📋 इस अध्याय में
- अपवाह तंत्र — परिचय एवं मूल विशेषताएँ
- अरब सागरीय नदी तंत्र (16-17%)
- आन्तरिक प्रवाह नदी तंत्र (60%)
- बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र (23-24%)
- तुलनात्मक तालिकाएँ एवं महत्वपूर्ण आँकड़े
- परीक्षा उपयोगी तकनीकी शब्दावली एवं विशिष्ट तथ्य
- झीलों का वर्गीकरण (Classification of Lakes)
- खारे पानी की झीलें (Salt Water Lakes)
- मीठे पानी की झीलें (Fresh Water Lakes)
- राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP) एवं झीलों का महत्व
- विशेष तथ्य — नलकूप, कुएँ एवं अन्य जल स्रोत
- नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)
- त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
🌟 क्या आप जानते हैं?
सोचिए — एक नदी अरावली की गोद से जन्म लेती है, सैकड़ों किलोमीटर तक बहती है, अजमेर से लेकर बाड़मेर तक पूरे मारवाड़ को सींचती है, लेकिन कभी समुद्र तक नहीं पहुँच पाती — रेगिस्तान की तपती रेत में उसका सारा पानी सोख लिया जाता है या भाप बनकर उड़ जाता है। यही है लूणी नदी का रहस्य, जिसे लोग प्यार से 'मरुस्थल की गंगा' कहते हैं। अब दूसरी तरफ देखिए — माही नदी, जो दुनिया की इकलौती ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को दो बार, एक उल्टे 'U' आकार में काटती है — जैसे कोई नदी खुद अपना रास्ता बदलकर वापस उसी रेखा को छूने आ जाए। और फिर है चम्बल — जिसके किनारे कभी डाकुओं का साम्राज्य हुआ करता था, लेकिन आज वही चम्बल घड़ियालों, डॉल्फ़िनों और भारत की सबसे बड़ी जल-विद्युत परियोजनाओं का घर है। झीलों की दुनिया भी कम रोमांचक नहीं — सांभर झील से निकलने वाला नमक भारत के 80-90% घरों की रसोई तक पहुँचता है, जबकि पचपदरा झील का नमक इतना शुद्ध (98% NaCl) है कि उसे 'सर्वश्रेष्ठ नमक' का दर्जा मिला हुआ है। वहीं नक्की झील के बारे में कहा जाता है कि इसे देवताओं ने अपने नाखूनों (नाखून = नक्की) से खोदकर बनाया था! आइए, इस अध्याय में राजस्थान के इन सभी नदी-तंत्रों और झीलों की पूरी कहानी — उनके उद्गम से लेकर संगम तक, उनकी सहायक नदियों से लेकर उन पर बने बाँधों तक — विस्तार से और बेहद सरल भाषा में समझते हैं।
1अपवाह तंत्र — परिचय एवं मूल विशेषताएँ
अपवाह तंत्र (Drainage System) का सीधा-सा मतलब है — किसी क्षेत्र में बारिश का पानी किस रास्ते से होकर बहता है और अंततः कहाँ जाकर मिलता है। राजस्थान का अपवाह तंत्र मुख्यतः मानसून पर आधारित है — यानी यहाँ की अधिकांश नदियाँ बारिश के मौसम में ही भरी हुई नज़र आती हैं, बाकी समय इनमें पानी बहुत कम या ना के बराबर होता है। इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लीजिए — जैसे किसी शहर की सड़कों की ढलान यह तय करती है कि बारिश का पानी किस नाले में जाकर गिरेगा, ठीक वैसे ही राजस्थान की भौगोलिक बनावट (खासकर अरावली पर्वतमाला) यह तय करती है कि किस इलाके का पानी किस दिशा में बहेगा।
1.1 अपवाह तंत्र की मुख्य विशेषताएँ
- अरावली पर्वतमाला राजस्थान की महान 'जलविभाजक रेखा' (Water Divide) है — यानी यह पर्वतमाला तय करती है कि पानी अरब सागर की ओर जाएगा या बंगाल की खाड़ी की ओर
- देश के कुल सतही जल एवं नदी जल में राजस्थान का योगदान मात्र 1.16% है — यह आँकड़ा बताता है कि राजस्थान अपनी विशालता के बावजूद जल-संसाधनों में अपेक्षाकृत गरीब राज्य है
- देश के कुल भूमिगत जल (Groundwater) में राजस्थान का योगदान 1.72% है
- देश की सर्वाधिक अन्तः प्रवाही नदियाँ (यानी वे नदियाँ जो समुद्र तक नहीं पहुँचतीं) राजस्थान में ही पाई जाती हैं — इसका सीधा कारण है मरुस्थल का सबसे अधिक विस्तार, जहाँ नदी का पानी रेत में सोख लिया जाता है या भाप बनकर उड़ जाता है
- राजस्थान में मुख्य नदी बेसिन (Basin) की संख्या 15 है, जबकि उप-बेसिन (Sub-basin) की संख्या 58 है
1.2 राजस्थान के 3 प्रमुख अपवाह तंत्र — एक नज़र में
| नदी तंत्र | प्रमुख नदियाँ | अंततः कहाँ गिरती हैं |
|---|
| अरब सागरीय तंत्र (16-17%) | लूनी, पश्चिमी बनास, साबरमती, माही | अरब सागर / खम्भात की खाड़ी / कच्छ का रन |
| आन्तरिक प्रवाह तंत्र (60%) | घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल, कांकनी | समुद्र तक नहीं पहुँचतीं — रेत/झीलों में विलुप्त हो जाती हैं |
| बंगाल की खाड़ी तंत्र (23-24%) | चम्बल, बनास, बेड़च, गम्भीर | यमुना नदी के रास्ते → गंगा → बंगाल की खाड़ी |
💡 तीनों तंत्रों को याद रखने का आसान तरीका
कल्पना कीजिए राजस्थान का नक्शा एक तिरछी छत जैसा है, और अरावली पर्वतमाला उस छत की सबसे ऊँची कड़ी (ridge) है। इस कड़ी के पश्चिम की ओर गिरने वाला पानी (लूनी, बनास-पश्चिमी, साबरमती, माही) अरब सागर की तरफ चला जाता है — इसीलिए दूरी कम है और गति तेज़ है। कड़ी के पूर्व की ओर गिरने वाला पानी (चम्बल, बनास) घूम-फिरकर लंबा सफर तय करता हुआ बंगाल की खाड़ी तक पहुँचता है — इसीलिए दूरी ज़्यादा और गति धीमी है। और तीसरा हिस्सा (घग्घर, कांतली जैसी नदियाँ) उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल में बहती हैं, जहाँ कोई समुद्र नहीं है, तो इनका पानी बीच रास्ते में ही रेत या झीलों में समा जाता है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान का अपवाह तंत्र: अरब सागरीय, आन्तरिक प्रवाह एवं बंगाल की खाड़ी तंत्र की सीमा-रेखा (जलविभाजक अरावली सहित)
2अरब सागरीय नदी तंत्र (16-17%)
अरब सागरीय तंत्र की नदियाँ अरावली के पश्चिमी भाग में बहती हैं। इनकी तीन खास पहचान हैं — पहला, ये अपेक्षाकृत कम दूरी तय करती हैं; दूसरा, इनका बहाव तीव्रगामी (तेज़) होता है; और तीसरा, समुद्र में मिलते समय ये अक्सर एक चौड़ा त्रिकोणीय मुहाना बनाती हैं जिसे ज्वारनदमुख (Estuary) कहते हैं — यानी नदी और समुद्र का पानी वहाँ आपस में मिल जाता है।
🔵 कच्छ के रन/खाड़ी में गिरने वाली
🔶 खम्भात की खाड़ी में गिरने वाली
2.1 लूनी नदी — मरुस्थल की गंगा
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | नाग हिल्स (नाग पहाड़), अजमेर — आनासागर झील के समीप |
| संगम | कच्छ का रन (गुजरात) |
| लम्बाई | कुल 495 किमी | राजस्थान में 330 किमी |
| अपवाह क्षेत्र | अजमेर, ब्यावर, डेगाना (नागौर), पाली, बिलाड़ा (जोधपुर), बाड़मेर, बालोतरा, जालौर |
| उपनाम | लवणती | आधी मीठी-आधी खारी | अन्तः सलीला (कालीदास द्वारा) | मरुस्थल की गंगा | सागरमती | सरगावती |
| प्रवाह | बालोतरा तक पानी मीठा रहता है, उसके बाद खारा हो जाता है |
| योगदान | राजस्थान के कुल अपवाह तंत्र में लूनी का योगदान 10.40% है |
| रिकॉर्ड | देश एवं पश्चिमी राजस्थान (मरुस्थल क्षेत्र) की सबसे लम्बी नदी |
| अपवाह क्षेत्र के नाम | जालौर-सांचौर क्षेत्र में इसे 'रेल/नाड़ा' कहते हैं; समग्र क्षेत्र 'गोड़वाड़ प्रदेश' कहलाता है; उत्तरी क्षेत्र को 'थली' कहा जाता है |
💡 लूनी 'मरुस्थल की गंगा' और 'आधी मीठी-आधी खारी' क्यों?
अजमेर से निकलकर लूनी नदी शुरू में मीठे पानी की नदी है और बालोतरा तक इसका पानी पीने योग्य रहता है — इसीलिए इसे 'मरुस्थल की गंगा' कहा गया, क्योंकि रेगिस्तान जैसे सूखे इलाके के लिए यह जीवनदायिनी है। लेकिन बालोतरा के बाद जब यह लवणीय (नमक-युक्त) चट्टानों और मिट्टी वाले क्षेत्र से गुजरती है, तो इसका पानी धीरे-धीरे खारा होता जाता है — इसीलिए इसे 'आधी मीठी-आधी खारी' कहा जाता है। और चूँकि यह कभी समुद्र तक सीधे नहीं पहुँचती (बीच में ही रेत में सोखी जाती है या कच्छ के रन में फैल जाती है), महाकवि कालिदास ने इसे 'अन्तः सलीला' (अंदर ही अंदर बहने वाली) कहा।
याद रखने की तरकीब: लूनी नदी के अपवाह क्षेत्र वाले जिलों को याद करने के लिए ट्रिक: 'अपना बजाज' — अजमेर, पाली, नागौर, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, जोधपुर।
लूनी की सहायक नदियाँ (Tributaries)
याद रखने की ट्रिक: 'सुकी बांडी खारी जो गुहिया से जवाई से मिली' → सुकड़ी, बांडी, खारी, जोजड़ी, गुहिया, जवाई, सागी, मीठड़ी।
| सहायक नदी | उद्गम | संगम | विशेष तथ्य |
|---|
| लीलड़ी | — | — | लूनी में सबसे पहले मिलने वाली सहायक नदी |
| जोजड़ी | पोंडलू/पोडलू गाँव (नागौर) | खेजड़ली खुर्द | एकमात्र ऐसी सहायक नदी जो दायीं ओर से मिलती है और अरावली से नहीं निकलती |
| बांडी | फुलाद (पाली) | जोधपुर (लाखर) | इसे 'राजस्थान की रासायनिक नदी' कहा जाता है — रंगाई-छपाई उद्योग के प्रदूषण के कारण |
| सुकड़ी | देसूरी (पाली) | समदड़ी (बालोतरा) | पाली, जालौर, बालोतरा जिलों में बहती है |
| मीठड़ी | पाली | मंगलया गाँव (बालोतरा) | — |
| जवाई | बाली-गारियाँ गाँव (पाली) | गाँधव (बाड़मेर) | पश्चिमी राजस्थान की एक बेहद महत्वपूर्ण सहायक नदी (जवाई बाँध इसी पर बना है) |
| खारी | रोरगाँव पहाड़ी (सिरोही) | सामला गाँव/सायला (जालौर) | यह जवाई की सहायक नदी है |
| सागी | जसवन्तपुरा पहाड़ी (जालौर) | गाँधव गाँव (बाड़मेर) | लूनी में सबसे अंत में मिलने वाली सहायक नदी |
| गुहिया | — | — | — |
बाँध परियोजनाएँ — लूनी तंत्र
| बाँध | स्थान | नदी | विशेष तथ्य |
|---|
| जसवन्त सागर / पिचियाक बाँध | जोधपुर | लूनी | — |
| हेमावास बाँध | पाली | बांडी | — |
| जवाई बाँध | सुमरेपुर (पाली) | जवाई | इसे 'मारवाड़ का अमृत सरोवर' कहा जाता है; यह पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है |
| बाँकली बाँध | जालौर | सुकड़ी | — |
महत्वपूर्ण जानकारी: जवाई बाँध में पानी की कमी होने पर सेई जल सुरंग (उदयपुर से पाली तक) के माध्यम से जलापूर्ति की जाती है। इस सुरंग से पाली, जोधपुर, सिरोही एवं जालौर जिलों को जल आपूर्ति होती है।
2.2 पश्चिमी बनास नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | नया सानवरा हिल्स (सिरोही), अरावली पहाड़ियों में |
| संगम | लिटिल रन / कच्छ का रन (गुजरात) |
| लम्बाई | कुल 266 किमी | राजस्थान में केवल 50 किमी |
| सहायक नदियाँ | सुकली/सीपू और कूकड़ी |
| किनारे के नगर | आबू रोड (सिरोही) एवं डीसा (गुजरात) — दोनों बाएँ किनारे पर स्थित |
भ्रम से बचें: राजस्थान में दो अलग-अलग 'बनास' नाम की नदियाँ हैं — एक 'पश्चिमी बनास' (यहाँ, सिरोही से निकलकर कच्छ के रन में गिरने वाली, सिर्फ 50 किमी राजस्थान में) और दूसरी सिर्फ 'बनास' (राजसमंद से निकलकर चम्बल में मिलने वाली, 512 किमी पूरी राजस्थान में) — इन दोनों को कभी एक न समझें, परीक्षा में यह सबसे आम गलती है।
2.3 साबरमती नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | पादरला/पदराना हिल्स (झाड़ोल, उदयपुर) |
| संगम | खम्भात की खाड़ी (गुजरात) |
| लम्बाई | कुल 416 किमी | राजस्थान में मात्र 45 किमी |
| अपवाह क्षेत्र | मुख्यतः उदयपुर एवं डूंगरपुर |
| सहायक नदियाँ | सेई, वाकल, हथमती, मेश्वा, वेतरक (वात्रक), माजम, मानसी |
| विशेष | राजस्थान की प्रथम नदी जिस पर अहमदाबाद (गुजरात) में एक आधुनिक 'रिवर फ्रंट' बनाया गया है |
| निर्माण | मुख्यतः वाकल एवं सेई धाराओं के आपस में मिलने से बनती है |
सहायक नदियों को याद रखने की ट्रिक: 'वैसे हमें मावा चाहिए' → वेतरक, सेई, हथमती, मेश्वा, मानसी, वाकल, माजम।
जल सुरंगें — साबरमती तंत्र
| जल सुरंग | उद्देश्य | विशेष |
|---|
| सेई जल सुरंग | जवाई बाँध में जलापूर्ति (उदयपुर से पाली तक) | राजस्थान की प्रथम जल सुरंग |
| मानसी-वाकल जल सुरंग (11.2 किमी) | देवास/मोहनलाल सुखाड़िया परियोजना में जलापूर्ति | राजस्थान की सबसे लम्बी जल सुरंग |
रोचक तथ्य: वात्रक (वेतरक) नदी का उद्गम डूंगरपुर के समीप होता है, फिर यह गुजरात के मेघरज तालुका में प्रवेश करती है और अंततः धोलका के पास साबरमती नदी में मिल जाती है — ध्यान रहे, इसका उद्गम बाँसवाड़ा से नहीं होता, यह एक आम गलतफहमी है।
2.4 माही नदी — वागड़ की गंगा
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | मैहदं झील (मिंडा गाँव), सरदारपुरा (धार जिला, मध्यप्रदेश); अमरेरू हिल्स (विन्ध्यन पर्वतमाला) |
| संगम | खम्भात की खाड़ी (अरब सागर), गुजरात |
| लम्बाई | कुल 576 किमी | राजस्थान में 171 किमी |
| राजस्थान में प्रवेश | खान्दू गाँव (बाँसवाड़ा) से |
| अपवाह क्षेत्र | बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (यह क्षेत्र 'वागड़ मैदान' या 'छप्पन का मैदान' कहलाता है) |
| उपनाम | वागड़ की गंगा | आदिवासियों की गंगा | कांठल की गंगा | दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा |
💡 माही का सबसे अनोखा तथ्य — कर्क रेखा को दो बार काटना
माही विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को दो बार काटती है, और यह भी एक खास 'उल्टे U' आकार में करती है — यानी नदी पहले कर्क रेखा को पार करके उत्तर की ओर बहती है, फिर मुड़कर दोबारा दक्षिण की ओर बहते हुए फिर से कर्क रेखा को पार कर जाती है। इसे ऐसे समझें जैसे कोई व्यक्ति सड़क पार करके फिर वापस उसी सड़क को पार कर ले — सामान्यतः नदियाँ ऐसा नहीं करतीं, इसलिए यह माही को दुनिया में अनोखा बनाता है। इसके अलावा, बाँसवाड़ा (चाचाकोटा क्षेत्र) में माही में इतने टापू (द्वीप) हैं कि इसे 'सौ टापुओं का शहर' कहा जाता है। यह नदी दक्षिण से प्रवेश करके पश्चिम की ओर बहती है।
माही की सहायक नदियाँ
सहायक नदियों की ट्रिक: 'अना चारपाई में ईरु/एराव सो जा' → अनास, चाप, इरु, मोरेन, सोम, जाखम।
| सहायक नदी | उद्गम | संगम | किनारा |
|---|
| सोम | बीछामेड़ा पहाड़ियाँ (उदयपुर) | बेणेश्वर (डूंगरपुर) में माही में | दायाँ |
| जाखम | भंवरमाता पहाड़ियाँ (छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़) | लोरावल बिलूरा गाँव — बेणेश्वर से पहले सोम में | दायाँ |
| अनास | आम्बेर गाँव (मध्यप्रदेश) → मेलडीखेड़ा | गलियाकोट (डूंगरपुर) में माही में | बायाँ |
| मोरेन | डूंगरपुर | गलियाकोट के निकट माही में | दायाँ |
| चाप | कालिंजरा पहाड़ी (बाँसवाड़ा) | डूंगरपुर में माही में | बायाँ |
| इरू | — | माही बाँध से पहले मिलती है (शेष सहायक नदियाँ बाँध के बाद मिलती हैं) | दायाँ |
| हरण | — | अनास की सहायक नदी है | बायाँ |
| भादर, एराव | — | — | दायाँ |
विशेष जानकारी: सोम नदी की एक अन्य प्रमुख सहायक नदी 'गोमती' भी है (जाखम के अतिरिक्त)। बेणेश्वर धाम (नवा टापरा, डूंगरपुर) में सोम + माही + जाखम — तीनों नदियों का त्रिवेणी संगम होता है, जिसे 'आदिवासियों का कुंभ' कहा जाता है और यहाँ माघ पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला लगता है।
बाँध परियोजनाएँ — माही तंत्र
| बाँध | स्थान | विशेष तथ्य |
|---|
| माही बजाज सागर बाँध | बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा) | कुल लम्बाई 3109 मीटर — राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध; आदिवासी क्षेत्र का सबसे बड़ा बाँध; इसे 'सुजलाम सुफलाम क्रांति' का प्रतीक माना जाता है |
| जाखम बाँध | सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़) | राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध — 81 मीटर ऊँचाई |
| कागदी पिकअप बाँध | बाँसवाड़ा | — |
| कडाना बाँध | गुजरात | गुजरात में माही नदी पर स्थित |
| सोम-कमला परियोजना | डूंगरपुर | — |
| सोम-कागदर परियोजना | उदयपुर | — |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — अरब सागरीय नदी तंत्र: लूनी, पश्चिमी बनास, साबरमती एवं माही नदियों का प्रवाह-मार्ग
3आन्तरिक प्रवाह नदी तंत्र (60%)
आन्तरिक प्रवाह (Internal/Inland Drainage) का मतलब है ऐसी नदियाँ जिनका पानी कभी समुद्र तक नहीं पहुँच पाता — ये अपने प्रवाह क्षेत्र में ही, यानी रेत में, किसी झील में, या मैदान में समाकर विलुप्त हो जाती हैं। सोचिए इसे एक ऐसी सड़क की तरह जो कहीं पहुँचने के बजाय बीच में ही एक बंद गली में खत्म हो जाए — नदी का पानी भी कुछ ऐसा ही करता है। राजस्थान के कुल अपवाह क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा (60%) इसी श्रेणी में आता है, जो यह दर्शाता है कि राज्य का बड़ा भूभाग मरुस्थलीय व अर्द्धशुष्क है।
3.1 घग्घर नदी — मृत नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | शिवालिक की पहाड़ियाँ, कालका माता मंदिर (हिमाचल प्रदेश) |
| राजस्थान में प्रवेश | तलवाड़ा गाँव (टिब्बी तहसील, हनुमानगढ़) |
| अपवाह क्षेत्र | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर |
| अंतिम स्थान | फोर्ट अब्बास (बहावलपुर, पाकिस्तान) में विलुप्त |
| उपनाम | सरस्वती (प्राचीन नाम) | मृत नदी | नट नदी | सोता/सोतर नदी | दृषद्वती नदी |
| अपवाह क्षेत्र के नाम | हनुमानगढ़ में इसे 'नाली/पाट' कहते हैं; पाकिस्तान में इसे 'हकरा' कहा जाता है |
| रिकॉर्ड | हिमालय पर्वत से निकलकर राजस्थान आने वाली एकमात्र नदी; देश एवं राजस्थान की सबसे लम्बी अन्तः प्रवाही नदी |
| सभ्यताएँ | कालीबंगा एवं पीलीबंगा सभ्यता इसी नदी के किनारे बसी थीं |
| तलवाड़ा झील | घग्घर नदी पर ही निर्मित है |
| संभाग | बीकानेर संभाग की एकमात्र नदी |
💡 घग्घर को 'मृत नदी' और 'सरस्वती' क्यों कहा जाता है?
माना जाता है कि घग्घर नदी वैदिक काल की प्रसिद्ध 'सरस्वती नदी' का ही अवशेष है — यानी हजारों साल पहले यह एक बड़ी, सतत बहने वाली नदी थी, लेकिन भूगर्भीय बदलावों के कारण इसका मुख्य जल-स्रोत सूख गया और अब यह सिर्फ बारिश के मौसम में ही थोड़ा-बहुत पानी लेकर बहती है — बाकी समय इसका मार्ग सूखा (dry channel) पड़ा रहता है, इसीलिए इसे 'मृत नदी' कहा जाता है। सरस्वती नदी के इसी प्राचीन मार्ग की खोज के लिए श्रीराम वाडरे व हनुवंता राय जैसे शोधकर्ताओं को नियुक्त किया गया था।
3.2 कांतली/काठली नदी — तोरावाटी की नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | खण्डेला की पहाड़ियाँ (सीकर) |
| अपवाह क्षेत्र | सीकर, झुंझुनूं, चूरू की सीमा (यह क्षेत्र 'तोरावाटी' कहलाता है) |
| लम्बाई | 100 किमी — यह पूर्ण रूप से राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी आन्तरिक प्रवाह नदी है |
| सभ्यताएँ | गणेश्वर सभ्यता (सीकर) | सुनारी सभ्यता (झुंझुनूं/खेतड़ी) |
| विशेष | झुंझुनूं जिले को दो भागों में बाँटती हुई अंततः चूरू की सीमा में विलीन हो जाती है |
3.3 साबी/साहिबी नदी — नजफगढ़ का नाला
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | सेवर की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़/जयपुर) |
| अपवाह क्षेत्र | जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा |
| अंत | हरियाणा के गुड़गाँव/पटौदी मैदान में ('नजफगढ़ के नाले' के रूप में) विलुप्त |
| सभ्यता | जोधपुरा सभ्यता (कोटपूतली-बहरोड़) |
| विशेष | राजस्थान की एकमात्र नदी जो हरियाणा के मैदान में जाकर विलुप्त होती है; मुगलकाल में इसकी बाढ़ 'विनाश लीला' के लिए प्रसिद्ध थी |
3.4 बाणगंगा नदी — अर्जुन की गंगा
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | बैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़/जयपुर) |
| अपवाह क्षेत्र | कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, दौसा, भरतपुर |
| सर्वाधिक बेसिन | भरतपुर में सर्वाधिक बेसिन क्षेत्र (लगभग 2746 वर्ग किमी) |
| उपनाम | अर्जुन की गंगा | ताला नदी | रुण्डित नदी (Beheaded River) |
| वर्गीकरण | वर्ष 2012 से इसे अन्तः प्रवाही नदी माना जाता है; भारी वर्षा के समय यह आगरा (फतेहाबाद) के निकट यमुना नदी में जाकर मिल जाती है |
| सभ्यता | बैराठ सभ्यता |
💡 रुण्डित नदी (Beheaded River) का मतलब क्या है?
'रुण्डित' शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'सिर कटा हुआ'। जिस तरह किसी का सिर धड़ से अलग कर दिया जाए, उसी तरह बाणगंगा जैसी नदियाँ अपनी मुख्य नदी (यहाँ यमुना) में पहुँचने से पहले ही बीच में समाप्त हो जाती हैं — यानी इनका 'सिर' (मुहाना) कहीं और है, धड़ (मुख्य प्रवाह) कहीं और। सामान्यतः बाणगंगा भरतपुर में ही विलुप्त हो जाती है, केवल असाधारण भारी बारिश में ही यह यमुना तक पहुँच पाती है।
बाँध — बाणगंगा तंत्र
- रामगढ़ बाँध/परियोजना — इसका जुड़ाव ईसरदा बाँध से किया गया है
- अजान बाँध (केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान) — जल की कमी होने पर पाँचना बाँध (गम्भीरी नदी, करौली) व यमुना लिंक नहर से जलापूर्ति की जाती है
- माधोसागर बाँध (दौसा)
3.5 रुपारेल नदी — वराह नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | उदयनाथ हिल्स (थानागाजी, अलवर) |
| अपवाह क्षेत्र | अलवर, डीग, भरतपुर |
| उपनाम | वराह नदी | लसवारी नदी |
| बाँध | सीकरी बाँध (डीग) — यहीं पर यह विलुप्त हो जाती है |
| झील | भरतपुर में 'मोती झील' में गिरती है, जिसे 'भरतपुर की जीवनरेखा' कहा जाता है; यहाँ नील हरित शैवाल (उर्वरक के रूप में उपयोगी) पाया जाता है |
| चैनल | सुजान गंगा नामक चैनल मोती झील और लोहागढ़ किले को आपस में जोड़ता है |
3.6 कांकनी/काकनेय/मसूरदी नदी — सबसे छोटी नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | कोटरी/कोठ्यारी गाँव (जैसलमेर) |
| लम्बाई | केवल 27 किमी — राजस्थान की सबसे छोटी नदी |
| झील | रूपसी गाँव के पास प्रसिद्ध 'बुझ झील' का निर्माण करती है |
| अंत | 'मीठा खाड़ी' में विलुप्त हो जाती है |
3.7 अन्य अन्तः प्रवाही नदियाँ — सांभर झील में गिरने वाली
सांभर झील में गिरने वाली नदियाँ एक खास प्रकार का जल-प्रतिरूप (drainage pattern) बनाती हैं जिसे 'अभिकेन्द्रीय प्रतिरूप' (Centripetal Pattern) कहा जाता है — यानी चारों दिशाओं से आने वाली सभी छोटी नदियाँ एक ही केंद्र बिंदु (यहाँ सांभर झील) की ओर बहकर आती हैं, जैसे किसी थाली के किनारों से पानी बीच में जमा होता जाए।
| नदी | उद्गम/विशेष | तथ्य |
|---|
| मेंथा/मेन्ढा | मनोहर हिल्स (जयपुर) | सांभर झील में सर्वाधिक लवणता (नमक) जमा करने वाली नदी |
| रूपनगढ़ | अजमेर | सांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदी |
| खारी (नागौर) | नागौर | सांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदी |
| खण्डेल | सीकर | सांभर झील में गिरने वाली प्रमुख नदी |
अन्य महत्वपूर्ण छोटी नदियाँ
| नदी | उद्गम/विशेष | तथ्य |
|---|
| अरवारी नदी | सरिस्का पहाड़ियाँ (थानागाजी, अलवर) — सकरा बाँध से चाँदपुरा ग्राम में 3 धाराओं का संगम | तरुण भारत संघ (जल-पुरुष राजेंद्र सिंह के संगठन) द्वारा पुनर्जीवित की गई नदी; 'सरसा नदी' में जाकर गिरती है |
| द्वैषवती/द्रव्यवती नदी | नाहरगढ़ पहाड़ियों में 'आधुनी कुंड' से; समापन 'ढूँढ़ नदी' में | ऋग्वेद में वर्णित; इसे 'अमानीशाह का नाला' भी कहते हैं; टाटा प्रोजेक्ट के तहत इसका सौन्दर्यीकरण किया गया; इसे 'जयपुर की लाइफलाइन' कहा जाता है |
| लिक (Lik) नदी | — | एक अन्य आन्तरिक प्रवाह नदी |
जिलों से जुड़े नदी-तथ्य: राजस्थान में तीन जिलों में कोई नदी नहीं बहती — बीकानेर, चूरू और फलौदी (पहले जैसलमेर में भी नदी नहीं थी, लेकिन नए जिले बनने के बाद कांकनी नदी जैसलमेर में मानी जाती है)। सर्वाधिक नदियाँ चित्तौड़गढ़ जिले में बहती हैं (कोटा संभाग), जबकि न्यूनतम नदियाँ बीकानेर जिले में (बीकानेर संभाग)। एक रोचक व चिंताजनक तथ्य यह भी है कि बालोतरा शहर (लूनी नदी के किनारे) और हनुमानगढ़ जंक्शन (घग्घर नदी के किनारे) दोनों नदी के तल (पेटे) से भी नीचे बसे हुए हैं — इसीलिए जब भी नदी में पानी अधिक आता है, वहाँ सीधे बाढ़ की स्थिति बन जाती है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — आन्तरिक प्रवाह नदी तंत्र: घग्घर, कांतली, साबी, बाणगंगा, रूपारेल एवं सांभर झील में गिरने वाली नदियाँ
4बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र (23-24%)
बंगाल की खाड़ी तंत्र की नदियाँ अरावली के पूर्वी भाग में बहती हैं। अरब सागरीय तंत्र के बिल्कुल विपरीत, इनकी विशेषताएँ हैं — लम्बी दूरी, मंद (धीमी) गति, सर्वाधिक जल-प्रवाह वाली नदियाँ, और समुद्र में मिलते समय डेल्टा (त्रिकोणीय भू-भाग) का निर्माण।
4.1 चम्बल नदी — राजस्थान की सबसे बड़ी नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | जनापाव हिल्स, महू / डॉ. अम्बेडकर नगर (विन्ध्यन पर्वतमाला, इंदौर, मध्यप्रदेश) |
| संगम | मुरादगंज/इटावा (उत्तरप्रदेश) — यमुना नदी में |
| लम्बाई | कुल 1051 किमी | राजस्थान में 322 किमी (पुराने आँकड़ों में कुल 965 किमी व राजस्थान में 135 किमी दर्ज था) |
| राजस्थान में प्रवेश | चौरासीगढ़ (चित्तौड़गढ़) से |
| अपवाह क्षेत्र | चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर |
| उपनाम | चर्मण्वती (प्राचीन नाम) | कामधेनु | बारहमासी | नित्यवाही | घड़ियालों की शरणस्थली |
| प्रवाह प्रतिरूप | वृक्षाकार (Dendritic) — यानी जैसे किसी पेड़ की शाखाएँ चारों तरफ फैली होती हैं, वैसे ही चम्बल की सहायक नदियाँ चारों ओर से आकर इसमें मिलती हैं |
| रिकॉर्ड | पूर्वी राजस्थान एवं सम्पूर्ण राजस्थान की सबसे लम्बी व सबसे बड़ी नदी; राजस्थान का सबसे बड़ा नदी-बेसिन |
चम्बल की विशेष विशेषताएँ
- अन्तर्राज्यीय सीमा (राजस्थान + मध्यप्रदेश) पर बहने वाली सबसे लम्बी नदी है
- राजस्थान में सर्वाधिक गॉर्ज वैली (V-आकार की संकरी घाटी), उत्खात भूमि (Badland Topography) एवं सर्वाधिक अवनालिका अपरदन (gully erosion) चम्बल नदी घाटी में ही पाया जाता है
- संरक्षित जीव: घड़ियाल, मगरमच्छ, गांगेय सूस/डॉल्फिन, उद्बिलाव — ये सभी चम्बल में पाए जाते हैं; यह नमामि गंगे परियोजना के तीसरे चरण में शामिल है
- विश्व का एकमात्र ऐसा नदी-तंत्र है जहाँ मात्र 100 किमी के दायरे में 3 बाँध जल-विद्युत उत्पादन करते हैं
- कोटा में बना हैंगिंग ब्रिज राजस्थान का प्रथम हैंगिंग ब्रिज है (1.5 किमी लंबा, ईस्ट-वेस्ट कोरिडोर के लिए)
- कोटा हैरिटेज रिवर फ्रंट राजस्थान का प्रथम रिवर फ्रंट है
- चूलिया जलप्रपात (भैंसरोड़गढ़, चित्तौड़गढ़) — 18 मीटर ऊँचा, राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात
- त्रिवेणी संगम — रामेश्वर घाट (पदरा गाँव, सवाई माधोपुर) में चम्बल + बनास + सीप नदी का संगम होता है
- सामेला नामक स्थान पर कालीसिंध + आहू नदियों का संगम होता है, और इसी के किनारे राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ जल दुर्ग 'गागरोन' स्थित है
- राजस्थान का दूसरा हैंगिंग ब्रिज माही नदी (बाँसवाड़ा) पर बना है
चम्बल की सहायक नदियाँ
सहायक नदियों की ट्रिक: 'गुस्से में मां पाया ने आज काले घोड़े पर बार बार चाकू से सीप मारा' → गुंजाली, मेज, मांगली, पार्वती, निवाज/नैवाज, आहू, कालीसिंध, घोड़ापछाड़, परवन, बनास, ब्राह्मणी, चाकण, कूनो/कूराल, सीप।
| सहायक नदी | उद्गम/विशेष | संगम/अन्य विवरण |
|---|
| गुंजाली (बायीं ओर) | — | राजस्थान में चम्बल से सबसे पहले मिलने वाली सहायक नदी |
| बामनी/ब्राह्मणी (बायीं ओर) | चित्तौड़गढ़ की हरिपुरा पहाड़ियाँ | भैंसरोड़गढ़ के निकट चम्बल में मिलती है |
| कुराल (बायीं ओर) | ऊपरमाल का पठार | बूंदी के पूर्व में चम्बल में मिलती है |
| मेज (बायीं ओर) | — | चम्बल में मिलती है |
| चाकण (बायीं ओर) | — | चम्बल में मिलती है |
| बनास (बायीं ओर) | — | चम्बल की सबसे लम्बी सहायक नदी है |
| कालीसिंध (दायीं ओर) | बागली गाँव (देवास, मध्यप्रदेश) | नोनेरा (कोटा) में चम्बल में मिलती है; इसकी अपनी सहायक नदियाँ हैं — परवन, उजाड़, आहू, निमाज; यह दायीं ओर से मिलने वाली सबसे लम्बी सहायक नदी है |
| आहू (दायीं ओर) | — | कालीसिंध से सामेला (गागरोन दुर्ग के निकट) में संगम होता है |
| आलनिया (दायीं ओर) | मुकुन्दवाड़ा पहाड़ियाँ (कोटा) | नोटाना गाँव में चम्बल में मिलती है |
| परवन (दायीं ओर) | — | शेरगढ़ अभयारण्य (बारां) से होकर बहती है |
| पार्वती (दायीं ओर) | — | धौलपुर में पूर्व से पश्चिम की दिशा में बहती है |
| सीप, कूनो (दायीं ओर) | — | — |
बाँध परियोजनाएँ — चम्बल तंत्र
| बाँध | स्थान | विशेष तथ्य |
|---|
| गाँधी सागर बाँध | मध्यप्रदेश | चम्बल नदी पर बना सबसे बड़ा बाँध |
| राणा प्रताप सागर बाँध | रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ | भराव क्षमता (Capacity) के आधार पर राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध |
| जवाहर सागर बाँध | कोटा-बूंदी | जल विद्युत उत्पादन हेतु |
| कोटा बैराज | कोटा | सिंचाई के लिए |
भ्रम से बचें — दो अलग-अलग 'सबसे बड़े बाँध': राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध (भराव क्षमता के आधार पर) = राणा प्रताप सागर (चित्तौड़गढ़), जबकि चम्बल नदी पर बना (राज्य के बाहर मध्यप्रदेश में स्थित) सबसे बड़ा बाँध = गाँधी सागर — इन दोनों तथ्यों को अलग-अलग याद रखें, परीक्षा में अक्सर एक-दूसरे से बदलकर पूछे जाते हैं।
4.2 बनास नदी — वनों की आशा
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | कुम्भलगढ़ के निकट खमनौर हिल्स / वेरों या भेरों का मठ (राजसमंद) |
| संगम | रामेश्वर घाट (सवाई माधोपुर) में — चम्बल नदी में |
| लम्बाई | 512 किमी — पूर्ण रूप से राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी |
| अपवाह क्षेत्र | राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर |
| जलग्रहण क्षेत्र | राजस्थान में सर्वाधिक — लगभग 46,570 से 47,060 वर्ग किमी |
| उपनाम | वनों की आशा | वर्णशा | वशिष्ठी | अध्यारोपित नदी (Superimposed River) |
| रिकॉर्ड | केवल/पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी (512 किमी) |
| त्रिवेणी संगम | राजस्थान में सर्वाधिक त्रिवेणी संगम बनास नदी पर ही स्थित हैं |
💡 अध्यारोपित नदी (Superimposed River) क्या है?
सोचिए किसी नदी के रास्ते में शुरुआत में नरम (मुलायम) मिट्टी/चट्टान थी, इसलिए नदी ने अपना रास्ता आसानी से तय कर लिया। लेकिन समय के साथ कटाव होते-होते नदी नीचे कठोर (सख्त) चट्टानों तक पहुँच गई — फिर भी नदी ने अपना वही पुराना रास्ता नहीं बदला, वह उसी ढलान पर बहती रही, भले ही अब नीचे कठोर चट्टान हो। ऐसी नदी को 'अध्यारोपित नदी' कहते हैं — यानी नदी का प्रारंभिक मार्ग नई (कठोर) सतह पर जबरन 'थोप' दिया गया हो। बनास, चम्बल, दामोदर और सुवर्णरेखा — ये सभी अध्यारोपित नदियों के उदाहरण हैं।
बनास की सहायक नदियाँ
सहायक नदियों की ट्रिक: 'काली डाकण मासी मेना मोर बांडी आम को खा गई' → कालीसिल, डाई, माशी/मांसी, मेनाल, मोरेल, बांडी, आयड़/बेड़च, कोठारी, खारी, गलवा।
| सहायक नदी | उद्गम/विशेष | संगम/अन्य विवरण |
|---|
| बेड़च/आयड़ (दायीं ओर) | गोगुन्दा हिल्स (उदयपुर) | बिगोद (भीलवाड़ा) में बनास में मिलती है; यह दायीं ओर से सबसे लम्बी सहायक नदी है; इसकी अपनी सहायक नदियाँ हैं — गोलवा, ओराई, गुजरी, वाग्ली, वागन |
| गम्भीरी | — | बेड़च की सहायक नदी है; चित्तौड़गढ़ दुर्ग बेड़च+गम्भीरी के संगम स्थल पर स्थित है |
| मेनाल | — | बनास में मिलती है; बिगोद (भीलवाड़ा) में बनास+बेड़च+मेनाल का त्रिवेणी संगम होता है |
| खारी (बायीं ओर) | बिजराल/विजराज हिल्स (राजसमंद) | राजमहल (टोंक) में बनास में मिलती है; यह बनास की सबसे लम्बी सहायक नदी है |
| कोठारी (बायीं ओर) | — | मेजा बाँध यहीं स्थित है; इसके किनारे बागौर सभ्यता (भीलवाड़ा) बसी हुई थी |
| डाई | नसीराबाद तहसील, किशनगढ़ (अजमेर) | राजमहल (टोंक) में बनास में मिलती है; अजमेर, केकड़ी क्षेत्र में बहती है |
| माशी/मांसी | — | बनास में मिलती है; देवधाम जोधपुरिया में बनास+बांडी+माशी का संगम होता है |
| मोरेल | बस्सी तहसील, चैनपुरा (जयपुर) | खंडार गाँव (सवाई माधोपुर) में बनास में मिलती है; मोरेल बाँध — पीलूखेड़ा में स्थित |
| ढूँढ (बायीं ओर) | — | — |
| कालीसिल (बायीं ओर) | — | कैलादेवी (करौली) यहीं स्थित है |
| बांडी-अजमेर | भीलवाड़ा/अजमेर | बनास में मिलती है (यह लूनी वाली 'बांडी' नदी से बिल्कुल अलग है) |
| मानसी (बनास वाली) | करेरा गाँव (भीलवाड़ा) | अजमेर जिले की सीमा पर खारी नदी में मिलती है |
| सोहादरा, ढील (बायीं ओर) | — | — |
भ्रम से बचें — दो अलग-अलग 'बांडी' नदियाँ: राजस्थान में दो अलग-अलग 'बांडी' नाम की नदियाँ हैं — एक लूनी की सहायक नदी (फुलाद, पाली से निकलकर जोधपुर में मिलने वाली, 'राजस्थान की रासायनिक नदी'), और दूसरी बनास की सहायक नदी (भीलवाड़ा/अजमेर क्षेत्र से)। इन्हें कभी एक-दूसरे से न जोड़ें।
बाँध परियोजनाएँ — बनास तंत्र
| बाँध | स्थान | विशेष तथ्य |
|---|
| बीसलपुर बाँध | टोंक (बनास नदी पर) | वर्ष 1999 में निर्मित; राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध; सबसे बड़ी पेयजल परियोजना; इसे 'मिनि गोवा' भी कहा जाता है; यहाँ फिश एक्वेरियम है; यह राजस्थान का प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व (2000) भी है; भविष्य में इसे ERCP (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) से जोड़ा जाएगा |
| जलापूर्ति — बीसलपुर | — | टोंक, अजमेर, नागौर, जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर को जलापूर्ति करता है |
| मोरेल बाँध | सवाई माधोपुर/दौसा | मोरेल नदी पर |
| मेजा बाँध | भीलवाड़ा | कोठारी नदी पर |
| गलवा बाँध | टोंक | गलवा/तालवा नदी पर |
| नन्दसमंद बाँध | राजसमंद | बनास नदी पर |
| मातृकुण्डिया (मेवाड़ का हरिद्वार) | चित्तौड़गढ़ | बनास नदी पर |
| ईसरदा बाँध | सवाई माधोपुर | बनास नदी पर; बीसलपुर बाँध से अतिरिक्त पानी के भंडारण हेतु |
4.3 बेड़च/आयड़ नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | गोगुन्दा हिल्स (उदयपुर के उत्तर में) |
| संगम | बिगोद (भीलवाड़ा) में बनास नदी में |
| अपवाह क्षेत्र | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा |
| नामांतरण | उदयसागर झील (उदयपुर) में गिरने से पहले इसे 'आयड़' कहा जाता है, और झील से निकलने के बाद इसका नाम 'बेड़च' हो जाता है |
| सभ्यता | आहड़ सभ्यता (उदयपुर) इसी नदी (आयड़) के किनारे बसी थी |
| दुर्ग | चित्तौड़गढ़ दुर्ग बेड़च एवं गम्भीरी नदी के संगम स्थल पर स्थित है |
| उप-सहायक नदियाँ | गोलवा, ओराई, गुजरी, वाग्ली, वागन |
4.4 गम्भीर/ऊंटगन नदी
| बिंदु | विवरण |
|---|
| उद्गम | सपोटरा तहसील / लांगरा गाँव (करौली) |
| संगम | रिहोली गाँव, फतेहाबाद/मैनपुरी (उत्तरप्रदेश) — यमुना नदी में; कुल लम्बाई 244 किमी |
| अपवाह क्षेत्र | करौली, भरतपुर, धौलपुर |
| सहायक नदियाँ | अटा, माची, भद्रावती, भैंसावट, बरखेड़ा |
| बाँध | पाँचना बाँध (करौली) — यह मिट्टी से निर्मित राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है |
| विशेष | अजान बाँध (केवलादेव) में जल की कमी होने पर पाँचना बाँध से जलापूर्ति की जाती है |
सहायक नदियों की ट्रिक: 'अ मा भदावरी भैंस बहार' → अटा, माची, भद्रावती, भैंसावट, बरखेड़ा (गम्भीर की सहायक नदियाँ)।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र: चम्बल, बनास, बेड़च एवं गम्भीर नदियों का प्रवाह-मार्ग एवं प्रमुख बाँध
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5तुलनात्मक तालिकाएँ एवं महत्वपूर्ण आँकड़े
5.1 प्रमुख त्रिवेणी संगम (जहाँ 3 नदियाँ मिलती हैं)
| संगम स्थल | नदियाँ | जिला/विशेष |
|---|
| बेणेश्वर धाम (नवा टापरा) | सोम + माही + जाखम | डूंगरपुर; यहाँ माघ पूर्णिमा को 'आदिवासियों का कुंभ' लगता है |
| बिगोद/माण्डलगढ़ | बनास + बेड़च + मेनाल | भीलवाड़ा |
| रामेश्वर घाट (पदरा गाँव) | बनास + चम्बल + सीप | सवाई माधोपुर |
| राजमहल | बनास + डाई + खारी | टोंक |
| देवधाम जोधपुरिया | बनास + बांडी + माशी/मांसी | टोंक |
| सामेला | कालीसिंध + आहू | झालावाड़; यहाँ 'गागरोन दुर्ग' स्थित है |
5.2 राजस्थान के प्रमुख जलप्रपात (Waterfalls)
| जलप्रपात | नदी | स्थान/ऊँचाई |
|---|
| चूलिया जलप्रपात | चम्बल | भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़); 18 मीटर ऊँचा — राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात |
| भीमलत जलप्रपात | मांगली नदी | बूंदी |
| मेनाल जलप्रपात | मेनाल नदी | भीलवाड़ा |
| भील बेरी जलप्रपात | बांडी नदी (फुलाद, जोजावर) | पाली; लगभग 182 फीट (लगभग 55 मीटर) |
| अरणा-झरना / बेरी गंगा | — | जोधपुर (मंडोर) |
| दमोह जलप्रपात | — | बाड़ी (धौलपुर) |
| दिर जलप्रपात (दीर्घ जलप्रपात) | कुकुंद नदी | दिर (भरतपुर) |
5.3 नदी किनारे स्थित प्रमुख नगर व प्राचीन सभ्यताएँ
| नगर/सभ्यता | नदी | जिला |
|---|
| कालीबंगा, पीलीबंगा | घग्घर | हनुमानगढ़ |
| हनुमानगढ़, सूरतगढ़ | घग्घर (बायाँ किनारा) | हनुमानगढ़/श्रीगंगानगर |
| बालोतरा, तिलवाड़ा | लूनी (दायाँ किनारा) | बालोतरा |
| एरिनपुरा, शिवगंज | जवाई (बायाँ किनारा) | सिरोही |
| आबू रोड, डीसा | पश्चिमी बनास (बायाँ किनारा) | सिरोही/गुजरात |
| गणेश्वर सभ्यता | कांतली | सीकर |
| सुनारी सभ्यता | कांतली | झुंझुनूं/खेतड़ी |
| जोधपुरा सभ्यता | साबी/साहिबी | कोटपूतली-बहरोड़ |
| बैराठ सभ्यता | बाणगंगा | जयपुर/कोटपूतली |
| आहड़ सभ्यता | बेड़च/आयड़ | उदयपुर |
| बागौर सभ्यता | कोठारी | भीलवाड़ा |
| आसीन्द, विजयनगर, हुरड़ा | खारी (बायाँ किनारा) | भीलवाड़ा/राजसमंद |
| कोटा नगर | चम्बल | कोटा |
| पीपलखूंट, गलियाकोट | माही | प्रतापगढ़/डूंगरपुर |
| देव सोमनाथ | सोम | डूंगरपुर |
| कैलादेवी | कालीसिल | करौली |
| चन्द्रावती (प्राचीन नगर) | पश्चिमी बनास (बायाँ किनारा) | सिरोही |
5.4 लम्बाई के अनुसार नदियों का क्रम
| नदी | कुल लम्बाई | राजस्थान में लम्बाई | उद्गम — संगम |
|---|
| चम्बल | 1051 किमी | 322 किमी | मध्यप्रदेश → उत्तरप्रदेश (यमुना में) |
| माही | 576 किमी | 171 किमी | मध्यप्रदेश → खम्भात की खाड़ी |
| बनास | 512 किमी | 512 किमी (पूर्णतः राजस्थान में) | राजसमंद → चम्बल |
| लूनी | 495 किमी | 330 किमी | अजमेर → कच्छ का रन |
| साबरमती | 416 किमी | 45 किमी | उदयपुर → खम्भात की खाड़ी |
| बाणगंगा | 380 किमी | — | जयपुर → भरतपुर में समाप्त |
| कालीसिंध | 278 किमी | 145 किमी | मध्यप्रदेश → चम्बल |
| पश्चिमी बनास | 266 किमी | 50 किमी | सिरोही → लिटिल कच्छ |
| कांतली | 100 किमी | 100 किमी (पूर्णतः) | सीकर → चूरू (आन्तरिक) |
| कांकनी | 27 किमी | 27 किमी (सबसे छोटी) | जैसलमेर → बुझ झील |
दो अलग-अलग क्रम याद रखें: राजस्थान से सम्बन्धित कुल लम्बाई के अनुसार क्रम: चम्बल (1051) > माही (576) > बनास (512) > लूनी (495)। लेकिन केवल राजस्थान में लम्बाई के अनुसार क्रम बदल जाता है: बनास (512) > लूनी (330) > चम्बल (322) > माही (171) — क्योंकि चम्बल व माही ज़्यादातर दूसरे राज्यों में बहती हैं, जबकि बनास पूरी तरह राजस्थान में ही बहती है।
5.5 अपवाह क्षेत्र (Catchment Area) के अनुसार क्रम
सभी स्रोतों में एकमत क्रम (अवरोही): बनास > लूनी > चम्बल > माही > बाणगंगा > साबरमती।
| नदी | प्रचलित डाटा | डॉ. हरिमोहन सक्सेना (IMTI) | पटवारी-2016 डाटा |
|---|
| बनास | 45,000 वर्ग किमी | 47,060.27 वर्ग किमी (13.75%) | 45,833 वर्ग किमी |
| लूनी | 37,000 वर्ग किमी | 69,302.10 वर्ग किमी (20.25%) | 34,866.40 वर्ग किमी |
| चम्बल | 32,000 वर्ग किमी | 31,242.50 वर्ग किमी (9.13%) | 18,446 वर्ग किमी (राजस्थान में) |
| माही | 16,000 वर्ग किमी | 16,610.63 वर्ग किमी (4.85%) | 16,551 वर्ग किमी |
| बाणगंगा | 8,800 वर्ग किमी | — | — |
| साबरमती | 4,000 वर्ग किमी | — | — |
उप-बेसिन के अनुसार क्रम: लूनी (12 उप-बेसिन) > बनास (10 उप-बेसिन) > चम्बल (7/8 उप-बेसिन) > माही (6 उप-बेसिन)। ध्यान दें — यह क्रम 'अपवाह क्षेत्र' के क्रम से अलग है, इसलिए दोनों को गड़बड़ न करें।
5.6 जल उपलब्धता के आधार पर क्रम (MCM में)
| क्रम | नदी | जल उपलब्धता (MCM) | विशेष |
|---|
| 1 | चम्बल | 5203 MCM | प्रथम (सर्वाधिक जल उपलब्धता) |
| 2 | बनास | 4039.3 MCM | द्वितीय |
| 3 | माही | 3149 MCM | तृतीय |
| 4 | लूनी | 1451.8 MCM | चतुर्थ |
5.7 दिशाओं के अनुसार नदियों का क्रम
| दिशा/श्रेणी | नदी/क्षेत्र |
|---|
| उत्तरी राजस्थान की सबसे लम्बी नदी | घग्घर |
| पश्चिमी राजस्थान/मरुस्थल की सबसे लम्बी नदी | लूनी |
| दक्षिणी राजस्थान/आदिवासी क्षेत्र की सबसे लम्बी नदी | माही |
| पूर्वी राजस्थान/सम्पूर्ण राजस्थान की सबसे लम्बी नदी | चम्बल |
| केवल/पूर्णतः राजस्थान में सबसे लम्बी नदी | बनास (512 किमी) |
| सबसे छोटी नदी | कांकनी (27 किमी) |
| पूर्व से पश्चिम दिशा-क्रम | पार्वती → कालीसिंध → चम्बल → बनास (राजसमंद) |
5.8 नदियों के किनारे प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
| अभयारण्य | नदी | जिला |
|---|
| फुलवारी की नाल अभयारण्य | मानसी-वाकल (उद्गम) | उदयपुर |
| बस्सी अभयारण्य | ओरई व बामनी (उद्गम) | चित्तौड़गढ़ |
| राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य | चम्बल | कोटा/सवाई माधोपुर/करौली/धौलपुर |
| जवाहर सागर अभयारण्य | चम्बल | कोटा-बूंदी |
| शेरगढ़ अभयारण्य | परवन नदी | बारां |
| भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य | चम्बल + बामनी संगम पर | चित्तौड़गढ़ |
| सीतामाता अभयारण्य | जाखम नदी | प्रतापगढ़ |
6परीक्षा उपयोगी तकनीकी शब्दावली एवं विशिष्ट तथ्य
6.1 दो 'खारी' नदियों में अंतर — भ्रम निवारण
राजस्थान में 'खारी' नाम की दो बिल्कुल अलग-अलग नदियाँ हैं, जो परीक्षा में सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करती हैं — नीचे तालिका में दोनों का साफ-साफ अंतर देखें।
| विषय | खारी-1 (अरब सागर तंत्र) | खारी-2 (बंगाल की खाड़ी तंत्र) |
|---|
| उद्गम | रोरगाँव/शेरगाँव पहाड़ियाँ (सिरोही) | बिजराल/विजराज हिल्स (राजसमंद) |
| बहाव क्षेत्र | सिरोही, जालोर | भीलवाड़ा (हुरड़ा), अजमेर-भीलवाड़ा सीमा |
| संगम | सायला गाँव (जालोर) में जवाई नदी में (जो आगे लूनी की सहायक है) | राजमहल (टोंक) में बनास नदी में |
| अन्य | — | आसीन्द कस्बा इसी खारी-2 के बाएँ किनारे पर बसा है |
6.2 तकनीकी पारिभाषिक शब्द — सरल भाषा में समझें
| शब्द/Term | सरल परिभाषा एवं उदाहरण |
|---|
| अध्यारोपित नदी (Superimposed River) | जब कोई नदी शुरू में नरम चट्टान पर बहती है, लेकिन कटाव के बाद नीचे की कठोर चट्टान तक पहुँचकर भी अपने पुराने रास्ते (ढलान) को नहीं छोड़ती। उदाहरण: चम्बल, बनास, दामोदर, सुवर्णरेखा |
| रुण्डित नदी (Beheaded River) | ऐसी नदी जो अपनी मुख्य नदी में मिलने से पहले ही, बीच रास्ते में समाप्त हो जाए — जैसे किसी का 'सिर' शरीर से अलग हो गया हो। उदाहरण: बाणगंगा (जो भरतपुर में ही समाप्त हो जाती है, यमुना तक शायद ही पहुँचती है) |
| अभिकेन्द्रीय प्रतिरूप (Centripetal Pattern) | जब चारों दिशाओं से आने वाली छोटी नदियाँ एक ही केंद्रीय स्थान (जैसे किसी झील) की ओर बहकर आएँ — जैसे थाली के किनारों से पानी बीच में जमा होना। उदाहरण: सांभर झील (जहाँ मेंथा, रूपनगढ़, खारी, खण्डेल नदियाँ आकर मिलती हैं) |
| उत्खात भूमि (Badland Topography) | सर्वाधिक अवनालिका अपरदन (गहरी नालीनुमा कटाव) से बनी ऊबड़-खाबड़, बंजर भूमि — जैसे किसी सतह पर बार-बार खरोंच लगने से गड्ढे बन जाएँ। उदाहरण: चम्बल नदी घाटी (डांग प्रदेश) |
| वृक्षाकार प्रतिरूप (Dendritic Pattern) | जब मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियाँ किसी पेड़ की शाखाओं जैसी आकृति में फैली हों — मुख्य तना (नदी) और चारों ओर निकलती टहनियाँ (सहायक नदियाँ)। उदाहरण: चम्बल नदी |
| गॉर्ज वैली बनाम कैनियन | गॉर्ज (Gorge) एक कम चौड़ी, गहरी V-आकार की घाटी होती है, जबकि कैनियन (Canyon) अपेक्षाकृत अधिक चौड़ी होती है। राजस्थान में सर्वाधिक गॉर्ज वैली चम्बल नदी में पाई जाती हैं |
| एस्चुअरी/ज्वारनदमुख (Estuary) | वह चौड़ा त्रिकोणीय मुहाना जहाँ नदी का मीठा पानी और समुद्र का खारा पानी आपस में मिलते हैं — यह अरब सागरीय नदियों (जो कम दूरी व तेज़ गति से बहती हैं) की खास पहचान है |
6.3 महत्वपूर्ण 'प्रथम' एवं 'सर्वाधिक' तथ्य
| श्रेणी | तथ्य |
|---|
| सबसे बड़ा बाँध (भराव क्षमता), राजस्थान | राणा प्रताप सागर (चम्बल, चित्तौड़गढ़) |
| चम्बल का सबसे बड़ा बाँध | गाँधी सागर (मध्यप्रदेश) |
| सबसे लम्बा बाँध, राजस्थान | माही बजाज सागर (3109 मीटर, बाँसवाड़ा) |
| सबसे ऊँचा बाँध, राजस्थान | जाखम बाँध (81 मीटर, प्रतापगढ़) |
| सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध, राजस्थान | बीसलपुर बाँध (टोंक) |
| मिट्टी से निर्मित सबसे बड़ा बाँध | पाँचना बाँध (करौली — गम्भीर नदी) |
| पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध | जवाई बाँध (पाली) |
| प्रथम रिवर फ्रंट, राजस्थान | कोटा हैरिटेज रिवर फ्रंट (चम्बल नदी) |
| प्रथम रिवर फ्रंट (साबरमती नदी पर) | अहमदाबाद, गुजरात |
| प्रथम हैंगिंग ब्रिज, राजस्थान | चम्बल नदी पर (कोटा, 1.5 किमी) |
| दूसरा हैंगिंग ब्रिज | माही नदी (बाँसवाड़ा) |
| सबसे बड़ी पेयजल परियोजना | बीसलपुर बाँध |
| प्रथम जल सुरंग, राजस्थान | सेई जल सुरंग (उदयपुर से पाली) |
| सबसे लम्बी जल सुरंग, राजस्थान | मानसी-वाकल सुरंग (11.2 किमी, उदयपुर) |
| प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व, राजस्थान | बीसलपुर (वर्ष 2000) |
| सर्वाधिक त्रिवेणी संगम | बनास नदी पर |
| सर्वाधिक जल उपलब्धता (MCM में) | चम्बल (5203 MCM) |
| सांभर झील में सर्वाधिक लवणता जमा करने वाली नदी | मेंथा/मेन्ढा नदी |
6.4 विशिष्ट उपनाम — एक नज़र में
| उपनाम | नदी |
|---|
| मरुस्थल की गंगा | लूनी |
| राजस्थान की रासायनिक नदी | बांडी (लूनी की सहायक) |
| मारवाड़ का अमृत सरोवर | जवाई बाँध (जवाई नदी) |
| वागड़ की गंगा / आदिवासियों की गंगा / कांठल की गंगा / दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा | माही |
| अर्जुन की गंगा / रुण्डित नदी | बाणगंगा |
| वनों की आशा | बनास |
| चर्मण्वती / कामधेनु / बारहमासी / नित्यवाही | चम्बल |
| अन्तः सलीला (कालीदास द्वारा) | लूनी |
| सरस्वती / मृत नदी / नट नदी | घग्घर |
| भरतपुर की जीवनरेखा | मोती झील (रुपारेल से भरती है) |
| जयपुर की लाइफलाइन | द्रव्यवती/द्वैषवती (अमानीशाह नाला) |
| मिनि गोवा | बीसलपुर बाँध (बनास) |
| मेवाड़ का हरिद्वार | मातृकुण्डिया (बनास) |
7झीलों का वर्गीकरण (Classification of Lakes)
अब तक हमने नदियों को समझा, अब बात करते हैं राजस्थान की झीलों की। झीलें दो बड़ी श्रेणियों में बाँटी जाती हैं — खारे पानी की और मीठे पानी की। इन दोनों के बनने का कारण, स्थान और उपयोग बिल्कुल अलग-अलग हैं।
🧂 खारे पानी की झीलें
- कारण: टेथिस सागर के अवशेष (प्राचीन समुद्र का बचा हुआ खारा पानी)
- सर्वाधिक: डीडवाना-कुचामन एवं नागौर क्षेत्र में
- उत्पत्ति प्रक्रिया: केशिकात्व (Capillary Action) प्रक्रिया द्वारा — यानी ज़मीन के अंदर की नमी केशिका नलियों जैसे महीन छिद्रों से ऊपर खिंचकर सतह पर आती है और वाष्पित होकर नमक छोड़ जाती है
- स्थिति: मुख्यतः उत्तर-पश्चिम राजस्थान में
- कारण चट्टान: माईकाशिष्ट (Mica-schist) चट्टानें झीलों के नीचे पाई जाती हैं
💧 मीठे पानी की झीलें
- कारण: वर्षा जल एवं नदी जल पर आधारित
- सर्वाधिक: उदयपुर क्षेत्र में (इसीलिए इसे 'झीलों की नगरी' कहा जाता है)
- स्थिति: मुख्यतः अरावली पर्वतीय क्षेत्र में अधिक पाई जाती हैं
8खारे पानी की झीलें (Salt Water Lakes)
8.1 प्रमुख खारे पानी की झीलों की सूची
| झील | जिला | विशेषता |
|---|
| सांभर झील | जयपुर | राजस्थान एवं भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील |
| पचपदरा झील | बालोतरा | सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का नमक (NaCl — 98%) |
| डीडवाना झील | डीडवाना-कुचामन | निम्न श्रेणी का नमक — सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) |
| रेवासा झील | सीकर | खारे पानी की झील |
| काछौर झील | सीकर | खारे पानी की झील |
| लूणकरणसर झील | बीकानेर | यहाँ नगण्य मात्रा में नमक बनता है |
| कुचामन झील | डीडवाना-कुचामन | खारे पानी की झील |
| फलौदी झील | फलौदी | खारे पानी की झील |
| नावां झील | डीडवाना-कुचामन | खारे पानी की झील |
| कावोद/काणोद झील | जैसलमेर | खारे पानी की झील |
| डेगाना झील | नागौर | खारे पानी की झील |
| सुजानगढ़ झील | चूरू | खारे पानी की झील |
| तालछापर झील | चूरू | खारे पानी की झील; यह तालछापर पक्षी अभयारण्य का हिस्सा है |
8.2 सांभर झील (Sambhar Lake) — जयपुर
| विवरण | जानकारी |
|---|
| स्थिति | जयपुर (फुलेरा तहसील) |
| निर्माता | वासुदेव चौहान (बिजौलिया शिलालेख के अनुसार) |
| रैंकिंग | राजस्थान की सबसे बड़ी एवं भारत की तीसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील (चिल्का प्रथम, पुलिकट द्वितीय, सांभर तृतीय); साथ ही यह भारत की सबसे बड़ी अन्तः स्थलीय (Inland) खारे पानी की झील भी है |
| नमक उत्पादन | भारत के कुल नमक उत्पादन का 8.7% एवं राजस्थान के कुल नमक उत्पादन का 80-90% यहीं से आता है |
| नदियाँ | मेंथा (सर्वाधिक लवणता लाने वाली) | खारी | रूपनगढ़ | तुरतमति | खंडेला |
| संचालन | संयुक्त उपक्रम — हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड/HSL (60% हिस्सेदारी, केंद्र सरकार) + सांभर साल्ट लिमिटेड/SSL (40% हिस्सेदारी, राज्य सरकार) |
| रामसर साइट | वर्ष 1990 में रामसर सूची में शामिल हुई (भारत की दूसरी रामसर साइट); यहाँ कुरंजा एवं राजहंस (फ्लेमिंगो) जैसे संरक्षित पक्षी आते हैं |
| नमक का नाम | सांभर से उत्पादित नमक को 'क्यार' कहा जाता है |
महत्वपूर्ण घटनाएँ: वर्ष 2019 में एवियन बोटुलिज्म (एक जीवाणु जनित बीमारी) से सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षियों की मृत्यु हो गई थी — यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी खबर बनी थी। इसके बाद 8 अक्टूबर 2021 को 'सांभर लेक मैनेजमेंट एजेंसी' का गठन किया गया, जो पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत काम करती है।
8.3 पचपदरा झील (Pachpadra Lake) — बालोतरा
| विवरण | जानकारी |
|---|
| स्थिति | बालोतरा (लूनी बेसिन क्षेत्र में) |
| विशेषता | भारत एवं राजस्थान की सबसे खारी झील; सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का नमक उत्पादक स्थल |
| NaCl मात्रा | 98% सोडियम क्लोराइड — यानी सबसे शुद्ध नमक |
| खारवाल जाति | एक पारंपरिक जाति जो पचपदरा में पुराने तरीकों से नमक उत्पादन करती है |
| मोरली | एक विशेष प्रकार की झाड़ी, जिसका उपयोग नमक बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है |
| कोसिया | ज़मीन से पानी के रिसाव के बाद बनने वाला नमक, जो छोटे-छोटे कुंड/कुओं में इकट्ठा होता है |
8.4 डीडवाना झील (Didwana Lake) — डीडवाना-कुचामन
| विवरण | जानकारी |
|---|
| स्थिति | डीडवाना-कुचामन (पूर्व में नागौर जिले का हिस्सा) |
| लवण प्रकार | यहाँ सोडियम क्लोराइड (NaCl) की जगह सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) पाया जाता है, जो खाने योग्य नहीं है |
| संस्थान | राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स — वर्ष 1964 में स्थापित |
| Na₂SO₄ का उपयोग | काँच उद्योग, कागज उद्योग एवं चमड़ा उद्योग में उपयोगी |
| उपनाम | खल्दा झील / प्लाया झील भी कहते हैं |
8.5 अन्य खारे पानी की झीलें एवं संबंधित शब्दावली
- लूणकरणसर (बीकानेर) — यहाँ नगण्य मात्रा में नमक बनता है; यह बीकानेर से उत्तर-पूर्व दिशा में लगभग 80 किमी दूर स्थित है
- तालछापर (चूरू) — तालछापर पक्षी अभयारण्य का हिस्सा है; समय के साथ इसका क्षेत्रफल संकुचित (कम) होता जा रहा है
💡 प्लाया, बालसन एवं रन में क्या अंतर है?
प्लाया झील जैसलमेर जैसे बालुकास्तूप-मुक्त क्षेत्र में वर्षा ऋतु में अस्थायी रूप से बनती है — यानी सिर्फ बरसात में पानी भरता है, बाकी समय सूखी रहती है। जब यही प्लाया सूख जाती है, तो जो सपाट मैदान बचता है उसे 'बालसन' कहते हैं। वहीं आकार के हिसाब से — छोटे गड्ढों/खड्डों में बनने वाली झील को 'रन/टाट/ढाढ़' कहा जाता है, जबकि बड़े गड्ढों में बनने वाली झील को 'प्लाया' कहते हैं। यानी रन और प्लाया में मूल अंतर सिर्फ आकार (गड्ढे का आकार) का है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान की प्रमुख खारे पानी की झीलों का स्थान (सांभर, पचपदरा, डीडवाना एवं अन्य)
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9मीठे पानी की झीलें (Fresh Water Lakes)
9.1 प्रमुख मीठे पानी की झीलों की सूची
| झील | जिला | विशेषता |
|---|
| जयसमंद (ढेबर झील) | सलूंबर (उदयपुर) | मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील |
| पिछोला झील | उदयपुर | जगमंदिर, जगनिवास, नटनी का चबूतरा यहीं स्थित हैं |
| फतेहसागर झील | उदयपुर | देवाली तालाब / ड्यूक ऑफ कनॉट डैम भी कहलाती है |
| रंगसागर/अमरकूट | उदयपुर | पिछोला एवं स्वरूप सागर से जुड़ी हुई |
| बड़ी झील/जाना सागर | उदयपुर (बड़ी गाँव) | महासीर मछली के लिए प्रसिद्ध; कंजर्वेशन रिजर्व |
| उदयसागर झील | उदयपुर | आयड़/बेड़च नदी पर बनी |
| दूधतलाई | उदयपुर | पिछोला झील के निकट स्थित |
| नक्की झील | माउंट आबू, सिरोही | राजस्थान की सर्वाधिक ऊँची, गहरी एवं ठंडी झील; एक क्रेटर झील |
| राजसमंद झील | राजसमंद | राजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील; राजप्रशस्ति यहीं है |
| पुष्कर झील | पुष्कर, अजमेर | प्राकृतिक मीठे पानी की सबसे बड़ी झील; पाँचवाँ तीर्थ |
| आनासागर झील | अजमेर | इलेक्ट्रिक क्रूज (अक्टूबर 2024 से); बांडी नदी पर बनी |
| फॉयसागर झील | अजमेर | राजस्थान की दूसरी अकाल राहत झील (1891-92) |
| मानसागर झील | जयपुर | राजस्थान की सर्वाधिक प्रदूषित झील; जलमहल यहीं स्थित है |
| माव्ठा झील | जयपुर | आमेर दुर्ग के निकट; प्राकृतिक झील |
| सिलीसेढ़ झील | अलवर (सरिस्का) | राजस्थान का 'नन्दनकानन' कहलाती है |
| कायलाना झील | जोधपुर | IGNP (इंदिरा गांधी नहर परियोजना) से जुड़ने वाली पहली झील |
| कोलायत झील | बीकानेर | कपिल मुनि से जुड़ी; लगभग 82 घाट |
| गजनेर झील | बीकानेर | 'पानी का शुद्ध दर्पण' कही जाती है |
| रामगढ़ झील | बारां | उल्कापिंड/क्रेटर झील; यूनेस्को भू-विरासत सूची में 2018 से शामिल |
| नवलसागर झील | बूंदी | वरुण देवता का मन्दिर यहीं स्थित है |
| सरदार समंद झील | पाली | इसे 'राजस्थान की जीवन रेखा' (Life Line of Rajasthan) कहा जाता है |
| जैत सागर झील | बूंदी | एक प्रमुख पर्यटन स्थल |
| बालसमंद झील | जोधपुर | — |
| किशोर सागर (तालाब) | कोटा | छत्तर विलास महल यहीं स्थित है |
| गैब सागर/एडवर्ड सागर | डूंगरपुर | गोवर्धननाथ मन्दिर यहीं स्थित है |
9.2 जयसमंद/ढेबर झील (Jaisamand Lake) — सलूंबर (उदयपुर)
| विवरण | जानकारी |
|---|
| स्थिति | सलूंबर (ढेबर नाल क्षेत्र) — पहले यह उदयपुर जिले का हिस्सा था |
| निर्माता | महाराणा जयसिंह (1685-1691 ई.) |
| नदी | गोमती नदी (इसके अतिरिक्त गोमती, झावरी, रूपारेल, बागर नदियाँ भी इसमें मिलती हैं) |
| रैंकिंग | मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील — राजस्थान में प्रथम एवं भारत में द्वितीय (भारत में प्रथम स्थान पर गोविन्द वल्लभ पंत सागर/रिहन्द बाँध है) |
| टापू | कुल 7 टापू (द्वीप) हैं — सबसे बड़ा 'बाबा का मगरा' और सबसे छोटा 'प्यारी' |
| जनजाति | भील-मीणा जनजाति इस क्षेत्र में निवास करती है |
| नहरें | श्यामपुरा नहर एवं भाट नहर (1950 में निर्मित) |
| मन्दिर | नर्मदेश्वर महादेव मन्दिर + हाथियों की प्रतिमाएँ |
| विशेषता | जलचरों की बस्ती — यहाँ जलीय जैव विविधता प्रचुर मात्रा में पाई जाती है |
9.3 पिछोला झील (Pichola Lake) — उदयपुर
| विवरण | जानकारी |
|---|
| स्थिति | उदयपुर |
| निर्माता | बंजारे (छीतरमल) — महाराणा लाखा के शासनकाल में; निर्माणकाल 1382 ई. से 1421 ई. (14वीं शताब्दी के अंत में) |
| नदियाँ | सीसारमा + बूझड़ा |
| ऐतिहासिक धरोहर | जगमंदिर (करणसिंह 1620 + जगतसिंह-I 1651), जगनिवास (जगतसिंह-II 1746), नटनी का चबूतरा, उदयपुर सिटी पैलेस |
| होटल | जगमंदिर + जगनिवास मिलकर होटल लेक पैलेस बनाते हैं |
| नाव | राजस्थान की प्रथम सौर ऊर्जा नाव एवं प्रथम इलेक्ट्रिक नाव यहीं चलाई गई |
| जुड़ाव | स्वरूप सागर चैनल के माध्यम से अतिरिक्त जल फतेहसागर झील में जाता है |
| इतिहास | मुगल सम्राट शाहजहाँ ने विद्रोह के समय (शहज़ादे के रूप में) इसी झील में शरण ली थी |
9.4 फतेहसागर झील (Fateh Sagar Lake) — उदयपुर
| विवरण | जानकारी |
|---|
| उपनाम | देवाली तालाब / ड्यूक ऑफ कनॉट डैम |
| निर्माता | महाराणा जयसिंह (1688 ई.); पुनर्निर्माण महाराणा फतेहसिंह द्वारा (1888-89) |
| नदियाँ | सीसारमा + बूझड़ा |
| नेहरु उद्यान | झील के मध्य स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल |
| वेधशाला | सौर वेधशाला, टेलीस्कोप एवं वर्चुअल फिरा एक्वेरियम यहीं स्थित हैं |
| जलापूर्ति | पानी की कमी होने पर मदार बाँध (बेड़च नदी) से जलापूर्ति की जाती है |
| पहाड़ी | मोती मगरी पहाड़ी झील के निकट स्थित है |
| जुड़ाव | स्वरूप सागर, पिछोला एवं फतेहसागर को आपस में जोड़ता है |
| आधारशिला | ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा रखी गई थी |
9.5 राजसमंद झील (Rajsamand Lake) — राजसमंद
| विवरण | जानकारी |
|---|
| निर्माता | महाराणा राजसिंह (1662-1676 ई.); RPSC ने आधिकारिक निर्माण वर्ष 1680 ई. स्वीकार किया है |
| नदियाँ | गोमती + ताली + केलवा |
| विशेषता | राजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील (Famine Relief Lake) — यानी अकाल के समय रोज़गार देने के लिए इसका निर्माण करवाया गया था |
| श्रमिक योगदान | इसके निर्माण में लगभग 60,000 लोगों ने काम किया |
| राजप्रशस्ति | 25 काले पत्थर की शिलाओं पर संस्कृत में लिखा मेवाड़ का इतिहास; लेखक: रणछोड़ भट्ट तैलंग; यह विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति मानी जाती है |
| मन्दिर | घेवर माता मन्दिर एवं द्वारकाधीश मन्दिर |
| बाँध | नौ चौकी पाल — यहाँ '9' अंक का अद्भुत प्रयोग किया गया है (लम्बाई 999 फीट, चौड़ाई 99 फीट) |
9.6 पुष्कर झील (Pushkar Lake) — पुष्कर, अजमेर
| विवरण | जानकारी |
|---|
| उपनाम | पाँचवाँ तीर्थ | तीर्थराज | तीर्थों का मामा | कोंकण तीर्थ | 52 घाट झील | राजस्थान की सबसे पवित्र किन्तु सर्वाधिक प्रदूषित झीलों में से एक |
| प्रकार | प्राकृतिक पवित्र झील; क्रेटर/ज्वालामुखी झील (काल्डेरा झील); मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील |
| आकार | अर्धचन्द्राकार; कुल 52 घाट हैं |
| मन्दिर | ब्रह्मा मन्दिर झील के किनारे स्थित है — यह भारत के गिने-चुने ब्रह्मा मंदिरों में से एक है |
| अस्थि विसर्जन | महात्मा गाँधी, अटल बिहारी वाजपेयी, बाल ठाकरे, किरोड़ी सिंह भैंसला जैसी हस्तियों की अस्थियाँ यहाँ विसर्जित की गई हैं |
| मेला | कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान का प्रसिद्ध 'रंगीला मेला' एवं दीपदान का आयोजन होता है |
| घाट | जनाना घाट — 1911 में महारानी मेरी (क्वीन मेरी) के दौरे के दौरान इसे 'क्वीन मेरी जनाना घाट' नाम दिया गया था; बाद में महात्मा गाँधी की अस्थियाँ यहीं विसर्जित हुईं तो नाम बदलकर 'गाँधी घाट' कर दिया गया |
| सफाई अभियान | वर्ष 1997-98 में कनाडा के सहयोग से झील की सफाई की गई थी |
9.7 आनासागर झील (Ana Sagar Lake) — अजमेर
| विवरण | जानकारी |
|---|
| निर्माता | अर्णोराज चौहान (पृथ्वीराज चौहान के पितामह, जिन्हें 'आनाजी चौहान' भी कहा जाता है); निर्माणकाल 1135-1137 ई. |
| नदी | बांडी नदी (लूनी की सहायक नदी, जिसका उद्गम हेमावास, पाली से होता है) |
| विशेष | देश की प्रथम इलेक्ट्रिक क्रूज नाव अक्टूबर 2024 में यहीं संचालित हुई |
| मुगल धरोहर | चश्मा-ए-नूर (जहाँगीर द्वारा, शिकार के लिए बनवाया गया), दौलतबाग/सुभाष उद्यान (जहाँगीर द्वारा), बारहदरी (शाहजहाँ द्वारा — 5 संगमरमर के मंडप) |
| निर्माण का कारण | तुर्क सेना द्वारा किए गए संहार के बाद खून से रंगी धरती को साफ करने हेतु चन्द्रा नदी के जल को रोककर इसका निर्माण किया गया था |
9.8 नक्की झील (Nakki Lake) — माउंट आबू, सिरोही
| विवरण | जानकारी |
|---|
| प्रकार | क्रेटर झील / ज्वालामुखी झील |
| ऊँचाई व गहराई | ऊँचाई 1200 मीटर; गहराई 35 मीटर |
| रैंकिंग | राजस्थान की सबसे ऊँची झील, सबसे गहरी झील, सबसे ठण्डी झील तथा एकमात्र ऐसी झील जो किसी हिल स्टेशन (माउंट आबू) पर स्थित है |
| पर्यटन | यहाँ स्थित Sunset Point एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है |
| विशेष चट्टानें | टॉड रॉक (मेंढ़क के आकार की), नन रॉक (घूँघट वाली स्त्री के आकार की), नन्दी रॉक, हॉर्न रॉक |
| परम्परा | गरासिया जनजाति द्वारा यहाँ अस्थि विसर्जन की परम्परा है |
| किंवदंती | मान्यता है कि इसे देवताओं ने अपने नाखूनों (नख) से खोदकर बनाया था — इसी से इसका नाम 'नक्की' पड़ा |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — उदयपुर की झीलों का समूह: पिछोला, फतेहसागर, स्वरूप सागर, उदयसागर, रंगसागर व बड़ी झील की आपसी स्थिति
9.9 अन्य महत्वपूर्ण मीठे पानी की झीलें
| झील | जिला | मुख्य तथ्य |
|---|
| उदयसागर झील | उदयपुर | निर्माता महाराणा उदयसिंह (1559-1564 ई.); बेड़/आयड़ नदी इसमें गिरने के बाद 'बेड़च' कहलाती है |
| रंगसागर/अमरकूट | उदयपुर | निर्माता अमरसिंह बड़वा; पिछोला एवं स्वरूप सागर से जुड़ी हुई; नदियाँ — सीसारमा + बूझड़ा |
| बड़ी झील/जाना सागर | उदयपुर | निर्माता महाराजा राजसिंह (1652-1680); बाहुबली पहाड़ी के निकट; महासीर मछली प्रजाति; कंजर्वेशन रिजर्व में शामिल |
| मानसागर झील | जयपुर | निर्माता मानसिंह (1610 ई.); राजस्थान की सर्वाधिक प्रदूषित झील; प्रसिद्ध जलमहल इसी में स्थित है; द्रव्यवती नदी (अमानीशाह नाला) यहीं से निकलती है |
| सिलीसेढ़ झील | अलवर (सरिस्का) | निर्माता महाराजा विनयसिंह; रूपारेल की सहायक नदी पर निर्मित; 'राजस्थान का नन्दनकानन' कहलाती है; स्वर्णिम त्रिकोण (जयपुर-दिल्ली-आगरा) पर स्थित; मत्स्यपालन एवं पर्यटन हेतु उपयोगी |
| कायलाना झील (सर प्रताप सागर) | जोधपुर | निर्माता सर प्रताप सिंह (1872); राजस्थान की पहली झील जो IGNP से जुड़ी है; जोधपुर की पेयजल आपूर्ति में उपयोगी; निकट माचिया सफारी (मृग उद्यान) है |
| कोलायत झील | बीकानेर | निर्माता कपिल मुनि (इसे 'कपिल सरोवर' भी कहते हैं); लगभग 52 घाट; कार्तिक पूर्णिमा पर मेला व दीपदान; विशेष तथ्य — चारण जाति परंपरागत रूप से कोलायत झील में नहीं जाती (करणी माता के पुत्र की मृत्यु से जुड़ी मान्यता के कारण) |
| गजनेर झील | बीकानेर | निर्माता महाराजा गंगासिंह; वर्षा जल पर आधारित; 'पानी का शुद्ध दर्पण' कहलाती है |
| रामगढ़ झील | बारां | क्रेटर/उल्कापिंड झील; घोड़े की नाल जैसी पहाड़ियों से घिरी; वर्ष 2022 में भू-विरासत स्थल (Geo Heritage Site) सूची में शामिल |
| नवलसागर/नवलखा झील | बूंदी | निर्माता उम्मेद सिंह; तारागढ़ दुर्ग (बूंदी) के निकट; झील के मध्य वरुण देवता का मन्दिर स्थित है, जो आधा जल में डूबा रहता है; निकट सुन्दर घाट है |
| फॉयसागर झील | अजमेर | निर्माता इंजीनियर फॉय (1891-92); बांडी नदी पर; राजस्थान की दूसरी अकाल राहत झील (प्रथम राजसमंद, 1662) |
| माव्ठा झील | जयपुर | प्राकृतिक मीठे पानी की झील; वर्षा जल पर आधारित; आमेर दुर्ग के निकट स्थित |
💡 उदयपुर में झीलों को जोड़ने वाले सेतु (Connections)
उदयपुर की झीलें एक-दूसरे से चैनलों के ज़रिए जुड़ी हुई हैं, जैसे किसी शहर की सड़कें आपस में जुड़ी होती हैं — स्वरूप सागर पिछोला व फतेहसागर को जोड़ता है; दूध तलाई अमरकुण्ड व कुम्हारिया तालाब को जोड़ती है; गोवर्धन सागर पिछोला से जुड़ा है; पिछोला कुम्हारिया तालाब से जुड़ी है; अमरकुण्ड रंग सागर से जुड़ा है; और रंग सागर स्वरूप सागर से जुड़ा है। इसी वजह से उदयपुर को 'झीलों की नगरी' कहा जाता है — यहाँ की झीलें अलग-थलग नहीं, बल्कि एक बड़े जल-नेटवर्क का हिस्सा हैं।
10राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP) एवं झीलों का महत्व
10.1 राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना — NLCP
| विवरण | जानकारी |
|---|
| शुरुआत | जून 2001 में शुरू हुई; बाद में 4 अप्रैल 2017 को इसे पुनर्गठित किया गया |
| वित्तीय सहयोग | केंद्र सरकार : राज्य सरकार = 60 : 40 के अनुपात में |
| मंत्रालय | वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार |
| राजस्थान की शामिल झीलें (6) | मानसागर (जयपुर), पुष्कर (अजमेर), आनासागर (अजमेर), पिछोला (उदयपुर), फतेहसागर (उदयपुर), नक्की झील (सिरोही) |
| शामिल नहीं | राजसमंद, कोलायत, स्वरूप सागर, बजाज सागर |
NLCP की 6 झीलें याद रखने की तरकीब: ट्रिक: 'मा-पु-आ-पि-फ-न' → मानसागर, पुष्कर, आनासागर, पिछोला, फतेहसागर, नक्की। ध्यान रहे — स्वरूप सागर और राजसमंद जैसी प्रसिद्ध झीलें भी इस योजना में शामिल नहीं हैं, यह परीक्षा में अक्सर उल्टा पूछा जाता है।
10.2 झीलों का महत्व (Importance of Lakes)
| महत्व का प्रकार | प्रमुख झीलें |
|---|
| पर्यटन | जयसमंद, नक्की, पिछोला, आनासागर |
| सिंचाई | जयसमंद, राजसमंद |
| नमक उत्पादन | सांभर, पचपदरा, डीडवाना |
| जैव विविधता | जयसमंद, मोती झील (भरतपुर की जीवन रेखा), सांभर (फ्लेमिंगो पक्षी हेतु प्रसिद्ध) |
| पेयजल आपूर्ति | कायलाना, मानसागर, पिछोला |
| धार्मिक महत्व | पुष्कर, कोलायत, नक्की |
| भू-जल स्तर में सुधार | राजस्थान की लगभग सभी झीलें |
| मत्स्य पालन | जयसमंद, सिलीसेढ़, बड़ी झील |
| जल संरक्षण | राजस्थान की लगभग सभी झीलें |
11विशेष तथ्य — नलकूप, कुएँ एवं अन्य जल स्रोत
- चाँदन नलकूप (जैसलमेर) — इसे 'थार का घड़ा' कहा जाता है
- बाटाडू कुआँ (बाड़मेर) — इसे 'रेगिस्तान का जलमहल' कहते हैं, यह संगमरमर से निर्मित है
- जलमहल (जयपुर) — मानसागर झील में स्थित; निर्माता सवाई जयसिंह; अश्वमेध यज्ञ के दौरान पंडितों के ठहरने हेतु बनवाया गया था
- गढ़सीसर झील (जैसलमेर) — हाल ही में इसे IGNP (इंदिरा गांधी नहर परियोजना) से जोड़ा गया है
- सरदार समंद झील (पाली)
- आनन्द सागर (बाई तालाव) — बाँसवाड़ा; इसका निर्माण महारावल जगमाल की रानी लाछ कुँवरी ने करवाया था
- किशोर सागर / छत्तर विलास (कोटा)
- गैब सागर / एडवर्ड सागर (डूंगरपुर) — बादल महल एवं गोवर्धननाथ मन्दिर यहीं स्थित हैं
- मोती झील (भरतपुर) — यहाँ नीलहरित शैवाल से नाइट्रोजन युक्त खाद बनती है; इसे 'भरतपुर की जीवन रेखा' कहा जाता है
- तालाब-ए-शाही — यह नाम धौलपुर एवं बारां दोनों जगह प्रयोग होता है, इसलिए दोनों को अलग-अलग याद रखें
- बुझ झील (जैसलमेर) — रूपसी गाँव के पास स्थित; इसमें काकनी नदी का जल भरता है
- मानसरोवर झील / काडला तालाब (झालावाड़)
- तलवाड़ा झील (हनुमानगढ़) — यह घग्घर नदी के राजस्थान में प्रवेश स्थल पर स्थित है
- रामगढ़ झील (धौलपुर) — इसे 'तालाबशाही' भी कहा जाता है; ध्यान रहे यह बारां वाली रामगढ़ (क्रेटर) झील से अलग है
नाम की समानता से भ्रमित न हों: नवलखा तालाब (बारां), नवलखा बावड़ी (डूंगरपुर) एवं नवलखा दुर्ग (झालावाड़) — इन तीनों को नवलसागर झील (बूंदी) से बिल्कुल अलग पहचानें। इसी तरह रामगढ़ झील नाम से बारां (क्रेटर झील) और धौलपुर (तालाबशाही) दोनों जगह जल-स्रोत मौजूद हैं — प्रश्न में जिले का नाम ध्यान से पढ़ें।
12नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)
इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम घटनाओं व आँकड़ों को यहाँ शामिल किया गया है।
💡 PKC-ERCP परियोजना — संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) अब 'संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल-पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (PKC-ERCP)' के रूप में मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य है — बरसात के मौसम में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की चम्बल एवं इसकी सहायक नदियों (कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध) से अतिरिक्त पानी इकट्ठा करके राज्य के दक्षिण-पूर्वी जिलों में पीने व सिंचाई हेतु उपलब्ध कराना। इस परियोजना से राजस्थान के 13 जिलों को पेयजल तथा 26 बड़ी-मझोली परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2.8 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा। पहले चरण (जिसकी समय-सीमा वर्ष 2028 रखी गई है) में डूंगरी बाँध तथा कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध, मेज एवं बनास नदियों पर 5 बैराजों का निर्माण शामिल है। यह भविष्य में बीसलपुर बाँध से भी जोड़ी जाएगी।
💡 सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मृत्यु — पुनरावृत्ति (अक्टूबर 2025)
अक्टूबर 2025 में सांभर झील के नावां (डीडवाना-कुचामन) क्षेत्र में एक बार फिर प्रवासी पक्षियों के मृत पाए जाने की घटनाएँ सामने आईं। स्थानीय पशु चिकित्सकों ने इसका कारण एवियन बोटुलिज्म (वही बीमारी जिसने 2019 में हजारों पक्षियों की जान ली थी) बताया। प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि नावां क्षेत्र की नमक रिफाइनरियों से निकलने वाला अपशिष्ट खुले में झील किनारे डाला जा रहा है, जिससे रासायनिक प्रदूषण पानी में मिल रहा है। चिंताजनक बात यह भी है कि खनन एवं अन्य गतिविधियों के कारण सांभर झील का लगभग 30% क्षेत्रफल पहले ही समाप्त हो चुका है — यह झील के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक गंभीर चुनौती है।
💡 राजस्थान में नए रामसर स्थल (Ramsar Sites) — जून 2025
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) 2025 पर राजस्थान के खीचन वेटलैंड (फलौदी) एवं मेनार वेटलैंड (उदयपुर) को रामसर स्थल घोषित किया गया। खीचन अपने यहाँ शीतकाल में आने वाले डेमोइसेल क्रेन (कुरजां) पक्षियों की विशाल संख्या तथा सामुदायिक संरक्षण मॉडल के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जबकि मेनार एक मीठे पानी का मानसूनी वेटलैंड है (ब्रह्म, ढांढ एवं खेरोड़ा तालाबों से मिलकर बना, कुल क्षेत्रफल लगभग 463.4 हेक्टेयर)। इसके अतिरिक्त सिलीसेढ़ झील (अलवर) को भी हाल में रामसर स्थल घोषित किया गया है। इस प्रकार अब राजस्थान में कुल 5 रामसर स्थल हो गए हैं — केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), सांभर झील (जयपुर), सिलीसेढ़ झील (अलवर), खीचन वेटलैंड (फलौदी) तथा मेनार वेटलैंड (उदयपुर)।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के रामसर स्थल एवं PKC-ERCP परियोजना क्षेत्र (नए बाँध/बैराज स्थान चिह्नित करने हेतु)
13त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
13.1 नदियों से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|
| लूनी नदी का उद्गम कहाँ से होता है? | नाग हिल्स, अजमेर |
| बांडी नदी को 'राजस्थान की रासायनिक नदी' क्यों कहते हैं? | रंगाई-छपाई उद्योग के प्रदूषण के कारण (पाली) |
| माही किस रेखा को दो बार काटती है? | कर्क रेखा (उल्टे U आकार में) |
| 'आदिवासियों का कुंभ' कहाँ लगता है? | बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) |
| राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध (भराव क्षमता) कौनसा है? | राणा प्रताप सागर |
| राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध कौनसा है? | जाखम (81 मीटर, प्रतापगढ़) |
| चूलिया जलप्रपात किस नदी पर है? | चम्बल |
| कांतली नदी का अपवाह क्षेत्र किस नाम से जाना जाता है? | तोरावाटी |
| साबरमती पर रिवर फ्रंट कहाँ बना? | अहमदाबाद |
| पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी कौनसी है? | बनास (512 किमी) |
| घग्घर नदी को पाकिस्तान में क्या कहते हैं? | हकरा |
| राजस्थान की सबसे छोटी नदी कौनसी है? | कांकनी (27 किमी, जैसलमेर) |
| सांभर झील में सर्वाधिक लवणता जमा करने वाली नदी कौनसी है? | मेंथा/मेन्ढा नदी |
| बीसलपुर बाँध किस नदी पर है? | बनास (टोंक) |
13.2 झीलों से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|
| राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम (मानव निर्मित) झील कौनसी है? | जयसमंद (ढेबर झील) |
| ढेबर झील किस नाम से भी जानी जाती है? | जयसमंद |
| 'नटनी का चबूतरा' किस झील पर स्थित है? | पिछोला झील |
| पिछोला झील का निर्माण किस शासक के काल में हुआ? | महाराणा लाखा |
| राजस्थान की पवित्र झील कौनसी मानी जाती है? | पुष्कर झील |
| पुष्कर झील कितने घाटों से घिरी है? | 52 घाट |
| पुष्कर झील की सफाई में किस देश का सहयोग रहा? | कनाडा (1997-98) |
| राजसमंद झील के तट पर कितने संगमरमर शिलालेख हैं? | 25 शिलालेख (राजप्रशस्ति) |
| राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी झील कौनसी है? | सांभर झील |
| सांभर झील रामसर सूची में कब शामिल हुई? | वर्ष 1990 |
| पचपदरा झील के नमक में NaCl का प्रतिशत कितना है? | 98% |
| नक्की झील (टॉड रॉक, नन रॉक के लिए प्रसिद्ध) किस जिले में है? | सिरोही (माउंट आबू) |
| NLCP के अंतर्गत कौनसी प्रमुख झील शामिल नहीं है? | स्वरूप सागर (राजसमंद भी नहीं) |
| कायलाना झील का निर्माण किसने करवाया? | सर प्रताप सिंह |
| राजस्थान के किस जिले में प्लाया झील पाई जाती है? | जैसलमेर |
| आनासागर झील का निर्माण किसने करवाया? | आनाजी चौहान (अर्णोराज चौहान) |
| 'खारवाल' जाति किस झील से नमक उत्पादन करती है? | पचपदरा |
| नवलखा सागर किस जिले में है? | बूंदी |
| सिलीसेढ़ झील किस जिले में स्थित है? | अलवर |
13.3 महत्त्वपूर्ण संख्याएँ (Number Facts) — एक नज़र में
| संख्या | अर्थ |
|---|
| 15 बेसिन, 58 उप-बेसिन | राजस्थान के कुल नदी बेसिन एवं उप-बेसिन |
| 16-17% : 60% : 23-24% | अरब सागरीय : आन्तरिक प्रवाह : बंगाल की खाड़ी तंत्र का अनुपात |
| 1.16% एवं 1.72% | देश के कुल सतही जल एवं भूमिगत जल में राजस्थान का योगदान |
| 1051 किमी | चम्बल — राजस्थान से संबंधित सबसे लम्बी नदी (कुल लम्बाई) |
| 512 किमी | बनास — पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी |
| 27 किमी | कांकनी — राजस्थान की सबसे छोटी नदी |
| 18 मीटर | चूलिया जलप्रपात — राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात |
| 80-90% | राजस्थान के कुल नमक उत्पादन में सांभर झील का योगदान |
| 98% | पचपदरा झील के नमक में NaCl की शुद्धता |
| 5 रामसर स्थल (2025-26) | केवलादेव, सांभर, सिलीसेढ़, खीचन, मेनार |
🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलविभाजक रेखा है, जो अपवाह तंत्र को अरब सागरीय एवं बंगाल की खाड़ी तंत्र में बाँटती है 2. लूनी नदी (495 किमी) मरुस्थल की सबसे लम्बी नदी है, जिसका उद्गम अजमेर की नाग हिल्स से होता है और अंत कच्छ के रन में होता है 3. माही विश्व की एकमात्र नदी है जो कर्क रेखा को दो बार, उल्टे U आकार में काटती है 4. चम्बल (1051 किमी) राजस्थान से जुड़ी सबसे लम्बी एवं सबसे बड़ी नदी है, जिसका सबसे बड़ा बेसिन भी है 5. बनास (512 किमी) पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है, जो एक अध्यारोपित (Superimposed) नदी है 6. घग्घर हिमालय से आने वाली एकमात्र नदी है, जिसे प्राचीन सरस्वती नदी का अवशेष माना जाता है 7. कांकनी (27 किमी) राजस्थान की सबसे छोटी नदी है, जो जैसलमेर में बुझ झील बनाती है 8. सांभर झील भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील है, जो राज्य के 80-90% नमक उत्पादन का स्रोत है 9. पचपदरा झील का नमक (98% NaCl) राजस्थान का सबसे शुद्ध व सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता का नमक माना जाता है 10. जयसमंद (ढेबर) झील मीठे पानी की राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है 11. पुष्कर झील प्राकृतिक मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है और एक क्रेटर/काल्डेरा झील भी है 12. नक्की झील राजस्थान की सबसे ऊँची, सबसे गहरी एवं सबसे ठंडी झील है, जो एकमात्र हिल स्टेशन (माउंट आबू) पर स्थित है 13. राजसमंद झील राजस्थान की प्रथम अकाल राहत झील है, जिसके किनारे विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति 'राजप्रशस्ति' अंकित है 14. NLCP (राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना) में राजस्थान की 6 झीलें शामिल हैं — मानसागर, पुष्कर, आनासागर, पिछोला, फतेहसागर, नक्की 15. बीसलपुर बाँध (बनास नदी, टोंक) राजस्थान का सबसे बड़ा कंक्रीट बाँध एवं सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है 16. 2025-26 में राजस्थान में कुल 5 रामसर स्थल हो गए हैं — केवलादेव, सांभर, सिलीसेढ़, खीचन एवं मेनार
📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝
Q1. राजस्थान के अपवाह तंत्र को कितने भागों में बाँटा जाता है और उनके नाम एवं प्रतिशत बताइए। Q2. लूनी नदी को 'मरुस्थल की गंगा' एवं 'आधी मीठी-आधी खारी' क्यों कहा जाता है? विस्तार से समझाइए। Q3. माही नदी की कर्क रेखा को दो बार काटने वाली अनोखी विशेषता का वर्णन कीजिए। Q4. चम्बल नदी को राजस्थान की सबसे बड़ी नदी क्यों माना जाता है? इसकी 5 प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। Q5. घग्घर नदी को 'मृत नदी' एवं 'सरस्वती' क्यों कहा जाता है? Q6. सांभर झील एवं पचपदरा झील के नमक उत्पादन की तुलना कीजिए। Q7. राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP) के अंतर्गत राजस्थान की कौनसी झीलें शामिल हैं? Q8. अध्यारोपित नदी (Superimposed River) एवं रुण्डित नदी (Beheaded River) में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।
📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)
- राजस्थान का अपवाह तंत्र तीन भागों में बँटा है — अरब सागरीय (16-17%, लूनी-माही जैसी तेज़ बहने वाली छोटी नदियाँ), आन्तरिक प्रवाह (60%, घग्घर-कांतली जैसी नदियाँ जो समुद्र तक नहीं पहुँचतीं) एवं बंगाल की खाड़ी तंत्र (23-24%, चम्बल-बनास जैसी लम्बी, विशाल नदियाँ) — और अरावली पर्वतमाला इन सबके बीच जलविभाजक रेखा का काम करती है।
- चम्बल (1051 किमी) राजस्थान से जुड़ी सबसे लम्बी नदी है, जबकि बनास (512 किमी) पूर्ण रूप से राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी है — दोनों मिलकर राज्य के सबसे बड़े व सबसे महत्वपूर्ण नदी-तंत्र (बंगाल की खाड़ी तंत्र) का निर्माण करती हैं, जिस पर राणा प्रताप सागर, बीसलपुर व जवाहर सागर जैसे प्रमुख बाँध बने हैं।
- झीलें दो श्रेणियों में बँटी हैं — खारे पानी की (सांभर, पचपदरा, डीडवाना — टेथिस सागर के अवशेष, उत्तर-पश्चिम राजस्थान में सर्वाधिक) एवं मीठे पानी की (जयसमंद, पिछोला, फतेहसागर, राजसमंद, पुष्कर — वर्षा/नदी जल आधारित, उदयपुर क्षेत्र में सर्वाधिक, इसीलिए उदयपुर 'झीलों की नगरी' कहलाता है)।
- सांभर झील (भारत की सबसे बड़ी अंतःस्थलीय खारे पानी की झील) राज्य के 80-90% नमक उत्पादन का स्रोत है, जबकि जयसमंद (मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील) एवं पुष्कर (सबसे बड़ी प्राकृतिक मीठे पानी की झील) पर्यटन व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- 2025-26 की नवीनतम घटनाओं ने दिखाया कि राजस्थान का जल-परिदृश्य निरंतर बदल रहा है — PKC-ERCP परियोजना से भविष्य में 13 जिलों को पेयजल व सिंचाई जल मिलेगा, जबकि सांभर झील में पक्षियों की मृत्यु की पुनरावृत्ति ने संरक्षण की चुनौतियों को उजागर किया है, और खीचन, मेनार व सिलीसेढ़ को नए रामसर स्थल का दर्जा मिलने से राज्य के वेटलैंड संरक्षण को नई पहचान मिली है।
- यह अध्याय (अध्याय 2) अध्याय 1A व 1B की भौगोलिक नींव पर आधारित है — नदियों व झीलों का प्रवाह अरावली, मरुस्थल, पूर्वी मैदान व हाड़ौती पठार जैसी भौतिक संरचनाओं से ही तय होता है, और यही ज्ञान आगे के अध्यायों (जलवायु, मृदा, कृषि, सिंचाई) को समझने की नींव बनेगा।
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