भारत में संसद की तरह राज्य स्तर पर सर्वोच्च विधि-निर्माण संस्था विधानमण्डल (State Legislature) है। जैसे केन्द्र में राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा मिलकर संसद बनाते हैं, वैसे ही राज्य में राज्यपाल + विधानसभा (+ विधानपरिषद्) मिलकर विधानमण्डल बनाते हैं। इसका उल्लेख संविधान के भाग-6, अनुच्छेद 168 से 212 में है।
| घटक/अंग | संवैधानिक स्थिति | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| राज्यपाल (Governor) | विधानमण्डल का अभिन्न अंग — सदस्य नहीं | राज्यपाल के हस्ताक्षर से ही विधेयक कानून बनता है |
| विधानसभा (Vidhan Sabha) | निम्न सदन — सभी राज्यों में | प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा; अनुच्छेद 170 |
| विधानपरिषद् (Vidhan Parishad) | उच्च सदन — केवल 6 राज्यों में | अप्रत्यक्ष निर्वाचन + मनोनयन; अनुच्छेद 171 |
"महाराणा KUMBA (कुंभा) Tea (टी) के" — महाराणा = महाराष्ट्र, K=कर्नाटक, U=उत्तरप्रदेश, M=मिलाकर (जोड़कर), B=बिहार, A=आन्ध्रप्रदेश, Tea=तेलंगाना। इनके अलावा शेष सभी 22 राज्यों में एकसदनात्मक (Unicameral) विधानमण्डल है।
विधानपरिषद् का निर्माण और समापन की अंतिम शक्ति संसद के पास है, न कि राज्य सरकार के पास। यह प्रक्रिया दो चरणों में होती है।
| चरण | विवरण | विशेष |
|---|---|---|
| चरण 1 | संबंधित राज्य की विधानसभा द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) से प्रस्ताव पारित करके संसद के समक्ष प्रस्तुत। | विशेष बहुमत = कुल सदस्यों का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 |
| चरण 2 | संसद साधारण बहुमत (Simple Majority) से प्रस्ताव पारित कर दे → विधानपरिषद् का गठन/समापन। | साधारण बहुमत = उपस्थित व मतदान करने वालों का 50%+1 |
विधानपरिषद् स्थायी सदन है — इसे भंग (Dissolve) नहीं किया जा सकता लेकिन समाप्त (Abolish) किया जा सकता है। यह राज्यसभा से अलग है — राज्यसभा को न भंग किया जा सकता है, न समाप्त।
(संविधान संशोधन की प्रक्रिया का उल्लेख भाग 20 के अनुच्छेद 368 में है।)
| राज्य | विधानसभा सीटें | राज्य | विधानसभा सीटें |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश (सर्वाधिक) | 403 | राजस्थान | 200 |
| महाराष्ट्र | 288 | मध्य प्रदेश | 230 |
| पश्चिम बंगाल | 294 | तमिलनाडु | 234 |
| बिहार | 243 | कर्नाटक | 224 |
| गुजरात | 182 | आन्ध्र प्रदेश | 175 |
| सिक्किम (न्यूनतम) | 32 | पुड्डुचेरी | 30 |
भारत के 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में से केवल 3 में विधानसभा है — दिल्ली (70), पुड्डुचेरी (30), जम्मू-कश्मीर (90)। लोकसभा में SC आरक्षण — अनुच्छेद 330; विधानसभा में SC/ST आरक्षण — अनुच्छेद 332।
| अनुपात | निर्वाचन/मनोनयन | किसके द्वारा |
|---|---|---|
| 1/3 | स्थानीय निकाय (नगरपालिका, जिला बोर्ड आदि) के प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचन | स्थानीय निकाय |
| 1/3 | विधानसभा सदस्यों द्वारा — ऐसे व्यक्ति जो वर्तमान में विधानसभा सदस्य नहीं हैं | विधायक (MLA) |
| 1/12 | 3 वर्ष पुराने स्नातकों द्वारा | Graduate Constituency |
| 1/12 | माध्यमिक विद्यालय/महाविद्यालय में 3 वर्षों से शिक्षणरत अध्यापकों द्वारा | Teachers Constituency |
| 1/6 | राज्यपाल द्वारा मनोनीत | साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन, समाज सेवा |
| राज्य | विधानपरिषद् सीटें |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 100 (सर्वाधिक) |
| महाराष्ट्र | 78 |
| बिहार | 75 |
| कर्नाटक | 75 |
| आन्ध्र प्रदेश | 58 |
| तेलंगाना | 40 (न्यूनतम) |
| योग्यता | विधानसभा (MLA) | विधानपरिषद् (MLC) |
|---|---|---|
| नागरिकता | भारत का नागरिक | भारत का नागरिक |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| शपथ | निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष | निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष |
| सेवा शर्त | शासकीय/लाभ के पद पर नहीं होना | — |
| मतदाता होना | उस राज्य के किसी विधानसभा क्षेत्र का मतदाता हो | उस राज्य के किसी विधानसभा क्षेत्र का मतदाता हो |
| विशेष नियम | एक साथ दोनों सदनों का सदस्य नहीं | 10 दिन में एक सदन की सदस्यता छोड़नी होगी |
⚠️ सावधान अनुच्छेद 190(1): कोई व्यक्ति दोनों सदनों का एक साथ सदस्य नहीं हो सकता — 10 दिन में एक सदन की सदस्यता त्यागनी होगी। अनुच्छेद 190(2): कोई व्यक्ति दो या अधिक राज्यों के विधानमण्डलों का एक साथ सदस्य नहीं हो सकता।
| तुलना | सत्रावसान (Prorogation) | स्थगन (Adjournment) |
|---|---|---|
| कौन करता है | राज्यपाल | विधानसभा अध्यक्ष |
| प्रभाव | सत्र के साथ बैठक भी समाप्त | केवल उस दिन की बैठक स्थगित |
| विधेयकों का हाल | विधेयक जारी रहते हैं | |
| Sine Die | अनिश्चितकाल के लिए स्थगन = Sine Die | — |
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर: "विधानसभा आहूत करना राज्यपाल का अधिकार नहीं — कर्तव्य है।" राज्यपाल सामान्यतः मुख्यमंत्री की सलाह पर सत्र बुलाता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में स्वविवेक से भी सत्र बुला सकता है।
| कार्य/शक्ति | विवरण | संबंधित अनुच्छेद/नियम |
|---|---|---|
| विधानमण्डल विशेषाधिकार संरक्षक | विधायकों के विशेषाधिकारों की रक्षा करता है | अनुच्छेद 194 |
| कार्यवाही संचालन | शांति व सामंजस्य बनाए रखना | — |
| नियमों की व्याख्या | विधानसभा के नियमों की व्याख्या का एकमात्र अधिकार | — |
| धन विधेयक निर्णय | कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं — अंतिम निर्णय | अनुच्छेद 199(3) |
| निर्णायक मत | पक्ष-विपक्ष बराबर होने पर Casting Vote | अनुच्छेद 189(1) |
| दल-बदल अयोग्यता | दल-बदल के आधार पर सदस्य को अयोग्य घोषित करना | 10वीं अनुसूची |
| कोरम न होने पर | बैठक स्थगित/निलंबित करना | अनुच्छेद 189(3-4) |
| समितियों का गठन | सभी समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति | — |
| 3 समितियों के अध्यक्ष | नियम समिति, कार्यमंत्रणा समिति, सामान्य प्रयोजन समिति | पदेन (ex-officio) |
| विधेयक पुनर्विचार | राज्यपाल द्वारा लौटाए विधेयक को सदन के समक्ष रखना | — |
1. विधानसभा के सदस्य न रहने पर।
2. स्वयं त्यागपत्र देने पर — अध्यक्ष → उपाध्यक्ष को; उपाध्यक्ष → अध्यक्ष को।
3. विधानसभा तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित करके हटा सकती है — 14 दिन पूर्व सूचना अनिवार्य।
अध्यक्ष व उपाध्यक्ष अलग से शपथ नहीं लेते — विधानसभा सदस्य के रूप में ली गई शपथ ही मान्य होती है। अब तक राजस्थान में किसी भी विधानसभा अध्यक्ष को हटाया नहीं गया है (6 बार प्रस्ताव आए — सभी विफल)।
"178-181 = विधानसभा अध्यक्ष; 182-185 = विधानपरिषद् सभापति" — दोनों में नियम समान हैं, बस सदन अलग। 186 दोनों का वेतन।
| क्र. | नाम | नियुक्ति | विशेष |
|---|---|---|---|
| 1. | महाराव संग्राम सिंह | 24.03.1952 | राजस्थान के प्रथम प्रोटेम स्पीकर |
| 2. | नारायण सिंह मसूदा | 22.04.1957 | प्रोटेम स्पीकर + उपाध्यक्ष दोनों रहे |
| 3. | नारायण सिंह मसूदा | 07.03.1962 | दूसरी बार |
| 4. | पूनम चंद विश्नोई | 28.04.1967 | सर्वाधिक 3 बार — प्रथम बार |
| 5. | यशवंत सिंह नाहर | 17.03.1972 | — |
| 6. | मेजर फतेह सिंह | 13.07.1977 | — |
| 7. | परसराम मदेरणा | 03.07.1980 | अध्यक्ष + प्रोटेम + विपक्ष नेता तीनों |
| 8. | लक्ष्मण सिंह | 11.03.1985 | अध्यक्ष + प्रोटेम + विपक्ष नेता तीनों |
| 9. | पूनम चंद विश्नोई | 08.03.1990 | सर्वाधिक 3 बार — दूसरी बार |
| 10. | पूनम चंद विश्नोई | 22.12.1993 | सर्वाधिक 3 बार — तीसरी बार; अध्यक्ष+उपाध्यक्ष+प्रोटेम तीनों पद |
| 11. | भैरोसिंह शेखावत | 05.04.1995 | CM + प्रोटेम + विपक्ष नेता + उपराष्ट्रपति |
| 12. | गंगाराम चौधरी | 06.01.2004 | — |
| 13. | देवी सिंह पाटिल | 24.12.2008 | — |
| 14. | प्रद्युम्न सिंह | 02.01.2014 | — |
| 15. | गुलाब चंद कटारिया | 08.01.2019 | |
| 16. | कालीचरण सराफ | 18.12.2023 | वर्तमान (16वीं विधानसभा) |
पूनम चंद विश्नोई — राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष + उपाध्यक्ष + प्रोटेम स्पीकर तीनों पदों पर रहे। सर्वाधिक 3 बार प्रोटेम स्पीकर।
| अयोग्यता | विवरण |
|---|---|
| लाभ का पद | भारत सरकार/राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारण |
| विकृत चित्त | सक्षम न्यायालय ने घोषित किया हो |
| दिवालिया | अनुन्मोचित दिवालिया (Undischarged Insolvent) |
| विदेशी नागरिकता | भारत का नागरिक नहीं या स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता |
| भ्रष्ट आचरण | चुनाव में भ्रष्ट आचरण या चुनावी अपराध |
| 2 वर्ष+ कारावास | किसी अपराध में 2 वर्ष या अधिक की सजा |
| सरकारी सेवा से निष्कासन | भ्रष्टाचार/विश्वासघात के कारण |
| चुनावी खर्च विवरण न देना | निर्धारित समय में विवरण प्रस्तुत न करना |
| सामाजिक अपराध | अस्पृश्यता, दहेज, सती प्रथा में संलिप्तता |
| दल-बदल | 10वीं अनुसूची — विधानसभा अध्यक्ष घोषित करता है |
नोट: "सर्चलाइट वाद" एवं "केशवसिंह वाद" का संबंध भारत में वाक्-स्वातंत्र्य एवं विधानमण्डल के विशेषाधिकारों से है। राज्य विधानमण्डल के विशेषाधिकार संघ की संसद के विशेषाधिकार के समान हैं।
1. आरंभ: किसी भी सदन (विधानसभा या विधानपरिषद्) में रखा जा सकता है — तीन वाचन (Reading) होते हैं।
2. विधानसभा पारित: विधानसभा से पारित होकर विधानपरिषद् में जाता है।
3. विधानपरिषद् में: यदि 3 माह तक न पारित करे या संशोधन करे जो विधानसभा को मंजूर नहीं → वापस विधानसभा।
4. विधानसभा पुनः पारित: विधानसभा संशोधन सहित/रहित पुनः पारित करके फिर विधानपरिषद् को भेजती है।
5. 1 माह बाद: विधानपरिषद् 1 माह में न पारित करे या अस्वीकार करे → विधानसभा से पारित माना जाएगा।
6. अधिकतम देरी: विधानपरिषद् अधिकतम 4 माह (3+1) तक विधेयक रोक सकती है।
7. अपवाद: विधानपरिषद् से पारित होकर विधानसभा में आए विधेयक को यदि विधानसभा अस्वीकार करे → विधेयक समाप्त।
साधारण विधेयक पर कोई संयुक्त बैठक (Joint Session) नहीं होती — क्योंकि 4 माह बाद विधानपरिषद् से स्वतः पारित मान लिया जाता है। (संसद में लोकसभा-राज्यसभा गतिरोध पर संयुक्त बैठक का प्रावधान है — राज्य में नहीं।)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आरंभ | केवल विधानसभा में — राज्यपाल की पूर्वानुमति (Prior Approval) से। |
| विधानपरिषद् में | अधिकतम 14 दिन रोक सकती है — संशोधन नहीं, अस्वीकार नहीं — केवल सिफारिश। |
| 14 दिन बाद | स्वतः पारित मान लिया जाता है। |
| सिफारिशें | विधानसभा स्वीकार या अस्वीकार — दोनों अधिकार। |
| संयुक्त बैठक | नहीं — 14 दिन बाद स्वतः पारित। |
| निर्णय | धन विधेयक है या नहीं → विधानसभा अध्यक्ष का अंतिम निर्णय — अनुच्छेद 199(3)। |
| राज्यपाल के विकल्प | स्वीकृति, रोकना, राष्ट्रपति के लिए आरक्षित — पुनर्विचार हेतु नहीं लौटा सकता। |
धन विधेयक (अनुच्छेद 199): कर अधिरोपण, धन उधार, संचित निधि, विनियोग, भारित व्यय, लोक लेखा — इन विषयों से संबंधित विधेयक। जुर्माना/लाइसेंस फीस/स्थानीय कर वाला विधेयक धन विधेयक नहीं।
| विकल्प | वीटो प्रकार | विवरण |
|---|---|---|
| 1. अनुमति देना | — | विधेयक → कानून/अधिनियम बन जाता है। |
| 2. पुनर्विचार हेतु लौटाना | निलम्बनकारी वीटो (Suspensive) | एक बार लौटा सकता है — पुनः पारित → देने के लिए बाध्य। धन विधेयक पर नहीं। |
| 3. अनुमति देने से मना | आत्यांतिक वीटो (Absolute) | सामान्यतः गैर-सरकारी विधेयकों पर। |
| 4. राष्ट्रपति के लिए आरक्षित | — | 6 आधारों पर; राज्यपाल की भूमिका समाप्त। |
| विशेष वित्तीय अनुदान | अनुच्छेद | विवरण |
|---|---|---|
| अनुपूरक अनुदान | 205 | मूल राशि अपर्याप्त या नई सेवा → अतिरिक्त राशि। |
| लेखानुदान (Vote on Account) | 206(क) | बजट पास होने से पहले — कुछ महीनों के अग्रिम व्यय के लिए। |
| प्रत्ययानुदान (Vote of Credit) | 206(ख) | अनिश्चित/अपरिमेय माँग — राष्ट्रीय सुरक्षा आदि। |
| अपवादानुदान (Exceptional Grant) | 206(ग) | वर्तमान वित्त वर्ष की चालू सेवा का भाग नहीं। |
| प्रश्न प्रकार | उत्तर | पूरक प्रश्न | सूचना | सीमा |
|---|---|---|---|---|
| (A) तारांकित प्रश्न | मौखिक | हाँ | 14 दिन पूर्व | बजट सत्र: अधिकतम 40; अन्य: 10; एक दिन: 2 से अधिक नहीं |
| (B) अतारांकित प्रश्न | लिखित | नहीं | 14 दिन पूर्व | बजट सत्र: 60; अन्य: 20; अंतः सत्रकाल: सप्ताह में 1 |
| (C) अल्प सूचना प्रश्न | मौखिक | — | 14 दिन से कम | — |
(1) अविश्वास प्रस्ताव (Non-Confidence Motion) — नियम 132
(2) विश्वास प्रस्ताव (Confidence Motion) — नियम 132A
(3) स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) — नियम 50
(4) कटौती प्रस्ताव (Cut Motion)
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| (A) नीतिगत कटौती | माँग की राशि घटाकर ₹1 — नीति के विरोध में। |
| (B) अर्थगत कटौती (मितव्ययता) | माँग की राशि में उल्लिखित कटौती — मितव्ययता हेतु। |
| (C) सांकेतिक कटौती | माँग में ₹100 की कमी — शिकायत/असंतोष दर्ज करने के लिए। |
(5) धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks)
(6) ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion)
(7) निन्दा प्रस्ताव (Censure Motion)
| प्रस्ताव | कारण जरूरी | सदन | पारित होने पर |
|---|---|---|---|
| अविश्वास | नहीं | केवल विधानसभा | सरकार गिरती है |
| विश्वास | — | केवल विधानसभा | पारित न हो → सरकार गिरती है |
| स्थगन | हाँ (तात्कालिक) | केवल विधानसभा | सरकार पर नैतिक दबाव |
| कटौती | — | केवल विधानसभा | सरकार गिरती है |
| धन्यवाद | — | विधानसभा | पारित न हो → सरकार गिरती है |
| ध्यानाकर्षण | — | केवल विधानसभा | केवल ध्यान आकर्षण |
| निन्दा | हाँ | केवल विधानसभा | प्रतिष्ठा गिरती है — सरकार नहीं |
"अविश्वास — बिना कारण; निन्दा — कारण बताना जरूरी" | "निन्दा पारित = प्रतिष्ठा गिरी; बाकी 4 (अविश्वास, विश्वास, कटौती, धन्यवाद) = सरकार गिरी"
राजस्थान विधानसभा में कार्य संचालन हेतु कुल 26 समितियाँ हैं — 4 वित्तीय + 22 स्थायी (जिनमें से वर्तमान में 18 सक्रिय)। प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम पहली बार 1956 में निर्मित।
| समिति | अध्यक्ष | सदस्य | कार्यकाल | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|---|---|
| (1) लोक लेखा समिति (PAC) | विपक्षी दल का होता है — विधानसभा अध्यक्ष चुनता है | 15 (एकल संक्रमणीय मत) | 1 वर्ष (6 माह विस्तार सम्भव) | राज्य के वित्तीय खर्चों पर नियंत्रण; CAG रिपोर्ट की जाँच। "CAG = मार्गदर्शक" |
| (2) प्राक्कलन समिति 'क' | विधानसभा अध्यक्ष चुनता है | अधिकतम 15 (वर्तमान 14) | 1 वर्ष | खर्चों का पूर्वानुमान; मितव्ययता सुझाव; बजट प्रारूप सुझाव |
| (3) प्राक्कलन समिति 'ख' | विधानसभा अध्यक्ष चुनता है | अधिकतम 15 (वर्तमान 10) | 1 वर्ष | राजस्व, सहकारिता, पशुपालन आदि विभागों के प्राक्कलन |
| (4) राजकीय उपक्रम समिति | विधानसभा अध्यक्ष चुनता है | 15 (एकल संक्रमणीय मत) | 1 वर्ष | सरकारी उपक्रमों के प्रतिवेदन/लेखे की जाँच |
"प्राक्कलन समिति = लोक लेखा समिति की जुड़वा बहन।" PAC गठन: 10 अप्रैल 1952। कोई मंत्री PAC का सदस्य नहीं हो सकता। संसद की PAC = 22 सदस्य (15 LS + 7 RS); गठन 1921।
नियम समिति, कार्यमंत्रणा समिति, सामान्य प्रयोजन समिति के अध्यक्ष — स्वयं विधानसभा अध्यक्ष होते हैं (पदेन)। किसी भी समिति में अधिकतम 15 सदस्य (अध्यक्ष सहित) — सामान्य प्रयोजन समिति अपवाद। बैठकें गोपनीय।
| समिति | वर्तमान अध्यक्ष (2024-25) |
|---|---|
| जन/लोक लेखा समिति | श्री टीकाराम जूली |
| राजकीय उपक्रम समिति | श्री कालीचरण सराफ |
| प्राक्कलन समिति 'क' | श्री अर्जुनलाल जीनगर |
| प्राक्कलन समिति 'ख' | श्री चंद कृपलानी |
| विशेषाधिकार समिति | श्री पुष्पेंद्र सिंह |
| नियम समिति | श्री वासुदेव देवनानी (पदेन) |
| कार्यसलाहकार समिति | श्री वासुदेव देवनानी (पदेन) |
| सदाचार समिति | श्री हरीश चौधरी |
| याचिका समिति | श्री हमीर सिंह भायल |
| अधीनस्थ विधान समिति | श्रीमती अनिता भदेल |
| आधार | विधानसभा (Lower House) | विधानपरिषद् (Upper House) |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | अनुच्छेद 170 | अनुच्छेद 169, 171 |
| उपनाम | निम्न सदन, प्रथम सदन, लोकप्रिय सदन | उच्च सदन, द्वितीय सदन, वरिष्ठों का सदन |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| विघटन | अस्थायी — राज्यपाल भंग कर सकता है | स्थायी — भंग नहीं; समाप्त हो सकती है |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (सदन) | 6 वर्ष (सदस्य); 2 वर्ष में 1/3 सेवानिवृत्त |
| निर्वाचन | प्रत्यक्ष, वयस्क मताधिकार, FPTP | अप्रत्यक्ष, STV (एकल संक्रमणीय मत) |
| पदाधिकारी | अध्यक्ष व उपाध्यक्ष | सभापति व उपसभापति |
| सीटें | अधिकतम 500, न्यूनतम 60 | विधानसभा सीटों का 1/3; न्यूनतम 40 |
| धन विधेयक | सर्वप्रथम यहाँ; संशोधन हो सकता है | 14 दिन रोक सकती है — संशोधन नहीं, अस्वीकार नहीं |
| साधारण विधेयक | 4 माह बाद पारित माना जाता है | विधानसभा-पारित वापस → 4 माह में कार्यवाही |
| मंत्रिपरिषद् उत्तरदायित्व | विधानसभा के प्रति उत्तरदायी | विधानपरिषद् के प्रति नहीं |
| राष्ट्रपति/RS चुनाव | इसके सदस्य भाग लेते हैं | इसके सदस्य भाग नहीं लेते |
| संविधान संशोधन | कम से कम आधे राज्यों का समर्थन (368) | — |
| अविश्वास/निन्दा | अविश्वास और निन्दा प्रस्ताव लाए जा सकते हैं | विधानसभा में ही |
| बजट मतदान | बहस + मतदान दोनों | केवल बहस — मतदान नहीं |
निष्कर्ष: विधानसभा के मुकाबले विधानपरिषद् के पास शक्तियाँ कम हैं — यह कमजोर सदन है। फिर भी प्रासंगिकता है: (1) विधानसभा की स्वेच्छारिता पर अंकुश, (2) साहित्य/विज्ञान/कला के व्यक्तियों को प्रतिनिधित्व, (3) विधेयकों पर आवश्यक पुनर्विचार का अवसर।
1. विधानमण्डल — भाग-6, अनुच्छेद 168-212; 3 घटक — राज्यपाल + विधानसभा + विधानपरिषद्। 6 द्विसदनात्मक राज्य (KUMBA + T)। 2. विधानपरिषद् सृजन/समापन — अनुच्छेद 169: विधानसभा विशेष बहुमत → संसद साधारण बहुमत। राजस्थान 2012 प्रस्ताव — संसद से अब तक पारित नहीं। 3. विधानसभा — अनुच्छेद 170: अधिकतम 500, न्यूनतम 60; राजस्थान 200 (1977 से); SC 34 + ST 25 आरक्षित। 4. विधानपरिषद् — अनुच्छेद 171: विधानसभा का 1/3 अधिकतम, 40 न्यूनतम। 1/3+1/3+1/12+1/12+1/6 सूत्र। 5. कार्यकाल — विधानसभा 5 वर्ष (आपातकाल में 1 वर्ष बढ़ाया जा सकता है); विधानपरिषद् स्थायी (सदस्य 6 वर्ष)। 6. योग्यताएँ — MLA: 25 वर्ष; MLC: 30 वर्ष; दोनों सदनों में एक साथ नहीं (10 दिन में एक छोड़ना होगा)। 7. सत्र — अनुच्छेद 174: 21 दिन सूचना, 6 माह अंतर, 60 बैठकें/वर्ष। Sine Die = अनिश्चितकाल स्थगन। 8. विधानसभा अध्यक्ष — 5 वर्ष; नियम, कार्यमंत्रणा, सामान्य प्रयोजन तीनों का पदेन अध्यक्ष; हटाने पर 14 दिन सूचना। 9. प्रोटेम स्पीकर — राज्यपाल नियुक्त; सबसे वरिष्ठ सदस्य; कार्य: नव-सदस्यों को शपथ। पूनम चंद विश्नोई — 3 बार। 10. गणपूर्ति — 1/10 या 10 सदस्य (जो अधिक); राजस्थान में 20; 60 दिन अनुपस्थित → स्थान रिक्त। 11. विधायी प्रक्रिया — साधारण: विधानपरिषद् 4 माह रोक सकती है; धन: 14 दिन; राज्यपाल — 2 वीटो (पॉकेट वीटो नहीं)। 12. वित्त — अनुच्छेद 202: वार्षिक वित्तीय विवरण; 203: भारित व्यय पर बहस-मतदान नहीं; 204: विनियोग विधेयक। 13. प्रश्नकाल — 11-12: तारांकित (मौखिक/14 दिन/पूरक हाँ); अतारांकित (लिखित/14 दिन/पूरक नहीं)। शून्यकाल 12-1। 14. 7 प्रस्ताव — अविश्वास (40 सदस्य, बिना कारण); निन्दा (कारण जरूरी); कटौती (3 प्रकार); धन्यवाद; विश्वास; स्थगन; ध्यानाकर्षण। 15. समितियाँ — 26 (4 वित्तीय + 22 स्थायी); PAC अध्यक्ष = विपक्षी; अधिकतम 15 सदस्य; नियम/कार्यमंत्रणा/सामान्य = अध्यक्ष पदेन।
| क्र. | नाम | कार्यकाल (से) | कार्यकाल (तक) | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| 1. | नरोत्तम लाल जोशी | 31.03.1952 | 25.04.1957 | प्रथम विधानसभा अध्यक्ष; झुंझुनूं से; हटाने के 2 प्रयास (जसवंत सिंह + वेदपाल त्यागी) |
| 2. | रामनिवास मिर्धा | 25.04.1957 | 03.05.1967 | 2 बार अध्यक्ष; सर्वाधिक कार्यकाल (10 वर्ष); बाद में 4 बार राज्यसभा सांसद |
| 3. | निरंजन नाथ आचार्य | 03.05.1967 | 20.03.1972 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों रहे; 4वीं विधानसभा में 1 बार हटाने का प्रयास |
| 4. | रामकिशोर व्यास | 20.03.1972 | 18.07.1977 | — |
| 5. | महारावल लक्ष्मण सिंह | 18.07.1977 | 20.06.1979 | प्रथम गैर-कांग्रेसी विधानसभा अध्यक्ष (6ठी विधानसभा); डूंगरपुर |
| 6. | गोपाल सिंह भाद्राजून | 25.09.1979 | 07.07.1980 | — |
| 7. | पूनम चंद विश्नोई | 07.07.1980 | 20.03.1985 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष + प्रोटेम स्पीकर तीनों; 3 बार प्रोटेम स्पीकर |
| 8. | हीरालाल देवपुरा | 20.03.1985 | 16.10.1985 | CM + विधानसभा अध्यक्ष दोनों रहे; CM + वित्त आयोग अध्यक्ष भी |
| 9. | गिरिराज प्रसाद तिवाड़ी | 31.01.1986 | 11.03.1990 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों; 8वीं विधानसभा में 1 बार हटाने का प्रयास |
| 10. | हरिशंकर भाभड़ा | 16.03.1990 | 21.12.1993 | DCM + विधानसभा अध्यक्ष; 2 बार अध्यक्ष; सर्वाधिक कार्यकाल वाले DCM |
| 11. | हरिशंकर भाभड़ा | 30.12.1993 | 05.10.1994 | दूसरी बार |
| 12. | शांतिलाल चपलोत | 07.04.1995 | 18.03.1998 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों; 10वीं विधानसभा में 2 बार हटाने के प्रयास |
| 13. | समरथलाल मीणा | 24.07.1998 | 04.01.1999 | न्यूनतम कार्यकाल (5 माह); अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों |
| 14. | परसराम मदेरणा | 06.01.1999 | 15.01.2004 | अध्यक्ष + प्रोटेम + विपक्ष नेता तीनों |
| 15. | सुमित्रा सिंह | 16.01.2004 | 01.01.2009 | प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष (12वीं विधानसभा); लाडपुरा, कोटा |
| 16. | दीपेन्द्र सिंह शेखावत | 02.01.2009 | 20.01.2014 | — |
| 17. | कैलाश मेघवाल | 22.01.2014 | 15.01.2019 | 14वीं विधानसभा के सर्वाधिक मतों से विजेता (शाहपुरा, भीलवाड़ा) |
| 18. | चंद्र प्रकाश जोशी | 06.01.2019 | 20.12.2023 | — |
| 19. | वासुदेव देवनानी | 21.12.2023 | वर्तमान (लगातार) | 16वीं विधानसभा; अजमेर उत्तर सीट से विधायक |
अब तक 6 बार विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव आए — एक बार भी सफल नहीं। सर्वाधिक कार्यकाल — रामनिवास मिर्धा (10 वर्ष); न्यूनतम — समरथलाल मीणा (5 माह)। 12वीं विधानसभा में पहली बार CM + राज्यपाल + विधानसभा अध्यक्ष तीनों महिलाएँ।
| क्र. | नाम | कार्यकाल | विशेष |
|---|---|---|---|
| 1. | लालसिंह शक्तावत | 31.03.1952 – 31.03.1957 | प्रथम उपाध्यक्ष |
| 2. | निरंजन नाथ आचार्य | 01.05.1957 – 01.03.1962 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों पदों पर |
| 3. | नारायण सिंह मसूदा | 07.05.1962 – 28.02.1967 | प्रोटेम स्पीकर भी रहे |
| 4. | पूनम चंद विश्नोई | 09.05.1967 – 09.07.1971 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष + प्रोटेम तीनों |
| 5. | रामनारायण चौधरी | 11.11.1971 – 15.03.1972 | उपाध्यक्ष + विपक्ष नेता दोनों |
| 6. | रामसिंह यादव | 25.03.1972 – 30.04.1977 | — |
| 7. | रामचंद्र | 08.09.1977 – 17.02.1980 | — |
| 8. | अहमद बक्ष सिंधी | 28.03.1981 – 24.10.1982 | — |
| 9. | गिरिराज प्रसाद तिवाड़ी | 29.03.1985 – 31.01.1986 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों |
| 10. | किशन मोटवानी | 28.10.1986 – 01.03.1990 | — |
| 11. | यदुनाथ सिंह | 05.07.1990 – 21.03.1991 | — |
| 12. | हीरा सिंह चौहान | 25.03.1991 – 14.12.1992 | — |
| 13. | शांतिलाल चपलोत | 27.09.1994 – 07.04.1995 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों |
| 14. | समरथलाल मीणा | 04.05.1995 – 17.07.1998 | अध्यक्ष + उपाध्यक्ष दोनों |
| 15. | तारा भण्डारी | 28.07.1998 – 30.11.1998 | प्रथम महिला उपाध्यक्ष |
| 16. | देवेन्द्र सिंह | 26.03.1999 – 04.12.2003 | — |
| 17. | रामनारायण विश्नोई | 19.07.2004 – 10.12.2008 | — |
| 18. | रामनारायण मीणा | 29.02.2012 – 09.12.2013 | — |
| 19. | राव राजेन्द्र सिंह | 18.09.2015 – 15.01.2019 | 16वीं विधानसभा में लोकसभा सांसद बने |
हरिशंकर भाभड़ा — एकमात्र उपमुख्यमंत्री जो विधानसभा अध्यक्ष भी रहे (2 बार)। तारा भण्डारी — प्रथम महिला उपाध्यक्ष। लालसिंह शक्तावत — प्रथम उपाध्यक्ष।
चुनाव: 4 से 24 जनवरी 1952; 160 सीटों पर परिणाम: कांग्रेस 82 (सबसे बड़ी), रामराज्य परिषद् 24, जनसंघ 8, कृषिकर लोक पार्टी 7, निर्दलीय 35 अध्यक्ष: नरोत्तम लाल जोशी | उपाध्यक्ष: लालसिंह शक्तावत प्रथम बैठक: 29 मार्च 1952 — सवाई मानसिंह टाउन हॉल, जयपुर CM: टीकाराम पालीवाल (प्रथम निर्वाचित); जयनारायण व्यास (किशनगढ़ उपचुनाव जीतकर) विशेष: राज्य की पहली महिला विधायक — यशोदा देवी (बाँसवाड़ा उपचुनाव, नवम्बर 1953) विशेष: 1956 में अजमेर-मेरवाड़ा विलय से 30 सीटें जुड़ी → 190 सीटें; पहली महिला मंत्री कमला बेनिवाल प्रोटेम: महाराव संग्राम सिंह | विपक्ष नेता: जसवंत सिंह (बीकानेर) उपचुनाव: 17 उपचुनाव — अब तक सर्वाधिक
चुनाव: कुल 176 सीटों पर; 4 राष्ट्रीय + 1 राज्य दल परिणाम: कांग्रेस 119, रामराज्य परिषद् 17, जनसंघ 6 अध्यक्ष: रामनिवास मिर्धा (सर्वाधिक कार्यकाल वाले) | उपाध्यक्ष: निरंजन नाथ आचार्य CM: मोहनलाल सुखाड़िया (2री बार); प्रोटेम: नारायण सिंह मसूदा
चुनाव: 176 सीटें; 2-सदस्य क्षेत्र समाप्त परिणाम: कांग्रेस 88, स्वतंत्र पार्टी 36 (दूसरी सबसे बड़ी), जनसंघ 15 विशेष: स्वतंत्र पार्टी का उदय — सामंतों/राजाओं की पार्टी; संस्थापक: सी. राजगोपालाचारी; चिन्ह: तारा (1959) विशेष: राजस्थान में स्वतंत्र पार्टी की नेता — जयपुर महारानी गायत्री देवी CM: मोहनलाल सुखाड़िया (3री बार) | अध्यक्ष: रामनिवास मिर्धा | सर्वाधिक 5 बार अविश्वास प्रस्ताव इस सदन में
चुनाव: 184 सीटें; कांग्रेस पहली बार बहुमत नहीं जुटा पाई परिणाम: कांग्रेस 89, स्वतंत्र पार्टी 48, जनसंघ 22 — त्रिशंकु विधानसभा विशेष: प्रथम राष्ट्रपति शासन (13 मार्च–26 अप्रैल 1967); CM: सुखाड़िया → बरकतुल्लाह खाँ (AJGAR फॉर्मूला) विशेष: पहली बार राज्यमंत्री तथा संसदीय सचिव पद बनाए गए (1967) अध्यक्ष: निरंजन नाथ आचार्य | 1 बार हटाने का प्रयास | उपाध्यक्ष: पूनम चंद विश्नोई
चुनाव: 184 सीटें; बांग्लादेश विजय (1971) की लहर परिणाम: कांग्रेस 145, स्वतंत्र पार्टी 11, जनसंघ 8 विशेष: 25 जून 1975 — आपातकाल (Emergency) → विधानसभा का कार्यकाल बढ़ा → 5वीं विधानसभा सर्वाधिक कार्यकाल वाली विशेष: 1977 में केन्द्र में जनता पार्टी → राजस्थान में 2रा राष्ट्रपति शासन (30 अप्रैल–21 जून 1977) अध्यक्ष: रामकिशोर व्यास | प्रोटेम: यशवंत सिंह नाहर
चुनाव: 200 सीटें (184 से बढ़कर) — पहली बार 200 सीटें परिणाम: जनता पार्टी 151, कांग्रेस 41 विशेष: राजस्थान में प्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार; CM भैरोसिंह शेखावत (प्रथम गैर-कांग्रेसी CM) अध्यक्ष: लक्ष्मण सिंह (प्रथम गैर-कांग्रेसी अध्यक्ष) → गोपाल सिंह भाद्राजून | प्रोटेम: मेजर फतेह सिंह विशेष: 1980 में जनता पार्टी गिरी → 3रा राष्ट्रपति शासन (17 फरवरी–5 जून 1980); प्रथम मध्यावधि चुनाव
चुनाव: 200 सीटें; प्रथम मध्यावधि चुनाव परिणाम: कांग्रेस 133, BJP 32 विशेष: प्रथम मध्यावधि चुनावों से गठित विधानसभा; CM: जगन्नाथ पहाड़िया (SC, प्रथम दलित CM) अध्यक्ष: पूनम चंद विश्नोई | प्रोटेम: परसराम मदेरणा विशेष: डीग गोलीकाण्ड (भरतपुर, महाराजा मानसिंह मृत्यु) → शिवचरण माथुर CM → हीरालाल देवपुरा (16 दिन) CM
चुनाव: 200 सीटें; कांग्रेस 113, BJP 39 CM: हरिदेव जोशी (2री बार) → शिवचरण माथुर (2री बार) | प्रोटेम: लक्ष्मण सिंह अध्यक्ष: हीरालाल देवपुरा → गिरिराज प्रसाद तिवाड़ी (1 बार हटाने का प्रयास) विशेष: 1987 में संभागीय व्यवस्था पुनः प्रारंभ (हरिदेव जोशी) | दिवराला सती काण्ड 1987
परिणाम: BJP 85 (सर्वाधिक) — किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं; जनता दल 55 सहयोग से शेखावत CM विशेष: राजस्थान में 2री बार गैर-कांग्रेसी सरकार; CM: भैरोसिंह शेखावत अध्यक्ष: हरिशंकर भाभड़ा (1री बार) | प्रोटेम: पूनम चंद विश्नोई विशेष: राम मंदिर आंदोलन → जनता दल ने समर्थन वापस; बाबरी काण्ड (1992) → 4था राष्ट्रपति शासन (15 दिसम्बर 1992–3 दिसम्बर 1993) विशेष: 2री बार मध्यावधि चुनाव; अविश्वास प्रस्ताव 2 बार (शेखावत के विरुद्ध)
परिणाम: BJP 95 (सबसे बड़ी) — निर्दलीय समर्थन से शेखावत 3री बार CM अध्यक्ष: हरिशंकर भाभड़ा (2री बार) → शांतिलाल चपलोत (2 बार हटाने का प्रयास — जगदीप धनकड़ द्वारा) प्रोटेम: पूनम चंद विश्नोई (3री बार — सर्वाधिक)
परिणाम: कांग्रेस 153 — पहली बार 3/4 (तीन-चौथाई) बहुमत; CM: अशोक गहलोत (1री बार) अध्यक्ष: परसराम मदेरणा | प्रोटेम: भैरोसिंह शेखावत विशेष: पहली बार EVM (Electronic Voting Machine) का प्रयोग — अंशतः (सम्पूर्ण राज्य में नहीं)
परिणाम: BJP 120 — वसुंधरा राजे ने पूर्ण बहुमत दिलाया; CM: वसुंधरा राजे (प्रथम महिला CM) अध्यक्ष: श्रीमती सुमित्रा सिंह — प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष प्रोटेम: गंगाराम चौधरी विशेष: 12वीं विधानसभा: CM + राज्यपाल + विधानसभा अध्यक्ष तीनों महिलाएँ (वसुंधरा + प्रतिभा पाटिल + सुमित्रा सिंह) विशेष: सम्पूर्ण राज्य में पहली बार EVM का प्रयोग (2003)
परिणाम: कांग्रेस 96 (सबसे बड़ी) — निर्दलीय + BSP समर्थन; CM: अशोक गहलोत (2री बार) अध्यक्ष: दीपेन्द्र सिंह शेखावत | प्रोटेम: देवी सिंह भाटी विशेष: सर्वाधिक महिला सदस्य — 28 महिला विधायक इस विधानसभा में जीतकर आईं
परिणाम: BJP 163 — राजस्थान में किसी एक पार्टी को अब तक मिलने वाली सर्वाधिक सीटें CM: वसुंधरा राजे (2री बार) | अध्यक्ष: कैलाश मेघवाल | उपाध्यक्ष: राव राजेन्द्र सिंह प्रोटेम: प्रद्युम्न सिंह
चुनाव: 7 दिसम्बर 2018 को 199 सीटों पर (रामगढ़ 28 जनवरी 2019 को); कुल मतदान 74.69% रामगढ़: BSP प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह निधन → चुनाव स्थगित → साफिया जुबेर (कांग्रेस) विजयी परिणाम: कांग्रेस 99 सीटें (6 BSP विधायकों के विलय से 107 सीटें हुईं) अध्यक्ष: चंद्र प्रकाश जोशी | प्रोटेम: गुलाब चंद कटारिया विशेष: 27 महिला विधायक; NOTA 1.41%; सर्वाधिक मतदान: जैसलमेर (85.36%); न्यूनतम: पाली (65.31%) विशेष: करणपुर (गंगानगर) में पुनः मतदान — पीठासीन अधिकारी की गलती
चुनाव: 25 नवम्बर 2023 को 199 सीटों पर; करणपुर स्थगित — कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह का निधन करणपुर: 5 जनवरी 2024 को उपचुनाव — कांग्रेस के रूपेन्द्र सिंह कुन्नर विजयी परिणाम: BJP 119 (199 में से), कांग्रेस 69, BAP 3, BSP 2, RLP 1, निर्दलीय 8 अंतिम परिणाम: करणपुर सहित: BJP 115, कांग्रेस 70, BAP 3, BSP 2, RLD 1, निर्दलीय 8, RLP 1 CM: भजनलाल शर्मा (सांगानेर, जयपुर) | DCM: दीया कुमारी + प्रेमचंद बैरवा शपथ: 15 दिसम्बर 2023, अल्बर्ट हॉल, जयपुर; राज्यपाल कलराज मिश्र ने दिलाई अध्यक्ष: वासुदेव देवनानी (अजमेर उत्तर) | प्रोटेम: कालीचरण सराफ (मालवीयनगर) मतदान: 75.45% (15वीं से 0.73% वृद्धि); ग्रामीण 75.68%, शहरी 71.23% महिला: 21 महिला विधायक (10.5%) — 10 BJP, 9 कांग्रेस, 2 निर्दलीय युवा: सबसे युवा विधायक: रवीन्द्रसिंह भाटी (शिव सीट, निर्दलीय, 25 वर्ष) NOTA: 3,82,066 (0.96%) — सर्वाधिक झाड़ोल सीट पर
16वीं विधानसभा में BJP को पूर्ण बहुमत; राजस्थान में BJP ने 2003 में वसुंधरा, 2013 में वसुंधरा, 2023 में भजनलाल — तीन बार गैर-कांग्रेसी CM। 16वीं में सर्वाधिक मतों से विजेता — दीया कुमारी (विद्याधरनगर से 71,368 मत); न्यूनतम — हेमराज पटेल (कोटपूतली से 321 मत)।
16वीं विधानसभा में 7 सीटों पर उपचुनाव 13 नवम्बर 2024 को हुए। मतगणना 23 नवम्बर 2024 को। कुल 7 में से BJP ने 5, कांग्रेस ने 1 और RLP ने 1 जीती।
| क्र. | विधानसभा सीट | विजेता | पार्टी | विशेष |
|---|---|---|---|---|
| 1. | झुंझुनूं | रेवतराम डागा | BJP | — |
| 2. | सलूम्बर | शांता मीणा | BJP | विधायक अमृतलाल मीणा के निधन से रिक्त |
| 3. | देवली-उनियारा | राजेन्द्र गुर्जर | BJP | — |
| 4. | रामगढ़ | सुखवंत सिंह | BJP | — |
| 5. | दौसा | दीनदयाल बैरवा | BJP | विधायक मुरारीलाल मीणा के LS जीतने से रिक्त |
| 6. | चौरासी | अनिल कटारा | कांग्रेस | BAP से कांग्रेस की जीत |
| 7. | खींवसर | प्रकाश बेनीवाल | RLP | हनुमान बेनीवाल के LS जीतने से रिक्त |
| विधानसभा | वर्ष | मैदान में महिलाएँ | विजयी महिलाएँ |
|---|---|---|---|
| 1ली | 1952 | 04 | 00 (4 लड़ीं — सभी हारीं) |
| 2री | 1957 | 22 | 08 |
| 3री | 1962 | 14 | 08 |
| 4थी | 1967 | 11 | 06 |
| 5वीं | 1972 | 05 | 04 |
| 6ठी | 1977 | 32 | 07 |
| 7वीं | 1980 | 31 | 10 |
| 8वीं | 1985 | 44 | 16 |
| 9वीं | 1990 | 87 | 11 |
| 10वीं | 1993 | 90 | 09 |
| 11वीं | 1998 | 69 | 14 |
| 12वीं | 2003 | 118 | 12 |
| 13वीं | 2008 | 154 | 28 (सर्वाधिक) |
| 14वीं | 2013 | 166 | 28 (सर्वाधिक = 13वीं के बराबर) |
| 15वीं | 2018 | 189 | 27 |
| 16वीं | 2023 | 183 | 21 |
विपक्ष के नेता पद का संविधान में उल्लेख नहीं है। यह पद प्राप्त करने के लिए कुल सीटों का कम से कम 10% (20 सीटें) जीतना आवश्यक है। विपक्ष नेता को कैबिनेट मंत्री के समान वेतन-भत्ते व सुविधाएँ।
| विधानसभा | विपक्ष के नेता |
|---|---|
| 1ली | जसवंत सिंह (बीकानेर), तन सिंह |
| 2री | — |
| 3री | नरेन्द्र सिंह |
| 4थी | लक्ष्मण सिंह |
| 5वीं | लक्ष्मण सिंह |
| 6ठी | लक्ष्मण सिंह |
| 7वीं | परसराम मदेरणा, रामनारायण चौधरी, लक्ष्मण सिंह |
| 8वीं | भैरोसिंह शेखावत |
| 9वीं | हरिदेव जोशी |
| 10वीं | भैरोसिंह शेखावत, केदारनाथ शर्मा |
| 11वीं | परसराम मदेरणा |
| 12वीं | भैरोसिंह शेखावत, गुलाब चंद कटारिया |
| 13वीं | बी.डी. कल्ला, रामनारायण चौधरी, हेमाराम चौधरी |
| 14वीं | वसुंधरा राजे, गुलाब चंद कटारिया |
| 15वीं | रामेश्वर लाल डूडी, गुलाब चंद कटारिया, राजेन्द्र राठौड़ |
| 16वीं | टीकाराम जूली (अलवर ग्रामीण, कांग्रेस) — वर्तमान |
राजस्थान से लोकसभा की कुल 25 सीटें; राज्यसभा की 10 सीटें — कुल 35 सांसद। लोकसभा में 4 SC + 3 ST आरक्षित।
| लोकसभा क्षेत्र | सांसद | दल |
|---|---|---|
| अजमेर | भागीरथ चौधरी | BJP |
| अलवर | भूपेन्द्र यादव | BJP |
| बाँसवाड़ा (ST) | राजकुमार रोत | BAP (भारत आदिवासी पार्टी) |
| बाड़मेर | उम्मेदाराम बनीवाल | कांग्रेस |
| भरतपुर (SC) | संजना जाटव | कांग्रेस |
| भीलवाड़ा | दामोदर अग्रवाल | BJP |
| बीकानेर (SC) | अर्जुनराम मेघवाल | BJP |
| चित्तौड़गढ़ | चंद्रप्रकाश जोशी | BJP |
| चूरू | राहुल कस्वां | कांग्रेस |
| दौसा (ST) | मुरारीलाल मीणा | कांग्रेस |
| गंगानगर (SC) | कुलदीप इंदौरा | कांग्रेस |
| जयपुर | मंजू शर्मा | BJP |
| जयपुर ग्रामीण | राव राजेन्द्र सिंह | BJP |
| जालौर | लुम्बाराम | BJP |
| झालावाड़-बाराँ | दुष्यंत सिंह | BJP |
| झुंझुनूं | बृजेन्द्र सिंह ओला | कांग्रेस |
| जोधपुर | गजेन्द्र सिंह शेखावत | BJP |
| करौली-धौलपुर (SC) | भजनलाल जाटव | कांग्रेस |
| कोटा | ओम बिड़ला | BJP |
| नागौर | हनुमान बेनीवाल | RLP |
| पाली | पी.पी. चौधरी | BJP |
| राजसमंद | महिमा कुमारी मेवाड़ | BJP |
| सीकर | अमराराम | CPI(M) |
| टोंक-सवाईमाधोपुर | हरिशचंद्र मीणा | कांग्रेस |
| उदयपुर (ST) | मन्नालाल रावत | BJP |
| सांसद | मंत्रालय | पद |
|---|---|---|
| गजेन्द्र सिंह शेखावत (जोधपुर) | पर्यटन एवं संस्कृति | कैबिनेट मंत्री |
| भूपेन्द्र यादव (अलवर) | वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, श्रम एवं रोजगार | कैबिनेट मंत्री |
| अर्जुनराम मेघवाल (बीकानेर) | कानून एवं न्याय; संसदीय कार्य + संस्कृति (MoS) | राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) |
| भागीरथ चौधरी (अजमेर) | कृषि एवं किसान कल्याण | राज्य मंत्री |
18वीं लोकसभा में राजस्थान: सर्वाधिक मतों से विजेता — महिमा कुमारी मेवाड़ (राजसमंद, 3,92,223 मत); न्यूनतम — राव राजेन्द्र सिंह (जयपुर ग्रामीण, 1615 मत)। सर्वाधिक मतदान: बाड़मेर (74.25%); न्यूनतम: करौली-धौलपुर (49.25%)।
| नाम | दल | कार्यकाल/विशेष |
|---|---|---|
| डॉ. अलका सिंह | BJP | 22.06.2026 – 21.06.2032 |
| डॉ. सतीश पूनिया | BJP | 22.06.2026 – 21.06.2032 |
| नीरज डांगी | INC | 22.06.2026 – 21.06.2032 |
| घनश्याम तिवाड़ी | BJP | वर्तमान |
| रणदीप सिंह सुरजेवाला | INC | वर्तमान |
| मुकुल वासनिक | INC | वर्तमान |
| प्रमोद कुमार | INC | वर्तमान |
| चुन्नीलाल गरासिया | BJP | वर्तमान |
| मदन राठौड़ | BJP | वर्तमान |
| सोनिया गांधी | INC | वर्तमान |
राज्यसभा में मनोनीत होने वाले प्रथम राजस्थानी — नारायणसिंह माणकलाव। निर्वाचित होने वाले प्रथम राजस्थानी — रामनाथ पोद्दार। सर्वाधिक 4 बार राज्यसभा सदस्य — रामनिवास मिर्धा और जसवंत सिंह।
| क्र. | सांसद | दल | वर्ष/विशेष |
|---|---|---|---|
| 1. | शारदा भार्गव | कांग्रेस | 1952 — प्रथम महिला राज्यसभा सांसद; 3 बार (1952, 1956, 1963) — सर्वाधिक; राज्यसभा उपसभापति भी रहीं |
| 2. | लक्ष्मीकुमारी चुड़ावत | — | — |
| 3. | शांति पहाड़िया | — | — |
| 4. | प्रभा ठाकुर | कांग्रेस | — |
| 5. | मंगला देवी तलवार | — | — |
| 6. | नारायणी देवी वर्मा | — | — |
| 7. | ऊषी खान | — | — |
| 8. | जमना देवी बारुपाल | — | — |
| 9. | नजमा हेपतुल्ला | कांग्रेस | — |
| 10. | सोनिया गाँधी | कांग्रेस | 2024 से; वर्तमान एकमात्र महिला राज्यसभा सांसद |
| 11 | डॉ. अलका सिंह | bjp |
| सांसद | क्षेत्र/पार्टी | वर्ष | विशेष |
|---|---|---|---|
| महारानी गायत्री देवी | जयपुर / स्वतंत्र पार्टी | 1962, 1967, 1971 | प्रथम महिला लोकसभा सांसद (राजस्थान से); 3 बार |
| निर्मला कुमारी शक्तावत | चित्तौड़ / कांग्रेस | 1980, 1984 | — |
| इंदुबाला सुखाड़िया | उदयपुर / कांग्रेस | 1984 | CM सुखाड़िया की पत्नी |
| डॉ. गिरिजा व्यास | उदयपुर / कांग्रेस | 1991, 1996, 1999, 2009 | 4 बार; राजस्थान से केन्द्रीय मंत्री बनने वाली प्रथम महिला (1991, PV नरसिंहराव सरकार में) |
| वसुंधरा राजे | झालावाड़ / BJP | 1989-1999 (5 बार) | सर्वाधिक 5 बार लोकसभा सांसद (राजस्थान की महिला में) |
| ऊषा देवी मीणा | स. माधोपुर / कांग्रेस | 1996, 1998 | ST प्रथम महिला लोकसभा सदस्य (1996) |
| सुशीला बंगारु | जालौर / BJP | 2004 | SC प्रथम महिला लोकसभा सदस्य (2004) |
| दीया कुमारी | राजसमंद / BJP | 2019 | अब राजस्थान की उपमुख्यमंत्री |
| संजना जाटव | भरतपुर(SC) / कांग्रेस | 2024 | 18वीं LS; सबसे युवा सांसद |
| महिमा कुमारी मेवाड़ | राजसमंद / BJP | 2024 | सर्वाधिक मतों से विजेता (3,92,223) |
| मंजू शर्मा | जयपुर / BJP | 2024 | — |
लोकसभा चुनाव लड़ने वाली प्रथम महिलाएँ (1952, दोनों हारीं): शारदा बाई (निर्दलीय, भरतपुर) + रानी देवी भार्गव (जनसंघ, सिरोही-पाली)। राजस्थान से अब तक 33 महिलाएँ सांसद रहीं (23 LS + 10 RS)।
| श्रेणी | तथ्य |
|---|---|
| प्रथम महिला LS सांसद | महारानी गायत्री देवी — 1962, जयपुर (स्वतंत्र पार्टी) |
| प्रथम महिला RS सांसद | शारदा भार्गव — 1952 (कांग्रेस) |
| सर्वाधिक बार LS सांसद (महिला) | वसुंधरा राजे — 5 बार (1989-1999) |
| सर्वाधिक बार RS सांसद (महिला) | शारदा भार्गव — 3 बार (RS उपसभापति भी) |
| सर्वाधिक बार LS सदस्य | नाथूराम मिर्धा — सर्वाधिक बार |
| सर्वाधिक बार RS सदस्य | रामनिवास मिर्धा (4 बार) + जसवंत सिंह (4 बार) |
| प्रथम महिला केन्द्रीय मंत्री | डॉ. गिरिजा व्यास — 1991 (PV नरसिंहराव सरकार में उपमंत्री) |
| प्रथम केबिनेट मंत्री | कालूलाल श्रीमाली — 1958-63 (JL नेहरू सरकार में) |
| LS से लोकसभा अध्यक्ष | बलराम जाखड़ (सीकर सांसद) + ओम बिड़ला (कोटा-बूंदी — 17वीं/18वीं LS) |
| प्रथम मुख्य सचेतक | मथुरादास माथुर |
| RS में मनोनीत प्रथम | नारायणसिंह माणकलाव |
| RS में निर्वाचित प्रथम | रामनाथ पोद्दार |
| SC की प्रथम महिला LS | सुशीला बंगारु (जालौर, 2004) |
| ST की प्रथम महिला LS | ऊषा देवी मीणा (सवाई माधोपुर, 1996) |
| LS चुनाव लड़ने वाली प्रथम महिलाएँ | शारदा बाई + रानी देवी भार्गव — 1952 (दोनों हारीं) |
| 18वीं LS — सर्वाधिक विजय | महिमा कुमारी मेवाड़ (3,92,223 मत — राजसमंद) |
| 18वीं LS — न्यूनतम विजय | राव राजेन्द्र सिंह (1615 मत — जयपुर ग्रामीण) |
| 18वीं LS — सर्वाधिक मतदान | बाड़मेर (74.25%) |
| 18वीं LS — न्यूनतम मतदान | करौली-धौलपुर (49.25%) |
| प्रथम LS चुनाव (1952) में राजस्थान | 22 सीटें (20 राजस्थान + 2 अजमेर-मेरवाड़ा) |
| RS में पुस्तक | राजस्थान की राजनीति: सामंतवाद से जातिवाद के भँवर में — लेखक: विजय भण्डारी |
| श्रेणी | रिकॉर्ड |
|---|---|
| सर्वाधिक सीटों वाला विधानसभा जिला | जयपुर (19 सीटें), अलवर (11 सीटें) |
| न्यूनतम सीटों वाले जिले | जैसलमेर (2) + प्रतापगढ़ (2) |
| सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र (क्षेत्रफल) | जैसलमेर |
| भारत में क्रमांक 01 सीट | सारदुलशहर (चूरू) |
| एक से अधिक जिलों में फैला क्षेत्र | नाथद्वारा (राजसमंद) |
| सभी सीटें ST आरक्षित जिले | बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ |
| एक भी आरक्षित सीट नहीं | जैसलमेर + राजसमंद |
| 16वीं विधानसभा में 18वीं LS में LS जीतने वाले MLA | 5 विधायक LS जीते |
| विधानसभा का प्रोटोकॉल | राज्यपाल > CM > विधानसभा अध्यक्ष > विपक्ष नेता |
| विधानसभा Digital Museum उद्घाटन | भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.बी. रमना ने किया |
| राजस्थान की राजनीति से संबंधित पुस्तक | वसुंधरा राजे और विकसित राजस्थान — रचयिता: विजय नाहर |
| भरतपुर से CM बने (2) | जगन्नाथ पहाड़िया + भजनलाल शर्मा |
| सर्वाधिक उपचुनाव (1 विधानसभा में) | प्रथम विधानसभा — 17 उपचुनाव |
| EVM पहली बार अंशतः | 11वीं विधानसभा 2003 चुनाव में |
| EVM सम्पूर्ण राज्य | 12वीं विधानसभा 2003 चुनाव में |
| NOTA सर्वाधिक (16वीं) | झाड़ोल सीट (6,488 मतदाता) |
| सर्वाधिक EVM मतदान (16वीं) | कुशलगढ़ (88.13%) |
| न्यूनतम EVM मतदान (16वीं) | आहोर (61.24%) |
| 16वीं में 40 वर्ष या कम आयु के MLA | 28 विधायक |
| 16वीं में पहली बार MLA | 72 विधायक |
1. विधानसभा अध्यक्ष — प्रथम: नरोत्तम लाल जोशी; सर्वाधिक कार्यकाल: रामनिवास मिर्धा; न्यूनतम: समरथलाल मीणा (5 माह); प्रथम महिला: सुमित्रा सिंह; प्रथम गैर-कांग्रेसी: लक्ष्मण सिंह। 2. प्रोटेम स्पीकर सर्वाधिक 3 बार — पूनम चंद विश्नोई। वर्तमान प्रोटेम: कालीचरण सराफ। 6 बार हटाने का प्रयास — सभी विफल। 3. 1ली विधानसभा (1952): 160 सीटें; प्रथम महिला MLA: यशोदा देवी (1953); 4 महिलाएँ लड़ीं — सभी हारीं। 4. राष्ट्रपति शासन 4 बार: 1967 (45 दिन), 1977 (53 दिन), 1980 (109 दिन), 1992-93 (353 दिन)। 5. 5वीं विधानसभा — सर्वाधिक कार्यकाल (आपातकाल 1975)। 200 सीटें 1977 (6ठी) से। 6. 11वीं (2003): EVM अंशतः; 12वीं (2003): सम्पूर्ण EVM; तीनों महिलाएँ (CM + Gov + Speaker)। 7. 14वीं — BJP 163 (सर्वाधिक); 16वीं — 75.45% मतदान; CM भजनलाल शर्मा; DCM दीया कुमारी + बैरवा। 8. विपक्ष नेता — सर्वाधिक 4 बार: लक्ष्मण सिंह। प्रथम महिला: वसुंधरा राजे। 16वीं: टीकाराम जूली। 9. 18वीं LS (2024): राजस्थान 25 सीटें — BJP 14, कांग्रेस 8, CPI(M) 1, RLP 1, BAP 1। 10. LS में 3 महिला (2024): संजना जाटव, महिमा कुमारी, मंजू शर्मा। राजस्थान से अब तक 33 महिला सांसद। 11. LS प्रथम महिला (1962): गायत्री देवी; RS प्रथम महिला (1952): शारदा भार्गव (3 बार + उपसभापति)। 12. प्रथम महिला केन्द्रीय मंत्री: गिरिजा व्यास (1991)। प्रथम केबिनेट मंत्री: कालूलाल श्रीमाली (1958)। 13. LS अध्यक्ष — बलराम जाखड़ (सीकर) + ओम बिड़ला (कोटा-बूंदी)। 14. विधानमण्डल में महिला भागीदारी — 13वीं-14वीं में सर्वाधिक 28; 16वीं में 21 (10.5%)। 15. विशेष सीटें — जैसलमेर सबसे बड़ा क्षेत्र; सारदुलशहर क्रमांक 1; BAD जिले — सभी ST आरक्षित।