📊 अध्याय 4/14 — राजस्थान अर्थव्यवस्था

सामाजिक सशक्तीकरण एवं समावेशन

Social Empowerment & Inclusion | SC/ST/OBC/EWS कल्याण, दिव्यांगजन, अल्पसंख्यक, महिला सुरक्षा व पेंशन
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📋 इस अध्याय में क्या-क्या पढ़ेंगे
  1. विज़न : विकसित राजस्थान @2047 — सामाजिक
  2. समावेशन
  3. SDG इंडेक्स में राजस्थान की प्रगति (2020-21 →
  4. 23-24)
  5. लक्षित समूह व 4 विषयगत क्षेत्रों का ढाँचा
  6. लैंगिक सशक्तिकरण — शैक्षिक व आर्थिक विकास
  7. योजनाएँ
  8. लैंगिक सशक्तिकरण — सामाजिक कल्याण व सुरक्षा
  9. योजनाएँ
  10. बाल कल्याण एवं सशक्तिकरण (ICDS, पोषण, सुरक्षा
  11. अधिनियम)
  12. SC, ST एवं OBC समुदायों का सामाजिक समावेशन
  13. दिव्यांगजन सशक्तिकरण
  14. वरिष्ठ नागरिक कल्याण
  15. सार्वभौमिक सामाजिक कल्याण (खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता
  16. संरक्षण, ट्रांसजेंडर कल्याण)
  17. अल्पसंख्यक कल्याण एवं समावेशन
🌟 शुरुआत एक कहानी से

सोचिए — एक विधवा महिला को हर महीने पेंशन मिले, एक अनाथ बच्चे को पालनहार योजना से गोद जैसा सहारा मिले, एक दिव्यांग व्यक्ति को स्वरोज़गार के लिए ऋण मिले, और एक वरिष्ठ नागरिक को सम्मान पेंशन मिले — यही है राजस्थान का "जीवन-चक्र दृष्टिकोण" (Life-Cycle Approach), जहाँ जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक हर कमज़ोर वर्ग के लिए कोई न कोई योजना मौजूद है।

यह अध्याय राजस्थान के सबसे बड़े और सबसे व्यापक अध्यायों में से एक है — इसमें महिलाएँ, बच्चे, SC/ST/OBC समुदाय, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, अल्पसंख्यक और ट्रांसजेंडर — सभी वर्गों के लिए बनी योजनाओं को कवर किया गया है। हर योजना को 4 विषयगत क्षेत्रों — शैक्षिक विकास, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण व सामाजिक सुरक्षा — में बाँटकर समझें, तो याद रखना बहुत आसान हो जाता है।

📘 2047 का लक्ष्य

परिभाषा: 2047 तक राजस्थान एक अधिक समतापूर्ण, समावेशी एवं समृद्ध राज्य होगा, जो सभी के लिए — विशेषकर कमज़ोर व वंचित वर्गों के लिए — समग्र विकास सुनिश्चित करेगा। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यक सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक रूप से सशक्त होंगे तथा महिलाएँ व बच्चे सम्मान व सुरक्षा के साथ समान अवसरों तक पहुँच पाएँगे। एक सुदृढ़ कार्यबल व कुशल युवा आर्थिक वृद्धि को गति देंगे।

1विज़न वक्तव्य — विकसित राजस्थान @2047

लक्ष्य (Goal)2020-21 स्कोर2023-24 स्कोरसुधार (अंक)
गरीबी का अंत (Goal-1 : No Poverty)6382+19
भूखमरी समाप्त करना (Goal-2 : Zero Hunger)5364+11
लैंगिक समानता (Goal-5 : Gender Equality)3952+13
शुद्ध जल एवं स्वच्छता (Goal-6)5460+6
असमानताओं में कमी (Goal-10)4549+4
अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण (Goal-3)7073+3
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Goal-4)6063+3
शैक्षिक विकास
Educational
Development शिक्षा की गुणवत्ता व पहुँच, कौशल विकास
आर्थिक विकास
Economic
Development रोज़गार, उद्यमिता, आय सुरक्षा
सामाजिक कल्याण
Social Welfare
स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा, सामुदायिक सहयोग
सामाजिक सुरक्षा
Social Security
पेंशन, बीमा, आपातकालीन वित्तीय सुरक्षा
याद रखें

गरीबी उन्मूलन (+19 अंक) राजस्थान का सबसे बड़ा सुधार है, इसके बाद लैंगिक समानता (+13) व भूखमरी उन्मूलन (+11) — यह क्रम परीक्षा में पूछे जाने की संभावना रखता है।

इस विज़न को प्राप्त करने हेतु राज्य की रणनीति निम्न बिंदुओं पर आधारित है —

2सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में राजस्थान की प्रगति

SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 (2020-21 की तुलना में) के अनुसार राजस्थान ने सामाजिक क्षेत्र के लगभग सभी लक्ष्यों में सुधार दर्ज किया है — विशेषकर गरीबी उन्मूलन व लैंगिक समानता में सबसे बड़ी छलांग लगाई है।

स्रोत : SDG इंडिया इंडेक्स रिपोट्स।

3लक्षित समूह व 4 विषयगत क्षेत्रों का ढाँचा

राज्य की सामाजिक सशक्तिकरण नीति 6 लक्षित समूहों (महिलाएँ व बालिकाएँ, बच्चे, SC/ST/OBC, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, अल्पसंख्यक) को 4 समान विषयगत क्षेत्रों से जोड़कर बनाई गई है — यही ढाँचा इस पूरे अध्याय को व्यवस्थित करता है।

1. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | फ़्लैगशिप योजना
उद्देश्यलैंगिक भेदभाव रोकना, लिंगानुपात सुधारना व बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना
गतिविधियाँबैठकें, प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ, सांस्कृतिक आयोजन — जागरूकता हेतु
उपलब्धि (2025-26)₹4.20 करोड़ खर्च (आवंटन ₹5.70 करोड़); "बेटी जन्मोत्सव" के तहत 1.04 लाख बालिका-जन्म उत्सव मनाए गए
योजनाउद्देश्य / लाभ2025-26 प्रगति (दिसंबर तक)
अमृता हाट (SHG सहयोग)स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को उत्पाद प्रदर्शन-बिक्री मंच; IITF, शिल्प ग्राम उत्सव में भागीदारी10 हाट आयोजित, 1,270 SHG लाभान्वित; ₹76.95 लाख खर्च
मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजनामहिला उद्यमियों को ऋण — व्यक्ति/SHG को ₹50 लाख तक, क्लस्टर/फेडरेशन को ₹1 करोड़ तक976 आवेदन (₹103.67 करोड़) स्वीकृत; ₹10 करोड़ खर्च
मुख्यमंत्री नारी शक्ति प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्धन योजनाRS-CIT, RS-CFA, स्पोकन इंग्लिश (RS-CSEP) मुफ़्त प्रशिक्षण + कौशल सामर्थ्य योजना74,001+4,979+3,607 प्रशिक्षणरत; ₹14.87 करोड़ खर्च
मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम/जॉब वर्क योजनाटेक्सटाइल, वेब डिज़ाइन, डेटा एंट्री, अकाउंटिंग आदि में घर-बैठे काम का पोर्टल147 नियोक्ता पंजीकृत, 47,462 अवसर, 5,952 महिलाएँ लाभान्वित
2. लाडो प्रोत्साहन योजना फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
शुरुआत1 अगस्त 2024 — बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ाना, लिंग-भेदभाव रोकना, बाल-विवाह रोकना
लाभ₹1.50 लाख, 7 किश्तों में — 6 किश्तें अभिभावक को, 7वीं सीधे बालिका के खाते में
पात्रतामाँ राजस्थान मूल निवासी; बालिका का जन्म सरकारी/अनुमोदित निजी संस्थान में जननी सुरक्षा योजना के तहत हो
प्रगति (2025-26)₹320 करोड़ में से ₹217.63 करोड़ खर्च; 3.27 लाख बालिकाएँ लाभान्वित

4लैंगिक सशक्तिकरण एवं समावेशन (Gender Empowerment and

5Inclusion)

महिलाओं व बालिकाओं को शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता, सुरक्षा व कानूनी संरक्षण के माध्यम से पूर्ण क्षमता प्राप्त करने में सक्षम बनाना इस स्तंभ का केंद्र है।

शैक्षिक विकास (Educational Development)

आर्थिक विकास (Economic Development)

सामाजिक कल्याण (Social Welfare) — महिलाएँ

3. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
BPL/SC/ST/अल्पसंख्यक बालिका₹31,000 (+₹10,000 दसवीं पास, +₹20,000 स्नातक पास पर अतिरिक्त)
अन्य BPL/अंत्योदय/आस्था-कार्ड धारी/विधवा/दिव्यांग/खिला ड़ी बालिका₹21,000 (+₹10,000/+₹20,000 अतिरिक्त वही शर्त)
प्रगति (2025-26)₹33.86 करोड़ सहायता, 7,269 बालिकाओं को
4. कालीबाई भील उड़ान योजना फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
उद्देश्य10-45 वर्ष की महिलाओं-बालिकाओं को मुफ़्त सैनिटरी नैपकिन — मासिक धर्म स्वास्थ्य व गरिमा हेतु
वितरणराजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन व राजीविका द्वारा आँगनवाड़ी व स्कूलों के माध्यम से — हर महीने ~1.22 करोड़ लाभार्थ
व्यय (2025-26)₹91.50 करोड़
योजनापात्रतामासिक पेंशन2025-26 लाभार्थ
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजनाBPL विधवा, 40+ वर्ष₹1,250 (75+ पर ₹1,500)4.17 लाख (₹229.54 करोड़)
मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजनाविधवा/तलाकशुदा/परित्यक्ता, 18+ वर्ष, आय <₹48,000/वर्ष₹1,250 (75+ पर ₹1,500)19.33 लाख (₹2,795.46 करोड़)
कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013

10 या अधिक कर्मचारियों वाले नियोक्ताओं के लिए आंतरिक समिति (Internal Committee) गठित करना अनिवार्य; हर ज़िले में एक स्थानीय समिति (Local Committee) भी गठित। अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी हेतु राज्य व ज़िला स्तर पर कार्यशालाएँ आयोजित; असंगठित व अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं की सुरक्षा भी इसमें शामिल।

📘 हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (HCM RIPA) — कालीबाई भील शोध संस्थान

परिभाषा: महिला एवं बाल विकास से जुड़े शोध, योजनाओं के मूल्यांकन व क्षमता-निर्माण हेतु HCM RIPA, जयपुर के अंतर्गत स्थापित संस्थान — वर्तमान में प्रबंध अध्ययन केंद्र (CMS) के अधीन कार्यरत

💡 आसान भाषा में: यानी सरकार को महिला-योजनाओं पर शोध व प्रशिक्षण देने वाला एक तकनीकी सहयोगी संस्थान — जैसे किसी बड़े विभाग का "थिंक-टैंक"।

🏠 उदाहरण: 2025-26 में महिला अधिकारिता निदेशालय की पर्यवेक्षकों हेतु प्रशिक्षण; सावित्रीबाई फुले इंस्टीट्यूट, NIMHANS व C-DAC के सहयोग से महिला हेल्पलाइन/वन स्टॉप सेंटर परामर्शदाताओं हेतु विशेष कार्यक्रम; जेंडर संवेदीकरण मॉड्यूल भी विकसित किया गया।

पोषण पखवाड़ा/माह में राजस्थान की उपलब्धि

राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा (अप्रैल 2025) में राजस्थान पूरे देश में प्रथम स्थान — 1.18 करोड़ गतिविधियाँ पंजीकृत। राष्ट्रीय पोषण माह (सितंबर-अक्टूबर 2025) में राजस्थान द्वितीय स्थान — 89.05 लाख गतिविधियाँ (लक्ष्य 81.02 लाख के मुकाबले 109.91%)।

सामाजिक सुरक्षा (Social Security) — महिलाएँ

5. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | फ़्लैगशिप योजना
उद्देश्यगर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद प्रोत्साहन — संस्थागत प्रसव बढ़ाना, मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाना
लाभपहले बच्चे पर ₹5,000 (2 किश्तों में); दूसरा बच्चा बालिका हो तो ₹6,000 (एकमुश्त)
राज्य अतिरिक्त सहायता1 अप्रैल 2024 से पहले बच्चे पर ₹1,500 अतिरिक्त; दिव्यांग गर्भवती महिला के लिए राशि ₹6,500 से ₹10,000 (1 सितंबर 2024 से)
प्रगति (2025-26)₹321 करोड़ आवंटन में ₹169.17 करोड़ खर्च; 3.26 लाख लक्षित में से 3.15 लाख पंजीकृत
6. PM POSHAN योजना (मध्याह्न भोजन) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | फ़्लैगशिप योजना
कवरेज68,480 सरकारी स्कूल/संस्थान; 57.01 लाख विद्यार्थ (प्री-प्राइमरी-कक्षा 5: 34.07 लाख; कक्षा 6-8: 22.94 लाख)
📘 एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS)

परिभाषा: 2 अक्टूबर 1975 से शुरू कार्यक्रम — 0-6 वर्ष के बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य स्तर में सुधार, कुपोषण-मृत्यु दर-ड्रॉपआउट घटाना

💡 आसान भाषा में: यानी हर आँगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से छोटे बच्चों, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताओं को एक ही जगह पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य जाँच की सुविधा।

🏠 उदाहरण: 363 बाल विकास परियोजनाएँ (22 शहरी + 41 आदिवासी + 300 ग्रामीण); 63,206 स्वीकृत आँगनवाड़ी केंद्रों में से 63,064 कार्यरत; 61,706 कार्यकर्ता + 55,441 सहायिकाएँ कार्यरत। ₹1,500 करोड़ आवंटन में ₹1,064.85 करोड़ खर्च — 27.64 लाख बच्चों, 2.89 लाख गर्भवती, 2.84 लाख स्तनपान कराने वाली महिलाओं व 29,368 किशोरी बालिकाओं को पूरक पोषण; 11.73 लाख बच्चों (3-6 वर्ष) को पूर्व-प्राथमिक शिक्षा।

📘 मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना (MMMPY)

परिभाषा: गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं व 3 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य-पोषण स्तर में सुधार हेतु — जन्म के समय कम वज़न व कुपोषण घटाने के लिए बनी योजना

💡 आसान भाषा में: यानी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पहले बच्चे पर लाभ देती है, यह योजना खासतौर पर दूसरे बच्चे के जन्म पर अतिरिक्त सहायता देती है।

🏠 उदाहरण: दूसरी संतान के जन्म पर कुल ₹6,000, 3 किश्तों में सीधे बैंक खाते में। 2025-26 में ₹88 करोड़ बजट में से ₹40.38 करोड़ खर्च — पहली किश्त में 21,932, दूसरी में 23,569 व तीसरी में 18,688 लाभार्थ।

बाल कल्याण एवं सशक्तिकरण (Child Welfare and Empowerment)

मात्रा/पोषण मानककक्षा 1-5: 100 ग्राम अनाज, 450 कैलोरी, 12 ग्राम प्रोटीन (पकाने की लागत ₹6.78/छात्र/दिन); कक्षा 6-8: 150 ग्राम अनाज, 700 कैलोरी, 20 ग्राम प्रोटीन (₹10.17/छात्र/दिन)
निगरानीNABL से पोषण-मूल्य जाँच; 1.16 लाख कुक-कम-हेल्पर कार्यरत (₹2,297/माह मानदेय)
प्रगति (2025-26)₹1,323.76 करोड़ आवंटन में ₹407.40 करोड़ खर्च
7. मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना राज्य योजना | सतत/जारी कार्यक्रम
उद्देश्यकोविड-19 महामारी से अनाथ हुए बच्चों व विधवा महिलाओं तथा उनके बच्चों को आर्थिक-सामाजिक-शैक्षणिक सहायता
अनाथ बच्चेतत्काल सहायता ₹1 लाख (एकमुश्त) + ₹2,500/माह (18 वर्ष तक) + ₹2,000 वार्षिक; 18 वर्ष पूर्ण होने पर ₹5 लाख; कक्षा 12वीं तक मुफ़्त शिक्षा + मुख्यमंत्री युवा संबल योजना में बेरोज़गारी भत्ता + कॉलेज छात्रावास में प्राथमिकता
विधवा महिलाएँतत्काल सहायता ₹1 लाख + पेंशन ₹1,500/माह; बच्चों को 18 वर्ष तक ₹1,000/माह + ₹2,000 वार्षिक
प्रगति (2025-26)23,663 बच्चे व विधवा महिलाएँ लाभान्वित, ₹15 करोड़ व्यय
8. पालनहार योजना फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
लाभार्थअनाथ, कैदी/विधवा/पुनर्विवाहित विधवा/कुष्ठ-HIV प्रभावित/दिव्यांग अभिभावकों के बच्चे व अन्य कमज़ोर वर्ग
अनाथ बच्चे0-6 वर्ष: ₹1,500/माह; 6-18 वर्ष (स्कूल नामांकित): ₹2,500/माह
अन्य पात्र बच्चे0-6 वर्ष: ₹750/माह; 6-18 वर्ष: ₹1,500/माह + वार्षिक ₹2,000 वस्त्र हेतु
प्रगति (2025-26)6.09 लाख बच्चे लाभान्वित, ₹760 करोड़ व्यय
योजनालाभार्थव्यय (₹ करोड़)
SC/ST पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति1,96,982240.70
OBC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति21,92022.38
EBC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति2,2092.34
MBC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति37,042102.43
मुख्यमंत्री सर्वजन उच्च शिक्षा योजना90.06
कुल योग2,58,162367.91
📘 मिशन वात्सल्य योजना

परिभाषा: केंद्र प्रायोजित योजना (केंद्र:राज्य 60:40) जो अनाथ व कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की सुरक्षा व पुनर्वास हेतु बाल देखभाल संस्थानों को मज़बूत करती है

💡 आसान भाषा में: यानी अनाथ या मुश्किल हालात के बच्चों को या तो संस्थागत देखभाल मिले, या परिवार जैसा माहौल (फोस्टर केयर/गोद लेना) मिले।

🏠 उदाहरण: राज्य में 40 सरकारी + 79 गैर-सरकारी बाल देखभाल संस्थान (3,268 बच्चे लाभान्वित); 40 विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों से 151 गोद-प्रक्रियाएँ; 62 बच्चे व्यक्तिगत फोस्टर केयर में, 201 प्रायोजन कार्यक्रम में, 42 आफ्टर-केयर में। ₹50.41 करोड़ व्यय।

बाल संरक्षण अधिनियम व हेल्पलाइन

बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 — "बाल विवाह मुक्त राजस्थान अभियान" के तहत 9 लाख+ लोगों को जागरूक किया गया। POCSO अधिनियम, 2012 (यौन अपराधों से बाल संरक्षण) — 88 सपोर्ट पर्सन राज्यभर में परामर्श व प्रक्रियागत सहायता दे रहे हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) — 33 ज़िलों व 5 रेलवे स्टेशनों पर 24×7 सक्रिय; ₹7.78 करोड़ खर्च।

6SC, ST एवं OBC समुदायों का सामाजिक समावेशन

ऐतिहासिक रूप से वंचित रहे समुदायों की शिक्षा, आजीविका व सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच बढ़ाकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना इस स्तंभ का लक्ष्य है।

शैक्षिक विकास

तालिका 4.2 : पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की प्रगति (2025-26, दिसंबर तक)

9. मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
उद्देश्यUPSC, RPSC, REET, पटवारी, कांस्टेबल आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग
पात्रताSC/ST/OBC/MBC/अल्पसंख्यक/EBC/दिव्यांग — वार्षिक पारिवारिक आय ₹8 लाख तक या सरकारी सेवा में अभिभावक (वेतन सीमा अनुसार)
प्रगति (2025-26)लक्ष्य 30,000 में से 19,985 विद्यार्थ लाभान्वित (अनंतिम मेरिट)
10. डॉ. सविता बेन अंबेडकर अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना सतत/जारी कार्यक्रम | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | राज्य योजना
31 मार्च 2023 तक पंजीकृत विवाह₹5 लाख/जोड़ा (केंद्र ₹1.25 लाख + राज्य ₹3.75 लाख)
1 अप्रैल 2023 से पंजीकृत विवाह₹10 लाख/जोड़ा (केंद्र ₹1.25 लाख + राज्य ₹8.75 लाख) — ₹2.5 लाख संयुक्त खाते में, ₹2.5 लाख पे-मैनेजर से, ₹5 लाख 8 वर्षय FD में
प्रगति (2025-26)₹14.70 करोड़ खर्च, 149 जोड़े लाभान्वित
योजनाइकाईलक्ष्यउपलब्धि
आश्रम छात्रावास संचालनविद्यार्थ30,25027,925
आवासीय विद्यालय संचालनविद्यार्थ5,1904,121
खेल छात्रावास संचालनविद्यार्थ900888
मॉडल पब्लिक स्कूल संचालनविद्यार्थ750663
मां बाड़ी संचालनविद्यार्थ99,69088,684
कॉलेज व बहुउद्देशीय छात्रावासविद्यार्थ1,5531,112
📘 प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY)

परिभाषा: पहले "विशेष केंद्रीय सहायता (SCA to SCSP)" कहलाने वाली योजना — SC समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान हेतु ज़िला व राज्य-स्तरीय आजीविका परियोजनाओं को अनुदान

💡 आसान भाषा में: यानी SC परिवारों को अपना छोटा व्यवसाय (ई-रिक्शा, पशुपालन, मुद्रा लोन आदि) शुरू करने में सरकार आर्थिक मदद करती है।

🏠 उदाहरण: सहायता ₹50,000 तक (परियोजना लागत के 50% या ₹50,000 में जो कम हो) — कोई आय सीमा नहीं, पर ₹2.5 लाख तक आय वालों को प्राथमिकता। 2025-26 में 1,441 SC परिवार लाभान्वित।

सामाजिक कल्याण

तालिका 4.4 : जनजातीय क्षेत्र विकास योजनाओं की प्रगति (2025-26)

योजनाइकाईलक्ष्यउपलब्धि
जनजातीय मेला आयोजनसंख्या124
पेयजल हेतु सोलर पंप सुविधासंख्या5050
बहुउद्देशीय केंद्रसंख्या138
सामुदायिक भवन निर्माणसंख्या505
शोध अध्येतावृत्ति (फेलोशिप)विद्यार्थ2427
मुख्यमंत्री अनुप्रति योजना (जनजातीय)विद्यार्थ150115
क्षय रोग (TB) नियंत्रण परियोजनालाभार्थ4,6954,538
कृषि विकास (मिनीकिट वितरण)लाभार्थ8,50,0008,26,196
बागवानी संबंधी गतिविधियाँलाभार्थ1,50,00099,750
PM कुसुम योजना घटक-B (जनजातीय)लाभार्थ4,200501
सहरिया, खैरवा व कठोड़ी जनजातियों हेतु खाद्य सुरक्षा

बारां (सहरिया) व उदयपुर (खैरवा-कठोड़ी) ज़िलों में प्रति परिवार-सदस्य प्रति माह 250ml घी + 500ml खाद्य तेल + 500 ग्राम दाल मुफ़्त — PoS मशीन से उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वितरण। 2025-26 में 3,253 कठोड़ी, 9,066 खैरवा व 1.18 लाख सहरिया व्यक्ति लाभान्वित।

📘 प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM JANMAN)

परिभाषा: विशेष रूप से संकटग्रस्त जनजातीय समूहों (PVTGs) के सामाजिक-आर्थिक सुधार हेतु केंद्र सरकार की पहल

💡 आसान भाषा में: यानी सबसे पिछड़ी आदिवासी उप-जनजातियों (जैसे सहरिया) को घर, शौचालय व रोज़गार एक साथ देने वाली विशेष योजना।

🏠 उदाहरण: बारां ज़िले की 8 पंचायत समितियों में बेघर सहरिया PVTG परिवारों को ₹2.37 लाख/घर (आवास+शौचालय+मनरेगा मज़दूरी सहित) — 11,411 घर पूर्ण, ₹368.18 करोड़ खर्च (दिसंबर 2025 तक)।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989

अत्याचार के मामलों में पीड़ित/आश्रितों को अपराध की प्रकृति अनुसार ₹85,000 से ₹8.25 लाख तक क्षतिपूतं; FIR, चालान व दोषसिद्धि चरणों में ₹10,000 तक राहत। मृतक पीड़ितों की विधवा/आश्रितों को ₹5,000/माह पेंशन (महँगाई भत्ते सहित) — केंद्र-राज्य बराबर वित्तपोषण। 2025-26 में SC पीड़ितों को ₹31.01 करोड़ (4,258 लाभार्थ) व ST पीड़ितों को ₹10.63 करोड़ (1,509 लाभार्थ) की सहायता।

सामाजिक सुरक्षा

योजनाउद्देश्य / लाभ2025-26 प्रगति
मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन स्वरोज़गार योजनास्वरोज़गार हेतु ₹5 लाख तक ऋण + ₹50,000/50% सब्सिडी (आय ₹2 लाख तक)232 लाभान्वित, ₹1.16 करोड़
संयुक्त सहायता अनुदानट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, जयपुर फुट, स्मार्टफोन जैसे उपकरण हेतु ₹20,000 तक55,945 लाभान्वित, ₹32.11 करोड़
सुखद दाम्पत्य योजनादिव्यांग विवाह पर ₹50,000 + आयोजक को ₹20,000; 80% दिव्यांग जीवनसाथी बनाने पर ₹5 लाख117 लाभान्वित, ₹1.69 करोड़
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी सहायता योजनापावर/इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर वितरण~1,100 व्हीलचेयर वितरित
योजनापात्रतामासिक पेंशन2025-26 लाभार्थ
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजनाBPL, 18+ वर्ष दिव्यांग₹1,25013,230 (₹6.65 करोड़)
मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजनासभी आयु वर्ग, आय ₹60,000/वर्ष तक₹1,250 (कुष्ठ-मुक्त ₹2,500; सिलिकोसिस ₹1,500)5.90 लाख (₹719.89 करोड़)
📘 यूनिक डिसएबिलिटी ID कार्ड (UDID) योजना

परिभाषा: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत 21 श्रेणियों में दिव्यांगता प्रमाणीकरण की प्रक्रिया

💡 आसान भाषा में: यानी हर दिव्यांग व्यक्ति के लिए एक राष्ट्रीय पहचान-पत्र, जिससे हर योजना का लाभ लेने के लिए बार-बार प्रमाण-पत्र न बनवाना पड़े — जैसे आधार कार्ड, पर दिव्यांगता के लिए।

🏠 उदाहरण: 2025-26 में (दिसंबर तक) कुल 90,025 UDID कार्ड जारी।

7दिव्यांगजन सशक्तिकरण (Specially Abled Persons)

दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल, रोज़गार, स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा तक समान पहुँच देकर एक समावेशी समाज बनाना इस स्तंभ का लक्ष्य है।

8वरिष्ठ नागरिक कल्याण (Senior Citizens' Welfare and Well-being)

वृद्ध होती जनसंख्या के दौर में वरिष्ठ नागरिकों को आय-सुरक्षा, स्वास्थ्य सहायता, आश्रय व सामाजिक देखभाल देकर गरिमापूर्ण व सक्रिय वृद्धावस्था सुनिश्चित करना।

योजनापात्रतामासिक पेंशन2025-26 लाभार्थ
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन (19 नवंबर 2007 से)BPL, 60+ वर्ष₹1,2508.32 लाख (₹335.49 करोड़)
मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजनामहिला 55+, पुरुष 58+, आय <₹48,000/वर्ष₹1,25051.90 लाख (₹7,124.78 करोड़)
छोटे/सीमांत किसान वृद्ध सम्मान पेंशन योजनाछोटे/सीमांत किसान — महिला 55+, पुरुष 58+₹1,250वृद्धजन सम्मान पेंशन जैसी शर्त लागू
11. मुख्यमंत्री घुमंतू आवास योजना 2024 फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
शुरुआत22 अक्टूबर 2024 — विमुक्त, घुमंतू व अर्ध-घुमंतू समुदायों (बिना पक्के मकान) का पुनर्वास व स्थायी बसाव
लाभ₹1.20 लाख (3 किश्तों — ₹20,000+₹50,000+₹50,000 निर्माण चरणानुसार) + ₹12,000 शौचालय (स्वच्छ भारत मिशन) + मनरेगा में 90 दिन मज़दूरी (₹23,920 तक)
प्रगति (2025-26)75 लाभार्थ, ₹92.40 लाख खर्च
याद रखें

मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना का व्यय (₹7,124.78 करोड़) अध्याय की सबसे बड़ी एकल-योजना राशि है — इसके 51.90 लाख लाभार्थ राजस्थान की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में से एक बनाते हैं।

9सार्वभौमिक सामाजिक कल्याण (Universal Social Welfare)

सभी वर्गों को बुनियादी सेवाओं, खाद्य सुरक्षा व सामाजिक संरक्षण तक पहुँच देना — सबसे वंचित व्यक्तियों/समुदायों (गाड़िया लोहार, तस्कर-मुक्ति चाहने वाले, ट्रांसजेंडर) को भी शामिल करते हुए।

आर्थिक विकास व सामाजिक कल्याण — विशेष समूह

📘 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) व सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)

परिभाषा: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) कीमतों को स्थिर रखने, कमी के समय आवश्यक वस्तुओं का राशन सुनिश्चित करने व गरीबों को किफ़ायती भोजन देने के लिए बना तंत्र

💡 आसान भाषा में: यानी उचित मूल्य दुकानों (राशन की दुकान) के ज़रिए ग़रीब परिवारों को हर महीने सस्ता/मुफ़्त गेहूँ मिलना।

🏠 उदाहरण: राजस्थान में NFSA लाभार्थियों की सीमा 4.46 करोड़ है, 1 दिसंबर 2025 तक 4.38 करोड़ लाभार्थ पंजीकृत। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अंत्योदय परिवारों को 35kg/राशन कार्ड व अन्य पात्रों को 5kg/माह मुफ़्त गेहूँ (जनवरी 2024 से अगले 5 वर्ष तक)। कुल 32 श्रेणियाँ NFSA सूची में शामिल हैं।

📘 राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (RSFCSCL)

परिभाषा: उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से PDS सामग्री व दैनिक आवश्यक वस्तुओं का कुशल वितरण सुनिश्चित करने वाला राज्य-स्तरीय निगम — गेहूँ के परिवहन का मुख्य दायित्व भी इसी के पास

💡 आसान भाषा में: यानी राशन की दुकानों तक गेहूँ व अन्य सामान सही समय पर पहुँचाने वाली "सप्लाई-चेन" एजेंसी।

🏠 उदाहरण: सभी सक्रिय उचित मूल्य दुकानों पर नई 4G PoS मशीनें लगाई गईं, जो इलेक्ट्रॉनिक वज़न-कांटे व आइरिस पहचान प्रणाली से स्वतः जुड़ी हैं। दिसंबर 2025 तक PoS मशीनों से जुड़ी 93,152 शिकायतें प्राप्त, 93,022 निपटाई गईं।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

योजनाउद्देश्य / लाभपात्रता
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तिअल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिभाशाली निम्न-आय छात्रों को उच्च शिक्षा हेतु सहायताअभिभावक आय <₹2 लाख/वर्ष, पिछली परीक्षा में 50%+ अंक
मेरिट-कम-मीन्स (MCM) छात्रवृत्तिUG/PG तकनीकी-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों हेतु सहायताअभिभावक आय <₹2.5 लाख/वर्ष, 50%+ अंक
छात्रावास सुविधाज़िला मुख्यालय व अल्पसंख्यक-बहुल ब्लॉकों में निःशुल्क आवास; मेस भत्ता ₹3,250/माह (9.5 माह तक)सभी अल्पसंख्यक छात्र-छात्राएँ
उपभोक्ता कल्याण कोष (Consumer Welfare Fund)

राजस्थान उपभोक्ता कल्याण कोष — उपभोक्ता मामलात विभाग द्वारा संचालित; राज्य/ज़िला आयोगों में दायर शिकायतों से प्राप्त शुल्क इसी कोष के PD खाते में जमा होता है — राष्ट्रीय/विश्व उपभोक्ता दिवस आयोजन व उपभोक्ता हेल्पलाइन संचालन हेतु उपयोग। राज्य उपभोक्ता कॉर्पस फंड — प्रारंभ में ₹10 करोड़ (केंद्र:राज्य = 75:25); 2019 में केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाकर कुल ₹20 करोड़ किया गया — इस पर अर्जित ब्याज उपभोक्ता कल्याण गतिविधियों में उपयोग होता है।

ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट, 2019

राजस्थान में ट्रांसजेंडर समुदाय को OBC सूची में 92वें स्थान पर शामिल किया गया है — जिससे आरक्षण व कल्याणकारी लाभ मिलते हैं। विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना के तहत सभी आयु वर्ग के ट्रांसजेंडर पात्र — वर्तमान में 32 लाभार्थ पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। DGP स्तर पर राज्य व ज़िला मजिस्ट्रेट स्तर पर सुरक्षा प्रकोष्ठ (Protection Cells) स्थापित; राजस्थान ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड (2016 से) व ट्रांसजेंडर उत्थान कोष (2021 से — शिक्षा व आजीविका हेतु छात्रवृत्ति) कार्यरत।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का कल्याण

10अल्पसंख्यक कल्याण एवं समावेशन (Minority Welfare and Inclusion)

अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा, आजीविका व बुनियादी अवसंरचना तक पहुँच बढ़ाना, साथ ही सामाजिक सुरक्षा व अधिकार संरक्षण सुनिश्चित करना।

📘 प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK)

परिभाषा: पहले "बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम" कहलाने वाली केंद्र प्रायोजित योजना — अल्पसंख्यक-बहुल क्षेत्रों में विकास अंतराल दूर करना

💡 आसान भाषा में: यानी जहाँ अल्पसंख्यक आबादी ज़्यादा है, वहाँ स्वास्थ्य, कौशल व शिक्षा से जुड़े भवन/अवसंरचना बनाने के लिए विशेष फंडिंग।

🏠 उदाहरण: 1 अप्रैल 2022 से राज्य के सभी ज़िलों तक विस्तारित; पात्रता — प्रस्तावित क्षेत्र के 15 किमी दायरे में कम से कम 25% आबादी अल्पसंख्यक समुदाय की हो। 2025-26 में ₹8.25 करोड़ के 31 कार्य स्वीकृत।

मुख्य परीक्षा दृष्टि से — अध्याय का सार (विश्लेषण)

जीवन-चक्र दृष्टिकोण (Life-Cycle Approach) — यह अध्याय जन्म-पूर्व (मातृ वंदना, सुपोषण किट) से लेकर वृद्धावस्था (वृद्धजन सम्मान पेंशन) तक हर चरण को कवर करने वाली योजनाओं की शृंखला दिखाता है — यही राजस्थान की सामाजिक नीति की मूल संरचना है। 4×6 मैट्रिक्स याद रखने की कुंजी — 6 लक्षित समूह (महिलाएँ, बच्चे, SC/ST/OBC, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, अल्पसंख्यक) × 4 विषयगत क्षेत्र (शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा) — किसी भी योजना को इस मैट्रिक्स में रखकर वर्गकृत करना याद रखना आसान बनाता है। पेंशन योजनाओं का बजट-भार — मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन (₹7,124.78 करोड़, 51.90 लाख) व एकल नारी सम्मान पेंशन (₹2,795.46 करोड़, 19.33 लाख) मिलकर सामाजिक सुरक्षा बजट का बड़ा हिस्सा हैं — यह दर्शाता है कि प्रत्यक्ष नकद अंतरण अब राजस्थान की कल्याण नीति की रीढ़ बन चुका है। डिजिटल तकनीक से "अंतिम छोर तक" वितरण — जन आधार, DBT, PoS मशीनें व GIVE UP अभियान जैसी पहलें दिखाती हैं कि दर्शिता व लक्षित वितरण (targeting) अब कल्याण योजनाओं की सफलता की कुंजी मानी जा रही है, न कि केवल बजट आवंटन।

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