सोचिए — एक परिवार का बजट कैसे चलता है? पहले यह देखा जाता है कि घर में कितनी कमाई (आय) हुई, फिर तय होता है कि कितना खर्च होगा, और अगर खर्च कमाई से ज़्यादा हो जाए तो घाटा (कर्ज) बढ़ता है। ठीक इसी तरह, किसी राज्य की सरकार को भी अपनी "कमाई" (राजस्व प्राप्तियां), अपना "खर्च" (व्यय) और अपना "घाटा" (राजकोषीय घाटा) संभालना पड़ता है — बस पैमाना करोड़ों-लाखों करोड़ रुपयों में होता है।
यह अध्याय राजस्थान की समूची अर्थव्यवस्था की "सेहत-जांच रिपोर्ट" है — राज्य कितना उत्पादन कर रहा है (GSDP), हर व्यक्ति की औसत आय कितनी है (प्रति व्यक्ति आय), बाज़ार में चीज़ों के दाम कैसे बदल रहे हैं (मूल्य सूचकांक), सरकार का खज़ाना कैसा चल रहा है (राजकोषीय प्रबंधन), बैंकों में पैसा कैसे आ-जा रहा है (वित्तीय सेवाएँ), और गरीब-वंचित वर्गों तक सरकारी मदद सीधे कैसे पहुँच रही है (DBT) — इन सभी सवालों के जवाब आर्थिक समीक्षा 2025-26 के इस अध्याय में मिलते हैं।
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में एक गतिशील भागीदार के रूप में स्थान बनाया है। वर्ष 2025-26 में राज्य ने देश की कुल GDP में (चालू कीमतों पर) 5.25 प्रतिशत का योगदान दिया।
लक्ष्य: राजस्थान को एक ऐसे मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करना जो सतत विकास (Sustainable Growth), वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) और नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen Centric Governance) की मिसाल बने। इस विजन को हासिल करने के लिए एक्शन एजेंडा में 6 स्तंभ शामिल हैं — (1) वित्तीय स्थिरता एवं संवृद्धि, (2) डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, (3) समावेशी आर्थिक विकास, (4) सतत विकास, (5) सामाजिक सुरक्षा, (6) दर्शिता एवं जवाबदेही।
परिभाषा: एक विशिष्ट समयावधि (सामान्यतः एक वर्ष) के भीतर किसी राज्य के घरेलू क्षेत्र में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य। इसकी परिभाषा के 4 मुख्य भाग हैं — (1) अंतिम वस्तुएँ एवं सेवाएँ, (2) राज्य का घरेलू क्षेत्र, (3) एक विशिष्ट समयावधि, (4) मौद्रिक मूल्य।
💡 आसान भाषा में: सीधी भाषा में — GSDP यह बताता है कि पूरे राजस्थान ने मिलकर एक साल में कुल कितने रुपये का माल-सामान बनाया और सेवाएं दीं। जैसे देश का कुल उत्पादन GDP कहलाता है, वैसे ही किसी एक राज्य के उत्पादन को GSDP कहते हैं।
🏠 उदाहरण: अगर राजस्थान में एक साल में सभी किसानों की फसल, फैक्ट्रियों का माल और होटल-दुकानों की सेवाएं जोड़ दी जाएं तो जो कुल रकम बनेगी, वही GSDP है — 2025-26 में यह रकम ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित है।
आर्थिक वृद्धि राजस्थान की सतत एवं उच्च-मूल्य विकास की आकांक्षा का केंद्रीय स्तंभ है। संरचनात्मक सुधारों और अवसंरचना में बढ़ते निवेश के साथ प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर विस्तार ने राज्य के उत्पादक आधार को मज़बूत किया है। विनिर्माण, सेवाओं, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिकीकृत कृषि की बढ़ती भूमिका आर्थिक विविधीकरण और मज़बूती को दर्शाती है।
राज्य घरेलू उत्पाद के आकलन राज्य के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को दर्शाते हैं। यह राज्य की अर्थव्यवस्था की वृद्धि मापने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है — यह विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों, किए गए निवेशों और खुले अवसरों के परिणामों की व्यापक तस्वीर देता है। राज्य घरेलू उत्पाद राज्य के आर्थिक विकास का प्रतिबिंब है, और इससे निकलने वाली प्रति व्यक्ति आय लोगों की खुशहाली (Well-being) मापने का उपयुक्त पैमाना है।
चालू (Current) बनाम स्थिर/आधार (Constant) कीमतें
| विवरण | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| GSDP - राजस्थान (₹ करोड़) | 11,95,641 | 13,48,693 | 15,22,063 | 17,01,190 | 18,75,413 |
| वृद्धि दर (%) | 17.46 | 12.80 | 12.85 | 11.77 | 10.24 |
| GDP - अखिल भारत (₹ करोड़) | 2,35,97,399 | 2,68,90,473 | 3,01,22,956 | 3,30,68,145 | 3,57,13,886 |
| वृद्धि दर (%) | 18.9 | 14.0 | 12.0 | 9.8 | 8.0 |
| विवरण | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| GSDP - राजस्थान (₹ करोड़) | 7,25,464 | 7,71,631 | 8,30,724 | 9,03,564 | 9,81,807 |
| वृद्धि दर (%) | 8.93 | 6.36 | 7.66 | 8.77 | 8.66 |
परिभाषा: चालू कीमत पर गणना में उसी वर्ष की बाज़ार-कीमतों का उपयोग होता है, जबकि स्थिर कीमत पर गणना में एक निश्चित आधार वर्ष (2011-12) की कीमतों को स्थिर रखकर उत्पादन की मात्रा में वास्तविक बदलाव मापा जाता है।
💡 आसान भाषा में: मान लीजिए पिछले साल 100 किलो गेहूं ₹2,000 का बिका, इस साल भी 100 किलो गेहूं बिका लेकिन दाम बढ़कर ₹2,200 हो गए। "चालू कीमत" पर वृद्धि 10% दिखेगी (सिर्फ महंगाई की वजह से), लेकिन "स्थिर कीमत" पर वृद्धि 0% होगी क्योंकि असल में उत्पादन उतना ही (100 किलो) रहा।
🏠 उदाहरण: इसीलिए असली आर्थिक वृद्धि जानने के लिए हमेशा स्थिर (Constant) कीमतों वाला आँकड़ा देखा जाता है, जबकि रोज़मर्रा के बजट/खर्च के लिए चालू (Current) कीमतों वाला आँकड़ा काम आता है।
राजस्थान — 2023-24: संशोधित अनुमान-II, 2024-25: संशोधित अनुमान-I, 2025-26: अग्रिम अनुमान (AE)। अखिल भारत — 2024-25: अनंतिम अनुमान (PE), 2025-26: प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE)।
अग्रिम अनुमानों (Advance Estimates) के अनुसार वर्ष 2025-26 में राजस्थान का GSDP (चालू कीमतों पर) ₹18.75 लाख करोड़ तक पहुँचने की संभावना है, जो 2024-25 के ₹17.01 लाख करोड़ से 10.24 प्रतिशत अधिक है। इसी वर्ष अखिल भारत की नॉमिनल GDP ₹357.14 लाख करोड़ अनुमानित है (वृद्धि 8.0%), जिसमें राजस्थान का योगदान 5.25 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
स्थिर (2011-12) कीमतों पर GSDP महंगाई का असर हटाकर अर्थव्यवस्था की असली वृद्धि दिखाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्थिर कीमतों पर GSDP ₹9.82 लाख करोड़ तक पहुँचा, जो 2024-25 के ₹9.04 लाख करोड़ की तुलना में 8.66 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी वर्ष अखिल भारत की स्थिर कीमतों पर GDP ₹201.90 लाख करोड़ अनुमानित है (वृद्धि 7.4%), जिसमें राजस्थान के GSDP का योगदान 4.86 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
| विवरण | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| GDP - अखिल भारत (₹ करोड़) | 1,50,21,846 | 1,61,64,913 | 1,76,50,591 | 1,87,96,955 | 2,01,89,919 |
| वृद्धि दर (%) | 9.7 | 7.6 | 9.2 | 6.5 | 7.4 |
| विवरण | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| चालू कीमतें (₹ करोड़) | 10,70,324 | 12,02,344 | 13,61,835 | 15,25,291 | 16,85,118 |
| वृद्धि दर (%) | 18.10 | 12.33 | 13.26 | 12.00 | 10.48 |
| स्थिर (2011-12) कीमतें (₹ करोड़) | 6,34,247 | 6,74,018 | 7,24,575 | 7,89,133 | 8,59,333 |
| वृद्धि दर (%) | 9.50 | 6.27 | 7.50 | 8.91 | 8.90 |
राष्ट्रीय GDP में राजस्थान का योगदान — चालू कीमत पर 5.25%, स्थिर कीमत पर 4.86% (वर्ष 2025-26)।
परिभाषा: सकल मूल्य के आँकड़ों में से मूल्यह्रास (Consumption of Fixed Capital / Depreciation) घटाने पर जो बचता है, वह NSDP कहलाता है। मूल्यह्रास टूट-फूट के कारण अचल संपत्तियों (मशीन, भवन आदि) के मूल्य में होने वाली हानि है — यानी वर्ष भर में उत्पादन-प्रक्रिया में इस्तेमाल हुई पूंजी की "घिसावट"।
💡 आसान भाषा में: जैसे कोई फैक्ट्री मशीन से 100 रुपये का माल बनाती है, लेकिन उस मशीन के इस्तेमाल से मशीन खुद भी थोड़ी "घिस" जाती है (मान लीजिए 5 रुपये जितनी)। तो असली शुद्ध कमाई 100-5=95 रुपये होगी। GSDP में से यही "घिसावट" (मूल्यह्रास) घटाकर NSDP निकाला जाता है।
🏠 उदाहरण: वर्ष 2025-26 में NSDP चालू कीमतों पर ₹16.85 लाख करोड़ (वृद्धि 10.48%) और स्थिर कीमतों पर ₹8.59 लाख करोड़ (वृद्धि 8.90%) अनुमानित है।
2023-24: संशोधित अनुमान-II, 2024-25: संशोधित अनुमान-I, 2025-26: अग्रिम अनुमान (AE)।
| विवरण | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| PCI - राजस्थान (₹) | 1,34,143 | 1,49,060 | 1,67,027 | 1,85,095 | 2,02,349 |
| वृद्धि दर (%) | 16.72 | 11.12 | 12.05 | 10.82 | 9.32 |
| PCI - अखिल भारत (₹) | 1,50,906 | 1,69,145 | 1,88,892 | 2,05,324 | 2,19,575 |
| वृद्धि दर (%) | 18.6 | 12.1 | 11.7 | 8.7 | 6.9 |
| विवरण | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| PCI - राजस्थान (₹) | 79,490 | 83,561 | 88,868 | 95,762 | 1,03,189 |
| वृद्धि दर (%) | 8.23 | 5.12 | 6.35 | 7.76 | 7.76 |
| PCI - अखिल भारत (₹) | 94,054 | 1,00,163 | 1,08,786 | 1,14,710 | 1,21,968 |
| वृद्धि दर (%) | 9.3 | 6.5 | 8.6 | 5.4 | 6.3 |
परिभाषा: PCI = NSDP ÷ राज्य की वर्ष-मध्य कुल जनसंख्या (Mid-Year Total Population)। यह लोगों के जीवन-स्तर एवं खुशहाली का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
💡 आसान भाषा में: अगर राज्य की कुल शुद्ध कमाई (NSDP) को राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति में बराबर-बराबर बाँट दिया जाए, तो हर व्यक्ति के हिस्से जितना पैसा आएगा, वही "प्रति व्यक्ति आय" है — यह ज़रूरी नहीं कि हर व्यक्ति को असल में उतना पैसा मिलता हो, यह सिर्फ औसत (Average) है।
🏠 उदाहरण: वर्ष 2025-26 में राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय (चालू कीमतों पर) ₹2,02,349 अनुमानित है, जो 2024-25 के ₹1,85,095 से 9.32% अधिक है — यानी हर व्यक्ति के हिस्से औसतन इतनी वार्षिक आय आती है।
तुलना (2011-12 → 2025-26) : राजस्थान PCI ₹57,192 → ₹2,02,349; अखिल भारत PCI ₹63,462 → ₹2,19,575 — दोनों में लगभग 3.5 गुना वृद्धि।
स्थिर कीमतों पर 2025-26 में राजस्थान PCI ₹1,03,189 (वृद्धि 7.76%) — यह "असली" (महंगाई-मुक्त) क्रय-क्षमता में वृद्धि दिखाता है।
राजस्थान की आर्थिक वृद्धि को तीन प्रमुख क्षेत्रों — कृषि, उद्योग एवं सेवा — में लक्षित रणनीतियों से आगे बढ़ाया जाएगा। कृषि में सिंचाई अवसंरचना के विस्तार, जल-प्रबंधन सुधार और सूक्ष्म-सिंचाई (Micro-Irrigation) पर ज़ोर है। उद्योग में विनिर्माण,
| क्षेत्र | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| कृषि क्षेत्र (₹ करोड़) | 3,22,739 | 3,51,121 | 3,88,438 | 4,25,904 | 4,40,702 |
| उद्योग क्षेत्र (₹ करोड़) | 3,15,450 | 3,48,361 | 3,95,783 | 4,24,790 | 4,54,486 |
| सेवा क्षेत्र (₹ करोड़) | 4,92,527 | 5,73,023 | 6,33,302 | 7,19,530 | 8,16,828 |
| उप-क्षेत्र | हिस्सा (%) | उप-क्षेत्र | हिस्सा (%) |
|---|---|---|---|
| फसलें (Crops) | 10.97 | व्यापार, होटल व रेस्टोरेंट | 13.33 |
| पशुपालन (Livestock) | 12.70 | परिवहन (Transport) | 5.04 |
| वानिकी (Forestry) | 1.93 | वित्तीय सेवाएं | 5.07 |
| मत्स्य (Fishing) | 0.14 | रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व एवं व्यावसायिक सेवाएं | 11.20 |
| खनन एवं उत्खनन | 3.30 | लोक प्रशासन | 3.34 |
| विनिर्माण | 10.76 | अन्य सेवाएं | 9.72 |
| विद्युत, गैस, जलापूर्ति आदि | 3.20 | ||
| निर्माण (Construction) | 9.30 |
परिभाषा: GSVA वह मूल्य है जो राज्य के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) द्वारा उत्पादन-प्रक्रिया में "जोड़ा" जाता है — यह आधार कीमतों (Basic Prices) पर मापा जाता है। संबंध: GSDP = GSVA + उत्पाद-कर (Taxes) − आर्थिक सहायता/सब्सिडी (Subsidies)।
💡 आसान भाषा में: GSDP कुल "पाई" (कुल उत्पादन) है, जबकि GSVA यह बताता है कि उस पाई में हर क्षेत्र (कृषि/उद्योग/सेवा) ने अलग-अलग कितना योगदान दिया — यानी GSVA, GSDP को क्षेत्र-वार बाँटकर देखने का तरीका है।
🏠 उदाहरण: अगर किसी थाली (GSDP) में सब्ज़ी, रोटी और चावल (कृषि, उद्योग, सेवा) डाला गया हो, तो GSVA यह बताता है कि हर एक चीज़ (हर क्षेत्र) की कितनी मात्रा (हिस्सेदारी) है — 2025-26 में सेवा क्षेत्र की "मात्रा" सबसे ज़्यादा (47.71%) है।
2025-26 में हिस्सेदारी — कृषि क्षेत्र: 25.74%, उद्योग क्षेत्र: 26.55%, सेवा क्षेत्र: 47.71% (कुल GSVA ₹17.12 लाख करोड़)।
खनन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (विशेषकर सौर व पवन ऊर्जा) पर फोकस है। सेवा क्षेत्र में पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एवं वित्तीय सेवाओं के दम पर निरंतर विस्तार की उम्मीद है।
वर्ष 2025-26 में नॉमिनल GSVA (आधार चालू कीमतों पर) ₹17.12 लाख करोड़ तक पहुँचने की संभावना है, जो 2024-25 के ₹15.70 लाख करोड़ से 9.03% अधिक है। क्षेत्रवार वृद्धि दरें — कृषि 3.47%, उद्योग 6.99% एवं सेवा क्षेत्र 13.52% रहीं।
चित्र 13.3 : उप-क्षेत्रवार हिस्सेदारी 2025-26 (चालू कीमतों पर, % में)
| क्षेत्र | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|---|---|---|
| कृषि क्षेत्र (₹ करोड़) | 1,91,571 | 1,99,619 | 2,06,474 | 2,22,073 | 2,22,550 |
| उद्योग क्षेत्र (₹ करोड़) | 1,94,568 | 2,03,171 | 2,18,768 | 2,31,618 | 2,47,872 |
| सेवा क्षेत्र (₹ करोड़) | 2,93,757 | 3,19,842 | 3,38,068 | 3,67,377 | 4,08,325 |
ध्यान दें — कृषि क्षेत्र की स्थिर-कीमत वृद्धि (0.22%) चालू-कीमत वृद्धि (3.47%) से बहुत कम है — यह दर्शाता है कि कृषि-आय में अधिकांश बढ़ोतरी वास्तविक उत्पादन-वृद्धि की बजाय कीमतों (महंगाई) के कारण हुई।
परिभाषा: GFCF किसी उत्पादक (Producer) द्वारा एक लेखा-अवधि में अचल संपत्तियों (मशीनरी, भवन, सड़क आदि) के अधिग्रहण में से निपटान (Disposal) घटाकर, तथा गैर-उत्पादित संपत्तियों के मूल्य में हुई कुछ वृद्धियों को जोड़कर मापा जाता है। इसके आँकड़े राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (National Accounts Statistics), आधार वर्ष 2011-12, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी मानकों के अनुसार तैयार होते हैं।
💡 आसान भाषा में: सरल शब्दों में — GFCF यह बताता है कि राज्य में उस साल कुल कितना नया "स्थायी निवेश" (सड़क, भवन, मशीन, फैक्ट्री) बनाया गया — यानी भविष्य में और उत्पादन के लिए कितनी नई "नींव" रखी गई।
🏠 उदाहरण: जैसे कोई किसान हर साल अपनी कमाई में से कुछ हिस्सा नए ट्रैक्टर, कुएं या गोदाम बनाने में लगाता है — वह उसका "पूंजी निर्माण" है। पूरे राज्य के स्तर पर ऐसे सभी नए निवेशों (सड़क, बिजलीघर, कारखाने आदि) का जोड़ ही GFCF है — वर्ष 2024-25 में यह ₹5,02,412 करोड़ था, जो GSDP का 29.53% है।
स्थिर (2011-12) आधार कीमतों पर वास्तविक GSVA वर्ष 2025-26 में ₹8.79 लाख करोड़ (वृद्धि 7.03%) रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह ₹8.21 लाख करोड़ (वृद्धि 7.57%) थी। स्थिर कीमतों पर क्षेत्रीय हिस्सेदारी — कृषि 25.33% (₹2.23 लाख करोड़, वृद्धि मात्र 0.22%), उद्योग 28.21% (₹2.48 लाख करोड़, वृद्धि 7.02%) एवं सेवा क्षेत्र 46.46% (₹4.08 लाख करोड़, वृद्धि 11.15%)।
राजस्थान की विकास योजना का एक महत्वपूर्ण घटक व्यापक अवसंरचना विकास है — ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों पर विशेष बल। मुख्य परियोजनाओं में सड़क, रेल, हवाई अड्डे, स्मार्ट सिटी, औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) तथा सार्वजनिक उपयोगिताओं का विस्तार शामिल है। ग्रामीण अवसंरचना — बेहतर सड़कें, सिंचाई तंत्र, बिजली-पानी की पहुँच — को भी मज़बूत किया जा रहा है ताकि शहरी-ग्रामीण अंतर कम हो सके।
| क्षेत्र | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|
| निजी क्षेत्र (Private) | 2,17,449 | 2,66,503 | 3,14,593 | 3,58,488 | 3,91,722 |
| सार्वजनिक क्षेत्र (Public) | 60,417 | 75,870 | 75,652 | 90,864 | 1,10,689 |
| कुल GFCF | 2,77,866 | 3,42,374 | 3,90,245 | 4,49,352 | 5,02,412 |
| क्र. | उद्योग | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | फसलें (Crops) | 8,527 | 10,237 | 10,190 | 12,568 | 14,871 |
| 2 | पशुपालन (Livestock) | 1,985 | 2,071 | 2,334 | 2,646 | 3,067 |
| 3 | वानिकी (Forestry) | 131 | 331 | 427 | 805 | 572 |
| 4 | मत्स्य (Fishing) | 131 | 147 | 187 | 205 | 241 |
| 5 | खनन (Mining) | 5,740 | 6,475 | 6,210 | 6,618 | 6,991 |
| 6 | विनिर्माण (Manufacturing) | 13,895 | 21,172 | 28,890 | 37,231 | 40,479 |
| 7 | विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य सेवाएं | 24,414 | 31,272 | 25,202 | 31,144 | 37,922 |
| 8 | निर्माण (Construction) | 1,13,134 | 1,36,998 | 1,61,923 | 1,88,132 | 2,07,125 |
| 9 | व्यापार, होटल व रेस्टोरेंट | 3,670 | 4,739 | 6,345 | 7,035 | 8,136 |
| 10 | रेलवे (Railways) | 1,086 | 1,704 | 3,421 | 6,784 | 7,459 |
| 11 | अन्य परिवहन (Other Transport) | 3,212 | 4,612 | 4,843 | 5,698 | 6,030 |
| 12 | भंडारण (Storage) | 52 | 183 | 185 | 67 | 67 |
| 13 | संचार (Communication) | 11,853 | 14,612 | 18,039 | 17,951 | 19,593 |
| 14 | वित्तीय सेवाएं (Financial Services) | 1,275 | 716 | 1,268 | 1,467 | 1,619 |
| 15 | रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व व व्यावसायिक सेवाएं | 66,430 | 77,567 | 85,064 | 90,497 | 96,745 |
| 16 | लोक प्रशासन (Public Administration) | 10,641 | 12,801 | 13,327 | 17,296 | 23,255 |
| 17 | अन्य सेवाएं (Other Services) | 11,689 | 16,737 | 22,390 | 23,210 | 28,240 |
| कुल (Total) | 2,77,866 | 3,42,374 | 3,90,245 | 4,49,352 | 5,02,412 |
निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में GFCF की प्रवृत्ति (₹ करोड़) तालिका 13.8 : उद्योग-वार सकल स्थिर पूंजी निर्माण (अनंतिम, ₹ करोड़)
| समूह | भार (Weight %) | वस्तुओं की संख्या |
|---|---|---|
| प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles) | 33.894 | 75 |
| विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products) | 49.853 | 69 |
गोलाई (Rounding) के कारण कुल योग में मामूली अंतर हो सकता है। सबसे बड़ा योगदान निर्माण (Construction) क्षेत्र का रहा — 2024-25 में ₹2,07,125 करोड़, इसके बाद रियल एस्टेट व व्यावसायिक सेवाएं (₹96,745 करोड़) एवं विनिर्माण (₹40,479 करोड़)।
परिभाषा: थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index, WPI) थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव मापता है और उत्पादन-लागत को प्रभावित करता है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index, CPI) खुदरा स्तर पर उपभोक्ताओं के जीवन-यापन की लागत मापता है और उनकी क्रय-शक्ति को प्रभावित करता है।
💡 आसान भाषा में: WPI यह बताता है कि "थोक व्यापारी/फैक्ट्री" के लिए चीज़ें कितनी महंगी हुईं (जैसे कपड़ा-मिल के लिए कच्चा कपास कितना महंगा हुआ), जबकि CPI यह बताता है कि "आम उपभोक्ता" जैसे आप-हम बाज़ार से सामान खरीदते वक्त कितना ज़्यादा खर्च कर रहे हैं।
🏠 उदाहरण: अगर टमाटर का थोक भाव मंडी में ₹20/किलो से ₹25/किलो हुआ, तो यह WPI में दिखेगा। लेकिन जब वही टमाटर आपकी गली की सब्ज़ी की दुकान पर ₹30/किलो से ₹38/किलो बिकने लगे (दुकानदार का मुनाफा जोड़कर), तो वह बदलाव CPI में दिखेगा — इसीलिए सरकार आम आदमी पर असर जानने के लिए WPI से ज़्यादा CPI पर ध्यान देती है।
समय के साथ-साथ और भौगोलिक क्षेत्रों में भी कीमतें कई आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक कारणों से बदलती रहती हैं। चूंकि कीमतें विभिन्न आर्थिक निर्णयों को प्रभावित करती हैं, इसलिए मूल्य-परिवर्तन की निगरानी आर्थिक नीति एवं योजना के लिए बेहद ज़रूरी है। इसके लिए मुख्य औज़ार है — मूल्य सूचकांक (Price Index), जो किसी क्षेत्र में वस्तुओं/सेवाओं के मूल्य-स्तर में एक निश्चित अवधि में होने वाले सापेक्ष परिवर्तन को मापता है।
थोक मूल्य सूचकांक एकमात्र ऐसा व्यापक सूचकांक है जो समग्र आर्थिक स्तर पर मूल्य-गतिविधियों को दर्शाता है और सभी व्यापार-लेन-देन में वस्तुओं की कीमतों की गतिविधि का संकेतक है। यह व्यापार, राजकोषीय, मौद्रिक व अन्य आर्थिक नीतियों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण निर्धारक का काम करता है। राजस्थान सरकार मासिक आधार पर WPI जारी करती है — इसमें 154 वस्तुएं शामिल हैं (75 "प्राथमिक वस्तुएं" समूह से, 69 "विनिर्मित उत्पाद" समूह से, 10 "ईंधन एवं शक्ति" समूह से)। ध्यान रहे —
भारत सरकार का अखिल भारतीय WPI आधार वर्ष 2011-12 रखता है, जो राज्य के 1999-2000 आधार वर्ष से अलग है।
| समूह | भार (Weight %) | वस्तुओं की संख्या |
|---|---|---|
| ईंधन, शक्ति, प्रकाश व उपस्नेहक (Fuel & Power) | 16.253 | 10 |
| प्रमुख समूह | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 |
|---|---|---|---|---|---|
| प्राथमिक वस्तुएं | 378.22 | 416.65 | 420.67 | 438.15 | 445.65 |
| (अ) कृषि वस्तुएं | 377.10 | 415.64 | 414.86 | 431.42 | 437.84 |
| (ब) खनिज | 386.65 | 424.23 | 464.56 | 488.97 | 504.67 |
| ईंधन, शक्ति, प्रकाश व उपस्नेहक | 569.93 | 576.88 | 579.11 | 570.72 | 571.11 |
| विनिर्मित उत्पाद | 285.65 | 302.60 | 303.29 | 307.73 | 311.42 |
| सभी वस्तुएं (All Commodities) | 363.23 | 385.83 | 387.90 | 394.68 | 399.13 |
| प्रमुख समूह | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 |
|---|---|---|---|---|---|
| प्राथमिक वस्तुएं | 14.10 | 10.16 | 0.96 | 4.16 | 1.71 |
| (अ) कृषि वस्तुएं | 14.77 | 10.22 | -0.19 | 3.99 | 1.49 |
| (ब) खनिज | 9.39 | 9.72 | 9.51 | 5.25 | 3.21 |
| ईंधन, शक्ति, प्रकाश व उपस्नेहक | 11.91 | 1.22 | 0.39 | -1.45 | 0.07 |
| विनिर्मित उत्पाद | 4.91 | 5.93 | 0.23 | 1.46 | 1.20 |
| सभी वस्तुएं (All Commodities) | 9.78 | 6.22 | 0.54 | 1.75 | 1.13 |
2025 में राजस्थान का समग्र WPI (सभी वस्तुएं) 394.68 से बढ़कर 399.13 हुआ — 1.13% की वृद्धि। सबसे ज़्यादा वृद्धि प्राथमिक वस्तुओं में (1.71%) रही। अखिल भारतीय WPI (आधार वर्ष 2011-12) वर्ष 2024 के 153.9 से बढ़कर 2025 में 154.9 हुआ — 0.65% की वृद्धि। खाद्य सूचकांक (WPI Food Index, भार 30.163) — 2024 के 421.67 से बढ़कर 2025 में 427.13 हुआ, यानी 1.29% वृद्धि। जलवायु परिवर्तन, लू, असमान मानसून, बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि जैसे कारणों से पिछले दो वर्षा में खाद्य महंगाई एक वैश्विक परिघटना रही है।
तालिका 13.9 : राजस्थान का थोक मूल्य सूचकांक — समूहवार सूचकांक मान तालिका 13.10 : समूहवार थोक मूल्य सूचकांक में वार्षिक % परिवर्तन (वर्ष-दर-वर्ष)
CPI परिवारों द्वारा उपभोग के लिए खरीदी गई चुनिंदा वस्तुओं व सेवाओं की औसत खुदरा कीमतों में समय के साथ होने वाले बदलाव को मापने के लिए बनाया गया है। ऐसे बदलाव उपभोक्ताओं की आय की वास्तविक क्रय-शक्ति और उनकी खुशहाली को प्रभावित करते हैं। चूंकि यह सूचकांक हर उपभोक्ता से जुड़े मूल्य-बदलाव को पकड़ता है, इसलिए सरकार WPI की तुलना में CPI पर ज़्यादा ध्यान देती है। हर महीने 4 अलग-अलग प्रकार के CPI तैयार किए जाते हैं:
| समूह | अलवर | भीलवाड़ा | जयपुर |
|---|---|---|---|
| खाद्य एवं पेय पदार्थ समूह | -0.90 | -2.68 | -0.14 |
| पान, सुपारी, तंबाकू व नशीले पदार्थ | 4.89 | 4.10 | 1.88 |
| वस्त्र एवं जूते-चप्पल समूह | 10.56 | 4.70 | 0.64 |
| आवास समूह (Housing) | 1.74 | 2.50 | 3.03 |
| ईंधन एवं प्रकाश (Fuel & Light) | 4.11 | 1.22 | 2.81 |
| विविध समूह (Miscellaneous) | 4.76 | 4.86 | 3.66 |
| सामान्य सूचकांक (General Index) | 2.02 | 2.62 | 1.88 |
| वर्ष | अलवर | भीलवाड़ा | जयपुर | अखिल भारत |
|---|---|---|---|---|
| 2021 | 120.9 (+2.37%) | 118.5 (+1.98%) | 115.8 (+1.31%) | 122.0 (+2.43%) |
| 2022 | 126.3 (+4.47%) | 127.0 (+7.17%) | 123.1 (+6.30%) | 129.2 (+5.90%) |
| 2023 | 127.6 (+1.03%) | 131.9 (+3.86%) | 126.4 (+2.68%) | 136.4 (+5.57%) |
| 2024 | 133.6 (+4.70%) | 133.6 (+1.29%) | 127.6 (+0.95%) | 141.6 (+3.81%) |
| 2025 | 136.3 (+2.02%) | 137.1 (+2.62%) | 130.0 (+1.88%) | 145.5 (+2.75%) |
2025 में तीनों केंद्रों पर सामान्य सूचकांक में वृद्धि दर्ज हुई — भीलवाड़ा में सबसे ज़्यादा (2.62%), उसके बाद अलवर (2.02%) व जयपुर (1.88%)। अखिल भारत स्तर पर वृद्धि 2.75% रही।
(अ) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक — औद्योगिक श्रमिक (CPI-IW), आधार वर्ष 2016=100 CPI-IW औसत श्रमिक-परिवार द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं-सेवाओं की एक निश्चित टोकरी (Basket) की खुदरा कीमतों में समय-समय पर होने वाले बदलाव मापता है — यह कारखानों, खनन, बागानों, मोटर परिवहन, बंदरगाहों, रेलवे व बिजली-उत्पादन जैसे क्षेत्रों के श्रमिकों के उपभोग-स्तर का संकेतक है। इसका मुख्य उपयोग सरकारी व निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance, DA) के निर्धारण में होता है। यह श्रम ब्यूरो, चंडीगढ़ द्वारा तैयार व जारी किया जाता है — राजस्थान से अलवर, भीलवाड़ा व जयपुर केंद्र इसमें शामिल हैं (सितंबर 2020 से अलवर ने अजमेर की जगह ली)। राष्ट्रीय स्तर पर यह सूचकांक देशभर के 88 औद्योगिक केंद्रों के आँकड़ों पर आधारित है।
तालिका 13.11 : समूहवार औसत CPI-IW (आधार वर्ष 2016=100) — 2025 की 2024 से % वृद्धि तालिका 13.12 : वर्षवार औसत सामान्य CPI-IW (आधार वर्ष 2016=100)
| वर्ष (जुलाई-जून) | राज. खाद्य समूह | राज. सामान्य सूचकांक | भारत खाद्य समूह | भारत सामान्य सूचकांक |
|---|---|---|---|---|
| 2021-22 | 1108 | 1151 | 1026 | 1092 |
| 2022-23 | 1247 | 1260 | 1094 | 1166 |
| 2023-24 | 1328 | 1319 | 1192 | 1250 |
| 2024-25 | 1398 | 1384 | 1245 | 1308 |
| वर्ष | राज.-ग्रामीण | राज.-शहरी | राज.-संयुक्त | भारत-ग्रामीण | भारत-शहरी | भारत-संयुक्त |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 2021 | 157.85 | 157.73 | 157.81 | 161.89 | 160.73 | 161.35 |
| 2022 | 169.10 | 167.98 | 168.70 | 173.13 | 171.03 | 172.15 |
| 2023 | 180.41 | 179.10 | 179.95 | 183.17 | 180.41 | 181.88 |
| 2024 | 189.21 | 187.95 | 188.75 | 193.11 | 188.34 | 190.88 |
| 2025 | 191.88 | 190.38 | 191.35 | 196.81 | 193.08 | 195.08 |
आधार वर्ष 1986-87=100 (कृषि-वर्ष जुलाई से जून तक गणना)।
2025 में राजस्थान का संयुक्त (Combined) CPI 191.35 रहा, जबकि अखिल भारत स्तर पर यह 195.08 रहा — दोनों में 2021 से लगातार वृद्धि की प्रवृत्ति स्पष्ट है।
(ब) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक — कृषि श्रमिक (CPI-AL), आधार वर्ष 1986-87=100 कृषि श्रमिकों व ग्रामीण श्रमिकों के लिए CPI भी श्रम ब्यूरो, चंडीगढ़ द्वारा तैयार किया जाता है — मई 2025 तक आधार वर्ष 1986-87 था, जून 2025 से नया आधार वर्ष 2019 लागू हुआ है। जून-दिसंबर 2025 के दौरान राजस्थान व अखिल भारत के कृषि श्रमिकों का औसत सामान्य सूचकांक क्रमशः 137.23 व 136.13 रहा।
(स) सामान्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक — ग्रामीण, शहरी एवं संयुक्त (आधार वर्ष 2012=100) राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) जनवरी 2015 से हर महीने अखिल भारत व राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए ग्रामीण, शहरी व संयुक्त — तीनों के लिए अलग-अलग सामान्य CPI जारी करता है, जिसका आधार वर्ष 2012 है।
| मद | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. राजस्व प्राप्तियां | 1,34,308 | 1,83,920 | 1,94,988 | 2,03,276 | 2,27,250 |
| (i) स्वयं के कर | 60,283 | 74,808 | 87,347 | 94,086 | 1,03,310 |
| (ii) गैर-कर राजस्व | 13,653 | 18,755 | 20,564 | 18,680 | 23,502 |
| (iii) केंद्रीय करों में हिस्सा | 35,576 | 54,031 | 57,231 | 68,063 | 77,548 |
| (iv) केंद्रीय अनुदान | 24,796 | 36,326 | 29,846 | 22,447 | 22,890 |
| 2. गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां | 388 | 2,405 | 436 | 419 | 524 |
| 3. कुल प्राप्तियां | 1,34,696 | 1,86,325 | 1,95,424 | 2,03,695 | 2,27,774 |
| 4. कुल व्यय | 1,94,071 | 2,34,563 | 2,46,452 | 2,69,275 | 3,00,194 |
| (i) राजस्व व्यय | 1,78,310 | 2,09,790 | 2,26,479 | 2,42,231 | 2,69,200 |
| — जिसमें ब्याज भुगतान | 25,202 | 28,100 | 30,602 | 34,128 | 40,179 |
| (ii) पूंजीगत परिव्यय | 15,270 | 24,152 | 19,798 | 26,646 | 30,727 |
| (iii) ऋण एवं अग्रिम | 491 | 621 | 175 | 398 | 267 |
परिभाषा: राजस्व घाटा (Revenue Deficit) = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियां। राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां) — यानी सरकार को कितना अतिरिक्त उधार लेना पड़ा। प्राथमिक घाटा (Primary Deficit) = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
💡 आसान भाषा में: राजस्व घाटा बताता है कि सरकार का रोज़मर्रा का खर्च (वेतन, पेंशन, ब्याज) उसकी रोज़मर्रा की कमाई (कर, गैर-कर आय) से ज़्यादा है या नहीं। राजकोषीय घाटा बताता है कि सरकार को अपने पूरे साल के सारे खर्चा (रोज़मर्रा + नई सड़क/भवन बनाने) के लिए कुल कितना कज़ लेना पड़ा। प्राथमिक घाटा में पुराने कज़ पर चुकाया जा रहा ब्याज हटाकर देखा जाता है कि नया घाटा असल में कितना है।
🏠 उदाहरण: जैसे किसी परिवार की महीने की सैलरी ₹50,000 है, पर घर-खर्च ही ₹55,000 हो गया — यह "राजस्व घाटा" जैसा है। अगर इसके ऊपर परिवार ने नई बाइक भी किश्तों पर खरीद ली, तो कुल जितना उधार लेना पड़ा वह "राजकोषीय घाटा" जैसा है। और अगर पुराने कज़ की किश्त (ब्याज) घटाकर देखें कि असल में कितना नया घाटा हुआ, तो वह "प्राथमिक घाटा" है।
| मद | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|
| 5. GSDP (चालू कीमत) | 10,17,917 | 11,95,641 | 13,48,693 | 15,22,063 | 17,01,190 |
| मद | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|
| 6. राजस्व घाटा (₹ करोड़) | 44,002 | 25,870 | 31,491 | 38,955 | 41,950 |
| 7. राजकोषीय घाटा (₹ करोड़) | 59,375 | 48,238 | 51,028 | 65,580 | 72,420 |
| 8. प्राथमिक घाटा (₹ करोड़) | 34,173 | 20,138 | 20,426 | 31,452 | 32,241 |
| 9. राजकोषीय घाटा/GSDP (%) | 5.83 | 4.03 | 3.78 | 4.31 | 4.26 |
| 10. राजस्व प्राप्ति वृद्धि दर (%) | -4.14 | 36.94 | 6.02 | 4.25 | 11.79 |
| 11. स्वयं कर वृद्धि दर (%) | 1.75 | 24.09 | 16.76 | 7.72 | 9.80 |
| 12. राजस्व प्राप्ति/GSDP (%) | 13.19 | 15.38 | 14.46 | 13.36 | 13.36 |
| 13. स्वयं कर/GSDP (%) | 5.92 | 6.26 | 6.48 | 6.18 | 6.07 |
| 14. वेतन-मजदूरी व्यय (₹ करोड़) | 51,619 | 57,118 | 59,774 | 65,399 | 70,791 |
| 15. ब्याज भुगतान व्यय (₹ करोड़) | 25,202 | 28,100 | 30,602 | 34,128 | 40,179 |
| 16. ऋण व अन्य दायित्व (₹ करोड़) | 4,10,499 | 4,62,845 | 5,05,574 | 5,68,285* | 6,40,844 |
| — GSDP का % (Debt/GSDP) | 40.33 | 38.71 | 37.49 | 37.34 | 37.67 |
| कर मद | वृद्धि दर (%) |
|---|---|
| मुद्रांक एवं पंजीकरण (Stamps & Registration) | 14.82 |
| राज्य उत्पाद शुल्क (State Excise) | 14.21 |
| वाहन कर (Vehicle Tax) | 12.98 |
*वर्ष 2023-24 के आँकड़े में महालेखाकार (Accountant General) कार्यालय द्वारा केंद्र सरकार से मिले ऋण में से GST क्षतिपूतं अनुदान की बजाय ₹3,353.38 करोड़ की प्रोफार्मा कटौती (Proforma Reduction) शामिल है। वेतन-मजदूरी व्यय 2024-25 में राजस्व व्यय का 35.45% (ब्याज व पेंशन भुगतान हटाकर) तथा ब्याज भुगतान राजस्व प्राप्तियों का 17.68% रहा।
तालिका 13.15-ब : घाटे एवं प्रमुख राजकोषीय अनुपात
(अ) प्राप्तियों की प्रवृत्ति
| कर मद | वृद्धि दर (%) |
|---|---|
| विद्युत शुल्क (Electricity Duty) | 12.40 |
| राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) | 11.84 |
| क्षेत्र | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|
| सामान्य सेवाएं (अनुदान सहित) | 60,144 (33.73%) | 65,406 (31.18%) | 71,875 (31.74%) | 77,678 (32.07%) | 87,022 (32.33%) |
| सामाजिक सेवाएं | 74,010 (41.51%) | 85,054 (40.54%) | 90,168 (39.81%) | 1,01,884 (42.06%) | 1,14,789 (42.64%) |
| आर्थिक सेवाएं | 44,156 (24.76%) | 59,330 (28.28%) | 64,436 (28.45%) | 62,669 (25.87%) | 67,389 (25.03%) |
| कुल राजस्व व्यय | 1,78,310 | 2,09,790 | 2,26,479 | 2,42,231 | 2,69,200 |
| विवरण | 2020-21 | 2021-22 | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|---|---|---|
| सामाजिक सेवाएं | 81,932 | 96,119 | 99,019 | 1,11,857 | 1,27,438 |
| आर्थिक सेवाएं | 51,597 | 72,554 | 75,016 | 79,333 | 85,217 |
| कुल विकासात्मक व्यय | 1,33,529 | 1,68,673 | 1,74,035 | 1,91,190 | 2,12,655 |
| कुल व्यय | 1,94,071 | 2,34,563 | 2,46,452 | 2,69,275 | 3,00,194 |
| विकासात्मक व्यय का % (कुल व्यय का) | 68.8% | 71.9% | 70.6% | 71.0% | 70.8% |
(ब) व्यय की प्रवृत्ति
राजकोषीय दायित्व 2023-24 के अंत में ₹5,68,285 करोड़ थे, जो 31 मार्च 2025 तक बढ़कर ₹6,40,844 करोड़ हो गए —
पिछले वर्ष से ₹72,559 करोड़ (12.77%) की वृद्धि। हालांकि अतिरिक्त उधार (GST क्षतिपूतं व पूंजीगत व्यय हेतु) को हटा दें तो राजकोषीय दायित्व ₹6,07,382 करोड़ रहते हैं, जो GSDP का 35.70% है।
परिभाषा: राज्य सरकार को राजकोषीय अनुशासन में रखने हेतु बनाया गया कानून, जो राजस्व घाटा समाप्त करने, राजकोषीय घाटे को एक तय सीमा (Ceiling) के भीतर रखने तथा ऋण-GSDP अनुपात को नियंत्रित रखने का लक्ष्य तय करता है — राजस्थान का FRBM अधिनियम मई 2005 में लागू हुआ, जिसमें 2011 व 2021 में संशोधन हुए।
💡 आसान भाषा में: यह कानून सरकार के लिए वैसा ही है जैसे किसी परिवार के लिए "बजट का अनुशासन" — यह तय करता है कि सरकार बहुत ज़्यादा उधार लेकर मनमाना खर्च न करे, बल्कि अपनी कमाई (राजस्व) और खर्च के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाए रखे।
🏠 उदाहरण: FRBM अधिनियम के तहत लक्ष्य — राजस्व घाटा 0%, राजकोषीय घाटा 3% (GSDP का), तथा ऋण-GSDP अनुपात 38.2% (2021 में संशोधित; अपवाद स्थितियों में 38.2%+0.5% तक अनुमेय)। तुलना करें तो 2024-25 में वास्तविक राजकोषीय घाटा 4.26% रहा — यह राज. FRBM अधिनियम, 2005 की 4.37% की सीमा से कम है।
परिभाषा: राज्य सरकार के बजट का वह हिस्सा जो विशेष रूप से विकास-योजनाओं (Schemes) — जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क, सामाजिक सुरक्षा आदि — पर खर्च के लिए स्वीकृत (Approved) होता है, बजट अनुमान (Budget Estimates) एवं वास्तविक व्यय (Expenditure) दोनों रूपों में ट्रैक किया जाता है।
💡 आसान भाषा में: यह उस "योजना-मद" जैसा है जो परिवार अपनी कमाई में से बच्चों की पढ़ाई या घर की मरम्मत जैसे खास मकसद के लिए अलग रखता है — सरकार भी अपने बजट का एक हिस्सा खास विकास-योजनाओं के लिए अलग रखती है, जिसे "योजनागत बजट" कहा जाता है।
🏠 उदाहरण: वर्ष 2025-26 के लिए योजनागत बजट परिव्यय ₹2,45,608.47 करोड़ स्वीकृत हुआ है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र (₹69,389.83 करोड़) को मिला है — ठीक वैसे ही जैसे परिवार अपनी "योजना" वाली बचत का सबसे बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है।
| वर्ष | बजट अनुमान (₹ करोड़) | व्यय (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| 2017-18 | 81,157.97 | 78,117.34 |
| 2018-19 | 1,07,865.40 | 99,743.07 |
| 2019-20 | 1,16,735.96 | 1,03,530.80 |
| 2020-21 | 1,10,200.82 | 1,01,872.43 |
| 2021-22 | 1,32,251.35 | 1,37,764.24 |
| 2022-23 | 1,69,655.55 | 1,41,924.56 |
| 2023-24 | 1,84,311.57 | 1,55,490.15 |
| 2024-25 | 2,09,633.99 | 1,83,456.87* |
| 2025-26 | 2,45,608.47 | 1,32,299.53# |
| क्र. | प्रमुख शीर्ष / क्षेत्र | परिव्यय |
|---|---|---|
| 1 | कृषि विकास | 14,075.96 |
| 2 | ग्रामीण विकास | 24,925.02 |
| 3 | शहरी विकास एवं आवास | 15,344.04 |
| 4 | शिक्षा एवं स्वास्थ्य | 69,389.83 |
| 5 | जलापूर्ति एवं ऊर्जा | 48,341.30 |
| 6 | सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण | 30,802.73 |
| 7 | अवसंरचना विकास | 26,697.86 |
| 8 | औद्योगिक विकास | 3,121.45 |
| 9 | सूचना प्रौद्योगिकी, सांख्यिकी एवं वैज्ञानिक सेवाएं | 2,414.03 |
| 10 | सुशासन (Governance) | 10,496.25 |
| कुल (Total) | 2,45,608.47 |
*तात्कालिक (Tentative) व्यय। #दिसंबर 2025 तक।
सबसे बड़ा परिव्यय शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को (₹69,389.83 करोड़, कुल का 28.25%), इसके बाद जलापूर्ति व ऊर्जा (19.68%) एवं ग्रामीण विकास (10.15%) का स्थान है।
तालिका 13.18 : योजनागत बजट — स्वीकृत परिव्यय एवं व्यय (₹ करोड़) तालिका 13.19 : योजनागत बजट परिव्यय 2025-26 — प्रमुख शीर्षवार (₹ करोड़)
| क्र. | प्रमुख शीर्ष | व्यय 2024-25* | व्यय 2025-26# |
|---|---|---|---|
| 1 | कृषि विकास | 9,658.24 | 7,577.80 |
| 2 | ग्रामीण विकास | 17,923.49 | 9,442.66 |
| 3 | शहरी विकास एवं आवास | 10,921.95 | 7,816.45 |
| 4 | शिक्षा एवं स्वास्थ्य | 53,412.05 | 44,770.27 |
| 5 | जलापूर्ति एवं ऊर्जा | 36,073.54 | 25,197.43 |
| 6 | सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण | 27,375.41 | 21,019.43 |
| 7 | अवसंरचना विकास | 19,068.44 | 12,479.17 |
| 8 | औद्योगिक विकास | 1,447.26 | 1,209.61 |
| 9 | सूचना प्रौद्योगिकी, सांख्यिकी व वैज्ञानिक सेवाएं | 1,208.43 | 916.68 |
| 10 | सुशासन | 6,368.06 | 1,870.03 |
| कुल (Grand Total) | 1,83,456.86 | 1,32,299.53 |
*तात्कालिक (Tentative) व्यय, 2024-25। #दिसंबर 2025 तक व्यय, 2025-26।
तालिका 13.20 : योजनागत बजट के अंतर्गत प्रगति — 2024-25 एवं 2025-26 (₹ करोड़ व्यय)
बैंकों सहित वित्तीय संस्थाएं जमा-राशि जुटाने एवं प्रमुख क्षेत्रों में साख (Credit) वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे अवसंरचना विकास व गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों दोनों के लिए निवेश संभव होता है। राजस्थान में विभिन्न बैंकिंग क्षेत्रों में जमा एवं साख की वृद्धि वित्तीय सेवाओं की बढ़ती पहुँच व प्रभावशीलता को दर्शाती है। डिजिटल भुगतान, बैंक मित्र (Business Correspondent) एवं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं में हो रही प्रगति के साथ यह वित्तीय तंत्र दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि व जीवन-स्तर सुधार की मज़बूत नींव प्रदान कर रहा है।
| बैंक प्रकार | हिस्सा (%) |
|---|---|
| सार्वजनिक क्षेत्र बैंक (Public Sector Banks) | 50.36 |
| निजी क्षेत्र बैंक (Private Sector Banks) | 25.09 |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks) | 17.75 |
| लघु वित्त बैंक (Small Finance Banks) | 6.29 |
| पेमेंट बैंक (Payment Banks) | 0.43 |
| विदेशी बैंक (Foreign Banks) | 0.08 |
| बैंक प्रकार | शाखा सित.24 | शाखा सित.25 | जमा सित.24 | जमा सित.25 | साख सित.24 | साख सित.25 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | 1,593 | 1,628 | 49,130 | 52,770 | 39,165 | 42,176 |
| विदेशी बैंक | 7 | 7 | 1,158 | 1,196 | 1,284 | 1,353 |
| निजी क्षेत्र बैंक | 2,093 | 2,301 | 1,91,680 | 2,09,253 | 2,30,650 | 2,61,369 |
| सार्वजनिक क्षेत्र बैंक | 4,271 | 4,619 | 4,30,072 | 4,70,327 | 3,06,468 | 3,48,084 |
| लघु वित्त बैंक | 564 | 577 | 31,513 | 38,597 | 33,979 | 38,961 |
| पेमेंट बैंक | 3 | 40 | 3 | 4 | 0 | 0 |
| कुल (सभी अनु. वाणि. बैंक) | 8,531 | 9,172 | 7,03,556 | 7,72,147 | 6,11,546 | 6,91,943 |
| बैंक प्रकार | शाखा सित.24 | शाखा सित.25 | जमा सित.24 | जमा सित.25 | साख सित.24 | साख सित.25 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | 22,140 | 22,634 | 6,41,599 | 6,90,414 | 4,79,195 | 5,35,476 |
| विदेशी बैंक | 781 | 810 | 10,78,997 | 11,93,145 | 5,95,705 | 6,30,738 |
| निजी क्षेत्र बैंक | 45,023 | 49,297 | 76,38,381 | 84,15,210 | 71,67,542 | 78,20,942 |
| सार्वजनिक क्षेत्र बैंक | 86,180 | 93,596 | 1,25,03,98 9 | 1,36,54,45 8 | 90,49,223 | 1,02,34,00 6 |
| लघु वित्त बैंक | 7,221 | 7,676 | 2,36,969 | 2,81,828 | 2,52,878 | 2,94,830 |
| पेमेंट बैंक | 72 | 845 | 17,566 | 28,508 | 0 | 0 |
| कुल (सभी अनु. वाणि. बैंक) | 1,61,417 | 1,74,858 | 2,21,17,50 1 | 2,42,63,56 3 | 1,75,44,54 3 | 1,95,15,99 2 |
चित्र 13.15 : राजस्थान में बैंक शाखाओं का वर्गवार हिस्सा (सितंबर 2025, %) तालिका 13.21-अ : राजस्थान — बैंक शाखाएं, जमा एवं साख (₹ करोड़, शाखाएं संख्या में) तालिका 13.21-ब : अखिल भारत — बैंक शाखाएं, जमा एवं साख (₹ करोड़, शाखाएं संख्या में)
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के जमा/साख आँकड़े RBI द्वारा वार्षिक आधार पर एकत्र किए जाते हैं, इसलिए सितंबर 2025 तिमाही का अलग आँकड़ा उपलब्ध नहीं है — निकटतम उपलब्ध वार्षिक आँकड़े दर्शाए गए हैं। स्रोत: RBI.
परिभाषा: CD Ratio = (कुल साख/ऋण ÷ कुल जमा) × 100 — यह दर्शाता है कि बैंकों में जमा हुई कुल राशि का कितना प्रतिशत हिस्सा वापस ऋण के रूप में क्षेत्र में बांटा गया।
💡 आसान भाषा में: जैसे मान लीजिए किसी इलाके के बैंकों में लोगों ने कुल ₹100 जमा किए, और उन्होंने उसी इलाके के व्यापारियों/किसानों को ₹90 का ऋण दे दिया — तो CD Ratio 90% होगा। ज़्यादा CD Ratio का मतलब है कि जमा हुआ पैसा उसी क्षेत्र में निवेश/कारोबार में वापस लग रहा है।
🏠 उदाहरण: सितंबर 2025 में राजस्थान का CD Ratio (89.61%) अखिल भारत (80.43%) से ऊँचा है — यानी राज्य में जमा हुई राशि का बड़ा हिस्सा राज्य के भीतर ही ऋण के रूप में लौट रहा है, जो स्थानीय आर्थिक गतिविधि के लिए सकारात्मक संकेत है।
मुख्य निष्कर्ष (सितंबर 2025 बनाम सितंबर 2024)
| 1. प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | फ़्लैगशिप योजना | |
|---|---|
| उद्देश्य | हर परिवार को बैंकिंग सुविधा से जोड़ना — बुनियादी बचत बैंक खाता, RuPay डेबिट कार्ड, बीमा व पेंशन तक पहुँच। |
| राजस्थान में प्रगति | कुल 3.80 करोड़ खाते खोले गए। |
| आधार सीडिंग | 92.25% खातों की आधार सीडिंग पूर्ण (31 दिसंबर 2025 तक)। |
| 2. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| स्वरूप | किफायती प्रीमियम पर जीवन बीमा कवर उपलब्ध कराने वाली योजना। |
| राजस्थान में प्रगति | कुल 132.82 लाख व्यक्तियों का नामांकन (31 दिसंबर 2025 तक)। |
| 3. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| स्वरूप | किफायती प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराने वाली योजना। |
| राजस्थान में प्रगति | कुल 295.26 लाख व्यक्तियों का नामांकन (31 दिसंबर 2025 तक)। |
| 4. अटल पेंशन योजना (APY) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| लक्षित वर्ग | असंगठित क्षेत्र के कामगार। |
परिभाषा: वित्तीय समावेशन वह प्रक्रिया है जिसके तहत ज़रूरतमंद व असुरक्षित वर्गों — कमज़ोर तबकों व कम-आय वर्ग सहित — को समयबद्ध, पर्याप्त एवं किफायती वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें ऋण, बचत, बीमा, प्रेषण (Remittance) सुविधा तथा वित्तीय परामर्श जैसी सेवाएं औपचारिक वित्तीय तंत्र द्वारा गरीब व्यक्ति की दहलीज़ तक पहुँचाई जाती हैं।
💡 आसान भाषा में: सीधी भाषा में — वित्तीय समावेशन का मतलब है कि गांव-ढाणी में बैठा एक गरीब मज़दूर भी उतनी ही आसानी से बैंक खाता खोल पाए, बीमा करवा पाए और ज़रूरत पड़ने पर ऋण ले पाए, जितनी आसानी से शहर में रहने वाला कोई व्यक्ति ले पाता है — यानी बैंकिंग सुविधाएं सबकी पहुँच में हों, किसी को बाहर न छोड़ा जाए।
🏠 उदाहरण: राज्य में बैंक ईंट-गारे की शाखाओं (Brick & Mortar Branches), बैंकिंग आउटलेट्स एवं 1,27,468 बैंक मित्रों (Business Correspondents) के माध्यम से वित्तीय समावेशन हेतु सेवाएं दे रहे हैं (31 दिसंबर 2025 तक)।
| पात्रता आयु | न्यूनतम 18 वर्ष, अधिकतम 40 वर्ष। |
|---|---|
| पेंशन लाभ | 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अभिदाता के योगदान के अनुसार ₹1,000 से ₹5,000 प्रतिमाह गारंटीशुदा न्यूनतम पेंशन। |
| राजस्थान में प्रगति | कुल 43.48 लाख व्यक्तियों का नामांकन (31 दिसंबर 2025 तक)। |
| 5. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| स्वरूप | स्वरोज़गार हेतु नई सूक्ष्म-इकाइयों की स्थापना के लिए ऋण-आधारित सब्सिडी कार्यक्रम। |
| राजस्थान में प्रगति | 2,559 लाभार्थियों को कुल ₹213.73 करोड़ के ऋण स्वीकृत (19 जनवरी 2026 तक)। |
| श्रेणी | स्वीकृतियों की संख्या | वितरण राशि (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| शिशु (Shishu) | 4,69,373 | 1,819.58 |
| किशोर (Kishore) | 9,18,751 | 11,477.48 |
| तरुण (Tarun) | 72,582 | 5,657.31 |
| तरुण प्लस (Tarun Plus) | 3,423 | 525.26 |
| कुल (Total) | 14,64,129 | 19,479.63 |
परिभाषा: DBT एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत सरकारी योजनाओं का नकद लाभ या सब्सिडी बिचौलियों के बिना सीधे लाभार्थ के बैंक खाते में जमा की जाती है — यह आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से संभव होता है।
💡 आसान भाषा में: पहले सरकार सब्सिडी वाला सामान (जैसे सस्ता राशन/गैस सिलेंडर) खुद बांटती थी, जिसमें बिचौलिए/डीलर पैसा या सामान बीच में "हड़प" सकते थे। DBT में सरकार सीधे लाभार्थ के बैंक खाते में पैसा भेज देती है — जैसे कोई अभिभावक अपने बच्चे के हाथ में पैसा देने की बजाय सीधे उसके बैंक खाते में डाल दे, ताकि बीच में कोई पैसा न रोक सके।
🏠 उदाहरण: राजस्थान में 2025-26 के दौरान 31 दिसंबर 2025 तक 4.50 करोड़ लाभार्थियों को कुल ₹36,698.53 करोड़ का DBT हस्तांतरित किया गया।
तालिका 13.22 : प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के अंतर्गत प्रगति — वित्त वर्ष 2025-26 (16 जनवरी 2026 तक)
| संकेतक | आँकड़ा |
|---|---|
| पोर्टल पर जुड़ी योजनाएं | 126 राज्य योजनाएं + 55 केंद्र प्रायोजित योजनाएं (CSS) |
| संचयी DBT (31 दिसंबर 2025 तक) | ₹3,90,917.93 करोड़ |
| वर्ष 2025-26 में DBT (31 दिसंबर 2025 तक) | ₹36,698.53 करोड़ → 4.50 करोड़ लाभार्थ |
| अनुमानित बचत/लाभ (2025-26) | ₹388.26 करोड़ |
| हटाए गए फज़/डुप्लिकेट लाभार्थ (2025-26) | 1,84,138 |
राजस्थान की अर्थव्यवस्था 2025-26 में मज़बूत वृद्धि (GSDP +10.24% चालू कीमतों पर) दर्ज कर रही है, सेवा क्षेत्र इसका सबसे बड़ा वाहक बना हुआ है। साथ ही राजकोषीय अनुशासन (घाटा FRBM सीमा के भीतर), बढ़ता बैंकिंग-नेटवर्क, विस्तृत वित्तीय समावेशन एवं सुदृढ़ DBT तंत्र मिलकर राज्य को "विकसित राजस्थान @2047" के विजन की ओर आगे बढ़ा रहे हैं — चुनौती अब सेवा व उद्योग-चालित इस वृद्धि को कृषि-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक समान रूप से पहुँचाने की है।
2. आधार अधिनियम की धारा 7 अथवा धारा 4 के तहत राज्य योजनाओं की अधिसूचना।
3. सर्विस प्लस या राज्य के किसी अन्य पोर्टल के माध्यम से DBT योजनाओं की प्रक्रियाओं का संपूर्ण डिजिटलीकरण (End-to-End Digitization)।
4. DBT योजनाओं की नागरिक-केंद्रित सेवाओं की पहचान एवं मोबाइल ऐप उमंग (UMANG) पर उनका एकीकरण।
DBT भारत मिशन पोर्टल पर राजस्थान की स्थिति DBT भारत मिशन पोर्टल भारत सरकार द्वारा विकसित एक वेब-आधारित पोर्टल है, जो केंद्र व राज्य में चल रही सभी DBT-योग्य योजनाओं का वास्तविक-समय (Real Time) संचित (Aggregated) दृश्य उपलब्ध कराता है।
समावेशी विकास राजस्थान को एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की केंद्रीय कड़ी है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों — विशेषकर ग्रामीण एवं वंचित समूहों — तक पहुँचें। समतापूर्ण विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ग्रामीण अवसंरचना में निवेश कर रही है, रोज़गार एवं कौशल-विकास कार्यक्रमों को मज़बूत कर रही है, वित्तीय समावेशन का विस्तार कर रही है तथा शिक्षा-स्वास्थ्य तक पहुँच सुधार रही है।
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