👥 अध्याय 9/14 — राजस्थान भूगोल

जनसंख्या — वृद्धि, घनत्व, साक्षरता, लिंगानुपात

Population: Growth, Density, Literacy, Sex Ratio | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. भारतीय जनगणना का इतिहास एवं कालक्रम
  2. जनगणना 2011 — परिचय एवं विशेष तथ्य
  3. कुल जनसंख्या — वितरण एवं स्थिति
  4. ग्रामीण एवं शहरी (नगरीय) जनसंख्या
  5. दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर (2001-2011)
  6. जनसंख्या घनत्व (Population Density)
  7. लिंगानुपात (Sex Ratio)
  8. बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष)
  9. साक्षरता दर (Literacy Rate)
  10. अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST)
  11. धार्मिक जनसंख्या एवं भाषा संबंधी तथ्य
  12. कार्य-सहभागिता, शिशु मृत्यु दर एवं जीवन प्रत्याशा
  13. जनसंख्या नीति (राज्य एवं राष्ट्रीय)
  14. नवीनतम अपडेट 2025-26 (Census 2027 एवं जातिगत जनगणना)
  15. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?

ज़रा सोचिए — भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.4% हिस्सा रखने वाला राजस्थान, फिर भी देश की कुल जनसंख्या का सिर्फ 5.66% ही समेटे हुए है। यानी राजस्थान क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन जनसंख्या घनत्व में बहुत विरल (कम घना) — यही वजह है कि जैसलमेर जैसे विशाल रेगिस्तानी जिले में सिर्फ 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी रहते हैं, जबकि जयपुर में यह आँकड़ा 595 तक पहुँच जाता है — यानी जयपुर, जैसलमेर से लगभग 35 गुना ज़्यादा घना है! एक और दिलचस्प बात — 1911 से 1921 के बीच राजस्थान (और पूरे भारत) की जनसंख्या घटी थी, बढ़ी नहीं। इस दशक को इतिहास में 'जनसंख्या विभाजक दशक' कहा जाता है, क्योंकि इसके बाद से जनसंख्या हमेशा बढ़ती ही गई, कभी घटी नहीं। इसका कारण था — प्लेग जैसी भयंकर महामारी और प्रथम विश्व युद्ध, जिसने लाखों लोगों की जान ले ली। और अब सबसे ताज़ा दिलचस्प खबर — 2011 के बाद से भारत में जनगणना नहीं हुई (जो सामान्यतः हर 10 साल में होती है), लेकिन अब 2027 में होने वाली अगली जनगणना (16वीं जनगणना) में सन् 1931 के बाद पहली बार जातिगत आँकड़े (Caste Census) भी दर्ज किए जाएँगे — यानी लगभग 100 साल बाद भारत को अपनी सही जातिगत तस्वीर पता चलेगी! आइए, इस अध्याय में राजस्थान की जनसंख्या से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आँकड़ों को विस्तार से समझते हैं।

1भारतीय जनगणना का इतिहास एवं कालक्रम

जनगणना का सीधा-सा मतलब है — किसी देश/राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति की गिनती करना, ताकि सरकार को पता चले कि कहाँ कितने लोग रहते हैं, उनकी उम्र, शिक्षा, धर्म, भाषा क्या है। भारत में जनगणना की परंपरा बहुत पुरानी है — प्राचीन काल में भी शासक अपनी प्रजा की गिनती करवाते थे।

काल (Period)स्रोत/उल्लेख
प्राचीन कालअर्थशास्त्र (चाणक्य) — मौर्य काल में जनसंख्या का उल्लेख मिलता है
मध्य कालआइने-अकबरी — अबुल फजल द्वारा लिखित (मुगल काल में जनसंख्या का ज़िक्र)
आधुनिक काललॉर्ड मेयो (1872 ई.) — भारत की प्रथम आधुनिक जनगणना

जनगणना का कालक्रम (Chronology)

वर्षमहत्वपूर्ण घटना
1872लॉर्ड मेयो — भारत की प्रथम आधुनिक जनगणना
1881लॉर्ड रिपन — व्यवस्थित/दशकीय (हर 10 साल में) जनगणना की शुरुआत
1948जनगणना अधिनियम पारित
2000राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन (11 मई)
2011भारत की 15वीं जनगणना (व्यवस्थित आधार पर 14वीं)
2027 (प्रस्तावित)भारत की 16वीं जनगणना — जिसमें 1931 के बाद पहली बार जातिगत गणना (Caste Census) भी होगी

महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य: जनसंख्या/जनगणना संविधान की 7वीं अनुसूची में 'संघ सूची' (Union List) का विषय है — यानी इस पर सिर्फ केंद्र सरकार कानून बना सकती है, राज्य सरकार नहीं। जनगणना का पूरा कार्य केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा करवाया जाता है, न कि किसी राज्य सरकार द्वारा।

2जनगणना 2011 — परिचय एवं विशेष तथ्य

विषयविवरण
क्रमांक (भारत में)15वीं जनगणना
क्रमांक (स्वतंत्रता के बाद)7वीं जनगणना
व्यवस्थित/दशकीय आधार पर14वीं जनगणना (1881 से गिनती शुरू करने पर)
शुभंकर (Mascot)🦁 'प्रगणक शिक्षिका'
आदर्श वाक्य (Slogan)"हमारी जनगणना – हमारा भविष्य"
बजट₹2,200 करोड़ (प्रति व्यक्ति खर्च: ₹18.19)
शामिल जिलेदेशभर में 640 (जिसमें राजस्थान के 33 जिले शामिल)
जनगणना निदेशालय रिपोर्ट प्रकाशन25 मई, 2013

जनगणना के दो चरण (Two Phases)

🟡 पहला चरण — मकान-गणना
  • समय-सीमा: 15 मई से 30 जून, 2010
  • उद्देश्य: घरों/मकानों की गिनती व घरेलू सुविधाओं का सर्वे (Housing Census)
🟢 दूसरा चरण — जनगणना
  • समय-सीमा: 1 फरवरी से 28 फरवरी, 2011
  • उद्देश्य: प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करना

जनगणना 2011 की विशेष बातें (Special Features)

💡 जनगणना क्यों ज़रूरी है? — एक आसान उदाहरण

ऐसे समझें — किसी बड़े परिवार का मुखिया अगर यह नहीं जानेगा कि घर में कितने बच्चे, कितने बुज़ुर्ग, कितने कमाने वाले सदस्य हैं, तो वह सही योजना कैसे बना पाएगा कि किसके लिए कितना राशन, कपड़े या पैसे चाहिए? ठीक इसी तरह, सरकार को यह जानना ज़रूरी है कि देश में कितने बच्चे स्कूल जाने लायक हैं, कितने बुज़ुर्गों को पेंशन चाहिए, कितनी महिलाएँ हैं — तभी वह स्कूल, अस्पताल, सड़कें और योजनाएँ सही जगह और सही मात्रा में बना पाएगी। यही जनगणना का सबसे बड़ा उद्देश्य है।

3कुल जनसंख्या — वितरण एवं स्थिति

विषयआँकड़ा/तथ्य
भारत की कुल जनसंख्या (2011)121.085 करोड़
राजस्थान की कुल जनसंख्या (2011)6.85 करोड़ (6,85,48,437) — 2001 में यह 5,65,07,188 थी
राजस्थान में पुरुष जनसंख्या51.86% (3,55,50,997)
राजस्थान में महिला जनसंख्या48.14% (3,29,97,440)
भारत की कुल जनसंख्या में राजस्थान का हिस्सा5.66% - 5.67%
विश्व की कुल जनसंख्या में राजस्थान का हिस्सालगभग 1%
जनसंख्या की दृष्टि से देश में स्थान (2011 में)8वाँ स्थान
वर्तमान स्थान (आंध्र प्रदेश-तेलंगाना विभाजन के बाद)7वाँ स्थान
शिशु जनसंख्या (0-6 वर्ष) का प्रतिशत15.5% (2001 में यह 18.8% थी — यानी घट रही है)
राजस्थान का क्षेत्रफल (भारत के कुल क्षेत्रफल का)10.4% — देश का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल में)

सबसे महत्वपूर्ण तुलना: राजस्थान क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य (10.4% हिस्सा) है, लेकिन जनसंख्या में सिर्फ 5.66% हिस्सा रखता है — यानी राजस्थान की जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत बहुत कम है, जो इसके बड़े रेगिस्तानी व पहाड़ी भू-भाग के कारण है।

सर्वाधिक एवं न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले (शीर्ष 5)

क्रमसर्वाधिक जनसंख्या वाले जिलेजनसंख्या (लाख)न्यूनतम जनसंख्या वाले जिलेजनसंख्या (लाख)
1जयपुर66.26जैसलमेर6.69
2जोधपुर36.87प्रतापगढ़8.67
3अलवर36.74सिरोही10.36
4नागौर33.07बूंदी11.10
5उदयपुर30.68राजसमंद11.56

संभागवार तुलना: जनसंख्या की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा संभाग 'जयपुर संभाग' है। संभागों की जनसंख्या का बढ़ता क्रम याद रखें: बीकानेर (23.63 लाख) < अजमेर (25.83 लाख) < जोधपुर (36.87 लाख) < जयपुर (66.26 लाख)।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के जिलेवार जनसंख्या वितरण (सर्वाधिक व न्यूनतम जनसंख्या वाले जिले चिन्हित करने हेतु)

4ग्रामीण एवं शहरी (नगरीय) जनसंख्या

प्रकारआँकड़े (2011)
ग्रामीण जनसंख्या5.15 करोड़ (75.1%)
नगरीय/शहरी जनसंख्या1.70 करोड़ (24.9%)
भारत में नगरीय जनसंख्या (तुलना हेतु)37.71 करोड़ (31.2%) — राजस्थान भारत से कम शहरीकृत है
50% से अधिक नगरीय जनसंख्या वाले जिलेकेवल कोटा (60.30%) और जयपुर (52.40%)
1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (राजस्थान)30 शहर
5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर5 शहर
10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (मेगा सिटी)3 शहर — जयपुर, जोधपुर, कोटा

सर्वाधिक एवं न्यूनतम नगरीय/ग्रामीण जनसंख्या वाले जिले

सर्वाधिक नगरीय (%)% नगरीयन्यूनतम नगरीय (%)% नगरीय
कोटा60.30%डूंगरपुर6.39%
जयपुर52.40%बाड़मेर6.98%
अजमेर40.08%बाँसवाड़ा7.10%
जोधपुर~38%दौसा12.35%
🏘️ सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या (संख्या व %)
  • संख्या में सर्वाधिक: जयपुर > अलवर > नागौर
  • प्रतिशत में सर्वाधिक: डूंगरपुर (93.6%) > बाड़मेर > बाँसवाड़ा
🏙️ सर्वाधिक नगरीय जनसंख्या (संख्या व %)
  • संख्या में सर्वाधिक: जयपुर (34.71 लाख) > जोधपुर > कोटा
  • प्रतिशत में सर्वाधिक: कोटा (60.30%) > जयपुर > अजमेर

ग्रामीण एवं नगरीय दशकीय वृद्धि दर (2001-2011)

विभाजनदशकीय वृद्धि दर
ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर19.0%
नगरीय जनसंख्या वृद्धि दर29.01% — नगरीय क्षेत्रों में वृद्धि ग्रामीण से कहीं तेज़ है
सर्वाधिक ग्रामीण वृद्धि दरजैसलमेर (34.5%)
न्यूनतम ग्रामीण वृद्धि दरकोटा (6.1%)
सर्वाधिक नगरीय वृद्धि दरअलवर (50.5%)
न्यूनतम नगरीय वृद्धि दरडूंगरपुर (9.8%)
💡 गाँव और शहर की वृद्धि दर में इतना अंतर क्यों?

नगरीय (शहरी) क्षेत्रों की वृद्धि दर (29.01%) ग्रामीण क्षेत्रों (19.0%) से कहीं ज़्यादा है — इसका मुख्य कारण है पलायन (Migration)। जब गाँवों में रोज़गार के अवसर कम होते हैं, तो लोग बेहतर नौकरी, शिक्षा व सुविधाओं की तलाश में शहरों की ओर आते हैं, जिससे शहरों की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ती है — इसे ही 'ग्रामीण-नगरीय पलायन' (Rural-Urban Migration) कहा जाता है।

5दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर (2001-2011)

विषयआँकड़ा
2011 में राजस्थान की दशकीय वृद्धि दर21.3%
पिछले दशक (1991-2001) में वृद्धि दर28.41%
वृद्धि दर में कमी28.41% → 21.3% (यानी 7.10% की कमी)
सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर वाला दशक (इतिहास में)1971-1981 (32.97%)
ऋणात्मक वृद्धि दर वाला दशक1911-1921 (-6.29%) — इसे 'जनसंख्या विभाजक दशक' कहते हैं
जनसंख्या विस्फोटक दशक (लगातार तेज़ वृद्धि का दौर)1951-1981 के दशक
राज्य औसत से अधिक वृद्धि वाले जिले16 जिले
राष्ट्रीय औसत से अधिक वृद्धि वाले जिले25 जिले

1911-1921 में जनसंख्या घटने के कारण: यह इतिहास का इकलौता दशक है जब जनसंख्या घटी — इसके पीछे तीन मुख्य कारण थे: (1) प्लेग महामारी — जिसने लाखों लोगों की जान ली (सबसे बड़ा कारण), (2) प्रथम विश्व युद्ध — जिसमें कई सैनिक मारे गए, (3) राष्ट्रीय आंदोलनों की शुरुआत के दौरान सामाजिक अस्थिरता। इसी वजह से इस दशक को 'जनसंख्या विभाजक दशक' कहा जाता है — यानी इसके पहले व बाद की जनसंख्या प्रवृत्ति (Trend) बिल्कुल अलग है।

जिलेवार दशकीय वृद्धि दर (2001-2011)

क्रमसर्वाधिक वृद्धि दरप्रतिशतन्यूनतम वृद्धि दरप्रतिशत
1बाड़मेर32.5%श्रीगंगानगर10.0%
2जैसलमेर31.8%झुंझुनूं11.7%
3जोधपुर27.7%पाली11.9%
4बाँसवाड़ा26.58%बूंदी15.4%
5जयपुर26.2%चित्तौड़गढ़16.1%

जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारक: किसी भी क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि तीन मुख्य कारकों से प्रभावित होती है: (1) उच्च जन्म दर, (2) न्यूनतम मृत्यु दर, (3) आप्रवास (Migration) — यानी बाहर से आकर बसने वाले लोग।

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6जनसंख्या घनत्व (Population Density)

जनसंख्या घनत्व का मतलब है — प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या। इसे ऐसे समझें — अगर किसी एक वर्ग किलोमीटर के मैदान में 200 लोग खड़े हों, तो वहाँ का घनत्व 200 होगा, और अगर सिर्फ 17 लोग खड़े हों (जैसे जैसलमेर में), तो घनत्व सिर्फ 17 होगा — यानी वहाँ लोग बहुत बिखरे हुए (कम सघन) रहते हैं।

विषयआँकड़ा
राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (2011)200 व्यक्ति/वर्ग किमी
राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (2001)165 व्यक्ति/वर्ग किमी
भारत का औसत जनसंख्या घनत्व (2011)382 व्यक्ति/वर्ग किमी — राजस्थान से लगभग दोगुना
100 से कम घनत्व वाले जिले (3 जिले)जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर
401-500 के मध्य घनत्व वाले जिलेदौसा एवं अलवर
घनत्व में न्यूनतम वृद्धि (2001-2011)जैसलमेर (सिर्फ 4 व्यक्ति/वर्ग किमी की वृद्धि)
सर्वाधिक जनघनत्व वाला क्षेत्रपूर्वी मैदानी भाग (जयपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर)
न्यूनतम जनघनत्व वाला क्षेत्रमरुस्थलीय जिले (पश्चिमी राजस्थान)

जिलेवार जनसंख्या घनत्व (शीर्ष 8)

क्रमसर्वाधिक घनत्वव्यक्ति/किमी²न्यूनतम घनत्वव्यक्ति/किमी²
1जयपुर595जैसलमेर17
2भरतपुर503बीकानेर78
3दौसा476बाड़मेर92
4अलवर438चूरू147
5धौलपुर398जोधपुर161
6बाँसवाड़ा397गंगानगर179
7कोटा374सिरोही202
8डूंगरपुर368अजमेर305
💡 घनत्व याद रखने की सबसे आसान ट्रिक

सबसे कम याद रखें: जैसलमेर (17) — सबसे कम, यानी यहाँ एक वर्ग किमी में मुश्किल से 17 लोग रहते हैं (ज़्यादातर रेगिस्तान)। सबसे ज़्यादा याद रखें: जयपुर (595) — सबसे ज़्यादा, यानी राजधानी होने के कारण यहाँ बहुत घनी आबादी है। भारत का औसत (382), राजस्थान के औसत (200) से लगभग दोगुना है — इसका मतलब भारत के बाकी हिस्सों में राजस्थान से कहीं ज़्यादा भीड़ है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान का जिलेवार जनसंख्या घनत्व वितरण (सर्वाधिक व न्यूनतम घनत्व वाले जिले चिन्हित करने हेतु)

7लिंगानुपात (Sex Ratio)

लिंगानुपात का मतलब है — प्रति 1000 पुरुषों की संख्या पर महिलाओं की संख्या। जैसे अगर लिंगानुपात 928 है, तो इसका मतलब है कि हर 1000 पुरुषों पर सिर्फ 928 महिलाएँ हैं — यानी महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है।

विषयआँकड़ा
राजस्थान का कुल लिंगानुपात (2011)928 (प्रति 1000 पुरुषों पर)
राजस्थान का लिंगानुपात (2001)921
2001 से 2011 में वृद्धि7 अंकों की बढ़ोतरी (921 → 928) — यह एक सकारात्मक संकेत है
भारत का औसत लिंगानुपात (2011)943
राष्ट्रीय औसत से अंतर15 अंक कम (राजस्थान < भारत)
ऐतिहासिक न्यूनतम (1921)896 — इतिहास में सबसे कम लिंगानुपात
1000 से अधिक लिंगानुपात वाले जिले (2011 में)कोई नहीं — यानी राजस्थान के किसी भी जिले में महिलाएँ पुरुषों से ज़्यादा नहीं हैं
औसत से कम लिंगानुपात वाले जिले15 जिले
औसत से अधिक लिंगानुपात वाले जिले18 जिले

जिलेवार समग्र लिंगानुपात (शीर्ष 5)

क्रमसर्वाधिक लिंगानुपातअनुपातन्यूनतम लिंगानुपातअनुपात
1डूंगरपुर994धौलपुर846
2राजसमंद990जैसलमेर852
3पाली987करौली861
4प्रतापगढ़983भरतपुर880
5बाँसवाड़ा980गंगानगर887

ग्रामीण एवं नगरीय लिंगानुपात

विभाजनलिंगानुपात (2011)सर्वाधिकन्यूनतम
ग्रामीण लिंगानुपात933पाली (1003)धौलपुर (841)
नगरीय लिंगानुपात914टोंक (985)जैसलमेर (807)

2001 की तुलना में लिंगानुपात में कमी वाले जिले

जिलाकमी (अंकों में)
डूंगरपुर-28 अंक (सबसे ज़्यादा कमी — 2001 में 1022 था)
उदयपुर-13 अंक
जालौर-12 अंक
राजसमंद-10 अंक (2001 में 1000 था)
चूरू-8 अंक
सीकर-4 अंक
सिरोही-3 अंक

सर्वाधिक व न्यूनतम लिंगानुपात के पीछे कारण

✅ सर्वाधिक लिंगानुपात के कारण
  • प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम
  • तकनीकी ज्ञान एवं सुविधा कम (सोनोग्राफी जैसी सुविधाओं तक कम पहुँच)
  • कम साक्षरता दर
  • संयुक्त परिवार व्यवस्था प्रचलित
  • दहेज प्रथा अपेक्षाकृत कम प्रचलित
❌ न्यूनतम लिंगानुपात के कारण
  • प्रति व्यक्ति आय अधिक
  • तकनीकी सुविधा व जानकारी अधिक (कन्या भ्रूण हत्या में दुरुपयोग की आशंका)
  • उच्च साक्षरता दर
  • एकल परिवार व्यवस्था प्रचलित
  • दहेज प्रथा अधिक प्रचलित

ज़रूरी नोट: राजस्थान के सभी 33 जिलों में लिंगानुपात 1000 से कम है — यानी हर जिले में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है। राजस्थान का औसत लिंगानुपात (928) भारत के औसत (943) से भी कम है — यह दिखाता है कि लैंगिक असंतुलन राजस्थान में राष्ट्रीय औसत से भी ज़्यादा गंभीर समस्या है।

8बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष)

बाल लिंगानुपात का मतलब है — 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों में, प्रति 1000 बालकों पर बालिकाओं की संख्या। यह आँकड़ा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर बताता है कि किसी समाज में बेटा-बेटी में कितना भेदभाव हो रहा है (जैसे कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाएँ)।

विषयआँकड़ा
बाल लिंगानुपात (2011)888 (0-6 वर्ष आयु वर्ग में)
बाल लिंगानुपात (2001)909
2001 से 2011 में परिवर्तन21 अंकों की कमी (909 → 888) — यह एक गंभीर चिंता का विषय है
ऐतिहासिक गिरावट का रुझान1981 (954) से लगातार गिरावट जारी है
ग्रामीण बाल लिंगानुपात892
नगरीय बाल लिंगानुपात874 — शहरी क्षेत्रों में स्थिति ग्रामीण से भी ज़्यादा खराब
850 से कम बाल लिंगानुपात वाले जिलेझुंझुनूं एवं सीकर
औसत से कम बाल लिंगानुपात वाले जिले12 जिले
💡 बाल लिंगानुपात में गिरावट क्यों चिंताजनक है?

यह आँकड़ा दिखाता है कि आने वाली पीढ़ी में लड़कियों की संख्या लगातार घट रही है — यानी अगर आज बाल लिंगानुपात 888 है, तो जब यह पीढ़ी बड़ी होगी, तब कुल लिंगानुपात और भी बिगड़ सकता है। शहरी क्षेत्रों (874) में स्थिति ग्रामीण (892) से भी ज़्यादा खराब होना विशेष रूप से चौंकाने वाला है, क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि शहरों में शिक्षा व जागरूकता ज़्यादा होती है — फिर भी वहाँ तकनीक (जैसे गैरकानूनी लिंग-जाँच) का दुरुपयोग ज़्यादा होने की आशंका जताई जाती है।

जिलेवार बाल लिंगानुपात (शीर्ष 5)

क्रमसर्वाधिक बाल लिंगानुपातअनुपातन्यूनतम बाल लिंगानुपातअनुपात
1बाँसवाड़ा934झुंझुनूं837
2प्रतापगढ़933सीकर848
3भीलवाड़ा928करौली852
4उदयपुर924गंगानगर854
5डूंगरपुर922धौलपुर857

SC/ST संबंधित बाल लिंगानुपात नोट: SC (अनुसूचित जाति) का न्यूनतम लिंगानुपात धौलपुर में है। ST (अनुसूचित जनजाति) का न्यूनतम लिंगानुपात करौली में है, जबकि ST का समग्र लिंगानुपात (948) राज्य के औसत (928) से बेहतर है — यह दिखाता है कि जनजातीय समाज में सामान्यतः लैंगिक भेदभाव अपेक्षाकृत कम है।

9साक्षरता दर (Literacy Rate)

साक्षरता की परिभाषा: 6 वर्ष से अधिक आयु का वह व्यक्ति जो किसी भी भाषा को पढ़ने या लिखने में सक्षम हो, उसे 'साक्षर' कहा जाता है — ध्यान रहे, इसके लिए किसी डिग्री या स्कूली शिक्षा की ज़रूरत नहीं, सिर्फ पढ़ने-लिखने की बुनियादी क्षमता ही काफी है।

विषयआँकड़ा
राजस्थान की कुल साक्षरता दर (2011)66.11%
पुरुष साक्षरता दर79.2% (79.19%)
महिला साक्षरता दर52.1% (52.12%)
पुरुष-महिला साक्षरता अंतरलगभग 27% — यह अंतर देश में सर्वाधिक राजस्थान में ही है
ग्रामीण साक्षरता दर61.4% (भारत का औसत: 67.8%)
नगरीय साक्षरता दर79.7% (भारत का औसत: 84.1%)
ग्रामीण महिला साक्षरता दर45.8%
नगरीय महिला साक्षरता दर70.7%
महिला साक्षरता में देश में स्थाननीचे से दूसरा (28वाँ स्थान) — सिर्फ बिहार (51.1%) राजस्थान से पीछे है
1951 में कुल साक्षरता8.50% — यानी 60 वर्षों में साक्षरता लगभग 8 गुना बढ़ी
2001-2011 दशक में साक्षरता वृद्धि5.69% (पुरुष: +3.50%, महिला: +8.28% — महिला साक्षरता तेज़ी से बढ़ी)
औसत से कम साक्षरता वाले जिले19 जिले

विशेष तथ्य: जनगणना 2011 में बाड़मेर और चूरू — ये दो ऐसे जिले थे जहाँ साक्षरता दर में कमी दर्ज हुई (शेष सभी जिलों में साक्षरता में वृद्धि हुई थी)।

जिलेवार साक्षरता (कुल, पुरुष, महिला) — शीर्ष 5

क्रमसर्वाधिक कुल साक्षरता%न्यूनतम कुल साक्षरता%
1कोटा76.6%जालौर54.9%
2जयपुर75.5%सिरोही55.3%
3झुंझुनूं74.1%प्रतापगढ़56.0%
4सीकर71.9%बाँसवाड़ा56.3%
5अलवर70.7%बाड़मेर56.5%
क्रमसर्वाधिक पुरुष साक्षरता%सर्वाधिक महिला साक्षरता%
1झुंझुनूं86.9%कोटा65.9%
2कोटा86.3%जयपुर64.0%
3जयपुर86.1%झुंझुनूं61.0%
4सीकर85.1%गंगानगर59.7%
5भरतपुर84.1%सीकर/अलवर58.2%/56.3%

ग्रामीण एवं नगरीय साक्षरता — सर्वाधिक/न्यूनतम जिले

विभाजनराज्य औसतसर्वाधिकन्यूनतम
ग्रामीण साक्षरता61.4%झुंझुनूं (73.4%)सिरोही
नगरीय साक्षरता79.7%उदयपुर (87.5%)नागौर/धौलपुर
ग्रामीण पुरुष साक्षरता76.2%झुंझुनूंसिरोही
ग्रामीण महिला साक्षरता45.8%झुंझुनूंसिरोही
नगरीय पुरुष साक्षरता87.9%उदयपुरजालौर
नगरीय महिला साक्षरता70.7%उदयपुरधौलपुर
💡 दूरस्थ शिक्षा एवं विशेष शैक्षणिक तथ्य

वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU), कोटा — इसकी स्थापना 1987 में 'कोटा खुला विश्वविद्यालय' के नाम से हुई थी, और 30 अगस्त 2002 को इसका वर्तमान नाम रखा गया। यह दूरस्थ शिक्षा (Distance Education) के माध्यम से राज्य के दूर-दराज़ के छात्रों तक शिक्षा पहुँचाता है — जो राजस्थान जैसे बड़े व विरल आबादी वाले राज्य के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ है। इसके अलावा, महात्मा गाँधी अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय सत्र 2019-20 से शुरू किए गए, ताकि सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेज़ी माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

10अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST)

SC (अनुसूचित जाति) एवं ST (अनुसूचित जनजाति) मिलाकर राजस्थान की कुल जनसंख्या का 31.3% हिस्सा बनाते हैं — यानी राज्य की लगभग एक-तिहाई आबादी इन दो सामाजिक समूहों से है।

A. अनुसूचित जाति (Scheduled Caste — SC)

विषयआँकड़ा
SC कुल जनसंख्या1,22,21,593 (राज्य की जनसंख्या का 17.8%)
SC लिंगानुपात923
SC का 25% से अधिक वाले जिलेश्रीगंगानगर, हनुमानगढ़
SC का 30% से अधिक वाला जिलाकेवल 1 जिला — श्रीगंगानगर (36.6%)
सर्वाधिक SC जनसंख्या (संख्या में)जयपुर (10,03,302)
सर्वाधिक SC प्रतिशत वाले जिलेगंगानगर (36.6%), हनुमानगढ़ (27.8%), करौली (24.3%), चूरू (22.1%)
न्यूनतम SC जनसंख्याडूंगरपुर
न्यूनतम SC प्रतिशत वाले जिलेडूंगरपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा
SC का न्यूनतम लिंगानुपातधौलपुर

B. अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe — ST)

विषयआँकड़ा
ST कुल जनसंख्या92,38,534 (राज्य की जनसंख्या का 13.5%)
ST लिंगानुपात948 — राज्य के औसत (928) से बेहतर
देश में ST आकार की दृष्टि से राजस्थान का स्थानचौथा (1st मध्यप्रदेश, 2nd महाराष्ट्र, 3rd ओडिशा)
ग्रामीण ST जनसंख्या16.9%
नगरीय ST जनसंख्या3.2%
60% से अधिक ST प्रतिशत वाले जिलेबाँसवाड़ा (76.4%), डूंगरपुर (70.8%), प्रतापगढ़ (63.4%)
ST का 24% से अधिक वाले जिले5 जिले — बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर
सर्वाधिक ST जनसंख्या (संख्या में)उदयपुर (15,25,289)
दूसरी सर्वाधिक ST जनसंख्याजयपुर (5,27,966)
न्यूनतम ST जनसंख्याबीकानेर (मात्र 7,779)
न्यूनतम ST प्रतिशतबीकानेर (0.3%), नागौर (0.3%)
ST की सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर (2001-11)नागौर (60.4%)
ST का न्यूनतम लिंगानुपातकरौली

राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ (जनसंख्या क्रम में)

क्रमजनजातिविशेषतासर्वाधिक क्षेत्र
1मीणाराजस्थान की सबसे बड़ी जनजातिजयपुर, दौसा
2भीलदूसरी सबसे बड़ी जनजातिउदयपुर, बाँसवाड़ा
3गरासियातीसरी सबसे बड़ी जनजातिसिरोही, पाली
4सहरियाराज्य की एकमात्र आदिम जनजाति (Primitive Tribe)बारां (सर्वाधिक), कोटा (दूसरा)
💡 जनजातीय जनसंख्या की सबसे आसान ट्रिक

मीणा + भील जनजाति मिलकर राजस्थान की कुल जनजातीय जनसंख्या का 90% से भी अधिक हिस्सा बनाते हैं — यानी अगर आप सिर्फ इन दो जनजातियों को अच्छे से याद रखें, तो राज्य की लगभग पूरी आदिवासी आबादी का हिसाब समझ आ जाएगा। सहरिया जनजाति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य की एकमात्र 'आदिम जनजाति' (Primitive Tribal Group) है — यानी यह सबसे पिछड़ी व सबसे कम विकसित जनजातीय समूह मानी जाती है, जिसे विशेष सरकारी संरक्षण मिलता है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में SC/ST जनसंख्या का जिलेवार वितरण एवं प्रमुख जनजातीय क्षेत्र

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11धार्मिक जनसंख्या एवं भाषा संबंधी तथ्य

धर्मप्रतिशतसर्वाधिक जनसंख्या (जिला)सर्वाधिक प्रतिशत (जिला)
हिन्दू88.49%जयपुरदौसा — राज्य में सर्वाधिक हिन्दू प्रतिशत
मुस्लिम9.07%जयपुरजैसलमेर (25.10%) — अजमेर में भी 12.16%
सिक्ख1.27%श्रीगंगानगरश्रीगंगानगर
जैन0.91%जयपुरउदयपुर
ईसाई0.14%बाँसवाड़ाबाँसवाड़ा
बौद्ध0.02%अलवरअलवर

12कार्य-सहभागिता, शिशु मृत्यु दर एवं जीवन प्रत्याशा

A. कार्य-सहभागिता दर (Work Participation Rate)

कार्य-सहभागिता दर का मतलब है — कुल जनसंख्या में से कितने प्रतिशत लोग किसी न किसी काम (नौकरी, खेती, मज़दूरी आदि) में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।

विषयआँकड़ा
राजस्थान की कुल कार्य-सहभागिता दर43.6%
भारत की कार्यशील जनसंख्या (15-64 वर्ष)39.8%
पुरुष कार्य-सहभागिता दर51.5%
स्त्री कार्य-सहभागिता दर35.1%
सर्वाधिक कार्य-सहभागिता दर वाला जिलाप्रतापगढ़ (55.50%)
कुल श्रमिकों में सीमांत श्रमिक (राजस्थान)29.5% (सीमांत श्रमिक = साल में 6 महीने से कम काम करने वाले)
कुल श्रमिकों में सीमांत श्रमिक (भारत)24.8%

B. शिशु मृत्यु दर (IMR) एवं जीवन प्रत्याशा

विषयआँकड़ा
शिशु मृत्यु दर — राजस्थान (SRS 2017/2020)32 (प्रति 1000 जीवित जन्म पर)
शिशु मृत्यु दर — भारत28
शिशु मृत्यु दर — 2016 (आर्थिक समीक्षा 2017-18 अनुसार)41
जीवन प्रत्याशा — राजस्थान (SRS 2016-20)69.4 वर्ष
जीवन प्रत्याशा — भारत70 वर्ष
पुरुष जीवन प्रत्याशा (2013-17)66.3 / 68.5 वर्ष
💡 शिशु मृत्यु दर व जीवन प्रत्याशा का संबंध

शिशु मृत्यु दर (IMR) जितनी कम होगी, जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) उतनी ही बेहतर होगी — क्योंकि दोनों का सीधा संबंध स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता से है। राजस्थान की शिशु मृत्यु दर (32) भारत के औसत (28) से थोड़ी ज़्यादा है, जो दिखाता है कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में अभी भी सुधार की गुंजाइश है, हालाँकि 2016 के 41 की तुलना में यह काफी सुधरी है।

13जनसंख्या नीति (राज्य एवं राष्ट्रीय)

नीतितिथि
राजस्थान राज्य जनसंख्या नीति20 जनवरी, 2000
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति15 फरवरी, 2000

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के उद्देश्य (तीन स्तर)

उद्देश्य का प्रकारलक्ष्य
⚡ तात्कालिक उद्देश्य (Immediate)गर्भ निरोधक एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाना
🕐 मध्यकालिक उद्देश्य (Medium-term)वर्ष 2010 तक TFR (कुल प्रजनन दर) को 2.1 तक लाना
🏛️ दीर्घकालिक उद्देश्य (Long-term)वर्ष 2045 तक स्थिर जनसंख्या (Stable Population) के लक्ष्य को प्राप्त करना

विश्व जनसंख्या दिवस: प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2024 की थीम थी: "किसी को पीछे न छोड़ना, सभी की गिनती करना" — जो दिखाती है कि सटीक जनगणना करना कितना ज़रूरी माना जाता है, ताकि कोई भी नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।

14नवीनतम अपडेट 2025-26 (Census 2027 एवं जातिगत जनगणना)

यह अध्याय पूरी तरह जनगणना 2011 के आँकड़ों पर आधारित है, क्योंकि यही भारत की आखिरी पूर्ण जनगणना है। लेकिन जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार अगली जनगणना (16वीं जनगणना) से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्हें जानना परीक्षा की दृष्टि से बेहद ज़रूरी है।

💡 अगली जनगणना (2027) — 6 वर्ष की देरी के बाद

भारत की अगली जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी (क्योंकि जनगणना हर 10 साल में होती है, और पिछली 2011 में हुई थी), लेकिन कोविड-19 महामारी सहित कई कारणों से यह लगातार टलती रही। जून 2025 में भारत सरकार ने घोषणा की कि जनगणना का पहला चरण (मकान-गणना/Housing Census — HLO) अक्टूबर 2026 से शुरू होगा, और जनसंख्या गणना (Population Enumeration) मार्च 2027 में होगी। वास्तव में, 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण (House Listing and Housing Census) पहले ही शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर तक चलेगा — यह अलग-अलग राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की समय-सीमा के अनुसार तय किया गया है। इस तरह यह भारत की 16वीं जनगणना होगी।

💡 जातिगत जनगणना (Caste Census) — 94 वर्षों बाद पहली बार

30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय राजनीतिक मामलों की समिति (Cabinet Committee on Political Affairs) ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना को भी शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया — यह सन् 1931 के बाद पहली बार होगा जब भारत में जातिगत जनगणना की जाएगी। इस 16वीं जनगणना में हर व्यक्ति की विशिष्ट जाति (Specific Jati) दर्ज की जाएगी, न कि सिर्फ SC/ST जैसी व्यापक श्रेणियाँ। इसे भारत की प्रथम डिजिटल जनगणना (Digital Census) भी कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

समयसीमा — याद रखें: चरण-1 (मकान-गणना): 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक। चरण-2 (जनसंख्या गणना + जातिगत गणना): मार्च 2027। प्रारंभिक (Provisional) परिणाम: 2027 के अंत तक अपेक्षित। पूर्ण अंतिम रिपोर्ट: 2028 के अंत तक अपेक्षित। इस तरह राजस्थान सहित पूरे भारत के लिए अगले 1-2 वर्ष जनगणना की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, और इस अध्याय के आँकड़े (जो अभी 2011 पर आधारित हैं) आने वाले समय में 2027 की जनगणना के बाद पूरी तरह अद्यतन होंगे।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — Census 2027 के अंतर्गत राजस्थान के जिलेवार House Listing चरण की प्रगति दर्शाने हेतु

15त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

15.1 Rapid Fire — एक दृष्टि में

विषयउत्तर
राजस्थान की जनसंख्या (2011)6.85 करोड़
राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (2011)200/किमी²
राजस्थान का लिंगानुपात (2011)928
बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष)888
कुल साक्षरता दर66.11%
पुरुष साक्षरता79.19%
महिला साक्षरता52.12%
दशकीय वृद्धि दर (2001-2011)21.3%
SC प्रतिशत17.8%
ST प्रतिशत13.5%
हिन्दू जनसंख्या88.49%
मुस्लिम जनसंख्या9.07%
कार्य-सहभागिता दर43.6%
सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिलाजयपुर (66.26 लाख)
न्यूनतम जनसंख्या वाला जिलाजैसलमेर (6.69 लाख)
सर्वाधिक घनत्वजयपुर (595)
न्यूनतम घनत्वजैसलमेर (17)
सर्वाधिक लिंगानुपातडूंगरपुर (994)
न्यूनतम लिंगानुपातधौलपुर (846)
सर्वाधिक बाल लिंगानुपातबाँसवाड़ा (934)
न्यूनतम बाल लिंगानुपातझुंझुनूं (837)
सर्वाधिक साक्षरताकोटा (76.6%)
न्यूनतम साक्षरताजालौर (54.9%)
सर्वाधिक SC%गंगानगर (36.6%)
सर्वाधिक ST%बाँसवाड़ा (76.4%)
सर्वाधिक दशकीय वृद्धिबाड़मेर (32.5%)
न्यूनतम दशकीय वृद्धिगंगानगर (10.0%)

Memory Tricks (याद रखने की ट्रिक्स)

🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. राजस्थान क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य (10.4% हिस्सा) है, लेकिन जनसंख्या में सिर्फ 5.66% हिस्सा रखता है — यानी जनसंख्या घनत्व अपेक्षाकृत बहुत कम (200/किमी²) है, जो भारत के औसत (382) से लगभग आधा है 2. राजस्थान की दशकीय वृद्धि दर 1991-2001 के 28.41% से घटकर 2001-2011 में 21.3% हो गई — यह दिखाता है कि राज्य जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हालाँकि 1911-1921 का 'जनसंख्या विभाजक दशक' (प्लेग महामारी के कारण -6.29% वृद्धि) इतिहास का इकलौता अपवाद रहा 3. लिंगानुपात (928) एवं बाल लिंगानुपात (888 — जो 2001 से 21 अंक घट गया) दोनों राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि राज्य के किसी भी जिले का लिंगानुपात 1000 से ऊपर नहीं है 4. साक्षरता (66.11%) में पुरुष-महिला अंतर (लगभग 27%) देश में सर्वाधिक है, जो दिखाता है कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक होना चाहिए 5. SC (17.8%) + ST (13.5%) मिलकर राज्य की जनसंख्या का 31.3% हिस्सा बनाते हैं — मीणा व भील (जनजातियों में) तथा गंगानगर/हनुमानगढ़ (SC सांद्रता में) क्रमशः सबसे महत्वपूर्ण समूह व क्षेत्र हैं 6. भारत अब 6 वर्ष की देरी के बाद 2027 में अपनी 16वीं जनगणना करवाने जा रहा है, जिसमें 1931 के बाद पहली बार जातिगत आँकड़े भी दर्ज होंगे — इस अध्याय के सभी आँकड़े अभी 2011 जनगणना पर आधारित हैं, और 2027 की जनगणना के बाद राजस्थान की जनसंख्या तस्वीर की पूरी तरह नई और अद्यतन जानकारी मिलेगी, जो अगले अध्यायों (शहरीकरण, जनजातियाँ) से भी सीधे जुड़ी हुई है

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान का जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किमी) कितना है? [RAS Pre. 2013] Q2. राजस्थान में 2011 में न्यूनतम जनसंख्या घनत्व किस जिले का है? [RPSC 2018] Q3. 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान का लिंगानुपात कितना था? [Patwar 2016] Q4. राजस्थान में 2011 में सर्वाधिक लिंगानुपात किस जिले में था? [RAS Pre. 2016] Q5. राजस्थान की 2011 की कुल साक्षरता दर क्या थी? [SSC 2019] Q6. जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान में ST का प्रतिशत क्या है? [RAS Pre. 2018] Q7. राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर किस दशक (1971-81) में कितनी थी? [RPSC 2020] Q8. "जनसंख्या विभाजक दशक" किसे कहते हैं? [RAS Pre. 2021]

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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