ज़रा सोचिए — भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.4% हिस्सा रखने वाला राजस्थान, फिर भी देश की कुल जनसंख्या का सिर्फ 5.66% ही समेटे हुए है। यानी राजस्थान क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन जनसंख्या घनत्व में बहुत विरल (कम घना) — यही वजह है कि जैसलमेर जैसे विशाल रेगिस्तानी जिले में सिर्फ 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी रहते हैं, जबकि जयपुर में यह आँकड़ा 595 तक पहुँच जाता है — यानी जयपुर, जैसलमेर से लगभग 35 गुना ज़्यादा घना है! एक और दिलचस्प बात — 1911 से 1921 के बीच राजस्थान (और पूरे भारत) की जनसंख्या घटी थी, बढ़ी नहीं। इस दशक को इतिहास में 'जनसंख्या विभाजक दशक' कहा जाता है, क्योंकि इसके बाद से जनसंख्या हमेशा बढ़ती ही गई, कभी घटी नहीं। इसका कारण था — प्लेग जैसी भयंकर महामारी और प्रथम विश्व युद्ध, जिसने लाखों लोगों की जान ले ली। और अब सबसे ताज़ा दिलचस्प खबर — 2011 के बाद से भारत में जनगणना नहीं हुई (जो सामान्यतः हर 10 साल में होती है), लेकिन अब 2027 में होने वाली अगली जनगणना (16वीं जनगणना) में सन् 1931 के बाद पहली बार जातिगत आँकड़े (Caste Census) भी दर्ज किए जाएँगे — यानी लगभग 100 साल बाद भारत को अपनी सही जातिगत तस्वीर पता चलेगी! आइए, इस अध्याय में राजस्थान की जनसंख्या से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आँकड़ों को विस्तार से समझते हैं।
जनगणना का सीधा-सा मतलब है — किसी देश/राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति की गिनती करना, ताकि सरकार को पता चले कि कहाँ कितने लोग रहते हैं, उनकी उम्र, शिक्षा, धर्म, भाषा क्या है। भारत में जनगणना की परंपरा बहुत पुरानी है — प्राचीन काल में भी शासक अपनी प्रजा की गिनती करवाते थे।
| काल (Period) | स्रोत/उल्लेख |
|---|---|
| प्राचीन काल | अर्थशास्त्र (चाणक्य) — मौर्य काल में जनसंख्या का उल्लेख मिलता है |
| मध्य काल | आइने-अकबरी — अबुल फजल द्वारा लिखित (मुगल काल में जनसंख्या का ज़िक्र) |
| आधुनिक काल | लॉर्ड मेयो (1872 ई.) — भारत की प्रथम आधुनिक जनगणना |
| वर्ष | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 1872 | लॉर्ड मेयो — भारत की प्रथम आधुनिक जनगणना |
| 1881 | लॉर्ड रिपन — व्यवस्थित/दशकीय (हर 10 साल में) जनगणना की शुरुआत |
| 1948 | जनगणना अधिनियम पारित |
| 2000 | राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन (11 मई) |
| 2011 | भारत की 15वीं जनगणना (व्यवस्थित आधार पर 14वीं) |
| 2027 (प्रस्तावित) | भारत की 16वीं जनगणना — जिसमें 1931 के बाद पहली बार जातिगत गणना (Caste Census) भी होगी |
महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य: जनसंख्या/जनगणना संविधान की 7वीं अनुसूची में 'संघ सूची' (Union List) का विषय है — यानी इस पर सिर्फ केंद्र सरकार कानून बना सकती है, राज्य सरकार नहीं। जनगणना का पूरा कार्य केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा करवाया जाता है, न कि किसी राज्य सरकार द्वारा।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| क्रमांक (भारत में) | 15वीं जनगणना |
| क्रमांक (स्वतंत्रता के बाद) | 7वीं जनगणना |
| व्यवस्थित/दशकीय आधार पर | 14वीं जनगणना (1881 से गिनती शुरू करने पर) |
| शुभंकर (Mascot) | 🦁 'प्रगणक शिक्षिका' |
| आदर्श वाक्य (Slogan) | "हमारी जनगणना – हमारा भविष्य" |
| बजट | ₹2,200 करोड़ (प्रति व्यक्ति खर्च: ₹18.19) |
| शामिल जिले | देशभर में 640 (जिसमें राजस्थान के 33 जिले शामिल) |
| जनगणना निदेशालय रिपोर्ट प्रकाशन | 25 मई, 2013 |
ऐसे समझें — किसी बड़े परिवार का मुखिया अगर यह नहीं जानेगा कि घर में कितने बच्चे, कितने बुज़ुर्ग, कितने कमाने वाले सदस्य हैं, तो वह सही योजना कैसे बना पाएगा कि किसके लिए कितना राशन, कपड़े या पैसे चाहिए? ठीक इसी तरह, सरकार को यह जानना ज़रूरी है कि देश में कितने बच्चे स्कूल जाने लायक हैं, कितने बुज़ुर्गों को पेंशन चाहिए, कितनी महिलाएँ हैं — तभी वह स्कूल, अस्पताल, सड़कें और योजनाएँ सही जगह और सही मात्रा में बना पाएगी। यही जनगणना का सबसे बड़ा उद्देश्य है।
| विषय | आँकड़ा/तथ्य |
|---|---|
| भारत की कुल जनसंख्या (2011) | 121.085 करोड़ |
| राजस्थान की कुल जनसंख्या (2011) | 6.85 करोड़ (6,85,48,437) — 2001 में यह 5,65,07,188 थी |
| राजस्थान में पुरुष जनसंख्या | 51.86% (3,55,50,997) |
| राजस्थान में महिला जनसंख्या | 48.14% (3,29,97,440) |
| भारत की कुल जनसंख्या में राजस्थान का हिस्सा | 5.66% - 5.67% |
| विश्व की कुल जनसंख्या में राजस्थान का हिस्सा | लगभग 1% |
| जनसंख्या की दृष्टि से देश में स्थान (2011 में) | 8वाँ स्थान |
| वर्तमान स्थान (आंध्र प्रदेश-तेलंगाना विभाजन के बाद) | 7वाँ स्थान |
| शिशु जनसंख्या (0-6 वर्ष) का प्रतिशत | 15.5% (2001 में यह 18.8% थी — यानी घट रही है) |
| राजस्थान का क्षेत्रफल (भारत के कुल क्षेत्रफल का) | 10.4% — देश का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल में) |
सबसे महत्वपूर्ण तुलना: राजस्थान क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य (10.4% हिस्सा) है, लेकिन जनसंख्या में सिर्फ 5.66% हिस्सा रखता है — यानी राजस्थान की जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत बहुत कम है, जो इसके बड़े रेगिस्तानी व पहाड़ी भू-भाग के कारण है।
| क्रम | सर्वाधिक जनसंख्या वाले जिले | जनसंख्या (लाख) | न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले | जनसंख्या (लाख) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 66.26 | जैसलमेर | 6.69 |
| 2 | जोधपुर | 36.87 | प्रतापगढ़ | 8.67 |
| 3 | अलवर | 36.74 | सिरोही | 10.36 |
| 4 | नागौर | 33.07 | बूंदी | 11.10 |
| 5 | उदयपुर | 30.68 | राजसमंद | 11.56 |
संभागवार तुलना: जनसंख्या की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा संभाग 'जयपुर संभाग' है। संभागों की जनसंख्या का बढ़ता क्रम याद रखें: बीकानेर (23.63 लाख) < अजमेर (25.83 लाख) < जोधपुर (36.87 लाख) < जयपुर (66.26 लाख)।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के जिलेवार जनसंख्या वितरण (सर्वाधिक व न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले चिन्हित करने हेतु)
| प्रकार | आँकड़े (2011) |
|---|---|
| ग्रामीण जनसंख्या | 5.15 करोड़ (75.1%) |
| नगरीय/शहरी जनसंख्या | 1.70 करोड़ (24.9%) |
| भारत में नगरीय जनसंख्या (तुलना हेतु) | 37.71 करोड़ (31.2%) — राजस्थान भारत से कम शहरीकृत है |
| 50% से अधिक नगरीय जनसंख्या वाले जिले | केवल कोटा (60.30%) और जयपुर (52.40%) |
| 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (राजस्थान) | 30 शहर |
| 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर | 5 शहर |
| 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (मेगा सिटी) | 3 शहर — जयपुर, जोधपुर, कोटा |
| सर्वाधिक नगरीय (%) | % नगरीय | न्यूनतम नगरीय (%) | % नगरीय |
|---|---|---|---|
| कोटा | 60.30% | डूंगरपुर | 6.39% |
| जयपुर | 52.40% | बाड़मेर | 6.98% |
| अजमेर | 40.08% | बाँसवाड़ा | 7.10% |
| जोधपुर | ~38% | दौसा | 12.35% |
| विभाजन | दशकीय वृद्धि दर |
|---|---|
| ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर | 19.0% |
| नगरीय जनसंख्या वृद्धि दर | 29.01% — नगरीय क्षेत्रों में वृद्धि ग्रामीण से कहीं तेज़ है |
| सर्वाधिक ग्रामीण वृद्धि दर | जैसलमेर (34.5%) |
| न्यूनतम ग्रामीण वृद्धि दर | कोटा (6.1%) |
| सर्वाधिक नगरीय वृद्धि दर | अलवर (50.5%) |
| न्यूनतम नगरीय वृद्धि दर | डूंगरपुर (9.8%) |
नगरीय (शहरी) क्षेत्रों की वृद्धि दर (29.01%) ग्रामीण क्षेत्रों (19.0%) से कहीं ज़्यादा है — इसका मुख्य कारण है पलायन (Migration)। जब गाँवों में रोज़गार के अवसर कम होते हैं, तो लोग बेहतर नौकरी, शिक्षा व सुविधाओं की तलाश में शहरों की ओर आते हैं, जिससे शहरों की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ती है — इसे ही 'ग्रामीण-नगरीय पलायन' (Rural-Urban Migration) कहा जाता है।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| 2011 में राजस्थान की दशकीय वृद्धि दर | 21.3% |
| पिछले दशक (1991-2001) में वृद्धि दर | 28.41% |
| वृद्धि दर में कमी | 28.41% → 21.3% (यानी 7.10% की कमी) |
| सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर वाला दशक (इतिहास में) | 1971-1981 (32.97%) |
| ऋणात्मक वृद्धि दर वाला दशक | 1911-1921 (-6.29%) — इसे 'जनसंख्या विभाजक दशक' कहते हैं |
| जनसंख्या विस्फोटक दशक (लगातार तेज़ वृद्धि का दौर) | 1951-1981 के दशक |
| राज्य औसत से अधिक वृद्धि वाले जिले | 16 जिले |
| राष्ट्रीय औसत से अधिक वृद्धि वाले जिले | 25 जिले |
1911-1921 में जनसंख्या घटने के कारण: यह इतिहास का इकलौता दशक है जब जनसंख्या घटी — इसके पीछे तीन मुख्य कारण थे: (1) प्लेग महामारी — जिसने लाखों लोगों की जान ली (सबसे बड़ा कारण), (2) प्रथम विश्व युद्ध — जिसमें कई सैनिक मारे गए, (3) राष्ट्रीय आंदोलनों की शुरुआत के दौरान सामाजिक अस्थिरता। इसी वजह से इस दशक को 'जनसंख्या विभाजक दशक' कहा जाता है — यानी इसके पहले व बाद की जनसंख्या प्रवृत्ति (Trend) बिल्कुल अलग है।
| क्रम | सर्वाधिक वृद्धि दर | प्रतिशत | न्यूनतम वृद्धि दर | प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बाड़मेर | 32.5% | श्रीगंगानगर | 10.0% |
| 2 | जैसलमेर | 31.8% | झुंझुनूं | 11.7% |
| 3 | जोधपुर | 27.7% | पाली | 11.9% |
| 4 | बाँसवाड़ा | 26.58% | बूंदी | 15.4% |
| 5 | जयपुर | 26.2% | चित्तौड़गढ़ | 16.1% |
जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारक: किसी भी क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि तीन मुख्य कारकों से प्रभावित होती है: (1) उच्च जन्म दर, (2) न्यूनतम मृत्यु दर, (3) आप्रवास (Migration) — यानी बाहर से आकर बसने वाले लोग।
जनसंख्या घनत्व का मतलब है — प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या। इसे ऐसे समझें — अगर किसी एक वर्ग किलोमीटर के मैदान में 200 लोग खड़े हों, तो वहाँ का घनत्व 200 होगा, और अगर सिर्फ 17 लोग खड़े हों (जैसे जैसलमेर में), तो घनत्व सिर्फ 17 होगा — यानी वहाँ लोग बहुत बिखरे हुए (कम सघन) रहते हैं।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (2011) | 200 व्यक्ति/वर्ग किमी |
| राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (2001) | 165 व्यक्ति/वर्ग किमी |
| भारत का औसत जनसंख्या घनत्व (2011) | 382 व्यक्ति/वर्ग किमी — राजस्थान से लगभग दोगुना |
| 100 से कम घनत्व वाले जिले (3 जिले) | जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर |
| 401-500 के मध्य घनत्व वाले जिले | दौसा एवं अलवर |
| घनत्व में न्यूनतम वृद्धि (2001-2011) | जैसलमेर (सिर्फ 4 व्यक्ति/वर्ग किमी की वृद्धि) |
| सर्वाधिक जनघनत्व वाला क्षेत्र | पूर्वी मैदानी भाग (जयपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर) |
| न्यूनतम जनघनत्व वाला क्षेत्र | मरुस्थलीय जिले (पश्चिमी राजस्थान) |
| क्रम | सर्वाधिक घनत्व | व्यक्ति/किमी² | न्यूनतम घनत्व | व्यक्ति/किमी² |
|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 595 | जैसलमेर | 17 |
| 2 | भरतपुर | 503 | बीकानेर | 78 |
| 3 | दौसा | 476 | बाड़मेर | 92 |
| 4 | अलवर | 438 | चूरू | 147 |
| 5 | धौलपुर | 398 | जोधपुर | 161 |
| 6 | बाँसवाड़ा | 397 | गंगानगर | 179 |
| 7 | कोटा | 374 | सिरोही | 202 |
| 8 | डूंगरपुर | 368 | अजमेर | 305 |
सबसे कम याद रखें: जैसलमेर (17) — सबसे कम, यानी यहाँ एक वर्ग किमी में मुश्किल से 17 लोग रहते हैं (ज़्यादातर रेगिस्तान)। सबसे ज़्यादा याद रखें: जयपुर (595) — सबसे ज़्यादा, यानी राजधानी होने के कारण यहाँ बहुत घनी आबादी है। भारत का औसत (382), राजस्थान के औसत (200) से लगभग दोगुना है — इसका मतलब भारत के बाकी हिस्सों में राजस्थान से कहीं ज़्यादा भीड़ है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान का जिलेवार जनसंख्या घनत्व वितरण (सर्वाधिक व न्यूनतम घनत्व वाले जिले चिन्हित करने हेतु)
लिंगानुपात का मतलब है — प्रति 1000 पुरुषों की संख्या पर महिलाओं की संख्या। जैसे अगर लिंगानुपात 928 है, तो इसका मतलब है कि हर 1000 पुरुषों पर सिर्फ 928 महिलाएँ हैं — यानी महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| राजस्थान का कुल लिंगानुपात (2011) | 928 (प्रति 1000 पुरुषों पर) |
| राजस्थान का लिंगानुपात (2001) | 921 |
| 2001 से 2011 में वृद्धि | 7 अंकों की बढ़ोतरी (921 → 928) — यह एक सकारात्मक संकेत है |
| भारत का औसत लिंगानुपात (2011) | 943 |
| राष्ट्रीय औसत से अंतर | 15 अंक कम (राजस्थान < भारत) |
| ऐतिहासिक न्यूनतम (1921) | 896 — इतिहास में सबसे कम लिंगानुपात |
| 1000 से अधिक लिंगानुपात वाले जिले (2011 में) | कोई नहीं — यानी राजस्थान के किसी भी जिले में महिलाएँ पुरुषों से ज़्यादा नहीं हैं |
| औसत से कम लिंगानुपात वाले जिले | 15 जिले |
| औसत से अधिक लिंगानुपात वाले जिले | 18 जिले |
| क्रम | सर्वाधिक लिंगानुपात | अनुपात | न्यूनतम लिंगानुपात | अनुपात |
|---|---|---|---|---|
| 1 | डूंगरपुर | 994 | धौलपुर | 846 |
| 2 | राजसमंद | 990 | जैसलमेर | 852 |
| 3 | पाली | 987 | करौली | 861 |
| 4 | प्रतापगढ़ | 983 | भरतपुर | 880 |
| 5 | बाँसवाड़ा | 980 | गंगानगर | 887 |
| विभाजन | लिंगानुपात (2011) | सर्वाधिक | न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| ग्रामीण लिंगानुपात | 933 | पाली (1003) | धौलपुर (841) |
| नगरीय लिंगानुपात | 914 | टोंक (985) | जैसलमेर (807) |
| जिला | कमी (अंकों में) |
|---|---|
| डूंगरपुर | -28 अंक (सबसे ज़्यादा कमी — 2001 में 1022 था) |
| उदयपुर | -13 अंक |
| जालौर | -12 अंक |
| राजसमंद | -10 अंक (2001 में 1000 था) |
| चूरू | -8 अंक |
| सीकर | -4 अंक |
| सिरोही | -3 अंक |
ज़रूरी नोट: राजस्थान के सभी 33 जिलों में लिंगानुपात 1000 से कम है — यानी हर जिले में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है। राजस्थान का औसत लिंगानुपात (928) भारत के औसत (943) से भी कम है — यह दिखाता है कि लैंगिक असंतुलन राजस्थान में राष्ट्रीय औसत से भी ज़्यादा गंभीर समस्या है।
बाल लिंगानुपात का मतलब है — 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों में, प्रति 1000 बालकों पर बालिकाओं की संख्या। यह आँकड़ा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर बताता है कि किसी समाज में बेटा-बेटी में कितना भेदभाव हो रहा है (जैसे कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाएँ)।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| बाल लिंगानुपात (2011) | 888 (0-6 वर्ष आयु वर्ग में) |
| बाल लिंगानुपात (2001) | 909 |
| 2001 से 2011 में परिवर्तन | 21 अंकों की कमी (909 → 888) — यह एक गंभीर चिंता का विषय है |
| ऐतिहासिक गिरावट का रुझान | 1981 (954) से लगातार गिरावट जारी है |
| ग्रामीण बाल लिंगानुपात | 892 |
| नगरीय बाल लिंगानुपात | 874 — शहरी क्षेत्रों में स्थिति ग्रामीण से भी ज़्यादा खराब |
| 850 से कम बाल लिंगानुपात वाले जिले | झुंझुनूं एवं सीकर |
| औसत से कम बाल लिंगानुपात वाले जिले | 12 जिले |
यह आँकड़ा दिखाता है कि आने वाली पीढ़ी में लड़कियों की संख्या लगातार घट रही है — यानी अगर आज बाल लिंगानुपात 888 है, तो जब यह पीढ़ी बड़ी होगी, तब कुल लिंगानुपात और भी बिगड़ सकता है। शहरी क्षेत्रों (874) में स्थिति ग्रामीण (892) से भी ज़्यादा खराब होना विशेष रूप से चौंकाने वाला है, क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि शहरों में शिक्षा व जागरूकता ज़्यादा होती है — फिर भी वहाँ तकनीक (जैसे गैरकानूनी लिंग-जाँच) का दुरुपयोग ज़्यादा होने की आशंका जताई जाती है।
| क्रम | सर्वाधिक बाल लिंगानुपात | अनुपात | न्यूनतम बाल लिंगानुपात | अनुपात |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बाँसवाड़ा | 934 | झुंझुनूं | 837 |
| 2 | प्रतापगढ़ | 933 | सीकर | 848 |
| 3 | भीलवाड़ा | 928 | करौली | 852 |
| 4 | उदयपुर | 924 | गंगानगर | 854 |
| 5 | डूंगरपुर | 922 | धौलपुर | 857 |
SC/ST संबंधित बाल लिंगानुपात नोट: SC (अनुसूचित जाति) का न्यूनतम लिंगानुपात धौलपुर में है। ST (अनुसूचित जनजाति) का न्यूनतम लिंगानुपात करौली में है, जबकि ST का समग्र लिंगानुपात (948) राज्य के औसत (928) से बेहतर है — यह दिखाता है कि जनजातीय समाज में सामान्यतः लैंगिक भेदभाव अपेक्षाकृत कम है।
साक्षरता की परिभाषा: 6 वर्ष से अधिक आयु का वह व्यक्ति जो किसी भी भाषा को पढ़ने या लिखने में सक्षम हो, उसे 'साक्षर' कहा जाता है — ध्यान रहे, इसके लिए किसी डिग्री या स्कूली शिक्षा की ज़रूरत नहीं, सिर्फ पढ़ने-लिखने की बुनियादी क्षमता ही काफी है।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| राजस्थान की कुल साक्षरता दर (2011) | 66.11% |
| पुरुष साक्षरता दर | 79.2% (79.19%) |
| महिला साक्षरता दर | 52.1% (52.12%) |
| पुरुष-महिला साक्षरता अंतर | लगभग 27% — यह अंतर देश में सर्वाधिक राजस्थान में ही है |
| ग्रामीण साक्षरता दर | 61.4% (भारत का औसत: 67.8%) |
| नगरीय साक्षरता दर | 79.7% (भारत का औसत: 84.1%) |
| ग्रामीण महिला साक्षरता दर | 45.8% |
| नगरीय महिला साक्षरता दर | 70.7% |
| महिला साक्षरता में देश में स्थान | नीचे से दूसरा (28वाँ स्थान) — सिर्फ बिहार (51.1%) राजस्थान से पीछे है |
| 1951 में कुल साक्षरता | 8.50% — यानी 60 वर्षों में साक्षरता लगभग 8 गुना बढ़ी |
| 2001-2011 दशक में साक्षरता वृद्धि | 5.69% (पुरुष: +3.50%, महिला: +8.28% — महिला साक्षरता तेज़ी से बढ़ी) |
| औसत से कम साक्षरता वाले जिले | 19 जिले |
विशेष तथ्य: जनगणना 2011 में बाड़मेर और चूरू — ये दो ऐसे जिले थे जहाँ साक्षरता दर में कमी दर्ज हुई (शेष सभी जिलों में साक्षरता में वृद्धि हुई थी)।
| क्रम | सर्वाधिक कुल साक्षरता | % | न्यूनतम कुल साक्षरता | % |
|---|---|---|---|---|
| 1 | कोटा | 76.6% | जालौर | 54.9% |
| 2 | जयपुर | 75.5% | सिरोही | 55.3% |
| 3 | झुंझुनूं | 74.1% | प्रतापगढ़ | 56.0% |
| 4 | सीकर | 71.9% | बाँसवाड़ा | 56.3% |
| 5 | अलवर | 70.7% | बाड़मेर | 56.5% |
| क्रम | सर्वाधिक पुरुष साक्षरता | % | सर्वाधिक महिला साक्षरता | % |
|---|---|---|---|---|
| 1 | झुंझुनूं | 86.9% | कोटा | 65.9% |
| 2 | कोटा | 86.3% | जयपुर | 64.0% |
| 3 | जयपुर | 86.1% | झुंझुनूं | 61.0% |
| 4 | सीकर | 85.1% | गंगानगर | 59.7% |
| 5 | भरतपुर | 84.1% | सीकर/अलवर | 58.2%/56.3% |
| विभाजन | राज्य औसत | सर्वाधिक | न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| ग्रामीण साक्षरता | 61.4% | झुंझुनूं (73.4%) | सिरोही |
| नगरीय साक्षरता | 79.7% | उदयपुर (87.5%) | नागौर/धौलपुर |
| ग्रामीण पुरुष साक्षरता | 76.2% | झुंझुनूं | सिरोही |
| ग्रामीण महिला साक्षरता | 45.8% | झुंझुनूं | सिरोही |
| नगरीय पुरुष साक्षरता | 87.9% | उदयपुर | जालौर |
| नगरीय महिला साक्षरता | 70.7% | उदयपुर | धौलपुर |
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU), कोटा — इसकी स्थापना 1987 में 'कोटा खुला विश्वविद्यालय' के नाम से हुई थी, और 30 अगस्त 2002 को इसका वर्तमान नाम रखा गया। यह दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के माध्यम से राज्य के दूर-दराज़ के छात्रों तक शिक्षा पहुँचाता है — जो राजस्थान जैसे बड़े व विरल आबादी वाले राज्य के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ है। इसके अलावा, महात्मा गाँधी अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय सत्र 2019-20 से शुरू किए गए, ताकि सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेज़ी माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
SC (अनुसूचित जाति) एवं ST (अनुसूचित जनजाति) मिलाकर राजस्थान की कुल जनसंख्या का 31.3% हिस्सा बनाते हैं — यानी राज्य की लगभग एक-तिहाई आबादी इन दो सामाजिक समूहों से है।
A. अनुसूचित जाति (Scheduled Caste — SC)
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| SC कुल जनसंख्या | 1,22,21,593 (राज्य की जनसंख्या का 17.8%) |
| SC लिंगानुपात | 923 |
| SC का 25% से अधिक वाले जिले | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ |
| SC का 30% से अधिक वाला जिला | केवल 1 जिला — श्रीगंगानगर (36.6%) |
| सर्वाधिक SC जनसंख्या (संख्या में) | जयपुर (10,03,302) |
| सर्वाधिक SC प्रतिशत वाले जिले | गंगानगर (36.6%), हनुमानगढ़ (27.8%), करौली (24.3%), चूरू (22.1%) |
| न्यूनतम SC जनसंख्या | डूंगरपुर |
| न्यूनतम SC प्रतिशत वाले जिले | डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा |
| SC का न्यूनतम लिंगानुपात | धौलपुर |
B. अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe — ST)
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| ST कुल जनसंख्या | 92,38,534 (राज्य की जनसंख्या का 13.5%) |
| ST लिंगानुपात | 948 — राज्य के औसत (928) से बेहतर |
| देश में ST आकार की दृष्टि से राजस्थान का स्थान | चौथा (1st मध्यप्रदेश, 2nd महाराष्ट्र, 3rd ओडिशा) |
| ग्रामीण ST जनसंख्या | 16.9% |
| नगरीय ST जनसंख्या | 3.2% |
| 60% से अधिक ST प्रतिशत वाले जिले | बाँसवाड़ा (76.4%), डूंगरपुर (70.8%), प्रतापगढ़ (63.4%) |
| ST का 24% से अधिक वाले जिले | 5 जिले — बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर |
| सर्वाधिक ST जनसंख्या (संख्या में) | उदयपुर (15,25,289) |
| दूसरी सर्वाधिक ST जनसंख्या | जयपुर (5,27,966) |
| न्यूनतम ST जनसंख्या | बीकानेर (मात्र 7,779) |
| न्यूनतम ST प्रतिशत | बीकानेर (0.3%), नागौर (0.3%) |
| ST की सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर (2001-11) | नागौर (60.4%) |
| ST का न्यूनतम लिंगानुपात | करौली |
| क्रम | जनजाति | विशेषता | सर्वाधिक क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| 1 | मीणा | राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति | जयपुर, दौसा |
| 2 | भील | दूसरी सबसे बड़ी जनजाति | उदयपुर, बाँसवाड़ा |
| 3 | गरासिया | तीसरी सबसे बड़ी जनजाति | सिरोही, पाली |
| 4 | सहरिया | राज्य की एकमात्र आदिम जनजाति (Primitive Tribe) | बारां (सर्वाधिक), कोटा (दूसरा) |
मीणा + भील जनजाति मिलकर राजस्थान की कुल जनजातीय जनसंख्या का 90% से भी अधिक हिस्सा बनाते हैं — यानी अगर आप सिर्फ इन दो जनजातियों को अच्छे से याद रखें, तो राज्य की लगभग पूरी आदिवासी आबादी का हिसाब समझ आ जाएगा। सहरिया जनजाति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य की एकमात्र 'आदिम जनजाति' (Primitive Tribal Group) है — यानी यह सबसे पिछड़ी व सबसे कम विकसित जनजातीय समूह मानी जाती है, जिसे विशेष सरकारी संरक्षण मिलता है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में SC/ST जनसंख्या का जिलेवार वितरण एवं प्रमुख जनजातीय क्षेत्र
| धर्म | प्रतिशत | सर्वाधिक जनसंख्या (जिला) | सर्वाधिक प्रतिशत (जिला) |
|---|---|---|---|
| हिन्दू | 88.49% | जयपुर | दौसा — राज्य में सर्वाधिक हिन्दू प्रतिशत |
| मुस्लिम | 9.07% | जयपुर | जैसलमेर (25.10%) — अजमेर में भी 12.16% |
| सिक्ख | 1.27% | श्रीगंगानगर | श्रीगंगानगर |
| जैन | 0.91% | जयपुर | उदयपुर |
| ईसाई | 0.14% | बाँसवाड़ा | बाँसवाड़ा |
| बौद्ध | 0.02% | अलवर | अलवर |
A. कार्य-सहभागिता दर (Work Participation Rate)
कार्य-सहभागिता दर का मतलब है — कुल जनसंख्या में से कितने प्रतिशत लोग किसी न किसी काम (नौकरी, खेती, मज़दूरी आदि) में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| राजस्थान की कुल कार्य-सहभागिता दर | 43.6% |
| भारत की कार्यशील जनसंख्या (15-64 वर्ष) | 39.8% |
| पुरुष कार्य-सहभागिता दर | 51.5% |
| स्त्री कार्य-सहभागिता दर | 35.1% |
| सर्वाधिक कार्य-सहभागिता दर वाला जिला | प्रतापगढ़ (55.50%) |
| कुल श्रमिकों में सीमांत श्रमिक (राजस्थान) | 29.5% (सीमांत श्रमिक = साल में 6 महीने से कम काम करने वाले) |
| कुल श्रमिकों में सीमांत श्रमिक (भारत) | 24.8% |
B. शिशु मृत्यु दर (IMR) एवं जीवन प्रत्याशा
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| शिशु मृत्यु दर — राजस्थान (SRS 2017/2020) | 32 (प्रति 1000 जीवित जन्म पर) |
| शिशु मृत्यु दर — भारत | 28 |
| शिशु मृत्यु दर — 2016 (आर्थिक समीक्षा 2017-18 अनुसार) | 41 |
| जीवन प्रत्याशा — राजस्थान (SRS 2016-20) | 69.4 वर्ष |
| जीवन प्रत्याशा — भारत | 70 वर्ष |
| पुरुष जीवन प्रत्याशा (2013-17) | 66.3 / 68.5 वर्ष |
शिशु मृत्यु दर (IMR) जितनी कम होगी, जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) उतनी ही बेहतर होगी — क्योंकि दोनों का सीधा संबंध स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता से है। राजस्थान की शिशु मृत्यु दर (32) भारत के औसत (28) से थोड़ी ज़्यादा है, जो दिखाता है कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में अभी भी सुधार की गुंजाइश है, हालाँकि 2016 के 41 की तुलना में यह काफी सुधरी है।
| नीति | तिथि |
|---|---|
| राजस्थान राज्य जनसंख्या नीति | 20 जनवरी, 2000 |
| राष्ट्रीय जनसंख्या नीति | 15 फरवरी, 2000 |
| उद्देश्य का प्रकार | लक्ष्य |
|---|---|
| ⚡ तात्कालिक उद्देश्य (Immediate) | गर्भ निरोधक एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना |
| 🕐 मध्यकालिक उद्देश्य (Medium-term) | वर्ष 2010 तक TFR (कुल प्रजनन दर) को 2.1 तक लाना |
| 🏛️ दीर्घकालिक उद्देश्य (Long-term) | वर्ष 2045 तक स्थिर जनसंख्या (Stable Population) के लक्ष्य को प्राप्त करना |
विश्व जनसंख्या दिवस: प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2024 की थीम थी: "किसी को पीछे न छोड़ना, सभी की गिनती करना" — जो दिखाती है कि सटीक जनगणना करना कितना ज़रूरी माना जाता है, ताकि कोई भी नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।
यह अध्याय पूरी तरह जनगणना 2011 के आँकड़ों पर आधारित है, क्योंकि यही भारत की आखिरी पूर्ण जनगणना है। लेकिन जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार अगली जनगणना (16वीं जनगणना) से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्हें जानना परीक्षा की दृष्टि से बेहद ज़रूरी है।
भारत की अगली जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी (क्योंकि जनगणना हर 10 साल में होती है, और पिछली 2011 में हुई थी), लेकिन कोविड-19 महामारी सहित कई कारणों से यह लगातार टलती रही। जून 2025 में भारत सरकार ने घोषणा की कि जनगणना का पहला चरण (मकान-गणना/Housing Census — HLO) अक्टूबर 2026 से शुरू होगा, और जनसंख्या गणना (Population Enumeration) मार्च 2027 में होगी। वास्तव में, 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण (House Listing and Housing Census) पहले ही शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर तक चलेगा — यह अलग-अलग राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की समय-सीमा के अनुसार तय किया गया है। इस तरह यह भारत की 16वीं जनगणना होगी।
30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय राजनीतिक मामलों की समिति (Cabinet Committee on Political Affairs) ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना को भी शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया — यह सन् 1931 के बाद पहली बार होगा जब भारत में जातिगत जनगणना की जाएगी। इस 16वीं जनगणना में हर व्यक्ति की विशिष्ट जाति (Specific Jati) दर्ज की जाएगी, न कि सिर्फ SC/ST जैसी व्यापक श्रेणियाँ। इसे भारत की प्रथम डिजिटल जनगणना (Digital Census) भी कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
समयसीमा — याद रखें: चरण-1 (मकान-गणना): 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक। चरण-2 (जनसंख्या गणना + जातिगत गणना): मार्च 2027। प्रारंभिक (Provisional) परिणाम: 2027 के अंत तक अपेक्षित। पूर्ण अंतिम रिपोर्ट: 2028 के अंत तक अपेक्षित। इस तरह राजस्थान सहित पूरे भारत के लिए अगले 1-2 वर्ष जनगणना की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, और इस अध्याय के आँकड़े (जो अभी 2011 पर आधारित हैं) आने वाले समय में 2027 की जनगणना के बाद पूरी तरह अद्यतन होंगे।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — Census 2027 के अंतर्गत राजस्थान के जिलेवार House Listing चरण की प्रगति दर्शाने हेतु
| विषय | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान की जनसंख्या (2011) | 6.85 करोड़ |
| राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (2011) | 200/किमी² |
| राजस्थान का लिंगानुपात (2011) | 928 |
| बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष) | 888 |
| कुल साक्षरता दर | 66.11% |
| पुरुष साक्षरता | 79.19% |
| महिला साक्षरता | 52.12% |
| दशकीय वृद्धि दर (2001-2011) | 21.3% |
| SC प्रतिशत | 17.8% |
| ST प्रतिशत | 13.5% |
| हिन्दू जनसंख्या | 88.49% |
| मुस्लिम जनसंख्या | 9.07% |
| कार्य-सहभागिता दर | 43.6% |
| सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला | जयपुर (66.26 लाख) |
| न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला | जैसलमेर (6.69 लाख) |
| सर्वाधिक घनत्व | जयपुर (595) |
| न्यूनतम घनत्व | जैसलमेर (17) |
| सर्वाधिक लिंगानुपात | डूंगरपुर (994) |
| न्यूनतम लिंगानुपात | धौलपुर (846) |
| सर्वाधिक बाल लिंगानुपात | बाँसवाड़ा (934) |
| न्यूनतम बाल लिंगानुपात | झुंझुनूं (837) |
| सर्वाधिक साक्षरता | कोटा (76.6%) |
| न्यूनतम साक्षरता | जालौर (54.9%) |
| सर्वाधिक SC% | गंगानगर (36.6%) |
| सर्वाधिक ST% | बाँसवाड़ा (76.4%) |
| सर्वाधिक दशकीय वृद्धि | बाड़मेर (32.5%) |
| न्यूनतम दशकीय वृद्धि | गंगानगर (10.0%) |
Q1. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किमी) कितना है? [RAS Pre. 2013] Q2. राजस्थान में 2011 में न्यूनतम जनसंख्या घनत्व किस जिले का है? [RPSC 2018] Q3. 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान का लिंगानुपात कितना था? [Patwar 2016] Q4. राजस्थान में 2011 में सर्वाधिक लिंगानुपात किस जिले में था? [RAS Pre. 2016] Q5. राजस्थान की 2011 की कुल साक्षरता दर क्या थी? [SSC 2019] Q6. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में ST का प्रतिशत क्या है? [RAS Pre. 2018] Q7. राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर किस दशक (1971-81) में कितनी थी? [RPSC 2020] Q8. "जनसंख्या विभाजक दशक" किसे कहते हैं? [RAS Pre. 2021]