1 जुलाई 2015 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में जब प्रधानमंत्री ने 'डिजिटल इंडिया मिशन' का शुभारंभ किया था, तो शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि ठीक 11 साल बाद, 2026 तक, भारत दुनिया के लगभग आधे (49%) रियल-टाइम डिजिटल भुगतान लेनदेन अकेले कर रहा होगा! सोचिए — एक सब्ज़ी वाला भी आज QR कोड दिखाकर UPI से भुगतान ले लेता है, जबकि विकसित देशों में भी यह सुविधा इतनी आम नहीं। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राष्ट्रीय नीति का नतीजा है। ठीक इसी तरह, जब राजस्थान सरकार ने 2026 में अपनी 'AI-ML नीति' पास की, तो राज्य ने यह घोषित किया कि अब सरकारी सेवाएं भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से और तेज़, पारदर्शी व नागरिक-केंद्रित बनेंगी। डिजिटल इंडिया से लेकर राजस्थान की AI नीति तक — यह अध्याय हमें बताएगा कि कैसे सही नीतियां किसी देश या राज्य की तकनीकी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती हैं।
भाग 1: डिजिटल इंडिया मिशन का परिचय एवं स्तंभ
डिजिटल इंडिया, 1 जुलाई 2015 को शुरू किया गया भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी अभियान है, जिसका लक्ष्य है — भारत को एक 'डिजिटल रूप से सशक्त समाज व ज्ञान अर्थव्यवस्था (Digitally Empowered Society and Knowledge Economy)' में बदलना। इसका मूल विचार सरल है — सरकारी सेवाओं को कागज़ी दफ्तरों से निकालकर हर नागरिक के मोबाइल फोन तक पहुंचाना, ताकि गांव में बैठा व्यक्ति भी शहर जितनी आसानी से सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सके।
डिजिटल इंडिया मिशन का पूरा ढांचा 9 प्रमुख स्तंभों पर टिका है, जो मिलकर डिजिटल बुनियादी ढांचे से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तक सब कुछ कवर करते हैं:
| स्तंभ | उद्देश्य |
|---|---|
| ब्रॉडबैंड हाइवे (Broadband Highways) | शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट की पहुंच सुनिश्चित करना |
| मोबाइल कनेक्टिविटी तक सार्वभौमिक पहुंच | हर नागरिक तक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बढ़ाना |
| सार्वजनिक इंटरनेट पहुंच कार्यक्रम | कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) व डाकघरों के ज़रिए इंटरनेट सुविधा |
| ई-गवर्नेंस | सरकारी प्रक्रियाओं व सेवाओं का प्रौद्योगिकी के ज़रिए सुधार |
| सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी | सभी सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराना |
| सबके लिए सूचना (Information for All) | सरकारी डेटा व दस्तावेज़ों तक खुली व आसान पहुंच |
| इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण | आयात कम कर घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ाना |
| रोज़गार हेतु IT (IT for Jobs) | IT क्षेत्र में कौशल विकास व रोज़गार सृजन |
| अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम | तुरंत लागू होने वाली छोटी परंतु प्रभावशाली डिजिटल परियोजनाएं |
कल्पना कीजिए राजस्थान के किसी दूरदराज़ गांव का एक छात्र, जिसे पहले छात्रवृत्ति फॉर्म भरने के लिए शहर के सरकारी दफ्तर के कई चक्कर काटने पड़ते थे। आज वही छात्र अपने मोबाइल से e-Mitra या डिजिलॉकर के ज़रिए घर बैठे ही फॉर्म भर सकता है, अपने प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर सकता है व छात्रवृत्ति की राशि सीधे अपने बैंक खाते में DBT के ज़रिए प्राप्त कर सकता है — यही डिजिटल इंडिया का सबसे बड़ा प्रभाव है, जो दूरी व नौकरशाही की बाधाओं को मिटाकर सेवाओं को हर नागरिक के करीब लाता है।
1. डिजिटल इंडिया मिशन 1 जुलाई 2015 को शुरू हुआ; लक्ष्य — भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज व ज्ञान अर्थव्यवस्था बनाना। 2. यह मिशन 9 स्तंभों पर आधारित है — ब्रॉडबैंड हाइवे, मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट पहुंच, e-गवर्नेंस, सेवा डिलीवरी, सूचना पहुंच, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, IT रोज़गार व अर्ली हार्वेस्ट।
भाग 2: डिजिटल इंडिया की प्रमुख उपलब्धियां
एकीकृत भुगतान इंटरफेस (Unified Payments Interface - UPI) भारत की सबसे बड़ी डिजिटल सफलता कहानियों में से एक है। यह एक ऐसा तंत्र है, जिससे कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल फोन से सीधे किसी दूसरे के बैंक खाते में तुरंत पैसे भेज या प्राप्त कर सकता है — बिना कार्ड, बिना नकद के।
| वर्ष/आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| वित्त वर्ष 2016-17 | लगभग 2 करोड़ UPI लेनदेन |
| वित्त वर्ष 2025-26 | 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन — भारी वृद्धि |
| वैश्विक हिस्सेदारी | भारत विश्व के लगभग 49% रियल-टाइम डिजिटल भुगतान लेनदेन अकेले करता है |
| अंतरराष्ट्रीय विस्तार | UPI अब UAE, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस व श्रीलंका सहित कई देशों में सक्रिय या लिंक हो चुका है |
आधार (Aadhaar), भारत के प्रत्येक निवासी को दी जाने वाली 12-अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है, जो फिंगरप्रिंट व आंखों की पुतली (Iris) के आधार पर बनाई जाती है। आज आधार प्रमाणीकरण (Authentication) 3,100 से अधिक कल्याणकारी योजनाओं व 360 से अधिक सार्वजनिक सेवाओं का समर्थन करता है। अप्रैल 2025 तक कुल आधार e-KYC लेनदेन की संख्या 2,393 करोड़ को पार कर चुकी थी — यह दिखाता है कि आधार अब केवल एक पहचान-पत्र नहीं, बल्कि पूरे डिजिटल शासन तंत्र की नींव बन चुका है।
| सेवा | आंकड़ा (2026) |
|---|---|
| डिजिलॉकर (DigiLocker) | मार्च 2026 तक 70.69 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता; 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज़ जारी — मार्कशीट, लाइसेंस व प्रमाण-पत्र अब मोबाइल में सुरक्षित |
| प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) | जून 2026 तक ₹51 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित — बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त |
| वैश्विक साझेदारी | फरवरी 2026 तक भारत ने 24 देशों के साथ डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure - DPI) व इंडिया स्टैक साझा करने हेतु समझौते किए |
जब कोई विकासशील देश अपनी सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाना चाहता है, तो अब वह अमेरिका या यूरोप की तरफ नहीं, बल्कि भारत की तरफ देखता है! भारत का 'इंडिया स्टैक' (आधार + UPI + डिजिलॉकर जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना) इतना सफल रहा है कि कई देश इसे अपनाना चाहते हैं। यही कारण है कि भारत अब दर्जनों देशों के साथ अपनी डिजिटल तकनीक साझा करने के समझौते कर रहा है — डिजिटल इंडिया अब सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक कहानी बन चुकी है।
1. UPI — 2 करोड़ (2016-17) से 24,000+ करोड़ लेनदेन (2025-26); भारत विश्व के 49% रियल-टाइम डिजिटल भुगतान अकेले करता है। 2. आधार — 3,100+ योजनाओं व 360+ सेवाओं में उपयोग; 2,393 करोड़+ e-KYC लेनदेन (अप्रैल 2025 तक)। 3. डिजिलॉकर — 70.69 करोड़+ उपयोगकर्ता, 850 करोड़+ दस्तावेज़ जारी (मार्च 2026)। 4. DBT — ₹51 लाख करोड़+ राशि सीधे बैंक खातों में; भारत ने 24 देशों के साथ DPI समझौते किए।
भाग 3: भारत की प्रमुख विज्ञान-प्रौद्योगिकी नीतियां एवं मिशन
विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति (Science, Technology and Innovation Policy - STIP) भारत सरकार की व्यापक नीति है, जिसका उद्देश्य है — देश के वैज्ञानिक व तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करना, अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना तथा विज्ञान को आम नागरिक के जीवन से जोड़ना। यह नीति 'खुले विज्ञान (Open Science)', समावेशिता व अनुसंधान के विकेंद्रीकरण पर विशेष ज़ोर देती है।
सेमीकंडक्टर चिप्स — जिन्हें आज हर स्मार्टफोन, कार व कंप्यूटर में इस्तेमाल किया जाता है — वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं। भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने हेतु 'भारत सेमीकंडक्टर मिशन' शुरू किया, जिसका दूसरा व अधिक महत्वाकांक्षी चरण — 'ISM 2.0' — केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित हुआ।
6 फरवरी 2026 को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 2019 के पुराने ढांचे की जगह एक नया, ऐतिहासिक अधिसूचना जारी की, जिसमें पहली बार 'डीप टेक स्टार्टअप्स (Deep Tech Startups)' — यानी AI, क्वांटम, बायोटेक, सेमीकंडक्टर जैसी अत्यंत जटिल व मौलिक तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स — को औपचारिक रूप से परिभाषित व मान्यता दी गई।
एक फूड-डिलीवरी ऐप बनाने वाला स्टार्टअप और क्वांटम कंप्यूटर चिप बनाने वाला स्टार्टअप — दोनों में ज़मीन-आसमान का अंतर है। पहला कुछ महीनों में मुनाफा कमा सकता है, परंतु दूसरे को वर्षों के गहन शोध व भारी निवेश के बाद ही परिणाम मिलता है। यही कारण है कि सरकार ने डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग व लंबी समय-सीमा (20 वर्ष) व अधिक राजस्व सीमा तय की — ताकि ऐसे जोखिम भरे परंतु राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण स्टार्टअप्स हतोत्साहित न हों।
1. STIP 2020 — खुले विज्ञान, समावेशिता व अनुसंधान विकेंद्रीकरण पर केंद्रित व्यापक राष्ट्रीय नीति। 2. भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (बजट 2026-27, ₹1,000 करोड़) — स्वदेशी चिप डिज़ाइन व आपूर्ति श्रृंखला मज़बूती पर केंद्रित; धोलेरा फैब से 2026 के अंत तक पहली चिप्स अपेक्षित। 3. डीप टेक स्टार्टअप नीति (फरवरी 2026) — 20 वर्ष तक स्टार्टअप दर्जा व ₹300 करोड़ राजस्व सीमा; तमिलनाडु पहला राज्य-स्तरीय डीप टेक नीति लाने वाला राज्य बना।
भाग 4: राजस्थान की डिजिटल गवर्नेंस
राजस्थान सिंगल साइन-ऑन (Rajasthan Single Sign-On - RajSSO) पोर्टल राज्य सरकार की सैकड़ों ऑनलाइन सेवाओं का एकल प्रवेश-द्वार है — यानी एक ही SSO ID से नागरिक e-Mitra, रोज़गार कार्यालय, छात्रवृत्ति पोर्टल, जन आधार, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा, भू-अभिलेख (अपना खाता), राजस्थान संपर्क व पेंशन सेवाओं सहित 100 से अधिक सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
e-Mitra पोर्टल व कियोस्क नेटवर्क राजस्थान की डिजिटल गवर्नेंस की रीढ़ है, जो 250 से अधिक सरकारी सेवाएं (प्रमाण-पत्र, फॉर्म, बिल भुगतान) एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। बिजली, पानी व मोबाइल बिल भुगतान से लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र तक — सब कुछ यहां से हो सकता है। e-Mitra पोर्टल पर औसतन लगभग 20 लाख दैनिक लेनदेन होते हैं, जो इसे राज्य के डिजिटल तंत्र की सबसे व्यस्त व महत्वपूर्ण कड़ी बनाता है — यह ePDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली), सामाजिक न्याय विभाग व आयुष्मान आरोग्य योजना जैसी सेवाओं को भी आपस में जोड़ता है।
जन आधार योजना, राजस्थान सरकार द्वारा 2019-20 के संशोधित बजट में घोषित एक अनूठी पहल है, जिसका सिद्धांत है — 'एक नंबर, एक कार्ड, एक पहचान'। राजस्थान जन आधार प्राधिकरण के माध्यम से राज्य के सभी परिवार पंजीकरण करा सकते हैं तथा एक ही कार्ड से राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सरल, सुलभ व पारदर्शी ढंग से प्राप्त कर सकते हैं — जैसे केंद्र में आधार कार्ड, वैसे ही राज्य में जन आधार कार्ड।
| सेवा/पोर्टल | कार्य |
|---|---|
| RajSSO | राज्य की 100+ ऑनलाइन सेवाओं का एकल प्रवेश-द्वार (Single Sign-On) |
| e-Mitra | 250+ सरकारी सेवाएं — बिल भुगतान, प्रमाण-पत्र, फॉर्म (लगभग 20 लाख दैनिक लेनदेन) |
| जन आधार | राज्य की समस्त कल्याणकारी योजनाओं हेतु एकल पारिवारिक पहचान कार्ड |
| अपना खाता | भूमि अभिलेख (Land Records) की ऑनलाइन उपलब्धता |
| राजस्थान संपर्क | नागरिकों की शिकायत निवारण हेतु ऑनलाइन मंच |
1. RajSSO एक ही ID से 100+ राज्य सेवाओं का एकल प्रवेश-द्वार प्रदान करता है। 2. e-Mitra 250+ सेवाएं देता है, लगभग 20 लाख दैनिक लेनदेन के साथ राज्य की डिजिटल गवर्नेंस की रीढ़ है। 3. जन आधार (2019-20 से) — 'एक नंबर, एक कार्ड, एक पहचान' सिद्धांत पर आधारित राज्य की अपनी 'आधार जैसी' पहचान प्रणाली।
भाग 5: राजस्थान की AI-ML नीति 2026 एवं अन्य S&T योजनाएं
राजस्थान मंत्रिमंडल ने 2026 में 'राजस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग (AI-ML) नीति-2026' को स्वीकृति दी, जो राज्य को प्रौद्योगिकी-संचालित निवेश व नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति का मूल उद्देश्य है — जवाबदेह, नैतिक व सुरक्षित AI/ML उपयोग के ज़रिए सरकारी सेवाओं को तेज़, पारदर्शी व नागरिक-केंद्रित बनाना, साथ ही प्रशासनिक दक्षता व नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
| नीति का घटक | विवरण |
|---|---|
| डिजिटल अवसंरचना विकास | AI क्लाउड सेवाएं, सुरक्षित डेटा भंडार, परीक्षण मंच व उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाएं |
| शिक्षा एवं कौशल विकास | स्कूलों, ITI, पॉलिटेक्निक व कॉलेजों में AI शिक्षा; युवाओं, शिक्षकों व सरकारी कर्मचारियों हेतु समर्पित प्रशिक्षण कार्यक्रम |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र | अनुसंधान, नवाचार व क्षमता निर्माण हेतु राज्य में AI उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना |
| उद्योग समर्थन | उद्योग, MSME, स्टार्टअप्स व अनुसंधान संस्थानों को RIPS, MSME व स्टार्टअप नीतियों के अनुरूप अतिरिक्त प्रोत्साहन |
इस नीति के साथ मुख्यमंत्री ने कई सहायक पहल भी शुरू कीं — AI साक्षरता कार्यक्रम, iStart लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS), AVGC-XR पोर्टल व राजस्थान AI पोर्टल। इसके साथ ही राज्य सरकार ने IIT दिल्ली, गूगल व नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
कल्पना कीजिए कि आप किसी सरकारी योजना के लिए आवेदन करते हैं, और एक AI सिस्टम आपके दस्तावेज़ों की तुरंत जांच कर, बिना किसी मानवीय देरी के आपकी पात्रता तय कर देता है। यही राजस्थान की AI-ML नीति का लक्ष्य है — सरकारी कामकाज़ को इतना तेज़ व पारदर्शी बनाना कि भ्रष्टाचार व देरी की गुंजाइश ही न बचे, जबकि हर निर्णय नैतिक व जवाबदेह तरीके से लिया जाए।
| क्षेत्र | योजना/पहल |
|---|---|
| औद्योगिक निवेश | राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) — तकनीक व विनिर्माण क्षेत्र में निवेश हेतु कर व वित्तीय प्रोत्साहन |
| स्टार्टअप | iStart राजस्थान — राज्य का प्रमुख स्टार्टअप इन्क्यूबेशन व सहायता कार्यक्रम, फंडिंग व मेंटरशिप सहित |
| नैनो एवं सामग्री विज्ञान | MNIT जयपुर का सामग्री अनुसंधान केंद्र (Materials Research Centre) — नैनो व उन्नत सामग्री अनुसंधान |
| क्वांटम तकनीक | MNIT जयपुर की क्वांटम कंप्यूटिंग एवं AI लैब — MeitY परियोजना अंतर्गत स्थापित |
| बायोटेक्नोलॉजी | राजस्थान जैव प्रौद्योगिकी नीति (2015) — जयपुर, जोधपुर, अलवर में बायोटेक पार्क |
| कृषि तकनीक | कृषि में ड्रोन, GIS व रिमोट सेंसिंग आधारित निगरानी व फसल सलाह सेवाएं |
1. राजस्थान AI-ML नीति 2026 — नैतिक व जवाबदेह AI उपयोग, डिजिटल अवसंरचना, कौशल विकास व AI उत्कृष्टता केंद्र पर केंद्रित। 2. सहायक पहल — AI साक्षरता कार्यक्रम, iStart LMS, AVGC-XR पोर्टल, राजस्थान AI पोर्टल तथा IIT दिल्ली/गूगल/NLU के साथ MoU। 3. RIPS (निवेश), iStart (स्टार्टअप), MNIT जयपुर (नैनो व क्वांटम) व राजस्थान जैव प्रौद्योगिकी नीति (2015) राज्य की अन्य प्रमुख S&T पहल हैं।
भाग 6: चुनौतियां एवं भविष्य की दिशा
आने वाले वर्षों में डिजिटल इंडिया मिशन AI-आधारित शासन (AI Governance), डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के विस्तार व 6G जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों के साथ और गहरा एकीकरण करेगा। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 व डीप टेक स्टार्टअप नीति के परिणाम अगले 5-10 वर्षों में भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में एक मज़बूत खिलाड़ी बना सकते हैं। राजस्थान जैसे राज्यों की AI-ML नीतियां यह सुनिश्चित करेंगी कि तकनीकी लाभ केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहकर, राज्य स्तर पर भी नागरिकों तक पहुंचे।
1. डिजिटल विभाजन, डेटा सुरक्षा व डिजिटल साक्षरता की कमी — तीन सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। 2. भविष्य — AI-आधारित शासन, 6G एकीकरण व सेमीकंडक्टर/डीप टेक में आत्मनिर्भरता भारत की दिशा तय करेंगे। 3. राजस्थान जैसी राज्य-स्तरीय नीतियां तकनीकी लाभ को महानगरों से आगे, हर नागरिक तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।
Q1. डिजिटल इंडिया मिशन कब शुरू हुआ तथा इसके 9 स्तंभ कौन-कौन से हैं? Q2. UPI का पूर्ण रूप बताइए तथा वित्त वर्ष 2025-26 तक इसके लेनदेन की संख्या कितनी थी? Q3. आधार प्रमाणीकरण कितनी योजनाओं व सेवाओं में उपयोग होता है? Q4. डिजिलॉकर पर मार्च 2026 तक कितने उपयोगकर्ता पंजीकृत थे? Q5. इंडिया स्टैक क्या है? Q6. भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 किस बजट में घोषित हुआ तथा इसका बजट प्रावधान कितना है? Q7. डीप टेक स्टार्टअप को अब कितने वर्षों तक स्टार्टअप का दर्जा मिलता है? Q8. भारत का पहला डीप टेक स्टार्टअप नीति लाने वाला राज्य कौनसा है? Q9. RajSSO पोर्टल से कौन-कौनसी प्रमुख सेवाएं जुड़ी हैं? Q10. e-Mitra पोर्टल पर औसत दैनिक लेनदेन कितने हैं? Q11. जन आधार योजना किस सिद्धांत पर आधारित है तथा कब शुरू हुई? Q12. राजस्थान AI-ML नीति 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है? Q13. राजस्थान AI पोर्टल व iStart LMS का क्या कार्य है?