Integration of Rajasthan — मत्स्य संघ से वर्तमान राजस्थान तक 7 चरणों की संपूर्ण कथा (1948-1956)
कल्पना कीजिए — 15 अगस्त 1947 को भारत तो आज़ाद हो गया, परंतु राजस्थान नाम की कोई भौगोलिक इकाई अस्तित्व में नहीं थी! इसके स्थान पर था एक बिखरा हुआ नक्शा — 19 अलग-अलग रियासतें, 3 छोटी ठिकानेदारियां और 1 केंद्रशासित प्रदेश, हर एक का अपना राजा, अपनी सेना, अपनी मुद्रा तक। बिजोलिया के किसानों का संघर्ष (अध्याय 14) और प्रजामंडल आंदोलनों की जन-चेतना (अध्याय 15) ने जिस एकता की नींव रखी थी, उसे अब एक भौगोलिक-राजनीतिक हकीकत बनाना था। यह काम आसान नहीं था — सरदार वल्लभभाई पटेल व वी.पी. मेनन की कू टनीति, महाराणा भूपाल सिंह का त्याग, और लाखों आम नागरिकों की आकांक्षा — इन सबने मिलकर अगले 8 वर्ष 7 महीने 14 दिनों में, 7 चरणों में, टुकड़े-टुकड़े राजस्थान को एक अखंड राज्य में बदल दिया। यह अध्याय उसी अद्भुत यात्रा की कहानी है — 18 मार्च 1948 के मत्स्य संघ से लेकर 1 नवंबर 1956 के वर्तमान राजस्थान तक।
1. परिचय — स्वतंत्रता के समय राजस्थान की राजनीतिक स्थिति
◆ 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय वर्तमान राजस्थान क्षेत्र में कोई एक राज्य नहीं था — यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से पूर्णतः खंडित था। ◆ स्वतंत्रता के समय राजस्थान की राजनीतिक स्थिति — 19 रियासतें (Princely States), 3 ठिकाने (Chiefships) तथा 1 केंद्रशासित प्रदेश (Chief Commissionary)। ◆ इनमें सबसे बड़ी रियासत जोधपुर थी तथा सबसे छोटी इकाई लावा चीफशिप (ठिकाना) थी। प्रत्येक रियासत का शासक (राजा, महाराजा या महाराणा) अलग था, सबकी अपनी-अपनी राज-व्यवस्था थी और अधिकांश रियासतों में आपसी समन्वय व तालमेल का अभाव था। ◆ राजस्थान का एकीकरण समस्त भारतीय रियासतों के एकीकरण का ही हिस्सा था। सरदार वल्लभभाई पटेल व वी.पी. मेनन के साथ स्थानीय शासकों और रियासतों के जननेताओं — जयनारायण व्यास, माणिक्यलाल वर्मा, पं. हीरालाल शास्त्री, प्रेमनारायण माथुर, गोकु लभाई भट्ट आदि — की अहम भूमिका रही। जनता रियासतों के आतंक व अलोकतांत्रिक शासन से मुक्त होकर राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ना चाहती थी; राष्ट्रवादी गतिविधियों ने मिलकर राजस्थान में एकता का सूत्रपात किया।
2. राजस्थान की 19 रियासतें, 3 ठिकाने एवं 1 केंद्रशासित प्रदेश एकीकरण अथवा स्वतंत्रता के समय राजस्थान की सभी रियासतों व उनके शासकों की सूची निम्नानुसार है — यह तालिका संपूर्ण अध्याय की आधारशिला है:
रियासत (Princely State) शासक (Ruler)
मेवाड़ / उदयपुर भूपाल सिंह
मारवाड़ / जोधपुर हनवंत सिंह
जयपुर सवाई मानसिंह द्वितीय
बीकानेर शार्दुल सिंह
अलवर तेज सिंह
धौलपुर उदयभान सिंह
भरतपुर बृजेंद्र सिंह द्वितीय
कोटा भीम सिंह द्वितीय
बूंदी बहादुर सिंह
झालावाड़ हरिश्चंद्र
बांसवाड़ा चंद्रवीर सिंह
डूंगरपुर लक्ष्मण सिंह
किशनगढ़ सुमेर सिंह
शाहपुरा सुदर्शन देव
सिरोही अभय सिंह
जैसलमेर जवाहर सिंह
प्रतापगढ़ राम सिंह
टोंक अजीज-उद्-दौला
करौली गणेशपाल
🏰 3 ठिकाने (Chiefships) 🏛️ 1 केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) ◆ नीमराणा ठिकाना — अलवर रियासत से अलग ◆ अजमेर-मेरवाड़ा — स्वतंत्रता के समय राजस्थान क्षेत्र में एकमात्र ◆ कु शलगढ़ ठिकाना — बांसवाड़ा रियासत से अलग केंद्रशासित प्रदेश
- लावा ठिकाना — टोंक रियासत से अलग ◆ 30-सदस्यीय धारा सभा (विधानसभा) थी
- मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय (विलय के विरोधी)
3. "राजस्थान यूनियन" की अवधारणा — महाराणा भूपाल सिंह ◆ मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह राजस्थान, मालवा एवं सौराष्ट्र की रियासतों को मिलाकर एक विशाल "राजस्थान यूनियन" (Rajasthan Union) बनाना चाहते थे — यह विचार वर्तमान राजस्थान से भी बड़े भौगोलिक संघ की परिकल्पना थी। ◆ इस उद्देश्य से उदयपुर में दो सम्मेलन आयोजित किए गए — उदयपुर सम्मेलन (1946 ई.) तथा उदयपुर सम्मेलन (1947 ई.)। के .एम. मुंशी महाराणा भूपाल सिंह के संवैधानिक सलाहकार नियुक्त हुए। ◆ यद्यपि यह व्यापक "राजस्थान यूनियन" योजना अपने मूल रूप में साकार नहीं हुई, परंतु इसने आगे की एकीकरण-प्रक्रिया के लिए वैचारिक आधार व राजनीतिक गति प्रदान की।
4. रियासती सचिवालय एवं भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947
🇮🇳 रियासती सचिवालय (Princely/States Secretariat) (स्थापना 5 जुलाई 1947 ई.) सरदार वल्लभभाई पटेल एवं वी.पी. मेनन के नेतृत्व में रियासतों के एकीकरण की केंद्रीय संस्था
◆ अध्यक्ष — सरदार वल्लभभाई पटेल; सचिव — वी.पी. मेनन। ◆ 18 जुलाई 1947 ई. को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act) पारित हुआ — इसकी धारा 8 के अंतर्गत राजाओं व अंग्रेजों के बीच की गई सभी संधियां समाप्त कर दी गईं। ◆ रियासती सचिवालय की घोषणा के अनुसार — जिन रियासतों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक तथा वार्षिक आय 1 करोड़ रुपये से अधिक थी, वे अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रख सकती थीं। ◆ राजस्थान क्षेत्र में ऐसी केवल 4 रियासतें थीं — मेवाड़ (राजा भूपाल सिंह), जयपुर, जोधपुर एवं बीकानेर — शेष सभी छोटी रियासतों को अनिवार्यतः विलय करना था।
5. विलय पत्र (Instrument of Accession)
तिथि (Date) शासक (Ruler) विवरण (Detail)
7 अगस्त 1947 ई. महाराजा शार्दुल सिंह (बीकानेर) बीकानेर राजस्थान की प्रथम रियासत थी, जिसने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए
14 अगस्त 1947 ई. महाराजा उदयभान सिंह (धौलपुर) धौलपुर राजस्थान की अंतिम रियासत थी, जिसने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए
"मैं अपने डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहा हूं।" — महारावल चंद्रवीर सिंह (बांसवाड़ा), विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते समय
6. एकीकरण — एक नज़र में (सभी 7 चरणों की सार तालिका) नीचे दी तालिका राजस्थान एकीकरण के सभी 7 चरणों को एक साथ प्रस्तुत करती है — रिवीजन के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण तालिका है, इसे अवश्य याद रखें:
चरण नामकरण (तिथि) राजधानी राजप्रमुख सम्मिलित क्षेत्र
प्रथम मत्स्य संघ (18 मार्च 1948) अलवर उदयभान सिंह (धौलपुर) अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर
द्वितीय पूर्व राजस्थान संघ (25 मार्च 1948) कोटा भीम सिंह (कोटा) कोटा, बूंदी, टोंक, झालावाड़, डूंगरपुर,
बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़, शाहपुरा,
कु शलगढ़तृतीय संयुक्त राजस्थान (18 अप्रैल 1948) उदयपुर भूपाल सिंह (मेवाड़) पूर्व राजस्थान संघ + उदयपुर
चतुर्थ वृहद् राजस्थान (30 मार्च 1949) जयपुर सवाई मानसिंह-II जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर
पंचम् संयुक्त वृहद् राजस्थान (15 मई जयपुर सवाई मानसिंह-II वृहद् राजस्थान + मत्स्य संघ 1949)
षष्ठम् राजस्थान (26 जनवरी 1950) जयपुर सवाई मानसिंह-II सिरोही (आबू को छोड़कर)
सप्तम् वर्तमान राजस्थान (1 नवंबर 1956) जयपुर गुरुमुख निहाल सिंह अजमेर-मेरवाड़ा, आबू-देलवाड़ा, सुनेल-
(गवर्नर) टप्पा; सिरोंज (कोटा) मध्य प्रदेश को दिया
गयाकु ल अवधि: राजस्थान का एकीकरण 18 मार्च 1948 से 1 नवंबर 1956 ई. के मध्य सम्पन्न हुआ — इस संपूर्ण प्रक्रिया में लगभग 8 वर्ष 7 माह 14 दिन का समय लगा।
7. प्रथम चरण — मत्स्य संघ (18 मार्च 1948)
🇮🇳 मत्स्य संघ (Matsya Union) (उद्घाटन 18 मार्च 1948 ई.) सम्मिलित रियासतें — धौलपुर, करौली, अलवर, भरतपुर, नीमराणा ठिकाना
- उद्घाटनकर्ता — एन.वी. गाडगिल (पूरा नाम नरहरि विष्णु गाडगिल); स्थान — भरतपुर।
◆ संवैधानिक पद — राजप्रमुख: धौलपुर के राजा उदयभान सिंह; उप-राजप्रमुख: करौली के राजा गणेशपाल। ◆ राजधानी — अलवर। मंत्रिमंडल — प्रधानमंत्री शोभाराम कु मावत (अलवर), उप-प्रधानमंत्री जुगलकिशोर चतुर्वेदी, अन्य मंत्री गोपीलाल यादव, चिरंजीलाल शर्मा, डॉ. मंगल सिंह, मास्टर भोलानाथ। ◆ जनसंख्या लगभग 18 लाख; वार्षिक आय लगभग 1.84 करोड़ रुपये। ◆ विशेष तथ्य — भारत सरकार ने अलवर व भरतपुर रियासतों पर पहले ही नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिससे इनका विलय अपेक्षाकृ त सरल रहा।
◆ "मत्स्य संघ" का नाम के .एम. मुंशी के सुझाव पर रखा गया था — यह नाम इस क्षेत्र के प्राचीन "मत्स्य जनपद" की याद दिलाता है। यह राज्य के एकीकरण की दिशा में पहला कदम था। एकीकरण प्रक्रिया का प्रारंभ 17 मार्च 1948 से माना जाता है (उद्घाटन 18 मार्च 1948)।
8. द्वितीय चरण — पूर्व राजस्थान संघ (25 मार्च 1948)
🇮🇳 पूर्व राजस्थान संघ (East Rajasthan Union) (उद्घाटन 25 मार्च 1948 ई.) सम्मिलित रियासतें — कोटा, बूंदी, झालावाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, टोंक, किशनगढ़, शाहपुरा, कु शलगढ़ ठिकाना
◆ उद्घाटनकर्ता — एन.वी. गाडगिल; स्थान व राजधानी — कोटा। ◆ संवैधानिक पद — राजप्रमुख: कोटा के राजा भीम सिंह; वरिष्ठ उप-राजप्रमुख: बूंदी के राजा बहादुर सिंह; कनिष्ठ उप-राजप्रमुख: डूंगरपुर के राजा लक्ष्मण सिंह। ◆ मंत्रिमंडल — प्रधानमंत्री गोकु ल लाल असावा (शाहपुरा); अन्य कोई मंत्री नियुक्त नहीं किए गए क्योंकि यह स्पष्ट हो चुका था कि मेवाड़ भी शीघ्र इस संघ में शामिल होगा। ◆ जनसंख्या लगभग 23.5 लाख; वार्षिक आय लगभग 1.90 करोड़ रुपये। ◆ टोंक — राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम-शासित रियासत थी; भारत सरकार शाहपुरा व किशनगढ़ को अजमेर-मेरवाड़ा में मिलाना चाहती थी, परंतु दोनों ने इसका विरोध किया।
9. तृतीय चरण — संयुक्त राजस्थान (18 अप्रैल 1948)
🇮🇳 संयुक्त राजस्थान (United State of Rajasthan) (उद्घाटन 18 अप्रैल 1948 ई.) सम्मिलित इकाइयां — पूर्व राजस्थान संघ (9 रियासतें + 1 ठिकाना) + मेवाड़ रियासत
◆ उद्घाटनकर्ता — पं. जवाहरलाल नेहरू; स्थान व राजधानी — उदयपुर। ◆ संवैधानिक पद — राजप्रमुख: महाराणा भूपाल सिंह (मेवाड़); वरिष्ठ उप-राजप्रमुख: कोटा के भीम सिंह; कनिष्ठ उप-राजप्रमुख: बूंदी के बहादुर सिंह व डूंगरपुर के लक्ष्मण सिंह। ◆ अधिवेशन-व्यवस्था — प्रतिवर्ष 3 अधिवेशन (2 उदयपुर में, 1 कोटा में — कोटा के विकास हेतु विशेष प्रयास किए जाने थे)। ◆ मंत्रिमंडल — प्रधानमंत्री माणिक्यलाल वर्मा (विस्तार अध्याय 15), उप-प्रधानमंत्री गोकु ल लाल असावा; अन्य मंत्री अभिन्न हरि, भोगीलाल पांड्या, बृजसुंदर शर्मा, भूरेलाल बया, प्रेमनारायण माथुर, मोहनलाल सुखाड़िया। ◆ प्रिवी पर्स — महाराणा भूपाल सिंह की मांग 20 लाख रुपये थी, जो स्वीकृ त हुई (प्रिवी पर्स 10 लाख + राजप्रमुख वेतन 5 लाख + धार्मिक अनुदान 5 लाख = कु ल 20 लाख रुपये)। ◆ डॉ. राममनोहर लोहिया ने इसी दौर में "राजस्थान आंदोलन समिति" का गठन किया।
10. चतुर्थ चरण — वृहद् राजस्थान (30 मार्च 1949) — राजस्थान दिवस
🇮🇳 वृहद् राजस्थान (Greater Rajasthan) (उद्घाटन 30 मार्च 1949 ई. (चैत्र शुक्ल एकम्, विक्रमी संवत् 2006)) सम्मिलित रियासतें — संयुक्त राजस्थान + जयपुर + जोधपुर + बीकानेर + जैसलमेर
◆ उद्घाटनकर्ता — सरदार वल्लभभाई पटेल; स्थान व राजधानी — जयपुर। 30 मार्च को ही परंपरागत रूप से "राजस्थान दिवस" मनाया जाता रहा है (विस्तार अनुभाग 17 में)। ◆ संवैधानिक पद — महाराजप्रमुख: महाराणा भूपाल सिंह; राजप्रमुख: सवाई मानसिंह-द्वितीय; वरिष्ठ उप-राजप्रमुख: कोटा के भीम सिंह व जोधपुर के हनवंत सिंह; कनिष्ठ उप-राजप्रमुख: बूंदी के बहादुर सिंह व डूंगरपुर के लक्ष्मण सिंह। ◆ मंत्रिमंडल — प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री (विस्तार अध्याय 15); अन्य मंत्री सिद्धराज ढढ्ढा, रघुवरदयाल गोयल, बृजसुंदर शर्मा, प्रेमनारायण माथुर, वेदपाल त्यागी, राव राजा हनूवंत सिंह, नरसिंह कच्छावा, फू लचंद बाफना। ◆ राजधानी विवाद — बी.आर. पटेल समिति (सदस्य: बी.आर. पटेल-अध्यक्ष, एच.सी. पुरी, एच.पी. सिन्हा) ने निर्णय दिया — राजधानी जयपुर, उच्च न्यायालय जोधपुर। ◆ प्रिवी पर्स — जयपुर 18 लाख, जोधपुर 17.50 लाख, बीकानेर 17 लाख रुपये। ◆ विशेष तथ्य — 19 जुलाई 1948 ई. को लावा ठिकाना जयपुर में मिला दिया गया था।
11. पंचम् चरण — संयुक्त वृहद् राजस्थान (15 मई 1949) ◆ सम्मिलित इकाइयां — वृहद् राजस्थान + मत्स्य संघ। ◆ मत्स्य संघ का विलय शंकर राव देव समिति (सदस्य — शंकर राव देव-अध्यक्ष, प्रभुदयाल, आर.के . सिद्धावा) की सिफारिश पर 15 मई 1949 ई. को हुआ। ◆ मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री रहे शोभाराम कु मावत को हीरालाल शास्त्री के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
12. षष्ठम् चरण — राजस्थान (26 जनवरी 1950) — सिरोही का विभाजन ◆ सिरोही रियासत का विभाजन — आबू व देलवाड़ा सहित 89 गांव बॉम्बे राज्य में मिला दिए गए; शेष सिरोही राजस्थान में मिला। ◆ गोकु लभाई भट्ट (विस्तार अध्याय 15) का पैतृक गांव हाथल राजस्थान में ही रहा — सरदार पटेल ने इस पर टिप्पणी की: "राजस्थान वालों को गोकु लभाई भट्ट चाहिए था, अतः वह हमने दे दिया।" ◆ 26 जनवरी 1950 ई. — राजस्थान एकीकरण का छठा चरण पूर्ण हुआ; राज्य का नाम अब औपचारिक रूप से "राजस्थान" रखा गया। हीरालाल शास्त्री राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री (मनोनीत) बने।
◆ इसी दिन (26 जनवरी 1950) भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित हुआ और राज्य को संविधान में "राजस्थान" नाम से उल्लेखित किया गया — अके ली बची सिरोही रियासत (आबू रोड/आबू क्षेत्र को छोड़कर) संयुक्त वृहद् राजस्थान में सम्मिलित की गई।
13. सप्तम् चरण — वर्तमान राजस्थान (1 नवंबर 1956)
🇮🇳 वर्तमान राजस्थान (Modern/Present Rajasthan) (1 नवंबर 1956 ई.) राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों पर एकीकरण की अंतिम एवं पूर्ण अवस्था
◆ राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली, 1953) की सिफारिशों के आधार पर — आबू व देलवाड़ा तथा अजमेर-मेरवाड़ा राजस्थान में मिलाए गए; सुनेल-टप्पा (मध्य प्रदेश का भाग) राजस्थान में मिला, जबकि सिरोंज मध्य प्रदेश को दिया गया। ◆ इसी दिन राजस्थान का एकीकरण पूर्णतः सम्पन्न हुआ — मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया (विस्तार अध्याय 15) थे। ◆ मुनि जिन विजय सूरी समिति (सदस्य — मुनि जिन विजय सूरी-अध्यक्ष, दशरथ शर्मा) का उद्देश्य आबू-देलवाड़ा का विलय सुनिश्चित करना था; अजमेर-मेरवाड़ा पहले केंद्रशासित प्रदेश था, जिसके मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय (विस्तार अध्याय 15) विलय के विरोधी थे — अजमेर राजस्थान का 26वां जिला बना। ◆ राजधानी विवाद — सत्यनारायण राव समिति (सदस्य — सत्यनारायण राव-अध्यक्ष, वी. विश्वनाथन, बी.के . गुप्ता) का निर्णय: राजधानी जयपुर, राजस्व अजमेर, शिक्षा बीकानेर, कृषि भरतपुर, वन व सहकार कोटा, खनिज उदयपुर — इस प्रकार प्रशासनिक संतुलन बनाए रखा गया।
◆ 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 लागू हुआ — इसके अंतर्गत कोटा जिले का सिरोंज क्षेत्र मध्य भारत (मध्य प्रदेश) को दिया गया, तथा अजमेर-मेरवाड़ा, आबू तहसील एवं मध्य भारत के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का सुनेल टप्पा राजस्थान में मिलाया गया। इस प्रकार वर्तमान राजस्थान अस्तित्व में आया और जयपुर इसकी राजधानी रही।
1 नवंबर 2000 का तथ्य: मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य अलग होने पर राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य बना — इससे पहले मध्य प्रदेश सबसे बड़ा राज्य था। यह संयोग ही है कि राजस्थान के एकीकरण की तिथि (1 नवंबर 1956) व भारत के सबसे बड़े राज्य बनने की तिथि (1 नवंबर 2000) दोनों 1 नवंबर को ही पड़ती हैं।
14. एकीकरण से जुड़े आयोग एवं समितियां
आयोग/समिति गठन वर्ष अध्यक्ष उद्देश्य/कार्य
राजस्थान एकीकरण समिति 1947 वी.पी. मेनन देशी रियासतों के विलय की योजना बनाना
मत्स्य संघ समिति 1948 एन.वी. गाडगिल मत्स्य संघ के गठन की प्रक्रिया
शंकर राव देव समिति 1949 शंकर राव देव मत्स्य संघ का वृहद् राजस्थान में विलय
बी.आर. पटेल समिति 1949 बी.आर. पटेल राजधानी निर्धारण (जयपुर)
सिरोही विलय समिति 1949-50 वल्लभभाई पटेल की देखरेख सिरोही के विभाजन का निर्णय
राज्य पुनर्गठन आयोग 1953 फजल अली राज्यों का भाषाई पुनर्गठन
मुनि जिन विजय सूरी समिति 1956 मुनि जिन विजय सूरी आबू-देलवाड़ा को राजस्थान में मिलाने हेतु
सत्यनारायण राव समिति 1956 सत्यनारायण राव राजधानी व प्रशासनिक संतुलन
धर आयोग 1948 एस.के . धर भाषायी आधार पर राज्य-गठन
जे.वी.पी. समिति 1949 नेहरू-पटेल-पट्टाभि भाषायी राज्यों पर पुनर्विचार सीतारमैया
15. राजस्थान के मुख्यमंत्री — मनोनीत, नियुक्त एवं निर्वाचित
श्रेणी (Category) मुख्यमंत्री (क्रम अनुसार)
मनोनीत मुख्यमंत्री प्रथम — हीरालाल शास्त्री (विस्तार अध्याय 15)
नियुक्त मुख्यमंत्री द्वितीय — सी.एस. वेंकटाचारी (ICS); तृतीय — जयनारायण व्यास (विस्तार अध्याय 15)
निर्वाचित मुख्यमंत्री प्रथम — टीकाराम पालीवाल; द्वितीय — जयनारायण व्यास; तृतीय — मोहनलाल सुखाड़िया (विस्तार अध्याय 15)
16. संवैधानिक तथ्य — राजप्रमुख पद एवं प्रिवी पर्स ◆ 7वां संविधान संशोधन (1956) — राजप्रमुख पद को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया; इसके स्थान पर राज्यपाल पद स्थापित हुआ (राजस्थान के प्रथम गवर्नर गुरुमुख निहाल सिंह बने)। ◆ राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख — सवाई मानसिंह-द्वितीय (जयपुर); राजस्थान के अंतिम राजप्रमुख भी सवाई मानसिंह-द्वितीय ही रहे। ◆ 26वां संविधान संशोधन (1971) — देशी राजाओं का प्रिवी पर्स (राजभत्ता) पूर्णतः समाप्त कर दिया गया।
17. राजस्थान दिवस — परंपरा एवं 2026 का महत्वपूर्ण बदलाव ◆ 30 मार्च 1949 ई. को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर व जैसलमेर रियासतों के विलय से "वृहद् राजस्थान संघ" का गठन हुआ था — इसी स्मृति में प्रतिवर्ष 30 मार्च को परंपरागत रूप से "राजस्थान दिवस" (Rajasthan Day) मनाया जाता रहा है।
ताज़ा अपडेट (2026): राजस्थान सरकार ने निर्णय लिया है कि अब से राजस्थान दिवस निश्चित अंग्रेजी तिथि (30 मार्च) के स्थान पर हिंदी पंचांग अनुसार "चैत्र शुक्ल प्रतिपदा" (हिंदू नववर्ष) के दिन मनाया जाएगा — इसी नई व्यवस्था के अनुसार वर्ष 2026 में राजस्थान दिवस 19 मार्च 2026 को मनाया गया, तथा राज्यभर में 14 से 19 मार्च तक सप्ताह भर सांस्कृ तिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसका मुख्य समारोह जालोर में हुआ। यह दर्शाता है कि राजस्थान का इतिहास आज भी गतिशील है — नोट्स पढ़ते समय ध्यान रखें कि "स्थापना/एकीकरण की तिथि" (30 मार्च 1949) एवं "वार्षिक उत्सव मनाने की तिथि" (अब चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, वर्षानुसार बदलती हुई) दो अलग बातें हैं।
18. एकीकरण का ऐतिहासिक महत्व
◆ राजस्थान एकीकरण भारत के सबसे जटिल रियासती एकीकरणों में से एक था — 19 रियासतों, 3 ठिकानों व 1 केंद्रशासित प्रदेश को मिलाकर एक अखंड, प्रशासनिक रूप से सुदृढ़ राज्य का निर्माण एक असाधारण राजनीतिक उपलब्धि थी। ◆ यह एकीकरण अधिकांशतः शांतिपूर्ण वार्ता व राजनीतिक समझौतों से हुआ, हिंसक संघर्ष से नहीं — इसका श्रेय सरदार पटेल-वी.पी. मेनन की कू टनीति के साथ-साथ प्रजामंडल आंदोलनों (अध्याय 15) द्वारा तैयार की गई जन-चेतना को भी जाता है, जिसने रियासती जनता को एकीकरण के पक्ष में लामबंद किया। ◆ एकीकरण ने सामंती जागीरदारी व्यवस्था (विस्तार अध्याय 11) का औपचारिक अंत किया तथा लोकतांत्रिक शासन-प्रणाली की नींव रखी — प्रजामंडल आंदोलनों में प्रशिक्षित नेतृत्व ही स्वतंत्र राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री व मंत्री बने। ◆ आज राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है (2000 ई. से) — यह विशाल आकार व प्रशासनिक एकता उसी 8 वर्ष 7 माह की धैर्यपूर्ण, चरणबद्ध एकीकरण-प्रक्रिया का प्रत्यक्ष परिणाम है।
"राजस्थान वालों को गोकु लभाई भट्ट चाहिए था, अतः वह हमने दे दिया।" — सरदार वल्लभभाई पटेल, सिरोही विभाजन के समय
19. अध्याय सार एवं समय-रेखा
★ अध्याय सार — महत्वपूर्ण तथ्य ★
1. स्वतंत्रता के समय राजस्थान क्षेत्र — 19 रियासतें, 3 ठिकाने, 1 केंद्रशासित प्रदेश (अजमेर-मेरवाड़ा)। 2. रियासती सचिवालय — स्थापना 5 जुलाई 1947, अध्यक्ष सरदार पटेल, सचिव वी.पी. मेनन। 3. बीकानेर — विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली प्रथम रियासत (7 अगस्त 1947); धौलपुर — अंतिम (14 अगस्त 1947)। 4. प्रथम चरण — मत्स्य संघ, 18 मार्च 1948, राजधानी अलवर, राजप्रमुख उदयभान सिंह। 5. द्वितीय चरण — पूर्व राजस्थान संघ, 25 मार्च 1948, राजधानी कोटा। 6. तृतीय चरण — संयुक्त राजस्थान, 18 अप्रैल 1948, राजधानी उदयपुर, उद्घाटनकर्ता नेहरू। 7. चतुर्थ चरण — वृहद् राजस्थान, 30 मार्च 1949, राजधानी जयपुर, उद्घाटनकर्ता सरदार पटेल — यही तिथि परंपरागत "राजस्थान दिवस" है। 8. पंचम् चरण — संयुक्त वृहद् राजस्थान, 15 मई 1949 (मत्स्य संघ का विलय)। 9. षष्ठम् चरण — 26 जनवरी 1950, राज्य का नाम औपचारिक रूप से "राजस्थान"; हीरालाल शास्त्री प्रथम मुख्यमंत्री। 10. सप्तम् (अंतिम) चरण — 1 नवंबर 1956, आबू-देलवाड़ा व अजमेर-मेरवाड़ा का विलय, मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया — एकीकरण पूर्ण। 11. संपूर्ण एकीकरण प्रक्रिया की अवधि — लगभग 8 वर्ष 7 माह 14 दिन (18 मार्च 1948 से 1 नवंबर 1956)। 12. 7वां संविधान संशोधन (1956) — राजप्रमुख पद समाप्त; 26वां संविधान संशोधन (1971) — प्रिवी पर्स समाप्त। 13. सवाई मानसिंह-द्वितीय — राजस्थान के प्रथम एवं अंतिम राजप्रमुख। 14. 1 नवंबर 2000 — छत्तीसगढ़ के मध्य प्रदेश से पृथक होने पर राजस्थान क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य बना। 15. 2026 से राजस्थान दिवस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू नववर्ष) को मनाया जाने लगा — 2026 में यह तिथि 19 मार्च थी। 16. राजस्थान एकीकरण की जन-चेतना की नींव किसान आंदोलनों (अध्याय 14) व प्रजामंडल आंदोलनों (अध्याय 15) ने रखी थी।
नीचे दी समय-रेखा (Timeline) इस अध्याय एवं संपूर्ण पुस्तक के अंतिम घटनाक्रम को स्पष्ट करती है — रिवीजन के लिए इसे ज़रूर दोहराएं :
वर्ष/तिथि घटना/Event महत्व
5 जुलाई 1947 रियासती सचिवालय की स्थापना पटेल-मेनन के नेतृत्व में एकीकरण प्रक्रिया प्रारंभ
18 जुलाई 1947 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित धारा 8 — रियासतों की संधियां समाप्त
7 अगस्त 1947 बीकानेर का विलय पत्र हस्ताक्षर राजस्थान की प्रथम विलय करने वाली रियासत
14 अगस्त 1947 धौलपुर का विलय पत्र हस्ताक्षर राजस्थान की अंतिम विलय करने वाली रियासत
17 मार्च 1948 एकीकरण प्रक्रिया प्रारंभ मत्स्य संघ के निर्माण से पहला कदम
18 मार्च 1948 मत्स्य संघ की स्थापना एकीकरण का प्रथम चरण
25 मार्च 1948 पूर्व राजस्थान संघ की स्थापना एकीकरण का द्वितीय चरण
18 अप्रैल 1948 संयुक्त राजस्थान की स्थापना मेवाड़ का विलय, तृतीय चरण
30 मार्च 1949 वृहद् राजस्थान की स्थापना चतुर्थ चरण — परंपरागत राजस्थान दिवस
15 मई 1949 संयुक्त वृहद् राजस्थान पंचम् चरण — मत्स्य संघ का विलय
26 जनवरी 1950 "राजस्थान" नाम की औपचारिक स्थापना षष्ठम् चरण — सिरोही का आंशिक विलय
1953 राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली) भाषायी पुनर्गठन की सिफारिशें
1956 7वां संविधान संशोधन राजप्रमुख पद समाप्त
1 नवंबर 1956 वर्तमान राजस्थान का गठन सप्तम् (अंतिम) चरण — एकीकरण पूर्ण
1971 26वां संविधान संशोधन राजाओं का प्रिवी पर्स समाप्त
1 नवंबर 2000 छत्तीसगढ़ का मध्य प्रदेश से पृथक्करण राजस्थान क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य बना
19 मार्च 2026 राजस्थान दिवस (नई पद्धति — चैत्र शुक्ल परंपरा में परिवर्तन — ताज़ा तथ्य प्रतिपदा)