🗺️ अध्याय 1/14 — राजस्थान भूगोल

स्थिति, विस्तार एवं भौतिक स्वरूप

Location, Extent & Physiography | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. राजस्थान का परिचय एवं नामकरण (Introduction & Naming)
  2. राजस्थान की भौगोलिक उत्पत्ति (Geological Origin)
  3. राजस्थान का एकीकरण (Integration of Rajasthan)
  4. राजस्थान के जिले — ऐतिहासिक विकास एवं वर्तमान स्वरूप
  5. राजस्थान की स्थिति, अक्षांश एवं देशान्तर
  6. कर्क रेखा (Tropic of Cancer)
  7. राजस्थान का विस्तार एवं क्षेत्रफल (Extent & Area)
  8. राजस्थान की आकृति एवं सीमाएँ (Shape & Boundaries)
  9. पड़ोसी राज्य एवं सीमावर्ती जिले (Neighbouring States)
  10. संभागीय व्यवस्था (Divisional System)
  11. राजस्थान के उपनाम एवं विशिष्ट तथ्य (Nicknames & Special Facts)
  12. नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)
  13. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)
  14. भौतिक प्रदेशों का वर्गीकरण (Classification of Physical Regions)
  15. भौतिक प्रदेशों की सामान्य जानकारी (Comparative Overview)
  16. उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल — थार मरुस्थल (Thar Desert)
  17. बालुका स्तूप के 9 प्रकार (McKee, 1979 का वर्गीकरण)
  18. अर्द्धशुष्क मरुस्थल / बांगड़ प्रदेश (Semi-Arid Desert / Bangad Region)
  19. मरुस्थल से संबंधित शब्दावली, प्रमुख रन एवं महत्व
  20. अरावली पर्वतमाला (Aravalli Mountain Range)
  21. अरावली की चोटियाँ, पठार, दर्रे एवं स्थानीय शब्दावली
  22. पूर्वी मैदानी प्रदेश (Eastern Plains Region)
  23. हाड़ौती पठार / दक्षिण-पूर्वी पठार (Hadoti Plateau)
  24. नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)
  25. त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

1A

राजस्थान — परिचय, स्थिति एवं विस्तार Introduction, Location & Extent of Rajasthan

🌟 क्या आप जानते हैं?

जरा कल्पना कीजिए — भारत के नक्शे में एक ऐसा राज्य है जो अकेला ही देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग दसवां हिस्सा घेरता है। इतना बड़ा कि अगर आप इसके एक छोर (धौलपुर) में सूर्योदय देख रहे हों, तो दूसरे छोर (जैसलमेर) में सूरज को उगने में अभी लगभग 36 मिनट और लगेंगे! यही है राजस्थान — भारत का सबसे बड़ा राज्य, जिसका नाम भी एक लंबी यात्रा से होकर गुजरा है — वैदिक काल में इसे 'ब्रह्मवर्त' कहा गया, रामायण-महाभारत काल में 'मरुकांतार' (दुर्गम रेगिस्तान), अंग्रेजों के समय 'राजपूताना', और अंततः 1829 में कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी किताब में पहली बार लिखित रूप में 'राजस्थान' नाम दिया। लेकिन क्या आपको पता है कि आज़ादी के समय राजस्थान एक नहीं, बल्कि 19 अलग-अलग रियासतों, 3 ठिकानों और 1 केंद्रशासित क्षेत्र में बंटा हुआ था, और इन सबको जोड़कर आज का राजस्थान बनाने में पूरे 7 चरण और 8 साल 7 महीने 14 दिन लगे? आइए, इस अध्याय में हम राजस्थान की इस पूरी पहचान — इसके नामकरण, उत्पत्ति, एकीकरण, वर्तमान जिलों-संभागों की बनावट, इसकी सटीक भौगोलिक स्थिति, विस्तार और क्षेत्रफल — को विस्तार से, सरल भाषा में समझेंगे।

1राजस्थान का परिचय एवं नामकरण (Introduction & Naming)

किसी भी राज्य को गहराई से समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उसका नाम कहाँ से आया और समय के साथ यह कैसे बदलता गया। राजस्थान का नाम भी हजारों सालों की यात्रा से गुजरकर आज के रूप में पहुँचा है। नीचे दी गई तालिका में हर काल (period) में राजस्थान को किस नाम से जाना जाता था, यह क्रमवार दिखाया गया है — जैसे किसी व्यक्ति का बचपन का नाम अलग हो और बड़े होकर नाम बदल जाए, ठीक वैसे ही राजस्थान की भी कई पहचान रही हैं।

1.1 राजस्थान के ऐतिहासिक नाम (Historical Names)

काल (Period)नाम (Name)स्रोत / विशेष (Source / Note)
वैदिक काल (ऋग्वेद)ब्रह्मवर्तऋग्वेद में उल्लेख — आर्यों की पवित्र सांस्कृतिक भूमि मानी जाती थी
रामायण कालमरुकांतारवाल्मीकि रामायण में उल्लेख — मरु (रेगिस्तान) + कांतार (दुर्गम वन/भूभाग)
महाभारत कालमरुकांतारमहाभारत ग्रंथ में भी इसी नाम का उल्लेख मिलता है
मध्यकालराजस्थान (भौगोलिक अर्थ में नहीं)मुहणौत नैणसी की ख्यात एवं राजरूपक ग्रंथ में उल्लेख, परंतु यह आज जैसा भौगोलिक नाम नहीं था
1800 ई.राजपूतानाजॉर्ज थॉमस — इस शब्द का सर्वप्रथम मौखिक (verbal) प्रयोग किया
1829 ई.राजस्थान (लिखित रूप में)कर्नल जेम्स टॉड — इस नाम का प्रथम लिखित (written) प्रयोग किया
💡 समझने का आसान तरीका

सोचिए — जैसे किसी बच्चे का घर में प्यार का नाम अलग होता है और स्कूल/सरकारी दस्तावेज़ों में अलग नाम दर्ज होता है, वैसे ही राजस्थान भी वैदिक काल में 'ब्रह्मवर्त' (धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान), रामायण-महाभारत काल में 'मरुकांतार' (भौगोलिक कठिनाई की पहचान — मरुस्थल व दुर्गम भूभाग), और अंग्रेजों के दौर में 'राजपूताना' (राजपूत रियासतों की भूमि) कहलाया। अंतिम और स्थायी नाम 'राजस्थान' (राजाओं का स्थान) कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी किताब में सबसे पहले लिखित रूप में दर्ज किया — और यही नाम आज तक चला आ रहा है।

कर्नल जेम्स टॉड (Colonel James Tod) — विशेष जानकारी

ध्यान रहे: 'राजपूताना' शब्द को औपचारिक रूप से आधुनिक अर्थ में सबसे पहले जॉर्ज थॉमस (1800 ई.) ने प्रयोग किया, जबकि 'राजस्थान' शब्द का प्रथम लिखित प्रयोग कर्नल जेम्स टॉड (1829 ई.) ने किया। परीक्षा में अक्सर इन दोनों नामों और व्यक्तियों को आपस में उलझा दिया जाता है — इसलिए वर्ष और व्यक्ति दोनों याद रखें।

1.2 राजस्थान की भौगोलिक स्थिति — एक नजर में (At a Glance)

इससे पहले कि हम अक्षांश-देशांतर जैसी तकनीकी बातों में जाएँ, यह समझना ज़रूरी है कि राजस्थान पृथ्वी के किस बड़े हिस्से में स्थित है — भारत में कहाँ, और दुनिया के नक़्शे में कहाँ।

मानक (Criteria)स्थिति (Position)
भारत में स्थितिउत्तर-पश्चिम भारत (North-West India)
विश्व में स्थितिउत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध (Northern-Eastern Hemisphere)
अक्षांशीय स्थितिउत्तरी गोलार्द्ध में (भूमध्य रेखा/Equator के उत्तर में)
देशान्तरीय स्थितिपूर्वी गोलार्द्ध में (ग्रीनविच रेखा/Prime Meridian के पूर्व में)
एशिया में स्थितिदक्षिण-पश्चिमी एशिया (South-West Asia)

2राजस्थान की भौगोलिक उत्पत्ति (Geological Origin)

राजस्थान आज जैसा दिखता है — पश्चिम में रेगिस्तान, बीच में अरावली पहाड़ियाँ, पूर्व में उपजाऊ मैदान — यह अचानक नहीं बना। इसके पीछे करोड़ों वर्षों की भूगर्भीय (geological) प्रक्रिया है। इसे समझने के लिए सबसे पहले वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर के 'महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत' (Continental Drift Theory) को समझना होगा।

2.1 अल्फ्रेड वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत

पैंजिया के दो भाग

भाग (Part)नाम (Name)शामिल महाद्वीप (Included Continents)
उत्तरी भागअंगारा लैंड / लॉरेशिया (Laurasia)उत्तरी अमेरिका, यूरोप, उत्तरी एशिया
दक्षिणी भागगोंडवाना लैंड (Gondwana Land)दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिणी एशिया (भारत सहित), ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका
💡 टेथिस सागर (Tethys Sea) क्या है?

पैंजिया के टूटने के दौरान अंगारा लैंड (उत्तर) और गोंडवाना लैंड (दक्षिण) के बीच एक लंबा, संकरा समुद्री गर्त बन गया था, जिसे 'टेथिस सागर' कहा जाता है — यह असल में एक भूसन्नति (Geosyncline) थी, यानी एक ऐसा गहरा गड्ढा जिसमें नदियों द्वारा लाई गई तलछट (sediment) लगातार जमा होती रही। लाखों वर्षों में यही तलछट दबकर और मुड़कर आज का हिमालय पर्वत, उत्तर का विशाल मैदान और थार का मरुस्थल बनी। यानी हिमालय और राजस्थान का रेगिस्तान — दोनों की जड़ें एक ही समुद्र (टेथिस सागर) में हैं, बस समय के साथ इनका रूप बदल गया।

2.2 राजस्थान के भौतिक प्रदेशों की उत्पत्ति

क्रमभौतिक प्रदेश (Physical Region)उत्पत्ति (Origin)भारत में वर्गीकरण
1अरावली पर्वतीय प्रदेश (सबसे प्राचीन)गोंडवाना लैंड सेप्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau) का भाग
2हाड़ौती का पठारगोंडवाना लैंड सेप्रायद्वीपीय पठार का भाग
3थार का मरुस्थलटेथिस सागर के अवसादों सेउत्तर के विशाल मैदान का भाग
4पूर्वी मैदानी प्रदेश (सबसे नवीन)टेथिस सागर के अवसादों सेउत्तर के विशाल मैदान का भाग

याद रखने की सरल तरकीब: प्राचीनता के क्रम में (सबसे पुराना → सबसे नया): अरावली पर्वत → हाड़ौती का पठार → थार का मरुस्थल → पूर्वी मैदानी प्रदेश। यानी अरावली पर्वत राजस्थान की सबसे पुरानी और पूर्वी मैदानी प्रदेश सबसे नई भौगोलिक रचना है।

3राजस्थान का एकीकरण (Integration of Rajasthan)

आज हम राजस्थान को एक अखंड, एकीकृत राज्य के रूप में देखते हैं, लेकिन आज़ादी के समय (1947) यह क्षेत्र दर्जनों छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था — हर रियासत का अपना राजा, अपना प्रशासन। इन सभी बिखरे हुए टुकड़ों को जोड़कर एक राज्य बनाना एक बहुत बड़ी और जटिल राजनीतिक प्रक्रिया थी, जिसे 'राजस्थान का एकीकरण' कहा जाता है।

3.1 स्वतंत्रता के समय की स्थिति (1947)

इकाई का प्रकारसंख्यानाम / विवरण
रियासतें (Princely States)19अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़, टोंक, बूंदी, कोटा, झालावाड़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, शाहपुरा, सिरोही
ठिकाने (Estates)3लावा, कुशलगढ़, नीमराणा
केन्द्रशासित प्रदेश1अजमेर-मेरवाड़ा (British India के अधीन सीधा शासित क्षेत्र)

3.2 एकीकरण के प्रमुख नेता

कुल समय: सम्पूर्ण एकीकरण प्रक्रिया में 8 वर्ष 7 माह 14 दिन का समय लगा और यह कुल 7 चरणों में पूरी हुई — 18 मार्च 1948 से शुरू होकर 1 नवम्बर 1956 को अंतिम रूप से पूर्ण हुई।

3.3 राजस्थान एकीकरण के 7 चरण (7 Phases of Integration)

चरणसंघ का नामतिथिसम्मिलित क्षेत्रविशेष तथ्य
Iमत्स्य संघ (Matsya Union)18 मार्च 1948अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौलीनाम के.एम. मुंशी के सुझाव पर रखा गया
IIपूर्व राजस्थान संघ25 मार्च 19489 रियासतें + कुशलगढ़ ठिकानाराजधानी — कोटा
IIIसंयुक्त राजस्थान18 अप्रैल 1948पूर्व राजस्थान + उदयपुर रियासतउद्घाटन पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा
IVवृहद् राजस्थान (Greater Rajasthan)30 मार्च 1949संयुक्त राजस्थान + जयपुर + जोधपुर + जैसलमेर + बीकानेरइसी दिन को 'राजस्थान दिवस' के रूप में मनाया जाता है, राजधानी जयपुर बनी
Vसंयुक्त वृहद् राजस्थान15 मई 1949वृहद् राजस्थान + मत्स्य संघशंकरदेव राय समिति की सिफारिश पर हुआ विलय
VIराजस्थान संघ26 जनवरी 1950सिरोही रियासत (आबू-देलवाड़ा क्षेत्र को छोड़कर)यह भारत के गणतंत्र बनने का दिन भी है
VIIवर्तमान राजस्थान1 नवम्बर 1956आबू-देलवाड़ा + अजमेर-मेरवाड़ा + सुनेल टप्पा (सिरोंज क्षेत्र मध्यप्रदेश को स्थानांतरित)राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के अंतर्गत — इस समय 26 जिले बने
💡 30 मार्च ही 'राजस्थान दिवस' क्यों?

30 मार्च 1949 को चरण-IV (वृहद् राजस्थान) के दौरान संयुक्त राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसी बड़ी व शक्तिशाली रियासतें भी शामिल हुईं और जयपुर को राजधानी बनाया गया — यह राजस्थान के एकीकरण का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जाता है, इसीलिए हर वर्ष 30 मार्च को 'राजस्थान दिवस' (Rajasthan Day) के रूप में मनाया जाता है, भले ही राज्य का अंतिम और पूर्ण स्वरूप 1 नवम्बर 1956 को मिला।

अतिरिक्त तथ्य: वी.पी. मेनन के अनुसार मत्स्य संघ का उद्घाटन 18 मार्च 1948 को हुआ था। 1 नवम्बर 1956 के पुनर्गठन के बाद राजस्थान में उस समय 5 संभाग तथा 26 जिले बने थे — यह संख्या बाद में समय-समय पर नए जिले बनने के साथ बढ़ती गई।

4राजस्थान के जिले — ऐतिहासिक विकास एवं वर्तमान स्वरूप

1956 में जब राजस्थान का अंतिम स्वरूप बना, तब इसमें 26 जिले थे। समय के साथ प्रशासनिक सुविधा और विकास की जरूरतों को देखते हुए पुराने बड़े जिलों को तोड़कर नए जिले बनाए जाते रहे। आइए इस पूरे सफर को चरणबद्ध तरीके से समझते हैं — यह जानना ज़रूरी है क्योंकि परीक्षाओं में जिलों की संख्या, उनके निर्माण की तारीख और मूल जिला बार-बार पूछा जाता है।

4.1 जिलों का ऐतिहासिक क्रम (27वें से 33वें जिले तक)

क्रमनया जिलातिथिमूल जिला (जिससे बना)
27वाँधौलपुर15 अप्रैल 1982भरतपुर
28वाँबारां10 अप्रैल 1991कोटा
29वाँदौसा10 अप्रैल 1991जयपुर
30वाँराजसमंद10 अप्रैल 1991उदयपुर
31वाँहनुमानगढ़12 जुलाई 1994श्रीगंगानगर
32वाँकरौली19 जुलाई 1997सवाई माधोपुर
33वाँप्रतापगढ़26 जनवरी 2008उदयपुर + चित्तौड़गढ़ + बाँसवाड़ा (तीनों जिलों के भाग मिलाकर)

4.2 राजनीतिक उठापटक — 2023 में 19 नए जिले, फिर 2024 में 9 निरस्त

यह राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास का सबसे उलझा हुआ, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है — इसलिए इसे बहुत ध्यान से, चरण-दर-चरण समझें।

1. मार्च 2023 (मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार): कुल 19 नए जिले और 3 नए संभाग (सीकर, पाली, बाँसवाड़ा) बनाने की घोषणा की गई। इससे राजस्थान में जिलों की कुल संख्या 33 (पुराने) + 19 (नए, जिनमें से 17 पूरी तरह नए जिले के रूप में अधिसूचित हुए) होकर कुल 50 जिले और 10 संभाग हो गए थे।

2. 7 अगस्त 2023: इनमें से 8 नए जिले औपचारिक रूप से क्रियाशील हुए (नीचे तालिका देखें), जबकि शेष नए जिलों को भी चरणबद्ध रूप से अधिसूचित किया गया।

3. दिसम्बर 2023 में सरकार बदली — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (भाजपा) की नई सरकार बनी। नई सरकार ने समीक्षा में पाया कि नए बनाए गए जिलों में से कई के पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा (कार्यालय भवन, प्रशासनिक अमला, बजट) उपलब्ध नहीं है।

4. 30 दिसम्बर 2024: भजनलाल शर्मा सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करके 9 नए जिलों और तीनों नए संभागों (सीकर, पाली, बाँसवाड़ा) को निरस्त (रद्द) कर दिया। यह निर्णय 28 दिसम्बर 2024 की कैबिनेट बैठक में लिया गया था।

7 अगस्त 2023 को बने 8 जिले जो आज भी मान्य हैं

क्रमजिलाकिससे बना
34वाँबालोतराबाड़मेर
35वाँब्यावरअजमेर, पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा
36वाँडीगभरतपुर
37वाँडीडवाना-कुचामननागौर
38वाँकोटपूतली-बहरोड़जयपुर व अलवर
39वाँखैरथल-तिजाराअलवर
40वाँफलौदीजोधपुर, जैसलमेर
41वाँसलूंबरउदयपुर

30 दिसम्बर 2024 को निरस्त किए गए 9 जिले

निरस्त जिलावापस किस जिले में मिलाया गया
अनूपगढ़श्रीगंगानगर व बीकानेर (मूल जिलों में वापस)
दूदूजयपुर
केकड़ीअजमेर
शाहपुराभीलवाड़ा
नीम का थाना (नीमकाथाना)सीकर व झुंझुनूं
गंगापुर सिटीसवाई माधोपुर व करौली
जयपुर ग्रामीणजयपुर
जोधपुर ग्रामीणजोधपुर
सांचौरजालौर

राजस्थान की सख्त भौगोलिक सच्चाई (ध्यान रखें): अनूपगढ़ अब (2025-26 में) एक स्वतंत्र जिला नहीं है — यह वापस श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों में मिला दिया गया है। परीक्षा में अगर पूछा जाए कि 'क्या अनूपगढ़ एक जिला है?' तो उत्तर होगा — नहीं, वर्तमान में नहीं।

4.3 वर्तमान स्थिति (2025-26) — 41 जिले, 7 संभाग

30 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के बाद से राजस्थान में स्थायी रूप से 41 जिले और 7 संभाग हैं। इंटरनेट पर की गई ताज़ा जांच (जुलाई 2026 तक) के अनुसार इस ढांचे में कोई और बदलाव नहीं हुआ है — यानी यह वर्तमान (2026) की स्थिति में भी पूरी तरह लागू है।

4.4 जिलों की आकृतियाँ (Shapes of Districts) — याद रखने में आसान

जिलाआकृति (Shape)
हनुमानगढ़कुर्सीनुमा (Chair-shaped)
सीकरअर्द्धचन्द्राकार / प्यालेनुमा / तस्तरीनुमा (Crescent/Saucer-shaped)
दौसाधनुषाकार (Bow-shaped)
राजसमंदतिलक जैसा / पानी की बूंद जैसा (Tilak/Water-drop shaped)
चित्तौड़गढ़पत्ता जैसा / घोड़े की नाल जैसा (Leaf/Horseshoe-shaped)
करौलीबतख (Duck) के समान आकृति
जालौरढाल (शील्ड) माला जैसा
टोंकवृताकार / चौकोर (Circular/Square-ish)
भीलवाड़ाआयताकार (Rectangular)
राजस्थान (सम्पूर्ण राज्य)पतंगाकार / विषमकोणीय चतुर्भुज (Kite-shaped / Rhombus)

5राजस्थान की स्थिति, अक्षांश एवं देशान्तर

किसी भी स्थान की सटीक भौगोलिक स्थिति बताने के लिए अक्षांश (Latitude) और देशान्तर (Longitude) रेखाओं का प्रयोग किया जाता है — ठीक वैसे ही जैसे किसी शहर में किसी घर का पता बताने के लिए सड़क नंबर और मकान नंबर दोनों चाहिए। राजस्थान की स्थिति भी इन्हीं दो निर्देशांकों (coordinates) से परिभाषित होती है।

5.1 अक्षांशीय एवं देशान्तरीय विस्तार

मानकविस्तारकुल अंतर
अक्षांशीय विस्तार (Latitudinal Extent)23°03′ उत्तरी अक्षांश → 30°12′ उत्तरी अक्षांश7°09′
देशान्तरीय विस्तार (Longitudinal Extent)69°30′ पूर्वी देशान्तर → 78°17′ पूर्वी देशान्तर8°47′ (लगभग 9°)

चारों अंतिम बिन्दु (Four Extreme Points)

दिशास्थानविवरण
उत्तरतम (Northernmost)कोणा गाँव (गंगानगर तहसील, श्रीगंगानगर)30°12′ उत्तरी अक्षांश — यहाँ सूर्य की किरणें सबसे अधिक तिरछी पड़ती हैं
दक्षिणतम (Southernmost)बोरकुण्डा गाँव (कुशलगढ़ तहसील, बाँसवाड़ा)23°03′ उत्तरी अक्षांश — यहाँ सूर्य की किरणें सबसे अधिक सीधी (लम्बवत् के निकट) पड़ती हैं
पूर्वतम (Easternmost)सिलाना गाँव (राजाखेड़ा तहसील, धौलपुर)78°17′ पूर्वी देशान्तर — राजस्थान में सबसे पहला सूर्योदय यहीं होता है
पश्चिमतम (Westernmost)कटरा गाँव (सम तहसील, जैसलमेर)69°30′ पूर्वी देशान्तर — राजस्थान में सबसे बाद में सूर्योदय यहीं होता है
💡 समय का अंतर (Time Difference) कैसे निकालें?

पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, यानी 1° देशान्तर घूमने में 4 मिनट का समय लगता है (360° ÷ 24 घंटे = 15° प्रति घंटा; 60 मिनट ÷ 15° = 4 मिनट प्रति डिग्री)। इसी प्रकार 1' (1 मिनट देशांतर) = 4 सेकण्ड का समय अंतर देता है। राजस्थान में पूर्वतम बिंदु (धौलपुर, 78°17′ पू.दे.) और पश्चिमतम बिंदु (जैसलमेर, 69°30′ पू.दे.) के बीच देशान्तर का अंतर 8°47′ है, जिसे मिनटों में बदलने पर लगभग 35 मिनट 8 सेकण्ड (व्यवहार में लगभग 36 मिनट) का समय-अंतर मिलता है — यानी धौलपुर में सूर्योदय होने के करीब 36 मिनट बाद जैसलमेर में सूर्योदय होता है। इसीलिए राजस्थान में सबसे पहले सूर्योदय धौलपुर (पूर्वतम) में और सबसे बाद में जैसलमेर (पश्चिमतम) में होता है।

मध्य गाँव (Mid Village of Rajasthan)

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के अक्षांश-देशान्तर एवं अंतिम बिन्दु (हाथ से चिन्हित करने हेतु रिक्त मानचित्र)

6कर्क रेखा (Tropic of Cancer)

कर्क रेखा (Tropic of Cancer) एक काल्पनिक रेखा है जो भूमध्य रेखा (Equator) से 23°30′ उत्तर में स्थित है। यह रेखा उस अधिकतम उत्तरी अक्षांश को दर्शाती है, जहाँ सूर्य वर्ष में एक बार (21 जून के आसपास) ठीक सिर के ऊपर (लम्बवत्) चमकता है। राजस्थान से होकर यह रेखा गुजरती है, इसलिए यह राज्य की जलवायु को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

6.1 कर्क रेखा की प्रमुख जानकारी

विवरणतथ्य
अक्षांश23°30′ उत्तरी अक्षांश (23½°)
राजस्थान में कुल लम्बाई26 किलोमीटर
राजस्थान में गुजरने वाले जिलेबाँसवाड़ा (अधिकतम लम्बाई से गुजरती है) एवं डूंगरपुर (न्यूनतम लम्बाई से गुजरती है)
निकटतम शहरबाँसवाड़ा — कर्क रेखा से सर्वाधिक नजदीक, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें सबसे सीधी पड़ती हैं
दूरतम जिलाश्रीगंगानगर — कर्क रेखा से सर्वाधिक दूर, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें सबसे तिरछी पड़ती हैं
बाँसवाड़ा में स्थितिकुशलगढ़ तहसील के मध्य से गुजरती है
डूंगरपुर में स्थितिचीखली गाँव को स्पर्श करती है

6.2 भारत में कर्क रेखा — कुल 8 राज्यों से होकर गुजरती है

क्रमराज्य (पश्चिम से पूर्व की ओर)
1गुजरात
2राजस्थान
3मध्यप्रदेश
4छत्तीसगढ़
5झारखण्ड
6पश्चिम बंगाल
7त्रिपुरा
8मिजोरम
💡 21 जून का खगोलीय महत्व

21 जून (ग्रीष्म संक्रान्ति / Summer Solstice) के दिन सूर्य ठीक कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता है — राजस्थान के संदर्भ में इसका मतलब है कि इस दिन सूर्य बाँसवाड़ा के ठीक ऊपर होता है। इसी कारण इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे बड़ा दिन (longest day) और सबसे छोटी रात (shortest night) होती है। संयोग से 21 जून को ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga) भी मनाया जाता है।

7राजस्थान का विस्तार एवं क्षेत्रफल (Extent & Area)

7.1 लम्बाई-चौड़ाई एवं आकृति

माप (Measurement)दूरीबिन्दु (Points)
उत्तर → दक्षिण लम्बाई826 किमीकोणा गाँव (गंगानगर) → बोरकुण्डा गाँव (बाँसवाड़ा)
पूर्व → पश्चिम चौड़ाई869 किमीसिलाना गाँव (धौलपुर) → कटरा गाँव (जैसलमेर)
लम्बाई-चौड़ाई में अंतर43 किमी869 − 826 = 43 किमी (चौड़ाई, लम्बाई से अधिक है)
उत्तर-पश्चिम → दक्षिण-पूर्व विकर्ण850 किमी
दक्षिण-पश्चिम → उत्तर-पूर्व विकर्ण784 किमी

7.2 क्षेत्रफल (Area)

विवरणआँकड़ा
कुल क्षेत्रफल3,42,239 वर्ग किलोमीटर (लगभग 1,32,139 वर्ग मील)
भारत के कुल क्षेत्रफल में हिस्सा10.41% (यानी लगभग भारत के भूभाग का दसवां हिस्सा)
भारत में स्थानप्रथम — क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य
यह स्थान कब से प्राप्त है1 नवम्बर 2000 से — जब मध्यप्रदेश के पुनर्गठन (Reorganisation) से छत्तीसगढ़ राज्य अलग बना और मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल घट गया, तब राजस्थान क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य बन गया
विश्व के कुल क्षेत्रफल में योगदानलगभग 0.25%

क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के सबसे बड़े राज्य

स्थानराज्यक्षेत्रफल
1राजस्थान3,42,239 वर्ग किमी
2मध्यप्रदेश3,08,245 वर्ग किमी
3महाराष्ट्र3,07,713 वर्ग किमी
4उत्तरप्रदेश2,40,928 वर्ग किमी

विश्व के प्रमुख देशों से क्षेत्रफल तुलना (Size Comparison)

🌍 राजस्थान के लगभग बराबर आकार के देश
  • जर्मनी (Germany)
  • जापान (Japan)
  • नॉर्वे (Norway)
  • पोलैण्ड (Poland)
📏 राजस्थान से कई गुना छोटे देश
  • ब्रिटेन (Britain) — राजस्थान लगभग 2 गुना बड़ा
  • श्रीलंका (Sri Lanka) — राजस्थान लगभग 5 गुना बड़ा
  • इजराइल (Israel) — राजस्थान लगभग 17 गुना बड़ा

क्षेत्रफल की दृष्टि से जिले

स्थानजिला
सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल में)जैसलमेर
दूसरा सबसे बड़ा जिलाबाड़मेर
तीसरा सबसे बड़ा जिलाबीकानेर
सबसे छोटा जिला (नए जिलों में)डीग (सबसे छोटा), उसके बाद खैरथल-तिजारा

महत्वपूर्ण नोट: याद रखें — क्षेत्रफल में सबसे बड़ा जिला (जैसलमेर) और जनसंख्या में सबसे बड़ा जिला (जयपुर) अलग-अलग हैं — इन्हें कभी न मिलाएँ, परीक्षा में यह एक आम गड़बड़ी (confusion) का बिंदु है।

8राजस्थान की आकृति एवं सीमाएँ (Shape & Boundaries)

8.1 राजस्थान की आकृति

विवरणजानकारी
आकृति का नामपतंगाकार / विषमकोणीय चतुर्भुज (Kite-shaped / Rhombus)
सर्वप्रथम किसने बतायाप्रो. टी.एच. हैण्डले (T.H. Handley) — जयपुर रियासत के ब्रिटिश हेल्थ ऑफिसर, जिन्होंने सबसे पहले राजस्थान की आकृति को पतंग के समान बताया

8.2 राजस्थान की सीमाएँ (Boundaries)

प्रकारलम्बाई
अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (पाकिस्तान के साथ)1070 किलोमीटर
अन्तर्राज्यीय सीमा (5 पड़ोसी राज्यों के साथ)4850 किलोमीटर
कुल स्थलीय सीमा (International + Interstate)5920 किलोमीटर

अन्तर्राष्ट्रीय सीमा — रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line)

अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित राजस्थान के जिले

जिलाविशेष तथ्य
श्रीगंगानगरसीमा के सर्वाधिक निकट जिला मुख्यालय; पंजाब व पाकिस्तान — दोनों की सीमाएँ लगती हैं
बीकानेरसीमा से सर्वाधिक दूर स्थित जिला मुख्यालय
फलौदीसबसे छोटी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (लगभग 30 किमी)
जैसलमेरसबसे लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (464 किमी)
बाड़मेरगुजरात व पाकिस्तान — दोनों की सीमाएँ लगती हैं

राजस्थान की सख्त भौगोलिक सच्चाई (ध्यान रखें): फलौदी की सीमा पाकिस्तान से नहीं लगती — यह एक बहुत सामान्य गलतफहमी है। ऊपर तालिका में 'फलौदी' का उल्लेख उसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से नहीं, बल्कि जैसलमेर व जोधपुर क्षेत्र में स्थिति के संदर्भ में समझें — वास्तव में पाकिस्तान सीमा से लगने वाले जिले केवल श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर हैं। परीक्षा में फलौदी को पाक-सीमावर्ती जिला मानना एक बड़ी त्रुटि होगी।

पाकिस्तान के सीमावर्ती जिले (9 जिले, पाकिस्तान की ओर से)

भारत की ओर से राजस्थान सीमा पर 4 जिले (श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर) हैं, जबकि सीमा के दूसरी ओर पाकिस्तान के 9 जिले पड़ते हैं — खैरपुर, उमरकोट, घोटकी, सुक्कुर, बहावतनगर, रहीमयारखान, संघर, थारपारकर, बहावलपुर।

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9पड़ोसी राज्य एवं सीमावर्ती जिले (Neighbouring States)

राजस्थान भारत के 5 राज्यों से घिरा हुआ है — इस सीमा-साझेदारी को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे राजस्थान की सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक विविधता को भी समझा जा सकता है (जैसे गुजरात से सटे क्षेत्रों में मारवाड़ी-गुजराती मिश्रित संस्कृति, या मध्यप्रदेश से सटे हाड़ौती क्षेत्र में मालवा प्रभाव)।

9.1 अन्तर्राज्यीय सीमाएँ (Interstate Boundaries)

राज्यसीमा लम्बाईदिशाराजस्थान के सीमावर्ती जिले
मध्यप्रदेश1600 किमीदक्षिण-पूर्व10 जिले | झालावाड़ (अधिकतम सीमा), भीलवाड़ा (न्यूनतम सीमा)
हरियाणा1262 किमीउत्तर-पूर्व8 जिले
गुजरात1022 किमीदक्षिण-पश्चिम6 जिले | बाड़मेर (न्यूनतम — 14 किमी)
उत्तरप्रदेश877 किमीपूर्व3 जिले
पंजाब89 किमी (सबसे छोटी सीमा)उत्तर2 जिले

क्रम याद रखें: सीमा-लम्बाई के अवरोही क्रम में: मध्यप्रदेश (1600 किमी) → हरियाणा (1262 किमी) → गुजरात (1022 किमी) → उत्तरप्रदेश (877 किमी) → पंजाब (89 किमी)।

9.2 पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जिले — याद रखने की तरकीबें

9.3 राजस्थान के जिलों से संबंधित विशेष सीमा तथ्य

विशेष तथ्यजिला
दो राज्यों से सीमा बनाने वाले जिले (4)हनुमानगढ़ (पंजाब+हरियाणा), डीग (हरियाणा+उत्तरप्रदेश), धौलपुर (उत्तरप्रदेश+मध्यप्रदेश), बाँसवाड़ा (मध्यप्रदेश+गुजरात)
अन्तर्राष्ट्रीय + अन्तर्राज्यीय दोनों सीमाएँ रखने वाले जिलेश्रीगंगानगर (पाकिस्तान+पंजाब), बाड़मेर (पाकिस्तान+गुजरात)
मध्यप्रदेश के साथ दो बार (अखंडित) सीमाकोटा
मध्यप्रदेश के साथ दो बार (खंडित) सीमाचित्तौड़गढ़
सर्वाधिक अन्तर्राज्यीय सीमा लम्बाईझालावाड़ — 520 किमी (मध्यप्रदेश के साथ)
न्यूनतम अन्तर्राज्यीय सीमा लम्बाईबाड़मेर — 14 किमी (गुजरात के साथ)
💡 200 बीघा विवाद व मानगढ़ हत्याकांड

200 बीघा भूमि विवाद उदयपुर (कोटड़ा तहसील) और गुजरात (बनासकांठा जिला) के बीच एक सीमा-विवाद है। वहीं मानगढ़ हत्याकाण्ड (17 नवम्बर 1913) बाँसवाड़ा-दाहोद सीमा क्षेत्र से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना है, जहाँ अंग्रेजों ने भील आदिवासियों के एक बड़े समूह पर गोली चलाई थी।

10संभागीय व्यवस्था (Divisional System)

संभाग (Division) प्रशासनिक इकाई है जो कई जिलों को मिलाकर बनाई जाती है — यह राज्य और जिला प्रशासन के बीच एक मध्यवर्ती स्तर है, जिसका मुखिया संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) होता है। राजस्थान की संभागीय व्यवस्था कई बार बनी, टूटी और फिर से बनी है — इसका पूरा इतिहास समझना ज़रूरी है।

10.1 संभागीय व्यवस्था का इतिहास

तिथि / वर्षघटनामुख्यमंत्री (उस समय)
30 मार्च 19495 संभागों के साथ शुरुआत: जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेरहीरालाल शास्त्री
अप्रैल 1962संभागीय व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गईमोहनलाल सुखाड़िया
26 जनवरी 1987संभागीय व्यवस्था पुनः शुरू | अजमेर छठे संभाग के रूप में जोड़ा गयाहरिदेव जोशी
4 जून 2005भरतपुर 7वें संभाग के रूप में जोड़ा गयावसुंधरा राजे
7 अगस्त 20233 नए संभाग जोड़े गए: सीकर, पाली, बाँसवाड़ा (साथ ही 19 नए जिले)अशोक गहलोत
30 दिसम्बर 20249 जिले + 3 नए संभाग निरस्त | वर्तमान: 41 जिले, 7 संभागभजनलाल शर्मा

ध्यान दें: 1962 से 1987 तक — लगभग 25 वर्ष — राजस्थान में कोई संभागीय व्यवस्था लागू नहीं थी। वर्तमान (2025-26) में राजस्थान में स्थायी रूप से 7 संभाग एवं 41 जिले हैं।

10.2 वर्तमान 7 संभाग एवं उनके जिले

क्र.संभागजिले (Districts)कुल जिले
1जयपुरजयपुर, अलवर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा7
2अजमेरअजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन6
3जोधपुरजोधपुर, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही8
4उदयपुरउदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सलूंबर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा7
5कोटाकोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़4
6भरतपुरभरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर5
7बीकानेरबीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू4

कुल: 7 संभाग तथा 41 जिले (सत्यापित — जुलाई 2026)

संभागों के जिले याद रखने की तरकीबें (Memory Tricks)

10.3 संभागों के विशिष्ट तथ्य

विशेष तथ्यसंभाग
सर्वाधिक जिलों वाला संभागजोधपुर (8 जिले)
दूसरे नंबर पर सर्वाधिक जिलेजयपुर व उदयपुर (7-7 जिले)
सबसे कम जिलों वाले संभागकोटा व बीकानेर (4-4 जिले)
क्षेत्रफल में सबसे बड़ा संभागजोधपुर
सर्वाधिक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा वाला संभागजोधपुर संभाग
सर्वाधिक नहर सिंचाई वाला संभागबीकानेर संभाग
सर्वाधिक नदियों वाला संभागकोटा संभाग (हाड़ौती क्षेत्र)
सर्वाधिक जनसंख्या वाला संभागजयपुर संभाग
अंतर्वर्ती (Landlocked, कोई बाहरी सीमा नहीं) संभागअजमेर संभाग — यह सभी अन्य संभागों से घिरा है, इसकी कोई सीमा राज्य के बाहर नहीं लगती
3 राज्यों से सीमा साझा करने वाला संभागभरतपुर संभाग (उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा)
खनिज सम्पन्न व जनजाति बहुल संभागउदयपुर संभाग
सबसे छोटी अन्तर्राज्यीय सीमा वाला संभागजयपुर (पंजाब से सीमा नहीं लगती)

11राजस्थान के उपनाम एवं विशिष्ट तथ्य (Nicknames & Special Facts)

11.1 प्रमुख शहरों/जिलों के उपनाम

शहर/जिलाउपनाम
जोधपुरब्लू सिटी / नीली नगरी, सूर्य नगरी / सन सिटी, मरुस्थल का प्रवेश द्वार, हैण्डीक्राफ्ट सिटी
जयपुरपिंक सिटी / गुलाबी शहर, पूर्व का पेरिस, हेरिटेज सिटी
जैसलमेरस्वर्ण नगरी, हवेलियों का शहर, पीले पत्थरों का शहर, रेगिस्तान का गुलाब
उदयपुरझीलों की नगरी, राजस्थान का कश्मीर, पूर्व का वेनिस, लेक सिटी
अजमेरभारत का मक्का, राजस्थान का नागपुर
बीकानेरऊन का घर, राजस्थान का अन्नागार, हाइटेक सिटी
कोटाराजस्थान का कानपुर, राजस्थान की औद्योगिक राजधानी, शिक्षा का तीर्थस्थल (Coaching Hub)
भीलवाड़ाराजस्थान का मेनचेस्टर, वस्त्र नगरी, टेक्सटाइल सिटी
अलवरराजस्थान का स्कॉटलैण्ड, राजस्थान का पूर्वी कश्मीर
धौलपुररेड डायमंड, राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार
डूंगरपुरसौ द्वीपों का शहर, आदिवासियों का शहर
नागौरराजस्थान का नाका, राजपूताना की कुंजी
बाँसवाड़ाराजस्थान का चेरापूंजी, आदिवासियों की भूमि
झालावाड़राजस्थान का नागपुर (संतरा उत्पादन हेतु)
सीकरशेखावाटी क्षेत्र, फव्वारों की नगरी
चूरूराजस्थान का अग्निकुण्ड (सर्वाधिक तापमान चरम हेतु)

11.2 राजस्थान में प्रथम — विश्व, देश, प्रदेश स्तर पर

विश्व में प्रथम / अनोखे तथ्य

देश में प्रथम तथ्य

11.3 राजस्थान में सर्वाधिक / न्यूनतम (जिलों की तुलना)

मानकजिला (सर्वाधिक)जिला (न्यूनतम)
क्षेत्रफलजैसलमेरधौलपुर / दौसा
जनसंख्याजयपुरजैसलमेर
जनघनत्वजयपुरजैसलमेर
साक्षरताझुंझुनूं / जयपुरजालौर
महिला साक्षरताझुंझुनूं / कोटाजालौर
लिंगानुपातडूंगरपुरधौलपुर
वर्षा / आर्द्रताबाँसवाड़ा / झालावाड़जैसलमेर
सर्वाधिक ठंड / ऊँचाईमाउण्ट आबू (सिरोही)
सर्वाधिक गर्मीचूरू / फलौदी
वन क्षेत्रउदयपुरचूरू
दुग्ध उत्पादनजयपुर
ऊन उत्पादनजोधपुर ग्रामीण क्षेत्र

12नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)

इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन (up-to-date) रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम आँकड़े और घटनाएँ नीचे दी गई हैं — ये तथ्य किसी भी पुरानी किताब में नहीं मिलेंगे, इसलिए विशेष ध्यान दें।

💡 जनसंख्या का ताज़ा अनुमान (Population Estimate 2025-26)

चूंकि जनगणना 2021 अभी तक आयोजित नहीं हुई है, इसलिए वर्तमान जनसंख्या केवल अनुमानों (projections) पर आधारित है। नीति आयोग (NITI Aayog) के तकनीकी समूह के अनुसार 1 जुलाई 2025 तक राजस्थान की अनुमानित जनसंख्या लगभग 8.31 करोड़ थी, जबकि 1 अक्टूबर 2025 के अनुमान अनुसार यह बढ़कर लगभग 8.33 करोड़ हो गई। इस आधार पर राजस्थान जनसंख्या की दृष्टि से भारत का छठा (6th) सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। ध्यान रहे — यह एक अनुमान है, जनगणना 2011 के बाद अभी तक कोई नई जनगणना नहीं हुई है, इसलिए स्थायी आँकड़ों के लिए जनगणना 2011 का ही आधिकारिक हवाला दिया जाता है (जनसंख्या अध्याय में विस्तार से देखें)।

💡 मतदाता सूची — फरवरी 2026

फरवरी 2026 में राजस्थान की अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) प्रकाशित हुई, जिसमें राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 5.15 करोड़ से अधिक दर्ज की गई — यह दर्शाता है कि राजस्थान की मतदाता संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

💡 राजस्थान दिवस समारोह 2026 — नया प्रारूप

हाल के वर्षों में राजस्थान दिवस (30 मार्च) को अब केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे सप्ताह भर के आयोजन (Rajasthan Day Week) के रूप में मनाया जाने लगा है। 2026 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में 14 से 19 मार्च के बीच कई कार्यक्रम आयोजित हुए — जैसे 15 मार्च को 'विकसित राजस्थान रन' व ODOP (एक जिला एक उत्पाद) प्रदर्शनी, 17 मार्च को 'राजस्थान युवा शक्ति दिवस', 18 मार्च को सभी सरकारी मंदिरों में आरती (गोविंद देव जी मंदिर में महा-आरती सहित), तथा 19 मार्च को नई रोडवेज बसों को झंडी दिखाकर रवाना करना और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। इससे स्पष्ट है कि राजस्थान दिवस अब एक बड़े सांस्कृतिक-प्रचार अभियान का रूप ले चुका है।

जिलों-संभागों की स्थिरता की पुष्टि: जुलाई 2026 तक की गई ताज़ा खोज के अनुसार, 30 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के बाद राजस्थान के जिलों (41) और संभागों (7) की संख्या में कोई और परिवर्तन नहीं हुआ है — यह ढांचा स्थिर बना हुआ है। यदि भविष्य में कोई नई अधिसूचना आती है, तो कृपया इस अध्याय को अद्यतन करवाएँ।

13त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

13.1 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — नामकरण

प्रश्नउत्तर
राजस्थान शब्द का प्रथम लिखित प्रयोग किसने किया?कर्नल जेम्स टॉड (1829 ई.)
राजपूताना शब्द किसने दिया?जॉर्ज थॉमस (1800 ई.)
वैदिक काल में राजस्थान का नाम?ब्रह्मवर्त
महाभारत काल में राजस्थान का नाम?मरुकांतार
जेम्स टॉड की पुस्तक का हिंदी अनुवाद किसने किया?गौरीशंकर हीराचंद ओझा

13.2 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — एकीकरण

प्रश्नउत्तर
राजस्थान दिवस कब मनाया जाता है?30 मार्च (वृहद् राजस्थान — 1949)
एकीकरण में कुल कितने चरण हुए?7 चरण (कुल समय: 8 वर्ष 7 माह 14 दिन)
एकीकरण का अंतिम चरण कब पूरा हुआ?1 नवम्बर 1956
मत्स्य संघ में कौन-कौन से जिले शामिल थे?अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली
एकीकरण के प्रमुख नेता कौन थे?सरदार वल्लभभाई पटेल + वी.पी. मेनन

13.3 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — स्थिति एवं विस्तार

प्रश्नउत्तर
राजस्थान का कुल क्षेत्रफल कितना है?3,42,239 वर्ग किमी (भारत का 10.41%)
उत्तर-दक्षिण लम्बाई कितनी है?826 किमी
पूर्व-पश्चिम चौड़ाई कितनी है?869 किमी
लम्बाई-चौड़ाई में कितना अंतर है?43 किमी
राजस्थान में कर्क रेखा की लम्बाई कितनी है?26 किमी
कर्क रेखा किन जिलों से गुजरती है?बाँसवाड़ा + डूंगरपुर
राजस्थान में सबसे पहले सूर्योदय कहाँ होता है?धौलपुर (सबसे बाद में जैसलमेर में)
सबसे सीधी सूर्य किरणें किस जिले में पड़ती हैं?बाँसवाड़ा (कर्क रेखा के सबसे निकट)
सबसे तिरछी सूर्य किरणें किस जिले में पड़ती हैं?श्रीगंगानगर (कर्क रेखा से सबसे दूर)
अन्तर्राष्ट्रीय सीमा की कुल लम्बाई कितनी है?1070 किमी (कुल सीमा का 18%)
अन्तर्राज्यीय सीमा की कुल लम्बाई कितनी है?4850 किमी
सबसे लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा किस राज्य के साथ है?मध्यप्रदेश (1600 किमी)
सबसे छोटी अन्तर्राज्यीय सीमा किस राज्य के साथ है?पंजाब (89 किमी)

13.4 संभाग एवं जिले — त्वरित पुनरावृत्ति

संभागजिलेखास बात
जयपुर7सर्वाधिक जनसंख्या; हरियाणा से सीमा नहीं
अजमेर6सर्वाधिक संभागों से सीमा; अंतर्वर्ती (Landlocked)
जोधपुर8सबसे बड़ा — अधिकतम जिले, सबसे लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा
भरतपुर53 राज्यों से सीमा; पूर्वी राजस्थान
उदयपुर7खनिज सम्पन्न; जनजाति क्षेत्र
बीकानेर4उत्तरी राजस्थान; नहर सिंचाई सर्वाधिक
कोटा4सर्वाधिक नदियाँ; हाड़ौती क्षेत्र

13.5 महत्त्वपूर्ण संख्याएँ (Number Facts) — एक नज़र में

संख्याअर्थ
41 जिले, 7 संभागवर्तमान (2025-26) प्रशासनिक ढांचा
19 रियासतें + 3 ठिकाने + 1 केन्द्रशासित क्षेत्रआज़ादी के समय (1947) की स्थिति
7 चरणएकीकरण के चरण | 30 मार्च 1949 = राजस्थान दिवस | 1 नवम्बर 1956 = अंतिम चरण
1070 किमी + 4850 किमी = 5920 किमीअन्तर्राष्ट्रीय + अन्तर्राज्यीय = कुल सीमा
826 किमी + 869 किमीउत्तर-दक्षिण + पूर्व-पश्चिम | अंतर = 43 किमी
3,42,239 वर्ग किमीकुल क्षेत्रफल | भारत का 10.41% | भारत में प्रथम स्थान
26 किमीकर्क रेखा की राजस्थान में लम्बाई | बाँसवाड़ा + डूंगरपुर
8.31–8.33 करोड़ (अनुमानित, 2025-26)जनसंख्या — भारत में छठा सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. राजस्थान शब्द का प्रथम लिखित प्रयोग किसने और कब किया? Q2. राजस्थान की स्थापना (वृहद् राजस्थान) कब हुई और इसे किस नाम से जाना जाता है? Q3. राजस्थान की कुल अन्तर्राष्ट्रीय एवं अन्तर्राज्यीय सीमा की लम्बाई बताइए। Q4. राजस्थान में कर्क रेखा किन-किन जिलों से होकर गुजरती है, और इसकी कुल लम्बाई क्या है? Q5. राजस्थान के किस जिले की सीमा पाकिस्तान से सबसे लम्बी है और किसकी सबसे छोटी? Q6. 30 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के तहत कौन-कौन से जिले व संभाग निरस्त किए गए? Q7. राजस्थान की उत्पत्ति में टेथिस सागर की क्या भूमिका रही? Q8. राजस्थान के किस संभाग को अंतर्वर्ती (Landlocked) संभाग कहा जाता है और क्यों?

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

📌 राजस्थान का भौतिक स्वरूप (Physiography)

1B

राजस्थान का भौतिक स्वरूप Physical Divisions / Physiography of Rajasthan

🌟 क्या आप जानते हैं?

सोचिए — एक ही राज्य के अंदर आप सुबह एक ऐसी जगह से यात्रा शुरू करें जहाँ मीलों तक सिर्फ रेत के टीले और ऊँट ही नज़र आते हैं, दोपहर तक आप हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे रास्तों से गुज़रें जहाँ बादल पहाड़ों को छूते हैं, शाम तक आप उपजाऊ हरे-भरे खेतों वाले मैदान में पहुँच जाएँ, और रात होते-होते आप काली मिट्टी वाले पठारी इलाके में हों जहाँ कभी लावा बहा करता था — क्या यह किसी परीकथा जैसा नहीं लगता? लेकिन यही है राजस्थान की सच्चाई! भारत के किसी और राज्य में एक साथ मरुस्थल, प्राचीनतम पर्वतमाला, उपजाऊ मैदान और लावा-निर्मित पठार — चारों प्रकार के भू-आकृतिक रूप (landforms) एक साथ नहीं मिलते। और सबसे दिलचस्प बात — इन चारों प्रदेशों की उम्र भी अलग-अलग है: अरावली पर्वत को धरती की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में गिना जाता है (गोंडवाना लैंड से जन्मी), जबकि पूर्वी मैदान अपेक्षाकृत बहुत नया है (टेथिस सागर के अवसादों से बना, प्लीस्टोसीन काल में)। आइए, इस अध्याय में हम राजस्थान के इन चारों भौतिक प्रदेशों — पश्चिमी मरुस्थल, अरावली पर्वतीय प्रदेश, पूर्वी मैदान और हाड़ौती का पठार — को गहराई से, हर छोटे-बड़े तथ्य के साथ समझेंगे, ताकि आपके सामने राजस्थान की पूरी भौगोलिक तस्वीर एकदम साफ हो जाए।

1भौतिक प्रदेशों का वर्गीकरण (Classification of Physical Regions)

राजस्थान जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य को समझने के लिए अलग-अलग विद्वानों ने इसे अलग-अलग आधारों पर बाँटने की कोशिश की है — कुछ ने प्रशासनिक व आर्थिक गतिविधियों के आधार पर बाँटा, तो कुछ ने विशुद्ध रूप से भूगोल (उच्चावच व जलवायु) के आधार पर। परीक्षा की दृष्टि से दोनों तरह के वर्गीकरण जानना ज़रूरी है।

1.1 व्यक्तिगत विद्वानों द्वारा वर्गीकरण

प्रो. वी.सी. मिश्रा (V.C. Mishra) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Geography of Rajasthan' (1967) में राजस्थान को आर्थिक-भौगोलिक आधार पर 7 भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया है — यह वर्गीकरण सिर्फ भू-आकृति ही नहीं, बल्कि कृषि व उद्योग जैसी आर्थिक गतिविधियों को भी ध्यान में रखता है।

क्रमभौतिक प्रदेश (V.C. Mishra के अनुसार)अंग्रेज़ी नाम
1नहरी प्रदेशCanal Region
2शुष्क प्रदेशArid Region
3अर्द्धशुष्क प्रदेशSemi-Arid Region
4अरावली प्रदेशAravalli Region
5पूर्वी कृषि एवं औद्योगिक प्रदेशEastern Agricultural & Industrial Region
6चम्बल एवं बीहड़ प्रदेशChambal & Ravine Region
7दक्षिणी-पूर्वी कृषि प्रदेशSouth-Eastern Agricultural Region

अन्य विद्वानों के वर्गीकरण (संक्षेप में): S.K. Sen (1968) ने राजस्थान को 3 भागों में बाँटा। डॉ. रामलोचन सिंह (1971) ने 2 प्रमुख भागों, 4 उपभागों एवं 12 लघु प्रदेशों में विभाजित किया। डॉ. हरिमोहन सक्सेना (1994) ने 4 भागों में वर्गीकरण किया — यह वर्गीकरण आगे चलकर मानक भौगोलिक वर्गीकरण (नीचे देखें) से मिलता-जुलता है।

1.2 भौगोलिक कारकों (उच्चावच + जलवायु) के आधार पर वर्गीकरण — सबसे मानक (Standard)

परीक्षा एवं अध्ययन की दृष्टि से सबसे अधिक प्रचलित और मानक वर्गीकरण वही है जो उच्चावच (Relief — यानी धरातल की ऊँचाई-नीचाई) और जलवायु दोनों को मिलाकर बनाया गया है। इसके अनुसार राजस्थान को 4 प्रमुख भौतिक प्रदेशों में बाँटा जाता है — और यही वर्गीकरण इस पूरे अध्याय का आधार है।

क्रमउच्चावच के आधार पर नामजलवायु के आधार पर नाम
1मरुस्थलउत्तरी-पश्चिमी मरुस्थल
2अरावलीअरावली पर्वतीय प्रदेश
3पूर्वी मैदानपूर्वी मैदानी प्रदेश
4हाड़ौतीदक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश
💡 इन दोनों नामों में फर्क क्यों?

असल में दोनों वर्गीकरण एक ही 4 प्रदेशों की बात करते हैं, बस नाम देने का आधार अलग है — जैसे किसी व्यक्ति को उसकी लंबाई (उच्चावच) से पहचानें या उसके स्वभाव (जलवायु) से — दोनों एक ही व्यक्ति के बारे में हैं। परीक्षा में दोनों नाम (जैसे 'मरुस्थल' और 'उत्तरी-पश्चिमी मरुस्थल') एक ही प्रदेश को दर्शाते हैं, इन्हें अलग-अलग प्रदेश न समझें।

2भौतिक प्रदेशों की सामान्य जानकारी (Comparative Overview)

नीचे दी गई तालिका राजस्थान के चारों भौतिक प्रदेशों की तुलना एक ही जगह प्रस्तुत करती है — क्षेत्रफल, जनसंख्या, मिट्टी, जलवायु, वर्षा, ऊँचाई, ढाल, निर्माण काल और प्रमुख फसलों के आधार पर। इसे ध्यान से पढ़ें, क्योंकि आगे के सेक्शन में हर प्रदेश की गहराई से चर्चा होगी, और यह तालिका आपके लिए एक 'मास्टर रेफरेंस' का काम करेगी।

विशेषतामरुस्थलअरावलीपूर्वी मैदानहाड़ौती
क्षेत्रफल (राज. का %)61.11%9%23%6.89%
जनसंख्या (राज. की %)40%10%39%11%
जिलों की संख्या12 जिले13 जिले (मुख्यतः 7)10 जिले7 जिले
प्रमुख मिट्टीरेतीली/बलुईपर्वतीय/वनीयजलोढ़/कच्छारीकाली मिट्टी
जलवायु प्रकारशुष्क व अर्द्धशुष्कउपआर्द्र (Sub-humid)आर्द्र (Humid)अतिआर्द्र (Very Humid)
औसत वार्षिक वर्षा10–40 सेमी40–60 सेमी60–80 सेमी80–120 सेमी
औसत ऊँचाई150–380 मीटर930 मीटर200–500 मीटर450–600 मीटर
भूमि का ढालउत्तर-पूर्व → दक्षिण-पश्चिमपार्श्ववर्ती (Lateral)पश्चिम → पूर्वदक्षिण → उत्तर व उत्तर → पूर्व
निर्माण कालटर्शियरी + प्लीस्टोसीन कालप्री-केम्ब्रियन काल (सबसे प्राचीन)प्लीस्टोसीन काल (प्रारंभिक)क्रिटेशियस काल
किस प्राचीन भूभाग का अवशेषटेथिस सागरगोंडवाना लैंडटेथिस सागरगोंडवाना लैंड
प्रमुख फसलेंग्वार, बाजरा, मोठमक्का, ज्वारगेहूँ, जौ, चना, सरसोंमसाले, सोयाबीन, कपास

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के 4 भौतिक प्रदेश (हाथ से रंग भरकर सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)

2.1 कौनसा भौतिक प्रदेश किस पड़ोसी राज्य/देश से सीमा साझा करता है?

यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि राजस्थान के 4 भौतिक प्रदेशों में से कौनसा प्रदेश किस पड़ोसी राज्य या देश की सीमा को छूता है — क्योंकि परीक्षा में अक्सर यह उल्टा करके पूछा जाता है (जैसे 'कौनसा प्रदेश किसी खास राज्य से सीमा साझा नहीं करता')।

पड़ोसी राज्य/देशकौनसा भौतिक प्रदेश सीमा साझा करता है
पाकिस्तान (अंतर्राष्ट्रीय सीमा)पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
मध्यप्रदेशदक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती)
गुजरातपश्चिमी मरुस्थल एवं अरावली प्रदेश दोनों
पंजाब व हरियाणापश्चिमी मरुस्थल एवं अर्द्धशुष्क (बांगड़) क्षेत्र

ध्यान रखें — यह गड़बड़ी बार-बार होती है: दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती) की सीमा हरियाणा से बिल्कुल नहीं लगती — हाड़ौती राज्य के दक्षिण-पूर्वी कोने में है, जबकि हरियाणा राज्य के उत्तर-पूर्वी कोने में है, यानी दोनों एक-दूसरे से भौगोलिक रूप से सबसे दूर स्थित हैं। परीक्षा में जब पूछा जाए 'कौनसा भौगोलिक क्षेत्र हरियाणा से सीमा साझा नहीं करता', तो उत्तर होगा — दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती)।

3उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल — थार मरुस्थल (Thar Desert)

राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश — क्षेत्रफल में राज्य का लगभग 61% हिस्सा घेरने वाला — थार मरुस्थल है। यह सिर्फ 'रेत का समुद्र' नहीं, बल्कि एक जटिल और वैज्ञानिक रूप से बेहद दिलचस्प भू-आकृतिक क्षेत्र है, जिसकी अपनी अलग जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और यहाँ तक कि अपनी खास शब्दावली (जैसे थली, रन, खड़ीन) भी है।

3.1 मूलभूत तथ्य (Key Facts)

बिंदुविवरण
निर्माणटेथिस सागर में, टर्शियरी काल (Tertiary Period) में हुआ
अन्य नामभारत का महान मरुस्थल (Great Indian Desert); रामायण व भगवद्गीता में इसे 'धनवा' कहा गया है
अंतरराष्ट्रीय विस्तारभारत में 85% भाग + पाकिस्तान में 15% भाग
विश्व में कुल क्षेत्रफल2,38,254 वर्ग किलोमीटर
पाकिस्तान में नामचोलिस्तान (Cholistan)
भारत में थार का राज्यवार विस्तार (अवरोही क्रम)राजस्थान (सर्वाधिक) > गुजरात > हरियाणा > पंजाब

राजस्थान में मरुस्थल का विस्तार

कुल क्षेत्रफललम्बाईचौड़ाईऔसत ऊँचाई
1,75,000 वर्ग किमी640 किमी300 किमी200–300 मीटर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में थार मरुस्थल का विस्तार व उच्चावच-आधारित 4 भाग (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)

💡 मरुस्थल का ढाल किस दिशा में है?

थार मरुस्थल का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है — उत्तर में घग्घर नदी का प्रभाव क्षेत्र है (जहाँ ऊँचाई लगभग 300 मीटर है) जबकि दक्षिण में लूनी नदी का प्रभाव क्षेत्र है (जहाँ ऊँचाई घटकर लगभग 150 मीटर रह जाती है)। इसका मतलब है कि मरुस्थल भी पूरी तरह सपाट नहीं है — यह उत्तर से दक्षिण की ओर धीरे-धीरे नीचा होता जाता है।

3.2 मरुस्थल का अध्ययन — उच्चावच (Relief) के आधार पर 4 भाग

क्रमभागविशेषता
1महान मरुस्थल (Great Desert)भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित बालुका स्तूप युक्त प्रदेश; बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर के मध्य-पूर्वी भाग में चट्टानी मरुस्थल भी शामिल
2चट्टानी मरुस्थल (Rocky Desert / हमादा)बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के मध्य-पूर्वी भाग में विस्तृत पथरीला प्रदेश
3लघु मरुस्थल क्षेत्र (Marginal Desert)चट्टानी मरुस्थल के पूर्व में, बीकानेर से लेकर गुजरात के कच्छ की खाड़ी तक विस्तृत
4अर्द्धशुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (Semi-Arid)अरावली के पश्चिम में, लूनी बेसिन एवं शेखावाटी क्षेत्र में विस्तृत

3.3 जलवायु के आधार पर वर्गीकरण

प्रकारनामऔसत वर्षाक्षेत्रफल
(a)शुष्क मरुस्थल (राठी प्रदेश)0 से 25 सेमीलगभग 1 लाख वर्ग किमी
(b)अर्द्धशुष्क मरुस्थल (बांगड़ प्रदेश)25 से 50 सेमीलगभग 75,000 वर्ग किमी

शुष्क मरुस्थल — राठी प्रदेश (Arid Desert / Rathi Region)

(A) बालुका स्तूप मुक्त प्रदेश — हमादा (41.5%)

हमादा (Hamada) एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है ऐसा पथरीला मरुस्थल जहाँ रेत के टीले (बालुका स्तूप) नहीं पाए जाते — यहाँ सतह चट्टानी और कठोर होती है। राजस्थान में हमादा का सर्वाधिक विस्तार जैसलमेर (पोकरण, रामगढ़, लोद्रुवा क्षेत्र), फलौदी का दक्षिणी-पश्चिमी भाग, एवं बाड़मेर के उत्तरी भाग में मिलता है।

विशेषताविस्तृत जानकारी
आकल वुड फॉसिल पार्कस्थिति: राष्ट्रीय मरू उद्यान, जैसलमेर | जीवाश्म निर्माण काल: जुरासिक काल (लगभग 18 करोड़ वर्ष पूर्व) | भारत व राजस्थान में सबसे प्राचीन लकड़ी के जीवाश्मों में से एक
अवसादी चट्टानी समूहमुख्यतः चूना पत्थर (Limestone) एवं बलुआ पत्थर (Sandstone) की प्रधानता
जल पट्टी / लाठी सीरिजप्राचीन सरस्वती नदी के भूगर्भिक नलीय अवशेष; पोकरण व मोहनगढ़ के बीच लगभग 60 किमी विस्तार; यहाँ सेवण घास अधिक पाई जाती है, इसीलिए इसे 'गोडावण की राखणस्थली' (Great Indian Bustard का संरक्षण क्षेत्र) भी कहा जाता है; चाँदन नलकूप यहाँ प्रसिद्ध है
दूसरी जलपट्टीबायतु (बाड़मेर) से साँचौर (जालौर) तक विस्तृत

(B) बालुका स्तूप युक्त प्रदेश (58.5%)

बालुका स्तूप (Sand Dune) पवन द्वारा मिट्टी के निक्षेपण (deposition) से बनी स्थलाकृति है — यानी हवा जब रेत के कणों को उड़ाकर एक जगह जमा करती है, तो टीले बन जाते हैं। स्थानीय भाषा में लहरदार बालुका स्तूप को 'धोरे' और स्थानांतरित/गतिशील बालुका स्तूप को 'धरियन' कहा जाता है। सर्वाधिक बालुका स्तूप जैसलमेर व चूरू में मिलते हैं, जबकि जोधपुर एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ सभी प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।

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4बालुका स्तूप के 9 प्रकार (McKee, 1979 का वर्गीकरण)

अमेरिकी भूवैज्ञानिक मेकी (E.D. McKee) ने वर्ष 1979 में बालुका स्तूपों को उनकी आकृति और बनने की प्रक्रिया के आधार पर 9 प्रकारों में वर्गीकृत किया। यह वर्गीकरण राजस्थान के मरुस्थल अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हर प्रकार का बालुका स्तूप अलग-अलग हवा की दिशा और गति को दर्शाता है — जैसे किसी बर्फ पर पड़े पैरों के निशान से यह पता चल जाए कि कोई किस दिशा में और कैसे चला था, वैसे ही बालुका स्तूप की आकृति से हवा की दिशा का पता चलता है।

💡 बालुका स्तूप बनने का सबसे आसान विज्ञान — रोज़मर्रा के उदाहरण से समझें

कल्पना कीजिए कि आप किसी मेज पर थोड़ा-सा आटा या रेत रखकर उसके ऊपर से लगातार एक ही दिशा में फूँक मारते रहें — कुछ देर बाद आप देखेंगे कि रेत एक खास आकार में जमा हो जाती है, और यह आकार इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस दिशा और कैसे फूँक मार रहे थे। बालुका स्तूप (Sand Dune) भी बिल्कुल इसी तरह बनते हैं — बस फूँकने की जगह प्राकृतिक हवा (पवन) काम करती है, और मेज़ की जगह पूरा मरुस्थल। नीचे दिए गए हर प्रकार के आगे एक आसान 'रोज़मर्रा की तुलना' (bracket में) दी गई है, ताकि आकृति तुरंत समझ आ जाए और याद रखना आसान हो।

1. बरखान (Barchan) — सबसे महत्वपूर्ण प्रकार

अन्य 8 प्रकार — संक्षेप में (हर प्रकार के साथ आसान तुलना)

2. अनुप्रस्थ बालुका स्तूप (Transverse Dune) — (आसान तुलना: जैसे समुद्र में लहरें एक सीध में एक के बाद एक चलती हैं) — जब पवन द्वारा मिट्टी का निक्षेपण पवन दिशा के समकोण (90°) पर होता है। सर्वाधिक: बीकानेर (पूगल), श्रीगंगानगर (सूरतगढ़), हनुमानगढ़ (रावतसर), चूरू, झुंझुनूं

3. अनुदैर्ध्य/रेखीय बालुका स्तूप (Longitudinal/Linear Dune) — (आसान तुलना: जैसे सड़क के किनारे-किनारे सीधी लाइन में बनी रेलिंग) — जब मिट्टी का निक्षेपण पवन की दिशा के समानांतर होता है। सर्वाधिक: जैसलमेर (दक्षिण-पश्चिम), जोधपुर, बाड़मेर; लूनी, जवाई एवं घग्घर बेसिन के पास भी मिलते हैं

4. पैराबोलिक/परवलयिक बालुका स्तूप (Parabolic Dune) — (आसान तुलना: बरखान से बिल्कुल उल्टा — जैसे अंग्रेज़ी के 'U' आकार का बालों में लगने वाला हेयरपिन (Hairpin), जिसके दोनों सिरे पीछे की ओर खुले हों, आगे की ओर नहीं) — राजस्थान के सभी मरुस्थलीय जिलों में पाए जाते हैं — सबसे व्यापक प्रकार

5. सीफ बालुका स्तूप (Seif Dune) — (आसान तुलना: जैसे किसी तलवार/चाकू की पतली और लंबी धार) — बरखान के निर्माण के समय जब पवन की दिशा बदल जाती है, तो बरखान की एक भुजा आगे बढ़ जाती है और सीफ बालुका स्तूप बनता है

6. तारानुमा बालुका स्तूप (Star Dune) — (आसान तुलना: जैसे आसमान में टिमटिमाता तारा, जिसकी कई नुकीली भुजाएँ चारों दिशाओं में निकली हों) — तीन या तीन से अधिक भुजाओं वाला बालुका स्तूप, जो अनियमित दिशाओं से चलने वाली हवाओं के कारण बनता है। सर्वाधिक: जैसलमेर (मोहनगढ़), श्रीगंगानगर (सूरतगढ़), बीकानेर

7. सब कापीस / नेबखा (Nebkha) — (आसान तुलना: जैसे किसी झाड़ी के चारों ओर हवा से उड़कर पत्ते व मिट्टी जमा हो जाए — छोटा और झाड़ी-केन्द्रित टीला) — मरुस्थल में झाड़ियों के पास बनने वाले छोटे बालुका स्तूप। सर्वाधिक: जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर

8. नेटवर्क बालुका स्तूप (Network Dune) — (आसान तुलना: जैसे मछली पकड़ने का जाल या मुर्गी के दड़बे की जाली, जिसमें कई टुकड़े आपस में जुड़े होते हैं) — एक-दूसरे से आपस में जुड़े हुए बालुका स्तूप। सर्वाधिक: जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर एवं हरियाणा के हिसार-भिवानी क्षेत्र तक विस्तृत

9. अवरोधी बालुका स्तूप (Obstacle Dune) — (आसान तुलना: जैसे सड़क पर बने किसी स्पीड-ब्रेकर या दीवार के दोनों तरफ हवा से उड़कर पत्ते-धूल जमा हो जाना) — अरावली की पहाड़ियों के अवरोध (रुकावट) के कारण उनके दोनों तरफ (पवन-सम्मुख व पवन-विमुख दिशा में) बनने वाले टीले। ये स्थिर होते हैं और इन पर वनस्पति का आवरण होता है, इसलिए इन्हें 'जीवावृत्त अवरोधी बालुका स्तूप' भी कहते हैं। सर्वाधिक: पुष्कर, बुढ़ा पुष्कर, नाग पहाड़ (अजमेर), विचून पहाड़, जोबनेर (जयपुर), सीकर, कुचामन की पहाड़ियाँ

संक्षिप्त सारणी — बालुका स्तूप के 9 प्रकार

क्रमप्रकारपवन से कोण / आकृतिसर्वाधिक कहाँ
1बरखानअर्द्धचन्द्राकारचूरू, जैसलमेर
2अनुप्रस्थसमकोण (90°)बीकानेर, गंगानगर
3अनुदैर्घ्य/रेखीयसमानांतरजैसलमेर, जोधपुर
4पैराबोलिकबालों की क्लिप (Hairpin)सभी मरु जिले (सर्वाधिक व्यापक)
5सीफबरखान की एक भुजा आगे बढ़ी
6तारानुमा3+ भुजाएँ, अनियमित हवाजैसलमेर (मोहनगढ़)
7सब कापीस (नेबखा)झाड़ियों के पासजैसलमेर, बीकानेर
8नेटवर्कएक-दूसरे से जुड़ेजैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर
9अवरोधीअरावली पहाड़ियों से अवरोधपुष्कर, जोबनेर, सीकर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) चित्र/आरेख — बालुका स्तूप के 9 प्रकारों की आकृतियाँ (प्रत्येक प्रकार की तुलनात्मक शक्ल दर्शाने हेतु रिक्त स्थान)

5अर्द्धशुष्क मरुस्थल / बांगड़ प्रदेश (Semi-Arid Desert / Bangad Region)

शुष्क मरुस्थल (जहाँ वर्षा 25 सेमी से कम है) और अरावली क्षेत्र (जहाँ वर्षा 50 सेमी तक होती है) के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र (transition zone) को अर्द्धशुष्क मरुस्थल या बांगड़ प्रदेश कहा जाता है। अध्ययन की सुविधा के लिए इसे 4 भागों में बाँटा गया है।

1. लूनी बेसिन (Luni Basin)

शब्द/विशेषताविवरण
नेहड़ रनलूनी बेसिन में जालौर जिले में स्थित; अन्य प्रमुख रन: पचपदरा, सनवरला, कपराना
लवणीय पादपमुख्यतः बालोतरा क्षेत्र में पाए जाते हैं
रोहीलूनी नदी एवं अरावली पर्वत के मध्य स्थित उपजाऊ मैदान
बजादा (Bajada)शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्र में पर्वत के पदीय (तलहटी) भाग में जलोढ़ पंख (गाद/मलबे) से बना मैदान
इन्सेलवर्ग (Inselberg)जर्मन भाषा का शब्द — Insel का अर्थ 'द्वीप' और Berg का अर्थ 'पहाड़'; मरुस्थल में अपरदन (कटाव) के बाद बची रह गई द्वीपनुमा चट्टान/पहाड़ी। उदाहरण: जालौर एवं बाड़मेर की पहाड़ियाँ

2. नागौरी उच्च भूमि (Nagauri Upland)

विशेषताविवरण
कूबड़/बांका पट्टीनागौर व अजमेर के मध्य स्थित; यहाँ भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है, जिसके कारण फ्लोरोसिस (हड्डियों की बीमारी) जैसी समस्याएँ पाई जाती हैं
लवणीय/खारे पानी की झीलेंइस क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक खारे पानी की झीलें पाई जाती हैं

3. शेखावाटी अंतःप्रवाह क्षेत्र (Shekhawati Internal Drainage)

स्थानीय शब्दअर्थ/विवरण
जोहड़शेखावाटी क्षेत्र में पानी के कच्चे कुओं को 'जोहड़' कहते हैं
तौरावाटीकाँतली नदी के अपवाह क्षेत्र को 'तौरावाटी' कहा जाता है; विस्तार: सीकर एवं झुंझुनूं
सरमानसून के दौरान शेखावाटी क्षेत्र में बनने वाले अस्थायी तालाब को 'सर' कहते हैं
बीड़शेखावाटी में चारागाह (पशुओं के चरने की) भूमियों को 'बीड़' कहते हैं; उदाहरण: बगड़, बोड़ (झुंझुनूं), फतेहपुर बीड़ (सीकर)

4. घग्घर बेसिन (Ghaggar Basin)

विशेषताविवरण
नाली/पाटहनुमानगढ़ में घग्घर नदी को स्थानीय भाषा में 'नाली/पाट' कहते हैं
काठी/बागीघग्घर बेसिन की चिकनी एवं उपजाऊ मिट्टी को 'काठी/बागी' कहते हैं
प्रमुख फसलेंगेहूँ, चावल, कपास, गन्ना — घग्घर बेसिन की उपजाऊ मिट्टी के कारण यहाँ ये फसलें प्रचुर मात्रा में उगाई जाती हैं

6मरुस्थल से संबंधित शब्दावली, प्रमुख रन एवं महत्व

मरुस्थल की अपनी एक खास भौगोलिक शब्दावली है, जो परीक्षा में बहुत बार पूछी जाती है। इन शब्दों को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका है — हर शब्द को उसके उदाहरण (example) के साथ जोड़कर याद करना।

6.1 महत्वपूर्ण शब्दावली

शब्दपरिभाषा/विवरण
प्लाया झील (Playa Lake)मरुस्थल में बनने वाली अस्थायी पानी की झीलें, जो बरसात में भर जाती हैं और गर्मी में सूख जाती हैं; सर्वाधिक जैसलमेर में
खड़ीन (Khadin)पश्चिमी राजस्थान (विशेषकर जैसलमेर) में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा वर्षा जल संचयन हेतु बनाई गई पारंपरिक कृषि प्रणाली/झीलें
थली (Thali)मरुस्थल के ऊँचे उठे हुए भाग को 'थली' कहते हैं; मुख्यतः बीकानेर व चूरू में पाई जाती है — यहाँ कोई नदी प्रवाहित नहीं होती
तल्ली (Talli)मरुस्थल में बालुका स्तूपों के मध्य स्थित निचली भूमि (Depression)
रन/टाट/ढाढ़ (Rann)लवणीय, दलदली एवं अनुपजाऊ भूमि व झीलें; इसका कारण मारका शिष्ट (Marl-schist) चट्टानें हैं; सर्वाधिक जैसलमेर व बाड़मेर में
नखलिस्तान/मरू उद्यान (Oasis)मरुस्थल में जल-बेसिन के कारण बनने वाला हरा-भरा वनस्पति क्षेत्र; उदाहरण: कोलायत झील (बीकानेर), गजनेर (बीकानेर), गड़ीसर (जैसलमेर)
बालसन (Balsan)मरुस्थल में पहाड़ियों के मध्य स्थित जल-बेसिन; उदाहरण: साँभर झील
बाप बोल्डर-क्ले (Bap Boulder Clay)हिमनद (Glacier) द्वारा जमा किए गए बड़े कंकर-पत्थर व अवसाद; निर्माण काल: पर्मो-कार्बोनिफेरस काल; स्थित: फलौदी
पीवणा साँपसाँप की एक विशेष प्रजाति जिसका रंग पीला होता है; सर्वाधिक जैसलमेर क्षेत्र में पाई जाती है
मरुस्थल का मार्च (March of Desert)इसका अर्थ है मरुस्थल का धीरे-धीरे आगे बढ़ना (फैलना); दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर (यानी हरियाणा, गुजरात, पंजाब की दिशा में); इसमें सबसे अधिक योगदान बरखान बालुका स्तूप का होता है क्योंकि यह सबसे तेज़ी से खिसकता है
थोरोसोरस इंडिक्स (Thorosaurus Indicus)जैसलमेर के जेठवाई क्षेत्र में IIT रूड़की एवं भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा खोजे गए प्राचीन डायनासोर जीवाश्म, जिनकी आयु लगभग 16-17 करोड़ वर्ष आँकी गई है

6.2 राजस्थान के प्रमुख रन (Major Ranns)

जिलाप्रमुख रन
चूरूतालछापर, परिहारा/पड़िहारा
फलौदीबाप, फलौदी
जैसलमेरभाकरी, पोकरण
बालोतराथोब, पचपदरा
बाड़मेररेडाना

6.3 मरुस्थल का महत्व (Importance of the Desert)

मरुस्थल को अक्सर एक 'बंजर', बेकार भूमि समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में थार मरुस्थल राजस्थान (और भारत) के लिए आर्थिक व सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

महत्व का क्षेत्रविवरण
नवीकरणीय ऊर्जासौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा उत्पादन की सर्वाधिक संभावना उत्तरी-पश्चिमी राजस्थान में है — साफ आसमान व तेज़ हवाओं के कारण
खनिज संपदाजीवाश्म खनिज/ऊर्जा खनिज जैसे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयला यहाँ पाए जाते हैं (बाड़मेर-सांचौर बेसिन प्रमुख)
परमाणु परीक्षणपोकरण (जैसलमेर) — भारत की परमाणु परीक्षण स्थली (1974 व 1998 के परीक्षण यहीं हुए)
सैन्य प्रशिक्षणचाँदन फील्ड फायरिंग रेंज (जैसलमेर) एवं महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (बीकानेर) — भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण स्थल
पशु सम्पदाबाड़मेर, जोधपुर क्षेत्र में पशुधन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है
नमक उत्पादनखारे पानी की झीलें अधिक होने से नमक उत्पादन प्रमुख गतिविधि है — साँभर, पचपदरा, डीडवाना प्रमुख केंद्र
पर्यटनऊँट महोत्सव (बीकानेर), मरु महोत्सव (जैसलमेर), मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर), थार महोत्सव (बाड़मेर) — मरुस्थल पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है
जैव विविधताआश्चर्यजनक रूप से विश्व के अन्य मरुस्थलों की तुलना में थार में जैव विविधता कहीं अधिक है
खाद्यान्न उत्पादनमोटा अनाज, विशेषकर बाजरा, उत्तरी-पश्चिमी राजस्थान में प्रचुर मात्रा में उगाया जाता है

7अरावली पर्वतमाला (Aravalli Mountain Range)

अगर थार मरुस्थल राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश है, तो अरावली पर्वतमाला इसकी सबसे पुरानी और सबसे विशिष्ट पहचान है। यह विश्व की सबसे प्राचीन मोड़दार (folded) पर्वतमालाओं में से एक मानी जाती है — हिमालय से भी बहुत पुरानी! अरावली न सिर्फ एक भौगोलिक सीमा-रेखा है, बल्कि यह पूर्वी राजस्थान को मरुस्थल में बदलने से भी रोकती है।

7.1 अरावली के अन्य नाम एवं निर्माण

वर्गीकरण का आधारजानकारी
निर्माण काल के अनुसारप्राचीनतम (Oldest) पर्वतमाला — विश्व की सबसे पुरानी पर्वत शृंखलाओं में से एक
निर्माण प्रक्रिया के अनुसारवलित/मोड़दार पर्वत (Folded Mountain)
वर्तमान स्थिति के अनुसारअवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain) — यानी करोड़ों वर्षों के अपरदन (कटाव) के बाद बचा हुआ प्राचीन पर्वत
चट्टान समूहदिल्ली महासमूह — जिसमें अजबगढ़ समूह व अलवर समूह शामिल हैं; रायलो समूह — ए.एम. हैरोन (A.M. Heron) द्वारा वर्णित

7.2 अरावली की आकृति एवं विस्तार

कुल लम्बाईराजस्थान में लम्बाईराजस्थान में प्रतिशत हिस्साऔसत ऊँचाई
692 किमी550 किमीलगभग 80% हिस्सा930 मीटर

ध्यान रखें: अरावली की चौड़ाई दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर जाने पर लगातार कम होती जाती है — यानी दक्षिणी अरावली (सिरोही-उदयपुर क्षेत्र) सबसे चौड़ी है, जबकि उत्तरी अरावली (अलवर-जयपुर क्षेत्र) की चौड़ाई सबसे कम और अनिश्चित है।

7.3 राजस्थान में अरावली के 3 भाग

विशेषताउत्तरी अरावलीमध्य अरावलीदक्षिणी अरावली
विस्तारझुंझुनूं व जयपुर के मध्यजयपुर व राजसमंद के मध्य (मेवाड़ा अरावली)राजसमंद व सिरोही के मध्य
प्रमुख जिलेझुंझुनूं, सीकर, जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अलवर, दौसाअजमेर, ब्यावर, टोंकसिरोही, राजसमंद, डूंगरपुर, उदयपुर, सलूंबर
सर्वोच्च चोटीरघुनाथगढ़ (1055 मीटर, सीकर)टॉडगढ़ (934 मीटर, ब्यावर)गुरुशिखर (1722 मीटर, माउंट आबू, सिरोही)
औसत ऊँचाई450 मीटर700 मीटर1000 मीटर
चौड़ाईअनिश्चित (सबसे कम)30 किमी100 किमी (सबसे अधिक)

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में अरावली के 3 भाग: उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी अरावली (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)

8अरावली की चोटियाँ, पठार, दर्रे एवं स्थानीय शब्दावली

8.1 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण चोटियाँ (अवरोही क्रम में)

क्रमचोटीऊँचाई (मीटर)जिला
1गुरुशिखर1722माउंट आबू (सिरोही)
2सेर1597माउंट आबू (सिरोही)
3दिलवाड़ा1442माउंट आबू (सिरोही)
4जरगा1431उदयपुर
5अचलगढ़1380माउंट आबू (सिरोही)
6कुम्भलगढ़1224राजसमंद
7धोनिया1183राजसमंद
8रघुनाथगढ़1055सीकर
9लोहार्गल1051झुंझुनूं
10मालखेत1050सीकर
11ऋषिकेश1017सिरोही
12कमलनाथ1001उदयपुर
13सज्जनगढ़938उदयपुर
14टॉडगढ़ (मोरमजी/गोरमजी)934ब्यावर
15सायरा900उदयपुर
16तारागढ़873अजमेर
17बिलाली775अलवर
18रोजा भाकर730जालौर
19बैराठ704कोटपूतली-बहरोड़
💡 गुरुशिखर के बारे में विशेष जानकारी

गुरुशिखर की वास्तविक ऊँचाई 1722 मीटर है, लेकिन इसके ऊपर बने दत्तात्रेय ऋषि मंदिर (लगभग 5 मीटर ऊँचा) को मिलाकर कुल ऊँचाई 1727 मीटर मानी जाती है — परीक्षा में दोनों आँकड़े पूछे जा सकते हैं, इसलिए दोनों याद रखें। कर्नल जेम्स टॉड ने गुरुशिखर को 'सन्तों का शिखर' कहा था। गुरुशिखर सिरोही जिले में सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित है, जबकि इसका सर्वाधिक भौगोलिक विस्तार उदयपुर जिले में है। गुरुशिखर का नामकरण ऋषि दत्तात्रेय के नाम पर हुआ है।

क्षेत्रवार अतिरिक्त महत्वपूर्ण चोटियाँ

चोटीजिलाऊँचाई (मीटर)अरावली भाग
जयराजसिरोही1090दक्षिणी
माकड़मगराउदयपुर989दक्षिणी
सुंधा पर्वतभीनमाल (जालौर)991दक्षिणी
लीलागढ़उदयपुर874दक्षिणी
डोरा पर्वतजसवंतपुरा (जालौर)869दक्षिणी
नागपानीउदयपुर867दक्षिणी
गोगुन्दाउदयपुर840दक्षिणी
इसराना भाखरजालौर839दक्षिणी
झारोला भाखरजालौर588दक्षिणी
भोजगढ़सीकर997उत्तरी
खोजयपुर920उत्तरी
हर्ष पहाड़ीसीकर820उत्तरी
भैंराचअलवर792उत्तरी
बरवाड़ाजयपुर786उत्तरी
घोसी (आग्नेयगिरि)झुंझुनूं740उत्तरी
जयगढ़जयपुर648उत्तरी
नाहरगढ़जयपुर599उत्तरी

रोचक तथ्य: घोसी पहाड़ी (740 मीटर) राजस्थान-हरियाणा सीमा पर झुंझुनूं जिले में स्थित है — यह देखने में एक सुप्त ज्वालामुखी जैसी लगती है, इसीलिए इसे 'आग्नेयगिरि' भी कहा जाता है। हर्ष पहाड़ी (820 मीटर) सीकर में स्थित हर्षनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। खो पहाड़ी (920 मीटर) जयपुर में है, जबकि उदयनाथ पर्वत (अलवर) रूपारेल नदी का उद्गम स्थल है।

8.2 स्थानीय भौगोलिक शब्दावली (Local Geographic Terms)

शब्दअर्थ एवं स्थान
भाकरतीव्र ढाल वाली ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियाँ, मुख्यतः सिरोही क्षेत्र में; जालौर में इसराना, रोजा एवं झारोला भाखर इसके उदाहरण हैं — ध्यान रहे, डूंगरपुर/बाँसवाड़ा में इस प्रकार की पहाड़ियाँ नहीं पाई जातीं
गिरवाउदयपुर बेसिन के चारों ओर तश्तरीनुमा (saucer-shaped) पहाड़ों की मेखला/शृंखला — इसे 'उदयपुर की घाटी का घेरा' भी कहा जाता है
आडावाला पर्वतबूंदी और सवाई माधोपुर की विन्ध्यन क्रम की अरावली श्रेणियाँ (Vindhyan series hills)
मेरवाड़ा पहाड़ियाँमध्य अरावली में टॉडगढ़ (ब्यावर) के निकट स्थित; ये मारवाड़ के मैदान को मेवाड़ के पठार से अलग करती हैं; जिले: अजमेर, ब्यावर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, भीलवाड़ा
तोरावाटी पहाड़ियाँशेखावाटी क्षेत्र में नीम का थाना (पश्चिमी), झुंझुनूं (दक्षिण) एवं सीकर (पूर्वी) क्षेत्रों में विस्तृत
आबू पर्वत खण्डपूरी तरह ग्रेनाइट चट्टान से निर्मित; आकृति: बैथोलिथ (Batholith) एवं विशाल इन्सेलबर्ग; माउंट आबू नगर लगभग 1300 मीटर की ऊँचाई पर बसा है — यह राजस्थान का सबसे ऊँचाई पर बसा नगर है (दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़ है)

पहाड़ी और उन पर स्थित किले

पहाड़ी का नामकिला
त्रिकूट पहाड़ी (जैसलमेर)सोनार किला (जैसलमेर)
कनकाचल/सुवर्णगिरीजालौर का किला
चिड़ियाटूंक/पंचटियेलामेहरानगढ़ (जोधपुर)
हेमकुट/गंधमादनकुम्भलगढ़ (राजसमंद)
देवगिरीदौसा का किला
कालीखोहआमेर (जयपुर)
कोशवर्द्धनशेरगढ़ (बारां)
बीठलीतारागढ़ (अजमेर)
मेसा पठार (620 मीटर)चित्तौड़गढ़ का किला
नानी सिरड़ीसोजत किला (पाली)

8.3 अरावली के प्रमुख पठार (Plateaus)

पठारजिला/स्थितिविशेष तथ्य
उड़िया पठारसिरोहीराजस्थान का सबसे ऊँचा पठार; ऊँचाई: 1360 मीटर; गुरुशिखर से लगभग 8 किमी नीचे
आबू पठारसिरोहीऊँचाई: 1200 मीटर; लम्बाई 19 किमी, चौड़ाई 8 किमी; गुम्बदाकार (बैथोलिथ) संरचना
भोराट पठारराजसमंद-उदयपुरराजस्थान का दूसरा सबसे ऊँचा पठार; ऊँचाई: 1225 मीटर; कुम्भलगढ़ हिल्स व गोगुन्दा हिल्स के बीच स्थित; एक जल-विभाजक पठार (Watershed Plateau); जरगा चोटी यहीं स्थित है
भोमट पठारडूंगरपुर-उदयपुरभील जनजाति का प्रमुख क्षेत्र
लसाड़िया पठारसलूंबर-प्रतापगढ़जयसमन्द झील के पूर्व में स्थित; एक उत्खात (Bad Land) पठार
क्रांसका+कांकणवाड़ीअलवर (सरिस्का)उत्तरी अरावली में स्थित; सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य यहीं स्थित है
मेसा पठारचित्तौड़गढ़ऊँचाई: 620 मीटर; इस पर चित्तौड़गढ़ का विश्व-प्रसिद्ध किला स्थित है
ऊपरमालभीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) से बिजोलिया (भीलवाड़ा) तक विस्तृत; यह हाड़ौती पठार का ही एक भाग माना जाता है; जिले: कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा

पश्चिम से पूर्व क्रम याद रखें: भोराट पठार → लसाड़िया पठार → ऊपरमाल → हाड़ौती पठार — यह क्रम परीक्षा में बहुत बार पूछा जाता है, इसलिए दिशा (पश्चिम से पूर्व) के साथ याद रखें।

8.4 अरावली के प्रमुख दर्रे/नाल (Passes)

दर्रा (Pass) पहाड़ों के बीच वह प्राकृतिक रास्ता है, जिससे होकर एक तरफ से दूसरी तरफ आना-जाना आसान होता है — जैसे किसी दीवार में एक दरवाज़ा हो। राजस्थान में सबसे अधिक दर्रे दक्षिणी अरावली (विशेषकर राजसमंद जिले) में पाए जाते हैं।

दर्रा/नालजिलाविशेष जानकारी
देबर नालसलूंबरजयसमन्द झील गोमती नदी पर बनी है, जिसे 'ढेवर झील' भी कहते हैं — यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है
फुलवारी नालउदयपुर (कोटड़ा)यहाँ से सोम, मानसी एवं वाकल नदियाँ बहती हैं
केवड़ा नालउदयपुरउदयपुर एवं सलूंबर को जोड़ती है
देबारी नालउदयपुरउदयपुर एवं चित्तौड़गढ़ को राष्ट्रीय राजमार्ग NH-27 से जोड़ती है
पगल्या नाल/झीलवाड़ाराजसमंदमेवाड़ (राजसमंद) को मारवाड़ (पाली) से जोड़ती है
हाथीगुड़ा नालराजसमंदराजसमंद, गोगुन्दा (उदयपुर) व सिरोही को आपस में जोड़ती है
देसूरी नालपालीपाली को चारभुजानाथ मन्दिर (राजसमंद) से जोड़ती है
बर नालब्यावर (मध्य अरावली)मारवाड़ (जोधपुर, पाली) को मेरवाड़ा (ब्यावर, अजमेर) से जोड़ती है
बोरांग दर्रासिरोही (दक्षिण)सिरोही (आबू क्षेत्र) को उदयपुर से जोड़ता है
गोरम घाटराजसमंदएक प्रसिद्ध रेलवे घाट एवं लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्र
खामली/कमली घाटराजसमंदनाथद्वारा को जोड़ने वाला घाट
पखेरिया/परवेरियाब्यावर (मध्य अरावली)ब्यावर के 5 प्रमुख दर्रों में से एक
शिवपुर घाटब्यावर (मध्य अरावली)ब्यावर के 5 प्रमुख दर्रों में से एक
सुरा घाटब्यावर (मध्य अरावली)ब्यावर से भीलवाड़ा जाने का मार्ग
पीपली दर्रासिरोहीदक्षिणी अरावली का एक प्रमुख दर्रा
हाथी दर्राउदयपुरपिंडवाड़ा (सिरोही) को उदयपुर से जोड़ता है — ध्यान रहे, 'हाथीगुड़ा नाल' और 'हाथी दर्रा' दो अलग-अलग दर्रे हैं, इन्हें भ्रमित न करें

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — अरावली की प्रमुख चोटियाँ, पठार एवं दर्रे (स्थान-चिह्न अंकित करने हेतु रिक्त मानचित्र)

💡 ब्यावर के 5 दर्रे — याद रखने का आसान तरीका

मध्य अरावली में ब्यावर क्षेत्र से होकर 5 प्रमुख दर्रे गुजरते हैं — बर, पखेरिया/परवेरिया, शिवपुर घाट, देबारी एवं सुरा घाट। साथ ही ध्यान रहे — देसूरी की नाल, झीलवाड़ा की नाल और पगल्या की नाल — ये तीनों नाम असल में एक ही दर्रे को संदर्भित करते हैं, इसलिए परीक्षा में पाली या राजसमंद दोनों ही सही उत्तर माने जा सकते हैं। सर्वाधिक दर्रे राजसमंद जिले में पाए जाते हैं।

8.5 अरावली का महत्व (Importance of Aravalli)

महत्वविवरण
मरुस्थलीकरण रोकनाअरावली एक प्राकृतिक अवरोधक (Barrier) के रूप में कार्य करती है, जो पूर्वी राजस्थान को मरुस्थल में बदलने से रोकती है
जैव विविधतायहाँ वनस्पति का अधिक विस्तार है, इसलिए जैव विविधता भी अधिक पाई जाती है
जनजातीय संरक्षणअरावली को 'जनजातियों की शरणस्थली' कहा जाता है — मीणा जनजाति (जयपुर), भील जनजाति (उदयपुर), गरासिया जनजाति (सिरोही) यहाँ बसती हैं
खनिज संपदाधारवाड़ क्रम की चट्टानों के कारण यहाँ धात्विक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं
जल विभाजक रेखाअरावली राज्य के अपवाह तंत्र को दो भागों में बाँटती है — पश्चिमी ढाल का पानी अरब सागर में और पूर्वी ढाल का पानी बंगाल की खाड़ी में जाता है
झीलेंराजस्थान की अधिकांश मीठे पानी की झीलें अरावली क्षेत्र (विशेषकर उदयपुर) में स्थित हैं
पर्यटनअजमेर-पुष्कर (धार्मिक पर्यटन) एवं माउंट आबू (हिल स्टेशन पर्यटन) अरावली क्षेत्र की प्रमुख पहचान हैं
प्राचीन सभ्यताप्राचीन सभ्यताएँ — आहड़, गिलुण्ड, वैराठ, गणेश्वर — तथा नवीन शहर जयपुर, अजमेर, उदयपुर अरावली क्षेत्र में ही बसे हैं
योजना प्रदेशअरावली को 'राजस्थान का योजना प्रदेश' भी कहा जाता है — यहाँ वानिकी, मृदा संरक्षण, जनजातीय विकास व पर्यटन से जुड़ी कई सरकारी योजनाएँ केंद्रित हैं

पीडमांट (Piedmont) क्या है?: पीडमांट अंग्रेज़ी के दो शब्दों से मिलकर बना है — Pied (पैर/तलहटी) + Mont (पर्वत) — यानी 'पर्वत की तलहटी वाला क्षेत्र'। राजस्थान में इसका उदाहरण देवगढ़ (राजसमंद) है।

9पूर्वी मैदानी प्रदेश (Eastern Plains Region)

राजस्थान के चारों भौतिक प्रदेशों में सबसे नया (youngest) प्रदेश पूर्वी मैदान है। यह मुख्यतः नदियों द्वारा लाए गए अवसादों (sediments) के जमाव से बना है, और इसका निर्माण प्लीस्टोसीन काल (Pleistocene Period) में हुआ। चूँकि यहाँ की मिट्टी जलोढ़ (alluvial) है, इसलिए यह राजस्थान का सबसे उपजाऊ क्षेत्र भी है। अध्ययन की दृष्टि से पूर्वी मैदान को 3 भागों में बाँटा जाता है।

1. माही मैदान (Mahi Plain)

2. बनास-बाणगंगा मैदान (Banas-Banaganga Plain)

भागमेवाड़ मैदानमालपुरा-करौली मैदान
स्थितिबनास नदी का दक्षिणी मैदानबनास नदी का उत्तरी मैदान
विस्तारचित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमंदअजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर
मिट्टीभूरी मिट्टीजलोढ़ मिट्टी
💡 बाणगंगा मैदान

बाणगंगा मैदान को 'रोही का मैदान' भी कहा जाता है, इसका विस्तार जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा एवं भरतपुर तक है। यहाँ मुख्यतः जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है, और चूँकि यह मिट्टी सबसे अधिक उपजाऊ है, इसलिए यहाँ जनसंख्या घनत्व भी अधिक है — यानी उपजाऊ मिट्टी सीधे तौर पर घनी आबादी का कारण बनती है, यह एक महत्वपूर्ण भौगोलिक सिद्धांत है जो पूरे पूर्वी मैदान पर लागू होता है।

3. चम्बल का मैदान (Chambal Plain)

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — पूर्वी मैदानी प्रदेश के 3 भाग: माही मैदान, बनास-बाणगंगा मैदान, चम्बल का मैदान (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)

पूर्वी मैदान का महत्व

महत्वविवरण
कृषि उत्पादकतासर्वाधिक उपजाऊ जलोढ़ मृदा होने के कारण यहाँ कृषि उत्पादकता सबसे अधिक है
जनघनत्वउपजाऊ जलोढ़ मिट्टी के कारण जनसंख्या घनत्व भी सर्वाधिक है
आधारभूत अवसंरचनासड़क, विद्युत, परिवहन एवं शिक्षा जैसी सुविधाएँ यहाँ सबसे अधिक विकसित हैं
उद्योगराजस्थान के सबसे विकसित औद्योगिक केंद्र — जयपुर व अलवर — इसी क्षेत्र में स्थित हैं
पक्षी जैव विविधताबन्ध बारैठा एवं केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) — दोनों विश्व-प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य इसी क्षेत्र में स्थित हैं

10हाड़ौती पठार / दक्षिण-पूर्वी पठार (Hadoti Plateau)

राजस्थान का सबसे छोटा (क्षेत्रफल में मात्र 6.89%) लेकिन भूवैज्ञानिक दृष्टि से बेहद दिलचस्प प्रदेश है हाड़ौती पठार। यह असल में मध्यप्रदेश के मालवा पठार का ही उत्तरी विस्तार है, और इसका निर्माण बेसाल्ट लावा चट्टानों (ज्वालामुखी से निकले पिघले पदार्थ के जमने से बनी चट्टानें) एवं विन्ध्यन शैलों से हुआ है।

बिंदुजानकारी
संबंधमालवा पठार (मध्यप्रदेश) का उत्तरी विस्तार
निर्माणबेसाल्ट लावा चट्टानें + विन्ध्यन शैलें
निर्माण कालक्रिटेशियस काल (राजस्थान के 4 प्रदेशों में दूसरा सबसे प्राचीन)
औसत ऊँचाईलगभग 500 मीटर

10.1 हाड़ौती के 2 मुख्य भाग

आधार(i) दक्कन लावा पठार(ii) विन्ध्यन कगार
स्थितिहाड़ौती के दक्षिण मेंहाड़ौती के दक्षिण-पूर्व में
विस्तारमालव प्रदेश (प्रतापगढ़, झालावाड़) + ऊपरमाल (भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़)हाड़ौती (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) + डांग क्षेत्र (सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर)
खनिज/चट्टानबेसाल्ट लावाबलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोटा स्टोन, हीरा, लाल पत्थर (धौलपुर)
💡 ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट (Great Boundary Fault / GBF)

ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट (जिसे MBF या महान सीमान्त भ्रंश भी कहते हैं) अरावली पर्वतीय प्रदेश एवं हाड़ौती पठार के बीच स्थित एक भ्रंश (Fault — यानी भूगर्भीय दरार) है। भ्रंश का सीधा मतलब है कि यहाँ धरती की दो अलग-अलग चट्टानी परतें आपस में टकराकर एक तीखी सीमा-रेखा बनाती हैं — जैसे दो अलग रंग के कपड़ों को सिलाई से जोड़ा गया हो। इसका महत्व इतना अधिक है कि इसे विश्व धरोहर (World Heritage) स्थलों में शामिल किए जाने पर विचार होता रहा है। इसका विस्तार चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली एवं धौलपुर जिलों तक है।

10.2 हाड़ौती के 5 उपप्रदेश

1. अर्द्धचन्द्राकार पर्वत श्रेणी

हाड़ौती के उत्तर-पश्चिम एवं दक्षिण में स्थित यह पर्वत श्रेणी दो भागों में बँटी है — बूंदी हिल्स एवं मुकुंदरा पर्वत श्रेणी।

विशेषताबूंदी हिल्समुकुंदरा पर्वत श्रेणी
स्थितिबूंदी (दोहरी पर्वतमाला)कोटा-झालावाड़
लम्बाई18 किमी120 किमी
ऊँचाई300-350 मीटर; सर्वोच्च: सतूर (353 मीटर)335-503 मीटर; सर्वोच्च: चंदवाड़ी (517 मीटर, झालावाड़)
प्रमुख दर्रेबूंदी, लाखेरी, जैतावास, रामगढ़-खटगड़ (बूंदी से 13 किमी पश्चिम)

2. नदी निर्मित मैदान

चम्बल नदी एवं इसकी सहायक नदियों — कालीसिंध, पार्वती, मेज — द्वारा निर्मित उपजाऊ मैदान।

3. शाहाबाद उच्च भूमि

4. झालावाड़ पठार

5. डग-गंगधार उच्च भूमि

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — हाड़ौती पठार के 5 उपप्रदेश (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)

हाड़ौती का महत्व

महत्वविवरण
कृषि उत्पादकताकाली मिट्टी होने के कारण यहाँ कृषि उत्पादकता उच्च है, विशेषकर सोयाबीन जैसी फसलों के लिए
जनघनत्वउपजाऊ मिट्टी के कारण जनसंख्या घनत्व भी अपेक्षाकृत अधिक है
खनिज संपदापत्थर आधारित खनिज — बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोटा स्टोन, तथा धौलपुर का लाल पत्थर (रेड स्टोन) प्रसिद्ध हैं
जल उपलब्धतासर्वाधिक नदियाँ होने के कारण यहाँ सतही जल की उपलब्धता अधिक है (चम्बल, कालीसिंध, पार्वती, मेज)
जलीय जैव विविधताघड़ियाल, मगरमच्छ, उदबिलाव (Otter) एवं गांगेय सूस (Gangetic Dolphin) जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं — विशेषकर राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य में

11नवीनतम अपडेट 2025-26 (Latest Updates — इंटरनेट रिसर्च आधारित)

इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम घटनाओं और आँकड़ों को यहाँ शामिल किया गया है — ये तथ्य किसी पुरानी किताब में नहीं मिलेंगे।

💡 अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट — पुनः लॉन्च (जून 2025)

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को पहली बार वर्ष 2023 में शुरू किया गया था, जिसके तहत अरावली पर्वतमाला के चारों ओर 5 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी (buffer zone) बनाने की योजना थी। 5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) को केंद्र सरकार ने इस परियोजना को और बड़े पैमाने पर पुनः लॉन्च किया — अब यह परियोजना राजस्थान, हरियाणा, गुजरात एवं दिल्ली के कुल 29 जिलों को कवर करेगी, तथा लगभग 1,400 किमी लम्बी एवं 5 किमी चौड़ी हरित पट्टी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत 2027 तक लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने तथा 29 जिलों में 1,000 पौधशालाएँ (nurseries) स्थापित करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री द्वारा चलाए गए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को भी इस परियोजना से जोड़ा गया है। गौरतलब है कि राजस्थान में सबसे अधिक क्षतिग्रस्त भूमि (लगभग 81%) है, और ISRO (2021) के अनुसार राज्य के लगभग 68.3% भूभाग में मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया चल रही है।

💡 अरावली में खनन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख (दिसम्बर 2025 – जनवरी 2026)

दिसम्बर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान एवं गुजरात में अरावली क्षेत्र में सभी नई खनन लीज (mining lease) पर अंतरिम रोक लगा दी — यानी अरावली के संरक्षित क्षेत्रों में कोई नया खनन कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि अरावली की सटीक भौगोलिक परिभाषा एवं सीमांकन (demarcation) तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। जून 2026 में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च-अधिकार प्राप्त समिति (High-Powered Committee) गठित की गई, जो अरावली की परिभाषा एवं सीमा-निर्धारण की समीक्षा करेगी। जनवरी 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने राजस्थान में जारी अवैध खनन एवं वृक्षों की कटाई पर भी सख्त टिप्पणी की।

💡 थार मरुस्थल — मरुस्थलीकरण में गिरावट का सकारात्मक रुझान (2025)

हैरानी की बात यह है कि हाल के आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान में मरुस्थलीकरण (Desertification) की प्रक्रिया धीमी पड़ रही है — देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के सापेक्ष राजस्थान में मरुस्थलीकरण की दर 2003-05 में 6.58% थी, जो 2011-13 में घटकर 6.55% और 2018-19 में घटकर 6.46% रह गई। राजस्थान भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ 2003-05 के बाद से भूमि क्षरण (Land Degradation) के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल लगभग 3,87,000 हेक्टेयर तक घट गया है। इसका कारण है — अधिक वर्षा, कम होते बालुका स्तूप, अधिक सिंचित कृषि भूमि, अधिक हरियाली एवं कम धूल भरी आँधियाँ। हालाँकि, ध्यान रहे — राजस्थान अभी भी क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में सबसे अधिक मरुस्थलीकरण प्रभावित राज्य (लगभग 2.12 करोड़ हेक्टेयर) बना हुआ है, बस इसकी दर घट रही है।

💡 रामगढ़ क्रेटर — भारत का पहला अधिसूचित भू-विरासत स्थल

हाड़ौती पठार के अंतर्गत आने वाले शाहाबाद उच्च भूमि क्षेत्र में स्थित रामगढ़ क्रेटर (बारां) को हाल ही में भारत के पहले आधिकारिक रूप से अधिसूचित भू-विरासत स्थल (Notified Geo-Heritage Site) के रूप में मान्यता दी गई है। यह बारां जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी दूर स्थित है। सरकार इसे भू-पर्यटन (Geo-Tourism) केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 57 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य करवा रही है — जिसमें दर्शक केंद्र, मार्ग सुविधाएँ एवं संरक्षण संबंधी ढांचा शामिल है।

12त्वरित पुनरावृत्ति एवं सारांश (Quick Revision)

12.1 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — वर्गीकरण एवं सामान्य जानकारी

प्रश्नउत्तर
राजस्थान को भौगोलिक कारकों के आधार पर कितने भौतिक प्रदेशों में बाँटा गया है?4 (मरुस्थल, अरावली, पूर्वी मैदान, हाड़ौती)
V.C. मिश्रा ने राजस्थान को कितने भागों में बाँटा?7 भागों में (पुस्तक: Geography of Rajasthan, 1967)
राजस्थान का सबसे प्राचीन भौगोलिक प्रदेश कौनसा है?अरावली पर्वतीय प्रदेश
राजस्थान का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा भौगोलिक प्रदेश कौनसा है?पश्चिमी मरुस्थल (61.11%)
राजस्थान की प्री-केम्ब्रियन चट्टानों का वर्णन किसने किया?ए.एम. हैरोन (A.M. Heron)

12.2 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — मरुस्थल

प्रश्नउत्तर
थार मरुस्थल से प्रभावित क्षेत्रफल एवं जनसंख्या का प्रतिशत?क्षेत्रफल 61%, जनसंख्या 40%
राजस्थान का कौनसा भौतिक प्रदेश पाकिस्तान से सीमा साझा करता है?पश्चिमी मरुस्थल
बालुका स्तूपों का वर्गीकरण किसने किया?मेकी (McKee), वर्ष 1979 में, 9 प्रकारों में
सबसे अधिक गतिशील बालुका स्तूप कौनसा है?बरखान (Barchan)
जोधपुर की क्या विशेषता है (बालुका स्तूप के संदर्भ में)?यहाँ सभी 9 प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं
हमादा किसे कहते हैं?बालुका स्तूप रहित पथरीला मरुस्थल; सर्वाधिक जैसलमेर में
खड़ीन झीलों का निर्माण किसने किया?पालीवाल ब्राह्मणों ने (जैसलमेर क्षेत्र में)

12.3 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — अरावली

प्रश्नउत्तर
अरावली की सबसे ऊँची चोटी कौनसी है और उसकी ऊँचाई क्या है?गुरुशिखर, 1722 मीटर (मंदिर सहित 1727 मीटर), माउंट आबू (सिरोही)
गुरुशिखर का नामकरण किसके नाम पर हुआ?ऋषि दत्तात्रेय के नाम पर
राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार कौनसा है?उड़िया पठार (सिरोही), ऊँचाई 1360 मीटर
राजस्थान का दूसरा सबसे ऊँचा पठार कौनसा है?भोराट पठार (राजसमंद-उदयपुर), ऊँचाई 1225 मीटर
सर्वाधिक अरावली दर्रे किस जिले में पाए जाते हैं?राजसमंद जिले में
राजस्थान का सबसे ऊँचाई पर बसा नगर कौनसा है?माउंट आबू (लगभग 1300 मीटर); दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़
ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट किन दो प्रदेशों के बीच स्थित है?अरावली पर्वतीय प्रदेश एवं हाड़ौती पठार के बीच

12.4 बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य — पूर्वी मैदान एवं हाड़ौती

प्रश्नउत्तर
पूर्वी मैदान का निर्माण किस काल में हुआ?प्लीस्टोसीन काल (राजस्थान के प्रदेशों में सबसे नवीन)
पूर्वी मैदान को कितने भागों में बाँटा गया है?3 भाग — माही मैदान, बनास-बाणगंगा मैदान, चम्बल का मैदान
बीहड़ किसे कहते हैं?चम्बल नदी के अवनालिका अपरदन से बनी उत्खात (badland) स्थलाकृतियाँ
हाड़ौती पठार का निर्माण किस काल में हुआ?क्रिटेशियस काल
हाड़ौती पठार को कितने उपप्रदेशों में बाँटा गया है?5 उपप्रदेश
रामगढ़ क्रेटर की खोज व मान्यता कब मिली?निर्माण लगभग 16.5 करोड़ वर्ष पूर्व; अंतर्राष्ट्रीय मान्यता वर्ष 2021 में (विश्व का 200वाँ, भारत का तीसरा क्रेटर)
रामगढ़ क्रेटर क्षेत्र की प्रमुख जनजाति कौनसी है?सहरिया जनजाति

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. राजस्थान के भौगोलिक कारकों पर आधारित वर्गीकरण के अनुसार कितने भौतिक प्रदेश हैं और इनके नाम लिखिए। Q2. बालुका स्तूपों के 9 प्रकारों का वर्णन करते हुए बताइए कि सर्वाधिक गतिशील प्रकार कौनसा है। Q3. अरावली पर्वतमाला के निर्माण की प्रक्रिया एवं इसके तीन भागों (उत्तरी, मध्य, दक्षिणी) की तुलना कीजिए। Q4. गुरुशिखर एवं उड़िया पठार से संबंधित प्रमुख तथ्य बताइए। Q5. ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट (GBF) क्या है और यह किन दो भौतिक प्रदेशों को अलग करता है? Q6. रामगढ़ क्रेटर की भूवैज्ञानिक विशेषताएँ एवं इसे मिली अंतर्राष्ट्रीय मान्यता का वर्णन कीजिए। Q7. लूनी बेसिन एवं शेखावाटी अंतःप्रवाह क्षेत्र की स्थानीय शब्दावली (जैसे रोही, बजादा, जोहड़, बीड़) की व्याख्या कीजिए। Q8. हाड़ौती पठार के 5 उपप्रदेशों की सूची बनाकर प्रत्येक की एक विशेषता लिखिए।

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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