ज़रा सोचिए — भारत के कुल क्षेत्रफल का मात्र 10.4% हिस्सा रखने वाला एक राज्य, ग्वार जैसी फसल में दुनिया के बाकी हिस्सों को लगभग पीछे छोड़ देता है — राजस्थान अकेला भारत के कुल ग्वार उत्पादन का 88.80% पैदा करता है! यानी अगर आपके घर में इस्तेमाल होने वाले शैम्पू, आइसक्रीम या यहाँ तक कि तेल की ड्रिलिंग में भी ग्वार गम इस्तेमाल होता है (हाँ, यह सच है), तो उसका बड़ा हिस्सा राजस्थान के खेतों से ही आता है। और क्या आप जानते हैं कि जिस राज्य को लोग सिर्फ रेगिस्तान समझते हैं, वही राज्य बाजरा और सरसों उत्पादन में भी देश में नंबर-1 है? यह ऐसा है जैसे कोई सबसे कम पानी वाला विद्यार्थी परीक्षा में टॉप कर जाए — क्योंकि यहाँ की खेती ज़्यादातर मानसून (बारिश) पर निर्भर है, इसीलिए इसे 'मानसून का जुआ' भी कहा जाता है — कभी बंपर फसल, तो कभी सूखा। आइए, इस अध्याय में राजस्थान की खेती की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं — यहाँ के 10 कृषि जलवायु प्रदेश, फसलों के प्रकार, प्रमुख फसलें, सरकारी योजनाएँ और नवीनतम आँकड़े।
कृषि (Agriculture) प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector — यानी सीधे प्रकृति से जुड़ा क्षेत्र, जैसे खेती, खनन, मछली पकड़ना) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजस्थान की कृषि मुख्यतः मानसून (बारिश) पर निर्भर है, इसीलिए यहाँ की खेती को 'मानसून का जुआ' (Gamble of Monsoon) कहा जाता है — ठीक वैसे ही जैसे जुए में परिणाम अनिश्चित रहता है, वैसे ही अच्छी बारिश हुई तो बंपर फसल, नहीं तो सूखा।
| संकेतक | आँकड़े/Data | विशेष |
|---|---|---|
| GVA वृद्धि (स्थिर कीमतें) | ₹1.92 लाख करोड़ (2021-22) → ₹2.23 लाख करोड़ (2025-26) | CAGR 3.82% |
| GVA वृद्धि (प्रचलित कीमतें) | ₹3.23 लाख करोड़ (2021-22) → ₹4.41 लाख करोड़ (2025-26) | CAGR 8.10% |
| GSVA में हिस्सेदारी | 25.74% (2025-26); 2011-12 में 28.56% था | घटती प्रवृत्ति |
| क्षेत्रवार हिस्सेदारी | पशुधन 49.35%, फसलें 42.61%, वानिकी 7.49%, मत्स्य 0.54% | 2025-26 |
| कुल खाद्यान्न उत्पादन | 283.98 लाख टन (2025-26 अग्रिम अनुमान) | 8.28% कम पिछले वर्ष से |
| तिलहन उत्पादन | 100.46 लाख टन | +7.18% वृद्धि |
| रबी दलहन उत्पादन | 26.61 लाख टन | +22.34% भारी वृद्धि |
| कपास उत्पादन | 17.94 लाख गांठें | 2025-26 अनुमान |
| गन्ना उत्पादन | 3.61 लाख टन | 2025-26 अनुमान |
| फसल क्षेत्र GVA वृद्धि | ₹1.88 लाख करोड़ | -5.01% गिरावट |
| पशुधन GVA | ₹2.17 लाख करोड़ (दूध 79.60%) | +5.20% वृद्धि |
महत्वपूर्ण तथ्य: 2023-24 में खाद्यान्न उत्पादन 245.01 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 283.98 लाख टन हो गया। राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान बाजरा, ग्वार एवं सरसों — तीनों में प्रथम स्थान पर है, और ग्वार में तो राज्य की राष्ट्रीय हिस्सेदारी 88.80% जितनी विशाल है।
| स्थान (Rank) | फसल एवं उत्पादन प्रतिशत |
|---|---|
| 🥇 प्रथम स्थान | बाजरा (41.34%), रेपसीड-सरसों (43.43%), ग्वार (88.80%), कुल तिलहन (23.61%), मोटे अनाज/Nutri-cereals (14.21%), कुल दलहन (13.76%) |
| 🥈 द्वितीय स्थान | मूंगफली (19.91%) |
| 🥉 तृतीय स्थान | चना (17.39%), सोयाबीन (8.96%) |
कृषि जलवायु प्रदेश (Agro-Climatic Zone) का मतलब है — किसी क्षेत्र को फसल-चक्रण, मिट्टी के प्रकार, जल उपलब्धता एवं वर्षा के आधार पर बाँटना। यह ठीक वैसे ही है जैसे किसी स्कूल में बच्चों को उनकी उम्र और क्षमता के हिसाब से अलग-अलग कक्षाओं में बाँटा जाता है — हर जोन की अपनी खास फसलें और खेती का तरीका होता है। भारत में कुल 15 कृषि जलवायु प्रदेश हैं, जिनमें से राजस्थान में 10 जोन आते हैं (देश के जोन-6, 8, 9 एवं 14 में राजस्थान स्थित है)।
| जोन | जलवायु क्षेत्र | प्रमुख जिले | वर्षा | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|---|---|
| IA | शुष्क पश्चिमी मैदान (Arid Western Plain) | जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा, फलौदी | 20-37 सेमी | रबी: गेहूँ, चना, सरसों, ईसबगोल, मोठ, जौ | खरीफ: बाजरा, ग्वार |
| IB | उत्तरी-पश्चिमी सिंचित मैदान (Irrigated NW Plain) | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (सबसे छोटा क्षेत्रफल) | 10-35 सेमी | रबी: गेहूँ, सरसों, जौ | खरीफ: कपास, गन्ना, चावल |
| IC | अति शुष्क आंशिक सिंचित (Hyper Arid Partial Irrigated) | जैसलमेर, बीकानेर, चूरू (आंशिक) — सबसे बड़ा क्षेत्रफल | 10-35 सेमी | रबी: गेहूँ, चना, सरसों | खरीफ: बाजरा, ग्वार, मूंगफली |
| IIA | शेखावाटी अंतः प्रवाह मैदान (Transitional Inland Drainage) | सीकर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामन, चूरू (आंशिक) | 30-50 सेमी | रबी: गेहूँ, सरसों, चना | खरीफ: बाजरा, ग्वार, दलहनी फसलें |
| IIB | लूनी अंतः प्रवाही मैदान (Transitional Plain of Luni) | पाली, जालोर, सांचौर, सिरोही, ब्यावर (आंशिक) | 30-50 सेमी | रबी: गेहूँ, सरसों, चना, ईसबगोल, जीरा, अरंडी | खरीफ: बाजरा, ग्वार, तिल |
| IIIA | अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान (Semi Arid Eastern Plain) | अजमेर, जयपुर, दौसा, टोंक, कोटपूतली-बहरोड़, ब्यावर | 50-70 सेमी | रबी: गेहूँ, सरसों, चना, जौ | खरीफ: बाजरा, ग्वार, ज्वार |
| IIIB | बाढ़ सम्भाव्य पूर्वी मैदान (Flood Prone Eastern Plain) | अलवर, डीग, भरतपुर, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर | 50-70 सेमी | रबी: गेहूँ, सरसों | खरीफ: बाजरा, ग्वार |
| IVA | उपआर्द्र दक्षिणी मैदान (Sub-Humid Southern Plain) | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, सिरोही | 50-90 सेमी | रबी: गेहूँ, चना, अफीम | खरीफ: गन्ना, ज्वार, मक्का |
| IVB | आर्द्र दक्षिणी मैदान (Humid Southern Plain) | बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर (सबसे छोटा जोन) | 50-110 सेमी | रबी: गेहूँ, चना, अफीम | खरीफ: गन्ना, चावल, मक्का |
| V | आर्द्र दक्षिणी-पूर्वी मैदान (Humid South-Eastern Plain) | कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ | 60-110 सेमी | रबी: गेहूँ, चना, सरसों, मसाला | खरीफ: मक्का, गन्ना, चावल, सोयाबीन |
क्षेत्रफल संबंधी विशेष तथ्य: सबसे बड़ा जोन: IC (प्रथम) → IA (द्वितीय) | सबसे छोटा जोन: IVB (प्रथम) → IB (द्वितीय)। याद रखने का ट्रिक: 'IC IB' — IC सबसे बड़ा जोन है और IB सबसे छोटा जोन है, जबकि IVB दूसरा सबसे छोटा जोन है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के 10 कृषि जलवायु प्रदेशों (IA से V तक) की सीमाएँ
I. वैज्ञानिक प्रकार — विशेष उत्पादों के अनुसार खेती के नाम
जिस तरह डॉक्टरी में अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ (specialist) होते हैं, उसी तरह खेती में भी अलग-अलग उत्पादों के लिए खास नाम दिए गए हैं — इन सबके अंत में 'कल्चर' (Culture) शब्द आता है, जिसका मतलब है 'खेती/पालन करना'।
| क्रम | कल्चर का नाम | उत्पादन |
|---|---|---|
| 1 | सेरीकल्चर (Sericulture) | रेशम/रेशम कीट पालन |
| 2 | पिसीकल्चर (Pisciculture) | मछली/मत्स्य पालन |
| 3 | एपीकल्चर (Apiculture) | शहद/मधुमक्खी पालन |
| 4 | विटीकल्चर (Viticulture) | अंगूर की खेती |
| 5 | हॉर्टीकल्चर (Horticulture) | बागवानी (फल, फूल, सब्जी) |
| 6 | पोमोकल्चर (Pomology) | फल उत्पादन |
| 7 | फ्लोरीकल्चर (Floriculture) | फूलों की खेती |
| 8 | ऑलेरीकल्चर (Olericulture) | सब्जियों की खेती |
| 9 | ऑलिवीकल्चर (Oliviculture) | जैतून (Olive) उत्पादन |
| 10 | सिल्वीकल्चर (Silviculture) | वन प्रबंधन |
| 11 | वर्मीकल्चर (Vermiculture) | केंचुआ पालन/खाद |
खड़ीन कृषि पश्चिमी राजस्थान (मुख्यतः जैसलमेर) में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा शुरू की गई एक अनूठी तकनीक है। इसमें बारिश के पानी को एक ढलान वाले खेत में इकट्ठा किया जाता है, और जब वह पानी सूख जाता है तो बची हुई नमी में फसल उगाई जाती है — ठीक वैसे ही जैसे बारिश के बाद गीली रेत में बीज बोकर उसकी नमी का इस्तेमाल किया जाए। यह मरुस्थल जैसे कम पानी वाले क्षेत्र में खेती करने का एक बहुत ही समझदारी भरा परंपरागत तरीका है।
विशेष उपाधियाँ: स्थानांतरित कृषि को 'आदिवासियों की कृषि' एवं 'पर्यावरण की दुश्मन' भी कहा जाता है — क्योंकि इसमें बार-बार पेड़ काटे/जलाए जाते हैं, जिससे वनों को नुकसान पहुँचता है।
यह एक ऐसी खेती पद्धति है जिसमें किसान को बाज़ार से कुछ भी (खाद, कीटनाशक) खरीदना नहीं पड़ता — इसीलिए इसे 'जीरो बजट' कहा जाता है। इसके 4 मुख्य स्तंभ हैं: जीवामृत, बीजामृत, आच्छादन (मल्चिंग) एवं वाष्प (नमी संरक्षण)। इसका पायलट प्रोजेक्ट बाँसवाड़ा, टोंक व सिरोही में 36 ग्राम पंचायतों तथा लगभग 20 हज़ार किसानों के साथ चलाया गया।
कृषि वर्ष: राजस्थान में कृषि वर्ष 1 जुलाई से 30 जून तक माना जाता है — यानी हर साल के मानसून के आगमन के साथ ही नया कृषि वर्ष शुरू होता है।
| ऋतु | अनाज | दलहन | तिलहन/मसाला | नकदी |
|---|---|---|---|---|
| खरीफ/स्यालू (जून-जुलाई बुआई, सितंबर-अक्टूबर कटाई) | बाजरा, ज्वार, चावल, मक्का, रामदाना | मूंग, मोठ, चवला, अरहर, उड़द | तिल, सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी, सूर्यमुखी | कपास, ग्वार, जूट (सुनहरा रेशा) |
| रबी/उनालू (अक्टूबर-नवंबर बुआई, मार्च-अप्रैल कटाई) | गेहूँ, जौ | मसूर, चना, मटर | सरसों, जीरा, राई, सौंफ, लहसुन, प्याज, अदरक, मिर्च, मेथी | तारामीरा, ईसबगोल, अफीम, तंबाकू, अलसी |
| जायद/चौमासा (मार्च-अप्रैल बुआई, मई-जून कटाई) | — | — | — | खरबूजा, तरबूज, सब्जियाँ, ककड़ी, पशुओं का चारा |
| फसल | वर्षा | तापमान | मिट्टी | ऋतु |
|---|---|---|---|---|
| बाजरा | 25-50 सेमी | 25°C-35°C | रेतीली, जलोढ़ | खरीफ |
| ज्वार | 50-100 सेमी | 21°C-27°C | रेतीली, जलोढ़ | खरीफ |
| गेहूँ | 50-100 सेमी | 15°C-20°C | जलोढ़, दोमट | रबी |
| जौ | 50-100 सेमी | 15°C-20°C | जलोढ़ | रबी |
| सरसों | 50-100 सेमी | 15°C-20°C | जलोढ़, रेतीली | रबी |
| मक्का | 50-100 सेमी | 21°C-27°C | लाल, चिकनी मिट्टी | खरीफ |
| गन्ना | 125-150 सेमी | 21°C-27°C | जलोढ़, दोमट | खरीफ |
| चावल | 150-200 सेमी | 21°C-28°C | जलोढ़, चिकनी | खरीफ |
| कपास | 50-100 सेमी | 20°C-40°C | काली मिट्टी | खरीफ |
| चना | 25-50 सेमी | 15°C-20°C | दोमट, जलोढ़ | रबी |
वर्षा: 25-50 सेमी | तापमान: 25°C-35°C | मिट्टी: जलोढ़, रेतीली | राजस्थान — उत्पादन में देश में प्रथम स्थान (41.34% हिस्सेदारी) | प्रमुख जिले: अलवर (सर्वाधिक), जयपुर, बाड़मेर | उत्तरी-पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र व पूर्वी मैदान में मुख्यतः उत्पादन होता है।
वर्षा: 50-100 सेमी | तापमान: 15°C-20°C | मिट्टी: जलोढ़, दोमट | यह शीतोष्ण जलवायु का पौधा है — श्रीगंगानगर को 'अन्न भंडार/खाद्य की टोकरी' कहा जाता है | प्रमुख जिले: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (वर्तमान में उत्पादन में प्रथम), अलवर, जयपुर, कोटा।
वर्षा: 50 सेमी | तापमान: 21°C-27°C | मिट्टी: लाल चिकनी, जीवांश दोमट | प्रमुख क्षेत्र: मेवाड़ संभाग — राजसमंद, उदयपुर, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा, चित्तौड़, सलूंबर | पकने की अवधि: लगभग 110 दिन।
वर्षा: 150-200 सेमी | तापमान: 21°C-28°C | मिट्टी: जलोढ़, चिकनी | प्रमुख जिले: बूंदी (बासमती चावल के लिए प्रसिद्ध), हनुमानगढ़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, बारां | बुआई विधि: पौधरोपण (Transplanting) या सीधे दाने बिखेरना।
वैज्ञानिक नाम: Sorghum | वर्षा: 50 सेमी | तापमान: 21°C-27°C | प्रमुख जिले: अजमेर, नागौर, पाली, चित्तौड़, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, टोंक। इसे 'गरीब की रोटी' कहा जाता है क्योंकि यह कम उपजाऊ ज़मीन में भी उग जाती है और आम लोगों का मुख्य भोजन रही है।
| क्रम | फसल | सर्वाधिक उत्पादन जिला | सर्वाधिक बुवाई क्षेत्रफल |
|---|---|---|---|
| 1 | गेहूँ | श्रीगंगानगर | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर |
| 2 | बाजरा | अलवर | बाड़मेर, जोधपुर |
| 3 | मक्का | चित्तौड़गढ़ | भीलवाड़ा, उदयपुर |
| 4 | कपास | हनुमानगढ़ | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर |
| 5 | गन्ना | श्रीगंगानगर | श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़ |
| 6 | जौ | जयपुर | जयपुर, श्रीगंगानगर |
| 7 | चावल | बूंदी | बूंदी, हनुमानगढ़ |
| 8 | सरसों | श्रीगंगानगर | श्रीगंगानगर, भरतपुर |
| 9 | चना | हनुमानगढ़ | हनुमानगढ़, चूरू |
| 10 | मूंगफली | बीकानेर | बीकानेर, जोधपुर |
| फसल | उन्नत किस्में (HYV) |
|---|---|
| बाजरा | RAJ-171, RCB-2, RCB-311, RHB-30, पूसा कम्पोजिट-383 |
| कपास | बीकानेरी नरमा, गंगानगर अगेती, नरमा, US-51, US-71, US-81, वीरनार, वरलक्ष्मी, संकर-4, किरण, प्रभात |
| गेहूँ | MG-नबी (मैक्सिकन गेहूँ), कल्याण सोना (1482), सोनालिका, मालविका, कोहिनूर, दुर्गापुरा-65, चंबल-65, लाल बहादुर, मंगला |
| गन्ना | CO-419, CO-449, CO-1007, CO-1111 |
| चावल | बासमती, माही-सुगंधा, परमल, चंबल, पद्मा, जया, कावेरी, रतना |
| मक्का | माही कंचन, माही धवल, HM-4, HM-8, HM-3, नवजोत, विजय, मोती कम्पोजिट |
| सरसों | पूसा बोल्ड, राजविजय सरसों, पूसा सरसों-25, पूसा सरसों-1, वरुणा, पूसा कल्याणी, वरदान |
| जौ | करण, कैलाश, केदार, ज्योति, RD-57, 2035, राजकिरण |
| मूंगफली | चंद्रा, RG-141, RSB-87, RS-1, कुफरी |
| चना | पूसा 2085 (काबूली), दोहद येलो, डागर |
राजस्थान — तृतीय स्थान (17.39% हिस्सेदारी) | प्रमुख: हनुमानगढ़ एवं चूरू (सर्वाधिक), बीकानेर, जैसलमेर, गंगानगर, अलवर, कोटा | किस्में: पूसा 2085 (काबूली), दोहद येलो, डागर
भूमि की उर्वरता (उपजाऊपन) बढ़ाने में विशेष रूप से उपयोगी — दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन का स्तर बढ़ा देती हैं, ठीक वैसे ही जैसे कोई प्राकृतिक खाद काम करती है।
राजस्थान — देश में प्रथम स्थान (43.43% हिस्सेदारी) | प्रमुख: श्रीगंगानगर, भरतपुर, अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग, सवाई माधोपुर, टोंक, जयपुर | किस्में: पूसा बोल्ड, वरुणा, दुर्गामणि, वरदान
गुजरात के बाद राजस्थान — द्वितीय स्थान (19.91% हिस्सेदारी) | लूणकरणसर (बीकानेर) को 'राजस्थान का राजकोट' कहा जाता है (क्योंकि गुजरात के राजकोट की तरह यहाँ भी मूंगफली की खेती बहुत होती है) | किस्में: चंद्रा, RG-141, RSB-87, RS-1, कुफरी | दालों की तरह ही यह मिट्टी में नाइट्रोजन का स्तर बढ़ाती है।
तृतीय स्थान (8.96% हिस्सेदारी) | प्रमुख क्षेत्र: हाड़ौती — झालावाड़, बारां, प्रतापगढ़, कोटा, बूंदी
अलसी: हाड़ौती प्रदेश में — बारां, कोटा, बूंदी, झालावाड़ में उगाई जाती है। अरंडी: इसके बीजों में सबसे अधिक तेल होता है — इसका उपयोग जलाने, साबुन एवं दवाइयाँ बनाने में होता है।
वर्षा: 50-100 सेमी | तापमान: 20°C-40°C (सर्वोत्तम: 20°C-30°C) | मिट्टी: काली मिट्टी (आर्द्रताग्राही — यानी नमी सोखने वाली) | कपास को 90 दिन तक पाला (Frost) रहित मौसम चाहिए | राजस्थान में: हनुमानगढ़ (कुल उत्पादन का 30%), श्रीगंगानगर, जोधपुर, फलौदी।
वर्षा: 100-200 सेमी | तापमान: 15°C-25°C | मिट्टी: कच्छारी, दोमट, लावा मिट्टी | अग्रणी जिले: श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़, बूंदी
तंबाकू: मुख्यतः अलवर जिले में उगाई जाती है। अफीम (Opium): यह एक मादक पदार्थ है, जो पौधे के फल से निकलने वाले दूध (लेटेक्स) से बनता है — सर्वाधिक चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़ में उगाई जाती है, और सरकार से लाइसेंस लेकर ही इसकी खेती की जा सकती है।
उद्यानिकी का मतलब है फल, सब्जी, फूल एवं मसालों की खेती। Economic Survey 2025-26 के अनुसार वर्ष 2024-25 में राजस्थान में फल की खेती 92,993 हेक्टेयर (13,84,606 मीट्रिक टन उत्पादन), सब्जियों की खेती 2,04,755 हेक्टेयर (28,60,484 मीट्रिक टन) एवं मसालों की खेती 13,64,822 हेक्टेयर (14,69,559 मीट्रिक टन) क्षेत्र में हुई।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में प्रमुख उद्यानिकी क्षेत्र (फल, मसाले, विशेष पादप) का वितरण
| संस्था/Research Center | स्थान | संचालक |
|---|---|---|
| बेर अनुसंधान केंद्र | बीछवाल (बीकानेर) | राज्य सरकार |
| खजूर अनुसंधान केंद्र | बीघवाल (बीकानेर) | राज्य सरकार |
| बाजरा अनुसंधान केंद्र | जोधपुर एवं बाड़मेर | राज्य सरकार |
| ईसबगोल अनुसंधान केंद्र | जोधपुर | राज्य सरकार |
| मक्का अनुसंधान केंद्र | बाँसवाड़ा | राज्य सरकार |
| चावल अनुसंधान केंद्र | बाँसवाड़ा | राज्य सरकार |
| ज्वार अनुसंधान केंद्र | वल्लभनगर (उदयपुर) | राज्य सरकार |
| शुष्क बागवानी केंद्र | बीघवाल (बीकानेर) — 1993 | ICAR |
| रेपसीड-सरसों अनुसंधान केंद्र | सेवर (भरतपुर) — 1993 | ICAR |
| बीजीय अनुसंधान केंद्र | तबीजी, अजमेर — 2000 | ICAR |
| CAZRI | जोधपुर — 1959 | ICAR (केंद्र सरकार) |
| RARI | दुर्गापुरा (जयपुर) — 1943 | राज्य सरकार |
| उत्कृष्टता केंद्र (फसल) | जिला/स्थान |
|---|---|
| खजूर (Date Palm) | सगरा भोजका, जैसलमेर |
| बाजरा | जोधपुर |
| अंजीर | सिरोही (प्रस्तावित) |
| नींबू वर्गीय/मसाला व औषधि | झालावाड़ |
| नींबू वर्गीय पादप | कोटा (नांता) |
| सब्जी | बूंदी |
| सीताफल (Custard Apple) | चित्तौड़गढ़ |
| अमरूद | देवडावास (टोंक), सवाई माधोपुर |
| एपीकल्चर (मधुमक्खी) | टोंक (प्रस्तावित) |
| फूल/पुष्प | सवाई माधोपुर |
| अनार | बस्सी (जयपुर) |
| ड्रैगन फ्रूट | बस्सी (जयपुर) |
| ऑलिव/जैतून | बस्सी (जयपुर) |
| आँवला, आम, जैतून | खैमरी (धौलपुर) |
| लहसुन | बारां |
| क्रम | विश्वविद्यालय का नाम | स्थान | स्थापना |
|---|---|---|---|
| 1st | स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय | बीछवाल (बीकानेर) | 1987 |
| 2nd | महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय | उदयपुर | 1999 |
| 3rd | जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय | मंडोर (जोधपुर) | 2013 |
| 4th | श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय | जोबनेर (जयपुर) | 2013 |
| 5th | कृषि विश्वविद्यालय | बोरखेड़ा (कोटा) | 2013 |
कृषक कल्याण कोष (K-3 Fund): स्थापना: 2003 | कुल कोष: ₹1500 करोड़ | उद्देश्य: किसानों को उनकी उपज की उचित कीमत उपलब्ध कराना। 16 दिसंबर 2019 को इस कोष को नए रूप में पुनर्गठित किया गया।
| योजना | विवरण |
|---|---|
| मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना | सभी 10 जलवायु खंडों में लागू; 2025-26 में 1.12 लाख क्विंटल बीज + 31.50 लाख मिनीकिट वितरित |
| मृदा स्वास्थ्य कार्ड | 4.15 लाख कार्ड जारी किए गए |
| गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना | वर्मी-कम्पोस्ट हेतु ₹10,000 प्रति किसान प्रति ब्लॉक |
| मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि | वार्षिक ₹3,000 सहायता |
| लघु/सीमांत वृद्ध किसान सम्मान पेंशन | ₹1,250 प्रति माह |
| राजस्थान कृषक समर्थन योजना | MSP पर ₹150 प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस |
| मुख्यमंत्री कृषक साथी/राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना | दुर्घटना सहायता; कुल बजट ₹5000 करोड़ |
| मिशन | विवरण |
|---|---|
| PMKSY (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना) | 1 जुलाई 2015 से (केंद्र:राज्य = 60:40) — AIBP + IWMP + OFWM शामिल |
| RKVY (राष्ट्रीय कृषि विकास योजना) | 2007-08 से (60:40) |
| NMSA (राष्ट्रीय टिकाऊ खेती मिशन) | 2014-15 (60:40) — 3 उप-मिशन: RAD, SMAF, मृदा स्वास्थ्य |
| NFSNM (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन) | 2007 से — गेहूँ में 18 जिले, दालों में 41, मक्का में 9, ज्वार में 11, बाजरा में 28 जिले शामिल |
| NHM (राष्ट्रीय बागवानी मिशन) | 24 जिलों में लागू |
| राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) | 2025-26 से — लगभग 2.5 लाख किसान शामिल |
| PM धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) | 8 जिलों में — बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, जालोर |
Rising Rajasthan Summit 2024: इस समिट में कृषि क्षेत्र से जुड़े ₹43,794.84 करोड़ के कुल 2524 MoU (समझौता ज्ञापन) हस्ताक्षरित हुए — यह दिखाता है कि निवेशक अब राजस्थान की कृषि में भी बड़ा निवेश करने के इच्छुक हैं।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में भूमि उपयोग पैटर्न (शुद्ध बोया क्षेत्र, वानिकी, पड़त भूमि) का जिलेवार वितरण
इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम कृषि संबंधी बजट घोषणाओं व आँकड़ों को यहाँ शामिल किया गया है।
राजस्थान बजट 2026-27 में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएँ की गई हैं — सस्ती बिजली, 50,000 सोलर पंप, सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) का विस्तार, तथा तारबंदी (खेत की चारदीवारी) के लिए अनुदान। उपनिवेशन क्षेत्रों में रहने वाले किसान, जिन पर ऋण की बकाया राशि एवं संचित ब्याज है, उन्हें 100% ब्याज माफी दी जाएगी — इसका लाभ उठाने के लिए किसानों को 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच अपनी बकाया मूल राशि जमा करनी होगी। इसके अलावा, राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष को ₹1,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दिया गया है — यानी डेयरी क्षेत्र में निवेश दोगुना हो गया है।
नवीनतम आँकड़ों के अनुसार राजस्थान बाजरा उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, राज्य में लगभग 42.81 लाख टन बाजरा उत्पादन होता है, जो देश के कुल बाजरा उत्पादन का लगभग 31.3% हिस्सा है (यह अध्याय में पहले बताए गए Economic Survey 2025-26 के 41.34% वाले आँकड़े से थोड़ा अलग है क्योंकि अलग-अलग वर्षों/स्रोतों के आँकड़े हैं, लेकिन दोनों ही यह पुष्टि करते हैं कि राजस्थान बाजरा उत्पादन में देश में सबसे आगे है)। इसी तरह सरसों उत्पादन में भी राजस्थान लगातार प्रथम स्थान पर बना हुआ है — राज्य के प्रमुख मसाला उत्पादों (जीरा, सरसों, लहसुन, धनिया, मेथी) में भी राजस्थान की मज़बूत पकड़ बनी हुई है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान बजट 2026-27 अंतर्गत नई सिंचाई/सोलर पंप योजनाओं से लाभान्वित जिलों का वितरण
| प्रश्न/तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि जलवायु प्रदेश कौनसा है? | IC (अति शुष्क आंशिक सिंचित) |
| राजस्थान में बाजरे का सर्वाधिक उत्पादन किस जिले में होता है? | अलवर |
| राजस्थान में सरसों उत्पादन में भारत में स्थान? | प्रथम (43.43%) |
| राजस्थान में 'मानसून का जुआ' किसे कहते हैं? | कृषि को |
| 'खड़ीन कृषि' किसके द्वारा शुरू की गई? | पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा (जैसलमेर) |
| राजस्थान की प्रमुख खाद्यान्न फसल कौनसी है? | बाजरा |
| राजस्थान का 'छोटा नागपुर' किसे कहते हैं? | झालावाड़ (संतरे के लिए) |
| 'सफेद सोना' किस फसल को कहते हैं? | कपास को |
| राजस्थान में 'डेजर्ट गोल्ड/पीला सोना' किसे कहते हैं? | जोजोबा/होहोबा |
| राजस्थान की प्रमुख तिलहन फसल कौनसी है? | सरसों |
| राजस्थान में ग्वार उत्पादन में भारत में स्थान? | प्रथम (88.80%) |
| स्थानांतरित कृषि को राजस्थान में क्या कहते हैं? | पहाड़ी क्षेत्र: चिमाता, मैदानी क्षेत्र: दाजिया/झूमटी |
| राजस्थान का 'राजकोट' किसे कहते हैं? | लूणकरणसर (मूंगफली के लिए) |
| देश की पहली जैतून तेल रिफाइनरी कहाँ है? | लूणकरणसर, बीकानेर (2014) |
| CAZRI संस्था कहाँ स्थित है? | जोधपुर (1959) |
Q1. राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि जलवायु प्रदेश कौनसा है? — RAS Pre. 2021 Q2. राजस्थान में बाजरे का सर्वाधिक उत्पादन किस जिले में होता है? — RAS Pre. 2018 Q3. राजस्थान में सरसों उत्पादन में भारत में स्थान बताइए। — RPSC 2019 Q4. राजस्थान में 'मानसून का जुआ' किसे कहते हैं? — SSC CGL Q5. 'खड़ीन कृषि' किसके द्वारा शुरू की गई? — RAS Pre. 2016 Q6. राजस्थान की प्रमुख खाद्यान्न फसल कौनसी है? — RAS Pre. 2020 Q7. राजस्थान का 'छोटा नागपुर' किसे कहते हैं? — RAS Pre. 2015 Q8. 'सफेद सोना' किस फसल को कहते हैं? — SSC 2021 Q9. राजस्थान में 'डेजर्ट गोल्ड/पीला सोना' किसे कहते हैं? — RAS Pre. 2022 Q10. राजस्थान की प्रमुख तिलहन फसल कौनसी है? — RPSC 2020 Q11. राजस्थान में ग्वार उत्पादन में भारत में स्थान बताइए। — RAS Pre. 2019 Q12. स्थानांतरित कृषि को राजस्थान में क्या कहते हैं? — RAS Mains Q13. राजस्थान का 'राजकोट' किसे कहते हैं? — RPSC 2018 Q14. देश की पहली जैतून तेल रिफाइनरी कहाँ है? — RAS Pre. 2023 Q15. CAZRI संस्था कहाँ स्थित है? — SSC/RAS