🏙️ अध्याय 10/14 — राजस्थान भूगोल

शहरीकरण

Urbanization | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. शहरीकरण का परिचय एवं परिभाषा
  2. शहरीकरण की ऐतिहासिक प्रवृत्ति (1961-2031)
  3. जनगणना 2011 अनुसार शहरी जनसंख्या के प्रमुख आँकड़े
  4. जिलेवार शहरीकरण — सर्वाधिक एवं न्यूनतम शहरी जिले
  5. दशकीय वृद्धि दर की स्थानिक भिन्नता
  6. शहरी लिंगानुपात, साक्षरता एवं बाल लिंगानुपात
  7. प्रमुख नगर एवं महानगर (Metropolitan Areas)
  8. नगरीय स्थानीय निकाय — वर्गीकरण एवं नवीनतम पुनर्गठन
  9. शहरी विकास प्राधिकरण, सुधार न्यास एवं मास्टर प्लान
  10. ग्रामीण-नगरीय प्रवासन एवं झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ
  11. RERA — रियल एस्टेट (नियामक एवं विकास) प्राधिकरण
  12. राज्य सरकार की प्रमुख शहरी विकास योजनाएँ
  13. केंद्र सरकार की प्रमुख शहरी विकास योजनाएँ
  14. नवीनतम अपडेट 2025-26 (नगर निगम एकीकरण एवं स्मार्ट सिटी स्थिति)
  15. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?

ज़रा सोचिए — साल 1961 में राजस्थान के हर 100 लोगों में से सिर्फ 16 लोग ही शहरों में रहते थे, बाकी 84 लोग गाँवों में रहते थे। लेकिन 2011 आते-आते यह आँकड़ा बढ़कर लगभग 25 हो गया — यानी 50 सालों में शहरों की ओर लोगों का रुझान लगातार बढ़ता ही गया। और अनुमान है कि 2031 तक राजस्थान के शहरों की आबादी 2001 के मुकाबले लगभग दोगुनी (132 लाख से बढ़कर 242 लाख) हो जाएगी! एक और दिलचस्प बात — क्या आपने कभी सोचा है कि जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में कभी-कभी एक ही शहर में दो-दो नगर निगम (जैसे जयपुर हेरिटेज और जयपुर ग्रेटर) क्यों होते थे? ये अलग-अलग निगम प्रशासनिक सुविधा के लिए साल 2019 में बनाए गए थे, लेकिन नवंबर 2025 में सरकार ने फैसला लिया कि अब हर शहर में सिर्फ एक ही नगर निगम होगा — यानी जयपुर हेरिटेज और जयपुर ग्रेटर, दोनों मिलकर अब सिर्फ एक 'जयपुर नगर निगम' बन गए हैं। यह अध्याय हमें बताएगा कि आख़िर लोग गाँव छोड़कर शहर की ओर क्यों भागते हैं, राजस्थान के कौनसे शहर सबसे तेज़ी से बढ़ रहे हैं, सरकार शहरों को बेहतर बनाने के लिए कौनसी योजनाएँ चला रही है, और भविष्य में राजस्थान के शहरों की तस्वीर कैसी दिखेगी। आइए, विस्तार से समझते हैं।

1शहरीकरण का परिचय एवं परिभाषा

शहरीकरण (Urbanization) का सीधा-सा मतलब है — ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर लोगों का पलायन, जिससे शहरों में रहने वाली जनसंख्या का अनुपात लगातार बढ़ता जाता है। यह प्रक्रिया मुख्यतः औद्योगीकरण (उद्योगों की स्थापना), बेहतर रोज़गार के अवसर, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, तथा व्यापार-व्यवसाय के विस्तार से जुड़ी हुई है। जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ता है, वैसे-वैसे लोगों की जीवनशैली, आधारभूत सुविधाएँ (सड़कें, बिजली, पानी) और क्षेत्रीय विकास में भी बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।

💡 शहरीकरण को आसान भाषा में कैसे समझें?

ऐसे समझें — जैसे किसी तालाब में मछलियाँ वहीं इकट्ठा होती हैं जहाँ खाना (भोजन) सबसे ज़्यादा उपलब्ध हो, ठीक उसी तरह इंसान भी वहीं बसना पसंद करता है जहाँ रोज़गार, स्कूल, अस्पताल और बेहतर सुविधाएँ मिलें। गाँव में जब खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होती या रोज़गार के अवसर सीमित होते हैं, तो लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं — और यही प्रक्रिया धीरे-धीरे शहरों को बड़ा और घना बनाती जाती है, जिसे 'शहरीकरण' कहा जाता है।

2शहरीकरण की ऐतिहासिक प्रवृत्ति (1961-2031)

वर्षभारत में शहरी जनसंख्या %राजस्थान में शहरी जनसंख्या %
196117.97%16.28%
201131.14%24.87% (कुछ स्रोतों में 24.9%)
2021 (अनुमानित)26.33%
2031 (प्रस्तावित/अनुमानित)27.74%

राजस्थान बनाम भारत — तुलना: राजस्थान में शहरीकरण की प्रवृत्ति (गति) राष्ट्रीय स्तर के समान ही रही है, यानी दोनों जगह शहरी जनसंख्या का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। लेकिन राजस्थान का शहरीकरण प्रतिशत (24.87% - 2011 में) भारत के औसत (31.14%) से काफी कम है — इसका मुख्य कारण राज्य का बड़ा ग्रामीण-कृषि आधारित अर्थव्यवस्था होना तथा बड़ा रेगिस्तानी/पहाड़ी भू-भाग है, जहाँ बड़े शहर विकसित होना मुश्किल है।

💡 संख्या में शहरी जनसंख्या का विस्तार

2001 में राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में रहने वाली कुल जनसंख्या 132 लाख थी, जिसमें 70 लाख पुरुष और 62 लाख महिलाएँ शामिल थीं। अनुमान है कि 2031 तक यह संख्या बढ़कर 242 लाख तक पहुँच जाएगी, जिसमें 126 लाख पुरुष और 116 लाख महिलाएँ शामिल होंगी — यानी सिर्फ 30 वर्षों में राजस्थान के शहरों की आबादी लगभग दोगुनी हो जाने का अनुमान है। इससे आने वाले वर्षों में शहरों पर आवास, पानी, यातायात व स्वास्थ्य सुविधाओं का दबाव और भी बढ़ेगा।

3जनगणना 2011 अनुसार शहरी जनसंख्या के प्रमुख आँकड़े

अध्याय 9 (जनसंख्या) में हमने राजस्थान की कुल जनसंख्या के आँकड़े विस्तार से देखे थे। अब हम विशेष रूप से शहरी (नगरीय) जनसंख्या के आँकड़ों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

विषयआँकड़े (2011)
ग्रामीण जनसंख्या5.15 करोड़ (75.1%)
नगरीय/शहरी जनसंख्या1.70 करोड़ अर्थात 1,70,48,085 (24.9%)
भारत में नगरीय जनसंख्या (तुलना हेतु)37.71 करोड़ (31.2%) — राजस्थान भारत से कम शहरीकृत है
50% से अधिक नगरीय जनसंख्या वाले जिलेकेवल कोटा (60.30%) और जयपुर (52.40%)
1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (राजस्थान)30 शहर
5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर5 शहर
10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (मेगा सिटी)3 शहर — जयपुर, जोधपुर, कोटा

4जिलेवार शहरीकरण — सर्वाधिक एवं न्यूनतम शहरी जिले

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार राजस्थान की शहरी जनसंख्या

क्रमसर्वाधिक नगरीय (%)% नगरीयन्यूनतम नगरीय (%)% नगरीय
1कोटा60.31%डूंगरपुर6.39%
2जयपुर52.40%बाड़मेर6.98%
3अजमेर40.08%बाँसवाड़ा7.10%
4जोधपुर34.30%प्रतापगढ़8.27%
5बीकानेर33.86%जालौर8.30%

महत्वपूर्ण तुलना — पुराने बनाम नए आँकड़े: जनगणना 2011 में जोधपुर की नगरीय जनसंख्या लगभग 38% बताई गई थी, लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार यह आँकड़ा 34.30% दर्शाया गया है — ऐसे मामूली अंतर अलग-अलग सर्वे पद्धतियों व सीमा निर्धारण (जैसे किसी क्षेत्र को नगर पालिका में शामिल करना/हटाना) के कारण हो सकते हैं। परीक्षा में अगर जनगणना 2011 का प्रश्न पूछा जाए, तो 2011 के मूल आँकड़े (जैसे जोधपुर ~38%) का उपयोग करें, और अगर 'नवीनतम/करंट' आँकड़े पूछे जाएँ, तो आर्थिक सर्वेक्षण के अद्यतन आँकड़े काम आएँगे।

उच्चतम व न्यूनतम ग्रामीण/शहरी आबादी वाले जिले (संख्या में)

🏘️ उच्चतम ग्रामीण जनसंख्या वाले जिले (संख्या में)
  • जयपुर
  • अलवर
  • नागौर
  • उदयपुर
  • जोधपुर
🏙️ उच्चतम शहरी जनसंख्या वाले जिले (संख्या में)
  • जयपुर
  • जोधपुर
  • कोटा
  • अजमेर
  • बीकानेर
📉 न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या वाले जिले
  • जैसलमेर
  • कोटा
  • प्रतापगढ़
  • सिरोही
  • बूंदी
📉 न्यूनतम शहरी जनसंख्या वाले जिले
  • प्रतापगढ़
  • डूंगरपुर
  • जैसलमेर
  • बाँसवाड़ा
  • जालौर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के जिलेवार शहरीकरण प्रतिशत (सर्वाधिक व न्यूनतम शहरी जिले चिन्हित करने हेतु)

5दशकीय वृद्धि दर की स्थानिक भिन्नता

स्थानिक भिन्नता का मतलब है — अलग-अलग जगहों (जिलों) में एक ही चीज़ (जैसे जनसंख्या वृद्धि) में पाया जाने वाला अंतर। राजस्थान में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की वृद्धि दर में जिलेवार काफी भिन्नता देखी जाती है।

सबसे अधिक वृद्धि दर वाले जिले (ग्रामीण)सबसे अधिक वृद्धि दर वाले जिले (शहरी)
जैसलमेरअलवर
बाड़मेरदौसा
बाँसवाड़ाबारां
न्यूनतम वृद्धि दर वाले जिले (ग्रामीण)न्यूनतम वृद्धि दर वाले जिले (शहरी)
कोटाडूंगरपुर
श्रीगंगानगरप्रतापगढ़
झुंझुनूंबाँसवाड़ा
💡 कोटा एक ही समय में दो अलग-अलग रिकॉर्ड क्यों रखता है?

कोटा जिला राज्य में सर्वाधिक शहरीकृत जिला (60.30%) भी है, और साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में सबसे कम वृद्धि दर (6.1%) वाला जिला भी है — यह कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। चूँकि कोटा में ज़्यादातर लोग पहले से ही शहर में बस चुके हैं (कोचिंग हब होने के कारण), इसलिए वहाँ बचे हुए ग्रामीण क्षेत्र में अब बहुत कम नई आबादी जुड़ रही है — बल्कि उल्टा, गाँव से लोग कोटा शहर की ओर ही पलायन कर रहे हैं।

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6शहरी लिंगानुपात, साक्षरता एवं बाल लिंगानुपात

A. लिंगानुपात (ग्रामीण बनाम शहरी)

विवरणग्रामीण लिंगानुपात (933)शहरी लिंगानुपात (914)
सर्वाधिक (शीर्ष 3)पाली (1003), राजसमंद (998), डूंगरपुर (996)टोंक (985), बाँसवाड़ा (964), प्रतापगढ़ (963)
न्यूनतम (शीर्ष 3)धौलपुर (841), करौली (856), जैसलमेर (859)जैसलमेर (807), धौलपुर (864), अलवर (872)

ध्यान देने योग्य बात: शहरी लिंगानुपात (914) ग्रामीण लिंगानुपात (933) से कम है — यह इसलिए है क्योंकि रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने वाले ज़्यादातर पुरुष होते हैं (जैसा कि आगे प्रवासन खंड में बताया गया है), जिससे शहरों में पुरुषों की संख्या अपेक्षाकृत ज़्यादा हो जाती है और लिंगानुपात कम दिखता है।

B. बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष) — ग्रामीण बनाम शहरी

विभाजन20012011सर्वाधिक जिला (2011)न्यूनतम जिला (2011)
ग्रामीण बाल लिंगानुपात914892बाँसवाड़ा (937)झुंझुनूं (832)
शहरी बाल लिंगानुपात887874
💡 चिंताजनक प्रवृत्ति

बाल लिंगानुपात में ग्रामीण क्षेत्रों का प्रदर्शन शहरी क्षेत्रों की तुलना में हमेशा बेहतर रहा है (892 बनाम 874), लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि दोनों ही क्षेत्रों में 2001 की तुलना में 2011 में बाल लिंगानुपात में गिरावट दर्ज हुई — यानी शहरीकरण के साथ-साथ तकनीक (जैसे गैरकानूनी लिंग-जाँच जैसी सुविधाओं तक पहुँच) का दुरुपयोग भी एक चिंता का विषय बना हुआ है, भले ही शहरों में शिक्षा व जागरूकता का स्तर ऊँचा हो।

C. साक्षरता दर — ग्रामीण बनाम शहरी

विभाजनराज्य औसतसर्वाधिक जिलान्यूनतम जिला
ग्रामीण साक्षरता दर61.4%झुंझुनूं (73.4%)सिरोही
नगरीय/शहरी साक्षरता दर79.7%उदयपुर (87.5%)नागौर/धौलपुर

7प्रमुख नगर एवं महानगर (Metropolitan Areas)

राजस्थान में जनसंख्या के आधार पर शहरों को अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा जाता है — इनमें से सबसे बड़े शहरों को 'शहरी समूह' (Urban Agglomeration) कहा जाता है, जिसमें मुख्य शहर के साथ-साथ उसके आस-पास के जुड़े हुए कस्बे भी शामिल होते हैं।

क्रमशहरी समूह (Urban Agglomeration)जनसंख्या (लगभग)
1जयपुर30.46 लाख (सर्वाधिक)
2जोधपुर11.38 लाख
3कोटा10.02 लाख
4बीकानेर6.44 लाख
बाँसवाड़ा1.01 लाख (1 लाख या अधिक जनसंख्या वाले समूहों में सबसे कम)

मेगा सिटी बनाम बड़े शहर: 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (जिन्हें मेगा सिटी कहा जाता है) राजस्थान में सिर्फ 3 हैं — जयपुर, जोधपुर, कोटा। इसके अलावा 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले कुल 5 शहर हैं (उपरोक्त 3 सहित बीकानेर व अजमेर)। यह ध्यान रखें कि जयपुर राजस्थान का न सिर्फ सबसे बड़ा शहर है, बल्कि सबसे बड़ा शहरी समूह भी है — जो राजधानी होने के साथ-साथ राज्य का सबसे प्रमुख वाणिज्यिक, प्रशासनिक व पर्यटन केंद्र भी है।

8नगरीय स्थानीय निकाय — वर्गीकरण एवं नवीनतम पुनर्गठन

राजस्थान में शहरी क्षेत्रों के प्रशासन (शासन-व्यवस्था) के लिए तीन स्तर के नगरीय स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies — ULB) बनाए गए हैं, जो शहर के आकार व जनसंख्या के आधार पर तय होते हैं।

निकाय का प्रकारकिसके लिएराजस्थान में (2025-26 स्थिति)
नगर निगम (Municipal Corporation)सबसे बड़े शहर (आमतौर पर 3 लाख+ जनसंख्या)13 (जयपुर, जोधपुर, कोटा — प्रत्येक में एक-एक; अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, पाली आदि)
नगर परिषद (Municipal Council)मध्यम आकार के शहर52 (हाल में भीलवाड़ा व पाली नगर परिषद से नगर निगम में क्रमोन्नत हुए, तथा पुष्कर, लालसोट, शाहपुरा नगर पालिका से नगर परिषद में क्रमोन्नत हुए)
नगर पालिका (Municipality/Nagar Palika)छोटे कस्बे/शहर240 (चार श्रेणियों में विभाजित — प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ श्रेणी)
💡 नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिका में अंतर कैसे याद रखें?

ऐसे समझें — जैसे किसी स्कूल में कक्षा 12वीं (सबसे बड़ी/वरिष्ठ) को नगर निगम, कक्षा 9वीं-10वीं (मध्यम) को नगर परिषद, और कक्षा 6वीं-8वीं (छोटी) को नगर पालिका माना जाए। जनसंख्या जितनी बड़ी होगी, ज़िम्मेदारियाँ व अधिकार भी उतने ही बड़े होंगे — नगर निगम का मुखिया 'महापौर' (Mayor) कहलाता है, जबकि नगर परिषद/पालिका का मुखिया 'सभापति'/'अध्यक्ष' (Chairperson) कहलाता है।

निकायों के हाल के महत्वपूर्ण पुनर्गठन (2024-25)

क्रमोन्नति (Upgrade) का फ़ायदा: जब किसी निकाय को ऊँची श्रेणी में क्रमोन्नत किया जाता है (जैसे नगर पालिका से नगर परिषद), तो उसे केंद्र व राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान (Grants) में बढ़ोतरी होती है, जिससे वह निकाय अपने संसाधन (सड़कें, सफ़ाई, पानी की व्यवस्था) और बेहतर बना सकता है — यही वजह है कि शहरी विकास के लिए यह क्रमोन्नति प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

9शहरी विकास प्राधिकरण, सुधार न्यास एवं मास्टर प्लान

🏛️ 7 शहरी विकास प्राधिकरण (Urban Development Authority)
  • जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA)
  • अजमेर विकास प्राधिकरण
  • जोधपुर विकास प्राधिकरण
  • कोटा विकास प्राधिकरण
  • भरतपुर विकास प्राधिकरण
  • बीकानेर विकास प्राधिकरण
  • उदयपुर विकास प्राधिकरण
🏗️ 10 शहरी सुधार न्यास (Urban Improvement Trust)
  • अलवर
  • आबू (माउंट आबू)
  • बाड़मेर
  • भीलवाड़ा
  • चित्तौड़गढ़
  • जैसलमेर
  • पाली
  • श्रीगंगानगर
  • सीकर
  • सवाई माधोपुर

मास्टर प्लान (Master Plan)

मास्टर प्लान किसी भी शहर के लिए लगभग 20 वर्षों की अवधि हेतु एक दृष्टिकोण (Vision) और कानूनी ढाँचा प्रदान करता है — यानी इसमें तय किया जाता है कि आने वाले 20 सालों में शहर का कौनसा हिस्सा आवासीय होगा, कौनसा व्यावसायिक, कौनसा औद्योगिक, कहाँ सड़कें व पार्क बनेंगे आदि। राजस्थान के 300 नगर निकायों में से 194 के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा चुके हैं और सरकार द्वारा अनुमोदित (Approved) किए जा चुके हैं।

10ग्रामीण-नगरीय प्रवासन एवं झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ

प्रवासन (Migration) का मतलब है — किसी व्यक्ति का एक जगह से दूसरी जगह जाकर बसना। जनगणना 2011 के आँकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पुरुष व महिलाएँ अलग-अलग कारणों से प्रवासन करते हैं।

👨 पुरुष प्रवासन का मुख्य कारण
  • बेहतर रोज़गार के अवसरों की तलाश
  • पुरुष प्रवासी आबादी का 49.16% रोज़गार के लिए पलायन करता है
👩 महिला प्रवासन का मुख्य कारण
  • मुख्यतः वैवाहिक कारण (शादी के बाद पति के घर जाना)
  • प्रवासी महिलाओं का 59.11% विवाह के कारण पलायन करता है

झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ (Slums)

जब गाँवों से शहरों की ओर बहुत तेज़ी से पलायन होता है, तो अक्सर शहरों में रहने की उचित व्यवस्था (आवास) की कमी हो जाती है — इसी वजह से झुग्गी-झोपड़ी बस्तियाँ बनती हैं, जहाँ अस्थायी व असुरक्षित मकानों में लोग रहते हैं।

💡 गाँव से शहर आने पर झुग्गी क्यों बनती है?

ऐसे समझें — जब कोई परिवार अचानक गाँव छोड़कर शहर आता है, तो उसके पास तुरंत एक अच्छा मकान खरीदने या किराए पर लेने के लिए पैसे नहीं होते। ऐसे में वे शहर के किसी खाली ज़मीन के टुकड़े पर अस्थायी (कच्चा) घर बना लेते हैं, ताकि रोज़गार की तलाश जारी रखी जा सके। धीरे-धीरे ऐसे कई परिवार एक ही जगह इकट्ठा हो जाते हैं, और यह जगह 'झुग्गी-झोपड़ी बस्ती' या 'स्लम' बन जाती है — जहाँ आमतौर पर पानी, सफ़ाई व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी होती है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के प्रमुख शहरी विकास प्राधिकरण, सुधार न्यास एवं झुग्गी बस्ती वाले शहरों की स्थिति

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11RERA — रियल एस्टेट (नियामक एवं विकास) प्राधिकरण

जैसे-जैसे शहर बढ़ते हैं, वैसे-वैसे बिल्डरों (Real Estate Developers) द्वारा फ्लैट/मकान बनाने का काम भी बढ़ता है। लेकिन कई बार बिल्डर ग्राहकों को धोखा दे देते थे — जैसे तय समय पर मकान न देना, या पैसे लेकर गायब हो जाना। इसी समस्या को रोकने के लिए RERA बनाया गया।

राजस्थान RERA — स्थापना: स्वस्थ, पारदर्शी, कुशल एवं प्रतिस्पर्धी रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास व संवर्धन को सुगम बनाने के लिए, राजस्थान सरकार ने 6 मार्च 2019 को राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) एवं रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) का गठन किया। इसका मुख्य उद्देश्य है — घर खरीदारों (Home Buyers) के हितों की रक्षा करना, ताकि कोई भी बिल्डर तय समय-सीमा व गुणवत्ता का उल्लंघन न कर सके।

12राज्य सरकार की प्रमुख शहरी विकास योजनाएँ

1. मुख्यमंत्री शहरी रोज़गार गारंटी योजना

2. राजस्थान शहरी विकास कोष-II (RUDF-II)

13केंद्र सरकार की प्रमुख शहरी विकास योजनाएँ

योजनामुख्य विवरण
स्मार्ट सिटी मिशनशुरुआत: जून 2015 (भारत सरकार) | उद्देश्य: बुनियादी अवसंरचना, उच्च जीवन गुणवत्ता, स्वच्छ-टिकाऊ पर्यावरण व 'स्मार्ट समाधानों' के ज़रिए शहरों का विकास | लक्ष्य: 100 शहर, प्रत्येक को प्रति वर्ष ₹100 करोड़ का अनुदान | राजस्थान के 4 शहर चयनित: जयपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर
AMRUT 2.0 (अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन)मंत्रालय: आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय | मूल AMRUT: चयनित 500 शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज व अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित | AMRUT 2.0: केवल जल व सीवरेज पर केंद्रित, उद्देश्य सभी वैधानिक शहरों में हर घर नल का पानी + 500 अमृत शहरों में सीवरेज प्रबंधन सुधार
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)मूल शुरुआत: 2 अक्टूबर 2014 (महात्मा गांधी जयंती पर) | मंत्रालय: आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA) | SBM-U 1.0: व्यक्तिगत/सामुदायिक शौचालय निर्माण व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित | SBM-U 2.0: अक्टूबर 2021 से 5 वर्षों (2026 तक) के लिए — शौचालय निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रयुक्त जल प्रबंधन व IEC (सूचना-शिक्षा-संचार) शामिल
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) — PMAY-Uशुरुआत: 25 जून 2015 | मंत्रालय: आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय | वित्त पैटर्न: सार्वजनिक व्यय (40%) + लाभार्थी अंशदान सहित निजी निवेश (60%) | लाभार्थी श्रेणियाँ: EWS (वार्षिक आय ₹3 लाख तक), LIG (₹3-6 लाख), MIG (₹6-18 लाख) | शर्त: लाभार्थी परिवार के नाम पर भारत में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए
DAY-NULM (दीनदयाल अंत्योदय योजना — राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन)राजस्थान के 213 शहरी स्थानीय निकायों में लागू | उद्देश्य: शहरी गरीबों को स्वरोज़गार व कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना
UIDSSMT (लघु एवं मध्यम शहरों के लिए शहरी अवसंरचना विकास योजना)शहरी विकास मंत्रालय (MoUD) ने चालू परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण पैटर्न को AMRUT की तर्ज़ पर 60:20:20 (भारत सरकार : राज्य : शहरी स्थानीय निकाय) में संशोधित किया

बाह्य सहायता प्राप्त कार्यक्रम

राजस्थान शहरी अवसंरचना क्षेत्र विकास कार्यक्रम (चरण-III) — ADB: एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank — ADB) की सहायता से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के तहत, राज्य के 12 शहरों में ₹3,930.45 करोड़ के कार्य कार्यान्वित (लागू) किए जा रहे हैं — यह दिखाता है कि राजस्थान अपने शहरी बुनियादी ढाँचे को सुधारने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का सहयोग भी ले रहा है।

14नवीनतम अपडेट 2025-26 (नगर निगम एकीकरण एवं स्मार्ट सिटी स्थिति)

जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, राजस्थान के शहरी प्रशासन में दो बड़े बदलाव हुए हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

💡 जयपुर, जोधपुर व कोटा — अब एक-एक ही नगर निगम (नवंबर 2025 से लागू)

पिछली सरकार के कार्यकाल में जयपुर, जोधपुर व कोटा — इन तीनों शहरों में प्रशासनिक सुविधा के लिए अक्टूबर 2019 से दो-दो नगर निगम बनाए गए थे (जैसे जयपुर हेरिटेज व जयपुर ग्रेटर), यानी कुल मिलाकर 6 नगर निगम थे। लेकिन वर्तमान सरकार ने फैसला किया कि इससे प्रशासनिक जटिलता व वित्तीय बोझ बढ़ता है, इसलिए फरवरी 2025 से वार्ड परिसीमन (सीमा निर्धारण) की प्रक्रिया शुरू की गई। तीनों शहरों के छह नगर निगमों का कार्यकाल 9 नवंबर 2025 को समाप्त हुआ, और 10 नवंबर 2025 से हर शहर में सिर्फ एक-एक एकीकृत (Unified) नगर निगम काम कर रहा है — जैसे जयपुर हेरिटेज व जयपुर ग्रेटर मिलकर अब सिर्फ 'जयपुर नगर निगम' बन गया है। नए ढाँचे में जयपुर में लगभग 150 वार्ड, जबकि जोधपुर व कोटा में लगभग 100-100 वार्ड प्रस्तावित हैं, तथा प्रत्येक निगम में एक आयुक्त (Commissioner) व अतिरिक्त आयुक्त नियुक्त किए जा रहे हैं।

💡 स्मार्ट सिटी मिशन — पूर्णता की स्थिति (2025-26)

राजस्थान के 4 स्मार्ट सिटी में से उदयपुर एकमात्र ऐसा शहर है जिसकी सभी परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं। वहीं जयपुर, कोटा व अजमेर में मिलाकर लगभग 13 परियोजनाएँ अभी अधूरी हैं — जयपुर में 5 परियोजनाएँ (₹177 करोड़ की लागत से), अजमेर में 5 परियोजनाएँ (₹58 करोड़) एवं कोटा में 3 परियोजनाएँ (₹38 करोड़) प्रगति पर हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय डेडलाइन (31 मार्च) के बाद लंबित योजनाओं के लिए नए वित्तीय वर्ष में कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं दी जाएगी — इसलिए राज्य सरकार पर इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का दबाव बना हुआ है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के एकीकृत नगर निगम (जयपुर, जोधपुर, कोटा) एवं 4 स्मार्ट सिटी की स्थिति (2025-26)

15त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

15.1 Rapid Fire — एक दृष्टि में

विषयउत्तर
राजस्थान की शहरी जनसंख्या (2011)24.9% (1.70 करोड़)
राजस्थान की शहरी जनसंख्या (1961)16.28%
भारत की शहरी जनसंख्या (2011)31.14%
सर्वाधिक शहरीकृत जिलाकोटा (60.30%/60.31%)
न्यूनतम शहरीकृत जिला (सर्वाधिक ग्रामीण)डूंगरपुर (93.6% ग्रामीण)
50%+ नगरीय जनसंख्या वाले जिलेसिर्फ 2 — कोटा व जयपुर
10 लाख+ जनसंख्या वाले शहर (मेगा सिटी)3 — जयपुर, जोधपुर, कोटा
सबसे बड़ा शहरी समूहजयपुर (30.46 लाख)
राजस्थान में नगर निगम (2025-26)13
राजस्थान में नगर परिषद52
राजस्थान में नगर पालिका240
शहरी विकास प्राधिकरण7 (जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, उदयपुर)
शहरी सुधार न्यास10
राजस्थान RERA स्थापना6 मार्च 2019
स्मार्ट सिटी में चयनित शहर4 — जयपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर
जयपुर/जोधपुर/कोटा नगर निगम एकीकरण10 नवंबर 2025 से लागू
🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. राजस्थान का शहरीकरण प्रतिशत (24.9%) भारत के औसत (31.14%) से कम है, लेकिन इसकी गति (Trend) राष्ट्रीय स्तर के समान ही तेज़ है — 1961 के 16.28% से 2031 तक अनुमानित 27.74% तक पहुँचने का रुझान है 2. कोटा व जयपुर राज्य के एकमात्र दो जिले हैं जहाँ आधी से अधिक आबादी शहरों में रहती है, जबकि डूंगरपुर, बाड़मेर व बाँसवाड़ा जैसे आदिवासी-बहुल जिले सबसे कम शहरीकृत हैं 3. शहरी क्षेत्रों में लिंगानुपात (914) व बाल लिंगानुपात (874), दोनों ग्रामीण क्षेत्रों (933 व 892) से कम हैं — यह पुरुष-प्रधान रोज़गार-प्रेरित प्रवासन तथा तकनीक के दुरुपयोग की चुनौतियों को दर्शाता है 4. राजस्थान का शहरी प्रशासनिक ढाँचा तीन स्तरों (नगर निगम-परिषद-पालिका) में बँटा है, जिसे समय-समय पर पुनर्गठित किया जाता रहा है — नवंबर 2025 में जयपुर, जोधपुर व कोटा में छह की जगह अब सिर्फ तीन (एक-एक) नगर निगम बनाना इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है 5. स्मार्ट सिटी मिशन, AMRUT 2.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) व PMAY-U जैसी केंद्रीय योजनाएँ राजस्थान के शहरों को बेहतर बुनियादी ढाँचा देने की दिशा में काम कर रही हैं, हालाँकि उदयपुर को छोड़कर बाकी 3 स्मार्ट सिटी (जयपुर, कोटा, अजमेर) की परियोजनाएँ 2025-26 तक भी पूरी तरह पूरी नहीं हो पाई हैं

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. राजस्थान में 2011 की जनगणना अनुसार शहरी जनसंख्या का प्रतिशत कितना था? Q2. राजस्थान का सर्वाधिक शहरीकृत जिला कौनसा है? Q3. राजस्थान के कितने जिलों में 50% से अधिक जनसंख्या नगरीय है? Q4. राजस्थान में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर कौनसे हैं? Q5. राजस्थान में वर्तमान में कुल कितने नगर निगम हैं? Q6. राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) की स्थापना कब हुई? Q7. स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत राजस्थान के कौनसे शहर चयनित हैं? Q8. राजस्थान में महिलाओं के प्रवासन का मुख्य कारण क्या है?

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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