🛡️ अध्याय 8/10 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

रक्षा प्रौद्योगिकी, मिसाइल कार्यक्रम एवं आधुनिक युद्ध तकनीक

Defence Technology, Missile Programme & Modern Warfare | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
    🌟 क्या आप जानते हैं?

    18 मई 1974 की सुबह, राजस्थान के जैसलमेर ज़िले के पोखरण नामक रेगिस्तानी कस्बे के नीचे, धरती हल्की सी कांपी — भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे 'स्माइलिंग बुद्धा (Smiling Buddha)' नाम दिया गया। ठीक 24 साल बाद, 11-13 मई 1998 को, उसी पोखरण की धरती ने फिर एक बार पूरी दुनिया को चौंका दिया, जब भारत ने पांच परमाणु परीक्षण कर स्वयं को एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित किया। अब कल्पना कीजिए मई 2025 का वह सप्ताह — जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया, और युद्ध का पूरा स्वरूप बदल गया — अब लड़ाई सिर्फ टैंकों व विमानों से नहीं, बल्कि ड्रोन-झुंडों (Drone Swarms), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध व कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी लड़ी जा रही थी। राजस्थान का रेगिस्तान — जहां कभी परमाणु परीक्षण हुए थे — आज भी पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज के रूप में भारत की नई पीढ़ी की मिसाइलों व हथियारों के परीक्षण का केंद्र बना हुआ है। यही है भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी की कहानी — परमाणु धमाकों से लेकर ड्रोन-युद्ध तक — जिसे हम इस अध्याय में विस्तार से समझेंगे।

    भाग 1: रक्षा प्रौद्योगिकी का परिचय एवं भारत की रक्षा अनुसंधान संस्थाएं

    1.1 रक्षा प्रौद्योगिकी का परिचय

    रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) में वे सभी वैज्ञानिक व तकनीकी क्षमताएं शामिल हैं, जो किसी राष्ट्र को अपनी सीमाओं, नागरिकों व हितों की सुरक्षा हेतु उपयोग में लाई जाती हैं — मिसाइल व हथियारों से लेकर उपग्रह, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता व साइबर सुरक्षा तक। किसी भी देश की सामरिक शक्ति आज केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी तकनीकी क्षमता व आत्मनिर्भरता से आंकी जाती है। भारत के लिए यह क्षेत्र दोहरी दृष्टि से महत्वपूर्ण है — एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा, दूसरी तरफ आत्मनिर्भरता व आर्थिक अवसर (रोज़गार, निर्यात, निवेश)।

    1.2 DRDO — भारत की रक्षा अनुसंधान रीढ़

    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation - DRDO) की स्थापना 1958 में हुई थी, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी है। DRDO के देश भर में 50 से अधिक प्रयोगशालाएं व अनुसंधान केंद्र हैं, जो मिसाइल, विमान, नौसेना प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स, सामग्री विज्ञान व जैव-रक्षा सहित विविध क्षेत्रों में कार्य करती हैं।

    1.3 प्रमुख रक्षा उपक्रम — HAL, BEL एवं OFB का पुनर्गठन

    DRDO द्वारा विकसित तकनीकों का वास्तविक उत्पादन सरकारी रक्षा उपक्रमों (Defence PSUs) द्वारा किया जाता है:

    उपक्रमकार्य
    हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)लड़ाकू विमान (तेजस), हेलीकॉप्टर व एयरोस्पेस उपकरणों का डिज़ाइन व निर्माण
    भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)रडार, संचार उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली व सैन्य इलेक्ट्रॉनिक्स
    भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL)मिसाइल प्रणालियों का निर्माण व एकीकरण
    भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML)सैन्य वाहन, इंजीनियरिंग उपकरण व रेल उपकरण निर्माण
    मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL)युद्धपोत व पनडुब्बी निर्माण

    अक्टूबर 2021 में एक बड़ा ऐतिहासिक सुधार हुआ — चार दशक पुराने आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board - OFB) को भंग कर उसकी 41 फैक्ट्रियों को 7 नए सरकारी रक्षा उपक्रमों (DPSU) में पुनर्गठित किया गया, ताकि दक्षता व जवाबदेही बढ़े:

    नया DPSU (2021 पुनर्गठन)विशेषीकृत क्षेत्र
    म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL)गोला-बारूद एवं विस्फोटक
    आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL)बख्तरबंद वाहन (टैंक आदि)
    एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL)हथियार एवं उपकरण
    ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (TCL)सैनिकों हेतु आवश्यक वस्तुएं (वर्दी, उपकरण)
    यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL)सहायक उपकरण एवं पुर्जे
    इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL)ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स (दूरबीन, नाइट विज़न आदि)
    ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL)पैराशूट एवं संबंधित उपकरण
    💡 OFB से 7 DPSU तक — एक बड़ा सुधार

    कल्पना कीजिए एक विशाल, पुरानी सरकारी दुकान जो हर तरह का सामान बेचती हो — जूते से लेकर बर्तन तक — परंतु किसी में भी विशेषज्ञता न हो। अब उसी दुकान को 7 अलग-अलग विशेषीकृत दुकानों में बांट दिया जाए, जहां हर दुकान अपने ही क्षेत्र (जैसे सिर्फ बख्तरबंद वाहन या सिर्फ गोला-बारूद) में माहिर हो — यही भारत सरकार ने OFB के साथ किया। इससे जवाबदेही बढ़ी, उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ व प्रत्येक कंपनी अपने विशेष क्षेत्र में वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा कर सकती है।

    📌 भाग 1 — परिचय एवं संस्थाएं — याद रखने योग्य बिंदु

    1. DRDO (स्थापना 1958) भारत की प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी है, जिसकी 50+ प्रयोगशालाएं हैं। 2. HAL (विमान), BEL (इलेक्ट्रॉनिक्स), BDL (मिसाइल), BEML (वाहन) व MDL (युद्धपोत) प्रमुख रक्षा उपक्रम हैं। 3. अक्टूबर 2021 में OFB को भंग कर 7 नए DPSU बनाए गए — MIL, AVNL, AWEIL, TCL, YIL, IOL व GIL। 4. यह पुनर्गठन दक्षता, जवाबदेही व विशेषज्ञता बढ़ाने हेतु किया गया — रक्षा उत्पादन सुधार का बड़ा कदम।

    भाग 2: मिसाइल एवं सामरिक प्रौद्योगिकी

    2.1 भारत का मिसाइल कार्यक्रम — एक परिचय

    भारत का आधुनिक मिसाइल कार्यक्रम 1983 में शुरू किए गए 'एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (Integrated Guided Missile Development Programme - IGMDP)' से आकार लेना शुरू हुआ, जिसका नेतृत्व डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने किया। इसी कार्यक्रम के तहत पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल व नाग जैसी मिसाइलें विकसित हुईं, जिन्होंने भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाया।

    2.2 अग्नि श्रृंखला — भारत की सामरिक ताकत

    मिसाइलप्रकार एवं मारक क्षमतानवीनतम स्थिति (2025-26)
    अग्नि-V (Agni-V)अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), 5,000+ km मारक क्षमतामई 2026 में MIRV (एक साथ कई स्वतंत्र लक्ष्यों को भेदने वाली) तकनीक का दूसरा परीक्षण सफल — एक ही मिसाइल कई अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बना सकती है
    अग्नि-प्राइम (Agni-Prime)नई पीढ़ी की कैनिस्टरीकृत मध्यम दूरी बैलिस्टिक मिसाइल, 1,000-2,000 km24 सितंबर 2025 को रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से सफल परीक्षण — गतिशीलता व छिपाव क्षमता में भारी वृद्धि
    पृथ्वी-II (Prithvi-II)कम दूरी की सतह-से-सतह बैलिस्टिक मिसाइलनियमित रूप से चांदीपुर से सफल परीक्षण जारी
    💡 MIRV तकनीक — एक तीर से कई निशाने

    सामान्य मिसाइल एक ही लक्ष्य पर एक ही हथियार गिराती है। परंतु 'मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV)' तकनीक से लैस मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग हथियारों को अलग-अलग, दूर-दूर स्थित लक्ष्यों पर सटीक रूप से भेज सकती है — जैसे एक ही तीरंदाज़ एक बार में कई तीर छोड़े, और हर तीर अपने अलग निशाने पर सटीक लगे। मई 2026 में भारत के अग्नि-V मिसाइल का यह परीक्षण दिखाता है कि भारत अब इस अत्यंत जटिल व चुनिंदा देशों के पास मौजूद तकनीक में महारत हासिल कर रहा है।

    2.3 ब्रह्मोस — विश्व की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइल

    ब्रह्मोस (BrahMos), भारत के 'ब्रह्मपुत्र' व रूस की 'मोस्कवा' नदी के नाम पर बनी भारत-रूस संयुक्त सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जो ध्वनि की गति से लगभग 3 गुना (Mach 2.8-3) तेज़ उड़ती है तथा भूमि, समुद्र व वायु — तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है। अब DRDO के 'प्रोजेक्ट विष्णु (Project Vishnu)' के तहत 'विस्तारित प्रक्षेपवक्र दीर्घकालिक हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल (ET-LDHCM)' विकसित की जा रही है, जो ध्वनि की गति से 8 गुना (Mach 8) तेज़ है व 1,500 किमी दूर तक लक्ष्य भेद सकती है — इसे लद्दाख में सफलतापूर्वक परीक्षित किया गया, जो मौजूदा ब्रह्मोस से भी कहीं आगे की तकनीक है।

    2.4 आकाश एवं अस्त्र — वायु रक्षा एवं हवा-से-हवा मिसाइल

    मिसाइलप्रकारनवीनतम विकास
    आकाश प्राइम/NG (Akash Prime/NG)सतह-से-हवा वायु रक्षा मिसाइल, 25-35 km मारक क्षमता16 जुलाई 2025 को लद्दाख के 4,500 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्र में सफल परीक्षण — लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल व ड्रोन को भी निष्क्रिय करने में सक्षम
    अस्त्र Mk-3 (Astra Mk-3)हवा-से-हवा मिसाइल (Air-to-Air Missile)स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर सहित सुखोई-30 लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण — भारत की वायु युद्ध क्षमता में भारी सुधार

    2.5 अन्य प्रमुख मिसाइलें — नाग, शौर्य, निर्भय एवं धनुष

    भारत के मिसाइल शस्त्रागार में अग्नि-ब्रह्मोस-आकाश-अस्त्र के अलावा भी कई महत्वपूर्ण मिसाइलें शामिल हैं, जो अलग-अलग सामरिक ज़रूरतों को पूरा करती हैं:

    मिसाइलप्रकार एवं विशेषता
    नाग (Nag) / हेलिना (Helina)तीसरी पीढ़ी की 'फायर-एंड-फॉरगेट' टैंक-रोधी मिसाइल (Anti-Tank Guided Missile); ज़मीनी संस्करण (NAMICA वाहक से) 0.5-4 km व हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली हेलिना/ध्रुवास्त्र संस्करण 7-10 km मारक क्षमता रखता है
    शौर्य (Shaurya)DRDO द्वारा विकसित हाइपरसोनिक, कैनिस्टर-लॉन्च सतह-से-सतह मिसाइल — 700-800 km मारक क्षमता, Mach 7 गति व उच्च गतिशीलता के साथ एक सशक्त परमाणु प्रतिरोधक
    निर्भय (Nirbhay)भारत की स्वदेशी सबसोनिक (ध्वनि से धीमी गति) क्रूज़ मिसाइल — 1,000+ km मारक क्षमता, एक साथ कई लक्ष्यों को सटीकता से भेदने की क्षमता; वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमित संख्या में तैनात
    धनुष (Dhanush)पृथ्वी मिसाइल से विकसित जहाज़-से-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल — 350 km मारक क्षमता, Mach 2 गति, नौसेना की समुद्री व तटीय लक्ष्यों पर वार करने की क्षमता बढ़ाती है

    📌 भाग 2 — मिसाइल एवं सामरिक प्रौद्योगिकी — याद रखने योग्य बिंदु

    1. भारत का मिसाइल कार्यक्रम 1983 के IGMDP (डॉ. कलाम के नेतृत्व) से शुरू हुआ। 2. अग्नि-V (मई 2026 MIRV परीक्षण) व अग्नि-प्राइम (सितंबर 2025, रेल-मोबाइल) भारत की रणनीतिक ताकत हैं। 3. ब्रह्मोस (Mach 2.8-3) व नया ET-LDHCM हाइपरसोनिक मिसाइल (Mach 8, प्रोजेक्ट विष्णु) भारत की क्रूज़ मिसाइल क्षमता दर्शाते हैं। 4. आकाश प्राइम/NG (जुलाई 2025) वायु रक्षा व अस्त्र Mk-3 हवा-से-हवा युद्ध क्षमता को मज़बूत कर रहे हैं। 5. नाग/हेलिना (टैंक-रोधी), शौर्य (हाइपरसोनिक परमाणु-सक्षम), निर्भय (क्रूज़) व धनुष (नौसैनिक बैलिस्टिक) भारत के विविध मिसाइल शस्त्रागार को पूर्ण करते हैं।

    भाग 3: थल, जल एवं वायु रक्षा प्रणालियां

    3.1 थल सेना — बख्तरबंद वाहन एवं सामरिक शक्ति

    भारतीय थल सेना (Indian Army) की सामरिक शक्ति का आधार अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tank), पैदल सेना लड़ाकू वाहन (Infantry Combat Vehicles) व तोपखाना प्रणालियां (जैसे स्वदेशी 'धनुष' तोप) हैं। AVNL (आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड) अब बख्तरबंद वाहनों के स्वदेशी उत्पादन का नेतृत्व कर रही है, जिससे आयात पर निर्भरता घट रही है।

    3.2 नौसेना — INS विक्रांत एवं समुद्री शक्ति

    भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए वर्ष 2023 एक ऐतिहासिक वर्ष था, जब भारत में निर्मित पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत' नौसेना में शामिल हुआ — इसी वर्ष तेजस के नौसैनिक संस्करण ने सफलतापूर्वक इस पर लैंडिंग की, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जो अपने स्वदेशी विमानवाहक पोत पर स्वदेशी लड़ाकू विमान उतार सकते हैं। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) द्वारा निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां (जैसे INS वागीर, वेला) भी भारत की जल-अंतर्गत सामरिक क्षमता को मज़बूत कर रही हैं।

    3.3 वायु सेना — तेजस एवं भविष्य के लड़ाकू विमान

    हल्का लड़ाकू विमान (Light Combat Aircraft) 'तेजस' भारत की स्वदेशी वैमानिकी क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है। सितंबर 2025 में भारत सरकार ने HAL के साथ 97 तेजस Mk1A विमानों हेतु ₹62,370 करोड़ (लगभग $7.5 बिलियन) का ऐतिहासिक अनुबंध किया, जिसमें 68 सिंगल-सीट लड़ाकू विमान व 29 दो-सीट प्रशिक्षण विमान शामिल हैं।

    🚀 तेजस Mk1A एवं AMCA — भारत की वायु शक्ति का भविष्य स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम | 2025-26 सक्रिय विकास चरण

    3.4 वायु रक्षा प्रणाली — S-400

    भारत ने रूस से 'S-400 ट्रायम्फ' दीर्घ-दूरी सतह-से-हवा वायु रक्षा प्रणाली अधिग्रहीत की है, जो एक साथ कई लड़ाकू विमानों, क्रूज़ मिसाइलों व बैलिस्टिक मिसाइलों को 400 किमी तक की दूरी पर ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम है। इसे भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली (Integrated Air Defence) की सबसे शक्तिशाली परत माना जाता है, जो आकाश जैसी स्वदेशी प्रणालियों के साथ मिलकर देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा करती है। इसके साथ ही फ्रांस से अधिग्रहीत 'राफेल (Rafale)' लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की सबसे आधुनिक व शक्तिशाली संपत्तियों में से एक है, जो लंबी दूरी की 'मेटियोर' व 'स्कैल्प' मिसाइलों से लैस होकर हवा व ज़मीन दोनों लक्ष्यों पर सटीक वार करने में सक्षम है।

    3.5 तोपखाना आधुनिकीकरण — K9 वज्र, धनुष एवं ATAGS

    भारतीय थल सेना का तोपखाना (Artillery) क्षेत्र बीते कुछ वर्षों में एक बड़े आधुनिकीकरण दौर से गुज़रा है — दशकों की पुरानी तोपों की जगह अब स्वदेशी व अत्याधुनिक प्रणालियां ले रही हैं।

    प्रणालीविवरण
    K9 वज्र (K9 Vajra)दक्षिण कोरियाई तकनीक पर आधारित, भारत में लार्सन एंड टूब्रो द्वारा निर्मित स्वचालित ट्रैक्ड होवित्ज़र (Self-Propelled Howitzer) — रेगिस्तानी इलाकों में तैनाती हेतु विशेष रूप से उपयुक्त
    धनुष तोप (Dhanush Howitzer)स्वदेशी रूप से उन्नत 155mm/45-कैलिबर टोड होवित्ज़र — बोफोर्स तोप का आधुनिक स्वदेशी संस्करण
    उन्नत टोड आर्टिलरी गन प्रणाली (ATAGS)DRDO द्वारा विकसित पूर्णतः स्वदेशी 155mm/52-कैलिबर तोप — विश्व की सबसे लंबी दूरी की टोड आर्टिलरी में से एक, वैश्विक निर्यात की संभावनाओं सहित
    M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़रअत्यंत हल्की तोप — ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से तेज़ी से पहुंचाई जा सकती है

    3.6 भारत की परमाणु त्रय (Nuclear Triad) — अरिहंत श्रेणी पनडुब्बियां

    परमाणु त्रय (Nuclear Triad) का अर्थ है — परमाणु हथियार को तीन अलग-अलग माध्यमों से दागने की क्षमता: भूमि (मिसाइल), वायु (लड़ाकू विमान) व समुद्र (पनडुब्बी) — ताकि यदि शत्रु एक माध्यम को नष्ट भी कर दे, तो शेष दो माध्यमों से भी 'दूसरा प्रहार (Second Strike)' किया जा सके। भारत की परमाणु त्रय अब पूर्ण रूप से स्थापित हो चुकी है:

    माध्यमप्रणाली
    भूमि (Land)अग्नि व पृथ्वी श्रृंखला की परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलें
    वायु (Air)मिराज-2000, सुखोई-30MKI व राफेल जैसे परमाणु-सक्षम लड़ाकू विमान
    समुद्र (Sea)अरिहंत श्रेणी की परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN) — INS अरिहंत, INS अरिघात व INS अरिधमान

    🚀 अरिहंत श्रेणी SSBN — भारत की 'अदृश्य ढाल' परमाणु-चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी कार्यक्रम | 2025-26 तेज़ी से विस्तार

    📌 भाग 3 — थल, जल एवं वायु रक्षा प्रणालियां — याद रखने योग्य बिंदु

    1. थल सेना — अर्जुन टैंक, AVNL के बख्तरबंद वाहन व K9 वज्र/धनुष/ATAGS जैसी आधुनिक तोपें प्रमुख हैं। 2. नौसेना — INS विक्रांत (2023, स्वदेशी विमानवाहक पोत), स्कॉर्पीन पनडुब्बियां व अरिहंत श्रेणी SSBN प्रमुख उपलब्धियां हैं। 3. वायु सेना — तेजस Mk1A (₹62,370 करोड़ अनुबंध, 2025), राफेल व AMCA (पांचवीं पीढ़ी, 2034-35 तक) भारत की वायु शक्ति की रीढ़ हैं। 4. S-400 वायु रक्षा प्रणाली भारत की बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा को मज़बूत करती है। 5. भारत की परमाणु त्रय (भूमि-वायु-समुद्र) अब INS अरिहंत/अरिघात/अरिधमान (2026 तक 3 सक्रिय SSBN) से पूर्ण व विश्वसनीय बन चुकी है।

    भाग 4: आधुनिक रक्षा तकनीक — ड्रोन, AI, साइबर एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध

    4.1 ऑपरेशन सिंदूर — आधुनिक युद्ध का नया चेहरा

    मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया — यह अभियान भारत के आधुनिक युद्ध-दृष्टिकोण में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस अभियान से मिले अनुभवों के आधार पर भारतीय सेनाएं अब 'मात्रा, किफायत व नेटवर्क-आधारित बुद्धिमत्ता (Mass, Affordability & Networked Intelligence)' के सिद्धांत पर पुनर्गठित हो रही हैं, जहां ड्रोन, उपग्रह, AI, सेंसर, साइबर क्षमता व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध — सभी एक ही एकीकृत युद्ध-तंत्र (Combat Architecture) का हिस्सा बन रहे हैं।

    4.2 ऑपरेशन सिंदूर में प्रयुक्त प्रमुख हथियार एवं प्रणालियां

    7-10 मई 2025 के 88 घंटे के इस अभियान में भारत ने आक्रामक व रक्षात्मक — दोनों प्रकार के अत्याधुनिक हथियारों का पहली बार वास्तविक युद्ध में सफल परीक्षण किया, जिसने भारत की स्वदेशी व आयातित तकनीक — दोनों की क्षमता को वास्तविक युद्ध-परिस्थिति में सिद्ध कर दिया।

    हथियार/प्रणालीभूमिका एवं परिणाम
    ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos)सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों से 19 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं — युद्ध में इसका यह पहला वास्तविक उपयोग था, जिसने इसे एक 'युद्ध-सिद्ध (Battle-Proven)' रणनीतिक हथियार के रूप में स्थापित किया
    SCALP/स्टॉर्म शैडो मिसाइलराफेल लड़ाकू विमानों से 19 SCALP क्रूज़ मिसाइलें दागी गईं — गहराई में स्थित सुरक्षित (Hardened) लक्ष्यों को भेदने में सक्षम स्टील्थ मिसाइल
    हैमर प्रिसिज़न-गाइडेड म्यूनिशनराफेल विमानों से सटीक-निर्देशित बम गिराए गए, जिससे लक्ष्यों पर बेहद सटीक वार सुनिश्चित हुआ
    हैरोप लोइटरिंग म्यूनिशन (Harop)भारत-इज़राइल की संयुक्त 'आत्मघाती ड्रोन' — लंबे समय तक हवा में मंडराकर गतिशील लक्ष्यों को ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम; युद्ध में पहली बार वास्तविक उपयोग
    S-400 वायु रक्षा प्रणालीभारत की वायु रक्षा की सबसे ऊपरी व शक्तिशाली परत — पाकिस्तानी वायुसेना की गतिविधियों की गहराई से निगरानी में निर्णायक भूमिका
    आकाश एवं MR-SAM (बराक-8)आकाश (25-45 km, एक साथ 4 लक्ष्य भेदने में सक्षम) व भारत-इज़राइल की संयुक्त MR-SAM (70-100 km) ने ड्रोन, मिसाइल व लड़ाकू विमानों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया
    आकाशतीर (Akashteer)BEL द्वारा विकसित स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा नियंत्रण तंत्र — रडार व संचार नेटवर्क को आपस में जोड़कर लगभग 99% ड्रोन/मिसाइल हमलों को रोकने में सफल रहा
    💡 99% सफलता दर — आकाशतीर का कमाल

    कल्पना कीजिए एक साथ दर्जनों दिशाओं से आ रहे ड्रोन व मिसाइलों को रोकना है — यह किसी एक हथियार का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के तालमेल का काम है। आकाशतीर प्रणाली ने ठीक यही किया — आकाश, MR-SAM व S-400 जैसी अलग-अलग प्रणालियों को आपस में 'बातचीत' करने लायक बनाकर, ताकि वे एक-दूसरे का डेटा साझा कर सकें। नतीजा — पाकिस्तान के लगभग 99% ड्रोन व मिसाइल हमले हवा में ही नष्ट कर दिए गए। यह दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में अकेला हथियार नहीं, बल्कि 'नेटवर्क में जुड़ी सूझ-बूझ' ही असली ताकत है।

    4.3 ड्रोन तकनीक एवं नई सैन्य संरचनाएं

    अक्टूबर 2025 के परीक्षणों में एक चिंताजनक तथ्य सामने आया — भारत के 46 स्वदेशी ड्रोन निर्माताओं में से कोई भी जैमिंग, स्पूफिंग व सिग्नल-हाइजैकिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध स्थितियों में विश्वसनीय ढंग से काम नहीं कर सका। इस कमज़ोरी को दूर करने हेतु रक्षा मंत्रालय ने IIT कानपुर में ₹500 करोड़ ($52.9 मिलियन) के 'राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी हब' की सैद्धांतिक स्वीकृति दी है, जो स्वदेशी डेटा-लिंक, EO ट्रैकिंग प्रणाली व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध मॉड्यूल विकसित करेगा।

    नई सैन्य संरचनाकार्य
    भैरव लाइट कमांडो बटालियनविशिष्ट छापामार क्षमता के साथ ड्रोन-निगरानी को जोड़ने वाली इकाई
    रुद्र ब्रिगेडमशीनीकृत पैदल सेना व मानव-रहित हवाई वाहन (UAV) का एकीकरण
    दिव्यास्त्र बैटरीआत्मघाती ड्रोन-झुंड (Kamikaze Drone Swarms) व तोपखाने की संयुक्त इकाई
    शक्तिबाण यूनिटसमर्पित ड्रोन स्ट्राइक इकाई

    मार्च 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को आने वाले वर्षों में 'स्वदेशी ड्रोन विनिर्माण का वैश्विक केंद्र' बनना होगा। इस दिशा में ideaForge, Garuda Aerospace व अदाणी डिफेंस जैसी निजी कंपनियां FPV ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन (मंडराने वाले गोला-बारूद) व स्वार्म तकनीक के विनिर्माण में तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।

    4.4 कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं रोबोटिक्स का सैन्य उपयोग

    आधुनिक युद्ध में AI का उपयोग लक्ष्य पहचान (Target Recognition), सेंसर डेटा विश्लेषण, स्वायत्त निगरानी व निर्णय-सहायता प्रणालियों में हो रहा है। रोबोटिक्स (जैसे बम-निष्क्रियकरण रोबोट व ज़मीनी निगरानी रोबोट) सैनिकों के जोखिम को कम करते हुए जटिल व खतरनाक कार्यों को अंजाम देने में सक्षम बना रहे हैं — यह भारत के व्यापक रक्षा-आधुनिकीकरण अभियान का अभिन्न हिस्सा है।

    4.5 इलेक्ट्रॉनिक युद्ध एवं साइबर युद्ध

    💡 इलेक्ट्रॉनिक युद्ध — अदृश्य लड़ाई

    कल्पना कीजिए दो सेनाएं आमने-सामने हैं, परंतु लड़ाई गोलियों से नहीं, बल्कि रेडियो तरंगों से हो रही है — एक पक्ष दूसरे के ड्रोन का सिग्नल जाम कर उसे रास्ता भटका देता है, तो दूसरा पक्ष शत्रु के रडार को झूठी तस्वीर दिखाकर गुमराह कर देता है। यही इलेक्ट्रॉनिक युद्ध है — जो आंखों से दिखाई नहीं देता, परंतु आधुनिक युद्ध का नतीजा तय कर सकता है।

    📌 भाग 4 — आधुनिक रक्षा तकनीक — याद रखने योग्य बिंदु

    1. ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) ने भारत की सेनाओं को ड्रोन-AI-साइबर एकीकृत युद्ध-ढांचे की ओर पुनर्गठित करने हेतु प्रेरित किया। 2. ब्रह्मोस (19), SCALP (19), हैमर, हैरोप लोइटरिंग म्यूनिशन आक्रामक हथियार तथा S-400, आकाश, MR-SAM व आकाशतीर (99% सफलता) रक्षात्मक कवच रहे। 3. IIT कानपुर में ₹500 करोड़ का राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन तकनीक हब स्वदेशी EW क्षमता की कमी दूर करेगा। 4. भैरव, रुद्र, दिव्यास्त्र व शक्तिबाण जैसी नई सैन्य संरचनाएं ड्रोन-युद्ध पर केंद्रित हैं। 5. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध व साइबर युद्ध आधुनिक युद्ध के दो अदृश्य परंतु निर्णायक आयाम हैं।

    भाग 5: अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी

    5.1 अंतरिक्ष — युद्ध का चौथा क्षेत्र (Domain)

    आधुनिक युद्ध अब केवल थल, जल व वायु तक सीमित नहीं है — अंतरिक्ष अब चौथा व सबसे महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र बन चुका है। भारत ने इसकी अहमियत समझते हुए 'रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency - DSA)' की स्थापना की है, जो तीनों सेनाओं के लिए अंतरिक्ष-आधारित सैन्य क्षमताओं का समन्वय करती है।

    5.2 सैन्य उपग्रह एवं NavIC

    भारत के समर्पित सैन्य संचार व निगरानी उपग्रह (जैसे GSAT श्रृंखला के सैन्य संस्करण व कार्टोसैट/RISAT जैसे सुदूर संवेदन उपग्रह) सीमा निगरानी, सामरिक संचार व लक्ष्य-पहचान में उपयोग होते हैं। NavIC (भारत की स्वदेशी नौवहन प्रणाली) मिसाइल मार्गदर्शन, सैनिकों की सटीक स्थिति-जानकारी व नौसेना जहाज़ों के नौवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है — यह सामरिक दृष्टि से भारत को विदेशी GPS प्रणालियों पर निर्भरता से मुक्त रखती है।

    5.3 मिशन शक्ति — भारत की ASAT क्षमता

    🚀 मिशन शक्ति (Mission Shakti) भारत का उपग्रह-रोधी (Anti-Satellite) मिसाइल परीक्षण | 27 मार्च 2019

    📌 भाग 5 — अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी — याद रखने योग्य बिंदु

    1. अंतरिक्ष अब युद्ध का चौथा डोमेन है; भारत की रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) इसका समन्वय करती है। 2. सैन्य उपग्रह व NavIC मिसाइल मार्गदर्शन, निगरानी व सैनिकों की सटीक स्थिति-जानकारी में उपयोगी हैं। 3. मिशन शक्ति (2019) — भारत की ASAT क्षमता का प्रदर्शन, विश्व का चौथा ASAT-सक्षम देश।

    भाग 6: Make in India एवं आत्मनिर्भरता — रक्षा गलियारे

    6.1 आत्मनिर्भर भारत एवं रक्षा उत्पादन में वृद्धि

    'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है। बीते एक दशक में इसके नतीजे स्पष्ट रूप से दिखते हैं — भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही आयात-निर्भरता भी घटी है — पहले जहां रक्षा उपकरणों की 65-70% आपूर्ति आयात से होती थी, अब लगभग 65% रक्षा उपकरण घरेलू स्तर पर ही निर्मित हो रहे हैं।

    6.2 रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors)

    रक्षा विनिर्माण में निजी निवेश आकर्षित करने हेतु सरकार ने दो समर्पित रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए हैं:

    गलियाराफोकस क्षेत्रनिवेश (2026 तक)
    उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियाराबख्तरबंद वाहन, एयरोस्पेस उपकरण₹42,057 करोड़ से अधिक निवेश प्रतिबद्धताएं; दिसंबर 2025 में अकेले $4.2 बिलियन (₹35,000 करोड़) का नया निवेश, लगभग 52,000 रोज़गार सृजन की संभावना
    तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियाराइलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, उन्नत विनिर्माण₹32,699 करोड़ की निवेश प्रतिबद्धताएं
    💡 रक्षा गलियारे — रोज़गार व आत्मनिर्भरता की दोहरी कहानी

    जब उत्तर प्रदेश सरकार ने रक्षा विनिर्माण कंपनियों को 1,142 हेक्टेयर भूमि आवंटित की, तो यह सिर्फ ज़मीन का आवंटन नहीं था — यह हज़ारों युवाओं के लिए नई नौकरियों व भारत के हथियार आयात बिल में कमी की शुरुआत भी थी। रक्षा गलियारे इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत, स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान बन सकती है।

    6.3 iDEX एवं SRIJAN — रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र

    बड़ी कंपनियों के साथ-साथ भारत ने स्टार्टअप्स व नवाचारकर्ताओं को भी रक्षा उत्पादन से जोड़ने हेतु विशेष मंच बनाए हैं:

    📌 भाग 6 — Make in India एवं आत्मनिर्भरता — याद रखने योग्य बिंदु

    1. रक्षा उत्पादन ₹46,429 करोड़ (2014-15) से बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ (2025-26) — आयात-निर्भरता 65-70% से घटकर लगभग 35% रह गई। 2. उत्तर प्रदेश (बख्तरबंद वाहन/एयरोस्पेस, ₹42,057+ करोड़ निवेश) व तमिलनाडु (इलेक्ट्रॉनिक्स, ₹32,699 करोड़) रक्षा गलियारे प्रमुख हैं। 3. दिसंबर 2025 में UP गलियारे में अकेले $4.2 बिलियन का नया निवेश आया, जिससे लगभग 52,000 रोज़गार सृजित होंगे। 4. iDEX (स्टार्टअप नवाचार), SRIJAN पोर्टल (आयात प्रतिस्थापन) व सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां आत्मनिर्भरता को संस्थागत रूप देती हैं।

    भाग 7: रक्षा निर्यात एवं भारत की वैश्विक स्थिति

    7.1 भारत के रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

    भारत, जो कभी विश्व के सबसे बड़े हथियार आयातकों में गिना जाता था, अब एक उभरता हुआ रक्षा निर्यातक बन चुका है — यह भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी यात्रा की सबसे प्रेरक कहानियों में से एक है।

    आधारआंकड़ा
    निर्यात वृद्धि₹686 करोड़ (2013-14) से बढ़कर ₹38,424 करोड़ (2025-26) — 12 वर्षों में 5,500% से अधिक की वृद्धि
    निर्यात गंतव्य देशभारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं
    भविष्य का लक्ष्य2029 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
    प्रमुख निर्यात उत्पादब्रह्मोस मिसाइल (फिलीपींस को निर्यात), आकाश वायु रक्षा प्रणाली, तोपें, राडार, बुलेटप्रूफ जैकेट व सैन्य वाहन

    7.2 वैश्विक रक्षा बाज़ार में भारत की बढ़ती साख

    भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का फिलीपींस को निर्यात होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय मानी जा रही है। यह वृद्धि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, DPSU के आधुनिकीकरण व सरकार की सतत नीतिगत सहायता का परिणाम है।

    📌 भाग 7 — रक्षा निर्यात एवं वैश्विक स्थिति — याद रखने योग्य बिंदु

    1. रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ (2013-14) से बढ़कर ₹38,424 करोड़ (2025-26) — 5,500%+ वृद्धि, 80+ देशों को निर्यात। 2. 2029 तक ₹50,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य; ब्रह्मोस मिसाइल जैसे उत्पाद वैश्विक मान्यता प्राप्त कर रहे हैं।

    भाग 8: चुनौतियां एवं उभरते रुझान

    8.1 हाइपरसोनिक हथियार (Hypersonic Weapons)

    हाइपरसोनिक हथियार वे हैं, जो ध्वनि की गति से 5 गुना (Mach 5+) या उससे अधिक तेज़ उड़ते हैं, तथा उड़ान के दौरान अपनी दिशा भी बदल सकते हैं — जिससे उन्हें रोकना पारंपरिक मिसाइल-रोधी प्रणालियों के लिए अत्यंत कठिन हो जाता है। जैसा भाग 2 में देखा, भारत का ET-LDHCM (Mach 8, प्रोजेक्ट विष्णु) इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। अमेरिका, रूस व चीन के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो रहा है, जो हाइपरसोनिक तकनीक में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

    8.2 डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (Directed Energy Weapons - DEW)

    डायरेक्टेड एनर्जी वेपन गोली या मिसाइल की बजाय केंद्रित ऊर्जा किरण (लेज़र) से लक्ष्य को नष्ट करते हैं — इनकी सबसे बड़ी खासियत है 'लगभग शून्य लागत प्रति फायर', क्योंकि इन्हें बार-बार गोला-बारूद की आवश्यकता नहीं होती।

    🚀 DURGA-II — भारत का 100 किलोवाट लेज़र हथियार Directionally Unrestricted Ray-Gun Array | 2025-26 नौसेना परीक्षण चरण

    8.3 क्वांटम तकनीक का रक्षा में उपयोग

    क्वांटम तकनीक रक्षा क्षेत्र में क्वांटम-सुरक्षित संचार (जिसे कोई भी बीच में पढ़ नहीं सकता), क्वांटम राडार (जो स्टील्थ विमानों को भी पहचान सकता है, सैद्धांतिक रूप से) व क्वांटम-आधारित नौवहन प्रणालियों (जो GPS जैम होने पर भी सटीक स्थिति बता सकें) की दिशा में विकसित हो रही है। भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन तथा DRDO की प्रयोगशालाएं इस क्षेत्र में शोध कर रही हैं, जो अगले दशक में भारत की सामरिक संचार सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जा सकती है।

    📌 भाग 8 — चुनौतियां एवं उभरते रुझान — याद रखने योग्य बिंदु

    1. हाइपरसोनिक हथियार (Mach 5+, दिशा-परिवर्तनशील) पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती हैं — भारत का ET-LDHCM (Mach 8) इसी दिशा में प्रगति है। 2. DURGA-II (100 kW लेज़र, नौसेना परीक्षण 2026) भारत को DEW-सक्षम चुनिंदा देशों में शामिल करता है। 3. क्वांटम तकनीक भविष्य में संचार सुरक्षा, राडार व नौवहन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

    भाग 9: भारत की रक्षा नीति, राजस्थान का योगदान एवं भविष्य

    9.1 चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) एवं एकीकृत थियेटर कमान

    दिसंबर 2019 में भारत ने पहली बार 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defence Staff - CDS)' का पद सृजित किया, जो थल, जल व वायु — तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल (Jointness) सुनिश्चित करने वाला सर्वोच्च सैन्य पद है। CDS का सबसे बड़ा व चुनौतीपूर्ण दायित्व है — 'एकीकृत थियेटर कमान (Integrated Theatre Command)' का गठन, जिसमें तीनों सेनाओं की इकाइयों को अलग-अलग रखने के बजाय, एक ही भौगोलिक क्षेत्र (थियेटर) के लिए एक साझा एकीकृत कमान के अधीन रखा जाएगा — जैसे अमेरिका व चीन जैसी बड़ी सैन्य शक्तियों में पहले से प्रचलित है।

    नवीनतम स्थिति (मई 2026): 9 मई 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एन.एस. राजा सुब्रमणि ने भारत के नए CDS का पदभार ग्रहण किया, जिनका स्पष्ट मैंडेट थियेटराइज़ेशन को गति देना है। अप्रैल 2026 तक तीनों प्रस्तावित थियेटर कमानों की व्यापक नेतृत्व संरचना अंतिम रूप ले चुकी थी तथा प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा जा चुका है — यह भारतीय सैन्य इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार माना जा रहा है।

    9.2 राजस्थान का भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी में योगदान

    जैसा हुक-स्टोरी में देखा, राजस्थान का पोखरण (जैसलमेर ज़िला) भारत के परमाणु व मिसाइल परीक्षण इतिहास का केंद्र-बिंदु रहा है — 1974 (स्माइलिंग बुद्धा) व 1998 (पोखरण-II, पांच परमाणु परीक्षण) की ऐतिहासिक घटनाएं यहीं घटीं। आज भी पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज भारत की नई पीढ़ी के हथियारों के परीक्षण का प्रमुख केंद्र है — यहां हाल ही में 'नाग Mk2' एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल फील्ड मूल्यांकन किया गया। इसके अलावा भारतीय सेना द्वारा पोखरण सहित देश के कई फायरिंग रेंज पर अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों (ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण सहित) के बड़े पैमाने पर परीक्षण नियमित रूप से किए जाते हैं।

    9.3 भारत की रक्षा नीति एवं भविष्य की दिशा

    भारत की रक्षा नीति अब तीन स्पष्ट स्तंभों पर टिकी है — आत्मनिर्भरता (स्वदेशी उत्पादन व निर्यात), आधुनिकीकरण (AI, ड्रोन, हाइपरसोनिक व DEW जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकें) तथा वैश्विक भागीदारी (निर्यात व सामरिक साझेदारी)। आने वाले वर्षों में AMCA जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, स्वदेशी विमानवाहक पोत, हाइपरसोनिक मिसाइल व लेज़र हथियार भारत को क्षेत्रीय शक्ति से वैश्विक रक्षा-तकनीकी शक्ति में बदल सकते हैं — बशर्ते इंजन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता भी उतनी ही तेज़ी से हासिल की जाए, जितनी तेज़ी से मिसाइल व सॉफ्टवेयर क्षेत्र में हुई है। CDS के नेतृत्व में जारी थियेटराइज़ेशन सुधार इस पूरी रणनीति को संस्थागत रूप से एकीकृत करने की कड़ी है।

    📌 भाग 9 — रक्षा नीति, राजस्थान एवं भविष्य — याद रखने योग्य बिंदु

    1. CDS (2019 से स्थापित पद; मई 2026 से ले. जनरल राजा सुब्रमणि) एकीकृत थियेटर कमान गठन का नेतृत्व कर रहे हैं — भारतीय सैन्य इतिहास का सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार। 2. राजस्थान का पोखरण (जैसलमेर) — 1974 व 1998 के परमाणु परीक्षणों का केंद्र, आज भी मिसाइल/हथियार परीक्षण का प्रमुख फील्ड फायरिंग रेंज है। 3. भारत की रक्षा नीति के तीन स्तंभ — आत्मनिर्भरता, आधुनिकीकरण व वैश्विक भागीदारी। 4. भविष्य — AMCA, स्वदेशी विमानवाहक पोत, हाइपरसोनिक हथियार व DEW भारत को वैश्विक रक्षा-तकनीकी शक्ति बना सकते हैं।

    भाग 10: रक्षा अधिग्रहण परिषद, मिसाइल वर्गीकरण एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली

    10.1 रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council - DAC)

    DAC भारतीय रक्षा मंत्रालय में सर्वोच्च खरीद निर्णय निकाय (Highest Decision-Making Body) है, जिसकी स्थापना 2001 में कारगिल युद्ध के बाद गठित मंत्री समूह (GoM) की सिफारिश पर हुई थी।

    बिंदुविवरण
    अध्यक्षरक्षा मंत्री (Defence Minister)
    सदस्यCDS, थलसेना/वायुसेना/नौसेना प्रमुख
    LTIPP15 वर्षीय Long Term Integrated Perspective Plan अनुमोदित करता है
    श्रेणियांBuy | Buy & Make | Make — इन श्रेणियों में खरीद प्रस्ताव वर्गीकृत करता है
    ऑफसेट₹2,000 करोड़ से अधिक की खरीद में ऑफसेट प्रावधान निर्धारित करता है

    चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद की सिफारिश सर्वप्रथम 2001 में GoM ने तथा पुनः 2012 में नरेश चंद्र समिति ने की थी, परंतु पद का वास्तविक सृजन 2019 में हुआ — पहले CDS जनरल बिपिन रावत बने। CDS ही रक्षा मंत्री को एकमात्र सैन्य सलाह देने वाला अधिकारी है, DMA विभाग का प्रमुख है तथा NCA (Nuclear Command Authority) का सलाहकार भी है।

    10.2 मिसाइल की संरचना एवं IGMDP

    मिसाइल एक पायलटरहित, स्वचालित, लक्ष्य-आधारित हथियार तंत्र है जो युद्ध-भार (Warhead) को निश्चित लक्ष्य तक पहुंचाता है। इसके पांच प्रमुख घटक हैं — गाइडेंस सिस्टम (GPS/Radar/IR/Laser से निर्देशन), वारहेड (विस्फोटक/परमाणु/रासायनिक पेलोड), ईंधन टैंक (ठोस/तरल/क्रायोजेनिक), प्रणोदन (रॉकेट बूस्टर/जेट/रैमजेट/स्क्रैमजेट) व Wings-Fins (उड़ान नियंत्रण)।

    भारत का मिसाइल कार्यक्रम 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू हुए 'एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP)' से आकार लेना शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य DRDO के तहत भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था।

    याद रखने की ट्रिक — PATNA: IGMDP के तहत विकसित पांच मूल मिसाइलें याद रखने हेतु ट्रिक: "PATNA" — Prithvi, Agni, Trishul, Nag, Akash।

    10.3 मिसाइलों का वर्गीकरण (Classification of Missiles)

    मिसाइलों को परास, प्रक्षेपण मोड, गति व गाइडेंस प्रणाली — चार आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है, जो RAS परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला बिंदु है:

    श्रेणी (परास के आधार पर)परासउदाहरण
    Short Range (SRBM)< 1,000 kmपृथ्वी-I/II, प्रहार, K-15, शौर्य, प्रलय
    Medium Range (MRBM)1,000–3,000 kmअग्नि-I, अग्नि-II, K-4
    Intermediate Range (IRBM)3,000–5,500 kmअग्नि-III, अग्नि-IV
    Intercontinental (ICBM)> 5,500 kmअग्नि-V/VI, सूर्य (निर्माणाधीन)
    लॉन्च मोडपूर्ण रूपउदाहरण
    S2SSurface to Surfaceपृथ्वी, अग्नि, प्रहार, शौर्य
    S2ASurface to Airआकाश, त्रिशूल, बराक, QRSAM, MRSAM
    A2AAir to Airअस्त्र, ब्रह्मोस (हवाई संस्करण)
    A2SAir to Surfaceरुद्रम (Anti-Radiation), HAMMER, SCALP
    W2SWater to Surface (SLBM)सागरिका K-15, K-4
    W2WWater to Waterब्रह्मोस (नौसेना संस्करण)
    गति श्रेणीगति (Mach)उदाहरण
    Subsonic (सबसोनिक)< 1 Machनिर्भय (0.7–0.8 Mach)
    Supersonic (सुपरसोनिक)1–5 Machब्रह्मोस (~3 Mach), आकाश, अस्त्र
    Hypersonic (हाइपरसोनिक)> 5 Machशौर्य (7.5 Mach), ब्रह्मोस-II व ET-LDHCM (7-8 Mach)
    गाइडेंस प्रकारउदाहरण
    RADAR आधारितआकाश (राजेन्द्र रडार)
    Laser आधारितLAHAT, सुदर्शन बम
    Infrared (IR) आधारितनाग, HELINA
    GPS आधारितअग्नि श्रृंखला, ब्रह्मोस
    TERCOM/INS आधारितक्रूज मिसाइलें — इलाके का नक्शा पढ़कर उड़ती हैं

    10.4 अग्नि श्रृंखला — विस्तृत तालिका

    मिसाइलश्रेणीपरासपेलोड/विशेषता
    Agni-IMRBM700–1,200 km1,000 kg; एकल चरण
    Agni-IIMRBM1,500–2,500 km1,000 kg; दो चरण
    Agni-IIIIRBM3,000–3,500 km1,500 kg
    Agni-IVIRBM3,000–4,000 km800 kg; उन्नत नेविगेशन
    Agni-VICBM5,000–5,500 km1,500 kg; MIRV क्षमता
    Agni-VIICBM8,000+ km3,000+ kg; निर्माणाधीन, MIRV
    Agni-PMRBM1,000–2,000 km~1,000 kg; कनस्तरीकृत, उन्नत

    10.5 मिसाइल रक्षा प्रणाली (BMD) — द्विस्तरीय ढांचा

    भारत अमेरिका, रूस व इज़राइल के बाद मिसाइल रक्षा प्रणाली (Ballistic Missile Defence) विकसित करने वाला विश्व का चौथा देश है। भारत की द्विस्तरीय BMD प्रणाली इस प्रकार है:

    प्रणालीस्तर/ऊंचाईविशेषता
    PAD / प्रद्युम्नExo-atmospheric — 50-80 km (300-2,000 km रेंज)बाह्य वायुमंडल में रोकता है; 5 Mach गति
    AAD / अश्विनEndo-atmospheric — 15-30 kmअंतः वायुमंडल में रोकता है
    PDV (Prithvi Defence Vehicle)Exo-atmospheric — 150 km ऊंचाईPAD का उन्नत संस्करण
    PDV Mk-2 / ASATExo-atmospheric — कक्षा तकउपग्रह एवं मिसाइल दोनों रोक सकता है
    AD-1 (चरण-2)दोहरा — Endo+Exo5,000 km तक की मिसाइलें रोकेगा (विकासाधीन)
    AD-2 (चरण-2)उच्च परासभविष्य की प्रणाली — उच्चतर परास

    इसके साथ ही कई सतह-से-हवा (SAM) प्रणालियां भारत के बहु-स्तरीय वायु रक्षा तंत्र का हिस्सा हैं:

    SAM प्रणालीपरासविशेषता
    QRSAM5–30 kmQuick Reaction SAM; एकल चरण; ठोस ईंधन; वायु रक्षा
    MRSAM (बराक-8)70 kmभारत-इज़राइल संयुक्त; उच्च प्रतिक्रिया; सभी हवाई खतरे
    Project KUSHA350 kmस्वदेशी LRSAM; 2028-29 तक तैनाती; स्टील्थ व क्रूज़ भी रोके
    S-400 Triumf400 kmरूस से आयातित; विमान, UAV, क्रूज़, बैलिस्टिक — सब रोके
    NASAMS-IIअमेरिकी प्रणाली; क्रूज़, विमान, ड्रोन रोधी
    Iron Dome~70 kmइज़राइली; अल्प-परास; उच्च अवरोधन दर
    प्रमुख रडार प्रणालीविशेषता/उपयोग
    Swordfish RADARबैलिस्टिक मिसाइल डिटेक्शन व ट्रैकिंग; दीर्घ परास
    राजेन्द्र रडारआकाश मिसाइल के लिए Fire Control Radar
    रोहिणी / Arudhraवायुसेना हवाई निगरानी रडार
    NETRA (AEW&C)Airborne Early Warning & Control — निगरानी, ट्रैकिंग, कमांड
    AWACSAirborne Warning and Control System — उड़ान रडार
    Over-the-Horizon (OTH)HF तरंगें आयनमंडल से उछालकर हज़ारों km दूर तक डिटेक्शन

    10.6 स्वदेशी रक्षा प्रणालियां

    📌 भाग 10 — DAC, मिसाइल वर्गीकरण एवं BMD — याद रखने योग्य बिंदु

    1. DAC (2001, कारगिल-पश्चात GoM सिफारिश) — रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में सर्वोच्च खरीद निकाय; LTIPP व Buy/Buy&Make/Make श्रेणियां तय करता है। 2. CDS सिफारिश 2001 (GoM) व 2012 (नरेश चंद्र समिति) में हुई थी, परंतु पद 2019 में सृजित हुआ। 3. मिसाइलों का वर्गीकरण — परास (SRBM/MRBM/IRBM/ICBM), लॉन्च मोड (S2S/S2A/A2A/A2S/W2S/W2W), गति (Subsonic/Supersonic/Hypersonic) व गाइडेंस — चार आधार हैं। IGMDP ट्रिक: PATNA। 4. भारत की द्विस्तरीय BMD — PAD/प्रद्युम्न, AAD/अश्विन, PDV, PDV Mk-2/ASAT (चरण-1) व AD-1/AD-2 (चरण-2, विकासाधीन) — भारत को विश्व का चौथा BMD-सक्षम देश बनाती है। 5. QRSAM, MRSAM, Project KUSHA, S-400, NASAMS-II व Iron Dome भारत की बहु-स्तरीय SAM ढाल हैं; Swordfish, राजेन्द्र, रोहिणी/Arudhra, NETRA व AWACS प्रमुख रडार हैं।

    भाग 11: प्रमुख टैंक, लड़ाकू विमान एवं थलसेना-वायुसेना उपकरण

    11.1 प्रमुख टैंक एवं थलसेना हथियार

    नाममूल/वर्षप्रकारविशेषता
    अजेय (Ajeya)रूस (T-72) — 1980MBTआयातित; रूसी T-72 आधारित
    भीष्म (Bhishma)रूस (T-90) — 2001MBTआयातित; T-90S आधारित
    अर्जुन (Arjun)DRDO — 2004MBT (स्वदेशी)120mm राइफल्ड गन; Arjun MK-1A उन्नत
    अभय (Abhay)DRDOIFV/तोपInfantry Fighting Vehicle; 400 km रेंज
    कर्ण (Karna)DRDOयुद्धक टैंक
    मंत्रा (Mantra)भारतमानवरहितभारत का पहला मानवरहित टैंक
    हथियारविशेषता
    पिनाका MBRLMulti Barrel Rocket Launcher; 44 सेकंड में 12 रॉकेट; DRDO विकसित; स्वदेशी
    KALI-500BARC द्वारा विकसित; लेज़र हथियार; विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम नष्ट करता है
    दक्ष (Daksh)DRDO रोबोट; IED पहचान, परमाणु/रासायनिक निगरानी, EOD, खोज-बचाव

    11.2 लड़ाकू विमान (Fighter Jets) — पीढ़ीवार वर्गीकरण

    पीढ़ीविमानमूलविशेषता
    1st GenMiG-21रूससुपरसोनिक; वायु रक्षा व जमीनी हमला
    2nd GenMiG-29रूसTwin-engine; A2A + A2G; अत्यधिक गतिशीलता
    3rd GenSu-30 MKIरूस-भारतMulti-role Air Superiority; उन्नत एवियोनिक्स
    3rd GenJaguarफ्रांस-ब्रिटेनGround Attack; Strike Missions
    4th GenDassault Rafaleफ्रांसMulti-role; परमाणु क्षमता; SCALP/HAMMER से लैस; सर्वोत्कृष्ट एवियोनिक्स
    4th GenHAL TejasHAL/DRDOस्वदेशी; हल्का; Single Engine; MiG-21 का विकल्प; Mk-2 विकासाधीन
    Next GenF/A-18 Super HornetUSAप्रस्तावित; Multi-role
    Next GenEurofighter Typhoonयूरोपप्रस्तावित; अत्यधिक उन्नत

    11.3 अन्य प्रमुख वायुयान

    वायुयानउपयोग/विशेषता
    HAL ध्रुव (ALH)Advanced Light Helicopter; परिवहन; HAL निर्मित
    HAL रुद्रसशस्त्र ALH; नाग + अस्त्र मिसाइल; आक्रमण हेलीकॉप्टर
    C-130J HerculesUSA; सामरिक परिवहन; विशेष अभियान
    C-17 Globemaster IIIUSA; भारी सामरिक एयरलिफ्ट; बड़े कार्गो
    Ilyushin IL-76रूस; भारी सैन्य परिवहन विमान
    Dornier-228समुद्री गश्त, निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण, SAR, MEDEVAC
    Mirage-2000फ्रांस; वायु रक्षा; परमाणु क्षमता; कारगिल में प्रयुक्त

    📌 भाग 11 — टैंक, लड़ाकू विमान एवं उपकरण — याद रखने योग्य बिंदु

    1. अर्जुन (स्वदेशी MBT, 120mm गन), भीष्म (T-90) व अजेय (T-72) भारत के प्रमुख टैंक हैं; मंत्रा भारत का पहला मानवरहित टैंक है। 2. पिनाका MBRL, KALI-500 लेज़र हथियार व दक्ष रोबोट थलसेना की विशेष क्षमताएं हैं। 3. लड़ाकू विमानों का पीढ़ीवार वर्गीकरण — MiG-21 (1st) से लेकर राफेल/तेजस (4th) व F/A-18/Eurofighter (Next Gen प्रस्तावित) तक फैला है। 4. HAL ध्रुव/रुद्र हेलीकॉप्टर, C-130J/C-17/IL-76 भारी परिवहन विमान व Mirage-2000/Dornier-228 भारत के विविध वायुयान बेड़े का हिस्सा हैं।

    भाग 12: विमान वाहक पोत, पनडुब्बी एवं नौसैनिक बल

    12.1 तीन सेवाएं एवं नौसेना के प्रकार

    सेनाकर्मी (लगभग)संरचना/विशेषता
    थलसेना (Indian Army)13-14 लाख6 ऑपरेशनल + 1 ट्रेनिंग कमांड
    वायुसेना (Indian Air Force)1.27 लाख5 ऑपरेशनल + 1 ट्रेनिंग + 1 मेंटेनेंस कमांड
    नौसेना (Indian Navy)58,000+Blue Water Navy — महासागरों में शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता
    नौसेना प्रकारपरिभाषा
    Blue Water Navyविशाल समुद्री क्षेत्रों में शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता — समुद्री सीमा से बहुत दूर तक; भारत Blue Water Navy है
    Brown Water Forceकेवल तटीय क्षेत्र तक सीमित नौसैनिक शक्ति
    Green Water Forceतटीय जल (Littoral Waters) में शक्ति प्रक्षेपण की क्षमता

    12.2 विमान वाहक पोत — INS विक्रमादित्य बनाम INS विक्रांत

    बिंदुINS विक्रमादित्यINS विक्रांत
    उत्पत्तिरूसी Admiral Gorshkov — रूपांतरितस्वदेशी (Cochin Shipyard); 76% स्वदेशी सामग्री
    आकार285m लंबा × 60m चौड़ा × 60m ऊंचा262m × 62m
    कर्मी1,600+ — 'Floating City' उपनाम~1,700
    विमान30+ MiG-29K, Sea Harrier, Kamov-31/28, ALH-Dhruv30 MiG-29K, Kamov-31, MH-60R, ALH, LCA Navy
    LandingLUNA (MiG) + DAPS (Sea Harrier)STOBAR — Ski-Jump + Arrester Wires

    12.3 प्रमुख स्वदेशी नौसैनिक पोत

    पोत/प्रोजेक्टवर्षविशेषता
    INS Astradharini2015Torpedo Launch/Recovery Vessel; 95% स्वदेशी; IIT खड़गपुर-NSTL डिज़ाइन
    INS Kavaratti2015Kamorta Class ASW Stealth Corvette; 90% स्वदेशी; GRSE कोलकाता; Project 28
    Project 17A (P17A)जारी7 Guided Missile Frigates; 75% स्वदेशी; MDSL+GRSE; शिवालिक का उन्नत रूप (INS निलगिरि आदि)
    Project 15B (P15B)जारी4 उन्नत Guided Missile Destroyers; 75% स्वदेशी; INS विशाखापत्तनम, मोरमुगाओ, इंफाल, सूरत

    2021 से तीन Joint Logistic Nodes (JLN) — मुंबई, गुवाहाटी व पोर्ट ब्लेयर में स्थापित किए गए हैं, जो तीनों सेनाओं के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक समर्थन (गोला-बारूद, राशन, ईंधन, इंजीनियरिंग) प्रदान करते हैं।

    12.4 पनडुब्बियां (Submarines) — प्रकार एवं सूची

    भारत के पास वर्तमान में 15 पारंपरिक डीजल-विद्युत (SSK) एवं 3+ परमाणु बैलिस्टिक (SSBN) पनडुब्बियां हैं।

    प्रकारसंक्षिप्तविवरण
    डीजल-विद्युतSSKडीजल इंजन से विद्युत; बार-बार सतह पर आना पड़ता है; ध्वनि-संवेदनशील
    परमाणु हमलाSSNअनिश्चित काल तक पानी में रह सकती है; टारपीडो + क्रूज़ मिसाइल
    परमाणु बैलिस्टिकSSBNपरमाणु हथियार लॉन्च मंच; परमाणु त्रिशक्ति का अंग
    पनडुब्बी/श्रेणीमूलविवरण
    INS अरिहंतस्वदेशी (2016)भारत की पहली SSBN; K-15 SLBM से लैस; 'No First Use' नीति
    INS अरिघातस्वदेशी (2024)दूसरी SSBN; परमाणु निवारक क्षमता को मज़बूती
    INS चक्र (Akula Class)रूस (2012-22)लीज़ पर SSN; 2022 में वापस; Akula-II श्रेणी
    कलवरी श्रेणी (Scorpene)भारत-फ्रांसProject 75: Kalvari, Khanderi, Karanj, Vela, Vagir, Vagsheer (6 पनडुब्बियां)
    शिशुमार श्रेणीजर्मनी4 SSK; HDW डिज़ाइन पर आधारित
    सिंधुघोष (Kilo Class)USSR/रूस (1984-2000)8 SSK; 1984-2000 के बीच खरीदी गईं

    AIP — Air-Independent Propulsion: AIP तकनीक पनडुब्बी को वायुमंडलीय हवा के बिना ऊर्जा उत्पन्न करने देती है — पानी में रहने की अवधि दिनों से हफ्तों तक बढ़ जाती है। Project 75(I) — Project 75 का उन्नत रूप है, जिसमें AIP सिस्टम + Fuel Cells सहित नए SSK निर्माण का प्रावधान है। Nuclear Triad (परमाणु त्रिशक्ति) = विमान + भूमि-आधारित बैलिस्टिक मिसाइल + पनडुब्बी लॉन्च मिसाइल — INS अरिहंत के कमीशन (2016) से भारत की परमाणु त्रिशक्ति पूर्ण हुई।

    12.5 UAV / ड्रोन एवं रोबोट — प्रकार एवं तालिका

    प्रकारविशेषता/उपयोग
    VTOL (Multi-Rotor)ऊर्ध्वाधर टेकऑफ/लैंडिंग; Hover क्षमता; Photography, Surveillance, Delivery
    Fixed-Wing UAVRunway आवश्यक; उच्च गति, लंबी अवधि; Long-Range Surveillance
    Loitering Munition'कामिकाज़े ड्रोन' — शत्रु क्षेत्र में मंडराकर आत्म-विनाशक प्रहार; एक बार उपयोग
    MALE UAVMedium Altitude Long Endurance; ISR + Strike; Predator, Heron
    UAV नाममूलउपयोग/विशेषता
    NETRA (AEW&C)DRDOहवाई निगरानी, लक्ष्य ट्रैकिंग, कमांड-कंट्रोल
    लक्ष्य (Lakshya)DRDOPilotless Target Aircraft; वायु रक्षा प्रशिक्षण; शत्रु विमान अनुकरण
    निशांत (Nishant)DRDOयुद्धक्षेत्र निगरानी, टोह, EW समर्थन
    रुस्तम-2DRDOLong Endurance MALE UAV; ISR + EW + Strike
    SWARM DronesDRDOSmart War-Fighting Array; समूह में समन्वित हमला
    Heronइज़राइलMALE UAV; ISR, सीमा निगरानी; आपदा प्रबंधन
    Harpy / Haropइज़राइलLoitering Munitions; EW + Precision Strike
    MQ-9B PredatorUSAMALE UAV; ISR + Strike; भारत ने खरीदी (30 ड्रोन)
    Sea GuardianUSAMaritime Surveillance; Anti-Submarine Warfare

    📌 भाग 12 — नौसैनिक बल, पनडुब्बी एवं UAV — याद रखने योग्य बिंदु

    1. तीन सेवाएं — थलसेना (13-14 लाख), वायुसेना (1.27 लाख) व नौसेना (58,000+, Blue Water Navy)। 2. INS विक्रमादित्य (रूपांतरित, LUNA+DAPS) व INS विक्रांत (76% स्वदेशी, STOBAR) भारत के दो विमान वाहक पोत हैं। 3. भारत के पास 15 SSK व 3+ SSBN पनडुब्बियां हैं — INS अरिहंत/अरिघात (स्वदेशी SSBN), कलवरी/शिशुमार/सिंधुघोष श्रेणियां प्रमुख हैं; AIP तकनीक Project 75(I) में उपयोग होगी। 4. UAV — VTOL, Fixed-Wing, Loitering Munition व MALE प्रकार हैं; NETRA, लक्ष्य, निशांत, रुस्तम-2, Heron, Harop व MQ-9B Predator प्रमुख UAV हैं।

    भाग 13: रासायनिक-जैविक हथियार एवं अंतर्राष्ट्रीय संधियां

    13.1 रासायनिक हथियार — श्रेणियां एवं संधियां

    श्रेणीउदाहरणप्रभाव
    घाव कारक (Blister)Sulfur Mustard, Nitrogen Mustardशरीर पर फफोले; सीरिया में प्रयुक्त
    तंत्रिका कारक (Nerve)Sarin, Soman, Novichokतंत्रिका तंत्र नष्ट; मस्तिष्क क्षति
    दमघोंटू (Choking)Chlorine, Phosgeneश्वसन नली पर सीधा प्रहार
    रक्त कारक (Blood)HCN, Cyanogen Chloride, Arsineरक्त कोशिकाओं की O₂ परिवहन क्षमता नष्ट
    वर्षसंधि/संगठनविशेषता
    1925Geneva Protocolरासायनिक हथियारों के प्रयोग पर प्रतिबंध
    1992-93CWC (Chemical Weapons Convention)उत्पादन, भंडारण, प्रयोग — सभी पर पूर्ण प्रतिबंध; भारत हस्ताक्षरकर्ता
    OPCW (हेग, नीदरलैंड)CWC का क्रियान्वयन निकाय; 193 सदस्य; नोबेल पुरस्कार 2013

    13.2 जैविक हथियार — श्रेणियां एवं संधियां

    श्रेणीखतरा स्तरउदाहरण
    Category Aसर्वाधिक घातकEbola, Plague (प्लेग), Smallpox (चेचक), Anthrax
    Category Bमध्यमRicin Toxin, Brucellosis, Typhus Fever
    Category Cउभरता खतराNipah, Hanta, Corona (COVID-19)
    वर्षसंधि/समूहविशेषता
    1972BWC (Biological Weapons Convention)WMD की पहली बहुपक्षीय निःशस्त्रीकरण संधि; 109 सदस्य; भारत हस्ताक्षरकर्ता
    1985Australia Group (43 सदस्य)रासायनिक+जैविक हथियारों की तकनीक निर्यात पर प्रतिबंध; भारत 2018 में शामिल

    13.3 प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संधियां एवं संगठन

    संधि/संगठनवर्षभारत की स्थितिमुख्य बिंदु
    NPT — परमाणु अप्रसार संधि1970❌ हस्ताक्षर नहींभेदभावपूर्ण — केवल P5 का एकाधिकार; 191 सदस्य
    CTBT — व्यापक परीक्षण प्रतिबंध1996❌ हस्ताक्षर नहींसभी परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध; 187 हस्ताक्षरकर्ता; अभी लागू नहीं
    TPNW — परमाणु निषेध संधि2017 (लागू 2021)❌ न हस्ताक्षर, न अनुसमर्थनपरमाणु हथियार रखना भी निषिद्ध
    MTCR — मिसाइल तकनीक नियंत्रण1987✅ 2016 में शामिल300 km+/500 kg+ मिसाइल तकनीक हस्तांतरण नियंत्रण; 35 सदस्य
    NSG — परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह1974❌ सदस्य नहीं48 देश; NPT न मानने से भारत बाहर
    BWC — जैविक हथियार1972✅ हस्ताक्षरकर्तापहली WMD बहुपक्षीय निःशस्त्रीकरण संधि; 109 सदस्य
    CWC — रासायनिक हथियार1993✅ हस्ताक्षरकर्ताउत्पादन+भंडारण+प्रयोग सब निषिद्ध
    Wassenaar Arrangement1996✅ सदस्यपारंपरिक हथियार + Dual-Use सामान निर्यात नियंत्रण; 42 सदस्य
    Australia Group1985✅ 2018 में शामिलरासायनिक+जैविक हथियार तकनीक निर्यात नियंत्रण

    13.4 भारत के परमाणु परीक्षण एवं रक्षा सुधार

    दिनांकऑपरेशन/नामविवरण
    18 मई 1974'Smiling Buddha' (Pokhran-I)पोखरण, जैसलमेर; DRDO + AEC; भूमिगत परीक्षण
    11-13 मई 1998'Operation Shakti' (Pokhran-II)5 परीक्षण; भारत परमाणु शक्ति राष्ट्र घोषित
    क्षेत्रमुख्य बिंदु
    Jointness & IntegrationIntegrated Theatre Commands (ITC) — भूगोल+कार्य के आधार पर तीनों सेनाओं का एकीकरण
    ISOs Act 2023Inter-Services Organisations Act — त्रि-सेवा कमांडरों को अनुशासन अधिकार; शीघ्र निर्णय
    FOBSFractional Orbital Bombardment System — निम्न पृथ्वी कक्षा से हथियार प्रहार; असीमित परास

    📌 भाग 13 — रासायनिक-जैविक हथियार एवं संधियां — याद रखने योग्य बिंदु

    1. रासायनिक हथियार 4 श्रेणी — घाव/तंत्रिका/दमघोंटू/रक्त कारक; Geneva Protocol 1925, CWC 1992-93 (भारत हस्ताक्षरकर्ता), OPCW (नोबेल 2013)। 2. जैविक हथियार Category A/B/C में वर्गीकृत; BWC 1972 पहली WMD निःशस्त्रीकरण संधि है, भारत हस्ताक्षरकर्ता। 3. भारत NPT, CTBT व TPNW पर हस्ताक्षरकर्ता नहीं है (भेदभावपूर्ण मानते हुए), परंतु MTCR (2016), Wassenaar व Australia Group (2018) का सदस्य है। 4. भारत के परमाणु परीक्षण — Smiling Buddha (1974) व Operation Shakti (1998), दोनों पोखरण, राजस्थान में। 5. ISOs Act 2023 व FOBS जैसी नई अवधारणाएं भारत के रक्षा सुधार व वैश्विक हथियार होड़ को दर्शाती हैं।

    🎯 रक्षा प्रौद्योगिकी, मिसाइल कार्यक्रम एवं आधुनिक युद्ध तकनीक — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

    📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 📝

    Q1. DRDO की स्थापना कब हुई तथा इसके अंतर्गत कितनी प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं? Q2. OFB के पुनर्गठन से बनी 7 नई DPSU कंपनियों के नाम बताइए। Q3. अग्नि-V मिसाइल में प्रयुक्त MIRV तकनीक क्या है? Q4. ब्रह्मोस मिसाइल की गति कितनी है तथा यह किन दो देशों की संयुक्त परियोजना है? Q5. ET-LDHCM मिसाइल किस प्रोजेक्ट के तहत विकसित हो रही है तथा इसकी गति क्या है? Q6. नाग, शौर्य, निर्भय व धनुष मिसाइलों में से कौनसी हाइपरसोनिक व परमाणु-सक्षम है? Q7. INS विक्रांत की क्या विशेषता है? Q8. भारत की परमाणु त्रय के तीन माध्यम कौन-कौन से हैं? Q9. अरिहंत श्रेणी की कौनसी पनडुब्बी से दिसंबर 2025 में K-4 मिसाइल का परीक्षण हुआ? Q10. तेजस Mk1A अनुबंध की राशि व विमानों की संख्या बताइए। Q11. ऑपरेशन सिंदूर कब चलाया गया तथा इसका महत्व क्या है? Q12. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने कौन-कौनसी मिसाइलें किन विमानों से दागीं? Q13. आकाशतीर प्रणाली का क्या कार्य है? Q14. मिशन शक्ति क्या है तथा यह कब आयोजित हुआ? Q15. उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु रक्षा गलियारों का फोकस क्षेत्र क्या है? Q16. iDEX व SRIJAN पोर्टल का उद्देश्य क्या है? Q17. भारत के रक्षा निर्यात में पिछले 12 वर्षों में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई है? Q18. DURGA-II क्या है तथा इसकी क्षमता कितनी है? Q19. भारत के वर्तमान CDS कौन हैं तथा वे कब पदस्थ हुए? Q20. राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों की तिथियां व नाम बताइए। Q21. DAC (रक्षा अधिग्रहण परिषद) की स्थापना कब हुई तथा इसके अध्यक्ष कौन होते हैं? Q22. IGMDP के तहत विकसित मिसाइलों को याद रखने की ट्रिक क्या है? Q23. SRBM, MRBM, IRBM व ICBM में मूल अंतर बताइए। Q24. भारत की BMD प्रणाली में PAD व AAD क्या हैं? Q25. MRSAM व Project KUSHA में क्या अंतर है? Q26. INS विक्रमादित्य व INS विक्रांत में कोई तीन अंतर बताइए। Q27. AIP तकनीक क्या है तथा यह पनडुब्बी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? Q28. रासायनिक हथियारों की चार श्रेणियां कौन-कौन सी हैं? Q29. भारत ने कौनसी अंतर्राष्ट्रीय संधियों (NPT/CTBT/MTCR) पर हस्ताक्षर किए हैं और कौनसी पर नहीं? Q30. स्माइलिंग बुद्धा व ऑपरेशन शक्ति में क्या अंतर है?

    📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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