💧 अध्याय 8/14 — राजस्थान भूगोल

सिंचाई

Irrigation | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. सिंचाई के साधन एवं परियोजना वर्गीकरण
  2. बहुउद्देशीय परियोजनाएँ — परिचय
  3. नदी घाटी परियोजनाएँ
  4. नहर परियोजनाएँ
  5. PKC-ERCP परियोजना (पूर्वी राजस्थान)
  6. अन्य प्रमुख बाँध परियोजनाएँ
  7. जिलेवार महत्वपूर्ण बाँध एवं परियोजनाएँ
  8. जल संरक्षण तकनीकें — पारंपरिक
  9. जल संरक्षण तकनीकें — आधुनिक
  10. प्रमुख योजनाएँ एवं अभियान
  11. भूजल प्रबंधन एवं जल नीति
  12. नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)
  13. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?

ज़रा सोचिए — एक नहर जो पंजाब के सतलज-व्यास नदियों से निकलकर लगभग 650 किलोमीटर का सफ़र तय करके राजस्थान के सबसे सूखे रेगिस्तान (जैसलमेर) तक पानी पहुँचाती है। यही है इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) — जिसे लोग प्यार से 'मरुगंगा' कहते हैं, यानी रेगिस्तान की गंगा! इसने पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर ही बदल दी — जहाँ पहले सिर्फ रेत के टीले थे, वहाँ आज गेहूँ व कपास के लहलहाते खेत हैं। और क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में एक ऐसी परियोजना भी है, जिसमें खेतों तक पानी नहरों से नहीं, बल्कि पूरी तरह ड्रिप (बूंद-बूंद) और फव्वारा पद्धति से पहुँचाया जाता है? यह है नर्मदा नहर परियोजना — जो राज्य की पहली और एकमात्र ऐसी परियोजना है, जहाँ पानी की एक-एक बूंद सीधे पौधों की जड़ों तक भेजी जाती है, ताकि रेगिस्तान में पानी की एक बूंद भी बर्बाद न हो। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सदियों पहले जब कोई बड़ी नहर या बाँध नहीं था, तब भी राजस्थान के लोगों ने बावड़ी, टांका, खड़ीन और जोहड़ जैसी अद्भुत परंपरागत तकनीकों से पानी बचाना सीख लिया था — यही वजह है कि आज भी राजस्थान को जल-प्रबंधन की सबसे समृद्ध परंपरा वाला राज्य माना जाता है। आइए, इस अध्याय में राजस्थान की सभी प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं और जल संरक्षण तकनीकों को विस्तार से समझते हैं।

1सिंचाई के साधन एवं परियोजना वर्गीकरण

A. सिंचाई के साधन

राजस्थान में खेतों तक पानी पहुँचाने के मुख्यतः 5 साधन हैं। इनमें नलकूप (Tube-well) का योगदान सबसे अधिक है, जो दिखाता है कि राजस्थान की सिंचाई आज भी बहुत हद तक भूजल (ज़मीन के नीचे के पानी) पर निर्भर है।

साधनसिंचाई में योगदानसर्वाधिक जिलाविशेष
नलकूप (Tube-well)49.94%जयपुरसर्वाधिक योगदान
कुएँ (Wells)24.41%जयपुर
नहर (Canal)23.05% (नए आँकड़े: 29.52-29.75%)श्रीगंगानगरदूसरा स्थान
तालाब (Tank)0.43% (नए आँकड़े: 0.40%)भीलवाड़ा/पालीसबसे कम योगदान
अन्य स्रोत2.41%

कुल सिंचित क्षेत्र: राजस्थान का कुल सिंचित क्षेत्र 35,47,212 हेक्टेयर है, जबकि कुल खेती योग्य क्षेत्र 2,23,25,051 हेक्टेयर है — यानी अभी भी खेती योग्य ज़मीन का बड़ा हिस्सा सिंचाई से वंचित है। राजस्थान के 13 नदी बेसिनों में कुल आंतरिक सतही जल क्षमता 15.86 MAF (Million Acre Feet) है, जो भारत के कुल जल का मात्र 1.16% है — यानी देश का सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल में) भी जल के मामले में बहुत गरीब है। राजस्थान की जल नीति को 17 फरवरी 2010 को राज्य मंत्रिमंडल ने मंज़ूरी दी थी।

B. सिंचाई परियोजनाओं का वर्गीकरण (आकार के अनुसार)

क्रमपरियोजना का प्रकारसिंचित क्षेत्रविशेष
(i)लघु सिंचाई परियोजना0 - 2,000 हेक्टेयरसर्वाधिक योगदान (संख्या में सबसे ज़्यादा)
(ii)मध्यम सिंचाई परियोजना2,000 - 10,000 हेक्टेयर
(iii)वृहद सिंचाई परियोजना10,000 हेक्टेयर या अधिकबड़े बाँध/नहर (जैसे IGNP, चंबल)

2बहुउद्देशीय परियोजनाएँ — परिचय

बहुउद्देशीय परियोजना (Multi-Purpose Project) वह परियोजना है, जिसके दो या दो से अधिक उद्देश्य हों — जैसे सिंचाई, पेयजल, जल विद्युत आदि एक साथ। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बहुउद्देशीय परियोजनाओं को 'आधुनिक भारत के मंदिर' (Temples of Modern India) कहा था — क्योंकि जिस तरह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र होते हैं, उसी तरह ये परियोजनाएँ आधुनिक भारत के विकास की आस्था का केंद्र बनीं।

विश्व की पहलीभारत की पहलीराजस्थान की पहली
टेनेसी (USA) — 1933दामोदर घाटी परियोजना — 1948गंग नहर — 1950 के बाद

राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

🏞️ I. नदी घाटी परियोजनाएँ
  • 1. चंबल बहुउद्देशीय परियोजना
  • 2. माही बजाज सागर परियोजना
  • 3. भाखड़ा-नांगल परियोजना
  • 4. व्यास बहुउद्देशीय परियोजना
  • 5. रेणुकाजी (गिरी) परियोजना
  • 6. लखवार (यमुना) परियोजना
🌊 II. नहर परियोजनाएँ
  • 1. गंग नहर (बीकानेर नहर)
  • 2. इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)
  • 3. राजीव गांधी सिद्धमुख-नोहर नहर
  • 4. यमुना नहर (प्रस्तावित)
  • 5. यमुना लिंक/गुड़गाँव नहर
  • 6. भरतपुर नहर
  • 7. नर्मदा नहर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं (नदी घाटी + नहर) की स्थिति

3नदी घाटी परियोजनाएँ

3.1 चंबल बहुउद्देशीय परियोजना

विवरणजानकारी
सहयोगी राज्यराजस्थान एवं मध्यप्रदेश — हिस्सेदारी 50:50
नदीचंबल नदी
उद्देश्यभू-क्षरण एवं बाढ़ की समस्या समाधान + सिंचाई + जल विद्युत
कुल जल विद्युत386 MW (राजस्थान: 193 MW | मध्यप्रदेश: 193 MW)
कुल सिंचित क्षेत्र4.5 लाख हेक्टेयर
बाँधों का सही क्रम (प्रवाह की दिशा में)गांधी सागर → राणा प्रताप सागर → जवाहर सागर → कोटा बैराज

चंबल परियोजना के 4 बाँध (3 चरणों में निर्मित)

चरणबाँधस्थानविद्युत (MW)विशेषताएँ
I (प्रथम)गांधी सागरमंदसौर, चौरासीगढ़ (M.P.) के निकट5×23 = 115 MWचंबल पर सबसे ऊँचा व बड़ा बाँध; ऊँचाई 62.17 मी; शुरुआत 1959
I (प्रथम)कोटा बैराज (सिंचाई बाँध)कोटा (राजस्थान), शुरुआत 1960शून्य (0) — सिंचाई मात्रएकमात्र बाँध जिसमें विद्युत नहीं; कैचमेंट सर्वाधिक; बायीं नहर (कोटा, बूंदी) + दायीं नहर (कोटा, बारां, M.P.); दायीं नहर पर 8 लिफ्ट नहरें राजस्थान में
II (द्वितीय)राणा प्रताप सागररावतभाटा, चित्तौड़गढ़4×43 = 172 MW (सर्वाधिक)राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध; भराव क्षमता 113 वर्ग किमी (राज. में सर्वाधिक); रावतभाटा परमाणु विद्युत गृह (कनाडा सहयोग) निकट; शुरुआत 1970; आइकोनिक बाँध
III (तृतीय)जवाहर सागर (कोटा डैम)कोटा-बूंदी सीमा, शुरुआत 19723×33 = 99 MWपिकअप बाँध (गांधी सागर + राणा प्रताप सागर का जल संग्रहण करता है); चंबल का सर्वाधिक प्रदूषण यहीं दर्ज होता है

कोटा बैराज की लिफ्ट नहरें: कोटा बैराज से कुल 14 लिफ्ट नहरें निकलती हैं — 8 राजस्थान में एवं 6 मध्यप्रदेश में। राजस्थान की 8 लिफ्ट नहरें हैं: दोगोद, जालीपुरा, गठणेश, गणेगंज+अनार, वाणेरावांज, अंता लिफ्ट, अंता माइनर, सीरखंड भोरसन।

3.2 माही बजाज सागर बहुउद्देशीय परियोजना

विवरणजानकारी
सहयोगी राज्यराजस्थान (45%) + गुजरात (55%)
विद्युत स्वामित्व100% विद्युत केवल राजस्थान को (गुजरात का कोई हिस्सा नहीं)
मुख्य बाँधमाही बजाज सागर बाँध — बोरखेड़ा गाँव, बाँसवाड़ा | लंबाई: 3109 मीटर (राजस्थान का सबसे लंबा बाँध)
गुजरात में बाँधकड़ाणा बाँध (गुजरात) | जल विद्युत: 240 MW
विद्युत उत्पादन (राजस्थान)प्रथम चरण (1986): 2×25 MW = 50 MW | द्वितीय चरण (1989): 2×45 MW = 90 MW | कुल: 140 MW
कागदी पिकअप बाँधबाँसवाड़ा में स्थित; ऊबड़-खाबड़ भूमि के कारण मुख्य बाँध से सीधी नहरें नहीं निकल पातीं, इसलिए नहरों हेतु यह अलग पिकअप बाँध बनाया गया
लाभआदिवासी क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन — सर्वाधिक लाभ बाँसवाड़ा को मिला

माही से संबंधित अन्य परियोजनाएँ

💡 जाखम बहुउद्देशीय परियोजना — एशिया का सबसे ऊँचा चिनाई वाला बाँध

जाखम नदी (माही की सहायक नदी) पर प्रतापगढ़ ज़िले के अनूपपुरा के पास बना यह बाँध ऊँचाई में 81 मीटर एवं लंबाई में 253 मीटर है — यह एशिया का चिनाई (Masonry) से बना सबसे ऊँचा बाँध है, और साथ ही राजस्थान का भी सबसे ऊँचा बाँध है। इसका शिलान्यास 14 मई 1968 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया ने किया था। लाभार्थी ज़िले: प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सलूंबर, उदयपुर।

3.3 भाखड़ा-नांगल बहुउद्देशीय परियोजना — भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना

विवरणजानकारी
नदीसतलज नदी
सहयोगी राज्यपंजाब, हरियाणा, राजस्थान (15.22%)
भाखड़ा बाँधबिलासपुर, हिमाचल प्रदेश | भारत का सबसे ऊँचा गुरुत्वीय (Gravity) बाँध — ऊँचाई 290 मीटर | पीछे बनी झील का नाम: गोविंद सागर झील
नांगल बाँधरोपड़/रूपनगर, पंजाब | बायीं नहर: भाखड़ा नहर (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) | दायीं नहर: बिस्त नहर (पंजाब)
राजस्थान का हिस्सा15.22% | विद्युत: 227.32 MW | सिंचाई: 2.3 लाख हेक्टेयर
सर्वाधिक लाभार्थीसिंचाई: हनुमानगढ़ | विद्युत: चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, झुंझुनूं, बीकानेर

नेहरूजी की मशहूर उक्ति: नेहरूजी ने भाखड़ा-नांगल परियोजना को 'आधुनिक/पुनरुत्थित भारत का नवीन मंदिर' एवं 'चमत्कारी विराट वस्तु' कहा था। भाखड़ा-नांगल — भारत एवं राजस्थान दोनों के लिए सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना मानी जाती है।

3.4 व्यास बहुउद्देशीय परियोजना

महत्वपूर्ण समझौते: राजीव गांधी-लोंगोवाल समझौता (1985) एवं इराड़ी कमीशन (1986) — दोनों व्यास परियोजना के जल-बँटवारे से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं।

3.5 रेणुकाजी एवं लखवार परियोजनाएँ

विवरणरेणुकाजी परियोजनालखवार (यमुना) परियोजना
नदीगिरी नदी (सिरमौर, हिमाचल प्रदेश)यमुना (देहरादून, उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड)
वित्त सहयोगकेंद्र 90 : राज्य 10केंद्र 90 : राज्य 10
विद्युत क्षमता40 MW (प्रस्तावित)300 MW (प्रस्तावित)
लाभार्थी राज्यहिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्लीहिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली

4नहर परियोजनाएँ

4.1 गंग नहर परियोजना (बीकानेर नहर)

गंग नहर राजस्थान की सिंचाई का इतिहास शुरू करने वाली सबसे पहली परियोजना है — इसे विश्व की सबसे पुरानी व विकसित नहरों में गिना जाता है।

विवरणजानकारी
विशेष दर्जाविश्व की सबसे पुरानी व विकसित नहर | राजस्थान की प्रथम नहर सिंचाई परियोजना | भारत/राजस्थान की प्रथम पक्की नहर | राजस्थान की प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना
निर्मातामहाराजा गंगासिंह जी (बीकानेर) — इन्हें 'आधुनिक भारत का भागीरथ' कहा जाता है
निर्माण काल1921-1927 ई. | नींव: 5 सितंबर 1921 | उद्घाटन: 26 अक्टूबर 1927 (वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा)
जल स्रोतसतलज नदी — हुसैनीवाला, फिरोजपुर (पंजाब)
राजस्थान प्रवेशसंखा गाँव, श्रीगंगानगर
लंबाईहुसैनीवाला से शिवपुर = 137 किमी | शिवपुर → श्रीगंगानगर → जोरावरपुर → पदमपुर → स्वरूप शहर
विशेषनहर का पेटा (तल) सीमेंट से निर्मित है | गंगानगर की जीवन रेखा मानी जाती है
लिफ्ट नहरें(i) करणी लिफ्ट (ii) लक्ष्मी नारायण लिफ्ट (iii) लालगढ़ लिफ्ट (iv) समीजा लिफ्ट
सर्वाधिक लाभार्थीश्रीगंगानगर — इसे 'राजस्थान का धान्यागार' कहा जाता है, क्योंकि यहाँ गंग नहर + IGNP दोनों से सिंचाई होती है

4.2 इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) — भारत की सबसे विशाल बहुउद्देशीय नहर

IGNP को 'मरुगंगा', 'पश्चिमी राजस्थान की जीवन रेखा' एवं 'मरुतांगा' जैसे प्यारभरे नामों से पुकारा जाता है — यह भारत की सबसे विशाल बहुउद्देशीय नहर परियोजना है।

विवरणजानकारी
प्रारूप/कल्पनाकारराय बहादुर कँवर सेन (1948) — उन्होंने 'बीकानेर राज्य के लिए पानी की आवश्यकता' नामक पुस्तक लिखी थी
नींव31 मार्च 1958 — गोविंद वल्लभ पंत (तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री) द्वारा
उद्घाटन11 अक्टूबर 1961 — डॉ. एस. राधाकृष्णन (तत्कालीन उपराष्ट्रपति) द्वारा
पहला नामराजस्थान नहर | नाम परिवर्तन: 2 नवंबर 1982-84 के आसपास इंदिरा गांधी नहर किया गया
जल स्रोतसतलज + व्यास नदी — हरिके बैराज, फिरोजपुर (पंजाब) | ध्यान रहे — यह नहर हरियाणा से होकर नहीं गुज़रती
राजस्थान प्रवेशमसीतावाली गाँव, हनुमानगढ़
कुल लंबाई649 किमी | मुख्य नहर: 445 किमी | फीडर नहर: 204 किमी (जिसमें से राजस्थान में सिर्फ 35 किमी)
राजस्थान में कुल लंबाई445 + 35 = 480 किमी
सिंचित क्षेत्रप्रस्तावित: 19.63 लाख हेक्टेयर | वर्तमान स्वीकृत (2005): 16.17 लाख हेक्टेयर
विद्युत क्षमता23.85 MW
वित्त सहयोगविश्व बैंक | संभागीय मुख्यालय: बीकानेर

IGNP — दो चरणों में निर्माण

चरणफीडर नहरमुख्य नहरविशेष
प्रथम चरण (393 किमी)204 किमी: हरिके बैराज → मसीतावाली (हनुमानगढ़)189 किमी: मसीतावाली → पूंगल हैड (सत्तासर, बीकानेर)
द्वितीय चरण (266 किमी)256 किमी: पूंगल हैड → मोहनगढ़ (जैसलमेर)मोहनगढ़ = IGNP का 'Zero Point' (अंतिम छोर); बाबा रामदेव उपशाखा: 165 किमी; अंतिम प्रस्ताव: गडरा रोड, बाड़मेर तक विस्तार

IGNP से लाभान्वित 10 जिले

💧 सिंचाई + पेयजल (6 जिले)
  • हनुमानगढ़
  • गंगानगर
  • चूरू
  • बीकानेर
  • जोधपुर
  • जैसलमेर
🥤 केवल पेयजल (4 जिले)
  • नागौर
  • बाड़मेर
  • सीकर
  • झुंझुनूं

जिला पुनर्गठन के बाद अपडेट: नए जिला पुनर्गठन के बाद फलौदी को सिंचाई + पेयजल दोनों श्रेणी में तथा डीडवाना-कुचामन को सिर्फ पेयजल श्रेणी में शामिल किया गया है। IGNP से सर्वाधिक लाभान्वित जिला बीकानेर है, क्योंकि यहाँ सर्वाधिक लिफ्ट नहरें व शाखाएँ हैं।

4.3 IGNP की 7 लिफ्ट नहरें

लिफ्ट नहर का मतलब है — जहाँ पानी को पंप की मदद से ऊँचाई पर उठाकर ('लिफ्ट' करके) आगे भेजा जाता है, क्योंकि साधारण ढाल (Gravity) से पानी वहाँ नहीं पहुँच सकता। सभी 7 लिफ्ट नहरें IGNP की बायीं ओर स्थित हैं, क्योंकि बायीं ओर का धरातल (ज़मीन) ऊँचा है — इनकी कुल लंबाई 1495 किमी है।

क्रमवर्तमान नामपुराना नामलाभार्थी जिलेविशेषताएँ
1चौधरी कुंभाराम आर्य (नोहर-साहवा)गंधेली-साहवा लिफ्टहनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूंसहायक नहरों सहित सबसे लंबी; सर्वाधिक जिलों में विस्तृत
2कँवरसेन (लूणकरणसर)लूणकरणसर लिफ्टगंगानगर, बीकानेरIGNP की प्रथम एवं सबसे लंबी लिफ्ट; बीकानेर शहर को पेयजल ('बीकानेर की जीवन रेखा')
3पन्नालाल बारूपाल (गजनेर)गजनेर लिफ्टबीकानेर, नागौरजल स्रोत: हरिके बैराज; जायल डी-फ्लोराइड पेयजल परियोजना (नागौर) इसी पर आधारित
4वीर तेजाजी (बांगड़सर)बांगड़सर लिफ्टकेवल बीकानेरIGNP की सबसे छोटी लिफ्ट नहर
5डॉ. करणी सिंह (कोलायत)कोलायत लिफ्टबीकानेर, जोधपुर (फलौदी)
6गुरु जंभेश्वर (फलौदी)फलौदी लिफ्टबीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर
7जयनारायण व्यास (पोकरण)पोकरण लिफ्टजोधपुर, फलौदी, जैसलमेर

IGNP की 8 शाखाएँ (उत्तर से दक्षिण क्रम)

क्रमशाखा का नामक्रमशाखा का नाम
1सूरतगढ़5बिरसलपुर
2अनूपगढ़6चारणवाला
3पूगलगढ़7शहीद बीरबल
4दंतोर (दातोर)8सागरमल गोपा

4.4 IGNP — लाभ एवं हानियाँ

✅ IGNP के लाभ
  • हरित क्रांति — उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि
  • चारागाह भूमि में बढ़ोतरी
  • किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार
  • जैव विविधता में बढ़ोतरी
  • मत्स्य पालन — गंगानगर, हनुमानगढ़ में विकसित
  • जल विद्युत: 23.85 MW उत्पादन
  • नए उद्योग — पेट्रोलियम रिफाइनरी जैसे उद्योग स्थापित हुए
  • इको टूरिज्म में बढ़ोतरी
  • मरुस्थलीकरण की रोकथाम
❌ IGNP की हानियाँ एवं समाधान
  • सेम/जलाक्रांता (Water Logging) → उपाय: सफेदा/यूकेलिप्टस वृक्षारोपण (इंडो-डच प्रोग्राम, नीदरलैंड)
  • लवणीयता → उपाय: जिप्सम खाद/बूंद-बूंद (ड्रिप)/फव्वारा सिंचाई
  • मरु जैव विविधता में कमी → उपाय: डेजर्ट थीम पार्क, कैक्टस पार्क (जैसलमेर-कुलधरा), किशन बाग (जयपुर)
  • भूमि उर्वरता में कमी → उपाय: जैविक खादों का उपयोग
  • भूमि विवाद → उपाय: 'प्रशासन गाँवों के संग' अभियान

निष्कर्ष: ऊपर बताई गई समस्याओं के समाधान के बाद, IGNP राजस्थान के लिए वास्तव में एक वरदान साबित हुई है — यह दिखाता है कि किसी भी बड़ी परियोजना में शुरुआती समस्याएँ आना स्वाभाविक है, लेकिन सही योजना व निरंतर सुधार से उसे वरदान में बदला जा सकता है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) का पूरा मार्ग, 7 लिफ्ट नहरें एवं 8 शाखाएँ

4.5 राजीव गांधी सिद्धमुख-नोहर नहर

रोचक तथ्य: मई 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण (पोखरण-II) के बाद यूरोपीय संघ ने इस परियोजना को आर्थिक सहयोग देना बंद कर दिया था — यह दिखाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाएँ स्थानीय विकास परियोजनाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं। ध्यान रहे — बीकानेर इस परियोजना से लाभान्वित नहीं होता।

4.6 यमुना नहर, गुड़गाँव नहर एवं भरतपुर नहर

विवरणयमुना नहर (प्रस्तावित)यमुना लिंक/गुड़गाँव नहर
नदीयमुनायमुना (ओखला, दिल्ली)
सहयोगराजस्थान + हरियाणा (MoU: 17 फरवरी 2014)राजस्थान + हरियाणा | 1966-1985
लाभार्थी जिलेशेखावाटी: चूरू, सीकर, झुंझुनूंभरतपुर, डीग
उद्देश्यपेयजल: चूरू 35,000 + कुल 70,000 हेक्टेयर; द्वितीय चरण: सिंचाई; यमुना जल: 1917 क्यूसेक (जुलाई-अक्टूबर)सिंचाई + पेयजल

भरतपुर नहर: निर्माण: 1964 ई. | सहयोग: राजस्थान + उत्तरप्रदेश | लाभार्थी: भरतपुर | लंबाई: 24 किमी (उत्तर प्रदेश में 15 किमी + राजस्थान में 9 किमी)

4.7 नर्मदा नहर परियोजना — राज्य की एकमात्र पूर्णतः ड्रिप/फव्वारा सिंचाई परियोजना

विवरणजानकारी
संयुक्त राज्यमध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान
मुख्य बाँधसरदार सरोवर बाँध (गुजरात) — नर्मदा नदी पर
राजस्थान का हिस्सा0.50 MAF (नर्मदा जल विवाद प्राधिकरण द्वारा तय)
राजस्थान में लंबाई74 किमी | कुल लंबाई: 832 किमी (458 गुजरात + 74 राजस्थान + शेष अन्य राज्यों में)
राजस्थान प्रवेशसीलू गाँव, जालौर
लाभार्थी जिलेजालौर (76 गाँव) + बाड़मेर (गुढ़ामलानी तहसील) | सिंचित क्षेत्र: 2.46 लाख हेक्टेयर
ड्रिप सिंचाईमूल रूप से इज़राइल की देन — पौधों की जड़ों में सीधे पानी पहुँचाई जाती है
लिफ्ट नहरें(i) सांचौर लिफ्ट (जालौर) (ii) भादरेड़ा लिफ्ट (जालौर) (iii) पनोरिया लिफ्ट (बाड़मेर)
💡 नर्मदा नहर में सिर्फ ड्रिप/फव्वारा सिंचाई ही क्यों अनिवार्य है?

नर्मदा नहर परियोजना राजस्थान के सबसे शुष्क क्षेत्रों (जालौर, बाड़मेर) तक पानी पहुँचाती है, इसलिए यहाँ हर बूंद कीमती है। पारंपरिक नहर सिंचाई में पानी खेत में बहाकर दिया जाता है, जिसमें काफी पानी वाष्पीकरण (भाप बनकर उड़ने) व रिसाव से बर्बाद हो जाता है। लेकिन ड्रिप सिंचाई में पानी सीधे पौधे की जड़ तक एक पतली पाइप से बूंद-बूंद टपकाया जाता है — ठीक वैसे ही जैसे किसी मरीज़ को ड्रिप (सलाइन) चढ़ाई जाती है, सीधे नस में, बिना एक बूंद बर्बाद किए। यही वजह है कि इसे यहाँ अनिवार्य किया गया, ताकि सीमित पानी से अधिकतम खेती हो सके। ध्यान रहे — बाड़मेर एक ऐसा जिला है जो IGNP एवं नर्मदा नहर, दोनों से लाभान्वित होता है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — नर्मदा नहर, राजीव गांधी सिद्धमुख-नोहर एवं यमुना/भरतपुर नहरों का मार्ग

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5PKC-ERCP परियोजना (पूर्वी राजस्थान)

पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) / पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी नवीनतम सिंचाई परियोजना है, जिसका उद्देश्य पूर्वी राजस्थान के जल संकट को स्थायी रूप से हल करना है। इसका MoU (समझौता ज्ञापन) 28 जनवरी 2024 को राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं केंद्र सरकार के बीच हुआ था — इसे 'राम जल सेतु लिंक परियोजना (RSLP)' भी कहा जाता है।

विवरणजानकारी
उद्देश्यचंबल बेसिन की नदियों को आपस में जोड़ना; पूर्वी राजस्थान में पेयजल + सिंचाई; DMIC (दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) को जलापूर्ति; भूजल स्तर में सुधार
नदियाँकुन्नू, कुराल, कालीसिंध, चाकण, पार्वती, मेज → चंबल, बनास, बाणगंगा, गंभीरी
वित्त सहयोगकेंद्र 90 : राज्य 10 | कुल ₹45,000 करोड़ प्रस्तावित
लाभार्थी जनसंख्या3.38 करोड़
लाभार्थी जिले17 जिले (पुराने विभाजन में 13 थे) — कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, टोंक, सवाई माधोपुर, दौसा, करौली, अलवर, धौलपुर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, ब्यावर, अजमेर
सिंचित क्षेत्रराजस्थान: 2.80 लाख हेक्टेयर (राजस्थान+मध्यप्रदेश कुल 5.6 लाख हेक्टेयर)
जल वितरणराजस्थान: 4102 MCM | मध्यप्रदेश: 3120 MCM
बजट स्वीकृति (प्रथम चरण)₹9,600 करोड़ (बजट 2024-25) — रामगढ़, महलपुर व नवनेरा बैराज से बीसलपुर + ईसरदा बाँध भरे जाएँगे

PKC-ERCP के प्रस्तावित 5 बैराज + 2 बाँध

क्रमसंरचनानदीजिला
1रामगढ़ बैराजकूल नदीबारां
2महलपुर बैराजपार्वती नदीबारां
3नवनेरा बैराज (सर्वाधिक भराव क्षमता)कालीसिंध नदीदीगोद, कोटा
4मेज बैराजमेज नदीबूंदी
5राठौड़ बैराजबनास नदीसवाई माधोपुर
6डूंगरी बाँध (जल संग्रहण)बनास नदीसवाई माधोपुर
7ईसरदा बाँधबनास नदीसवाई माधोपुर/टोंक

बैराज बनाम बाँध — अंतर याद रखें: बैराज (Barrage) मुख्यतः जल अपवर्तन (यानी नदी के पानी की दिशा मोड़कर नहर में भेजने) के लिए बनाया जाता है, जबकि बाँध (Dam) जल संग्रहण (यानी बड़ी मात्रा में पानी इकट्ठा करके रखने) के लिए बनाया जाता है — यह ठीक वैसे ही है जैसे बैराज एक 'रास्ता बदलने वाला गेट' हो और बाँध एक 'बड़ा टैंक' हो। ERCP से राजस्थान को अगले 3-4 दशक तक पेयजल सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — PKC-ERCP परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित बैराज एवं बाँधों की स्थिति तथा लाभार्थी 17 जिले

6अन्य प्रमुख बाँध परियोजनाएँ

💡 बीसलपुर परियोजना — राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना

बनास, खारी एवं डाई नदियों के त्रिवेणी संगम पर बनी यह परियोजना (1987-1999 के दौरान निर्मित) राजस्थान का एकमात्र कंक्रीट बाँध है। स्थान: बीसलपुर गाँव, देवली (टोंक)। लाभार्थी: जयपुर, ब्यावर, अजमेर, टोंक। इसे NABARD/RIDF से वित्तीय सहायता मिली थी, और ब्राह्मणी-बनास परियोजना (बजट 2018-19) से इसमें पानी की आवक और बढ़ेगी।

💡 जवाई बाँध — पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध

'मारवाड़ का अमृतसरोवर' कहलाने वाला यह बाँध पाली ज़िले में जवाई नदी पर बना है। इसकी नींव 13 मई 1946 को जोधपुर के महाराजा उम्मेदसिंह ने रखी थी, और इसे इंजीनियर एडगर व फर्ग्यूसन ने डिज़ाइन किया था। पेयजल: जोधपुर + पाली को मिलता है, जबकि सिंचाई: जालौर + पाली में होती है। सेई परियोजना के तहत कोटड़ा (उदयपुर) से सुरंग बनाकर जवाई बाँध तक पानी लाया जाता है।

💡 परवन परियोजना

परवन नदी पर, खानपुर (झालावाड़) के ग्राम अकावद कलाँ में स्थित यह परियोजना — पेयजल: 1821 गाँवों को, सिंचाई: 2,01,400 हेक्टेयर (झालावाड़, बारां, कोटा के 637 गाँव) में उपलब्ध कराती है। इसे 2023 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था।

7जिलेवार महत्वपूर्ण बाँध एवं परियोजनाएँ

नीचे दी गई तालिका में राजस्थान के प्रत्येक प्रमुख जिले के महत्वपूर्ण बाँधों/जलाशयों की सूची दी गई है — यह परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खंड है।

जिलाप्रमुख बाँध/परियोजनाएँ
कोटानवनेरा/नौनेरा बाँध (कालीसिंध, दीगोद), गोपालपुरा, तकली (धानक्या, रामगंज मंडी), सावन-भादो (सांगोद), आलनिया, हरिश्चंद्र सागर (33 गेटों वाला, कालीसिंध-झालावाड़)
झालावाड़भीमसागर (उजाड़ नदी), हरिश्चंद्र सागर, छापी, गागरीन (कालापीपल-पिड़ावा), पीपलाद/पिप्पलाद (सूलिया चौकी, अकलेरा), चौली, राजगढ़, मनोहरयाना, रेवा, परवन, कालीसिंध परियोजना
बारांल्हासी (खजुरिया, छीपाबड़ौद), परवन लिफ्ट, बिलास (कनवास/किशनगढ़), बेथली, खिरिया, अहमदी, रामगढ़ बैराज (PKC), महलपुर बैराज (PKC), अंधेरी, हथियादेह
बूंदीगरड़दा (पोलासपुरा — 2.90 लाख लोग लाभान्वित), गुढ़ा, चाकन, जैत सागर, नवल सागर, जिगजैग बाँध (लाखेरी), हिंडोली तालाब, मेज बैराज (PKC), बारदड़ा — राज्य में सर्वाधिक बावड़ियाँ बूंदी में ही हैं
सवाई माधोपुरईसरदा बाँध (काफर डैम), इंदिरा लिफ्ट परियोजना, पीपलदा, मोरेल, राठौड़ बैराज (PKC), डूंगरी बाँध (PKC)
दौसामाधोसागर, काला खोह (सबसे बड़ा बाँध), चिरमिरी, झिलमिली, रेडियो सागर
टोंकबीसलपुर परियोजना, बालवा डैम, टोरड़ी सागर, मोरा सागर बाँध
भरतपुरबंध बारेठा (कुकुंद नदी, 1897, राजा रामसिंह के समय, जहाज़ जैसी बनावट), मोती झील (भरतपुर की जीवन रेखा), भरतपुर नहर
धौलपुरतालाब-ए-शाही, धौलपुर लिफ्ट (चंबल, सागरपाडा), पार्वती बाँध, कालितीर परियोजना (चंबल से पार्वती-रामसागर में जलापूर्ति)
करौलीपाँचना बाँध (मिट्टी से निर्मित — भद्रावती, माची, अटा, बरखेड़ा, भैंसावट नदियों का संगम), शाही कुंड, इंदिरा गांधी परियोजना
भीलवाड़ामेजा बाँध (कोठारी नदी, 1972, मेजा पार्क विकसित) — सिंचाई में तालाबों से सर्वाधिक योगदान
उदयपुरसोम-कागदर (ऋषभदेव), मानसी वाकल (उदयपुर को 24 ML पेयजल + 30% हिन्दुस्तान जिंक को; अरावली की दूसरी सुरंग, पहली 1973 में देवास नाई सुरंग), मदार बाँध (बेड़च नदी), टिड्डी बाँध — राज्य में सर्वाधिक झीलें उदयपुर में ही हैं
डूंगरपुरसोम-कमला-अंबा (सोम नदी, आसपुर तहसील + सलूंबर), गैब सागर/गैप सागर, भीखाभाई सागवाड़ा नहर (माही साइफन), कडाना बैक वाटर
बाँसवाड़ामाही बजाज सागर (राज्य का सबसे लंबा बाँध: 3109 मी), कागदी पिकअप बाँध, अनास बाँध (अनास नदी)
प्रतापगढ़जाखम बाँध (81 मी ऊँचा, 253 मी लंबा) — एशिया का चिनाई वाला सर्वोच्च बाँध; पिपलखूंत नहर (माही के दायीं ओर)
पालीजवाई बाँध (पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा), हेमावास, रामेलाव तालाब (सोजत), सेई परियोजना
जालौरबाँकली सिंचाई परियोजना (सुकड़ी नदी), बाँडी-सेदडा, नर्मदा नहर, सांचौर + भादरेड़ा लिफ्ट
चित्तौड़गढ़मातृकुंडिया बाँध (राज्य में सर्वाधिक 52 गेट), घोसुंडा बाँध, ओराई
अजमेरनारायण सागर बाँध (खारी नदी — 'अजमेर का समुद्र', ब्यावर की जीवन रेखा)
राजसमंदनंदसमंद बाँध (राजसमंद की जीवन रेखा)
जयपुरबीसलपुर परियोजना, कानोता बाँध (सर्वाधिक मछली उत्पादन), हिंगोनिया बाँध, पन्ना मीना कुंड, द्रव्यवती नदी (जयपुर की जीवन रेखा)
अलवरसाँकड़ा + मनसासागर (तरुण भारत संघ सहयोग — भाँवता, गढ़बसई गाँव)
झुंझुनूंसरजू सागर/कोट बाँध (शाकंभरी पहाड़ियाँ, उदयपुरवाटी से 13 किमी), पन्नाशाह तालाब (खेतड़ी)
सीकरकोटड़ी बाँध (कांटली नदी, खंडेला — निर्माणाधीन)
जोधपुरपिचियाक बाँध/जसवंत सागर, तख्त सागर, फतेहसागर, रानीसर (टाँका), पदमसर
जैसलमेरगढ़सीसर/गढ़ीसर (1340 ई., रावल गड़सीसिंह — प्रवासी कुरजा पक्षी यहाँ आते हैं; 1909 में टीलां वेश्या का प्रवेश द्वार बना; लोक सांस्कृतिक संग्रहालय भी है), अमर सागर
सिरोहीबत्तीसा नाला, सुकली सेलवाड़ा, दूध बावड़ी, लाहिनी बावड़ी

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के सभी 33 जिलों के प्रमुख बाँध व जलाशयों की स्थिति

8जल संरक्षण तकनीकें — पारंपरिक

बड़ी नहरों व बाँधों से बहुत पहले, राजस्थान के लोगों ने पानी बचाने के लिए कई अद्भुत परंपरागत तकनीकें विकसित कर ली थीं — ये तकनीकें आज भी राजस्थान की जल-प्रबंधन संस्कृति की मिसाल मानी जाती हैं। इन्हें दो भागों में समझा जा सकता है — वर्षा जल आधारित एवं भूजल आधारित।

1. नाड़ी

2. टोबा

3. बावड़ी

💡 बावड़ी की कल्पना कैसे करें?

बावड़ी को ऐसे समझें जैसे किसी उल्टे पिरामिड (सीढ़ीदार सिनेमाघर) की तरह ज़मीन के अंदर बनी एक सुंदर इमारत हो — जहाँ हर मंज़िल पर सीढ़ियाँ नीचे जल स्तर तक जाती हैं। गर्मियों में जब पानी का स्तर नीचे चला जाता है, तब लोग सबसे निचली सीढ़ियों तक जाकर पानी लेते हैं, और मानसून के बाद जब पानी ऊपर आ जाता है, तब ऊपरी सीढ़ियों से ही पानी मिल जाता है — यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है।

4. झालरा

5. खड़ीन

6. बेरी/कुई

7. टांका/कुंड

8. जोहड़/नाड़ा

💡 जोहड़ पुनर्जीवन — राजेंद्र सिंह की कहानी

राजेंद्र सिंह, जिन्हें प्यार से 'जोहड़ वाले बाबा' कहा जाता है, ने राजस्थान के सूखे इलाकों में सैकड़ों पुराने जोहड़ों को फिर से ज़िंदा किया (पुनर्जीवित किया), जिससे कई सूखी नदियाँ फिर से बहने लगीं। इस अद्भुत काम के लिए उन्हें रमन मैग्सेसे पुरस्कार (जिसे 'एशिया का नोबेल पुरस्कार' भी कहा जाता है) मिला। उन्होंने 1975 में जयपुर में 'तरुण भारत संघ' नामक संस्था स्थापित की, जो आज भी जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय है — यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति की मेहनत से पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।

9. तालाब

10-12. अन्य तकनीकें

महत्वपूर्ण शब्द — नेहटा/नेष्टा: नाड़ी या तालाब से अतिरिक्त जल की निकासी के लिए बनाई गई 'पाइप' या 'नाली' को नेहटा/नेष्टा कहते हैं — यह अतिरिक्त पानी को बाढ़ जैसी स्थिति से बचाने के लिए बनाई जाती है।

जल संग्रहण संरचनाओं का वर्गीकरण

🌧️ वर्षा जल आधारित
  • टांका
  • नाड़ी
  • जोहड़
  • खड़ीन
  • तालाब
  • बेरी
  • टोबा
🌊 भू-जल आधारित
  • कुएँ
  • बावड़ी

प्रमुख बावड़ियाँ

बावड़ीजिला
दूध बावड़ीसिरोही
लाहिनी बावड़ीसिरोही
भूत बावड़ी
त्रिमुखी बावड़ीउदयपुर
चाँद बावड़ी (आभानेरी)दौसा
बड़ी/छोटी बावड़ी
नौ मंज़िला बावड़ीनीमराणा (अलवर)
नवलखा बावड़ीडूंगरपुर
अनारकली बावड़ीबूंदी
रानी की बावड़ीबूंदी
गुलाब बावड़ीबूंदी
हाड़ी रानी की बावड़ीटोडारायसिंह (दौसा)
बंगाली बाबा बावड़ीजयपुर
काला हनुमानजी बावड़ीजयपुर

प्रमुख तालाब

तालाबस्थानविशेषता
पदम तालाबरणथम्भौरजंगली जानवरों के पानी पीने का स्थान
काला तालाबखारा (भीलवाड़ा)
पद्म सर/रानी सरजोधपुर
सुख तालाबमांडल (भीलवाड़ा)राजस्थान का सबसे बड़ा तालाब

राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना: शुरुआत: 2001 | बजट अनुपात: केंद्र:राज्य = 60:40 | इसमें राजस्थान की 6 झीलें शामिल हैं: (i) फतेह सागर (ii) पिछोला (iii) आनासागर (iv) पुष्कर (v) नक्की (vi) मानसागर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण संरचनाओं (बावड़ी, नाड़ी, खड़ीन, टांका) का वितरण

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9जल संरक्षण तकनीकें — आधुनिक

पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ आज राजस्थान में कई आधुनिक (वैज्ञानिक) जल संरक्षण विधियाँ भी अपनाई जा रही हैं, जो कम पानी में अधिकतम फ़ायदा देने पर केंद्रित हैं।

10प्रमुख योजनाएँ एवं अभियान

1. जल जीवन मिशन (JJM)

2. मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA)

3. जल शक्ति अभियान — 'कैच द रेन'

4. अटल भूजल योजना

5-12. अन्य योजनाएँ एवं अभियान

योजना/अभियानमुख्य विवरण
राजीव गांधी जल संचय योजनाशुरुआत: 20 अगस्त 2007 | दो चरण: (i) 20 अगस्त 2011 (ii) 29 मार्च 2013 | उद्देश्य: पेयजलापूर्ति, वर्षा जल संग्रहण, भूजल स्तर सुधार, कृषि क्षेत्र वृद्धि
मिशन अमृत सरोवरशुरुआत: 24 अप्रैल 2022 | उद्देश्य: आज़ादी के अमृत महोत्सव (75 वर्ष) के उपलक्ष्य में हर जिले में 75 अमृत सरोवर (तालाब) बनाना
नीरांचल परियोजनाविश्व बैंक पोषित | PMKSY (वाटरशेड कंपोनेंट) के तहत | 9 राज्यों में लागू | राजस्थान के चयनित जिले: जोधपुर + उदयपुर
स्वजल धारा योजनाशुरुआत: 2003 | केंद्र सरकार द्वारा | ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति हेतु
एकीकृत जलग्रहण विकास कार्यक्रमशुरुआत: 1989 | समाप्ति: 31 मार्च 2013
आपणी योजनाजर्मनी द्वारा पोषित | क्षेत्र: झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़
जीवन धारा योजनाशुरुआत: 1996-97 | गरीबी रेखा से नीचे के SC/ST लघु व सीमांत किसानों को कुओं के निर्माण हेतु 100% अनुदान
अमृतम् जलम्राजस्थान पत्रिका (समाचार-पत्र) द्वारा चलाया गया एक जल संरक्षण जन-जागरूकता अभियान

जल संबंधी संस्थान

11भूजल प्रबंधन एवं जल नीति

A. भूजल संसाधन मूल्यांकन (2023)

भूजल (ज़मीन के नीचे का पानी) के स्तर के आधार पर राजस्थान के सभी ब्लॉकों (छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों) को 5 श्रेणियों में बाँटा गया है — यह वर्गीकरण दिखाता है कि किस इलाके में पानी की स्थिति कितनी गंभीर है।

श्रेणीविवरणब्लॉकों की संख्याविशेष
अतिदोहित (Over-Exploited)जहाँ भूजल का दोहन (निकालना) उसकी पुनःपूर्ति से कहीं ज़्यादा हो चुका है216सर्वाधिक ब्लॉक इसी श्रेणी में — यह सबसे चिंताजनक स्थिति है
विषम/गंभीर (Critical)23
अर्द्ध विषम (Semi-Critical)22
सुरक्षित (Safe)38
लवणीय (Saline)3तारानगर, खाजूवाला, रावतसर

चिंताजनक तथ्य: राजस्थान के कुल 302 ब्लॉकों में से 216 (यानी लगभग 71%) 'अतिदोहित' श्रेणी में आते हैं — इसका मतलब है कि राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में भूजल का इस्तेमाल उसके प्राकृतिक भरने की गति से कहीं तेज़ हो रहा है। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य में कोई भी ब्लॉक 'न्यून संदोहित' (यानी बहुत कम इस्तेमाल वाली) श्रेणी में नहीं है — यानी हर जगह पानी का दबाव किसी-न-किसी स्तर पर मौजूद है। इसी समस्या को हल करने के लिए 5 अक्टूबर 2021 से जोधपुर में भूजल प्रबंधन हेतु 'हेली-बोर्न सर्वेक्षण तकनीक' शुरू की गई थी।

B. राजस्थान राज्य जल नीति

जल उपलब्धता की प्राथमिकता क्रम (Priority Order)

जब पानी की कमी होती है, तो सरकार तय करती है कि किसे पहले पानी मिलेगा — इसके लिए एक स्पष्ट प्राथमिकता-क्रम बनाया गया है।

क्रमउपयोग
1मानव पेयजल (सबसे पहली प्राथमिकता)
2पशु पेयजल
3घरेलू कार्यों के लिए जलापूर्ति
4कृषि कार्यों के लिए जलापूर्ति
💡 प्राथमिकता क्रम को याद रखने का आसान तरीका

इसे ऐसे याद रखें — जैसे किसी आपातकालीन स्थिति (Emergency) में सबसे पहले इंसानों को बचाया जाता है, फिर जानवरों को, फिर घर-गृहस्थी के काम, और आखिर में खेती — क्योंकि इंसान व जानवर बिना पानी के तुरंत मुसीबत में पड़ सकते हैं, जबकि खेती में कुछ दिन की देरी झेली जा सकती है। यही सोच इस प्राथमिकता-क्रम के पीछे है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

12नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)

इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम सिंचाई व जल संरक्षण संबंधी घटनाओं व आँकड़ों को यहाँ शामिल किया गया है।

💡 PKC-ERCP का शिलान्यास — सितंबर 2025

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP) का शिलान्यास (नींव पत्थर रखने का समारोह) सितंबर 2025 में किया। परियोजना का लक्ष्य पार्वती, नेवज़ एवं कालीसिंध नदियों के अतिरिक्त (सरप्लस) पानी को चंबल नदी में भेजना है, ताकि पूर्वी राजस्थान के 13 से बढ़कर अब 17 ज़िलों को पेयजल व औद्योगिक जल मिल सके — जिसमें अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर व जयपुर जैसे प्रमुख ज़िले शामिल हैं। परियोजना के प्रथम चरण को पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2028 रखा गया है, जिसमें डूंगरी बाँध, 5 बैराज (कूल, पार्वती, कालीसिंध, मेज, बनास नदियों पर) तथा ईसरदा बाँध का नवीनीकरण शामिल है।

पर्यावरणीय चिंता: PKC-ERCP परियोजना के कारण रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व (अध्याय 4 में विस्तार से पढ़ा) का लगभग 37 वर्ग किमी हिस्सा जलमग्न (डूब) हो सकता है, जिससे टाइगर रिज़र्व व्यावहारिक रूप से दो हिस्सों में बँट सकता है — यह पर्यावरणविदों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। इस तरह यह परियोजना विकास (जल सुरक्षा) एवं पर्यावरण संरक्षण (वन्यजीव सुरक्षा) के बीच के जटिल संतुलन को उजागर करती है।

💡 जल जीवन मिशन — कवरेज की स्थिति

31 मार्च 2024 तक राजस्थान में लगभग 50.99 लाख कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connections) दिए जा चुके थे, तथा 36,000 से अधिक गाँवों के लगभग 87 लाख परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन की मंज़ूरी मिल चुकी है। राज्य के बजट 2024-25 में जल जीवन मिशन के लिए ₹15,000 करोड़ का आवंटन किया गया था, जिसका लक्ष्य 25 लाख ग्रामीण घरों को नल कनेक्शन देना था — यह दिखाता है कि हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने की दिशा में राजस्थान लगातार तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, हालाँकि पूर्ण कवरेज (सभी गाँवों में हर घर नल) का लक्ष्य अभी भी कुछ वर्ष दूर है, इसीलिए मिशन की अवधि अब 2034 तक बढ़ा दी गई है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — 2025-26 की PKC-ERCP शिलान्यास एवं जल जीवन मिशन प्रगति से जुड़े जिले

13त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

13.1 Super Important Quick Facts

प्रश्न/तथ्यउत्तर
राजस्थान की प्रथम नहर सिंचाई परियोजना कौनसी है?गंग नहर (बीकानेर नहर)
राजस्थान की सबसे विशाल बहुउद्देशीय नहर परियोजना कौनसी है?इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP)
IGNP की परिकल्पना किसने की थी?राय बहादुर कँवर सेन (1948)
राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध कौनसा है?राणा प्रताप सागर (चंबल परियोजना)
राजस्थान का सबसे लंबा बाँध कौनसा है?माही बजाज सागर बाँध (3109 मीटर)
एशिया का चिनाई वाला सबसे ऊँचा बाँध कौनसा है?जाखम बाँध (प्रतापगढ़) — 81 मीटर ऊँचा
राजस्थान का एकमात्र कंक्रीट बाँध कौनसा है?बीसलपुर बाँध
पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध कौनसा है?जवाई बाँध (पाली)
राज्य की एकमात्र पूर्णतः ड्रिप/फव्वारा सिंचाई परियोजना कौनसी है?नर्मदा नहर परियोजना
भारत/राजस्थान की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना कौनसी है?भाखड़ा-नांगल परियोजना
राजस्थान में IGNP की कुल कितनी लिफ्ट नहरें हैं?7
'बावड़ियों का शहर' किसे कहा जाता है?बूंदी
खड़ीन तकनीक किसने विकसित की?पालीवाल ब्राह्मणों ने (15वीं सदी में)
'जोहड़ वाले बाबा' किसे कहा जाता है?राजेंद्र सिंह (तरुण भारत संघ के संस्थापक)
PKC-ERCP परियोजना का MoU कब हुआ?28 जनवरी 2024
🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. राजस्थान में सिंचाई का सबसे बड़ा साधन नलकूप (49.94%) है, जो दिखाता है कि राज्य की सिंचाई आज भी बहुत हद तक भूजल पर निर्भर है, जबकि राज्य के 13 नदी बेसिनों में भारत के कुल सतही जल का मात्र 1.16% ही उपलब्ध है 2. चंबल (राणा प्रताप सागर — सबसे बड़ा बाँध), माही बजाज सागर (सबसे लंबा बाँध — 3109 मी), भाखड़ा-नांगल (भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना) एवं व्यास — ये राजस्थान की 4 प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएँ हैं 3. गंग नहर (राजस्थान की प्रथम नहर परियोजना, महाराजा गंगासिंह द्वारा निर्मित) एवं IGNP ('मरुगंगा', भारत की सबसे विशाल बहुउद्देशीय नहर, कँवर सेन द्वारा परिकल्पित) — दोनों ने पश्चिमी राजस्थान की खेती को पूरी तरह बदल दिया 4. PKC-ERCP परियोजना (MoU 2024, शिलान्यास सितंबर 2025) पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को अगले 3-4 दशक तक पेयजल सुरक्षा देने के लिए बनाई गई राज्य की सबसे बड़ी नवीनतम परियोजना है, हालाँकि इससे रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व का कुछ हिस्सा प्रभावित होने की पर्यावरणीय चिंता भी जुड़ी है 5. बावड़ी, खड़ीन, टांका, जोहड़ जैसी पारंपरिक तकनीकों के साथ-साथ ड्रिप/फव्वारा सिंचाई, रूफ टॉप हार्वेस्टिंग व हेली-बोर्न सर्वेक्षण जैसी आधुनिक तकनीकें मिलकर राजस्थान की जल-प्रबंधन रणनीति को मज़बूत बनाती हैं 6. राज्य के 302 में से 216 ब्लॉक (71%) 'अतिदोहित' श्रेणी में हैं — यह सबसे बड़ी चिंता का विषय है, जिसे हल करने के लिए जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना व मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान जैसी योजनाएँ लगातार चलाई जा रही हैं

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. IGNP की परिकल्पना किसने और कब की थी? इसके प्रमुख चरणों की व्याख्या कीजिए। Q2. चंबल बहुउद्देशीय परियोजना के 4 बाँधों का वर्णन कीजिए। Q3. राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों (बावड़ी, खड़ीन, टांका) का वर्णन कीजिए। Q4. PKC-ERCP परियोजना के उद्देश्य एवं प्रमुख घटकों की व्याख्या कीजिए। Q5. IGNP के लाभ एवं हानियों की विवेचना कीजिए। Q6. नर्मदा नहर परियोजना की विशेषताएँ बताइए। इसमें ड्रिप सिंचाई अनिवार्य क्यों है? Q7. राजस्थान में भूजल संसाधन मूल्यांकन 2023 के अनुसार ब्लॉकों का वर्गीकरण बताइए। Q8. जल जीवन मिशन एवं मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान की तुलना कीजिए। Q9. राजस्थान की जल उपलब्धता प्राथमिकता क्रम क्या है? Q10. बीसलपुर एवं जवाई बाँध की तुलना कीजिए।

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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