18 मई 1974 की सुबह, राजस्थान के जैसलमेर ज़िले के पोखरण नामक रेगिस्तानी कस्बे के नीचे, धरती हल्की सी कांपी — भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे 'स्माइलिंग बुद्धा (Smiling Buddha)' नाम दिया गया। ठीक 24 साल बाद, 11-13 मई 1998 को, उसी पोखरण की धरती ने फिर एक बार पूरी दुनिया को चौंका दिया, जब भारत ने पांच परमाणु परीक्षण कर स्वयं को एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित किया। अब कल्पना कीजिए मई 2025 का वह सप्ताह — जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया, और युद्ध का पूरा स्वरूप बदल गया — अब लड़ाई सिर्फ टैंकों व विमानों से नहीं, बल्कि ड्रोन-झुंडों (Drone Swarms), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध व कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी लड़ी जा रही थी। राजस्थान का रेगिस्तान — जहां कभी परमाणु परीक्षण हुए थे — आज भी पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज के रूप में भारत की नई पीढ़ी की मिसाइलों व हथियारों के परीक्षण का केंद्र बना हुआ है। यही है भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी की कहानी — परमाणु धमाकों से लेकर ड्रोन-युद्ध तक — जिसे हम इस अध्याय में विस्तार से समझेंगे।
भाग 1: रक्षा प्रौद्योगिकी का परिचय एवं भारत की रक्षा अनुसंधान संस्थाएं
रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) में वे सभी वैज्ञानिक व तकनीकी क्षमताएं शामिल हैं, जो किसी राष्ट्र को अपनी सीमाओं, नागरिकों व हितों की सुरक्षा हेतु उपयोग में लाई जाती हैं — मिसाइल व हथियारों से लेकर उपग्रह, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता व साइबर सुरक्षा तक। किसी भी देश की सामरिक शक्ति आज केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी तकनीकी क्षमता व आत्मनिर्भरता से आंकी जाती है। भारत के लिए यह क्षेत्र दोहरी दृष्टि से महत्वपूर्ण है — एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा, दूसरी तरफ आत्मनिर्भरता व आर्थिक अवसर (रोज़गार, निर्यात, निवेश)।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation - DRDO) की स्थापना 1958 में हुई थी, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी है। DRDO के देश भर में 50 से अधिक प्रयोगशालाएं व अनुसंधान केंद्र हैं, जो मिसाइल, विमान, नौसेना प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स, सामग्री विज्ञान व जैव-रक्षा सहित विविध क्षेत्रों में कार्य करती हैं।
DRDO द्वारा विकसित तकनीकों का वास्तविक उत्पादन सरकारी रक्षा उपक्रमों (Defence PSUs) द्वारा किया जाता है:
| उपक्रम | कार्य |
|---|---|
| हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) | लड़ाकू विमान (तेजस), हेलीकॉप्टर व एयरोस्पेस उपकरणों का डिज़ाइन व निर्माण |
| भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) | रडार, संचार उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली व सैन्य इलेक्ट्रॉनिक्स |
| भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) | मिसाइल प्रणालियों का निर्माण व एकीकरण |
| भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) | सैन्य वाहन, इंजीनियरिंग उपकरण व रेल उपकरण निर्माण |
| मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) | युद्धपोत व पनडुब्बी निर्माण |
अक्टूबर 2021 में एक बड़ा ऐतिहासिक सुधार हुआ — चार दशक पुराने आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board - OFB) को भंग कर उसकी 41 फैक्ट्रियों को 7 नए सरकारी रक्षा उपक्रमों (DPSU) में पुनर्गठित किया गया, ताकि दक्षता व जवाबदेही बढ़े:
| नया DPSU (2021 पुनर्गठन) | विशेषीकृत क्षेत्र |
|---|---|
| म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) | गोला-बारूद एवं विस्फोटक |
| आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) | बख्तरबंद वाहन (टैंक आदि) |
| एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) | हथियार एवं उपकरण |
| ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (TCL) | सैनिकों हेतु आवश्यक वस्तुएं (वर्दी, उपकरण) |
| यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) | सहायक उपकरण एवं पुर्जे |
| इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) | ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स (दूरबीन, नाइट विज़न आदि) |
| ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL) | पैराशूट एवं संबंधित उपकरण |
कल्पना कीजिए एक विशाल, पुरानी सरकारी दुकान जो हर तरह का सामान बेचती हो — जूते से लेकर बर्तन तक — परंतु किसी में भी विशेषज्ञता न हो। अब उसी दुकान को 7 अलग-अलग विशेषीकृत दुकानों में बांट दिया जाए, जहां हर दुकान अपने ही क्षेत्र (जैसे सिर्फ बख्तरबंद वाहन या सिर्फ गोला-बारूद) में माहिर हो — यही भारत सरकार ने OFB के साथ किया। इससे जवाबदेही बढ़ी, उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ व प्रत्येक कंपनी अपने विशेष क्षेत्र में वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा कर सकती है।
1. DRDO (स्थापना 1958) भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी है, जिसकी 50+ प्रयोगशालाएं हैं। 2. HAL (विमान), BEL (इलेक्ट्रॉनिक्स), BDL (मिसाइल), BEML (वाहन) व MDL (युद्धपोत) प्रमुख रक्षा उपक्रम हैं। 3. अक्टूबर 2021 में OFB को भंग कर 7 नए DPSU बनाए गए — MIL, AVNL, AWEIL, TCL, YIL, IOL व GIL। 4. यह पुनर्गठन दक्षता, जवाबदेही व विशेषज्ञता बढ़ाने हेतु किया गया — रक्षा उत्पादन सुधार का बड़ा कदम।
भाग 2: मिसाइल एवं सामरिक प्रौद्योगिकी
भारत का आधुनिक मिसाइल कार्यक्रम 1983 में शुरू किए गए 'एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (Integrated Guided Missile Development Programme - IGMDP)' से आकार लेना शुरू हुआ, जिसका नेतृत्व डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने किया। इसी कार्यक्रम के तहत पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल व नाग जैसी मिसाइलें विकसित हुईं, जिन्होंने भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाया।
| मिसाइल | प्रकार एवं मारक क्षमता | नवीनतम स्थिति (2025-26) |
|---|---|---|
| अग्नि-V (Agni-V) | अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), 5,000+ km मारक क्षमता | मई 2026 में MIRV (एक साथ कई स्वतंत्र लक्ष्यों को भेदने वाली) तकनीक का दूसरा परीक्षण सफल — एक ही मिसाइल कई अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बना सकती है |
| अग्नि-प्राइम (Agni-Prime) | नई पीढ़ी की कैनिस्टरीकृत मध्यम दूरी बैलिस्टिक मिसाइल, 1,000-2,000 km | 24 सितंबर 2025 को रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से सफल परीक्षण — गतिशीलता व छिपाव क्षमता में भारी वृद्धि |
| पृथ्वी-II (Prithvi-II) | कम दूरी की सतह-से-सतह बैलिस्टिक मिसाइल | नियमित रूप से चांदीपुर से सफल परीक्षण जारी |
सामान्य मिसाइल एक ही लक्ष्य पर एक ही हथियार गिराती है। परंतु 'मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV)' तकनीक से लैस मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग हथियारों को अलग-अलग, दूर-दूर स्थित लक्ष्यों पर सटीक रूप से भेज सकती है — जैसे एक ही तीरंदाज़ एक बार में कई तीर छोड़े, और हर तीर अपने अलग निशाने पर सटीक लगे। मई 2026 में भारत के अग्नि-V मिसाइल का यह परीक्षण दिखाता है कि भारत अब इस अत्यंत जटिल व चुनिंदा देशों के पास मौजूद तकनीक में महारत हासिल कर रहा है।
ब्रह्मोस (BrahMos), भारत के 'ब्रह्मपुत्र' व रूस की 'मोस्कवा' नदी के नाम पर बनी भारत-रूस संयुक्त सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से लगभग 3 गुना (Mach 2.8-3) तेज़ उड़ती है तथा भूमि, समुद्र व वायु — तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है। अब DRDO के 'प्रोजेक्ट विष्णु (Project Vishnu)' के तहत 'विस्तारित प्रक्षेपवक्र दीर्घकालिक हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल (ET-LDHCM)' विकसित की जा रही है, जो ध्वनि की गति से 8 गुना (Mach 8) तेज़ है व 1,500 किमी दूर तक लक्ष्य भेद सकती है — इसे लद्दाख में सफलतापूर्वक परीक्षित किया गया, जो मौजूदा ब्रह्मोस से भी कहीं आगे की तकनीक है।
| मिसाइल | प्रकार | नवीनतम विकास |
|---|---|---|
| आकाश प्राइम/NG (Akash Prime/NG) | सतह-से-हवा वायु रक्षा मिसाइल, 25-35 km मारक क्षमता | 16 जुलाई 2025 को लद्दाख के 4,500 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्र में सफल परीक्षण — लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल व ड्रोन को भी निष्क्रिय करने में सक्षम |
| अस्त्र Mk-3 (Astra Mk-3) | हवा-से-हवा मिसाइल (Air-to-Air Missile) | स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर सहित सुखोई-30 लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण — भारत की वायु युद्ध क्षमता में भारी सुधार |
भारत के मिसाइल शस्त्रागार में अग्नि-ब्रह्मोस-आकाश-अस्त्र के अलावा भी कई महत्वपूर्ण मिसाइलें शामिल हैं, जो अलग-अलग सामरिक ज़रूरतों को पूरा करती हैं:
| मिसाइल | प्रकार एवं विशेषता |
|---|---|
| नाग (Nag) / हेलिना (Helina) | तीसरी पीढ़ी की 'फायर-एंड-फॉरगेट' टैंक-रोधी मिसाइल (Anti-Tank Guided Missile); ज़मीनी संस्करण (NAMICA वाहक से) 0.5-4 km व हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली हेलिना/ध्रुवास्त्र संस्करण 7-10 km मारक क्षमता रखता है |
| शौर्य (Shaurya) | DRDO द्वारा विकसित हाइपरसोनिक, कैनिस्टर-लॉन्च सतह-से-सतह मिसाइल — 700-800 km मारक क्षमता, Mach 7 गति व उच्च गतिशीलता के साथ एक सशक्त परमाणु प्रतिरोधक |
| निर्भय (Nirbhay) | भारत की स्वदेशी सबसोनिक (ध्वनि से धीमी गति) क्रूज़ मिसाइल — 1,000+ km मारक क्षमता, एक साथ कई लक्ष्यों को सटीकता से भेदने की क्षमता; वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमित संख्या में तैनात |
| धनुष (Dhanush) | पृथ्वी मिसाइल से विकसित जहाज़-से-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल — 350 km मारक क्षमता, Mach 2 गति, नौसेना की समुद्री व तटीय लक्ष्यों पर वार करने की क्षमता बढ़ाती है |
1. भारत का मिसाइल कार्यक्रम 1983 के IGMDP (डॉ. कलाम के नेतृत्व) से शुरू हुआ। 2. अग्नि-V (मई 2026 MIRV परीक्षण) व अग्नि-प्राइम (सितंबर 2025, रेल-मोबाइल) भारत की रणनीतिक ताकत हैं। 3. ब्रह्मोस (Mach 2.8-3) व नया ET-LDHCM हाइपरसोनिक मिसाइल (Mach 8, प्रोजेक्ट विष्णु) भारत की क्रूज़ मिसाइल क्षमता दर्शाते हैं। 4. आकाश प्राइम/NG (जुलाई 2025) वायु रक्षा व अस्त्र Mk-3 हवा-से-हवा युद्ध क्षमता को मज़बूत कर रहे हैं। 5. नाग/हेलिना (टैंक-रोधी), शौर्य (हाइपरसोनिक परमाणु-सक्षम), निर्भय (क्रूज़) व धनुष (नौसैनिक बैलिस्टिक) भारत के विविध मिसाइल शस्त्रागार को पूर्ण करते हैं।
भाग 3: थल, जल एवं वायु रक्षा प्रणालियां
भारतीय थल सेना (Indian Army) की सामरिक शक्ति का आधार अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tank), पैदल सेना लड़ाकू वाहन (Infantry Combat Vehicles) व तोपखाना प्रणालियां (जैसे स्वदेशी 'धनुष' तोप) हैं। AVNL (आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड) अब बख्तरबंद वाहनों के स्वदेशी उत्पादन का नेतृत्व कर रही है, जिससे आयात पर निर्भरता घट रही है।
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए वर्ष 2023 एक ऐतिहासिक वर्ष था, जब भारत में निर्मित पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत' नौसेना में शामिल हुआ — इसी वर्ष तेजस के नौसैनिक संस्करण ने सफलतापूर्वक इस पर लैंडिंग की, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जो अपने स्वदेशी विमानवाहक पोत पर स्वदेशी लड़ाकू विमान उतार सकते हैं। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) द्वारा निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां (जैसे INS वागीर, वेला) भी भारत की जल-अंतर्गत सामरिक क्षमता को मज़बूत कर रही हैं।
हल्का लड़ाकू विमान (Light Combat Aircraft) 'तेजस' भारत की स्वदेशी वैमानिकी क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है। सितंबर 2025 में भारत सरकार ने HAL के साथ 97 तेजस Mk1A विमानों हेतु ₹62,370 करोड़ (लगभग $7.5 बिलियन) का ऐतिहासिक अनुबंध किया, जिसमें 68 सिंगल-सीट लड़ाकू विमान व 29 दो-सीट प्रशिक्षण विमान शामिल हैं।
भारत ने रूस से 'S-400 ट्रायम्फ' दीर्घ-दूरी सतह-से-हवा वायु रक्षा प्रणाली अधिग्रहीत की है, जो एक साथ कई लड़ाकू विमानों, क्रूज़ मिसाइलों व बैलिस्टिक मिसाइलों को 400 किमी तक की दूरी पर ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम है। इसे भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली (Integrated Air Defence) की सबसे शक्तिशाली परत माना जाता है, जो आकाश जैसी स्वदेशी प्रणालियों के साथ मिलकर देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा करती है। इसके साथ ही फ्रांस से अधिग्रहीत 'राफेल (Rafale)' लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की सबसे आधुनिक व शक्तिशाली संपत्तियों में से एक है, जो लंबी दूरी की 'मेटियोर' व 'स्कैल्प' मिसाइलों से लैस होकर हवा व ज़मीन दोनों लक्ष्यों पर सटीक वार करने में सक्षम है।
भारतीय थल सेना का तोपखाना (Artillery) क्षेत्र बीते कुछ वर्षों में एक बड़े आधुनिकीकरण दौर से गुज़रा है — दशकों की पुरानी तोपों की जगह अब स्वदेशी व अत्याधुनिक प्रणालियां ले रही हैं।
| प्रणाली | विवरण |
|---|---|
| K9 वज्र (K9 Vajra) | दक्षिण कोरियाई तकनीक पर आधारित, भारत में लार्सन एंड टूब्रो द्वारा निर्मित स्वचालित ट्रैक्ड होवित्ज़र (Self-Propelled Howitzer) — रेगिस्तानी इलाकों में तैनाती हेतु विशेष रूप से उपयुक्त |
| धनुष तोप (Dhanush Howitzer) | स्वदेशी रूप से उन्नत 155mm/45-कैलिबर टोड होवित्ज़र — बोफोर्स तोप का आधुनिक स्वदेशी संस्करण |
| उन्नत टोड आर्टिलरी गन प्रणाली (ATAGS) | DRDO द्वारा विकसित पूर्णतः स्वदेशी 155mm/52-कैलिबर तोप — विश्व की सबसे लंबी दूरी की टोड आर्टिलरी में से एक, वैश्विक निर्यात की संभावनाओं सहित |
| M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र | अत्यंत हल्की तोप — ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से तेज़ी से पहुंचाई जा सकती है |
परमाणु त्रय (Nuclear Triad) का अर्थ है — परमाणु हथियार को तीन अलग-अलग माध्यमों से दागने की क्षमता: भूमि (मिसाइल), वायु (लड़ाकू विमान) व समुद्र (पनडुब्बी) — ताकि यदि शत्रु एक माध्यम को नष्ट भी कर दे, तो शेष दो माध्यमों से भी 'दूसरा प्रहार (Second Strike)' किया जा सके। भारत की परमाणु त्रय अब पूर्ण रूप से स्थापित हो चुकी है:
| माध्यम | प्रणाली |
|---|---|
| भूमि (Land) | अग्नि व पृथ्वी श्रृंखला की परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलें |
| वायु (Air) | मिराज-2000, सुखोई-30MKI व राफेल जैसे परमाणु-सक्षम लड़ाकू विमान |
| समुद्र (Sea) | अरिहंत श्रेणी की परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN) — INS अरिहंत, INS अरिघात व INS अरिधमान |
1. थल सेना — अर्जुन टैंक, AVNL के बख्तरबंद वाहन व K9 वज्र/धनुष/ATAGS जैसी आधुनिक तोपें प्रमुख हैं। 2. नौसेना — INS विक्रांत (2023, स्वदेशी विमानवाहक पोत), स्कॉर्पीन पनडुब्बियां व अरिहंत श्रेणी SSBN प्रमुख उपलब्धियां हैं। 3. वायु सेना — तेजस Mk1A (₹62,370 करोड़ अनुबंध, 2025), राफेल व AMCA (पांचवीं पीढ़ी, 2034-35 तक) भारत की वायु शक्ति की रीढ़ हैं। 4. S-400 वायु रक्षा प्रणाली भारत की बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा को मज़बूत करती है। 5. भारत की परमाणु त्रय (भूमि-वायु-समुद्र) अब INS अरिहंत/अरिघात/अरिधमान (2026 तक 3 सक्रिय SSBN) से पूर्ण व विश्वसनीय बन चुकी है।
भाग 4: आधुनिक रक्षा तकनीक — ड्रोन, AI, साइबर एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया — यह अभियान भारत के आधुनिक युद्ध-दृष्टिकोण में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस अभियान से मिले अनुभवों के आधार पर भारतीय सेनाएं अब 'मात्रा, किफायत व नेटवर्क-आधारित बुद्धिमत्ता (Mass, Affordability & Networked Intelligence)' के सिद्धांत पर पुनर्गठित हो रही हैं, जहां ड्रोन, उपग्रह, AI, सेंसर, साइबर क्षमता व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध — सभी एक ही एकीकृत युद्ध-तंत्र (Combat Architecture) का हिस्सा बन रहे हैं।
7-10 मई 2025 के 88 घंटे के इस अभियान में भारत ने आक्रामक व रक्षात्मक — दोनों प्रकार के अत्याधुनिक हथियारों का पहली बार वास्तविक युद्ध में सफल परीक्षण किया, जिसने भारत की स्वदेशी व आयातित तकनीक — दोनों की क्षमता को वास्तविक युद्ध-परिस्थिति में सिद्ध कर दिया।
| हथियार/प्रणाली | भूमिका एवं परिणाम |
|---|---|
| ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos) | सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों से 19 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं — युद्ध में इसका यह पहला वास्तविक उपयोग था, जिसने इसे एक 'युद्ध-सिद्ध (Battle-Proven)' रणनीतिक हथियार के रूप में स्थापित किया |
| SCALP/स्टॉर्म शैडो मिसाइल | राफेल लड़ाकू विमानों से 19 SCALP क्रूज़ मिसाइलें दागी गईं — गहराई में स्थित सुरक्षित (Hardened) लक्ष्यों को भेदने में सक्षम स्टील्थ मिसाइल |
| हैमर प्रिसिज़न-गाइडेड म्यूनिशन | राफेल विमानों से सटीक-निर्देशित बम गिराए गए, जिससे लक्ष्यों पर बेहद सटीक वार सुनिश्चित हुआ |
| हैरोप लोइटरिंग म्यूनिशन (Harop) | भारत-इज़राइल की संयुक्त 'आत्मघाती ड्रोन' — लंबे समय तक हवा में मंडराकर गतिशील लक्ष्यों को ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम; युद्ध में पहली बार वास्तविक उपयोग |
| S-400 वायु रक्षा प्रणाली | भारत की वायु रक्षा की सबसे ऊपरी व शक्तिशाली परत — पाकिस्तानी वायुसेना की गतिविधियों की गहराई से निगरानी में निर्णायक भूमिका |
| आकाश एवं MR-SAM (बराक-8) | आकाश (25-45 km, एक साथ 4 लक्ष्य भेदने में सक्षम) व भारत-इज़राइल की संयुक्त MR-SAM (70-100 km) ने ड्रोन, मिसाइल व लड़ाकू विमानों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया |
| आकाशतीर (Akashteer) | BEL द्वारा विकसित स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा नियंत्रण तंत्र — रडार व संचार नेटवर्क को आपस में जोड़कर लगभग 99% ड्रोन/मिसाइल हमलों को रोकने में सफल रहा |
कल्पना कीजिए एक साथ दर्जनों दिशाओं से आ रहे ड्रोन व मिसाइलों को रोकना है — यह किसी एक हथियार का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के तालमेल का काम है। आकाशतीर प्रणाली ने ठीक यही किया — आकाश, MR-SAM व S-400 जैसी अलग-अलग प्रणालियों को आपस में 'बातचीत' करने लायक बनाकर, ताकि वे एक-दूसरे का डेटा साझा कर सकें। नतीजा — पाकिस्तान के लगभग 99% ड्रोन व मिसाइल हमले हवा में ही नष्ट कर दिए गए। यह दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में अकेला हथियार नहीं, बल्कि 'नेटवर्क में जुड़ी सूझ-बूझ' ही असली ताकत है।
अक्टूबर 2025 के परीक्षणों में एक चिंताजनक तथ्य सामने आया — भारत के 46 स्वदेशी ड्रोन निर्माताओं में से कोई भी जैमिंग, स्पूफिंग व सिग्नल-हाइजैकिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध स्थितियों में विश्वसनीय ढंग से काम नहीं कर सका। इस कमज़ोरी को दूर करने हेतु रक्षा मंत्रालय ने IIT कानपुर में ₹500 करोड़ ($52.9 मिलियन) के 'राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी हब' की सैद्धांतिक स्वीकृति दी है, जो स्वदेशी डेटा-लिंक, EO ट्रैकिंग प्रणाली व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध मॉड्यूल विकसित करेगा।
| नई सैन्य संरचना | कार्य |
|---|---|
| भैरव लाइट कमांडो बटालियन | विशिष्ट छापामार क्षमता के साथ ड्रोन-निगरानी को जोड़ने वाली इकाई |
| रुद्र ब्रिगेड | मशीनीकृत पैदल सेना व मानव-रहित हवाई वाहन (UAV) का एकीकरण |
| दिव्यास्त्र बैटरी | आत्मघाती ड्रोन-झुंड (Kamikaze Drone Swarms) व तोपखाने की संयुक्त इकाई |
| शक्तिबाण यूनिट | समर्पित ड्रोन स्ट्राइक इकाई |
मार्च 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को आने वाले वर्षों में 'स्वदेशी ड्रोन विनिर्माण का वैश्विक केंद्र' बनना होगा। इस दिशा में ideaForge, Garuda Aerospace व अदाणी डिफेंस जैसी निजी कंपनियां FPV ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन (मंडराने वाले गोला-बारूद) व स्वार्म तकनीक के विनिर्माण में तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।
आधुनिक युद्ध में AI का उपयोग लक्ष्य पहचान (Target Recognition), सेंसर डेटा विश्लेषण, स्वायत्त निगरानी व निर्णय-सहायता प्रणालियों में हो रहा है। रोबोटिक्स (जैसे बम-निष्क्रियकरण रोबोट व ज़मीनी निगरानी रोबोट) सैनिकों के जोखिम को कम करते हुए जटिल व खतरनाक कार्यों को अंजाम देने में सक्षम बना रहे हैं — यह भारत के व्यापक रक्षा-आधुनिकीकरण अभियान का अभिन्न हिस्सा है।
कल्पना कीजिए दो सेनाएं आमने-सामने हैं, परंतु लड़ाई गोलियों से नहीं, बल्कि रेडियो तरंगों से हो रही है — एक पक्ष दूसरे के ड्रोन का सिग्नल जाम कर उसे रास्ता भटका देता है, तो दूसरा पक्ष शत्रु के रडार को झूठी तस्वीर दिखाकर गुमराह कर देता है। यही इलेक्ट्रॉनिक युद्ध है — जो आंखों से दिखाई नहीं देता, परंतु आधुनिक युद्ध का नतीजा तय कर सकता है।
1. ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) ने भारत की सेनाओं को ड्रोन-AI-साइबर एकीकृत युद्ध-ढांचे की ओर पुनर्गठित करने हेतु प्रेरित किया। 2. ब्रह्मोस (19), SCALP (19), हैमर, हैरोप लोइटरिंग म्यूनिशन आक्रामक हथियार तथा S-400, आकाश, MR-SAM व आकाशतीर (99% सफलता) रक्षात्मक कवच रहे। 3. IIT कानपुर में ₹500 करोड़ का राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन तकनीक हब स्वदेशी EW क्षमता की कमी दूर करेगा। 4. भैरव, रुद्र, दिव्यास्त्र व शक्तिबाण जैसी नई सैन्य संरचनाएं ड्रोन-युद्ध पर केंद्रित हैं। 5. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध व साइबर युद्ध आधुनिक युद्ध के दो अदृश्य परंतु निर्णायक आयाम हैं।
भाग 5: अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी
आधुनिक युद्ध अब केवल थल, जल व वायु तक सीमित नहीं है — अंतरिक्ष अब चौथा व सबसे महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र बन चुका है। भारत ने इसकी अहमियत समझते हुए 'रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency - DSA)' की स्थापना की है, जो तीनों सेनाओं के लिए अंतरिक्ष-आधारित सैन्य क्षमताओं का समन्वय करती है।
भारत के समर्पित सैन्य संचार व निगरानी उपग्रह (जैसे GSAT श्रृंखला के सैन्य संस्करण व कार्टोसैट/RISAT जैसे सुदूर संवेदन उपग्रह) सीमा निगरानी, सामरिक संचार व लक्ष्य-पहचान में उपयोग होते हैं। NavIC (भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली) मिसाइल मार्गदर्शन, सैनिकों की सटीक स्थिति-जानकारी व नौसेना जहाज़ों के नौवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है — यह सामरिक दृष्टि से भारत को विदेशी GPS प्रणालियों पर निर्भरता से मुक्त रखती है।
1. अंतरिक्ष अब युद्ध का चौथा डोमेन है; भारत की रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) इसका समन्वय करती है। 2. सैन्य उपग्रह व NavIC मिसाइल मार्गदर्शन, निगरानी व सैनिकों की सटीक स्थिति-जानकारी में उपयोगी हैं। 3. मिशन शक्ति (2019) — भारत की ASAT क्षमता का प्रदर्शन, विश्व का चौथा ASAT-सक्षम देश।
भाग 6: Make in India एवं आत्मनिर्भरता — रक्षा गलियारे
'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। बीते एक दशक में इसके नतीजे स्पष्ट रूप से दिखते हैं — भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही आयात-निर्भरता भी घटी है — पहले जहां रक्षा उपकरणों की 65-70% आपूर्ति आयात से होती थी, अब लगभग 65% रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर ही निर्मित हो रहे हैं।
रक्षा विनिर्माण में निजी निवेश आकर्षित करने हेतु सरकार ने दो समर्पित रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए हैं:
| गलियारा | फोकस क्षेत्र | निवेश (2026 तक) |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारा | बख्तरबंद वाहन, एयरोस्पेस उपकरण | ₹42,057 करोड़ से अधिक निवेश प्रतिबद्धताएं; दिसंबर 2025 में अकेले $4.2 बिलियन (₹35,000 करोड़) का नया निवेश, लगभग 52,000 रोज़गार सृजन की संभावना |
| तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारा | इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, उन्नत विनिर्माण | ₹32,699 करोड़ की निवेश प्रतिबद्धताएं |
जब उत्तर प्रदेश सरकार ने रक्षा विनिर्माण कंपनियों को 1,142 हेक्टेयर भूमि आवंटित की, तो यह सिर्फ ज़मीन का आवंटन नहीं था — यह हज़ारों युवाओं के लिए नई नौकरियों व भारत के हथियार आयात बिल में कमी की शुरुआत भी थी। रक्षा गलियारे इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत, स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान बन सकती है।
बड़ी कंपनियों के साथ-साथ भारत ने स्टार्टअप्स व नवाचारकर्ताओं को भी रक्षा उत्पादन से जोड़ने हेतु विशेष मंच बनाए हैं:
1. रक्षा उत्पादन ₹46,429 करोड़ (2014-15) से बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ (2025-26) — आयात-निर्भरता 65-70% से घटकर लगभग 35% रह गई। 2. उत्तर प्रदेश (बख्तरबंद वाहन/एयरोस्पेस, ₹42,057+ करोड़ निवेश) व तमिलनाडु (इलेक्ट्रॉनिक्स, ₹32,699 करोड़) रक्षा गलियारे प्रमुख हैं। 3. दिसंबर 2025 में UP गलियारे में अकेले $4.2 बिलियन का नया निवेश आया, जिससे लगभग 52,000 रोज़गार सृजित होंगे। 4. iDEX (स्टार्टअप नवाचार), SRIJAN पोर्टल (आयात प्रतिस्थापन) व सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां आत्मनिर्भरता को संस्थागत रूप देती हैं।
भाग 7: रक्षा निर्यात एवं भारत की वैश्विक स्थिति
भारत, जो कभी विश्व के सबसे बड़े हथियार आयातकों में गिना जाता था, अब एक उभरता हुआ रक्षा निर्यातक बन चुका है — यह भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी यात्रा की सबसे प्रेरक कहानियों में से एक है।
| आधार | आंकड़ा |
|---|---|
| निर्यात वृद्धि | ₹686 करोड़ (2013-14) से बढ़कर ₹38,424 करोड़ (2025-26) — 12 वर्षों में 5,500% से अधिक की वृद्धि |
| निर्यात गंतव्य देश | भारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं |
| भविष्य का लक्ष्य | 2029 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य |
| प्रमुख निर्यात उत्पाद | ब्रह्मोस मिसाइल (फिलीपींस को निर्यात), आकाश वायु रक्षा प्रणाली, तोपें, राडार, बुलेटप्रूफ जैकेट व सैन्य वाहन |
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का फिलीपींस को निर्यात होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय मानी जा रही है। यह वृद्धि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, DPSU के आधुनिकीकरण व सरकार की सतत नीतिगत सहायता का परिणाम है।
1. रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ (2013-14) से बढ़कर ₹38,424 करोड़ (2025-26) — 5,500%+ वृद्धि, 80+ देशों को निर्यात। 2. 2029 तक ₹50,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य; ब्रह्मोस मिसाइल जैसे उत्पाद वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रहे हैं।
भाग 8: चुनौतियां एवं उभरते रुझान
हाइपरसोनिक हथियार वे हैं, जो ध्वनि की गति से 5 गुना (Mach 5+) या उससे अधिक तेज़ उड़ते हैं, तथा उड़ान के दौरान अपनी दिशा भी बदल सकते हैं — जिससे उन्हें रोकना पारंपरिक मिसाइल-रोधी प्रणालियों के लिए अत्यंत कठिन हो जाता है। जैसा भाग 2 में देखा, भारत का ET-LDHCM (Mach 8, प्रोजेक्ट विष्णु) इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। अमेरिका, रूस व चीन के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो रहा है, जो हाइपरसोनिक तकनीक में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन गोली या मिसाइल की बजाय केंद्रित ऊर्जा किरण (लेज़र) से लक्ष्य को नष्ट करते हैं — इनकी सबसे बड़ी खासियत है 'लगभग शून्य लागत प्रति फायर', क्योंकि इन्हें बार-बार गोला-बारूद की आवश्यकता नहीं होती।
क्वांटम तकनीक रक्षा क्षेत्र में क्वांटम-सुरक्षित संचार (जिसे कोई भी बीच में पढ़ नहीं सकता), क्वांटम राडार (जो स्टील्थ विमानों को भी पहचान सकता है, सैद्धांतिक रूप से) व क्वांटम-आधारित नौवहन प्रणालियों (जो GPS जैम होने पर भी सटीक स्थिति बता सकें) की दिशा में विकसित हो रही है। भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन तथा DRDO की प्रयोगशालाएं इस क्षेत्र में शोध कर रही हैं, जो अगले दशक में भारत की सामरिक संचार सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जा सकती है।
1. हाइपरसोनिक हथियार (Mach 5+, दिशा-परिवर्तनशील) पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती हैं — भारत का ET-LDHCM (Mach 8) इसी दिशा में प्रगति है। 2. DURGA-II (100 kW लेज़र, नौसेना परीक्षण 2026) भारत को DEW-सक्षम चुनिंदा देशों में शामिल करता है। 3. क्वांटम तकनीक भविष्य में संचार सुरक्षा, राडार व नौवहन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
भाग 9: भारत की रक्षा नीति, राजस्थान का योगदान एवं भविष्य
दिसंबर 2019 में भारत ने पहली बार 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defence Staff - CDS)' का पद सृजित किया, जो थल, जल व वायु — तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल (Jointness) सुनिश्चित करने वाला सर्वोच्च सैन्य पद है। CDS का सबसे बड़ा व चुनौतीपूर्ण दायित्व है — 'एकीकृत थियेटर कमान (Integrated Theatre Command)' का गठन, जिसमें तीनों सेनाओं की इकाइयों को अलग-अलग रखने के बजाय, एक ही भौगोलिक क्षेत्र (थियेटर) के लिए एक साझा एकीकृत कमान के अधीन रखा जाएगा — जैसे अमेरिका व चीन जैसी बड़ी सैन्य शक्तियों में पहले से प्रचलित है।
नवीनतम स्थिति (मई 2026): 9 मई 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एन.एस. राजा सुब्रमणि ने भारत के नए CDS का पदभार ग्रहण किया, जिनका स्पष्ट मैंडेट थियेटराइज़ेशन को गति देना है। अप्रैल 2026 तक तीनों प्रस्तावित थियेटर कमानों की व्यापक नेतृत्व संरचना अंतिम रूप ले चुकी थी तथा प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा जा चुका है — यह भारतीय सैन्य इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार माना जा रहा है।
जैसा हुक-स्टोरी में देखा, राजस्थान का पोखरण (जैसलमेर ज़िला) भारत के परमाणु व मिसाइल परीक्षण इतिहास का केंद्र-बिंदु रहा है — 1974 (स्माइलिंग बुद्धा) व 1998 (पोखरण-II, पांच परमाणु परीक्षण) की ऐतिहासिक घटनाएं यहीं घटीं। आज भी पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज भारत की नई पीढ़ी के हथियारों के परीक्षण का प्रमुख केंद्र है — यहां हाल ही में 'नाग Mk2' एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल फील्ड मूल्यांकन किया गया। इसके अलावा भारतीय सेना द्वारा पोखरण सहित देश के कई फायरिंग रेंज पर अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों (ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण सहित) के बड़े पैमाने पर परीक्षण नियमित रूप से किए जाते हैं।
भारत की रक्षा नीति अब तीन स्पष्ट स्तंभों पर टिकी है — आत्मनिर्भरता (स्वदेशी उत्पादन व निर्यात), आधुनिकीकरण (AI, ड्रोन, हाइपरसोनिक व DEW जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकें) तथा वैश्विक भागीदारी (निर्यात व सामरिक साझेदारी)। आने वाले वर्षों में AMCA जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, स्वदेशी विमानवाहक पोत, हाइपरसोनिक मिसाइल व लेज़र हथियार भारत को क्षेत्रीय शक्ति से वैश्विक रक्षा-तकनीकी शक्ति में बदल सकते हैं — बशर्ते इंजन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता भी उतनी ही तेज़ी से हासिल की जाए, जितनी तेज़ी से मिसाइल व सॉफ्टवेयर क्षेत्र में हुई है। CDS के नेतृत्व में जारी थियेटराइज़ेशन सुधार इस पूरी रणनीति को संस्थागत रूप से एकीकृत करने की कड़ी है।
1. CDS (2019 से स्थापित पद; मई 2026 से ले. जनरल राजा सुब्रमणि) एकीकृत थियेटर कमान गठन का नेतृत्व कर रहे हैं — भारतीय सैन्य इतिहास का सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार। 2. राजस्थान का पोखरण (जैसलमेर) — 1974 व 1998 के परमाणु परीक्षणों का केंद्र, आज भी मिसाइल/हथियार परीक्षण का प्रमुख फील्ड फायरिंग रेंज है। 3. भारत की रक्षा नीति के तीन स्तंभ — आत्मनिर्भरता, आधुनिकीकरण व वैश्विक भागीदारी। 4. भविष्य — AMCA, स्वदेशी विमानवाहक पोत, हाइपरसोनिक हथियार व DEW भारत को वैश्विक रक्षा-तकनीकी शक्ति बना सकते हैं।
भाग 10: रक्षा अधिग्रहण परिषद, मिसाइल वर्गीकरण एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली
DAC भारतीय रक्षा मंत्रालय में सर्वोच्च खरीद निर्णय निकाय (Highest Decision-Making Body) है, जिसकी स्थापना 2001 में कारगिल युद्ध के बाद गठित मंत्री समूह (GoM) की सिफारिश पर हुई थी।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अध्यक्ष | रक्षा मंत्री (Defence Minister) |
| सदस्य | CDS, थलसेना/वायुसेना/नौसेना प्रमुख |
| LTIPP | 15 वर्षीय Long Term Integrated Perspective Plan अनुमोदित करता है |
| श्रेणियां | Buy | Buy & Make | Make — इन श्रेणियों में खरीद प्रस्ताव वर्गीकृत करता है |
| ऑफसेट | ₹2,000 करोड़ से अधिक की खरीद में ऑफसेट प्रावधान निर्धारित करता है |
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद की सिफारिश सर्वप्रथम 2001 में GoM ने तथा पुनः 2012 में नरेश चंद्र समिति ने की थी, परंतु पद का वास्तविक सृजन 2019 में हुआ — पहले CDS जनरल बिपिन रावत बने। CDS ही रक्षा मंत्री को एकमात्र सैन्य सलाह देने वाला अधिकारी है, DMA विभाग का प्रमुख है तथा NCA (Nuclear Command Authority) का सलाहकार भी है।
मिसाइल एक पायलटरहित, स्वचालित, लक्ष्य-आधारित हथियार तंत्र है जो युद्ध-भार (Warhead) को निश्चित लक्ष्य तक पहुंचाता है। इसके पांच प्रमुख घटक हैं — गाइडेंस सिस्टम (GPS/Radar/IR/Laser से निर्देशन), वारहेड (विस्फोटक/परमाणु/रासायनिक पेलोड), ईंधन टैंक (ठोस/तरल/क्रायोजेनिक), प्रणोदन (रॉकेट बूस्टर/जेट/रैमजेट/स्क्रैमजेट) व Wings-Fins (उड़ान नियंत्रण)।
भारत का मिसाइल कार्यक्रम 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू हुए 'एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP)' से आकार लेना शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य DRDO के तहत भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था।
याद रखने की ट्रिक — PATNA: IGMDP के तहत विकसित पांच मूल मिसाइलें याद रखने हेतु ट्रिक: "PATNA" — Prithvi, Agni, Trishul, Nag, Akash।
मिसाइलों को परास, प्रक्षेपण मोड, गति व गाइडेंस प्रणाली — चार आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है, जो RAS परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला बिंदु है:
| श्रेणी (परास के आधार पर) | परास | उदाहरण |
|---|---|---|
| Short Range (SRBM) | < 1,000 km | पृथ्वी-I/II, प्रहार, K-15, शौर्य, प्रलय |
| Medium Range (MRBM) | 1,000–3,000 km | अग्नि-I, अग्नि-II, K-4 |
| Intermediate Range (IRBM) | 3,000–5,500 km | अग्नि-III, अग्नि-IV |
| Intercontinental (ICBM) | > 5,500 km | अग्नि-V/VI, सूर्य (निर्माणाधीन) |
| लॉन्च मोड | पूर्ण रूप | उदाहरण |
|---|---|---|
| S2S | Surface to Surface | पृथ्वी, अग्नि, प्रहार, शौर्य |
| S2A | Surface to Air | आकाश, त्रिशूल, बराक, QRSAM, MRSAM |
| A2A | Air to Air | अस्त्र, ब्रह्मोस (हवाई संस्करण) |
| A2S | Air to Surface | रुद्रम (Anti-Radiation), HAMMER, SCALP |
| W2S | Water to Surface (SLBM) | सागरिका K-15, K-4 |
| W2W | Water to Water | ब्रह्मोस (नौसेना संस्करण) |
| गति श्रेणी | गति (Mach) | उदाहरण |
|---|---|---|
| Subsonic (सबसोनिक) | < 1 Mach | निर्भय (0.7–0.8 Mach) |
| Supersonic (सुपरसोनिक) | 1–5 Mach | ब्रह्मोस (~3 Mach), आकाश, अस्त्र |
| Hypersonic (हाइपरसोनिक) | > 5 Mach | शौर्य (7.5 Mach), ब्रह्मोस-II व ET-LDHCM (7-8 Mach) |
| गाइडेंस प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| RADAR आधारित | आकाश (राजेन्द्र रडार) |
| Laser आधारित | LAHAT, सुदर्शन बम |
| Infrared (IR) आधारित | नाग, HELINA |
| GPS आधारित | अग्नि श्रृंखला, ब्रह्मोस |
| TERCOM/INS आधारित | क्रूज मिसाइलें — इलाके का नक्शा पढ़कर उड़ती हैं |
| मिसाइल | श्रेणी | परास | पेलोड/विशेषता |
|---|---|---|---|
| Agni-I | MRBM | 700–1,200 km | 1,000 kg; एकल चरण |
| Agni-II | MRBM | 1,500–2,500 km | 1,000 kg; दो चरण |
| Agni-III | IRBM | 3,000–3,500 km | 1,500 kg |
| Agni-IV | IRBM | 3,000–4,000 km | 800 kg; उन्नत नेविगेशन |
| Agni-V | ICBM | 5,000–5,500 km | 1,500 kg; MIRV क्षमता |
| Agni-VI | ICBM | 8,000+ km | 3,000+ kg; निर्माणाधीन, MIRV |
| Agni-P | MRBM | 1,000–2,000 km | ~1,000 kg; कनस्तरीकृत, उन्नत |
भारत अमेरिका, रूस व इज़राइल के बाद मिसाइल रक्षा प्रणाली (Ballistic Missile Defence) विकसित करने वाला विश्व का चौथा देश है। भारत की द्विस्तरीय BMD प्रणाली इस प्रकार है:
| प्रणाली | स्तर/ऊंचाई | विशेषता |
|---|---|---|
| PAD / प्रद्युम्न | Exo-atmospheric — 50-80 km (300-2,000 km रेंज) | बाह्य वायुमंडल में रोकता है; 5 Mach गति |
| AAD / अश्विन | Endo-atmospheric — 15-30 km | अंतः वायुमंडल में रोकता है |
| PDV (Prithvi Defence Vehicle) | Exo-atmospheric — 150 km ऊंचाई | PAD का उन्नत संस्करण |
| PDV Mk-2 / ASAT | Exo-atmospheric — कक्षा तक | उपग्रह एवं मिसाइल दोनों रोक सकता है |
| AD-1 (चरण-2) | दोहरा — Endo+Exo | 5,000 km तक की मिसाइलें रोकेगा (विकासाधीन) |
| AD-2 (चरण-2) | उच्च परास | भविष्य की प्रणाली — उच्चतर परास |
इसके साथ ही कई सतह-से-हवा (SAM) प्रणालियां भारत के बहु-स्तरीय वायु रक्षा तंत्र का हिस्सा हैं:
| SAM प्रणाली | परास | विशेषता |
|---|---|---|
| QRSAM | 5–30 km | Quick Reaction SAM; एकल चरण; ठोस ईंधन; वायु रक्षा |
| MRSAM (बराक-8) | 70 km | भारत-इज़राइल संयुक्त; उच्च प्रतिक्रिया; सभी हवाई खतरे |
| Project KUSHA | 350 km | स्वदेशी LRSAM; 2028-29 तक तैनाती; स्टील्थ व क्रूज़ भी रोके |
| S-400 Triumf | 400 km | रूस से आयातित; विमान, UAV, क्रूज़, बैलिस्टिक — सब रोके |
| NASAMS-II | — | अमेरिकी प्रणाली; क्रूज़, विमान, ड्रोन रोधी |
| Iron Dome | ~70 km | इज़राइली; अल्प-परास; उच्च अवरोधन दर |
| प्रमुख रडार प्रणाली | विशेषता/उपयोग |
|---|---|
| Swordfish RADAR | बैलिस्टिक मिसाइल डिटेक्शन व ट्रैकिंग; दीर्घ परास |
| राजेन्द्र रडार | आकाश मिसाइल के लिए Fire Control Radar |
| रोहिणी / Arudhra | वायुसेना हवाई निगरानी रडार |
| NETRA (AEW&C) | Airborne Early Warning & Control — निगरानी, ट्रैकिंग, कमांड |
| AWACS | Airborne Warning and Control System — उड़ान रडार |
| Over-the-Horizon (OTH) | HF तरंगें आयनमंडल से उछालकर हज़ारों km दूर तक डिटेक्शन |
1. DAC (2001, कारगिल-पश्चात GoM सिफारिश) — रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में सर्वोच्च खरीद निकाय; LTIPP व Buy/Buy&Make/Make श्रेणियां तय करता है। 2. CDS सिफारिश 2001 (GoM) व 2012 (नरेश चंद्र समिति) में हुई थी, परंतु पद 2019 में सृजित हुआ। 3. मिसाइलों का वर्गीकरण — परास (SRBM/MRBM/IRBM/ICBM), लॉन्च मोड (S2S/S2A/A2A/A2S/W2S/W2W), गति (Subsonic/Supersonic/Hypersonic) व गाइडेंस — चार आधार हैं। IGMDP ट्रिक: PATNA। 4. भारत की द्विस्तरीय BMD — PAD/प्रद्युम्न, AAD/अश्विन, PDV, PDV Mk-2/ASAT (चरण-1) व AD-1/AD-2 (चरण-2, विकासाधीन) — भारत को विश्व का चौथा BMD-सक्षम देश बनाती है। 5. QRSAM, MRSAM, Project KUSHA, S-400, NASAMS-II व Iron Dome भारत की बहु-स्तरीय SAM ढाल हैं; Swordfish, राजेन्द्र, रोहिणी/Arudhra, NETRA व AWACS प्रमुख रडार हैं।
भाग 11: प्रमुख टैंक, लड़ाकू विमान एवं थलसेना-वायुसेना उपकरण
| नाम | मूल/वर्ष | प्रकार | विशेषता |
|---|---|---|---|
| अजेय (Ajeya) | रूस (T-72) — 1980 | MBT | आयातित; रूसी T-72 आधारित |
| भीष्म (Bhishma) | रूस (T-90) — 2001 | MBT | आयातित; T-90S आधारित |
| अर्जुन (Arjun) | DRDO — 2004 | MBT (स्वदेशी) | 120mm राइफल्ड गन; Arjun MK-1A उन्नत |
| अभय (Abhay) | DRDO | IFV/तोप | Infantry Fighting Vehicle; 400 km रेंज |
| कर्ण (Karna) | DRDO | युद्धक टैंक | — |
| मंत्रा (Mantra) | भारत | मानवरहित | भारत का पहला मानवरहित टैंक |
| हथियार | विशेषता |
|---|---|
| पिनाका MBRL | Multi Barrel Rocket Launcher; 44 सेकंड में 12 रॉकेट; DRDO विकसित; स्वदेशी |
| KALI-500 | BARC द्वारा विकसित; लेज़र हथियार; विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम नष्ट करता है |
| दक्ष (Daksh) | DRDO रोबोट; IED पहचान, परमाणु/रासायनिक निगरानी, EOD, खोज-बचाव |
| पीढ़ी | विमान | मूल | विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1st Gen | MiG-21 | रूस | सुपरसोनिक; वायु रक्षा व जमीनी हमला |
| 2nd Gen | MiG-29 | रूस | Twin-engine; A2A + A2G; अत्यधिक गतिशीलता |
| 3rd Gen | Su-30 MKI | रूस-भारत | Multi-role Air Superiority; उन्नत एवियोनिक्स |
| 3rd Gen | Jaguar | फ्रांस-ब्रिटेन | Ground Attack; Strike Missions |
| 4th Gen | Dassault Rafale | फ्रांस | Multi-role; परमाणु क्षमता; SCALP/HAMMER से लैस; सर्वोत्कृष्ट एवियोनिक्स |
| 4th Gen | HAL Tejas | HAL/DRDO | स्वदेशी; हल्का; Single Engine; MiG-21 का विकल्प; Mk-2 विकासाधीन |
| Next Gen | F/A-18 Super Hornet | USA | प्रस्तावित; Multi-role |
| Next Gen | Eurofighter Typhoon | यूरोप | प्रस्तावित; अत्यधिक उन्नत |
| वायुयान | उपयोग/विशेषता |
|---|---|
| HAL ध्रुव (ALH) | Advanced Light Helicopter; परिवहन; HAL निर्मित |
| HAL रुद्र | सशस्त्र ALH; नाग + अस्त्र मिसाइल; आक्रमण हेलीकॉप्टर |
| C-130J Hercules | USA; सामरिक परिवहन; विशेष अभियान |
| C-17 Globemaster III | USA; भारी सामरिक एयरलिफ्ट; बड़े कार्गो |
| Ilyushin IL-76 | रूस; भारी सैन्य परिवहन विमान |
| Dornier-228 | समुद्री गश्त, निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण, SAR, MEDEVAC |
| Mirage-2000 | फ्रांस; वायु रक्षा; परमाणु क्षमता; कारगिल में प्रयुक्त |
1. अर्जुन (स्वदेशी MBT, 120mm गन), भीष्म (T-90) व अजेय (T-72) भारत के प्रमुख टैंक हैं; मंत्रा भारत का पहला मानवरहित टैंक है। 2. पिनाका MBRL, KALI-500 लेज़र हथियार व दक्ष रोबोट थलसेना की विशेष क्षमताएं हैं। 3. लड़ाकू विमानों का पीढ़ीवार वर्गीकरण — MiG-21 (1st) से लेकर राफेल/तेजस (4th) व F/A-18/Eurofighter (Next Gen प्रस्तावित) तक फैला है। 4. HAL ध्रुव/रुद्र हेलीकॉप्टर, C-130J/C-17/IL-76 भारी परिवहन विमान व Mirage-2000/Dornier-228 भारत के विविध वायुयान बेड़े का हिस्सा हैं।
भाग 12: विमान वाहक पोत, पनडुब्बी एवं नौसैनिक बल
| सेना | कर्मी (लगभग) | संरचना/विशेषता |
|---|---|---|
| थलसेना (Indian Army) | 13-14 लाख | 6 ऑपरेशनल + 1 ट्रेनिंग कमांड |
| वायुसेना (Indian Air Force) | 1.27 लाख | 5 ऑपरेशनल + 1 ट्रेनिंग + 1 मेंटेनेंस कमांड |
| नौसेना (Indian Navy) | 58,000+ | Blue Water Navy — महासागरों में शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता |
| नौसेना प्रकार | परिभाषा |
|---|---|
| Blue Water Navy | विशाल समुद्री क्षेत्रों में शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता — समुद्री सीमा से बहुत दूर तक; भारत Blue Water Navy है |
| Brown Water Force | केवल तटीय क्षेत्र तक सीमित नौसैनिक शक्ति |
| Green Water Force | तटीय जल (Littoral Waters) में शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता |
| बिंदु | INS विक्रमादित्य | INS विक्रांत |
|---|---|---|
| उत्पत्ति | रूसी Admiral Gorshkov — रूपांतरित | स्वदेशी (Cochin Shipyard); 76% स्वदेशी सामग्री |
| आकार | 285m लंबा × 60m चौड़ा × 60m ऊंचा | 262m × 62m |
| कर्मी | 1,600+ — 'Floating City' उपनाम | ~1,700 |
| विमान | 30+ MiG-29K, Sea Harrier, Kamov-31/28, ALH-Dhruv | 30 MiG-29K, Kamov-31, MH-60R, ALH, LCA Navy |
| Landing | LUNA (MiG) + DAPS (Sea Harrier) | STOBAR — Ski-Jump + Arrester Wires |
| पोत/प्रोजेक्ट | वर्ष | विशेषता |
|---|---|---|
| INS Astradharini | 2015 | Torpedo Launch/Recovery Vessel; 95% स्वदेशी; IIT खड़गपुर-NSTL डिज़ाइन |
| INS Kavaratti | 2015 | Kamorta Class ASW Stealth Corvette; 90% स्वदेशी; GRSE कोलकाता; Project 28 |
| Project 17A (P17A) | जारी | 7 Guided Missile Frigates; 75% स्वदेशी; MDSL+GRSE; शिवालिक का उन्नत रूप (INS निलगिरि आदि) |
| Project 15B (P15B) | जारी | 4 उन्नत Guided Missile Destroyers; 75% स्वदेशी; INS विशाखापत्तनम, मोरमुगाओ, इंफाल, सूरत |
2021 से तीन Joint Logistic Nodes (JLN) — मुंबई, गुवाहाटी व पोर्ट ब्लेयर में स्थापित किए गए हैं, जो तीनों सेनाओं के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक समर्थन (गोला-बारूद, राशन, ईंधन, इंजीनियरिंग) प्रदान करते हैं।
भारत के पास वर्तमान में 15 पारंपरिक डीजल-विद्युत (SSK) एवं 3+ परमाणु बैलिस्टिक (SSBN) पनडुब्बियां हैं।
| प्रकार | संक्षिप्त | विवरण |
|---|---|---|
| डीजल-विद्युत | SSK | डीजल इंजन से विद्युत; बार-बार सतह पर आना पड़ता है; ध्वनि-संवेदनशील |
| परमाणु हमला | SSN | अनिश्चित काल तक पानी में रह सकती है; टारपीडो + क्रूज़ मिसाइल |
| परमाणु बैलिस्टिक | SSBN | परमाणु हथियार लॉन्च मंच; परमाणु त्रिशक्ति का अंग |
| पनडुब्बी/श्रेणी | मूल | विवरण |
|---|---|---|
| INS अरिहंत | स्वदेशी (2016) | भारत की पहली SSBN; K-15 SLBM से लैस; 'No First Use' नीति |
| INS अरिघात | स्वदेशी (2024) | दूसरी SSBN; परमाणु निवारक क्षमता को मज़बूती |
| INS चक्र (Akula Class) | रूस (2012-22) | लीज़ पर SSN; 2022 में वापस; Akula-II श्रेणी |
| कलवरी श्रेणी (Scorpene) | भारत-फ्रांस | Project 75: Kalvari, Khanderi, Karanj, Vela, Vagir, Vagsheer (6 पनडुब्बियां) |
| शिशुमार श्रेणी | जर्मनी | 4 SSK; HDW डिज़ाइन पर आधारित |
| सिंधुघोष (Kilo Class) | USSR/रूस (1984-2000) | 8 SSK; 1984-2000 के बीच खरीदी गईं |
AIP — Air-Independent Propulsion: AIP तकनीक पनडुब्बी को वायुमंडलीय हवा के बिना ऊर्जा उत्पन्न करने देती है — पानी में रहने की अवधि दिनों से हफ्तों तक बढ़ जाती है। Project 75(I) — Project 75 का उन्नत रूप है, जिसमें AIP सिस्टम + Fuel Cells सहित नए SSK निर्माण का प्रावधान है। Nuclear Triad (परमाणु त्रिशक्ति) = विमान + भूमि-आधारित बैलिस्टिक मिसाइल + पनडुब्बी लॉन्च मिसाइल — INS अरिहंत के कमीशन (2016) से भारत की परमाणु त्रिशक्ति पूर्ण हुई।
| प्रकार | विशेषता/उपयोग |
|---|---|
| VTOL (Multi-Rotor) | ऊर्ध्वाधर टेकऑफ/लैंडिंग; Hover क्षमता; Photography, Surveillance, Delivery |
| Fixed-Wing UAV | Runway आवश्यक; उच्च गति, लंबी अवधि; Long-Range Surveillance |
| Loitering Munition | 'कामिकाज़े ड्रोन' — शत्रु क्षेत्र में मंडराकर आत्म-विनाशक प्रहार; एक बार उपयोग |
| MALE UAV | Medium Altitude Long Endurance; ISR + Strike; Predator, Heron |
| UAV नाम | मूल | उपयोग/विशेषता |
|---|---|---|
| NETRA (AEW&C) | DRDO | हवाई निगरानी, लक्ष्य ट्रैकिंग, कमांड-कंट्रोल |
| लक्ष्य (Lakshya) | DRDO | Pilotless Target Aircraft; वायु रक्षा प्रशिक्षण; शत्रु विमान अनुकरण |
| निशांत (Nishant) | DRDO | युद्धक्षेत्र निगरानी, टोह, EW समर्थन |
| रुस्तम-2 | DRDO | Long Endurance MALE UAV; ISR + EW + Strike |
| SWARM Drones | DRDO | Smart War-Fighting Array; समूह में समन्वित हमला |
| Heron | इज़राइल | MALE UAV; ISR, सीमा निगरानी; आपदा प्रबंधन |
| Harpy / Harop | इज़राइल | Loitering Munitions; EW + Precision Strike |
| MQ-9B Predator | USA | MALE UAV; ISR + Strike; भारत ने खरीदी (30 ड्रोन) |
| Sea Guardian | USA | Maritime Surveillance; Anti-Submarine Warfare |
1. तीन सेवाएं — थलसेना (13-14 लाख), वायुसेना (1.27 लाख) व नौसेना (58,000+, Blue Water Navy)। 2. INS विक्रमादित्य (रूपांतरित, LUNA+DAPS) व INS विक्रांत (76% स्वदेशी, STOBAR) भारत के दो विमान वाहक पोत हैं। 3. भारत के पास 15 SSK व 3+ SSBN पनडुब्बियां हैं — INS अरिहंत/अरिघात (स्वदेशी SSBN), कलवरी/शिशुमार/सिंधुघोष श्रेणियां प्रमुख हैं; AIP तकनीक Project 75(I) में उपयोग होगी। 4. UAV — VTOL, Fixed-Wing, Loitering Munition व MALE प्रकार हैं; NETRA, लक्ष्य, निशांत, रुस्तम-2, Heron, Harop व MQ-9B Predator प्रमुख UAV हैं।
भाग 13: रासायनिक-जैविक हथियार एवं अंतर्राष्ट्रीय संधियां
| श्रेणी | उदाहरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| घाव कारक (Blister) | Sulfur Mustard, Nitrogen Mustard | शरीर पर फफोले; सीरिया में प्रयुक्त |
| तंत्रिका कारक (Nerve) | Sarin, Soman, Novichok | तंत्रिका तंत्र नष्ट; मस्तिष्क क्षति |
| दमघोंटू (Choking) | Chlorine, Phosgene | श्वसन नली पर सीधा प्रहार |
| रक्त कारक (Blood) | HCN, Cyanogen Chloride, Arsine | रक्त कोशिकाओं की O₂ परिवहन क्षमता नष्ट |
| वर्ष | संधि/संगठन | विशेषता |
|---|---|---|
| 1925 | Geneva Protocol | रासायनिक हथियारों के प्रयोग पर प्रतिबंध |
| 1992-93 | CWC (Chemical Weapons Convention) | उत्पादन, भंडारण, प्रयोग — सभी पर पूर्ण प्रतिबंध; भारत हस्ताक्षरकर्ता |
| — | OPCW (हेग, नीदरलैंड) | CWC का क्रियान्वयन निकाय; 193 सदस्य; नोबेल पुरस्कार 2013 |
| श्रेणी | खतरा स्तर | उदाहरण |
|---|---|---|
| Category A | सर्वाधिक घातक | Ebola, Plague (प्लेग), Smallpox (चेचक), Anthrax |
| Category B | मध्यम | Ricin Toxin, Brucellosis, Typhus Fever |
| Category C | उभरता खतरा | Nipah, Hanta, Corona (COVID-19) |
| वर्ष | संधि/समूह | विशेषता |
|---|---|---|
| 1972 | BWC (Biological Weapons Convention) | WMD की पहली बहुपक्षीय निःशस्त्रीकरण संधि; 109 सदस्य; भारत हस्ताक्षरकर्ता |
| 1985 | Australia Group (43 सदस्य) | रासायनिक+जैविक हथियारों की तकनीक निर्यात पर प्रतिबंध; भारत 2018 में शामिल |
| संधि/संगठन | वर्ष | भारत की स्थिति | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|
| NPT — परमाणु अप्रसार संधि | 1970 | ❌ हस्ताक्षर नहीं | भेदभावपूर्ण — केवल P5 का एकाधिकार; 191 सदस्य |
| CTBT — व्यापक परीक्षण प्रतिबंध | 1996 | ❌ हस्ताक्षर नहीं | सभी परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध; 187 हस्ताक्षरकर्ता; अभी लागू नहीं |
| TPNW — परमाणु निषेध संधि | 2017 (लागू 2021) | ❌ न हस्ताक्षर, न अनुसमर्थन | परमाणु हथियार रखना भी निषिद्ध |
| MTCR — मिसाइल तकनीक नियंत्रण | 1987 | ✅ 2016 में शामिल | 300 km+/500 kg+ मिसाइल तकनीक हस्तांतरण नियंत्रण; 35 सदस्य |
| NSG — परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह | 1974 | ❌ सदस्य नहीं | 48 देश; NPT न मानने से भारत बाहर |
| BWC — जैविक हथियार | 1972 | ✅ हस्ताक्षरकर्ता | पहली WMD बहुपक्षीय निःशस्त्रीकरण संधि; 109 सदस्य |
| CWC — रासायनिक हथियार | 1993 | ✅ हस्ताक्षरकर्ता | उत्पादन+भंडारण+प्रयोग सब निषिद्ध |
| Wassenaar Arrangement | 1996 | ✅ सदस्य | पारंपरिक हथियार + Dual-Use सामान निर्यात नियंत्रण; 42 सदस्य |
| Australia Group | 1985 | ✅ 2018 में शामिल | रासायनिक+जैविक हथियार तकनीक निर्यात नियंत्रण |
| दिनांक | ऑपरेशन/नाम | विवरण |
|---|---|---|
| 18 मई 1974 | 'Smiling Buddha' (Pokhran-I) | पोखरण, जैसलमेर; DRDO + AEC; भूमिगत परीक्षण |
| 11-13 मई 1998 | 'Operation Shakti' (Pokhran-II) | 5 परीक्षण; भारत परमाणु शक्ति राष्ट्र घोषित |
| क्षेत्र | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| Jointness & Integration | Integrated Theatre Commands (ITC) — भूगोल+कार्य के आधार पर तीनों सेनाओं का एकीकरण |
| ISOs Act 2023 | Inter-Services Organisations Act — त्रि-सेवा कमांडरों को अनुशासन अधिकार; शीघ्र निर्णय |
| FOBS | Fractional Orbital Bombardment System — निम्न पृथ्वी कक्षा से हथियार प्रहार; असीमित परास |
1. रासायनिक हथियार 4 श्रेणी — घाव/तंत्रिका/दमघोंटू/रक्त कारक; Geneva Protocol 1925, CWC 1992-93 (भारत हस्ताक्षरकर्ता), OPCW (नोबेल 2013)। 2. जैविक हथियार Category A/B/C में वर्गीकृत; BWC 1972 पहली WMD निःशस्त्रीकरण संधि है, भारत हस्ताक्षरकर्ता। 3. भारत NPT, CTBT व TPNW पर हस्ताक्षरकर्ता नहीं है (भेदभावपूर्ण मानते हुए), परंतु MTCR (2016), Wassenaar व Australia Group (2018) का सदस्य है। 4. भारत के परमाणु परीक्षण — Smiling Buddha (1974) व Operation Shakti (1998), दोनों पोखरण, राजस्थान में। 5. ISOs Act 2023 व FOBS जैसी नई अवधारणाएं भारत के रक्षा सुधार व वैश्विक हथियार होड़ को दर्शाती हैं।
Q1. DRDO की स्थापना कब हुई तथा इसके अंतर्गत कितनी प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं? Q2. OFB के पुनर्गठन से बनी 7 नई DPSU कंपनियों के नाम बताइए। Q3. अग्नि-V मिसाइल में प्रयुक्त MIRV तकनीक क्या है? Q4. ब्रह्मोस मिसाइल की गति कितनी है तथा यह किन दो देशों की संयुक्त परियोजना है? Q5. ET-LDHCM मिसाइल किस प्रोजेक्ट के तहत विकसित हो रही है तथा इसकी गति क्या है? Q6. नाग, शौर्य, निर्भय व धनुष मिसाइलों में से कौनसी हाइपरसोनिक व परमाणु-सक्षम है? Q7. INS विक्रांत की क्या विशेषता है? Q8. भारत की परमाणु त्रय के तीन माध्यम कौन-कौन से हैं? Q9. अरिहंत श्रेणी की कौनसी पनडुब्बी से दिसंबर 2025 में K-4 मिसाइल का परीक्षण हुआ? Q10. तेजस Mk1A अनुबंध की राशि व विमानों की संख्या बताइए। Q11. ऑपरेशन सिंदूर कब चलाया गया तथा इसका महत्व क्या है? Q12. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने कौन-कौनसी मिसाइलें किन विमानों से दागीं? Q13. आकाशतीर प्रणाली का क्या कार्य है? Q14. मिशन शक्ति क्या है तथा यह कब आयोजित हुआ? Q15. उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु रक्षा गलियारों का फोकस क्षेत्र क्या है? Q16. iDEX व SRIJAN पोर्टल का उद्देश्य क्या है? Q17. भारत के रक्षा निर्यात में पिछले 12 वर्षों में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई है? Q18. DURGA-II क्या है तथा इसकी क्षमता कितनी है? Q19. भारत के वर्तमान CDS कौन हैं तथा वे कब पदस्थ हुए? Q20. राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों की तिथियां व नाम बताइए। Q21. DAC (रक्षा अधिग्रहण परिषद) की स्थापना कब हुई तथा इसके अध्यक्ष कौन होते हैं? Q22. IGMDP के तहत विकसित मिसाइलों को याद रखने की ट्रिक क्या है? Q23. SRBM, MRBM, IRBM व ICBM में मूल अंतर बताइए। Q24. भारत की BMD प्रणाली में PAD व AAD क्या हैं? Q25. MRSAM व Project KUSHA में क्या अंतर है? Q26. INS विक्रमादित्य व INS विक्रांत में कोई तीन अंतर बताइए। Q27. AIP तकनीक क्या है तथा यह पनडुब्बी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? Q28. रासायनिक हथियारों की चार श्रेणियां कौन-कौन सी हैं? Q29. भारत ने कौनसी अंतर्राष्ट्रीय संधियों (NPT/CTBT/MTCR) पर हस्ताक्षर किए हैं और कौनसी पर नहीं? Q30. स्माइलिंग बुद्धा व ऑपरेशन शक्ति में क्या अंतर है?