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राजस्थान — परिचय, स्थिति एवं विस्तार Introduction, Location & Extent of Rajasthan
जरा कल्पना कीजिए — भारत के नक्शे में एक ऐसा राज्य है जो अकेला ही देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग दसवां हिस्सा घेरता है। इतना बड़ा कि अगर आप इसके एक छोर (धौलपुर) में सूर्योदय देख रहे हों, तो दूसरे छोर (जैसलमेर) में सूरज को उगने में अभी लगभग 36 मिनट और लगेंगे! यही है राजस्थान — भारत का सबसे बड़ा राज्य, जिसका नाम भी एक लंबी यात्रा से होकर गुजरा है — वैदिक काल में इसे 'ब्रह्मवर्त' कहा गया, रामायण-महाभारत काल में 'मरुकांतार' (दुर्गम रेगिस्तान), अंग्रेजों के समय 'राजपूताना', और अंततः 1829 में कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी किताब में पहली बार लिखित रूप में 'राजस्थान' नाम दिया। लेकिन क्या आपको पता है कि आज़ादी के समय राजस्थान एक नहीं, बल्कि 19 अलग-अलग रियासतों, 3 ठिकानों और 1 केंद्रशासित क्षेत्र में बंटा हुआ था, और इन सबको जोड़कर आज का राजस्थान बनाने में पूरे 7 चरण और 8 साल 7 महीने 14 दिन लगे? आइए, इस अध्याय में हम राजस्थान की इस पूरी पहचान — इसके नामकरण, उत्पत्ति, एकीकरण, वर्तमान जिलों-संभागों की बनावट, इसकी सटीक भौगोलिक स्थिति, विस्तार और क्षेत्रफल — को विस्तार से, सरल भाषा में समझेंगे।
किसी भी राज्य को गहराई से समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उसका नाम कहाँ से आया और समय के साथ यह कैसे बदलता गया। राजस्थान का नाम भी हजारों सालों की यात्रा से गुजरकर आज के रूप में पहुँचा है। नीचे दी गई तालिका में हर काल (period) में राजस्थान को किस नाम से जाना जाता था, यह क्रमवार दिखाया गया है — जैसे किसी व्यक्ति का बचपन का नाम अलग हो और बड़े होकर नाम बदल जाए, ठीक वैसे ही राजस्थान की भी कई पहचान रही हैं।
| काल (Period) | नाम (Name) | स्रोत / विशेष (Source / Note) |
|---|---|---|
| वैदिक काल (ऋग्वेद) | ब्रह्मवर्त | ऋग्वेद में उल्लेख — आर्यों की पवित्र सांस्कृतिक भूमि मानी जाती थी |
| रामायण काल | मरुकांतार | वाल्मीकि रामायण में उल्लेख — मरु (रेगिस्तान) + कांतार (दुर्गम वन/भूभाग) |
| महाभारत काल | मरुकांतार | महाभारत ग्रंथ में भी इसी नाम का उल्लेख मिलता है |
| मध्यकाल | राजस्थान (भौगोलिक अर्थ में नहीं) | मुहणौत नैणसी की ख्यात एवं राजरूपक ग्रंथ में उल्लेख, परंतु यह आज जैसा भौगोलिक नाम नहीं था |
| 1800 ई. | राजपूताना | जॉर्ज थॉमस — इस शब्द का सर्वप्रथम मौखिक (verbal) प्रयोग किया |
| 1829 ई. | राजस्थान (लिखित रूप में) | कर्नल जेम्स टॉड — इस नाम का प्रथम लिखित (written) प्रयोग किया |
सोचिए — जैसे किसी बच्चे का घर में प्यार का नाम अलग होता है और स्कूल/सरकारी दस्तावेज़ों में अलग नाम दर्ज होता है, वैसे ही राजस्थान भी वैदिक काल में 'ब्रह्मवर्त' (धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान), रामायण-महाभारत काल में 'मरुकांतार' (भौगोलिक कठिनाई की पहचान — मरुस्थल व दुर्गम भूभाग), और अंग्रेजों के दौर में 'राजपूताना' (राजपूत रियासतों की भूमि) कहलाया। अंतिम और स्थायी नाम 'राजस्थान' (राजाओं का स्थान) कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी किताब में सबसे पहले लिखित रूप में दर्ज किया — और यही नाम आज तक चला आ रहा है।
ध्यान रहे: 'राजपूताना' शब्द को औपचारिक रूप से आधुनिक अर्थ में सबसे पहले जॉर्ज थॉमस (1800 ई.) ने प्रयोग किया, जबकि 'राजस्थान' शब्द का प्रथम लिखित प्रयोग कर्नल जेम्स टॉड (1829 ई.) ने किया। परीक्षा में अक्सर इन दोनों नामों और व्यक्तियों को आपस में उलझा दिया जाता है — इसलिए वर्ष और व्यक्ति दोनों याद रखें।
इससे पहले कि हम अक्षांश-देशांतर जैसी तकनीकी बातों में जाएँ, यह समझना ज़रूरी है कि राजस्थान पृथ्वी के किस बड़े हिस्से में स्थित है — भारत में कहाँ, और दुनिया के नक़्शे में कहाँ।
| मानक (Criteria) | स्थिति (Position) |
|---|---|
| भारत में स्थिति | उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India) |
| विश्व में स्थिति | उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध (Northern-Eastern Hemisphere) |
| अक्षांशीय स्थिति | उत्तरी गोलार्द्ध में (भूमध्य रेखा/Equator के उत्तर में) |
| देशान्तरीय स्थिति | पूर्वी गोलार्द्ध में (ग्रीनविच रेखा/Prime Meridian के पूर्व में) |
| एशिया में स्थिति | दक्षिण-पश्चिमी एशिया (South-West Asia) |
राजस्थान आज जैसा दिखता है — पश्चिम में रेगिस्तान, बीच में अरावली पहाड़ियाँ, पूर्व में उपजाऊ मैदान — यह अचानक नहीं बना। इसके पीछे करोड़ों वर्षों की भूगर्भीय (geological) प्रक्रिया है। इसे समझने के लिए सबसे पहले वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगनर के 'महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत' (Continental Drift Theory) को समझना होगा।
| भाग (Part) | नाम (Name) | शामिल महाद्वीप (Included Continents) |
|---|---|---|
| उत्तरी भाग | अंगारा लैंड / लॉरेशिया (Laurasia) | उत्तरी अमेरिका, यूरोप, उत्तरी एशिया |
| दक्षिणी भाग | गोंडवाना लैंड (Gondwana Land) | दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिणी एशिया (भारत सहित), ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका |
पैंजिया के टूटने के दौरान अंगारा लैंड (उत्तर) और गोंडवाना लैंड (दक्षिण) के बीच एक लंबा, संकरा समुद्री गर्त बन गया था, जिसे 'टेथिस सागर' कहा जाता है — यह असल में एक भूसन्नति (Geosyncline) थी, यानी एक ऐसा गहरा गड्ढा जिसमें नदियों द्वारा लाई गई तलछट (sediment) लगातार जमा होती रही। लाखों वर्षों में यही तलछट दबकर और मुड़कर आज का हिमालय पर्वत, उत्तर का विशाल मैदान और थार का मरुस्थल बनी। यानी हिमालय और राजस्थान का रेगिस्तान — दोनों की जड़ें एक ही समुद्र (टेथिस सागर) में हैं, बस समय के साथ इनका रूप बदल गया।
| क्रम | भौतिक प्रदेश (Physical Region) | उत्पत्ति (Origin) | भारत में वर्गीकरण |
|---|---|---|---|
| 1 | अरावली पर्वतीय प्रदेश (सबसे प्राचीन) | गोंडवाना लैंड से | प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau) का भाग |
| 2 | हाड़ौती का पठार | गोंडवाना लैंड से | प्रायद्वीपीय पठार का भाग |
| 3 | थार का मरुस्थल | टेथिस सागर के अवसादों से | उत्तर के विशाल मैदान का भाग |
| 4 | पूर्वी मैदानी प्रदेश (सबसे नवीन) | टेथिस सागर के अवसादों से | उत्तर के विशाल मैदान का भाग |
याद रखने की सरल तरकीब: प्राचीनता के क्रम में (सबसे पुराना → सबसे नया): अरावली पर्वत → हाड़ौती का पठार → थार का मरुस्थल → पूर्वी मैदानी प्रदेश। यानी अरावली पर्वत राजस्थान की सबसे पुरानी और पूर्वी मैदानी प्रदेश सबसे नई भौगोलिक रचना है।
आज हम राजस्थान को एक अखंड, एकीकृत राज्य के रूप में देखते हैं, लेकिन आज़ादी के समय (1947) यह क्षेत्र दर्जनों छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था — हर रियासत का अपना राजा, अपना प्रशासन। इन सभी बिखरे हुए टुकड़ों को जोड़कर एक राज्य बनाना एक बहुत बड़ी और जटिल राजनीतिक प्रक्रिया थी, जिसे 'राजस्थान का एकीकरण' कहा जाता है।
| इकाई का प्रकार | संख्या | नाम / विवरण |
|---|---|---|
| रियासतें (Princely States) | 19 | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़, टोंक, बूंदी, कोटा, झालावाड़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, शाहपुरा, सिरोही |
| ठिकाने (Estates) | 3 | लावा, कुशलगढ़, नीमराणा |
| केन्द्रशासित प्रदेश | 1 | अजमेर-मेरवाड़ा (British India के अधीन सीधा शासित क्षेत्र) |
कुल समय: सम्पूर्ण एकीकरण प्रक्रिया में 8 वर्ष 7 माह 14 दिन का समय लगा और यह कुल 7 चरणों में पूरी हुई — 18 मार्च 1948 से शुरू होकर 1 नवम्बर 1956 को अंतिम रूप से पूर्ण हुई।
| चरण | संघ का नाम | तिथि | सम्मिलित क्षेत्र | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| I | मत्स्य संघ (Matsya Union) | 18 मार्च 1948 | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली | नाम के.एम. मुंशी के सुझाव पर रखा गया |
| II | पूर्व राजस्थान संघ | 25 मार्च 1948 | 9 रियासतें + कुशलगढ़ ठिकाना | राजधानी — कोटा |
| III | संयुक्त राजस्थान | 18 अप्रैल 1948 | पूर्व राजस्थान + उदयपुर रियासत | उद्घाटन पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा |
| IV | वृहद् राजस्थान (Greater Rajasthan) | 30 मार्च 1949 | संयुक्त राजस्थान + जयपुर + जोधपुर + जैसलमेर + बीकानेर | इसी दिन को 'राजस्थान दिवस' के रूप में मनाया जाता है, राजधानी जयपुर बनी |
| V | संयुक्त वृहद् राजस्थान | 15 मई 1949 | वृहद् राजस्थान + मत्स्य संघ | शंकरदेव राय समिति की सिफारिश पर हुआ विलय |
| VI | राजस्थान संघ | 26 जनवरी 1950 | सिरोही रियासत (आबू-देलवाड़ा क्षेत्र को छोड़कर) | यह भारत के गणतंत्र बनने का दिन भी है |
| VII | वर्तमान राजस्थान | 1 नवम्बर 1956 | आबू-देलवाड़ा + अजमेर-मेरवाड़ा + सुनेल टप्पा (सिरोंज क्षेत्र मध्यप्रदेश को स्थानांतरित) | राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के अंतर्गत — इस समय 26 जिले बने |
30 मार्च 1949 को चरण-IV (वृहद् राजस्थान) के दौरान संयुक्त राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसी बड़ी व शक्तिशाली रियासतें भी शामिल हुईं और जयपुर को राजधानी बनाया गया — यह राजस्थान के एकीकरण का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जाता है, इसीलिए हर वर्ष 30 मार्च को 'राजस्थान दिवस' (Rajasthan Day) के रूप में मनाया जाता है, भले ही राज्य का अंतिम और पूर्ण स्वरूप 1 नवम्बर 1956 को मिला।
अतिरिक्त तथ्य: वी.पी. मेनन के अनुसार मत्स्य संघ का उद्घाटन 18 मार्च 1948 को हुआ था। 1 नवम्बर 1956 के पुनर्गठन के बाद राजस्थान में उस समय 5 संभाग तथा 26 जिले बने थे — यह संख्या बाद में समय-समय पर नए जिले बनने के साथ बढ़ती गई।
1956 में जब राजस्थान का अंतिम स्वरूप बना, तब इसमें 26 जिले थे। समय के साथ प्रशासनिक सुविधा और विकास की जरूरतों को देखते हुए पुराने बड़े जिलों को तोड़कर नए जिले बनाए जाते रहे। आइए इस पूरे सफर को चरणबद्ध तरीके से समझते हैं — यह जानना ज़रूरी है क्योंकि परीक्षाओं में जिलों की संख्या, उनके निर्माण की तारीख और मूल जिला बार-बार पूछा जाता है।
| क्रम | नया जिला | तिथि | मूल जिला (जिससे बना) |
|---|---|---|---|
| 27वाँ | धौलपुर | 15 अप्रैल 1982 | भरतपुर |
| 28वाँ | बारां | 10 अप्रैल 1991 | कोटा |
| 29वाँ | दौसा | 10 अप्रैल 1991 | जयपुर |
| 30वाँ | राजसमंद | 10 अप्रैल 1991 | उदयपुर |
| 31वाँ | हनुमानगढ़ | 12 जुलाई 1994 | श्रीगंगानगर |
| 32वाँ | करौली | 19 जुलाई 1997 | सवाई माधोपुर |
| 33वाँ | प्रतापगढ़ | 26 जनवरी 2008 | उदयपुर + चित्तौड़गढ़ + बाँसवाड़ा (तीनों जिलों के भाग मिलाकर) |
यह राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास का सबसे उलझा हुआ, लेकिन परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है — इसलिए इसे बहुत ध्यान से, चरण-दर-चरण समझें।
| क्रम | जिला | किससे बना |
|---|---|---|
| 34वाँ | बालोतरा | बाड़मेर |
| 35वाँ | ब्यावर | अजमेर, पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा |
| 36वाँ | डीग | भरतपुर |
| 37वाँ | डीडवाना-कुचामन | नागौर |
| 38वाँ | कोटपूतली-बहरोड़ | जयपुर व अलवर |
| 39वाँ | खैरथल-तिजारा | अलवर |
| 40वाँ | फलौदी | जोधपुर, जैसलमेर |
| 41वाँ | सलूंबर | उदयपुर |
| निरस्त जिला | वापस किस जिले में मिलाया गया |
|---|---|
| अनूपगढ़ | श्रीगंगानगर व बीकानेर (मूल जिलों में वापस) |
| दूदू | जयपुर |
| केकड़ी | अजमेर |
| शाहपुरा | भीलवाड़ा |
| नीम का थाना (नीमकाथाना) | सीकर व झुंझुनूं |
| गंगापुर सिटी | सवाई माधोपुर व करौली |
| जयपुर ग्रामीण | जयपुर |
| जोधपुर ग्रामीण | जोधपुर |
| सांचौर | जालौर |
राजस्थान की सख्त भौगोलिक सच्चाई (ध्यान रखें): अनूपगढ़ अब (2025-26 में) एक स्वतंत्र जिला नहीं है — यह वापस श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों में मिला दिया गया है। परीक्षा में अगर पूछा जाए कि 'क्या अनूपगढ़ एक जिला है?' तो उत्तर होगा — नहीं, वर्तमान में नहीं।
30 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के बाद से राजस्थान में स्थायी रूप से 41 जिले और 7 संभाग हैं। इंटरनेट पर की गई ताज़ा जांच (जुलाई 2026 तक) के अनुसार इस ढांचे में कोई और बदलाव नहीं हुआ है — यानी यह वर्तमान (2026) की स्थिति में भी पूरी तरह लागू है।
| जिला | आकृति (Shape) |
|---|---|
| हनुमानगढ़ | कुर्सीनुमा (Chair-shaped) |
| सीकर | अर्द्धचन्द्राकार / प्यालेनुमा / तस्तरीनुमा (Crescent/Saucer-shaped) |
| दौसा | धनुषाकार (Bow-shaped) |
| राजसमंद | तिलक जैसा / पानी की बूंद जैसा (Tilak/Water-drop shaped) |
| चित्तौड़गढ़ | पत्ता जैसा / घोड़े की नाल जैसा (Leaf/Horseshoe-shaped) |
| करौली | बतख (Duck) के समान आकृति |
| जालौर | ढाल (शील्ड) माला जैसा |
| टोंक | वृताकार / चौकोर (Circular/Square-ish) |
| भीलवाड़ा | आयताकार (Rectangular) |
| राजस्थान (सम्पूर्ण राज्य) | पतंगाकार / विषमकोणीय चतुर्भुज (Kite-shaped / Rhombus) |
किसी भी स्थान की सटीक भौगोलिक स्थिति बताने के लिए अक्षांश (Latitude) और देशान्तर (Longitude) रेखाओं का प्रयोग किया जाता है — ठीक वैसे ही जैसे किसी शहर में किसी घर का पता बताने के लिए सड़क नंबर और मकान नंबर दोनों चाहिए। राजस्थान की स्थिति भी इन्हीं दो निर्देशांकों (coordinates) से परिभाषित होती है।
| मानक | विस्तार | कुल अंतर |
|---|---|---|
| अक्षांशीय विस्तार (Latitudinal Extent) | 23°03′ उत्तरी अक्षांश → 30°12′ उत्तरी अक्षांश | 7°09′ |
| देशान्तरीय विस्तार (Longitudinal Extent) | 69°30′ पूर्वी देशान्तर → 78°17′ पूर्वी देशान्तर | 8°47′ (लगभग 9°) |
| दिशा | स्थान | विवरण |
|---|---|---|
| उत्तरतम (Northernmost) | कोणा गाँव (गंगानगर तहसील, श्रीगंगानगर) | 30°12′ उत्तरी अक्षांश — यहाँ सूर्य की किरणें सबसे अधिक तिरछी पड़ती हैं |
| दक्षिणतम (Southernmost) | बोरकुण्डा गाँव (कुशलगढ़ तहसील, बाँसवाड़ा) | 23°03′ उत्तरी अक्षांश — यहाँ सूर्य की किरणें सबसे अधिक सीधी (लम्बवत् के निकट) पड़ती हैं |
| पूर्वतम (Easternmost) | सिलाना गाँव (राजाखेड़ा तहसील, धौलपुर) | 78°17′ पूर्वी देशान्तर — राजस्थान में सबसे पहला सूर्योदय यहीं होता है |
| पश्चिमतम (Westernmost) | कटरा गाँव (सम तहसील, जैसलमेर) | 69°30′ पूर्वी देशान्तर — राजस्थान में सबसे बाद में सूर्योदय यहीं होता है |
पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है, यानी 1° देशान्तर घूमने में 4 मिनट का समय लगता है (360° ÷ 24 घंटे = 15° प्रति घंटा; 60 मिनट ÷ 15° = 4 मिनट प्रति डिग्री)। इसी प्रकार 1' (1 मिनट देशांतर) = 4 सेकण्ड का समय अंतर देता है। राजस्थान में पूर्वतम बिंदु (धौलपुर, 78°17′ पू.दे.) और पश्चिमतम बिंदु (जैसलमेर, 69°30′ पू.दे.) के बीच देशान्तर का अंतर 8°47′ है, जिसे मिनटों में बदलने पर लगभग 35 मिनट 8 सेकण्ड (व्यवहार में लगभग 36 मिनट) का समय-अंतर मिलता है — यानी धौलपुर में सूर्योदय होने के करीब 36 मिनट बाद जैसलमेर में सूर्योदय होता है। इसीलिए राजस्थान में सबसे पहले सूर्योदय धौलपुर (पूर्वतम) में और सबसे बाद में जैसलमेर (पश्चिमतम) में होता है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के अक्षांश-देशान्तर एवं अंतिम बिन्दु (हाथ से चिन्हित करने हेतु रिक्त मानचित्र)
कर्क रेखा (Tropic of Cancer) एक काल्पनिक रेखा है जो भूमध्य रेखा (Equator) से 23°30′ उत्तर में स्थित है। यह रेखा उस अधिकतम उत्तरी अक्षांश को दर्शाती है, जहाँ सूर्य वर्ष में एक बार (21 जून के आसपास) ठीक सिर के ऊपर (लम्बवत्) चमकता है। राजस्थान से होकर यह रेखा गुजरती है, इसलिए यह राज्य की जलवायु को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| अक्षांश | 23°30′ उत्तरी अक्षांश (23½°) |
| राजस्थान में कुल लम्बाई | 26 किलोमीटर |
| राजस्थान में गुजरने वाले जिले | बाँसवाड़ा (अधिकतम लम्बाई से गुजरती है) एवं डूंगरपुर (न्यूनतम लम्बाई से गुजरती है) |
| निकटतम शहर | बाँसवाड़ा — कर्क रेखा से सर्वाधिक नजदीक, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें सबसे सीधी पड़ती हैं |
| दूरतम जिला | श्रीगंगानगर — कर्क रेखा से सर्वाधिक दूर, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें सबसे तिरछी पड़ती हैं |
| बाँसवाड़ा में स्थिति | कुशलगढ़ तहसील के मध्य से गुजरती है |
| डूंगरपुर में स्थिति | चीखली गाँव को स्पर्श करती है |
| क्रम | राज्य (पश्चिम से पूर्व की ओर) |
|---|---|
| 1 | गुजरात |
| 2 | राजस्थान |
| 3 | मध्यप्रदेश |
| 4 | छत्तीसगढ़ |
| 5 | झारखण्ड |
| 6 | पश्चिम बंगाल |
| 7 | त्रिपुरा |
| 8 | मिजोरम |
21 जून (ग्रीष्म संक्रान्ति / Summer Solstice) के दिन सूर्य ठीक कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता है — राजस्थान के संदर्भ में इसका मतलब है कि इस दिन सूर्य बाँसवाड़ा के ठीक ऊपर होता है। इसी कारण इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे बड़ा दिन (longest day) और सबसे छोटी रात (shortest night) होती है। संयोग से 21 जून को ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga) भी मनाया जाता है।
| माप (Measurement) | दूरी | बिन्दु (Points) |
|---|---|---|
| उत्तर → दक्षिण लम्बाई | 826 किमी | कोणा गाँव (गंगानगर) → बोरकुण्डा गाँव (बाँसवाड़ा) |
| पूर्व → पश्चिम चौड़ाई | 869 किमी | सिलाना गाँव (धौलपुर) → कटरा गाँव (जैसलमेर) |
| लम्बाई-चौड़ाई में अंतर | 43 किमी | 869 − 826 = 43 किमी (चौड़ाई, लम्बाई से अधिक है) |
| उत्तर-पश्चिम → दक्षिण-पूर्व विकर्ण | 850 किमी | — |
| दक्षिण-पश्चिम → उत्तर-पूर्व विकर्ण | 784 किमी | — |
| विवरण | आँकड़ा |
|---|---|
| कुल क्षेत्रफल | 3,42,239 वर्ग किलोमीटर (लगभग 1,32,139 वर्ग मील) |
| भारत के कुल क्षेत्रफल में हिस्सा | 10.41% (यानी लगभग भारत के भूभाग का दसवां हिस्सा) |
| भारत में स्थान | प्रथम — क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य |
| यह स्थान कब से प्राप्त है | 1 नवम्बर 2000 से — जब मध्यप्रदेश के पुनर्गठन (Reorganisation) से छत्तीसगढ़ राज्य अलग बना और मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल घट गया, तब राजस्थान क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य बन गया |
| विश्व के कुल क्षेत्रफल में योगदान | लगभग 0.25% |
| स्थान | राज्य | क्षेत्रफल |
|---|---|---|
| 1 | राजस्थान | 3,42,239 वर्ग किमी |
| 2 | मध्यप्रदेश | 3,08,245 वर्ग किमी |
| 3 | महाराष्ट्र | 3,07,713 वर्ग किमी |
| 4 | उत्तरप्रदेश | 2,40,928 वर्ग किमी |
| स्थान | जिला |
|---|---|
| सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल में) | जैसलमेर |
| दूसरा सबसे बड़ा जिला | बाड़मेर |
| तीसरा सबसे बड़ा जिला | बीकानेर |
| सबसे छोटा जिला (नए जिलों में) | डीग (सबसे छोटा), उसके बाद खैरथल-तिजारा |
महत्वपूर्ण नोट: याद रखें — क्षेत्रफल में सबसे बड़ा जिला (जैसलमेर) और जनसंख्या में सबसे बड़ा जिला (जयपुर) अलग-अलग हैं — इन्हें कभी न मिलाएँ, परीक्षा में यह एक आम गड़बड़ी (confusion) का बिंदु है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आकृति का नाम | पतंगाकार / विषमकोणीय चतुर्भुज (Kite-shaped / Rhombus) |
| सर्वप्रथम किसने बताया | प्रो. टी.एच. हैण्डले (T.H. Handley) — जयपुर रियासत के ब्रिटिश हेल्थ ऑफिसर, जिन्होंने सबसे पहले राजस्थान की आकृति को पतंग के समान बताया |
| प्रकार | लम्बाई |
|---|---|
| अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (पाकिस्तान के साथ) | 1070 किलोमीटर |
| अन्तर्राज्यीय सीमा (5 पड़ोसी राज्यों के साथ) | 4850 किलोमीटर |
| कुल स्थलीय सीमा (International + Interstate) | 5920 किलोमीटर |
| जिला | विशेष तथ्य |
|---|---|
| श्रीगंगानगर | सीमा के सर्वाधिक निकट जिला मुख्यालय; पंजाब व पाकिस्तान — दोनों की सीमाएँ लगती हैं |
| बीकानेर | सीमा से सर्वाधिक दूर स्थित जिला मुख्यालय |
| फलौदी | सबसे छोटी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (लगभग 30 किमी) |
| जैसलमेर | सबसे लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा (464 किमी) |
| बाड़मेर | गुजरात व पाकिस्तान — दोनों की सीमाएँ लगती हैं |
राजस्थान की सख्त भौगोलिक सच्चाई (ध्यान रखें): फलौदी की सीमा पाकिस्तान से नहीं लगती — यह एक बहुत सामान्य गलतफहमी है। ऊपर तालिका में 'फलौदी' का उल्लेख उसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से नहीं, बल्कि जैसलमेर व जोधपुर क्षेत्र में स्थिति के संदर्भ में समझें — वास्तव में पाकिस्तान सीमा से लगने वाले जिले केवल श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर हैं। परीक्षा में फलौदी को पाक-सीमावर्ती जिला मानना एक बड़ी त्रुटि होगी।
भारत की ओर से राजस्थान सीमा पर 4 जिले (श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर) हैं, जबकि सीमा के दूसरी ओर पाकिस्तान के 9 जिले पड़ते हैं — खैरपुर, उमरकोट, घोटकी, सुक्कुर, बहावतनगर, रहीमयारखान, संघर, थारपारकर, बहावलपुर।
राजस्थान भारत के 5 राज्यों से घिरा हुआ है — इस सीमा-साझेदारी को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे राजस्थान की सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक विविधता को भी समझा जा सकता है (जैसे गुजरात से सटे क्षेत्रों में मारवाड़ी-गुजराती मिश्रित संस्कृति, या मध्यप्रदेश से सटे हाड़ौती क्षेत्र में मालवा प्रभाव)।
| राज्य | सीमा लम्बाई | दिशा | राजस्थान के सीमावर्ती जिले |
|---|---|---|---|
| मध्यप्रदेश | 1600 किमी | दक्षिण-पूर्व | 10 जिले | झालावाड़ (अधिकतम सीमा), भीलवाड़ा (न्यूनतम सीमा) |
| हरियाणा | 1262 किमी | उत्तर-पूर्व | 8 जिले |
| गुजरात | 1022 किमी | दक्षिण-पश्चिम | 6 जिले | बाड़मेर (न्यूनतम — 14 किमी) |
| उत्तरप्रदेश | 877 किमी | पूर्व | 3 जिले |
| पंजाब | 89 किमी (सबसे छोटी सीमा) | उत्तर | 2 जिले |
क्रम याद रखें: सीमा-लम्बाई के अवरोही क्रम में: मध्यप्रदेश (1600 किमी) → हरियाणा (1262 किमी) → गुजरात (1022 किमी) → उत्तरप्रदेश (877 किमी) → पंजाब (89 किमी)।
| विशेष तथ्य | जिला |
|---|---|
| दो राज्यों से सीमा बनाने वाले जिले (4) | हनुमानगढ़ (पंजाब+हरियाणा), डीग (हरियाणा+उत्तरप्रदेश), धौलपुर (उत्तरप्रदेश+मध्यप्रदेश), बाँसवाड़ा (मध्यप्रदेश+गुजरात) |
| अन्तर्राष्ट्रीय + अन्तर्राज्यीय दोनों सीमाएँ रखने वाले जिले | श्रीगंगानगर (पाकिस्तान+पंजाब), बाड़मेर (पाकिस्तान+गुजरात) |
| मध्यप्रदेश के साथ दो बार (अखंडित) सीमा | कोटा |
| मध्यप्रदेश के साथ दो बार (खंडित) सीमा | चित्तौड़गढ़ |
| सर्वाधिक अन्तर्राज्यीय सीमा लम्बाई | झालावाड़ — 520 किमी (मध्यप्रदेश के साथ) |
| न्यूनतम अन्तर्राज्यीय सीमा लम्बाई | बाड़मेर — 14 किमी (गुजरात के साथ) |
200 बीघा भूमि विवाद उदयपुर (कोटड़ा तहसील) और गुजरात (बनासकांठा जिला) के बीच एक सीमा-विवाद है। वहीं मानगढ़ हत्याकाण्ड (17 नवम्बर 1913) बाँसवाड़ा-दाहोद सीमा क्षेत्र से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना है, जहाँ अंग्रेजों ने भील आदिवासियों के एक बड़े समूह पर गोली चलाई थी।
संभाग (Division) प्रशासनिक इकाई है जो कई जिलों को मिलाकर बनाई जाती है — यह राज्य और जिला प्रशासन के बीच एक मध्यवर्ती स्तर है, जिसका मुखिया संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) होता है। राजस्थान की संभागीय व्यवस्था कई बार बनी, टूटी और फिर से बनी है — इसका पूरा इतिहास समझना ज़रूरी है।
| तिथि / वर्ष | घटना | मुख्यमंत्री (उस समय) |
|---|---|---|
| 30 मार्च 1949 | 5 संभागों के साथ शुरुआत: जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर | हीरालाल शास्त्री |
| अप्रैल 1962 | संभागीय व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई | मोहनलाल सुखाड़िया |
| 26 जनवरी 1987 | संभागीय व्यवस्था पुनः शुरू | अजमेर छठे संभाग के रूप में जोड़ा गया | हरिदेव जोशी |
| 4 जून 2005 | भरतपुर 7वें संभाग के रूप में जोड़ा गया | वसुंधरा राजे |
| 7 अगस्त 2023 | 3 नए संभाग जोड़े गए: सीकर, पाली, बाँसवाड़ा (साथ ही 19 नए जिले) | अशोक गहलोत |
| 30 दिसम्बर 2024 | 9 जिले + 3 नए संभाग निरस्त | वर्तमान: 41 जिले, 7 संभाग | भजनलाल शर्मा |
ध्यान दें: 1962 से 1987 तक — लगभग 25 वर्ष — राजस्थान में कोई संभागीय व्यवस्था लागू नहीं थी। वर्तमान (2025-26) में राजस्थान में स्थायी रूप से 7 संभाग एवं 41 जिले हैं।
| क्र. | संभाग | जिले (Districts) | कुल जिले |
|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | जयपुर, अलवर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा | 7 |
| 2 | अजमेर | अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन | 6 |
| 3 | जोधपुर | जोधपुर, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही | 8 |
| 4 | उदयपुर | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, सलूंबर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा | 7 |
| 5 | कोटा | कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ | 4 |
| 6 | भरतपुर | भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर | 5 |
| 7 | बीकानेर | बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू | 4 |
कुल: 7 संभाग तथा 41 जिले (सत्यापित — जुलाई 2026)
| विशेष तथ्य | संभाग |
|---|---|
| सर्वाधिक जिलों वाला संभाग | जोधपुर (8 जिले) |
| दूसरे नंबर पर सर्वाधिक जिले | जयपुर व उदयपुर (7-7 जिले) |
| सबसे कम जिलों वाले संभाग | कोटा व बीकानेर (4-4 जिले) |
| क्षेत्रफल में सबसे बड़ा संभाग | जोधपुर |
| सर्वाधिक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा वाला संभाग | जोधपुर संभाग |
| सर्वाधिक नहर सिंचाई वाला संभाग | बीकानेर संभाग |
| सर्वाधिक नदियों वाला संभाग | कोटा संभाग (हाड़ौती क्षेत्र) |
| सर्वाधिक जनसंख्या वाला संभाग | जयपुर संभाग |
| अंतर्वर्ती (Landlocked, कोई बाहरी सीमा नहीं) संभाग | अजमेर संभाग — यह सभी अन्य संभागों से घिरा है, इसकी कोई सीमा राज्य के बाहर नहीं लगती |
| 3 राज्यों से सीमा साझा करने वाला संभाग | भरतपुर संभाग (उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा) |
| खनिज सम्पन्न व जनजाति बहुल संभाग | उदयपुर संभाग |
| सबसे छोटी अन्तर्राज्यीय सीमा वाला संभाग | जयपुर (पंजाब से सीमा नहीं लगती) |
| शहर/जिला | उपनाम |
|---|---|
| जोधपुर | ब्लू सिटी / नीली नगरी, सूर्य नगरी / सन सिटी, मरुस्थल का प्रवेश द्वार, हैण्डीक्राफ्ट सिटी |
| जयपुर | पिंक सिटी / गुलाबी शहर, पूर्व का पेरिस, हेरिटेज सिटी |
| जैसलमेर | स्वर्ण नगरी, हवेलियों का शहर, पीले पत्थरों का शहर, रेगिस्तान का गुलाब |
| उदयपुर | झीलों की नगरी, राजस्थान का कश्मीर, पूर्व का वेनिस, लेक सिटी |
| अजमेर | भारत का मक्का, राजस्थान का नागपुर |
| बीकानेर | ऊन का घर, राजस्थान का अन्नागार, हाइटेक सिटी |
| कोटा | राजस्थान का कानपुर, राजस्थान की औद्योगिक राजधानी, शिक्षा का तीर्थस्थल (Coaching Hub) |
| भीलवाड़ा | राजस्थान का मेनचेस्टर, वस्त्र नगरी, टेक्सटाइल सिटी |
| अलवर | राजस्थान का स्कॉटलैण्ड, राजस्थान का पूर्वी कश्मीर |
| धौलपुर | रेड डायमंड, राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार |
| डूंगरपुर | सौ द्वीपों का शहर, आदिवासियों का शहर |
| नागौर | राजस्थान का नाका, राजपूताना की कुंजी |
| बाँसवाड़ा | राजस्थान का चेरापूंजी, आदिवासियों की भूमि |
| झालावाड़ | राजस्थान का नागपुर (संतरा उत्पादन हेतु) |
| सीकर | शेखावाटी क्षेत्र, फव्वारों की नगरी |
| चूरू | राजस्थान का अग्निकुण्ड (सर्वाधिक तापमान चरम हेतु) |
| मानक | जिला (सर्वाधिक) | जिला (न्यूनतम) |
|---|---|---|
| क्षेत्रफल | जैसलमेर | धौलपुर / दौसा |
| जनसंख्या | जयपुर | जैसलमेर |
| जनघनत्व | जयपुर | जैसलमेर |
| साक्षरता | झुंझुनूं / जयपुर | जालौर |
| महिला साक्षरता | झुंझुनूं / कोटा | जालौर |
| लिंगानुपात | डूंगरपुर | धौलपुर |
| वर्षा / आर्द्रता | बाँसवाड़ा / झालावाड़ | जैसलमेर |
| सर्वाधिक ठंड / ऊँचाई | माउण्ट आबू (सिरोही) | — |
| सर्वाधिक गर्मी | चूरू / फलौदी | — |
| वन क्षेत्र | उदयपुर | चूरू |
| दुग्ध उत्पादन | जयपुर | — |
| ऊन उत्पादन | जोधपुर ग्रामीण क्षेत्र | — |
इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन (up-to-date) रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम आँकड़े और घटनाएँ नीचे दी गई हैं — ये तथ्य किसी भी पुरानी किताब में नहीं मिलेंगे, इसलिए विशेष ध्यान दें।
चूंकि जनगणना 2021 अभी तक आयोजित नहीं हुई है, इसलिए वर्तमान जनसंख्या केवल अनुमानों (projections) पर आधारित है। नीति आयोग (NITI Aayog) के तकनीकी समूह के अनुसार 1 जुलाई 2025 तक राजस्थान की अनुमानित जनसंख्या लगभग 8.31 करोड़ थी, जबकि 1 अक्टूबर 2025 के अनुमान अनुसार यह बढ़कर लगभग 8.33 करोड़ हो गई। इस आधार पर राजस्थान जनसंख्या की दृष्टि से भारत का छठा (6th) सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है। ध्यान रहे — यह एक अनुमान है, जनगणना 2011 के बाद अभी तक कोई नई जनगणना नहीं हुई है, इसलिए स्थायी आँकड़ों के लिए जनगणना 2011 का ही आधिकारिक हवाला दिया जाता है (जनसंख्या अध्याय में विस्तार से देखें)।
फरवरी 2026 में राजस्थान की अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) प्रकाशित हुई, जिसमें राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 5.15 करोड़ से अधिक दर्ज की गई — यह दर्शाता है कि राजस्थान की मतदाता संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
हाल के वर्षों में राजस्थान दिवस (30 मार्च) को अब केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे सप्ताह भर के आयोजन (Rajasthan Day Week) के रूप में मनाया जाने लगा है। 2026 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में 14 से 19 मार्च के बीच कई कार्यक्रम आयोजित हुए — जैसे 15 मार्च को 'विकसित राजस्थान रन' व ODOP (एक जिला एक उत्पाद) प्रदर्शनी, 17 मार्च को 'राजस्थान युवा शक्ति दिवस', 18 मार्च को सभी सरकारी मंदिरों में आरती (गोविंद देव जी मंदिर में महा-आरती सहित), तथा 19 मार्च को नई रोडवेज बसों को झंडी दिखाकर रवाना करना और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल थे। इससे स्पष्ट है कि राजस्थान दिवस अब एक बड़े सांस्कृतिक-प्रचार अभियान का रूप ले चुका है।
जिलों-संभागों की स्थिरता की पुष्टि: जुलाई 2026 तक की गई ताज़ा खोज के अनुसार, 30 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के बाद राजस्थान के जिलों (41) और संभागों (7) की संख्या में कोई और परिवर्तन नहीं हुआ है — यह ढांचा स्थिर बना हुआ है। यदि भविष्य में कोई नई अधिसूचना आती है, तो कृपया इस अध्याय को अद्यतन करवाएँ।
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान शब्द का प्रथम लिखित प्रयोग किसने किया? | कर्नल जेम्स टॉड (1829 ई.) |
| राजपूताना शब्द किसने दिया? | जॉर्ज थॉमस (1800 ई.) |
| वैदिक काल में राजस्थान का नाम? | ब्रह्मवर्त |
| महाभारत काल में राजस्थान का नाम? | मरुकांतार |
| जेम्स टॉड की पुस्तक का हिंदी अनुवाद किसने किया? | गौरीशंकर हीराचंद ओझा |
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान दिवस कब मनाया जाता है? | 30 मार्च (वृहद् राजस्थान — 1949) |
| एकीकरण में कुल कितने चरण हुए? | 7 चरण (कुल समय: 8 वर्ष 7 माह 14 दिन) |
| एकीकरण का अंतिम चरण कब पूरा हुआ? | 1 नवम्बर 1956 |
| मत्स्य संघ में कौन-कौन से जिले शामिल थे? | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली |
| एकीकरण के प्रमुख नेता कौन थे? | सरदार वल्लभभाई पटेल + वी.पी. मेनन |
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान का कुल क्षेत्रफल कितना है? | 3,42,239 वर्ग किमी (भारत का 10.41%) |
| उत्तर-दक्षिण लम्बाई कितनी है? | 826 किमी |
| पूर्व-पश्चिम चौड़ाई कितनी है? | 869 किमी |
| लम्बाई-चौड़ाई में कितना अंतर है? | 43 किमी |
| राजस्थान में कर्क रेखा की लम्बाई कितनी है? | 26 किमी |
| कर्क रेखा किन जिलों से गुजरती है? | बाँसवाड़ा + डूंगरपुर |
| राजस्थान में सबसे पहले सूर्योदय कहाँ होता है? | धौलपुर (सबसे बाद में जैसलमेर में) |
| सबसे सीधी सूर्य किरणें किस जिले में पड़ती हैं? | बाँसवाड़ा (कर्क रेखा के सबसे निकट) |
| सबसे तिरछी सूर्य किरणें किस जिले में पड़ती हैं? | श्रीगंगानगर (कर्क रेखा से सबसे दूर) |
| अन्तर्राष्ट्रीय सीमा की कुल लम्बाई कितनी है? | 1070 किमी (कुल सीमा का 18%) |
| अन्तर्राज्यीय सीमा की कुल लम्बाई कितनी है? | 4850 किमी |
| सबसे लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा किस राज्य के साथ है? | मध्यप्रदेश (1600 किमी) |
| सबसे छोटी अन्तर्राज्यीय सीमा किस राज्य के साथ है? | पंजाब (89 किमी) |
| संभाग | जिले | खास बात |
|---|---|---|
| जयपुर | 7 | सर्वाधिक जनसंख्या; हरियाणा से सीमा नहीं |
| अजमेर | 6 | सर्वाधिक संभागों से सीमा; अंतर्वर्ती (Landlocked) |
| जोधपुर | 8 | सबसे बड़ा — अधिकतम जिले, सबसे लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा |
| भरतपुर | 5 | 3 राज्यों से सीमा; पूर्वी राजस्थान |
| उदयपुर | 7 | खनिज सम्पन्न; जनजाति क्षेत्र |
| बीकानेर | 4 | उत्तरी राजस्थान; नहर सिंचाई सर्वाधिक |
| कोटा | 4 | सर्वाधिक नदियाँ; हाड़ौती क्षेत्र |
| संख्या | अर्थ |
|---|---|
| 41 जिले, 7 संभाग | वर्तमान (2025-26) प्रशासनिक ढांचा |
| 19 रियासतें + 3 ठिकाने + 1 केन्द्रशासित क्षेत्र | आज़ादी के समय (1947) की स्थिति |
| 7 चरण | एकीकरण के चरण | 30 मार्च 1949 = राजस्थान दिवस | 1 नवम्बर 1956 = अंतिम चरण |
| 1070 किमी + 4850 किमी = 5920 किमी | अन्तर्राष्ट्रीय + अन्तर्राज्यीय = कुल सीमा |
| 826 किमी + 869 किमी | उत्तर-दक्षिण + पूर्व-पश्चिम | अंतर = 43 किमी |
| 3,42,239 वर्ग किमी | कुल क्षेत्रफल | भारत का 10.41% | भारत में प्रथम स्थान |
| 26 किमी | कर्क रेखा की राजस्थान में लम्बाई | बाँसवाड़ा + डूंगरपुर |
| 8.31–8.33 करोड़ (अनुमानित, 2025-26) | जनसंख्या — भारत में छठा सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य |
Q1. राजस्थान शब्द का प्रथम लिखित प्रयोग किसने और कब किया? Q2. राजस्थान की स्थापना (वृहद् राजस्थान) कब हुई और इसे किस नाम से जाना जाता है? Q3. राजस्थान की कुल अन्तर्राष्ट्रीय एवं अन्तर्राज्यीय सीमा की लम्बाई बताइए। Q4. राजस्थान में कर्क रेखा किन-किन जिलों से होकर गुजरती है, और इसकी कुल लम्बाई क्या है? Q5. राजस्थान के किस जिले की सीमा पाकिस्तान से सबसे लम्बी है और किसकी सबसे छोटी? Q6. 30 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के तहत कौन-कौन से जिले व संभाग निरस्त किए गए? Q7. राजस्थान की उत्पत्ति में टेथिस सागर की क्या भूमिका रही? Q8. राजस्थान के किस संभाग को अंतर्वर्ती (Landlocked) संभाग कहा जाता है और क्यों?
1B
राजस्थान का भौतिक स्वरूप Physical Divisions / Physiography of Rajasthan
सोचिए — एक ही राज्य के अंदर आप सुबह एक ऐसी जगह से यात्रा शुरू करें जहाँ मीलों तक सिर्फ रेत के टीले और ऊँट ही नज़र आते हैं, दोपहर तक आप हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे रास्तों से गुज़रें जहाँ बादल पहाड़ों को छूते हैं, शाम तक आप उपजाऊ हरे-भरे खेतों वाले मैदान में पहुँच जाएँ, और रात होते-होते आप काली मिट्टी वाले पठारी इलाके में हों जहाँ कभी लावा बहा करता था — क्या यह किसी परीकथा जैसा नहीं लगता? लेकिन यही है राजस्थान की सच्चाई! भारत के किसी और राज्य में एक साथ मरुस्थल, प्राचीनतम पर्वतमाला, उपजाऊ मैदान और लावा-निर्मित पठार — चारों प्रकार के भू-आकृतिक रूप (landforms) एक साथ नहीं मिलते। और सबसे दिलचस्प बात — इन चारों प्रदेशों की उम्र भी अलग-अलग है: अरावली पर्वत को धरती की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में गिना जाता है (गोंडवाना लैंड से जन्मी), जबकि पूर्वी मैदान अपेक्षाकृत बहुत नया है (टेथिस सागर के अवसादों से बना, प्लीस्टोसीन काल में)। आइए, इस अध्याय में हम राजस्थान के इन चारों भौतिक प्रदेशों — पश्चिमी मरुस्थल, अरावली पर्वतीय प्रदेश, पूर्वी मैदान और हाड़ौती का पठार — को गहराई से, हर छोटे-बड़े तथ्य के साथ समझेंगे, ताकि आपके सामने राजस्थान की पूरी भौगोलिक तस्वीर एकदम साफ हो जाए।
राजस्थान जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य को समझने के लिए अलग-अलग विद्वानों ने इसे अलग-अलग आधारों पर बाँटने की कोशिश की है — कुछ ने प्रशासनिक व आर्थिक गतिविधियों के आधार पर बाँटा, तो कुछ ने विशुद्ध रूप से भूगोल (उच्चावच व जलवायु) के आधार पर। परीक्षा की दृष्टि से दोनों तरह के वर्गीकरण जानना ज़रूरी है।
प्रो. वी.सी. मिश्रा (V.C. Mishra) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Geography of Rajasthan' (1967) में राजस्थान को आर्थिक-भौगोलिक आधार पर 7 भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया है — यह वर्गीकरण सिर्फ भू-आकृति ही नहीं, बल्कि कृषि व उद्योग जैसी आर्थिक गतिविधियों को भी ध्यान में रखता है।
| क्रम | भौतिक प्रदेश (V.C. Mishra के अनुसार) | अंग्रेज़ी नाम |
|---|---|---|
| 1 | नहरी प्रदेश | Canal Region |
| 2 | शुष्क प्रदेश | Arid Region |
| 3 | अर्द्धशुष्क प्रदेश | Semi-Arid Region |
| 4 | अरावली प्रदेश | Aravalli Region |
| 5 | पूर्वी कृषि एवं औद्योगिक प्रदेश | Eastern Agricultural & Industrial Region |
| 6 | चम्बल एवं बीहड़ प्रदेश | Chambal & Ravine Region |
| 7 | दक्षिणी-पूर्वी कृषि प्रदेश | South-Eastern Agricultural Region |
अन्य विद्वानों के वर्गीकरण (संक्षेप में): S.K. Sen (1968) ने राजस्थान को 3 भागों में बाँटा। डॉ. रामलोचन सिंह (1971) ने 2 प्रमुख भागों, 4 उपभागों एवं 12 लघु प्रदेशों में विभाजित किया। डॉ. हरिमोहन सक्सेना (1994) ने 4 भागों में वर्गीकरण किया — यह वर्गीकरण आगे चलकर मानक भौगोलिक वर्गीकरण (नीचे देखें) से मिलता-जुलता है।
परीक्षा एवं अध्ययन की दृष्टि से सबसे अधिक प्रचलित और मानक वर्गीकरण वही है जो उच्चावच (Relief — यानी धरातल की ऊँचाई-नीचाई) और जलवायु दोनों को मिलाकर बनाया गया है। इसके अनुसार राजस्थान को 4 प्रमुख भौतिक प्रदेशों में बाँटा जाता है — और यही वर्गीकरण इस पूरे अध्याय का आधार है।
| क्रम | उच्चावच के आधार पर नाम | जलवायु के आधार पर नाम |
|---|---|---|
| 1 | मरुस्थल | उत्तरी-पश्चिमी मरुस्थल |
| 2 | अरावली | अरावली पर्वतीय प्रदेश |
| 3 | पूर्वी मैदान | पूर्वी मैदानी प्रदेश |
| 4 | हाड़ौती | दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश |
असल में दोनों वर्गीकरण एक ही 4 प्रदेशों की बात करते हैं, बस नाम देने का आधार अलग है — जैसे किसी व्यक्ति को उसकी लंबाई (उच्चावच) से पहचानें या उसके स्वभाव (जलवायु) से — दोनों एक ही व्यक्ति के बारे में हैं। परीक्षा में दोनों नाम (जैसे 'मरुस्थल' और 'उत्तरी-पश्चिमी मरुस्थल') एक ही प्रदेश को दर्शाते हैं, इन्हें अलग-अलग प्रदेश न समझें।
नीचे दी गई तालिका राजस्थान के चारों भौतिक प्रदेशों की तुलना एक ही जगह प्रस्तुत करती है — क्षेत्रफल, जनसंख्या, मिट्टी, जलवायु, वर्षा, ऊँचाई, ढाल, निर्माण काल और प्रमुख फसलों के आधार पर। इसे ध्यान से पढ़ें, क्योंकि आगे के सेक्शन में हर प्रदेश की गहराई से चर्चा होगी, और यह तालिका आपके लिए एक 'मास्टर रेफरेंस' का काम करेगी।
| विशेषता | मरुस्थल | अरावली | पूर्वी मैदान | हाड़ौती |
|---|---|---|---|---|
| क्षेत्रफल (राज. का %) | 61.11% | 9% | 23% | 6.89% |
| जनसंख्या (राज. की %) | 40% | 10% | 39% | 11% |
| जिलों की संख्या | 12 जिले | 13 जिले (मुख्यतः 7) | 10 जिले | 7 जिले |
| प्रमुख मिट्टी | रेतीली/बलुई | पर्वतीय/वनीय | जलोढ़/कच्छारी | काली मिट्टी |
| जलवायु प्रकार | शुष्क व अर्द्धशुष्क | उपआर्द्र (Sub-humid) | आर्द्र (Humid) | अतिआर्द्र (Very Humid) |
| औसत वार्षिक वर्षा | 10–40 सेमी | 40–60 सेमी | 60–80 सेमी | 80–120 सेमी |
| औसत ऊँचाई | 150–380 मीटर | 930 मीटर | 200–500 मीटर | 450–600 मीटर |
| भूमि का ढाल | उत्तर-पूर्व → दक्षिण-पश्चिम | पार्श्ववर्ती (Lateral) | पश्चिम → पूर्व | दक्षिण → उत्तर व उत्तर → पूर्व |
| निर्माण काल | टर्शियरी + प्लीस्टोसीन काल | प्री-केम्ब्रियन काल (सबसे प्राचीन) | प्लीस्टोसीन काल (प्रारंभिक) | क्रिटेशियस काल |
| किस प्राचीन भूभाग का अवशेष | टेथिस सागर | गोंडवाना लैंड | टेथिस सागर | गोंडवाना लैंड |
| प्रमुख फसलें | ग्वार, बाजरा, मोठ | मक्का, ज्वार | गेहूँ, जौ, चना, सरसों | मसाले, सोयाबीन, कपास |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान के 4 भौतिक प्रदेश (हाथ से रंग भरकर सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)
यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि राजस्थान के 4 भौतिक प्रदेशों में से कौनसा प्रदेश किस पड़ोसी राज्य या देश की सीमा को छूता है — क्योंकि परीक्षा में अक्सर यह उल्टा करके पूछा जाता है (जैसे 'कौनसा प्रदेश किसी खास राज्य से सीमा साझा नहीं करता')।
| पड़ोसी राज्य/देश | कौनसा भौतिक प्रदेश सीमा साझा करता है |
|---|---|
| पाकिस्तान (अंतर्राष्ट्रीय सीमा) | पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश |
| मध्यप्रदेश | दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती) |
| गुजरात | पश्चिमी मरुस्थल एवं अरावली प्रदेश दोनों |
| पंजाब व हरियाणा | पश्चिमी मरुस्थल एवं अर्द्धशुष्क (बांगड़) क्षेत्र |
ध्यान रखें — यह गड़बड़ी बार-बार होती है: दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती) की सीमा हरियाणा से बिल्कुल नहीं लगती — हाड़ौती राज्य के दक्षिण-पूर्वी कोने में है, जबकि हरियाणा राज्य के उत्तर-पूर्वी कोने में है, यानी दोनों एक-दूसरे से भौगोलिक रूप से सबसे दूर स्थित हैं। परीक्षा में जब पूछा जाए 'कौनसा भौगोलिक क्षेत्र हरियाणा से सीमा साझा नहीं करता', तो उत्तर होगा — दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती)।
राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश — क्षेत्रफल में राज्य का लगभग 61% हिस्सा घेरने वाला — थार मरुस्थल है। यह सिर्फ 'रेत का समुद्र' नहीं, बल्कि एक जटिल और वैज्ञानिक रूप से बेहद दिलचस्प भू-आकृतिक क्षेत्र है, जिसकी अपनी अलग जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और यहाँ तक कि अपनी खास शब्दावली (जैसे थली, रन, खड़ीन) भी है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| निर्माण | टेथिस सागर में, टर्शियरी काल (Tertiary Period) में हुआ |
| अन्य नाम | भारत का महान मरुस्थल (Great Indian Desert); रामायण व भगवद्गीता में इसे 'धनवा' कहा गया है |
| अंतरराष्ट्रीय विस्तार | भारत में 85% भाग + पाकिस्तान में 15% भाग |
| विश्व में कुल क्षेत्रफल | 2,38,254 वर्ग किलोमीटर |
| पाकिस्तान में नाम | चोलिस्तान (Cholistan) |
| भारत में थार का राज्यवार विस्तार (अवरोही क्रम) | राजस्थान (सर्वाधिक) > गुजरात > हरियाणा > पंजाब |
| कुल क्षेत्रफल | लम्बाई | चौड़ाई | औसत ऊँचाई |
|---|---|---|---|
| 1,75,000 वर्ग किमी | 640 किमी | 300 किमी | 200–300 मीटर |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में थार मरुस्थल का विस्तार व उच्चावच-आधारित 4 भाग (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)
थार मरुस्थल का ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है — उत्तर में घग्घर नदी का प्रभाव क्षेत्र है (जहाँ ऊँचाई लगभग 300 मीटर है) जबकि दक्षिण में लूनी नदी का प्रभाव क्षेत्र है (जहाँ ऊँचाई घटकर लगभग 150 मीटर रह जाती है)। इसका मतलब है कि मरुस्थल भी पूरी तरह सपाट नहीं है — यह उत्तर से दक्षिण की ओर धीरे-धीरे नीचा होता जाता है।
| क्रम | भाग | विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | महान मरुस्थल (Great Desert) | भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित बालुका स्तूप युक्त प्रदेश; बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर के मध्य-पूर्वी भाग में चट्टानी मरुस्थल भी शामिल |
| 2 | चट्टानी मरुस्थल (Rocky Desert / हमादा) | बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के मध्य-पूर्वी भाग में विस्तृत पथरीला प्रदेश |
| 3 | लघु मरुस्थल क्षेत्र (Marginal Desert) | चट्टानी मरुस्थल के पूर्व में, बीकानेर से लेकर गुजरात के कच्छ की खाड़ी तक विस्तृत |
| 4 | अर्द्धशुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (Semi-Arid) | अरावली के पश्चिम में, लूनी बेसिन एवं शेखावाटी क्षेत्र में विस्तृत |
| प्रकार | नाम | औसत वर्षा | क्षेत्रफल |
|---|---|---|---|
| (a) | शुष्क मरुस्थल (राठी प्रदेश) | 0 से 25 सेमी | लगभग 1 लाख वर्ग किमी |
| (b) | अर्द्धशुष्क मरुस्थल (बांगड़ प्रदेश) | 25 से 50 सेमी | लगभग 75,000 वर्ग किमी |
हमादा (Hamada) एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है ऐसा पथरीला मरुस्थल जहाँ रेत के टीले (बालुका स्तूप) नहीं पाए जाते — यहाँ सतह चट्टानी और कठोर होती है। राजस्थान में हमादा का सर्वाधिक विस्तार जैसलमेर (पोकरण, रामगढ़, लोद्रुवा क्षेत्र), फलौदी का दक्षिणी-पश्चिमी भाग, एवं बाड़मेर के उत्तरी भाग में मिलता है।
| विशेषता | विस्तृत जानकारी |
|---|---|
| आकल वुड फॉसिल पार्क | स्थिति: राष्ट्रीय मरू उद्यान, जैसलमेर | जीवाश्म निर्माण काल: जुरासिक काल (लगभग 18 करोड़ वर्ष पूर्व) | भारत व राजस्थान में सबसे प्राचीन लकड़ी के जीवाश्मों में से एक |
| अवसादी चट्टानी समूह | मुख्यतः चूना पत्थर (Limestone) एवं बलुआ पत्थर (Sandstone) की प्रधानता |
| जल पट्टी / लाठी सीरिज | प्राचीन सरस्वती नदी के भूगर्भिक नलीय अवशेष; पोकरण व मोहनगढ़ के बीच लगभग 60 किमी विस्तार; यहाँ सेवण घास अधिक पाई जाती है, इसीलिए इसे 'गोडावण की राखणस्थली' (Great Indian Bustard का संरक्षण क्षेत्र) भी कहा जाता है; चाँदन नलकूप यहाँ प्रसिद्ध है |
| दूसरी जलपट्टी | बायतु (बाड़मेर) से साँचौर (जालौर) तक विस्तृत |
बालुका स्तूप (Sand Dune) पवन द्वारा मिट्टी के निक्षेपण (deposition) से बनी स्थलाकृति है — यानी हवा जब रेत के कणों को उड़ाकर एक जगह जमा करती है, तो टीले बन जाते हैं। स्थानीय भाषा में लहरदार बालुका स्तूप को 'धोरे' और स्थानांतरित/गतिशील बालुका स्तूप को 'धरियन' कहा जाता है। सर्वाधिक बालुका स्तूप जैसलमेर व चूरू में मिलते हैं, जबकि जोधपुर एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ सभी प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक मेकी (E.D. McKee) ने वर्ष 1979 में बालुका स्तूपों को उनकी आकृति और बनने की प्रक्रिया के आधार पर 9 प्रकारों में वर्गीकृत किया। यह वर्गीकरण राजस्थान के मरुस्थल अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हर प्रकार का बालुका स्तूप अलग-अलग हवा की दिशा और गति को दर्शाता है — जैसे किसी बर्फ पर पड़े पैरों के निशान से यह पता चल जाए कि कोई किस दिशा में और कैसे चला था, वैसे ही बालुका स्तूप की आकृति से हवा की दिशा का पता चलता है।
कल्पना कीजिए कि आप किसी मेज पर थोड़ा-सा आटा या रेत रखकर उसके ऊपर से लगातार एक ही दिशा में फूँक मारते रहें — कुछ देर बाद आप देखेंगे कि रेत एक खास आकार में जमा हो जाती है, और यह आकार इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस दिशा और कैसे फूँक मार रहे थे। बालुका स्तूप (Sand Dune) भी बिल्कुल इसी तरह बनते हैं — बस फूँकने की जगह प्राकृतिक हवा (पवन) काम करती है, और मेज़ की जगह पूरा मरुस्थल। नीचे दिए गए हर प्रकार के आगे एक आसान 'रोज़मर्रा की तुलना' (bracket में) दी गई है, ताकि आकृति तुरंत समझ आ जाए और याद रखना आसान हो।
| क्रम | प्रकार | पवन से कोण / आकृति | सर्वाधिक कहाँ |
|---|---|---|---|
| 1 | बरखान | अर्द्धचन्द्राकार | चूरू, जैसलमेर |
| 2 | अनुप्रस्थ | समकोण (90°) | बीकानेर, गंगानगर |
| 3 | अनुदैर्घ्य/रेखीय | समानांतर | जैसलमेर, जोधपुर |
| 4 | पैराबोलिक | बालों की क्लिप (Hairpin) | सभी मरु जिले (सर्वाधिक व्यापक) |
| 5 | सीफ | बरखान की एक भुजा आगे बढ़ी | — |
| 6 | तारानुमा | 3+ भुजाएँ, अनियमित हवा | जैसलमेर (मोहनगढ़) |
| 7 | सब कापीस (नेबखा) | झाड़ियों के पास | जैसलमेर, बीकानेर |
| 8 | नेटवर्क | एक-दूसरे से जुड़े | जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर |
| 9 | अवरोधी | अरावली पहाड़ियों से अवरोध | पुष्कर, जोबनेर, सीकर |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) चित्र/आरेख — बालुका स्तूप के 9 प्रकारों की आकृतियाँ (प्रत्येक प्रकार की तुलनात्मक शक्ल दर्शाने हेतु रिक्त स्थान)
शुष्क मरुस्थल (जहाँ वर्षा 25 सेमी से कम है) और अरावली क्षेत्र (जहाँ वर्षा 50 सेमी तक होती है) के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र (transition zone) को अर्द्धशुष्क मरुस्थल या बांगड़ प्रदेश कहा जाता है। अध्ययन की सुविधा के लिए इसे 4 भागों में बाँटा गया है।
| शब्द/विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नेहड़ रन | लूनी बेसिन में जालौर जिले में स्थित; अन्य प्रमुख रन: पचपदरा, सनवरला, कपराना |
| लवणीय पादप | मुख्यतः बालोतरा क्षेत्र में पाए जाते हैं |
| रोही | लूनी नदी एवं अरावली पर्वत के मध्य स्थित उपजाऊ मैदान |
| बजादा (Bajada) | शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्र में पर्वत के पदीय (तलहटी) भाग में जलोढ़ पंख (गाद/मलबे) से बना मैदान |
| इन्सेलवर्ग (Inselberg) | जर्मन भाषा का शब्द — Insel का अर्थ 'द्वीप' और Berg का अर्थ 'पहाड़'; मरुस्थल में अपरदन (कटाव) के बाद बची रह गई द्वीपनुमा चट्टान/पहाड़ी। उदाहरण: जालौर एवं बाड़मेर की पहाड़ियाँ |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कूबड़/बांका पट्टी | नागौर व अजमेर के मध्य स्थित; यहाँ भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है, जिसके कारण फ्लोरोसिस (हड्डियों की बीमारी) जैसी समस्याएँ पाई जाती हैं |
| लवणीय/खारे पानी की झीलें | इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक खारे पानी की झीलें पाई जाती हैं |
| स्थानीय शब्द | अर्थ/विवरण |
|---|---|
| जोहड़ | शेखावाटी क्षेत्र में पानी के कच्चे कुओं को 'जोहड़' कहते हैं |
| तौरावाटी | काँतली नदी के अपवाह क्षेत्र को 'तौरावाटी' कहा जाता है; विस्तार: सीकर एवं झुंझुनूं |
| सर | मानसून के दौरान शेखावाटी क्षेत्र में बनने वाले अस्थायी तालाब को 'सर' कहते हैं |
| बीड़ | शेखावाटी में चारागाह (पशुओं के चरने की) भूमियों को 'बीड़' कहते हैं; उदाहरण: बगड़, बोड़ (झुंझुनूं), फतेहपुर बीड़ (सीकर) |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नाली/पाट | हनुमानगढ़ में घग्घर नदी को स्थानीय भाषा में 'नाली/पाट' कहते हैं |
| काठी/बागी | घग्घर बेसिन की चिकनी एवं उपजाऊ मिट्टी को 'काठी/बागी' कहते हैं |
| प्रमुख फसलें | गेहूँ, चावल, कपास, गन्ना — घग्घर बेसिन की उपजाऊ मिट्टी के कारण यहाँ ये फसलें प्रचुर मात्रा में उगाई जाती हैं |
मरुस्थल की अपनी एक खास भौगोलिक शब्दावली है, जो परीक्षा में बहुत बार पूछी जाती है। इन शब्दों को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका है — हर शब्द को उसके उदाहरण (example) के साथ जोड़कर याद करना।
| शब्द | परिभाषा/विवरण |
|---|---|
| प्लाया झील (Playa Lake) | मरुस्थल में बनने वाली अस्थायी पानी की झीलें, जो बरसात में भर जाती हैं और गर्मी में सूख जाती हैं; सर्वाधिक जैसलमेर में |
| खड़ीन (Khadin) | पश्चिमी राजस्थान (विशेषकर जैसलमेर) में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा वर्षा जल संचयन हेतु बनाई गई पारंपरिक कृषि प्रणाली/झीलें |
| थली (Thali) | मरुस्थल के ऊँचे उठे हुए भाग को 'थली' कहते हैं; मुख्यतः बीकानेर व चूरू में पाई जाती है — यहाँ कोई नदी प्रवाहित नहीं होती |
| तल्ली (Talli) | मरुस्थल में बालुका स्तूपों के मध्य स्थित निचली भूमि (Depression) |
| रन/टाट/ढाढ़ (Rann) | लवणीय, दलदली एवं अनुपजाऊ भूमि व झीलें; इसका कारण मारका शिष्ट (Marl-schist) चट्टानें हैं; सर्वाधिक जैसलमेर व बाड़मेर में |
| नखलिस्तान/मरू उद्यान (Oasis) | मरुस्थल में जल-बेसिन के कारण बनने वाला हरा-भरा वनस्पति क्षेत्र; उदाहरण: कोलायत झील (बीकानेर), गजनेर (बीकानेर), गड़ीसर (जैसलमेर) |
| बालसन (Balsan) | मरुस्थल में पहाड़ियों के मध्य स्थित जल-बेसिन; उदाहरण: साँभर झील |
| बाप बोल्डर-क्ले (Bap Boulder Clay) | हिमनद (Glacier) द्वारा जमा किए गए बड़े कंकर-पत्थर व अवसाद; निर्माण काल: पर्मो-कार्बोनिफेरस काल; स्थित: फलौदी |
| पीवणा साँप | साँप की एक विशेष प्रजाति जिसका रंग पीला होता है; सर्वाधिक जैसलमेर क्षेत्र में पाई जाती है |
| मरुस्थल का मार्च (March of Desert) | इसका अर्थ है मरुस्थल का धीरे-धीरे आगे बढ़ना (फैलना); दिशा: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर (यानी हरियाणा, गुजरात, पंजाब की दिशा में); इसमें सबसे अधिक योगदान बरखान बालुका स्तूप का होता है क्योंकि यह सबसे तेज़ी से खिसकता है |
| थोरोसोरस इंडिक्स (Thorosaurus Indicus) | जैसलमेर के जेठवाई क्षेत्र में IIT रूड़की एवं भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा खोजे गए प्राचीन डायनासोर जीवाश्म, जिनकी आयु लगभग 16-17 करोड़ वर्ष आँकी गई है |
| जिला | प्रमुख रन |
|---|---|
| चूरू | तालछापर, परिहारा/पड़िहारा |
| फलौदी | बाप, फलौदी |
| जैसलमेर | भाकरी, पोकरण |
| बालोतरा | थोब, पचपदरा |
| बाड़मेर | रेडाना |
मरुस्थल को अक्सर एक 'बंजर', बेकार भूमि समझ लिया जाता है, लेकिन वास्तव में थार मरुस्थल राजस्थान (और भारत) के लिए आर्थिक व सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
| महत्व का क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| नवीकरणीय ऊर्जा | सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा उत्पादन की सर्वाधिक संभावना उत्तरी-पश्चिमी राजस्थान में है — साफ आसमान व तेज़ हवाओं के कारण |
| खनिज संपदा | जीवाश्म खनिज/ऊर्जा खनिज जैसे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, कोयला यहाँ पाए जाते हैं (बाड़मेर-सांचौर बेसिन प्रमुख) |
| परमाणु परीक्षण | पोकरण (जैसलमेर) — भारत की परमाणु परीक्षण स्थली (1974 व 1998 के परीक्षण यहीं हुए) |
| सैन्य प्रशिक्षण | चाँदन फील्ड फायरिंग रेंज (जैसलमेर) एवं महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (बीकानेर) — भारतीय सेना के प्रमुख प्रशिक्षण स्थल |
| पशु सम्पदा | बाड़मेर, जोधपुर क्षेत्र में पशुधन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है |
| नमक उत्पादन | खारे पानी की झीलें अधिक होने से नमक उत्पादन प्रमुख गतिविधि है — साँभर, पचपदरा, डीडवाना प्रमुख केंद्र |
| पर्यटन | ऊँट महोत्सव (बीकानेर), मरु महोत्सव (जैसलमेर), मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर), थार महोत्सव (बाड़मेर) — मरुस्थल पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है |
| जैव विविधता | आश्चर्यजनक रूप से विश्व के अन्य मरुस्थलों की तुलना में थार में जैव विविधता कहीं अधिक है |
| खाद्यान्न उत्पादन | मोटा अनाज, विशेषकर बाजरा, उत्तरी-पश्चिमी राजस्थान में प्रचुर मात्रा में उगाया जाता है |
अगर थार मरुस्थल राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक प्रदेश है, तो अरावली पर्वतमाला इसकी सबसे पुरानी और सबसे विशिष्ट पहचान है। यह विश्व की सबसे प्राचीन मोड़दार (folded) पर्वतमालाओं में से एक मानी जाती है — हिमालय से भी बहुत पुरानी! अरावली न सिर्फ एक भौगोलिक सीमा-रेखा है, बल्कि यह पूर्वी राजस्थान को मरुस्थल में बदलने से भी रोकती है।
| वर्गीकरण का आधार | जानकारी |
|---|---|
| निर्माण काल के अनुसार | प्राचीनतम (Oldest) पर्वतमाला — विश्व की सबसे पुरानी पर्वत शृंखलाओं में से एक |
| निर्माण प्रक्रिया के अनुसार | वलित/मोड़दार पर्वत (Folded Mountain) |
| वर्तमान स्थिति के अनुसार | अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain) — यानी करोड़ों वर्षों के अपरदन (कटाव) के बाद बचा हुआ प्राचीन पर्वत |
| चट्टान समूह | दिल्ली महासमूह — जिसमें अजबगढ़ समूह व अलवर समूह शामिल हैं; रायलो समूह — ए.एम. हैरोन (A.M. Heron) द्वारा वर्णित |
| कुल लम्बाई | राजस्थान में लम्बाई | राजस्थान में प्रतिशत हिस्सा | औसत ऊँचाई |
|---|---|---|---|
| 692 किमी | 550 किमी | लगभग 80% हिस्सा | 930 मीटर |
ध्यान रखें: अरावली की चौड़ाई दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर जाने पर लगातार कम होती जाती है — यानी दक्षिणी अरावली (सिरोही-उदयपुर क्षेत्र) सबसे चौड़ी है, जबकि उत्तरी अरावली (अलवर-जयपुर क्षेत्र) की चौड़ाई सबसे कम और अनिश्चित है।
| विशेषता | उत्तरी अरावली | मध्य अरावली | दक्षिणी अरावली |
|---|---|---|---|
| विस्तार | झुंझुनूं व जयपुर के मध्य | जयपुर व राजसमंद के मध्य (मेवाड़ा अरावली) | राजसमंद व सिरोही के मध्य |
| प्रमुख जिले | झुंझुनूं, सीकर, जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, अलवर, दौसा | अजमेर, ब्यावर, टोंक | सिरोही, राजसमंद, डूंगरपुर, उदयपुर, सलूंबर |
| सर्वोच्च चोटी | रघुनाथगढ़ (1055 मीटर, सीकर) | टॉडगढ़ (934 मीटर, ब्यावर) | गुरुशिखर (1722 मीटर, माउंट आबू, सिरोही) |
| औसत ऊँचाई | 450 मीटर | 700 मीटर | 1000 मीटर |
| चौड़ाई | अनिश्चित (सबसे कम) | 30 किमी | 100 किमी (सबसे अधिक) |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — राजस्थान में अरावली के 3 भाग: उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी अरावली (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)
| क्रम | चोटी | ऊँचाई (मीटर) | जिला |
|---|---|---|---|
| 1 | गुरुशिखर | 1722 | माउंट आबू (सिरोही) |
| 2 | सेर | 1597 | माउंट आबू (सिरोही) |
| 3 | दिलवाड़ा | 1442 | माउंट आबू (सिरोही) |
| 4 | जरगा | 1431 | उदयपुर |
| 5 | अचलगढ़ | 1380 | माउंट आबू (सिरोही) |
| 6 | कुम्भलगढ़ | 1224 | राजसमंद |
| 7 | धोनिया | 1183 | राजसमंद |
| 8 | रघुनाथगढ़ | 1055 | सीकर |
| 9 | लोहार्गल | 1051 | झुंझुनूं |
| 10 | मालखेत | 1050 | सीकर |
| 11 | ऋषिकेश | 1017 | सिरोही |
| 12 | कमलनाथ | 1001 | उदयपुर |
| 13 | सज्जनगढ़ | 938 | उदयपुर |
| 14 | टॉडगढ़ (मोरमजी/गोरमजी) | 934 | ब्यावर |
| 15 | सायरा | 900 | उदयपुर |
| 16 | तारागढ़ | 873 | अजमेर |
| 17 | बिलाली | 775 | अलवर |
| 18 | रोजा भाकर | 730 | जालौर |
| 19 | बैराठ | 704 | कोटपूतली-बहरोड़ |
गुरुशिखर की वास्तविक ऊँचाई 1722 मीटर है, लेकिन इसके ऊपर बने दत्तात्रेय ऋषि मंदिर (लगभग 5 मीटर ऊँचा) को मिलाकर कुल ऊँचाई 1727 मीटर मानी जाती है — परीक्षा में दोनों आँकड़े पूछे जा सकते हैं, इसलिए दोनों याद रखें। कर्नल जेम्स टॉड ने गुरुशिखर को 'सन्तों का शिखर' कहा था। गुरुशिखर सिरोही जिले में सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित है, जबकि इसका सर्वाधिक भौगोलिक विस्तार उदयपुर जिले में है। गुरुशिखर का नामकरण ऋषि दत्तात्रेय के नाम पर हुआ है।
| चोटी | जिला | ऊँचाई (मीटर) | अरावली भाग |
|---|---|---|---|
| जयराज | सिरोही | 1090 | दक्षिणी |
| माकड़मगरा | उदयपुर | 989 | दक्षिणी |
| सुंधा पर्वत | भीनमाल (जालौर) | 991 | दक्षिणी |
| लीलागढ़ | उदयपुर | 874 | दक्षिणी |
| डोरा पर्वत | जसवंतपुरा (जालौर) | 869 | दक्षिणी |
| नागपानी | उदयपुर | 867 | दक्षिणी |
| गोगुन्दा | उदयपुर | 840 | दक्षिणी |
| इसराना भाखर | जालौर | 839 | दक्षिणी |
| झारोला भाखर | जालौर | 588 | दक्षिणी |
| भोजगढ़ | सीकर | 997 | उत्तरी |
| खो | जयपुर | 920 | उत्तरी |
| हर्ष पहाड़ी | सीकर | 820 | उत्तरी |
| भैंराच | अलवर | 792 | उत्तरी |
| बरवाड़ा | जयपुर | 786 | उत्तरी |
| घोसी (आग्नेयगिरि) | झुंझुनूं | 740 | उत्तरी |
| जयगढ़ | जयपुर | 648 | उत्तरी |
| नाहरगढ़ | जयपुर | 599 | उत्तरी |
रोचक तथ्य: घोसी पहाड़ी (740 मीटर) राजस्थान-हरियाणा सीमा पर झुंझुनूं जिले में स्थित है — यह देखने में एक सुप्त ज्वालामुखी जैसी लगती है, इसीलिए इसे 'आग्नेयगिरि' भी कहा जाता है। हर्ष पहाड़ी (820 मीटर) सीकर में स्थित हर्षनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। खो पहाड़ी (920 मीटर) जयपुर में है, जबकि उदयनाथ पर्वत (अलवर) रूपारेल नदी का उद्गम स्थल है।
| शब्द | अर्थ एवं स्थान |
|---|---|
| भाकर | तीव्र ढाल वाली ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियाँ, मुख्यतः सिरोही क्षेत्र में; जालौर में इसराना, रोजा एवं झारोला भाखर इसके उदाहरण हैं — ध्यान रहे, डूंगरपुर/बाँसवाड़ा में इस प्रकार की पहाड़ियाँ नहीं पाई जातीं |
| गिरवा | उदयपुर बेसिन के चारों ओर तश्तरीनुमा (saucer-shaped) पहाड़ों की मेखला/शृंखला — इसे 'उदयपुर की घाटी का घेरा' भी कहा जाता है |
| आडावाला पर्वत | बूंदी और सवाई माधोपुर की विन्ध्यन क्रम की अरावली श्रेणियाँ (Vindhyan series hills) |
| मेरवाड़ा पहाड़ियाँ | मध्य अरावली में टॉडगढ़ (ब्यावर) के निकट स्थित; ये मारवाड़ के मैदान को मेवाड़ के पठार से अलग करती हैं; जिले: अजमेर, ब्यावर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, भीलवाड़ा |
| तोरावाटी पहाड़ियाँ | शेखावाटी क्षेत्र में नीम का थाना (पश्चिमी), झुंझुनूं (दक्षिण) एवं सीकर (पूर्वी) क्षेत्रों में विस्तृत |
| आबू पर्वत खण्ड | पूरी तरह ग्रेनाइट चट्टान से निर्मित; आकृति: बैथोलिथ (Batholith) एवं विशाल इन्सेलबर्ग; माउंट आबू नगर लगभग 1300 मीटर की ऊँचाई पर बसा है — यह राजस्थान का सबसे ऊँचाई पर बसा नगर है (दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़ है) |
| पहाड़ी का नाम | किला |
|---|---|
| त्रिकूट पहाड़ी (जैसलमेर) | सोनार किला (जैसलमेर) |
| कनकाचल/सुवर्णगिरी | जालौर का किला |
| चिड़ियाटूंक/पंचटियेला | मेहरानगढ़ (जोधपुर) |
| हेमकुट/गंधमादन | कुम्भलगढ़ (राजसमंद) |
| देवगिरी | दौसा का किला |
| कालीखोह | आमेर (जयपुर) |
| कोशवर्द्धन | शेरगढ़ (बारां) |
| बीठली | तारागढ़ (अजमेर) |
| मेसा पठार (620 मीटर) | चित्तौड़गढ़ का किला |
| नानी सिरड़ी | सोजत किला (पाली) |
| पठार | जिला/स्थिति | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| उड़िया पठार | सिरोही | राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार; ऊँचाई: 1360 मीटर; गुरुशिखर से लगभग 8 किमी नीचे |
| आबू पठार | सिरोही | ऊँचाई: 1200 मीटर; लम्बाई 19 किमी, चौड़ाई 8 किमी; गुम्बदाकार (बैथोलिथ) संरचना |
| भोराट पठार | राजसमंद-उदयपुर | राजस्थान का दूसरा सबसे ऊँचा पठार; ऊँचाई: 1225 मीटर; कुम्भलगढ़ हिल्स व गोगुन्दा हिल्स के बीच स्थित; एक जल-विभाजक पठार (Watershed Plateau); जरगा चोटी यहीं स्थित है |
| भोमट पठार | डूंगरपुर-उदयपुर | भील जनजाति का प्रमुख क्षेत्र |
| लसाड़िया पठार | सलूंबर-प्रतापगढ़ | जयसमन्द झील के पूर्व में स्थित; एक उत्खात (Bad Land) पठार |
| क्रांसका+कांकणवाड़ी | अलवर (सरिस्का) | उत्तरी अरावली में स्थित; सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य यहीं स्थित है |
| मेसा पठार | चित्तौड़गढ़ | ऊँचाई: 620 मीटर; इस पर चित्तौड़गढ़ का विश्व-प्रसिद्ध किला स्थित है |
| ऊपरमाल | भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़ | भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) से बिजोलिया (भीलवाड़ा) तक विस्तृत; यह हाड़ौती पठार का ही एक भाग माना जाता है; जिले: कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा |
पश्चिम से पूर्व क्रम याद रखें: भोराट पठार → लसाड़िया पठार → ऊपरमाल → हाड़ौती पठार — यह क्रम परीक्षा में बहुत बार पूछा जाता है, इसलिए दिशा (पश्चिम से पूर्व) के साथ याद रखें।
दर्रा (Pass) पहाड़ों के बीच वह प्राकृतिक रास्ता है, जिससे होकर एक तरफ से दूसरी तरफ आना-जाना आसान होता है — जैसे किसी दीवार में एक दरवाज़ा हो। राजस्थान में सबसे अधिक दर्रे दक्षिणी अरावली (विशेषकर राजसमंद जिले) में पाए जाते हैं।
| दर्रा/नाल | जिला | विशेष जानकारी |
|---|---|---|
| देबर नाल | सलूंबर | जयसमन्द झील गोमती नदी पर बनी है, जिसे 'ढेवर झील' भी कहते हैं — यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है |
| फुलवारी नाल | उदयपुर (कोटड़ा) | यहाँ से सोम, मानसी एवं वाकल नदियाँ बहती हैं |
| केवड़ा नाल | उदयपुर | उदयपुर एवं सलूंबर को जोड़ती है |
| देबारी नाल | उदयपुर | उदयपुर एवं चित्तौड़गढ़ को राष्ट्रीय राजमार्ग NH-27 से जोड़ती है |
| पगल्या नाल/झीलवाड़ा | राजसमंद | मेवाड़ (राजसमंद) को मारवाड़ (पाली) से जोड़ती है |
| हाथीगुड़ा नाल | राजसमंद | राजसमंद, गोगुन्दा (उदयपुर) व सिरोही को आपस में जोड़ती है |
| देसूरी नाल | पाली | पाली को चारभुजानाथ मन्दिर (राजसमंद) से जोड़ती है |
| बर नाल | ब्यावर (मध्य अरावली) | मारवाड़ (जोधपुर, पाली) को मेरवाड़ा (ब्यावर, अजमेर) से जोड़ती है |
| बोरांग दर्रा | सिरोही (दक्षिण) | सिरोही (आबू क्षेत्र) को उदयपुर से जोड़ता है |
| गोरम घाट | राजसमंद | एक प्रसिद्ध रेलवे घाट एवं लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्र |
| खामली/कमली घाट | राजसमंद | नाथद्वारा को जोड़ने वाला घाट |
| पखेरिया/परवेरिया | ब्यावर (मध्य अरावली) | ब्यावर के 5 प्रमुख दर्रों में से एक |
| शिवपुर घाट | ब्यावर (मध्य अरावली) | ब्यावर के 5 प्रमुख दर्रों में से एक |
| सुरा घाट | ब्यावर (मध्य अरावली) | ब्यावर से भीलवाड़ा जाने का मार्ग |
| पीपली दर्रा | सिरोही | दक्षिणी अरावली का एक प्रमुख दर्रा |
| हाथी दर्रा | उदयपुर | पिंडवाड़ा (सिरोही) को उदयपुर से जोड़ता है — ध्यान रहे, 'हाथीगुड़ा नाल' और 'हाथी दर्रा' दो अलग-अलग दर्रे हैं, इन्हें भ्रमित न करें |
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — अरावली की प्रमुख चोटियाँ, पठार एवं दर्रे (स्थान-चिह्न अंकित करने हेतु रिक्त मानचित्र)
मध्य अरावली में ब्यावर क्षेत्र से होकर 5 प्रमुख दर्रे गुजरते हैं — बर, पखेरिया/परवेरिया, शिवपुर घाट, देबारी एवं सुरा घाट। साथ ही ध्यान रहे — देसूरी की नाल, झीलवाड़ा की नाल और पगल्या की नाल — ये तीनों नाम असल में एक ही दर्रे को संदर्भित करते हैं, इसलिए परीक्षा में पाली या राजसमंद दोनों ही सही उत्तर माने जा सकते हैं। सर्वाधिक दर्रे राजसमंद जिले में पाए जाते हैं।
| महत्व | विवरण |
|---|---|
| मरुस्थलीकरण रोकना | अरावली एक प्राकृतिक अवरोधक (Barrier) के रूप में कार्य करती है, जो पूर्वी राजस्थान को मरुस्थल में बदलने से रोकती है |
| जैव विविधता | यहाँ वनस्पति का अधिक विस्तार है, इसलिए जैव विविधता भी अधिक पाई जाती है |
| जनजातीय संरक्षण | अरावली को 'जनजातियों की शरणस्थली' कहा जाता है — मीणा जनजाति (जयपुर), भील जनजाति (उदयपुर), गरासिया जनजाति (सिरोही) यहाँ बसती हैं |
| खनिज संपदा | धारवाड़ क्रम की चट्टानों के कारण यहाँ धात्विक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं |
| जल विभाजक रेखा | अरावली राज्य के अपवाह तंत्र को दो भागों में बाँटती है — पश्चिमी ढाल का पानी अरब सागर में और पूर्वी ढाल का पानी बंगाल की खाड़ी में जाता है |
| झीलें | राजस्थान की अधिकांश मीठे पानी की झीलें अरावली क्षेत्र (विशेषकर उदयपुर) में स्थित हैं |
| पर्यटन | अजमेर-पुष्कर (धार्मिक पर्यटन) एवं माउंट आबू (हिल स्टेशन पर्यटन) अरावली क्षेत्र की प्रमुख पहचान हैं |
| प्राचीन सभ्यता | प्राचीन सभ्यताएँ — आहड़, गिलुण्ड, वैराठ, गणेश्वर — तथा नवीन शहर जयपुर, अजमेर, उदयपुर अरावली क्षेत्र में ही बसे हैं |
| योजना प्रदेश | अरावली को 'राजस्थान का योजना प्रदेश' भी कहा जाता है — यहाँ वानिकी, मृदा संरक्षण, जनजातीय विकास व पर्यटन से जुड़ी कई सरकारी योजनाएँ केंद्रित हैं |
पीडमांट (Piedmont) क्या है?: पीडमांट अंग्रेज़ी के दो शब्दों से मिलकर बना है — Pied (पैर/तलहटी) + Mont (पर्वत) — यानी 'पर्वत की तलहटी वाला क्षेत्र'। राजस्थान में इसका उदाहरण देवगढ़ (राजसमंद) है।
राजस्थान के चारों भौतिक प्रदेशों में सबसे नया (youngest) प्रदेश पूर्वी मैदान है। यह मुख्यतः नदियों द्वारा लाए गए अवसादों (sediments) के जमाव से बना है, और इसका निर्माण प्लीस्टोसीन काल (Pleistocene Period) में हुआ। चूँकि यहाँ की मिट्टी जलोढ़ (alluvial) है, इसलिए यह राजस्थान का सबसे उपजाऊ क्षेत्र भी है। अध्ययन की दृष्टि से पूर्वी मैदान को 3 भागों में बाँटा जाता है।
| भाग | मेवाड़ मैदान | मालपुरा-करौली मैदान |
|---|---|---|
| स्थिति | बनास नदी का दक्षिणी मैदान | बनास नदी का उत्तरी मैदान |
| विस्तार | चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमंद | अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर |
| मिट्टी | भूरी मिट्टी | जलोढ़ मिट्टी |
बाणगंगा मैदान को 'रोही का मैदान' भी कहा जाता है, इसका विस्तार जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा एवं भरतपुर तक है। यहाँ मुख्यतः जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है, और चूँकि यह मिट्टी सबसे अधिक उपजाऊ है, इसलिए यहाँ जनसंख्या घनत्व भी अधिक है — यानी उपजाऊ मिट्टी सीधे तौर पर घनी आबादी का कारण बनती है, यह एक महत्वपूर्ण भौगोलिक सिद्धांत है जो पूरे पूर्वी मैदान पर लागू होता है।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — पूर्वी मैदानी प्रदेश के 3 भाग: माही मैदान, बनास-बाणगंगा मैदान, चम्बल का मैदान (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)
| महत्व | विवरण |
|---|---|
| कृषि उत्पादकता | सर्वाधिक उपजाऊ जलोढ़ मृदा होने के कारण यहाँ कृषि उत्पादकता सबसे अधिक है |
| जनघनत्व | उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी के कारण जनसंख्या घनत्व भी सर्वाधिक है |
| आधारभूत अवसंरचना | सड़क, विद्युत, परिवहन एवं शिक्षा जैसी सुविधाएँ यहाँ सबसे अधिक विकसित हैं |
| उद्योग | राजस्थान के सबसे विकसित औद्योगिक केंद्र — जयपुर व अलवर — इसी क्षेत्र में स्थित हैं |
| पक्षी जैव विविधता | बन्ध बारैठा एवं केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) — दोनों विश्व-प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य इसी क्षेत्र में स्थित हैं |
राजस्थान का सबसे छोटा (क्षेत्रफल में मात्र 6.89%) लेकिन भूवैज्ञानिक दृष्टि से बेहद दिलचस्प प्रदेश है हाड़ौती पठार। यह असल में मध्यप्रदेश के मालवा पठार का ही उत्तरी विस्तार है, और इसका निर्माण बेसाल्ट लावा चट्टानों (ज्वालामुखी से निकले पिघले पदार्थ के जमने से बनी चट्टानें) एवं विन्ध्यन शैलों से हुआ है।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| संबंध | मालवा पठार (मध्यप्रदेश) का उत्तरी विस्तार |
| निर्माण | बेसाल्ट लावा चट्टानें + विन्ध्यन शैलें |
| निर्माण काल | क्रिटेशियस काल (राजस्थान के 4 प्रदेशों में दूसरा सबसे प्राचीन) |
| औसत ऊँचाई | लगभग 500 मीटर |
| आधार | (i) दक्कन लावा पठार | (ii) विन्ध्यन कगार |
|---|---|---|
| स्थिति | हाड़ौती के दक्षिण में | हाड़ौती के दक्षिण-पूर्व में |
| विस्तार | मालव प्रदेश (प्रतापगढ़, झालावाड़) + ऊपरमाल (भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़) | हाड़ौती (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) + डांग क्षेत्र (सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर) |
| खनिज/चट्टान | बेसाल्ट लावा | बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोटा स्टोन, हीरा, लाल पत्थर (धौलपुर) |
ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट (जिसे MBF या महान सीमान्त भ्रंश भी कहते हैं) अरावली पर्वतीय प्रदेश एवं हाड़ौती पठार के बीच स्थित एक भ्रंश (Fault — यानी भूगर्भीय दरार) है। भ्रंश का सीधा मतलब है कि यहाँ धरती की दो अलग-अलग चट्टानी परतें आपस में टकराकर एक तीखी सीमा-रेखा बनाती हैं — जैसे दो अलग रंग के कपड़ों को सिलाई से जोड़ा गया हो। इसका महत्व इतना अधिक है कि इसे विश्व धरोहर (World Heritage) स्थलों में शामिल किए जाने पर विचार होता रहा है। इसका विस्तार चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली एवं धौलपुर जिलों तक है।
हाड़ौती के उत्तर-पश्चिम एवं दक्षिण में स्थित यह पर्वत श्रेणी दो भागों में बँटी है — बूंदी हिल्स एवं मुकुंदरा पर्वत श्रेणी।
| विशेषता | बूंदी हिल्स | मुकुंदरा पर्वत श्रेणी |
|---|---|---|
| स्थिति | बूंदी (दोहरी पर्वतमाला) | कोटा-झालावाड़ |
| लम्बाई | 18 किमी | 120 किमी |
| ऊँचाई | 300-350 मीटर; सर्वोच्च: सतूर (353 मीटर) | 335-503 मीटर; सर्वोच्च: चंदवाड़ी (517 मीटर, झालावाड़) |
| प्रमुख दर्रे | बूंदी, लाखेरी, जैतावास, रामगढ़-खटगड़ (बूंदी से 13 किमी पश्चिम) | — |
चम्बल नदी एवं इसकी सहायक नदियों — कालीसिंध, पार्वती, मेज — द्वारा निर्मित उपजाऊ मैदान।
(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र — हाड़ौती पठार के 5 उपप्रदेश (सीमांकन हेतु रिक्त मानचित्र)
| महत्व | विवरण |
|---|---|
| कृषि उत्पादकता | काली मिट्टी होने के कारण यहाँ कृषि उत्पादकता उच्च है, विशेषकर सोयाबीन जैसी फसलों के लिए |
| जनघनत्व | उपजाऊ मिट्टी के कारण जनसंख्या घनत्व भी अपेक्षाकृत अधिक है |
| खनिज संपदा | पत्थर आधारित खनिज — बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, कोटा स्टोन, तथा धौलपुर का लाल पत्थर (रेड स्टोन) प्रसिद्ध हैं |
| जल उपलब्धता | सर्वाधिक नदियाँ होने के कारण यहाँ सतही जल की उपलब्धता अधिक है (चम्बल, कालीसिंध, पार्वती, मेज) |
| जलीय जैव विविधता | घड़ियाल, मगरमच्छ, उदबिलाव (Otter) एवं गांगेय सूस (Gangetic Dolphin) जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं — विशेषकर राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य में |
इस अध्याय को पूरी तरह अद्यतन रखने के लिए जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार नवीनतम घटनाओं और आँकड़ों को यहाँ शामिल किया गया है — ये तथ्य किसी पुरानी किताब में नहीं मिलेंगे।
अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को पहली बार वर्ष 2023 में शुरू किया गया था, जिसके तहत अरावली पर्वतमाला के चारों ओर 5 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी (buffer zone) बनाने की योजना थी। 5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) को केंद्र सरकार ने इस परियोजना को और बड़े पैमाने पर पुनः लॉन्च किया — अब यह परियोजना राजस्थान, हरियाणा, गुजरात एवं दिल्ली के कुल 29 जिलों को कवर करेगी, तथा लगभग 1,400 किमी लम्बी एवं 5 किमी चौड़ी हरित पट्टी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत 2027 तक लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने तथा 29 जिलों में 1,000 पौधशालाएँ (nurseries) स्थापित करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री द्वारा चलाए गए 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को भी इस परियोजना से जोड़ा गया है। गौरतलब है कि राजस्थान में सबसे अधिक क्षतिग्रस्त भूमि (लगभग 81%) है, और ISRO (2021) के अनुसार राज्य के लगभग 68.3% भूभाग में मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया चल रही है।
दिसम्बर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान एवं गुजरात में अरावली क्षेत्र में सभी नई खनन लीज (mining lease) पर अंतरिम रोक लगा दी — यानी अरावली के संरक्षित क्षेत्रों में कोई नया खनन कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि अरावली की सटीक भौगोलिक परिभाषा एवं सीमांकन (demarcation) तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। जून 2026 में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च-अधिकार प्राप्त समिति (High-Powered Committee) गठित की गई, जो अरावली की परिभाषा एवं सीमा-निर्धारण की समीक्षा करेगी। जनवरी 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने राजस्थान में जारी अवैध खनन एवं वृक्षों की कटाई पर भी सख्त टिप्पणी की।
हैरानी की बात यह है कि हाल के आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान में मरुस्थलीकरण (Desertification) की प्रक्रिया धीमी पड़ रही है — देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के सापेक्ष राजस्थान में मरुस्थलीकरण की दर 2003-05 में 6.58% थी, जो 2011-13 में घटकर 6.55% और 2018-19 में घटकर 6.46% रह गई। राजस्थान भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ 2003-05 के बाद से भूमि क्षरण (Land Degradation) के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल लगभग 3,87,000 हेक्टेयर तक घट गया है। इसका कारण है — अधिक वर्षा, कम होते बालुका स्तूप, अधिक सिंचित कृषि भूमि, अधिक हरियाली एवं कम धूल भरी आँधियाँ। हालाँकि, ध्यान रहे — राजस्थान अभी भी क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में सबसे अधिक मरुस्थलीकरण प्रभावित राज्य (लगभग 2.12 करोड़ हेक्टेयर) बना हुआ है, बस इसकी दर घट रही है।
हाड़ौती पठार के अंतर्गत आने वाले शाहाबाद उच्च भूमि क्षेत्र में स्थित रामगढ़ क्रेटर (बारां) को हाल ही में भारत के पहले आधिकारिक रूप से अधिसूचित भू-विरासत स्थल (Notified Geo-Heritage Site) के रूप में मान्यता दी गई है। यह बारां जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी दूर स्थित है। सरकार इसे भू-पर्यटन (Geo-Tourism) केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 57 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य करवा रही है — जिसमें दर्शक केंद्र, मार्ग सुविधाएँ एवं संरक्षण संबंधी ढांचा शामिल है।
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान को भौगोलिक कारकों के आधार पर कितने भौतिक प्रदेशों में बाँटा गया है? | 4 (मरुस्थल, अरावली, पूर्वी मैदान, हाड़ौती) |
| V.C. मिश्रा ने राजस्थान को कितने भागों में बाँटा? | 7 भागों में (पुस्तक: Geography of Rajasthan, 1967) |
| राजस्थान का सबसे प्राचीन भौगोलिक प्रदेश कौनसा है? | अरावली पर्वतीय प्रदेश |
| राजस्थान का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा भौगोलिक प्रदेश कौनसा है? | पश्चिमी मरुस्थल (61.11%) |
| राजस्थान की प्री-केम्ब्रियन चट्टानों का वर्णन किसने किया? | ए.एम. हैरोन (A.M. Heron) |
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| थार मरुस्थल से प्रभावित क्षेत्रफल एवं जनसंख्या का प्रतिशत? | क्षेत्रफल 61%, जनसंख्या 40% |
| राजस्थान का कौनसा भौतिक प्रदेश पाकिस्तान से सीमा साझा करता है? | पश्चिमी मरुस्थल |
| बालुका स्तूपों का वर्गीकरण किसने किया? | मेकी (McKee), वर्ष 1979 में, 9 प्रकारों में |
| सबसे अधिक गतिशील बालुका स्तूप कौनसा है? | बरखान (Barchan) |
| जोधपुर की क्या विशेषता है (बालुका स्तूप के संदर्भ में)? | यहाँ सभी 9 प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं |
| हमादा किसे कहते हैं? | बालुका स्तूप रहित पथरीला मरुस्थल; सर्वाधिक जैसलमेर में |
| खड़ीन झीलों का निर्माण किसने किया? | पालीवाल ब्राह्मणों ने (जैसलमेर क्षेत्र में) |
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| अरावली की सबसे ऊँची चोटी कौनसी है और उसकी ऊँचाई क्या है? | गुरुशिखर, 1722 मीटर (मंदिर सहित 1727 मीटर), माउंट आबू (सिरोही) |
| गुरुशिखर का नामकरण किसके नाम पर हुआ? | ऋषि दत्तात्रेय के नाम पर |
| राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार कौनसा है? | उड़िया पठार (सिरोही), ऊँचाई 1360 मीटर |
| राजस्थान का दूसरा सबसे ऊँचा पठार कौनसा है? | भोराट पठार (राजसमंद-उदयपुर), ऊँचाई 1225 मीटर |
| सर्वाधिक अरावली दर्रे किस जिले में पाए जाते हैं? | राजसमंद जिले में |
| राजस्थान का सबसे ऊँचाई पर बसा नगर कौनसा है? | माउंट आबू (लगभग 1300 मीटर); दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़ |
| ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट किन दो प्रदेशों के बीच स्थित है? | अरावली पर्वतीय प्रदेश एवं हाड़ौती पठार के बीच |
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| पूर्वी मैदान का निर्माण किस काल में हुआ? | प्लीस्टोसीन काल (राजस्थान के प्रदेशों में सबसे नवीन) |
| पूर्वी मैदान को कितने भागों में बाँटा गया है? | 3 भाग — माही मैदान, बनास-बाणगंगा मैदान, चम्बल का मैदान |
| बीहड़ किसे कहते हैं? | चम्बल नदी के अवनालिका अपरदन से बनी उत्खात (badland) स्थलाकृतियाँ |
| हाड़ौती पठार का निर्माण किस काल में हुआ? | क्रिटेशियस काल |
| हाड़ौती पठार को कितने उपप्रदेशों में बाँटा गया है? | 5 उपप्रदेश |
| रामगढ़ क्रेटर की खोज व मान्यता कब मिली? | निर्माण लगभग 16.5 करोड़ वर्ष पूर्व; अंतर्राष्ट्रीय मान्यता वर्ष 2021 में (विश्व का 200वाँ, भारत का तीसरा क्रेटर) |
| रामगढ़ क्रेटर क्षेत्र की प्रमुख जनजाति कौनसी है? | सहरिया जनजाति |
Q1. राजस्थान के भौगोलिक कारकों पर आधारित वर्गीकरण के अनुसार कितने भौतिक प्रदेश हैं और इनके नाम लिखिए। Q2. बालुका स्तूपों के 9 प्रकारों का वर्णन करते हुए बताइए कि सर्वाधिक गतिशील प्रकार कौनसा है। Q3. अरावली पर्वतमाला के निर्माण की प्रक्रिया एवं इसके तीन भागों (उत्तरी, मध्य, दक्षिणी) की तुलना कीजिए। Q4. गुरुशिखर एवं उड़िया पठार से संबंधित प्रमुख तथ्य बताइए। Q5. ग्रेट बाउन्ड्री फॉल्ट (GBF) क्या है और यह किन दो भौतिक प्रदेशों को अलग करता है? Q6. रामगढ़ क्रेटर की भूवैज्ञानिक विशेषताएँ एवं इसे मिली अंतर्राष्ट्रीय मान्यता का वर्णन कीजिए। Q7. लूनी बेसिन एवं शेखावाटी अंतःप्रवाह क्षेत्र की स्थानीय शब्दावली (जैसे रोही, बजादा, जोहड़, बीड़) की व्याख्या कीजिए। Q8. हाड़ौती पठार के 5 उपप्रदेशों की सूची बनाकर प्रत्येक की एक विशेषता लिखिए।