कल्पना कीजिए — 1938 ई. में जयपुर के नाथमल का कटला में हजारों लोग एकत्र हैं, मंच पर सेठ जमनालाल बजाज अध्यक्षता कर रहे हैं और अगले ही दिन कस्तूरबा गांधी स्वयं महिला-सभा को संबोधित करती हैं। यह कोई साधारण सभा नहीं थी — यह जयपुर प्रजामंडल का प्रथम अधिवेशन था, जो रियासती जनता की सदियों पुरानी चुप्पी को तोड़ने वाला था। बिजोलिया, बेंगू व मानगढ़ जैसे किसान-जनजातीय आंदोलनों ने जो चिंगारी जलाई थी, प्रजामंडल आंदोलन ने उसे एक संगठित, राजनीतिक रूप दिया — "राजा के अधीन उत्तरदायी शासन" (Responsible Government under the Crown) की मांग के साथ। अगले दो दशकों में जयपुर से जैसलमेर तक, हर छोटी-बड़ी रियासत में यह मांग गूंजी, हजारों सत्याग्रहियों ने जेल भरी, कालीबाई जैसी किशोरियों ने बलिदान दिया — और अंततः यही जन-जागृति राजस्थान के एकीकरण का सबसे मजबूत आधार बनी।
| संगठन (Organization) | स्थापना (Year) | स्थान (Place) | प्रमुख व्यक्ति |
|---|---|---|---|
| अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (AISPC) | 1927 ई. | बॉम्बे (मुंबई) | रामचंद्र राव (अध्यक्ष), विजयसिंह पथिक (उपाध्यक्ष) |
| राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद | 1928 ई. | अजमेर | रामनारायण चौधरी |
| हरिपुरा अधिवेशन (कांग्रेस समर्थन) | 1938 ई. | हरिपुरा (गुजरात) | सुभाषचंद्र बोस (कांग्रेस अध्यक्ष) |
महत्व की तीन कसौटियां: राजनीतिक महत्व — उत्तरदायी शासन की स्थापना, राजनीतिक चेतना का विकास, राष्ट्रीय एकता को बल, राजतंत्र का अंत व लोकतंत्र की स्थापना, राजस्थान के शांतिपूर्ण एकीकरण (अध्याय 16) में योगदान। सामाजिक महत्व — सामाजिक कुरीतियों में कमी, अस्पृश्यता-निवारण, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा का प्रसार, नागरिक असमानता का विरोध। आर्थिक महत्व — स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा, किसान आंदोलनों को समर्थन, भूमि पर किसान के अधिकार, जागीरदारी व बेगार प्रथा की समाप्ति।
प्रजामंडलों की स्थापना से पूर्व राजस्थान में कई छोटे-छोटे सामाजिक-राजनीतिक संगठन बने, जिन्होंने शिक्षा, समाज-सुधार व राष्ट्रीय चेतना के प्रसार का कार्य किया — इन्हीं संगठनों के कार्यकर्ता आगे चलकर प्रजामंडलों के प्रमुख नेता बने।
| संगठन (Organization) | वर्ष | स्थान | संस्थापक/संबंधित व्यक्ति |
|---|---|---|---|
| जैन शिक्षा प्रचारक समिति | 1905 ई. | जयपुर | अर्जुनलाल सेठी |
| अभिनव भारत समिति | 1907 ई. | जयपुर | अर्जुनलाल सेठी, गोपाल सिंह, केसरी सिंह |
| सर्वहितकारिणी सभा | 1907 ई. | चूरू | कन्हैयालाल ढूंढ, स्वामी गोपालदास |
| वर्धमान विद्यालय | 1907 ई. | जयपुर | अर्जुनलाल सेठी |
| आचार सुधारिणी सभा | 1910 ई. | धौलपुर | यमुना प्रसाद शर्मा |
| वीर भारत सभा | 1910 ई. | अजमेर | केसरी सिंह बारहठ, गोपाल सिंह |
| मारुधरा हितकारिणी सभा | 1915 ई. | जोधपुर | जयनारायण व्यास, भंवरलाल |
| राजपूताना मध्य भारत सभा | 1918 ई. | दिल्ली | जमनालाल बजाज, विजयसिंह पथिक |
| राजस्थान सेवा संघ | 1919 ई. | वर्धा (बाद में ब्यावर/अजमेर) | विजयसिंह पथिक |
| राजपूत सेवा संघ | 1920 ई. | जोधपुर | जयनारायण व्यास |
| अमर सेवा समिति | 1922 ई. | चिड़ावा | पं. प्यारेलाल गुप्ता |
| अस्पृश्यता निवारण संघ | 1923 ई. | अलवर | हरिनारायण शर्मा |
| राजस्थान चरखा संघ | 1925 ई. | अजमेर | जमनालाल बजाज |
| हरिजनोद्धार सभा | 1925 ई. | कोटा | नंदलाल शर्मा |
| नागरिक प्रचारिणी सभा | 1934 ई. | धौलपुर | ज्वालाप्रसाद जिज्ञासु |
| खादी आश्रम | 1934 ई. | डूंगरपुर | माणिक्यलाल वर्मा |
| राजस्थान सेवक मंडल | 1935 ई. | — | भोगीलाल पांड्या |
| घटना/संगठन (Event/Org) | वर्ष (Year) | विवरण (Detail) |
|---|---|---|
| मारवाड़ हितकारिणी सभा | 1918 ई. | संस्थापक चांदमल सुराणा |
| मारवाड़ सेवा संघ | 1920 ई. | स्थापना |
| मारवाड़ प्रजामंडल पुनर्गठन | 1923/1934 ई. | जयनारायण व्यास द्वारा पुनर्गठित, अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ |
| चांदी तिरंगा फहराव | 1932 ई. | छगनराज चोपासनीवाला ने जोधपुर में तिरंगा फहराया |
| तौल आंदोलन (Weight Movement) | — | 100 तोला के स्थान पर 80 तोला 1 सेर करने के विरुद्ध आंदोलन |
| कृष्ण दिवस | 1936 ई., बॉम्बे | कृष्ण-अपहरण मामले के विरुद्ध मनाया गया |
| शिक्षा दिवस | 1936 ई., जोधपुर | स्कूल फीस वृद्धि के विरुद्ध |
| चांडावल कांड (पाली) | 28 मार्च 1942 ई. | किसान सभा पर लाठीचार्ज |
| डाबड़ा कांड (नागौर) | 13 मार्च 1947 ई. | शहीद मोतीराम-चुन्नीलाल; घायल माथुरादास माथुर |
1938 ई. में विजयलक्ष्मी पंडित सुभाषचंद्र बोस के साथ जोधपुर आईं — यह घटना दर्शाती है कि किस प्रकार राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस नेता रियासती प्रजामंडल आंदोलनों को प्रत्यक्ष समर्थन देने पहुंचते थे, जिससे स्थानीय आंदोलनों को राष्ट्रीय पहचान व नैतिक बल मिलता था।
"सारदा किला — जहां दीवारें कैद कर सकती थीं, पर विचारों को नहीं।" — मेवाड़ प्रजामंडल की स्मृति परंपरा ("मेवाड़ का कालापानी")
| प्रजामंडल | स्थापना वर्ष | संस्थापक/नेता | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| बूंदी प्रजामंडल | 1931 ई. | नित्यानंद, कांतिलाल, ऋषिदत्त मेहता | "राजस्थान" समाचार-पत्र (1923, ब्यावर) से जुड़ाव; बूंदी देशी राज्य लोक परिषद (ऋषिदत्त मेहता का संगठन) |
| हाड़ौती प्रजामंडल | 1934 ई. | पं. नयनूराम शर्मा, हाजी फैज मोहम्मद | बेगार-विरोधी आंदोलन का नेतृत्व (नयनूराम शर्मा — अध्याय 14 में भी उल्लेखित) |
| कोटा प्रजामंडल | 1939 ई. | नयनूराम शर्मा, अभिन्न हरि, तनसुखलाल मित्तल | प्रथम अधिवेशन 1939 मांगरोल; द्वितीय अधिवेशन 1940 कोटा |
| प्रजामंडल | स्थापना वर्ष | संस्थापक/नेता | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| अलवर प्रजामंडल | 1938 ई. | हरिनारायण शर्मा | भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में भाग नहीं लिया; प्रथम अधिवेशन 1944, अध्यक्ष भवानीशंकर शर्मा |
| भरतपुर प्रजामंडल | 1938 ई. | गोपीलाल यादव | स्थापना रेवाड़ी में; जुगलकिशोर चतुर्वेदी — "राजस्थान के नेहरू"; समाचार-पत्र "वैभव"; जापान दिवस (16-17 अगस्त 1945), इंडोनेशिया दिवस (28 अक्टूबर 1945) |
| धौलपुर प्रजामंडल | 1936 ई. | ज्वालाप्रसाद जिज्ञासु, कृष्णदत्त पालीवाल | तासीमो कांड — 11 अप्रैल 1947 ई., शहीद पंचमसिंह-छत्तरसिंह |
| करौली प्रजामंडल | 1938 ई. | त्रिलोकचंद माथुर, चिरंजीलाल वर्मा, कुंवर मदनसिंह | कुंवर मदनसिंह — करौली किसान आंदोलन (1927, अध्याय 14) से भी जुड़े |
विशेष उपलब्धि: शाहपुरा (छोटी सी ठिकानेदारी होते हुए भी) राजस्थान की उन गिनी-चुनी रियासतों में अग्रणी रही जहां प्रजामंडल आंदोलन ने व्यवहारिक रूप से उत्तरदायी शासन स्थापित करवाया — यह झालावाड़ में भी बाद में दोहराया गया (देखें अनुभाग 13)।
सोचिए — डूंगरपुर के रास्तापाल गांव की एक भील किशोरी कालीबाई, जो नई-नई पढ़ना सीख रही थी, 19 जून 1947 की उस शाम पुलिस को अपनी शिक्षिका सेंगाभाई को गिरफ्तार करते देखती है। बिना डरे वह शिक्षिका को बचाने दौड़ पड़ती है — और पुलिस की गोली का शिकार होकर सदा के लिए अमर हो जाती है। आज, लगभग 80 वर्ष बाद भी, राजस्थान सरकार उन्हीं की स्मृति में मेधावी बालिकाओं को छात्रवृत्ति व स्कूटी/नकद राशि प्रदान करती है — यह दर्शाता है कि एक किशोरी का बलिदान कैसे पीढ़ियों तक शिक्षा की मशाल जलाए रखता है।
| प्रजामंडल | स्थापना वर्ष | संस्थापक/नेता | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| बांसवाड़ा प्रजामंडल | 1943 ई. | मणिशंकर नागर, धूलजी भाई भावसार, भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी | विजया बहन भावसार ने "महिला मंडल" की स्थापना की |
| कुशलगढ़ प्रजामंडल | 1942 ई. | भंवरलाल निगम | वागड़ क्षेत्र की छोटी ठिकानेदारी में प्रजामंडल गतिविधि |
| प्रतापगढ़ प्रजामंडल | 1945 ई. | अमृतलाल पायक, चुन्नीलाल प्रभाकर, ठक्कर बापा | वागड़-मालवा सीमा क्षेत्र में उत्तरदायी शासन की मांग |
नीचे दी तालिका राजस्थान की सभी प्रमुख रियासतों के प्रजामंडलों को एक साथ प्रस्तुत करती है — रिवीजन व त्वरित तुलना के लिए यह तालिका सर्वाधिक उपयोगी है:
| प्रजामंडल (रियासत) | स्थापना वर्ष | संस्थापक/प्रमुख नेता | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| जयपुर प्रजामंडल | 1931 ई. | कपूरचंद पाटनी, जमनालाल बजाज | राजस्थान का प्रथम प्रजामंडल; 1936-37 में हीरालाल शास्त्री द्वारा पुनर्गठित |
| बूंदी प्रजामंडल | 1931 ई. | नित्यानंद, कांतिलाल, ऋषिदत्त मेहता | "राजस्थान" समाचार-पत्र (1923) से जुड़ाव |
| मारवाड़ प्रजामंडल | 1934 ई. (पुनर्गठन) | जयनारायण व्यास, भंवरलाल सर्राफ | "तौल आंदोलन" के लिए प्रसिद्ध |
| हाड़ौती प्रजामंडल | 1934 ई. | नयनूराम शर्मा, हाजी फैज मोहम्मद | बेगार-विरोधी आंदोलन |
| सिरोही प्रजामंडल | 1939 ई. | गोकुलभाई भट्ट | गोकुलभाई — "राजस्थान के गांधी" |
| बीकानेर प्रजामंडल | 1936 ई., कलकत्ता | वैद्य मघाराम | 1944 — दमन-विरोधी दिवस मनाया गया |
| कोटा प्रजामंडल | 1939 ई. | नयनूराम शर्मा | प्रथम अधिवेशन मांगरोल में हुआ |
| मेवाड़ प्रजामंडल | 1938 ई. | माणिक्यलाल वर्मा, बलवंत सिंह मेहता | सारदा किला — "मेवाड़ का कालापानी" |
| अलवर प्रजामंडल | 1938 ई. | हरिनारायण शर्मा | भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लिया |
| भरतपुर प्रजामंडल | 1938 ई. | गोपीलाल यादव | जुगलकिशोर चतुर्वेदी — "राजस्थान के नेहरू" |
| शाहपुरा प्रजामंडल | 1938 ई. | लादूराम व्यास | राजस्थान की प्रथम उत्तरदायी सरकार स्थापित |
| धौलपुर प्रजामंडल | 1936 ई. | ज्वालाप्रसाद जिज्ञासु | तासीमो कांड (1947) |
| करौली प्रजामंडल | 1938 ई. | त्रिलोकचंद माथुर | कुंवर मदनसिंह भी संस्थापकों में शामिल |
| किशनगढ़ प्रजामंडल | 1939 ई. | कांतिलाल चौथानी, जमालशाह | — |
| कुशलगढ़ प्रजामंडल | 1942 ई. | भंवरलाल निगम | वागड़ की छोटी ठिकानेदारी |
| बांसवाड़ा प्रजामंडल | 1943 ई. | मणिशंकर नागर, धूलजी भावसार | विजया बहन भावसार — महिला मंडल की स्थापना |
| डूंगरपुर प्रजामंडल | 1944 ई. (1 अगस्त) | भोगीलाल पांड्या | कालीबाई का बलिदान (1947, रास्तापाल) |
| जैसलमेर प्रजामंडल | 1945 ई. | मीठालाल व्यास | जोधपुर में स्थापित |
| प्रतापगढ़ प्रजामंडल | 1945 ई. | अमृतलाल पायक | — |
| झालावाड़ प्रजामंडल | 1946 ई. | मांगीलाल भव्य | शासक राजराणा हरिश्चंद्र का समर्थन, उत्तरदायी शासन स्थापित |
1. जयपुर प्रजामंडल (1931) राजस्थान का प्रथम प्रजामंडल था; बूंदी प्रजामंडल भी उसी वर्ष 1931 ई. में स्थापित हुआ। 2. शाहपुरा व झालावाड़ — दोनों रियासतों में प्रजामंडल आंदोलन ने व्यवहारिक रूप से उत्तरदायी शासन स्थापित करवाया। 3. मेवाड़ प्रजामंडल का सारदा किला ("मेवाड़ का कालापानी") — भूरेलाल बया की नजरबंदी का स्थान। 4. गोकुलभाई भट्ट (सिरोही) को "राजस्थान के गांधी" तथा भोगीलाल पांड्या (डूंगरपुर) को "वागड़ के गांधी" कहा जाता है। 5. जयपुर के "जेंटलमैन एग्रीमेंट" (17 सितंबर 1942) के तहत प्रजामंडल भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल नहीं हुआ था।
प्रजामंडल आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी न केवल सहयोगी रही, बल्कि कई अवसरों पर उन्होंने स्वतंत्र नेतृत्व भी किया — सत्याग्रह, जेल-यात्रा, महिला-संगठनों की स्थापना व शिक्षा-प्रसार में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
| महिला नेत्री | संबंध/क्षेत्र | योगदान |
|---|---|---|
| किशोरी देवी | पत्नी, सरदार हरलाल सिंह | 25 अप्रैल 1934 कटराथल सम्मेलन की अध्यक्षता (विस्तार अध्याय 14) |
| नारायणी देवी वर्मा | पत्नी, माणिक्यलाल वर्मा | 1944 भीलवाड़ा में महिला आश्रम स्थापित; डूंगरपुर के खांडलाई क्षेत्र में भील शिक्षा-प्रसार; 1970-76 राज्यसभा सदस्य |
| स्नेहलता वर्मा | पुत्री, माणिक्यलाल वर्मा | पिता के नेतृत्व में बिजोलिया किसान आंदोलन में भागीदारी |
| रतन शास्त्री | पत्नी, हीरालाल शास्त्री | 1939 जयपुर प्रजामंडल सत्याग्रह; 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिगत सेवा; 1955 पद्मश्री, 1975 पद्मभूषण |
| अंजना देवी चौधरी | पत्नी, रामनारायण चौधरी | बिजोलिया-बूंदी किसान सत्याग्रह में लगभग 500 महिलाओं का नेतृत्व; 1930 नमक सत्याग्रह, 6 माह कारावास |
| नागेंद्र बाला | पौत्री, केसरी सिंह बारहठ | 1941-47 किसान आंदोलनों में सक्रिय; स्वतंत्रता बाद कोटा की प्रथम महिला जिला प्रमुख |
| जानकी देवी बजाज | पत्नी, जमनालाल बजाज | 1944 जयपुर प्रजामंडल अधिवेशन की अध्यक्षता; भूदान आंदोलन; 1956 पद्मविभूषण |
| शांता त्रिवेदी | उदयपुर निवासी | 1947 उदयपुर में "राजस्थान महिला परिषद" की स्थापना |
| कालीबाई (भील किशोरी) | रास्तापाल, डूंगरपुर | 19 जून 1947 शिक्षिका की रक्षा हेतु बलिदान — आज भी "कालीबाई भील छात्रवृत्ति योजना" के रूप में जीवंत विरासत |
| लक्ष्मीदेवी आचार्य | बीकानेर प्रजामंडल | संस्थापक सदस्य व अध्यक्ष; सविनय अवज्ञा व स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय |
| विजया बहन भावसार | पत्नी, धूलजी भावसार (बांसवाड़ा) | "महिला मंडल" की स्थापना |
| सत्यभामा | पुत्रवधू, नित्यानंद नागर (बूंदी) | 1932 ब्यावर-अजमेर आंदोलन का नेतृत्व; गांधीजी की "मानस पुत्री" |
| समाचार-पत्र/पत्रिका | प्रकाशन स्थान/भाषा | महत्व |
|---|---|---|
| राजस्थान | ब्यावर, 1923 (साप्ताहिक) | हाड़ौती क्षेत्र की खबरें प्रकाशित; बूंदी प्रजामंडल से जुड़ाव |
| अखंड भारत | बॉम्बे, हिंदी | जयनारायण व्यास द्वारा 1936 ई. में प्रारंभ |
| तरुण राजस्थान | ब्यावर, हिंदी, 1927 | जयनारायण व्यास द्वारा प्रारंभ (विस्तार अध्याय 14) |
| पीप (Peep) | दिल्ली, अंग्रेजी | राष्ट्रीय स्तर पर रियासती मुद्दों का प्रचार |
| अंगीबाण | ब्यावर, राजस्थानी | प्रथम राजस्थानी भाषा राजनीतिक पत्र |
| लोकवाणी | जयपुर, हिंदी, 1943 | देवीशंकर तिवाड़ी द्वारा प्रकाशित |
| वैभव | भरतपुर | भरतपुर प्रजामंडल का मुखपत्र |
| दैनिक नवज्योति | — | कैप्टन दुर्गाप्रसाद चौधरी बाद में संपादक बने |
| प्रकाश | — | कमला देवी (राजस्थान की प्रथम महिला पत्रकार) की लेखन-यात्रा का प्रारंभिक पत्र |
"राजा के अधीन उत्तरदायी शासन — यही हमारा एकमात्र लक्ष्य है, न विद्रोह, न विध्वंस, केवल जनता का अधिकार।" — प्रजामंडल आंदोलन की मूल भावना
1. अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (AISPC) — स्थापना 1927 ई., बॉम्बे; प्रथम अध्यक्ष रामचंद्र राव। 2. राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद — स्थापना 1928 ई., अजमेर; प्रथम अधिवेशन 1931 ई.। 3. जयपुर प्रजामंडल (1931) — राजस्थान का प्रथम प्रजामंडल, संस्थापक कपूरचंद पाटनी व जमनालाल बजाज। 4. जयपुर "जेंटलमैन एग्रीमेंट" — 17 सितंबर 1942, मिर्जा इस्माइल-हीरालाल शास्त्री के बीच। 5. मारवाड़ प्रजामंडल — जयनारायण व्यास, "तौल आंदोलन" के लिए प्रसिद्ध; भारत छोड़ो आंदोलन में सिवाना दुर्ग में नजरबंद। 6. मेवाड़ प्रजामंडल — स्थापना 24 अप्रैल 1938; प्रतिबंध 24 सितंबर 1938; प्रतिबंध समाप्ति 22 फरवरी 1941। 7. सारदा किला — "मेवाड़ का कालापानी", भूरेलाल बया की नजरबंदी स्थल। 8. 7वां AISPC अधिवेशन — 1946, सालेटिया मैदान (उदयपुर), अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू। 9. बीकानेर प्रजामंडल — स्थापना 4 अक्टूबर 1936, कलकत्ता, संस्थापक वैद्य मघाराम। 10. शाहपुरा व झालावाड़ — दोनों में प्रजामंडल आंदोलन से उत्तरदायी शासन व्यावहारिक रूप से स्थापित हुआ। 11. गोकुलभाई भट्ट — "राजस्थान के गांधी" (सिरोही प्रजामंडल, 1939)। 12. भोगीलाल पांड्या — "वागड़ के गांधी" (डूंगरपुर प्रजामंडल, 1 अगस्त 1944)। 13. रास्तापाल कांड — 19 जून 1947, कालीबाई व नानाभाई शहीद — आज भी बालिका-शिक्षा योजना के रूप में जीवंत। 14. तासीमो कांड (धौलपुर) — 11 अप्रैल 1947, शहीद पंचमसिंह-छत्तरसिंह। 15. देवीशंकर तिवाड़ी — राजस्थान के प्रथम गैर-सरकारी मंत्री (1946, जयपुर राज्य)। 16. प्रजामंडल आंदोलनों से प्रशिक्षित नेतृत्व ही स्वतंत्र राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री व मंत्री बने। 17. प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान के एकीकरण (अध्याय 16) की राजनीतिक-वैचारिक नींव बना।
नीचे दी समय-रेखा (Timeline) इस अध्याय के संपूर्ण घटनाक्रम को स्पष्ट करती है — रिवीजन के लिए इसे ज़रूर दोहराएं:
| वर्ष/तिथि | घटना/Event | महत्व |
|---|---|---|
| 1927 | AISPC की स्थापना (बॉम्बे) | सभी प्रजामंडलों का छत्र-संगठन |
| 1928 | राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना | अजमेर में क्षेत्रीय समन्वय |
| 1931 | जयपुर व बूंदी प्रजामंडल की स्थापना | राजस्थान के प्रथम प्रजामंडल |
| 1934 | मारवाड़ व हाड़ौती प्रजामंडल पुनर्गठन | जयनारायण व्यास, नयनूराम शर्मा का नेतृत्व |
| 1936 | बीकानेर व धौलपुर प्रजामंडल की स्थापना | कलकत्ता व स्थानीय स्तर पर संगठन |
| 1938 | मेवाड़, अलवर, भरतपुर, करौली, शाहपुरा प्रजामंडल | सर्वाधिक प्रजामंडल एक ही वर्ष में स्थापित |
| 24 सितंबर 1938 | मेवाड़ प्रजामंडल पर प्रतिबंध | माणिक्यलाल वर्मा निष्कासित |
| 1939 | कोटा, किशनगढ़, सिरोही प्रजामंडल | गोकुलभाई भट्ट का नेतृत्व प्रारंभ |
| 22 फरवरी 1941 | मेवाड़ प्रजामंडल पर से प्रतिबंध हटा | पुनः सक्रियता |
| 25-26 नवंबर 1941 | मेवाड़ प्रजामंडल प्रथम अधिवेशन (उदयपुर) | अध्यक्ष माणिक्यलाल वर्मा |
| 1942 | कुशलगढ़ प्रजामंडल; बीकानेर प्रजा परिषद की स्थापना | रघुवीरदयाल गोयल का नेतृत्व |
| 17 सितंबर 1942 | जयपुर जेंटलमैन एग्रीमेंट | मिर्जा इस्माइल-हीरालाल शास्त्री समझौता |
| 1943 | बांसवाड़ा प्रजामंडल की स्थापना | — |
| 26 अक्टूबर 1944 | बीकानेर दमन-विरोधी दिवस | जन-प्रतिरोध का प्रतीक |
| 1 अगस्त 1944 | डूंगरपुर प्रजामंडल की स्थापना | भोगीलाल पांड्या का नेतृत्व |
| 1945 | जैसलमेर व प्रतापगढ़ प्रजामंडल | — |
| 1946 | 7वां AISPC अधिवेशन (उदयपुर); झालावाड़ प्रजामंडल | अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू |
| 11 अप्रैल 1947 | तासीमो कांड (धौलपुर) | शहीद पंचमसिंह-छत्तरसिंह |
| 19 जून 1947 | रास्तापाल कांड (डूंगरपुर) | कालीबाई व नानाभाई शहीद |