राजस्थान भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 10.41% रखता है, परंतु देश के जल संसाधनों का मात्र 1.16% हिस्सा ही राज्य के पास है — यह असंतुलन जल सुरक्षा को राज्य की दीर्घकालिक विकास रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बनाता है।
अनियमित वर्षा, घटता भूजल स्तर व विस्तारित बंजर भूमि जैसी चुनौतियों के बीच राज्य ने बृहद सिंचाई अवसंरचना, सामुदायिक संरक्षण, जल उपयोग दक्षता व संस्थागत सुधारों को जोड़ने वाला एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है।
विज़न — विकसित राजस्थान@2047 वर्ष 2047 तक राजस्थान मजबूत शासन, सतत संरक्षण और न्यायसंगत उपयोग के माध्यम से जल सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा। उपलब्धता, गुणवत्ता व अनुकूलता (Resilience) सुनिश्चित कर राज्य कृषि, समुदायों व पारिस्थितिकी तंत्र को जलवायु चुनौतियों के अनुकूल सशक्त बनाएगा।
| 1. संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (PKC, ERCP एकीकृत) फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना | |
|---|---|
| उद्देश्य | चंबल सहायक नदियों (कुनू, कुल, पार्वती, कालीसिंध, मेज) के अतिरिक्त मानसूनी जल को बनास-मोरेल-बाणगंगा-गंभीर-कालीसिल-पार्वती बेसिन में स्थानांतरण |
परिभाषा: ₹2,765.05 करोड़ बजट प्रावधान ₹6,028.74 करोड़ की तुलना में (दिसंबर तक)
परिभाषा: Culturable Command Area (CCA) किसी सिंचाई परियोजना की नहर प्रणाली के अंतर्गत वह कुल भूमि है जिस पर तकनीकी रूप से खेती व सिंचाई संभव है।
💡 आसान भाषा में: सरल शब्दों में — किसी बांध/नहर का पानी कागज़ पर जितने खेतों तक पहुँच सकता है, उतना क्षेत्रफल ही CCA कहलाता है; इसमें से जितनी भूमि पर असल में सिंचाई हो रही है, वह "सिंचित क्षेत्र" कहलाता है।
🏠 उदाहरण: IGNP की कुल CCA 16.17 लाख हेक्टेयर है — यानी नहर तंत्र इतनी भूमि तक सिंचाई-योग्य जल पहुँचा सकता है।
| MoU व DPR | केंद्र-राजस्थान-मध्यप्रदेश MoU (28 जनवरी 2024) — हिस्सेदारी अनुपात केंद्र 90% : राजस्थान 5% : मध्यप्रदेश 5%; राजस्थान हिस्से की DPR (₹89,644 करोड़) 29 जुलाई 2025 को केंद्रीय जल आयोग को प्रस्तुत |
|---|---|
| लाभ | 17 ज़िलों में पेयजल-औद्योगिक जल उपलब्धता; 2.51 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई (जिसमें 2.21 लाख हेक्टेयर स्प्रिंकलर पद्धति से + 30,000 हेक्टेयर अपशिष्ट जल शोधन से) + 1.52 लाख हेक्टेयर पुनर्स्थापित; ~32.5 मिलियन लोग लाभान्वित |
| प्रगति | नवनेरा बैराज व ईसरदा बांध निर्माण पूर्ण; पेयजल हेतु ₹9,416.70 करोड़ के 3 पैकेज (रामगढ़-महलपुर बैराज, चंबल एक्वाडक्ट, फीडर) प्रगति पर; मोरसागर-रामगढ़-जयसमंद-बंध बेरठा फीडर हेतु ₹13,895 करोड़ के आवंटन पत्र जारी; 2025-26 (दिसंबर तक) कुल ₹251.49 करोड़ व्यय (नवनेरा बैराज ₹9.53 करोड़ + ईसरदा बांध ₹56.62 करोड़) |
| अतिरिक्त लाभ | फीडर नहरों के किनारे सड़क निर्माण से यातायात सुविधा; नहर तटों पर सघन वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण; परियोजना संचालन हेतु सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रावधान |
| 2. इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) फ़्लैगशिप योजना | |
|---|---|
| उद्देश्य | पश्चिम राजस्थान की मरुभूमि को दूरस्थ हिमालयी जल से सिंचाई-पेयजल आपूर्ति; सूखा-प्रभावित क्षेत्र में पर्यावरण सुधार व रोज़गार सृजन |
| सिंचित क्षेत्र (CCA) | नहर कार्य पूर्ण कर 16.17 लाख हेक्टेयर सांस्कृतिक कमांड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध |
| भूमि आवंटन | प्रारंभ से अब तक कुल 14.82 लाख हेक्टेयर भूमि आवंटित; 2025-26 (दिसंबर तक) 11,296 हेक्टेयर नया आवंटन — उपनिवेशन विभाग ने ₹337.80 करोड़ वसूली की (वार्षिक लक्ष्य ₹70 करोड़ के मुकाबले) |
| सुधार कार्य | चौधरी कुम्भाराम आर्य लिफ्ट योजना — 0.10 लाख हेक्टेयर हेतु 6 नई नहरें प्रगति पर (16.35 किमी नहर पूर्ण, ₹16.16 करोड़ व्यय); द्वितीय चरण लिफ्ट योजनाओं में स्प्रिंकलर सिंचाई का चरणबद्ध विस्तार — पायलट में 0.27 लाख हेक्टेयर (पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर), वर्ष 2016-24 में 1.99 लाख हेक्टेयर, वर्ष 2025-26 में अतिरिक्त 1.11 लाख हेक्टेयर आवंटित (कुल मिलाकर ~3.37 लाख हेक्टेयर) |
| नवीनीकरण परियोजनाएँ (NABARD-RIDF) | बीसलपुर शाखा, भुट्टोवाला व धोधा नहर तंत्र का विस्तार-नवीनीकरण — ₹134.55 करोड़ (RIDF-XXVI); चरणवाला शाखा तंत्र नवीनीकरण — ₹102.31 करोड़ (RIDF-XXVII); सागरमल गोपा शाखा, RD 1254-1458 माइनर व असूटार वितरिका तंत्र (जैसलमेर) पर ₹35.82 करोड़ अतिरिक्त व्यय |
| 2025-26 बजट | कुल ₹1,106.36 करोड़ आवंटित (प्रथम चरण कंवरसेन लिफ्ट योजना हेतु ₹78.04 करोड़ + द्वितीय चरण के संचालन-रखरखाव-निर्माण हेतु ₹1,028.32 करोड़); दिसंबर 2025 तक ₹546.84 करोड़ व्यय |
| इंदिरा गांधी फीडर व सरहिंद फीडर री-लाइनिंग | क्रमशः 97 किमी व 100 किमी री-लाइनिंग; केंद्र 60% : राज्य 40% वित्तपोषण — इंदिरा गांधी फीडर में 81.70/97 किमी कार्य पूर्ण (शेष 15.30 किमी मार्च-मई 2026 तक प्रस्तावित, पंजाब का अब तक व्यय ₹1,346.84 करोड़, राजस्थान द्वारा अपने अंश हेतु ₹960.89 करोड़ हस्तांतरित); सरहिंद फीडर में पूर्ण 100 किमी कार्य समाप्त (पंजाब व्यय ₹801.49 करोड़, राजस्थान अंश ₹183.86 करोड़ हस्तांतरित) |
| परियोजना (नदी/ज़िला) | लाभान्वित क्षेत्र / विशेषता |
|---|---|
| राम जल सेतु लिंक / नर्मदा नहर परियोजना (जालौर-बाड़मेर) | भारत की पहली प्रमुख सिंचाई परियोजना; 2.46 लाख हेक्टेयर (233 गाँव) के पूरे कमांड क्षेत्र में स्प्रिंकलर सिंचाई अनिवार्य; 1,541 गाँव (जालौर 874+बाड़मेर 667) व 3 शहर — जालौर, भीनमाल, सांचौर (37.48 लाख लोग) |
| परवन सिंचाई परियोजना (झालावाड़-बारां-कोटा) | परवन नदी पर बहुउद्देशीय बांध; 571 गाँवों में 2.01 लाख हेक्टेयर सिंचाई (कुल 1,402 गाँवों को पेयजल भी प्रस्तावित); SCADA-नियंत्रित दाबयुक्त पाइप से स्प्रिंकलर सिंचाई; परियोजना के अपने सौर ऊर्जा संयंत्र से बिजली आपूर्ति; संशोधित स्वीकृति ₹7,355.23 करोड़ |
| धौलपुर लिफ्ट सिंचाई परियोजना (पार्वती-रामसागर बांध) | धौलपुर ज़िले के ~39,980 हेक्टेयर CCA व 483 गाँव-3 शहर (बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा) लाभान्वित; संपूर्ण कमांड क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई अनिवार्य व 30 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना प्रस्तावित; जून 2026 तक पूर्ण लक्ष्य |
| माही-पीपलखूंट उच्च स्तरीय कैनाल (प्रतापगढ़) | माही बांध से 3.72 TMC जल जाखम बांध में मोड़ा जाएगा; पीपलखूंट के 24 गाँवों की 5,127 हेक्टेयर असिंचित भूमि — लागत ₹2,000 करोड़ |
परिभाषा: Detailed Project Report (DPR) किसी भी बड़ी सिंचाई/जल परियोजना के निर्माण से पहले तैयार होने वाला वह तकनीकी-वित्तीय दस्तावेज़ है जिसमें लागत, डिज़ाइन, लाभान्वित क्षेत्र व समय-सीमा का पूरा ब्यौरा होता है।
💡 आसान भाषा में: जैसे घर बनाने से पहले नक्शा व बजट तैयार किया जाता है, वैसे ही किसी बांध-नहर परियोजना को मंज़ूरी व धन मिलने से पहले DPR बनाकर केंद्रीय जल आयोग को भेजना ज़रूरी होता है।
🏠 उदाहरण: संशोधित PKC-ERCP परियोजना की राजस्थान-हिस्से की DPR (लागत ₹89,644 करोड़) 29 जुलाई 2025 को केंद्रीय जल आयोग को प्रस्तुत की गई।
परिभाषा: Lift Irrigation वह सिंचाई पद्धति है जिसमें नदी/बांध का पानी गुरुत्वाकर्षण (ढलान) से नहीं, बल्कि पम्पों की सहायता से ऊँचाई पर स्थित खेतों तक "उठाकर" (lift करके) पहुँचाया जाता है।
💡 आसान भाषा में: जैसे निचली मंज़िल की टंकी से पानी को मोटर लगाकर छत की टंकी तक चढ़ाया जाता है, वैसे ही जहाँ ज़मीन नदी के स्तर से ऊँची हो, वहाँ नहर की जगह बड़े पम्प लगाकर पानी ऊपर के खेतों तक भेजा जाता है।
🏠 उदाहरण: धौलपुर लिफ्ट परियोजना में पार्वती-रामसागर बांध का पानी पम्पों से ऊँचाई पर स्थित 483 गाँवों तक पहुँचाया जाता है।
राम जल सेतु लिंक परियोजना का आधिकारिक नाम नर्मदा नहर परियोजना (Narmada Canal Project) भी है — आर्थिक समीक्षा में यह दोनों नामों से संदर्भित होती है। संशोधित लागत ₹3,124 करोड़; 2025-26 (दिसंबर तक) ₹0.10 करोड़ व्यय (प्रावधान ₹10.96 करोड़) तथा अब तक कुल ₹3,280.82 करोड़ व्यय।
राज्य में सतही जल स्रोतों पर आधारित कई मध्यम व लघु सिंचाई परियोजनाएँ निर्माणाधीन/क्रियान्वित हैं — प्रमुख परियोजनाओं का सारांश:
| परियोजना (नदी/ज़िला) | लाभान्वित क्षेत्र / विशेषता |
|---|---|
| कालीतीर लिफ्ट परियोजना (बांसवाड़ा-कुशलगढ़-बागीदौरा) | 338 गाँवों के 41,903 हेक्टेयर क्षेत्र में माइक्रो सिंचाई — सर्वेक्षण पूर्ण, निर्माण जारी; लागत ₹2,500 करोड़; ~105 किमी मुख्य नहर से जल आपूर्ति |
| मंगली डूंगरी (गरदड़ा) परियोजना (बूंदी) | 44 गाँवों की 9,161 हेक्टेयर भूमि, ~44,000 लोग लाभान्वित; 111 गाँव-98 बस्तियों को पेयजल; बांध लंबाई 4.37 किमी, भंडारण क्षमता 44.38 मिलियन घन मीटर (8 मिलियन घन मीटर पेयजल हेतु आरक्षित); 104.24 किमी नहर में से 70% पूर्ण; कुल लागत ₹360.51 करोड़ |
| तकली सिंचाई परियोजना (कोटा) | 33 गाँवों की 7,800 हेक्टेयर — स्प्रिंकलर प्रणाली; बांध भंडारण क्षमता 33.74 मिलियन घन मीटर; वर्ष 2025 से रबी फ़सल हेतु सिंचाई प्रारंभ; कुल व्यय ₹288.75 करोड़ |
| गागरीन सिंचाई परियोजना — आहू नदी (झालावाड़) | 32 गाँवों की 9,999.83 हेक्टेयर (5,088.21 हेक्टेयर दाब-सिंचाई + 4,911.62 हेक्टेयर प्रवाह-सिंचाई); बांध क्षमता 52.60 मिलियन घन मीटर (10 मिलियन घन मीटर पेयजल हेतु); जून 2026 तक पूर्ण लक्ष्य; लागत ₹284.79 करोड़ |
| हथियादेह सिंचाई परियोजना (बारां) | 49 गाँवों की 8,979 हेक्टेयर; बांध क्षमता 46.95 मिलियन घन मीटर; 286.50 हेक्टेयर वन भूमि प्रत्यावर्तन की प्रथम चरण सैद्धांतिक स्वीकृति (23 मई 2025); मुख्य नहर हेतु ₹118.45 करोड़ का कार्यादेश, 60% कार्य पूर्ण; कुल व्यय ₹371.59 करोड़ |
| अंधेरी सिंचाई परियोजना (बारां) | 11,887 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र में 9,850 हेक्टेयर स्प्रिंकलर सिंचाई प्रस्तावित (8.95 किमी मुख्य नहर); DPR स्वीकृत ₹829.96 करोड़; मिट्टी बांध — 1,598 मिलियन घन फीट भंडारण क्षमता, अधिकतम ऊँचाई 23.30 मीटर, 3 किमी लंबाई व 14 गेट वाला 152 मीटर लंबा चूट स्पिलवे |
| योजना | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना — PMKSY (2015-16) | कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा क्रियान्वित; केंद्र:राज्य 60:40 — "हर खेत को पानी" व "प्रति बूंद अधिक फसल"; तारबंदी-डिग्गी-फ़ार्म पॉन्ड-जलहौज-ग्रीनहाउस-पॉलीहाउस-शेडनेट-ड्रिप/स्प्रिंकलर पर अनुदान; भूमिहीन कृषि श्रमिकों को ₹5,000 तक के कृषि यंत्र-उपकरण अनुदान |
| PMKSY 2.0 — वाटरशेड विकास घटक — WDC (2021-22) | भूमि संसाधन विभाग, भारत सरकार — रिज क्षेत्र उपचार, जल निकासी रेखा उपचार, मृदा-आर्द्रता संरक्षण, जल संचयन संरचनाएँ (चेक डैम, नाला बांध, खेत तालाब, अमृत सरोवर), प्रभावी वर्षा प्रबंधन, नर्सरी-वनारोपण-बागवानी; 2025-26 तक 159 परियोजनाएँ (39 ज़िलों में, 8.05 लाख हेक्टेयर उपचार) ₹1,990.37 करोड़ लागत से स्वीकृत — कुल प्राप्त निधि ₹1,387.38 करोड़ (राज्यांश ₹554.95 करोड़), व्यय ₹1,216.27 करोड़; 49,692 में से 47,858 कार्य पूर्ण (दिसंबर 2025 तक) |
| RRR — मरम्मत-नवीनीकरण-पुनर्स्थापन परियोजना (जनवरी 2005) | छोटी जल संरचनाओं की मरम्मत; 2017-18 से PMKSY में शामिल; केंद्र:राज्य 60:40; जारी 37 परियोजनाएँ (14 ज़िले) — स्वीकृत लागत ₹124.71 करोड़ (केंद्रांश ₹74.83+राज्यांश ₹49.88 करोड़), 1.94 लाख किसान लाभान्वित (92,269 SC/ST), 7,484.17 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र पुनर्जवित; 84 नए प्रस्ताव (कोटा-बूंदी-टोंक ज़िले) — लागत ₹142.92 करोड़ (केंद्रांश ₹85.75+राज्यांश ₹57.17 करोड़), 2.16 लाख किसान लाभान्वित (88,629 SC/ST), 4,404 हेक्टेयर पुनर्जवित |
| योजना | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) घटक | ड्रिप-स्प्रिंकलर तकनीक — जल बचत व फ़सल गुणवत्ता वृद्धि; सामान्य किसान 70% (केंद्र 27% + राज्य 18% + अतिरिक्त राज्यांश 25%) व SC/ST-महिला-लघु/सीमांत किसान 75% (केंद्र 27-33% + राज्य 18-22% + अतिरिक्त 20-30%) सब्सिडी; 2025-26 में ₹905.18 करोड़ प्रावधान (केंद्रांश ₹543.11+राज्यांश ₹362.07 करोड़) व अतिरिक्त ₹359.29 करोड़ राज्य निधि (MIF सहित); दिसंबर तक ड्रिप में 62,916 हेक्टेयर व मिनी-स्प्रिंकलर/स्प्रिंकलर में 63,243 हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित |
| कमांड क्षेत्र / परियोजना | कार्य-प्रगति (2025-26) |
|---|---|
| गंग नहर परियोजना चरण-II (99 प्राथमिकता CADWM परियोजनाओं में शामिल) | 14,500 हेक्टेयर लक्ष्य में से 6,907 हेक्टेयर में पक्के वॉटर-कोर्स निर्मित; ₹15.70 करोड़ व्यय; कुल परियोजना व्यय ₹341.53 करोड़ (1,17,975 हेक्टेयर लक्ष्य) |
| अमरसिंह सब-ब्रांच, सिद्धमुख-नोहर, भाखड़ा नहर, गंग नहर व IGNP चरण-I (खाजूवाला-सूरतगढ़) | श्रीगंगानगर-बीकानेर-हनुमानगढ़ ज़िलों में 57,200 हेक्टेयर लक्ष्य में से 48,712 हेक्टेयर में वॉटर-कोर्स निर्माण/नवीनीकरण; ₹175.91 करोड़ व्यय |
| चंबल कमांड क्षेत्र (कोटा-बूंदी-बारां) | 8,596 हेक्टेयर वॉटर-कोर्स व 284.57 किमी नहर लाइनिंग लक्ष्य में से 6,296 हेक्टेयर व 169.95 किमी पूर्ण; ₹289.06 करोड़ व्यय |
परिभाषा: Command Area Development and Water Management (CADWM) PMKSY की वह उप-योजना है जिसमें बड़ी नहर से खेत तक पानी ले जाने वाले छोटे रास्तों (वॉटर-कोर्स) को पक्का (लाइनिंग) बनाया जाता है ताकि रास्ते में पानी रिसकर बर्बाद न हो।
💡 आसान भाषा में: सोचिए — मुख्य नहर तो पक्की बनी है, पर खेत तक जाने वाली छोटी कच्ची नालियों में आधा पानी ज़मीन में सोख लिया जाता है। CADWM के तहत इन्हीं छोटी नालियों को पक्का करके पानी की बर्बादी रोकी जाती है।
🏠 उदाहरण: गंग नहर परियोजना चरण-II में CADWM के तहत 6,907 हेक्टेयर क्षेत्र में पक्के जलमार्ग (वॉटर-कोर्स) बनाए गए हैं।
कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन (CADWM) — PMKSY
| 3. मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA) 2.0 फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना | |
|---|---|
| शुभारंभ | फ़रवरी 2024 से — अधिकतम वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण व जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग हेतु |
| कार्य प्रकार | नए एनीकट, खेत तालाब, मिनी परकोलेशन टैंक (MPT), मिनी स्टोरेज टैंक (MST), सब-सरफ़ेस बैरियर (SSB), लघु सिंचाई टैंक (MIT) निर्माण व पुरानी संरचनाओं की मरम्मत |
| लक्ष्य (4 वर्ष) | कुल 20,000 गाँवों में जल संचयन संरचनाएँ — चरण-1: 1,14,039 लक्ष्य में से 1,10,059 कार्य पूर्ण (₹2,289.49 करोड़ व्यय, दिसंबर 2025 तक); चरण-2: 99,930 लक्ष्य में से 26,059 स्वीकृत (₹612.01 करोड़), 6,218 कार्य प्रारंभ (₹184.58 करोड़), 2,880 पूर्ण (₹54.90 करोड़) |
| चरण (गाँव चयन) | गाँवों की संख्या | पूर्णता अवधि |
|---|---|---|
| प्रथम चरण | 5,135 | 31 मार्च 2026 |
| द्वितीय चरण | 4,746 | 30 जून 2026 |
| तृतीय चरण | 5,000 | 30 जून 2027 |
| चतुर्थ चरण | 5,119 | 30 जून 2028 |
| जन-भागीदारी अभियान | विवरण |
|---|---|
| कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान | 15 जनवरी 2025 शुभारंभ (माननीय मुख्यमंत्री द्वारा — जल शक्ति मंत्रालय की 6 सितंबर 2024 वाली "जल संचय जन भागीदारी अभियान" की अगली कड़ी में) — भामाशाह-प्रवासी राजस्थानी-क्राउड फंडिंग-CSR निधि से भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ; अगले 4 वर्षा में 41 ज़िलों की ~11,195 ग्राम पंचायतों में कुल 45,000 संरचनाएँ बनाने का लक्ष्य; 2025-26 में हर ज़िले को CSR निधि से न्यूनतम 125 संरचना लक्ष्य (राज्य कुल लक्ष्य 5,000, उपलब्धि 16,006 यानी 300% से अधिक); ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा e-पंचायत मोबाइल ऐप से 43,126 निर्माण स्थल चिह्नित; उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु राष्ट्रीय स्तर पर भामाशाह सम्मानित |
परिभाषा: भूजल पुनर्भरण वह प्रक्रिया है जिसमें बारिश का पानी सीधे नदी-नालों में बहकर बर्बाद होने के बजाय ज़मीन के अंदर रिसाकर भूजल स्तर (Water Table) को फिर से ऊँचा उठाता है।
💡 आसान भाषा में: ज़मीन के नीचे एक बड़ा "प्राकृतिक टैंक" (जलभृत/Aquifer) होता है — जैसे बैंक खाते से बार-बार पैसा निकालने पर उसे फिर जमा करना ज़रूरी है, वैसे ही भूजल का लगातार दोहन होने पर एनीकट-तालाब-रिचार्ज शाफ़्ट बनाकर उसमें पानी वापस "जमा" कराना ज़रूरी है।
🏠 उदाहरण: MJSA 2.0 के तहत बनने वाले खेत तालाब, मिनी परकोलेशन टैंक व सब-सरफ़ेस बैरियर सभी भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ हैं।
| जन-भागीदारी अभियान | विवरण |
|---|---|
| वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान | 5-20 जून 2025 (गंगा दशहरा व विश्व पर्यावरण दिवस अवसर पर), जयपुर के रामगढ़ बांध से जैसलमेर की गडीसर झील तक — कलश यात्रा, जल सेवा, पशु-पक्षी जल प्रबंध, प्रभात फेरी, रात्रि चौपाल व ग्राम सभाओं सहित जन-आंदोलन; 11,000 ग्राम पंचायतों में ~3.70 लाख कार्यक्रम, 2.53 करोड़ नागरिक भागीदार (1.32 करोड़ महिलाएँ सहित); 42,200 जल स्रोत व 73,900 कार्यालय-अस्पताल-विद्यालय स्वच्छ किए गए; 18,900 पूर्ण कार्यों का निरीक्षण/लोकार्पण व 5,600 नए कार्य आरंभ; CSR-दानदाताओं सहयोग से 4,560 पुनर्भरण शाफ़्ट निर्मित; ~1.02 लाख स्थानों पर श्रमदान |
| किसान साथी ऐप (14 अगस्त 2024) | जल संसाधन विभाग द्वारा लॉन्च — पार्वती परियोजना कमांड क्षेत्र के ~70,000 किसानों हेतु डिजिटल संचार मंच; जल उपलब्धता, बांध स्थिति, नहर संचालन, वास्तविक-समय जल-निर्गम, मंडी भाव व मौसम पूर्वानुमान की पारदर्श जानकारी; फ़सल विवरण डिजिटल प्रस्तुति व दो-तरफ़ा शिकायत निवारण; जियो-फ़ेंसिंग सुरक्षा |
| बारांबंदी मोबाइल ऐप | जल संसाधन विभाग व NIC श्रीगंगानगर विकसित — किसान अपने मोबाइल पर भूमि, सिंचाई बारी व जल-निर्गम कार्यक्रम की स्लिप सीधे देख सकते हैं |
| परियोजना (वित्तपोषण) | उद्देश्य / प्रगति |
|---|---|
| राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना — RWSLIP (JICA) | 1 अप्रैल 2017-31 मार्च 2028 — 30 ज़िलों में 137 परियोजनाओं (चरण-1: 65, चरण-2: 36, चरण-3: 36) का पुनर्वास; 5.13 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र लाभ; लागत ₹2,294.30 करोड़ (JICA अंश ₹1,882.70 करोड़ + राज्यांश ₹411.60 करोड़), 2 किश्तों में वित्तपोषित; लखपति दीदी-उद्यानिकी घटक (चरण II-III) — 1,000 गाँवों की 10,000 महिला किसानों की आजीविका सुधार हेतु महिला कृषक हित समूह गठन |
| बांध पुनर्वास व सुधार परियोजना — DRIP चरण-II व III (विश्व बैंक-AIIB, जल शक्ति मंत्रालय) | कुल 10 वर्ष — चरण-II: अप्रैल 2021-मार्च 2027; चरण-III: अप्रैल 2025-मार्च 2031 (2 वर्ष ओवरलैप); राज्य के 212 में से 189 बड़े बांध चयनित; चरण-II में 15 बांधों का पुनर्वास ₹516.55 करोड़ स्वीकृत, 11 बांधों में ₹184.06 करोड़ का कार्य प्रारंभ, 7 बांध पूर्ण व 4 प्रक्रियाधीन; उद्देश्य — बांध सुरक्षा, जल भंडारण क्षमता व बाढ़-आँकड़ा प्रणाली में सुधार |
परिभाषा: Community Resource Person (CRP) वह प्रशिक्षित स्थानीय व्यक्ति है जो अपनी ग्राम पंचायत में भूजल स्तर, वर्षा व जल-उपयोग का हिसाब रखकर ग्रामीणों को जल-बचत के तौर-तरीके सिखाता है।
💡 आसान भाषा में: हर गाँव में एक "जल-प्रहरी" जैसी भूमिका — जो पानी की बर्बादी पर नज़र रखता है और लोगों को सही उपयोग सिखाता है, ठीक वैसे ही जैसे आशा-कार्यकर्ता स्वास्थ्य जागरूकता फैलाती हैं।
🏠 उदाहरण: अटल भू-जल योजना में राजस्थान की प्रत्येक ग्राम पंचायत से 1 व्यक्ति — कुल 1,132 CRP — प्रशिक्षित किए गए।
| परियोजना (वित्तपोषण) | उद्देश्य / प्रगति |
|---|---|
| मरुस्थल क्षेत्र जल पुनर्गठन परियोजना — RWSRPD / IGNP (NDB, राज. 30%:ऋण 70%) | 8 वर्ष 6 माह, 2 चरण — कुल लागत ₹3,291.63 करोड़; चरण-1 (100 मिलियन डॉलर ऋण, 13 फ़रवरी 2018) पूर्ण; चरण-2 (₹2,254.38 करोड़ ऋण, 29 जुलाई 2022) में ₹1,787.51 करोड़ व्यय; इंदिरा गांधी मुख्य नहर व फीडर के 179.53 किमी में से 177.47 किमी जीर्णोद्धार + 2,498.69 किमी वितरण तंत्र नवीनीकरण पूर्ण; 33,312 हेक्टेयर जलभराव क्षेत्र विकास; श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़-चूरू-नागौर-बीकानेर-झुंझुनू-सीकर-जोधपुर-फलौदी-जै सलमेर-बालोतरा-बाड़मेर लाभान्वित; कुल 286 में से 276 कार्य पूर्ण |
| अटल भू-जल योजना (विश्व बैंक, केंद्र-विश्व बैंक 50:50) | अप्रैल 2020-मार्च 2025 — 7 राज्यों (हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश) में सामुदायिक भागीदारी से भूजल स्तर सुधार; राजस्थान के 17 ज़िलों की 38 ब्लॉक की 1,132 ग्राम पंचायतें आच्छादित; कुल ₹2,824.76 करोड़ व्यय (NDB से ₹1,818.76 करोड़ दावा प्राप्त); पिछले 3 वर्षा में 137 सामान्य ग्राम पंचायतों में भूजल गिरावट रुकी/सुधरी; 38 में से 7 ब्लॉक के 50% से अधिक कुओं में सुधार दर्ज |
| राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना — NHP (विश्व बैंक) | 2016 से सितंबर 2025 — सतही-भूजल निगरानी स्टेशन स्थापना व जल प्रबंधन क्षमता-वर्धन; SCADA प्रणाली 7 बांधों — बीसलपुर, राणा प्रताप सागर, माही, गुड़ा, जवाई, छापी, जवाहर सागर — व 2 नहरों (गंग-भाखड़ा, नर्मदा) पर; जयपुर-जोधपुर-उदयपुर में निगरानी केंद्र |
| NABARD वित्तपोषित परियोजनाएँ (RIDF, जल संसाधन विभाग) | गाँवों में भूजल स्तर सुधार हेतु मध्यम-लघु-सूक्ष्म जल संचयन संरचनाओं का निर्माण; वर्तमान में RIDF-27 से 31 तक की किश्तों में 94 परियोजनाएँ ₹2,018.11 करोड़ लागत से स्वीकृत (NABARD ऋण ₹1,575.57 करोड़), 53 पूर्ण व 39 प्रगति पर; 2025-26 (दिसंबर तक) ₹157.89 करोड़ के दावे प्रस्तुत, ₹137.89 करोड़ प्रतिपूतं प्राप्त |
परिभाषा: Rural Infrastructure Development Fund (RIDF) नाबार्ड (NABARD) द्वारा संचालित एक ऋण-निधि है जिससे राज्य सरकारें ग्रामीण सड़क, सिंचाई व जल-संचयन जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए सस्ता ऋण लेती हैं।
💡 आसान भाषा में: यह एक तरह का "विशेष बैंक ऋण" है जो सिर्फ गाँव-देहात की बुनियादी सुविधाओं (सड़क, नहर, जल संरचना) के लिए ही मिलता है — हर वर्ष की नई किश्त को क्रम-संख्या (जैसे RIDF-27, RIDF-31) से पहचाना जाता है।
🏠 उदाहरण: IGNP की बीसलपुर शाखा व चरणवाला शाखा के नवीनीकरण कार्य क्रमशः RIDF-XXVI व RIDF-XXVII किश्तों से वित्तपोषित हैं।
| 4. अमृत मिशन 2.0 (AMRUT 2.0) — शहरी पेयजल फ़्लैगशिप योजना | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| शुभारंभ / लक्ष्य | 1 अक्टूबर 2021 — सभी नगरीय निकायों में जल आपूर्ति योजनाओं से "हर घर नल" के माध्यम से 2025-26 तक शत-प्रतिशत घरों में पेयजल पहुँचाने का लक्ष्य |
| वित्तपोषण अनुपात | जनसंख्या 1 लाख से कम वाले शहरों में केंद्रांश 50%; 1-10 लाख वाले शहरों में 33.33%; 10 लाख से अधिक वाले शहरों में 25% — शेष राज्यांश (जिसका 10% संबंधित नगर निकाय वहन करता है) |
| स्वीकृति स्थिति | 183 नगरीय निकायों में जल आपूर्ति हेतु ₹5,123.06 करोड़ के कार्य भारत सरकार द्वारा स्वीकृत; 178 नगरीय निकायों में पेयजल सुधार हेतु ₹5,099.56 करोड़ के कार्यादेश जारी, जिनमें से 104 निकायों में निर्माण कार्यादेश जारी हो चुके हैं |
| 5. जल जीवन मिशन (JJM) — ग्रामीण घरेलू नल कनेक्शन फ़्लैगशिप योजना | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम | |
|---|---|
| शुभारंभ / लक्ष्य | 15 अगस्त 2019 — वर्ष 2028 तक हर ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) से 55 लीटर/व्यक्ति/दिन जल आपूर्ति; केंद्र:राज्य 50:50 |
| क्रियान्वयन ढाँचा | राज्य जल-स्वच्छता समिति (SWSM) → ज़िला (DWSM) → ग्राम (VWSC) — 73वें संविधान संशोधन अनुसार 11वीं अनुसूची में पेयजल विषय होने से पंचायतों की केंद्रीय भूमिका |
| प्रगति (दिसंबर 2025 तक) | 62.40 लाख घरेलू नल कनेक्शन जारी (2025-26 में 1.94 लाख नए, ₹2,750.94 करोड़ व्यय, कुल उपलब्ध निधि ₹6,007.12 करोड़); 11,159 एकल-ग्राम योजनाएँ + 139 वृहद पेयजल परियोजनाएँ (₹93,427 करोड़) स्वीकृत — ~92 लाख परिवार लाभ हेतु लक्षित, 50.46 लाख परिवार लाभान्वित (संचयी व्यय ₹29,039 करोड़) |
परिभाषा: Functional Household Tap Connection (FHTC) वह घरेलू नल कनेक्शन है जो नियमित रूप से न्यूनतम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराता है।
💡 आसान भाषा में: सिर्फ घर में नल लग जाना काफी नहीं — नल से रोज़ पर्याप्त मात्रा में साफ़ पानी आना ज़रूरी है, तभी उसे "कार्यात्मक" (functional) कनेक्शन माना जाता है।
🏠 उदाहरण: जल जीवन मिशन का लक्ष्य वर्ष 2028 तक राजस्थान के हर ग्रामीण घर में FHTC पहुँचाना है — अभी तक 62.40 लाख कनेक्शन जारी हो चुके हैं।
| विवरण | जल संसाधन विभाग | जल जीवन मिशन विस्तार |
|---|---|---|
| आच्छादन (Coverage) | 99 कस्बे, 14,842 गाँव, 12,071 ढाणी लाभान्वित | — |
| पूर्ण परियोजनाएँ | 105 परियोजनाएँ (₹27,162.93 करोड़ व्यय) | 42 परियोजनाएँ पूर्ण |
| प्रगतिरत परियोजनाएँ | 12 परियोजनाएँ-13 कस्बे (₹6,273.25 करोड़) + 3 परियोजनाएँ (₹1,176.10 करोड़) | 119 परियोजनाएँ प्रगति पर |
| प्रमुख जल स्रोत | लाभान्वित गाँव व कस्बे |
|---|---|
| इंदिरा गांधी नहर परियोजना | 5,719 गाँव, 39 कस्बे |
| चंबल नदी | 4,899 गाँव, 29 कस्बे |
| नर्मदा नदी | 902 गाँव, 3 कस्बे |
| बीसलपुर बांध | 3,109 गाँव, 22 कस्बे |
| जवाई बांध | 811 गाँव, 10 कस्बे |
परिभाषा: ₹39,362.64 करोड़ निवेश — 110 कस्बे, 16,680 गाँव, 12,716 ढाणी लक्षित
18 नवंबर 2025, विज्ञान भवन नई दिल्ली — जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी हेतु "जल संरक्षण एवं जन भागीदारी पुरस्कार" में राज्य/केंद्रशासित प्रदेश श्रेणी में तृतीय पुरस्कार; ज़िला श्रेणी (पश्चिमी क्षेत्र) में भीलवाड़ा प्रथम व बाड़मेर द्वितीय स्थान पर।
राजस्थान भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 10.41% पर स्थित पर जल संसाधनों का मात्र 1.16% रखता है — यह असंतुलन याद रखें। संशोधित PKC-ERCP लिंक परियोजना व IGNP दोनों की अलग-अलग प्रगति स्थिति (DPR स्वीकृति बनाम भूमि आवंटन) न मिलाएँ। PMKSY (2015-16), PMKSY 2.0 (वाटरशेड, 2021-22) व RRR योजना (2005) के केंद्र:राज्य अनुपात व शुरुआत वर्ष स्पष्ट रखें — सभी 60:40 हैं। MJSA 2.0 (राज्य योजना, फ़रवरी 2024) व जल जीवन मिशन (केंद्रीय योजना, अगस्त 2019, केंद्र:राज्य 50:50) के वित्तपोषण अनुपात में अंतर याद रखें। JJM लक्ष्य वर्ष 2028 — 55 लीटर/व्यक्ति/दिन FHTC मानक याद रखें। 5 प्रमुख जल स्रोतों (IGNP, चंबल, नर्मदा, बीसलपुर, जवाई) से लाभान्वित गाँव-कस्बों की संख्या क्रम में याद रखें।
वृहद पेयजल परियोजनाओं की प्रगति (दिसंबर 2025 तक)
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