🌍 अध्याय 09/11 — लोक प्रशासन

तुलनात्मक लोक प्रशासन

अर्थ, विकास, रिग्स के तीन रुझान; अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन की प्रशासनिक व्यवस्थाएँ; भारत से तुलना
📖 कहानी से शुरुआत — चार दोस्त, एक बीमारी, चार इलाज

सोचिए आपके 4 दोस्त हैं और चारों को एक ही बीमारी है — "प्रशासन में देरी और भ्रष्टाचार"। पर चारों का इलाज बिल्कुल अलग-अलग तरीक़े से होता है। अमेरिका वाला दोस्त कहता है — "मेरे यहाँ नौकरी सिर्फ़ कड़ी परीक्षा पास करने वाले को मिलती है, नेता की मर्ज़ी से नहीं" (योग्यता — Merit)। ब्रिटेन वाला दोस्त कहता है — "मेरे यहाँ अफ़सर कभी बदलता नहीं, बस मंत्री बदलते रहते हैं" (स्थायित्व — Permanence)।

फ्रांस वाला दोस्त कहता है — "मेरे यहाँ टॉप अफ़सर बनने के लिए एक ख़ास स्कूल से पास होना ज़रूरी है, जैसे भारत में IAS के लिए मसूरी अकादमी" (विशिष्ट प्रशिक्षण)। और चीन वाला दोस्त कहता है — "मेरे यहाँ हर बड़े फ़ैसले के पीछे असली ताक़त सरकार की नहीं, बल्कि पार्टी की होती है" (पार्टी-नियंत्रण)।

इन चारों तरीक़ों को साथ रखकर पढ़ना और यह समझना कि कौन-सा तरीक़ा किस समस्या को बेहतर हल करता है — यही है तुलनात्मक लोक प्रशासन (Comparative Public Administration)। इससे भारत भी सीखता है कि अपने प्रशासन को और बेहतर कैसे बनाया जाए।

📋 विषय-सूची — इस अध्याय में क्या पढ़ेंगे?

1. तुलनात्मक लोक प्रशासन (Comparative Public Administration) — अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र एवं महत्व

2. विकास एवं प्रमुख विद्वान — तुलनात्मक प्रशासन समूह, रिग्स के तीन रुझान (Three Trends), हेडी के उपागम

3. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का प्रशासनिक तंत्र — राष्ट्रपति प्रणाली, लूट से योग्यता प्रणाली

4. यूनाइटेड किंगडम (UK) का प्रशासनिक तंत्र — वेस्टमिंस्टर मॉडल, सिविल सेवा सुधार

5. फ्रांस (France) का प्रशासनिक तंत्र — अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली, प्रीफ़ेक्ट, प्रशासनिक न्यायालय

6. चीन (China) का प्रशासनिक तंत्र — एकल-दलीय साम्यवादी मॉडल, दोहरा पदानुक्रम, कैडर प्रणाली

7. तुलनात्मक विश्लेषण — भारत बनाम USA, UK, France, China; भारत की सीख; समय-रेखा

1तुलनात्मक लोक प्रशासन — अर्थ, प्रकृति एवं महत्व

तुलनात्मक लोक प्रशासन (Comparative Public Administration — CPA) का सीधा-सा अर्थ है — अलग-अलग देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, संरचनाओं, प्रक्रियाओं और व्यवहारों का आपस में तुलनात्मक अध्ययन करना, ताकि यह समझा जा सके कि एक जैसी समस्या को अलग-अलग देश किस तरह अलग ढंग से सुलझाते हैं, और इनमें से कौन-सा तरीक़ा सबसे उपयुक्त है।

📘 आसान परिभाषा — तुलनात्मक लोक प्रशासन (Comparative Public Administration)

शास्त्रीय अर्थ: विभिन्न संस्कृतियों और राष्ट्रीय परिवेशों में लागू लोक प्रशासन के सिद्धांतों का अध्ययन, और उन तथ्यों का संग्रह जिनसे इन सिद्धांतों की जाँच और विस्तार हो सके। तुलनात्मक प्रशासन समूह ने इसे इसी अर्थ में परिभाषित किया था।

सरल भाषा में: अपने घर के तौर-तरीक़े दूसरों के घरों से मिलाकर देखना — कौन-सी आदत अच्छी है, कौन-सी बदलनी चाहिए। उदाहरण: भारत का "ज़िला कलेक्टर" और फ्रांस का "प्रीफ़ेक्ट" — दोनों केंद्र या राज्य सरकार के प्रतिनिधि; दोनों की तुलना से समझ आता है कि केंद्रीकृत प्रशासन ज़िले तक कैसे पहुँचता है।

🎓 चिंतक-परिचय — तुलनात्मक लोक प्रशासन की परिभाषा एवं औचित्य — रॉबर्ट डाहल (Robert Dahl)

निबंध: "लोक प्रशासन का विज्ञान — तीन समस्याएँ" | वर्ष: 1947

1.1 प्रकृति और क्षेत्र

1.2 महत्व (Significance)

विद्वान (Scholar)प्रमुख योगदान (Contribution)
फ्रेड रिग्स (Fred W. Riggs)तुलनात्मक लोक प्रशासन के जनक माने जाते हैं — पारिस्थितिक उपागम (Ecological Approach), प्रिज्मीय समाज मॉडल एवं तुलनात्मक लोक प्रशासन के तीन रुझान (देखें अध्याय 02 और अगला खंड) के प्रतिपादक।
फेरेल हेडी (Ferrel Heady)"लोक प्रशासन: एक तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य (Public Administration: A Comparative Perspective, 1966)" पुस्तक के लेखक — विकासशील देशों के प्रशासनिक मॉडलों और राजनीतिक व्यवस्थाओं का वर्गीकरण किया।
रॉबर्ट डाहल (Robert Dahl)"लोक प्रशासन का विज्ञान: तीन समस्याएँ (1947)" निबंध में तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।
ड्वाइट वाल्डो (Dwight Waldo)लोक प्रशासन को मूल्य-निरपेक्ष (Value-free) विज्ञान मानने की धारणा को चुनौती दी — विभिन्न देशों के प्रशासन पर संस्कृति और मूल्यों के प्रभाव को रेखांकित किया।
वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson)1887 के निबंध में ही यूरोपीय (विशेषकर फ्रांस और प्रशा की) प्रशासनिक प्रणालियों से सीखने की बात कही थी — तुलनात्मक लोक प्रशासन का बीज यहीं से पड़ा (देखें अध्याय 01)। उनका प्रसिद्ध तर्क — "हत्यारे से भी चाकू तेज़ करना सीखा जा सकता है, बिना उसकी नीयत अपनाए।"
एडवर्ड वाइडनर (Edward Weidner)विकास प्रशासन की अवधारणा — विकासशील देशों में प्रशासन को विकास का साधन माना।
💡 सरल भाषा में समझें — डॉक्टरों की तुलना

जैसे मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला छात्र सिर्फ़ भारत का इलाज नहीं, बल्कि जापान, जर्मनी और अमेरिका में इलाज के तरीक़े भी पढ़ता है ताकि सबसे अच्छा तरीक़ा चुन सके — ठीक वैसे ही RAS/IAS परीक्षा की तैयारी करने वाला छात्र भी अलग-अलग देशों के प्रशासनिक मॉडल पढ़ता है ताकि भारतीय प्रशासन की ख़ूबियों और कमियों को बेहतर समझ सके।

🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
तुलनात्मक लोक प्रशासन
विभिन्न देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन
रॉबर्ट डाहल (1947)
तुलना के बिना विज्ञान का दावा खोखला; तीन समस्याएँ
तुलना के स्तर
अंतर-राष्ट्रीय, अंतर-राज्यीय, अंतर-संस्थागत, ऐतिहासिक
सर्वोत्तम व्यवहार
नेक्स्ट स्टेप्स से प्रेरित स्वायत्त एजेंसियाँ
विल्सन (1887)
यूरोप से सीखना — तुलना का बीज
प्रीफ़ेक्ट
फ्रांस — भारत के ज़िला कलेक्टर के समान

1.3 तुलनात्मक लोक प्रशासन के उदय के कारण

तुलना करना मानव स्वभाव है, और मानव सभ्यता के आरंभ से ही तुलना का प्रचलन रहा है। फिर भी लोक प्रशासन में व्यवस्थित तुलनात्मक अध्ययन अपेक्षाकृत नई अवधारणा है — द्वितीय विश्व युद्ध अपने साथ सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और भौगोलिक परिवर्तन लाया, और युद्धोत्तर काल का पहला बड़ा विकास तुलनात्मक लोक प्रशासन ही था। इसका लक्ष्य था लोक प्रशासन को अधिक वैज्ञानिक बनाना।

कारणव्याख्या
1. परंपरागत दृष्टिकोण की अपर्याप्ततातेज़ी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों को समझने के लिए परंपरागत लोक प्रशासन के पास उपयुक्त उपागम नहीं था — विद्यार्थी एक देश का प्रशासन तो जानता था, पर दूसरे देशों से उसकी समानता या अंतर नहीं देख पाता था।
2. शोध के नए साधनलोक प्रशासन को विज्ञान का दर्जा दिलाने के लिए उसे संकुचित दायरे से निकालकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने के प्रयास — इसी हेतु तुलनात्मक अध्ययन शुरू हुए।
3. अंतरराष्ट्रीय निर्भरताकोई देश हर क्षेत्र में पूर्णतः आत्मनिर्भर नहीं; आयात-निर्यात और मेलजोल बढ़ने से दूसरे देशों के अभिकरणों से अपनी तुलना स्वतः होने लगी।
4. विश्व युद्धयुद्ध के दौरान अमेरिकी विद्वान और प्रशासक अनेक देशों में गए और उनकी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विशेषताएँ जानीं।
5. नव-स्वतंत्र राष्ट्रों का उदयभारत सहित एशिया-अफ़्रीका के देश स्वतंत्र हुए — इन्हें "तृतीय विश्व" कहा गया; तीव्र विकास के लिए कौन-सा प्रशासनिक प्रतिमान उपयुक्त है, इस पर शोध हुए; अमेरिकी विदेशी सहायता कार्यक्रमों ने भी योगदान दिया। 1952 में प्रिंसटन (अमेरिका) का "तुलनात्मक प्रशासन सम्मेलन" इस दिशा का प्रारंभिक पड़ाव था।
विद्वानपरिभाषा
निमरोद रफ़ायली (Nimrod Raphaeli)"तुलनात्मक लोक प्रशासन तुलनात्मक आधार पर लोक प्रशासन का अध्ययन है।"
तुलनात्मक प्रशासन समूह"विभिन्न संस्कृतियों और राष्ट्रीय परिवेशों में प्रयुक्त लोक प्रशासन के सिद्धांत, तथा वह तथ्यात्मक सामग्री जिससे उनका विस्तार और परीक्षण किया जा सके।"
फेरेल हेडी"तुलनात्मक लोक प्रशासन सिद्धांत-निर्माण की प्रक्रिया के समान है।"
फ्रेड रिग्स"तुलनात्मक अध्ययन वह है जो अनुभवजन्य, सामान्यपरक (Nomothetic) और पारिस्थितिक हो।"
टी.एन. चतुर्वेदी"तुलनात्मक लोक प्रशासन के अंतर्गत विभिन्न संस्कृतियों में कार्यरत विभिन्न राज्यों की सार्वजनिक और प्रशासनिक संस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।"

निष्कर्ष: तुलनात्मक लोक प्रशासन ज्ञान की वह नई शाखा है जो दो या अधिक प्रशासनिक संगठनों, देशों और व्यवस्थाओं — उनके अभिकरणों, विभागों, निगमों और प्रक्रियाओं — का तुलनात्मक अध्ययन करती है; यह सामान्यीकरण और वैज्ञानिक विधि पर बल देती है और अंतर-विषयक है।

🎯 तुलनात्मक लोक प्रशासन के पाँच उद्देश्य

1.4 प्रकृति — फेरेल हेडी के चार रूप

तुलनात्मक लोक प्रशासन स्वभाव से ही वैज्ञानिक और तर्कसम्मत है। फेरेल हेडी ने इसकी प्रकृति को चार रूपों में बाँटा (देखें चित्र 9.4) —

हेडी का रूपअर्थ
1. संशोधित परंपरागत (सुधरी हुई पारस्परिक प्रकृति)विविध प्रशासनिक संस्थाओं और संगठनों की परस्पर तुलना करके विश्लेषण से निष्कर्ष निकालना — पारंपरिक संस्थागत अध्ययन, पर देशों की तुलना के साथ।
2. विकास-उन्मुख (विकासमान प्रकृति)सामाजिक-आर्थिक विकास को महत्व — उन आँकड़ों और तथ्यों पर बल जिनसे विकास संभव हो।
3. सामान्य व्यवस्था मॉडल-निर्माणसामाजिक परिवेश के अनुरूप ही प्रशासनिक तंत्र चलता है — इसलिए ऐसा मॉडल बनाना जो समाज और प्रशासन दोनों पर सामान्य रूप से लागू हो (जैसे रिग्स का प्रिज्मीय मॉडल)।
4. मध्य-स्तरीय सिद्धांतऐसे सिद्धांत जो व्यावहारिक रूप से लागू हों और जिनका तुलनात्मक-विश्लेषणात्मक परीक्षण हो सके — विशेषकर नौकरशाही की तुलना।

रॉबर्ट टी. गोलम्बियुस्की के अनुसार तुलनात्मक लोक प्रशासन ध्यान देने योग्य मुद्दों पर बल देता है और परिणाम तथा निर्धारित अध्ययन-पद्धति अपनाने की प्रेरणा देता है। व्यवहार में इसकी प्रकृति में वैज्ञानिकता, सामान्यपरकता, वस्तुनिष्ठता, परिणाम और अनुभवमूलकता — सभी तत्व निहित हैं; और इसकी प्रकृति समझाने में सर्वाधिक योगदान फ्रेड रिग्स का है (तीन रुझान — खंड 2)।

1.5 क्षेत्र — तुलना के तीन स्तर

तुलनात्मक लोक प्रशासन जन्म से ही वैश्वीकृत है — इसका क्षेत्र विश्व के सभी देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाएँ हैं। किसी देश के भीतर (अंतर्देशीय) भी तुलना हो सकती है और देशों के बीच (अंतरराष्ट्रीय) भी — और यह तुलना तीन स्तरों पर होती है:

चित्र 9.1: तुलनात्मक अध्ययन के तीन स्तर — बड़े से छोटे की ओर
चित्र 9.1: तुलनात्मक अध्ययन के तीन स्तर — बड़े से छोटे की ओर
स्तरक्या तुलनाउदाहरण
वृहद्-स्तरीय (Macro)एक देश की सम्पूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था की दूसरे देश की सम्पूर्ण व्यवस्था से — दोनों के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक परिवेश सहितभारत बनाम अमेरिका या फ्रांस का पूरा प्रशासन
मध्यवर्ती (Meso)न पूरी व्यवस्था, न सूक्ष्म अंग — प्रशासन के किसी बड़े भाग की दूसरे देश के समकक्ष भाग सेभारत और अमेरिका की वित्तीय प्रणाली या स्थानीय प्रशासन
लघु-स्तरीय (Micro)किसी विशेष प्रक्रिया की दूसरे देश की समकक्ष व्यवस्था से — आजकल सबसे प्रचलितभारत और अमेरिका में सोशल मीडिया का प्रशासन पर प्रभाव; नवंबर 2016 के विमुद्रीकरण का प्रबंधन बनाम अन्य देशों के केंद्रीय बैंक; भ्रष्टाचार-निरोध — भारत बनाम स्वीडन

इनके अतिरिक्त अंतर्देशीय (देश के भीतर), अंतर-सांस्कृतिक (दो देशों के प्रशासकों का व्यवहार, रीति-रिवाज), समसामयिक (वर्तमान भारत बनाम वर्तमान जर्मनी), संकर-सामयिक (वर्तमान प्रशासन बनाम प्राचीन — जैसे मौर्य और गुप्त काल की न्याय-व्यवस्था) और विकसित, विकासशील तथा अत्यंत पिछड़े देशों के बीच तुलना भी इसके क्षेत्र में आती है।

🧠 याद रखने की ट्रिक — तुलना के स्तर और प्रकार

"मै-मे-मा" — मैक्रो (पूरा देश), मेसो (बड़ा अंग), माइक्रो (एक प्रक्रिया)। प्रकार — "अंतर्देशीय, अंतर-सांस्कृतिक, समसामयिक, संकर-सामयिक"।

1.6 महत्व, आलोचना, संकट और पुनरुत्थान

महत्वव्याख्या
सिद्धांत-निर्माणतुलनात्मक अध्ययन से लोक प्रशासन के अनेक सिद्धांत बने; नए सम्प्रत्यय पाठ्यक्रम में जुड़े।
वैज्ञानिक पद्धतिअध्ययन-पद्धति में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार।
अनुसंधान का विस्तारसामाजिक अनुसंधान का क्षेत्र व्यापक और गहन हुआ, जो पहले सीमित था।
एक-दूसरे से सीखनादेश एक-दूसरे के अनुभव से लाभ लेते हैं — एक देश की व्यवस्था आवश्यक संशोधन के साथ दूसरे में लागू; जैसे भारत ने स्वीडन की ऑम्बड्समैन प्रणाली को लोकपाल के रूप में अपनाने का प्रयास किया (देखें अध्याय 08) — इससे सुशासन सरल हुआ।
समझविद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों और प्रशासकों को दूसरे देशों की व्यवस्था समझने में सहायता।
आलोचना — 1970 का संकट
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यवहार में लागू करने की स्पष्ट विधि नहीं बन पाई।
  • लक्ष्य-आधारित अनुभवमूलक सिद्धांत विकसित नहीं हुए — व्यावहारिक पक्ष कमज़ोर।
  • तुलना के स्पष्ट आधारों का अभाव — हर देश का परिवेश भिन्न; जो एक देश में उचित, वह दूसरे में अनुचित।
  • इन्हीं कारणों से 1970 के दशक की शुरुआत में तुलनात्मक लोक प्रशासन पर संकट छा गया।
पुनरुत्थान — 1980 का दशक
  • कुछ विद्वानों ने विषय की गिरावट रोकने के लिए पुनरुत्थान आंदोलन चलाया।
  • प्रमुख विद्वान — फेरेल हेडी (मुख्य मार्गदर्शक), चार्ल्स टी. गुडसेल, जोंग एस. जून, ओ.पी. द्विवेदी।
  • हेडी का संदेश — पुरानी कमियों का चिंतन छोड़कर नए आकर्षक अवसरों का दोहन करो।
  • परिणाम — अनेक नए उपागम; आज सभी देशों में इसका अध्ययन; लोक प्रशासन की जड़ें विषय और व्यवहार दोनों रूपों में मज़बूत।

निष्कर्ष: एक समय स्वयं लोक प्रशासन अस्तित्व के संकट (पहचान का संकट) से गुज़रा — उस दौर में तुलनात्मक लोक प्रशासन ने ही उसे विषय के रूप में बने रहने का सहारा दिया; इसीलिए कहा जाता है कि तुलनात्मक लोक प्रशासन ने लोक प्रशासन को "जीवन-दान" दिया।

🔑 खंड 1.3-1.6 का कीवर्ड सारांश
प्रिंसटन सम्मेलन
1952 — तुलनात्मक प्रशासन सम्मेलन
उदय के 5 कारण
परंपरा की अपर्याप्तता, शोध, अंतरराष्ट्रीय निर्भरता, विश्व युद्ध, नव-स्वतंत्र राष्ट्र
रफ़ायली
तुलनात्मक आधार पर लोक प्रशासन का अध्ययन
हेडी
सिद्धांत-निर्माण की प्रक्रिया; प्रकृति के 4 रूप
रिग्स
अनुभवजन्य, सामान्यपरक, पारिस्थितिक
तीन स्तर
वृहद्, मध्यवर्ती, लघु
संकट / पुनरुत्थान
1970 का दशक / 1980 का दशक — हेडी, गुडसेल, जून, द्विवेदी
जीवन-दान
पहचान के संकट में लोक प्रशासन को सहारा

2विकास एवं प्रमुख विद्वान — रिग्स के तीन रुझान (Three Trends)

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब अमेरिका ने एशिया और अफ्रीका के नव-स्वतंत्र (Newly Independent) देशों को "विकास सहायता (Development Aid)" देना शुरू किया, तो अमेरिकी प्रशासकों को यह समझने की ज़रूरत महसूस हुई कि इन देशों का प्रशासन अमेरिका जैसा क्यों नहीं चलता — यहीं से तुलनात्मक लोक प्रशासन को एक अलग गति (Momentum) मिली, और 1960 में अमेरिकन सोसाइटी फ़ॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के अंतर्गत "तुलनात्मक प्रशासन समूह (Comparative Administration Group — CAG)" बना, जिसकी अगुवाई फ्रेड रिग्स ने की और जिसे फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन से अनुदान मिला।

चित्र 9.2: तुलनात्मक लोक प्रशासन के विकास की यात्रा
चित्र 9.2: तुलनात्मक लोक प्रशासन के विकास की यात्रा

उत्थान और ठहराव: 1960 के दशक में यह समूह बहुत सक्रिय रहा — सम्मेलन, शोध-पत्र और "तुलनात्मक प्रशासन पत्रिका (Journal of Comparative Administration, 1969)"। पर 1970 के दशक में फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन का अनुदान बंद होने, अत्यधिक सैद्धांतिक मॉडलों की आलोचना और व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रश्न उठने से इसमें ठहराव आया। बाद में 1990 के दशक से वैश्वीकरण, नव लोक प्रबंधन (NPM) और सुशासन की तुलना ने इसे फिर नया रूप दिया — आज विश्व बैंक के शासन सूचकांक और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग भी तुलनात्मक प्रशासन का ही आधुनिक रूप हैं।

🎓 चिंतक-परिचय — तुलनात्मक लोक प्रशासन के तीन रुझान (Three Trends in CPA) — फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स (Fred W. Riggs)

लेख: "तुलनात्मक लोक प्रशासन के अध्ययन में रुझान" | वर्ष: 1962

चित्र 9.3: रिग्स के तीन रुझान — पहले से अब की ओर
चित्र 9.3: रिग्स के तीन रुझान — पहले से अब की ओर

📌 परीक्षा-दृष्टि: रिग्स के तीन रुझान सीधे पूछे जा चुके हैं — "फ्रेड रिग्स द्वारा प्रतिपादित तुलनात्मक लोक प्रशासन के तीन रुझान बताइए।" तीनों जोड़े — आदर्शवादी से अनुभवजन्य, विशिष्ट से सामान्यीकरण, गैर-पारिस्थितिक से पारिस्थितिक — क्रम और अंग्रेज़ी शब्दों सहित शब्दशः याद रखें।

💡 सरल भाषा में समझें — पुराना बनाम नया डॉक्टर

पुराना डॉक्टर सिर्फ़ किताब पढ़कर बताता था कि मरीज़ को "क्या करना चाहिए" (आदर्शवादी)। नया डॉक्टर मरीज़ की टेस्ट-रिपोर्ट और आँकड़े देखकर बताता है कि "वास्तव में क्या हो रहा है" (अनुभवजन्य)। पुराना डॉक्टर सिर्फ़ एक मरीज़ को गहराई से जानता था (विशिष्ट), नया डॉक्टर हज़ारों मरीज़ों के डेटा से सामान्य पैटर्न निकालता है (सामान्यीकरण)। और नया डॉक्टर यह भी देखता है कि मरीज़ किस माहौल — प्रदूषण, खान-पान, तनाव — में रहता है (पारिस्थितिक)। यही तीन बदलाव रिग्स ने लोक प्रशासन के अध्ययन में भी बताए।

2.1 रिग्स के मॉडल — संक्षेप में

रिग्स ने समाजों की तुलना के लिए दो प्रसिद्ध मॉडल दिए (विस्तार अध्याय 02 में): (1) कृषि-प्रधान बनाम उद्योग-प्रधान (Agraria–Industria, 1956-57), बीच में संक्रमणशील "ट्रांज़िशिया"; (2) संयुक्त–प्रिज्मीय–विवर्तित (Fused–Prismatic–Diffracted) — जैसे सफ़ेद प्रकाश (संयुक्त, पारंपरिक समाज) प्रिज़्म से गुज़रकर इंद्रधनुष (विवर्तित, आधुनिक समाज) बनता है, वैसे ही विकासशील देश "प्रिज्मीय" अवस्था में हैं। प्रिज्मीय समाज के प्रशासनिक उपतंत्र को उन्होंने "साला मॉडल (Sala Model)" कहा, जिसकी विशेषताएँ हैं — विषमता (Heterogeneity), औपचारिकतावाद (Formalism) और अतिव्यापन (Overlapping) — यानी क़ानून कागज़ पर कुछ, व्यवहार में कुछ और; नियुक्ति में योग्यता के साथ जाति-रिश्तेदारी का प्रभाव।

2.2 फेरेल हेडी — उपागम और राजनीतिक व्यवस्थाओं का वर्गीकरण

चित्र 9.4: फेरेल हेडी के अनुसार तुलनात्मक अध्ययन के चार उपागम
चित्र 9.4: फेरेल हेडी के अनुसार तुलनात्मक अध्ययन के चार उपागम

हेडी ने कहा कि हर देश के प्रशासन का अध्ययन उस देश की राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में होना चाहिए, क्योंकि नौकरशाही की भूमिका राजनीतिक ढाँचे से तय होती है। उन्होंने विकासशील देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं का वर्गीकरण इस प्रकार किया:

हेडी का वर्गपहचाननौकरशाही की स्थिति
परंपरागत निरंकुश (Traditional Autocratic)राजशाही, वंशानुगत शासकशासक के प्रति व्यक्तिगत निष्ठा
नौकरशाही अभिजन (Bureaucratic Elite)सैनिक या असैनिक नौकरशाह ही शासकनौकरशाही सबसे शक्तिशाली
बहुतंत्रीय प्रतिस्पर्धी (Polyarchal Competitive)प्रतिस्पर्धी दल, नियमित चुनावराजनीतिक नियंत्रण में तटस्थ सेवा — भारत इसी के निकट
प्रभावी-दल अर्ध-प्रतिस्पर्धी (Dominant-party Semi-competitive)एक दल का लंबा वर्चस्व, विपक्ष कमज़ोरदल और नौकरशाही में घनिष्ठ संबंध
प्रभावी-दल लामबंदी (Dominant-party Mobilization)एक दल, जन-लामबंदी की विचारधारानौकरशाही दल के लक्ष्यों का साधन
साम्यवादी सर्वाधिकारवादी (Communist Totalitarian)साम्यवादी दल का पूर्ण नियंत्रणदल के अधीन कैडर-नौकरशाही — चीन का उदाहरण

2.3 तुलनात्मक अध्ययन की सीमाएँ

🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
CAG
तुलनात्मक प्रशासन समूह — 1960; रिग्स; फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन
रिग्स के तीन रुझान
1962; आदर्श से अनुभव, विशिष्ट से सामान्य, गैर-पारिस्थितिक से पारिस्थितिक
प्रिज्मीय समाज
संयुक्त, प्रिज्मीय, विवर्तित; साला मॉडल
साला की विशेषताएँ
विषमता, औपचारिकतावाद, अतिव्यापन
फेरेल हेडी
1966; 4 उपागम; 6 प्रकार की राजनीतिक व्यवस्थाएँ
ठहराव
1970 के दशक में अनुदान बंद; फिर NPM, सुशासन की तुलना

2.4 विकास प्रशासन (Development Administration) — तुलनात्मक लोक प्रशासन की सह-उपज

विकास प्रशासन की अवधारणा उन विकासशील देशों में, जो आर्थिक वृद्धि के लिए प्रयत्नशील थे, लोक प्रशासन के तुलनात्मक अध्ययन की सह-उपज है। परंपरागत या नियामक प्रशासन (Regulatory Administration) का मुख्य ध्येय सुरक्षा, क़ानून-व्यवस्था और राजस्व था; विकास प्रशासन का मुख्य लक्ष्य लोक-कल्याण है — यह सरकार की हर उस गतिविधि का नाम है जिसमें जन-कल्याण या राष्ट्रीय विकास निहित है, और जो अर्थव्यवस्था में योजनाबद्ध ढंग से परिमाणात्मक तथा गुणात्मक बदलाव लाती है।

तथ्यविवरण
पहला प्रयोगभारतीय विद्वान यू.एल. गोस्वामी — 1955 के लेख "भारत में विकास प्रशासन की संरचना (The Structure of Development Administration in India)" में।
जनकअमेरिकी विद्वान जॉर्ज गैंट (George Gant) — इसी काल में शब्द का प्रयोग; पुस्तक "विकास प्रशासन: अवधारणाएँ, लक्ष्य और विधियाँ" (1979)।
सबसे बड़े भाष्यकारएडवर्ड डब्ल्यू. वाइडनर — पहली बार अवधारणात्मक परिभाषा दी।
अन्य योगदानकर्ताफ्रेड रिग्स, जोसेफ ला पालोम्बरा, अल्बर्ट वाटरसन।
औपचारिक मान्यताअमेरिकन सोसाइटी फ़ॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के तुलनात्मक प्रशासन समूह (1960) और सामाजिक विज्ञान शोध परिषद् की तुलनात्मक राजनीति समिति ने बौद्धिक आधार दिया।
🌱 उद्भव के कारण (1950-60 का दशक)
विद्वानपरिभाषा
एडवर्ड वाइडनर"विकास प्रशासन राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए संगठन का मार्गदर्शन करता है" — यह मुख्यतः कार्योन्मुख और लक्ष्योन्मुख प्रशासनिक प्रणाली पर बल देता है।
फ्रेड रिग्स"विकास प्रशासन का संबंध विकास कार्यक्रमों के प्रशासन, बड़े संगठनों (विशेषकर सरकार) की प्रणालियों, और विकास-लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नीतियों तथा योजनाओं के क्रियान्वयन से है।"
डोनाल्ड सी. स्टोन"विकास प्रशासन निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति के लिए संयुक्त प्रयास के रूप में सभी तत्वों और साधनों (मानवीय और भौतिक) का सम्मिश्रण है; इसका लक्ष्य निर्धारित समय-क्रम में पूर्व-निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति है।"
📘 आसान परिभाषा — विकास प्रशासन (Development Administration)

शास्त्रीय अर्थ: सरकार द्वारा योजनाबद्ध परिवर्तन के माध्यम से राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों को निर्धारित समय में प्राप्त करने के लिए संगठनों का लक्ष्योन्मुख और कार्योन्मुख मार्गदर्शन।

सरल भाषा में: "विकास" यानी निरंतर आगे बढ़ना और "प्रशासन" यानी सेवा करना — जनता की सेवा के लिए विकास का काम करने वाला प्रशासन। उदाहरण: मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण रोज़गार देना, या जन-धन योजना से हर व्यक्ति का बैंक खाता खुलवाकर वित्तीय समावेशन — ये विकास प्रशासन हैं; जबकि थाने में FIR दर्ज करना परंपरागत (नियामक) प्रशासन।

विशेषताअर्थ
1. परिवर्तनशीलकेंद्र-बिंदु सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक परिवर्तन — परिवर्तनशीलता इसकी "बहुमूल्य पूँजी"।
2. विकासात्मक प्रकृतिनए सुधारों और नवाचारों पर निर्भर; पिछड़े समाज का विकास।
3. लोकतांत्रिक मूल्यजन-आकांक्षाओं की पूर्ति; मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों से अलग नहीं।
4. आधुनिकीकरणआधुनिक दृष्टिकोण; विकसित देशों से मानक और तकनीक लेकर प्रशासनिक आधुनिकीकरण।
5. प्रशासनिक कुशलताकुशलता के बिना विकास-उद्देश्य संभव नहीं — प्रशासनिक विकास से कुशलता बढ़ाना।
6. आर्थिक विकासआर्थिक योजनाएँ और विकास कार्यक्रम इसी के सहयोग से लागू; आर्थिक प्रगति का मार्ग।
7. परिणामोन्मुखीनिर्धारित समय में अच्छे परिणाम — परिणाम को अधिक महत्व।
8. प्रतिबद्धतापिछड़े और वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति कटिबद्धता।
9. तात्कालिकतासमय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार तत्काल निर्णय।
10. जन-सहभागिताकार्यक्रम जनता के लिए हैं, इसलिए भागीदारी के बिना निष्फल — मनरेगा, जन-धन की सफलता इसी से।
🧠 याद रखने की ट्रिक — विकास प्रशासन की 10 विशेषताएँ

"परि-वि-लो-आ, कु-आ-प, प्र-ता-ज" — परिवर्तनशील, विकासात्मक, लोकतांत्रिक, आधुनिक; कुशल, आर्थिक, परिणामोन्मुखी; प्रतिबद्ध, तात्कालिक, जन-सहभागी।

चित्र 9.5: परम्परागत प्रशासन बनाम विकास प्रशासन
चित्र 9.5: परम्परागत प्रशासन बनाम विकास प्रशासन
आधारपरम्परागत (नियामक) प्रशासनविकास प्रशासन
दिशायथास्थिति-निर्देशितपरिवर्तन-निर्देशित
संरचनापदसोपानात्मक और कठोरगतिशील, लचीली, नमनीय
बलमितव्ययिता और दक्षतालक्ष्य-प्राप्ति की प्रभाविता; वृद्धि-अभिमुखी
उद्देश्यसरल, सीमितजटिल, अनेक
सरोकारदैनिक सामान्य कार्यनई ज़िम्मेदारियाँ
निर्णयकेंद्रीकृत; आदेशात्मकविकेंद्रीकृत; सहभागी, जनवादी
योजनाकम निर्भरयोजना पर बहुत निर्भर
नवाचारसंगठनात्मक बदलाव का विरोधरचनात्मक, आविष्कारक
अभिमुखताकार्य-अभिमुखी, प्रस्थिति-अभिमुखी, अंतर्मुखीसंबंध-अभिमुखी, भविष्य-अभिमुखी, बहिर्मुखी
समयपूर्णतः निर्देशित नहींनिश्चित समय में कार्य पूरा

दोनों पूरक हैं: क़ानून-व्यवस्था स्थापित हुए बिना विकास असंभव है — इसलिए परंपरागत प्रशासन भी आवश्यक है। विलियम वुड तो दोनों में कोई अंतर ही नहीं मानते — एक के बिना दूसरा क़ायम नहीं रह सकता, इसलिए इनमें भेद करना अवास्तविक और अतिसरल है। यह धारणा भी ग़लत है कि विकास प्रशासन केवल विकासशील देशों से संबंधित है — विकास की कोई सीमा नहीं, इसलिए हर अर्थव्यवस्था और शासन-व्यवस्था में विकास प्रशासन की आवश्यकता बनी रहती है।

🗺️ क्षेत्र और महत्व

2.5 प्रशासनिक विकास (Administrative Development)

विकास के लिए लगी प्रशासनिक इकाइयाँ और कार्मिक ही विकास प्रशासन हैं — और टिकाऊ, समयानुकूल विकास के लिए सक्षम प्रशासनिक तंत्र चाहिए; इसलिए विकास-कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों का व्यवस्थित विकास ही प्रशासनिक विकास है। उदाहरण — विद्यालय का पूरा स्टाफ़ विकास प्रशासन का भाग है (बच्चों को पढ़ाकर राष्ट्र-विकास); पर जब शिक्षक दक्ष और प्रशिक्षित बनते हैं, तो वह प्रशासनिक विकास है। विडंबना यह है कि विकासशील देशों में परिवर्तन का सबसे सशक्त अस्त्र — प्रशासन — ही सबसे उपेक्षित, अकुशल और निष्प्रभावी रहा है।

विद्वानप्रशासनिक विकास की परिभाषा
फ्रेड रिग्स"निर्दिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध साधनों के उपयोग की बढ़ती हुई प्रभावशीलता का प्रतिमान।"
जे.एन. खोसलानौकरशाही की नीतियों, कार्यक्रमों, क्रिया-विधियों, कार्य-पद्धतियों, संगठनात्मक संरचनाओं, भर्ती-प्रतिमानों, सेवीवर्ग और प्रशासन के ग्राहकों (नागरिकों) के साथ संबंधों में गुणात्मक और मात्रात्मक सुधार।
गेराल्ड केडन (प्रशासनिक सुधार)वह प्रक्रिया जिसमें प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यकुशलता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जानबूझकर (सुनियोजित) परिवर्तन किए जाते हैं।
🔧 प्रशासनिक विकास — आवश्यकता और तीन साधन
चित्र 9.6: विकास प्रशासन और प्रशासनिक विकास — "मुर्गी और अंडे" का संबंध
चित्र 9.6: विकास प्रशासन और प्रशासनिक विकास — "मुर्गी और अंडे" का संबंध
बिंदुविकास प्रशासनप्रशासनिक विकास
अर्थसामाजिक-आर्थिक विकास के लक्ष्यों में लगी प्रशासनिक व्यवस्थाउस व्यवस्था को सक्षम बनाना और उसमें समयानुकूल परिवर्तन लाना
सूत्रप्रशासन द्वारा विकासप्रशासन का विकास
आवश्यकतालोक-कल्याणकारी राज्य के लक्ष्यों के लिएविकास प्रशासन के लक्ष्यों के लिए
दायराव्यापक क्षेत्र — सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक आयामउसी क्षेत्र का छोटा पक्ष या आंतरिक गतिविधि
संबंधप्रशासनिक विकास को आधार (माँग) देता हैविकास प्रशासन की सफलता का आधार; उसी का भाग या पूर्व-शर्त
उदाहरणसमाज-कल्याण या साक्षरता के लिए कार्यरत तंत्रउस तंत्र को सुगठित करना; ब्रिटिश काल की पुलिस को लोकतंत्र के अनुकूल बनाना
❝ विकास प्रशासन और प्रशासनिक विकास में अंडे और मुर्गी जैसा कार्य-कारण संबंध है — पर्यावरण बदले बिना प्रशासन में बड़े परिवर्तन नहीं आते, और प्रशासन सुदृढ़ हुए बिना पर्यावरण नहीं बदलता। ❞ (Chicken and egg relationship — भावार्थ) — (फ्रेड रिग्स (Fred Riggs))
प्रशासनिक विकास की समस्याएँ
  • ऐतिहासिक — उपनिवेशवादी विरासत।
  • संरचनात्मक-संगठनात्मक — अनावश्यक लंबा पदसोपान, निर्णय में विलंब।
  • भ्रष्टाचार — भाई-भतीजावाद, पक्षपात, रिश्वत, नैतिक मूल्यों में कमी।
  • अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप।
  • परिचालनात्मक, कार्मिक-प्रशासन, प्रक्रियात्मक और व्यवहारात्मक समस्याएँ।
वर्तमान चुनौतियाँ
  • गुणवत्तापूर्ण सेवा-प्रदायगी का बढ़ता दबाव; सरकार का बढ़ता आकार।
  • सूचना-संचार क्रांति को शीघ्र अपनाना — मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया पर विभाग।
  • नियोजन, समन्वय, नियंत्रण, पर्यवेक्षण और विकेंद्रीकरण की बढ़ती आवश्यकता।
  • मानव विकास सूचकांक में ऊँचा स्थान, सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन प्रावधानों का क्रियान्वयन।
  • गरीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा — आर्थिक समस्याएँ भी प्रशासन की समस्याएँ; निरंतर सुधार और विकास-अभिमुख प्रशासन की चुनौती।

नौकरशाही को विकास-अनुकूल बनाने के सुझाव: पदसोपान को कम महत्व; नीति और निर्णय-निर्माण में कार्मिकों की भागीदारी; सत्ता का विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय इकाइयों को अधिक निर्णय-अधिकार; प्रस्थिति की परवाह किए बिना संचार का मुक्त प्रवाह; केवल योग्यता से भर्ती और उचित प्रशिक्षण; जन-सहभागिता; जनता के प्रति शिष्ट और विनम्र व्यवहार; व्यावसायिक गतिशीलता। समावेशी और सतत विकास को साकार करने तथा सुशासन और विधि के शासन की स्थापना के लिए सुदृढ़ प्रशासनिक विकास अनिवार्य है।

🔑 खंड 2.4-2.5 का कीवर्ड सारांश
पहला प्रयोग
यू.एल. गोस्वामी, 1955
जनक
जॉर्ज गैंट; भाष्यकार — वाइडनर
नियामक प्रशासन
क़ानून-व्यवस्था, राजस्व; यथास्थिति
विकास प्रशासन
लक्ष्योन्मुख, कार्योन्मुख; लोक-कल्याण
स्टोन
मानवीय-भौतिक साधनों का सम्मिश्रण, निर्धारित समय
विलियम वुड
दोनों प्रशासनों में भेद अवास्तविक
प्रशासनिक विकास
प्रशासन का विकास; रिग्स, खोसला
तीन साधन
सुधार, नवाचार, पारिस्थितिकी
नवाचार (थॉम्पसन)
आविष्कार, स्वीकृति, व्यवहार
सुधार आयोग
प्रथम 5 जनवरी 1966; द्वितीय 31 अगस्त 2005
रिग्स
मुर्गी और अंडे का संबंध

3संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का प्रशासनिक तंत्र

अमेरिका में राष्ट्रपति प्रणाली (Presidential System) लागू है, जिसमें शक्ति-पृथक्करण (Separation of Powers) का सिद्धांत सख़्ती से लागू होता है — राष्ट्रपति (कार्यपालिका), कांग्रेस (विधायिका) और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायपालिका), तीनों एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर एक-दूसरे पर नियंत्रण (नियंत्रण और संतुलन — Checks and Balances) रखते हैं — यह भारत की संसदीय प्रणाली से बिल्कुल अलग है, जहाँ कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है (देखें अध्याय 08)।

संवैधानिक ढाँचा: 1787 का लिखित संविधान (विश्व का सबसे पुराना लिखित राष्ट्रीय संविधान), 50 राज्यों का संघ। राष्ट्रपति चार वर्ष के लिए चुना जाता है (अधिकतम दो कार्यकाल — 22वाँ संशोधन); वह राज्य-प्रमुख और शासन-प्रमुख दोनों है। मंत्री (Secretaries) कांग्रेस के सदस्य नहीं होते, राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होते हैं; पर उनकी नियुक्ति पर सीनेट की स्वीकृति आवश्यक है। केंद्र में 15 कार्यकारी विभाग हैं, साथ ही अनेक स्वतंत्र नियामक आयोग (जैसे संघीय व्यापार आयोग)।

🎓 चिंतक-परिचय — USA — प्रशासनिक तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ

राष्ट्रपति प्रणाली (Presidential System) | 1883 के पेंडलटन अधिनियम से आधुनिक स्वरूप

चित्र 9.7: अमेरिका — लूट प्रणाली से योग्यता प्रणाली और हाल के बदलाव
चित्र 9.7: अमेरिका — लूट प्रणाली से योग्यता प्रणाली और हाल के बदलाव
💡 सरल भाषा में समझें — लूट प्रणाली (Spoils System)

सोचिए हर 5 साल में जब नया मुख्यमंत्री बने, तो वह राजस्थान के सारे कलेक्टर और तहसीलदार बदलकर अपनी पार्टी के लोगों को बिठा दे — यही "लूट प्रणाली" अमेरिका में चलती थी। 1881 के गारफ़ील्ड-हत्याकांड के बाद जनता भड़की, और 1883 में क़ानून बना कि नौकरी सिर्फ़ परीक्षा पास करने से मिलेगी, नेता की मर्ज़ी से नहीं — यही आज की योग्यता-प्रणाली (Merit System) की नींव बनी, ठीक वैसे ही जैसे भारत में UPSC/RPSC परीक्षा से भर्ती होती है।

3.1 प्रमुख प्रशासनिक संस्थाएँ और सुधार

USA की संस्था (Institution)कार्य (Function)
कार्मिक प्रबंधन कार्यालय (Office of Personnel Management — OPM)संघीय सरकार की केंद्रीय कार्मिक नीति-निर्माता — भर्ती, प्रशिक्षण, पेंशन और सेवा-नियमों का प्रबंधन — भारत के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के समकक्ष।
वरिष्ठ कार्यपालक सेवा (Senior Executive Service — SES)नीति और प्रशासन के बीच सेतु का काम करने वाला वरिष्ठ प्रबंधकीय संवर्ग — राजनीतिक नियुक्तियों और करियर सिविल सेवकों, दोनों को शामिल करता है।
योग्यता प्रणाली सुरक्षा बोर्ड (Merit Systems Protection Board — MSPB)कर्मचारी अपील सुनने वाला अर्ध-न्यायिक निकाय — ग़लत तरीक़े से हटाए गए कर्मचारियों को संरक्षण देता है, भारत के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (देखें अध्याय 08) जैसा कार्य।
राष्ट्रपति का कार्यकारी कार्यालय (Executive Office of the President)ब्राउनलो समिति (1937) — "राष्ट्रपति को सहायता चाहिए" — की सिफ़ारिश पर 1939 में बना; व्हाइट हाउस कार्यालय, बजट-प्रबंधन कार्यालय (OMB) आदि — भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय जैसा।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Security Council — NSC)राष्ट्रपति को विदेश और रक्षा नीति पर सलाह — भारत की सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति के समान।
सरकारी जवाबदेही कार्यालय (Government Accountability Office — GAO)1921 में बना; कांग्रेस के लिए लेखा-परीक्षा और कार्यक्रम-मूल्यांकन — भारत के CAG के समान, पर विधायिका का अंग।
महानिरीक्षक (Inspectors General)1978 के अधिनियम से हर विभाग में स्वतंत्र आंतरिक निगरानी अधिकारी।
अमेरिकी सुधार-प्रयासवर्षमुख्य विचार
ब्राउनलो समिति1937राष्ट्रपति का कार्यकारी कार्यालय; "राष्ट्रपति को सहायता चाहिए"
हूवर आयोग (प्रथम और द्वितीय)1947-49, 1953-55संघीय विभागों का पुनर्गठन, दक्षता और मितव्ययिता
राष्ट्रीय निष्पादन समीक्षा (उपराष्ट्रपति अल गोर)1993"सरकार का पुनर्आविष्कार (Reinventing Government)" — ओसबोर्न और गेब्लर की पुस्तक (1992) से प्रेरित; परिणाम-आधारित, नागरिक-केंद्रित सरकार
सरकारी निष्पादन एवं परिणाम अधिनियम1993हर विभाग के लिए रणनीतिक योजना और परिणाम-मापन
सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) और कार्यबल-कटौती2025-26जनवरी 2025 के कार्यकारी आदेश से; सितंबर 2024 के लगभग 23.1 लाख से घटकर जनवरी 2026 तक लगभग 20.3 लाख संघीय असैनिक कर्मचारी (लगभग 2.8 लाख की कमी)

स्थानीय शासन: अमेरिका में लगभग 3,000 काउंटी और हज़ारों नगर हैं। नगरों में तीन प्रमुख रूप हैं — महापौर-परिषद् (Mayor-Council), आयोग (Commission) और परिषद्-प्रबंधक (Council-Manager), जिसमें निर्वाचित परिषद् एक पेशेवर "सिटी मैनेजर" नियुक्त करती है। कई काउंटी-अधिकारी (जैसे शेरिफ़) निर्वाचित होते हैं — भारत की तरह नियुक्त कलेक्टर जैसी व्यवस्था नहीं।

📎 पूरक जानकारी — अमेरिका के स्वतंत्र नियामक आयोग और ब्राउनलो समिति (1937)

अमेरिका में कुछ संस्थाएँ — जैसे SEC, FCC, FTC, ICC — स्वतंत्र नियामक आयोग (Independent Regulatory Commissions) कहलाती हैं। ये कांग्रेस के क़ानून से बनती हैं, इनके सदस्य सीनेट की सहमति से नियुक्त होते हैं और इन्हें राष्ट्रपति सामान्यतः मनमर्ज़ी से हटा नहीं सकता।

इनमें नियम बनाने (अर्ध-विधायी), जाँचने-लागू करने (कार्यकारी) और विवाद निपटाने (अर्ध-न्यायिक) — तीनों तरह की शक्तियाँ एक साथ होती हैं, इसलिए ब्राउनलो समिति (1937) ने इन्हें सरकार की "बिना सिर वाली चौथी शाखा" (Headless Fourth Branch) कहा और इन्हें कार्यकारी विभागों के अधीन लाने की सिफ़ारिश की।

याद रखें: स्वतंत्र आयोग = शक्ति-पृथक्करण के सिद्धांत का अपवाद-सा; यही आलोचना का मुख्य आधार है।

🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
अमेरिकी प्रणाली
राष्ट्रपति प्रणाली; शक्ति-पृथक्करण; नियंत्रण और संतुलन
लूट प्रणाली
जैक्सन युग 1829; "विजेता को लूट का माल"
पेंडलटन अधिनियम
1883; चेस्टर आर्थर; गारफ़ील्ड हत्या 1881
हैच अधिनियम
1939; राजनीतिक तटस्थता
सिविल सेवा सुधार अधिनियम
1978; कार्टर; OPM, MSPB, SES
ब्राउनलो समिति
1937; राष्ट्रपति का कार्यकारी कार्यालय 1939
शेड्यूल पॉलिसी/करियर
फ़रवरी 2026; लगभग 50,000 पद इच्छाधीन
कार्यबल
जनवरी 2026 तक लगभग 20.3 लाख; SES 6,647 (अप्रैल 2026)

4यूनाइटेड किंगडम (UK) का प्रशासनिक तंत्र

ब्रिटेन की शासन-प्रणाली को "वेस्टमिंस्टर मॉडल (Westminster Model)" कहा जाता है — भारत सहित अधिकांश राष्ट्रमंडल देशों (कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि) ने इसी मॉडल से प्रेरणा लेकर अपनी संसदीय व्यवस्था बनाई। यहाँ प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल, संसद (विशेषकर हाउस ऑफ़ कॉमन्स) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं — ठीक भारतीय अनुच्छेद 75(3) की तरह (देखें अध्याय 08)।

संवैधानिक ढाँचा: ब्रिटेन का संविधान अलिखित (संहिताबद्ध नहीं) है — परंपराएँ, संसद के क़ानून और न्यायिक निर्णय मिलकर संविधान बनाते हैं। राजा या रानी नाममात्र का प्रमुख है, वास्तविक शक्ति मंत्रिमंडल के पास है; संसदीय संप्रभुता का सिद्धांत लागू है। व्यवस्था एकात्मक है, पर 1998 से स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड को शक्ति-हस्तांतरण (Devolution) हुआ है।

🎓 चिंतक-परिचय — UK — प्रशासनिक तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ

वेस्टमिंस्टर मॉडल (Westminster Model) | 1854 की नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट से आधुनिक स्वरूप

चित्र 9.8: ब्रिटेन — सिविल सेवा सुधारों का क्रम
चित्र 9.8: ब्रिटेन — सिविल सेवा सुधारों का क्रम
🇮🇳 भारतीय उदाहरण — स्थायी सिविल सेवा का प्रमाण — 2026

19 फ़रवरी 2026 को डेम एंटोनिया रोमियो कैबिनेट सचिव और सिविल सेवा प्रमुख बनीं (सर क्रिस वॉर्मल्ड के स्थान पर)। फिर 20 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के स्थान पर एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बदला, पर स्थायी सचिव और सिविल सेवा अपनी जगह रहे — यही वेस्टमिंस्टर मॉडल के "स्थायित्व" का जीवंत उदाहरण है।

💡 सरल भाषा में समझें — प्रिंसिपल बनाम हेड-क्लर्क

सोचिए एक स्कूल में हर 5 साल में चुनाव से नया प्रिंसिपल (मंत्री) आता है, पर स्कूल का हेड-क्लर्क (सिविल सेवक) वर्षों से वही रहता है, चुपचाप काम करता है, कभी अख़बार में बयान नहीं देता और किसी पार्टी का पक्ष नहीं लेता — प्रिंसिपल बदलने पर भी स्कूल का रोज़मर्रा का काम बिना रुके चलता रहता है। यही है ब्रिटेन की "स्थायी, तटस्थ, गुमनाम" सिविल सेवा — जिससे भारत ने भी बहुत कुछ सीखा।

UK की संस्था/सुधार (Institution/Reform)विवरण (Details)
हाउस ऑफ़ कॉमन्स प्रवर समितियाँ (Select Committees)भारत की संसदीय स्थायी समितियों (देखें अध्याय 08) की मूल प्रेरणा — 1979 से विभाग-वार मंत्रालयों की जाँच करती हैं; लोक लेखा समिति (1861) सबसे पुरानी।
सिविल सेवा आयोग (Civil Service Commission)भर्ती में निष्पक्षता और योग्यता सुनिश्चित करने वाली स्वतंत्र वैधानिक संस्था (1855) — भारत के संघ लोक सेवा आयोग का ऐतिहासिक मॉडल।
कैबिनेट कार्यालय (Cabinet Office)प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के कामकाज का समन्वय — भारत के मंत्रिमंडल सचिवालय (देखें अध्याय 08) की प्रेरणा।
राजकोष (HM Treasury)वित्त मंत्रालय के समकक्ष — बजट और सार्वजनिक व्यय पर नियंत्रण रखने वाली शक्तिशाली संस्था; "विभागों का विभाग"।
संसदीय आयुक्त (संसदीय ऑम्बड्समैन)1967 से — नागरिकों की कुप्रशासन संबंधी शिकायतों की जाँच; शिकायत सांसद के माध्यम से (देखें अध्याय 08)।
राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा कार्यालय (National Audit Office)संसद के लिए सार्वजनिक व्यय की लेखा-परीक्षा — भारत के CAG के समान; प्रमुख "नियंत्रक और महालेखा परीक्षक"।

स्थानीय शासन: इंग्लैंड में काउंटी, ज़िला और एकात्मक (Unitary) प्राधिकरण — निर्वाचित परिषदें, जिनके अधिकारी परिषद् द्वारा नियुक्त पेशेवर होते हैं। भारत के कलेक्टर जैसा केंद्र का कोई प्रतिनिधि ज़िले में नहीं — इसीलिए ब्रिटेन को "एकात्मक पर विकेंद्रीकृत" कहा जाता है।

🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
वेस्टमिंस्टर मॉडल
संसदीय, सामूहिक उत्तरदायित्व; अलिखित संविधान
नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन
1854; सिविल सेवा का "जन्म-प्रमाण पत्र"
तीन स्तंभ
स्थायित्व, तटस्थता, गुमनामी
फुल्टन रिपोर्ट
1968; सामान्यज्ञ वर्चस्व की आलोचना
नेक्स्ट स्टेप्स
1988; इब्स; कार्यकारी एजेंसियाँ
नागरिक घोषणा-पत्र
1991; जॉन मेजर
2010 अधिनियम
सिविल सेवा संहिता को वैधानिक आधार
2026
कैबिनेट सचिव एंटोनिया रोमियो; पूर्णकालिक-समतुल्य 5,24,000

5फ्रांस (France) का प्रशासनिक तंत्र

फ्रांस में अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली (Semi-Presidential System) लागू है — यह अमेरिका (पूर्ण राष्ट्रपति प्रणाली) और ब्रिटेन (पूर्ण संसदीय प्रणाली) के बीच की एक मिश्रित व्यवस्था है, जिसमें राष्ट्रपति (विदेश और रक्षा नीति) तथा प्रधानमंत्री (घरेलू प्रशासन और नीति) दोनों वास्तविक शक्तियाँ रखते हैं — यह 1958 में स्थापित "पाँचवाँ गणराज्य (Fifth Republic)" की देन है।

संवैधानिक ढाँचा: 4 अक्टूबर 1958 का संविधान, जनरल चार्ल्स द गॉल की पहल पर। राष्ट्रपति प्रत्यक्ष जनमत से चुना जाता है; 2000 के जनमत-संग्रह के बाद कार्यकाल 7 से घटकर 5 वर्ष हुआ। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है, पर प्रधानमंत्री को नेशनल असेंबली का विश्वास चाहिए। जब राष्ट्रपति एक दल का और संसद में बहुमत दूसरे दल का हो, तो राष्ट्रपति को विरोधी दल का प्रधानमंत्री रखना पड़ता है — इसे "सह-अस्तित्व (Cohabitation)" कहते हैं (1986, 1993, 1997 के उदाहरण)। वर्तमान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (2017 से) हैं; हाल के वर्षों में बार-बार प्रधानमंत्री बदलना और बजट पर अविश्वास-प्रस्तावों का संकट फ्रांसीसी राजनीति की पहचान रहा है।

🎓 चिंतक-परिचय — फ्रांस — प्रशासनिक तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ

अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली (Semi-Presidential System) | ENA (1945) से INSP (2022) तक

चित्र 9.9: फ्रांस का प्रशासनिक ढाँचा — केंद्र से कम्यून तक
चित्र 9.9: फ्रांस का प्रशासनिक ढाँचा — केंद्र से कम्यून तक

विकेंद्रीकरण (1982 के बाद): 1982 के "डेफ़र क़ानूनों (Defferre Laws)" से फ्रांस में बड़ा विकेंद्रीकरण हुआ — निर्वाचित क्षेत्रीय और विभागीय परिषदों को कार्यकारी शक्तियाँ मिलीं, और प्रीफ़ेक्ट का स्थानीय निर्णयों पर पूर्व-नियंत्रण (A Priori) हटाकर केवल वैधता की पश्च-जाँच (A Posteriori) रखी गई। आज फ्रांस में 18 क्षेत्र, 101 विभाग और लगभग 35,000 कम्यून हैं।

नागरिक शिकायत तंत्र: 1973 में "मध्यस्थ (Médiateur de la République)" बना, जिसे 2011 से "अधिकारों के रक्षक (Défenseur des droits)" नामक संवैधानिक संस्था ने प्रतिस्थापित किया — फ्रांस का ऑम्बड्समैन (देखें अध्याय 08)।

💡 सरल भाषा में समझें — फ्रांस की "मसूरी अकादमी"

जैसे भारत में IAS अफ़सर बनने के लिए UPSC पास करने के बाद LBSNAA मसूरी में प्रशिक्षण लेना पड़ता है, ठीक वैसे ही फ्रांस में टॉप अफ़सर बनने के लिए पहले प्रतिष्ठित ENA (अब INSP) से प्रशिक्षण लेना ज़रूरी होता था। और जैसे भारत के हर ज़िले में एक कलेक्टर होता है जो केंद्र और राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व करता है, वैसे ही फ्रांस के हर "डिपार्टमेंट" में एक "प्रीफ़ेक्ट" होता है, जो सीधे पेरिस (केंद्र सरकार) का प्रतिनिधि होता है।

फ्रांस की संस्था (Institution)भूमिका (Role)
राज्य परिषद् (Conseil d'État)सरकार को क़ानूनी सलाह + प्रशासनिक न्यायालयों का शीर्ष निकाय — प्रशासनिक क़ानून की सर्वोच्च व्याख्याकार संस्था।
लेखा न्यायालय (Cour des Comptes)1807 से; सार्वजनिक वित्त की लेखा-परीक्षा (Audit) करने वाली स्वतंत्र संस्था — भारत के CAG (देखें अध्याय 05) के समकक्ष।
वित्त महानिरीक्षण (Inspection Générale des Finances — IGF)सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय-निरीक्षण निकाय — शीर्ष वित्तीय और आर्थिक सलाहकार अधिकारियों का स्रोत।
प्रीफ़ेक्ट (Prefect)डिपार्टमेंट स्तर पर केंद्र सरकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि — क़ानून-व्यवस्था, विकास-कार्यों और केंद्र-स्थानीय समन्वय का दायित्व — भारतीय कलेक्टर से समानता।
अधिकारों के रक्षक (Défenseur des droits)2011 से संवैधानिक ऑम्बड्समैन — नागरिक शिकायतें, भेदभाव, बच्चों के अधिकार।
राष्ट्रीय लोक सेवा संस्थान (INSP)स्ट्रासबर्ग; 2022 से शीर्ष प्रशासकों का प्रशिक्षण।
🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली
पाँचवाँ गणराज्य 1958; द गॉल; दोहरी कार्यपालिका
सह-अस्तित्व
विरोधी दलों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री — 1986, 1993, 1997
ENA से INSP
1945; 1 जनवरी 2022; स्ट्रासबर्ग
भव्य निकाय
राज्य परिषद्, लेखा न्यायालय, वित्त महानिरीक्षण
प्रीफ़ेक्ट
1800, नेपोलियन; ज़िला कलेक्टर के समान
द्वि-न्यायालय प्रणाली
सामान्य + प्रशासनिक न्यायालय; प्रशासनिक क़ानून
डेफ़र क़ानून
1982; विकेंद्रीकरण; पूर्व-नियंत्रण हटा
ढाँचा
18 क्षेत्र, 101 विभाग, लगभग 35,000 कम्यून

6चीन (China) का प्रशासनिक तंत्र

चीन एक एकल-दलीय राज्य (One-Party State) है, जहाँ चीनी साम्यवादी पार्टी (Chinese Communist Party — CCP) पूरे प्रशासन-तंत्र पर सर्वोच्च और निर्णायक नियंत्रण रखती है — यहाँ सरकार को पार्टी के निर्णयों को क्रियान्वित करने वाला "कार्यकारी हाथ" माना जाता है, न कि एक स्वतंत्र सत्ता-केंद्र। चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना 1 अक्टूबर 1949 को हुई थी; वर्तमान संविधान 1982 का है, जिसमें "पार्टी का नेतृत्व" मूल सिद्धांत है (2018 के संशोधन से राष्ट्रपति के दो कार्यकाल की सीमा भी हटाई गई)।

शीर्ष ढाँचा: पार्टी के महासचिव (शी जिनपिंग, 2012 से; राष्ट्रपति 2013 से) सबसे शक्तिशाली नेता हैं; वास्तविक निर्णय पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति में होते हैं। औपचारिक रूप से सर्वोच्च संस्था राष्ट्रीय जन कांग्रेस (NPC) है — लगभग 3,000 प्रतिनिधि, 5 वर्ष का कार्यकाल, वर्ष में एक बार बैठक; बीच में उसकी स्थायी समिति काम करती है।

🎓 चिंतक-परिचय — चीन — प्रशासनिक तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ

एकल-दलीय साम्यवादी मॉडल (One-Party Communist Model) | चीनी जनवादी गणराज्य, स्थापना 1949

चित्र 9.10: चीन — हर स्तर पर पार्टी और राज्य का दोहरा पदानुक्रम
चित्र 9.10: चीन — हर स्तर पर पार्टी और राज्य का दोहरा पदानुक्रम

प्रशिक्षण: उच्च अधिकारियों का वैचारिक और प्रशासनिक प्रशिक्षण केंद्रीय पार्टी स्कूल (2018 से चीनी शासन अकादमी के साथ एकीकृत) और प्रांतीय पार्टी स्कूलों में होता है। निगरानी: पार्टी के भीतर केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग (CCDI), और 2018 के पर्यवेक्षण क़ानून से बना राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आयोग, जो पार्टी-सदस्यों के साथ सभी सरकारी कर्मचारियों की भ्रष्टाचार-जाँच करता है — दोनों एक ही कार्यालय से काम करते हैं। 2012 के बाद "बाघ और मक्खियाँ (बड़े और छोटे, दोनों भ्रष्ट)" के नारे के साथ व्यापक भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान चला।

💡 सरल भाषा में समझें — दो कुर्सियों वाला दफ़्तर

सोचिए एक सरकारी दफ़्तर में दो कुर्सियाँ हैं — एक सरकारी अफ़सर की, एक "पार्टी सचिव" की। काग़ज़ों पर अफ़सर फ़ैसला लेता हुआ दिखता है, पर असली मंज़ूरी पार्टी सचिव की कुर्सी से ही मिलती है, बिना उसकी सहमति के कोई बड़ा फ़ैसला लागू नहीं होता। यही है चीन की "समांतर पदानुक्रम (Interlocking Hierarchy)" व्यवस्था — जहाँ पार्टी हमेशा प्रशासन से एक कदम ऊपर खड़ी रहती है।

चीन की संस्था (Institution)भूमिका (Role)
राष्ट्रीय जन कांग्रेस (National People's Congress — NPC)चीन की सर्वोच्च विधायिका (औपचारिक रूप से) — क़ानून बनाना, बजट पारित करना और राज्य परिषद् के नेतृत्व को औपचारिक मंज़ूरी देना।
राज्य परिषद् (State Council)सर्वोच्च प्रशासनिक/कार्यकारी निकाय — भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल के समकक्ष, पर पार्टी के अधीन कार्यरत।
केंद्रीय संगठन विभाग (Central Organisation Department — CCP)कैडर प्रणाली का संचालन — उच्च पदों पर नियुक्ति, स्थानांतरण और मूल्यांकन का वास्तविक नियंत्रक; 2018 से सिविल सेवा प्रशासन भी इसी में।
केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग (Central Commission for Discipline Inspection — CCDI)पार्टी-आंतरिक भ्रष्टाचार-विरोधी निगरानी निकाय — भारत के लोकपाल (देखें अध्याय 05) से अलग, क्योंकि यह पार्टी के भीतर का ही तंत्र है, स्वतंत्र संस्था नहीं।
राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आयोग (2018)सभी लोक कर्मचारियों की भ्रष्टाचार-जाँच; CCDI के साथ संयुक्त रूप से कार्यरत।
केंद्रीय पार्टी स्कूलवरिष्ठ कैडरों का वैचारिक और प्रशासनिक प्रशिक्षण।
🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
चीन
एकल-दलीय राज्य; 1949; संविधान 1982
राज्य परिषद्
सर्वोच्च कार्यकारी; प्रधानमंत्री ली छ्यांग (2023 से)
दोहरा पदानुक्रम
हर स्तर पर पार्टी सचिव वरिष्ठ
कैडर प्रणाली
गान्बू; नोमेनक्लातुरा; केंद्रीय संगठन विभाग
सिविल सेवक क़ानून
2005; संशोधन 2018; पार्टी नेतृत्व का पालन
गुओकाओ
नवंबर 2025; 37 लाख+ अभ्यर्थी; आयु-सीमा 38
CCDI + राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आयोग
पार्टी और राज्य की भ्रष्टाचार-निगरानी; 2018
95%
काउंटी स्तर से ऊपर नेतृत्व-पद CCP कैडर के पास

7तुलनात्मक विश्लेषण — भारत बनाम USA, UK, France, China

अब तक पढ़े गए चारों देशों और भारत के प्रशासनिक तंत्र को एक साथ रखकर देखने से उनकी समानताएँ और असमानताएँ स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती हैं — यह तालिका तुलनात्मक प्रश्नों (जैसे "भारत और अमेरिका की सिविल सेवा भर्ती की तुलना कीजिए") के उत्तर की रीढ़ बन सकती है।

तुलना बिंदुभारतअमेरिकाब्रिटेनफ्रांसचीन
शासन प्रणालीसंसदीय गणतंत्रराष्ट्रपति प्रणालीसंसदीय (वेस्टमिंस्टर)अर्ध-राष्ट्रपतिएकल-दलीय साम्यवादी
संविधानलिखित, 1950लिखित, 1787अलिखितलिखित, 1958लिखित, 1982
सिविल सेवा भर्तीUPSC — खुली प्रतियोगिताOPM — योग्यता प्रणाली (1883)खुली प्रतियोगिता (1854 से)कॉनकूर; ENA/INSP से चयनगुओकाओ + पार्टी-नियंत्रित कैडर प्रणाली
शीर्ष स्तरकरियर अधिकारी (सचिव)राजनीतिक नियुक्तियाँ (लगभग 4,000)करियर स्थायी सचिवभव्य निकाय; मंत्री का निजी "कैबिनेट"पार्टी कैडर
प्रशिक्षण संस्थानLBSNAA, मसूरीविभागीय + संघीय संस्थानसिविल सेवा कॉलेज / अकादमीINSP (स्ट्रासबर्ग)पार्टी स्कूल (Party School)
ज़िला/क्षेत्रीय प्रतिनिधिज़िला कलेक्टरनिर्वाचित काउंटी प्रशासकस्थानीय परिषद् (Local Council)प्रीफ़ेक्ट (Prefect)स्थानीय पार्टी सचिव + मेयर
राजनीतिक तटस्थतासंवैधानिक अपेक्षा (अनु. 311); आचरण नियमहैच अधिनियम द्वारा सीमितपूर्ण तटस्थता परंपराअपेक्षाकृत तटस्थपार्टी-निष्ठा अनिवार्य
केंद्र-स्थानीय संबंधसंघीय (73वाँ/74वाँ संशोधन)संघीय (संघ-राज्य-स्थानीय)एकात्मक, विकेंद्रीकृतएकात्मक, प्रीफ़ेक्टोरलएकात्मक, पार्टी-केंद्रित
प्रशासनिक न्यायसामान्य न्यायालय + अधिकरणसामान्य न्यायालय + MSPBसामान्य न्यायालय + अधिकरणअलग प्रशासनिक न्यायालयपार्टी-नियंत्रित न्यायपालिका
ऑम्बड्समैनलोकपाल-लोकायुक्तमहानिरीक्षकसंसदीय आयुक्त (1967)अधिकारों के रक्षक (2011)CCDI / पर्यवेक्षण आयोग
लोकतांत्रिक मॉडल (भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस)
  • स्वतंत्र, प्रतिस्पर्धी परीक्षा आधारित भर्ती (UPSC / OPM / सिविल सेवा आयोग / INSP)।
  • सिविल सेवक राजनीतिक दल से तटस्थ रहने की अपेक्षा — क़ानून और परंपरा दोनों से संरक्षित।
  • न्यायपालिका और मीडिया द्वारा स्वतंत्र बाह्य नियंत्रण (देखें अध्याय 08)।
  • सत्ता-परिवर्तन पर भी प्रशासनिक ढाँचा स्थिर और निरंतर बना रहता है।
एकल-दलीय मॉडल (चीन)
  • भर्ती और पदोन्नति पर पार्टी के संगठन विभाग का प्रत्यक्ष नियंत्रण।
  • शीर्ष पदों पर पार्टी-सदस्यता और निष्ठा एक अनिवार्य अपेक्षा है।
  • बाह्य नियंत्रण सीमित — निगरानी मुख्यतः पार्टी-आंतरिक निकायों (जैसे CCDI) से।
  • नीति-निरंतरता अधिक (चुनावी अनिश्चितता नहीं), पर जवाबदेही सीमित रहती है।

7.1 भारत ने किससे क्या सीखा

भारतीय व्यवस्थाप्रेरणा-स्रोत देशसमानता
संसदीय शासन, मंत्रिमंडलीय उत्तरदायित्व, स्थायी-तटस्थ सिविल सेवाब्रिटेनवेस्टमिंस्टर मॉडल; मैकाले रिपोर्ट (1854) से ICS में खुली प्रतियोगिता
संघ लोक सेवा आयोगब्रिटेन (सिविल सेवा आयोग, 1855)स्वतंत्र भर्ती-संस्था
ज़िला कलेक्टरफ्रांस (प्रीफ़ेक्ट) / ब्रिटिश राजकेंद्र या राज्य का ज़िले में प्रतिनिधि
मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, संघवादअमेरिकालिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका
स्वायत्त एजेंसियाँ (राजमार्ग प्राधिकरण आदि)ब्रिटेन (नेक्स्ट स्टेप्स)नीति मंत्रालय में, क्रियान्वयन एजेंसी में
नागरिक घोषणा-पत्र (1997)ब्रिटेन (1991)सेवा के मानक सार्वजनिक
पार्श्व प्रवेश (2018)अमेरिका की राजनीतिक/विशेषज्ञ नियुक्तियाँविशेषज्ञों का शीर्ष पदों पर प्रवेश (देखें अध्याय 06)
मिशन कर्मयोगी — भूमिका-आधारित क्षमताकई देशों के दक्षता-ढाँचेहर पद के लिए आवश्यक दक्षताएँ
🏜️ राजस्थान संदर्भ — राजस्थान/भारत की सीख (Rajasthan-India Connect)

भारत और राजस्थान का प्रशासनिक ढाँचा वस्तुतः इन सभी मॉडलों का एक मिश्रण (Hybrid) है — संसदीय शासन-प्रणाली ब्रिटेन से, योग्यता आधारित परीक्षा-प्रणाली (UPSC/RPSC) अमेरिका के पेंडलटन सिद्धांत से प्रेरित, ज़िला कलेक्टर पद फ्रांस के प्रीफ़ेक्ट से मिलता-जुलता, तथा योजना-कार्यान्वयन में एकल-दलीय मॉडल जैसी नीति-निरंतरता (जैसे मिशन कर्मयोगी, देखें अध्याय 07) की भी कोशिश — यही तुलनात्मक अध्ययन का असली लाभ है कि भारत हर मॉडल से अच्छी बात चुनकर अपनाता है।

राजस्थान के संदर्भ में देखें तो संभागीय आयुक्त और ज़िला कलेक्टर की व्यवस्था फ्रांस की प्रीफ़ेक्टोरल परंपरा जैसी है, जबकि पंचायती राज (1959, नागौर) ब्रिटेन और अमेरिका जैसे निर्वाचित स्थानीय शासन की दिशा है — दोनों का सह-अस्तित्व ही भारतीय मॉडल की विशेषता है।

❝ जब तक लोक प्रशासन तुलनात्मक नहीं बनता, तब तक इसका विज्ञान होने का दावा खोखला ही रहेगा। ❞ (Until public administration becomes comparative, its claim to be a science remains hollow.) — (रॉबर्ट डाहल (Robert Dahl))
🧠 याद रखने की ट्रिक — चार देशों की पहचान — "अमेरिका में योग्यता, ब्रिटेन में स्थिरता, फ्रांस में विशिष्टता, चीन में पार्टी"

अमेरिका = पेंडलटन, OPM, SES — योग्यता और राजनीतिक नियुक्तियों का मेल | ब्रिटेन = नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन, फुल्टन, नेक्स्ट स्टेप्स — स्थायी, तटस्थ, गुमनाम | फ्रांस = ENA/INSP, प्रीफ़ेक्ट, राज्य परिषद् — अभिजात प्रशिक्षण और प्रशासनिक न्यायालय | चीन = CCP, कैडर, दोहरा पदानुक्रम — पार्टी सर्वोपरि।

🔑 इस खंड का कीवर्ड सारांश
हाइब्रिड भारत
ब्रिटेन से संसद, अमेरिका से योग्यता-सिद्धांत, फ्रांस-सा कलेक्टर
लोकतांत्रिक बनाम एकल-दलीय
तटस्थ सेवा बनाम पार्टी-निष्ठ कैडर
प्रशासनिक न्याय
फ्रांस में अलग न्यायालय; भारत में अधिकरण
ऑम्बड्समैन
भारत लोकपाल; ब्रिटेन 1967; फ्रांस 2011

समय-रेखा — तुलनात्मक लोक प्रशासन और चार देशों के प्रमुख पड़ाव

वर्ष/अनुच्छेदविषय
1787अमेरिकी संविधान
1799 / 1800फ्रांस — राज्य परिषद् (1799) और प्रीफ़ेक्ट व्यवस्था (1800), नेपोलियन
1829अमेरिका — जैक्सन युग में लूट प्रणाली
1854नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट (UK) — ब्रिटिश सिविल सेवा में योग्यता और खुली प्रतियोगिता की नींव; भारत के लिए मैकाले रिपोर्ट
1855ब्रिटेन — सिविल सेवा आयोग
1883पेंडलटन सिविल सेवा सुधार अधिनियम (USA) — लूट प्रणाली समाप्त कर योग्यता प्रणाली की शुरुआत
1887वुडरो विल्सन का निबंध — यूरोप से सीखने की बात
1937 / 1939ब्राउनलो समिति; अमेरिका — राष्ट्रपति का कार्यकारी कार्यालय और हैच अधिनियम (1939)
1945ENA की स्थापना (France) — फ्रांस में शीर्ष प्रशासकों के लिए विशिष्ट प्रशिक्षण संस्थान
1947रॉबर्ट डाहल का निबंध "लोक प्रशासन का विज्ञान" — तुलनात्मक लोक प्रशासन की आवश्यकता पर बल; अमेरिका में तुलनात्मक अध्ययन आंदोलन को गति
1949चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना — CCP-नियंत्रित प्रशासनिक तंत्र का प्रारंभ
1958फ्रांस का पाँचवाँ गणराज्य (Fifth Republic) स्थापित — अर्ध-राष्ट्रपति प्रणाली की शुरुआत
1952प्रिंसटन (अमेरिका) — तुलनात्मक प्रशासन सम्मेलन
1955यू.एल. गोस्वामी — विकास प्रशासन शब्द का पहला प्रयोग
1960तुलनात्मक प्रशासन समूह (CAG) — फ्रेड रिग्स
1962फ्रेड रिग्स — "तीन रुझान (Three Trends)" प्रतिपादित
1966फेरेल हेडी — "लोक प्रशासन: एक तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य"; भारत में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (5 जनवरी)
1970 का दशक / 1980 का दशकतुलनात्मक लोक प्रशासन पर संकट / हेडी के मार्गदर्शन में पुनरुत्थान आंदोलन
1979जॉर्ज गैंट — विकास प्रशासन: अवधारणाएँ, लक्ष्य और विधियाँ
1967ब्रिटेन — संसदीय आयुक्त (ऑम्बड्समैन)
1968फुल्टन रिपोर्ट (UK) — सामान्यज्ञ वर्चस्व की आलोचना, विशेषज्ञता पर बल
1978सिविल सेवा सुधार अधिनियम (USA) — OPM और वरिष्ठ कार्यपालक सेवा (SES) की स्थापना
1982फ्रांस — डेफ़र विकेंद्रीकरण क़ानून; चीन — वर्तमान संविधान
1988नेक्स्ट स्टेप्स पहल (UK) — नीति-निर्माण और सेवा-वितरण को अलग किया गया
1991ब्रिटेन — नागरिक घोषणा-पत्र
1993अमेरिका — राष्ट्रीय निष्पादन समीक्षा, "सरकार का पुनर्आविष्कार"
2005चीन — सिविल सेवक क़ानून
2010ब्रिटेन — संवैधानिक सुधार एवं शासन अधिनियम
2011फ्रांस — अधिकारों के रक्षक
2018चीन — राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आयोग; सिविल सेवा प्रशासन पार्टी के संगठन विभाग में
2022ENA का स्थान INSP ने लिया (France) — प्रशिक्षण-प्रणाली को अधिक विविध और व्यावहारिक बनाया
2025अमेरिका — सरकारी दक्षता विभाग और कार्यबल-कटौती; चीन — रिकॉर्ड 37 लाख अभ्यर्थी (नवंबर)
2026शेड्यूल पॉलिसी/करियर नियम (USA) और "नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन क्षण" बहस (UK) — दोनों देशों में सिविल सेवा जवाबदेही और संरचना पर नवीनतम बड़े सुधार-प्रयास; ब्रिटेन में नई कैबिनेट सचिव (फ़रवरी)
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