ज़रा सोचिए — राजस्थान के हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी जनजाति (आदिवासी समुदाय) से है, यानी राज्य की लगभग 92 लाख से भी ज़्यादा आबादी जनजातीय है। इनमें सबसे दिलचस्प है 'मीना' जनजाति — जिनका नाम संस्कृत के 'मत्स्य' (मछली) शब्द से बना है, और मान्यता है कि इनकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के 'मीन अवतार' से हुई। वहीं दूसरी ओर 'भील' शब्द द्रविड़ भाषा के 'बिल' यानी 'धनुष' से बना है — क्योंकि भील धनुर्विद्या में इतने निपुण थे कि कर्नल टॉड ने उन्हें 'वनपुत्र' की उपाधि दी। और क्या आपने कभी सुना है कि किसी जनजाति में महिलाएँ तो गोदना (टैटू) गुदवा सकती हैं, लेकिन पुरुष नहीं? यह है सहरिया जनजाति की अनोखी परंपरा — जो राजस्थान की एकमात्र 'PVTG' (Particularly Vulnerable Tribal Group यानी विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) है, और जिसे बारां ज़िले के किशनगंज-शाहबाद क्षेत्र में सबसे ज़्यादा देखा जाता है। इस अध्याय में हम राजस्थान की सभी प्रमुख जनजातियों — उनकी उत्पत्ति, रीति-रिवाज़, विवाह प्रथाएँ, त्यौहार और उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं को बारीकी से समझेंगे, ताकि आपको हर एक जनजाति की पहचान बिल्कुल साफ़ हो जाए।
सामाजिक तथा आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वे लोग, जो समाज की मुख्य धारा (Mainstream) से अलग अपनी विशिष्ट परंपराओं व जीवनशैली के साथ रहते हैं, 'जनजाति' (Tribe) कहलाते हैं। भारत के संविधान में इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribe — ST) कहा जाता है, और इन्हें विशेष सुरक्षा व सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं ताकि ये भी समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें।
ऐसे समझें — जैसे किसी बड़े शहर में अलग-अलग मोहल्लों की अपनी अलग परंपराएँ होती हैं, वैसे ही जनजातियाँ सदियों से जंगलों, पहाड़ों व दूरदराज़ के इलाकों में अपनी खुद की भाषा, पहनावा, त्यौहार व सामाजिक नियमों के साथ रहती आई हैं। चूँकि ये मुख्य शहरी/कृषि समाज से कटी हुई थीं, इसलिए शिक्षा व आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण ये आर्थिक रूप से पिछड़ गईं — और यही वजह है कि सरकार इन्हें संविधान के तहत विशेष संरक्षण व आरक्षण देती है।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| राजस्थान की आदिवासी आबादी (ST जनसंख्या) | 92.39 लाख (92,38,534) |
| कुल जनसंख्या का प्रतिशत | 13.48% (लगभग 13.5%) |
| 2001-2011 दशक में वृद्धि दर | 30.2% |
| जनजातीय जनसंख्या में देश में स्थान | चौथा स्थान (क्रम: मध्यप्रदेश → महाराष्ट्र → ओडिशा → राजस्थान) |
| ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाली आदिवासी आबादी | 95% |
| अनुसूचित जनजातियों में लिंगानुपात | 948 (राज्य के औसत 928 से बेहतर) |
| श्रेणी | शीर्ष 3 जिले |
|---|---|
| अधिकतम संख्या (लाख में) | 1. उदयपुर (15.25 लाख) 2. बांसवाड़ा 3. डूंगरपुर |
| न्यूनतम संख्या | 1. बीकानेर 2. नागौर 3. चूरू |
| अधिकतम प्रतिशत (%) | 1. बांसवाड़ा — 76.4% 2. डूंगरपुर — 70.8% 3. प्रतापगढ़ — 63.4% |
| न्यूनतम प्रतिशत (%) | 1. बीकानेर — 0.3% 2. नागौर — 0.3% |
महत्वपूर्ण सीमा-रेखाएँ (Thresholds): 50% से अधिक जनजातीय जनसंख्या वाले जिले सिर्फ 3 हैं — बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़। जबकि 75% से अधिक (यानी बहुत सघन आदिवासी क्षेत्र) सिर्फ इन 3 के अलावा सिरोही व उदयपुर को मिलाकर कुल 5 जिलों में देखा जाता है — बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर। ये 5 जिले मिलकर राजस्थान का 'दक्षिणी आदिवासी बेल्ट' बनाते हैं।
| क्रम | जनजाति | विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | मीना | राजस्थान की सर्वाधिक संख्या वाली जनजाति — 43.46% |
| 2 | भील | दूसरे स्थान पर — प्रमुखतः दक्षिणी राजस्थान में |
| 3 | गरासिया | तीसरे स्थान पर — सिरोही-पाली-उदयपुर क्षेत्र में |
| 4 | सहरिया | PVTG — विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह |
याद रखने की सबसे आसान ट्रिक — मीना व भील जनजातियाँ मिलकर राजस्थान की कुल जनजातीय जनसंख्या का 90% से भी अधिक हिस्सा बनाती हैं। इसलिए अगर आप सिर्फ इन दो जनजातियों को अच्छे से समझ लें, तो राज्य की लगभग पूरी आदिवासी आबादी की तस्वीर साफ़ हो जाती है। राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित आधिकारिक सूची में कुल 12 अनुसूचित जनजातियाँ एवं उनकी उपजनजातियाँ शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं — मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, डामोर, कंजर, कथोड़ी, सांसी।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान का दक्षिणी आदिवासी बेल्ट (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर)
🏹 भील जनजाति मुख्य क्षेत्र: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूंबर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| उत्पत्ति स्थान (मान्यता) | हिमालय की तलहटी एवं विंध्याचल जंगल |
| सर्वाधिक भील आबादी वाला जिला | उदयपुर |
| भाषा | भीली एवं वागरी बोलियाँ |
| ऐतिहासिक उल्लेख | महाभारत में 'निषाद' कहा गया; रामायण में भी उल्लेख मिलता है |
ऐसे समझें — जैसे किसी कॉलोनी में पहले कुछ घर मिलकर एक 'गली' बनाते हैं, और कई गलियाँ मिलकर एक पूरा 'मोहल्ला' बनाती हैं, ठीक वैसे ही भील समाज में 8-10 घर मिलकर एक 'फला' (छोटी बस्ती) बनाते हैं, और 4-6 फला मिलकर एक बड़ा 'पाल' (बड़ा समूह) बनाते हैं। यह संरचना गरासिया जनजाति में भी लगभग इसी तरह पाई जाती है।
याद रखने की ट्रिक: भील = बिल (धनुष) → धनुर्विद्या में निपुण | कर्नल टॉड ने कहा = 'वनपुत्र' | निवास पद्धति = चिमाता (पहाड़ी खेती) + वालरा (स्थानांतरित खेती)।
🐟 मीना जनजाति मुख्य क्षेत्र: जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, उदयपुर, अलवर, सीकर, झुंझुनूं, बारां, कोटा, बूंदी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| जनसंख्या | राज्य में सर्वाधिक — 43.46% (राजस्थान की जनजातियों में प्रथम स्थान) |
| सर्वाधिक मीना आबादी वाला जिला | जयपुर |
| न्यूनतम मीना आबादी वाले जिले | जैसलमेर व बाड़मेर |
| भाषा | ढूंढाड़ी, मेवाड़ी एवं हाड़ौती बोलियाँ |
| विशेष पहचान | राजस्थान की सबसे शिक्षित व आर्थिक रूप से सशक्त (मज़बूत) जनजाति |
| प्रकार | क्षेत्र |
|---|---|
| जमींदार मीना | उदयपुर, हाड़ौती, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ |
| चौकीदार मीना | जयपुर, दौसा, अजमेर, करौली, सवाई माधोपुर |
याद रखने की ट्रिक: मीना = मत्स्य (मछली) से नाम | सर्वाधिक जनसंख्या = 43.46% | सर्वाधिक शिक्षित जनजाति | टैटू के लिए प्रसिद्ध | पटेल = मुखिया | चौरासी = पंचायत।
🌿 गरासिया जनजाति मुख्य क्षेत्र: सिरोही (आबू रोड, पिंडवारा), पाली (बाली), उदयपुर (गोगुंदा, कोटरा), जालौर, डूंगरपुर
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| जनसंख्या स्थान | राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा आदिवासी समूह |
| भाषा | गुजराती, भीली, मेवाड़ी एवं मारवाड़ी का मिश्रण |
| उत्पत्ति (मान्यता) | राजपूत वंश से माना जाता है |
| नाम का अर्थ | 'गरास' = भूमि / भूमि का एक छोटा टुकड़ा |
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| राजपूत गरासिया | राजपूतों से वंश (कुल) होने का दावा करते हैं |
| भोपा गरासिया | सामुदायिक धार्मिक अनुष्ठानों में पुरोहित जैसी भूमिका निभाते हैं |
| भील गरासिया | भील पुरुष व गरासिया महिला के विवाह से उत्पन्न संतान |
| Gameti Garasiya | गरासिया पुरुष व भील महिला के विवाह से उत्पन्न — 'गमेती' कहलाते हैं |
| विवाह प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| मोर बांधिया | फेरे लिए जाते हैं — यह मुख्य/पारंपरिक विवाह है |
| ताणना | फेरे नहीं होते, सिर्फ दापा (वधू मूल्य) चुकाया जाता है — 12 बछड़े + 12 रोल कपड़ा |
| पहरावणा | ब्राह्मण की भूमिका नहीं होती, सिर्फ नाम मात्र के फेरे लिए जाते हैं |
| मेलबो | दुल्हन को दूल्हे के घर छोड़ दिया जाता है |
| खेवणो | भागकर विवाह (Love Marriage) |
| सेवा | घर जवाई (Ghar Jamai) प्रथा |
याद रखने की ट्रिक: गरासिया = गरास (भूमि) | जनसंख्या में तीसरा स्थान | वेलार = घूमर नृत्य | मांखा रो मेलो = सबसे बड़ा मेला (सिरोही) | हरि भवरी = सामुदायिक खेती | नक्की झील = प्रमुख तीर्थ।
🌳 सहरिया जनजाति मुख्य क्षेत्र: बारां जिला — किशनगंज व शाहबाद तहसील; अन्य: कोटा, झालावाड़, सवाई माधोपुर
सबसे महत्वपूर्ण पहचान: सहरिया राजस्थान की एकमात्र 'विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह' (PVTG — Particularly Vulnerable Tribal Group) है — यानी यह जनजाति सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से इतनी पिछड़ी है कि इसे केंद्र सरकार द्वारा विशेष संरक्षण व प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए चुना गया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भाषा | हाड़ौती की एक स्थानीय बोली |
| आदि पुरुष (मूल पुरुष) | वाल्मीकि |
| कुल देवी | कौड़िया माता |
| कुल देवता | तेजाजी |
| नाम का अर्थ | संस्कृत शब्द 'शहर' (जंगल के अर्थ में प्रयुक्त) से — यानी 'जंगल से जुड़े लोग' |
अनोखी परंपरा: सहरिया जनजाति में पुरुष टैटू (गोदना) नहीं गुदवा सकते, जबकि महिलाएँ गोदना गुदवा सकती हैं — यह अधिकांश अन्य जनजातियों (जैसे मीना, गरासिया) से बिल्कुल उल्टा है। इसके अलावा, महिलाएँ घर से बाहर घूंघट नहीं निकालतीं, और दहेज प्रथा व श्राद्ध जैसी प्रथाएँ यहाँ प्रतिबंधित (वर्जित) हैं।
याद रखने की ट्रिक: सहरिया = शहर (जंगल) से नाम | PVTG (एकमात्र विशेष कमज़ोर जनजाति) | कोतवाल = मुखिया | सहरोल = गाँव | कौड़िया माता = कुल देवी | तेजाजी = कुल देवता | सीताबाड़ी = पवित्र स्थान।
🌾 दामोर जनजाति मुख्य क्षेत्र: सीमलवाड़ा (डूंगरपुर) — डामरिया क्षेत्र; अन्य: बांसवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भाषा | वागड़ी (भीली परिवार की बोली, राजस्थानी व गुजराती से प्रभावित); गुजराती भाषा का भी अधिक प्रयोग |
| मुखिया | मुखी |
याद रखने की ट्रिक: दामोर = सीमलवाड़ा (डूंगरपुर) क्षेत्र | मुखी = मुखिया | वागड़ी भाषा | घूमर + भवाई नृत्य | बेनेश्वर मेला | दापा + बहुविवाह प्रचलित।
🎪 कंजर जनजाति मुख्य क्षेत्र: हाड़ौती — कोटा, बूंदी, झालावाड़, भरतपुर, अजमेर
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुखिया | पटेल |
| आराध्य देव | चौथ माता, रक्त रंजी माता, हनुमान जी, काली माता, भवानी माता |
| नाम का अर्थ | फारसी शब्द 'घुमक्कड़' या 'जिप्सी' से |
| कानूनी इतिहास | 1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act) के तहत इन्हें 'अपराधी जनजाति' घोषित किया गया था; 1952 में इस अधिसूचना से हटाया गया |
ब्रिटिश शासन ने 1871 में एक कानून बनाकर कंजर जैसी कुछ घुमंतू (एक जगह से दूसरी जगह घूमने वाली) जनजातियों को बिना किसी ठोस सबूत के ही 'जन्मजात अपराधी' घोषित कर दिया था — सिर्फ इसलिए क्योंकि वे स्थायी रूप से एक जगह नहीं बसते थे और अलग जीवनशैली अपनाते थे। यह एक तरह का सामाजिक भेदभाव था। आज़ादी के बाद, भारत सरकार ने 1952 में इस अन्यायपूर्ण कानून को हटाकर इन जनजातियों को 'विमुक्त जनजाति' (De-notified Tribe) का दर्जा दिया।
याद रखने की ट्रिक: कंजर = जिप्सी/घुमक्कड़ | हाड़ौती क्षेत्र | पाती मांगना = अपराध से पहले आशीर्वाद | पटेल = मुखिया | 1871 = आपराधिक घोषित, 1952 = मुक्त (De-notified)।
🌲 कथोड़ी जनजाति मूल स्थान: महाराष्ट्र से; सर्वाधिक सांद्रता: उदयपुर
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| सर्वाधिक कथोड़ी आबादी वाला जिला | उदयपुर |
| मुखिया | नायक |
| पूजनीय देवता | डूंगर देवता, भारी माता, कंसारी माता |
| झोपड़े का नाम | खोलरा |
| नाम का कारण | खैर के पेड़ से 'कत्था' प्राप्त करने के कारण 'कथोड़ी' कहलाए |
याद रखने की ट्रिक: कथोड़ी = खैर का पेड़ → कत्था | उदयपुर = सर्वाधिक | नायक = मुखिया | खोलरा = घर | दूध निषिद्ध | गोदना प्रचलित लेकिन महिलाएँ गहने नहीं पहनतीं।
🦅 सांसी जनजाति मुख्य क्षेत्र: भरतपुर, अजमेर, जयपुर, सीकर, अलवर
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य देवता | भाकर बावजी (शपथ लेकर झूठ नहीं बोलते) |
| मुख्य देवी | सिकोदरी माता |
| कानूनी इतिहास | 1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम के तहत घोषित; 1952 में अनुसूचित जाति (SC) में वर्गीकृत |
| सबसे विशेष तथ्य | राजस्थान में सांसी जनजाति को अनुसूचित जनजाति (ST) नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है |
सबसे बड़ा भ्रम — ध्यान से याद रखें: यह अध्याय 'जनजातियों' (Tribes/ST) पर केंद्रित है, लेकिन सांसी को इसमें इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि यह मूल रूप से एक घुमंतू जनजातीय समुदाय है — फिर भी आधिकारिक तौर पर इसे ST नहीं बल्कि SC (अनुसूचित जाति) की श्रेणी में रखा गया है। परीक्षा में यह बहुत बार भ्रम पैदा करने वाला प्रश्न होता है, इसलिए ध्यान रखें: कंजर = विमुक्त जनजाति (De-notified, but not officially SC/ST-shifted), सांसी = SC में वर्गीकृत।
याद रखने की ट्रिक: सांसी = SC (अनुसूचित जाति) में वर्गीकृत | भाकर बावजी = मुख्य देवता | सिकोदरी माता = कुल देवी | कूकड़ी = विवाह रस्म | टांडा = बस्ती | माला + बीजा = दो प्रकार।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — भील, मीना, गरासिया, सहरिया, दामोर, कंजर, कथोड़ी व सांसी जनजातियों के प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति
नीचे दी गई तालिका में सभी 8 प्रमुख जनजातियों की सबसे ज़रूरी पहचान एक साथ दी गई है, ताकि रिवीज़न (पुनरावृत्ति) करते समय आप एक ही नज़र में सब कुछ याद कर सकें।
| जनजाति | मुखिया | घर | बस्ती | विशेष पहचान |
|---|---|---|---|---|
| भील | गमेती/पटेल | कू/टापरा | फला (8-10) → पाल (4-6 फला) | दापा प्रथा, गवरी उत्सव |
| मीना | पटेल | — | चौरासी (पंचायत) | सर्वाधिक जनसंख्या — 43.46% |
| गरासिया | पालवी | घेर | फलिया → फला → पाल | वेलार नृत्य, हरि भवरी (सामुदायिक खेती) |
| सहरिया | कोतवाल | गोपणा/टोपा | सहरोल | PVTG, पुरुष टैटू नहीं गुदवा सकते |
| दामोर | मुखी | — | डामरिया क्षेत्र | वागड़ी भाषा |
| कंजर | पटेल | — | — | पाती मांगना प्रथा |
| कथोड़ी | नायक | खोलरा | — | दूध निषिद्ध, कत्था बनाना |
| सांसी | — | — | टांडा | SC में वर्गीकृत, कूकड़ी रस्म |
| संस्था | स्थापना | मुख्यालय | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| राजस (RAJAS) — राजस्थान जनजातीय क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ | 27 मार्च 1976 | उदयपुर | आदिवासी क्षेत्रों में कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाना, साहूकारों के शोषण से बचाव, उपभोक्ता संरक्षण |
| माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान | 2 जनवरी 1964 | उदयपुर | जनजातियों का निरंतर विकास, मुख्यधारा में लाना, प्रशिक्षण एवं शोध (अनुसंधान) |
| TADA (ट्राइबल एरियाज़ डेवलपमेंट एजेंसी) | 1979 (शुरुआत) | — | बिखरी हुई जनजातियों के लिए विशेष विकास कार्यक्रमों का संचालन |
| अनुजा निगम | — | — | राजस्थान अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम — ऋण एवं अनुदान देकर जीवन स्तर सुधारना |
| जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) | — | — | भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची के अनुच्छेद 244(1) के तहत गठित — जनजातीय कल्याण, विकास व संरक्षण पर राज्य सरकार को सलाह देना |
| राजस्थान अनुसूचित जनजाति आयोग | 2016 | — | जनजातीय क्षेत्र विकास विभाग के तहत, संविधान के अनुच्छेद 46 के अनुसार पिछड़ेपन दूर करना |
भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची (Schedule) खासतौर पर जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए बनाई गई है। अनुच्छेद 244(1) राज्यपाल को जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष नियम बनाने की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 46 सरकार को यह ज़िम्मेदारी देता है कि वह अनुसूचित जाति व जनजाति जैसे कमज़ोर वर्गों की शिक्षा व आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए तथा उनका सामाजिक शोषण रोके — यही मूल भावना जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) व राजस्थान अनुसूचित जनजाति आयोग जैसी संस्थाओं के गठन के पीछे है।
| योजना/कार्यक्रम | मुख्य विवरण |
|---|---|
| TADP (जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम) | शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढाँचे का एकीकृत (Integrated) विकास |
| सहरिया विकास कार्यक्रम | सहरिया PVTG के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएँ |
| राजस्थान कौशल विकास कार्यक्रम | आदिवासी युवाओं को कौशल प्रशिक्षण व रोज़गार के अवसर |
| सांस्कृतिक विरासत संरक्षण कार्यक्रम | जनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं (नृत्य, भाषा, त्यौहार) का संरक्षण |
| STDF (अनुसूचित जनजाति विकास कोष) | जनजातीय विकास के लिए समर्पित विशेष वित्तीय कोष |
| योजना | मुख्य विवरण |
|---|---|
| कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना | मेधावी (होनहार) अनुसूचित जनजाति की लड़कियों को स्कूटी देकर शिक्षा को प्रोत्साहन |
| सीएम लाडो प्रोत्साहन योजना (पूर्व नाम: मुख्यमंत्री राजश्री योजना) | ST बालिकाओं को जन्म से कक्षा 12वीं तक ₹1,50,000 की वित्तीय सहायता; स्वास्थ्य जाँच व कौशल विकास भी शामिल |
| महिला उद्यमिता योजना | ST महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने हेतु ₹5 लाख तक का ऋण; लक्ष्य — 5 वर्षों में 5 लाख लाभार्थी |
| अनुप्रति कोचिंग योजना | प्रतियोगी परीक्षाओं (RAS, SSC आदि) की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा |
| समर्थ योजना (कौशल विकास) | पायलट प्रोजेक्ट — उदयपुर व जोधपुर में शुरू, अब राज्य मिशन के रूप में विस्तारित |
जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण नई पहलें सामने आई हैं।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) को 15 नवंबर 2023 को 'जनजातीय गौरव दिवस' के अवसर पर शुरू किया गया था। इस योजना का कुल बजटीय परिव्यय (2023-24 से 2025-26 तक की अवधि के लिए) ₹24,104 करोड़ है, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹15,336 करोड़ तथा राज्यों का हिस्सा ₹8,768 करोड़ है। इस राशि का लगभग 80% हिस्सा सिर्फ घरों (आवास) व सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जा रहा है। यह योजना खासतौर पर PVTG (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) श्रेणी की जनजातियों के लिए बनाई गई है — और चूँकि राजस्थान की सहरिया जनजाति ही राज्य की एकमात्र PVTG है, इसलिए बारां ज़िले के किशनगंज-शाहबाद क्षेत्र की सहरिया बस्तियों को इस योजना से सीधा लाभ मिल रहा है, जिसमें पक्के घर, सड़क संपर्क, बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाओं में तेज़ी से सुधार शामिल है।
11 फरवरी 2026 को उप-मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत राजस्थान बजट 2026-27 ('विकसित राजस्थान @2047' के विज़न पर आधारित) में भी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष आवंटन (SC/ST Sub-Plan) जारी रखा गया है, जिसमें शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, आवास व रोज़गार पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह दिखाता है कि जनजातीय कल्याण राज्य सरकार की दीर्घकालिक (Long-term) प्राथमिकताओं में से एक बना हुआ है, न कि सिर्फ किसी एक वर्ष की घोषणा।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — PM-JANMAN योजना के अंतर्गत बारां जिले की सहरिया PVTG बस्तियों की स्थिति
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान में सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या (%) | मीना — 43.46% |
| राजस्थान में जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत (2011) | 13.48% |
| जनजाति जनसंख्या में भारत में राजस्थान का स्थान | चौथा (मध्यप्रदेश → महाराष्ट्र → ओडिशा → राजस्थान) |
| सर्वाधिक जनजाति — जिला (संख्या में) | उदयपुर (15.25 लाख) |
| सर्वाधिक जनजाति — जिला (% में) | बांसवाड़ा (76.4%) |
| राजस्थान की एकमात्र PVTG जनजाति | सहरिया |
| दूध न पीने वाली जनजाति | कथोड़ी |
| टैटू के लिए सबसे प्रसिद्ध जनजाति | मीना जनजाति |
| सबसे शिक्षित जनजाति | मीना |
| बेनेश्वर मेला — किन नदियों के संगम पर | माही + सोम + जाखम |
| भीलों का घर (व्यक्तिगत) | कू / टापरा |
| गरासिया का सबसे बड़ा मेला | मांखा रो मेलो (सिरोही) |
| सहरिया का पवित्र स्थान | सीताबाड़ी मेला (बारां) |
| कंजर की अनूठी परंपरा | पाती मांगना (अपराध से पहले आशीर्वाद) |
| सांसी का वर्गीकरण (SC/ST) | SC (अनुसूचित जाति) |
| माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान की स्थापना | 2 जनवरी 1964 |
| राजस (RAJAS) की स्थापना | 27 मार्च 1976 |
| PM-JANMAN योजना की शुरुआत | 15 नवंबर 2023 (जनजातीय गौरव दिवस) |
Q1. राजस्थान में सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या किस जिले में है? [RAS Pre. 2021] Q2. राजस्थान में जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत सर्वाधिक किस जिले में है? [RAS Pre. 2018] Q3. राजस्थान की PVTG (विशेष कमज़ोर जनजातीय समूह) कौन है? [RAS Pre. 2023] Q4. भील जनजाति में तलाक को क्या कहते हैं? [RAS Pre. 2016] Q5. गरासिया जनजाति में 'वेलार' क्या है? [RAS Pre. 2019] Q6. कंजर जनजाति की 'पाती मांगना' प्रथा किससे संबंधित है? [RAS Pre. 2020] Q7. बेनेश्वर मेला किन नदियों के संगम पर लगता है? [RAS Pre. 2014] Q8. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान की स्थापना कब हुई? [RAS Pre. 2022]