📡 अध्याय 2/10 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

नेटवर्किंग, दूरसंचार एवं मोबाइल टेलीफोनी

Networking, Telecommunication & Mobile Telephony | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. नेटवर्किंग: प्रकार, टोपोलॉजी एवं उपकरण (Networking: Types, Topology & Devices)
  2. एनालॉग एवं डिजिटल दूरसंचार (Analog vs Digital Telecommunication)
  3. आवृत्ति स्पेक्ट्रम (Frequency Spectrum): 4G/5G बैंड
  4. मोबाइल टेलीफोनी: 1G से 5G तथा भविष्य के 6G तक का विकास
🌟 क्या आप जानते हैं?

साल 1876 — अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने अपने सहायक को कमरे के दूसरे कोने से आवाज़ दी: "Mr. Watson, come here, I want to see you" — यह इतिहास का पहला टेलीफोन कॉल था, जो तार के सहारे मुश्किल से कुछ मीटर दूर तक पहुंचा था। आज, राजस्थान के किसी दूरदराज़ गांव में बैठा एक किसान अपने स्मार्टफोन से अमेरिका में पढ़ रहे अपने बेटे को बिना किसी तार के, बिना किसी रुकावट के हाई-डेफिनिशन वीडियो कॉल कर लेता है — और आवाज़/वीडियो मिलीसेकंड में हज़ारों किलोमीटर की यात्रा तय कर लेते हैं। यह चमत्कार कैसे संभव हुआ? इसके पीछे है नेटवर्किंग (Networking) और दूरसंचार (Telecommunication) की वह तकनीकी क्रांति, जिसने एनालॉग तारों से डिजिटल 5G तरंगों तक का सफर तय किया है। आइए, इस अध्याय में समझते हैं कि कंप्यूटर व मोबाइल आपस में कैसे जुड़ते हैं, सिग्नल कैसे यात्रा करता है, और भारत आज इस दूरसंचार क्रांति में विश्व में कहां खड़ा है।

1नेटवर्किंग: प्रकार, टोपोलॉजी एवं उपकरण (Networking: Types, Topology & Devices)

1.1 नेटवर्क क्या है? (What is a Network?)

नेटवर्क दो या दो से अधिक कंप्यूटरों/उपकरणों का ऐसा समूह है, जो आपस में किसी माध्यम (तार अथवा वायरलेस) से जुड़े होते हैं ताकि वे डेटा, संसाधन (जैसे प्रिंटर) और सूचना का आदान-प्रदान कर सकें। नेटवर्किंग का मुख्य उद्देश्य है — संसाधन साझाकरण (Resource Sharing), संचार (Communication) की सुविधा, तथा डेटा को केंद्रीकृत रूप से प्रबंधित करना।

1.2 नेटवर्क के प्रकार — आकार के आधार पर (Types of Network by Size)

भौगोलिक विस्तार (Geographical Coverage) के आधार पर नेटवर्क को मुख्यतः चार श्रेणियों में बांटा जाता है:

प्रकारपूरा नामसीमा (Range)उदाहरण
PANपर्सनल एरिया नेटवर्क (Personal Area Network)कुछ मीटर तक (~10 मी.)ब्लूटूथ हेडफोन, स्मार्टवॉच व मोबाइल के बीच कनेक्शन
LANलोकल एरिया नेटवर्क (Local Area Network)एक भवन/परिसर (कुछ किमी तक)स्कूल/ऑफिस का इंटरनल नेटवर्क, साइबर कैफे
MANमेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क (Metropolitan Area Network)एक शहर (5-50 किमी)केबल TV नेटवर्क, नगर निगम का सरकारी नेटवर्क
WANवाइड एरिया नेटवर्क (Wide Area Network)देश/महाद्वीप/संपूर्ण विश्वइंटरनेट, बैंकों का राष्ट्रव्यापी ATM नेटवर्क
WAN — वाइड एरिया नेटवर्क (देश/विश्व स्तर, जैसे इंटरनेट)
MAN — मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क (एक शहर)
LAN — लोकल एरिया नेटवर्क (एक भवन/परिसर)
PAN — पर्सनल एरिया नेटवर्क (कुछ मीटर)

चित्र: नेटवर्क के प्रकार — आकार व सीमा के अनुसार (नीचे से ऊपर बढ़ता दायरा)

1.3 नेटवर्क टोपोलॉजी (Network Topology)

टोपोलॉजी वह भौतिक अथवा तार्किक व्यवस्था (Layout) है, जिसमें नेटवर्क के विभिन्न उपकरण (नोड्स) आपस में जुड़े होते हैं। सही टोपोलॉजी का चुनाव नेटवर्क की गति, विश्वसनीयता व लागत तय करता है:

टोपोलॉजीसंरचनामुख्य लाभमुख्य हानि
बस (Bus)सभी उपकरण एक ही केंद्रीय केबल (Backbone) से जुड़ेसस्ती व स्थापित करना आसानमुख्य केबल टूटने पर पूरा नेटवर्क ठप
स्टार (Star)सभी उपकरण एक केंद्रीय हब/स्विच से जुड़ेएक नोड खराब होने पर बाकी नेटवर्क सुरक्षित; सबसे लोकप्रिय LAN संरचनाकेंद्रीय हब खराब होने पर पूरा नेटवर्क ठप
रिंग (Ring)हर उपकरण अपने अगल-बगल के दो उपकरणों से जुड़ा — गोलाकार लूपडेटा प्रवाह व्यवस्थित; टकराव (Collision) कमएक कड़ी टूटने पर पूरा लूप प्रभावित (जब तक डुअल-रिंग न हो)
मेश (Mesh)हर उपकरण सीधे हर दूसरे उपकरण से जुड़ाअत्यधिक विश्वसनीय व फॉल्ट-टॉलरेंट; सैन्य नेटवर्क में उपयोगमहंगी व जटिल — केबल/कनेक्शन बहुत अधिक चाहिए
ट्री (Tree)स्टार व बस का संयोजन — पदानुक्रमिक (Hierarchical) संरचनाअत्यधिक स्केलेबल; बड़े WAN के लिए उपयुक्तमुख्य शाखा (Root) खराब होने पर उससे जुड़े सभी हिस्से प्रभावित
हाइब्रिड (Hybrid)दो या अधिक टोपोलॉजी का मिश्रणलचीली — हर हिस्से के लिए सर्वोत्तम टोपोलॉजी चुनी जा सकती हैडिज़ाइन व प्रबंधन जटिल

1.4 नेटवर्क उपकरण (Networking Devices)

नेटवर्क को स्थापित करने व उसका प्रबंधन करने के लिए कुछ विशेष हार्डवेयर उपकरणों की आवश्यकता होती है:

उपकरणकार्य
हब (Hub)प्राप्त डेटा को बिना किसी बुद्धिमत्ता के सभी जुड़े उपकरणों को भेज देता है (Broadcast) — पुरानी व धीमी तकनीक
स्विच (Switch)डेटा को केवल सही गंतव्य (Destination) उपकरण तक भेजता है — हब से अधिक बुद्धिमान व तेज़
राउटर (Router)दो अलग-अलग नेटवर्कों के बीच डेटा पैकेट को सही रास्ता (Route) दिखाकर भेजता है — घर/ऑफिस को इंटरनेट से जोड़ता है
मॉडेम (Modem)डिजिटल सिग्नल को एनालॉग में (Modulation) व एनालॉग को डिजिटल में (Demodulation) बदलता है
गेटवे (Gateway)दो भिन्न प्रोटोकॉल/संरचना वाले नेटवर्कों के बीच अनुवादक (Translator) का कार्य करता है
रिपीटर (Repeater)कमज़ोर हो चुके सिग्नल को पुनः बढ़ाकर (Amplify) आगे भेजता है ताकि लंबी दूरी तय हो सके
ब्रिज (Bridge)एक बड़े नेटवर्क को दो छोटे भागों में बांटकर ट्रैफिक नियंत्रित करता है
एक्सेस प्वाइंट (Access Point)वायर्ड नेटवर्क से वायरलेस (Wi-Fi) उपकरणों को जोड़ता है

1.5 ट्रांसमिशन माध्यम (Transmission Media)

डेटा एक उपकरण से दूसरे उपकरण तक जिस माध्यम से यात्रा करता है, उसे ट्रांसमिशन मीडिया कहते हैं — यह दो प्रकार का होता है:

वायर्ड (Guided/Wired Media)
  • ट्विस्टेड पेयर केबल (Twisted Pair) — टेलीफोन/LAN में सामान्य उपयोग
  • कोएक्सियल केबल (Coaxial) — केबल TV में उपयोग
  • फाइबर ऑप्टिक केबल — प्रकाश संकेतों से डेटा भेजती है, सबसे तेज़ व सुरक्षित
  • BharatNet जैसी योजनाओं में फाइबर ऑप्टिक ही रीढ़ (Backbone) है
वायरलेस (Unguided/Wireless Media)
  • रेडियो तरंगें (Radio Waves) — मोबाइल नेटवर्क, FM रेडियो
  • माइक्रोवेव (Microwave) — टावर-टू-टावर लंबी दूरी संचार
  • उपग्रह संचार (Satellite) — दूरस्थ/पर्वतीय क्षेत्रों तक कवरेज
  • इन्फ्रारेड व ब्लूटूथ/वाई-फाई — अल्प दूरी वायरलेस संचार
💡 राउटर बनाम मॉडेम — घर में इंटरनेट कैसे आता है?

जब आप घर में इंटरनेट कनेक्शन लगवाते हैं, तो सबसे पहले मॉडेम इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) से आ रहे एनालॉग/ऑप्टिकल सिग्नल को डिजिटल डेटा में बदलता है। इसके बाद राउटर इस डिजिटल डेटा को Wi-Fi के माध्यम से आपके फोन, लैपटॉप व स्मार्ट TV जैसे कई उपकरणों तक एक साथ पहुंचाता है। आज के अधिकांश घरेलू उपकरण 'मॉडेम-राउटर' दोनों के कार्य एक ही बॉक्स में करते हैं।

फाइबर ऑप्टिक — भारत की डिजिटल रीढ़: फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा प्रकाश की गति से यात्रा करता है, जिससे यह तांबे के तार (Copper Wire) से हज़ारों गुना तेज़ है। भारत सरकार की BharatNet परियोजना के तहत जनवरी 2026 तक लगभग 7 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाई जा चुकी है और 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ा जा चुका है — मई 2026 में शुरू हुए BharatNet फेज़-III का लक्ष्य 2028 तक शेष सभी ग्राम पंचायतों व लगभग 6.25 लाख गांवों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ना है।

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2एनालॉग एवं डिजिटल दूरसंचार (Analog vs Digital Telecommunication)

2.1 दूरसंचार (Telecommunication) का अर्थ

दूरसंचार का अर्थ है — किसी भी माध्यम (तार, रेडियो तरंग, प्रकाश) से लंबी दूरी तक सूचना (आवाज़, टेक्स्ट, चित्र, वीडियो) का आदान-प्रदान करना। यह सूचना दो रूपों में यात्रा कर सकती है — एनालॉग (Analog) अथवा डिजिटल (Digital)।

2.2 एनालॉग सिग्नल (Analog Signal)

एनालॉग सिग्नल एक निरंतर (Continuous) तरंग होती है, जो समय के साथ लगातार बदलती रहती है — जैसे हमारी आवाज़ की प्राकृतिक ध्वनि तरंग। पुराने लैंडलाइन टेलीफोन व रेडियो प्रसारण एनालॉग सिग्नल पर आधारित थे। एनालॉग सिग्नल में दूरी बढ़ने के साथ 'शोर (Noise)' व सिग्नल की गुणवत्ता में गिरावट (Signal Degradation) की समस्या अधिक होती है।

2.3 डिजिटल सिग्नल (Digital Signal)

डिजिटल सिग्नल असंतत (Discrete) होता है, जिसे केवल दो अवस्थाओं — 0 और 1 (बाइनरी) में दर्शाया जाता है। आधुनिक मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट व कंप्यूटर संचार डिजिटल सिग्नल पर आधारित हैं। डिजिटल सिग्नल की गुणवत्ता लंबी दूरी तक भी लगभग समान बनी रहती है, इसे एन्क्रिप्ट (सुरक्षित) करना आसान है, और यह कम बिजली खपत करता है।

एनालॉग सिग्नल (Analog)
  • निरंतर तरंग (Continuous Wave)
  • शोर (Noise) की समस्या अधिक
  • दूरी बढ़ने पर गुणवत्ता घटती है
  • उदाहरण: पुराना लैंडलाइन फोन, 1G मोबाइल नेटवर्क
डिजिटल सिग्नल (Digital)
  • असंतत — केवल 0 और 1 (Binary)
  • शोर-रोधी (Noise Resistant), सुरक्षित
  • लंबी दूरी पर भी गुणवत्ता स्थिर
  • उदाहरण: 4G/5G मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट

2.4 मॉड्यूलेशन — एनालॉग व डिजिटल के बीच सेतु

चूंकि लंबी दूरी के तार व वायरलेस माध्यम मूल रूप से एनालॉग तरंगों को बेहतर ढंग से ले जाते हैं, इसलिए डिजिटल डेटा (0/1) को भेजने से पहले उसे एक एनालॉग वाहक तरंग (Carrier Wave) पर आरोपित किया जाता है — इस प्रक्रिया को 'मॉड्यूलेशन (Modulation)' कहते हैं, और प्राप्तकर्ता छोर पर इसे वापस डिजिटल डेटा में बदलने की प्रक्रिया को 'डीमॉड्यूलेशन (Demodulation)' कहते हैं। यही कारण है कि इस उपकरण को 'मॉडेम (MOdulator + DEModulator = MODEM)' कहा जाता है।

डिजिटल डेटा भेजने वाला (Sender)मॉडुलेशन Modem — Digital→Analogट्रांसमिशन तार/वायरलेस माध्यमडीमॉडुलेशन Modem — Analog→Digital

चित्र: मॉड्यूलेशन-डीमॉड्यूलेशन प्रक्रिया — डिजिटल डेटा का दूरसंचार माध्यम से सफर

2.5 भारत में दूरसंचार का ऐतिहासिक विकास

वर्षघटना
1851भारत में पहली टेलीग्राफ लाइन कोलकाता-डायमंड हार्बर के बीच शुरू
1881-82कोलकाता में भारत की पहली टेलीफोन एक्सचेंज सेवा शुरू
1986MTNL व VSNL की स्थापना — शहरी व अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार सेवाओं हेतु
1994राष्ट्रीय दूरसंचार नीति (National Telecom Policy - NTP) लागू — निजी क्षेत्र के लिए दरवाज़े खुले
1997भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की स्थापना
2000भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की स्थापना
2016रिलायंस जियो का शुभारंभ — मुफ्त डेटा व वॉइस कॉल से भारत में डेटा-क्रांति (Data Revolution)
2022भारत में 5G सेवाओं का आधिकारिक शुभारंभ (1 अक्टूबर, इंडिया मोबाइल कांग्रेस)
2026₹23.1 बिलियन डॉलर मूल्य की नई स्पेक्ट्रम नीलामी प्रस्तावित — 5G विस्तार व 6G की नींव हेतु
💡 क्यों बदली गई एनालॉग से डिजिटल तकनीक?

1990 के दशक तक भारत में टेलीफोन कॉल में अक्सर 'क्रॉस-टॉकिंग' (दूसरी लाइन की आवाज़ मिल जाना) व शोर की समस्या आम थी — यह एनालॉग सिग्नल की सीमा थी। 2G की डिजिटल तकनीक आने के बाद कॉल की गुणवत्ता बेहतर हुई, कॉल करना सस्ता हुआ और SMS जैसी नई सुविधा भी संभव हुई — यही कारण है कि आज विश्व की हर आधुनिक दूरसंचार प्रणाली डिजिटल तकनीक पर आधारित है।

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3आवृत्ति स्पेक्ट्रम (Frequency Spectrum): 4G/5G बैंड

3.1 आवृत्ति स्पेक्ट्रम क्या है? (What is Frequency Spectrum?)

प्रत्येक वायरलेस संचार (मोबाइल कॉल, Wi-Fi, रेडियो, TV प्रसारण) विद्युत-चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) की एक विशेष 'आवृत्ति (Frequency)' पर यात्रा करता है। आवृत्ति को हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है — यानी तरंग प्रति सेकंड कितनी बार दोलन (Oscillate) करती है। चूंकि स्पेक्ट्रम एक सीमित व मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है, इसलिए सरकार इसे लाइसेंस/नीलामी के माध्यम से दूरसंचार कंपनियों को आवंटित करती है।

3.2 स्पेक्ट्रम की श्रेणियाँ (Low, Mid & High Band)

मोबाइल नेटवर्क के लिए उपयोग होने वाले स्पेक्ट्रम को उसकी आवृत्ति सीमा के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है — प्रत्येक श्रेणी की गति व कवरेज दूरी में उलटा संबंध (Trade-off) होता है:

श्रेणी (Band)आवृत्ति रेंजविशेषता
लो बैंड (Low Band)1 GHz से कम (जैसे 700 MHz)लंबी दूरी तय करती है, दीवारों को आसानी से भेदती है (बेहतर इनडोर कवरेज), परंतु गति अपेक्षाकृत कम
मिड बैंड (Mid Band)1 GHz - 6 GHz (जैसे 3300-3670 MHz)गति व दूरी के बीच सबसे अच्छा संतुलन — 5G का मुख्य/प्राथमिक बैंड
हाई बैंड / mmWave24 GHz - 40 GHz (जैसे 26 GHz)बहुत अधिक गति (कई Gbps तक), परंतु दूरी बहुत कम — घने शहरी क्षेत्रों (स्टेडियम, हवाई अड्डे) हेतु उपयुक्त
हाई बैंड / mmWave (24-40 GHz) — अत्यंत तेज़, बहुत कम दूरी
मिड बैंड (1-6 GHz) — संतुलित गति व दूरी, 5G का मुख्य बैंड
लो बैंड (1 GHz से कम) — कम गति, बहुत लंबी दूरी व बेहतर इनडोर कवरेज

चित्र: स्पेक्ट्रम बैंड की तुलना — नीचे लो बैंड (अधिक कवरेज), ऊपर हाई बैंड (अधिक गति)

3.3 भारत में 4G एवं 5G स्पेक्ट्रम बैंड

जनरेशनभारत में उपयोग होने वाले प्रमुख बैंड
4G/LTE700 MHz, 850 MHz, 900 MHz, 1800 MHz, 2100 MHz, 2300 MHz, 2500 MHz
5G700 MHz (लो बैंड), 3300-3670 MHz (मिड/C-बैंड — मुख्य बैंड), 26 GHz (हाई बैंड/mmWave)
प्रस्तावित (2026 नीलामी)600 MHz, 800 MHz, 900 MHz, 1800 MHz, 2100 MHz, 2300 MHz, 2500 MHz, 3300 MHz, 26 GHz — संपूर्ण उपलब्ध स्पेक्ट्रम की नीलामी प्रस्तावित

3.4 स्पेक्ट्रम नीलामी — नियामक ढांचा (Regulatory Framework)

स्पेक्ट्रम इतना महंगा क्यों है?: स्पेक्ट्रम एक सीमित प्राकृतिक संसाधन है — किसी भी देश में हवा में उपलब्ध कुल उपयोगी आवृत्तियां तय हैं, इन्हें बढ़ाया नहीं जा सकता। इसलिए सरकार इन्हें नीलामी (Auction) के माध्यम से बेचती है, जिससे दूरसंचार कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और सरकार को राजस्व भी मिले — यही कारण है कि हर नई पीढ़ी (4G→5G→6G) की शुरुआत से पहले बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी होती है।

3.5 भविष्य की तैयारी — 6G की ओर भारत के कदम

भारत केवल 5G तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अगली पीढ़ी 6G तकनीक में वैश्विक अगुआ (Global Leader) बनने का लक्ष्य रखता है — इसी दिशा में 'भारत 6G विज़न (Bharat 6G Vision)' दस्तावेज़ लाया गया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत को 6G के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।

🚀 भारत 6G विज़न (Bharat 6G Vision) राष्ट्रीय 6G अनुसंधान एवं मानकीकरण पहल | 2023-2030 (लक्ष्य)

4मोबाइल टेलीफोनी: 1G से 5G तथा भविष्य के 6G तक का विकास

4.1 मोबाइल पीढ़ियों का परिचय

पिछले चार दशकों में मोबाइल संचार तकनीक ने हर 8-10 वर्षों में एक नई 'पीढ़ी (Generation)' के रूप में क्रांतिकारी छलांग लगाई है — हर पीढ़ी ने अपनी पिछली पीढ़ी की सीमाओं को दूर करते हुए गति, गुणवत्ता व नई सुविधाओं का विस्तार किया:

पीढ़ीकालतकनीकअधिकतम गतिमुख्य सुविधा
1G1980 का दशकएनालॉग (Analog)~2.4 kbpsकेवल वॉइस कॉल — गुणवत्ता खराब, कोई सुरक्षा (Encryption) नहीं
2G1990 का दशकडिजिटल — GSM/CDMA~64 kbpsवॉइस कॉल की बेहतर गुणवत्ता, SMS की शुरुआत, सीमित मोबाइल इंटरनेट
3G2000 का दशकCDMA2000/UMTS~2 Mbpsमोबाइल इंटरनेट, वीडियो कॉल, स्मार्टफोन युग की शुरुआत
4G/LTE2009 सेLTE (Long-Term Evolution)~100 Mbps-1 GbpsHD वीडियो स्ट्रीमिंग, VoLTE (इंटरनेट पर वॉइस कॉल), पूर्ण IP-आधारित नेटवर्क
5G2019 से (भारत: 2022)5G NR (New Radio)~1-20 Gbpsअल्ट्रा-लो लेटेंसी, IoT, स्वचालित वाहन, स्मार्ट सिटी, AR/VR
1G 1980s — एनालॉग2G 1990s — डिजिटल/SMS3G 2000s — इंटरनेट4G 2009+ — ब्रॉडबैंड5G 2019+ — अल्ट्रा स्पीड6G 2030 लक्ष्य — भविष्य

चित्र: मोबाइल टेलीफोनी पीढ़ियों का विकास-क्रम (1G से 6G तक)

💡 हर पीढ़ी ने कौन-सी नई समस्या हल की?

1G में कॉल की गुणवत्ता खराब थी और कोई भी इसे सुन सकता था (कोई एन्क्रिप्शन नहीं) — 2G ने डिजिटल तकनीक से इसे सुरक्षित व स्पष्ट बनाया तथा SMS जोड़ा। 3G ने धीमी इंटरनेट स्पीड को हल कर मोबाइल पर वेबसाइट व वीडियो देखना संभव बनाया। 4G ने बफरिंग (Buffering) की समस्या को लगभग समाप्त कर दिया और HD स्ट्रीमिंग को सामान्य बना दिया। 5G अब लेटेंसी (Latency — डेटा भेजने व प्रतिक्रिया मिलने के बीच का समय) को इतना कम कर देता है कि स्वचालित (Self-Driving) कारें व रिमोट सर्जरी जैसी तकनीकें संभव हो पा रही हैं।

4.2 भारत में मोबाइल टेलीफोनी की क्रांति

भारत में मोबाइल टेलीफोनी के विकास को सबसे अधिक गति सितंबर 2016 में मिली, जब रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने मुफ्त वॉइस कॉल व अत्यंत सस्ते डेटा प्लान के साथ बाज़ार में प्रवेश किया — इसने भारत को विश्व में सबसे सस्ती मोबाइल डेटा दरों वाले देशों में शामिल कर दिया तथा प्रति व्यक्ति डेटा खपत में भारी वृद्धि हुई। 1 अक्टूबर 2022 को भारत में आधिकारिक रूप से 5G सेवाओं का शुभारंभ हुआ, और आज देश तेज़ी से 5G विस्तार व 6G की तैयारी में जुटा है।

ऑपरेटरमार्केट शेयरकुल सब्सक्राइबर (मिलियन)
रिलायंस जियो (Reliance Jio)39.27%501.44
भारती एयरटेल (Airtel)37.89%483.81
वोडाफोन आइडिया (VI)15.56%198.66
BSNL7.28%92.91

चित्र: भारत के प्रमुख मोबाइल ऑपरेटर व बाज़ार हिस्सेदारी (TRAI डेटा, मई 2026) — कुल वायरलेस सब्सक्राइबर लगभग 1,294.46 मिलियन

BSNL का 4G से 5G की ओर सफर: सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BSNL का 4G नेटवर्क, C-DOT, टेजस नेटवर्क्स व TCS द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित है — यह भारत की आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। 2026 में BSNL का 4G नेटवर्क लगभग 98,000 साइट्स तक विस्तृत हो चुका है (मध्य-2024 में मात्र 9,000 साइट्स से), और लगभग ₹20,000 करोड़ के निवेश से 50,000-60,000 अतिरिक्त टावर लगाए जा रहे हैं। सरकार की योजना है कि 4G नेटवर्क स्थिर होते ही मौजूदा साइट्स को सॉफ्टवेयर अपग्रेड के ज़रिए सीधे 5G में बदला जाए।

🏛️ दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख भारतीय पहलें

4.3 राजस्थान में दूरसंचार अवसंरचना

राजस्थान, अपने विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल (देश में सबसे बड़ा राज्य) व विरल जनसंख्या घनत्व के कारण, दूरसंचार अवसंरचना विस्तार की दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण परंतु प्राथमिकता वाला राज्य है। राज्य सरकार की RajNet परियोजना — राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों (जिला मुख्यालय से पंचायत स्तर तक) को हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क से जोड़ती है, जो e-Mitra, RajSSO जैसी डिजिटल सेवाओं की रीढ़ है (अध्याय 9 में विस्तार से देखें)। BharatNet परियोजना के तहत राजस्थान की हज़ारों ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है, जिससे थार मरुस्थल के दूरदराज़ गांवों तक भी इंटरनेट व मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच रही है — यही अवसंरचना आगे चलकर राज्य के डिजिटल शासन (Digital Governance) व AI-ML नीति 2026 (अध्याय 9 देखें) को व्यावहारिक रूप देने का आधार बनती है।

🎯 नेटवर्किंग, दूरसंचार एवं मोबाइल टेलीफोनी — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 📝

Q1. LAN, MAN व WAN में अंतर स्पष्ट कीजिए। Q2. स्टार टोपोलॉजी, बस टोपोलॉजी से किस प्रकार बेहतर है? उदाहरण सहित समझाइए। Q3. राउटर व मॉडेम में क्या अंतर है? Q4. एनालॉग व डिजिटल सिग्नल में अंतर स्पष्ट करते हुए मॉडेम की भूमिका बताइए। Q5. भारत में स्पेक्ट्रम आवंटन व नीलामी की प्रक्रिया में TRAI तथा DoT की भूमिका बताइए। Q6. 5G की मिड बैंड व हाई बैंड (mmWave) स्पेक्ट्रम में क्या अंतर है? Q7. मोबाइल टेलीफोनी की पीढ़ियों (1G से 5G) का विकास-क्रम उनकी मुख्य विशेषताओं सहित समझाइए। Q8. भारत के "भारत 6G विज़न" पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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