🔩 अध्याय 3/11 — रसायन विज्ञान

धातु, अधातु एवं उपधातु

Metal, Non-Metal and Metalloids | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. धातुओं के भौतिक गुण (Physical Properties of Metals)
  2. धातुओं के रासायनिक गुण एवं सक्रियता श्रेणी
  3. अधातुओं के भौतिक-रासायनिक गुण एवं प्रमुख अधातु
  4. उपधातु (Metalloids) — गुण, उपयोग एवं महत्वपूर्ण खनिज
  5. संक्षारण (Corrosion) — कारण एवं रोकथाम
🌟 क्या आप जानते हैं?

दिल्ली के महरौली इलाके में लगभग 1600 साल पुराना एक लोहे का खंभा खड़ा है — कुतुब मीनार परिसर का प्रसिद्ध लौह स्तंभ। हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों की धूप, बारिश और नमी झेलने के बावजूद इस पर आज तक जंग नहीं लगी। जबकि आपके घर की लोहे की कोई भी वस्तु — जैसे कैंची या कुल्हाड़ी — बरसात के कुछ ही हफ्तों में जंग खा जाती है। आखिर वह कौन-सा रहस्य है, जिसने प्राचीन भारतीय धातुकर्मियों को ऐसा लोहा बनाना सिखाया, जो आधुनिक विज्ञान को भी चकित कर देता है? इस रहस्य को समझने के लिए हमें पहले यह जानना होगा कि धातु, अधातु और उपधातु आखिर हैं क्या, इनके गुण एक-दूसरे से इतने अलग क्यों हैं, और संक्षारण (जंग लगना) की प्रक्रिया वास्तव में काम कैसे करती है — यही इस अध्याय की यात्रा है।

1धातुओं के भौतिक गुण (Physical Properties of Metals)

धातुएँ वे तत्व हैं जो सामान्यतः इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन (Cations) बनाते हैं और धात्विक बंध (Metallic Bond) के कारण उनकी विशिष्ट भौतिक विशेषताएँ दिखाई देती हैं। धातुओं की बाह्य कक्षा में सामान्यतः 1-3 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए ये आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग देती हैं।

1.1 भौतिक अवस्था एवं कठोरता

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

थर्मामीटर में उपयोग होने वाला चमकदार तरल पारा है — यह इसलिए संभव है क्योंकि पारा एकमात्र धातु है जो सामान्य कमरे के तापमान पर द्रव रहती है। इसके विपरीत, यदि आप कभी सोडियम धातु का एक छोटा टुकड़ा देखें (प्रयोगशाला में), तो वह चाकू से मक्खन जैसी आसानी से कट जाता है — यह उसकी असाधारण मुलायमियत को दर्शाता है।

1.2 आघातवर्धनीयता, तन्यता एवं ध्वनिकता

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

मंदिरों में बजने वाली घंटी और स्कूल की घंटी दोनों धातु की बनी होती हैं, क्योंकि धातुएँ टकराने पर स्पष्ट, गूंजने वाली ध्वनि उत्पन्न करती हैं — यही ध्वनिक गुण है। इसके विपरीत, यदि आप प्लास्टिक या लकड़ी की वस्तु को टकराएँ, तो ऐसी गूंजने वाली ध्वनि नहीं आती, क्योंकि ये अधातु प्रकृति की होती हैं।

1.3 चालकता, घनत्व, गलनांक एवं धात्विक चमक

📐 धातुओं के कुछ रोचक रिकॉर्ड — सूत्र/अभिक्रिया

सबसे हल्की धातु — लीथियम (Li)
सबसे भारी/घनत्व वाली धातु — ऑस्मियम (Os)
उच्चतम गलनांक — टंगस्टन (W)
सबसे अधिक तन्य व आघातवर्धनीय — सोना (Au)

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

खाना बनाने के बर्तन प्रायः एल्युमिनियम या ताँबे से बनाए जाते हैं, क्योंकि ये ऊष्मा के अच्छे चालक हैं और जल्दी गर्म होकर भोजन को समान रूप से पकाते हैं। वहीं बिजली के बल्ब के अंदर का पतला तार टंगस्टन धातु का बना होता है, क्योंकि इसका गलनांक (लगभग 3400°C) सभी धातुओं में सबसे अधिक है, जिससे वह तेज़ धारा से गर्म होकर भी पिघलता नहीं।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
धात्विक बंधआघातवर्धनीयतातन्यताध्वनिकतामुक्त इलेक्ट्रॉनधात्विक चमकटंगस्टनऑस्मियम
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2धातुओं के रासायनिक गुण एवं सक्रियता श्रेणी

धातुएँ सामान्यतः विद्युत धनात्मक (Electropositive) तत्व होती हैं, अर्थात वे अपनी बाह्य कक्षा के इलेक्ट्रॉनों को आसानी से त्यागकर धनायन बनाती हैं। इसी कारण धातुएँ विभिन्न अधातुओं तथा यौगिकों के साथ अभिक्रिया करके अनेक प्रकार के रासायनिक यौगिक बनाती हैं।

2.1 ऑक्सीजन, जल एवं अम्लों के साथ अभिक्रिया

📐 धातुओं की प्रमुख अभिक्रियाएँ — सूत्र/अभिक्रिया

2Mg + O₂ → 2MgO (मैग्नीशियम का दहन)
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ (सोडियम की जल से अभिक्रिया)
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑ (जिंक की अम्ल से अभिक्रिया)

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

प्रयोगशाला में सोडियम धातु को हमेशा केरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है, क्योंकि यह वायु की नमी एवं ऑक्सीजन के साथ इतनी तीव्र अभिक्रिया करती है कि आग लगने का खतरा रहता है। यही कारण है कि सोडियम को कभी खुले वातावरण में नहीं रखा जाता।

2.2 विस्थापन अभिक्रिया एवं सक्रियता श्रेणी

धातुओं का एक महत्वपूर्ण रासायनिक गुण यह है कि अधिक क्रियाशील धातु, कम क्रियाशील धातु को उसके यौगिक (लवण के विलयन) से विस्थापित कर देती है — इसे विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) कहते हैं। इसी सिद्धांत के आधार पर धातुओं की सक्रियता श्रेणी (Activity Series) बनाई गई है, जो धातुओं को उनकी सापेक्ष क्रियाशीलता के अवरोही क्रम में सूचीबद्ध करती है।

📐 विस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण — सूत्र/अभिक्रिया

Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu
(जिंक कॉपर सल्फेट के विलयन में डालने पर कॉपर को विस्थापित कर देता है, क्योंकि जिंक अधिक क्रियाशील है)

क्रियाशीलता क्रमधातुविशेष तथ्य
सर्वाधिक क्रियाशीलपोटैशियम (K), सोडियम (Na)ठंडे जल से भी तीव्र अभिक्रिया
अधिक क्रियाशीलकैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), एल्युमिनियम (Al)गर्म जल/भाप से अभिक्रिया
मध्यम क्रियाशीलजिंक (Zn), आयरन (Fe), लेड (Pb)तनु अम्लों से हाइड्रोजन मुक्त करती हैं
सबसे कम क्रियाशीलकॉपर (Cu), सिल्वर (Ag), गोल्ड (Au), प्लैटिनम (Pt)जल एवं अम्लों से अभिक्रिया नहीं, प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिलती हैं
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

जब जंग लगी हुई लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले घोल में डाला जाता है, तो कील पर लाल-भूरे रंग की कॉपर की परत जम जाती है और घोल का नीला रंग हल्का पड़ जाता है — क्योंकि लोहा कॉपर से अधिक क्रियाशील होने के कारण कॉपर को उसके सल्फेट यौगिक से विस्थापित कर देता है। यह प्रयोग विद्यालयों में सक्रियता श्रेणी समझाने के लिए बहुत लोकप्रिय है।

जानने योग्य तथ्य: सोना, चाँदी एवं प्लैटिनम जैसी धातुएँ इतनी कम क्रियाशील हैं कि वे वायु, जल या अम्लों से अभिक्रिया ही नहीं करतीं — इसीलिए ये प्रकृति में शुद्ध, मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं और इन्हें "उत्कृष्ट धातुएँ" (Noble Metals) कहा जाता है। इसके विपरीत सोडियम-पोटैशियम जैसी अत्यंत क्रियाशील धातुएँ प्रकृति में कभी मुक्त अवस्था में नहीं मिलतीं, हमेशा यौगिकों के रूप में मिलती हैं।
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
धातु ऑक्साइडउभयधर्मी ऑक्साइडविस्थापन अभिक्रियासक्रियता श्रेणीउत्कृष्ट धातुएँ
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3अधातुओं के भौतिक-रासायनिक गुण एवं प्रमुख अधातु

अधातु वे तत्व होते हैं, जिनमें सामान्यतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है। इनकी बाह्य कक्षा लगभग पूर्ण होती है, इसलिए ये इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके ऋणायन (Anions) बनाते हैं — यानी धातुओं के ठीक विपरीत व्यवहार।

3.1 अधातुओं के भौतिक गुण

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

पेंसिल की सीसे में उपयोग होने वाला ग्रेफाइट एक अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक है — यही कारण है कि इसे बैटरी के इलेक्ट्रोड बनाने में उपयोग किया जाता है, जो अधातुओं के सामान्य नियम का एक दिलचस्प अपवाद है।

3.2 प्रमुख अधातु एवं उनके उपयोग

अधातुप्रमुख विशेषतामुख्य उपयोग
फॉस्फोरस (P)लाल एवं सफेद दो अपररूप, सफेद अत्यंत विषैला-ज्वलनशीलमाचिस, आतिशबाज़ी, उर्वरक; DNA-RNA का घटक
सल्फर (S)चमकीले पीले रंग की ठोस, ज्वालामुखी क्षेत्रों में मिलती हैH₂SO₄ निर्माण, रबर वल्कनीकरण, दवाएँ
आयोडीन (I)बैंगनी-काली चमकदार ठोस, ऊर्ध्वपातन गुणटिंक्चर आयोडीन (एंटीसेप्टिक), थायरॉक्सिन निर्माण
हाइड्रोजन (H)ब्रह्मांड में सर्वाधिक प्रचुर तत्व, रंगहीन-ज्वलनशीलअमोनिया निर्माण, रॉकेट ईंधन, स्वच्छ ईंधन
ऑक्सीजन (O)वायुमंडल का लगभग 21% भाग, दहन में सहायकश्वसन, इस्पात निर्माण, चिकित्सा गैस
नाइट्रोजन (N)वायुमंडल का लगभग 78% भाग, अक्रिय प्रकृतिउर्वरक निर्माण, खाद्य पैकेजिंग
💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

चोट लगने पर घाव पर लगाई जाने वाली टिंक्चर आयोडीन असल में आयोडीन अधातु का ही एक घोल है, जो अपने पूतिरोधी गुण के कारण संक्रमण रोकता है। वहीं आयोडीन की कमी से घेंघा रोग (Goitre) हो सकता है, इसीलिए भारत में आयोडीनयुक्त नमक (Iodised Salt) अनिवार्य रूप से बेचा जाता है।

3.3 नोबल गैसें (Noble Gases)

आवर्त सारणी के समूह-18 में स्थित तत्वों को नोबल गैसें या अक्रिय गैसें कहा जाता है। इनकी बाह्यतम कक्षा पूर्ण (अष्टक पूर्ण) होने के कारण ये रासायनिक रूप से अत्यंत अक्रिय होती हैं।

गैसप्रमुख उपयोग
हीलियम (He)गुब्बारों, मौसम एयरशिप में; MRI मशीनों के चुंबक ठंडा करने में
नियॉन (Ne)विज्ञापन बोर्ड एवं नियॉन साइन लाइटों में (चमकीली लाल-नारंगी रोशनी)
आर्गन (Ar)विद्युत बल्बों में भरी जाती है; वेल्डिंग में निष्क्रिय वातावरण हेतु
क्रिप्टॉन (Kr)उच्च तीव्रता वाले प्रकाश स्रोतों एवं लेज़र तकनीक में
ज़ेनॉन (Xe)कैमरा फ्लैश, एयरपोर्ट रनवे लाइट्स में
रेडॉन (Rn)एकमात्र प्राकृतिक रेडियोधर्मी नोबल गैस, कैंसर रेडियोथेरेपी में सीमित उपयोग
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
ऋणायनग्रेफाइटऊर्ध्वपातनघेंघा रोगआयोडीनयुक्त नमकनोबल गैसअष्टक नियम
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4उपधातु (Metalloids) — गुण, उपयोग एवं महत्वपूर्ण खनिज

कुछ तत्व ऐसे होते हैं जिनके गुण धातुओं और अधातुओं दोनों के बीच के होते हैं — इन्हें उपधातु (Metalloids) या अर्धधातु कहा जाता है। कुल 7 प्रमुख उपधातु हैं — बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), टेल्यूरियम (Te) तथा पोलोनियम (Po)।

¶ चित्र: आवर्त सारणी में धातु, अधातु (हल्का पीला) एवं उपधातु (धूसर, टेढ़ी-मेढ़ी सीढ़ी रेखा पर स्थित) का वर्गीकरण — बोरॉन से पोलोनियम तक की सीढ़ीनुमा रेखा ही उपधातुओं को अलग करती है।

4.1 उपधातुओं के गुणधर्म

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

आपके स्मार्टफोन एवं कंप्यूटर के अंदर लगी माइक्रोचिप का मुख्य घटक सिलिकॉन है, जो एक उपधातु है। इसकी अर्धचालक प्रकृति के कारण ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में करंट को नियंत्रित रूप से प्रवाहित किया जा सकता है — यही कारण है कि सिलिकॉन को "डिजिटल युग की रीढ़" कहा जाता है, और अमेरिका की प्रसिद्ध टेक घाटी का नाम भी इसी से "सिलिकॉन वैली" पड़ा।

उपधातुप्रमुख उपयोग
बोरॉन (B)पायरेक्स काँच, डिटर्जेंट, बुलेटप्रूफ जैकेट, नाभिकीय रिएक्टर की नियंत्रक छड़ों में
सिलिकॉन (Si)कंप्यूटर चिप, सोलर सेल, काँच-सीमेंट उद्योग में
जर्मेनियम (Ge)ट्रांजिस्टर, फाइबर ऑप्टिक्स, इन्फ्रारेड डिटेक्टर में
आर्सेनिक (As)बैटरी प्लेट मज़बूत करने, सीमित मात्रा में कीटनाशकों में
एंटीमनी (Sb)लेड-एसिड बैटरी, अग्निरोधक पदार्थों में
टेल्यूरियम (Te)सोलर पैनल, थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर में

4.2 महत्वपूर्ण खनिज एवं रेयर अर्थ मिनरल्स (करंट अफेयर्स)

भारत सरकार के खान मंत्रालय ने 30 खनिजों को "महत्वपूर्ण खनिज" (Critical Minerals) घोषित किया है, जो देश की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं — इनमें लीथियम, कोबाल्ट, निकल एवं ग्रेफाइट प्रमुख हैं। ये खनिज धातु, अधातु एवं उपधातु — तीनों वर्गों में पाए जाते हैं (जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम एवं गैलियम उपधातु वर्ग के महत्वपूर्ण खनिज हैं, जो सेमीकंडक्टर चिप्स एवं सोलर पैनलों में उपयोग होते हैं)।

जानने योग्य तथ्य: भारत सरकार ने आत्मनिर्भरता हेतु राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission) शुरू किया है, जिसके लिए लगभग ₹34,300 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक 1,200 घरेलू खोज परियोजनाएँ पूर्ण करना तथा कम-से-कम 15 प्रमुख खनिजों का घरेलू उत्पादन प्रारंभ करना है — यह भारत के इलेक्ट्रिक वाहन एवं स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
उपधातुअर्धचालकसिलिकॉन वैलीमहत्वपूर्ण खनिजरेयर अर्थ मिनरल्सराष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन
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5संक्षारण (Corrosion) — कारण एवं रोकथाम

धातुओं की सतह का धीरे-धीरे वायु, नमी या रसायनों के संपर्क में आकर क्षतिग्रस्त होना संक्षारण (Corrosion) कहलाता है। यह एक विद्युत-रासायनिक (Electrochemical) प्रक्रिया है, जिसमें धातु का ऑक्सीकरण होता है।

5.1 लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया (Rusting of Iron)

लोहे में जंग लगना संक्षारण का सबसे सामान्य एवं परिचित उदाहरण है। जब लोहा नमी (जल) एवं वायु की ऑक्सीजन दोनों के संपर्क में आता है, तो यह धीरे-धीरे ऑक्सीकृत होकर जलयोजित आयरन ऑक्साइड — जिसे जंग कहते हैं — बनाता है।

📐 जंग लगने की अभिक्रिया — सूत्र/अभिक्रिया

4Fe + 3O₂ + xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (जंग)

यह एक विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें लोहे की सतह पर सूक्ष्म गैल्वेनिक सेल बनते हैं — कुछ स्थानों पर लोहा इलेक्ट्रॉन त्यागकर ऑक्सीकृत होता है (एनोड), तो कुछ स्थानों पर ऑक्सीजन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है (कैथोड), और घुले हुए नमक या अम्ल इस प्रक्रिया को तेज़ कर देते हैं।

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

समुद्र के किनारे बसे शहरों (जैसे मुंबई, चेन्नई) में वाहनों एवं लोहे की वस्तुओं में जंग तेज़ी से लगती है, क्योंकि समुद्री हवा में नमी के साथ-साथ नमक (सोडियम क्लोराइड) के सूक्ष्म कण भी होते हैं, जो जंग लगने की विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया को और तेज़ कर देते हैं।

5.2 अन्य धातुओं का संक्षारण

💡 रोज़मर्रा का उदाहरण

अमेरिका की प्रसिद्ध स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी जब फ्रांस से बनकर आई थी, तब उसका रंग चमकीला भूरा (ताँबे का मूल रंग) था। लगभग 30 वर्षों में हवा के साथ प्रतिक्रिया करके उस पर हरे रंग की पैटिना परत जम गई, जो आज उसकी पहचान बन चुकी है — और यही परत मूर्ति को आगे के क्षरण से बचाती भी है।

¶ चित्र: स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की सतह पर बनी हरी पैटिना (कॉपर कार्बोनेट) परत — यह संक्षारण का ही एक रूप है, जो धातु को आगे की क्षति से बचाती है।

5.3 संक्षारण से बचाव के उपाय

दिल्ली का लौह स्तंभ — एक वैज्ञानिक रहस्य: कुतुब मीनार परिसर में स्थित लगभग 1600 वर्ष पुराना लौह स्तंभ आज भी जंग-रहित खड़ा है। वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि इसमें फॉस्फोरस की उच्च मात्रा होने के कारण धातु-जंग की सतह पर आयरन हाइड्रोजन फॉस्फेट की एक अत्यंत पतली सुरक्षा-परत (Passive Layer) बन जाती है, जो आगे के संक्षारण को रोक देती है। यह प्राचीन भारतीय धातुकर्मियों के कौशल का अद्भुत उदाहरण है, जो आधुनिक धातुकर्म वैज्ञानिकों को आज भी शोध के लिए प्रेरित करता है।
¶ चित्र: कुतुब मीनार परिसर, दिल्ली में स्थित लगभग 1600 वर्ष पुराना लौह स्तंभ — उच्च फॉस्फोरस सामग्री के कारण आज भी जंग-रहित।
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
संक्षारणजंगगैल्वेनिक सेलधूमिलनपैटिनागैल्वनीकरणबलिदान एनोडटिन-प्लेटिंगलौह स्तंभ

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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