🏞️ अध्याय 2/14 — राजस्थान भूगोल

अपवाह तंत्र — नदियाँ एवं झीलें

Drainage System — Rivers & Lakes | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. अपवाह तंत्र — परिचय एवं मूल विशेषताएँ
  2. अरब सागरीय नदी तंत्र (16-17%)
  3. आन्तरिक प्रवाह नदी तंत्र (60%)
  4. बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र (23-24%)
  5. तुलनात्मक तालिकाएँ एवं महत्वपूर्ण आँकड़े
  6. परीक्षा उपयोगी तकनीकी शब्दावली एवं विशिष्ट तथ्य
  7. झीलों का वर्गीकरण (Classification of Lakes)
  8. खारे पानी की झीलें (Salt Water Lakes)
  9. मीठे पानी की झीलें (Fresh Water Lakes)
  10. राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP) एवं झीलों का महत्व
  11. विशेष तथ्य — नलकूप, कुएँ एवं अन्य जल स्रोत
  12. नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)
  13. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?

सोचिए — एक नदी अरावली की गोद से जन्म लेती है, सैकड़ों किलोमीटर तक बहती है, अजमेर से लेकर बाड़मेर तक पूरे मारवाड़ को सींचती है, लेकिन कभी समुद्र तक नहीं पहुँच पाती — रेगिस्तान की तपती रेत में उसका सारा पानी सोख लिया जाता है या भाप बनकर उड़ जाता है। यही है लूणी नदी का रहस्य, जिसे लोग प्यार से 'मरुस्थल की गंगा' कहते हैं। अब दूसरी तरफ देखिए — माही नदी, जो दुनिया की इकलौती ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को दो बार, एक उल्टे 'U' आकार में काटती है — जैसे कोई नदी खुद अपना रास्ता बदलकर वापस उसी रेखा को छूने आ जाए। और फिर है चम्बल — जिसके किनारे कभी डाकुओं का साम्राज्य हुआ करता था, लेकिन आज वही चम्बल घड़ियालों, डॉल्फ़िनों और भारत की सबसे बड़ी जल-विद्युत परियोजनाओं का घर है। झीलों की दुनिया भी कम रोमांचक नहीं — सांभर झील से निकलने वाला नमक भारत के 80-90% घरों की रसोई तक पहुँचता है, जबकि पचपदरा झील का नमक इतना शुद्ध (98% NaCl) है कि उसे 'सर्वश्रेष्ठ नमक' का दर्जा मिला हुआ है। वहीं नक्की झील के बारे में कहा जाता है कि इसे देवताओं ने अपने नाखूनों (नाखून = नक्की) से खोदकर बनाया था! आइए, इस अध्याय में राजस्थान के इन सभी नदी-तंत्रों और झीलों की पूरी कहानी — उनके उद्गम से लेकर संगम तक, उनकी सहायक नदियों से लेकर उन पर बने बाँधों तक — विस्तार से और बेहद सरल भाषा में समझते हैं।

1अपवाह तंत्र — परिचय एवं मूल विशेषताएँ

अपवाह तंत्र (Drainage System) का सीधा-सा मतलब है — किसी क्षेत्र में बारिश का पानी किस रास्ते से होकर बहता है और अंततः कहाँ जाकर मिलता है। राजस्थान का अपवाह तंत्र मुख्यतः मानसून पर आधारित है — यानी यहाँ की अधिकांश नदियाँ बारिश के मौसम में ही भरी हुई नज़र आती हैं, बाकी समय इनमें पानी बहुत कम या ना के बराबर होता है। इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लीजिए — जैसे किसी शहर की सड़कों की ढलान यह तय करती है कि बारिश का पानी किस नाले में जाकर गिरेगा, ठीक वैसे ही राजस्थान की भौगोलिक बनावट (खासकर अरावली पर्वतमाला) यह तय करती है कि किस इलाके का पानी किस दिशा में बहेगा।

1.1 अपवाह तंत्र की मुख्य विशेषताएँ

1.2 राजस्थान के 3 प्रमुख अपवाह तंत्र — एक नज़र में

नदी तंत्रप्रमुख नदियाँअंततः कहाँ गिरती हैं
अरब सागरीय तंत्र (16-17%)लूनी, पश्चिमी बनास, साबरमती, माहीअरब सागर / खम्भात की खाड़ी / कच्छ का रन
आन्तरिक प्रवाह तंत्र (60%)घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल, कांकनीसमुद्र तक नहीं पहुँचतीं — रेत/झीलों में विलुप्त हो जाती हैं
बंगाल की खाड़ी तंत्र (23-24%)चम्बल, बनास, बेड़च, गम्भीरयमुना नदी के रास्ते → गंगा → बंगाल की खाड़ी
💡 तीनों तंत्रों को याद रखने का आसान तरीका

कल्पना कीजिए राजस्थान का नक्शा एक तिरछी छत जैसा है, और अरावली पर्वतमाला उस छत की सबसे ऊँची कड़ी (ridge) है। इस कड़ी के पश्चिम की ओर गिरने वाला पानी (लूनी, बनास-पश्चिमी, साबरमती, माही) अरब सागर की तरफ चला जाता है — इसीलिए दूरी कम है और गति तेज़ है। कड़ी के पूर्व की ओर गिरने वाला पानी (चम्बल, बनास) घूम-फिरकर लंबा सफर तय करता हुआ बंगाल की खाड़ी तक पहुँचता है — इसीलिए दूरी ज़्यादा और गति धीमी है। और तीसरा हिस्सा (घग्घर, कांतली जैसी नदियाँ) उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल में बहती हैं, जहाँ कोई समुद्र नहीं है, तो इनका पानी बीच रास्ते में ही रेत या झीलों में समा जाता है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान का अपवाह तंत्र: अरब सागरीय, आन्तरिक प्रवाह एवं बंगाल की खाड़ी तंत्र की सीमा-रेखा (जलविभाजक अरावली सहित)

2अरब सागरीय नदी तंत्र (16-17%)

अरब सागरीय तंत्र की नदियाँ अरावली के पश्चिमी भाग में बहती हैं। इनकी तीन खास पहचान हैं — पहला, ये अपेक्षाकृत कम दूरी तय करती हैं; दूसरा, इनका बहाव तीव्रगामी (तेज़) होता है; और तीसरा, समुद्र में मिलते समय ये अक्सर एक चौड़ा त्रिकोणीय मुहाना बनाती हैं जिसे ज्वारनदमुख (Estuary) कहते हैं — यानी नदी और समुद्र का पानी वहाँ आपस में मिल जाता है।

🔵 कच्छ के रन/खाड़ी में गिरने वाली
  • लूनी नदी
  • पश्चिमी बनास नदी
🔶 खम्भात की खाड़ी में गिरने वाली
  • साबरमती नदी
  • माही नदी

2.1 लूनी नदी — मरुस्थल की गंगा

बिंदुविवरण
उद्गमनाग हिल्स (नाग पहाड़), अजमेर — आनासागर झील के समीप
संगमकच्छ का रन (गुजरात)
लम्बाईकुल 495 किमी | राजस्थान में 330 किमी
अपवाह क्षेत्रअजमेर, ब्यावर, डेगाना (नागौर), पाली, बिलाड़ा (जोधपुर), बाड़मेर, बालोतरा, जालौर
उपनामलवणती | आधी मीठी-आधी खारी | अन्तः सलीला (कालीदास द्वारा) | मरुस्थल की गंगा | सागरमती | सरगावती
प्रवाहबालोतरा तक पानी मीठा रहता है, उसके बाद खारा हो जाता है
योगदानराजस्थान के कुल अपवाह तंत्र में लूनी का योगदान 10.40% है
रिकॉर्डदेश एवं पश्चिमी राजस्थान (मरुस्थल क्षेत्र) की सबसे लम्बी नदी
अपवाह क्षेत्र के नामजालौर-सांचौर क्षेत्र में इसे 'रेल/नाड़ा' कहते हैं; समग्र क्षेत्र 'गोड़वाड़ प्रदेश' कहलाता है; उत्तरी क्षेत्र को 'थली' कहा जाता है
💡 लूनी 'मरुस्थल की गंगा' और 'आधी मीठी-आधी खारी' क्यों?

अजमेर से निकलकर लूनी नदी शुरू में मीठे पानी की नदी है और बालोतरा तक इसका पानी पीने योग्य रहता है — इसीलिए इसे 'मरुस्थल की गंगा' कहा गया, क्योंकि रेगिस्तान जैसे सूखे इलाके के लिए यह जीवनदायिनी है। लेकिन बालोतरा के बाद जब यह लवणीय (नमक-युक्त) चट्टानों और मिट्टी वाले क्षेत्र से गुजरती है, तो इसका पानी धीरे-धीरे खारा होता जाता है — इसीलिए इसे 'आधी मीठी-आधी खारी' कहा जाता है। और चूँकि यह कभी समुद्र तक सीधे नहीं पहुँचती (बीच में ही रेत में सोखी जाती है या कच्छ के रन में फैल जाती है), महाकवि कालिदास ने इसे 'अन्तः सलीला' (अंदर ही अंदर बहने वाली) कहा।

याद रखने की तरकीब: लूनी नदी के अपवाह क्षेत्र वाले जिलों को याद करने के लिए ट्रिक: 'अपना बजाज' — अजमेर, पाली, नागौर, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, जोधपुर।

लूनी की सहायक नदियाँ (Tributaries)

याद रखने की ट्रिक: 'सुकी बांडी खारी जो गुहिया से जवाई से मिली' → सुकड़ी, बांडी, खारी, जोजड़ी, गुहिया, जवाई, सागी, मीठड़ी।

सहायक नदीउद्गमसंगमविशेष तथ्य
लीलड़ीलूनी में सबसे पहले मिलने वाली सहायक नदी
जोजड़ीपोंडलू/पोडलू गाँव (नागौर)खेजड़ली खुर्दएकमात्र ऐसी सहायक नदी जो दायीं ओर से मिलती है और अरावली से नहीं निकलती
बांडीफुलाद (पाली)जोधपुर (लाखर)इसे 'राजस्थान की रासायनिक नदी' कहा जाता है — रंगाई-छपाई उद्योग के प्रदूषण के कारण
सुकड़ीदेसूरी (पाली)समदड़ी (बालोतरा)पाली, जालौर, बालोतरा जिलों में बहती है
मीठड़ीपालीमंगलया गाँव (बालोतरा)
जवाईबाली-गारियाँ गाँव (पाली)गाँधव (बाड़मेर)पश्चिमी राजस्थान की एक बेहद महत्वपूर्ण सहायक नदी (जवाई बाँध इसी पर बना है)
खारीरोरगाँव पहाड़ी (सिरोही)सामला गाँव/सायला (जालौर)यह जवाई की सहायक नदी है
सागीजसवन्तपुरा पहाड़ी (जालौर)गाँधव गाँव (बाड़मेर)लूनी में सबसे अंत में मिलने वाली सहायक नदी
गुहिया

बाँध परियोजनाएँ — लूनी तंत्र

बाँधस्थाननदीविशेष तथ्य
जसवन्त सागर / पिचियाक बाँधजोधपुरलूनी
हेमावास बाँधपालीबांडी
जवाई बाँधसुमरेपुर (पाली)जवाईइसे 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहा जाता है; यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है
बाँकली बाँधजालौरसुकड़ी

महत्वपूर्ण जानकारी: जवाई बाँध में पानी की कमी होने पर सेई जल सुरंग (उदयपुर से पाली तक) के माध्यम से जलापूर्ति की जाती है। इस सुरंग से पाली, जोधपुर, सिरोही एवं जालौर जिलों को जल आपूर्ति होती है।

2.2 पश्चिमी बनास नदी

बिंदुविवरण
उद्गमनया सानवरा हिल्स (सिरोही), अरावली पहाड़ियों में
संगमलिटिल रन / कच्छ का रन (गुजरात)
लम्बाईकुल 266 किमी | राजस्थान में केवल 50 किमी
सहायक नदियाँसुकली/सीपू और कूकड़ी
किनारे के नगरआबू रोड (सिरोही) एवं डीसा (गुजरात) — दोनों बाएँ किनारे पर स्थित

भ्रम से बचें: राजस्थान में दो अलग-अलग 'बनास' नाम की नदियाँ हैं — एक 'पश्चिमी बनास' (यहाँ, सिरोही से निकलकर कच्छ के रन में गिरने वाली, सिर्फ 50 किमी राजस्थान में) और दूसरी सिर्फ 'बनास' (राजसमंद से निकलकर चम्बल में मिलने वाली, 512 किमी पूरी राजस्थान में) — इन दोनों को कभी एक न समझें, परीक्षा में यह सबसे आम गलती है।

2.3 साबरमती नदी

बिंदुविवरण
उद्गमपादरला/पदराना हिल्स (झाड़ोल, उदयपुर)
संगमखम्भात की खाड़ी (गुजरात)
लम्बाईकुल 416 किमी | राजस्थान में मात्र 45 किमी
अपवाह क्षेत्रमुख्यतः उदयपुर एवं डूंगरपुर
सहायक नदियाँसेई, वाकल, हथमती, मेश्वा, वेतरक (वात्रक), माजम, मानसी
विशेषराजस्थान की प्रथम नदी जिस पर अहमदाबाद (गुजरात) में एक आधुनिक 'रिवर फ्रंट' बनाया गया है
निर्माणमुख्यतः वाकल एवं सेई धाराओं के आपस में मिलने से बनती है

सहायक नदियों को याद रखने की ट्रिक: 'वैसे हमें मावा चाहिए' → वेतरक, सेई, हथमती, मेश्वा, मानसी, वाकल, माजम।

जल सुरंगें — साबरमती तंत्र

जल सुरंगउद्देश्यविशेष
सेई जल सुरंगजवाई बाँध में जलापूर्ति (उदयपुर से पाली तक)राजस्थान की प्रथम जल सुरंग
मानसी-वाकल जल सुरंग (11.2 किमी)देवास/मोहनलाल सुखाड़िया परियोजना में जलापूर्तिराजस्थान की सबसे लम्बी जल सुरंग

रोचक तथ्य: वात्रक (वेतरक) नदी का उद्गम डूंगरपुर के समीप होता है, फिर यह गुजरात के मेघरज तालुका में प्रवेश करती है और अंततः धोलका के पास साबरमती नदी में मिल जाती है — ध्यान रहे, इसका उद्गम बाँसवाड़ा से नहीं होता, यह एक आम गलतफहमी है।

2.4 माही नदी — वागड़ की गंगा

बिंदुविवरण
उद्गममैहदं झील (मिंडा गाँव), सरदारपुरा (धार जिला, मध्यप्रदेश); अमरेरू हिल्स (विन्ध्यन पर्वतमाला)
संगमखम्भात की खाड़ी (अरब सागर), गुजरात
लम्बाईकुल 576 किमी | राजस्थान में 171 किमी
राजस्थान में प्रवेशखान्दू गाँव (बाँसवाड़ा) से
अपवाह क्षेत्रबाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (यह क्षेत्र 'वागड़ मैदान' या 'छप्पन का मैदान' कहलाता है)
उपनामवागड़ की गंगा | आदिवासियों की गंगा | कांठल की गंगा | दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा
💡 माही का सबसे अनोखा तथ्य — कर्क रेखा को दो बार काटना

माही विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को दो बार काटती है, और यह भी एक खास 'उल्टे U' आकार में करती है — यानी नदी पहले कर्क रेखा को पार करके उत्तर की ओर बहती है, फिर मुड़कर दोबारा दक्षिण की ओर बहते हुए फिर से कर्क रेखा को पार कर जाती है। इसे ऐसे समझें जैसे कोई व्यक्ति सड़क पार करके फिर वापस उसी सड़क को पार कर ले — सामान्यतः नदियाँ ऐसा नहीं करतीं, इसलिए यह माही को दुनिया में अनोखा बनाता है। इसके अलावा, बाँसवाड़ा (चाचाकोटा क्षेत्र) में माही में इतने टापू (द्वीप) हैं कि इसे 'सौ टापुओं का शहर' कहा जाता है। यह नदी दक्षिण से प्रवेश करके पश्चिम की ओर बहती है।

माही की सहायक नदियाँ

सहायक नदियों की ट्रिक: 'अना चारपाई में ईरु/एराव सो जा' → अनास, चाप, इरु, मोरेन, सोम, जाखम।

सहायक नदीउद्गमसंगमकिनारा
सोमबीछामेड़ा पहाड़ियाँ (उदयपुर)बेणेश्वर (डूंगरपुर) में माही मेंदायाँ
जाखमभंवरमाता पहाड़ियाँ (छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़)लोरावल बिलूरा गाँव — बेणेश्वर से पहले सोम मेंदायाँ
अनासआम्बेर गाँव (मध्यप्रदेश) → मेलडीखेड़ागलियाकोट (डूंगरपुर) में माही मेंबायाँ
मोरेनडूंगरपुरगलियाकोट के निकट माही मेंदायाँ
चापकालिंजरा पहाड़ी (बाँसवाड़ा)डूंगरपुर में माही मेंबायाँ
इरूमाही बाँध से पहले मिलती है (शेष सहायक नदियाँ बाँध के बाद मिलती हैं)दायाँ
हरणअनास की सहायक नदी हैबायाँ
भादर, एरावदायाँ

विशेष जानकारी: सोम नदी की एक अन्य प्रमुख सहायक नदी 'गोमती' भी है (जाखम के अतिरिक्त)। बेणेश्वर धाम (नवा टापरा, डूंगरपुर) में सोम + माही + जाखम — तीनों नदियों का त्रिवेणी संगम होता है, जिसे 'आदिवासियों का कुंभ' कहा जाता है और यहाँ माघ पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला लगता है।

बाँध परियोजनाएँ — माही तंत्र

बाँधस्थानविशेष तथ्य
माही बजाज सागर बाँधबोरखेड़ा (बाँसवाड़ा)कुल लम्बाई 3109 मीटर — राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध; आदिवासी क्षेत्र का सबसे बड़ा बाँध; इसे 'सुजलाम सुफलाम क्रांति' का प्रतीक माना जाता है
जाखम बाँधसीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़)राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध — 81 मीटर ऊँचाई
कागदी पिकअप बाँधबाँसवाड़ा
कडाना बाँधगुजरातगुजरात में माही नदी पर स्थित
सोम-कमला परियोजनाडूंगरपुर
सोम-कागदर परियोजनाउदयपुर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — अरब सागरीय नदी तंत्र: लूनी, पश्चिमी बनास, साबरमती एवं माही नदियों का प्रवाह-मार्ग

3आन्तरिक प्रवाह नदी तंत्र (60%)

आन्तरिक प्रवाह (Internal/Inland Drainage) का मतलब है ऐसी नदियाँ जिनका पानी कभी समुद्र तक नहीं पहुँच पाता — ये अपने प्रवाह क्षेत्र में ही, यानी रेत में, किसी झील में, या मैदान में समाकर विलुप्त हो जाती हैं। सोचिए इसे एक ऐसी सड़क की तरह जो कहीं पहुँचने के बजाय बीच में ही एक बंद गली में खत्म हो जाए — नदी का पानी भी कुछ ऐसा ही करता है। राजस्थान के कुल अपवाह क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा (60%) इसी श्रेणी में आता है, जो यह दर्शाता है कि राज्य का बड़ा भूभाग मरुस्थलीय व अर्द्धशुष्क है।

3.1 घग्घर नदी — मृत नदी

बिंदुविवरण
उद्गमशिवालिक की पहाड़ियाँ, कालका माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
राजस्थान में प्रवेशतलवाड़ा गाँव (टिब्बी तहसील, हनुमानगढ़)
अपवाह क्षेत्रहनुमानगढ़, श्रीगंगानगर
अंतिम स्थानफोर्ट अब्बास (बहावलपुर, पाकिस्तान) में विलुप्त
उपनामसरस्वती (प्राचीन नाम) | मृत नदी | नट नदी | सोता/सोतर नदी | दृषद्वती नदी
अपवाह क्षेत्र के नामहनुमानगढ़ में इसे 'नाली/पाट' कहते हैं; पाकिस्तान में इसे 'हकरा' कहा जाता है
रिकॉर्डहिमालय पर्वत से निकलकर राजस्थान आने वाली एकमात्र नदी; देश एवं राजस्थान की सबसे लम्बी अन्तः प्रवाही नदी
सभ्यताएँकालीबंगा एवं पीलीबंगा सभ्यता इसी नदी के किनारे बसी थीं
तलवाड़ा झीलघग्घर नदी पर ही निर्मित है
संभागबीकानेर संभाग की एकमात्र नदी
💡 घग्घर को 'मृत नदी' और 'सरस्वती' क्यों कहा जाता है?

माना जाता है कि घग्घर नदी वैदिक काल की प्रसिद्ध 'सरस्वती नदी' का ही अवशेष है — यानी हजारों साल पहले यह एक बड़ी, सतत बहने वाली नदी थी, लेकिन भूगर्भीय बदलावों के कारण इसका मुख्य जल-स्रोत सूख गया और अब यह सिर्फ बारिश के मौसम में ही थोड़ा-बहुत पानी लेकर बहती है — बाकी समय इसका मार्ग सूखा (dry channel) पड़ा रहता है, इसीलिए इसे 'मृत नदी' कहा जाता है। सरस्वती नदी के इसी प्राचीन मार्ग की खोज के लिए श्रीराम वाडरे व हनुवंता राय जैसे शोधकर्ताओं को नियुक्त किया गया था।

3.2 कांतली/काठली नदी — तोरावाटी की नदी

बिंदुविवरण
उद्गमखण्डेला की पहाड़ियाँ (सीकर)
अपवाह क्षेत्रसीकर, झुंझुनूं, चूरू की सीमा (यह क्षेत्र 'तोरावाटी' कहलाता है)
लम्बाई100 किमी — यह पूर्ण रूप से राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी आन्तरिक प्रवाह नदी है
सभ्यताएँगणेश्वर सभ्यता (सीकर) | सुनारी सभ्यता (झुंझुनूं/खेतड़ी)
विशेषझुंझुनूं जिले को दो भागों में बाँटती हुई अंततः चूरू की सीमा में विलीन हो जाती है

3.3 साबी/साहिबी नदी — नजफगढ़ का नाला

बिंदुविवरण
उद्गमसेवर की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़/जयपुर)
अपवाह क्षेत्रजयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा
अंतहरियाणा के गुड़गाँव/पटौदी मैदान में ('नजफगढ़ के नाले' के रूप में) विलुप्त
सभ्यताजोधपुरा सभ्यता (कोटपूतली-बहरोड़)
विशेषराजस्थान की एकमात्र नदी जो हरियाणा के मैदान में जाकर विलुप्त होती है; मुगलकाल में इसकी बाढ़ 'विनाश लीला' के लिए प्रसिद्ध थी

3.4 बाणगंगा नदी — अर्जुन की गंगा

बिंदुविवरण
उद्गमबैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़/जयपुर)
अपवाह क्षेत्रकोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, दौसा, भरतपुर
सर्वाधिक बेसिनभरतपुर में सर्वाधिक बेसिन क्षेत्र (लगभग 2746 वर्ग किमी)
उपनामअर्जुन की गंगा | ताला नदी | रुण्डित नदी (Beheaded River)
वर्गीकरणवर्ष 2012 से इसे अन्तः प्रवाही नदी माना जाता है; भारी वर्षा के समय यह आगरा (फतेहाबाद) के निकट यमुना नदी में जाकर मिल जाती है
सभ्यताबैराठ सभ्यता
💡 रुण्डित नदी (Beheaded River) का मतलब क्या है?

'रुण्डित' शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'सिर कटा हुआ'। जिस तरह किसी का सिर धड़ से अलग कर दिया जाए, उसी तरह बाणगंगा जैसी नदियाँ अपनी मुख्य नदी (यहाँ यमुना) में पहुँचने से पहले ही बीच में समाप्त हो जाती हैं — यानी इनका 'सिर' (मुहाना) कहीं और है, धड़ (मुख्य प्रवाह) कहीं और। सामान्यतः बाणगंगा भरतपुर में ही विलुप्त हो जाती है, केवल असाधारण भारी बारिश में ही यह यमुना तक पहुँच पाती है।

बाँध — बाणगंगा तंत्र

3.5 रुपारेल नदी — वराह नदी

बिंदुविवरण
उद्गमउदयनाथ हिल्स (थानागाजी, अलवर)
अपवाह क्षेत्रअलवर, डीग, भरतपुर
उपनामवराह नदी | लसवारी नदी
बाँधसीकरी बाँध (डीग) — यहीं पर यह विलुप्त हो जाती है
झीलभरतपुर में 'मोती झील' में गिरती है, जिसे 'भरतपुर की जीवनरेखा' कहा जाता है; यहाँ नील हरित शैवाल (उर्वरक के रूप में उपयोगी) पाया जाता है
चैनलसुजान गंगा नामक चैनल मोती झील और लोहागढ़ किले को आपस में जोड़ता है

3.6 कांकनी/काकनेय/मसूरदी नदी — सबसे छोटी नदी

बिंदुविवरण
उद्गमकोटरी/कोठ्यारी गाँव (जैसलमेर)
लम्बाईकेवल 27 किमी — राजस्थान की सबसे छोटी नदी
झीलरूपसी गाँव के पास प्रसिद्ध 'बुझ झील' का निर्माण करती है
अंत'मीठा खाड़ी' में विलुप्त हो जाती है

3.7 अन्य अन्तः प्रवाही नदियाँ — सांभर झील में गिरने वाली

सांभर झील में गिरने वाली नदियाँ एक खास प्रकार का जल-प्रतिरूप (drainage pattern) बनाती हैं जिसे 'अभिकेन्द्रीय प्रतिरूप' (Centripetal Pattern) कहा जाता है — यानी चारों दिशाओं से आने वाली सभी छोटी नदियाँ एक ही केंद्र बिंदु (यहाँ सांभर झील) की ओर बहकर आती हैं, जैसे किसी थाली के किनारों से पानी बीच में जमा होता जाए।

नदीउद्गम/विशेषतथ्य
मेंथा/मेन्ढामनोहर हिल्स (जयपुर)सांभर झील में सर्वाधिक लवणता (नमक) जमा करने वाली नदी
रूपनगढ़अजमेरसांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदी
खारी (नागौर)नागौरसांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदी
खण्डेलसीकरसांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदी

अन्य महत्वपूर्ण छोटी नदियाँ

नदीउद्गम/विशेषतथ्य
अरवारी नदीसरिस्का पहाड़ियाँ (थानागाजी, अलवर) — सकरा बाँध से चाँदपुरा ग्राम में 3 धाराओं का संगमतरुण भारत संघ (जल-पुरुष राजेंद्र सिंह के संगठन) द्वारा पुनर्जीवित की गई नदी; 'सरसा नदी' में जाकर गिरती है
द्वैषवती/द्रव्यवती नदीनाहरगढ़ पहाड़ियों में 'आधुनी कुंड' से; समापन 'ढूँढ़ नदी' मेंऋग्वेद में वर्णित; इसे 'अमानीशाह का नाला' भी कहते हैं; टाटा प्रोजेक्ट के तहत इसका सौन्दर्यीकरण किया गया; इसे 'जयपुर की लाइफलाइन' कहा जाता है
लिक (Lik) नदीएक अन्य आन्तरिक प्रवाह नदी

जिलों से जुड़े नदी-तथ्य: राजस्थान में तीन जिलों में कोई नदी नहीं बहती — बीकानेर, चूरू और फलौदी (पहले जैसलमेर में भी नदी नहीं थी, लेकिन नए जिले बनने के बाद कांकनी नदी जैसलमेर में मानी जाती है)। सर्वाधिक नदियाँ चित्तौड़गढ़ जिले में बहती हैं (कोटा संभाग), जबकि न्यूनतम नदियाँ बीकानेर जिले में (बीकानेर संभाग)। एक रोचक व चिंताजनक तथ्य यह भी है कि बालोतरा शहर (लूनी नदी के किनारे) और हनुमानगढ़ जंक्शन (घग्घर नदी के किनारे) दोनों नदी के तल (पेटे) से भी नीचे बसे हुए हैं — इसीलिए जब भी नदी में पानी अधिक आता है, वहाँ सीधे बाढ़ की स्थिति बन जाती है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — आन्तरिक प्रवाह नदी तंत्र: घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल एवं सांभर झील में गिरने वाली नदियाँ

4बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र (23-24%)

बंगाल की खाड़ी तंत्र की नदियाँ अरावली के पूर्वी भाग में बहती हैं। अरब सागरीय तंत्र के बिल्कुल विपरीत, इनकी विशेषताएँ हैं — लम्बी दूरी, मंद (धीमी) गति, सर्वाधिक जल-प्रवाह वाली नदियाँ, और समुद्र में मिलते समय डेल्टा (त्रिकोणीय भू-भाग) का निर्माण।

4.1 चम्बल नदी — राजस्थान की सबसे बड़ी नदी

बिंदुविवरण
उद्गमजनापाव हिल्स, महू / डॉ. अम्बेडकर नगर (विन्ध्यन पर्वतमाला, इंदौर, मध्यप्रदेश)
संगममुरादगंज/इटावा (उत्तरप्रदेश) — यमुना नदी में
लम्बाईकुल 1051 किमी | राजस्थान में 322 किमी (पुराने आँकड़ों में कुल 965 किमी व राजस्थान में 135 किमी दर्ज था)
राजस्थान में प्रवेशचौरासीगढ़ (चित्तौड़गढ़) से
अपवाह क्षेत्रचित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर
उपनामचर्मण्वती (प्राचीन नाम) | कामधेनु | बारहमासी | नित्यवाही | घड़ियालों की शरणस्थली
प्रवाह प्रतिरूपवृक्षाकार (Dendritic) — यानी जैसे किसी पेड़ की शाखाएँ चारों तरफ फैली होती हैं, वैसे ही चम्बल की सहायक नदियाँ चारों ओर से आकर इसमें मिलती हैं
रिकॉर्डपूर्वी राजस्थान एवं सम्पूर्ण राजस्थान की सबसे लम्बी व सबसे बड़ी नदी; राजस्थान का सबसे बड़ा नदी-बेसिन

चम्बल की विशेष विशेषताएँ

चम्बल की सहायक नदियाँ

सहायक नदियों की ट्रिक: 'गुस्से में मां पाया ने आज काले घोड़े पर बार बार चाकू से सीप मारा' → गुंजाली, मेज, मांगली, पार्वती, निवाज/नैवाज, आहू, कालीसिंध, घोड़ापछाड़, परवन, बनास, ब्राह्मणी, चाकण, कूनो/कूराल, सीप।

सहायक नदीउद्गम/विशेषसंगम/अन्य विवरण
गुंजाली (बायीं ओर)राजस्थान में चम्बल से सबसे पहले मिलने वाली सहायक नदी
बामनी/ब्राह्मणी (बायीं ओर)चित्तौड़गढ़ की हरिपुरा पहाड़ियाँभैंसरोड़गढ़ के निकट चम्बल में मिलती है
कुराल (बायीं ओर)ऊपरमाल का पठारबूंदी के पूर्व में चम्बल में मिलती है
मेज (बायीं ओर)चम्बल में मिलती है
चाकण (बायीं ओर)चम्बल में मिलती है
बनास (बायीं ओर)चम्बल की सबसे लम्बी सहायक नदी है
कालीसिंध (दायीं ओर)बागली गाँव (देवास, मध्यप्रदेश)नोनेरा (कोटा) में चम्बल में मिलती है; इसकी अपनी सहायक नदियाँ हैं — परवन, उजाड़, आहू, निमाज; यह दायीं ओर से मिलने वाली सबसे लम्बी सहायक नदी है
आहू (दायीं ओर)कालीसिंध से सामेला (गागरोन दुर्ग के निकट) में संगम होता है
आलनिया (दायीं ओर)मुकुन्दवाड़ा पहाड़ियाँ (कोटा)नोटाना गाँव में चम्बल में मिलती है
परवन (दायीं ओर)शेरगढ़ अभयारण्य (बारां) से होकर बहती है
पार्वती (दायीं ओर)धौलपुर में पूर्व से पश्चिम की दिशा में बहती है
सीप, कूनो (दायीं ओर)

बाँध परियोजनाएँ — चम्बल तंत्र

बाँधस्थानविशेष तथ्य
गाँधी सागर बाँधमध्यप्रदेशचम्बल नदी पर बना सबसे बड़ा बाँध
राणा प्रताप सागर बाँधरावतभाटा, चित्तौड़गढ़भराव क्षमता (Capacity) के आधार पर राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध
जवाहर सागर बाँधकोटा-बूंदीजल विद्युत उत्पादन हेतु
कोटा बैराजकोटासिंचाई के लिए

भ्रम से बचें — दो अलग-अलग 'सबसे बड़े बाँध': राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध (भराव क्षमता के आधार पर) = राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़), जबकि चम्बल नदी पर बना (राज्य के बाहर मध्यप्रदेश में स्थित) सबसे बड़ा बाँध = गाँधी सागर — इन दोनों तथ्यों को अलग-अलग याद रखें, परीक्षा में अक्सर एक-दूसरे से बदलकर पूछे जाते हैं।

4.2 बनास नदी — वनों की आशा

बिंदुविवरण
उद्गमकुम्भलगढ़ के निकट खमनौर हिल्स / वेरों या भेरों का मठ (राजसमंद)
संगमरामेश्वर घाट (सवाई माधोपुर) में — चम्बल नदी में
लम्बाई512 किमी — पूर्ण रूप से राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी
अपवाह क्षेत्रराजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर
जलग्रहण क्षेत्रराजस्थान में सर्वाधिक — लगभग 46,570 से 47,060 वर्ग किमी
उपनामवनों की आशा | वर्णशा | वशिष्ठी | अध्यारोपित नदी (Superimposed River)
रिकॉर्डकेवल/पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी (512 किमी)
त्रिवेणी संगमराजस्थान में सर्वाधिक त्रिवेणी संगम बनास नदी पर ही स्थित हैं
💡 अध्यारोपित नदी (Superimposed River) क्या है?

सोचिए किसी नदी के रास्ते में शुरुआत में नरम (मुलायम) मिट्टी/चट्टान थी, इसलिए नदी ने अपना रास्ता आसानी से तय कर लिया। लेकिन समय के साथ कटाव होते-होते नदी नीचे कठोर (सख्त) चट्टानों तक पहुँच गई — फिर भी नदी ने अपना वही पुराना रास्ता नहीं बदला, वह उसी ढलान पर बहती रही, भले ही अब नीचे कठोर चट्टान हो। ऐसी नदी को 'अध्यारोपित नदी' कहते हैं — यानी नदी का प्रारंभिक मार्ग नई (कठोर) सतह पर जबरन 'थोप' दिया गया हो। बनास, चम्बल, दामोदर और सुवर्णरेखा — ये सभी अध्यारोपित नदियों के उदाहरण हैं।

बनास की सहायक नदियाँ

सहायक नदियों की ट्रिक: 'काली डाकण मासी मेना मोर बांडी आम को खा गई' → कालीसिल, डाई, माशी/मांसी, मेनाल, मोरेल, बांडी, आयड़/बेड़च, कोठारी, खारी, गलवा।

सहायक नदीउद्गम/विशेषसंगम/अन्य विवरण
बेड़च/आयड़ (दायीं ओर)गोगुन्दा हिल्स (उदयपुर)बिगोद (भीलवाड़ा) में बनास में मिलती है; यह दायीं ओर से सबसे लम्बी सहायक नदी है; इसकी अपनी सहायक नदियाँ हैं — गोलवा, ओराई, गुजरी, वाग्ली, वागन
गम्भीरीबेड़च की सहायक नदी है; चित्तौड़गढ़ दुर्ग बेड़च+गम्भीरी के संगम स्थल पर स्थित है
मेनालबनास में मिलती है; बिगोद (भीलवाड़ा) में बनास+बेड़च+मेनाल का त्रिवेणी संगम होता है
खारी (बायीं ओर)बिजराल/विजराज हिल्स (राजसमंद)राजमहल (टोंक) में बनास में मिलती है; यह बनास की सबसे लम्बी सहायक नदी है
कोठारी (बायीं ओर)मेजा बाँध यहीं स्थित है; इसके किनारे बागौर सभ्यता (भीलवाड़ा) बसी हुई थी
डाईनसीराबाद तहसील, किशनगढ़ (अजमेर)राजमहल (टोंक) में बनास में मिलती है; अजमेर, केकड़ी क्षेत्र में बहती है
माशी/मांसीबनास में मिलती है; देवधाम जोधपुरिया में बनास+बांडी+माशी का संगम होता है
मोरेलबस्सी तहसील, चैनपुरा (जयपुर)खंडार गाँव (सवाई माधोपुर) में बनास में मिलती है; मोरेल बाँध — पीलूखेड़ा में स्थित
ढूँढ (बायीं ओर)
कालीसिल (बायीं ओर)कैलादेवी (करौली) यहीं स्थित है
बांडी-अजमेरभीलवाड़ा/अजमेरबनास में मिलती है (यह लूनी वाली 'बांडी' नदी से बिल्कुल अलग है)
मानसी (बनास वाली)करेरा गाँव (भीलवाड़ा)अजमेर जिले की सीमा पर खारी नदी में मिलती है
सोहादरा, ढील (बायीं ओर)

भ्रम से बचें — दो अलग-अलग 'बांडी' नदियाँ: राजस्थान में दो अलग-अलग 'बांडी' नाम की नदियाँ हैं — एक लूनी की सहायक नदी (फुलाद, पाली से निकलकर जोधपुर में मिलने वाली, 'राजस्थान की रासायनिक नदी'), और दूसरी बनास की सहायक नदी (भीलवाड़ा/अजमेर क्षेत्र से)। इन्हें कभी एक-दूसरे से न जोड़ें।

बाँध परियोजनाएँ — बनास तंत्र

बाँधस्थानविशेष तथ्य
बीसलपुर बाँधटोंक (बनास नदी पर)वर्ष 1999 में निर्मित; राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध; सबसे बड़ी पेयजल परियोजना; इसे 'मिनि गोवा' भी कहा जाता है; यहाँ फिश एक्वेरियम है; यह राजस्थान का प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व (2000) भी है; भविष्य में इसे ERCP (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) से जोड़ा जाएगा
जलापूर्ति — बीसलपुरटोंक, अजमेर, नागौर, जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर को जलापूर्ति करता है
मोरेल बाँधसवाई माधोपुर/दौसामोरेल नदी पर
मेजा बाँधभीलवाड़ाकोठारी नदी पर
गलवा बाँधटोंकगलवा/तालवा नदी पर
नन्दसमंद बाँधराजसमंदबनास नदी पर
मातृकुण्डिया (मेवाड़ का हरिद्वार)चित्तौड़गढ़बनास नदी पर
ईसरदा बाँधसवाई माधोपुरबनास नदी पर; बीसलपुर बाँध से अतिरिक्त पानी के भंडारण हेतु

4.3 बेड़च/आयड़ नदी

बिंदुविवरण
उद्गमगोगुन्दा हिल्स (उदयपुर के उत्तर में)
संगमबिगोद (भीलवाड़ा) में बनास नदी में
अपवाह क्षेत्रउदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा
नामांतरणउदयसागर झील (उदयपुर) में गिरने से पहले इसे 'आयड़' कहा जाता है, और झील से निकलने के बाद इसका नाम 'बेड़च' हो जाता है
सभ्यताआहड़ सभ्यता (उदयपुर) इसी नदी (आयड़) के किनारे बसी थी
दुर्गचित्तौड़गढ़ दुर्ग बेड़च एवं गम्भीरी नदी के संगम स्थल पर स्थित है
उप-सहायक नदियाँगोलवा, ओराई, गुजरी, वाग्ली, वागन

4.4 गम्भीर/ऊंटगन नदी

बिंदुविवरण
उद्गमसपोटरा तहसील / लांगरा गाँव (करौली)
संगमरिहोली गाँव, फतेहाबाद/मैनपुरी (उत्तरप्रदेश) — यमुना नदी में; कुल लम्बाई 244 किमी
अपवाह क्षेत्रकरौली, भरतपुर, धौलपुर
सहायक नदियाँअटा, माची, भद्रावती, भैंसावट, बरखेड़ा
बाँधपाँचना बाँध (करौली) — यह मिट्टी से निर्मित राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है
विशेषअजान बाँध (केवलादेव) में जल की कमी होने पर पाँचना बाँध से जलापूर्ति की जाती है

सहायक नदियों की ट्रिक: 'अ मा भदावरी भैंस बहार' → अटा, माची, भद्रावती, भैंसावट, बरखेड़ा (गम्भीर की सहायक नदियाँ)।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र: चम्बल, बनास, बेड़च एवं गम्भीर नदियों का प्रवाह-मार्ग एवं प्रमुख बाँध

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5तुलनात्मक तालिकाएँ एवं महत्वपूर्ण आँकड़े

5.1 प्रमुख त्रिवेणी संगम (जहाँ 3 नदियाँ मिलती हैं)

संगम स्थलनदियाँजिला/विशेष
बेणेश्वर धाम (नवा टापरा)सोम + माही + जाखमडूंगरपुर; यहाँ माघ पूर्णिमा को 'आदिवासियों का कुंभ' लगता है
बिगोद/माण्डलगढ़बनास + बेड़च + मेनालभीलवाड़ा
रामेश्वर घाट (पदरा गाँव)बनास + चम्बल + सीपसवाई माधोपुर
राजमहलबनास + डाई + खारीटोंक
देवधाम जोधपुरियाबनास + बांडी + माशी/मांसीटोंक
सामेलाकालीसिंध + आहूझालावाड़; यहाँ 'गागरोन दुर्ग' स्थित है

5.2 राजस्थान के प्रमुख जलप्रपात (Waterfalls)

जलप्रपातनदीस्थान/ऊँचाई
चूलिया जलप्रपातचम्बलभैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़); 18 मीटर ऊँचा — राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात
भीमलत जलप्रपातमांगली नदीबूंदी
मेनाल जलप्रपातमेनाल नदीभीलवाड़ा
भील बेरी जलप्रपातबांडी नदी (फुलाद, जोजावर)पाली; लगभग 182 फीट (लगभग 55 मीटर)
अरणा-झरना / बेरी गंगाजोधपुर (मंडोर)
दमोह जलप्रपातबाड़ी (धौलपुर)
दिर जलप्रपात (दीर्घ जलप्रपात)कुकुंद नदीदिर (भरतपुर)

5.3 नदी किनारे स्थित प्रमुख नगर व प्राचीन सभ्यताएँ

नगर/सभ्यतानदीजिला
कालीबंगा, पीलीबंगाघग्घरहनुमानगढ़
हनुमानगढ़, सूरतगढ़घग्घर (बायाँ किनारा)हनुमानगढ़/श्रीगंगानगर
बालोतरा, तिलवाड़ालूनी (दायाँ किनारा)बालोतरा
एरिनपुरा, शिवगंजजवाई (बायाँ किनारा)सिरोही
आबू रोड, डीसापश्चिमी बनास (बायाँ किनारा)सिरोही/गुजरात
गणेश्वर सभ्यताकांतलीसीकर
सुनारी सभ्यताकांतलीझुंझुनूं/खेतड़ी
जोधपुरा सभ्यतासाबी/साहिबीकोटपूतली-बहरोड़
बैराठ सभ्यताबाणगंगाजयपुर/कोटपूतली
आहड़ सभ्यताबेड़च/आयड़उदयपुर
बागौर सभ्यताकोठारीभीलवाड़ा
आसीन्द, विजयनगर, हुरड़ाखारी (बायाँ किनारा)भीलवाड़ा/राजसमंद
कोटा नगरचम्बलकोटा
पीपलखूंट, गलियाकोटमाहीप्रतापगढ़/डूंगरपुर
देव सोमनाथसोमडूंगरपुर
कैलादेवीकालीसिलकरौली
चन्द्रावती (प्राचीन नगर)पश्चिमी बनास (बायाँ किनारा)सिरोही

5.4 लम्बाई के अनुसार नदियों का क्रम

नदीकुल लम्बाईराजस्थान में लम्बाईउद्गम — संगम
चम्बल1051 किमी322 किमीमध्यप्रदेश → उत्तरप्रदेश (यमुना में)
माही576 किमी171 किमीमध्यप्रदेश → खम्भात की खाड़ी
बनास512 किमी512 किमी (पूर्णतः राजस्थान में)राजसमंद → चम्बल
लूनी495 किमी330 किमीअजमेर → कच्छ का रन
साबरमती416 किमी45 किमीउदयपुर → खम्भात की खाड़ी
बाणगंगा380 किमीजयपुर → भरतपुर में समाप्त
कालीसिंध278 किमी145 किमीमध्यप्रदेश → चम्बल
पश्चिमी बनास266 किमी50 किमीसिरोही → लिटिल कच्छ
कांतली100 किमी100 किमी (पूर्णतः)सीकर → चूरू (आन्तरिक)
कांकनी27 किमी27 किमी (सबसे छोटी)जैसलमेर → बुझ झील

दो अलग-अलग क्रम याद रखें: राजस्थान से सम्बन्धित कुल लम्बाई के अनुसार क्रम: चम्बल (1051) > माही (576) > बनास (512) > लूनी (495)। लेकिन केवल राजस्थान में लम्बाई के अनुसार क्रम बदल जाता है: बनास (512) > लूनी (330) > चम्बल (322) > माही (171) — क्योंकि चम्बल व माही ज़्यादातर दूसरे राज्यों में बहती हैं, जबकि बनास पूरी तरह राजस्थान में ही बहती है।

5.5 अपवाह क्षेत्र (Catchment Area) के अनुसार क्रम

सभी स्रोतों में एकमत क्रम (अवरोही): बनास > लूनी > चम्बल > माही > बाणगंगा > साबरमती।

नदीप्रचलित डाटाडॉ. हरिमोहन सक्सेना (IMTI)पटवारी-2016 डाटा
बनास45,000 वर्ग किमी47,060.27 वर्ग किमी (13.75%)45,833 वर्ग किमी
लूनी37,000 वर्ग किमी69,302.10 वर्ग किमी (20.25%)34,866.40 वर्ग किमी
चम्बल32,000 वर्ग किमी31,242.50 वर्ग किमी (9.13%)18,446 वर्ग किमी (राजस्थान में)
माही16,000 वर्ग किमी16,610.63 वर्ग किमी (4.85%)16,551 वर्ग किमी
बाणगंगा8,800 वर्ग किमी
साबरमती4,000 वर्ग किमी

उप-बेसिन के अनुसार क्रम: लूनी (12 उप-बेसिन) > बनास (10 उप-बेसिन) > चम्बल (7/8 उप-बेसिन) > माही (6 उप-बेसिन)। ध्यान दें — यह क्रम 'अपवाह क्षेत्र' के क्रम से अलग है, इसलिए दोनों को गड़बड़ न करें।

5.6 जल उपलब्धता के आधार पर क्रम (MCM में)

क्रमनदीजल उपलब्धता (MCM)विशेष
1चम्बल5203 MCMप्रथम (सर्वाधिक जल उपलब्धता)
2बनास4039.3 MCMद्वितीय
3माही3149 MCMतृतीय
4लूनी1451.8 MCMचतुर्थ

5.7 दिशाओं के अनुसार नदियों का क्रम

दिशा/श्रेणीनदी/क्षेत्र
उत्तरी राजस्थान की सबसे लम्बी नदीघग्घर
पश्चिमी राजस्थान/मरुस्थल की सबसे लम्बी नदीलूनी
दक्षिणी राजस्थान/आदिवासी क्षेत्र की सबसे लम्बी नदीमाही
पूर्वी राजस्थान/सम्पूर्ण राजस्थान की सबसे लम्बी नदीचम्बल
केवल/पूर्णतः राजस्थान में सबसे लम्बी नदीबनास (512 किमी)
सबसे छोटी नदीकांकनी (27 किमी)
पूर्व से पश्चिम दिशा-क्रमपार्वती → कालीसिंध → चम्बल → बनास (राजसमंद)

5.8 नदियों के किनारे प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य

अभयारण्यनदीजिला
फुलवारी की नाल अभयारण्यमानसी-वाकल (उद्गम)उदयपुर
बस्सी अभयारण्यओरई व बामनी (उद्गम)चित्तौड़गढ़
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्यचम्बलकोटा/सवाई माधोपुर/करौली/धौलपुर
जवाहर सागर अभयारण्यचम्बलकोटा-बूंदी
शेरगढ़ अभयारण्यपरवन नदीबारां
भैंसरोड़गढ़ अभयारण्यचम्बल + बामनी संगम परचित्तौड़गढ़
सीतामाता अभयारण्यजाखम नदीप्रतापगढ़

6परीक्षा उपयोगी तकनीकी शब्दावली एवं विशिष्ट तथ्य

6.1 दो 'खारी' नदियों में अंतर — भ्रम निवारण

राजस्थान में 'खारी' नाम की दो बिल्कुल अलग-अलग नदियाँ हैं, जो परीक्षा में सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करती हैं — नीचे तालिका में दोनों का साफ-साफ अंतर देखें।

विषयखारी-1 (अरब सागर तंत्र)खारी-2 (बंगाल की खाड़ी तंत्र)
उद्गमरोरगाँव/शेरगाँव पहाड़ियाँ (सिरोही)बिजराल/विजराज हिल्स (राजसमंद)
बहाव क्षेत्रसिरोही, जालोरभीलवाड़ा (हुरड़ा), अजमेर-भीलवाड़ा सीमा
संगमसायला गाँव (जालोर) में जवाई नदी में (जो आगे लूनी की सहायक है)राजमहल (टोंक) में बनास नदी में
अन्यआसीन्द कस्बा इसी खारी-2 के बाएँ किनारे पर बसा है

6.2 तकनीकी पारिभाषिक शब्द — सरल भाषा में समझें

शब्द/Termसरल परिभाषा एवं उदाहरण
अध्यारोपित नदी (Superimposed River)जब कोई नदी शुरू में नरम चट्टान पर बहती है, लेकिन कटाव के बाद नीचे की कठोर चट्टान तक पहुँचकर भी अपने पुराने रास्ते (ढलान) को नहीं छोड़ती। उदाहरण: चम्बल, बनास, दामोदर, सुवर्णरेखा
रुण्डित नदी (Beheaded River)ऐसी नदी जो अपनी मुख्य नदी में मिलने से पहले ही, बीच रास्ते में समाप्त हो जाए — जैसे किसी का 'सिर' शरीर से अलग हो गया हो। उदाहरण: बाणगंगा (जो भरतपुर में ही समाप्त हो जाती है, यमुना तक शायद ही पहुँचती है)
अभिकेन्द्रीय प्रतिरूप (Centripetal Pattern)जब चारों दिशाओं से आने वाली छोटी नदियाँ एक ही केंद्रीय स्थान (जैसे किसी झील) की ओर बहकर आएँ — जैसे थाली के किनारों से पानी बीच में जमा होना। उदाहरण: सांभर झील (जहाँ मेंथा, रूपनगढ़, खारी, खण्डेल नदियाँ आकर मिलती हैं)
उत्खात भूमि (Badland Topography)सर्वाधिक अवनालिका अपरदन (गहरी नालीनुमा कटाव) से बनी ऊबड़-खाबड़, बंजर भूमि — जैसे किसी सतह पर बार-बार खरोंच लगने से गड्ढे बन जाएँ। उदाहरण: चम्बल नदी घाटी (डांग प्रदेश)
वृक्षाकार प्रतिरूप (Dendritic Pattern)जब मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियाँ किसी पेड़ की शाखाओं जैसी आकृति में फैली हों — मुख्य तना (नदी) और चारों ओर निकलती टहनियाँ (सहायक नदियाँ)। उदाहरण: चम्बल नदी
गॉर्ज वैली बनाम कैनियनगॉर्ज (Gorge) एक कम चौड़ी, गहरी V-आकार की घाटी होती है, जबकि कैनियन (Canyon) अपेक्षाकृत अधिक चौड़ी होती है। राजस्थान में सर्वाधिक गॉर्ज वैली चम्बल नदी में पाई जाती हैं
एस्चुअरी/ज्वारनदमुख (Estuary)वह चौड़ा त्रिकोणीय मुहाना जहाँ नदी का मीठा पानी और समुद्र का खारा पानी आपस में मिलते हैं — यह अरब सागरीय नदियों (जो कम दूरी व तेज़ गति से बहती हैं) की खास पहचान है

6.3 महत्वपूर्ण 'प्रथम' एवं 'सर्वाधिक' तथ्य

श्रेणीतथ्य
सबसे बड़ा बाँध (भराव क्षमता), राजस्थानराणा प्रताप सागर (चम्बल, चित्तौड़गढ़)
चम्बल का सबसे बड़ा बाँधगाँधी सागर (मध्यप्रदेश)
सबसे लम्बा बाँध, राजस्थानमाही बजाज सागर (3109 मीटर, बाँसवाड़ा)
सबसे ऊँचा बाँध, राजस्थानजाखम बाँध (81 मीटर, प्रतापगढ़)
सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध, राजस्थानबीसलपुर बाँध (टोंक)
मिट्टी से निर्मित सबसे बड़ा बाँधपाँचना बाँध (करौली — गम्भीर नदी)
पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँधजवाई बाँध (पाली)
प्रथम रिवर फ्रंट, राजस्थानकोटा हैरिटेज रिवर फ्रंट (चम्बल नदी)
प्रथम रिवर फ्रंट (साबरमती नदी पर)अहमदाबाद, गुजरात
प्रथम हैंगिंग ब्रिज, राजस्थानचम्बल नदी पर (कोटा, 1.5 किमी)
दूसरा हैंगिंग ब्रिजमाही नदी (बाँसवाड़ा)
सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाबीसलपुर बाँध
प्रथम जल सुरंग, राजस्थानसेई जल सुरंग (उदयपुर से पाली)
सबसे लम्बी जल सुरंग, राजस्थानमानसी-वाकल सुरंग (11.2 किमी, उदयपुर)
प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व, राजस्थानबीसलपुर (वर्ष 2000)
सर्वाधिक त्रिवेणी संगमबनास नदी पर
सर्वाधिक जल उपलब्धता (MCM में)चम्बल (5203 MCM)
सांभर झील में सर्वाधिक लवणता जमा करने वाली नदीमेंथा/मेन्ढा नदी

6.4 विशिष्ट उपनाम — एक नज़र में

उपनामनदी
मरुस्थल की गंगालूनी
राजस्थान की रासायनिक नदीबांडी (लूनी की सहायक)
मारवाड़ का अमृत सरोवरजवाई बाँध (जवाई नदी)
वागड़ की गंगा / आदिवासियों की गंगा / कांठल की गंगा / दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखामाही
अर्जुन की गंगा / रुण्डित नदीबाणगंगा
वनों की आशाबनास
चर्मण्वती / कामधेनु / बारहमासी / नित्यवाहीचम्बल
अन्तः सलीला (कालीदास द्वारा)लूनी
सरस्वती / मृत नदी / नट नदीघग्घर
भरतपुर की जीवनरेखामोती झील (रुपारेल से भरती है)
जयपुर की लाइफलाइनद्रव्यवती/द्वैषवती (अमानीशाह नाला)
मिनि गोवाबीसलपुर बाँध (बनास)
मेवाड़ का हरिद्वारमातृकुण्डिया (बनास)

7झीलों का वर्गीकरण (Classification of Lakes)

अब तक हमने नदियों को समझा, अब बात करते हैं राजस्थान की झीलों की। झीलें दो बड़ी श्रेणियों में बाँटी जाती हैं — खारे पानी की और मीठे पानी की। इन दोनों के बनने का कारण, स्थान और उपयोग बिल्कुल अलग-अलग हैं।

🧂 खारे पानी की झीलें
  • कारण: टेथिस सागर के अवशेष (प्राचीन समुद्र का बचा हुआ खारा पानी)
  • सर्वाधिक: डीडवाना-कुचामन एवं नागौर क्षेत्र में
  • उत्पत्ति प्रक्रिया: केशिकात्व (Capillary Action) प्रक्रिया द्वारा — यानी ज़मीन के अंदर की नमी केशिका नलियों जैसे महीन छिद्रों से ऊपर खिंचकर सतह पर आती है और वाष्पित होकर नमक छोड़ जाती है
  • स्थिति: मुख्यतः उत्तर-पश्चिम राजस्थान में
  • कारण चट्टान: माईकाशिष्ट (Mica-schist) चट्टानें झीलों के नीचे पाई जाती हैं
💧 मीठे पानी की झीलें
  • कारण: वर्षा जल एवं नदी जल पर आधारित
  • सर्वाधिक: उदयपुर क्षेत्र में (इसीलिए इसे 'झीलों की नगरी' कहा जाता है)
  • स्थिति: मुख्यतः अरावली पर्वतीय क्षेत्र में अधिक पाई जाती हैं

8खारे पानी की झीलें (Salt Water Lakes)

8.1 प्रमुख खारे पानी की झीलों की सूची

झीलजिलाविशेषता
सांभर झीलजयपुरराजस्थान एवं भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील
पचपदरा झीलबालोतरासर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का नमक (NaCl — 98%)
डीडवाना झीलडीडवाना-कुचामननिम्न श्रेणी का नमक — सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄)
रेवासा झीलसीकरखारे पानी की झील
काछौर झीलसीकरखारे पानी की झील
लूणकरणसर झीलबीकानेरयहाँ नगण्य मात्रा में नमक बनता है
कुचामन झीलडीडवाना-कुचामनखारे पानी की झील
फलौदी झीलफलौदीखारे पानी की झील
नावां झीलडीडवाना-कुचामनखारे पानी की झील
कावोद/काणोद झीलजैसलमेरखारे पानी की झील
डेगाना झीलनागौरखारे पानी की झील
सुजानगढ़ झीलचूरूखारे पानी की झील
तालछापर झीलचूरूखारे पानी की झील; यह तालछापर पक्षी अभयारण्य का हिस्सा है

8.2 सांभर झील (Sambhar Lake) — जयपुर

विवरणजानकारी
स्थितिजयपुर (फुलेरा तहसील)
निर्मातावासुदेव चौहान (बिजौलिया शिलालेख के अनुसार)
रैंकिंगराजस्थान की सबसे बड़ी एवं भारत की तीसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील (चिल्का प्रथम, पुलिकट द्वितीय, सांभर तृतीय); साथ ही यह भारत की सबसे बड़ी अन्तः स्थलीय (Inland) खारे पानी की झील भी है
नमक उत्पादनभारत के कुल नमक उत्पादन का 8.7% एवं राजस्थान के कुल नमक उत्पादन का 80-90% यहीं से आता है
नदियाँमेंथा (सर्वाधिक लवणता लाने वाली) | खारी | रूपनगढ़ | तुरतमति | खंडेला
संचालनसंयुक्त उपक्रम — हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड/HSL (60% हिस्सेदारी, केंद्र सरकार) + सांभर साल्ट लिमिटेड/SSL (40% हिस्सेदारी, राज्य सरकार)
रामसर साइटवर्ष 1990 में रामसर सूची में शामिल हुई (भारत की दूसरी रामसर साइट); यहाँ कुरंजा एवं राजहंस (फ्लेमिंगो) जैसे संरक्षित पक्षी आते हैं
नमक का नामसांभर से उत्पादित नमक को 'क्यार' कहा जाता है

महत्वपूर्ण घटनाएँ: वर्ष 2019 में एवियन बोटुलिज्म (एक जीवाणु जनित बीमारी) से सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षियों की मृत्यु हो गई थी — यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी खबर बनी थी। इसके बाद 8 अक्टूबर 2021 को 'सांभर लेक मैनेजमेंट एजेंसी' का गठन किया गया, जो पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत काम करती है।

8.3 पचपदरा झील (Pachpadra Lake) — बालोतरा

विवरणजानकारी
स्थितिबालोतरा (लूनी बेसिन क्षेत्र में)
विशेषताभारत एवं राजस्थान की सबसे खारी झील; सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का नमक उत्पादक स्थल
NaCl मात्रा98% सोडियम क्लोराइड — यानी सबसे शुद्ध नमक
खारवाल जातिएक पारंपरिक जाति जो पचपदरा में पुराने तरीकों से नमक उत्पादन करती है
मोरलीएक विशेष प्रकार की झाड़ी, जिसका उपयोग नमक बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है
कोसियाज़मीन से पानी के रिसाव के बाद बनने वाला नमक, जो छोटे-छोटे कुंड/कुओं में इकट्ठा होता है

8.4 डीडवाना झील (Didwana Lake) — डीडवाना-कुचामन

विवरणजानकारी
स्थितिडीडवाना-कुचामन (पूर्व में नागौर जिले का हिस्सा)
लवण प्रकारयहाँ सोडियम क्लोराइड (NaCl) की जगह सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) पाया जाता है, जो खाने योग्य नहीं है
संस्थानराजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स — वर्ष 1964 में स्थापित
Na₂SO₄ का उपयोगकाँच उद्योग, कागज उद्योग एवं चमड़ा उद्योग में उपयोगी
उपनामखल्दा झील / प्लाया झील भी कहते हैं

8.5 अन्य खारे पानी की झीलें एवं संबंधित शब्दावली

💡 प्लाया, बालसन एवं रन में क्या अंतर है?

प्लाया झील जैसलमेर जैसे बालुकास्तूप-मुक्त क्षेत्र में वर्षा ऋतु में अस्थायी रूप से बनती है — यानी सिर्फ बरसात में पानी भरता है, बाकी समय सूखी रहती है। जब यही प्लाया सूख जाती है, तो जो सपाट मैदान बचता है उसे 'बालसन' कहते हैं। वहीं आकार के हिसाब से — छोटे गड्ढों/खड्डों में बनने वाली झील को 'रन/टाट/ढाढ़' कहा जाता है, जबकि बड़े गड्ढों में बनने वाली झील को 'प्लाया' कहते हैं। यानी रन और प्लाया में मूल अंतर सिर्फ आकार (गड्ढे का आकार) का है।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलों का स्थान (सांभर, पचपदरा, डीडवाना एवं अन्य)

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9मीठे पानी की झीलें (Fresh Water Lakes)

9.1 प्रमुख मीठे पानी की झीलों की सूची

झीलजिलाविशेषता
जयसमंद (ढेबर झील)सलूंबर (उदयपुर)मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील
पिछोला झीलउदयपुरजगमंदिर, जगनिवास, नटनी का चबूतरा यहीं स्थित हैं
फतेहसागर झीलउदयपुरदेवाली तालाब / ड्यूक ऑफ कनॉट डैम भी कहलाती है
रंगसागर/अमरकूटउदयपुरपिछोला एवं स्वरूप सागर से जुड़ी हुई
बड़ी झील/जाना सागरउदयपुर (बड़ी गाँव)महासीर मछली के लिए प्रसिद्ध; कंजर्वेशन रिजर्व
उदयसागर झीलउदयपुरआयड़/बेड़च नदी पर बनी
दूधतलाईउदयपुरपिछोला झील के निकट स्थित
नक्की झीलमाउंट आबू, सिरोहीराजस्थान की सर्वाधिक ऊँची, गहरी एवं ठंडी झील; एक क्रेटर झील
राजसमंद झीलराजसमंदराजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील; राजप्रशस्ति यहीं है
पुष्कर झीलपुष्कर, अजमेरप्राकृतिक मीठे पानी की सबसे बड़ी झील; पाँचवाँ तीर्थ
आनासागर झीलअजमेरइलेक्ट्रिक क्रूज (अक्टूबर 2024 से); बांडी नदी पर बनी
फॉयसागर झीलअजमेरराजस्थान की दूसरी अकाल राहत झील (1891-92)
मानसागर झीलजयपुरराजस्थान की सर्वाधिक प्रदूषित झील; जलमहल यहीं स्थित है
माव्ठा झीलजयपुरआमेर दुर्ग के निकट; प्राकृतिक झील
सिलीसेढ़ झीलअलवर (सरिस्का)राजस्थान का 'नन्दनकानन' कहलाती है
कायलाना झीलजोधपुरIGNP (इंदिरा गांधी नहर परियोजना) से जुड़ने वाली पहली झील
कोलायत झीलबीकानेरकपिल मुनि से जुड़ी; लगभग 82 घाट
गजनेर झीलबीकानेर'पानी का शुद्ध दर्पण' कही जाती है
रामगढ़ झीलबारांउल्कापिंड/क्रेटर झील; यूनेस्को भू-विरासत सूची में 2018 से शामिल
नवलसागर झीलबूंदीवरुण देवता का मन्दिर यहीं स्थित है
सरदार समंद झीलपालीइसे 'राजस्थान की जीवन रेखा' (Life Line of Rajasthan) कहा जाता है
जैत सागर झीलबूंदीएक प्रमुख पर्यटन स्थल
बालसमंद झीलजोधपुर
किशोर सागर (तालाब)कोटाछत्तर विलास महल यहीं स्थित है
गैब सागर/एडवर्ड सागरडूंगरपुरगोवर्धननाथ मन्दिर यहीं स्थित है

9.2 जयसमंद/ढेबर झील (Jaisamand Lake) — सलूंबर (उदयपुर)

विवरणजानकारी
स्थितिसलूंबर (ढेबर नाल क्षेत्र) — पहले यह उदयपुर जिले का हिस्सा था
निर्मातामहाराणा जयसिंह (1685-1691 ई.)
नदीगोमती नदी (इसके अतिरिक्त गोमती, झावरी, रूपारेल, बागर नदियाँ भी इसमें मिलती हैं)
रैंकिंगमीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील — राजस्थान में प्रथम एवं भारत में द्वितीय (भारत में प्रथम स्थान पर गोविन्द वल्लभ पंत सागर/रिहन्द बाँध है)
टापूकुल 7 टापू (द्वीप) हैं — सबसे बड़ा 'बाबा का मगरा' और सबसे छोटा 'प्यारी'
जनजातिभील-मीणा जनजाति इस क्षेत्र में निवास करती है
नहरेंश्यामपुरा नहर एवं भाट नहर (1950 में निर्मित)
मन्दिरनर्मदेश्वर महादेव मन्दिर + हाथियों की प्रतिमाएँ
विशेषताजलचरों की बस्ती — यहाँ जलीय जैव विविधता प्रचुर मात्रा में पाई जाती है

9.3 पिछोला झील (Pichola Lake) — उदयपुर

विवरणजानकारी
स्थितिउदयपुर
निर्माताबंजारे (छीतरमल) — महाराणा लाखा के शासनकाल में; निर्माणकाल 1382 ई. से 1421 ई. (14वीं शताब्दी के अंत में)
नदियाँसीसारमा + बूझड़ा
ऐतिहासिक धरोहरजगमंदिर (करणसिंह 1620 + जगतसिंह-I 1651), जगनिवास (जगतसिंह-II 1746), नटनी का चबूतरा, उदयपुर सिटी पैलेस
होटलजगमंदिर + जगनिवास मिलकर होटल लेक पैलेस बनाते हैं
नावराजस्थान की प्रथम सौर ऊर्जा नाव एवं प्रथम इलेक्ट्रिक नाव यहीं चलाई गई
जुड़ावस्वरूप सागर चैनल के माध्यम से अतिरिक्त जल फतेहसागर झील में जाता है
इतिहासमुगल सम्राट शाहजहाँ ने विद्रोह के समय (शहज़ादे के रूप में) इसी झील में शरण ली थी

9.4 फतेहसागर झील (Fateh Sagar Lake) — उदयपुर

विवरणजानकारी
उपनामदेवाली तालाब / ड्यूक ऑफ कनॉट डैम
निर्मातामहाराणा जयसिंह (1688 ई.); पुनर्निर्माण महाराणा फतेहसिंह द्वारा (1888-89)
नदियाँसीसारमा + बूझड़ा
नेहरु उद्यानझील के मध्य स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल
वेधशालासौर वेधशाला, टेलीस्कोप एवं वर्चुअल फिरा एक्वेरियम यहीं स्थित हैं
जलापूर्तिपानी की कमी होने पर मदार बाँध (बेड़च नदी) से जलापूर्ति की जाती है
पहाड़ीमोती मगरी पहाड़ी झील के निकट स्थित है
जुड़ावस्वरूप सागर, पिछोला एवं फतेहसागर को आपस में जोड़ता है
आधारशिलाड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा रखी गई थी

9.5 राजसमंद झील (Rajsamand Lake) — राजसमंद

विवरणजानकारी
निर्मातामहाराणा राजसिंह (1662-1676 ई.); RPSC ने आधिकारिक निर्माण वर्ष 1680 ई. स्वीकार किया है
नदियाँगोमती + ताली + केलवा
विशेषताराजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील (Famine Relief Lake) — यानी अकाल के समय रोज़गार देने के लिए इसका निर्माण करवाया गया था
श्रमिक योगदानइसके निर्माण में लगभग 60,000 लोगों ने काम किया
राजप्रशस्ति25 काले पत्थर की शिलाओं पर संस्कृत में लिखा मेवाड़ का इतिहास; लेखक: रणछोड़ भट्ट तैलंग; यह विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति मानी जाती है
मन्दिरघेवर माता मन्दिर एवं द्वारकाधीश मन्दिर
बाँधनौ चौकी पाल — यहाँ '9' अंक का अद्भुत प्रयोग किया गया है (लम्बाई 999 फीट, चौड़ाई 99 फीट)

9.6 पुष्कर झील (Pushkar Lake) — पुष्कर, अजमेर

विवरणजानकारी
उपनामपाँचवाँ तीर्थ | तीर्थराज | तीर्थों का मामा | कोंकण तीर्थ | 52 घाट झील | राजस्थान की सबसे पवित्र किन्तु सर्वाधिक प्रदूषित झीलों में से एक
प्रकारप्राकृतिक पवित्र झील; क्रेटर/ज्वालामुखी झील (काल्डेरा झील); मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील
आकारअर्धचन्द्राकार; कुल 52 घाट हैं
मन्दिरब्रह्मा मन्दिर झील के किनारे स्थित है — यह भारत के गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक है
अस्थि विसर्जनमहात्मा गाँधी, अटल बिहारी वाजपेयी, बाल ठाकरे, किरोड़ी सिंह भैंसला जैसी हस्तियों की अस्थियाँ यहाँ विसर्जित की गई हैं
मेलाकार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान का प्रसिद्ध 'रंगीला मेला' एवं दीपदान का आयोजन होता है
घाटजनाना घाट — 1911 में महारानी मेरी (क्वीन मेरी) के दौरे के दौरान इसे 'क्वीन मेरी जनाना घाट' नाम दिया गया था; बाद में महात्मा गाँधी की अस्थियाँ यहीं विसर्जित हुईं तो नाम बदलकर 'गाँधी घाट' कर दिया गया
सफाई अभियानवर्ष 1997-98 में कनाडा के सहयोग से झील की सफाई की गई थी

9.7 आनासागर झील (Ana Sagar Lake) — अजमेर

विवरणजानकारी
निर्माताअर्णोराज चौहान (पृथ्वीराज चौहान के पितामह, जिन्हें 'आनाजी चौहान' भी कहा जाता है); निर्माणकाल 1135-1137 ई.
नदीबांडी नदी (लूनी की सहायक नदी, जिसका उद्गम हेमावास, पाली से होता है)
विशेषदेश की प्रथम इलेक्ट्रिक क्रूज नाव अक्टूबर 2024 में यहीं संचालित हुई
मुगल धरोहरचश्मा-ए-नूर (जहाँगीर द्वारा, शिकार के लिए बनवाया गया), दौलतबाग/सुभाष उद्यान (जहाँगीर द्वारा), बारहदरी (शाहजहाँ द्वारा — 5 संगमरमर के मंडप)
निर्माण का कारणतुर्क सेना द्वारा किए गए संहार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने हेतु चन्द्रा नदी के जल को रोककर इसका निर्माण किया गया था

9.8 नक्की झील (Nakki Lake) — माउंट आबू, सिरोही

विवरणजानकारी
प्रकारक्रेटर झील / ज्वालामुखी झील
ऊँचाई व गहराईऊँचाई 1200 मीटर; गहराई 35 मीटर
रैंकिंगराजस्थान की सबसे ऊँची झील, सबसे गहरी झील, सबसे ठण्डी झील तथा एकमात्र ऐसी झील जो किसी हिल स्टेशन (माउंट आबू) पर स्थित है
पर्यटनयहाँ स्थित Sunset Point एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है
विशेष चट्टानेंटॉड रॉक (मेंढ़क के आकार की), नन रॉक (घूँघट वाली स्त्री के आकार की), नन्दी रॉक, हॉर्न रॉक
परम्परागरासिया जनजाति द्वारा यहाँ अस्थि विसर्जन की परम्परा है
किंवदंतीमान्यता है कि इसे देवताओं ने अपने नाखूनों (नख) से खोदकर बनाया था — इसी से इसका नाम 'नक्की' पड़ा

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — उदयपुर की झीलों का समूह: पिछोला, फतेहसागर, स्वरूप सागर, उदयसागर, रंगसागर व बड़ी झील की आपसी स्थिति

9.9 अन्य महत्वपूर्ण मीठे पानी की झीलें

झीलजिलामुख्य तथ्य
उदयसागर झीलउदयपुरनिर्माता महाराणा उदयसिंह (1559-1564 ई.); बेड़/आयड़ नदी इसमें गिरने के बाद 'बेड़च' कहलाती है
रंगसागर/अमरकूटउदयपुरनिर्माता अमरसिंह बड़वा; पिछोला एवं स्वरूप सागर से जुड़ी हुई; नदियाँ — सीसारमा + बूझड़ा
बड़ी झील/जाना सागरउदयपुरनिर्माता महाराजा राजसिंह (1652-1680); बाहुबली पहाड़ी के निकट; महासीर मछली प्रजाति; कंजर्वेशन रिजर्व में शामिल
मानसागर झीलजयपुरनिर्माता मानसिंह (1610 ई.); राजस्थान की सर्वाधिक प्रदूषित झील; प्रसिद्ध जलमहल इसी में स्थित है; द्रव्यवती नदी (अमानीशाह नाला) यहीं से निकलती है
सिलीसेढ़ झीलअलवर (सरिस्का)निर्माता महाराजा विनयसिंह; रूपारेल की सहायक नदी पर निर्मित; 'राजस्थान का नन्दनकानन' कहलाती है; स्वर्णिम त्रिकोण (जयपुर-दिल्ली-आगरा) पर स्थित; मत्स्यपालन एवं पर्यटन हेतु उपयोगी
कायलाना झील (सर प्रताप सागर)जोधपुरनिर्माता सर प्रताप सिंह (1872); राजस्थान की पहली झील जो IGNP से जुड़ी है; जोधपुर की पेयजल आपूर्ति में उपयोगी; निकट माचिया सफारी (मृग उद्यान) है
कोलायत झीलबीकानेरनिर्माता कपिल मुनि (इसे 'कपिल सरोवर' भी कहते हैं); लगभग 52 घाट; कार्तिक पूर्णिमा पर मेला व दीपदान; विशेष तथ्य — चारण जाति परंपरागत रूप से कोलायत झील में नहीं जाती (करणी माता के पुत्र की मृत्यु से जुड़ी मान्यता के कारण)
गजनेर झीलबीकानेरनिर्माता महाराजा गंगासिंह; वर्षा जल पर आधारित; 'पानी का शुद्ध दर्पण' कहलाती है
रामगढ़ झीलबारांक्रेटर/उल्कापिंड झील; घोड़े की नाल जैसी पहाड़ियों से घिरी; वर्ष 2022 में भू-विरासत स्थल (Geo Heritage Site) सूची में शामिल
नवलसागर/नवलखा झीलबूंदीनिर्माता उम्मेद सिंह; तारागढ़ दुर्ग (बूंदी) के निकट; झील के मध्य वरुण देवता का मन्दिर स्थित है, जो आधा जल में डूबा रहता है; निकट सुन्दर घाट है
फॉयसागर झीलअजमेरनिर्माता इंजीनियर फॉय (1891-92); बांडी नदी पर; राजस्थान की दूसरी अकाल राहत झील (प्रथम राजसमंद, 1662)
माव्ठा झीलजयपुरप्राकृतिक मीठे पानी की झील; वर्षा जल पर आधारित; आमेर दुर्ग के निकट स्थित
💡 उदयपुर में झीलों को जोड़ने वाले सेतु (Connections)

उदयपुर की झीलें एक-दूसरे से चैनलों के ज़रिए जुड़ी हुई हैं, जैसे किसी शहर की सड़कें आपस में जुड़ी होती हैं — स्वरूप सागर पिछोला व फतेहसागर को जोड़ता है; दूध तलाई अमरकुण्ड व कुम्हारिया तालाब को जोड़ती है; गोवर्धन सागर पिछोला से जुड़ा है; पिछोला कुम्हारिया तालाब से जुड़ी है; अमरकुण्ड रंग सागर से जुड़ा है; और रंग सागर स्वरूप सागर से जुड़ा है। इसी वजह से उदयपुर को 'झीलों की नगरी' कहा जाता है — यहाँ की झीलें अलग-थलग नहीं, बल्कि एक बड़े जल-नेटवर्क का हिस्सा हैं।

10राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP) एवं झीलों का महत्व

10.1 राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना — NLCP

विवरणजानकारी
शुरुआतजून 2001 में शुरू हुई; बाद में 4 अप्रैल 2017 को इसे पुनर्गठित किया गया
वित्तीय सहयोगकेंद्र सरकार : राज्य सरकार = 60 : 40 के अनुपात में
मंत्रालयवन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार
राजस्थान की शामिल झीलें (6)मानसागर (जयपुर), पुष्कर (अजमेर), आनासागर (अजमेर), पिछोला (उदयपुर), फतेहसागर (उदयपुर), नक्की झील (सिरोही)
शामिल नहींराजसमंद, कोलायत, स्वरूप सागर, बजाज सागर

NLCP की 6 झीलें याद रखने की तरकीब: ट्रिक: 'मा-पु-आ-पि-फ-न' → मानसागर, पुष्कर, आनासागर, पिछोला, फतेहसागर, नक्की। ध्यान रहे — स्वरूप सागर और राजसमंद जैसी प्रसिद्ध झीलें भी इस योजना में शामिल नहीं हैं, यह परीक्षा में अक्सर उल्टा पूछा जाता है।

10.2 झीलों का महत्व (Importance of Lakes)

महत्व का प्रकारप्रमुख झीलें
पर्यटनजयसमंद, नक्की, पिछोला, आनासागर
सिंचाईजयसमंद, राजसमंद
नमक उत्पादनसांभर, पचपदरा, डीडवाना
जैव विविधताजयसमंद, मोती झील (भरतपुर की जीवन रेखा), सांभर (फ्लेमिंगो पक्षी हेतु प्रसिद्ध)
पेयजल आपूर्तिकायलाना, मानसागर, पिछोला
धार्मिक महत्वपुष्कर, कोलायत, नक्की
भू-जल स्तर में सुधारराजस्थान की लगभग सभी झीलें
मत्स्य पालनजयसमंद, सिलीसेढ़, बड़ी झील
जल संरक्षणराजस्थान की लगभग सभी झीलें

11विशेष तथ्य — नलकूप, कुएँ एवं अन्य जल स्रोत

नाम की समानता से भ्रमित न हों: नवलखा तालाब (बारां), नवलखा बावड़ी (डूंगरपुर) एवं नवलखा दुर्ग (झालावाड़) — इन तीनों को नवलसागर झील (बूंदी) से बिल्कुल अलग पहचानें। इसी तरह रामगढ़ झील नाम से बारां (क्रेटर झील) और धौलपुर (तालाबशाही) दोनों जगह जल-स्रोत मौजूद हैं — प्रश्न में जिले का नाम ध्यान से पढ़ें।

12नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)

इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम घटनाओं व आँकड़ों को यहाँ शामिल किया गया है।

💡 PKC-ERCP परियोजना — संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) अब 'संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल-पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP)' के रूप में मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य है — बरसात के मौसम में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की चम्बल एवं इसकी सहायक नदियों (कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध) से अतिरिक्त पानी इकट्ठा करके राज्य के दक्षिण-पूर्वी जिलों में पीने व सिंचाई हेतु उपलब्ध कराना। इस परियोजना से राजस्थान के 13 जिलों को पेयजल तथा 26 बड़ी-मझोली परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2.8 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा। पहले चरण (जिसकी समय-सीमा वर्ष 2028 रखी गई है) में डूंगरी बाँध तथा कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध, मेज एवं बनास नदियों पर 5 बैराजों का निर्माण शामिल है। यह भविष्य में बीसलपुर बाँध से भी जोड़ी जाएगी।

💡 सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मृत्यु — पुनरावृत्ति (अक्टूबर 2025)

अक्टूबर 2025 में सांभर झील के नावां (डीडवाना-कुचामन) क्षेत्र में एक बार फिर प्रवासी पक्षियों के मृत पाए जाने की घटनाएँ सामने आईं। स्थानीय पशु चिकित्सकों ने इसका कारण एवियन बोटुलिज्म (वही बीमारी जिसने 2019 में हजारों पक्षियों की जान ली थी) बताया। प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि नावां क्षेत्र की नमक रिफाइनरियों से निकलने वाला अपशिष्ट खुले में झील किनारे डाला जा रहा है, जिससे रासायनिक प्रदूषण पानी में मिल रहा है। चिंताजनक बात यह भी है कि खनन एवं अन्य गतिविधियों के कारण सांभर झील का लगभग 30% क्षेत्रफल पहले ही समाप्त हो चुका है — यह झील के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक गंभीर चुनौती है।

💡 राजस्थान में नए रामसर स्थल (Ramsar Sites) — जून 2025

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) 2025 पर राजस्थान के खीचन वेटलैंड (फलौदी) एवं मेनार वेटलैंड (उदयपुर) को रामसर स्थल घोषित किया गया। खीचन अपने यहाँ शीतकाल में आने वाले डेमोइसेल क्रेन (कुरजां) पक्षियों की विशाल संख्या तथा सामुदायिक संरक्षण मॉडल के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जबकि मेनार एक मीठे पानी का मानसूनी वेटलैंड है (ब्रह्म, ढांढ एवं खेरोड़ा तालाबों से मिलकर बना, कुल क्षेत्रफल लगभग 463.4 हेक्टेयर)। इसके अतिरिक्त सिलीसेढ़ झील (अलवर) को भी हाल में रामसर स्थल घोषित किया गया है। इस प्रकार अब राजस्थान में कुल 5 रामसर स्थल हो गए हैं — केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), सांभर झील (जयपुर), सिलीसेढ़ झील (अलवर), खीचन वेटलैंड (फलौदी) तथा मेनार वेटलैंड (उदयपुर)।

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के रामसर स्थल एवं PKC-ERCP परियोजना क्षेत्र (नए बाँध/बैराज स्थान चिह्नित करने हेतु)

13त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

13.1 नदियों से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य

प्रश्नउत्तर
लूनी नदी का उद्गम कहाँ से होता है?नाग हिल्स, अजमेर
बांडी नदी को 'राजस्थान की रासायनिक नदी' क्यों कहते हैं?रंगाई-छपाई उद्योग के प्रदूषण के कारण (पाली)
माही किस रेखा को दो बार काटती है?कर्क रेखा (उल्टे U आकार में)
'आदिवासियों का कुंभ' कहाँ लगता है?बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर)
राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध (भराव क्षमता) कौनसा है?राणा प्रताप सागर
राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध कौनसा है?जाखम (81 मीटर, प्रतापगढ़)
चूलिया जलप्रपात किस नदी पर है?चम्बल
कांतली नदी का अपवाह क्षेत्र किस नाम से जाना जाता है?तोरावाटी
साबरमती पर रिवर फ्रंट कहाँ बना?अहमदाबाद
पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी कौनसी है?बनास (512 किमी)
घग्घर नदी को पाकिस्तान में क्या कहते हैं?हकरा
राजस्थान की सबसे छोटी नदी कौनसी है?कांकनी (27 किमी, जैसलमेर)
सांभर झील में सर्वाधिक लवणता जमा करने वाली नदी कौनसी है?मेंथा/मेन्ढा नदी
बीसलपुर बाँध किस नदी पर है?बनास (टोंक)

13.2 झीलों से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य

प्रश्नउत्तर
राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम (मानव निर्मित) झील कौनसी है?जयसमंद (ढेबर झील)
ढेबर झील किस नाम से भी जानी जाती है?जयसमंद
'नटनी का चबूतरा' किस झील पर स्थित है?पिछोला झील
पिछोला झील का निर्माण किस शासक के काल में हुआ?महाराणा लाखा
राजस्थान की पवित्र झील कौनसी मानी जाती है?पुष्कर झील
पुष्कर झील कितने घाटों से घिरी है?52 घाट
पुष्कर झील की सफाई में किस देश का सहयोग रहा?कनाडा (1997-98)
राजसमंद झील के तट पर कितने संगमरमर शिलालेख हैं?25 शिलालेख (राजप्रशस्ति)
राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी झील कौनसी है?सांभर झील
सांभर झील रामसर सूची में कब शामिल हुई?वर्ष 1990
पचपदरा झील के नमक में NaCl का प्रतिशत कितना है?98%
नक्की झील (टॉड रॉक, नन रॉक के लिए प्रसिद्ध) किस जिले में है?सिरोही (माउंट आबू)
NLCP के अंतर्गत कौनसी प्रमुख झील शामिल नहीं है?स्वरूप सागर (राजसमंद भी नहीं)
कायलाना झील का निर्माण किसने करवाया?सर प्रताप सिंह
राजस्थान के किस जिले में प्लाया झील पाई जाती है?जैसलमेर
आनासागर झील का निर्माण किसने करवाया?आनाजी चौहान (अर्णोराज चौहान)
'खारवाल' जाति किस झील से नमक उत्पादन करती है?पचपदरा
नवलखा सागर किस जिले में है?बूंदी
सिलीसेढ़ झील किस जिले में स्थित है?अलवर

13.3 महत्त्वपूर्ण संख्याएँ (Number Facts) — एक नज़र में

संख्याअर्थ
15 बेसिन, 58 उप-बेसिनराजस्थान के कुल नदी बेसिन एवं उप-बेसिन
16-17% : 60% : 23-24%अरब सागरीय : आन्तरिक प्रवाह : बंगाल की खाड़ी तंत्र का अनुपात
1.16% एवं 1.72%देश के कुल सतही जल एवं भूमिगत जल में राजस्थान का योगदान
1051 किमीचम्बल — राजस्थान से संबंधित सबसे लम्बी नदी (कुल लम्बाई)
512 किमीबनास — पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी
27 किमीकांकनी — राजस्थान की सबसे छोटी नदी
18 मीटरचूलिया जलप्रपात — राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात
80-90%राजस्थान के कुल नमक उत्पादन में सांभर झील का योगदान
98%पचपदरा झील के नमक में NaCl की शुद्धता
5 रामसर स्थल (2025-26)केवलादेव, सांभर, सिलीसेढ़, खीचन, मेनार
🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलविभाजक रेखा है, जो अपवाह तंत्र को अरब सागरीय एवं बंगाल की खाड़ी तंत्र में बाँटती है 2. लूनी नदी (495 किमी) मरुस्थल की सबसे लम्बी नदी है, जिसका उद्गम अजमेर की नाग हिल्स से होता है और अंत कच्छ के रन में होता है 3. माही विश्व की एकमात्र नदी है जो कर्क रेखा को दो बार, उल्टे U आकार में काटती है 4. चम्बल (1051 किमी) राजस्थान से जुड़ी सबसे लम्बी एवं सबसे बड़ी नदी है, जिसका सबसे बड़ा बेसिन भी है 5. बनास (512 किमी) पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है, जो एक अध्यारोपित (Superimposed) नदी है 6. घग्घर हिमालय से आने वाली एकमात्र नदी है, जिसे प्राचीन सरस्वती नदी का अवशेष माना जाता है 7. कांकनी (27 किमी) राजस्थान की सबसे छोटी नदी है, जो जैसलमेर में बुझ झील बनाती है 8. सांभर झील भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील है, जो राज्य के 80-90% नमक उत्पादन का स्रोत है 9. पचपदरा झील का नमक (98% NaCl) राजस्थान का सबसे शुद्ध व सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का नमक माना जाता है 10. जयसमंद (ढेबर) झील मीठे पानी की राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है 11. पुष्कर झील प्राकृतिक मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है और एक क्रेटर/काल्डेरा झील भी है 12. नक्की झील राजस्थान की सबसे ऊँची, सबसे गहरी एवं सबसे ठंडी झील है, जो एकमात्र हिल स्टेशन (माउंट आबू) पर स्थित है 13. राजसमंद झील राजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील है, जिसके किनारे विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति 'राजप्रशस्ति' अंकित है 14. NLCP (राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना) में राजस्थान की 6 झीलें शामिल हैं — मानसागर, पुष्कर, आनासागर, पिछोला, फतेहसागर, नक्की 15. बीसलपुर बाँध (बनास नदी, टोंक) राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध एवं सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है 16. 2025-26 में राजस्थान में कुल 5 रामसर स्थल हो गए हैं — केवलादेव, सांभर, सिलीसेढ़, खीचन एवं मेनार

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. राजस्थान के अपवाह तंत्र को कितने भागों में बाँटा जाता है और उनके नाम एवं प्रतिशत बताइए। Q2. लूनी नदी को 'मरुस्थल की गंगा' एवं 'आधी मीठी-आधी खारी' क्यों कहा जाता है? विस्तार से समझाइए। Q3. माही नदी की कर्क रेखा को दो बार काटने वाली अनोखी विशेषता का वर्णन कीजिए। Q4. चम्बल नदी को राजस्थान की सबसे बड़ी नदी क्यों माना जाता है? इसकी 5 प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। Q5. घग्घर नदी को 'मृत नदी' एवं 'सरस्वती' क्यों कहा जाता है? Q6. सांभर झील एवं पचपदरा झील के नमक उत्पादन की तुलना कीजिए। Q7. राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP) के अंतर्गत राजस्थान की कौनसी झीलें शामिल हैं? Q8. अध्यारोपित नदी (Superimposed River) एवं रुण्डित नदी (Beheaded River) में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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