⛏️ अध्याय 12/14 — राजस्थान भूगोल

खनिज संसाधन — धात्विक एवं अधात्विक

Minerals: Metallic & Non-Metallic | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. खनिज दृष्टिकोण — परिचय एवं आँकड़े
  2. राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का दबदबा
  3. अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र का योगदान (आर्थिक समीक्षा 2025-26)
  4. खनिज चट्टानें एवं खनिजों का वर्गीकरण
  5. प्रमुख धात्विक खनिज — अरावली पेटी
  6. प्रमुख अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)
  7. पत्थर वाले खनिज (Stone Minerals)
  8. ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)
  9. विद्युत एवं नवीकरणीय (हरित) ऊर्जा 2025-26
  10. खनिज नीतियाँ 2024 एवं M-Sand नीति
  11. प्रमुख खनन संस्थाएँ (Mineral Institutions)
  12. राजस्व, नीलामी एवं निवेश
  13. नवीनतम अपडेट 2025-26 (पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन एवं खनन कानून संशोधन)
  14. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?

ज़रा सोचिए — दुनिया में मौजूद लगभग हर तरह का खनिज राजस्थान की धरती के नीचे कहीं न कहीं मिल जाता है, यही वजह है कि राजस्थान को 'खनिजों का अजायबघर' (Museum of Minerals) कहा जाता है। यहाँ 82 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिनमें से 57 का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन होता है — और तो और, पोटाश जैसे खनिज में तो अकेला राजस्थान ही देश के कुल उत्पादन का 94% हिस्सा देता है! क्या आपने कभी सोचा है कि बाड़मेर के रेगिस्तान से निकला कच्चा तेल (पेट्रोलियम) कैसे एक पूरी रिफाइनरी खड़ी कर सकता है? 2004 में जब 'मंगला' नाम का पहला तेल कुआँ खोजा गया, तब किसी को अंदाज़ा नहीं था कि आने वाले सालों में यहाँ ₹79,459 करोड़ की लागत से देश की सबसे आधुनिक पेट्रोलियम रिफाइनरी (पचपदरा, बालोतरा) बन जाएगी — जिसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई 2026 को किया! और जोधपुर के भड़ला गाँव में बना सोलर पार्क तो विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क है — यानी राजस्थान सिर्फ ज़मीन के नीचे के खनिजों में ही नहीं, बल्कि आसमान से मिलने वाली सूरज की ऊर्जा में भी नंबर वन बनने की राह पर है। आइए, इस अध्याय में राजस्थान के सभी प्रमुख खनिज व ऊर्जा संसाधनों को विस्तार से समझते हैं।

1खनिज दृष्टिकोण — परिचय एवं आँकड़े

राजस्थान को 'खनिजों का अजायबघर' (Museum of Minerals) कहा जाता है क्योंकि यहाँ देश में सर्वाधिक खनिज विविधता (Variety) पाई जाती है। वहीं अरावली पर्वतमाला को 'खनिजों का भण्डारगृह' (Storehouse of Minerals) कहा जाता है, क्योंकि यहाँ सबसे ज़्यादा खनिज भण्डारण (Reserves) मौजूद है — यह भण्डारण मुख्यतः धारवाड़ चट्टानों में पाया जाता है।

सूचकआँकड़ा
खनिज विविधता82 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिनमें से 57 का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन होता है
खनिज भण्डारणसर्वाधिक भण्डारण अरावली पर्वतमाला (धारवाड़ चट्टानों) में
खनिज उत्पादनदेश के कुल खनिज उत्पादन में राजस्थान का 22% योगदान; धात्विक खनिजों में 15% व अधात्विक खनिजों में 25% योगदान — अधात्विक खनिज उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है
खनिज आय (राजस्व) में देश में स्थानतीसरा स्थान (प्रथम — झारखंड, द्वितीय — ओडिशा, तृतीय — राजस्थान)

महत्वपूर्ण नोट: पुराने वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान से कुल उत्पादित खनिजों की संख्या 58 थी — जिसमें 20 मुख्य खनिज (Major Minerals) व 36 गौण खनिज (Minor Minerals) शामिल हैं। राजस्थान भले ही उत्पादन (मात्रा) में देश में तीसरे स्थान पर हो, लेकिन यहाँ पेट्रोलियम, ग्रेनाइट व मार्बल जैसे कीमती अधात्विक खनिजों का भारी उत्पादन होता है — यही वजह है कि आय (मूल्य) की दृष्टि से भी राजस्थान देश के शीर्ष 3 राज्यों में शामिल है।

2राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का दबदबा

एकमात्र उत्पादक राज्य (Sole Producer)

राजस्थान देश में निम्नलिखित 6 खनिजों का एकमात्र (100%) उत्पादक राज्य है — यानी भारत में ये खनिज सिर्फ और सिर्फ राजस्थान में ही मिलते हैं।

क्रमखनिजक्रमखनिज
1कैल्साइट4जस्ता अयस्क
2चाँदी (Silver)5सेलेनाइट
3प्राकृतिक जिप्सम6वोलेस्टोनाइट

देश के कुल उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी (%)

खनिज% हिस्सेदारीखनिज% हिस्सेदारी
पोटाश94% (सर्वाधिक)गेरू/Ochre81%
सीसा-जस्ता अयस्क89%जिप्सम82%
चाँदी का अयस्क88%बेंटोनाइट75%
वोलेस्टोनाइट88%मुल्तानी मिट्टी74%
डोलोमाइट72%फेल्डस्पार66%
मार्बल63%एस्बेस्टस61%
तांबा अयस्क54%कैल्साइट50%
टैल्क/घीया पत्थर49%बॉल क्ले38%
रॉक फॉस्फेट31%फ्लोराइट29%
टंगस्टन27%सिलिका सैंडअग्रणी (Leading)

अग्रणी उत्पादक (Leading Producer) खनिज

राजस्थान इन खनिजों में देश का अग्रणी (सबसे आगे) उत्पादक राज्य है, भले ही यहाँ इनका 100% उत्पादन न हो: चूना पत्थर, सीसा-जस्ता, वोलेस्टोनाइट, गार्नेट, बेराइट्स, सिलिका सैंड, ग्रेनाइट, मार्बल, तांबा, कोयला, लिग्नाइट, जिप्सम, तथा पत्थर उद्योग (मार्बल, बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट)।

💡 'एकमात्र उत्पादक' और 'अग्रणी उत्पादक' में अंतर

ऐसे समझें — 'एकमात्र उत्पादक' का मतलब है कि पूरे भारत में वह खनिज सिर्फ राजस्थान में ही मिलता है (जैसे चाँदी या पोटाश का लगभग पूरा हिस्सा), जबकि 'अग्रणी उत्पादक' का मतलब है कि वह खनिज भारत के अन्य राज्यों में भी मिलता है, लेकिन राजस्थान सबसे ज़्यादा मात्रा में उसका उत्पादन करता है (जैसे मार्बल — जो कुछ अन्य राज्यों में भी है, लेकिन राजस्थान का हिस्सा 63% होने से यह सबसे आगे है)।

3अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र का योगदान (आर्थिक समीक्षा 2025-26)

सूचक/Indicatorआँकड़ा/Data
GSVA (खनन क्षेत्र, 2025-26)₹56,426 करोड़ (कुल GSVA का 3.30%)
औद्योगिक क्षेत्र में खनन का योगदान12.42%
वृद्धि दर (प्रचलित कीमतों पर)+2.69%
वृद्धि दर (स्थिर 2011-12 कीमतों पर)-1.41% (गिरावट)
GFCF — पूँजी निर्माण (2024-25)₹6,991 करोड़
रोज़गार — PLFS 2023-24राज्य: 0.47% | राष्ट्रीय औसत: 0.23% (राजस्थान में खनन क्षेत्र का रोज़गार-योगदान राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक)
WPI खनिज सूचकांक (2021 → 2025)386.65 → 504.67
IIP खनन क्षेत्र (2021-22 → नवंबर 2025)124.53 → 87.94
GSVA — विद्युत/गैस/जल (2025-26)₹54,702 करोड़ (कुल GSVA का 3.20%)
GFCF — ऊर्जा क्षेत्र (2024-25)₹37,922 करोड़
प्रति व्यक्ति बिजली खपत1,345.30 kWh

स्थिर कीमतों पर गिरावट क्यों?: ध्यान दें कि प्रचलित (Current) कीमतों पर खनन क्षेत्र की वृद्धि दर +2.69% है, लेकिन स्थिर (Constant) 2011-12 कीमतों पर यह -1.41% (गिरावट) दिखाती है। इसका मतलब है कि खनिज उत्पादों के दाम बढ़ने से कुल मूल्य (Rupee Value) में बढ़ोतरी दिख रही है, लेकिन वास्तविक उत्पादन की मात्रा (Volume) में कमी आई है — यानी कीमतें बढ़ने से आँकड़ा अच्छा लग रहा है, जबकि हकीकत में उत्पादन थोड़ा घटा है।

4खनिज चट्टानें एवं खनिजों का वर्गीकरण

A. खनिज चट्टानें (Mineral Rocks)

चट्टान प्रकारमुख्य क्षेत्रखनिज प्रकारप्रमुख खनिज
अवसादी चट्टानेंउत्तर-पश्चिम (पश्चिमी मरुस्थल)ऊर्जा खनिजपेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयला
धारवाड़ चट्टानेंअरावली क्षेत्रधात्विक खनिजतांबा, लोहा, सीसा-जस्ता, चाँदी
विन्ध्यन चट्टानेंदक्षिणी-पूर्वी राजस्थानपत्थर/अधात्विकबलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोटा स्टोन, लाल पत्थर
💡 अरावली में धात्विक खनिज ज़्यादा क्यों मिलते हैं?

अरावली पर्वतमाला का निर्माण धारवाड़ चट्टानों से हुआ है, और धारवाड़ चट्टानें विश्व की सबसे प्राचीन (पुरानी) आग्नेय व कायांतरित चट्टानों में गिनी जाती हैं — इन्हीं में धातु-युक्त खनिज (जैसे तांबा, लोहा, सीसा-जस्ता) बनने की प्रक्रिया लाखों साल पहले हुई थी। इसीलिए अरावली क्षेत्र (शेखावाटी, उदयपुर, भीलवाड़ा आदि) को धात्विक खनिजों का सबसे समृद्ध क्षेत्र माना जाता है।

B. खनिजों का वर्गीकरण (Classification)

वर्गउपवर्गउदाहरण/Trick
धात्विक खनिजलौह धातु (Ferrous)Trick 'K-LMNT': K-कोबाल्ट, K-क्रोमाइट, L-लोहा, M-मैंगनीज, N-निकल, T-टंगस्टन, T-टाइटेनियम
धात्विक खनिजअलौह धातु (Non-Ferrous)सोना, चाँदी, प्लेटिनम, सीसा-जस्ता, टिन, तांबा, बॉक्साइट (एल्युमिनियम), मैग्नीशियम, पारा (Hg)
अधात्विक खनिजक्ले, पत्थर, अन्यअभ्रक, जिप्सम, क्ले खनिज, ब्लीचिंग क्ले, पत्थर वाले खनिज
ऊर्जा खनिजजीवाश्म + आण्विकपेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयला, यूरेनियम, थोरियम

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान की तीन प्रमुख चट्टान श्रेणियाँ (अवसादी, धारवाड़, विन्ध्यन) व उनका विस्तार क्षेत्र

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5प्रमुख धात्विक खनिज — अरावली पेटी

I. तांबा (Copper) 🔶

देश के कुल तांबा अयस्क उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा 54% है।

⛏️ तांबा (Copper)

📍 प्रमुख जिले: शेखावाटी (चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना), अजमेर, अलवर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, सिरोही 🏭 उपयोग: विद्युत तार, ऑटोमोबाइल/मोटरगाड़ी, उपकरण/मशीनरी, रंग उद्योग, बर्तन बनाना

क्षेत्रउत्पादन स्थान
उत्तरी अरावलीझुंझुनूं → अकावली, कोल्हन | नीम का थाना → खेतड़ी, चाँदमारी | सीकर → बन्नो की ढाणी, मदान-कूदान, बनवास | चूरू → बिदासर
मध्य अरावलीअजमेर → हनोतिया, सावर | अलवर → खो-दरीबा, भगत का बास, थानागाजी, भगोनी
दक्षिणी अरावलीउदयपुर → अंजनी सलूम्बर क्षेत्र | भीलवाड़ा → पुर-दरीबा, देवतलाई (तांबा+सोना दोनों), देवपुरा-छनेड़ग | सिरोही → बसंतगढ़ | चित्तौड़गढ़ → भागल, वारी क्षेत्र

II. लौह अयस्क (Iron Ore) 🔩

लोहा धातु को 'उद्योगों का आधार/उद्योगों की रीढ़' कहा जाता है, क्योंकि लगभग हर बड़े उद्योग में लोहे व इस्पात का इस्तेमाल होता है। राजस्थान में मुख्यतः मैग्नेटाइट व हेमेटाइट श्रेणी का लोहा पाया जाता है।

क्षेत्रउत्पादन स्थान
तोरावाटी क्षेत्रसीकर (डानला), नीम का थाना, झुंझुनूं (सिंघाना)
जयपुर व आसपासजयपुर (मोरिजा-बानोला), दौसा (नीमला-रायसेला), करौली (देशलैी, टोडपुरा, लीलोटी, खोरा)
मेवाड़ क्षेत्रउदयपुर (नाथरा की पाल, थुर-हुण्डेर), भीलवाड़ा (तिरंगा क्षेत्र, पुर-बनेड़ा)

III. सीसा-जस्ता एवं चाँदी (Lead-Zinc & Silver) ⚗️

मुख्य अयस्क: गैलेना (Galena)। राजस्थान इन खनिजों का देश में अग्रणी एवं एकाधिकार वाला राज्य है — सीसा-जस्ता अयस्क में 89% व चाँदी अयस्क में 88% हिस्सेदारी।

⛏️ सीसा-जस्ता व चाँदी (Lead-Zinc-Silver)

📍 प्रमुख जिले: भीलवाड़ा (रामपुरा-आगुचा, गुलाबपुरा-आगुचा), राजसमंद (राजपुरा दरीबा, सिदेसर खुर्द व कलाँ), उदयपुर (जावर माला — राणा लाखा के समय से, देवारी), सवाई माधोपुर (चौथ का बरवाड़ा), अलवर (गुढ़ा-किशोर दास) 🏭 उपयोग: सीसा — रंग उद्योग, कारतूस, वायुयान निर्माण | जस्ता — विद्युत उपकरण, तार, ऑटोमोबाइल, औषधि, उर्वरक | चाँदी — आभूषण, विद्युत उपकरण, औषधि, बर्तन, सिक्के/पदक

IV. टंगस्टन (Tungsten) 🔦

मुख्य अयस्क: वोल्फ्रामाइट (Wolframite) व शीलाईट (Scheelite)। डेगाना (नागौर) देश की सबसे बड़ी टंगस्टन खान है, हालाँकि यह वर्तमान में बंद है।

जिलाउत्पादन क्षेत्र
नागौरडेगाना (रेवत हिल्स) — देश की सबसे बड़ी टंगस्टन खान (वर्तमान में बंद)
पालीनाना-कराब
सिरोहीआबू-रेवदर, बाल्दा/वाल्दा

V. मैंगनीज (Manganese) 🔩

जिलाउत्पादन क्षेत्र
बाँसवाड़ा (सर्वाधिक)लीलवाणी, कालाखूंटा, तलवाड़ा, तामबेसरा, इटाला
राजसमंदनेगड़िया
उदयपुरछोटी सार, बड़ी सार

VI. सोना (Gold) 🌟

जिलाउत्पादन/भण्डारण क्षेत्र
बाँसवाड़ाआनन्दपुरा-भूकिया, जगपुरा-भूकिया, घोटिया अंबा, देलवाड़ा
भीलवाड़ादेवतलाई (सोना एवं तांबा दोनों एक साथ मिलते हैं)
अन्यडूंगरपुर (भारकुंदी), उदयपुर (डागोचा), अलवर (खेड़ा मुंडिया वास), दौसा (ढाणी बासडी), झुंझुनूं (खेतड़ी)

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के प्रमुख धात्विक खनिज (तांबा, लौह अयस्क, सीसा-जस्ता, टंगस्टन, मैंगनीज, सोना) के उत्पादन क्षेत्र

6प्रमुख अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)

A. वागड़ पेटी के खनिज 💎

खनिजउत्पादन स्थान
फ्लोराईट/फ्लोर्सपारमांडों की पाल (डूंगरपुर)
हीरा (Diamond)केसरपुरा (प्रतापगढ़)
सोना व मैंगनीजबाँसवाड़ा

B. क्ले खनिज (Clay Minerals) 🏺

क्ले प्रकारप्रथम स्थानद्वितीय स्थानविशेष
बॉल क्ले (बीकानेर क्ले)बीकानेरदेश का 38% योगदान
फायर क्लेबीकानेर (कोलायत)भीलवाड़ा (मनरूप, बनियाखेड़ा)चित्तौड़गढ़ (सावल) में भी
चाइना क्ले/केओलिनबीकानेरसीकर
मुल्तानी मिट्टी (Fuller's Earth)बाड़मेरबीकानेरदेश का 74% योगदान
सिलिका सैंडबूंदी (बाड़ोदिया)जयपुरकाँच उद्योग में उपयोग

C. अरावली क्षेत्र के खनिज 🏔️

💡 याद रखने की ट्रिक

'वरण क्वार्टर लेकर फैल गया' → वर्मीक्युलाइट (Vermiculite) | लिथियम | ग्रेफाइट (देश में प्रथम — अलवर) | क्वार्ट्ज | फेल्सपार — इस वाक्य के हर शब्द का पहला अक्षर आपको इन 5 खनिजों की याद दिला देगा।

⛏️ एस्बेस्टस (Asbestos)

📍 प्रमुख जिले: उदयपुर (खैरवाड़ा, ऋषभदेव, सलूम्बर), डूंगरपुर (देवल, पीपरदा, मलवा, खेपारू), राजसमंद (नाथद्वारा), अजमेर (अर्जुनपुरा), जोधपुर — देश का 61% उत्पादन 🏭 उपयोग: सीमेंट की चद्दरें, टाइलें, ताप निरोधक (Heat Resistant) सामग्री

⛏️ घीया पत्थर (Soapstone/Talc) (Talc)

📍 प्रमुख जिले: उदयपुर (ऋषभदेव, देवपुरा-सालोज, सालौल), राजसमंद (कावादार, राक्चा, औडन), डूंगरपुर (देवल, थाना), अजमेर (हटूण्डी, लच्छीपुरा), बाँसवाड़ा, भीलवाड़ा, करौली — देश का 49% उत्पादन 🏭 उपयोग: टैल्कम पाउडर, रंगीन पेन्सिल, खिलौने, कीटनाशक

D. उर्वरक वाले खनिज (Fertilizer Minerals) 🌱

उर्वरक (खाद) बनाने में उपयोग होने वाले मुख्य खनिज हैं: पोटाश, जिप्सम, जस्ता, पाइराइट्स, रॉक फॉस्फेट।

⛏️ रॉक फॉस्फेट (Rock Phosphate)

📍 प्रमुख जिले: उदयपुर (डाफन कोटड़ा, झामर-कोटड़ा, मटून, सीसारमा), बाँसवाड़ा (सल्लोपट), जैसलमेर (लाठी-विरमानिया, फतेहगढ़), जयपुर — देश का 31% उत्पादन 🏭 उपयोग: उर्वरक (खाद) निर्माण में

⛏️ पोटाश (Potash)

📍 प्रमुख जिले: हनुमानगढ़, बीकानेर, श्रीगंगानगर, चूरू, करौली — देश का 94% उत्पादन (राजस्थान का सबसे बड़ा एकाधिकार) 🏭 उपयोग: उर्वरक निर्माण में

⛏️ जिप्सम (Gypsum)

📍 प्रमुख जिले: बीकानेर (सर्वाधिक — लूणकरणसर, जामसर, हरकासर), श्रीगंगानगर, जैसलमेर (पोकरण, चाँदन, मोहनगढ़), बाड़मेर (कवास, उत्तरलाई), नागौर (गोठ मांगलोद, भदवासी) — देश का 82% उत्पादन 🏭 उपयोग: सीमेंट उद्योग, प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), उर्वरक, रंग

सबसे बड़ी खान: जामसर (बीकानेर) — जिप्सम की देश की सबसे बड़ी खान है। यही वजह है कि बीकानेर को जिप्सम उत्पादन में राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण ज़िला माना जाता है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के अधात्विक खनिज (क्ले, उर्वरक खनिज, एस्बेस्टस, घीया पत्थर) के उत्पादन क्षेत्र

E. एकाधिकार वाले खनिज 🏆 (पूर्णतः राजस्थान में उत्पादित)

खनिजउत्पादन क्षेत्रविशेष
रक्तमणि/तामड़ा/गार्नेटटोंक (राजमहल, जनकपुर), अजमेर (सरवाड़)
जास्पर (Jaspar)जोधपुर
वोलेस्टोनाइटबेल का मगरा (सिरोही), उदयपुरदेश का 88%
ऑकर/लाल गेरू (Ochre)चित्तौड़गढ़देश का 81%
पन्ना/एमरल्ड (Emerald)राजसमंद (देवगढ़, आमेट, कालागुमान, टिक्की), अजमेर (बुबानी-मुहामी)इसे 'हरी अग्नि' भी कहा जाता है
सीसा-जस्ताभीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुरआर्थिक समीक्षा 2023-24 अनुसार एकाधिकार
सेलेनाइट (जिप्सम की किस्म)बीकानेर क्षेत्रएकाधिकार

F. अन्य महत्वपूर्ण खनिज

खनिजजिला/उत्पादन
बेंटोनाइटबाड़मेर, बीकानेर — देश का 75% उत्पादन
बेरीलियमजयपुर (गुजरवाड़ा), अजमेर (बांदर-सिंदरी), उदयपुर (शिकारवाड़ी)
बॉक्साइटकोटा

G. अभ्रक/माइका — 'खनिजों का बीमार बच्चा' 🧊

माइका को 'खनिजों का बीमार बच्चा' कहा जाता है क्योंकि देश की 20 बड़ी अभ्रक खानों में से केवल 50% में ही उत्पादन हो रहा है — यानी यह खनिज लगातार गिरावट की स्थिति में है।

क्षेत्र/जिलाउत्पादन स्थान
भीलवाड़ा ('अभ्रक नगरी')दांता भूणास, नात की नेरी, घोगास, चापरी
उदयपुरमालवा के चंपागढ़
टोंकबारेली, शंकरवाड़ा
जयपुरबंजारी, लक्ष्मी
अन्य भण्डारणअलवर, अजमेर, राजसमंद, नीम का थाना

7पत्थर वाले खनिज (Stone Minerals)

ये अधात्विक खनिज हैं जो मुख्यतः विन्ध्यन चट्टानों का हिस्सा हैं।

A. प्रमुख पत्थर खनिज एवं उत्पादन

पत्थरप्रथम स्थानद्वितीय/अन्य स्थान
स्लेट स्टोनअलवरटोंक
सैंड स्टोन (बलुआ पत्थर)बंसी पहाड़पुर (भरतपुर)बूंदी, करौली
लाल पत्थर (धौलपुर स्टोन)धौलपुरकरौली
कोटा स्टोनकोटाचित्तौड़गढ़, झालावाड़
ग्रेनाइट स्टोनजालोर ('ग्रेनाइट सिटी')बाड़मेर, सिरोही, अजमेर, पाली, जोधपुर
चूना पत्थरजोधपुर (सर्वाधिक)जैसलमेर, नागौर (3 किस्में)

B. संगमरमर/मार्बल (Marble) 🤍

मार्बल एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है, जो चूना पत्थर (अवसादी चट्टान) के रूपांतरण से बनती है — यानी लाखों साल पहले चूना पत्थर पर भारी दबाव व तापमान पड़ने से यह मार्बल में बदल गया। राजसमंद में सर्वाधिक मार्बल उत्पादन इकाइयाँ हैं, और देश के कुल मार्बल उत्पादन का 63% हिस्सा अकेले राजस्थान से आता है।

किस्मस्थानजिला
सफेद संगमरमरमकरानानागौर
काला संगमरमरभैंसलानाजयपुर
पीला संगमरमरपीथलाजैसलमेर
बादामी संगमरमरजोधपुर
हरा संगमरमरऋषभदेवउदयपुर
गुलाबी संगमरमरऋषभदेव, बाबरमालउदयपुर, जालोर, भरतपुर
सतरंगी संगमरमरखांदरापाली
💡 मकराना का सफेद संगमरमर — विश्व प्रसिद्ध क्यों?

नागौर के मकराना क़स्बे का सफेद संगमरमर इतना शुद्ध, चमकदार व टिकाऊ होता है कि इसी से ताजमहल बनाया गया था। यह संगमरमर सैकड़ों साल बाद भी अपनी चमक बनाए रखता है, इसलिए आज भी दुनियाभर के बड़े स्मारकों व मंदिरों में मकराना मार्बल की भारी माँग रहती है — यही वजह है कि नागौर ज़िले का यह छोटा सा कस्बा दुनिया-भर में अपनी अलग पहचान रखता है।

C. चूना पत्थर (Limestone) की किस्में

किस्मक्षेत्र/जिला
स्टील ग्रेडजैसलमेर (सानू क्षेत्र)
केमिकल ग्रेडजोधपुर (बिलाड़ा), नागौर (गोटन)
सीमेंट ग्रेडचित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी

D. ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) एवं पंच गौरव 📍

'एक ज़िला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत हर ज़िले के किसी एक खास उत्पाद को बढ़ावा दिया जाता है — खनिज/पत्थर क्षेत्र में निम्न ज़िलों को उनके विशेष उत्पाद के लिए पहचाना गया है।

खनिज/पत्थर उत्पादजिले
ग्रेनाइट व मार्बल उत्पादअजमेर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर
मार्बल उत्पादबाँसवाड़ा, डूंगरपुर, सवाई माधोपुर, सिरोही
बलुआ पत्थर (Sandstone)बूंदी, करौली
पीला पत्थरजैसलमेर
ग्रेनाइटजालोर
कोटा स्टोनझालावाड़
स्लेट स्टोनटोंक
अन्य पत्थरडीग, धौलपुर
क्वार्ट्ज व फेल्डस्पार पाउडरब्यावर
क्वार्ट्जसलूंबर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के पत्थर वाले खनिज (मार्बल, ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर, चूना पत्थर) के उत्पादन क्षेत्र

8ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)

A. परमाणु/आण्विक ऊर्जा खनिज ☢️

खनिजअयस्कउत्पादन/भण्डारणउपयोग
यूरेनियमपिचब्लैंडखंडेला, रोयल, सुहागपुरा (सीकर); उमरा (उदयपुर)परमाणु ऊर्जा, परमाणु बम
थोरियममोनोजाइटकेवल भंडारण — भद्रावन (पाली), सरदारपुरा (भीलवाड़ा), रामगढ़ (बारां)परमाणु ऊर्जा, परमाणु बम

B. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस 🛢️

कच्चा तेल उत्पादन — देश में स्थानप्राकृतिक गैस — तथ्य
बॉम्बे हाई → 40% (प्रथम)Onshore उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर
राजस्थान → लगभग 12-14% (द्वितीय)उत्पादन: 2.60-2.95 MMSCM/दिन
गुजरात (तृतीय)राजस्व (दिसंबर 2025 तक): ₹1,533.74 करोड़
असम (चतुर्थ)1996 में पहली बार मणिहारी टीबा (जैसलमेर) से गैस मिली
राजस्थान में उत्पादन: 57,000-59,000 BOPD (बैरल प्रति दिन)

पेट्रोलियम बेसिन — 4 बेसिन, 14 जिले, 1,50,000 वर्ग किमी क्षेत्र

बेसिनजिलेप्राधिकरण/कंपनीविशेष
बाड़मेर-सांचौर बेसिनबाड़मेर, जालोर (2 जिले)Cairn Energy (Vedanta) + ONGCराज्य में सर्वाधिक भण्डारण
जैसलमेर बेसिन (राजस्थान शेल्फ बेसिन)जैसलमेर (1 जिला)ONGC
बीकानेर-नागौर बेसिनबीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू (5 जिले)OIL (Oil India) + ESSAR (Nayara)
विन्ध्यन बेसिनकोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ (6 जिले)ONGC + Cairn Energy

प्रमुख कुएँ एवं उत्पादन क्षेत्र

जिलाप्रमुख कुएँ/क्षेत्रविशेष
बाड़मेरमंगला, विजया, कोसलू (सरस्वती), शक्ति, बायतू (ऐश्वर्या), दुर्गा, गुड़ा मालानी (रागेश्वरी), भाग्यम, कामेश्वरीमंगला = राजस्थान का प्रथम तेल कुआँ (2004 में खोजा गया, उत्पादन 29 अगस्त 2009 से शुरू)
जैसलमेरबाघेवाला, साधेवाला, तनोट, चिन्नेवाला
बीकानेरतुवरीवाला/टावरेवाला, पूनम क्षेत्र (OIL द्वारा खोजा)क्षमता 30,000 बैरल/दिन (1 बैरल = 159 लीटर)
💡 प्राकृतिक गैस क्षेत्र — जैसलमेर की Trick

जैसलमेर के प्रमुख गैस क्षेत्रों को याद रखने के लिए यह वाक्य याद रखें: 'डंडे का बाम राम तूने मन में घोटा' → D=डाडवाला | G=गुमानेवाला | R=रामगढ़ | T=तनोट | M=मणिहारी तिब्बा | G=घोटारू। बाड़मेर के प्रमुख गैस क्षेत्र: रागेश्वरी, गुड़ा मालानी।

पेट्रोलियम रिफाइनरी (HRRL) — पचपदरा, बालोतरा

विवरणतथ्य
स्थानपचपदरा (बालोतरा, बाड़मेर)
हिस्सेदारीHPCL: 74% | राजस्थान सरकार: 26%
संशोधित लागत₹79,459 करोड़ (पुरानी लागत: ₹72,937 करोड़)
क्षमता9 MMTPA (मिलियन मेट्रिक टन प्रति वर्ष) — क्रूड रिफाइनिंग + 2 मिलियन टन का पेट्रो-केमिकल कॉम्प्लेक्स
स्थान (रैंक)राज्य की पहली रिफाइनरी | देश की 26वीं (कुछ स्रोतों में 27वीं)
मानकBS-6 (Bharat Stage 6)
विशेषताभारत की पहली रिफाइनरी जो पेट्रो-केमिकल कॉम्प्लेक्स से जुड़ी हुई है
पेट्रो कॉम्प्लेक्स शुभारंभ16 जनवरी 2018
क्षेत्रफललगभग 4,500 एकड़ (7,200 बीघा)

C. कोयला (Coal) 🪨

राजस्थान में 'टर्शियरी काल' का कोयला पाया जाता है। ध्यान रहे — भारत में कुल कोयले का 98% हिस्सा 'गोंडवाना काल' का है और सिर्फ 2% 'टर्शियरी काल' का है (जो मुख्यतः राजस्थान व पूर्वोत्तर राज्यों में मिलता है)। लिग्नाइट उत्पादन में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है (प्रथम — तमिलनाडु, द्वितीय — गुजरात)।

प्रकारकार्बन %रंगविशेष
एन्थ्रासाइट95%काला व चमकीलासर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता
बिटुमिनस60-70%काला व भूराभारत में सर्वाधिक पाया जाने वाला
लिग्नाइट50-60%भूराराजस्थान में सर्वाधिक पाया जाने वाला
पीट कोयला50% से कमहल्का भूरानिम्नतम गुणवत्ता
जिलाक्षेत्र/खानविशेष
बाड़मेरकपूरडी, जालीपा, गिरल, भाद्रेश
बीकानेर (Trick: BBPI)बीठनोक, बरसिंहसर, पलाना, गुरहापलाना → सर्वश्रेष्ठ लिग्नाइट
नागौरमेड़ता सिटी, ईग्यार, मातासुख-कसनाऊ

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के पेट्रोलियम बेसिन (4), प्रमुख तेल-गैस कुएँ एवं कोयला/लिग्नाइट क्षेत्रों की स्थिति

9विद्युत एवं नवीकरणीय (हरित) ऊर्जा 2025-26

राजस्थान खुद को 'हरित ऊर्जा हब' (Green Energy Hub) के रूप में विकसित कर रहा है। दिसंबर 2025 तक राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 31,556.43 MW थी, जिसमें से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की हिस्सेदारी 45.36% है — यानी राज्य की लगभग आधी बिजली अब सूरज, हवा व अन्य स्वच्छ स्रोतों से बन रही है।

कुल स्थापित क्षमता का विभाजन (दिसंबर 2025)

क्षेत्रक्षमता (MW)विवरण
राज्य सरकार (State Owned)9,447.79 MWथर्मल: 7,830 | जल विद्युत (Hydel): 1,017.29 | गैस: 600.50
केंद्र सरकार (Central Sector)3,856.07 MWथर्मल: 2,197.47 | जल विद्युत: 851.86 | परमाणु (Nuclear): 806.74
निजी/नवीकरणीय (Private/Renewables)18,252.57 MWपवन: 4,416.12 | बायोमास: 196.45 | सौर: 9,898 | अन्य: 3,742
कुल स्थापित क्षमता31,556.43 MWनवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी: 45.36%

सौर एवं पवन ऊर्जा (Solar & Wind)

प्रकारक्षमता/तथ्य
सौर ऊर्जा — कुल संभावित क्षमता142 GW (संभावित) | 42,531 MW कमीशन (चालू) हो चुका है
पवन ऊर्जा — कुल संभावित क्षमता284 GW (150 मीटर ऊँचाई पर मापी गई) | 5,229 MW कमीशन हो चुका है
बायोमास207.50 MW कमीशन हो चुका है

प्रमुख सोलर पार्क

सोलर पार्कस्थानक्षमताविशेष
भड़ला सोलर पार्कजोधपुर (4 चरणों में निर्मित)2,245 MWविश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क
नोख सोलर पार्कजोधपुर925 MWनिर्मित/चालू
फलौदी-पोकरणजोधपुर750 MWनिर्माणाधीन
फतेहगढ़ फेज़-1Bजैसलमेर1,500 MWनिर्माणाधीन
पूगलबीकानेर2,450 MWनिर्माणाधीन
💡 भड़ला सोलर पार्क — विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क क्यों?

जोधपुर के भड़ला गाँव में बना यह सोलर पार्क लगभग 14,000 एकड़ (56 वर्ग किमी) क्षेत्र में फैला हुआ है — यानी इतना बड़ा कि इसमें कई छोटे शहर समा जाएँ! राजस्थान के इस इलाके में साल भर तेज़ धूप व बादल रहित आसमान रहता है, जिससे सौर पैनल अधिकतम बिजली बना पाते हैं — यही वजह है कि यहाँ इतनी बड़ी क्षमता (2,245 MW) का सोलर पार्क बनाना संभव हुआ, जो पूरे विश्व में सबसे बड़ा है।

राजस्थान Integrated Clean Energy Policy 2024

लक्ष्य 2030: कुल नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य: 1,25,000 MW (125 GW) — जिसमें से 90,000 MW सोलर, 25,000 MW पवन/हाइब्रिड, तथा 10,000 MW स्टोरेज (बैटरी भण्डारण) शामिल है। इसके अलावा 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य 2,000 KTPA (किलो टन प्रति वर्ष) रखा गया है।

प्रमुख विद्युत योजनाएँ

योजनालाभ/तथ्य
मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (घरेलू)100 यूनिट मुफ्त | लाभार्थी: 98.03 लाख | सब्सिडी: ₹5,805.18 करोड़ | 64.23 लाख उपभोक्ताओं के बिल शून्य
मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (कृषि)2000 यूनिट मुफ्त | लाभार्थी: 19.70 लाख किसान | सब्सिडी: ₹16,001.72 करोड़
PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना5 लाख घरों का लक्ष्य | अब तक 1.22 लाख घरों में 493 MW स्थापित
PM-KUSUM (Component-C)838 सोलर प्लांट (2,162 MW) कमीशन हो चुके हैं | फीडर सोलराइजेशन पर भी काम जारी
RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme)AT&C लाइन लॉस (बिजली की चोरी/हानि) को 12-15% तक लाने का लक्ष्य | Smart Meter व Sub-station आधुनिकीकरण

आधारभूत ढाँचा (Transmission System)

सूचकआँकड़ा
EHV ट्रांसमिशन नेटवर्क (दिसंबर 2025)45,933.315 सर्किट किलोमीटर
EHV Grid Sub-Station (GSS)678 | कुल क्षमता: 1,09,071 MVA
कुल उपभोक्ता (नवंबर 2025)202.78 लाख (घरेलू: 158.44 लाख | कृषि: 21.08 लाख)
कुल ऊर्जा उपलब्धता (2024-25)11,770 करोड़ यूनिट
बेची गई ऊर्जा (2024-25)9,200.80 करोड़ यूनिट
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10खनिज नीतियाँ 2024 एवं M-Sand नीति

A. सामान्य खनिज नीतियों का इतिहास

क्रमखनिज नीति (वर्ष)
प्रथम1978
द्वितीय1990
तृतीय1994
चतुर्थ2011
पंचम4 जून 2015
षष्ठ (नवीनतम)9 दिसंबर 2024 — राजस्थान खनिज नीति 2024

B. राजस्थान खनिज नीति 2024 — विज़न एवं लक्ष्य

इस नीति का विज़न है — AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित निगरानी, GPS ट्रैकिंग, जियो-फेंसिंग, ज़ीरो-वेस्ट माइनिंग (यानी खनन से कोई अपशिष्ट व्यर्थ न जाए), तथा टिकाऊ (Sustainable), पारदर्शी व ज़िम्मेदार खनिज विकास सुनिश्चित करना।

सूचकवर्तमान2030 लक्ष्य2046-47 लक्ष्य
खनन रियायत क्षेत्र0.68%1%2%
उत्पादित खनिज (संख्या)5870
GDP योगदान3.10%5%8%
राजस्व₹7,491 करोड़3 गुणा₹1 लाख करोड़
रोज़गार50 लाख1 करोड़

C. राजस्थान M-Sand नीति 2024 (1 दिसंबर 2024)

M-Sand का मतलब है — कृत्रिम (मानव-निर्मित) बजरी, जो पत्थर खनिजों को पीसकर बनाई जाती है। यह नदी की प्राकृतिक बजरी का एक Eco-Friendly (पर्यावरण-अनुकूल) विकल्प है — क्योंकि नदी से बजरी निकालने से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचता है, जबकि M-Sand बनाने में सिर्फ खनन से बचे पत्थर के टुकड़ों (अपशिष्ट) का इस्तेमाल होता है।

M-Sand नीति का इतिहास: पहली M-Sand नीति 2020 में बनाई गई थी (लागू 25 जनवरी 2021 से), जबकि नवीनतम M-Sand नीति 1 दिसंबर 2024 को जारी की गई।

उद्देश्य/लक्ष्यविवरण
पर्यावरण संरक्षणनदी बजरी का पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराना
खनन अपशिष्ट समाधानबारीक पत्थर (अपशिष्ट/Waste) का सदुपयोग करना
उत्पादन लक्ष्य2025 तक 30 मिलियन टन/वर्ष उत्पादन | हर साल 20% वृद्धि का लक्ष्य
सरकारी प्रयोग2028-29 तक सरकारी प्रोजेक्ट्स में 50% M-Sand उपयोग अनिवार्य करने का लक्ष्य
आवंटन (दिसंबर 2025 तक)38 M-Sand भूखंड + 10 Overburden Dump Mining Plot आवंटित

M-Sand नीति के तहत छूट (Incentives)

छूट/Incentiveविवरण
रॉयल्टी व डंप शुल्क50% छूट
राज्य कर वापसी75% (10 वर्षों के लिए)
बिजली शुल्क100% छूट (7 वर्षों के लिए)
स्टाम्प ड्यूटी75% कमी

D. अन्य नीतियाँ एवं पहलें

नीति/पहलविवरण
सिलिकोसिस नीति 2019खनन/पत्थर काटने से होने वाली फेफड़ों की बीमारी (सिलिकोसिस) के लिए ₹3 लाख पुनर्वास सहायता; मृत्यु होने पर परिजनों को ₹2 लाख
अवैध खनन कार्रवाई (दिसंबर 2025 तक)7,335 मामले दर्ज | 831 FIR | 7,162 वाहन/मशीन ज़ब्त | ₹50.94 करोड़ जुर्माना वसूला गया
IPS सर्वेक्षण योजना (2025-26)34 परियोजनाएँ | 220 वर्ग किमी क्षेत्र का सर्वेक्षण | 1,414 मीटर ड्रिलिंग
DMFT Trust (ज़िला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट)₹9,393.38 करोड़ स्वीकृत | ₹5,927.84 करोड़ खर्च | 21,993 कार्य स्वीकृत, जिनमें 13,612 पूरे हुए
SRSAC तकनीकरिमोट सेंसिंग मैपिंग व Data Analytics का उपयोग करके अवैध खनन व कर चोरी पकड़ना
💡 सिलिकोसिस बीमारी क्या है?

सिलिकोसिस फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी है, जो पत्थर काटने, खनन करने या पत्थर की धूल में लगातार साँस लेने से होती है — बारीक सिलिका कण फेफड़ों में जमा होकर उन्हें धीरे-धीरे कमज़ोर व सख़्त कर देते हैं। चूँकि राजस्थान में मार्बल, ग्रेनाइट व बलुआ पत्थर उद्योग बहुत बड़ा है, इसलिए यहाँ हज़ारों मज़दूर इस बीमारी के ख़तरे में रहते हैं — इसी कारण सरकार ने 2019 में विशेष सिलिकोसिस नीति बनाकर पीड़ितों व उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देना शुरू किया।

11प्रमुख खनन संस्थाएँ (Mineral Institutions)

A. RSMML — राजस्थान राज्य खान एवं खनिज निगम

विवरणतथ्य
स्थापना1974
मुख्यालयउदयपुर
राजस्व 2024-25₹1,726.03 करोड़ | लाभ: ₹658.22 करोड़
अनुमानित राजस्व 2025-26₹1,922.17 करोड़
सरकारी खज़ाने में योगदान (दिसंबर 2025 तक)₹253.92 करोड़

RSMML की 4 SBU इकाइयाँ (दिसंबर 2025 तक राजस्व)

इकाई (SBU)स्थानराजस्व
रॉक फॉस्फेटझामरकोटड़ा (उदयपुर)₹911.48 करोड़
जिप्समबीकानेर₹3.59 करोड़
लाइमस्टोन/चूना पत्थरजोधपुर₹201.04 करोड़
लिग्नाइटजयपुर₹156.22 करोड़
पवन/सौर ऊर्जाजैसलमेर₹24.32 करोड़

B. HZL — हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ⚗️

विवरणतथ्य
स्थापना1966
प्रमुख स्थानदेबारी (उदयपुर); 2010 से राजपुरा दरीबा (राजसमंद) भी
जिंक स्मेल्टर प्लांटचंदेरिया (चित्तौड़गढ़) — 2005 में ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित

C. HCL — हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड 🔶

विवरणतथ्य
स्थापना1967
मुख्यालयखेतड़ी (झुंझुनूं)
ताम्र (तांबा) परियोजनाएँ1. खेतड़ी (झुंझुनूं) 2. चान्दमारी (झुंझुनूं) 3. खो-दरीबा (अलवर)

D. अन्य संस्थाएँ

संस्थाविवरण
RUDAग्रामीण गैर-कृषि विकास अभिकरण — इसमें लघु खनिज एक प्रमुख उप-क्षेत्र है
SRSACState Remote Sensing Application Centre — खनिज मानचित्रण (Mapping) में उपयोग होता है

12राजस्व, नीलामी एवं निवेश

A. खदानों की लीज़ एवं राजस्व

सूचकआँकड़ा
प्रमुख खनिज पट्टे (Mining Leases)3,395
लघु खनिज पट्टे13,428
खदान लाइसेंस (e-नीलामी के ज़रिए)16,058
नीलामी में देश में स्थान (2024-25)प्रथम (34 प्रमुख ब्लॉक नीलाम किए गए)
राजस्व लक्ष्य 2025-26₹12,980 करोड़
प्राप्त राजस्व (दिसंबर 2025 तक)₹6,857.97 करोड़

B. 2022-23 खनिज राजस्व विवरण

🔑 मुख्य खनिज राजस्व
  • जिंक → ₹2,611 करोड़ (प्रथम स्थान)
  • चूना पत्थर → ₹423 करोड़ (द्वितीय स्थान)
  • लिग्नाइट → ₹89 करोड़ (तृतीय स्थान)
🏗️ गौण खनिज राजस्व
  • बिल्डिंग स्टोन → ₹596 करोड़ (प्रथम स्थान)
  • ग्रेनाइट → ₹391 करोड़ (द्वितीय स्थान)
  • मार्बल → ₹284 करोड़ (तृतीय स्थान)

C. निर्यात (Exports 2024-25)

निर्यात उत्पादमूल्य
डायमेंशनल स्टोन (मार्बल, ग्रेनाइट, माइका आदि)₹3,764.83 करोड़
खनिज ईंधन/खनिज तेल/बिटुमिनस पदार्थ₹1,766.44 करोड़

D. राइज़िंग राजस्थान समिट 2024 — निवेश

क्षेत्रMoU (समझौते)निवेश राशिGround-Breaking (धरातल पर शुरू)
खनन (Mining)293 MoU₹99,587 करोड़₹34,237 करोड़
ऊर्जा (Energy)812 MoU (सर्वाधिक)₹28,27,421 करोड़ (28.27 लाख करोड़)₹6,15,995 करोड़

निवेश का बड़ा संकेत: राइज़िंग राजस्थान समिट 2024 में ऊर्जा क्षेत्र में सबसे ज़्यादा 812 MoU हुए, जो लगभग ₹28.27 लाख करोड़ के निवेश का प्रस्ताव लेकर आए — यह दिखाता है कि राजस्थान अब सिर्फ पारंपरिक खनिज उत्पादक राज्य नहीं, बल्कि सौर व पवन ऊर्जा में देश का सबसे बड़ा निवेश केंद्र भी बनता जा रहा है।

13नवीनतम अपडेट 2025-26 (पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन एवं खनन कानून संशोधन)

जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, राजस्थान के खनिज व ऊर्जा क्षेत्र में दो बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं।

💡 पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन — 4 जुलाई 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई 2026 को बालोतरा ज़िले के पचपदरा में बनी HRRL रिफाइनरी का उद्घाटन किया — यह ₹79,459 करोड़ की लागत से 4,500 एकड़ में बनी देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी है। लेकिन एक दिलचस्प व चिंताजनक तथ्य सामने आया है — जब यह रिफाइनरी परियोजना शुरू हुई थी, तब राजस्थान लगभग 9 MMTPA (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) कच्चा तेल उत्पादित कर रहा था, यानी राज्य के अपने ही तेल भंडार से इस 9 MMTPA क्षमता की रिफाइनरी को चलाया जा सकता था। लेकिन निर्माण के दौरान राज्य का उत्पादन लगातार घटता गया और अब यह घटकर मात्र लगभग 1.5 MMTPA रह गया है (यानी प्रतिदिन उत्पादन 175,000 बैरल से घटकर 50,000 बैरल से भी नीचे आ गया)। इस वजह से रिफाइनरी को अपनी ज़रूरत का सिर्फ 2.5 MMTPA तेल राजस्थान से मिल पाएगा, जबकि बाकी 7.5 MMTPA तेल अरब देशों व अन्य विदेशी स्रोतों से आयात करके गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के ज़रिए, लगभग 485 किमी लंबी विद्युत-गर्म (Electrically Heated) पाइपलाइन से पचपदरा तक पहुँचाया जाएगा।

परीक्षा के लिए ज़रूरी सीख: यह घटना दिखाती है कि किसी भी बड़ी परियोजना की योजना बनाते समय दीर्घकालिक (Long-term) संसाधन अनुमान कितने महत्वपूर्ण होते हैं — बाड़मेर के तेल भंडार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं (जो प्राकृतिक संसाधनों की एक सामान्य विशेषता है), लेकिन रिफाइनरी जैसी बड़ी अधोसंरचना (Infrastructure) परियोजनाएँ दशकों तक चलानी होती हैं, इसलिए आयात पर निर्भरता एक व्यावहारिक व ज़रूरी समाधान है।

💡 खनन कानून में 6 बड़े संशोधन — लिथियम, सोना व चाँदी की खोज तेज़

केंद्र सरकार ने अगस्त 2025 में 'खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम' में 6 महत्वपूर्ण संशोधन किए, ताकि देश के खनिज संसाधनों का दोहन (उपयोग) तेज़ किया जा सके। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, भारत लिथियम जैसे खनिजों के लिए विदेशों पर निर्भर है, और ये संशोधन खनिज-समृद्ध राज्यों (जैसे राजस्थान) को रॉयल्टी व रोज़गार दोनों के अवसर देंगे। मुख्य संशोधन: (1) मौजूदा खनन पट्टों में लिथियम, सोना, चाँदी, निकल व कोयला जैसे नए खनिज बिना अतिरिक्त शुल्क के जोड़े जा सकेंगे (2) राज्य सरकारें गौण खनिजों (पत्थर, बजरी, रेत) की रॉयल्टी खुद तय करेंगी (3) राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण मिशन के तहत अगले 5 वर्षों में ₹8,700 करोड़ का निवेश (4) 200 मीटर से अधिक गहराई वाले खनिजों के लिए पट्टा क्षेत्र विस्तार की अनुमति (5) खनिज व धातु व्यापार के लिए एक पंजीकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म — 'मिनरल एक्सचेंज' की स्थापना (6) नीलामी से प्राप्त खानों में नए खनिज जोड़ने पर अतिरिक्त प्रीमियम देना होगा। राजस्थान में पहले से 2 सोने की खानों की नीलामी हो चुकी है, और लिथियम, कोबाल्ट व दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) की खोज पर काम जारी है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — पचपदरा रिफाइनरी (बालोतरा) एवं राजस्थान में लिथियम/दुर्लभ मृदा तत्वों की खोज वाले संभावित क्षेत्र

14त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

14.1 Most Important Exam Facts

क्र.महत्वपूर्ण तथ्य
1'खनिजों का अजायबघर' = राजस्थान | 'खनिजों का भण्डारगृह' = अरावली
2अधात्विक खनिज उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर
3खनिज आय में राजस्थान तीसरे स्थान पर (प्रथम-झारखंड, द्वितीय-ओडिशा)
4मंगला = राजस्थान का पहला पेट्रोलियम कुआँ (2004 में खोजा गया, 29 अगस्त 2009 से उत्पादन शुरू)
5भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) = विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क (2,245 MW)
6जामसर (बीकानेर) = जिप्सम की देश की सबसे बड़ी खान
7डेगाना (नागौर) = देश की सबसे बड़ी टंगस्टन खान (वर्तमान में बंद)
8पन्ना (Emerald) को 'हरी अग्नि' कहा जाता है
9माइका = 'खनिजों का बीमार बच्चा' | भीलवाड़ा = 'अभ्रक नगरी'
10RSMML — स्थापना 1974, मुख्यालय उदयपुर | HZL — 1966, देबारी | HCL — 1967, खेतड़ी
11पचपदरा रिफाइनरी — क्षमता 9 MMTPA | BS-6 मानक | HPCL 74% + राजस्थान सरकार 26% हिस्सेदारी | उद्घाटन 4 जुलाई 2026
12नीलामी में राजस्थान 2024-25 में देश में प्रथम स्थान पर (34 ब्लॉक नीलाम)
13Clean Energy Policy 2024 — 2030 तक 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य
14नवीनतम खनिज नीति — 9 दिसंबर 2024 (छठी नीति)
15पोटाश — देश का 94% उत्पादन राजस्थान में (सबसे बड़ी हिस्सेदारी)
🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. राजस्थान 'खनिजों का अजायबघर' है — 82 प्रकार के खनिजों में से 57 का व्यावसायिक उत्पादन होता है, और अधात्विक खनिज उत्पादन में यह देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि खनिज आय (राजस्व) में तीसरे स्थान पर 2. धात्विक खनिज मुख्यतः अरावली की धारवाड़ चट्टानों में मिलते हैं (तांबा, लौह अयस्क, सीसा-जस्ता-चाँदी, टंगस्टन, मैंगनीज, सोना), जबकि अधात्विक व ऊर्जा खनिज मुख्यतः पश्चिमी मरुस्थल की अवसादी चट्टानों में मिलते हैं (पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयला, जिप्सम, पोटाश) 3. राजस्थान पोटाश (94%), सीसा-जस्ता (89%), वोलेस्टोनाइट व चाँदी अयस्क (88%) तथा जिप्सम (82%) में देश की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखता है, और चाँदी, कैल्साइट, प्राकृतिक जिप्सम, जस्ता अयस्क, सेलेनाइट व वोलेस्टोनाइट में देश का एकमात्र उत्पादक है 4. मंगला (बाड़मेर) से 2004 में मिले पहले तेल कुएँ ने पचपदरा (बालोतरा) में ₹79,459 करोड़ की HRRL रिफाइनरी की नींव रखी, जिसका उद्घाटन 4 जुलाई 2026 को हुआ — लेकिन राज्य का घटता कच्चा तेल उत्पादन (9 से घटकर 1.5 MMTPA) अब इस रिफाइनरी को आयातित तेल पर निर्भर बना रहा है 5. भड़ला सोलर पार्क (विश्व का सबसे बड़ा, 2,245 MW) व Clean Energy Policy 2024 (2030 तक 125 GW लक्ष्य) दिखाते हैं कि राजस्थान अब पारंपरिक खनिज उत्पादक राज्य से आगे बढ़कर देश का सबसे बड़ा हरित ऊर्जा हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसे अगस्त 2025 के खनन कानून संशोधनों से लिथियम व दुर्लभ खनिजों की खोज में भी नई गति मिलेगी

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. देश के कुल तांबा उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा कितना प्रतिशत है? Q2. देश की सबसे बड़ी टंगस्टन खान कहाँ स्थित है? Q3. राजस्थान में मार्बल का सर्वाधिक उत्पादन किस जिले में होता है? Q4. राजस्थान का पहला पेट्रोलियम कुआँ कौनसा है और कब खोजा गया? Q5. विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क कहाँ स्थित है? Q6. राजस्थान में किस खनिज का उत्पादन देश में सर्वाधिक (94%) है? Q7. RSMML की स्थापना कब व कहाँ हुई? Q8. 'खनिजों का बीमार बच्चा' किस खनिज को कहा जाता है?

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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