📊 अध्याय 1/14 — राजस्थान अर्थव्यवस्था

कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण

Agriculture & Allied Sectors | कृषि, बागवानी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन एवं किसान कल्याण
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📋 इस अध्याय में क्या-क्या पढ़ेंगे
  1. विकसित राजस्थान @2047 — कृषि की दृष्टि
  2. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र : योगदान एवं वृद्धि
  3. भूमि उपयोग एवं फ़सल प्रतिरूप
  4. प्रचालित भूमि जोत (कृषि गणना 2015-16)
  5. कृषि-जलवायु क्षेत्र (10 क्षेत्र)
  6. प्रमुख फ़सलों का उत्पादन, उत्पादकता एवं बागवानी
  7. किसानों के लिए एकीकृत सहायता — बीज, उर्वरक, मृदा
  8. स्वास्थ्य
  9. कृषि ऋण, सहकारिता एवं फ़सल बीमा
  10. कृषि सुधार की प्रमुख पहलें (मिशन, सतत कृषि-बागवानी
  11. व खाद्य सुरक्षा NFSA)
  12. फसलोत्तर प्रबंधन — भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन
  13. समृद्ध खेती के लिए पशुधन, पशुपालक कल्याण एवं
  14. गोपालन
  15. डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन
  16. किसान एवं कृषि श्रमिक कल्याण
  17. बजट 2026-27 एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम
🌟 शुरुआत एक कहानी से

बाड़मेर के किसान रामेश्वर जी के पास 2 हेक्टेयर ज़मीन है। सूखे साल में घर किसने चलाया? — उनकी 4 गायों और 20 बकरियों ने, दूध बेचकर। यही राजस्थान की खेती का असली चेहरा है — जहाँ फ़सल और पशुधन साथ-साथ चलते हैं, इसीलिए 2025-26 में कृषि आय में पशुधन का हिस्सा (49.35%) फ़सलों (42.61%) से भी अधिक है।

इस अध्याय में हम समझेंगे राजस्थान की खेती कितनी बड़ी है, कौन-सी फ़सलों में राज्य देश में पहले स्थान पर है, किसानों को बीज-ऋण-बीमा कैसे मिलता है, और सरकार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों व मछुआरों के लिए क्या कर रही है।

📘 दृष्टि वक्तव्य (Vision Statement)

परिभाषा: वर्ष 2047 तक राजस्थान भारत का अग्रणी "कृषि पावरहाउस" बनेगा — उत्पादकता, किसानों की आय व पर्यावरणीय स्थिरता तीनों बढ़ेंगी; पशुधन सशक्तीकरण, सहकारिता-आधारित अर्थव्यवस्था, उन्नत कृषि-तकनीकों, सूक्ष्म सिंचाई व जलग्रहण-वनारोपण कार्यों से न्यायपूर्ण, आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास होगा।

1विकसित राजस्थान @2047 — कृषि की दृष्टि

राजस्थान की कृषि की प्राकृतिक चुनौतियाँ
▸ शुष्क व अर्ध-शुष्क जलवायु
▸ जोतों का छोटा व बिखरा होना (विखंडन) ▸ मिट्टी का क्षरण (कटाव व उर्वरता में कमी) ▸ पानी की भारी कमी व अनियमित मानसून ▸ भंडारण व विपणन की समस्याएँ, वित्तीय संसाधनों की कमी
समाधान की दिशा
▸ संसाधनों का कुशल प्रबंधन, टिकाऊ भूमि उपयोग
▸ मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक, जैव-उर्वरक ▸ जैविक व प्राकृतिक खेती (विशेषकर वर्षा-आधारित क्षेत्रों में) ▸ बूँद-बूँद (ड्रिप) सिंचाई, वर्षा जल संचयन ▸ सूखा-रोधी फ़सलें (बाजरा, दालें), कृषि-वानिकी + पशुपालन का मेल
वर्षGVA चालू मूल्य (₹ करोड़)वृद्धि (%)GVA स्थिर मूल्य (₹ करोड़)वृद्धि (%)
2021-223,22,73910.281,91,5712.50
2022-233,51,1218.791,99,6194.20
2023-243,88,43810.632,06,4743.43
2024-254,25,9049.652,22,0737.56
2025-26 (अग्रिम)4,40,7023.472,22,5500.22
📘 कृषि-खाद्य प्रणाली (Agri-Food System)

परिभाषा: खेत में उत्पादन से लेकर भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन, विपणन और उपभोक्ता की थाली तक पहुँचने वाली पूरी शृंखला, जिसमें फ़सलें, पशुधन, मत्स्य और वानिकी सभी शामिल हैं।

💡 आसान भाषा में: सिफ़ "खेती" नहीं, बल्कि खेत से थाली तक की पूरी यात्रा।

🏠 उदाहरण: किसान ने सरसों उगाई → गोदाम में रखी → तेल मिल में पेराई हुई → पैकेट बनकर दुकान पहुँचा → हमारे घर की रसोई में आया। यह पूरी कड़ी कृषि-खाद्य प्रणाली है।

📘 CAGR — चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर

परिभाषा: किसी अवधि में हर साल की औसत वृद्धि दर, यह मानते हुए कि हर वर्ष की वृद्धि पिछले वर्ष के बढ़े हुए आधार पर हुई (चक्रवृद्धि ब्याज की तरह)।

💡 आसान भाषा में: कई सालों की उछल-कूद वाली वृद्धि को एक "औसत सालाना रफ़्तार" में बदलना।

🏠 उदाहरण: कृषि GVA (स्थिर मूल्य) 2021-22 से 2025-26 तक हर साल औसतन 3.82% बढ़ा; चालू मूल्य पर 8.10% प्रति वर्ष।

समीक्षा में उत्पादन को भंडारण-प्रसंस्करण-विपणन से जोड़ने, सिंचाई-बीज-खाद मज़बूत करने और सहकारिता-ऋण-बीमा-डिजिटल सेवाओं से किसानों को सहारा देने का एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया गया है। मिश्रित खेती (फ़सल + पशुपालन) ने जलवायु व बाज़ार के झटकों के प्रति खेती को अधिक मज़बूत बनाया है।

2कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र : योगदान एवं वृद्धि

GSVA में हिस्सा — चालू मूल्य 25.74% (₹4.41 लाख करोड़; 2011-12 में 28.56%), स्थिर मूल्य 25.33% (₹2.23 लाख करोड़); वृद्धि दर 2025-26 — 3.47% (चालू) / 0.22% (स्थिर) — राष्ट्रीय औसत से काफ़ी अधिक हिस्सा, खेती की केंद्रीय भूमिका दर्शाता है।

उप-क्षेत्रकृषि GVA में हिस्साGVA (चालू मूल्य)वृद्धि दर 2025-26 (स्थिर मूल्य)
पशुधन49.35%₹2.17 लाख करोड़5.20% ↑
फ़सलें42.61%₹1.88 लाख करोड़−5.01% ↓
वानिकी एवं लट्ठा (Logging)7.49%—2.67% ↑
मत्स्य पालन0.54%—0.87% ↑
फ़सल (सकल मूल्य उत्पाद, चालू मूल्य)2024-25 (₹ करोड़)2025-26 (₹ करोड़)रुझान
बाजरा12,9919,781↓ घटा
मूँगफली10,96115,978↑ बढ़ा
मूँग9,1919,507↑ बढ़ा
गेहूँ40,97038,394↓ घटा
राई एवं सरसों31,76034,826↑ बढ़ा
चना11,19313,913↑ बढ़ा
क्र.भूमि का प्रकार (भू-उपयोग सांख्यिकी 2024-25, अनंतिम)प्रतिशत
1शुद्ध बोया गया क्षेत्र53.02
2कृषि-योग्य बंजर भूमि (Culturable Waste)10.11
3वन (वानिकी)8.30
4ऊसर तथा कृषि-अयोग्य भूमि (Barren & Unculturable)6.85
उप-क्षेत्रों से जुड़े मुख्य तथ्य

पशुधन क्षेत्र की आय (₹2.17 लाख करोड़) फ़सल क्षेत्र (₹1.88 लाख करोड़) से अधिक है — पशुधन की आय में दूध का सबसे बड़ा योगदान है, और पोल्ट्री-अंडा उत्पादन का हिस्सा बढ़ाने की काफ़ी संभावनाएँ हैं। 2025-26 में फ़सल क्षेत्र में 5.01% की गिरावट आई (ख़रीफ़ अनाज उत्पादन घटने से), जबकि पशुधन 5.20% बढ़ा — इसी कारण पूरे कृषि क्षेत्र की वास्तविक वृद्धि केवल 0.22% रही।

उप-क्षेत्रों का योगदान (चालू मूल्य, 2025-26 अग्रिम अनुमान) पशुधन उत्पादों का GVO में हिस्सा (2025-26, चालू मूल्य) : दूध 79.60%, मांस-पोल्ट्री 7.46%, अंडे 0.67%, अन्य 12.27%।

फ़सल क्षेत्र की आय में मुख्य फ़सलें ख़रीफ़ में मुख्य योगदान — बाजरा, मूँगफली, मूँग; रबी में — गेहूँ, राई एवं सरसों, चना।

3भूमि उपयोग एवं फ़सल प्रतिरूप

शुष्क जलवायु, सीमित कृषि-योग्य भूमि व पानी की कमी के कारण राजस्थान में भूमि का कुशल उपयोग समृद्ध खेती की पहली शर्त है (देखें §1 के समाधान — ड्रिप सिंचाई, सूखा-रोधी फ़सलें, फ़सल चक्र, शून्य जुताई, वर्षा जल संचयन)। कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल (2024-25) — 343.43 लाख हेक्टेयर, जिसमें शुद्ध बोया गया क्षेत्र 53.02% (आधे से अधिक)।

क्र.भूमि का प्रकार (भू-उपयोग सांख्यिकी 2024-25, अनंतिम)प्रतिशत
5कृषि के अलावा अन्य उपयोग वाली भूमि5.96
6अन्य पड़त भूमि (Other Fallow)5.62
7चालू पड़त (Current Fallow)5.22
8स्थायी चारागाह एवं अन्य गोचर भूमि4.81
9विविध वृक्ष फ़सलें एवं बाग़0.11
आधारप्रकारउदाहरण
ऋतु-चक्र आधारितख़रीफ़ (वर्षा ऋतु)बाजरा, मक्का, मूँगफली, कपास, ग्वार, मूँग, मोठ
रबी (शीत ऋतु)गेहूँ, सरसों, जौ, चना
ज़ायद (ग्रीष्म ऋतु)तरबूज़, ख़रबूज़ा, ककड़ी, सब्ज़ियाँ
उपयोग आधारितखाद्यान्नअनाज (गेहूँ, बाजरा, चावल, मक्का) + दलहन (मूँग, चना, मोठ)
व्यापारिक/नक़दी व मसालेतिलहन, गन्ना, कपास, ग्वार, जीरा, धनिया, मेथी
📘 चालू पड़त बनाम अन्य पड़त भूमि

परिभाषा: चालू पड़त = वह भूमि जो केवल चालू वर्ष (एक वर्ष या कम) खाली छोड़ी गई; अन्य पड़त = वह भूमि जो 1 से 5 वर्ष तक खेती के बिना छोड़ी गई हो।

💡 आसान भाषा में: खेत को आराम देना — थोड़े समय के लिए (चालू पड़त) या कुछ सालों के लिए (अन्य पड़त)।

🏠 उदाहरण: जैसे कोई किसान इस साल पानी न होने से खेत ख़ाली छोड़ दे, तो वह "चालू पड़त" है; यदि 3 साल से उस खेत में कुछ न बोया गया हो, तो वह "अन्य पड़त" है।

📘 प्रचालित भूमि जोत (Operational Land Holding)

परिभाषा: वह पूरी भूमि जिस पर एक व्यक्ति/परिवार (अकेले या दूसरों के साथ) एक तकनीकी इकाई के रूप में खेती करता है — चाहे भूमि उसकी अपनी हो, पट्टे पर ली हो या किसी और रूप में।

💡 आसान भाषा में: ज़मीन का मालिक कौन है, यह नहीं — बल्कि खेती कौन चला रहा है, यह गिना जाता है।

🏠 उदाहरण: रमेश की अपनी 1 हेक्टेयर ज़मीन है और उसने 1 हेक्टेयर पट्टे पर भी ली है — तो उसकी प्रचालित जोत 2 हेक्टेयर मानी जाएगी।

फ़सलों के प्रकार

4प्रचालित भूमि जोत (कृषि गणना 2015-16)

कुल जोतें — 76.55 लाख (2010-11 : 68.88 लाख, +11.14%); कुल जोत क्षेत्र — 208.73 लाख हे. (211.36 लाख हे., −1.24%); औसत जोत आकार — 2.73 हेक्टेयर (3.07 हे., −11.07%)।

श्रेणी (आकार)कुल जोतों में हिस्सा (2015-16)संख्या में परिवर्तन (2010-11 से)क्षेत्र में परिवर्तन
सीमांत (1 हे. से कम)40.12%+22.30%+19.79%
लघु (1-2 हे.)21.90%+10.99%+10.50%
अर्ध-मध्यम (2-4 हे.)18.50%+6.07%+5.67%
मध्यम (4-10 हे.)14.79%+0.44%−0.27%
बड़ी (10 हे. से अधिक)4.69%−11.14%−13.20%
श्रेणीवर्गजोत संख्या 2010-112015-16% परिवर्तनक्षेत्र 2010-11 (हज़ार हे.)2015-16% परिवर्तन
सीमांतपुरुष2268268318.301120130416.43
महिला23938460.6711617752.59
कुल2511307122.301238148319.79
लघुपुरुष138915149.00198821588.55
महिला12016134.1717122732.75
कुल1511167710.992162238910.50
अर्ध-मध्यमपुरुष124012974.60350936554.16
महिला9211626.0925832525.97
कुल133514166.07377439885.67
मध्यमपुरुष10511038−1.2464596334−1.94
महिला749122.9744554923.37
कुल112711320.4469186899−0.27
बड़ीपुरुष381334−12.3466215657−14.56
महिला21239.5234037710.88
कुल404359−11.1470446114−13.20
सभी श्रेणियाँपुरुष632968668.481969719108−2.99
भूमि जोत — विश्लेषण

सीमांत, लघु, अर्ध-मध्यम व मध्यम जोतों की संख्या बढ़ी, जबकि बड़ी जोतों की संख्या 11.14% घटी — यह भूमि विखंडन (संभावित कारण : संयुक्त परिवारों का बँटवारा) का संकेत है। बजट 2026-27 : घटते जोत आकार को देखते हुए 5,000 किसानों को ऊर्ध्वाधर सहारा प्रणाली (Vertical Support System) से सब्ज़ी उत्पादन हेतु सहायता।

जोतों का आकार-वार वितरण

तालिका 1.1 : लिंग-वार जोतों की संख्या व क्षेत्र (हज़ार में)

श्रेणीवर्गजोत संख्या 2010-112015-16% परिवर्तनक्षेत्र 2010-11 (हज़ार हे.)2015-16% परिवर्तन
महिला54677541.941330165524.44
संस्थागत13147.691091100.92
कुल6888765511.142113620873−1.24
महिला जोतों का कुल क्षेत्र — श्रेणीवार हिस्सा (2015-16)प्रतिशत
सीमांत49.55%
लघु20.77%
अर्ध-मध्यम14.97%
मध्यम11.74%
बड़ी2.97%
#क्षेत्र (कूट)सम्मिलित ज़िलेख़रीफ़ फ़सलेंरबी फ़सलें
1शुष्क पश्चिमी मैदान (I-A)जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतराबाजरा, मोठ, तिलगेहूँ, सरसों, जीरा
2सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदान (I-B)श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़कपास, ग्वारगेहूँ, सरसों, चना
3अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदान (I-C)बीकानेर, जैसलमेर, चूरू का भाग (रतनगढ़, सरदारशहर, बीदासर, सुजानगढ़ तहसील)बाजरा, मोठ, ग्वारगेहूँ, सरसों, चना
4आंतरिक जल-निकासी का संक्रमणकालीन मैदान (II-A)सीकर, चूरू (उपरोक्त 4 तहसील छोड़कर), झुंझुनूँ, नागौर, डीडवाना-कुचामनबाजरा, ग्वार, दलहनसरसों, चना
5लूनी बेसिन का संक्रमणकालीन मैदान (II-B)जालोर, पाली, सिरोही (पिंडवाड़ा, आबूरोड तहसील छोड़कर), ब्यावर का भाग (जैतारण, ब्यावर तहसील)बाजरा, ग्वार, तिलगेहूँ, सरसों
6अर्ध-शुष्क पूर्व मैदान (III-A)जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, ब्यावर (जैतारण, ब्यावर तहसील छोड़कर)बाजरा, ग्वार, ज्वारगेहूँ, सरसों, चना
7बाढ़-संभावित पूर्व मैदान (III-B)अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुरबाजरा, ग्वार, मूँगफलीगेहूँ, जौ, सरसों, चना
8उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान (IV-A)उदयपुर, चित्तौड़गढ़ (बड़ी सादड़ी छोड़कर), राजसमंद, भीलवाड़ा, सिरोही का भाग (पिंडवाड़ा, आबूरोड)मक्का, दलहन, ज्वारगेहूँ, चना

5कृषि-जलवायु क्षेत्र (Agro-Climatic Zones)

विविध भौगोलिक व जलवायु परिस्थितियों के कारण राजस्थान को जलवायु, मिट्टी, स्थलाकृति व फ़सल प्रतिरूप के आधार पर 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है। उत्तर-पश्चिमी भाग (लगभग 61%) मरुस्थलीय/अर्ध-मरुस्थलीय व वर्षा-निर्भर है, जबकि दक्षिण-पूर्व भाग (लगभग 39%) उपजाऊ है — यह विविधता मिश्रित खेती व आय-स्रोतों में विविधता की संभावना देती है।

#क्षेत्र (कूट)सम्मिलित ज़िलेख़रीफ़ फ़सलेंरबी फ़सलें
9आर्द्र दक्षिणी मैदान (IV-B)बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, चित्तौड़गढ़ का भाग (बड़ी सादड़ी)मक्का, धान, ज्वार, उड़दगेहूँ, चना
10आर्द्र दक्षिण-पूर्व मैदान (V)कोटा, बाराँ, बूँदी, झालावाड़ज्वार, सोयाबीनगेहूँ, सरसों
फ़सल समूहक्षेत्र 2023-24 (लाख हे.)2024-25 (अंतिम)2025-26 (अग्रिम)उत्पादन 2023-24 (लाख टन)2024-25 (अंतिम)2025-26 (अग्रिम)
(क) अनाज93.39105.5596.73207.64267.82236.85
ख़रीफ़59.4763.8656.4477.0794.1969.03
रबी33.9241.6940.29130.57173.63167.82
(ख) दलहन54.6354.0660.5133.2941.8047.13
ख़रीफ़36.4737.0939.6213.4020.0520.52
रबी18.1616.9720.8919.8921.7526.61
(क+ख) खाद्यान्न148.02159.61157.24240.93309.62283.98
ख़रीफ़95.94100.9596.0690.47114.2489.55
रबी52.0858.6661.18150.46195.38194.43
(ग) तिलहन66.4660.9862.83101.2793.73100.46
ख़रीफ़24.5225.7326.8437.2938.2341.23
रबी41.9435.2535.9963.9855.5059.23
(घ) गन्ना0.040.060.053.644.653.61
(ङ) कपास (रुई)*10.046.276.4426.2117.8817.94
कृषि-जलवायु क्षेत्र — याद रखने योग्य

क्षेत्र I (A, B, C) = पश्चिम का मरुस्थल; II (A, B) = संक्रमणकालीन मैदान; III (A, B) = पूर्व मैदान; IV (A, B) = दक्षिणी मैदान; V = दक्षिण-पूर्व (हाड़ौती)। जीरा केवल I-A में; कपास I-B (गंगानगर-हनुमानगढ़) में; धान व उड़द IV-B (बाँसवाड़ा-डूँगरपुर) में; सोयाबीन V (हाड़ौती) में; जौ व मूँगफली III-B में। चूरू, ब्यावर, सिरोही और चित्तौड़गढ़ — ये चार ज़िले दो-दो क्षेत्रों में बँटे हुए हैं।

6प्रमुख फ़सलों का उत्पादन एवं उत्पादकता

राजस्थान में कृषि उत्पादन मुख्यतः मानसून के समय पर आने पर निर्भर है। ख़रीफ़ में उत्पादन केवल वर्षा की मात्रा पर ही नहीं, बल्कि उसके समान वितरण व तीव्रता पर भी निर्भर करता है।

तालिका 1.3 : ख़रीफ़ एवं रबी फ़सलों का क्षेत्रफल एवं उत्पादन

फ़सल2024-252025-26 (अग्रिम)परिवर्तन
कुल खाद्यान्न309.62283.98−8.28%
ख़रीफ़ खाद्यान्न114.2489.55−21.61%
रबी खाद्यान्न195.38194.43−0.49%
ख़रीफ़ अनाज94.1969.03−26.71%
रबी अनाज173.63167.82−3.35%
ख़रीफ़ दलहन20.0520.52+2.34%
रबी दलहन21.7526.61+22.34%
कुल तिलहन93.73100.46+7.18%
ख़रीफ़ तिलहन38.2341.23+7.85%
रबी तिलहन55.5059.23+6.72%
गन्ना4.653.61−22.37%
कपास (लाख गाँठ)17.8817.94+0.34%
फ़सल2020-212021-222022-232023-242024-25रुझान
अनाज24232093222022332537↑
दलहन671628657609773↑
खाद्यान्न17571486165316281940↑
तिलहन15231484144915241537लगभग स्थिर
गन्ना7911175852893078715576835↓
कपास (रुई)675558579444484उतार-चढ़ाव
ग्वार बीज458419540513662↑
#फ़सलप्रथमद्वितीयतृतीयदेश में राजस्थान का हिस्सा
1राई एवं सरसोंराजस्थानमध्य प्रदेशउत्तर प्रदेश43.43%
2बाजराराजस्थानउत्तर प्रदेशगुजरात41.34%
3कुल तिलहनराजस्थानमध्य प्रदेशगुजरात23.61%
4मोटे अनाजराजस्थानकर्नाटकउत्तर प्रदेश14.21%
उत्पादन — याद रखने योग्य

तिलहन — ख़रीफ़ में मूँगफली, तिल, सोयाबीन, अरंडी; रबी में राई-सरसों, तारामीरा, अलसी। राजस्थान में पहली बार अलग "कृषि बजट" वर्ष 2022-23 में प्रस्तुत — विचार : "समृद्ध किसान — ख़ुशहाल राजस्थान"।

2025-26 में उत्पादन का विश्लेषण (2024-25 की तुलना में)

तालिका 1.4 : फ़सलों की उत्पादकता (किलोग्राम प्रति हेक्टेयर)

तालिका 1.5 : प्रमुख फ़सलों में राजस्थान का स्थान (2023-24)

#फ़सलप्रथमद्वितीयतृतीयदेश में राजस्थान का हिस्सा
5ग्वारराजस्थानहरियाणागुजरात88.80%
6मूँगफलीगुजरातराजस्थानमध्य प्रदेश19.91%
7चनामध्य प्रदेशमहाराष्ट्रराजस्थान17.39%
8कुल दलहनमध्य प्रदेशमहाराष्ट्रराजस्थान13.76%
9सोयाबीनमध्य प्रदेशमहाराष्ट्रराजस्थान8.96%
वर्षफल — क्षेत्र (हे.)उत्पादन (मी. टन)उत्पादकता (किग्रा/हे.)सब्ज़ी — क्षेत्र (हे.)उत्पादन (मी. टन)उत्पादकता
2020-2168,8839,06,73913,1631,89,38721,85,86511,542
2021-2278,1379,56,44212,2402,04,00523,74,80611,640
2022-2382,3319,06,13411,0061,92,71223,34,88412,116
2023-2488,67211,97,55513,5061,93,51027,11,81614,014
2024-2592,99313,84,60614,8892,04,75528,60,48413,970
वर्षमसाले — क्षेत्र (हे.)उत्पादन (मी. टन)उत्पादकता (किग्रा/हे.)
2020-219,62,36711,80,4771,227
2021-228,11,79710,44,8801,287
2022-239,22,6169,33,3171,012
2023-246,84,4493,79,720555
2024-2513,64,82214,69,5591,077
रैंकिंग ऐसे याद करें

प्रथम (5 फ़सलें) : बाजरा, राई-सरसों, कुल तिलहन, मोटे अनाज, ग्वार — सबसे बड़ा हिस्सा ग्वार (88.80%) में। द्वितीय (1) : मूँगफली (गुजरात पहले)। तृतीय (3) : चना, कुल दलहन, सोयाबीन — तीनों में क्रम मध्य प्रदेश → महाराष्ट्र → राजस्थान।

बागवानी 2024-25 की झलक

फल उत्पादन अब तक का सबसे अधिक — 13.84 लाख मी. टन; सब्ज़ी उत्पादन 28.60 लाख मी. टन; मसालों में क्षेत्र लगभग दोगुना और उत्पादन 3.80 से 14.70 लाख मी. टन (2023-24 मसालों के लिए ख़राब वर्ष था)। बजट 2026-27 : 4,000 किसानों को उन्नत ग्रीनहाउस (पॉलीहाउस/शेड-नेट) हेतु ≈₹200 करोड़ अनुदान; 500 सौर फ़सल ड्रायर; जीरा-धनिया-सौंफ-मेथी जैसे बीजीय मसालों का ≈4,000 हेक्टेयर में विस्तार।

बागवानी : फल, सब्ज़ी एवं मसाले (तालिका 1.6)

बिंदुविवरण
उद्देश्यकिसान अपने ही खेत में अपने उपयोग के लिए अच्छी गुणवत्ता का बीज स्वयं तैयार करें
शुरुआत2017 में 3 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (कोटा, भीलवाड़ा, उदयपुर) से; 2018-19 से पूरे राज्य (सभी 10 क्षेत्रों) में लागू
फ़सलेंगेहूँ, जौ, चना, ज्वार, सोयाबीन, मूँग, मोठ, सरसों व उड़द की 10 वर्ष तक पुरानी किस्मों का बीज उत्पादन
2025-26ख़रीफ़ व रबी में 1.12 लाख क्विंटल बीज वितरित (लक्ष्य 1.13 लाख क्विंटल)
निःशुल्क बीज मिनीकिटनई किस्मों को लोकप्रिय बनाने हेतु — 2025-26 में 31.50 लाख मिनीकिट वितरित
मृदा स्वास्थ्य कार्ड — तथ्यविवरण
शुरुआत19 फ़रवरी 2015 — सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से; इसी कारण 19 फ़रवरी = मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस
वर्तमान स्थिति2022-23 में इसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) में मिला दिया गया
2025-26 (दिसंबर तक)4.79 लाख मिट्टी के नमूने लिए गए, 4.15 लाख कार्ड जारी
बजट 2026-27 — बीज से जुड़ी घोषणाएँ

90% अनुदान पर लगभग 70,000 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज। मिनीकिट : मूँग के 5 लाख, मोठ के 1 लाख, ज्वार/बाजरा/बरसीम के 1 लाख मिनीकिट; 50,000 ढैंचा किट और 5,000 किसानों को नेपियर घास। बजट चर्चा (27 फ़रवरी 2026) : 8.50 लाख जनजाति किसानों को ₹85 करोड़ की लागत से निःशुल्क संकर मक्का बीज मिनीकिट; पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों (ईसबगोल, अश्वगंधा, सफ़ेद मूसली, एलोवेरा) की खेती हेतु 1,000 किसानों को उन्नत बीज।

📘 मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card)

परिभाषा: किसान के खेत की मिट्टी की जाँच के बाद जारी किया गया कार्ड, जिसमें मिट्टी के पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फ़ॉस्फ़ोरस, पोटाश, सूक्ष्म तत्व) की स्थिति और फ़सल-वार उर्वरक की सही मात्रा की सलाह होती है।

💡 आसान भाषा में: मिट्टी की "मेडिकल रिपोर्ट" — जो बताती है कि खेत को कौन-सी "दवा" (खाद) कितनी चाहिए।

🏠 उदाहरण: जैसे डॉक्टर ख़ून की जाँच देखकर ही दवा लिखता है, वैसे ही कार्ड देखकर किसान उतना ही यूरिया-DAP डालता है जितना ज़रूरी है — पैसा भी बचता है और मिट्टी भी बची रहती है।

7किसानों के लिए एकीकृत सहायता — बीज, उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य

उत्पादन-उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार किसानों को एकीकृत सहायता प्रणाली देती है — अच्छे बीज, संतुलित उर्वरक व मृदा स्वास्थ्य, सस्ता कृषि ऋण, और फ़सल बीमा।

(क) बीज

राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड (RSSC) — बीजों के उत्पादन, ख़रीद, प्रसंस्करण एवं आपूर्ति की नोडल एजेंसी; राजस्थान राज्य बीज एवं जैविक उत्पादन प्रमाणीकरण संस्था (RSSOCA) — बीजों व जैविक उत्पादों का प्रमाणीकरण।

मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना

(ख) उर्वरक एवं मृदा स्वास्थ्य

मृदा स्वास्थ्य कार्ड — तथ्यविवरण
मुख्य कार्यमृदा परीक्षण सेवाओं का विस्तार, कार्ड जारी करना, फ़सल-वार विवेकपूर्ण पोषक तत्व प्रबंधन — राज्य के सभी 352 ब्लॉकों में
योजना/कार्यक्रमविवरण
गोवर्धन जैविक उर्वरक योजनारासायनिक उर्वरक घटाना, जैव/जैविक/नैनो उर्वरक बढ़ावा; हर ब्लॉक में 50 किसानों को पशु अपशिष्ट से वर्म-कम्पोस्ट बनाने हेतु प्रति किसान ₹10,000 तक; दिसंबर 2025 तक राज किसान पोर्टल पर 1.02 लाख आवेदन → 54,940 प्रशासनिक + 10,814 वित्तीय स्वीकृतियाँ
कृषि क्लिनिकहर ज़िला मुख्यालय पर मृदा परीक्षण, फ़सल जानकारी व कीट/रोग उपचार की एक ही जगह सेवाएँ; 2024-25 में 20 स्थापित, 2025-26 में 13 और निर्माणाधीन
नमो ड्रोन दीदी योजनामहिला स्वयं सहायता समूहों को 1,070 कृषि ड्रोन व परिवहन वाहन ख़रीद के ऋण पर केंद्र से 3% अतिरिक्त ब्याज अनुदान; नैनो यूरिया व कीटनाशकों का सटीक छिड़काव — पारंपरिक खेती व आधुनिक तकनीक का मेल
पशु सखी एवं कृषि सखीराजीविका की गतिविधियाँ मुख्यतः महिलाएँ चलाती हैं — 37,369 सदस्य पशु सखी व 36,787 सदस्य कृषि सखी के रूप में कार्यरत (विस्तार अध्याय 10)
संस्था / तथ्यविवरण
कुल पंजीकृत सहकारी समितियाँ42,858
प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियाँ (PACS / ग्राम सेवा सहकारी समितियाँ)9,086
सामान्य विपणन एवं फल-सब्ज़ी सहकारी विपणन समितियाँ (क्रय-विक्रय समितियाँ)285
उपभोक्ता थोक भंडार38
दुग्ध संघ24
संघ (Federations)23
केंद्रीय सहकारी बैंक — अल्पकालीन कृषि ऋण29
प्राथमिक भूमि विकास बैंक — दीर्घकालीन कृषि ऋण36
राजस्थान में सहकारिता की शुरुआत1904 — अजमेर ज़िले के भिनाय से
राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अल्पकालीन सहकारी साख का शीर्ष बैंक)स्थापना 14 अक्टूबर 1953, मुख्यालय जयपुर
राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक (दीर्घकालीन ऋण, भूमि गिरवी पर)स्थापना 1957
सहकार सदस्यता अभियान2 से 22 अक्टूबर 2025 — PACS स्तर पर शिविर; लगभग 8.90 लाख नए सदस्य जुड़े

उर्वरक आपूर्ति 2025-26 (दिसंबर तक) : यूरिया 22.20, DAP 7.77, SSP 4.32, NPK 2.53 लाख मी.टन।

उर्वरक-संबद्ध अन्य कार्यक्रम एवं डिजिटल सेवाएँ

8कृषि ऋण, सहकारिता एवं फ़सल बीमा

कृषि ऋण वह वित्तीय सेवा है, जिससे किसान बीज, खाद, उपकरण ख़रीद पाते हैं — सस्ता व आसान ऋण कृषि वृद्धि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण गरीबी घटाने के लिए ज़रूरी है। राजस्थान में ऋण का बड़ा हिस्सा सहकारी संस्थाओं से आता है।

सहकारी ढाँचा — संख्या एवं ऐतिहासिक तथ्य

ऋण का प्रकारवितरणलक्ष्य
दीर्घकालीन ऋण (प्राथमिक भूमि विकास बैंक)₹95.13 करोड़₹209.00 करोड़
मध्यमकालीन ऋण (कृषि + ग़ैर-कृषि)₹783.79 करोड़—
अल्पकालीन फ़सली ऋण₹18,085.89 करोड़कुल लक्ष्य ₹25,000 करोड़
योजनामुख्य प्रावधानप्रगति 2025-26 (दिसंबर तक)
शून्य ब्याज दर पर अल्पकालीन फ़सली ऋणसहकारी समितियों से बिना ब्याज फ़सली ऋण; समय पर चुकाने वाले किसानों को राज्य सरकार ब्याज अनुदान देती है30.45 लाख किसानों को ₹18,085.89 करोड़
सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)अल्पकालीन फ़सली ऋण KCC के माध्यम सेसितंबर 2025 तक 61.83 लाख KCC जारी, 43.95 लाख सक्रिय
राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना (अक्टूबर 2022)ग्रामीण कारीगर, ग़ैर-कृषि कार्य से आजीविका चलाने वाले परिवार तथा लघु-सीमांत किसान परिवार के सदस्य — ₹2 लाख तक ऋण13,801 लाभार्थियों को ₹122.04 करोड़
सहकार किसान कल्याण योजनाफ़सली ऋण के अलावा कृषि व संबद्ध कार्यों हेतु ₹10 लाख तक ऋण₹121.11 करोड़ वितरित
कृषि उपज रहन (गिरवी) ऋण योजनाउपज गिरवी रखकर केवल 3% ब्याज पर ऋण27 किसानों को ₹70.50 लाख
स्वयं सहायता समूहों को ऋणकेंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा393 समूहों को ₹5.06 करोड़
स्वरोज़गार क्रेडिट कार्ड योजना (नाबार्ड प्रायोजित)ग़ैर-कृषि कार्यों हेतु ₹50,000 तक, अवधि 5 वर्ष76 मामलों में ₹33 लाख
राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजनाडेयरी से जुड़े 2.5 लाख परिवारों को ₹1 लाख तक ब्याज-मुक्त अल्पकालीन ऋण; बजट ₹150 करोड़92,074 ऑनलाइन आवेदनों में से 89,997 स्वीकृत
बिंदुविवरण
घोषणा15 मई 2020 — केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा; कोष का आकार ₹1 लाख करोड़
उद्देश्यकिसानों के लिए "फ़ार्म गेट" (खेत के पास) अवसंरचना — गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, छँटाई-ग्रेडिंग इकाइयाँ आदि
ब्याज अनुदान₹2 करोड़ तक के सभी ऋणों पर 3% प्रति वर्ष
PACS से जुड़ावAIF को PACS की बहु-सेवा केंद्र (Multi Service Centre) योजना से जोड़ा गया
प्रगति (31 दिसंबर 2025)4,900 परियोजनाएँ, ₹4,212.54 करोड़ स्वीकृत; 4,427 परियोजनाओं के लिए ₹2,793.08 करोड़ वितरित

सहकारी ऋण वितरण — 2025-26 (दिसंबर तक)

प्रमुख कृषि ऋण योजनाएँ

कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund — AIF)

फ़सल बीमा — प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना (PMFBY)

अप्रत्याशित घटनाओं (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, कीट) से फ़सल नुकसान पर सुरक्षा देने के लिए यह योजना ख़रीफ़ 2016 से लागू है (शुभारंभ 18 फ़रवरी 2016); इसमें खाद्यान्न, तिलहन व वाणिज्यिक/बागवानी फ़सलें शामिल हैं। किसान का प्रीमियम :

ख़रीफ़ 2%, रबी 1.5%, वाणिज्यिक/बागवानी 5%।

योजनामुख्य बिंदुप्रगति / प्रावधान
राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)फल, मसाले, फूल आदि का क्षेत्र, उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाना; चयनित 41 ज़िलों में; 2025-26 बजट ₹124.76 करोड़ (केंद्र ₹74.86 + राज्य ₹49.90)दिसंबर 2025 तक ₹48.83 करोड़ व्यय; 2,358 हे. में फलोद्यान; 3.13 लाख वर्ग मी. ग्रीनहाउस; 0.51 लाख वर्ग मी. शेड-नेट; 638 हे. प्लास्टिक मल्चिंग; 9 वर्म-कम्पोस्ट इकाइयाँ; 1,129 कम लागत प्याज़ भंडारण संरचनाएँ; 19 जल संग्रहण संरचनाएँ
राष्ट्रीय बाँस मिशनकेंद्र प्रायोजित (अभी शुरू होना बाक़ी); सार्वजनिक-निजी क्षेत्र में हाई-टेक व छोटी नर्सरियाँ, कौशल प्रशिक्षण व सेमिनारभारत सरकार द्वारा ₹93.28 लाख की वार्षिक कार्ययोजना स्वीकृत; 2025-26 में ₹100 लाख का प्रावधान
कृषि-वानिकी योजनासार्वजनिक-निजी क्षेत्र में नई नर्सरियाँ (हाई-टेक, बड़ी, छोटी) और मौजूदा नर्सरियों में पौध तैयार करना2025-26 में 3 स्थानों पर 4 हाई-टेक नर्सरियाँ; ₹285 लाख का प्रावधान
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)शुरुआत 2007-08, केंद्र : राज्य = 60 : 40; खजूर की खेती, NHM रहित ज़िलों में बागवानी, शहरी क्षेत्रों में सब्ज़ी क्लस्टरउत्कृष्टता केंद्र — झालावाड़, धौलपुर, टोंक, बूँदी, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, बस्सी (जयपुर), नांता (कोटा) — संरक्षित खेती व नर्सरी हेतु; ₹40.14 करोड़ आवंटन में से ₹20.56 करोड़ व्यय
घटकशुरुआतज़िले (2025-26)
गेहूँ एवं दलहनरबी 2007-08 (केंद्र प्रायोजित)गेहूँ — 18 ज़िले : अजमेर, ब्यावर, दौसा, जयपुर, झुंझुनूँ, नागौर, सीकर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, बीकानेर, जोधपुर, पाली, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा दलहन — सभी 41 ज़िले
बजट 2026-27 — बागवानी व कृषि-वानिकी

नए उत्कृष्टता केंद्र : अलवर (प्याज़ एवं सब्ज़ियाँ), श्रीगंगानगर (किन्नू), बाँसवाड़ा (आम); प्राकृतिक खेती का उत्कृष्टता केंद्र — श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (जयपुर)। कृषि-वानिकी की हाई-टेक नर्सरियाँ — जोधपुर, पाली और कोटा (जैसे नागौरी अश्वगंधा, सोजत मेहंदी की पौध); जैविक खाद्य बाज़ार — जोधपुर, कोटा, उदयपुर।

सतत कृषि एवं बागवानी की योजनाएँ

बागवानी ग्रामीण लोगों को अतिरिक्त रोज़गार देती है व अर्थव्यवस्था को कृषि-प्रसंस्करण की ओर ले जाती है। 2025-26 में बागवानी हेतु राज्य योजना (केंद्रीय हिस्से सहित) में ₹1,918.67 करोड़ बजट, जिसमें से दिसंबर तक ₹523.13 करोड़ उपयोग।

9कृषि सुधार की प्रमुख पहलें (मिशन एवं योजनाएँ)

(i) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM)

चारों घटकों की मुख्य गतिविधियाँ लगभग समान हैं — उन्नत तकनीक पर फ़सल प्रदर्शन, प्रमाणित बीज वितरण, सूक्ष्म पोषक तत्व/जैव-उर्वरक, जिप्सम, पौध संरक्षण रसायन व जैव-कीटनाशक, फ़सल प्रणाली आधारित प्रशिक्षण तथा तारबंदी को बढ़ावा।

घटकशुरुआतज़िले (2025-26)
मोटे अनाज (मक्का, जौ)2018-19मक्का — 9 ज़िले : बाराँ, झालावाड़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, सलूंबर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद जौ — 9 ज़िले : अजमेर, ब्यावर, जयपुर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, भीलवाड़ा
पोषक अनाज / श्री अन्न (बाजरा, ज्वार)2018-19ज्वार — 11 ज़िले : अजमेर, ब्यावर, जयपुर, टोंक, नागौर, अलवर, भरतपुर, जोधपुर, पाली, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ बाजरा — 28 ज़िले
वाणिज्यिक फ़सलें (कपास)—कपास — 18 ज़िले : अजमेर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, झुंझुनूँ, नागौर, अलवर, भरतपुर, डीग, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, फलौदी, पाली, बाँसवाड़ा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़; प्रथम पंक्ति प्रदर्शन, फ़ेरोमोन ट्रैप, कीट प्रबंधन प्रशिक्षण
मिशन/कार्यक्रममुख्य बिंदुवित्त पोषण / प्रगति 2025-26
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (तिलहन)ब्रीडर बीज (100% केंद्रीय), मूल्य शृंखला क्लस्टर में प्रमाणित बीज, IPM किसान खेत पाठशाला, तारबंदी; वृक्ष-जनित तिलहन (TBO) — जैतून, महुआ, नीम, जोजोबा, करंज, रतनजोत (जेट्रोफ़ा)केंद्र:राज्य 60:40; ₹125 करोड़ में से ₹105.73 करोड़ व्यय
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) — वर्षा-आधारित क्षेत्र विकास (RAD)पशुधन/बागवानी/कृषि-वानिकी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS); वर्म-कम्पोस्ट, मधुमक्खी पालन, मत्स्य, साइलेज इकाईकेंद्र:राज्य 60:40
अनुकूली परीक्षण केंद्र (ATC) व जैविक खेती सहायतानई कृषि सिफ़ारिशों की क्षेत्र-विशेष अनुकूलता व आर्थिक व्यवहार्यता की जाँचजैविक खेती में उत्कृष्ट 3 किसानों को हर वर्ष ₹1-1 लाख प्रोत्साहन पुरस्कार
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)क्लस्टर दृष्टिकोण व सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS-India) प्रमाणीकरण से जैविक खेती, रसायन-मुक्त उत्पादन₹42.07 करोड़ में से दिसंबर तक ₹4.20 करोड़ व्यय
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF)2025-26 से केंद्र प्रायोजित; कुल 2,000 क्लस्टर (केंद्र 1,800+राज्य 200), प्रत्येक ≈50 हे./125 किसान; क्लस्टर में कृषि सखी/CRP, प्रति एकड़ DBT सहायता, जैव-इनपुट संसाधन केंद्रकवरेज — 2.50 लाख किसान, 1 लाख हेक्टेयर
बिंदुविवरण
घोषणा / शुरुआतकेंद्रीय बजट 2025-26 में घोषणा; मंत्रिमंडल स्वीकृति 16 जुलाई 2025; प्रधानमंत्री द्वारा शुभारंभ 11 अक्टूबर 2025
अवधि6 वर्ष (2025-26 से)
कवरेजदेश के 100 आकांक्षी कृषि ज़िले
एकीकरण11 मंत्रालयों/विभागों की 36 योजनाओं का मेल
ज़िलों के चयन का आधारकम उत्पादकता, कम फ़सल सघनता, औसत से कम ऋण वितरण
उद्देश्यउत्पादकता, फ़सल विविधता, आय और स्थिरता बढ़ाना; भंडारण, सिंचाई और ऋण सुविधा सुधारना
राजस्थान के 8 ज़िलेबाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, जालोर
उप-मिशनउद्देश्य
कृषि विस्तार उप-मिशन (SMAE)नई तकनीक किसानों तक पहुँचाना
बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन (SMSP)गुणवत्तापूर्ण बीज-रोपण सामग्री उत्पादन
कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM)यंत्रों पर अनुदान — SC/ST, महिला, लघु-सीमांत को 50%, अन्य को 40%; कस्टम हायरिंग केंद्र — "राज किसान कस्टम हायरिंग ऐप" से बुकिंग
📘 एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System)

परिभाषा: एक ही खेत पर फ़सल, पशुपालन, बागवानी, वृक्ष, मत्स्य आदि कई घटकों को इस तरह जोड़ना कि एक का अपशिष्ट दूसरे का संसाधन बने।

💡 आसान भाषा में: खेत को एक "परिवार" की तरह चलाना, जहाँ हर सदस्य एक-दूसरे की मदद करे।

🏠 उदाहरण: गाय का गोबर → वर्म-कम्पोस्ट → खेत की खाद; खेत का चारा → गाय का भोजन; मेड़ पर लगे पेड़ → लकड़ी व छाया। एक फ़सल ख़राब हो तो भी दूध और पेड़ों से आय चलती रहती है।

📘 प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती

परिभाषा: प्राकृतिक खेती में बाहर से ख़रीदा कोई भी उर्वरक (रासायनिक या जैविक) नहीं डाला जाता; खेत पर ही गाय के गोबर-गोमूत्र से बने जीवामृत, बीजामृत आदि का उपयोग होता है। जैविक खेती में रसायन तो नहीं, पर बाहर से जैविक खाद/कम्पोस्ट लाई जा सकती है।

💡 आसान भाषा में: जैविक = "रसायन-मुक्त"; प्राकृतिक = "रसायन-मुक्त + लगभग शून्य बाहरी लागत"।

🏠 उदाहरण: जैविक किसान बाज़ार से वर्म-कम्पोस्ट ख़रीद सकता है; प्राकृतिक खेती करने वाला अपनी गाय के गोबर से खेत पर ही जीवामृत बनाता है।

(vii) प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)

(viii) राष्ट्रीय कृषि विस्तार एवं प्रौद्योगिकी मिशन (NMAET)

घटकइकाईलक्ष्यउपलब्धि (दिसंबर 2025 तक)
पाइपलाइनकि.मी.20,00010,073
डिग्गीसंख्या10,0004,979
खेत तलाई (फ़ार्म पॉन्ड)संख्या25,00010,626
कृषि यंत्रसंख्या1,00,00028,479
जिप्सम वितरणमी. टन30,0008,090
किसान भ्रमणसंख्या205158
फ़सल प्रदर्शनसंख्या3,36,1132,78,920
बीज मिनीकिट वितरणसंख्या31,50,00031,49,683
एकीकृत कीट प्रबंधन प्रदर्शनसंख्या300180
किसान प्रशिक्षण (1-2 दिन)संख्या11,32010,105
पौध संरक्षण रसायन/जैव-कीटनाशकहेक्टेयर2,00,00090,000
मृदा स्वास्थ्य कार्डसंख्या4,05,0004,14,714 (लक्ष्य से अधिक)
काँटेदार तार बाड़बंदीमीटर3,00,00,00094,69,496
बिंदुविवरण
अधिनियमराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 — अधिसूचना 10 सितंबर 2013; राजस्थान में लागू : 2 अक्टूबर 2013
कवरेज (राष्ट्रीय)ग्रामीण जनसंख्या का 75% और शहरी का 50% (कुल लगभग दो-तिहाई)
हक़दारीअंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार — 35 किग्रा प्रति परिवार प्रति माह; प्राथमिकता वाले परिवार — 5 किग्रा प्रति व्यक्ति प्रति माह
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना1 जनवरी 2024 से 5 वर्ष तक NFSA लाभार्थियों को निःशुल्क अनाज
महिला सशक्तीकरण18 वर्ष या अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला राशन कार्ड के लिए परिवार की मुखिया
राजस्थान में (1 दिसंबर 2025)लाभार्थियों की अधिकतम सीमा 4.46 करोड़; वर्तमान लाभार्थ 4.38 करोड़
2025-26 (दिसंबर तक)PMGKAY में 18.73 लाख मी. टन गेहूँ का उठाव और 18.76 लाख मी. टन वितरण
"गिव-अप" अभियाननवंबर 2024 से — सक्षम/अपात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने के लिए प्रेरित करना, ताकि नए पात्र परिवार जुड़ सकें

तालिका 1.7 : कृषि विभाग के प्रमुख घटकों की भौतिक प्रगति (2025-26)

(ix) खाद्य सुरक्षा — राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013

10फसलोत्तर प्रबंधन — भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन

फ़सल कटने के बाद उसे सुरक्षित रखना, प्रसंस्करण करना और सही बाज़ार तक पहुँचाना — यही फसलोत्तर प्रबंधन है, जो भोजन की बर्बादी घटाकर खाद्य सुरक्षा व किसानों की आय-स्थिरता बढ़ाता है।

मद2021-222022-232023-242024-252025-26 (दिसं. तक)
औसत भंडारण क्षमता (लाख मी. टन)14.7115.9816.7918.1717.25
औसत उपयोग (लाख मी. टन)10.316.107.378.548.25
औसत उपयोग का प्रतिशत70%38%44%47%48%
निर्मित भंडारण क्षमता (लाख मी. टन)2.242.400.710.610.03
गोदामों की संख्या9393949797
कुल आय (₹ करोड़)122.61130.13130.37142.62181.61 (अनंतिम)
बिंदुविवरण — प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME)
संचालनखाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार; राज्य में नोडल एजेंसी — राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड
उद्देश्यअसंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को औपचारिक बनाना, ऋण व तकनीक तक पहुँच देना
अवधि / वित्त पोषण2020-21 से 2024-25; अब 2025-26 तक बढ़ाई गई; केंद्र : राज्य = 60 : 40
व्यक्तिगत इकाई को अनुदानपरियोजना लागत का 35%, अधिकतम ₹10 लाख — नई इकाई या विस्तार हेतु; अनुदान संबंधित बैंक शाखा को भेजा जाता है, 3 वर्ष लॉक-इन के बाद ऋण खाते में समायोजित
अन्य सहायतास्वयं सहायता समूहों को बीज पूँजी; साझा अवसंरचना हेतु 35% अनुदान; ब्रांडिंग-विपणन सहायता
प्रगति 2025-26 (दिसंबर तक)2,048 आवेदन → 1,518 बैंकों को भेजे → 414 को ₹23.54 करोड़ अनुदान स्वीकृत; 8 ज़िलों में 8 इन्क्यूबेशन केंद्र (₹23.11 करोड़ केंद्र द्वारा जारी)

(i) भंडारण

(ii) प्रसंस्करण

प्रसंस्करण फसलोत्तर नुकसान घटाता है, बाज़ार मूल्य बढ़ाता है और गाँवों में रोज़गार पैदा करता है। राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन 2024 : कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र में 2,524 समझौता ज्ञापन (MoU), कुल ₹43,794.84 करोड़ का निवेश।

योजना / संस्थाविवरण एवं प्रगति 2025-26 (दिसंबर तक)
कृषक उपहार योजनाई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार) पोर्टल पर उपज बेचने वाले किसान को हर ₹10,000 की बिक्री पर एक डिजिटल कूपन (अधिक बिक्री पर उसी अनुपात में अधिक कूपन); मंडी व संभाग स्तर पर 798 लॉटरियों से ₹1.38 करोड़ के पुरस्कार
सहकारी विपणन ढाँचा285 क्रय-विक्रय एवं फल-सब्ज़ी विपणन समितियाँ — उपभोक्ता वस्तुएँ ₹87 करोड़, कृषि आदान ₹357.30 करोड़, कृषि उपज ₹890 करोड़ का विपणन
राजफ़ेड (किसानों का शीर्ष सहकारी विपणन संघ)2025-26 में किसानों को 3,000 मी. टन उर्वरक व बीज वितरित; न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ख़रीद में भी भूमिका
कॉनफ़ेड (उपभोक्ता सहकारी संघ — शीर्ष संस्था)कालाबाज़ारी व कृत्रिम कमी से उपभोक्ताओं की सुरक्षा; 38 सहकारी थोक भंडार पंजीकृत, 33 ज़िला स्तर पर कार्यरत; ₹1,516.29 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध ₹1,073.82 करोड़ का व्यवसाय
राष्ट्रीय सहकारी मसाला मेला 20259 से 18 मई 2025, जवाहर कला केंद्र, जयपुर — राज्य व अन्य राज्यों की सहकारी संस्थाओं के गुणवत्तापूर्ण क्षेत्रीय उत्पाद
मंडी विकासमंडी यार्ड/उप-यार्ड, सड़क निर्माण व अन्य विभागों के जमा कार्यों पर ₹513.65 करोड़ व्यय; मंडी क्षेत्रों में 47.38 कि.मी. सड़क
किसान कल्याण कोष16 दिसंबर 2019 को ₹1,000 करोड़ से गठित; बाद में राशि बढ़ाई गई
पशुदेश में राजस्थान का हिस्सा (पशुगणना 2019)
ऊँट84.43%
बकरी14.00%
भैंस12.47%
भेड़10.64%
गोवंश7.24%
वर्षदूध (हज़ार टन)मांस (हज़ार टन)अंडे (मिलियन)ऊन (लाख किग्रा)
2019-2026,5722002,698144
2020-2130,7232012,488157

(iii) विपणन

कृषि विपणन किसानों को उपभोक्ताओं से जोड़ता है, क़ीमतें स्थिर रखता है और आधुनिक खेती में निवेश बढ़ाता है। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (1974) और कृषि विपणन निदेशालय (1980) इसके प्रमुख संस्थान हैं।

11समृद्ध खेती के लिए पशुधन

पशुपालन राज्य की, विशेषकर शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की, प्रमुख आर्थिक गतिविधि है — पश्चिमी शुष्क क्षेत्र में यह सूखे-अकाल के झटकों से बचाने वाली "ढाल" का काम करता है और ग्रामीण गरीबों को स्थिर आजीविका देता है।

कुल पशुधन (पशुगणना 2019) — 568.01 लाख (देश का 10.60%); कुक्कुट पक्षी — 146.23 लाख।

वर्षदूध (हज़ार टन)मांस (हज़ार टन)अंडे (मिलियन)ऊन (लाख किग्रा)
2021-2233,2652212,688156
2022-2333,3072402,761161
2023-2434,7332473,087160
संस्था2021-222022-232023-242024-252025-26 (दिसं.)
बहु-चिकित्सा केंद्र (पॉलीक्लिनिक)3538487398
ब्लॉक पशु स्वास्थ्य कार्यालय / प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय788813831848873
पशु चिकित्सालय21052095218722422243
पशु चिकित्सा उप-केंद्र57686030716775637712
ज़िला चल पशु चिकित्सा इकाई10210210210234
बिंदुविवरण
नई संस्थाएँ700 नए पशु चिकित्सा उप-केंद्र; 2 नए पशु चिकित्सालय; 151 उप-केंद्र → चिकित्सालय; 101 चिकित्सालय → प्रथम श्रेणी; 50 प्रथम श्रेणी → पॉलीक्लिनिक; 2,423 नए पद सृजित
RIDF सहायतानाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष ट्रेंच-31 में 310 पशु चिकित्सालयों के भवन हेतु ₹144.15 करोड़ स्वीकृत
1962 चल पशु चिकित्सा सेवाचिकित्सा आपातकालीन सेवा 108 की तज़ पर; कॉल सेंटर 1962 के माध्यम से 536 मोबाइल वाहन घर-घर सेवा; 2025-26 में 59.82 लाख पशुओं के उपचार से 15.30 लाख+ पशुपालक लाभान्वित
टीकाकरण2025-26 (दिसंबर तक) कुल 571.90 लाख टीके; खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) नियंत्रण के 5वें चरण में 1.86 करोड़ गाय-भैंस; लम्पी स्किन रोग से बचाव हेतु 108.30 लाख गोवंश निःशुल्क टीकाकरण
नस्ल सुधार2.49 लाख बड़े व 4.47 लाख छोटे पशुओं का बधियाकरण; 17.09 लाख कृत्रिम गर्भाधान
योजनामुख्य प्रावधानप्रगति
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजनापशुओं का रोग व मृत्यु के विरुद्ध निःशुल्क बीमा; 1 दिसंबर 2025 से गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊँट जैसे देशी पशुओं का निःशुल्क बीमा; 100% प्रीमियम राज्य सरकार देती है; बीमा राशि — गाय, भैंस, ऊँट के लिए ₹40,000 तक और भेड़-बकरी के लिए ₹4,000 तक2024-25 में 5.54 लाख परिवारों के 10.63 लाख पशु बीमित; 2025-26 में कुल 42 लाख पशुओं का लक्ष्य

तालिका 1.9 : पशु चिकित्सा संस्थाएँ पशु स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति (2025-26) पशु कल्याण एवं देशी नस्ल संरक्षण

पशुपालक कल्याण योजनाएँ

योजनामुख्य प्रावधानप्रगति
पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा24 जून – 9 जुलाई 2025; योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक25.19 लाख बीमार पशुओं का उपचार, 23.21 लाख टीकाकरण, 6.63 लाख पशुपालक लाभान्वित
ग्रामीण सेवा शिविर अभियान 2025शिविरों में पशु उपचार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवा, बाहरी परजीवी-नाशक छिड़काव21 लाख+ पशुओं का उपचार, 17.41 लाख टीकाकरण, 29.43 लाख को कृमिनाशक, 24.53 लाख पर छिड़काव; 10.29 लाख पशुपालक लाभान्वित
राज सरस सुरक्षा कवच बीमा (9वाँ चरण)दुग्ध उत्पादकों का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा — 1 फ़रवरी 2025 से 31 जनवरी 2026; मृत्यु/पूर्ण स्थायी विकलांगता पर ₹5 लाख, आंशिक स्थायी विकलांगता पर ₹2.50 लाखदिसंबर 2025 तक 1,12,176 दुग्ध उत्पादक बीमित
सरस सामूहिक आरोग्य बीमाज़िला दुग्ध संघों द्वारा दुग्ध उत्पादकों का स्वास्थ्य बीमा19वें चरण में दिसंबर 2025 तक 33,516 उत्पादक बीमित
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना1 फ़रवरी 2019 से; दुग्ध उत्पादकों को अनुदान ₹2 से बढ़ाकर ₹5 प्रति लीटर (2022-23 से)2025-26 में ₹650 करोड़ के प्रावधान में से ₹519 करोड़ DBT से वितरित
सक्रिय मछुआरों हेतु समूह दुर्घटना बीमामत्स्य कार्य में लगे लोगों का दुर्घटना बीमा — राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, हैदराबाद के माध्यम सेराज्य के लगभग 20,000 मछुआरों में से 2025-26 में 5,501 बीमित
योजनाप्रावधानप्रगति (दिसंबर 2025 तक)
गौशाला विकास योजनापंजीकृत गौशालाओं में बाड़ा, चारा गोदाम, गोपालक आवास, पानी की टंकी आदि हेतु अधिकतम ₹10 लाख — सरकार : जनता = 90 : 1012 गौशालाओं को ₹1.10 करोड़
पंजीकृत गौशालाओं को सहायता अनुदानअनुत्पादक, दुर्घटनाग्रस्त व बीमार गोवंश के चारे-पानी हेतु; 1 अप्रैल 2025 से बड़े पशु ₹44 → ₹50 और छोटे पशु ₹22 → ₹25 प्रति पशु प्रतिदिन, 270 दिनों के लिए3,043 गौशालाओं को ₹1,204.90 करोड़
पंचायत समिति स्तरीय नंदीशाला जनसहभागिता योजनानिराश्रित नर गोवंश की समस्या के समाधान हेतु; प्रति इकाई लगभग ₹1.57 करोड़ (90 : 10)13 ज़िलों में ₹13.31 करोड़
ग्राम गौशाला / पशु आश्रय स्थल जनसहभागिता योजनाग्राम पंचायत स्तर पर; अनुमानित लागत ₹1 करोड़ (90 : 10)15 ग्राम गौशालाओं को ₹6.80 करोड़
वध/तस्करी से बचाए गए गोवंश हेतु अनुदानगौशालाओं में रखे ऐसे गोवंश की 1 वर्ष तक देखभाल हेतु6 गौशालाओं को ₹34 लाख
मूल्य संवर्धन प्रशिक्षणगौ-उत्पादों के प्रसंस्करण का प्रशिक्षण — जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, पाली के संस्थानों में13 बैच, 455 गौशाला प्रबंधक; ₹14.13 लाख

गोपालन

राज्य देशी गोवंश नस्लों के संरक्षण व विकास को गौशालाओं व नंदीशालाओं के माध्यम से बढ़ावा देता है — "गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन निधि 2016 व 2021" के अंतर्गत, साथ ही जैविक खेती-चारा उत्पादन-पंचगव्य मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। राज्य में पृथक गोपालन विभाग 2014 में बना।

गतिविधिइकाईलक्ष्य (दिसं. 2025 तक)उपलब्धि
औसत दुग्ध संकलनलाख किग्रा/दिन36.9530.29
औसत दुग्ध विपणनलाख लीटर/दिन26.6322.60
पशु आहार बिक्री (संघ)हज़ार मी. टन356219
पुनर्जवित समितियाँसंख्या675546
नई समितियाँसंख्या1467627
कृत्रिम एवं प्राकृतिक गर्भाधानहज़ार310194
बिंदुविवरण
शुभारंभ / उद्देश्य10 सितंबर 2020; मछली उत्पादन बढ़ाना, मत्स्य अवसंरचना सुधारना, आजीविका बढ़ाना (तालाब, झींगा पालन, पिंजरा पालन, आहार मिल पर अनुदान)
2025-26 (दिसंबर तक)19 लाभार्थियों को 17.06 हे. मछली तालाब; 5 को 8.80 हे. झींगा पालन तालाब; 12 पिंजरा पालन इकाइयाँ (18/इकाई); 5 को परिवहन वाहन; कुल 41 लाभार्थियों को ₹467.72 लाख (जन आधार DBT, SNA स्पर्श पोर्टल)
बजट 2026-27 — डेयरी

राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष : ₹1,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़। सरस ब्रांड विस्तार : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में। मुर्ग दाना इकाई : तबीजी (अजमेर)। नए/विस्तारित डेयरी संयंत्र — अलवर (≈3 लाख ली./दिन), बाराँ व सिरोही (50-50 हज़ार ली./दिन), जैसलमेर संयंत्र की क्षमता 30 से 50 हज़ार ली./दिन।

12डेयरी विकास

डेयरी विकास कार्यक्रम सहकारी समितियों के माध्यम से चलता है — दिसंबर 2025 तक 19,643 डेयरी सहकारी समितियाँ, 24 ज़िला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों से और शीर्ष संस्था राजस्थान सहकारी डेयरी फ़ेडरेशन लिमिटेड (RCDF), जयपुर (स्थापना 1977, ब्रांड "सरस") से जुड़ी हैं।

दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता — 51.40 लाख ली./दिन; औसत दुग्ध संकलन — 30.29 लाख किग्रा/दिन; दुग्ध उत्पादकों को भुगतान — ₹4,304.91 करोड़ (दिसंबर 2025 तक)। लगभग 10 लाख दुग्ध उत्पादक सहकारी डेयरी कार्यक्रम से जुड़े हैं और उन्हें पूरे वर्ष दूध का भुगतान मिलता है।

तालिका 1.11 : डेयरी गतिविधियाँ 2025-26

मत्स्य पालन

मत्स्य क्षेत्र राज्य के जल संसाधनों का उपयोग करते हुए सस्ता, प्रोटीन-युक्त भोजन और विशेषकर ग्रामीण-वंचित समुदायों को रोज़गार देता है।

कुल जल क्षेत्र — 4.30 लाख हेक्टेयर ( बड़े-मध्यम जलाशय 3.36 लाख हे. + छोटे तालाब-टैंक 0.94 लाख हे.)।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY)

वर्षमछली उत्पादन (मी. टन)मत्स्य बीज उत्पादन/संचय (मिलियन फ़्राई)राजस्व (₹ करोड़)
2021-2265,693.921,181.4041.35
2022-2379,286.401,197.7468.92
2023-2491,349.431,364.0067.95
2024-251,13,647.211,382.3966.66
2025-26 (दिसं. तक)78,013.031,335.9020.25
योजनामुख्य प्रावधानप्रगति (दिसंबर 2025 तक)
पीएम किसान पोर्टलप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में पंजीकरण व भूमि सत्यापनभूमि सत्यापन हेतु 75.17 लाख आवेदन; 21वीं किस्त में 65.29 लाख किसानों को ₹1,305.80 करोड़; 69.42 लाख किसानों का ई-केवाईसी व आधार सीडिंग; लाभार्थियों की संख्या में राज्य देश में 5वें स्थान पर
मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजनापीएम किसान के लाभार्थियों को अतिरिक्त राज्य सहायता (घोषणा बजट 2024-25); बजट 2025-26 में वार्षिक सहायता ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,0004थी किस्त में 71.79 लाख किसानों को ₹717.96 करोड़ (₹1,000 प्रति किसान, DBT)
लघु एवं सीमांत वृद्ध कृषक सम्मान पेंशन योजनापात्र — महिला 55+ और पुरुष 58+ वर्ष के लघु-सीमांत किसान; ₹1,250 प्रति माह (बजट चर्चा फ़रवरी 2026 : ₹50 बढ़ाकर ₹1,300; आगामी वर्ष ₹1,350)1.97 लाख लाभार्थ; ₹234.89 करोड़ व्यय
राजस्थान कृषक समर्थन योजनान्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के ऊपर ₹150 प्रति क्विंटल बोनसराज्य सरकार द्वारा ₹320.50 करोड़ का भुगतान
MSP पर गेहूँ ख़रीद (रबी विपणन मौसम 2025-26)10 मार्च – 30 जून 2025; MSP ₹2,425 प्रति क्विंटल327 केंद्रों से 21.37 लाख मी. टन ख़रीद, 1.73 लाख किसान लाभान्वित
राजस्थान कृषक ऋण माफ़ी योजना30 नवंबर 2018 को बकाया अल्पकालीन फ़सली ऋण माफ़; योजना 2019 में अवधिपार मध्यम व दीर्घकालीन ऋण पर ₹2 लाख तक अतिरिक्त राहत20.92 लाख किसानों को ₹7,881.89 करोड़ की राहत (मार्च 2025 तक)
समेकित बाल विकास सेवाओं में पूरक पोषाहारकॉनफ़ेड के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पूरक पोषण सामग्री की आपूर्तिलगभग 63,000 आंगनबाड़ी केंद्र; ₹662.50 करोड़ की आपूर्ति
किसान कलेवा योजना"सुपर", "ए" और "बी" श्रेणी की कृषि उपज मंडी समितियों में किसानों व मज़दूरों को ₹5 में गुणवत्तापूर्ण भोजन; फल-सब्ज़ी मंडी यार्ड छोड़कर सभी आर्थिक रूप से सक्षम मंडियों तक विस्तार18.26 लाख किसान व श्रमिक लाभान्वित; ₹5.09 करोड़ व्यय
महिला कृषक प्रशिक्षणग्राम पंचायत स्तर पर एक-दिवसीय प्रशिक्षण; 30 महिला किसानों के प्रति प्रशिक्षण पर ₹3,000 सहायता; कृषि तकनीक का प्रसार2025-26 में 10,105 प्रशिक्षण, 3.03 लाख महिलाएँ लाभान्वित
कृषि शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहनवरिष्ठ माध्यमिक (कृषि) — ₹15,000/वर्ष; बी.एससी./एम.एससी. (कृषि) — ₹25,000/वर्ष; पीएच.डी. — ₹40,000/वर्ष25,862 छात्राओं को ₹48.03 करोड़

तालिका 1.12 : मछली उत्पादन, मत्स्य बीज एवं राजस्व

13किसान एवं कृषि श्रमिक कल्याण

किसान केवल भोजन पैदा नहीं करते, बल्कि ग्रामीण आजीविका व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के आधार हैं — बाज़ार क़ीमतों के उतार-चढ़ाव व जलवायु परिवर्तन के बीच कल्याण योजनाएँ आय को स्थिर रखती हैं और छोटे किसानों व भूमिहीन श्रमिकों को शिक्षा-स्वास्थ्य-सामाजिक सुरक्षा से जोड़ती हैं।

योजनामुख्य प्रावधानप्रगति (दिसंबर 2025 तक)
मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजनाकृषि व विपणन कार्य के दौरान दुर्घटना/मृत्यु पर आर्थिक सहायता — किसान, खेतिहर मज़दूर और हम्माल1,938 लाभार्थियों को ₹31.06 करोड़
सहायता का प्रकारप्रावधानप्रगति 2025-26
प्रसूति सहायताअनुज्ञप्तिधारी महिला श्रमिक को 45 दिन की मज़दूरी के बराबर राशि (अधिकतम दो प्रसव); नवजात के पिता को 15 दिन की मज़दूरी24 महिला श्रमिकों को ₹1.18 लाख
विवाह सहायतास्वयं के विवाह या अधिकतम दो पुत्रियों के विवाह पर ₹75,000461 श्रमिकों को ₹341 लाख
छात्रवृत्ति / मेधावी पुरस्कारश्रमिकों के 60% या अधिक अंक लाने वाले बच्चों को181 विद्यार्थियों को ₹7.11 लाख
चिकित्सा सहायताकैंसर, हृदय, यकृत, गुर्दा जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज हेतु ₹20,0006 श्रमिकों को ₹1.05 लाख
मद (कृषि बजट 2026-27)राशि (₹ करोड़)
(क) कृषि अनुदान (Subsidy)42,191.11
कृषि बिजली टैरिफ़ अनुदान33,272.39
विभिन्न योजनाओं पर अनुदान4,724.37
ब्याज अनुदान (ऋण)1,683.50
गौशालाओं को अनुदान1,401.22
डेयरी विपणन अनुदान724.00
(ख) कृषि-आधारित अन्य गतिविधियाँ57,271.55
कृषि साख (ऋण)25,480.00
कृषि उपज मंडी समितियाँ9,001.71
सामाजिक सुरक्षा7,039.83
कृषि बीमा5,987.93
क्षेत्रघोषणा
लक्ष्यवर्ष 2047 तक राजस्थान को तकनीक-आधारित अग्रणी कृषि शक्ति बनाना; फ़ोकस — कृषि विकास + कृषक कल्याण + अन्नदाता की आय वृद्धि

महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना (2015)

14बजट 2026-27 : कृषि से जुड़ी प्रमुख घोषणाएँ

कुल कृषि बजट 2026-27 — ₹1,19,408 करोड़ (कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र), जिसमें से समेकित निधि से ₹69,422.99 करोड़; पिछले वर्ष से वृद्धि 7.59% (GSDP का 5.55%)।

क्षेत्रघोषणा
सिंचाईसूक्ष्म सिंचाई का हिस्सा सकल बोए गए क्षेत्र में 24% से बढ़ाकर 2030 तक 51%; सिंचाई कार्यों पर ₹11,300 करोड़ से अधिक; लगभग 5,000 गाँवों में 1.10 लाख जल संग्रहण संरचनाएँ (₹2,500 करोड़); यमुना जल — हथिनीकुंड बैराज से शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूँ, चूरू) तक
सौर ऊर्जाकिसानों हेतु 50,000 सौर पंप (₹1,500 करोड़); 500 सौर फ़सल ड्रायर
तारबंदी (नीलगाय व जंगली पशुओं से सुरक्षा)आगामी वर्ष 50,000 किसान, 20,000 कि.मी. तारबंदी, ₹228 करोड़ अनुदान; सामुदायिक तारबंदी के लिए न्यूनतम किसानों की संख्या 10 से घटाकर 7
वर्म-कम्पोस्ट5,000 से अधिक आबादी वाली 3,496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्म-कम्पोस्ट इकाइयाँ
डिजिटल कृषिRaj-AIMS (राजस्थान कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली) — कृत्रिम बुद्धिमत्ता, GIS, सुदूर संवेदन व उपग्रह चित्रों से मौसम-आधारित सलाह; एग्री-स्टैक PMU — डेटा-आधारित सेवाएँ; कार्बन क्रेडिट पायलट परियोजना
यंत्रीकरण500 नए कस्टम हायरिंग केंद्र (₹96 करोड़); कृषि यंत्रों पर ₹160 करोड़ अनुदान
उपनिवेशन क्षेत्र राहतकृषि भूमि की बकाया किस्तें 1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026 के बीच एकमुश्त जमा करने पर ब्याज में 100% छूट
गेहूँ ख़रीद 2026-27 (बजट चर्चा, 27 फ़रवरी 2026)MSP ₹2,585 + राज्य बोनस ₹150 = ₹2,735 प्रति क्विंटल; ख़रीद 10 मार्च 2026 से; लगभग 383 केंद्र; ख़रीद एजेंसियाँ — भारतीय खाद्य निगम के साथ NAFED, NCCF और राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम
अन्यकृषि विपणन के नए खंड कार्यालय — पाली, प्रतापगढ़, भरतपुर, बाराँ; ज्ञान संवर्धन कार्यक्रम में 3,300 किसानों का भ्रमण; बूँदी की केशोरायपाटन शुगर मिल को PPP मोड पर चलाने के प्रयास
कार्यक्रमविवरण
ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM) 2026राज्य स्तरीय कृषि-तकनीक सम्मेलन, जयपुर; इसकी तैयारी में 23 जनवरी 2026 से प्रदेश के प्रत्येक गिरदावर सर्कल पर लगभग 2,839 ग्राम उत्थान शिविर
राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2025राजस्थान से — हर्षित झूरिया (सीकर) : सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान (तृतीय); विकास कुमार (हनुमानगढ़) : सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (द्वितीय)
गौकाष्ठ लोहड़ी उत्सवजयपुर, 13 जनवरी 2026 — लकड़ी की जगह गोबर से बनी "गौकाष्ठ" के उपयोग को बढ़ावा
कृषक अधिकार पंजीयन पखवाड़ाएग्री-स्टैक के तहत किसानों का डिजिटल पंजीयन (किसान पहचान) अभियान
कृषि ज्ञान धारा 2.016 अक्टूबर 2025, दुर्गापुरा (जयपुर) — "हरित दर्पण" पत्रिका का विमोचन
छत पर खेती (Rooftop Farming)दुर्गापुरा (जयपुर) से आयोजन — जयपुर नगर निगम क्षेत्र में छतों पर सब्ज़ी उगाने को बढ़ावा
मुख्य परीक्षा दृष्टि से — अध्याय का सार (विश्लेषण)

पशुधन = कृषि की रीढ़ : कृषि GVA में पशुधन (49.35%) > फ़सलें (42.61%); सूखा-प्रवण राज्य में पशुपालन आय को स्थिर रखता है — इसलिए मंगला पशु बीमा, 1962 सेवा, गोपाल क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएँ केंद्र में हैं। मानसून पर निर्भरता : 2025-26 में ख़रीफ़ अनाज 26.71% घटा व कृषि की वास्तविक वृद्धि 0.22% रह गई — समाधान : सूक्ष्म सिंचाई (24% → 51%), सूखा-रोधी फ़सलें, जल संरक्षण। विखंडन की चुनौती : औसत जोत 3.07 से घटकर 2.73 हे.; सीमांत जोतें 40% से अधिक — समाधान : सहकारिता, FPO, कस्टम हायरिंग केंद्र, ऊर्ध्वाधर खेती जैसी तकनीकें। मूल्य संवर्धन की दिशा : बाजरा, सरसों, ग्वार, जीरा में अग्रणी होने के बावजूद प्रसंस्करण कम — PM-FME, मसाला कॉन्क्लेव, राज स्पाइस ऐप, मिशन राज GIFT, GI उत्पाद इसी कमी को दूर करने के कदम हैं।

अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम एवं तथ्य

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