🏕️ अध्याय 11/14 — राजस्थान भूगोल

जनजातियाँ

Tribes of Rajasthan | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय — राजस्थान की जनजातियाँ
  2. भील जनजाति 🏹
  3. मीना जनजाति 🐟
  4. गरासिया जनजाति 🌿
  5. सहरिया जनजाति (PVTG) 🌳
  6. दामोर जनजाति 🌾
  7. कंजर जनजाति 🎪
  8. कथोड़ी जनजाति 🌲
  9. सांसी जनजाति 🦅
  10. जनजातियों की त्वरित संदर्भ तुलना तालिका
  11. जनजाति कल्याण हेतु प्रमुख संस्थाएँ
  12. जनजाति कल्याण की प्रमुख सरकारी योजनाएँ (राज्य बजट 2025-26)
  13. नवीनतम अपडेट 2025-26 (PM-JANMAN एवं बजट 2026-27)
  14. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?

ज़रा सोचिए — राजस्थान के हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी जनजाति (आदिवासी समुदाय) से है, यानी राज्य की लगभग 92 लाख से भी ज़्यादा आबादी जनजातीय है। इनमें सबसे दिलचस्प है 'मीना' जनजाति — जिनका नाम संस्कृत के 'मत्स्य' (मछली) शब्द से बना है, और मान्यता है कि इनकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के 'मीन अवतार' से हुई। वहीं दूसरी ओर 'भील' शब्द द्रविड़ भाषा के 'बिल' यानी 'धनुष' से बना है — क्योंकि भील धनुर्विद्या में इतने निपुण थे कि कर्नल टॉड ने उन्हें 'वनपुत्र' की उपाधि दी। और क्या आपने कभी सुना है कि किसी जनजाति में महिलाएँ तो गोदना (टैटू) गुदवा सकती हैं, लेकिन पुरुष नहीं? यह है सहरिया जनजाति की अनोखी परंपरा — जो राजस्थान की एकमात्र 'PVTG' (Particularly Vulnerable Tribal Group यानी विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) है, और जिसे बारां ज़िले के किशनगंज-शाहबाद क्षेत्र में सबसे ज़्यादा देखा जाता है। इस अध्याय में हम राजस्थान की सभी प्रमुख जनजातियों — उनकी उत्पत्ति, रीति-रिवाज़, विवाह प्रथाएँ, त्यौहार और उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं को बारीकी से समझेंगे, ताकि आपको हर एक जनजाति की पहचान बिल्कुल साफ़ हो जाए।

1परिचय — राजस्थान की जनजातियाँ

सामाजिक तथा आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वे लोग, जो समाज की मुख्य धारा (Mainstream) से अलग अपनी विशिष्ट परंपराओं व जीवनशैली के साथ रहते हैं, 'जनजाति' (Tribe) कहलाते हैं। भारत के संविधान में इन्हें 'अनुसूचित जनजाति' (Scheduled Tribe — ST) कहा जाता है, और इन्हें विशेष सुरक्षा व सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं ताकि ये भी समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें।

💡 जनजाति को आसान भाषा में कैसे समझें?

ऐसे समझें — जैसे किसी बड़े शहर में अलग-अलग मोहल्लों की अपनी अलग परंपराएँ होती हैं, वैसे ही जनजातियाँ सदियों से जंगलों, पहाड़ों व दूरदराज़ के इलाकों में अपनी खुद की भाषा, पहनावा, त्यौहार व सामाजिक नियमों के साथ रहती आई हैं। चूँकि ये मुख्य शहरी/कृषि समाज से कटी हुई थीं, इसलिए शिक्षा व आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण ये आर्थिक रूप से पिछड़ गईं — और यही वजह है कि सरकार इन्हें संविधान के तहत विशेष संरक्षण व आरक्षण देती है।

जनसंख्या सांख्यिकी (जनगणना 2011)

विषयआँकड़ा
राजस्थान की आदिवासी आबादी (ST जनसंख्या)92.39 लाख (92,38,534)
कुल जनसंख्या का प्रतिशत13.48% (लगभग 13.5%)
2001-2011 दशक में वृद्धि दर30.2%
जनजातीय जनसंख्या में देश में स्थानचौथा स्थान (क्रम: मध्यप्रदेश → महाराष्ट्र → ओडिशा → राजस्थान)
ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाली आदिवासी आबादी95%
अनुसूचित जनजातियों में लिंगानुपात948 (राज्य के औसत 928 से बेहतर)

जिलेवार वितरण — अधिकतम एवं न्यूनतम

श्रेणीशीर्ष 3 जिले
अधिकतम संख्या (लाख में)1. उदयपुर (15.25 लाख) 2. बांसवाड़ा 3. डूंगरपुर
न्यूनतम संख्या1. बीकानेर 2. नागौर 3. चूरू
अधिकतम प्रतिशत (%)1. बांसवाड़ा — 76.4% 2. डूंगरपुर — 70.8% 3. प्रतापगढ़ — 63.4%
न्यूनतम प्रतिशत (%)1. बीकानेर — 0.3% 2. नागौर — 0.3%

महत्वपूर्ण सीमा-रेखाएँ (Thresholds): 50% से अधिक जनजातीय जनसंख्या वाले जिले सिर्फ 3 हैं — बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़। जबकि 75% से अधिक (यानी बहुत सघन आदिवासी क्षेत्र) सिर्फ इन 3 के अलावा सिरोही व उदयपुर को मिलाकर कुल 5 जिलों में देखा जाता है — बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर। ये 5 जिले मिलकर राजस्थान का 'दक्षिणी आदिवासी बेल्ट' बनाते हैं।

जनजातियों का आकार क्रम (जनसंख्या के अनुसार)

क्रमजनजातिविशेषता
1मीनाराजस्थान की सर्वाधिक संख्या वाली जनजाति — 43.46%
2भीलदूसरे स्थान पर — प्रमुखतः दक्षिणी राजस्थान में
3गरासियातीसरे स्थान पर — सिरोही-पाली-उदयपुर क्षेत्र में
4सहरियाPVTG — विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह
💡 मीना + भील = 90% से ज़्यादा

याद रखने की सबसे आसान ट्रिक — मीना व भील जनजातियाँ मिलकर राजस्थान की कुल जनजातीय जनसंख्या का 90% से भी अधिक हिस्सा बनाती हैं। इसलिए अगर आप सिर्फ इन दो जनजातियों को अच्छे से समझ लें, तो राज्य की लगभग पूरी आदिवासी आबादी की तस्वीर साफ़ हो जाती है। राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित आधिकारिक सूची में कुल 12 अनुसूचित जनजातियाँ एवं उनकी उपजनजातियाँ शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं — मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, डामोर, कंजर, कथोड़ी, सांसी।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान का दक्षिणी आदिवासी बेल्ट (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर)

2भील जनजाति 🏹

🏹 भील जनजाति मुख्य क्षेत्र: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूंबर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़

विवरणजानकारी
उत्पत्ति स्थान (मान्यता)हिमालय की तलहटी एवं विंध्याचल जंगल
सर्वाधिक भील आबादी वाला जिलाउदयपुर
भाषाभीली एवं वागरी बोलियाँ
ऐतिहासिक उल्लेखमहाभारत में 'निषाद' कहा गया; रामायण में भी उल्लेख मिलता है

नाम की व्युत्पत्ति एवं ऐतिहासिक तथ्य

पर्यावास, आवास एवं राजनीतिक व्यवस्था

💡 फला और पाल — बस्ती की संरचना को याद रखने का तरीका

ऐसे समझें — जैसे किसी कॉलोनी में पहले कुछ घर मिलकर एक 'गली' बनाते हैं, और कई गलियाँ मिलकर एक पूरा 'मोहल्ला' बनाती हैं, ठीक वैसे ही भील समाज में 8-10 घर मिलकर एक 'फला' (छोटी बस्ती) बनाते हैं, और 4-6 फला मिलकर एक बड़ा 'पाल' (बड़ा समूह) बनाते हैं। यह संरचना गरासिया जनजाति में भी लगभग इसी तरह पाई जाती है।

सामाजिक जीवन एवं विवाह प्रथाएँ

सांस्कृतिक प्रथाएँ, पोशाक एवं धार्मिक परंपराएँ

आर्थिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: भील = बिल (धनुष) → धनुर्विद्या में निपुण | कर्नल टॉड ने कहा = 'वनपुत्र' | निवास पद्धति = चिमाता (पहाड़ी खेती) + वालरा (स्थानांतरित खेती)।

3मीना जनजाति 🐟

🐟 मीना जनजाति मुख्य क्षेत्र: जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, उदयपुर, अलवर, सीकर, झुंझुनूं, बारां, कोटा, बूंदी

विवरणजानकारी
जनसंख्याराज्य में सर्वाधिक — 43.46% (राजस्थान की जनजातियों में प्रथम स्थान)
सर्वाधिक मीना आबादी वाला जिलाजयपुर
न्यूनतम मीना आबादी वाले जिलेजैसलमेर व बाड़मेर
भाषाढूंढाड़ी, मेवाड़ी एवं हाड़ौती बोलियाँ
विशेष पहचानराजस्थान की सबसे शिक्षित व आर्थिक रूप से सशक्त (मज़बूत) जनजाति

नाम की व्युत्पत्ति एवं उत्पत्ति मान्यताएँ

प्रकार एवं उपसमूह

प्रकारक्षेत्र
जमींदार मीनाउदयपुर, हाड़ौती, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़
चौकीदार मीनाजयपुर, दौसा, अजमेर, करौली, सवाई माधोपुर

सामाजिक जीवन, ग्राम संरचना एवं विवाह प्रथाएँ

सांस्कृतिक जीवन, पोशाक एवं धार्मिक मान्यताएँ

आर्थिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: मीना = मत्स्य (मछली) से नाम | सर्वाधिक जनसंख्या = 43.46% | सर्वाधिक शिक्षित जनजाति | टैटू के लिए प्रसिद्ध | पटेल = मुखिया | चौरासी = पंचायत।

4गरासिया जनजाति 🌿

🌿 गरासिया जनजाति मुख्य क्षेत्र: सिरोही (आबू रोड, पिंडवारा), पाली (बाली), उदयपुर (गोगुंदा, कोटरा), जालौर, डूंगरपुर

विवरणजानकारी
जनसंख्या स्थानराजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा आदिवासी समूह
भाषागुजराती, भीली, मेवाड़ी एवं मारवाड़ी का मिश्रण
उत्पत्ति (मान्यता)राजपूत वंश से माना जाता है
नाम का अर्थ'गरास' = भूमि / भूमि का एक छोटा टुकड़ा

प्रकार, उपसमूह एवं सामाजिक खंड

प्रकारविशेषता
राजपूत गरासियाराजपूतों से वंश (कुल) होने का दावा करते हैं
भोपा गरासियासामुदायिक धार्मिक अनुष्ठानों में पुरोहित जैसी भूमिका निभाते हैं
भील गरासियाभील पुरुष व गरासिया महिला के विवाह से उत्पन्न संतान
Gameti Garasiyaगरासिया पुरुष व भील महिला के विवाह से उत्पन्न — 'गमेती' कहलाते हैं

गाँव, आवास एवं विवाह प्रथाएँ

विवाह प्रकारविशेषता
मोर बांधियाफेरे लिए जाते हैं — यह मुख्य/पारंपरिक विवाह है
ताणनाफेरे नहीं होते, सिर्फ दापा (वधू मूल्य) चुकाया जाता है — 12 बछड़े + 12 रोल कपड़ा
पहरावणाब्राह्मण की भूमिका नहीं होती, सिर्फ नाम मात्र के फेरे लिए जाते हैं
मेलबोदुल्हन को दूल्हे के घर छोड़ दिया जाता है
खेवणोभागकर विवाह (Love Marriage)
सेवाघर जवाई (Ghar Jamai) प्रथा

सांस्कृतिक जीवन, मेले, पोशाक एवं धार्मिक मान्यताएँ

आर्थिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: गरासिया = गरास (भूमि) | जनसंख्या में तीसरा स्थान | वेलार = घूमर नृत्य | मांखा रो मेलो = सबसे बड़ा मेला (सिरोही) | हरि भवरी = सामुदायिक खेती | नक्की झील = प्रमुख तीर्थ।

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5सहरिया जनजाति (PVTG) 🌳

🌳 सहरिया जनजाति मुख्य क्षेत्र: बारां जिला — किशनगंज व शाहबाद तहसील; अन्य: कोटा, झालावाड़, सवाई माधोपुर

सबसे महत्वपूर्ण पहचान: सहरिया राजस्थान की एकमात्र 'विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह' (PVTG — Particularly Vulnerable Tribal Group) है — यानी यह जनजाति सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से इतनी पिछड़ी है कि इसे केंद्र सरकार द्वारा विशेष संरक्षण व प्राथमिकता वाली योजनाओं के लिए चुना गया है।

विवरणजानकारी
भाषाहाड़ौती की एक स्थानीय बोली
आदि पुरुष (मूल पुरुष)वाल्मीकि
कुल देवीकौड़िया माता
कुल देवतातेजाजी
नाम का अर्थसंस्कृत शब्द 'शहर' (जंगल के अर्थ में प्रयुक्त) से — यानी 'जंगल से जुड़े लोग'

ग्राम संरचना एवं सामाजिक जीवन

अनोखी परंपरा: सहरिया जनजाति में पुरुष टैटू (गोदना) नहीं गुदवा सकते, जबकि महिलाएँ गोदना गुदवा सकती हैं — यह अधिकांश अन्य जनजातियों (जैसे मीना, गरासिया) से बिल्कुल उल्टा है। इसके अलावा, महिलाएँ घर से बाहर घूंघट नहीं निकालतीं, और दहेज प्रथा व श्राद्ध जैसी प्रथाएँ यहाँ प्रतिबंधित (वर्जित) हैं।

संस्कृति, धार्मिक मान्यताएँ एवं आर्थिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: सहरिया = शहर (जंगल) से नाम | PVTG (एकमात्र विशेष कमज़ोर जनजाति) | कोतवाल = मुखिया | सहरोल = गाँव | कौड़िया माता = कुल देवी | तेजाजी = कुल देवता | सीताबाड़ी = पवित्र स्थान।

6दामोर जनजाति 🌾

🌾 दामोर जनजाति मुख्य क्षेत्र: सीमलवाड़ा (डूंगरपुर) — डामरिया क्षेत्र; अन्य: बांसवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़

विवरणजानकारी
भाषावागड़ी (भीली परिवार की बोली, राजस्थानी व गुजराती से प्रभावित); गुजराती भाषा का भी अधिक प्रयोग
मुखियामुखी

आवास, सामाजिक संरचना एवं सांस्कृतिक जीवन

आर्थिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: दामोर = सीमलवाड़ा (डूंगरपुर) क्षेत्र | मुखी = मुखिया | वागड़ी भाषा | घूमर + भवाई नृत्य | बेनेश्वर मेला | दापा + बहुविवाह प्रचलित।

7कंजर जनजाति 🎪

🎪 कंजर जनजाति मुख्य क्षेत्र: हाड़ौती — कोटा, बूंदी, झालावाड़, भरतपुर, अजमेर

विवरणजानकारी
मुखियापटेल
आराध्य देवचौथ माता, रक्त रंजी माता, हनुमान जी, काली माता, भवानी माता
नाम का अर्थफारसी शब्द 'घुमक्कड़' या 'जिप्सी' से
कानूनी इतिहास1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act) के तहत इन्हें 'अपराधी जनजाति' घोषित किया गया था; 1952 में इस अधिसूचना से हटाया गया
💡 'अपराधी जनजाति' का लेबल — एक ऐतिहासिक अन्याय

ब्रिटिश शासन ने 1871 में एक कानून बनाकर कंजर जैसी कुछ घुमंतू (एक जगह से दूसरी जगह घूमने वाली) जनजातियों को बिना किसी ठोस सबूत के ही 'जन्मजात अपराधी' घोषित कर दिया था — सिर्फ इसलिए क्योंकि वे स्थायी रूप से एक जगह नहीं बसते थे और अलग जीवनशैली अपनाते थे। यह एक तरह का सामाजिक भेदभाव था। आज़ादी के बाद, भारत सरकार ने 1952 में इस अन्यायपूर्ण कानून को हटाकर इन जनजातियों को 'विमुक्त जनजाति' (De-notified Tribe) का दर्जा दिया।

विशेष प्रथाएँ, आवास एवं आर्थिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: कंजर = जिप्सी/घुमक्कड़ | हाड़ौती क्षेत्र | पाती मांगना = अपराध से पहले आशीर्वाद | पटेल = मुखिया | 1871 = आपराधिक घोषित, 1952 = मुक्त (De-notified)।

8कथोड़ी जनजाति 🌲

🌲 कथोड़ी जनजाति मूल स्थान: महाराष्ट्र से; सर्वाधिक सांद्रता: उदयपुर

विवरणजानकारी
सर्वाधिक कथोड़ी आबादी वाला जिलाउदयपुर
मुखियानायक
पूजनीय देवताडूंगर देवता, भारी माता, कंसारी माता
झोपड़े का नामखोलरा
नाम का कारणखैर के पेड़ से 'कत्था' प्राप्त करने के कारण 'कथोड़ी' कहलाए

विशेष प्रथाएँ एवं सामाजिक जीवन

याद रखने की ट्रिक: कथोड़ी = खैर का पेड़ → कत्था | उदयपुर = सर्वाधिक | नायक = मुखिया | खोलरा = घर | दूध निषिद्ध | गोदना प्रचलित लेकिन महिलाएँ गहने नहीं पहनतीं।

9सांसी जनजाति 🦅

🦅 सांसी जनजाति मुख्य क्षेत्र: भरतपुर, अजमेर, जयपुर, सीकर, अलवर

विवरणजानकारी
मुख्य देवताभाकर बावजी (शपथ लेकर झूठ नहीं बोलते)
मुख्य देवीसिकोदरी माता
कानूनी इतिहास1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम के तहत घोषित; 1952 में अनुसूचित जाति (SC) में वर्गीकृत
सबसे विशेष तथ्यराजस्थान में सांसी जनजाति को अनुसूचित जनजाति (ST) नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है

सबसे बड़ा भ्रम — ध्यान से याद रखें: यह अध्याय 'जनजातियों' (Tribes/ST) पर केंद्रित है, लेकिन सांसी को इसमें इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि यह मूल रूप से एक घुमंतू जनजातीय समुदाय है — फिर भी आधिकारिक तौर पर इसे ST नहीं बल्कि SC (अनुसूचित जाति) की श्रेणी में रखा गया है। परीक्षा में यह बहुत बार भ्रम पैदा करने वाला प्रश्न होता है, इसलिए ध्यान रखें: कंजर = विमुक्त जनजाति (De-notified, but not officially SC/ST-shifted), सांसी = SC में वर्गीकृत।

प्रकार एवं सामाजिक संरचना

सांस्कृतिक जीवन एवं आर्थिक गतिविधियाँ

याद रखने की ट्रिक: सांसी = SC (अनुसूचित जाति) में वर्गीकृत | भाकर बावजी = मुख्य देवता | सिकोदरी माता = कुल देवी | कूकड़ी = विवाह रस्म | टांडा = बस्ती | माला + बीजा = दो प्रकार।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — भील, मीना, गरासिया, सहरिया, दामोर, कंजर, कथोड़ी व सांसी जनजातियों के प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति

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10जनजातियों की त्वरित संदर्भ तुलना तालिका

नीचे दी गई तालिका में सभी 8 प्रमुख जनजातियों की सबसे ज़रूरी पहचान एक साथ दी गई है, ताकि रिवीज़न (पुनरावृत्ति) करते समय आप एक ही नज़र में सब कुछ याद कर सकें।

जनजातिमुखियाघरबस्तीविशेष पहचान
भीलगमेती/पटेलकू/टापराफला (8-10) → पाल (4-6 फला)दापा प्रथा, गवरी उत्सव
मीनापटेलचौरासी (पंचायत)सर्वाधिक जनसंख्या — 43.46%
गरासियापालवीघेरफलिया → फला → पालवेलार नृत्य, हरि भवरी (सामुदायिक खेती)
सहरियाकोतवालगोपणा/टोपासहरोलPVTG, पुरुष टैटू नहीं गुदवा सकते
दामोरमुखीडामरिया क्षेत्रवागड़ी भाषा
कंजरपटेलपाती मांगना प्रथा
कथोड़ीनायकखोलरादूध निषिद्ध, कत्था बनाना
सांसीटांडाSC में वर्गीकृत, कूकड़ी रस्म

11जनजाति कल्याण हेतु प्रमुख संस्थाएँ

संस्थास्थापनामुख्यालयउद्देश्य
राजस (RAJAS) — राजस्थान जनजातीय क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ27 मार्च 1976उदयपुरआदिवासी क्षेत्रों में कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाना, साहूकारों के शोषण से बचाव, उपभोक्ता संरक्षण
माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान2 जनवरी 1964उदयपुरजनजातियों का निरंतर विकास, मुख्यधारा में लाना, प्रशिक्षण एवं शोध (अनुसंधान)
TADA (ट्राइबल एरियाज़ डेवलपमेंट एजेंसी)1979 (शुरुआत)बिखरी हुई जनजातियों के लिए विशेष विकास कार्यक्रमों का संचालन
अनुजा निगमराजस्थान अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास सहकारी निगम — ऋण एवं अनुदान देकर जीवन स्तर सुधारना
जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC)भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची के अनुच्छेद 244(1) के तहत गठित — जनजातीय कल्याण, विकास व संरक्षण पर राज्य सरकार को सलाह देना
राजस्थान अनुसूचित जनजाति आयोग2016जनजातीय क्षेत्र विकास विभाग के तहत, संविधान के अनुच्छेद 46 के अनुसार पिछड़ेपन दूर करना
💡 संविधान के अनुच्छेद 244(1) व 46 को आसान भाषा में समझें

भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची (Schedule) खासतौर पर जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए बनाई गई है। अनुच्छेद 244(1) राज्यपाल को जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष नियम बनाने की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 46 सरकार को यह ज़िम्मेदारी देता है कि वह अनुसूचित जाति व जनजाति जैसे कमज़ोर वर्गों की शिक्षा व आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए तथा उनका सामाजिक शोषण रोके — यही मूल भावना जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) व राजस्थान अनुसूचित जनजाति आयोग जैसी संस्थाओं के गठन के पीछे है।

12जनजाति कल्याण की प्रमुख सरकारी योजनाएँ (राज्य बजट 2025-26)

योजना/कार्यक्रममुख्य विवरण
TADP (जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम)शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढाँचे का एकीकृत (Integrated) विकास
सहरिया विकास कार्यक्रमसहरिया PVTG के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएँ
राजस्थान कौशल विकास कार्यक्रमआदिवासी युवाओं को कौशल प्रशिक्षण व रोज़गार के अवसर
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण कार्यक्रमजनजातीय सांस्कृतिक परंपराओं (नृत्य, भाषा, त्यौहार) का संरक्षण
STDF (अनुसूचित जनजाति विकास कोष)जनजातीय विकास के लिए समर्पित विशेष वित्तीय कोष

वित्तीय प्रावधान (राज्य बजट 2025-26)

शिक्षा एवं महिला सशक्तीकरण योजनाएँ

योजनामुख्य विवरण
कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजनामेधावी (होनहार) अनुसूचित जनजाति की लड़कियों को स्कूटी देकर शिक्षा को प्रोत्साहन
सीएम लाडो प्रोत्साहन योजना (पूर्व नाम: मुख्यमंत्री राजश्री योजना)ST बालिकाओं को जन्म से कक्षा 12वीं तक ₹1,50,000 की वित्तीय सहायता; स्वास्थ्य जाँच व कौशल विकास भी शामिल
महिला उद्यमिता योजनाST महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने हेतु ₹5 लाख तक का ऋण; लक्ष्य — 5 वर्षों में 5 लाख लाभार्थी
अनुप्रति कोचिंग योजनाप्रतियोगी परीक्षाओं (RAS, SSC आदि) की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग सुविधा
समर्थ योजना (कौशल विकास)पायलट प्रोजेक्ट — उदयपुर व जोधपुर में शुरू, अब राज्य मिशन के रूप में विस्तारित

स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम

13नवीनतम अपडेट 2025-26 (PM-JANMAN एवं बजट 2026-27)

जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण नई पहलें सामने आई हैं।

💡 PM-JANMAN योजना — सहरिया जैसी PVTG जनजातियों के लिए ऐतिहासिक कदम

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) को 15 नवंबर 2023 को 'जनजातीय गौरव दिवस' के अवसर पर शुरू किया गया था। इस योजना का कुल बजटीय परिव्यय (2023-24 से 2025-26 तक की अवधि के लिए) ₹24,104 करोड़ है, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹15,336 करोड़ तथा राज्यों का हिस्सा ₹8,768 करोड़ है। इस राशि का लगभग 80% हिस्सा सिर्फ घरों (आवास) व सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जा रहा है। यह योजना खासतौर पर PVTG (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) श्रेणी की जनजातियों के लिए बनाई गई है — और चूँकि राजस्थान की सहरिया जनजाति ही राज्य की एकमात्र PVTG है, इसलिए बारां ज़िले के किशनगंज-शाहबाद क्षेत्र की सहरिया बस्तियों को इस योजना से सीधा लाभ मिल रहा है, जिसमें पक्के घर, सड़क संपर्क, बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाओं में तेज़ी से सुधार शामिल है।

💡 राजस्थान बजट 2026-27 में SC/ST सब-प्लान

11 फरवरी 2026 को उप-मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत राजस्थान बजट 2026-27 ('विकसित राजस्थान @2047' के विज़न पर आधारित) में भी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष आवंटन (SC/ST Sub-Plan) जारी रखा गया है, जिसमें शिक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, आवास व रोज़गार पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह दिखाता है कि जनजातीय कल्याण राज्य सरकार की दीर्घकालिक (Long-term) प्राथमिकताओं में से एक बना हुआ है, न कि सिर्फ किसी एक वर्ष की घोषणा।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — PM-JANMAN योजना के अंतर्गत बारां जिले की सहरिया PVTG बस्तियों की स्थिति

14त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

14.1 Most Important Facts

तथ्यउत्तर
राजस्थान में सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या (%)मीना — 43.46%
राजस्थान में जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत (2011)13.48%
जनजाति जनसंख्या में भारत में राजस्थान का स्थानचौथा (मध्यप्रदेश → महाराष्ट्र → ओडिशा → राजस्थान)
सर्वाधिक जनजाति — जिला (संख्या में)उदयपुर (15.25 लाख)
सर्वाधिक जनजाति — जिला (% में)बांसवाड़ा (76.4%)
राजस्थान की एकमात्र PVTG जनजातिसहरिया
दूध न पीने वाली जनजातिकथोड़ी
टैटू के लिए सबसे प्रसिद्ध जनजातिमीना जनजाति
सबसे शिक्षित जनजातिमीना
बेनेश्वर मेला — किन नदियों के संगम परमाही + सोम + जाखम
भीलों का घर (व्यक्तिगत)कू / टापरा
गरासिया का सबसे बड़ा मेलामांखा रो मेलो (सिरोही)
सहरिया का पवित्र स्थानसीताबाड़ी मेला (बारां)
कंजर की अनूठी परंपरापाती मांगना (अपराध से पहले आशीर्वाद)
सांसी का वर्गीकरण (SC/ST)SC (अनुसूचित जाति)
माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान की स्थापना2 जनवरी 1964
राजस (RAJAS) की स्थापना27 मार्च 1976
PM-JANMAN योजना की शुरुआत15 नवंबर 2023 (जनजातीय गौरव दिवस)

Memory Tricks (याद रखने की ट्रिक्स)

🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. राजस्थान की जनजातीय आबादी (92.39 लाख, 13.48%) देश में चौथे स्थान पर है, और मीना+भील मिलकर इसका 90% से भी अधिक हिस्सा बनाते हैं — जबकि बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही व उदयपुर मिलकर राज्य का 'दक्षिणी आदिवासी बेल्ट' बनाते हैं 2. हर जनजाति की अपनी विशिष्ट पहचान है — मीना नाम की उत्पत्ति मत्स्य (मछली) से, भील नाम धनुष (बिल) से, गरासिया नाम भूमि (गरास) से, और सहरिया नाम जंगल (शहर) से जुड़ा है, जो इनकी जीवनशैली व मूल निवास स्थान को सीधे दर्शाता है 3. सहरिया राजस्थान की एकमात्र PVTG जनजाति है, जिसे विशेष रूप से कमज़ोर मानकर PM-JANMAN जैसी केंद्रीय योजना (2023-24 से 2025-26, ₹24,104 करोड़) के ज़रिए प्राथमिकता से आवास, सड़क, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएँ दी जा रही हैं 4. कंजर व सांसी जनजातियाँ ब्रिटिशकालीन 1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम का शिकार रही थीं, जिसे 1952 में हटाया गया — लेकिन आज भी सांसी को ST नहीं बल्कि SC श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है, जो परीक्षा में अक्सर भ्रम पैदा करता है 5. राज्य व केंद्र दोनों स्तर पर जनजातीय कल्याण के लिए संस्थागत ढाँचा (RAJAS, TAC, अनुजा निगम, राजस्थान अनुसूचित जनजाति आयोग) एवं वित्तीय प्रावधान (बजट का 14.82% आवंटन, बजट 2025-26 व 2026-27 में निरंतरता) दोनों मज़बूत किए जा रहे हैं, ताकि आदिवासी समुदाय शिक्षा, स्वास्थ्य व रोज़गार में मुख्यधारा के बराबर आ सकें

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. राजस्थान में सर्वाधिक जनजाति जनसंख्या किस जिले में है? [RAS Pre. 2021] Q2. राजस्थान में जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत सर्वाधिक किस जिले में है? [RAS Pre. 2018] Q3. राजस्थान की PVTG (विशेष कमज़ोर जनजातीय समूह) कौन है? [RAS Pre. 2023] Q4. भील जनजाति में तलाक को क्या कहते हैं? [RAS Pre. 2016] Q5. गरासिया जनजाति में 'वेलार' क्या है? [RAS Pre. 2019] Q6. कंजर जनजाति की 'पाती मांगना' प्रथा किससे संबंधित है? [RAS Pre. 2020] Q7. बेनेश्वर मेला किन नदियों के संगम पर लगता है? [RAS Pre. 2014] Q8. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान की स्थापना कब हुई? [RAS Pre. 2022]

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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