📊 अध्याय 12/14 — राजस्थान अर्थव्यवस्था

प्रभावी शासन एवं सार्वजनिक सेवाएँ

Good Governance & Public Services | ई-गवर्नेंस, जन सूचना पोर्टल, राजस्थान संपर्क, राजकाज, सुशासन पहल व सेवाएं
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📋 इस अध्याय में क्या-क्या पढ़ेंगे
  1. प्रभावी शासन के तीन स्तंभ एवं SMART परियोजना
  2. जन आधार योजना — "एक नंबर, एक कार्ड, एक पहचान"
  3. राजस्थान संपर्क (181), RGDPS व RTH अधिनियम,
  4. त्रिस्तरीय जनसुनवाई
  5. ई-मित्र एवं ई-मित्र प्लस
  6. जन सूचना पोर्टल
  7. आईस्टार्ट (iStart) — स्टार्टअप इकोसिस्टम
  8. राज SSO (सिंगल साइन-ऑन)
  9. राज ई-वॉल्ट (Raj e-Vault)
  10. AVGC-XR नीति 2024
  11. किसानों हेतु तकनीकी पहलें (राज-AIMS, राज किसान
  12. साथी आदि)
  13. स्थानीय स्वशासन (LSG) की ऑनलाइन सेवाएं
  14. पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र (राज-काज, राज
  15. ई-साइन आदि)
  16. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 व RajCAD
  17. भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) — राजधारा
  18. ई-प्रोक्योरमेंट, डेटा एनालिटिक्स व क्षमता निर्माण
  19. राजस्थान AI/ML नीति 2026
  20. प्रभावी वित्तीय प्रबंधन — IFMS 3.0
🌟 शुरुआत एक कहानी से

सोचिए — किसी गांव में रहने वाली एक महिला को अपने बच्चे का जन्म-प्रमाण पत्र चाहिए, राशन कार्ड बनवाना है और किसी सरकारी योजना का लाभ भी लेना है। पहले उसे कई दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। आज वही महिला अपने गांव के ई-मित्र केंद्र पर जाकर, या मोबाइल से ही, अपना जन आधार कार्ड दिखाकर यह सारे काम कुछ ही मिनटों में करवा सकती है।

यही है "प्रभावी शासन" (Effective Governance) की असली पहचान — सिर्फ अच्छी नीतियां बनाना काफी नहीं, बल्कि उन्हें समय पर, पारदर्श तरीके से और हर आखिरी नागरिक तक पहुंचाना ज़रूरी है। इसी सोच के साथ राजस्थान सरकार ने डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा-विश्लेषण के सहारे शासन को नागरिकों के करीब लाने का बड़ा अभियान चलाया है — इसी की पूरी कहानी इस अध्याय में है।

11. प्रभावी शासन के तीन स्तंभ

प्रभावी शासन (Effective Governance) का मतलब सिर्फ अच्छी नीति बनाना नहीं है, बल्कि यह देखना भी है कि उस नीति को कितनी अच्छी तरह लागू किया गया और उसका नतीजा क्या निकला। इसका मूल मंत्र है — सार्वजनिक सेवाओं की समय पर डिलीवरी, सरकारी संसाधनों का सही उपयोग, और समावेशी विकास जिसमें "कोई भी पीछे न छूटे" (No One Left Behind)।

आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राजस्थान में प्रभावी शासन एवं सार्वजनिक सेवाओं के तीन मुख्य स्तंभ (Three Pillars) हैं :

स्तंभ 1
IT-सक्षम नागरिक-केंद्रित
सेवा वितरण
स्तंभ 2
पारदर्शी एवं जवाबदेह
प्रशासनिक तंत्र
स्तंभ 3
प्रभावी वित्तीय प्रबंधन
1. राजस्थान जन आधार योजना फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
शुरुआत18 दिसंबर, 2019 को राज्य में लॉन्च (वित्तीय वर्ष 2019-20)।
कानूनी आधारराजस्थान जन आधार प्राधिकरण अधिनियम, 2020 तथा जन आधार प्राधिकरण नियम-2021 (लागू — 4 अगस्त 2021)।
📘 SMART परियोजना

परिभाषा: Service Management with Artificial Intelligence and Real Time System — कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) व मशीन लर्निंग (ML) की मदद से नागरिक सेवा वितरण के अनुभव को बेहतर बनाने की परियोजना।

💡 आसान भाषा में: सरकार अब कंप्यूटर की "समझदारी" (AI) का उपयोग करके खुद पता लगा लेती है कि कौन नागरिक किस योजना का पात्र है, उसे खुद ही उस योजना में शामिल कर देती है, और बिना नागरिक के बार-बार आवेदन किए उसे लाभ पहुंचा देती है — यानी मैनुअल (हाथ से किए जाने वाले) कामकाज को कम से कम किया जाता है।

🏠 उदाहरण: जैसे किसी वृद्ध व्यक्ति को पेंशन योजना के लिए अलग से आवेदन ही न करना पड़े — सरकार का सिस्टम उसका डेटा देखकर खुद ही उसे पात्र पाकर पेंशन शुरू कर दे।

SMART परियोजना — कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सेवा वितरण

विभिन्न सरकारी विभाग नागरिक-केंद्रित सेवाएं देने के लिए योजनाओं से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा कर अलग-अलग डेटा-सेट बनाते हैं। इन बिखरे हुए डेटा-सेट्स का बेहतर उपयोग करने के लिए निम्न चरण अपनाए गए हैं :

1. डेटा लेक (Data Lake) का निर्माण — सभी विभागों के अलग-थलग (silos) डेटा को तोड़कर एक केंद्रीकृत डेटा-भंडार बनाना।

2. गोल्डन रिकॉर्ड (Golden Record) का गठन — हर नागरिक के लिए एक ही "सत्य का स्रोत" (Single Source of Truth) तैयार करना, ताकि अलग-अलग जगह अलग-अलग जानकारी न रहे।

3. नागरिकों/परिवारों की 360° प्रोफाइलिंग — हर परिवार की योजना-पात्रता, खर्च व आय का एक ही एकीकृत लेजर (ledger) तैयार करना।

4. स्वचालित सेवा वितरण (Auto Service Delivery) — निम्न क्रम में स्वतः प्रक्रिया :

◦ पात्र लाभार्थ की स्वतः पहचान → लाभ लेने की सहमति हेतु स्वतः सूचना → सहमति मिलने पर स्वतः आवेदन जमा → उपलब्ध डेटा के आधार पर सिस्टम-चालित स्वतः अनुमोदन → संबंधित विभाग द्वारा लाभ/सेवा की स्वतः प्रदायगी शुरू → डेटा से मिली जानकारी के आधार पर मौजूदा योजनाओं में सुधार के सुझाव।

22. जन आधार योजना — "एक नंबर, एक कार्ड, एक पहचान"

राज्य में "एक नंबर, एक कार्ड, एक पहचान" की विचारधारा को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा विभिन्न विभागों द्वारा दी जाने वाली सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के नकद व गैर-नकद लाभ सरल, आसान व पारदर्श तरीके से नागरिकों तक पहुंचाने के लिए "राजस्थान जन आधार योजना" चलाई जा रही है।

प्रशासनिक ढांचानोडल विभाग — आयोजना विभाग; क्रियान्वयन एजेंसी — राजस्थान जन आधार प्राधिकरण; ज़िला स्तर पर ज़िला कलेक्टर व उपखंड अधिकारी; तकनीकी सहयोग — राजकॉम्प इंफो सर्विसेज लिमिटेड (RISL)।
राशन कार्ड का दर्जाअधिनियम की धारा 40 के तहत 5 अप्रैल, 2022 को राज्य के "जन आधार कार्ड" को राशन कार्ड घोषित किया गया — यानी अब दो अलग कार्ड एक ही कार्ड में समाहित हो गए हैं।
कवरेजराज्य की करीब 97% अनुमानित जनसंख्या का सामाजिक-आर्थिक डेटा सम्मिलित — देश की सबसे बड़ी पारिवारिक डायरेक्टरी।
पोर्टल एकीकरणजन आधार पोर्टल से 199 से अधिक योजनाएं व सेवाएं एकीकृत (165 कल्याणकारी योजनाएं + 34 अन्य सेवाएं)।
पंजीकृत परिवार
2.06 करोड़
पंजीकृत सदस्य
7.95 करोड़
कुल लेन-देन
206 करोड़
(नकद व गैर-नकद)
कुल नकद लाभ (DBT)
₹1.29 लाख करोड़

(आंकड़े दिसंबर 2025 तक के हैं। इसके अतिरिक्त, जन आधार के माध्यम से डुप्लिकेट व फर्ज लाभार्थियों की छंटनी होने से सरकारी खजाने की प्रतिवर्ष ₹500 करोड़ रुपये से अधिक की बचत भी होती है।) जन आधार की प्रमुख विशेषताएं

पंजीकृत शिकायतें (2025)
34.43 लाख
निस्तारित शिकायतें
33.88 लाख
(98% से अधिक)
अधिसूचित विभाग
28
अधिसूचित सेवाएं
306
प्राप्त आवेदन (2025)
1.78 करोड़
निस्तारित आवेदन
1.76 करोड़
(98% से अधिक)
📘 RGDPS अधिनियम

परिभाषा: Rajasthan Guaranteed Delivery of Public Services Act, 2011 — निश्चित समय-सीमा के भीतर नागरिकों को सरकारी सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने वाला अधिनियम।

💡 आसान भाषा में: इस कानून के तहत हर अधिसूचित सेवा के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तय किया जाता है, और अगर वह अधिकारी तय समय के भीतर नागरिक को सेवा नहीं देता, तो उस पर जुर्माना लग सकता है — यानी यह सरकार को "समय पर काम करने" के लिए जवाबदेह बनाता है।

🏠 उदाहरण: जैसे किसी नागरिक ने जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया और तय समय (जैसे 15 दिन) में वह नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारी पर विलंब के लिए दंड लगाया जा सकता है।

33. समयबद्ध सेवा-वितरण व शिकायत निवारण तंत्र

राजस्थान संपर्क (181) — मुख्यमंत्री हेल्पलाइन

राजस्थान संपर्क एक केंद्रीकृत मंच है जहां राज्य का कोई भी नागरिक टोल-फ्री नंबर 181 डायल कर संबंधित विभागों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। यह मुख्यतः एक राज्य-स्तरीय कॉल सेंटर है जो एक एकीकृत वेब पोर्टल के साथ नागरिकों की शिकायतों के समाधान हेतु एकल संपर्क-बिंदु (single point of contact) का काम करता है।

RGDPS अधिनियम, 2011 — राजस्थान लोक सेवाओं का गारंटीशुदा वितरण अधिनियम

ग्राम पंचायत व ब्लॉक स्तर
▸ सरपंच व स्थानीय अधिकारी नियमित सत्र आयोजित कर
शिकायतें सुनते व सुलझाते हैं। ▸ ग्राम स्तर पर हल न होने वाली शिकायतें ब्लॉक स्तर के अधिकारियों तक भेजी जाती हैं। ▸ ब्लॉक विकास अधिकारी व अन्य ब्लॉक अधिकारी इन मुद्दों का समाधान करते हैं।
जिला स्तर
▸ जिला कलेक्टर व वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों को संबोधित व
निस्तारित करते हैं। ▸ जांच की निगरानी, स्थिति की समीक्षा व सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है। ▸ माननीय मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री भी समय-समय पर जनसुनवाई सत्रों में सक्रिय भागीदारी करते हैं।
क्र.सं.स्तरपंजीकृत शिकायतेंनिस्तारित शिकायतेंनिस्तारण प्रतिशत
1जिला स्तर19,16919,15799.93%
2अटल जन सेवा शिविर (ब्लॉक स्तर)25,97525,91399.76%
3ग्राम पंचायत स्तर1,20,5671,20,40499.86%
2. ई-मित्र (e-Mitra) फ़्लैगशिप योजना | सतत/जारी कार्यक्रम
शुरुआतराजस्थान ने वर्ष 2002 में देश का सबसे बड़ा एकल एकीकृत सेवा-वितरण प्लेटफॉर्म "ई-मित्र" लॉन्च किया।
उद्देश्यसभी सरकारी व निजी नागरिक-केंद्रित सेवाओं को पारदर्श व किफायती तरीके से आम आदमी की दहलीज़ तक पहुंचाना — खासकर ग्रामीण इलाकों के निवासियों को IT-सक्षम सेवा-वितरण इंटरफेस से जोड़ना।
उपलब्धतावेब आधारित ई-मित्र एप्लिकेशन, मोबाइल ऐप और IT-सक्षम भौतिक कियोस्क — तीनों माध्यमों से उपलब्ध। वर्तमान में 78,000 से अधिक ई-मित्र कियोस्क के माध्यम से 600 से अधिक सेवाएं दी जा रही हैं।
नई सुविधाएंबहुभाषी बातचीत-आधारित AI चैटबॉट व व्हाट्सएप के माध्यम से भी सेवा-वितरण शुरू किया गया है। दिसंबर 2025 में 10 नई सेवाएं (9 सरकारी क्षेत्र की G2C सेवाएं + 1 टैक्सबडी की B2C सेवा) पोर्टल पर जोड़ी गईं।

राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम (RTH), 2012

इस अधिनियम के तहत नागरिकों को अपनी बात/शिकायत को अधिकारियों के समक्ष सुनवाई हेतु रखने का कानूनी अधिकार मिलता है। वर्ष 2025 (दिसंबर तक) कुल 84,099 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 84,048 आवेदनों का निस्तारण किया जा चुका है।

त्रिस्तरीय जनसुनवाई प्रणाली

शासन को बेहतर बनाने और सार्वजनिक शिकायतों के तुरंत निस्तारण के लिए एक मजबूत प्रणाली तैयार करने हेतु राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय जनसुनवाई प्रणाली शुरू की है, जो जिला, ब्लॉक (अटल जन सेवा शिविर) और ग्राम पंचायत — तीन स्तरों पर संरचित है। यह नागरिकों और सरकारी अधिकारियों के बीच सीधे संवाद को सुनिश्चित करती है, जिससे प्रशासन में जवाबदेही बढ़ती है।

तालिका 12.1 : वर्ष 2025 में शिकायतों की स्थिति (पंजीकृत व निस्तारित)

44. ई-मित्र एवं ई-मित्र प्लस

ई-मित्र होम सर्विस
19 दिसंबर 2021 को जयपुर व जोधपुर में 5 सेवाओं के साथ ई-मित्र होम सर्विस का शुभारंभ हुआ, जिससे
नागरिकों को घर बैठे सेवाएं उपलब्ध हुईं।
3. ई-मित्र प्लस (e-Mitra Plus) फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
विशेषतानागरिकों को कई कार्यालयों में जाए बिना सभी सरकारी सेवाओं तक पहुंच देने के लिए, यह भारत में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप (जैसे ATM की तरह) के e-सेवा वितरण का पहला अग्रणी कदम है।
सुविधाएं85 से अधिक सेवाएं; नागरिक सरकारी दस्तावेज़ों के लिए आवेदन कर बिल्ट-इन प्रिंटर से उन्हें प्रिंट भी कर सकते हैं। नकद, डेबिट/क्रेडिट कार्ड व नेट-बैंकिंग सहित कई भुगतान विकल्प उपलब्ध।
वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंगग्राम पंचायत स्तर तक वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा — जनसुनवाई, सरकारी योजनाओं की जानकारी का प्रसार, राज्य कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण।
शैक्षणिक सामग्रीराजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए करीब 2,500 शैक्षणिक वीडियो भी उपलब्ध कराए गए हैं।
विस्तारराज्यभर में कुल 14,891 ई-मित्र प्लस कियोस्क स्थापित किए जा चुके हैं।
विभाग
117
योजनाएं
351
सूचना के प्रकार
749
याद रखें :

जन सूचना पोर्टल का उद्देश्य नागरिकों को बिना RTI आवेदन किए ही, सीधे और पारदर्श ढंग से सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है — यह सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना को स्वतः (proactive disclosure) के रूप में आगे बढ़ाता है।

55. जन सूचना पोर्टल

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 की धारा 4(2) के अनुरूप विकसित किया गया जन सूचना पोर्टल, विभिन्न सरकारी योजनाओं की पात्रता, उपलब्धियों व नोडल विभाग की जानकारी एक ही जगह, सरल, पारदर्श व भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध कराने वाला एकल मंच है।

66. आईस्टार्ट (iStart) — स्टार्टअप इकोसिस्टम

राज्य सरकार ने स्टार्टअप से जुड़ी समस्त जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराने के लिए वेब पोर्टल www.istart.rajasthan.gov.in स्थापित किया है। यह पोर्टल स्टार्टअप नीति के तहत निर्धारित सभी प्रोत्साहनों के लिए एकल-प्रवेशद्वार (one-stop gateway) है, और सरकारी अधिकारियों, स्टार्टअप्स, मेंटर्स व प्रशासकों को आईस्टार्ट कार्यक्रम की निगरानी व पहुंच के लिए एक डैशबोर्ड भी उपलब्ध कराता है।

एकीकृत विभागीय एप्लिकेशन
604
(G2G: 368, G2C: 236)
लाभान्वित नागरिक
3.29 करोड़+
(दिसंबर 2025 तक)
संग्रहित दस्तावेज़
86 करोड़+
(दिसंबर 2025 तक)
दैनिक अपलोड
~2 लाख
(दस्तावेज़/दिन)
📘 राज SSO (RajSSO)

परिभाषा: "एक डिजिटल पहचान" (One Digital Identity) के सिद्धांत पर आधारित एक ऐसा मंच, जो राज्य सरकार के सभी एप्लिकेशन/सिस्टम तक केंद्रीकृत पहुंच प्रदान करता है।

💡 आसान भाषा में: पहले हर सरकारी वेबसाइट/एप पर अलग-अलग यूज़रनेम-पासवर्ड बनाना पड़ता था। अब SSO की मदद से सिर्फ एक बार लॉग-इन करने पर उपयोगकर्ता विभिन्न सरकारी एप्लिकेशनों पर काम कर सकता है — बार-बार अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करने की ज़रूरत खत्म हो जाती है।

🏠 उदाहरण: जैसे एक बार ईमेल में लॉग-इन करने पर गूगल की अन्य सभी सेवाएं (मैप्स, ड्राइव, यूट्यूब) अपने आप खुल जाती हैं — ठीक वैसे ही SSO से राजस्थान सरकार की सभी सेवाएं एक ही लॉग-इन से मिल जाती हैं।

77. राज SSO — सिंगल साइन-ऑन (Single Sign-On)

88. राज ई-वॉल्ट (Raj e-Vault)

राज ई-वॉल्ट विभिन्न सरकारी विभागों व नागरिकों के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली (Document Management System) है, जो दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित रखने हेतु एक केंद्रीय भंडार का काम करती है।

डिजिटल तकनीकें
▸ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) व मशीन लर्निंग (ML)
▸ रिमोट सेंसिंग व भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) ▸ ब्लॉकचेन तकनीक
फील्ड तकनीकें
▸ इंटरनेट ऑफ थिंग्स इन एग्रीकल्चर (IoT)
▸ एग्रीकल्चर रोबोट ▸ ड्रोन/अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV)
📘 AVGC-XR

परिभाषा: Animation, Visual Effects, Gaming, Comics and Extended Reality — एनिमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स व एक्सटेंडेड रियलिटी क्षेत्र, जिसे संक्षेप में AVGC-XR कहा जाता है।

💡 आसान भाषा में: यह नीति राजस्थान को एनिमेशन-फिल्में, वीडियो गेम, विशेष प्रभाव (VFX), कॉमिक्स और वर्चुअल/ऑगमेंटेड रियलिटी (XR) बनाने वाली कंपनियों के लिए एक प्रमुख केंद्र (हब) बनाने के मकसद से लाई गई है, ताकि इस बढ़ते हुए उद्योग में निवेश व रोज़गार दोनों बढ़ें।

🏠 उदाहरण: जैसे कोई कंपनी बच्चों के लिए एनिमेशन कार्टून बनाना चाहे, या कोई स्टूडियो मोबाइल गेम डिज़ाइन करना चाहे — तो इस नीति के तहत उसे राजस्थान में अनुदान, प्रशिक्षण व सिंगल-विंडो मंजूरी की सुविधा मिलेगी।

99. राजस्थान AVGC-XR नीति, 2024

उद्देश्य : (1) AVGC-XR में निवेश आकर्षित कर राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, और (2) युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित करना।

नीति के प्रमुख बिंदु (a) वित्तीय प्रोत्साहन — उत्पादन अनुदान (30% तक प्रतिपूतं) और स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण।

(b) अवसंरचना विकास — अटल इनोवेशन स्टूडियो, एक्सेलेरेटर, इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना और उच्च-स्तरीय तकनीकी संसाधनों तक पहुंच।

(c) कौशल विकास — कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु विश्वविद्यालयों व प्रशिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी।

(d) व्यापार-सुगमता (Ease of Doing Business) — अनुमोदनों व प्रोत्साहनों के लिए समर्पित AVGC-XR सेल तथा एकल-खिड़की पोर्टल।

(e) सांस्कृतिक प्रोत्साहन — राजस्थानी लोकगीतों पर आधारित सामग्री हेतु प्रोत्साहन तथा मीडिया स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों के साथ सहयोग।

(f) शोध व विकास — IP (बौद्धिक संपदा) निर्माण, नवाचार प्रयोगशालाओं व AVGC-XR सैंडबॉक्स के लिए समर्थन।

10किसानों हेतु प्रमुख तकनीकी हस्तक्षेप

कृषि क्षेत्र में तकनीकी प्रगति ने खेती के तौर-तरीकों को काफी हद तक बदला है, जिससे उत्पादकता, टिकाऊपन (sustainability) व दक्षता में सुधार हुआ है।

राज-AIMS (Raj-AIMS) डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (DAM) के अंतर्गत राजस्थान कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली (Raj-AIMS) परियोजना को स्वीकृति दी गई है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा :

राज किसान साथी पोर्टल कृषि योजनाओं के ऑनलाइन आवेदन व प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के लिए सेवाएं प्रदान करने हेतु एकल-खिड़की एकीकृत पोर्टल — इसका लक्ष्य है "Ease of Doing Farming" (खेती करना आसान बनाना)।

विकसित मॉड्यूल
150+
(40 योजनाओं के तहत)
मोबाइल ऐप
11
DBT हस्तांतरण
₹3,566 करोड़
(दिसंबर 2025 तक)
लाइसेंस/पंजीयन जारी
2.10 लाख+
(कृषि-इनपुट डीलर/निर्माता)
ऋण व मूल्य संबंधी सेवाएं
▸ अल्पकालिक फसल ऋण आवेदन
▸ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आवेदन ▸ ऑनलाइन भुगतान
पंजीयन संबंधी सेवाएं
▸ नवीन सहकारी संस्था पंजीकरण
▸ NGO पंजीकरण ▸ खेल संघों का पंजीयन

1111. स्थानीय स्वशासन (LSG) की ऑनलाइन सेवाएं

स्थानीय स्वशासन विभाग एक समर्पित पोर्टल के ज़रिए राज्य के शहरी निवासियों को कई ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराता है, जैसे :

1212. पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र

राज्य में प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने तथा एक अधिक समावेशी, पारदर्श व जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए निम्न प्रमुख पहलें चलाई जा रही हैं

4. राज-काज (Raj-Kaj) फ़्लैगशिप योजना | सतत/जारी कार्यक्रम
परिचयपरंपरागत मैनुअल प्रणाली को डिजिटाइज़ कर, निर्णय-प्रक्रिया को बेहतर बनाने व परिचालन-दक्षता बढ़ाने के लिए राज्य द्वारा विकसित एक डिजिटल ई-ऑफिस मंच।
लाभकागज़-रहित (paperless) कामकाज, समय व संसाधनों की बचत, तथा डेटा-सुरक्षा, दर्शिता, तत्परता व जवाबदेही में वृद्धि। फाइल प्रबंधन, मानव-संसाधन प्रबंधन व कार्यालयों की विशेष कार्य-प्रक्रियाओं को भी स्वचालित व सुव्यवस्थित करता है।
प्रमुख मॉड्यूलIPR, PAR, NOC (अनापत्ति प्रमाण-पत्र), लीव (अवकाश), ई-फाइल व ई-डाक।
प्रगतिदिसंबर 2025 तक 42 लाख से अधिक फाइलें बन चुकी हैं। 75 प्रशासनिक विभागों की 430 संस्थाओं के 60,000 से अधिक कार्यालयों में 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ता राज-काज एप्लिकेशन से जुड़ चुके हैं।
आगे की राहराज-काज संस्करण 2.0 विकसित किया जा रहा है। हाल ही में "कॉमन मास्टर्स" व "इम्मूवेबल प्रॉपर्ट रिटर्न" मॉड्यूल भी लाइव किए गए हैं।
ई-गवर्नस एप्लिकेशन
50+
(आधार-आधारित ई-साइन उपयोग में)
ई-साइन दस्तावेज़
11.55 करोड़+
(दिसंबर 2025 तक)
औसत दैनिक ई-साइन
70,000+
(दस्तावेज़/दिन)

राज ई-साइन (Raj e-Sign) कागज़-रहित पारदर्श शासन की दिशा में एक बड़ा कदम — आधार ई-केवाईसी प्रमाणीकरण के माध्यम से कभी भी, कहीं भी सुरक्षित, किफायती व पारदर्श ऑनलाइन दस्तावेज़ हस्ताक्षर व सरकारी प्राधिकरण को सक्षम बनाता है।

राजमेल (RajMail) राज्य के हर नागरिक के लिए निःशुल्क ईमेल सेवा — जिसमें स्थानीय भाषा में उपलब्ध वर्नाक्युलर ईमेल सेवा भी शामिल है, ताकि तकनीक और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बन सके। दिसंबर 2025 तक 57.48 लाख से अधिक खाते बनाए जा चुके हैं।

राजनेट (RajNET) व RAJSWAN राज्य ने राजस्थान स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (RAJSWAN) के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर तक अंतिम-छोर (last-mile) कनेक्टिविटी वाला एकीकृत नेटवर्क समाधान लागू किया है। इसी पहल के तहत जिला व ब्लॉक स्तर के कार्यालयों में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा (VC Room) भी स्थापित की गई है। राज्य की 9,260 से अधिक ग्राम पंचायतों में राजनेट के माध्यम से नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध है।

स्टेट पोर्टल (rajasthan.gov.in) यह पोर्टल नागरिकों, सरकारी उपयोगकर्ताओं, व्यवसायों, पर्यटकों व प्रवासी भारतीयों के लिए सूचना व लेन-देन आधारित सरकारी सेवाओं का एकल स्रोत है। यह विभिन्न विभागों/संस्थानों/संगठनों/PSU/बोर्डा/योजनाओं के वेब पोर्टलों से भी सहजता से जुड़ा हुआ है। दिसंबर 2025 तक लगभग 93 लाख लोगों ने पोर्टल पर आकर सेवाओं का लाभ उठाया।

स्टेट डेटा सेंटर (SDC) e-गवर्नस एप्लिकेशनों की मेज़बानी के लिए राज्य स्तर पर एक भौतिक सुविधा उपलब्ध कराता है, जो शहरी व ग्रामीण — दोनों क्षेत्रों के हर नागरिक तक प्रभावी शासन पहुंचाने की राज्य सरकार की जवाबदेही व समावेशिता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

निगरानी व सुरक्षा
▸ वीडियो सर्विलांस सिस्टम
▸ डायल 100 कंट्रोल सिस्टम ▸ फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन सिस्टम
यातायात व स्थान-आधारित
▸ इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
▸ व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम ▸ भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS)
CM एक्सीलेंस अवार्ड
6 अधिकारी + 3 विभाग
संपर्क पोर्टल अवार्ड
9 अधिकारी + 4 विभाग
(प्रभावी शिकायत निवारण हेतु)
वेब पोर्टल परियोजनाएं
20
एनालिटिकल डैशबोर्ड/मॉड्यूल
107
इन-हाउस मोबाइल ऐप
8
प्रोसेस टेंडर (2025-26)
9.52 लाख+
कुल मूल्य
₹1.59 लाख करोड़+
📘 भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS)

परिभाषा: Geographical Information System — भौगोलिक स्थानों (नक्शों/भू-निर्देशांकों) से जुड़े डेटा के प्रबंधन व विश्लेषण के लिए एक निर्णय-समर्थन प्रणाली (Decision Support System)।

💡 आसान भाषा में: यह एक ऐसा डिजिटल नक्शा-आधारित सिस्टम है जो ज़मीन, भवन, सड़क, संपत्ति जैसी हर चीज़ की सटीक भौगोलिक जानकारी कंप्यूटर पर दिखाता व विश्लेषित करता है, जिससे सही फैसले लेना आसान हो जाता है।

🏠 उदाहरण: जैसे किसी सड़क-निर्माण की योजना बनाते समय GIS से यह तुरंत पता चल जाता है कि रास्ते में कहां-कहां घर, खेत या नाले पड़ते हैं।

भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) — राजधारा (RajDharaa)

भू-स्थानिक (geospatial) डेटा के प्रबंधन व विश्लेषण हेतु राज्य-स्तरीय एकीकृत GIS प्लेटफॉर्म "राजधारा (RajDharaa)" की स्थापना की गई है। औद्योगिक ले-आउट योजनाओं में सहायता हेतु राजधारा को रीको (RIICO) GIS प्लेटफॉर्म के साथ भी एकीकृत किया गया है। राजधारा पहल के तहत निम्न समाधान उपलब्ध कराए गए हैं :

ई-प्रोक्योरमेंट (GePNIC)

दर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य ने सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) सहित सभी सरकारी संगठनों के लिए गवर्नमेंट ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (GePNIC) लागू किया है। अक्टूबर, 2011 में राज्य में इसकी शुरुआत के बाद से अब तक 327 से अधिक विभागों व PSU ने इसे अपनाया है।

डेटा एनालिटिक्स

कर-अपवंचन (tax evasion) की पहचान कर तथा "कर आधार" में वृद्धि कर "कर राजस्व" बढ़ाने के उद्देश्य से यह परियोजना राजस्व अर्जित करने वाले विभागों — जैसे वाणिज्यिक कर, परिवहन, खान व भूविज्ञान में लागू की गई है। इसके अतिरिक्त RGHS, जन आधार, ई-मित्र, राजस्थान संपर्क, IFMS, RTI जैसी योजनाओं तथा चिकित्सा व स्वास्थ्य, JDA, वन विभाग जैसे अन्य विभागों में भी डेटा एनालिटिक्स का उपयोग किया जा रहा है, ताकि डेटा-आधारित नीति निर्धारण व साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा मिल सके।

उद्देश्य 1
शासन में AI अपनाना
उद्देश्य 2
उद्योगों हेतु AI प्रोत्साहन
उद्देश्य 3
AI कौशल व क्षमता
निर्माण

सरकारी कार्यालयों में क्षमता निर्माण

1313. राजस्थान AI/ML नीति, 2026

राजस्थान AI/ML नीति 2026 को 6 जनवरी, 2026 को माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जयपुर में आयोजित "राजस्थान रीजनल AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस" में लॉन्च किया गया। यह नीति सार्वजनिक सेवा वितरण को आधुनिक बनाने, दर्शिता बढ़ाने, नवाचार को गति देने, रोज़गार के नए अवसर पैदा करने और AI के लाभों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराती है।

राज्य AI को एक परिवर्तनकारी शक्ति (transformative force) के रूप में देखता है, जो शहरी व ग्रामीण — दोनों समुदायों में प्रगति को तेज़ करेगी और "विकसित राजस्थान@2047" के दीर्घकालिक लक्ष्यों में योगदान देगी।

(ये तीनों उद्देश्य "नैतिक एवं जवाबदेह AI ढांचे" के दायरे में रखे गए हैं।)

1414. प्रभावी वित्तीय प्रबंधन — IFMS 3.0

वित्तीय शासन (Financial Governance) इस विश्वास पर आधारित है कि एक पारदर्श व कानूनी रूप से मज़बूत लोक-वित्त प्रणाली, अच्छे शासन के व्यापक ढांचे का अभिन्न हिस्सा है। इसमें वित्तीय लेन-देन पर नज़र रखना, प्रदर्शन प्रबंधन, अनुपालन सुनिश्चित करना, परिचालन व खुलासे (disclosures) उपलब्ध कराना शामिल है।

राजस्थान ने अपनी बजटिंग व लेखांकन प्रक्रिया के प्रभावी प्रबंधन हेतु एक व्यापक तंत्र लागू किया है, जो एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) के स्वचालित प्लेटफॉर्म के माध्यम से संभव हुआ है।

विशेषताविवरण
बजट प्रबंधनबजट अनुमान, योजना, निगरानी, तैयारी, पुनःस्वीकृति व मुख्य वर्गकरण मैपिंग; बजट नियंत्रक प्राधिकरणों की मांगों की मैपिंग तथा सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) के अनुसार आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) द्वारा बिल तैयार करना।
केंद्र प्रायोजित योजनाएंSNA SPARSH के तहत केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) के क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार के प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण।
ई-भुगतान (E-Payments)नियमों के अनुरूप, RBI से जुड़े हुए, तेज़ व पारदर्श तरीके से भुगतान सुनिश्चित करना — नेट-बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, UPI, NEFT व QR कोड भुगतान की सुविधा सहित; समाधान (reconciliation) हेतु इलेक्ट्रॉनिक राजकोष मंच भी उपलब्ध।
बैंकिंग लेन-देनबैंक डिसबर्समेंट इंजन के माध्यम से सभी बैंकिंग लेन-देन दर्ज किए जाते हैं।
राजकोष नियंत्रण (Treasury Controls)सटीक व कुशल वित्तीय लेन-देन सुनिश्चित करने हेतु राजकोष-जांच लागू।
ई-अकाउंट प्रस्तुतीकरणसभी ई-वाउचर व खातों की सूची महालेखाकार (AG) कार्यालय को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजी जाती है।
मास्टर डेटा प्रबंधनकर्मचारियों, पेंशनभोगियों, विक्रेताओं (vendors), लाभार्थियों, प्राधिकरणों व हितधारकों का मास्टर डेटा रख-रखाव।
📘 IFMS (एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली)

परिभाषा: Integrated Financial Management System — राज्य सरकार की बजटिंग, लेखांकन, भुगतान व राजकोष (treasury) संबंधी सभी प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल मंच पर एकीकृत करने वाली स्वचालित प्रणाली।

💡 आसान भाषा में: सरकार का सारा पैसा कहां से आया, कहां खर्च हुआ, किसे भुगतान हुआ — यह सब कागज़ों की बजाय एक ही कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज होता है, जिससे हिसाब-किताब तुरंत व पारदर्श तरीके से देखा जा सकता है।

🏠 उदाहरण: जैसे किसी स्कूल के लिए बजट स्वीकृत होने से लेकर शिक्षक के वेतन-भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया अब IFMS के ज़रिए ऑनलाइन ट्रैक होती है, कागज़ी फाइलों में नहीं।

IFMS अपनाने से बजटिंग प्रक्रियाएं अधिक दक्ष हुई हैं, नकदी-प्रवाह प्रबंधन व खातों का वास्तविक-समय समाधान (real-time reconciliation) बेहतर हुआ है। इससे सूचना-प्रबंधन क्षमता मज़बूत हुई तथा लेखा तैयार करने में सटीकता व समयबद्धता बढ़ी है, साथ ही लोक-वित्त वितरण में दर्शिता व दक्षता को भी बल मिला है।

IFMS 3.0 की मुख्य विशेषताएं IFMS एक "छाता मंच" (umbrella platform) की तरह काम करता है, जो आंतरिक व बाह्य — दोनों हितधारकों की सुविधा हेतु कई मॉड्यूलर प्रणालियों को एक साथ जोड़ता है। यह बजट अनुमान, बजट तैयारी, पूल बजट, राजकोष कार्य, ई-भुगतान, ई-बिल, ई-सैंक्शन, ई-रसीद, आधार-आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) तथा ई-चालान — इन सभी को कवर करता है।

साथ ही यह डेटा-प्रबंधन, ई-अकाउंट प्रस्तुतीकरण, ई-समाधान, बैंकों/RBI/महालेखाकार/लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली/विभागीय पोर्टलों/NSDL/NPCI के साथ एकीकरण, तथा सभी हितधारकों के बीच कागज़-रहित ई-प्रस्तुतीकरण को भी सक्षम बनाता है।

वर्ष 2010-11 से बजट, वित्तीय व लेखा-संबंधी रिकॉड्स का एक मज़बूत डेटाबेस तैयार होने के कारण, अब IFMS कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ एकीकरण के लिए भी तैयार है, जिससे राज्य तेज़ निर्णय-क्षमता, बेहतर पूर्वानुमान व मानवीय अतिरेक (redundancy) को कम कर वित्तीय संचालन व शासन को और अधिक कुशल बनाना चाहता है।

निष्कर्ष रूप में :

राजस्थान में "प्रभावी शासन" की यह यात्रा — जन आधार जैसे एकीकृत डिजिटल पहचान-तंत्र से लेकर, IFMS 3.0 जैसी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और अब AI/ML नीति 2026 तक — दिखाती है कि राज्य किस तरह दर्शिता, जवाबदेही व तकनीक के सहारे हर नागरिक तक सेवाओं की समयबद्ध व सुलभ डिलीवरी सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

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