✊ अध्याय 14/16 — राजस्थान का इतिहास

किसान एवं जनजातीय आंदोलन

Peasant & Tribal Movements | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय — पृष्ठभूमि एवं शब्दावली
  2. मेवाड़ जाट आंदोलन — मातृकुंडिया (1880)
  3. बिजोलिया किसान आंदोलन (1897-1941) — प्रथम चरण
  4. बिजोलिया आंदोलन — नेतृत्व, चरण एवं समाधान
  5. बेंगू किसान आंदोलन (1921-1925)
  6. बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन एवं गुर्जर आंदोलन (1922-1945)
  7. मारवाड़ एवं करौली किसान आंदोलन
  8. शेखावाटी (सीकर-जयपुर) किसान आंदोलन (1922-1947)
  9. अलवर के किसान आंदोलन — नीमूचाणा हत्याकांड एवं मेव आंदोलन
  10. भरतपुर एवं बीकानेर किसान आंदोलन
  11. किसान आंदोलनों की तुलनात्मक तालिका एवं महत्व
  12. जनजातीय आंदोलन — परिचय, कारण एवं शब्दावली
  13. भील/भगत आंदोलन — गोविंद गुरु एवं मानगढ़ हत्याकांड (1913)
  14. एकी आंदोलन (भोमट) — मोतीलाल तेजावत एवं नीमड़ा हत्याकांड (1922)
  15. मीणा आंदोलन — जरायमपेशा कानून का विरोध
  16. आंदोलनों से जुड़े समाचार-पत्र, साहित्य एवं गीत
  17. आंदोलनों का ऐतिहासिक महत्व एवं प्रभाव
  18. अध्याय सार एवं समय-रेखा

कल्पना कीजिए — बिजोलिया (भीलवाड़ा) के एक छोटे-से गांव में एक किसान अपने खेत में हल जोत रहा है, परंतु उसकी फसल का बड़ा हिस्सा हर साल लगभग 84 प्रकार के अलग-अलग करों — "लाग-बाग" — में चला जाता है। बेटी के विवाह पर "चंवरी कर", नए जागीरदार के आगमन पर "तलवार बंधाई कर", यहां तक कि हल की संख्या और गाड़ी के पहियों पर भी कर! यही वह घुटन थी जिसने 1897 ई. में एक शांत विरोध को जन्म दिया, जो अगले 44 वर्षों तक चला और अंततः पूरे राजस्थान में किसान चेतना की चिंगारी बन गया। वहीं दूसरी ओर, वागड़-मेवाड़ के घने जंगलों में भील समुदाय अंग्रेजी हुकूमत की बेगार, बोलाई व राखवाली जैसी प्रथाओं से त्रस्त था — गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1913 ई. में मानगढ़ की पहाड़ी पर 1500 से अधिक भील शहीद हुए, जिसे इतिहासकार "राजस्थान का जलियांवाला बाग हत्याकांड" कहते हैं। यह अध्याय उन सभी किसान एवं जनजातीय आंदोलनों की कहानी है जिन्होंने रियासती सामंतवाद व ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध जन-चेतना जगाई तथा आगे चलकर प्रजामंडल आंदोलन (विस्तार देखें: अध्याय 15) की मजबूत नींव रखी।

1परिचय — पृष्ठभूमि एवं शब्दावली

शब्द/कर (Term)अर्थ (Meaning)
लाग-बाग (Lag-Bag)भूमि-कर के अतिरिक्त वसूले जाने वाले दर्जनों प्रकार के अनुचित उपकर — बिजोलिया में इनकी संख्या लगभग 84 तक थी
चंवरी कर (Chanwri Kar)पुत्री के विवाह पर लिया जाने वाला कर
तलवार बंधाई कर (Talwar Bandhai)नए जागीरदार/ठिकानेदार के गद्दी पर बैठने पर वसूला जाने वाला कर
लाटा-कुंता (Lata-Kunta)अनुमानित उपज के आधार पर अतिरिक्त भू-राजस्व
बेगार (Begar)बिना पारिश्रमिक के जबरन श्रम/सेवा
बोलाई/राखवाली (Bolai/Rakhwali)जनजातीय क्षेत्रों में वन-रक्षा व चौकीदारी के बदले वसूला जाने वाला कर/भेंट
आधा-बरार (Aadha Barar)जनजातीय क्षेत्र में उपज का आधा हिस्सा राज्य को देने की प्रथा
मौताना (Mautana)मृत्यु/हत्या की सूचना न देने या अपराधी न पकड़े जाने पर पूरे गांव/कुटुंब पर लगाया गया सामूहिक दंड
जागीरदारी प्रथा (Jagirdari)सामंतों को भूमि व राजस्व अधिकार — विस्तार देखें: अध्याय 11
🌾 किसान आंदोलनों के सामान्य कारण
  • अत्यधिक भू-राजस्व एवं दर्जनों लाग-बाग
  • बेगार प्रथा का दबाव
  • जागीरदारों की मनमानी व अत्याचार
  • अकाल के समय भी कर-माफी न देना
  • न्याय-व्यवस्था का अभाव
🌳 जनजातीय आंदोलनों के सामान्य कारण
  • वन-भूमि पर अधिकार छिनना, बेगार व बोलाई-राखवाली
  • मौताना जैसी सामूहिक दंड-प्रथाएं
  • शराबबंदी/आबकारी नीति से आर्थिक चोट
  • धार्मिक-सामाजिक कुरीतियां (डाकन प्रथा आदि)
  • मेवाड़ भील कोर व मेरवाड़ा बटालियन में जबरन भर्ती (1841-32)

2मेवाड़ जाट आंदोलन — मातृकुंडिया (1880)

3बिजोलिया किसान आंदोलन (1897-1941) — प्रथम चरण

✊ बिजोलिया किसान आंदोलन (1897-1941 ई. (लगभग 44 वर्ष)) भीलवाड़ा (मेवाड़ ठिकाना) — राजस्थान का सबसे लंबा एवं सर्वाधिक प्रभावशाली, पूर्णतः अहिंसक किसान आंदोलन

💡 84 लाग-बाग — जब हर खुशी और हर जरूरत पर टैक्स लगे

सोचिए — एक किसान की बेटी का विवाह होना है, पर खुशी मनाने से पहले उसे "चंवरी कर" चुकाना पड़ता है। नया ठिकानेदार गद्दी पर बैठे, तो किसान को "तलवार बंधाई कर" देना होता है। यहां तक कि हल जोतने, गाड़ी चलाने और यहां तक कि दांत निकलवाने तक पर कर लगते थे — कुल मिलाकर लगभग 84 प्रकार के ऐसे "लाग-बाग"! बिजोलिया के किसानों ने तय किया — अब बस नहीं। उन्होंने न लगान चुकाया, न खेत जोता — और यह मौन प्रतिरोध पूरे 44 वर्षों तक, बिना किसी हिंसा के चला। यही कारण है कि इतिहासकार बिजोलिया आंदोलन को महात्मा गांधी के "बारडोली सत्याग्रह" से पूर्व का, राजस्थान का अपना "मेवाड़ का बारडोली" कहते हैं।

4बिजोलिया आंदोलन — नेतृत्व, चरण एवं समाधान

चरण (Phase)अवधिप्रमुख नेतृत्वमुख्य घटनाएं
प्रथम चरण1897-1916साधु सीतारामदासअसहयोग व लगान-बंदी की शुरुआत; "बिजोलिया आंदोलन के जनक" की उपाधि
द्वितीय चरण1916-1923विजयसिंह पथिक, साधु सीतारामदासकिसान पंच बोर्ड (1916) व उपरमाल पंच बोर्ड (1917) गठन; बिन्दुलाल भट्टाचार्य जांच आयोग (1917); मेवाड़ दरबार से समझौता व बाद में विश्वासघात
तृतीय चरण1927-1941माणिक्यलाल वर्माआंदोलन का पुनरुत्थान; 1941 ई. में महाराणा भूपालसिंह द्वारा प्रमुख लाग-बाग समाप्त, अंतिम समाधान

विशेष तथ्य: बिजोलिया आंदोलन को "राजस्थान का प्रथम संगठित एवं सर्वाधिक दीर्घकालिक किसान आंदोलन" (44 वर्ष, 1897-1941) माना जाता है। यह भारत के उन गिने-चुने किसान आंदोलनों में से एक है जो प्रारंभ से अंत तक पूर्णतः अहिंसक रहा।

5बेंगू किसान आंदोलन (1921-1925)

6बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन एवं गुर्जर आंदोलन (1922-1945)

आंदोलन/घटनातिथि (Date)विवरण
बूंदी (बरड़) आंदोलन प्रारंभ1922 ई.नयनूराम शर्मा के नेतृत्व में लगान-वृद्धि के विरुद्ध विरोध
डाबी हत्याकांड2 अप्रैल 1923 ई.बूंदी सेना की गोलीबारी में किसान शहीद
आंदोलन का समापन1943 ई.आंशिक मांगें स्वीकृत
गुर्जर आंदोलन1936-1945 ई.भूमि-अधिकार व करों के विरुद्ध पृथक संघर्ष
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7मारवाड़ एवं करौली किसान आंदोलन

8शेखावाटी (सीकर-जयपुर) किसान आंदोलन (1922-1947)

घटना (Event)तिथि (Date)महत्व
कटराथल महिला सम्मेलन25 अप्रैल 1934 ई.किसान आंदोलन में महिला-भागीदारी का प्रतीक
जयसिंहपुरा गोलीकांड21 जून 1934 ई.जागीरी सेना की गोलीबारी में किसान शहीद
कुदन गांव हत्याकांड25 अप्रैल 1935 ई.शेखावाटी आंदोलन का सर्वाधिक रक्तरंजित प्रसंग
जाट प्रजापति महायज्ञ1934 ई.सामाजिक-आर्थिक जागृति का आयोजन

9अलवर के किसान आंदोलन — नीमूचाणा हत्याकांड एवं मेव आंदोलन

"न हाकिम, न हुकुम — अब हम अपने अधिकारों के लिए स्वयं खड़े होंगे।" — आंदोलनकारी किसानों/जनजातीय समुदायों का सामूहिक उद्घोष

10भरतपुर एवं बीकानेर किसान आंदोलन

11किसान आंदोलनों की तुलनात्मक तालिका एवं महत्व

आंदोलन (Movement)अवधि (Period)प्रमुख नेता (Leader)मुख्य कारण/मांग
मातृकुंडिया (चित्तौड़)1880 ई.स्थानीय जाट किसानअतिरिक्त भू-राजस्व — राजस्थान का प्रथम आंदोलन
बिजोलिया1897-1941 ई.सीतारामदास, विजयसिंह पथिक, माणिक्यलाल वर्मा84 लाग-बाग व बेगार — सबसे दीर्घकालिक आंदोलन
बेंगू1921-1925 ई.रामनारायण चौधरी, हरिभाऊ उपाध्यायलाग-बाग — गोविंदपुरा हत्याकांड (1923)
बूंदी (बरड़)1922-1943 ई.नयनूराम शर्माअत्यधिक लगान — डाबी हत्याकांड (1923)
शेखावाटी1922-1947 ई.स्थानीय जाट/किसान नेतृत्वजकात व लाग-बाग — कटराथल महिला सम्मेलन (1934)
नीमूचाणा (अलवर)1925 ई.स्थानीय किसानअत्यधिक लगान व बेगार — हत्याकांड (14 मई 1925)
मेव (अलवर)1932-1934 ई.स्थानीय मेव नेतृत्वभू-राजस्व व सामाजिक दबाव
करौली1927 ई.कुंवर मदनसिंहबेगार व भू-राजस्व
बीकानेर (आबियाना)1937-1946 ई.स्थानीय किसान संगठनगंगनहर सिंचाई-कर (आबियाना)

★ किसान आंदोलन — त्वरित स्मरण-बिंदु ★

1. बिजोलिया आंदोलन राजस्थान का सबसे लंबा (44 वर्ष) एवं पूर्णतः अहिंसक किसान आंदोलन था — इसे "मेवाड़ का बारडोली" भी कहा जाता है। 2. मातृकुंडिया आंदोलन (1880) को राजस्थान का प्रथम कृषक विरोध माना जाता है, जो बिजोलिया से भी पूर्व हुआ। 3. विजयसिंह पथिक को "राजस्थान के किसान आंदोलनों का जनक/पिता" कहा जाता है — उन्होंने बिजोलिया, बेंगू व अन्य आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 4. नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925, अलवर) को समकालीन प्रेस ने जलियांवाला बाग से जोड़ा। 5. नयनूराम शर्मा को "बूंदी का गांधी" कहा जाता है।

12जनजातीय आंदोलन — परिचय, कारण एवं शब्दावली

राजस्थान जनजातीय जनसंख्या की दृष्टि से भारत में छठे स्थान पर है — यहां मुख्यतः भील, गरासिया, मीणा व सहरिया जनजातियां मेवाड़-वागड़ (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा) व शेखावाटी-पूर्वी क्षेत्र में केंद्रित हैं। अंग्रेजी हस्तक्षेप व सामंती दमन के विरुद्ध इन समुदायों ने भी सशस्त्र एवं सामाजिक-धार्मिक आंदोलन चलाए, जिनमें भगत/भील आंदोलन, एकी (भोमट) आंदोलन तथा मीणा आंदोलन प्रमुख हैं।

कारण (Cause)विवरण (Detail)
सैन्य भर्ती का बोझ1832 ई. में मेरवाड़ा बटालियन एवं 1841 ई. में मेवाड़ भील कोर की स्थापना — जबरन भर्ती से आक्रोश
मौताना प्रथाहत्या/अपराध की सूचना न मिलने पर पूरे गांव पर सामूहिक दंड — बाद में समाप्त की गई
डाकन प्रथा प्रतिबंध1853 ई. में मेवाड़ में डाकन-प्रथा (टोना-टोटका के आरोप में हत्या) पर प्रतिबंध — सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में देखा गया
आबकारी नीतिमहुए की शराब पर कर व नियंत्रण — जनजातीय आजीविका व परंपरा पर सीधा प्रभाव
बेगार, बोलाई व राखवालीवन-भूमि व चौकीदारी से जुड़े अनुचित कर एवं जबरन श्रम
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13भील/भगत आंदोलन — गोविंद गुरु एवं मानगढ़ हत्याकांड (1913)

✊ गोविंद गुरु (1858-1913 ई. (आंदोलन काल)) भगत/संप सभा आंदोलन के प्रवर्तक — मेवाड़-वागड़ भील समुदाय के महानायक

💡 मानगढ़ — जब पहाड़ी पर प्रार्थना करते भीलों पर गोलियां चलीं

सोचिए — हजारों भील स्त्री-पुरुष-बच्चे मानगढ़ की पहाड़ी पर गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्र हैं, हाथ में कोई हथियार नहीं, केवल अपने अधिकारों की शांतिपूर्ण मांग। 17 नवंबर 1913 की उस सुबह अंग्रेज सेना ने चारों ओर से पहाड़ी को घेर लिया और बिना किसी चेतावनी के गोलीबारी शुरू कर दी — 1500 से अधिक निर्दोष भील वहीं शहीद हो गए। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पहले हुई, फिर भी लंबे समय तक इतिहास की किताबों में उपेक्षित रही। आज मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में मान्यता देने की मांग जनजातीय समुदाय द्वारा निरंतर उठाई जाती रही है।

14एकी आंदोलन (भोमट) — मोतीलाल तेजावत एवं नीमड़ा हत्याकांड (1922)

✊ मोतीलाल तेजावत (1921-1936 ई. (आंदोलन काल)) "बावजी" / "आदिवासियों के मसीहा" / "मेवाड़ के गांधी" — एकी (भोमट) आंदोलन के प्रणेता

हत्याकांड (Massacre)तिथि (Date)विवरण
सियावा हत्याकांड12 अप्रैल 1922 ई.3 गरासियों की गोलीबारी में मृत्यु
भूला-बलोलिया हत्याकांड5-6 मई 1922 ई.लगभग 50 मृत, 150 घायल — राजस्थान सेवा संघ की जांच
नीमड़ा (विजयनगर) हत्याकांड6/7 मार्च 1922 ई.मेजर सटन के नेतृत्व में गोलीबारी, लगभग 1200 भील शहीद — "मेवाड़ का द्वितीय जलियांवाला बाग"

15मीणा आंदोलन — जरायमपेशा कानून का विरोध

वर्ष (Year)घटना (Event)
1851-1860 ई.जहाजपुर मीणा विद्रोह
1924 ई.आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act)
1930 ई.जयपुर राज्य में जरायमपेशा कानून लागू
1933 ई.मीणा क्षेत्रीय महासभा का गठन
1944 ई.नीम का थाना सम्मेलन; "मीण पुराण" ग्रंथ की रचना (मुनि मगनसागर)
28 अक्टूबर 1946 ई.बगावास सम्मेलन — 26,000 चौकीदारों का सामूहिक त्याग-पत्र, "मुक्ति दिवस"
1952 ई.जरायमपेशा कानून पूर्णतः समाप्त (हीरालाल शास्त्री-टीकाराम पालीवाल)
🏔️ भगत आंदोलन (गोविंद गुरु)
  • क्षेत्र — मेवाड़-वागड़ (बांसवाड़ा-डूंगरपुर)
  • संगठन — संप सभा (स्थापना 1883)
  • चरम घटना — मानगढ़ हत्याकांड (17 नवंबर 1913)
  • लगभग 1500 भील शहीद
⛰️ एकी आंदोलन (मोतीलाल तेजावत)
  • क्षेत्र — भोमट (गोगुंदा-झाड़ोल-कोटड़ा)
  • नारा — "न हाकिम, न हुकुम"
  • चरम घटना — नीमड़ा हत्याकांड (6/7 मार्च 1922)
  • लगभग 1200 भील शहीद

16आंदोलनों से जुड़े समाचार-पत्र, साहित्य एवं गीत

इन आंदोलनों को जन-जन तक पहुंचाने तथा राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने में समकालीन समाचार-पत्रों व लोक-साहित्य की निर्णायक भूमिका रही — इन्होंने रियासती दमन को उजागर कर सार्वजनिक दबाव बनाया।

समाचार-पत्र/रचनाप्रकाशन स्थान/रचनाकारमहत्व
प्रतापकानपुर (गणेश शंकर विद्यार्थी), 1910बिजोलिया आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया
राजस्थान केसरीवर्धा (विजयसिंह पथिक)किसान आंदोलनों की खबरें व विश्लेषण
नवीन राजस्थानअजमेर, 1922 (1923 में प्रतिबंधित)रियासती दमन का पर्दाफाश
तरुण राजस्थानअजमेर/ब्यावर, 1923भूला-बलोलिया हत्याकांड की जांच-रिपोर्ट प्रकाशित
अग्नि-बाणब्यावर, 1932प्रथम राजस्थानी भाषा का राजनीतिक समाचार-पत्र
रियासतनीमूचाणा हत्याकांड की तुलना जलियांवाला बाग से की
उपरमाल का डंकाबिजोलिया क्षेत्रस्थानीय स्तर पर आंदोलन-प्रचार
पछीदा (गीत)माणिक्यलाल वर्माकिसान शोषण पर आधारित लोकगीत
पीड़ितों का पछीदा (गीत)विजयसिंह पथिककिसान पीड़ा को समर्पित रचना
नानक भील की अर्जी (गीत)अज्ञात रचनाकारगोविंदपुरा हत्याकांड में शहीद नानकजी भील की स्मृति में

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: राजपूताना का प्रथम समाचार-पत्र "मजहरुल सरूर" 1849 ई. में भरतपुर से प्रकाशित हुआ था; "मारवाड़ गजट" (1866) व "सज्जन कीर्ति सुधाकर" (उदयपुर, 1876/79) भी प्रारंभिक महत्वपूर्ण पत्र थे — इन्होंने आगे चलकर किसान व जनजातीय आंदोलनों की खबरों को जन-जन तक पहुंचाने की परंपरा स्थापित की।

17आंदोलनों का ऐतिहासिक महत्व एवं प्रभाव

"हमने न कभी हथियार उठाया, न कभी झुके — हमारी लड़ाई केवल अपने हक की थी।" — बिजोलिया आंदोलन से जुड़ी परंपरा (44 वर्षों तक पूर्णतः अहिंसक संघर्ष)

18अध्याय सार एवं समय-रेखा

★ अध्याय सार — महत्वपूर्ण तथ्य ★

1. राजस्थान का प्रथम कृषक विरोध — मातृकुंडिया (चित्तौड़गढ़), जून 1880 ई. 2. सबसे दीर्घकालिक व पूर्णतः अहिंसक किसान आंदोलन — बिजोलिया (1897-1941, 44 वर्ष)। 3. बिजोलिया के तीन चरण — साधु सीतारामदास (1897-1916), विजयसिंह पथिक (1916-1923), माणिक्यलाल वर्मा (1927-1941)। 4. बिजोलिया में लगभग 84 प्रकार के लाग-बाग वसूले जाते थे — चंवरी कर, तलवार बंधाई कर, लाटा-कुंता प्रमुख। 5. गोविंदपुरा हत्याकांड (बेंगू) — 13 जुलाई 1923 ई., नानकजी भील शहीद। 6. डाबी हत्याकांड (बूंदी) — 2 अप्रैल 1923 ई., नेतृत्व नयनूराम शर्मा ("बूंदी का गांधी")। 7. कटराथल महिला सम्मेलन (शेखावाटी) — 25 अप्रैल 1934 ई., किसान आंदोलन में महिला-भागीदारी का प्रतीक। 8. नीमूचाणा हत्याकांड (अलवर) — 14 मई 1925 ई., समकालीन प्रेस द्वारा जलियांवाला बाग से तुलना। 9. गोविंद गुरु का जन्म — 1858 ई., बेडसा/बांसिया (डूंगरपुर); संप सभा की स्थापना — 1883 ई., सिरोही। 10. मानगढ़ हत्याकांड — 17 नवंबर 1913 ई., लगभग 1500 भील शहीद — "राजस्थान/वागड़ का जलियांवाला बाग" (जलियांवाला बाग से भी 6 वर्ष पूर्व)। 11. मोतीलाल तेजावत — "आदिवासियों के मसीहा"; नारा — "न हाकिम, न हुकुम"; आंदोलन प्रारंभ 1921 ई., मातृकुंडिया से। 12. नीमड़ा हत्याकांड (एकी आंदोलन) — 6/7 मार्च 1922 ई., लगभग 1200 भील शहीद — "मेवाड़ का द्वितीय जलियांवाला बाग"। 13. सियावा हत्याकांड — 12 अप्रैल 1922 ई.; भूला-बलोलिया हत्याकांड — 5-6 मई 1922 ई.। 14. मीणा आंदोलन — 1924 ई. आपराधिक जनजाति अधिनियम व 1930 ई. जरायमपेशा कानून का विरोध। 15. बगावास सम्मेलन ("मुक्ति दिवस") — 28 अक्टूबर 1946 ई., 26,000 मीणा चौकीदारों का सामूहिक त्याग-पत्र। 16. जरायमपेशा कानून पूर्णतः समाप्त — 1952 ई. (हीरालाल शास्त्री-टीकाराम पालीवाल)। 17. प्रताप (कानपुर, गणेश शंकर विद्यार्थी) ने बिजोलिया आंदोलन को राष्ट्रीय मंच दिया। 18. ये सभी आंदोलन आगे चलकर प्रजामंडल आंदोलन (अध्याय 15) की नींव बने।

नीचे दी समय-रेखा (Timeline) इस अध्याय के संपूर्ण घटनाक्रम को स्पष्ट करती है — रिवीजन के लिए इसे ज़रूर दोहराएं:

वर्ष/तिथिघटना/Eventमहत्व
20-22 जून 1880मातृकुंडिया (चित्तौड़) जाट आंदोलनराजस्थान का प्रथम कृषक विरोध
1897बिजोलिया आंदोलन प्रारंभसाधु सीतारामदास का नेतृत्व
1916किसान पंच बोर्ड गठनविजयसिंह पथिक का नेतृत्व प्रारंभ
1917उपरमाल पंच बोर्ड गठन13-सदस्यीय संगठन, सरपंच मन्ना पटेल
1921एकी आंदोलन प्रारंभ (मातृकुंडिया से)मोतीलाल तेजावत का नेतृत्व
12 अप्रैल 1922सियावा हत्याकांड3 गरासी शहीद
6/7 मार्च 1922नीमड़ा हत्याकांडलगभग 1200 भील शहीद
5-6 मई 1922भूला-बलोलिया हत्याकांडलगभग 50 मृत, 150 घायल
1922बूंदी (बरड़) आंदोलन प्रारंभनयनूराम शर्मा का नेतृत्व
2 अप्रैल 1923डाबी हत्याकांड (बूंदी)किसान आंदोलन का दमन
13 जुलाई 1923गोविंदपुरा हत्याकांड (बेंगू)नानकजी भील शहीद
1927करौली किसान आंदोलनकुंवर मदनसिंह का नेतृत्व
25 अप्रैल 1934कटराथल महिला सम्मेलनशेखावाटी आंदोलन में महिला-भागीदारी
21 जून 1934जयसिंहपुरा गोलीकांडशेखावाटी आंदोलन का दमन
25 अप्रैल 1935कुदन गांव हत्याकांडशेखावाटी आंदोलन का सर्वाधिक रक्तरंजित प्रसंग
1941बिजोलिया आंदोलन का अंतिम समाधानमहाराणा भूपालसिंह द्वारा मांगें स्वीकार
28 अक्टूबर 1946बगावास सम्मेलन ("मुक्ति दिवस")26,000 मीणा चौकीदारों का त्याग-पत्र
1952जरायमपेशा कानून समाप्तमीणा आंदोलन की अंतिम सफलता
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