🏯 अध्याय 10/11 — लोक प्रशासन

राज्य प्रशासन

State Administration | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. राज्यपाल (Governor)
  2. मुख्यमंत्री (Chief Minister)
  3. मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)
  4. राज्य सचिवालय (State Secretariat)
  5. मुख्य सचिव (Chief Secretary)
  6. निदेशालयों की भूमिका (Role of Directorates)
  7. पुलिस प्रशासन (Police Administration)
  8. राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर
  9. राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission — SEC)
  10. राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission — SHRC)
  11. लोकायुक्त (Lokayukta)

सोचिए एक बड़ा परिवार है — घर का सबसे बुज़ुर्ग सदस्य (राज्यपाल) ज़्यादातर फैसले नौजवान मुखिया (मुख्यमंत्री) की सलाह पर ही लेता है, पर कुछ खास व नाज़ुक मौकों पर अपने विवेक से भी फैसला कर सकता है। मुखिया अपनी टीम (मंत्रिपरिषद) बनाता है, और उस टीम के लिए रोज़ का हिसाब-किताब व योजना बनाने वाला "दिमाग" होता है सचिवालय — जिसका सबसे वरिष्ठ सदस्य मुख्य सचिव कहलाता है। पर सिर्फ योजना बनाने से काम नहीं चलता — ज़मीन पर उसे लागू करने के लिए अलग-अलग "हाथ-पैर" चाहिए, यही हैं निदेशालय (जैसे शिक्षा निदेशालय, पुलिस महकमा, राजस्व मंडल)। और अगर कहीं गड़बड़ी हो जाए, तो उसकी जाँच व निगरानी के लिए अलग-अलग चौकीदार भी बिठाए गए हैं — राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग व लोकायुक्त। यही है राज्य प्रशासन का पूरा ढांचा — जिसे यह अध्याय एक-एक करके, उदाहरणों के साथ समझाएगा।

1राज्यपाल (Governor)

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक/नाममात्र प्रमुख (Nominal/Constitutional Head) होता है — ठीक वैसे ही जैसे केंद्र में राष्ट्रपति। पर राज्यपाल की एक दोहरी भूमिका भी है — वह राज्य का प्रमुख भी है, और साथ ही केंद्र सरकार का प्रतिनिधि/एजेंट (Agent of the Union) भी, जो राज्य में केंद्र की नज़र बनाए रखता है (देखें अध्याय 07 — केंद्र-राज्य संबंध)।

🎓 राज्यपाल (Governor) विचारक/प्रवर्तक: अनुच्छेद 153-162 | वर्ष: नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा
  • नियुक्ति (अनुच्छेद 155): राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है — व्यवहार में केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) की सलाह पर। योग्यता: भारत का नागरिक, 35 वर्ष की आयु पूर्ण, राज्य विधानमंडल/संसद का सदस्य न हो, लाभ के पद पर न हो।
  • कार्यकाल (अनुच्छेद 156): सामान्यतः 5 वर्ष, पर राष्ट्रपति के "प्रसादपर्यंत (During the Pleasure of the President)" — यानी कभी भी हटाया जा सकता है, कोई निश्चित सुरक्षा नहीं।
  • दोहरी भूमिका: (1) राज्य का संवैधानिक प्रमुख — मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य (अनुच्छेद 163); (2) केंद्र का एजेंट/प्रतिनिधि — विशेषकर अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) की सिफारिश भेजते समय।
  • शक्तियाँ: कार्यपालिका (मुख्यमंत्री व मंत्रियों की नियुक्ति), विधायी (विधानसभा सत्र बुलाना/भंग करना, अभिभाषण), वित्तीय (धन विधेयक की पूर्वानुमति), न्यायिक (क्षमादान — अनुच्छेद 161), एवं विवेकाधीन शक्तियाँ।
  • विवेकाधीन शक्तियाँ (Discretionary Powers): त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) में मुख्यमंत्री चयन, बहुमत खो चुकी सरकार को बर्खास्त करना, किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखना (अनुच्छेद 200), तथा अनुच्छेद 356 की रिपोर्ट भेजना — ये वे इने-गिने मौके हैं जब राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना स्वयं निर्णय ले सकता है।
  • वर्तमान राजस्थान के राज्यपाल: श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े (Haribhau Kisanrao Bagade) — 31 जुलाई 2024 से राजस्थान के 22वें राज्यपाल के रूप में कार्यरत।
💡 सरल भाषा में समझें — घर का बड़ा-बुज़ुर्ग
सोचिए घर के बड़े-बुज़ुर्ग (राज्यपाल) ज़्यादातर छोटे-बड़े फैसले घर के मुखिया (मुख्यमंत्री) की सलाह पर ही लेते हैं — जैसे कौन-सा सामान खरीदना है, कब मेहमान बुलाने हैं। पर अगर परिवार में झगड़ा हो जाए और कोई भी फैसला न ले पाए (त्रिशंकु विधानसभा), या मुखिया गलत काम कर रहा हो, तो बड़े-बुज़ुर्ग अपने विवेक से हस्तक्षेप करते हैं — यही है राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति।
राज्यपाल की शक्ति (Power)संक्षिप्त विवरण
कार्यपालिका (Executive)मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद की नियुक्ति, राज्य के प्रमुख अधिकारियों (महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग अध्यक्ष) की नियुक्ति।
विधायी (Legislative)विधानसभा सत्र आहूत करना/स्थगित करना/भंग करना, प्रथम सत्र व वार्षिक प्रथम सत्र में अभिभाषण, विधेयकों पर अनुमति।
वित्तीय (Financial)धन विधेयक (Money Bill) पूर्व अनुमति के बिना पेश नहीं हो सकता, राज्य आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) पर नियंत्रण।
न्यायिक (Judicial)राज्य के विषयों पर क्षमादान, लघुकरण व दंड-स्थगन की शक्ति (अनुच्छेद 161) — मृत्युदंड को छोड़कर।
विवेकाधीन (Discretionary)त्रिशंकु विधानसभा में CM चयन, विधेयक राष्ट्रपति हेतु आरक्षित रखना, अनुच्छेद 356 रिपोर्ट भेजना।

राज्यपाल संबंधी हालिया विवाद (Recent Controversies): हाल के वर्षों में तमिलनाडु, केरल, पंजाब जैसे राज्यों में विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर राज्यपाल द्वारा लंबे समय तक निर्णय न लेने (बिना अनुमति दिए, बिना लौटाए) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में मामले गए — सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल अनुच्छेद 200 के तहत अनिश्चितकाल तक विधेयक को "जेब में" (Pocket Veto की तरह) नहीं रख सकते, उन्हें उचित समय-सीमा में निर्णय लेना होगा — यह केंद्र-राज्य संबंधों (देखें अध्याय 07) की परीक्षा-दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उभरता विषय है।

2मुख्यमंत्री (Chief Minister)

जहाँ राज्यपाल राज्य का नाममात्र प्रमुख है, वहीं मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख (Real Executive Head) होता है — ठीक केंद्र में प्रधानमंत्री की तरह। विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल/गठबंधन का नेता ही राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है।

🎓 मुख्यमंत्री (Chief Minister) विचारक/प्रवर्तक: अनुच्छेद 163-164 | वर्ष: नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा
  • नियुक्ति (अनुच्छेद 164): विधानसभा में बहुमत दल के नेता को राज्यपाल मुख्यमंत्री नियुक्त करता है; शेष मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल करता है।
  • संवैधानिक कर्तव्य (अनुच्छेद 167) — RAS Mains PYQ 2023 का प्रत्यक्ष उत्तर: मुख्यमंत्री का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक कर्तव्य है — मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों व प्रशासन से जुड़े प्रस्तावित विधान की जानकारी राज्यपाल को नियमित रूप से संप्रेषित करना। यही कर्तव्य मुख्यमंत्री को मंत्रिपरिषद व राज्यपाल के बीच अनिवार्य "संचार-सेतु (Communication Link)" बनाकर सरकार का वास्तविक प्रमुख सिद्ध करता है।
  • मुख्यमंत्री की भूमिका: मंत्रिपरिषद का नेता — पोर्टफोलियो (विभाग) आवंटन, कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता, मंत्रियों को हटाने की अनुशंसा; विधानसभा का नेता — सदन में सरकार का प्रवक्ता; राज्यपाल व मंत्रिपरिषद के बीच सेतु; राज्य प्रशासन का समन्वयक — मुख्य सचिव व सचिवालय के माध्यम से पूरे प्रशासन-तंत्र पर निगरानी।
  • "Primus Inter Pares" (समकक्षों में प्रथम): मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों में "प्रथम" तो है, पर सैद्धांतिक रूप से "समकक्ष" — व्यवहार में मुख्यमंत्री का प्रभाव व शक्ति सबसे अधिक होती है, क्योंकि वही पूरी टीम चुनता है।
  • वर्तमान राजस्थान के मुख्यमंत्री: श्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma)।
💡 सरल भाषा में समझें — टीम का कप्तान
मुख्यमंत्री क्रिकेट टीम के कप्तान जैसा है — वही तय करता है किसे कौन-सी ज़िम्मेदारी (विभाग) मिलेगी, वही रणनीति (नीति) बनाता है, और मैच के बाद वही अंपायर (राज्यपाल) को टीम की पूरी रिपोर्ट देता है। कप्तान भले ही टीम का "एक सदस्य" हो, पर असली फैसले उसी के हाथ में होते हैं।
मुख्यमंत्री की भूमिका (Role)विवरण
मंत्रिपरिषद का नेताविभाग-बंटवारा, कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता, नीति-निर्णयों में अंतिम शब्द।
विधानसभा का नेतासदन में सरकार की ओर से प्रमुख वक्ता, बहुमत बनाए रखने का दायित्व।
राज्यपाल-मंत्रिपरिषद सेतु (अनु. 167)सभी मंत्रिपरिषद निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को देना — अनिवार्य संवैधानिक कर्तव्य।
प्रशासन का समन्वयकमुख्य सचिव व सचिवालय के माध्यम से समूचे राज्य प्रशासन पर पर्यवेक्षण।
राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधिनीति आयोग गवर्निंग काउंसिल (देखें अध्याय 05), अंतर-राज्यीय परिषद जैसे मंचों पर राज्य का प्रतिनिधित्व।

3मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)

राज्य मंत्रिपरिषद, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की तरह ही, विधानसभा के प्रति "सामूहिक रूप से उत्तरदायी (Collectively Responsible)" होती है — अनुच्छेद 164(2) इसका सीधा प्रावधान करता है। यानी एक मंत्री की गलती पर भी पूरी मंत्रिपरिषद ज़िम्मेदार मानी जाती है, और अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है (देखें अध्याय 08 — कार्यपालिका नियंत्रण)।

💡 सरल भाषा में समझें — एक ही थाली में खाने वाला परिवार

सोचिए एक परिवार एक ही थाली से खाना खाता है — अगर एक सदस्य की वजह से खाना खराब निकले, तो पूरा परिवार शर्मिंदा होता है, अकेला वह सदस्य नहीं। ठीक इसी तरह मंत्रिपरिषद के किसी एक मंत्री की भी बड़ी गलती पर विधानसभा पूरी मंत्रिपरिषद को ज़िम्मेदार मानकर अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है — यही है "सामूहिक उत्तरदायित्व"।

वर्तमान राजस्थान मंत्रिपरिषद (Rajasthan Cabinet — नवीनतम): दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में गठित मंत्रिपरिषद में श्रीमती दीया कुमारी (Diya Kumari) व श्री प्रेम चंद बैरवा (Prem Chand Bairwa) को उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाया गया — दोनों भाजपा से हैं। शपथ-ग्रहण में कुल 22 विधायकों को मंत्री बनाया गया, जिनमें लगभग 12 कैबिनेट मंत्री तथा शेष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार सहित/रहित) शामिल हैं — यह राजस्थान में सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की परंपरा को दर्शाता है।

📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

4राज्य सचिवालय (State Secretariat)

राज्य सचिवालय राज्य सरकार का सर्वोच्च नीति-निर्माता व समन्वयक निकाय है — यह एक "स्टाफ एजेंसी (Staff Agency)" है (देखें अध्याय 03 — Line व Staff Authority), यानी यह स्वयं सीधे जनता को सेवा नहीं देता, बल्कि नीति बनाकर मार्गदर्शन व निगरानी करता है। इसे राज्य सरकार का "मस्तिष्क (Brain)" कहा जा सकता है, जबकि निदेशालय व फील्ड कार्यालय इसके "हाथ-पैर (Hands & Legs)" हैं।

🎓 राज्य सचिवालय (State Secretariat) विचारक/प्रवर्तक: राजस्थान सचिवालय, जयपुर | वर्ष: स्टाफ एजेंसी (Staff Agency)
  • संरचना: सचिवालय कई विभागों (Departments) में बँटा होता है — प्रत्येक विभाग का नेतृत्व एक मुख्य सचिव-स्तर/अपर मुख्य सचिव/प्रमुख शासन सचिव/सचिव स्तर का IAS अधिकारी करता है, जिसकी सहायता के लिए संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव व सहायक सचिव जैसे पद होते हैं।
  • कार्य (Functions) — RAS Mains PYQ 2016 का प्रत्यक्ष उत्तर: (1) नीति-निर्माण में मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद की सहायता करना; (2) विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना; (3) बजट तैयार करने में सहयोग; (4) विधेयकों व अध्यादेशों का प्रारूपण; (5) केंद्र सरकार व अन्य राज्यों से संपर्क बनाए रखना; (6) निदेशालयों व फील्ड कार्यालयों को नीतिगत मार्गदर्शन व निर्देश देना।
  • सचिवालय स्वयं क्रियान्वयन (Implementation) नहीं करता — क्रियान्वयन का कार्य निदेशालयों व जिला प्रशासन (देखें अध्याय 11) के माध्यम से होता है। यही "नीति बनाम क्रियान्वयन" का भेद सचिवालय व निदेशालय के बीच के मूल अंतर की जड़ है (देखें अगला बिंदु)।
💡 सरल भाषा में समझें — स्कूल का ऑफिस-कक्ष
सोचिए स्कूल का प्रिंसिपल-ऑफिस (सचिवालय) समय-सारणी बनाता है, नियम तय करता है, बजट मंज़ूर करता है — पर क्लासरूम में पढ़ाने का असली काम टीचर (निदेशालय/फील्ड स्टाफ) करते हैं। ऑफिस बताता है "क्या करना है", क्लासरूम में होता है "कैसे करना है" — यही सचिवालय व निदेशालय का रिश्ता है।

सचिवालय में पद-सोपान (Rank Hierarchy in Secretariat)

पद (Rank)स्थान/भूमिका
मुख्य सचिव (Chief Secretary)सचिवालय व राज्य प्रशासन का सर्वोच्च पद — देखें अगला बिंदु।
अपर मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary — ACS)महत्वपूर्ण/भारी विभागों (जैसे गृह, वित्त, ऊर्जा) का नेतृत्व — मुख्य सचिव के ठीक बाद का सबसे वरिष्ठ स्तर।
प्रमुख शासन सचिव (Principal Secretary)ACS के समकक्ष वरिष्ठता, पर अपेक्षाकृत छोटे/मध्यम विभाग का नेतृत्व।
सचिव (Secretary)एक विभाग का नियमित प्रशासनिक प्रमुख — नीति-क्रियान्वयन की सीधी ज़िम्मेदारी।
संयुक्त सचिव (Joint Secretary)सचिव की सहायता, विभाग के किसी उप-क्षेत्र (Wing) की ज़िम्मेदारी।
उप सचिव / अवर सचिव / सहायक सचिव (Deputy/Under/Assistant Secretary)फाइल-स्तर पर परीक्षण, टिप्पणी व दैनिक कार्य — पद-सोपान का आधार स्तर।

5मुख्य सचिव (Chief Secretary)

मुख्य सचिव राज्य सिविल सेवाओं का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होता है — राज्य प्रशासन में यह पद ठीक वैसे ही सर्वोच्च है, जैसे केंद्र में कैबिनेट सचिव (देखें अध्याय 08)। यह पद संविधान में उल्लिखित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक परंपरा (Administrative Convention) से विकसित हुआ है, फिर भी व्यवहार में अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

🎓 मुख्य सचिव (Chief Secretary) की भूमिका विचारक/प्रवर्तक: राज्य के वरिष्ठतम IAS अधिकारी | वर्ष: RAS Mains PYQ 2016 (10 अंक) का प्रत्यक्ष उत्तर
  • मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार (Principal Advisor): नीति-निर्माण व प्रशासनिक निर्णयों में मुख्यमंत्री को दिन-प्रतिदिन सलाह देना।
  • सचिवालय का समन्वयक: विभिन्न विभागों के सचिवों/अपर मुख्य सचिवों के कार्यों में तालमेल बिठाना — अंतर-विभागीय टकराव सुलझाना।
  • राज्य सिविल सेवा बोर्ड का अध्यक्ष: IAS/राज्य सेवाओं के तबादलों, पदस्थापन व वरिष्ठता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका।
  • संकट प्रबंधन (Crisis Management): बाढ़, सूखा, महामारी, कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति में समूचे प्रशासन-तंत्र का समन्वयन व नियंत्रण कक्ष (Control Room) का नेतृत्व।
  • केंद्र-राज्य संपर्क सेतु: केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों व नीति आयोग के साथ राज्य की ओर से मुख्य संपर्क अधिकारी।
  • मंत्रिमंडल की बैठकों में उपस्थिति: निर्णयों का कार्यवृत्त (Minutes) तैयार करना व उनके क्रियान्वयन की निगरानी।
  • वर्तमान राजस्थान के मुख्य सचिव: श्री वी. श्रीनिवास (V. Srinivas) — 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्ति प्रस्तावित; उत्तराधिकार हेतु अभय कुमार, रजत मिश्रा व अपर्णा अरोड़ा जैसे वरिष्ठ IAS अधिकारियों के नाम चर्चा में।
💡 सरल भाषा में समझें — टीम का हेड-कोच
मुख्यमंत्री अगर टीम का कप्तान है, तो मुख्य सचिव उस टीम का "हेड-कोच" है — कप्तान बड़ी रणनीति (नीति) तय करता है, पर मैदान पर हर खिलाड़ी (IAS/RAS अधिकारी) को सही जगह लगाना, अनुशासन बनाए रखना व रोज़ का अभ्यास (दैनिक प्रशासन) चलाना हेड-कोच यानी मुख्य सचिव का काम है।

6निदेशालयों की भूमिका (Role of Directorates)

सचिवालय नीति बनाता है, पर उस नीति को ज़मीन पर उतारने का काम निदेशालय (Directorate) करते हैं — निदेशालय एक "लाइन एजेंसी (Line Agency)" है (देखें अध्याय 03), जिसका सीधा संपर्क आम जनता से होता है। हर प्रमुख विभाग का अपना एक निदेशालय होता है, जिसका मुखिया "निदेशक (Director)" कहलाता है।

सचिवालय (Secretariat)
  • नीति-निर्माण करता है (Policy-making)।
  • स्टाफ एजेंसी — सलाहकार व समन्वयक भूमिका।
  • मंत्रालय-स्तर पर, राजधानी (जयपुर) में केंद्रित।
  • सीधा जनता से संपर्क नहीं — अप्रत्यक्ष भूमिका।
  • नेतृत्व: सचिव/प्रमुख शासन सचिव (IAS)।
निदेशालय (Directorate)
  • नीति का क्रियान्वयन करता है (Implementation)।
  • लाइन एजेंसी — प्रत्यक्ष सेवा-वितरण भूमिका।
  • राज्यभर में फैले फील्ड कार्यालयों के माध्यम से कार्यरत।
  • सीधा जनता से संपर्क — योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन।
  • नेतृत्व: निदेशक (Director, प्रायः वरिष्ठ राज्य सेवा अधिकारी)।

RAS Mains PYQ 2023 — अजमेर स्थित निदेशालय (प्रत्यक्ष प्रश्न): राजस्थान में ऐतिहासिक कारणों (अजमेर लंबे समय तक ब्रिटिश-प्रशासित केंद्रीय क्षेत्र रहा, राजस्थान एकीकरण के बाद भी कई पुराने संस्थान वहीं बने रहे) से कई महत्वपूर्ण निदेशालय आज भी जयपुर के बजाय अजमेर में स्थित हैं — जैसे (1) राजस्व मंडल (Board of Revenue), और (2) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान (Board of Secondary Education, Rajasthan — RBSE, स्थापना 1957)। इसके अतिरिक्त देवस्थान विभाग (Devasthan Department) व महाविद्यालय शिक्षा विभाग का एक क्षेत्रीय (जोनल) कार्यालय भी अजमेर में है।

💡 सरल भाषा में समझें — रसोईघर की योजना बनाम खाना बनाना

सचिवालय वह है जो तय करता है कि आज खाने में क्या बनेगा, बजट कितना है, सामग्री कहाँ से आएगी (नीति) — पर असली खाना रसोईघर (निदेशालय) में बनता है, जहाँ रसोइया (फील्ड स्टाफ) उसे पकाकर परिवार (जनता) तक पहुँचाता है। दोनों के बिना काम नहीं चलता, पर दोनों की भूमिका बिल्कुल अलग है।

निदेशालयों के प्रकार — तकनीकी बनाम सामान्य विभाग (Technical vs Non-Technical Departments)

सभी निदेशालय एक जैसे नहीं होते — कुछ का नेतृत्व विशेषज्ञ/तकनीकी अधिकारी करते हैं, तो कुछ का सामान्यवादी (Generalist) प्रशासनिक अधिकारी — यह भेद अध्याय 07 में पढ़े गए "सामान्यवादी-विशेषज्ञ विवाद (Generalists-Specialists Debate)" से सीधे जुड़ता है।

निदेशालय का प्रकारउदाहरण एवं नेतृत्व
तकनीकी निदेशालय (Technical Directorate)लोक निर्माण विभाग (PWD), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सिंचाई/जल संसाधन, कृषि — इनका नेतृत्व इंजीनियर, चिकित्सक या कृषि-विशेषज्ञ (जैसे मुख्य अभियंता, निदेशक-चिकित्सा) करते हैं, जो उस क्षेत्र की तकनीकी शिक्षा प्राप्त विशेषज्ञ होते हैं।
सामान्य/प्रशासनिक निदेशालय (Non-Technical Directorate)राजस्व, स्थानीय निकाय, सामाजिक न्याय — इनका नेतृत्व प्रायः IAS/RAS संवर्ग के सामान्यवादी (Generalist) अधिकारी करते हैं, जिन्हें विशिष्ट तकनीकी प्रशिक्षण नहीं, बल्कि व्यापक प्रशासनिक अनुभव प्राप्त होता है।
💡 सरल भाषा में समझें — डॉक्टर बनाम मैनेजर

अस्पताल के निदेशालय का मुखिया एक डॉक्टर (तकनीकी विशेषज्ञ) होता है, क्योंकि वहाँ दवा व इलाज से जुड़े फैसले चाहिए। पर राजस्व निदेशालय जैसे सामान्य प्रशासनिक विभाग का मुखिया एक "मैनेजर-टाइप" प्रशासनिक अधिकारी (IAS/RAS) होता है, क्योंकि वहाँ ज़रूरत है समन्वय व कानून-व्यवस्था चलाने की, किसी खास तकनीकी डिग्री की नहीं।

7पुलिस प्रशासन (Police Administration)

पुलिस "राज्य सूची" का विषय है (संविधान की सातवीं अनुसूची) — यानी पुलिस प्रशासन का संगठन, नियंत्रण व वित्त-पोषण मुख्यतः राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है। पुलिस-तंत्र एक सुस्पष्ट सोपानिक्रम (Hierarchy) में कार्य करता है, ठीक सेना की तरह — हर स्तर ऊपर वाले स्तर को उत्तरदायी होता है।

🎓 पुलिस प्रशासन — सोपानिक्रम (Hierarchy) विचारक/प्रवर्तक: राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 | वर्ष: राज्य स्तर से थाना स्तर तक
  • राज्य स्तर: पुलिस महानिदेशक (Director General of Police — DGP) — राज्य पुलिस बल का प्रमुख, संपूर्ण राज्य में कानून-व्यवस्था व अपराध-नियंत्रण की अंतिम ज़िम्मेदारी।
  • क्षेत्र (रेंज) स्तर: पुलिस महानिरीक्षक (Inspector General of Police — IGP) व पुलिस उप-महानिरीक्षक (Deputy Inspector General — DIG) — कई ज़िलों के समूह (रेंज) की निगरानी।
  • ज़िला स्तर: पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police — SP) — ज़िले का पुलिस-प्रमुख, ज़िला कलेक्टर के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था बनाए रखना (देखें अध्याय 11)।
  • उप-ज़िला/वृत्त स्तर: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), उप-अधीक्षक (Deputy SP/DySP) — वृत्ताधिकारी (Circle Officer)।
  • थाना स्तर: थानाधिकारी (Station House Officer — SHO, प्रायः निरीक्षक/उप-निरीक्षक रैंक), सहायक उप-निरीक्षक (ASI), हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल — जनता से सीधा संपर्क वाली सबसे निचली इकाई।
💡 सरल भाषा में समझें — सेना की तरह Chain of Command
पुलिस विभाग भी सेना की तरह "chain of command" पर चलता है — गाँव के थाने का सिपाही अपने थानाधिकारी को, थानाधिकारी SP को, SP अपने रेंज के IG को, और IG राज्य के DGP को रिपोर्ट करता है। हर कड़ी टूटे बिना जुड़ी रहनी चाहिए, तभी कानून-व्यवस्था ठीक से चलती है।
सुधार/मामला (Reform/Case)विवरण
प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006)सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस-सुधार हेतु 7 बाध्यकारी निर्देश (Binding Directives) दिए — जैसे राज्य सुरक्षा आयोग (State Security Commission) का गठन, DGP का न्यूनतम 2-वर्ष निश्चित कार्यकाल, कानून-व्यवस्था व अन्वेषण (Investigation) कार्यों का पृथक्करण, पुलिस स्थापना बोर्ड (Police Establishment Board), पुलिस शिकायत प्राधिकरण (Police Complaints Authority)।
राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 एवं नियम, 2008सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में राजस्थान का अपना पुलिस अधिनियम — आधुनिक पुलिस-प्रशासन, सामुदायिक पुलिसिंग व जवाबदेही तंत्र की रूपरेखा प्रदान करता है।
क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति (नवीनतम)लगभग दो दशक बाद भी अधिकांश राज्यों (राजस्थान सहित) में प्रकाश सिंह निर्देशों का क्रियान्वयन आंशिक/सतही ही रहा है — विश्लेषणों के अनुसार केवल आंध्र प्रदेश व अरुणाचल प्रदेश ही आंशिक रूप से अनुपालनशील पाए गए हैं — राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी मुख्य कारण मानी जाती है।

वर्तमान राजस्थान पुलिस महानिदेशक (DGP): श्री राजीव कुमार शर्मा (Rajeev Kumar Sharma), 1990-बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी, वर्तमान में राजस्थान के पुलिस महानिदेशक — कार्यकाल जून 2027 तक प्रस्तावित।

📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

8राजस्व मंडल (Board of Revenue), अजमेर

राजस्व मंडल राजस्थान में भू-राजस्व (Land Revenue) व राजस्व-न्यायालयों से जुड़े मामलों की "सर्वोच्च अदालत" जैसी संस्था है — यह एक अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) निकाय है, जो अपील, पुनरीक्षण (Revision) व निर्देश (Reference) की शक्तियों का प्रयोग करता है।

🎓 राजस्व मंडल (Board of Revenue) विचारक/प्रवर्तक: स्थापना: 7 अप्रैल 1949 (अध्यादेश संख्या 22) | वर्ष: मुख्यालय: अजमेर
  • स्थापना: संयुक्त राजस्थान के निर्माण के बाद, राजप्रमुख द्वारा अध्यादेश संख्या 22, 1949 के तहत 7 अप्रैल 1949 को स्थापित — इसने बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, मत्स्य व पूर्वी राजस्थान की पुरानी अलग-अलग राजस्व-व्यवस्थाओं का स्थान लिया।
  • वर्तमान विधिक आधार: राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (Rajasthan Land Revenue Act, 1956), जिसने 1949 के अध्यादेश का स्थान लिया।
  • संरचना: एक अध्यक्ष (Chairman) व अधिकतम 20 सदस्य — सामान्यतः वरिष्ठ IAS/राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी सदस्य नियुक्त होते हैं।
  • कार्य: भू-राजस्व कानूनों के एकरूप व कुशल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना; अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों (तहसीलदार, उपखंड अधिकारी, कलेक्टर — देखें अध्याय 11) के निर्णयों के विरुद्ध अपील/पुनरीक्षण सुनना; भू-अभिलेख (Land Records — जमाबंदी, खसरा) से जुड़े विवादों का अंतिम निपटारा।
  • मुख्यालय अजमेर में क्यों: ऐतिहासिक रूप से अजमेर ब्रिटिश काल में एक पृथक केंद्र-शासित क्षेत्र (Ajmer-Merwara) था, और राजस्थान-एकीकरण के बाद भी कई पुरानी संस्थाएँ प्रशासनिक सुविधा व ऐतिहासिक निरंतरता के कारण अजमेर में ही बनी रहीं।
💡 सरल भाषा में समझें — राजस्व की "सुप्रीम कोर्ट"
जैसे देश की हर बड़ी कानूनी अपील अंततः सर्वोच्च न्यायालय में जाती है, वैसे ही राजस्थान में ज़मीन/भू-राजस्व से जुड़े विवादों की सबसे बड़ी अपील राजस्व मंडल, अजमेर में जाकर खत्म होती है — इसीलिए इसे राज्य की "राजस्व संबंधी सुप्रीम कोर्ट" भी कहा जाता है।

9राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission — SEC)

73वें व 74वें संविधान संशोधन (1992) ने पंचायती राज संस्थाओं व नगरीय स्थानीय निकायों (देखें अध्याय 03 — विकेंद्रीकरण) को संवैधानिक दर्जा दिया — इनके चुनाव सुचारू रूप से करवाने के लिए ही राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई, ठीक वैसे ही जैसे केंद्र में भारत निर्वाचन आयोग (देखें अध्याय 05) संसद/विधानसभा चुनाव करवाता है।

🎓 राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) विचारक/प्रवर्तक: अनुच्छेद 243K एवं 243ZA | वर्ष: एकल-सदस्यीय आयोग
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 243K (पंचायतों हेतु) व अनुच्छेद 243ZA (नगरपालिकाओं हेतु) — दोनों प्रावधान लगभग समान भाषा में राज्य निर्वाचन आयोग के गठन व शक्तियों का उल्लेख करते हैं।
  • गठन: एक "राज्य निर्वाचन आयुक्त (State Election Commissioner)" — राज्यपाल द्वारा नियुक्त, एकल-सदस्यीय आयोग (भारत निर्वाचन आयोग के विपरीत, जो बहु-सदस्यीय है)।
  • मुख्य कार्य — RAS Mains PYQ 2023 का प्रत्यक्ष उत्तर: पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, ज़िला परिषद) व शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिका, नगर परिषद, नगर निगम) के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन व नियंत्रण तथा मतदाता-सूचियाँ तैयार करवाना।
  • स्वतंत्रता के सुरक्षोपाय: सेवा-शर्तों में नियुक्ति के बाद अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता — भारत निर्वाचन आयोग की तरह स्वतंत्र व निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करने हेतु।
  • वर्तमान राजस्थान राज्य निर्वाचन आयुक्त: श्री राजेश्वर सिंह (Rajeshwar Singh) — सितंबर 2025 से पदस्थापित।
💡 सरल भाषा में समझें — गाँव-स्तर का "चुनाव आयोग"
जैसे लोकसभा व विधानसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग करवाता है, वैसे ही गाँव की पंचायत व शहर की नगर पालिका के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग करवाता है — दोनों का काम एक जैसा (निष्पक्ष चुनाव करवाना) है, बस स्तर अलग है।

10राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission — SHRC)

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993) के तहत केंद्र में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के साथ-साथ राज्यों में भी राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) गठित करने का प्रावधान किया गया — राजस्थान में भी इसी अधिनियम के तहत SHRC कार्यरत है।

🎓 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC) विचारक/प्रवर्तक: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 | वर्ष: अध्यक्ष + 2 सदस्य
  • संरचना: एक अध्यक्ष (सामान्यतः किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश) + अधिकतम 2 सदस्य।
  • नियुक्ति, त्यागपत्र व पदच्युति के प्रावधान — RAS Mains PYQ 2024 (5 अंक) का प्रत्यक्ष उत्तर: अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर होती है, जिसमें मुख्यमंत्री (अध्यक्ष के रूप में), विधानसभा अध्यक्ष, राज्य के गृह मंत्री व विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। त्यागपत्र राज्यपाल को संबोधित कर दिया जा सकता है। पदच्युति (हटाना) केवल राष्ट्रपति द्वारा, और वह भी सिद्ध कदाचार/असमर्थता पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद ही संभव है — ठीक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा (यह स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु है)।
  • कार्य: मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों की स्वतः संज्ञान अथवा शिकायत पर जाँच; जेलों व हिरासत-केंद्रों का निरीक्षण; पीड़ितों हेतु मुआवज़े की अनुशंसा; सरकार को मानवाधिकार-संबंधी सुधारों की सिफारिश।
  • सीमाएँ: आयोग की सिफारिशें सलाहकार (Advisory) प्रकृति की हैं, बाध्यकारी नहीं — यह लोकायुक्त (देखें अगला बिंदु) की तरह ही एक "मृदु शक्ति (Soft Power)" वाली संस्था है।
  • वर्तमान अध्यक्ष: न्यायमूर्ति मंधाता सीतारामा मूर्ति (Justice Mandhata Seetharama Murti)।
💡 सरल भाषा में समझें — शिकायत सुनने वाला दादा-दादी
सोचिए घर में एक बुज़ुर्ग सदस्य है जिसके पास हर कोई अपनी शिकायत लेकर जा सकता है, वे सुनकर सलाह देते हैं — पर उनकी सलाह मानना ज़रूरी नहीं, बस नैतिक दबाव बनता है। SHRC भी ठीक ऐसा ही करता है — मानवाधिकार हनन की शिकायत सुनता है, जाँच करता है, सलाह देता है — पर आदेश देने की सीधी शक्ति नहीं रखता।

11लोकायुक्त (Lokayukta)

जब केंद्र सरकार दशकों तक लोकपाल विधेयक पर बहस करती रही (देखें अध्याय 05), तब तक कई राज्यों ने अपने स्तर पर ही भ्रष्टाचार-निरोधक लोकायुक्त संस्था स्थापित कर ली — राजस्थान इस मामले में देश के अग्रणी राज्यों में से एक रहा है।

🎓 राजस्थान लोकायुक्त (Rajasthan Lokayukta) विचारक/प्रवर्तक: राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 | वर्ष: देश का तीसरा राज्य लोकायुक्त
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 (अधिनियम संख्या 9 का 1973) के तहत गठित — भारत में सबसे पहले उड़ीसा (1970-71), फिर महाराष्ट्र (1971-72), और तीसरे स्थान पर राजस्थान (1973) ने यह संस्था स्थापित की — डोनाल्ड सी. रोवाट के अनुसार, "भारत विश्व का सबसे व्यापक ओम्बड्समैन क्षेत्राधिकार रखता है।"
  • नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा, मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के मुख्य न्यायाधीश व विधानसभा में विपक्ष के नेता के परामर्श से — सामान्यतः किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश की नियुक्ति की परंपरा।
  • अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction): मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य, विधायक (कतिपय शर्तों सहित) एवं राज्य सरकार के अधिकारी/कर्मचारी भ्रष्टाचार व प्रशासनिक कदाचार की शिकायतों की जाँच के दायरे में आते हैं।
  • अधिकार-क्षेत्र से अपवर्जित (Excluded) — RAS Mains PYQ 2018 (5 अंक) का प्रत्यक्ष उत्तर: (1) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश व न्यायिक सेवा के सदस्य; (2) मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयुक्त, क्षेत्रीय आयुक्त व राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी; (3) राजस्थान विधानसभा सचिवालय के कर्मचारी। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार, लोकायुक्त की सिफारिश पर, राजपत्र-अधिसूचना द्वारा किसी विशेष श्रेणी के लोक सेवकों (राजपत्रित रैंक को छोड़कर) को भी अधिकार-क्षेत्र से बाहर कर सकती है।
  • कार्यप्रणाली की विशेषताएँ (Characteristics) — RAS Mains PYQ 2016 (5 अंक) का प्रत्यक्ष उत्तर, कुल 5 बिंदु: (1) लोकायुक्त प्रतिवर्ष राज्यपाल को अपने कार्यों की समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करता है; (2) राज्यपाल यह रिपोर्ट स्पष्टीकरण-ज्ञापन सहित विधानसभा के समक्ष रखता है; (3) लोकायुक्त विधानसभा के प्रति उत्तरदायी है; (4) जाँच हेतु राज्य की अन्वेषण एजेंसियों की सहायता ले सकता है; (5) राज्य सरकार के किसी भी विभाग से संबंधित फाइलें व दस्तावेज़ तलब कर सकता है — परंतु उसकी सिफारिशें केवल सलाहकार (Advisory) होती हैं, राज्य सरकार पर बाध्यकारी नहीं।
  • वर्तमान राजस्थान लोकायुक्त: न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा (Justice Pratap Krishna Lohra) — अक्टूबर 2023 से राजस्थान के 13वें लोकायुक्त के रूप में कार्यरत (देखें अध्याय 08)।
💡 सरल भाषा में समझें — मोहल्ले का निष्पक्ष बुज़ुर्ग-पंच
सोचिए मोहल्ले में कोई विवाद हो, तो लोग किसी सम्मानित, निष्पक्ष बुज़ुर्ग (लोकायुक्त) के पास जाते हैं — वे दोनों पक्षों की सुनते हैं, जाँच करते हैं, और अपनी राय देते हैं, पर कोई पुलिस जैसी सज़ा नहीं दे सकते। यही लोकायुक्त की सीमा भी है — शक्तिशाली प्रभाव, पर सीधी दंड-शक्ति नहीं।
राज्य (State)लोकायुक्त स्थापना वर्ष
उड़ीसा (Orissa) — देश में प्रथम1970-71
महाराष्ट्र (Maharashtra)1971-72
राजस्थान (Rajasthan)1973
बिहार (Bihar)1974
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)1975
कर्नाटक (Karnataka)1979
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)1981
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)1983
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)1983
गुजरात (Gujarat)1986
पंजाब (Punjab)1995

राजस्थान की विशेष स्थिति (Rajasthan Connect): राजस्थान भारत का तीसरा राज्य था जिसने लोकायुक्त संस्था स्थापित की — यह दर्शाता है कि प्रशासनिक जवाबदेही व भ्रष्टाचार-निरोध के मामले में राजस्थान शुरू से ही अग्रणी राज्यों में रहा है। राजस्थान में उप-लोकायुक्त (Up-Lokayukta) का भी प्रावधान है, यद्यपि यह पद लंबे समय से रिक्त रहा है।

🎯 राज्य प्रशासन (State Administration) — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

★ परीक्षा में अवश्य ध्यान रखने योग्य तथ्य ★

1. राज्यपाल — अनुच्छेद 153-162; नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा; कार्यकाल 5 वर्ष/राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत। 2. राज्यपाल की दोहरी भूमिका — राज्य का संवैधानिक प्रमुख + केंद्र का एजेंट। 3. वर्तमान राजस्थान राज्यपाल: हरिभाऊ किसनराव बागड़े — 31 जुलाई 2024 से, 22वें राज्यपाल। 4. मुख्यमंत्री — अनुच्छेद 163-164; नियुक्ति राज्यपाल द्वारा; अनुच्छेद 167 के तहत निर्णयों की सूचना राज्यपाल को देना अनिवार्य कर्तव्य। 5. वर्तमान राजस्थान मुख्यमंत्री: भजनलाल शर्मा। 6. मंत्रिपरिषद — अनुच्छेद 164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व; 91वें संशोधन (2003) से आकार अधिकतम 15% सीमित। 7. राज्य सचिवालय — स्टाफ एजेंसी, नीति-निर्माण; निदेशालय — लाइन एजेंसी, क्रियान्वयन। 8. मुख्य सचिव — राज्य का वरिष्ठतम IAS अधिकारी, राज्य सिविल सेवा बोर्ड का अध्यक्ष, संकट-प्रबंधन का नेतृत्व। 9. वर्तमान राजस्थान मुख्य सचिव: वी. श्रीनिवास — 31 अगस्त 2026 सेवानिवृत्ति प्रस्तावित। 10. अजमेर स्थित प्रमुख निदेशालय/संस्थाएँ: राजस्व मंडल, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), देवस्थान विभाग। 11. राजस्व मंडल — स्थापना 7 अप्रैल 1949, अध्यादेश 22/1949; अब राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 से शासित; अध्यक्ष + अधिकतम 20 सदस्य। 12. पुलिस सोपानिक्रम: DGP (राज्य) → IG/DIG (रेंज) → SP (ज़िला) → ASP/DySP → SHO (थाना)। 13. प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) — 7 बाध्यकारी निर्देश; DGP का न्यूनतम 2-वर्ष कार्यकाल इनमें से एक। 14. राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 एवं नियम, 2008। 15. वर्तमान राजस्थान DGP: राजीव कुमार शर्मा (1990-बैच IPS)। 16. राज्य निर्वाचन आयोग — अनुच्छेद 243K (पंचायत) व 243ZA (नगरपालिका); एकल-सदस्यीय आयोग। 17. वर्तमान राजस्थान राज्य निर्वाचन आयुक्त: राजेश्वर सिंह — सितंबर 2025 से। 18. SHRC — मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993; पदच्युति केवल राष्ट्रपति द्वारा, HC न्यायाधीश जैसी सुरक्षा। 19. वर्तमान RSHRC अध्यक्ष: न्यायमूर्ति मंधाता सीतारामा मूर्ति। 20. राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 — देश में तीसरा राज्य (उड़ीसा, महाराष्ट्र के बाद)। 21. लोकायुक्त क्षेत्राधिकार से अपवर्जित: HC न्यायाधीश, CEC/EC/चुनाव अधिकारी, विधानसभा सचिवालय स्टाफ। 22. वर्तमान राजस्थान लोकायुक्त: न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा — अक्टूबर 2023 से, 13वें लोकायुक्त।

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न (PYQs) 📝 5-अंक (60-70 शब्द) | 10-अंक (~120 शब्द)

Q1. भारत के संविधान में उल्लिखित मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का वर्णन कीजिए तथा उस सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य को भी रेखांकित कीजिए जो उन्हें सरकार का प्रमुख बनाता है। (RAS Mains 2023 — 5 अंक) Q2. सचिवालय (सेक्रेटेरिएट) और निदेशालय (डायरेक्टोरेट) के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। (RAS Mains 2021 — 5 अंक) Q3. राज्य सचिवालय के कोई दो कार्य लिखिए। (RAS Mains 2016 — मूल रूप से 2 अंक, नए पैटर्न में 5 अंक) Q4. अजमेर में स्थित राज्य सरकार के निदेशालयों या कार्यपालक विभागों के किन्हीं दो मुख्यालयों के नाम लिखिए। (RAS Mains 2023 — 5 अंक) Q5. राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य की नियुक्ति, त्यागपत्र और पदच्युति के लिए क्या प्रावधान हैं? (RAS Mains 2024 — 5 अंक) Q6. राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य क्या है? (RAS Mains 2023 — 5 अंक) Q7. राजस्थान में लोकायुक्त के अधिकार-क्षेत्र पर चर्चा कीजिए। (RAS Mains 2021 — 5 अंक) Q8. राजस्थान में लोकायुक्त के अधिकार-क्षेत्र से कौन-से पद और व्यक्ति अपवर्जित किए गए हैं? (RAS Mains 2018 — 5 अंक) Q9. लोकायुक्त के किन्हीं पाँच कार्यों का उल्लेख कीजिए। (RAS Mains 2016 — 5 अंक) Q10. राज्य प्रशासन में मुख्यमंत्री की स्थिति और भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (RAS Mains 2016 — 10 अंक) Q11. राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव की भूमिका को उजागर कीजिए। (RAS Mains 2016 — 10 अंक) Q12. राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों की विवेचना कीजिए। राज्यपाल की भूमिका को लेकर हाल के विवाद क्यों उठे हैं? (संभावित प्रश्न — 10 अंक)

वर्षघटना/सुधारमहत्व
1949 (7 अप्रैल)राजस्व मंडल की स्थापना (अध्यादेश 22/1949)।राजस्थान की एकीकृत राजस्व-न्याय व्यवस्था की नींव।
1956राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम पारित।राजस्व मंडल का वर्तमान विधिक आधार बना।
1970-71उड़ीसा — देश का पहला राज्य लोकायुक्त।राज्य-स्तरीय ओम्बड्समैन आंदोलन की शुरुआत।
1971-72महाराष्ट्र — देश का दूसरा राज्य लोकायुक्त।लोकायुक्त संस्था का विस्तार।
1973राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम पारित।राजस्थान — देश का तीसरा राज्य लोकायुक्त।
199273वाँ व 74वाँ संविधान संशोधन।राज्य निर्वाचन आयोग (अनु. 243K/243ZA) की स्थापना का आधार।
1993मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम पारित।NHRC व SHRC (राज्य मानवाधिकार आयोग) की स्थापना का आधार।
200391वाँ संविधान संशोधन।मंत्रिपरिषद के आकार पर 15% की सीमा तय।
2006 (सितंबर)प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ — सर्वोच्च न्यायालय के 7 निर्देश।पुलिस-सुधार की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय।
2007-08राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 व नियम, 2008।राजस्थान का पुलिस-सुधार संबंधी विधिक ढांचा।
2023 (अक्टूबर)न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा — राजस्थान के 13वें लोकायुक्त नियुक्त।लोकायुक्त संस्था में वर्तमान नेतृत्व।
2024 (31 जुलाई)हरिभाऊ किसनराव बागड़े — राजस्थान के 22वें राज्यपाल नियुक्त।राज्यपाल पद पर वर्तमान नियुक्ति।
2024 (29 दिसंबर)राजस्थान सरकार द्वारा 9 नवगठित ज़िले (अनूपगढ़ सहित) समाप्त — 41 ज़िले, 7 संभाग शेष।राज्य के प्रशासनिक भूगोल में नवीनतम बड़ा परिवर्तन (देखें अध्याय 11)।
2025 (सितंबर)राजेश्वर सिंह — राजस्थान राज्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त।SEC में वर्तमान नेतृत्व।
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →
← अध्याय 9: तुलनात्मक लोक प्रशासन अध्याय 11: जिला प्रशासन →