⚔️ अध्याय 7/16 — राजस्थान का इतिहास

चौहान वंश

Chauhan (Chahamana) Dynasty | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. चौहान वंश का परिचय — उत्पत्ति के सिद्धांत
  2. शाकंभरी-अजमेर के चौहान — प्रारंभिक शासक
  3. अजयराज द्वितीय से विग्रहराज चतुर्थ तक — अजमेर व दिल्ली विजय, चौहानों का स्वर्णकाल
  4. पृथ्वीराज चौहान तृतीय — तराइन के युद्ध एवं चौहान वंश का पतन
  5. नाडौल के चौहान
  6. जालौर के सोनगरा चौहान
  7. रणथंभौर के चौहान — हम्मीर देव व राजस्थान का प्रथम जल जौहर
  8. सिरोही के देवड़ा चौहान
  9. हाड़ौती के हाड़ा चौहान — बूंदी, कोटा एवं झालावाड़
  10. चौहान वंश की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत

कल्पना कीजिए — एक 11 साल का बालक अपनी मां की गोद में बैठकर राज्य चलाना सीख रहा है, और आगे चलकर वही बालक "राय पिथौरा" कहलाता है, जिसके नाम से आज भी दिल्ली का एक इलाका "रायपिथौरा" जाना जाता है। यह कहानी है पृथ्वीराज चौहान तृतीय की — भारत के सबसे चर्चित राजपूत शासकों में से एक। परंतु चौहान वंश की गाथा केवल पृथ्वीराज तक सीमित नहीं है — यह वंश सांभर की झील से शुरू होकर अजमेर, दिल्ली, नाडौल, जालौर, रणथंभौर, सिरोही और हाड़ौती (बूंदी-कोटा-झालावाड़) तक फैला — हर शाखा की अपनी वीरता, अपना बलिदान और अपनी कहानी है। इसी विशाल वंश-वृक्ष को इस अध्याय में हम एक साथ समझेंगे।

1चौहान वंश का परिचय — उत्पत्ति के सिद्धांत

सिद्धांत (Theory)आधार/समर्थक (Source/Scholar)मुख्य बिंदु (Key Point)
सूर्यवंशी मूलहम्मीर महाकाव्य (नयनचंद्र सूरि), हम्मीर रासो (जोधराज), पृथ्वीराज विजय (जयानक); समर्थक — डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझाचौहानों को सूर्यवंशी क्षत्रियों का वंशज बताया गया
चंद्रवंशी मूलहांसी अभिलेख (हरियाणा), अचलेश्वर (आबू) अभिलेखचौहानों को चंद्रवंश से जोड़ा गया
ब्राह्मण मूलबिजौलिया शिलालेख — "विप्र श्री वत्स गोत्र"; समर्थक — डॉ. दशरथ शर्मा, कवि जन (कायमखानी रासो)चौहान मूलतः ब्राह्मण गोत्र से थे, बाद में क्षत्रिय बने
अग्निकुल सिद्धांतस्रोत — पृथ्वीराज रासो (चंद बरदाई); समर्थक — सूर्यमल्ल मिश्रण, मुहणोत नैणसी, जोधराजमाउंट आबू में वशिष्ठ ऋषि के यज्ञ-कुंड से परमार, चालुक्य व प्रतिहार के बाद चौथे योद्धा "चौहान" की उत्पत्ति — पौराणिक मत, ऐतिहासिक आधार नहीं
मिश्रित वंश सिद्धांतशक्तिकुमार अभिलेख — मेवाड़ के अल्लट का हूण राजकुमारी हरिया देवी से विवाह; समर्थक — देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय, डॉ. दशरथ शर्माराजपूतों की मिश्रित (देशी-विदेशी) नस्ल का प्रमाण
💡 अग्निकुल कथा — मिथक या इतिहास?

चंद बरदाई के "पृथ्वीराज रासो" के अनुसार, कभी राक्षसों के आतंक से त्रस्त होकर ऋषि वशिष्ठ ने माउंट आबू पर एक विशाल यज्ञ किया — उस अग्निकुंड से पहले तीन योद्धा उत्पन्न हुए (परमार, चालुक्य/सोलंकी, प्रतिहार), परंतु वे राक्षसों को परास्त नहीं कर सके। तब वशिष्ठ ने पुनः यज्ञ कर एक चौथा योद्धा उत्पन्न किया — हाथ में शस्त्र लिए यह योद्धा "चौहान" कहलाया, जिसने राक्षसों का नाश किया। यह कथा एक प्रतीकात्मक/पौराणिक परंपरा है — आधुनिक इतिहासकार इसे ऐतिहासिक तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं करते, परंतु यह राजपूत वंशों की गौरव-गाथा में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थान रखती है।

2शाकंभरी-अजमेर के चौहान — प्रारंभिक शासक

👑 वासुदेव चौहान (लगभग 551 ई.) चौहान वंश के प्रथम व वास्तविक संस्थापक

वासुदेव से सिंहराज तक — प्रारंभिक शासकों की सूची

शासक (Ruler)काल (Period)प्रमुख तथ्य (Key Fact)
समंतराज684-709 ई.वासुदेव के लगभग 125 वर्ष बाद पुनः चौहान सत्ता मजबूत की; टॉड ने इन्हें "माणिक्य राय" कहा; भाई दुलराज अरबों से युद्ध में वीरगति
नरदेव/पूर्णतल्ल709 ई.बिजौलिया शिलालेख में "नृप" नाम से उल्लेख
चंद्रराज व गोपेंद्रराज (विग्रहराज प्रथम के पुत्र)गोपेंद्रराज ने बेग वारिश को हराया — अरब विस्तार को रोका; प्रतिहार-चौहान गठबंधन की शुरुआत
दुर्लभराज प्रथम784-809 ई.उपाधि "गौड़ रसास्वाद"; गंगासागर तक विजय अभियान; प्रतिहार वत्सराज का सामंत
गूवक प्रथम/गोविंदराज809-836 ई.हर्षनाथ मंदिर (सीकर) निर्माण; प्रतिहार नागभट्ट द्वितीय से "प्रसिद्धवीर" उपाधि; सी.वी. वैद्य के अनुसार स्वतंत्र शासक
चंद्रराज द्वितीय/शशिनृप836-863 ई.दिल्ली के तंवर शासक रुद्र को हराया व मारा (हर्ष अभिलेख); रानी रुद्राणी ने पुष्कर में 1000 शिवलिंग स्थापित किए
गूवक द्वितीय863-890 ई.स्वयंवर आयोजित कर बहन कलावती का विवाह कन्नौज के भोज प्रथम से किया
वाक्पतिराज प्रथम"महाराज" उपाधि धारण करने वाले प्रथम चौहान शासक; पृथ्वीराज विजय अनुसार 188 युद्धों में विजयी; पुष्कर में शिव मंदिर बनवाया
सिंहराजअजमेर नगर का विस्तार किया; पुत्र अर्णोराज को राजगद्दी सौंपकर पुष्कर में तपस्या हेतु चले गए

3अजयराज द्वितीय से विग्रहराज चतुर्थ तक — अजमेर व दिल्ली विजय, चौहानों का स्वर्णकाल

👑 अजयराज द्वितीय / अजयपाल चक्री (1113-1133 ई.) अजमेर नगर के संस्थापक

👑 अर्णोराज/आनाजी (1133-1155 ई.) तुर्क आक्रमणकारियों के विजेता

👑 विग्रहराज चतुर्थ / बीसलदेव (1158-1163 ई.) "कवि बांधव" — चौहानों का स्वर्णकाल, दिल्ली विजेता

विग्रहराज चतुर्थ के बाद के लघु-शासक

शासक (Ruler)काल (Period)प्रमुख तथ्य
अमरगांगेय/अपरगांगेय1164-1165 ई.विग्रहराज चतुर्थ के पुत्र, अल्पायु; पुत्र पृथ्वीराज द्वितीय द्वारा अपदस्थ
पृथ्वीराज द्वितीय1165-1168 ई.जनता में लोकप्रिय, "राम का अवतार" कहा गया; अल्प शासनकाल, निःसंतान
सोमेश्वरउपाधि "प्रताप लंकेश्वर"; अजमेर में कल्पवृक्ष रोपित किया; पृथ्वीराज तृतीय के पिता
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4पृथ्वीराज चौहान तृतीय — तराइन के युद्ध एवं चौहान वंश का पतन

👑 पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177-1192 ई.) "राय पिथौरा", "दलपुंगल/विश्वविजेता" — चौहान वंश के अंतिम प्रतापी शासक

"चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण। ता ऊपर सुल्तान है, मत चूके चौहान।" — चंदबरदाई की प्रसिद्ध उक्ति — पृथ्वीराज रासो

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का आगमन: सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती मोहम्मद गौरी के साथ, पृथ्वीराज चौहान तृतीय के शासनकाल में ही राजस्थान पहुंचे — आगे चलकर अजमेर उनकी दरगाह के कारण भारत के सबसे बड़े सूफी तीर्थ-स्थलों में गिना जाने लगा।

5नाडौल के चौहान

👑 राव लक्ष्मण/राव लाखन (लगभग 950 ई. के आसपास) नाडौल शाखा के संस्थापक

नाडौल शाखा के शासकों की सूची

शासक (Ruler)काल (Period)प्रमुख तथ्य
सोभितलगभग 982-990 ई.मालवा के धारा नगर पर विजय; सेवाड़ी ताम्रपत्र अभिलेख (वि.सं. 1076) में उल्लेख
बलराजलगभग 990-996 ई.परमार शासक मुंज (974-995 ई.) की सेना को हराया
विग्रहपाललगभग 996 ई.अल्प शासनकाल
महेंद्रलगभग 994-1005 ई.बहन का विवाह चालुक्य दुर्लभराज से करवाया — "द्वयाश्रय काव्य" में उल्लेख
अश्वपाललगभग 1005-1015 ई.अश्वालेश्वर शिव मंदिर बनवाया
अहिल व अन्हिललगभग 1015-1055 ई.अन्हिल ने महमूद गजनवी के विरुद्ध युद्ध किया; नाडौल शाखा के सबसे शक्तिशाली शासक माने जाते हैं
बालप्रसादलगभग 1055-1070 ई.नाडौल शाखा पर सबसे लंबे समय तक शासन किया
जेंद्रराज/जेंदुराजलगभग 1070-1110 ई.जेंद्रराजेश्वर मंदिर (नाडौल) बनवाया
पृथ्वीपाललगभग 1110-1120 ई.पृथ्वीपालेश्वर मंदिर बनवाया
जोजलदेवलगभग 1120-1140 ई.धार्मिक सहिष्णुता के आदेश जारी किए
अशराजलगभग 1140-1160 ई.चालुक्य सिद्धराज जयसिंह के अधीन सामंत बने
रायपाललगभग 1160-1180 ई.नाडौल पर पुनः अधिकार किया
अल्हणदेवलगभग 1140-1163 ई.पशु-वध निषेध आदेश जारी किया; पुत्र कीर्तिपाल ने जालौर शाखा स्थापित की
केल्हणदेवलगभग 1163-1178 ई.1178 ई. में कासहरदा (क्यासरा) में मोहम्मद गौरी को हराया — विजय-स्मृति में सोमनाथ को स्वर्ण द्वार अर्पित किया
जयसिंहलगभग 1178-1197 ई.कुतुबुद्दीन ऐबक से पराजित — 1197 ई. में नाडौल शाखा का अंत

6जालौर के सोनगरा चौहान

👑 कीर्तिपाल चौहान (1181 ई. (वि.सं. 1238)) जालौर (सोनगरा) शाखा के संस्थापक

जालौर शाखा के अन्य प्रमुख शासक

शासक (Ruler)काल (Period)प्रमुख तथ्य
समरसिंहकीर्तिपाल के पुत्र व उत्तराधिकारी
उदयसिंहसुल्तान इल्तुतमिश से संधि; अरामशाह व इल्तुतमिश दोनों को हराया; सिंध के राजा को भी पराजित किया — जालौर के चौहान शासकों में सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं
चाचिगदेव1257-1282 ई.उपाधियां महाराजाधिराज व महामंडलेश्वर; नासिरुद्दीन महमूद व बलबन के समय कोई आक्रमण नहीं झेला; ब्राह्मणों को कर-मुक्त किया
समंतसिंहपुत्र कान्हड़देव को प्रशासन में सहभागी बनाया

👑 कान्हड़देव चौहान (1305-1311 ई.) सोनगरा चौहान वंश के अंतिम व सबसे प्रतापी शासक

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7रणथंभौर के चौहान — हम्मीर देव व राजस्थान का प्रथम जल जौहर

👑 हम्मीर देव चौहान (1282-1301 ई.) रणथंभौर के चौहानों में सबसे प्रतापी व अंतिम शासक

"ऐसे 10 दुर्गों को मैं मुसलमान के एक बाल के बराबर महत्व नहीं देता।" — जलालुद्दीन खिलजी — रणथंभौर पर असफल आक्रमण के बाद (हम्मीर देव की वीरता के संदर्भ में)

साहित्यिक स्रोत: रणथंभौर के चौहान शासकों की जानकारी नयनचंद्र सूरि रचित "हम्मीर महाकाव्य", जोधराज रचित "हम्मीर रासो", चंद्रशेखर रचित "हम्मीर हठ" तथा अमीर खुसरो व जियाउद्दीन बर्नी के फारसी विवरणों से मिलती है।

8सिरोही के देवड़ा चौहान

वर्ष/शासक (Year/Ruler)घटना (Event)
1311 ई. — राव लुंबाचौहानों की देवड़ा शाखा द्वारा सिरोही राज्य की स्थापना; प्रारंभिक राजधानी चंद्रावती
1425 ई. — सहसमलसिरोही नगर की स्थापना कर इसे राजधानी बनाया
1823 ई. — शिवसिंहईस्ट इंडिया कंपनी से संधि — राज्य की सुरक्षा का दायित्व अंग्रेजों को सौंपा
26 जनवरी 1950सिरोही राज्य का राजस्थान में विलय

9हाड़ौती के हाड़ा चौहान — बूंदी, कोटा एवं झालावाड़

👑 देवसिंह हाड़ा (देवजी) (1241 ई.) बूंदी में हाड़ा चौहान शासन के संस्थापक

बूंदी के हाड़ा चौहान — प्रमुख शासक

शासक (Ruler)काल (Period)प्रमुख कार्य
बरसिंह1296-1323 ई.तारागढ़ किला (बूंदी, ऊंचाई लगभग 1426 फीट) निर्माण; मालवा के महमूद खिलजी के आक्रमण झेले
राव सुर्जन1554-1585 ई.रणथंभौर के किलेदार नियुक्त; 1569 ई. में अकबर द्वारा रणथंभौर विजय के बदले काशी क्षेत्र में जागीर प्राप्त की
राव भोज1585-1607 ई.अकबर के दरबार में सेवा; बादल महल, फूल महल, फूल सागर तालाब का निर्माण
राव रतन1607-1631 ई.जहांगीर के प्रिय सेनापति; रतन दौलतखाना, रतन विलास, खरबूजा महल का निर्माण
शत्रुशाल1631-1658 ई.52 युद्धों में भाग लिया; सामूगढ़ के युद्ध (1658 ई.) में वीरगति; दरबारी कवि भूषण
बुद्ध सिंह1695-1729 ई.औरंगजेब की मृत्यु बाद जाजऊ के युद्ध में मुअज्जम (बहादुरशाह प्रथम) का साथ दिया; बदले में "महाराव राणा" उपाधि प्राप्त की
उम्मेद सिंह प्रथम1748-1770 ई.जयपुर-कोटा-मराठा राजनीति में संतुलन बनाकर स्वतंत्र शासन पुनर्स्थापित किया; चित्रशाला महल का निर्माण — बूंदी चित्रकला शैली को पहचान दी; प्रसिद्ध इराकी घोड़ा "हुंजा" रखते थे
राव रामसिंह1804-1889 ई.दीर्घकालीन शासन — बूंदी में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काल; लगभग 40 संस्कृत पाठशालाओं के कारण बूंदी "छोटी काशी" कहलाई; 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का समर्थन नहीं किया

कोटा एवं झालावाड़ रियासतों की स्थापना

वर्ष (Year)घटना (Event)
1631 ई.मुगल बादशाह शाहजहां ने कोटा को बूंदी से पृथक कर राव रतन के पुत्र माधोसिंह को कोटा का प्रथम शासक बनाया — माधोसिंह ने राज्य को 43 परगनों तक विस्तृत किया
1769-1823 ई.झाला जालिम सिंह — कोटा के फौजदार व कुशल कूटनीतिज्ञ; दिसंबर 1817 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि; 20 फरवरी 1818 ई. को गुप्त संधि — प्रशासनिक अधिकार झाला वंश को, शासन का अधिकार महाराव उम्मेदसिंह वंश को
अक्टूबर 1821 ई.मांगरोल का युद्ध — महाराव किशोरसिंह व झाला जालिम सिंह के बीच सत्ता-संघर्ष; अंग्रेजों ने झाला जालिम सिंह का समर्थन किया; 22 नवंबर 1821 ई. महाराणा भीमसिंह (मेवाड़) की मध्यस्थता से समझौता
1838 ई.अंग्रेजों ने झाला जालिम सिंह के पौत्र मदनसिंह को 17 परगने देकर कोटा से पृथक कर झालावाड़ को स्वतंत्र रियासत का दर्जा दिया — राजधानी झालरापाटन; 1817 ई. में टोंक के बाद अंग्रेजों द्वारा बनाई गई राजस्थान की दूसरी व अंतिम रियासत

करंट अफेयर्स — UNESCO विश्व धरोहर: गागरोन दुर्ग (झालावाड़) — जल दुर्ग, आहू व कालीसिंध नदियों के संगम पर स्थित, 13वीं शताब्दी में हाड़ा-पूर्व खींची चौहानों द्वारा निर्मित — "राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग" श्रृंखला के अंतर्गत रणथंभौर दुर्ग सहित वर्ष 2013 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ। झालरापाटन को इसके प्राचीन मंदिरों के कारण "मंदिरों का शहर" कहा जाता है और झालावाड़ क्षेत्र को कृषि-वैविध्य के कारण "राजस्थान का चेरापूंजी" भी कहा जाता है।

10चौहान वंश की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत

A. स्थापत्य कला

स्मारक (Monument)स्थान (Location)निर्माता (Builder)विशेषता (Significance)
अढ़ाई दिन का झोंपड़ाअजमेरमूलतः सरस्वती कंठाभरण पाठशाला (विग्रहराज चतुर्थ); 1198 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने मस्जिद में बदलाजॉन मार्शल द्वारा नामकरण; भारत की प्राचीनतम मस्जिदों में से एक
आनासागर झीलअजमेरअर्णोराज, 1137 ई.तुर्क विजय की स्मृति में निर्मित
तारागढ़ किला (अजमेर)अजमेरअजयराज द्वितीयभारत में पहाड़ी पर बना प्रथम दुर्ग (अखबार-उल-अखबार के अनुसार)
तारागढ़ किला (बूंदी)बूंदीबरसिंह हाड़ा, 1354 ई.लगभग 1426 फीट ऊंचा
रणथंभौर दुर्गसवाई माधोपुररणथंभौर चौहान शासकUNESCO विश्व धरोहर सूची (2013)
गागरोन दुर्गझालावाड़खींची चौहान, 13वीं सदीजल दुर्ग; UNESCO विश्व धरोहर सूची (2013)
चित्रशाला महलबूंदीउम्मेद सिंह प्रथमबूंदी चित्रकला शैली की पहचान

B. साहित्यिक स्रोत

ग्रंथ (Work)रचयिता (Author)संबंधित विषय (Related Topic)
पृथ्वीराज रासोचंदबरदाईपृथ्वीराज तृतीय की वीरता का विस्तृत वर्णन
पृथ्वीराज विजयजयानक भट्टअजयराज से पृथ्वीराज तृतीय तक के शासकों का वर्णन
हम्मीर महाकाव्यनयनचंद्र सूरिरणथंभौर के हम्मीर देव चौहान का वर्णन
हम्मीर रासोजोधराजहम्मीर देव चौहान की वीरगाथा
कान्हड़दे प्रबंधपद्मनाभजालौर के कान्हड़देव व अलाउद्दीन खिलजी का युद्ध
बीसलदेव रासोनरपति नाल्हविग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) का जीवन-वर्णन
हरिकेली नाटकविग्रहराज चतुर्थ (स्वयं)शिव-अर्जुन संवाद पर आधारित संस्कृत नाटक
बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.)उत्कीर्णक — लोलकचौहान वंश की उत्पत्ति व प्रारंभिक शासकों का प्रामाणिक विवरण
चौहान वंश की उपलब्धियां (Achievements)
  • सांभर, अजमेर व दिल्ली — तीन प्रमुख नगरों की स्थापना/विजय
  • अढ़ाई दिन का झोंपड़ा व आनासागर जैसी स्थापत्य धरोहर
  • पृथ्वीराज रासो व हम्मीर महाकाव्य जैसे कालजयी साहित्य
  • रणथंभौर व जालौर के अंतिम-सांस तक प्रतिरोध — साका व जौहर की परंपरा
चौहान वंश की चुनौतियां (Challenges)
  • राजपूत राज्यों में एकता का अभाव — जयचंद जैसे प्रतिद्वंद्वी
  • तराइन द्वितीय युद्ध की पराजय से उत्तर भारत में मुस्लिम सत्ता का मार्ग खुला
  • आंतरिक विश्वासघात (रतिपाल, रणमल) से रणथंभौर व जालौर का पतन
  • निरंतर युद्धों से आर्थिक व प्रशासनिक संसाधन क्षीण हुए

★ अध्याय सार — महत्वपूर्ण तथ्य ★

1. वासुदेव चौहान (551 ई.) ने नागौर/सांभर में चौहान वंश की स्थापना की — इन्हें चौहान वंश का आदिपुरुष व वास्तविक संस्थापक माना जाता है। 2. बिजौलिया शिलालेख (1170 ई., भीलवाड़ा) चौहान वंश के इतिहास का सबसे प्रामाणिक स्रोत है। 3. अजयराज द्वितीय ने 1113 ई. में अजमेर नगर व तारागढ़ किले की स्थापना की — सांभर से अजमेर राजधानी स्थानांतरित हुई। 4. अर्णोराज ने 1137 ई. में आनासागर झील बनवाई; पुत्र जग्गदेव द्वारा हत्या के कारण उसे "पितृहंता" कहा गया। 5. विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने दिल्ली पर विजय पाई — चौहान वंश की पहली दिल्ली-विजय; इनका काल "चौहान वंश का स्वर्णकाल" कहलाता है। 6. पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने तराइन के प्रथम युद्ध (1191 ई.) में मोहम्मद गौरी को हराया, परंतु तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में स्वयं पराजित हुए — इसी के साथ दिल्ली सल्तनत की नींव पड़ी। 7. नाडौल शाखा की स्थापना राव लक्ष्मण/लाखन ने की; अंतिम शासक जयसिंह 1197 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक से पराजित हुए। 8. जालौर की सोनगरा शाखा की स्थापना 1181 ई. में कीर्तिपाल चौहान ने की; अंतिम शासक कान्हड़देव व पुत्र वीरमदेव 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। 9. रणथंभौर शाखा की स्थापना गोविंदराज चौहान ने 1194 ई. में की; अंतिम शासक हम्मीर देव चौहान (1282-1301 ई.) के समय 12 जुलाई 1301 ई. को राजस्थान का प्रथम जल जौहर व साका हुआ। 10. सिरोही की देवड़ा चौहान शाखा की स्थापना 1311 ई. में राव लुंबा ने की — प्रारंभिक राजधानी चंद्रावती थी। 11. हाड़ौती (बूंदी) में हाड़ा चौहान शासन की स्थापना देवसिंह हाड़ा ने 1241 ई. में की; 1631 ई. में कोटा को बूंदी से पृथक कर स्वतंत्र रियासत बनाया गया। 12. झालावाड़ रियासत 1838 ई. में कोटा से पृथक होकर बनी — अंग्रेजों द्वारा 1817 ई. में टोंक के बाद बनाई गई राजस्थान की दूसरी रियासत। 13. रणथंभौर व गागरोन दुर्ग दोनों "राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग" श्रृंखला के अंतर्गत वर्ष 2013 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल हुए। 14. चंदबरदाई कृत "पृथ्वीराज रासो" व नयनचंद्र सूरि कृत "हम्मीर महाकाव्य" चौहान वंश के सबसे प्रसिद्ध साहित्यिक स्रोत हैं। 15. अग्निकुल सिद्धांत के अनुसार चौहान चार अग्निकुल राजपूत वंशों (परमार, चालुक्य, प्रतिहार, चौहान) में से एक हैं — यह एक पौराणिक/सांस्कृतिक मत है, ऐतिहासिक तथ्य नहीं।

नीचे दी समय-रेखा (Timeline) इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण वर्षों को एक साथ जोड़ती है — रिवीजन के लिए इसे ज़रूर दोहराएं:

वर्ष (Year)घटना/Eventमहत्व
551 ई.वासुदेव चौहान द्वारा चौहान वंश की स्थापना (नागौर/सांभर)चौहान वंश का प्रारंभ
1113 ई.अजयराज द्वितीय द्वारा अजमेर नगर की स्थापनाराजधानी सांभर से अजमेर स्थानांतरित
1137 ई.अर्णोराज द्वारा आनासागर झील निर्माणतुर्क विजय की स्मृति
1158 ई.विग्रहराज चतुर्थ द्वारा दिल्ली विजयचौहान वंश का स्वर्णकाल प्रारंभ
1170 ई.बिजौलिया शिलालेखचौहान वंश का सबसे प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोत
1181 ई.कीर्तिपाल चौहान द्वारा जालौर (सोनगरा) शाखा की स्थापनासोनगरा चौहान वंश का प्रारंभ
1191 ई.तराइन का प्रथम युद्ध — पृथ्वीराज तृतीय की विजयमोहम्मद गौरी पराजित
1192 ई.तराइन का द्वितीय युद्ध — पृथ्वीराज तृतीय पराजितदिल्ली सल्तनत की नींव
1194 ई.गोविंदराज द्वारा रणथंभौर शाखा की स्थापनारणथंभौर चौहान वंश का प्रारंभ
1197 ई.कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा नाडौल पर विजयनाडौल शाखा का अंत
1198 ई.कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा सरस्वती पाठशाला का मस्जिद में रूपांतरणअढ़ाई दिन का झोंपड़ा का निर्माण
1241 ई.देवसिंह हाड़ा द्वारा बूंदी पर अधिकारहाड़ौती में हाड़ा चौहान शासन का प्रारंभ
1290-1292 ई.जलालुद्दीन खिलजी के रणथंभौर पर असफल आक्रमणहम्मीर देव की सैन्य क्षमता का प्रमाण
1301 ई.रणथंभौर का पतन — राजस्थान का प्रथम जल जौहर व साकाहम्मीर देव व रानी रंगदेवी का बलिदान
1308 ई.अलाउद्दीन खिलजी द्वारा सिवाना दुर्ग पर विजयसिवाना का नाम "खैराबाद" रखा गया
1311 ई.राव लुंबा द्वारा सिरोही (देवड़ा चौहान) की स्थापनासिरोही रियासत का प्रारंभ
1311 ई.अलाउद्दीन खिलजी द्वारा जालौर पर विजय — कान्हड़देव वीरगतिसोनगरा चौहान वंश का अंत
1425 ई.सहसमल द्वारा सिरोही नगर की स्थापनासिरोही की नई राजधानी
1631 ई.शाहजहां द्वारा कोटा को बूंदी से पृथक करनाकोटा रियासत की स्थापना (माधोसिंह)
1817-18 ई.कोटा व सिरोही की ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से संधियांब्रिटिश अधीनस्थ संधि व्यवस्था लागू
1838 ई.झालावाड़ रियासत की स्थापना (कोटा से पृथक)मदनसिंह झाला को स्वतंत्र रियासत
26 जनवरी 1950सिरोही राज्य का राजस्थान में विलयराजस्थान एकीकरण की अंतिम कड़ियों में से एक
2013 ई.रणथंभौर व गागरोन दुर्ग UNESCO सूची में शामिल"राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग" को अंतरराष्ट्रीय मान्यता
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