📊 अध्याय 3/14 — राजस्थान अर्थव्यवस्था

शिक्षा एवं ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था

Education & Knowledge Economy | स्कूल, उच्च व तकनीकी शिक्षा, साक्षरता दर, कौशल विकास व NEP 2020
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📋 इस अध्याय में क्या-क्या पढ़ेंगे
  1. विज़न : विकसित राजस्थान @2047 — शिक्षा
  2. स्कूली शिक्षा — प्रारंभिक व माध्यमिक (आँकड़े व 5
  3. सांख्यिकीय संकेतक)
  4. समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha) — A से J
  5. तक 10 स्तंभ
  6. स्कूली शिक्षा की प्रमुख योजनाएँ (छात्रवृत्ति, नि:शुल्क
  7. सुविधाएँ)
  8. शिक्षा नीति व मॉडल स्कूल कार्यक्रम (NEP 2020, PM
  9. SHRI, MSRA)
  10. साक्षरता एवं सतत शिक्षा (Literacy & Continuing
  11. Education)
  12. उच्च शिक्षा — कॉलेज, बालिका-केंद्रित योजनाएँ, PM
  13. Usha/RUSA
  14. तकनीकी शिक्षा — इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, ITI
  15. चिकित्सा शिक्षा — मेडिकल व डेंटल कॉलेज
  16. संस्कृत शिक्षा, भाषा-पुस्तकालय एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी
🌟 शुरुआत एक कहानी से

सोचिए — आज़ादी के समय राजस्थान में सामान्य शिक्षा के मात्र 7 कॉलेज थे। आज यह संख्या बढ़कर 3,218 हो चुकी है!

एक राज्य जहाँ कभी शिक्षा तक पहुँच सबसे बड़ी चुनौती थी, वहाँ आज 49 मेडिकल कॉलेज, 1 IIT, 1 IIM और हज़ारों स्कूल हैं।

शिक्षा को राजस्थान सरकार मानव संसाधन विकास का सबसे बड़ा निवेश मानती है — क्योंकि शिक्षा ही वह कड़ी है जो गरीबी, बेरोज़गारी और असमानता को तोड़ती है। इस अध्याय में हम पढ़ेंगे — स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और विज्ञान-प्रौद्योगिकी तक — राजस्थान की पूरी "ज्ञान अर्थव्यवस्था" कैसे आकार ले रही है।

📘 2047 का लक्ष्य

परिभाषा: 2047 तक राजस्थान में विद्यार्थ-केंद्रित, समावेशी एवं प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण प्रणाली होगी, जो पहुँच, समानता एवं उत्कृष्टता सुनिश्चित करेगी। स्कूली व तकनीकी शिक्षा क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता व बहुविषयी शिक्षण को बढ़ावा देगी। संस्कृत को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाएगा और एक जीवंत विज्ञान-प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र राजस्थान को ज्ञान व नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाएगा।

1विज़न वक्तव्य — विकसित राजस्थान @2047

फोकस क्षेत्र (क्र. 1-5)फोकस क्षेत्र (क्र. 6-10)
समावेशी व उच्च-गुणवत्ता शिक्षाउद्योग-अकादमिक सहयोग
शिक्षक सशक्तिकरणशोध व नवाचार केंद्र
स्मार्ट अवसंरचनासततता व आपदा-तैयारी
डिजिटल परिवर्तनसामुदायिक सहभागिता
करियर व कौशल विकासवैश्विक पहुँच (Global Outreach)
प्राथमिक/उच्च प्राथमिक
विद्यालय
44,934 राजकीय विद्यालय
उच्च माध्यमिक विद्यालय
19,950
इनमें 1,364 बालिका विद्यालय
कुल नामांकन
72.93 लाख
राजकीय विद्यालयों में
उत्कृष्ट विद्यालय
8,373
1,575 प्राथमिक + 6,798 उच्च प्राथमिक
प्राथमिक शिक्षा
13 : 1
नामांकन 22.72 लाख, शिक्षक 1.69 लाख
माध्यमिक शिक्षा
18 : 1
नामांकन 50.22 लाख, शिक्षक 2.82 लाख
याद रखें

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 अनुशंसित अनुपात 30:1 है — राजस्थान के दोनों अनुपात (13:1 व 18:1) इससे बेहतर व कहीं अधिक सुविधाजनक हैं।

शिक्षा क्षेत्र के 10 फोकस क्षेत्र (Thrust Areas)

2स्कूली शिक्षा — प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा सबके लिए

स्कूली शिक्षा बच्चों के बौद्धिक, सामाजिक व भावनात्मक विकास की नींव रखती है। यह प्रारंभिक शिक्षा (Elementary) व माध्यमिक शिक्षा (Secondary) दोनों को समाहित करती है — पहले चरण में बुनियादी ज्ञान, दूसरे चरण में उन्नत विषय व क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स।

छात्र-शिक्षक अनुपात (2025-26)

📘 सकल नामांकन अनुपात (GER — Gross Enrolment Ratio)

परिभाषा: किसी शिक्षा स्तर में कुल नामांकन (आयु चाहे जो भी हो), उस स्तर की आधिकारिक आयु-समूह जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में

💡 आसान भाषा में: यानी स्कूल में कितने % बच्चे भर्त हैं — भले ही उनकी उम्र सही कक्षा से थोड़ी कम/ज़्यादा हो।

🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि किसी इलाके में प्राथमिक (कक्षा 1-5) आयु-वर्ग के 100 बच्चे हैं, पर स्कूल में कुल 88 बच्चे नामांकित हैं (चाहे उम्र में थोड़ा आगे-पीछे भी हों) — तो GER = 88%। 2024-25 में राजस्थान का प्राथमिक GER 88.3% रहा।

📘 छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR — Pupil Teacher Ratio)

परिभाषा: किसी शिक्षा स्तर पर प्रति शिक्षक औसत विद्यार्थियों की संख्या

💡 आसान भाषा में: यानी एक शिक्षक को औसतन कितने बच्चे पढ़ाने पड़ते हैं।

🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि किसी क्षेत्र में उच्च माध्यमिक स्तर पर कुल 1,500 विद्यार्थ और 100 शिक्षक हैं, तो PTR = 15:1। 2024-25 में राजस्थान का उच्च माध्यमिक PTR भी ठीक 15 रहा।

📘 संक्रमण दर (Transition Rate)

परिभाषा: एक शिक्षा स्तर की अंतिम कक्षा से अगले स्तर की पहली कक्षा में प्रवेश करने वाले छात्रों का अनुपात

💡 आसान भाषा में: यानी कक्षा 8 पास करने वाले कितने बच्चे कक्षा 9 में एडमिशन लेते हैं।

🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि कक्षा 8 में 100 बच्चे थे और अगले साल उनमें से 90 बच्चों ने कक्षा 9 में प्रवेश लिया, तो संक्रमण दर = 90%। 2024-25 में उच्च प्राथमिक→माध्यमिक संक्रमण दर 90.2% रही।

📘 ठहराव दर (Retention Rate)

परिभाषा: किसी स्तर की पहली कक्षा में नामांकित विद्यार्थियों के समूह में से कितने % उस स्तर की अंतिम कक्षा तक पहुँचने की संभावना रखते हैं

💡 आसान भाषा में: यानी जो बच्चे कक्षा 1 में भर्त हुए, उनमें से कितने % बीच में स्कूल छोड़े बिना अंतिम कक्षा तक टिके रहते हैं।

🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि कक्षा 1 में 100 बच्चे भर्त हुए और उनमें से 78 बच्चे कक्षा 8 तक पहुँचे, तो प्रारंभिक ठहराव दर = 78%। 2024-25 में राजस्थान की प्रारंभिक (1-8) ठहराव दर 78.7% रही।

📘 अवसान/ड्रॉपआउट दर (Dropout Rate)

परिभाषा: किसी स्तर में नामांकित विद्यार्थियों के समूह में से जो अगले शैक्षणिक वर्ष में किसी भी कक्षा में नामांकित नहीं रहते

💡 आसान भाषा में: यानी बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों का प्रतिशत।

🏠 उदाहरण: उदाहरण : यदि माध्यमिक स्तर पर 100 बच्चों में से 8 बच्चे अगले साल स्कूल में नहीं दिखे, तो ड्रॉपआउट दर = 8%। 2024-25 में राजस्थान की माध्यमिक ड्रॉपआउट दर 7.7% रही — 2023-24 के 11.1% से बेहतर सुधार।

5 प्रमुख शैक्षिक सांख्यिकीय संकेतक — सरल समझ

स्कूली शिक्षा की प्रगति मापने के लिए 5 प्रमुख संकेतक उपयोग होते हैं — इन्हें उदाहरण सहित समझें ताकि आगे की तालिकाएँ आसानी से समझ आएँ:

वर्षप्राथमिक (1-5)उच्च प्राथमिक (6-8)प्रारंभिक (1-8)माध्यमिक (9-10)उच्च माध्यमिक (11-12)
2023-2495.190.993.680.262.0
2024-2588.392.189.782.266.1
संकेतकप्राथमिकउच्च प्राथमिकमाध्यमिक/संक्रमणउच्च माध्यमिक
छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR)18121115
संक्रमण दर (%) — क्रमशः 5→6, 8→9, 10→11—93.890.288.2
संकेतकप्राथमिकप्रारंभिकमाध्यमिकउच्च माध्यमिक
ठहराव दर 2023-24 (%)82.575.359.148.9
ठहराव दर 2024-25 (%)83.178.755.951.9
ड्रॉपआउट दर 2023-24 (%)7.66.811.1—
ड्रॉपआउट दर 2024-25 (%)3.63.67.7—
ध्यान देने योग्य बिंदु

माध्यमिक स्तर पर ठहराव दर में गिरावट (59.1% → 55.9%) चिंताजनक संकेत है, जबकि बाकी सभी स्तरों पर सुधार हुआ — यह दर्शाता है कि कक्षा 9-10 के बाद बच्चों को स्कूल में टिकाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। फिर भी माध्यमिक स्तर की ड्रॉपआउट दर 11.1% से घटकर 7.7% हो गई — यानी स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति घट रही है, भले ही अंतिम कक्षा तक पहुँचने की दर धीमी हो।

तालिका 3.1 : सकल नामांकन अनुपात (GER) — राजस्थान

तालिका 3.2, 3.3 : PTR एवं संक्रमण दर (2024-25)

तालिका 3.4, 3.5 : ठहराव दर एवं ड्रॉपआउट दर

स्कूली शिक्षा छात्रवृत्ति योजनाएँ (2025-26, दिसंबर तक)

वंचित व पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों हेतु कई छात्रवृत्ति योजनाएँ स्कूली शिक्षा में समांतर रूप से चलती हैं:

शिक्षा स्तरपात्र श्रेणियाँ (Categories)लाभार्थ व व्यय
माध्यमिक शिक्षासफाई/स्वास्थ्य-जोखिम व्यवसाय (Scavenger) परिवारों के बच्चे, अति पिछड़ा वर्ग (प्री+पोस्ट मैट्रिक), अनुसूचित जाति (प्री+पोस्ट), अनुसूचित जनजाति (प्री+पोस्ट), अन्य पिछड़ा वर्ग (कक्षा 9-10 प्री-मैट्रिक), देवनारायण गुरुकुल (विशेष प्री-मैट्रिक, MBC)2.93 लाख विद्यार्थ लाभान्वित; ₹67.50 करोड़ व्यय
प्रारंभिक शिक्षाअनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग व स्वच्छता/स्वास्थ्य-जोखिम व्यवसाय में लगे अभिभावकों के बच्चों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति₹20.04 करोड़ व्यय
ज्ञान संकल्प पोर्टल — CSR से स्कूलों की मदद

ज्ञान संकल्प पोर्टल — दानदाताओं/भामाशाहों/कंपनियों (CSR के तहत) से राजकीय स्कूलों के विकास कार्यों हेतु सीधा योगदान लेने का ऑनलाइन मंच — 2025-26 में ₹34.38 करोड़ के विकास कार्य स्वीकृत (दिसंबर तक)। 29वाँ राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह (2025) में 135 भामाशाह व 91 प्रेरक सम्मानित हुए — इनका कुल शिक्षा-योगदान ₹139.90 करोड़ रहा।

📘 समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha)

परिभाषा: एक केंद्र प्रायोजित योजना (केंद्र:राज्य = 60:40) जो प्री-नर्सरी से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाती है — सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान व शिक्षक-शिक्षा योजनाओं का एकीकरण

💡 आसान भाषा में: यानी पहले जो 3 अलग-अलग योजनाएँ (प्राथमिक, माध्यमिक, शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए) अलग-अलग चलती थीं, अब वे सब एक ही "समग्र शिक्षा" छाते के नीचे एक साथ चलती हैं — जैसे एक ही थाली में सारे व्यंजन।

🏠 उदाहरण: राजस्थान में इसे राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद एकल राज्य कार्यान्वयन समिति के रूप में लागू करती है — इसके 10 स्तंभ (A-J) नीचे दिए गए हैं।

📘 निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat — FLN)

परिभाषा: कक्षा 1-5 के विद्यार्थियों को बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy) प्रदान करने का राष्ट्रीय मिशन, लक्ष्य 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा 3 तक पढ़ना-लिखना सीख जाए

💡 आसान भाषा में: यानी छोटी कक्षाओं में बच्चों को ठीक से पढ़ना-लिखना व गिनती सिखाने पर ज़ोर, ताकि आगे की पढ़ाई की नींव मज़बूत हो।

🏠 उदाहरण: "निपुण मेला" पंचायत स्तर पर आयोजित होते हैं, कक्षा 1 के लिए "विद्या प्रवेश" व कक्षा 3-5 के लिए विषय-वार वर्कबुक दी जाती हैं। इससे 35.41 लाख विद्यार्थ लाभान्वित हुए, ₹50.09 करोड़ खर्च हुआ (2025-26, दिसंबर तक)।

3समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha)

A. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल व शिक्षा (ECCE)

B. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा

1. स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल सतत/जारी कार्यक्रम | राज्य योजना
उद्देश्यशैक्षणिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों (EBB) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा — बालिका शिक्षा पर विशेष ज़ोर (न्यूनतम 55% सीटें आरक्षित)
संबद्धताकेंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), नई दिल्ली — पाठ्यक्रम NCERT आधारित
कवरेज27 जिलों के 134 ब्लॉकों में 134 स्कूल; 62,433 विद्यार्थ नामांकित (2025-26, दिसंबर तक)
2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय/छात्रावास सतत/जारी कार्यक्रम | राज्य योजना
संरचना10 मेवात बालिका आवासीय विद्यालय + 20 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका छात्रावास + 11 बेघर-बेसहारा व अनाथ श्रेणी विद्यालय/छात्रावास (कुल 41)
क्षमता एवं नामांकन3,900 प्रवेश क्षमता में से 3,458 बालिकाएँ नामांकित (2025-26, दिसंबर तक)
वित्तशिक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत ₹20.94 करोड़ में से ₹16.76 करोड़ ज़िलों को आवंटित
📘 शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009

परिभाषा: 1 अप्रैल 2010 से लागू — निजी स्कूलों में कमज़ोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करना अनिवार्य

💡 आसान भाषा में: यानी हर निजी स्कूल को अपनी कुल सीटों में से एक-चौथाई सीटें गरीब बच्चों के लिए मुफ़्त में देनी होती हैं।

🏠 उदाहरण: आय पात्रता सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख कर दी गई। 2024-25 में निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूतं हेतु ₹546.13 करोड़ स्वीकृत।

C. पहुँच एवं ठहराव (Access and Retention)

निम्न प्रमुख योजनाएँ बालक-बालिकाओं की पहुँच व ठहराव सुनिश्चित करती हैं:

3. नि:शुल्क यूनिफॉर्म व पाठ्यपुस्तक वितरण फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
यूनिफॉर्म (2025-26)कक्षा 1-8 के सभी विद्यार्थियों को ₹600 प्रति विद्यार्थ DBT के माध्यम से
यूनिफॉर्म (2024-25)कक्षा 1-8 व कक्षा 9-12 की बालिकाओं को ₹800/विद्यार्थ (सिलाई+बैग सहित); ₹330.06 करोड़ खर्च, 41.26 लाख लाभान्वित
नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकेंकक्षा 1-8 सभी, कक्षा 9-12 सभी बालिकाएँ, SC/ST विद्यार्थ, गैर-आयकरदाता अभिभावकों के बच्चे — 2025-26 में 4.05 करोड़ पुस्तकें, 80 लाख विद्यार्थियों को
नि:शुल्क साइकिलकक्षा 9 की सभी बालिकाओं को — 2024-25 में 3.25 लाख साइकिलें वितरित; 2025-26 के लिए 3.34 लाख का आपूर्ति आदेश
4. PM SHRI स्कूल योजना फ़्लैगशिप योजना | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम
शुरुआत2022 — मौजूदा स्कूलों को हरित, डिजिटल व नवाचार-आधारित मॉडल स्कूल के रूप में सुदृढ़ करना
हरित सुविधाएँसोलर पैनल, LED लाइटिंग, न्यूट्रिशन गार्डन, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक-मुक्त परिसर, जल संरक्षण
राजस्थान में कवरेज639 स्कूल (90 प्रारंभिक + 549 माध्यमिक + 1 संस्कृत शिक्षा); 2.96 लाख विद्यार्थ; ₹51.81 करोड़ खर्च (प्रावधान ₹434.65 करोड़)
5. मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान (MSRA) फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
उद्देश्यराजस्थान में NEP 2020 को प्रभावी ढंग से लागू करना — राज्य को मॉडल बनाना, नामांकन व गुणवत्ता बढ़ाना
📘 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 व SARTHAQ

परिभाषा: 29 जुलाई 2020 को शुरू हुई शिक्षा नीति; इसे लागू करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने SARTHAQ (Students And Teachers Holistic Advancement through Quality Education) पहल के तहत 27 अध्यायों में 297 कार्य निर्धारित किए

💡 आसान भाषा में: यानी एक बड़ा राष्ट्रीय एक्शन-प्लान जो बताता है कि NEP को ज़मीन पर कैसे लागू करना है — किसे, कब, क्या करना है।

🏠 उदाहरण: 297 में से 202 कार्य राज्यों को सौंपे गए, जिनमें से राजस्थान ने दिसंबर 2025 तक 73 कार्य पूरे किए — 6 समितियों व ज़िला कलेक्टर-अध्यक्षता वाली ज़िला-स्तरीय समितियों के माध्यम से, गूगल "202 टास्क ट्रैकर" से मासिक निगरानी।

D. शिक्षा में अवसंरचना विकास

E. गुणवत्ता एवं नवाचार हस्तक्षेप

रणनीतिNEP बालक, NEP शिक्षक व NEP स्कूल — तीन बहुवर्षय कार्यक्रमों के रूप में लागू
गतिविधियाँ (29 अप्रैल 2025 से)राज्य-स्तरीय AI-आधारित मौखिक पठन प्रवाह (ORF) मूल्यांकन, छात्र उपस्थिति ऐप, NIOS हेतु ऑन-डिमांड परीक्षाएँ, डिजिटल पहलें
6. मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना सतत/जारी कार्यक्रम | राज्य योजना
शुरुआतबजट 2022-23 — पंजीकृत मदरसों को कंप्यूटर, स्मार्ट कक्षा, फर्नचर व ई-लर्निंग उपकरणों से उन्नत करना
वित्तीय सहायताप्राथमिक स्तर मदरसों को ₹15 लाख तक, उच्च प्राथमिक को ₹25 लाख तक (राज्य 90% + मदरसा प्रबंधन समिति 10%)
लाभार्थदिसंबर 2025 तक कुल 305 मदरसे लाभान्वित
📘 लाडो प्रोत्साहन योजना (Lado Protsahan Yojana)

परिभाषा: बालिका के जन्म से लेकर स्नातक पूर्ण होने तक 7 अलग-अलग पड़ावों पर कुल ₹1.50 लाख तक की प्रोत्साहन राशि माता-पिता/अभिभावक को दी जाती है

💡 आसान भाषा में: यानी बेटी के हर बड़े पड़ाव (जन्म, टीकाकरण, कक्षा 1, कक्षा 6, कक्षा 10, कक्षा 12, स्नातक) पर सरकार परिवार को पैसा देती है ताकि बेटी को बोझ न समझा जाए और उसकी पढ़ाई बीच में न छूटे।

🏠 उदाहरण: किश्तें : संस्थागत प्रसव पर ₹2,500 → 1 वर्ष उम्र व पूर्ण टीकाकरण पर ₹2,500 → कक्षा 1 प्रवेश पर ₹4,000 → कक्षा 6 प्रवेश पर ₹5,000 → कक्षा 10 प्रवेश पर ₹11,000 → कक्षा 12 प्रवेश पर ₹25,000 → स्नातक उत्तीर्ण व 21 वर्ष पूर्ण होने पर ₹1 लाख। तीसरी से छठी किश्त स्कूल शिक्षा विभाग व सातवीं किश्त उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दी जाती है। 2025-26 (दिसंबर तक) में ₹18.09 करोड़ व्यय हुआ।

मुख्यमंत्री (D.El.Ed) संबल योजना

विधवा/परित्यक्ता महिलाओं को निजी प्रशिक्षण संस्थानों में 2-वर्षय प्रारंभिक शिक्षा डिप्लोमा (D.El.Ed) करने पर ₹9,000/लाभार्थ शिक्षण-शुल्क सहायता — 2025-26 में प्राप्त 352 ऑनलाइन आवेदनों में से 331 लाभार्थियों के खाते में राशि हस्तांतरित।

F. लैंगिक समानता (Gender Equality)

7. नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | सतत/जारी कार्यक्रम
शुरुआत1 अप्रैल 2022 से केंद्र प्रायोजित योजना — 15+ आयु वर्ग में साक्षरता बढ़ाना
क्रियान्वयनस्वयंसेवी-आधारित अभियान; ULLAS ऐप के माध्यम से ऑनलाइन सर्वेक्षण
प्रगति (2025-26)30 लाख के लक्ष्य में से 25.72 लाख निरक्षरों व 1.49 लाख स्वयंसेवी शिक्षकों का सर्वेक्षण; ₹34.37 करोड़ आवंटन में ₹4.24 करोड़ खर्च

G. समावेशी शिक्षा (CWSN)

H. व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education)

I. ICT एवं डिजिटल पहलें

J. सामुदायिक सहभागिता

4साक्षरता एवं सतत शिक्षा (Literacy & Continuing Education)

साक्षरता एवं सतत शिक्षा निदेशालय 15 वर्ष व अधिक आयु के निरक्षर व्यक्तियों (विशेषकर महिलाओं व पिछड़े वर्गों) को कार्यात्मक साक्षरता व उपयोगी कौशल प्रदान करता है।

लाभार्थतलाकशुदा, विधवा, आदिवासी या वंचित समूहों की 15-30 वर्ष आयु की महिलाएँ
सुविधाकक्षा 10 तक शिक्षा + व्यावसायिक प्रशिक्षण, आवासीय स्कूल के रूप में
वर्तमान स्थितिझालावाड़ ज़िले में संचालित, 100 महिलाएँ नामांकित; ₹29.18 लाख खर्च (दिसंबर तक)
कुल कॉलेज
3,218
आज़ादी के समय केवल 7 थे
राजकीय कॉलेज
596
+20 विधि +48 कृषि कॉलेज
निजी कॉलेज
1,589
+957 B.Ed. कॉलेज
बजट व्यय (2025-26)
₹786.24 करोड़
आवंटन ₹1,552.08 करोड़ में से
योजनाउद्देश्य / लाभ2025-26 व्यय (दिसंबर तक)
मुख्यमंत्री (B.Ed) संबल योजनाविधवा/तलाकशुदा महिलाओं को B.Ed. फीस प्रतिपूतं₹31.12 लाख (आवंटन ₹48 लाख)
बालिका दूरस्थ शिक्षा योजनादूरस्थ क्षेत्रों की बालिकाओं को VMOU/IGNOU ट्यूशन फीस प्रतिपूतं₹20.54 करोड़ (आवंटन ₹21.30 करोड़)
मुख्यमंत्री हमारी बेटियाँ योजनामेधावी बालिकाओं को वित्तीय सहायता (2015-16 से)₹91.99 लाख (आवंटन ₹200 लाख)
कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजनाकक्षा 12 पास मेधावी बालिकाओं को स्कूटी₹67.67 करोड़ (आवंटन ₹299.69 करोड़)
देवनारायण बालिका स्कूटी वितरण योजना (2023 से)शिक्षा के माध्यम से बालिका सशक्तिकरण₹33.71 करोड़ (आवंटन ₹56.10 करोड़)
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजनानिम्न-आय परिवारों के बच्चों को सहायता₹21.11 करोड़ (आवंटन ₹45.50 करोड़)
विशेष

स्वामी विवेकानंद उत्कृष्टता छात्रवृत्ति — Times Higher Education (THE) सूची या NIRF रैंकिंग 1-50 वाले विदेशी/भारतीय संस्थानों में उच्च अध्ययन हेतु; ₹150 करोड़ प्रावधान में से ₹145 करोड़ खर्च (2025-26, दिसंबर तक)। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना — पात्रता : कक्षा 12 उत्तीर्ण प्रथम 1 लाख विद्यार्थियों को — सामान्य विद्यार्थ ₹500/माह (वार्षिक ₹5,000), दिव्यांग व अल्पसंख्यक विद्यार्थ ₹1,000/माह (वार्षिक ₹10,000); शर्त — पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से कम व कोई अन्य छात्रवृत्ति न ली हो।

5उच्च शिक्षा — ज्ञान-आधारित भविष्य का निर्माण

उच्च शिक्षा व्यक्तियों को व्यावसायिक विकास, आर्थिक प्रगति व सामाजिक सशक्तिकरण के लिए ज्ञान व कौशल से लैस करती है — साथ ही अनुसंधान, नवाचार व सांस्कृतिक संरक्षण को भी बढ़ावा देती है।

बालिका व महिला-केंद्रित उच्च शिक्षा योजनाएँ

योजना2025-26 आवंटन2025-26 व्यय (दिसंबर तक)
जनजातीय बालिकाओं हेतु उच्च शिक्षा सहायता₹20 करोड़₹3.55 करोड़
जनजातीय प्रतिभाशाली बालकों हेतु सहायता (बोर्ड व विश्वविद्यालय)₹30 लाख₹7 लाख
सहरिया विद्यार्थ B.Ed प्रशिक्षण सहायता₹50 लाख₹31.75 लाख
सहरिया विद्यार्थ उच्च शिक्षा सहायता₹150 लाख₹123 लाख
इंजीनियरिंग कॉलेज
73
19 राजकीय + 54 निजी; क्षमता 27,753
MBA संस्थान
52
7 राजकीय + 45 निजी; क्षमता 4,474
पॉलिटेक्निक कॉलेज
137
क्षमता 25,802 (तालिका 3.6 देखें)
ITI
314 राजकीय +
1,385 निजी क्षमता क्रमशः 63,960 व 2,12,624
📘 प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM Usha)

परिभाषा: केंद्र प्रायोजित योजना (60:40) जो उच्च शिक्षा तंत्र को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी, शोधपरक व रोज़गारोन्मुखी बनाने के लिए NEP 2020 के 5 स्तंभों (पहुँच, समानता, जवाबदेही, क्षमता, गुणवत्ता) पर आधारित है

💡 आसान भाषा में: यानी केंद्र व राज्य मिलकर कॉलेजों-विश्वविद्यालयों के भवन, लैब व संसाधन बेहतर बनाने के लिए पैसा देते हैं।

🏠 उदाहरण: राजस्थान को RUSA 1.0 में ₹390 करोड़ (110 संस्थान, 94.4% पूर्ण), RUSA 2.0 में ₹221 करोड़ (20 संस्थान, 73.82% पूर्ण) व PM Usha में ₹330 करोड़ (34 संस्थान, 27% पूर्ण) मिले।

जनजातीय एवं सहरिया विद्यार्थियों हेतु विशेष वित्तीय सहायता

नवाचार, कौशल विकास व अवसंरचना विस्तार

6तकनीकी शिक्षा — कुशल एवं नवाचारी कार्यबल का निर्माण

तकनीकी शिक्षा विद्यार्थियों को विभिन्न व्यवसायों व शिल्पों में विशिष्ट ज्ञान व कौशल से लैस करती है — जिससे राज्य की तकनीकी जनशक्ति वैश्विक मानकों तक पहुँचे।

वर्षराजकीय कॉलेजनिजी कॉलेजकुल कॉलेजराजकीय क्षमतानिजी क्षमताकुल क्षमता
2024-2548681167,56514,67322,238
2025-26696813710,99414,80825,802
कुल मेडिकल कॉलेज
49
दिसंबर 2025 तक
कुल डेंटल कॉलेज
17
2 राजकीय + 15 निजी
UG सीटें (सभी)
8,980
सरकारी+निजी मेडिकल-डेंटल
PG सीटें (सभी)
3,930
+446 सुपर-स्पेशलिटी सीटें
📘 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI)

परिभाषा: कौशल, रोज़गार एवं उद्यमिता (SEE) विभाग के अंतर्गत कार्यरत संस्थान जो शिल्पकार प्रशिक्षण प्रदान करते हैं

💡 आसान भाषा में: यानी जहाँ बच्चे 10वीं/12वीं के बाद सीधे कोई हुनर (इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर आदि) सीखकर सीधे नौकरी के लिए तैयार होते हैं।

🏠 उदाहरण: 314 राजकीय ITI (क्षमता 63,960, जिनमें 12 महिला ITI शामिल — जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर, मंडोर, कोटा, बीकानेर, अलवर, उदयपुर, टोंक, बांसवाड़ा, भरतपुर) व 1,385 निजी ITI (क्षमता 2,12,624)। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (CTS) के तहत 44 इंजीनियरिंग व 35 गैर-इंजीनियरिंग ट्रेडों में 1-2 वर्षय प्रशिक्षण। ₹496.82 करोड़ आवंटन में ₹119.21 करोड़ खर्च।

तालिका 3.6 : पॉलिटेक्निक कॉलेजों की भौतिक प्रगति

7चिकित्सा शिक्षा — स्वस्थ राज्य हेतु सुदृढ़ीकरण

चिकित्सा शिक्षा को मज़बूत करना स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने, चिकित्सकों की कमी दूर करने व ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत ज़रूरी है।

49 मेडिकल कॉलेजों का विभाजन

संस्थानUG सीटेंPG सीटेंसुपर-स्पेशलिटी
राजकीय मेडिकल कॉलेज (कुल)4,3301,974210
AIIMS जोधपुर15019083
निजी मेडिकल कॉलेज (कुल)2,8001,398153
स्तरराजकीयनिजीकुल
कुल संस्कृत शिक्षा संस्थान1,8725022,374
नए मेडिकल कॉलेज — चरणबद्ध विस्तार

दूसरा चरण — धौलपुर (2022-23 से); तीसरा चरण — श्री गंगानगर, चित्तौड़गढ़, सिरोही (2022-23), फिर अलवर, दौसा, करौली, बूंदी, हनुमानगढ़ (2023-24), फिर बारां, बांसवाड़ा, नागौर, झुंझुनू, सवाई माधोपुर (2024-25, प्रत्येक में 100 MBBS सीटें)। 2025-26 में टोंक व जैसलमेर में 2 नए मेडिकल कॉलेज शुरू (प्रत्येक 50 MBBS सीटें) — कुल 15 नए कॉलेज ₹325 करोड़/कॉलेज की लागत से (केंद्र 60% : राज्य 40%); सभी की DPR स्वीकृत, निर्माण कार्य प्रगति पर। RajMES के तहत 2025-26 में ₹3,630.50 करोड़ आवंटन में ₹1,116.95 करोड़ खर्च (दिसंबर तक)।

SSIERT, महापुरा (जयपुर)

राजस्थान राज्य संस्कृत शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान — कक्षा 1-12 तक संस्कृत पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकें व प्रशिक्षण सामग्री तैयार करता है; संस्कृत शिक्षकों का प्रशिक्षण व संस्कृत को "जनभाषा" बनाने के प्रयास भी करता है। 2025-26 में ₹94 लाख प्रावधान में ₹57.43 लाख खर्च — 2,551 शिक्षक लाभान्वित।

वार्षिक प्रवेश क्षमता (राजकीय संस्थान)

8संस्कृत शिक्षा का पुनरुद्धार

संस्कृत शिक्षा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, बौद्धिक विकास व भारत के प्राचीन साहित्य-दर्शन से विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। राजस्थान में संस्कृत हेतु अलग निदेशालय 1958 में व संस्कृत विश्वविद्यालय 1998 में स्थापित हुआ — दोनों ही देश में अग्रणी पहल थीं।

तालिका 3.7 : राजस्थान में संस्कृत शिक्षा संस्थान (2025-26)

कुल पुस्तकालय
323
1 राज्य केंद्रीय + 7 संभागीय + 33 ज़िला + 282 पंचायत समिति स्तर
कुल पुस्तकें
22,87,985
47 विभागीय पुस्तकालयों में
नए सदस्य (2025-26)
14,289
पंजीकृत
📘 KARYA कार्यक्रम

परिभाषा: Knowledge Augmentation through Research in Young Aspirants — विज्ञान विषय के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शोध संस्थानों में इंटर्नशिप व अनुसंधान प्रशिक्षण हेतु फेलोशिप कार्यक्रम

💡 आसान भाषा में: यानी विज्ञान पढ़ने वाले होनहार छात्रों को बड़े शोध संस्थानों में जाकर असली रिसर्च का अनुभव लेने के लिए स्कॉलरशिप।

🏠 उदाहरण: KARYA-2025 के तहत 63 विद्यार्थियों को अनुसंधान फेलोशिप प्रदान की गई।

9भाषा एवं पुस्तकालय शिक्षा

भाषा एवं पुस्तकालय विभाग हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने व सार्वजनिक पुस्तकालयों के प्रबंधन के लिए स्थापित है।

10विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी — प्रगतिशील राज्य की दिशा में

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (स्थापना 1983, मुख्यालय जयपुर) प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं व सेमिनारों के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाता है तथा STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में करियर हेतु प्रोत्साहित करता है।

2025-26 की प्रमुख उपलब्धियाँ

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी 2025) पर राजस्थान राज्य नवाचार पुरस्कार — ग्रासरूट इनोवेशन व उच्च शिक्षण संस्थान श्रेणी में प्रथम ₹1 लाख, द्वितीय ₹51,000, तृतीय ₹21,000। जयपुर के इंदिरा गाँधी पंचायती राज संस्थान में SRSAC उप-केंद्र स्थापित। 2025-26 में एस्ट्रो नाइट टूरिज्म गतिविधि के तहत विज्ञान केंद्र, जंतर-मंतर, अल्बर्ट हॉल जैसे 5 स्थानों पर कार्यक्रम — लगभग 1,600 प्रतिभागियों ने आकाश-दर्शन किया।

मुख्य परीक्षा दृष्टि से — अध्याय का सार (विश्लेषण)

नींव से शिखर तक का मॉडल — राजस्थान की शिक्षा नीति स्कूली शिक्षा (नींव), उच्च व तकनीकी शिक्षा (कौशल), और चिकित्सा-संस्कृत-विज्ञान शिक्षा (विशेषज्ञता) को एक सतत श्रृंखला के रूप में जोड़ती है — हर स्तर पिछले स्तर पर आधारित है। आँकड़े बनाम गुणवत्ता का अंतर — GER व PTR जैसे सुविधा-संकेतक राष्ट्रीय सिफारिश से बेहतर हैं, पर माध्यमिक स्तर पर ठहराव दर में गिरावट (59.1%→55.9%) दिखाती है कि पहुँच बढ़ने के बावजूद कक्षा 9-10 पर बच्चों को टिकाए रखना अब भी चुनौती है — यह "क्वांटिटी बनाम क्वालिटी" के अंतर को उजागर करता है। केंद्र-राज्य भागीदारी मॉडल — अधिकांश प्रमुख योजनाएँ (समग्र शिक्षा, PM Usha, PM SHRI, नई मेडिकल कॉलेज) 60:40 फंडिंग पैटर्न पर आधारित हैं, जो राज्य की सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े पैमाने पर अवसंरचना विस्तार को संभव बनाती है। बालिका-केंद्रित डिज़ाइन एक सतत थीम — KGBV, लाडो प्रोत्साहन, कालीबाई भील स्कूटी, देवनारायण स्कूटी, बालिका दूरस्थ शिक्षा जैसी अनेक योजनाएँ स्कूल से उच्च शिक्षा तक बालिकाओं की ड्रॉपआउट दर घटाने व नामांकन बढ़ाने की सुसंगत रणनीति दर्शाती हैं।

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