सोचिए — आज़ादी के समय राजस्थान में सामान्य शिक्षा के मात्र 7 कॉलेज थे। आज यह संख्या बढ़कर 3,218 हो चुकी है!
एक राज्य जहाँ कभी शिक्षा तक पहुँच सबसे बड़ी चुनौती थी, वहाँ आज 49 मेडिकल कॉलेज, 1 IIT, 1 IIM और हज़ारों स्कूल हैं।
शिक्षा को राजस्थान सरकार मानव संसाधन विकास का सबसे बड़ा निवेश मानती है — क्योंकि शिक्षा ही वह कड़ी है जो गरीबी, बेरोज़गारी और असमानता को तोड़ती है। इस अध्याय में हम पढ़ेंगे — स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और विज्ञान-प्रौद्योगिकी तक — राजस्थान की पूरी "ज्ञान अर्थव्यवस्था" कैसे आकार ले रही है।
परिभाषा: 2047 तक राजस्थान में विद्यार्थ-केंद्रित, समावेशी एवं प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण प्रणाली होगी, जो पहुँच, समानता एवं उत्कृष्टता सुनिश्चित करेगी। स्कूली व तकनीकी शिक्षा क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता व बहुविषयी शिक्षण को बढ़ावा देगी। संस्कृत को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाएगा और एक जीवंत विज्ञान-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र राजस्थान को ज्ञान व नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाएगा।
| फोकस क्षेत्र (क्र. 1-5) | फोकस क्षेत्र (क्र. 6-10) |
|---|---|
| समावेशी व उच्च-गुणवत्ता शिक्षा | उद्योग-अकादमिक सहयोग |
| शिक्षक सशक्तिकरण | शोध व नवाचार केंद्र |
| स्मार्ट अवसंरचना | सततता व आपदा-तैयारी |
| डिजिटल परिवर्तन | सामुदायिक सहभागिता |
| करियर व कौशल विकास | वैश्विक पहुँच (Global Outreach) |
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 अनुशंसित अनुपात 30:1 है — राजस्थान के दोनों अनुपात (13:1 व 18:1) इससे बेहतर व कहीं अधिक सुविधाजनक हैं।
शिक्षा क्षेत्र के 10 फोकस क्षेत्र (Thrust Areas)
स्कूली शिक्षा बच्चों के बौद्धिक, सामाजिक व भावनात्मक विकास की नींव रखती है। यह प्रारंभिक शिक्षा (Elementary) व माध्यमिक शिक्षा (Secondary) दोनों को समाहित करती है — पहले चरण में बुनियादी ज्ञान, दूसरे चरण में उन्नत विषय व क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स।
परिभाषा: किसी शिक्षा स्तर में कुल नामांकन (आयु चाहे जो भी हो), उस स्तर की आधिकारिक आयु-समूह जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में
💡 आसान भाषा में: यानी स्कूल में कितने % बच्चे भर्त हैं — भले ही उनकी उम्र सही कक्षा से थोड़ी कम/ज़्यादा हो।
🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि किसी इलाके में प्राथमिक (कक्षा 1-5) आयु-वर्ग के 100 बच्चे हैं, पर स्कूल में कुल 88 बच्चे नामांकित हैं (चाहे उम्र में थोड़ा आगे-पीछे भी हों) — तो GER = 88%। 2024-25 में राजस्थान का प्राथमिक GER 88.3% रहा।
परिभाषा: किसी शिक्षा स्तर पर प्रति शिक्षक औसत विद्यार्थियों की संख्या
💡 आसान भाषा में: यानी एक शिक्षक को औसतन कितने बच्चे पढ़ाने पड़ते हैं।
🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि किसी क्षेत्र में उच्च माध्यमिक स्तर पर कुल 1,500 विद्यार्थ और 100 शिक्षक हैं, तो PTR = 15:1। 2024-25 में राजस्थान का उच्च माध्यमिक PTR भी ठीक 15 रहा।
परिभाषा: एक शिक्षा स्तर की अंतिम कक्षा से अगले स्तर की पहली कक्षा में प्रवेश करने वाले छात्रों का अनुपात
💡 आसान भाषा में: यानी कक्षा 8 पास करने वाले कितने बच्चे कक्षा 9 में एडमिशन लेते हैं।
🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि कक्षा 8 में 100 बच्चे थे और अगले साल उनमें से 90 बच्चों ने कक्षा 9 में प्रवेश लिया, तो संक्रमण दर = 90%। 2024-25 में उच्च प्राथमिक→माध्यमिक संक्रमण दर 90.2% रही।
परिभाषा: किसी स्तर की पहली कक्षा में नामांकित विद्यार्थियों के समूह में से कितने % उस स्तर की अंतिम कक्षा तक पहुँचने की संभावना रखते हैं
💡 आसान भाषा में: यानी जो बच्चे कक्षा 1 में भर्त हुए, उनमें से कितने % बीच में स्कूल छोड़े बिना अंतिम कक्षा तक टिके रहते हैं।
🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि कक्षा 1 में 100 बच्चे भर्त हुए और उनमें से 78 बच्चे कक्षा 8 तक पहुँचे, तो प्रारंभिक ठहराव दर = 78%। 2024-25 में राजस्थान की प्रारंभिक (1-8) ठहराव दर 78.7% रही।
परिभाषा: किसी स्तर में नामांकित विद्यार्थियों के समूह में से जो अगले शैक्षणिक वर्ष में किसी भी कक्षा में नामांकित नहीं रहते
💡 आसान भाषा में: यानी बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों का प्रतिशत।
🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि माध्यमिक स्तर पर 100 बच्चों में से 8 बच्चे अगले साल स्कूल में नहीं दिखे, तो ड्रॉपआउट दर = 8%। 2024-25 में राजस्थान की माध्यमिक ड्रॉपआउट दर 7.7% रही — 2023-24 के 11.1% से बेहतर सुधार।
स्कूली शिक्षा की प्रगति मापने के लिए 5 प्रमुख संकेतक उपयोग होते हैं — इन्हें उदाहरण सहित समझें ताकि आगे की तालिकाएँ आसानी से समझ आएँ:
| वर्ष | प्राथमिक (1-5) | उच्च प्राथमिक (6-8) | प्रारंभिक (1-8) | माध्यमिक (9-10) | उच्च माध्यमिक (11-12) |
|---|---|---|---|---|---|
| 2023-24 | 95.1 | 90.9 | 93.6 | 80.2 | 62.0 |
| 2024-25 | 88.3 | 92.1 | 89.7 | 82.2 | 66.1 |
| संकेतक | प्राथमिक | उच्च प्राथमिक | माध्यमिक/संक्रमण | उच्च माध्यमिक |
|---|---|---|---|---|
| छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) | 18 | 12 | 11 | 15 |
| संक्रमण दर (%) — क्रमशः 5→6, 8→9, 10→11 | — | 93.8 | 90.2 | 88.2 |
| संकेतक | प्राथमिक | प्रारंभिक | माध्यमिक | उच्च माध्यमिक |
|---|---|---|---|---|
| ठहराव दर 2023-24 (%) | 82.5 | 75.3 | 59.1 | 48.9 |
| ठहराव दर 2024-25 (%) | 83.1 | 78.7 | 55.9 | 51.9 |
| ड्रॉपआउट दर 2023-24 (%) | 7.6 | 6.8 | 11.1 | — |
| ड्रॉपआउट दर 2024-25 (%) | 3.6 | 3.6 | 7.7 | — |
माध्यमिक स्तर पर ठहराव दर में गिरावट (59.1% → 55.9%) चिंताजनक संकेत है, जबकि बाकी सभी स्तरों पर सुधार हुआ — यह दर्शाता है कि कक्षा 9-10 के बाद बच्चों को स्कूल में टिकाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। फिर भी माध्यमिक स्तर की ड्रॉपआउट दर 11.1% से घटकर 7.7% हो गई — यानी स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति घट रही है, भले ही अंतिम कक्षा तक पहुँचने की दर धीमी हो।
वंचित व पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों हेतु कई छात्रवृत्ति योजनाएँ स्कूली शिक्षा में समांतर रूप से चलती हैं:
| शिक्षा स्तर | पात्र श्रेणियाँ (Categories) | लाभार्थ व व्यय |
|---|---|---|
| माध्यमिक शिक्षा | सफाई/स्वास्थ्य-जोखिम व्यवसाय (Scavenger) परिवारों के बच्चे, अति पिछड़ा वर्ग (प्री+पोस्ट मैट्रिक), अनुसूचित जाति (प्री+पोस्ट), अनुसूचित जनजाति (प्री+पोस्ट), अन्य पिछड़ा वर्ग (कक्षा 9-10 प्री-मैट्रिक), देवनारायण गुरुकुल (विशेष प्री-मैट्रिक, MBC) | 2.93 लाख विद्यार्थ लाभान्वित; ₹67.50 करोड़ व्यय |
| प्रारंभिक शिक्षा | अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग व स्वच्छता/स्वास्थ्य-जोखिम व्यवसाय में लगे अभिभावकों के बच्चों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति | ₹20.04 करोड़ व्यय |
ज्ञान संकल्प पोर्टल — दानदाताओं/भामाशाहों/कंपनियों (CSR के तहत) से राजकीय स्कूलों के विकास कार्यों हेतु सीधा योगदान लेने का ऑनलाइन मंच — 2025-26 में ₹34.38 करोड़ के विकास कार्य स्वीकृत (दिसंबर तक)। 29वाँ राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह (2025) में 135 भामाशाह व 91 प्रेरक सम्मानित हुए — इनका कुल शिक्षा-योगदान ₹139.90 करोड़ रहा।
परिभाषा: एक केंद्र प्रायोजित योजना (केंद्र:राज्य = 60:40) जो प्री-नर्सरी से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाती है — सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान व शिक्षक-शिक्षा योजनाओं का एकीकरण
💡 आसान भाषा में: यानी पहले जो 3 अलग-अलग योजनाएँ (प्राथमिक, माध्यमिक, शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए) अलग-अलग चलती थीं, अब वे सब एक ही "समग्र शिक्षा" छाते के नीचे एक साथ चलती हैं — जैसे एक ही थाली में सारे व्यंजन।
🏠 उदाहरण: राजस्थान में इसे राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद एकल राज्य कार्यान्वयन समिति के रूप में लागू करती है — इसके 10 स्तंभ (A-J) नीचे दिए गए हैं।
परिभाषा: कक्षा 1-5 के विद्यार्थियों को बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy) प्रदान करने का राष्ट्रीय मिशन, लक्ष्य 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा 3 तक पढ़ना-लिखना सीख जाए
💡 आसान भाषा में: यानी छोटी कक्षाओं में बच्चों को ठीक से पढ़ना-लिखना व गिनती सिखाने पर ज़ोर, ताकि आगे की पढ़ाई की नींव मज़बूत हो।
🏠 उदाहरण: "निपुण मेला" पंचायत स्तर पर आयोजित होते हैं, कक्षा 1 के लिए "विद्या प्रवेश" व कक्षा 3-5 के लिए विषय-वार वर्कबुक दी जाती हैं। इससे 35.41 लाख विद्यार्थ लाभान्वित हुए, ₹50.09 करोड़ खर्च हुआ (2025-26, दिसंबर तक)।
| 1. स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल सतत/जारी कार्यक्रम | राज्य योजना | |
|---|---|
| उद्देश्य | शैक्षणिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों (EBB) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा — बालिका शिक्षा पर विशेष ज़ोर (न्यूनतम 55% सीटें आरक्षित) |
| संबद्धता | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), नई दिल्ली — पाठ्यक्रम NCERT आधारित |
| कवरेज | 27 जिलों के 134 ब्लॉकों में 134 स्कूल; 62,433 विद्यार्थ नामांकित (2025-26, दिसंबर तक) |
| 2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय/छात्रावास सतत/जारी कार्यक्रम | राज्य योजना | |
|---|---|
| संरचना | 10 मेवात बालिका आवासीय विद्यालय + 20 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास + 11 बेघर-बेसहारा व अनाथ श्रेणी विद्यालय/छात्रावास (कुल 41) |
| क्षमता एवं नामांकन | 3,900 प्रवेश क्षमता में से 3,458 बालिकाएँ नामांकित (2025-26, दिसंबर तक) |
| वित्त | शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत ₹20.94 करोड़ में से ₹16.76 करोड़ ज़िलों को आवंटित |
परिभाषा: 1 अप्रैल 2010 से लागू — निजी स्कूलों में कमज़ोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करना अनिवार्य
💡 आसान भाषा में: यानी हर निजी स्कूल को अपनी कुल सीटों में से एक-चौथाई सीटें गरीब बच्चों के लिए मुफ़्त में देनी होती हैं।
🏠 उदाहरण: आय पात्रता सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख कर दी गई। 2024-25 में निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूतं हेतु ₹546.13 करोड़ स्वीकृत।
निम्न प्रमुख योजनाएँ बालक-बालिकाओं की पहुँच व ठहराव सुनिश्चित करती हैं:
| 3. नि:शुल्क यूनिफॉर्म व पाठ्यपुस्तक वितरण फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना | |
|---|---|
| यूनिफॉर्म (2025-26) | कक्षा 1-8 के सभी विद्यार्थियों को ₹600 प्रति विद्यार्थ DBT के माध्यम से |
| यूनिफॉर्म (2024-25) | कक्षा 1-8 व कक्षा 9-12 की बालिकाओं को ₹800/विद्यार्थ (सिलाई+बैग सहित); ₹330.06 करोड़ खर्च, 41.26 लाख लाभान्वित |
| नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें | कक्षा 1-8 सभी, कक्षा 9-12 सभी बालिकाएँ, SC/ST विद्यार्थ, गैर-आयकरदाता अभिभावकों के बच्चे — 2025-26 में 4.05 करोड़ पुस्तकें, 80 लाख विद्यार्थियों को |
| नि:शुल्क साइकिल | कक्षा 9 की सभी बालिकाओं को — 2024-25 में 3.25 लाख साइकिलें वितरित; 2025-26 के लिए 3.34 लाख का आपूर्ति आदेश |
| 4. PM SHRI स्कूल योजना फ़्लैगशिप योजना | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| शुरुआत | 2022 — मौजूदा स्कूलों को हरित, डिजिटल व नवाचार-आधारित मॉडल स्कूल के रूप में सुदृढ़ करना |
| हरित सुविधाएँ | सोलर पैनल, LED लाइटिंग, न्यूट्रिशन गार्डन, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक-मुक्त परिसर, जल संरक्षण |
| राजस्थान में कवरेज | 639 स्कूल (90 प्रारंभिक + 549 माध्यमिक + 1 संस्कृत शिक्षा); 2.96 लाख विद्यार्थ; ₹51.81 करोड़ खर्च (प्रावधान ₹434.65 करोड़) |
| 5. मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान (MSRA) फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना | |
|---|---|
| उद्देश्य | राजस्थान में NEP 2020 को प्रभावी ढंग से लागू करना — राज्य को मॉडल बनाना, नामांकन व गुणवत्ता बढ़ाना |
परिभाषा: 29 जुलाई 2020 को शुरू हुई शिक्षा नीति; इसे लागू करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने SARTHAQ (Students And Teachers Holistic Advancement through Quality Education) पहल के तहत 27 अध्यायों में 297 कार्य निर्धारित किए
💡 आसान भाषा में: यानी एक बड़ा राष्ट्रीय एक्शन-प्लान जो बताता है कि NEP को ज़मीन पर कैसे लागू करना है — किसे, कब, क्या करना है।
🏠 उदाहरण: 297 में से 202 कार्य राज्यों को सौंपे गए, जिनमें से राजस्थान ने दिसंबर 2025 तक 73 कार्य पूरे किए — 6 समितियों व ज़िला कलेक्टर-अध्यक्षता वाली ज़िला-स्तरीय समितियों के माध्यम से, गूगल "202 टास्क ट्रैकर" से मासिक निगरानी।
| रणनीति | NEP बालक, NEP शिक्षक व NEP स्कूल — तीन बहुवर्षय कार्यक्रमों के रूप में लागू |
|---|---|
| गतिविधियाँ (29 अप्रैल 2025 से) | राज्य-स्तरीय AI-आधारित मौखिक पठन प्रवाह (ORF) मूल्यांकन, छात्र उपस्थिति ऐप, NIOS हेतु ऑन-डिमांड परीक्षाएँ, डिजिटल पहलें |
| 6. मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना सतत/जारी कार्यक्रम | राज्य योजना | |
|---|---|
| शुरुआत | बजट 2022-23 — पंजीकृत मदरसों को कंप्यूटर, स्मार्ट कक्षा, फर्नचर व ई-लर्निंग उपकरणों से उन्नत करना |
| वित्तीय सहायता | प्राथमिक स्तर मदरसों को ₹15 लाख तक, उच्च प्राथमिक को ₹25 लाख तक (राज्य 90% + मदरसा प्रबंधन समिति 10%) |
| लाभार्थ | दिसंबर 2025 तक कुल 305 मदरसे लाभान्वित |
परिभाषा: बालिका के जन्म से लेकर स्नातक पूर्ण होने तक 7 अलग-अलग पड़ावों पर कुल ₹1.50 लाख तक की प्रोत्साहन राशि माता-पिता/अभिभावक को दी जाती है
💡 आसान भाषा में: यानी बेटी के हर बड़े पड़ाव (जन्म, टीकाकरण, कक्षा 1, कक्षा 6, कक्षा 10, कक्षा 12, स्नातक) पर सरकार परिवार को पैसा देती है ताकि बेटी को बोझ न समझा जाए और उसकी पढ़ाई बीच में न छूटे।
🏠 उदाहरण: किश्तें : संस्थागत प्रसव पर ₹2,500 → 1 वर्ष उम्र व पूर्ण टीकाकरण पर ₹2,500 → कक्षा 1 प्रवेश पर ₹4,000 → कक्षा 6 प्रवेश पर ₹5,000 → कक्षा 10 प्रवेश पर ₹11,000 → कक्षा 12 प्रवेश पर ₹25,000 → स्नातक उत्तीर्ण व 21 वर्ष पूर्ण होने पर ₹1 लाख। तीसरी से छठी किश्त स्कूल शिक्षा विभाग व सातवीं किश्त उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दी जाती है। 2025-26 (दिसंबर तक) में ₹18.09 करोड़ व्यय हुआ।
विधवा/परित्यक्ता महिलाओं को निजी प्रशिक्षण संस्थानों में 2-वर्षय प्रारंभिक शिक्षा डिप्लोमा (D.El.Ed) करने पर ₹9,000/लाभार्थ शिक्षण-शुल्क सहायता — 2025-26 में प्राप्त 352 ऑनलाइन आवेदनों में से 331 लाभार्थियों के खाते में राशि हस्तांतरित।
| 7. नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | सतत/जारी कार्यक्रम | |
|---|---|
| शुरुआत | 1 अप्रैल 2022 से केंद्र प्रायोजित योजना — 15+ आयु वर्ग में साक्षरता बढ़ाना |
| क्रियान्वयन | स्वयंसेवी-आधारित अभियान; ULLAS ऐप के माध्यम से ऑनलाइन सर्वेक्षण |
| प्रगति (2025-26) | 30 लाख के लक्ष्य में से 25.72 लाख निरक्षरों व 1.49 लाख स्वयंसेवी शिक्षकों का सर्वेक्षण; ₹34.37 करोड़ आवंटन में ₹4.24 करोड़ खर्च |
साक्षरता एवं सतत शिक्षा निदेशालय 15 वर्ष व अधिक आयु के निरक्षर व्यक्तियों (विशेषकर महिलाओं व पिछड़े वर्गों) को कार्यात्मक साक्षरता व उपयोगी कौशल प्रदान करता है।
| लाभार्थ | तलाकशुदा, विधवा, आदिवासी या वंचित समूहों की 15-30 वर्ष आयु की महिलाएँ |
|---|---|
| सुविधा | कक्षा 10 तक शिक्षा + व्यावसायिक प्रशिक्षण, आवासीय स्कूल के रूप में |
| वर्तमान स्थिति | झालावाड़ ज़िले में संचालित, 100 महिलाएँ नामांकित; ₹29.18 लाख खर्च (दिसंबर तक) |
| योजना | उद्देश्य / लाभ | 2025-26 व्यय (दिसंबर तक) |
|---|---|---|
| मुख्यमंत्री (B.Ed) संबल योजना | विधवा/तलाकशुदा महिलाओं को B.Ed. फीस प्रतिपूतं | ₹31.12 लाख (आवंटन ₹48 लाख) |
| बालिका दूरस्थ शिक्षा योजना | दूरस्थ क्षेत्रों की बालिकाओं को VMOU/IGNOU ट्यूशन फीस प्रतिपूतं | ₹20.54 करोड़ (आवंटन ₹21.30 करोड़) |
| मुख्यमंत्री हमारी बेटियाँ योजना | मेधावी बालिकाओं को वित्तीय सहायता (2015-16 से) | ₹91.99 लाख (आवंटन ₹200 लाख) |
| कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना | कक्षा 12 पास मेधावी बालिकाओं को स्कूटी | ₹67.67 करोड़ (आवंटन ₹299.69 करोड़) |
| देवनारायण बालिका स्कूटी वितरण योजना (2023 से) | शिक्षा के माध्यम से बालिका सशक्तिकरण | ₹33.71 करोड़ (आवंटन ₹56.10 करोड़) |
| मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना | निम्न-आय परिवारों के बच्चों को सहायता | ₹21.11 करोड़ (आवंटन ₹45.50 करोड़) |
स्वामी विवेकानंद उत्कृष्टता छात्रवृत्ति — Times Higher Education (THE) सूची या NIRF रैंकिंग 1-50 वाले विदेशी/भारतीय संस्थानों में उच्च अध्ययन हेतु; ₹150 करोड़ प्रावधान में से ₹145 करोड़ खर्च (2025-26, दिसंबर तक)। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना — पात्रता : कक्षा 12 उत्तीर्ण प्रथम 1 लाख विद्यार्थियों को — सामान्य विद्यार्थ ₹500/माह (वार्षिक ₹5,000), दिव्यांग व अल्पसंख्यक विद्यार्थ ₹1,000/माह (वार्षिक ₹10,000); शर्त — पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से कम व कोई अन्य छात्रवृत्ति न ली हो।
उच्च शिक्षा व्यक्तियों को व्यावसायिक विकास, आर्थिक प्रगति व सामाजिक सशक्तिकरण के लिए ज्ञान व कौशल से लैस करती है — साथ ही अनुसंधान, नवाचार व सांस्कृतिक संरक्षण को भी बढ़ावा देती है।
| योजना | 2025-26 आवंटन | 2025-26 व्यय (दिसंबर तक) |
|---|---|---|
| जनजातीय बालिकाओं हेतु उच्च शिक्षा सहायता | ₹20 करोड़ | ₹3.55 करोड़ |
| जनजातीय प्रतिभाशाली बालकों हेतु सहायता (बोर्ड व विश्वविद्यालय) | ₹30 लाख | ₹7 लाख |
| सहरिया विद्यार्थ B.Ed प्रशिक्षण सहायता | ₹50 लाख | ₹31.75 लाख |
| सहरिया विद्यार्थ उच्च शिक्षा सहायता | ₹150 लाख | ₹123 लाख |
परिभाषा: केंद्र प्रायोजित योजना (60:40) जो उच्च शिक्षा तंत्र को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी, शोधपरक व रोज़गारोन्मुखी बनाने के लिए NEP 2020 के 5 स्तंभों (पहुँच, समानता, जवाबदेही, क्षमता, गुणवत्ता) पर आधारित है
💡 आसान भाषा में: यानी केंद्र व राज्य मिलकर कॉलेजों-विश्वविद्यालयों के भवन, लैब व संसाधन बेहतर बनाने के लिए पैसा देते हैं।
🏠 उदाहरण: राजस्थान को RUSA 1.0 में ₹390 करोड़ (110 संस्थान, 94.4% पूर्ण), RUSA 2.0 में ₹221 करोड़ (20 संस्थान, 73.82% पूर्ण) व PM Usha में ₹330 करोड़ (34 संस्थान, 27% पूर्ण) मिले।
जनजातीय एवं सहरिया विद्यार्थियों हेतु विशेष वित्तीय सहायता
तकनीकी शिक्षा विद्यार्थियों को विभिन्न व्यवसायों व शिल्पों में विशिष्ट ज्ञान व कौशल से लैस करती है — जिससे राज्य की तकनीकी जनशक्ति वैश्विक मानकों तक पहुँचे।
| वर्ष | राजकीय कॉलेज | निजी कॉलेज | कुल कॉलेज | राजकीय क्षमता | निजी क्षमता | कुल क्षमता |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2024-25 | 48 | 68 | 116 | 7,565 | 14,673 | 22,238 |
| 2025-26 | 69 | 68 | 137 | 10,994 | 14,808 | 25,802 |
परिभाषा: कौशल, रोज़गार एवं उद्यमिता (SEE) विभाग के अंतर्गत कार्यरत संस्थान जो शिल्पकार प्रशिक्षण प्रदान करते हैं
💡 आसान भाषा में: यानी जहाँ बच्चे 10वीं/12वीं के बाद सीधे कोई हुनर (इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर आदि) सीखकर सीधे नौकरी के लिए तैयार होते हैं।
🏠 उदाहरण: 314 राजकीय ITI (क्षमता 63,960, जिनमें 12 महिला ITI शामिल — जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर, मंडोर, कोटा, बीकानेर, अलवर, उदयपुर, टोंक, बांसवाड़ा, भरतपुर) व 1,385 निजी ITI (क्षमता 2,12,624)। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS) के तहत 44 इंजीनियरिंग व 35 गैर-इंजीनियरिंग ट्रेडों में 1-2 वर्षय प्रशिक्षण। ₹496.82 करोड़ आवंटन में ₹119.21 करोड़ खर्च।
चिकित्सा शिक्षा को मज़बूत करना स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने, चिकित्सकों की कमी दूर करने व ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत ज़रूरी है।
| संस्थान | UG सीटें | PG सीटें | सुपर-स्पेशलिटी |
|---|---|---|---|
| राजकीय मेडिकल कॉलेज (कुल) | 4,330 | 1,974 | 210 |
| AIIMS जोधपुर | 150 | 190 | 83 |
| निजी मेडिकल कॉलेज (कुल) | 2,800 | 1,398 | 153 |
| स्तर | राजकीय | निजी | कुल |
|---|---|---|---|
| कुल संस्कृत शिक्षा संस्थान | 1,872 | 502 | 2,374 |
दूसरा चरण — धौलपुर (2022-23 से); तीसरा चरण — श्री गंगानगर, चित्तौड़गढ़, सिरोही (2022-23), फिर अलवर, दौसा, करौली, बूंदी, हनुमानगढ़ (2023-24), फिर बारां, बांसवाड़ा, नागौर, झुंझुनू, सवाई माधोपुर (2024-25, प्रत्येक में 100 MBBS सीटें)। 2025-26 में टोंक व जैसलमेर में 2 नए मेडिकल कॉलेज शुरू (प्रत्येक 50 MBBS सीटें) — कुल 15 नए कॉलेज ₹325 करोड़/कॉलेज की लागत से (केंद्र 60% : राज्य 40%); सभी की DPR स्वीकृत, निर्माण कार्य प्रगति पर। RajMES के तहत 2025-26 में ₹3,630.50 करोड़ आवंटन में ₹1,116.95 करोड़ खर्च (दिसंबर तक)।
राजस्थान राज्य संस्कृत शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान — कक्षा 1-12 तक संस्कृत पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकें व प्रशिक्षण सामग्री तैयार करता है; संस्कृत शिक्षकों का प्रशिक्षण व संस्कृत को "जनभाषा" बनाने के प्रयास भी करता है। 2025-26 में ₹94 लाख प्रावधान में ₹57.43 लाख खर्च — 2,551 शिक्षक लाभान्वित।
संस्कृत शिक्षा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, बौद्धिक विकास व भारत के प्राचीन साहित्य-दर्शन से विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। राजस्थान में संस्कृत हेतु अलग निदेशालय 1958 में व संस्कृत विश्वविद्यालय 1998 में स्थापित हुआ — दोनों ही देश में अग्रणी पहल थीं।
परिभाषा: Knowledge Augmentation through Research in Young Aspirants — विज्ञान विषय के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शोध संस्थानों में इंटर्नशिप व अनुसंधान प्रशिक्षण हेतु फेलोशिप कार्यक्रम
💡 आसान भाषा में: यानी विज्ञान पढ़ने वाले होनहार छात्रों को बड़े शोध संस्थानों में जाकर असली रिसर्च का अनुभव लेने के लिए स्कॉलरशिप।
🏠 उदाहरण: KARYA-2025 के तहत 63 विद्यार्थियों को अनुसंधान फेलोशिप प्रदान की गई।
भाषा एवं पुस्तकालय विभाग हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने व सार्वजनिक पुस्तकालयों के प्रबंधन के लिए स्थापित है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (स्थापना 1983, मुख्यालय जयपुर) प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं व सेमिनारों के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाता है तथा STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में करियर हेतु प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी 2025) पर राजस्थान राज्य नवाचार पुरस्कार — ग्रासरूट इनोवेशन व उच्च शिक्षण संस्थान श्रेणी में प्रथम ₹1 लाख, द्वितीय ₹51,000, तृतीय ₹21,000। जयपुर के इंदिरा गाँधी पंचायती राज संस्थान में SRSAC उप-केंद्र स्थापित। 2025-26 में एस्ट्रो नाइट टूरिज्म गतिविधि के तहत विज्ञान केंद्र, जंतर-मंतर, अल्बर्ट हॉल जैसे 5 स्थानों पर कार्यक्रम — लगभग 1,600 प्रतिभागियों ने आकाश-दर्शन किया।
नींव से शिखर तक का मॉडल — राजस्थान की शिक्षा नीति स्कूली शिक्षा (नींव), उच्च व तकनीकी शिक्षा (कौशल), और चिकित्सा-संस्कृत-विज्ञान शिक्षा (विशेषज्ञता) को एक सतत श्रृंखला के रूप में जोड़ती है — हर स्तर पिछले स्तर पर आधारित है। आँकड़े बनाम गुणवत्ता का अंतर — GER व PTR जैसे सुविधा-संकेतक राष्ट्रीय सिफारिश से बेहतर हैं, पर माध्यमिक स्तर पर ठहराव दर में गिरावट (59.1%→55.9%) दिखाती है कि पहुँच बढ़ने के बावजूद कक्षा 9-10 पर बच्चों को टिकाए रखना अब भी चुनौती है — यह "क्वांटिटी बनाम क्वालिटी" के अंतर को उजागर करता है। केंद्र-राज्य भागीदारी मॉडल — अधिकांश प्रमुख योजनाएँ (समग्र शिक्षा, PM Usha, PM SHRI, नई मेडिकल कॉलेज) 60:40 फंडिंग पैटर्न पर आधारित हैं, जो राज्य की सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े पैमाने पर अवसंरचना विस्तार को संभव बनाती है। बालिका-केंद्रित डिज़ाइन एक सतत थीम — KGBV, लाडो प्रोत्साहन, कालीबाई भील स्कूटी, देवनारायण स्कूटी, बालिका दूरस्थ शिक्षा जैसी अनेक योजनाएँ स्कूल से उच्च शिक्षा तक बालिकाओं की ड्रॉपआउट दर घटाने व नामांकन बढ़ाने की सुसंगत रणनीति दर्शाती हैं।
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