📊 अध्याय 7/14 — राजस्थान अर्थव्यवस्था

आधारभूत अवसंरचना

Basic Infrastructure | सड़क नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्ग, ऊर्जा, सौर/पवन ऊर्जा, परिवहन व लॉजिस्टिक्स
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📋 इस अध्याय में क्या-क्या पढ़ेंगे
  1. 01. ऊर्जा क्षेत्र — उत्पादन एवं संचरण
  2. 02. ऊर्जा वितरण एवं ग्रामीण विद्युतीकरण
  3. 03. सौर-ऊर्जा उपभोक्ता योजनाएँ एवं नवीकरणीय नीति
  4. 04. सड़क एवं परिवहन (PWD, RSRTC, सड़क सुरक्षा)
  5. 05. रेल, नागरिक उड्डयन एवं डाक-दूरसंचार
  6. 06. बाह्य सहायतित परियोजनाएँ (EAP)
  7. 07. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) ढाँचा
  8. 08. हरित अवसंरचना
कुल अधिष्ठापित क्षमता
31,556.43 MW
दिसंबर 2025 तक (मार्च 2025: 27,283.83 MW)
पवन+सौर हिस्सेदारी
45.36%
कुल स्थापित क्षमता में
उत्पादन CAGR
5.55%
2020-21 से 2024-25
स्रोत (दिसंबर 2025)क्षमता (MW)हिस्सा
तापीय (राज्य+केंद्रीय हिस्सा)10,027.47सर्वाधिक स्थिर स्रोत
सौर ऊर्जा (KUSUM सहित)9,898.00राष्ट्रीय अग्रणी
पवन ऊर्जा4,416.12जैसलमेर-बाड़मेर प्रमुख
🌟 शुरुआत एक कहानी से

किसी राज्य की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ उसकी अवसंरचना (Infrastructure) होती है — ऊर्जा, सड़क, रेल, वायु सेवा व दूरसंचार जैसी बुनियादी सेवाएँ जितनी सुदृढ़ होंगी, राज्य की उत्पादन क्षमता व बाज़ार पहुँच उतनी ही व्यापक होगी।

राजस्थान आज सौर-पवन ऊर्जा में राष्ट्रीय अग्रणी है, सड़क घनत्व व रेल नेटवर्क में सतत विस्तार कर रहा है, तथा बाह्य सहायतित परियोजनाओं व सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) से अवसंरचना निवेश को गति दे रहा है।

🌟 शुरुआत एक कहानी से

विज़न — विकसित राजस्थान@2047 वर्ष 2047 तक राजस्थान सतत ऊर्जा, नवाचार और सुदृढ़ अवसंरचना विकास में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा।

राज्य सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करेगा — हरित गतिशीलता (ग्रीन मोबिलिटी) व वैश्विक संपर्क को बढ़ावा देते हुए आधुनिक, समावेशी व सतत राज्य की दिशा में अग्रसर होगा।

1ऊर्जा क्षेत्र — उत्पादन एवं संचरण

स्रोत (दिसंबर 2025)क्षमता (MW)हिस्सा
जलविद्युत + परमाणु + बायोमास2,672.34—
श्रेणीक्षमता (MW)मुख्य घटक
(1) राज्य क्षेत्र/साझा परियोजनाएँ9,447.79तापीय 7,830 + जलविद्युत 1,017.29 + गैस 600.50
(2) केंद्रीय क्षेत्र से राज्य आवंटन3,856.07तापीय 2,197.47 + जलविद्युत 851.86 + परमाणु 806.74
(3) RREC, RSMML व निजी क्षेत्र18,252.57सौर (कुसुम सहित) 9,898 + पवन 4,416.12 + तापीय/जल 3,742 + बायोमास 196.45
कुल योग (1+2+3)31,556.43दिसंबर 2025 तक
EHV संचरण नेटवर्क
45,933 सर्किट किमी
2016-17 से 27.31% वृद्धि (PPP सहित)
कुल EHV सब-स्टेशन
678
कुल क्षमता 1,09,071 MVA
ध्यान दें — गैस आवंटन शून्य क्यों?

केंद्रीय क्षेत्र से गैस आवंटन (2021-22 में 221 MW) को विद्युत मंत्रालय की मार्च 2021 गाइडलाइन अनुसार उच्च क्रय लागत के कारण NTPC को वापस (सरेंडर) कर दिया गया — इसलिए तालिका में गैस का केंद्रीय हिस्सा अब शून्य दिखता है।

📘 CAGR — चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (Compound Annual Growth Rate)

परिभाषा: किसी मात्रा (जैसे बिजली उत्पादन) की शुरुआती वर्ष से अंतिम वर्ष तक की औसत वार्षिक वृद्धि दर, यह मानते हुए कि हर वर्ष की वृद्धि पिछले वर्ष के आधार पर चक्रवृद्धि (compound) होती है।

💡 आसान भाषा में: सीधे शब्दों में — यह एक "औसत वृद्धि-रफ्तार" है। राजस्थान का ऊर्जा उत्पादन 2020-21 से 2024-25 तक 5.55% CAGR से बढ़ा — यानी हर साल औसतन लगभग साढ़े पाँच प्रतिशत की दर से उत्पादन बढ़ता रहा।

🏠 उदाहरण: जैसे बैंक में जमा राशि पर हर साल ब्याज पिछले साल के जमा+ब्याज दोनों पर मिलता है (चक्रवृद्धि ब्याज) — ठीक उसी तज़ पर राजस्थान का बिजली उत्पादन साल-दर-साल बढ़ता गया।

वोल्टेज स्तरमार्च 2025 (सर्किट किमी)दिसंबर 2025 (सर्किट किमी)
765 KV लाइनें425.50425.50
400 KV लाइनें7,914.418,416.71
220 KV लाइनें16,367.4816,428.96
132 KV लाइनें20,138.7320,662.15
कुल लाइनें44,846.1245,933.32
GSS श्रेणीसंख्या (मार्च→दिसंबर 2025)क्षमता MVA (मार्च→दिसंबर 2025)
765 KV2 → 29,000 → 9,000
400 KV19 → 2018,570 → 20,255
220 KV130 → 13335,635 → 36,895
132 KV506 → 52339,747 → 42,921
कुल EHV सब-स्टेशन657 → 6781,02,952 → 1,09,071
PPP पहलविवरण
निजी क्षेत्र को सब-स्टेशन रखरखाव245 ग्रिड सब-स्टेशन (132 KV) — ~₹45 लाख/सब-स्टेशन वार्षिक बचत
PPP मॉडल ग्रिड सब-स्टेशन (GSS)400 KV — अलवर व डीडवाना; 220 KV 1 + 132 KV 15 GSS भी विकसित
VGF-आधारित संचरण लाइनें400 KV बीकानेर-सीकर (PPP-6) व सूरतगढ़-बीकानेर (PPP-7) — चालू
सांगोद 400 KV ग्रिड सब-स्टेशनसंबंधित 400 KV लाइन सहित निर्माण 29 अप्रैल 2025 को पूर्ण कर चालू किया गया
📘 EHV — अति उच्च वोल्टेज पारेषण (Extra High Voltage Transmission)

परिभाषा: 132 KV या उससे ऊपर के वोल्टेज स्तर (132/220/400/765 KV) पर बिजली को लंबी दूरी तक भेजने वाला नेटवर्क, जो उत्पादन केंद्र से बिजली को वितरण तंत्र (DISCOM) तक पहुँचाता है।

💡 आसान भाषा में: बिजली पहले बहुत ऊँचे वोल्टेज (EHV) पर लंबी दूरी तय करती है ताकि रास्ते में कम ऊर्जा बर्बाद (हानि) हो, फिर पास के सब-स्टेशन पर वोल्टेज घटाकर घरों-खेतों तक भेजी जाती है।

🏠 उदाहरण: जैसे शहरों के बीच तेज़-रफ़्तार एक्सप्रेसवे होता है और शहर के अंदर सामान्य सड़कें — वैसे ही EHV लाइनें बिजली का "एक्सप्रेसवे" हैं, जबकि 11/33 KV की लाइनें गाँव-मोहल्ले की "गलियाँ" हैं।

वोल्टेज-वार पारेषण लाइनें व सब-स्टेशन विस्तार

ऊर्जा उपलब्धता (2024-25)
11,770 करोड़ यूनिट
2021-22 से 29.61% वृद्धि
कुल उपभोक्ता (नवंबर 2025)
202.78 लाख
मार्च 2025 से 2.44% वृद्धि
ग्रामीण विद्युतीकरण
43,965 गाँव
दिसंबर 2025 तक विद्युतीकृत + 1.14 लाख ढाणी + 111.15 लाख ग्रामीण घर
श्रेणीउपभोक्ता संख्या
घरेलू1,58,44,700
गैर-घरेलू18,34,251
औद्योगिक3,37,671
कृषि21,08,710
PHED (जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी)93,374
स्ट्रीट लाइट + मिश्रित भार + अन्य59,925
कुल उपभोक्ता2,02,78,631
1. PM-KUSUM योजना (राजस्थान) फ़्लैगशिप योजना | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम
घटक-A (विकेंद्रीकृत सौर संयंत्र)DISCOM सब-स्टेशन के 5 किमी दायरे में किसानों की बंजर भूमि पर 0.5-2MW संयंत्र — कुल स्वीकृत क्षमता 5,250 MW (चरण I-III); दिसंबर 2025 तक 371 संयंत्र, ~482 MW स्थापित
घटक-B (व्यक्तिगत पम्प सोलराइज़ेशन)7.5 HP तक क्षमता वाले कृषि पम्प सेटों को व्यक्तिगत सौर पम्प से जोड़ने हेतु 12,500 पम्प सेट सोलराइज़ेशन का लक्ष्य
📘 PM-KUSUM योजना — तीन घटकों को न उलझाएँ

परिभाषा: प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान — किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की केंद्रीय योजना, जिसके 3 अलग-अलग घटक (A, B, C) हैं।

💡 आसान भाषा में: घटक-A = बड़े सोलर प्लांट किसान की बंजर ज़मीन पर बिजली बेचने हेतु; घटक-B = व्यक्तिगत सोलर पम्प (ऑफ-ग्रिड); घटक-C = पहले से लगे बिजली के पम्प को सोलर से जोड़ना (फीडर स्तर पर) — तीनों का मकसद अलग है, परीक्षा में मिलाएँ नहीं।

🏠 उदाहरण: जैसे एक ही घर में तीन अलग काम हों — बेचने के लिए सोलर पैनल, अपने पम्प के लिए सीधा सोलर कनेक्शन, और पुराने पम्प को सोलर सपोर्ट देना — तीनों अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं।

वितरण एवं ग्रामीण विद्युतीकरण

2सौर-ऊर्जा उपभोक्ता योजनाएँ एवं नवीकरणीय नीति

घटक-C (फीडर लेवल सोलराइज़ेशन)लक्ष्य 4,00,000 पम्प सेट सोलराइज़ेशन — दिसंबर 2025 तक 838 संयंत्र (2,162 MW) सफलतापूर्वक स्थापित; केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) 3 किश्तों में जारी
क्रियान्वयनराजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RRECL) → जुलाई 2024 से डिस्कॉम को हस्तांतरित (घटक-A)
योजनामुख्य लाभ
PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना (13 फ़रवरी 2024)1 करोड़ घरों पर सौर संयंत्र — 300 यूनिट/माह मुफ़्त बिजली; अधिकतम अनुदान ₹78,000 (3KW+); राजस्थान लक्ष्य 5 लाख घर — दिसंबर 2025 तक 493 MW, 1.22 लाख उपभोक्ता लाभान्वित; शीर्ष 5 ज़िले: जयपुर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, सीकर, हनुमानगढ़
150 यूनिट/माह निःशुल्क बिजली योजना (राज्य)पोर्टल शुभारंभ 13 अक्टूबर 2025 — PM सूर्य घर से अतिरिक्त ₹17,000 राज्य सब्सिडी; हर ज़िले में एक मॉडल सौर गाँव घोषित
मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना (जून 2023)2,000 यूनिट/माह तक कृषि उपभोक्ता को मुफ़्त बिजली; अधिक खपत पर ₹1,000/माह सब्सिडी — 2025-26 तक ~10 लाख कृषि उपभोक्ताओं को शून्य बिल
घरेलू 100 यूनिट मुफ़्त बिजली योजना (जून 2023)100 यूनिट तक मुफ़्त; 200 यूनिट तक प्रथम 100 यूनिट के शुल्क में छूट — 2025-26 तक ~64 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को शून्य बिल
2. राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2024 फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
लक्ष्य2029-30 तक 125 GW नवीकरणीय क्षमता (115 GW उत्पादन + 10 GW भंडारण)
विभाजनसौर 90,000 MW; पवन-हाइब्रिड 25,000 MW; हाइड्रो-पम्प स्टोरेज-बैटरी (BESS) 10,000 MW
विकास शुल्क छूटअक्टूबर 2023 — नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों हेतु विकास शुल्क में 50% कमी
KUSUM घटक-C — केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) की 3 किश्तें कैसे मिलती हैं?

① कुल कार्य के 30% पूर्ण होने पर — 30% राशि जारी। ② 75% कार्य पूर्ण होने पर — अगली 30% राशि जारी। ③ परियोजना सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर शेष 40% — इसमें से 25% संयंत्र चालू होते ही डिस्कॉम के माध्यम से, तथा 15% स्थापना के दो माह बाद सफल संचालन (कम से कम एक माह में न्यूनतम CUF प्राप्त करने की शर्त सहित) पर जारी होती है।

वितरण सुधार लक्ष्य (केंद्रीय योजना, 20 जुलाई 2021)

कुल तकनीकी-वाणिज्यिक हानि (AT&C Loss) को 12.15% तक घटाना व औसत आपूर्ति लागत-राजस्व अंतर (ACS-ARR) शून्य करना — लक्ष्य अवधि 31 मार्च 2028 तक।

सौर विकिरण तीव्रता
6-7 kWh/वर्गमी/दिन
325+ धूप वाले दिन/वर्ष
अनुमानित सौर क्षमता (MNRE)
142 GW
—
कुल स्थापित सौर क्षमता
42,531 MW
रूफटॉप व ऑफ-ग्रिड सहित, दिसंबर 2025
सौर पार्क (कुल क्षमता)विकासकर्ता / स्थिति
भड़ला सोलर पार्क — 2,245 MW (जोधपुर)चरण-I 65MW (RSDCL स्वयं) + II 680MW (RSDCL) + III 1,000MW (SURAJ — राज्य+IL&FS संयुक्त उद्यम) + IV 500MW (अडानी रिन्यूएबल एनर्ज पार्क राजस्थान)
नोख सोलर पार्क — 925 MWRSDCL द्वारा विकसित, पूर्ण चालू
फलौदी-पोकरण सोलर पार्क — 750 MWएस्सेल सौर्य ऊर्जा कंपनी (राज्य+एस्सेल इन्फ्रा संयुक्त उद्यम) — 450 MW चालू, शेष विकासाधीन
फतेहगढ़ चरण-IB — 1,500 MWअडानी रिन्यूएबल एनर्ज पार्क राजस्थान — 1,496 MW चालू
पुगल सोलर पार्क — 2,450 MWRSDCL — 3 चरणों में, 1,600/6,400 MWh बैटरी स्टोरेज (BESS) सहित विकासाधीन
पवन ऊर्जा क्षमता (NIWE आकलन,
150मी ऊँचाई)
284 GW —
स्थापित पवन क्षमता
5,229 MW
दिसंबर 2025 तक
हाइब्रिड क्षमता
2,140 MW
इसमें 885.60 MW पवन क्षमता शामिल
प्रमुख/ऐतिहासिक पवन ऊर्जा संयंत्रविशेषता
अमरसागर (जैसलमेर)राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र
📘 RSDCL — राजस्थान सोलर पार्क डवलपमेंट कंपनी (विशेष प्रयोजन कंपनी/SPV)

परिभाषा: RRECL की सहायक कंपनी के रूप में स्थापित एक "विशेष प्रयोजन कंपनी (Special Purpose Vehicle)", जो सिर्फ सौर/नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों हेतु साझा अवसंरचना (सड़क, ग्रिड-संपर्क आदि) विकसित करती है।

💡 आसान भाषा में: SPV को एक "खास काम के लिए बनी छोटी कंपनी" समझें — जैसे किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए अलग टीम बनाई जाए ताकि पैसा व ज़िम्मेदारी सिर्फ उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहे।

🏠 उदाहरण: जैसे भड़ला सोलर पार्क के लिए RSDCL बनाई गई, वैसे ही सड़कों के लिए RIDCOR/PDCOR — हर बड़े अवसंरचना क्षेत्र की अपनी अलग SPV होती है।

प्रमुख/ऐतिहासिक पवन ऊर्जा संयंत्रविशेषता
बड़ाबाग (जैसलमेर)प्रथम निजी क्षेत्र पवन संयंत्र
देवगढ़ (प्रतापगढ़)पूर्व राजस्थान का उल्लेखनीय पवन स्थल
सोढ़ा बांधन (जैसलमेर)—
फलौदी (जोधपुर)ध्यान दें — यह जोधपुर ज़िले का फलौदी क़स्बा है
आकल (जैसलमेर)—
कुल सड़क लंबाई (मार्च 2025)
3,35,306 किमी
1949 में केवल 13,553 किमी थी
सड़क घनत्व
97.97 किमी/100 वर्ग
किमी —
सड़क से जुड़े गाँव
91.68% (39,666)
कुल गाँवों में से
श्रेणीलंबाई (किमी)
राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)10,790
राज्य राजमार्ग (SH)17,316
मुख्य ज़िला सड़क (MDR)18,234
अन्य ज़िला सड़क (ODR)72,822
ग्रामीण सड़क (PMGSY)2,16,144

3सड़क एवं परिवहन

सड़क कोष योजना2025-26 बजट / लक्ष्य / दिसंबर 2025 तक उपलब्धि
राज्य सड़क निधि (SRF)₹1,650 करोड़ बजट, लक्ष्य 1,186 किमी → 1,455 किमी पूर्ण (₹1,080.03 करोड़)
NABARD योजना₹1,200 करोड़ बजट, लक्ष्य 2,109 किमी → 1,632 किमी पूर्ण (₹367.45 करोड़)
SMR — राज्य राजमार्ग व अन्य₹1,700 करोड़ बजट, लक्ष्य 610 किमी → 632 किमी पूर्ण (₹820.74 करोड़)
ग्रामीण सड़कें (मिसिंग लिंक)₹7,200 करोड़ बजट, लक्ष्य 9,675 किमी → 7,368 किमी पूर्ण (₹2,723.39 करोड़)
शहरी सड़कें₹350 करोड़ बजट, लक्ष्य 150 किमी → 168 किमी पूर्ण (₹206.75 करोड़)
केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF)100% GoI-वित्तपोषित; ₹1,500 करोड़ बजट, लक्ष्य 1,050 किमी → 735 किमी पूर्ण (₹1,251.60 करोड़)
3. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फ़्लैगशिप योजना | केंद्र प्रायोजित / राष्ट्रीय कार्यक्रम
प्रारंभ25 दिसंबर 2000 — मैदानी क्षेत्र में 500+ व पहाड़ी-मरुस्थलीय क्षेत्र में 250+ जनसंख्या वाली बस्तियाँ पात्र
चरण-III (2019-20 से 2024-25)8,662.50 किमी ग्रामीण सड़कों का उन्नयन लक्ष्य; ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 8,658.35 किमी स्वीकृत (₹5,174.06 करोड़); दिसंबर 2025 तक 8,560.07 किमी उन्नयन पूर्ण (₹4,064.08 करोड़)
PM-JANMAN (बारां ज़िला)38 असंपर्कित बस्तियों हेतु 98.69 किमी नई सड़क (₹68.87 करोड़); दिसंबर 2025 तक 21.19 किमी पूर्ण (₹10.85 करोड़)
वित्तीय प्रोत्साहन योजनाराज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर केंद्र से ₹941.91 करोड़ प्रोत्साहन राशि — इससे 10,536 किमी पुरानी PMGSY सड़कों का नवीनीकरण (₹898.15 करोड़ व्यय)
सहायक योजनाएँRCP-II (99 किमी, बारां ज़िले की 38 असंपर्कित बस्तियाँ); RCP-III (ADB, 754 किमी राज्य राजमार्ग-MDR); RCP-IV (ADB, 290 किमी); विश्व बैंक सहायतित 14 राज्य राजमार्ग विकास — मार्च 2025 तक 1 पूर्ण, 7 प्रगति पर, 6 की DPR प्रगति पर
राजस्थान सड़क विकास एवं रखरखाव कार्यक्रम

अगले 5 वर्षा में ₹60,000 करोड़+ का निवेश प्रस्तावित; 2025-26 में (नवंबर तक) कुल आवंटन ₹17,383.81 करोड़ में से ₹6,251 करोड़ व्यय हो चुका।

— 2025-26 बजट में 15 और शहरों में रिंग रोड की घोषणा (कोटपूतली में निर्माणाधीन; सीकर हेतु भूमि अधिग्रहण जारी; डीग-प्रतापगढ़-बालोतरा-करौली की DPR तैयार)। PM गति शक्ति योजना से भी संरचना निर्माण को गति।

स्थापना1 अक्टूबर 1964, सड़क परिवहन निगम अधिनियम 1950 के तहत
यात्री सुविधाएँवोल्वो-स्केनिया वातानुकूलित बसें; महिला सुरक्षा हेतु पैनिक बटन; वरिष्ठ नागरिक (60-80 वर्ष) किराया छूट 30-50%; लोकतंत्र सेनानी व प्रतियोगी परीक्षार्थियों को निःशुल्क यात्रा
2025-26 (दिसंबर तक)महिला दिवस पर 7.50 लाख व रक्षाबंधन पर 16.03 लाख महिलाओं को निःशुल्क यात्रा; 102.87 लाख परीक्षार्थियों को निःशुल्क यात्रा सुविधा
बेड़ा एवं संचालनकुल 3,423 बसें (स्वामित्व+किराये); प्रतिदिन 2,968 बसें 2,025 मार्गों पर 12.46 लाख किमी चलकर औसतन 7.27 लाख यात्री ढोती हैं
नई सुविधाएँवोल्वो-स्केनिया में रेल/हवाई यात्रा शैली की सशुल्क कैटरिंग सुविधा; सुरक्षा नियंत्रण एवं कमांड सेंटर स्थापित; धार्मिक स्थलों हेतु नई AC बस सेवाएँ; मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रोगी व एक सहयोगी को साधारण-द्रुतगामी बसों में निःशुल्क यात्रा
सड़क सुरक्षा पहलविवरण
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति (26 जुलाई 2024)10-वर्षय लक्ष्य — सड़क दुर्घटना कमी; राज्य सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ (RKCL सहयोग)
कम्प्लेंट पोर्टल (24 जुलाई 2024)RSRTC सेवाओं संबंधी यात्री शिकायत समाधान हेतु
e-चालान व फिटनेस प्रणालीटोल-कैमरा डेटा आधारित स्वचालित चालान; 47 स्वचालित परीक्षण केंद्रों को पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी
NIC-ITMS इंटरसेप्टर47 डिजिटल कार + 42 बाइक इंटरसेप्टर एकीकृत — ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, नो-पार्किंग जैसे उल्लंघन पर स्वतः कार्रवाई
वाहन पंजीकरण व राजस्व (2025-26, दिसंबर तक)13.41 लाख नए वाहन पंजीकृत; परिवहन विभाग राजस्व ₹5,417.96 करोड़ (2024-25 पूर्ण वर्ष: ₹7,573.91 करोड़)
रेल नेटवर्क (मार्च 2022)
6,046 किमी
भारत के कुल 68,043 किमी नेटवर्क का 8.89%
रेल विद्युतीकरण
~100%
उत्तर पश्चिम रेलवे ज़ोन
डाकघर (दिसंबर 2025)
11,031
ग्रामीण 10,419 + शहरी 612

4रेल, नागरिक उड्डयन एवं डाक-दूरसंचार

हवाई पट्टीज़िला
चक चैनपुरासवाई माधोपुर
नागौर हवाई पट्टीनागौर
हमीरगढ़भीलवाड़ा
आबू रोडसिरोही
लालगढ़ जाटानश्रीगंगानगर
📘 अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme)

परिभाषा: भारतीय रेल की राष्ट्रव्यापी योजना, जिसके तहत पुराने/छोटे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाता है — बेहतर प्रवेश द्वार, वेटिंग हॉल, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, पार्किंग व प्लेटफॉर्म शेड जैसी सुविधाएँ जोड़ी जाती हैं।

💡 आसान भाषा में: इसे स्टेशन का "मेकओवर" समझें — मूल ढाँचा वही रहता है, पर सुविधाएँ आधुनिक बना दी जाती हैं, साथ ही स्थानीय संस्कृति को भी दर्शाया जाता है।

🏠 उदाहरण: 22 मई 2025 को देशभर के 103 अमृत भारत स्टेशनों का उद्घाटन हुआ, जिनमें राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी, राजगढ़, मंडी डबवाली, गोगामेड़ी व देशनोक शामिल थे।

5बाह्य सहायतित परियोजनाएँ (EAP)

12वें वित्त आयोग की सिफारिशों अनुसार 1 अप्रैल 2005 या उसके पश्चात स्वीकृत परियोजनाओं हेतु केंद्र द्वारा राज्य को "बैक-टू-बैक" आधार पर बाह्य वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। 2025-26 प्रारंभ में 14 EAP क्रियान्वित — दिसंबर 2025 तक 3 पूर्ण।

2025-26 EAP आवंटन
₹3,701.63 करोड़
दिसंबर 2025 तक व्यय ₹1,703.06 करोड़
कुल परियोजना लागत (14 EAP)
₹32,027.56 करोड़
संचयी व्यय ₹17,849.08 करोड़ (दिसंबर 2025 तक)
परियोजना (वित्तपोषण संस्था)उद्देश्य / कवरेज
RUIDP चरण I-IV (ADB)राजस्थान शहरी अवसंरचना विकास — जयपुर-बीकानेर-जोधपुर-अजमेर-कोटा-उदयपुर सहित 27+ शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज, ठोस-अपशिष्ट प्रबंधन (1998 से जारी, चरण-IV मई 2028 तक); चरण-III में 12 शहरों में कार्य — पाली, टोंक, झुंझुनू में सीवरेज+जल आपूर्ति; भीलवाड़ा, झालावाड़, बीकानेर, सवाई माधोपुर, कोटा, उदयपुर, माउंट आबू में सीवरेज व बांसवाड़ा में ड्रेनेज पूर्ण; श्रीगंगानगर में कार्य प्रगति पर (18 लाख जनसंख्या लाभान्वित)
राज्य राजमार्ग परियोजना I-III (ADB)राज्य राजमार्ग-MDR की परिवहन दक्षता व सुरक्षा सुधार — चरण-II (दिसंबर 2019-सितंबर 2025) में 754 किमी के 11 राजमार्ग (6 पैकेज), चरण-III (मार्च 2023-सितंबर 2026) में 290 किमी; PPP प्रभाग क्षमता निर्माण
राज्य राजमार्ग परियोजना-II (विश्व बैंक)अक्टूबर 2019-मई 2025 — 801 किमी राजमार्ग 2-लेन/मध्यवर्त उन्नयन; राज. राज्य राजमार्ग प्राधिकरण सुदृढ़ीकरण; 917 किमी के 13 राजमार्ग (10 पैकेज) विकासाधीन
सिंचाई सुधार परियोजना I-III (JICA)1 अप्रैल 2017-31 मार्च 2028 — 30 ज़िलों में 137 सिंचाई परियोजनाओं का पुनर्वास (चरण-1: 65, चरण-2: 36, चरण-3: 36 उप-परियोजनाएँ); 5.13 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र लाभान्वित; चरण-I हस्ताक्षर 31 मार्च 2017 (₹827.20 करोड़), चरण-II हस्ताक्षर 29 मार्च 2023 (₹1,055.50 करोड़); लखपति दीदी (बागवानी) — 1,000 गाँवों में 10,000 महिला कृषकों की आजीविका सुधार लक्ष्य + 100 कृषि-प्रसंस्करण इकाइयाँ
इंदिरा गांधी नहर आधुनिकीकरण चरण I-II (न्यू डवलपमेंट बैंक, 70%)मई 2018-जुलाई 2026 — रिसाव रोकथाम, जल संरक्षण, लवणता-जलभराव समाधान — श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, बाड़मेर लाभान्वित; 33,312 हेक्टेयर जलजमाव क्षेत्र में लवणता समाधान; चरण-I ($100mn, 2018) व चरण-II ($245mn, 29 जुलाई 2022 हस्ताक्षरित) — 2 चरणों में 8.5 वर्ष में क्रियान्वयन
📘 बाह्य सहायतित परियोजना — EAP (Externally Aided Project)

परिभाषा: विदेशी वित्तीय संस्थाओं (विश्व बैंक, ADB, JICA, KfW, NDB, AFD आदि) से ऋण/अनुदान लेकर चलाई जाने वाली परियोजना, जिसमें केंद्र सरकार पहले विदेशी संस्था से पैसा लेती है और फिर वही शर्ता पर राज्य को "बैक-टू-बैक" आधार पर आगे देती है।

💡 आसान भाषा में: राज्य सरकार सीधे विदेश से कज़ नहीं लेती — केंद्र सरकार बीच में "गारंटर व पास-थ्रू" का काम करती है, इसलिए राज्य को वही ब्याज-दर व चुकौती अवधि मिलती है जो केंद्र को विदेशी संस्था से मिली थी।

🏠 उदाहरण: जैसे कोई बड़ा भाई बैंक से लोन लेकर छोटे भाई को उसी शर्त पर आगे दे दे — राज्य को अलग से विदेशी बैंक जाकर मोलभाव नहीं करना पड़ता।

परियोजना (वित्तपोषण संस्था)उद्देश्य / कवरेज
ट्रांसमिशन सुदृढ़ीकरण चरण I-II (KfW जर्मनी)अक्टूबर 2015-अक्टूबर 2026 — जैसलमेर-बाड़मेर-बीकानेर-जोधपुर में पवन-सौर ऊर्जा निकासी हेतु ट्रांसमिशन लाइनें; चरण-II (नवंबर 2022-अक्टूबर 2026) में हनुमानगढ़-उदयपुर-डूंगरपुर-चित्तौड़गढ़ शामिल; वित्तपोषण हिस्सेदारी KfW 47%→67% (25 जून 2025), शेष केंद्रीय अनुदान (MNRE) व राज्य इक्विटी; RERC ने 29 नवंबर 2024 को 3 प्रमुख सब-स्टेशन (400KV हनुमानगढ़-केंचिया, 400KV उदयपुर, 220KV डूंगरपुर) को RTM मोड में मंजूरी दी
सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ीकरण (विश्व बैंक)जुलाई 2018-जून 2025 — GST कार्यान्वयन सहयोग, ऑनलाइन ऑडिट प्रबंधन प्रणाली (AMS), एकीकृत नकदी-ऋण प्रबंधन प्रणाली (ICDMS), प्रतिबद्धता नियंत्रण प्रणाली (CCS), सार्वजनिक निवेश प्रबंधन ढाँचा (PIM) व इन्वेंटरी प्रबंधन प्रणाली विकास
नागौर-झुंझुनू-बाड़मेर पेयजल परियोजना I-II (JICA)जुलाई 2021-दिसंबर 2028 — फ्लोराइड-प्रभावित भूजल क्षेत्रों में सतही जल आधारित सुरक्षित पेयजल आपूर्ति; कुल 3.28 लाख क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) — सूरजगढ़+उदयपुरवाटी (2 कस्बे) व झुंझुनू-बाड़मेर के 1,173 गाँव + 4,184 बस्तियाँ लाभान्वित; 4 निर्माण पैकेज (1-झुंझुनूं, 3-बाड़मेर)
बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना DRIP चरण II-III (विश्व बैंक व AIIB)राजस्थान के 212 बड़े बांधों में से 189 DRIP फेज-2/3 में शामिल; चरण-I (अप्रैल 2012-मार्च 2021, विश्व बैंक) में 7 राज्यों के 223 बांध पुनर्वासित; चरण-II (अप्रैल 2021-मार्च 2027) में राजस्थान के 15 बांध स्वीकृत — 7 पूर्ण, 4 प्रगति पर; चरण-III (अप्रैल 2025-मार्च 2031) — जोखिम-आधारित बांध सुरक्षा प्रबंधन
पूर्व राजस्थान वन-जैवविविधता परियोजना (AFD फ्रांस)2023-24 से 2030-31 (8 वर्ष) — 13 ज़िलों (अलवर, बारां, भीलवाड़ा, भरतपुर, बूंदी, दौसा, धौलपुर, जयपुर, झालावाड़, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर, टोंक) के 800 गाँवों में संरक्षित क्षेत्र सुदृढ़ीकरण; 23 प्रभागीय (DMU) + 90 क्षेत्रीय (FMU) प्रबंधन इकाइयाँ; 55,000 हेक्टेयर वृक्षारोपण, 3,000 हेक्टेयर ओरण विकास, 55 लाख पौधे वितरण, 610 किमी सुरक्षा दीवार
पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन परियोजना — CRESEP (JICA)अक्टूबर 2024-मार्च 2035 — लागत ₹1,774.30 करोड़ (JICA ऋण ₹1,493.20 करोड़+राज्य ₹281.10 करोड़); 19 ज़िलों (अजमेर, बाड़मेर, बांसवाड़ा, बीकानेर, चूरू, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, सीकर, सिरोही, राजसमंद, उदयपुर) में 30 DMU+90 FMU; कृषि-वानिकी आजीविका, जैसलमेर डेज़र्ट नेशनल पार्क विशेष योजना, 160 जैवविविधता प्रबंधन समितियाँ प्रशिक्षित, 10,000 हेक्टेयर पवित्र उपवन (ओरण) व 3,000 हेक्टेयर सूक्ष्म रिज़र्व संरक्षण
समितिअध्यक्षता व कार्य
सक्षम अधिकरण (CID)मुख्यमंत्री — PPP नीतिगत निर्णय; ₹500 करोड़+ या विभागीय वित्तीय शक्ति से बाहर परियोजनाओं की स्वीकृति
अधिकार प्राप्त समिति (ECID)मुख्य सचिव — CID के सुचारू संचालन हेतु

6सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) ढाँचा

राज्य में PPP परियोजनाओं की स्वीकृति व समन्वय हेतु बहु-स्तरीय संस्थागत ढाँचा — आयोजना विभाग अंतर्गत PPP सैल (2007-08 में गठित; 8 दिसंबर 2025 आदेश से अब वित्त विभाग को हस्तांतरित) नोडल एजेंसी है।

समितिअध्यक्षता व कार्य
राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (SLEC)मुख्य सचिव, आयोजना विभाग — स्विस चैलेंज पद्धति अंतर्गत PPP व गैर-PPP प्रस्तावों की स्वीकृति
RSHDP समितिमुख्य सचिव — राजस्थान स्टेट हाइवे डवलपमेंट प्रोग्राम अंतर्गत सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति (नोडल: PWD)
विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV)गठन वर्ष / उद्देश्य
प्रोजेक्ट्स डवलपमेंट कंपनी ऑफ़ राजस्थान (PDCOR)1997 — बैंकेबल अवसंरचना परियोजनाएँ तैयार करना
रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कंपनी ऑफ़ राजस्थान (RIDCOR)2004 — मेगा हाइवे परियोजनाओं का क्रियान्वयन
एस्सेल सौर्य व SUCRL व अडानी रिन्यूएबल एनर्ज पार्क2014-15 — जैसलमेर-भड़ला (जोधपुर) में सौर पार्क विकास (क्रमशः 750/1000/2000 MW)
📘 VGF — व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding)

परिभाषा: ऐसी अवसंरचना परियोजना जो सामाजिक रूप से ज़रूरी हो पर उपयोगकर्ता-शुल्क से पूरी लागत न निकल पाने के कारण व्यावसायिक रूप से घाटे का सौदा लगे — उसमें सरकार एकमुश्त/किस्तों में अनुदान देकर उसे निवेशक के लिए लाभकारी (viable) बना देती है।

💡 आसान भाषा में: प्रोजेक्ट समाज के लिए अच्छा है, पर निजी कंपनी के लिए पैसा वसूलना मुश्किल है (जैसे गाँव में पानी सप्लाई) — सरकार वह "अंतर" (gap) भर देती है ताकि कंपनी को नुकसान न हो और वह काम करने को तैयार हो जाए।

🏠 उदाहरण: जैसे किसी दुकान का किराया ज़्यादा हो और मुनाफा कम, तो मकान-मालिक कुछ किराया माफ कर दे ताकि दुकान चलती रहे — बिल्कुल वैसे ही सरकार परियोजना लागत का एक हिस्सा अनुदान कर देती है।

व्यवहार्यता अंतर निधि (VGF, 2007) व परियोजना विकास निधि (PDF)

VGF — आर्थिक रूप से वांछित पर व्यावसायिक रूप से अलाभकारी अवसंरचना परियोजनाओं हेतु केंद्रीय योजना; सामाजिक क्षेत्र परियोजनाओं (जल आपूर्ति, स्वास्थ्य-शिक्षा) की कुल लागत का अधिकतम 60% (राज्य 30%+केंद्र 30%) अनुदान। PDF (₹150 करोड़, 2022-23 से 2024-25) — परियोजना विकास लागत हेतु; नवंबर 2022 में IIPDF को केंद्रीय क्षेत्रक योजना में पुनर्गठित।

VGF — नवंबर 2020 पुनर्गठन (2 उप-योजनाएँ, न मिलाएँ)

उप-योजना 1 — सामान्य सामाजिक क्षेत्र (जल आपूर्ति, अपशिष्ट जल उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य-शिक्षा) की परियोजनाओं हेतु कुल परियोजना लागत (TPC) का अधिकतम 60% (केंद्र 30%+राज्य 30%) — शर्त: 100% परिचालन लागत वसूली। उप-योजना 2 — केवल स्वास्थ्य व शिक्षा की प्रदर्शन-पायलट परियोजनाओं हेतु, TPC का अधिकतम 80% (केंद्र 40%+राज्य 40%) — शर्त: न्यूनतम 50% परिचालन लागत वसूली। इसके अतिरिक्त, प्रचालन प्रारंभ के बाद पहले 5 वर्षा के O&M खर्च का अधिकतम 50% (25%+25%) भी VGF से मिल सकता है।

सलाहकार संस्थास्वामित्व/प्रकृति
राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम (RSRDC)राज्य सरकार
वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (WAPCOS)केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय अधीन उपक्रम
नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (NABCONS)NABARD की पूर्ण सहायक कंपनी
राइट्स (RITES)भारतीय रेल अधीन सार्वजनिक उपक्रम
PFC कंसल्टिंग (PFCCL)पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की सहायक
एनर्ज एफिशिएंसी सर्विसेज (EESL)NTPC-PFC-REC-पावरग्रिड संयुक्त उद्यम
राजस्थान फाइनेंशियल सर्विसेज डिलीवरी (RFSDL)राज्य सरकार की पूर्ण सहायक
क्षेत्रपूर्ण (सं./₹करोड़)प्रगति पर (सं./₹करोड़)पाइपलाइन (सं./₹करोड़)
सड़क (NH+SH)84 / 12,982.255 / 1,839.960 / —
शहरी अवसंरचना30 / 754.547 / 323.8013 / 4,983.65
ऊर्जा16 / 7,558.136 / 7,635.453 / 1,523.16
जल1 / 46.003 / 9,416.4011 / 34,675.83
सामाजिक62 / 635.173 / 16.476 / 613.35
IT व अन्य17 / 220.370 / —2 / 28.00
कुल210 / 22,196.4624 / 19,232.0835 / 41,823.99
5. पंचवटी योजना — हरित गलियारा फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
शुभारंभजुलाई 2024, दूदू ज़िले के गाहोता से — वन विभाग क्रियान्वयन
लक्ष्यअगले 5 वर्षा में 50 करोड़ वृक्षारोपण, ₹4,000 करोड़ निवेश से हरित क्षेत्र विस्तार

सलाहकार सेवाएँ (Transaction Advisory) — प्राथमिकता प्राप्त संस्थाएँ

7हरित अवसंरचना

मार्ग
रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश मंदिर व सरिस्का टाइगर रिज़र्व के पांडुपोल मंदिर तक — कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण व
वन्यजीव व्यवधान न्यूनीकरण उद्देश्य
6. मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 (MJSA) फ़्लैगशिप योजना | राज्य योजना
उद्देश्यवर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण व परंपरागत जल स्रोतों के पुनरुद्धार से जल संरक्षण को बढ़ावा
प्रथम चरण कवरेज5,000+ गाँवों में जल उपलब्धता व कृषि उत्पादकता में सुधार का लक्ष्य
📘 हरित अवसंरचना (Green Infrastructure)

परिभाषा: प्राकृतिक व अर्ध-प्राकृतिक तंत्रों (वन, जल-निकाय, हरित पट्टी आदि) का ऐसा नेटवर्क जो पर्यावरण, अर्थव्यवस्था व समाज — तीनों को एक साथ लाभ पहुँचाए, पारंपरिक "कंक्रीट अवसंरचना" (सड़क-भवन) के विपरीत।

💡 आसान भाषा में: जैसे सड़क/पुल "ग्रे इंफ्रास्ट्रक्चर" है, वैसे ही पेड़-पौधे, तालाब, ग्रीन कॉरिडोर "ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर" हैं — यह विकास को पर्यावरण-अनुकूल बनाए रखने का माध्यम है।

🏠 उदाहरण: जैसे पंचवटी योजना में सड़क किनारे हरित गलियारा बनाना, या शहरों में अनिवार्य वर्षा जल संचयन — ये सब हरित अवसंरचना के उदाहरण हैं।

अध्याय 7 — मुख्य परीक्षा दृष्टि से

राजस्थान की स्थापित विद्युत क्षमता 31,556.43 MW (दिसंबर 2025) — पवन+सौर मिलाकर 45.36% हिस्सेदारी याद रखें। PM-KUSUM के 3 घटक (A-B-C) व PM सूर्य घर योजना (5 लाख घर लक्ष्य) को न मिलाएँ — दोनों अलग-अलग स्तर की सब्सिडी योजनाएँ हैं। भड़ला सोलर पार्क (जोधपुर) — विश्व का सबसे बड़ा सौर पार्क, 2,245 MW क्षमता। PMGSY चरण-III (2019-20 से 2024-25) में 8,662.50 किमी ग्रामीण सड़क उन्नयन लक्ष्य याद रखें। 12 प्रमुख बाह्य सहायतित परियोजनाओं (EAP) में वित्तपोषण एजेंसी (ADB/विश्व बैंक/JICA/KfW/NDB/AFD) को उलझाएँ नहीं — हर एजेंसी विशिष्ट क्षेत्र (शहरी/सड़क/सिंचाई/वन) से जुड़ी है। PPP ढाँचे में CID (मुख्यमंत्री) व ECID-SLEC (मुख्य सचिव) की भूमिका में अंतर स्पष्ट रखें। क्षेत्रवार PPP में सड़क क्षेत्र में सर्वाधिक 84 परियोजनाएँ पूर्ण (₹12,982.25 करोड़) पर जल क्षेत्र में सबसे बड़ी राशि (₹34,675.83 करोड़) अभी पाइपलाइन में है — पूर्ण बनाम पाइपलाइन का अंतर याद रखें।

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