🌐 अध्याय 3/10 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

इंटरनेट एवं सूचना-संचार प्रौद्योगिकी (ICT)

Internet & Information Communication Technology | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. इंटरनेट का इतिहास, WWW एवं प्रोटोकॉल (Internet History, WWW & Protocols)
  2. ई-गवर्नेंस में ICT का उपयोग (Use of ICT in e-Governance)
  3. भारत में इंटरनेट प्रवेश (Internet Penetration in India) — नवीनतम आंकड़े
🌟 क्या आप जानते हैं?

29 अक्टूबर 1969 — अमेरिका की दो यूनिवर्सिटीज़ (UCLA और स्टैनफोर्ड) के बीच एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक सिर्फ एक शब्द भेजने की कोशिश हो रही थी: "LOGIN"। लेकिन जैसे ही 'L' और 'O' अक्षर भेजे गए, सिस्टम क्रैश हो गया — पूरा शब्द कभी नहीं पहुंचा! यही टूटा-फूटा "LO" संदेश आज के अरबों-खरबों डेटा से भरे इंटरनेट की पहली सांस थी। आज, ठीक उसी तकनीक की नींव पर, राजस्थान के किसी दूरदराज़ गांव में बैठा एक किसान अपने मोबाइल से मंडी भाव, मौसम पूर्वानुमान और सरकारी योजना का लाभ चंद सेकंडों में पा लेता है — बिना किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए। आइए, इस अध्याय में समझते हैं कि इंटरनेट कैसे बना, यह काम कैसे करता है, और यह कैसे भारत को गांव-गांव तक डिजिटल रूप से जोड़ रहा है।

1इंटरनेट का इतिहास, WWW एवं प्रोटोकॉल (Internet History, WWW & Protocols)

1.1 इंटरनेट क्या है? (What is the Internet?)

इंटरनेट (Internet) शब्द 'इंटरकनेक्टेड नेटवर्क (Interconnected Network)' का संक्षिप्त रूप है — यह दुनिया भर के करोड़ों कंप्यूटरों, सर्वरों व उपकरणों का एक विशाल जाल (Network of Networks) है, जो एक-दूसरे से डेटा साझा करने हेतु सामान्य नियमों (Protocols) के अनुसार आपस में जुड़े होते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटरनेट पर किसी एक कंपनी या सरकार का स्वामित्व नहीं है — यह लाखों छोटे-बड़े नेटवर्कों का सामूहिक व विकेंद्रीकृत (Decentralized) ढांचा है, जिसे कोई भी अकेला बंद नहीं कर सकता।

1.2 इंटरनेट का इतिहास (History of the Internet)

इंटरनेट का जन्म शीत युद्ध (Cold War) के दौर में अमेरिकी सेना की एक ज़रूरत से हुआ — ऐसा संचार नेटवर्क बनाना जो युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति में भी बाधित न हो। इसी सोच से 'ARPANET' का जन्म हुआ, जो आगे चलकर आज के इंटरनेट में विकसित हुआ:

वर्षघटना
1969ARPANET (अमेरिकी रक्षा विभाग की परियोजना) के माध्यम से पहला कंप्यूटर-टू-कंप्यूटर संदेश भेजा गया — यहीं से इंटरनेट की शुरुआत मानी जाती है
1974वैज्ञानिक विंट सर्फ (Vint Cerf) व बॉब कान (Bob Kahn) ने ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल (TCP) पर शोध-पत्र प्रकाशित किया
1 जनवरी 1983ARPANET ने पूरी तरह TCP/IP प्रोटोकॉल अपनाया — इसी दिन को आधुनिक इंटरनेट का जन्मदिन माना जाता है; साथ ही DNS (डोमेन नेम सिस्टम) की शुरुआत हुई
1989-90ब्रिटिश वैज्ञानिक टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee) ने स्विट्ज़रलैंड की CERN प्रयोगशाला में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का आविष्कार किया
1991पहला वेब ब्राउज़र व सर्वर तैयार; 6 अगस्त 1991 को विश्व की पहली वेबसाइट प्रकाशित हुई
1993-94वर्ल्ड वाइड वेब आम जनता के लिए खुला — वेबसाइटें आम उपयोग में आने लगीं
15 अगस्त 1995भारत में सार्वजनिक इंटरनेट सेवा VSNL द्वारा शुरू की गई
💡 इंटरनेट का पहला "टूटा हुआ" संदेश

29 अक्टूबर 1969 की रात, UCLA के एक छात्र ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर पर "LOGIN" शब्द भेजने की कोशिश की। जैसे ही उसने 'L' और 'O' अक्षर टाइप किए, प्राप्तकर्ता कंप्यूटर क्रैश हो गया — पूरा शब्द कभी नहीं पहुंचा। यह अधूरा संदेश ही इतिहास का पहला इंटरनेट संदेश बना — आज उसी नींव पर हर सेकंड अरबों संदेश, वीडियो व डेटा दुनिया भर में यात्रा करते हैं।

1.3 भारत में इंटरनेट का सफर

भारत में इंटरनेट की यात्रा 1986 में शुरू हुई, जब ERNET (Education and Research Network) के माध्यम से केवल शिक्षा व अनुसंधान संस्थानों को सीमित पहुंच मिली। 1995 में सरकारी कार्यालयों को आपस में जोड़ने हेतु NICNET (नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर नेटवर्क) स्थापित किया गया। परंतु आम जनता के लिए इंटरनेट का वास्तविक शुभारंभ 15 अगस्त 1995 को हुआ, जब सरकारी कंपनी VSNL (विदेश संचार निगम लिमिटेड) ने 'गेटवे इंटरनेट एक्सेस सर्विस (GIAS)' के नाम से डायल-अप इंटरनेट सेवा शुरू की — उस समय गति मात्र 9.6 kbps थी और 250 घंटे के उपयोग के लिए ₹5,200 चुकाने पड़ते थे। आज, तीन दशक बाद, भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 100 करोड़ को पार कर चुकी है (विस्तृत आंकड़े सेक्शन 3 में)।

1.4 वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) — इंटरनेट से किस प्रकार भिन्न?

अक्सर लोग 'इंटरनेट' व 'वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)' को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं — इंटरनेट वह भौतिक अवसंरचना (Infrastructure) है जिससे कंप्यूटर आपस में जुड़े हैं, जबकि WWW उस अवसंरचना पर चलने वाली एक 'सेवा (Service)' है, जो हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़ों (वेबपेज) को हाइपरलिंक के माध्यम से आपस में जोड़ती है।

💡 पहली वेबसाइट की कहानी

6 अगस्त 1991 को टिम बर्नर्स-ली ने दुनिया की पहली वेबसाइट (info.cern.ch) प्रकाशित की, जो स्वयं 'वर्ल्ड वाइड वेब प्रोजेक्ट' के बारे में जानकारी देती थी। रोचक बात यह है कि टिम बर्नर्स-ली ने WWW तकनीक का पेटेंट (Patent) कभी नहीं करवाया और इसे पूरी दुनिया के लिए मुफ्त व खुला (Free & Open) रखा — यही कारण है कि आज कोई भी व्यक्ति बिना किसी लाइसेंस शुल्क के वेबसाइट बना सकता है।

1.5 प्रोटोकॉल (Protocols) — इंटरनेट के नियम

प्रोटोकॉल नियमों का वह समूह है, जो तय करता है कि डेटा किस प्रारूप में, कैसे व किस क्रम में एक उपकरण से दूसरे उपकरण तक भेजा जाएगा। इंटरनेट पर संचार के लिए कई प्रोटोकॉल मिलकर कार्य करते हैं:

प्रोटोकॉलपूरा नामकार्य
TCPTransmission Control Protocolडेटा को छोटे पैकेट्स में बांटना तथा उनकी विश्वसनीय (बिना गड़बड़ी के) डिलीवरी सुनिश्चित करना
IPInternet Protocolनेटवर्क पर हर डिवाइस को एक अनूठा पता (Address) देकर डेटा को सही गंतव्य तक भेजना (रूटिंग)
HTTPHyperText Transfer Protocolवेब ब्राउज़र व सर्वर के बीच वेबपेज लोड करने के लिए डेटा का आदान-प्रदान (असुरक्षित)
HTTPSHTTP SecureHTTP का सुरक्षित संस्करण — डेटा एन्क्रिप्टेड (कोडेड) होकर भेजा जाता है, बैंकिंग व लॉगिन हेतु आवश्यक
FTPFile Transfer Protocolकंप्यूटरों के बीच फाइलें अपलोड/डाउनलोड करने के लिए उपयोग
SMTPSimple Mail Transfer Protocolईमेल भेजने के लिए उपयोग होने वाला प्रोटोकॉल
POP/IMAPPost Office/Internet Message Access Protocolईमेल सर्वर से प्राप्त करने व प्रबंधित करने के लिए उपयोग
1. ब्राउज़र URL टाइप करना2. DNS सर्वर IP पता खोजना3. वेब सर्वर डेटा भेजना4. वेबपेज ब्राउज़र में प्रदर्शन

चित्र: वेबपेज कैसे खुलता है — ब्राउज़र से लेकर स्क्रीन तक डेटा का सफर

1.6 IP एड्रेस — डिवाइस की पहचान

इंटरनेट से जुड़ा हर उपकरण एक अनूठे संख्यात्मक पते — 'IP एड्रेस' से पहचाना जाता है, ठीक वैसे ही जैसे हर घर का एक अनूठा पता होता है:

IPv4 (पुराना संस्करण)
  • 32-बिट पता — जैसे 192.168.1.1
  • कुल लगभग 4.3 अरब पते ही उपलब्ध
  • बढ़ते उपकरणों के कारण पते अब लगभग समाप्त
  • आज भी सर्वाधिक उपयोग में
IPv6 (नया संस्करण)
  • 128-बिट पता — जैसे 2001:0db8:85a3::8a2e:0370
  • व्यावहारिक रूप से असीमित पते (340 अंडेसिलियन)
  • IoT युग की बढ़ती डिवाइस मांग हेतु आवश्यक
  • धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है

DNS — इंटरनेट की "फोन डायरेक्टरी": जब आप ब्राउज़र में "google.com" टाइप करते हैं, असल में कंप्यूटर एक संख्यात्मक IP पता (जैसे 142.250.195.100) ढूंढता है, क्योंकि मशीनें नामों से नहीं, संख्याओं से पहचान करती हैं। यह अनुवाद कार्य DNS (Domain Name System) द्वारा किया जाता है — इसे "इंटरनेट की फोन डायरेक्टरी" भी कहा जाता है, जो आसान-याद नामों को जटिल IP पतों में बदल देती है।

1.7 राजस्थान में इंटरनेट अवसंरचना — RajNet

जिस तरह पूरे देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी हेतु BharatNet राष्ट्रीय परियोजना कार्यरत है, उसी तर्ज़ पर राजस्थान सरकार ने अपने राज्य में सरकारी कार्यालयों व ग्राम पंचायतों तक नेटवर्क पहुंचाने हेतु 'RajNet' नामक राज्य-स्तरीय परियोजना शुरू की है — जो राज्य के डिजिटल गवर्नेंस ढांचे की रीढ़ है।

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2ई-गवर्नेंस में ICT का उपयोग (Use of ICT in e-Governance)

2.1 ई-गवर्नेंस क्या है? (What is e-Governance?)

ई-गवर्नेंस (Electronic Governance) का अर्थ है — सरकारी सेवाओं, सूचना के आदान-प्रदान व प्रशासनिक कार्यों को सूचना-संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से नागरिकों, व्यवसायों व अन्य सरकारी विभागों तक पहुंचाना। इसका मूल उद्देश्य है — पारदर्शिता (Transparency) बढ़ाना, भ्रष्टाचार व बिचौलियों को घटाना, तथा सेवाओं को तेज़, सस्ता व सुलभ बनाना।

2.2 ई-गवर्नेंस के चार मॉडल

मॉडलपूरा नामउदाहरण
G2CGovernment to Citizen (सरकार से नागरिक)DigiLocker, e-Courts, पासपोर्ट सेवा, ऑनलाइन जन्म प्रमाण-पत्र
G2BGovernment to Business (सरकार से व्यवसाय)GST पोर्टल, उद्यम पंजीकरण, ई-टेंडरिंग
G2GGovernment to Government (सरकार से सरकार)अंतर-विभागीय डेटा साझाकरण, e-Office
G2EGovernment to Employee (सरकार से कर्मचारी)ऑनलाइन वेतन-पर्ची, कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) पोर्टल

2.3 भारत में ई-गवर्नेंस का विकास

भारत में औपचारिक ई-गवर्नेंस यात्रा 2006 में शुरू हुए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan - NeGP) से हुई। इसके बाद 1 जुलाई 2015 को शुरू हुए 'डिजिटल इंडिया मिशन' ने इसे नई ऊंचाई दी — जिसने 1 जुलाई 2026 को अपने 11 वर्ष पूर्ण किए। डिजिटल इंडिया तीन मुख्य विज़न क्षेत्रों — डिजिटल अवसंरचना (Digital Infrastructure), ऑन-डिमांड शासन-सेवाएं (Governance on Demand) व नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण (Digital Empowerment) — पर आधारित है और नौ स्तंभों (Pillars) पर कार्य करता है:

स्तंभ (Pillar)विवरण
ब्रॉडबैंड हाईवेदेशभर में हाई-स्पीड इंटरनेट अवसंरचना (जैसे BharatNet)
सर्वव्यापी मोबाइल कनेक्टिविटीहर क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क कवरेज सुनिश्चित करना
पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्रामकॉमन सर्विस सेंटर (CSC) व डाकघरों के माध्यम से इंटरनेट पहुंच
ई-गवर्नेंससरकारी प्रक्रियाओं को सरल व ऑनलाइन बनाना
ई-क्रांतिसेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी (शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि क्षेत्र में)
सूचना सबके लिएसरकारी डेटा व सूचना को ऑनलाइन खुले रूप में उपलब्ध कराना (Open Data)
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माणभारत में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा (Make in India)
IT for Jobsयुवाओं को IT क्षेत्र हेतु कौशल-प्रशिक्षण देना
अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्रामत्वरित प्रभाव वाली परियोजनाएं (जैसे बायोमेट्रिक अटेंडेंस)

2.4 प्रमुख ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म (नवीनतम आंकड़े)

प्लेटफॉर्मउद्देश्यनवीनतम आंकड़े (2026)
DigiLockerदस्तावेज़ों (मार्कशीट, ड्राइविंग लाइसेंस, RC) का डिजिटल भंडारण व सत्यापनमार्च 2026 तक 70.69 करोड़+ पंजीकृत उपयोगकर्ता, 850 करोड़+ डिजिटल दस्तावेज़ जारी
UMANGएक ही ऐप में सैकड़ों सरकारी सेवाओं तक पहुंच2017 में 166 सेवाओं से बढ़कर जून 2026 तक 2,572 सेवाएं; लेनदेन 3.9 करोड़ से बढ़कर 796.69 करोड़
MyGovनागरिक भागीदारी व नीति-सुझाव हेतु सरकारी मंचसरकार व नागरिकों के बीच सीधा संवाद व पारदर्शिता का प्लेटफॉर्म
आधार (Aadhaar)12-अंकीय विशिष्ट पहचान संख्या — DBT व पहचान सत्यापन की रीढ़भारत की लगभग संपूर्ण वयस्क जनसंख्या को कवर करने वाली विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली
UPIतुरंत मोबाइल-आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली (NPCI)जून 2026 में 2,272 करोड़ लेनदेन, ₹28.92 लाख करोड़ मूल्य — 23% वार्षिक वृद्धि

🚀 यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) डिजिटल भुगतान क्रांति (NPCI द्वारा संचालित) | 2016-वर्तमान

2.5 JAM ट्रिनिटी (JAM Trinity)

JAM ट्रिनिटी — जन धन बैंक खाता (Jan Dhan), आधार (Aadhaar) व मोबाइल नंबर (Mobile) — तीनों को आपस में जोड़कर सरकार सब्सिडी व कल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में बिना बिचौलियों के भेजती है, जिसे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) कहा जाता है। इससे 'लीकेज' (गलत हाथों में पैसा जाना) में भारी कमी आई है और सरकार को हज़ारों करोड़ रुपये की बचत हुई है।

2.6 राजस्थान का ई-गवर्नेंस मॉडल — देश में अग्रणी

राजस्थान को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के सबसे नवाचारी (Innovative) राज्यों में गिना जाता है — राज्य ने कई ऐसे प्लेटफॉर्म बनाए हैं, जिन्हें बाद में अन्य राज्यों व केंद्र सरकार ने भी अपनी योजनाओं का आधार बनाया।

🚀 ई-मित्र (e-Mitra) — राजस्थान का G2C सुपर-मॉडल राज्य सरकार की एकीकृत नागरिक सेवा वितरण प्रणाली | 2006-वर्तमान

प्लेटफॉर्मउद्देश्यमुख्य विशेषता
जन आधार (Jan Aadhaar)राज्य की एकीकृत परिवार व व्यक्तिगत पहचान प्रणाली — पुराने भामाशाह कार्ड का स्थान लिया'एक नंबर, एक कार्ड, एक पहचान' — परिवार को 10-अंकीय Family ID व सदस्य को 11-अंकीय Member ID; फर्ज़ी लाभार्थी पहचान कर ₹435 करोड़ की सरकारी बचत
राजस्थान SSO (Single Sign-On)एक ही यूज़रनेम-पासवर्ड से राज्य के सभी सरकारी पोर्टल तक पहुंचsso.rajasthan.gov.in के माध्यम से जन आधार अपडेट, ई-मित्र सेवाएं, भर्ती परीक्षा फॉर्म व अन्य दर्जनों पोर्टल एकीकृत
राजस्थान संपर्क (Sampark)नागरिक शिकायत निवारण पोर्टलडायल 181 (चौबीसों घंटे उपलब्ध) व टोल-फ्री 1800-180-6127 पर शिकायत दर्ज; वेब, फोन व ईमेल — तीनों माध्यम से शिकायत संभव, संबंधित विभाग को स्वतः अंतरित
💡 ई-मित्र — एक क्लिक में सैकड़ों सरकारी सेवाएं

कल्पना कीजिए, आपको बिजली का बिल भरना है, जाति प्रमाण-पत्र बनवाना है और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश परमिट भी चाहिए — पहले इन तीनों कामों के लिए तीन अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। आज राजस्थान के किसी भी गांव या शहर के नज़दीकी ई-मित्र कियोस्क पर जाकर यह तीनों काम एक ही जगह, कुछ ही मिनटों में हो जाते हैं। यही कारण है कि ई-मित्र मॉडल को देश के सबसे सफल G2C (Government to Citizen) मॉडलों में गिना जाता है, और कई अन्य राज्यों ने इसी ढांचे से प्रेरणा लेकर अपने नागरिक सेवा केंद्र बनाए।

ई-गवर्नेंस के लाभ (Benefits)
  • पारदर्शिता (Transparency) में वृद्धि
  • भ्रष्टाचार व बिचौलियों में कमी
  • समय व धन दोनों की बचत
  • 24×7 सेवा उपलब्धता — कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं
चुनौतियां (Challenges)
  • डिजिटल डिवाइड — ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित पहुंच
  • साइबर सुरक्षा व डेटा गोपनीयता के जोखिम
  • डिजिटल साक्षरता की कमी
  • दूरदराज़ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या
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3भारत में इंटरनेट प्रवेश (Internet Penetration in India) — नवीनतम आंकड़े

3.1 भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के ताज़ा आंकड़े

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक भारत में कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 109.28 करोड़ (1,092.79 मिलियन) तक पहुंच चुकी है — दिसंबर 2025 के 102.86 करोड़ (1,028.61 मिलियन) की तुलना में यह 6.24% की तिमाही वृद्धि दर्शाता है।

श्रेणीआंकड़ा (मार्च 2026)
कुल इंटरनेट उपयोगकर्ता109.28 करोड़ (1,092.79 मिलियन)
ग्रामीण उपयोगकर्ता44.09 करोड़ (440.87 मिलियन)
शहरी उपयोगकर्ता65.19 करोड़ (651.93 मिलियन)
ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ता (न्यूनतम 2 Mbps)106.59 करोड़ (1,065.88 मिलियन)
नैरोबैंड उपयोगकर्ता2.69 करोड़ (26.91 मिलियन)

3.2 ग्रामीण बनाम शहरी इंटरनेट पहुंच (Digital Divide)

संख्या में वृद्धि के बावजूद, ग्रामीण व शहरी भारत के बीच इंटरनेट पहुंच में भारी असमानता बनी हुई है — शहरी क्षेत्रों में प्रति 100 जनसंख्या पर इंटरनेट पहुंच (Penetration Rate) 100 से भी ऊपर है (क्योंकि कई लोगों के पास एक से अधिक डिवाइस/कनेक्शन हैं), जबकि ग्रामीण भारत अभी आधे रास्ते पर ही है:

शहरी क्षेत्र — 126.80 कनेक्शन प्रति 100 जनसंख्या
ग्रामीण क्षेत्र — 48.31 कनेक्शन प्रति 100 जनसंख्या

चित्र: शहरी बनाम ग्रामीण इंटरनेट पहुंच दर की तुलना (TRAI, मार्च 2026)

गांवों तक मोबाइल इंटरनेट कवरेज: TRAI के अनुसार भारत के लगभग 95% गांवों में 3G/4G कनेक्टिविटी उपलब्ध है, जबकि लगभग 80% गांवों में 5G कवरेज पहुंच चुकी है — यह BharatNet (अध्याय-1 देखें) व निजी दूरसंचार कंपनियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। फिर भी, कवरेज होने और वास्तविक उपयोग (Adoption) में अंतर बना रहता है — यही डिजिटल डिवाइड की असली चुनौती है।

💡 डिजिटल डिवाइड — एक व्यावहारिक उदाहरण

शहर में रहने वाला व्यक्ति जहां प्रति व्यक्ति एक से अधिक इंटरनेट डिवाइस (मोबाइल + लैपटॉप + ब्रॉडबैंड) के साथ जीता है, वहीं ग्रामीण भारत में अब भी आधे से अधिक लोगों के पास इंटरनेट की पहुंच नहीं है। इसी अंतर को 'डिजिटल डिवाइड (Digital Divide)' कहा जाता है। इसे पाटने के लिए BharatNet, PM-WANI तथा PMGDISHA (अध्याय 1 व 2 में विस्तार से पढ़ें) जैसी योजनाएं एक साथ मिलकर काम कर रही हैं — अवसंरचना (Infrastructure), पहुंच (Access) व साक्षरता (Literacy) — तीनों मोर्चों पर।

ग्रामीण भारत — अब सबसे तेज़ बढ़ता इंटरनेट बाज़ार: एक दिलचस्प बदलाव यह है कि 2026 की शुरुआत में ग्रामीण भारत में सक्रिय (Active) इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 54.8 करोड़ (548 मिलियन) से अधिक हो चुकी है — यानी देश के कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का 57% से अधिक हिस्सा अब गांवों से है, और यह संख्या शहरी क्षेत्रों की तुलना में लगभग चार गुना तेज़ गति से बढ़ रही है। सस्ते स्मार्टफोन, सस्ता डेटा व स्थानीय भाषा में उपलब्ध कंटेंट इस बदलाव के मुख्य कारण हैं।

3.3 राजस्थान में डिजिटल पहुंच — RajNet व e-Mitra का योगदान

राजस्थान में ग्रामीण डिजिटल पहुंच बढ़ाने में राज्य की अपनी RajNet परियोजना (सेक्शन 1.7 में विस्तार से पढ़ें) की केंद्रीय भूमिका है — राज्य की 9,372 ग्राम पंचायतों में नेटवर्क कनेक्टिविटी के दम पर ही 55,000 से अधिक ई-मित्र कियोस्क व हज़ारों 'भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र' संचालित हो पा रहे हैं। इस तरह राजस्थान में इंटरनेट पहुंच केवल व्यक्तिगत मोबाइल कनेक्शन तक सीमित नहीं, बल्कि सामूहिक पहुंच-बिंदुओं (Shared Access Points) के माध्यम से भी नागरिकों तक पहुंचती है — यह मॉडल विशेष रूप से उन परिवारों के लिए सहायक है, जिनके पास अभी व्यक्तिगत स्मार्टफोन/इंटरनेट कनेक्शन नहीं है।

3.4 इंटरनेट प्रवेश बढ़ने के प्रमुख कारण

1. सस्ते स्मार्टफोन व सस्ता मोबाइल डेटा — विशेषकर 2016 की जियो-क्रांति के बाद।

2. BharatNet व PM-WANI जैसी सरकारी अवसंरचना योजनाएं — गांव-गांव तक फाइबर व वाई-फाई पहुंचाना।

3. UPI, DigiLocker जैसी दैनिक जीवन में उपयोगी डिजिटल सेवाएं — जिससे इंटरनेट उपयोग करने की एक ठोस वजह मिली।

4. कोविड-19 महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा व वर्क-फ्रॉम-होम की आदत — डिजिटल अपनाव में तेज़ी।

🏛️ भारत में इंटरनेट प्रवेश बढ़ाने वाली प्रमुख योजनाएं (सारांश — विस्तृत विवरण अध्याय 1 व 2 में)

🎯 इंटरनेट एवं सूचना-संचार प्रौद्योगिकी (ICT) — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 📝

Q1. इंटरनेट व वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) में अंतर स्पष्ट कीजिए। Q2. HTTP व HTTPS में क्या अंतर है? इनमें से कौन-सा अधिक सुरक्षित है और क्यों? Q3. भारत में इंटरनेट के विकास का संक्षिप्त इतिहास लिखिए। Q4. ई-गवर्नेंस के चार मॉडल (G2C, G2B, G2G, G2E) को उदाहरण सहित समझाइए। Q5. DigiLocker व UMANG ऐप के उद्देश्य व लाभ बताइए। Q6. JAM ट्रिनिटी क्या है? इसने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को किस प्रकार सशक्त बनाया? Q7. भारत में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) के कारण एवं समाधान बताइए। Q8. IPv4 व IPv6 में अंतर स्पष्ट कीजिए। Q9. राजस्थान के ई-मित्र मॉडल की विशेषताएं व उपलब्धियां बताइए। Q10. जन आधार योजना, भामाशाह कार्ड से किस प्रकार भिन्न व बेहतर है? Q11. राजस्थान संपर्क पोर्टल की कार्यप्रणाली संक्षेप में समझाइए।

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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← अध्याय 2: नेटवर्किंग, दूरसंचार एवं मोबाइल टेलीफोनी अध्याय 4: ICT में हालिया विकास (AI-ML, Big Data, IoT, Blockchain, VR/AR, साइबर सुरक्षा) →