👥 अध्याय 6/11 — लोक प्रशासन

कार्मिक प्रशासन

Personnel Administration | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. भर्ती (Recruitment)
  2. प्रशिक्षण (Training)
  3. पदोन्नति (Promotion)
  4. तटस्थता (Neutrality)
  5. गुमनामी (Anonymity)
  6. आचार संहिता (Code of Conduct)

कल्पना कीजिए एक युवा का सफर — वह लाखों प्रतियोगियों में से चुना जाता है (भर्ती), फिर मसूरी या जयपुर की अकादमी में प्रशिक्षण लेता है (प्रशिक्षण), वर्षों की सेवा के बाद वरिष्ठ पद पर पदोन्नत होता है (पदोन्नति), चाहे किसी भी पार्टी की सरकार आए वह निष्पक्ष रहकर काम करता है (तटस्थता), उसकी गलती पर मंत्री जवाब देता है, वह खुद नहीं (गुमनामी), और वह एक तय आचार संहिता के दायरे में रहकर ही जीवन जीता है (आचार संहिता)। यही है "कार्मिक प्रशासन (Personnel Administration)" — यानी सरकार अपने सबसे बड़े संसाधन, अपने मानव-बल (human resource) का प्रबंधन कैसे करती है — भर्ती से लेकर सेवानिवृत्ति तक।

1भर्ती (Recruitment)

भर्ती का अर्थ है — रिक्त पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों को खोजना, आकर्षित करना व चयनित करना। एक कुशल प्रशासन की नींव उसकी भर्ती-प्रक्रिया की निष्पक्षता व गुणवत्ता पर टिकी होती है — वेबर के अनुसार (देखें अध्याय 02) आधुनिक नौकरशाही की पहचान ही यह है कि नियुक्ति तकनीकी योग्यता व खुली प्रतियोगी परीक्षा (Open Competitive Examination) के आधार पर हो, व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं।

भर्ती के प्रकार (Types of Recruitment)

प्रत्यक्ष भर्ती (Direct Recruitment)
  • खुली प्रतियोगी परीक्षा (UPSC/RPSC/SSC) के माध्यम से बाहर से नए उम्मीदवारों की भर्ती।
  • ताज़ा विचार व ऊर्जा संगठन में लाती है।
  • उदाहरण: सिविल सेवा परीक्षा से सीधे IAS/IPS में चयन।
प्रत्यायोजित/पदोन्नति द्वारा भर्ती (Recruitment by Promotion)
  • संगठन के भीतर मौजूद कर्मचारियों को अनुभव व वरिष्ठता के आधार पर ऊपर उठाना।
  • अनुभवी कर्मियों को अवसर व मनोबल बढ़ाता है (देखें अध्याय 04)।
  • उदाहरण: राज्य सेवा के अधिकारी का पदोन्नति द्वारा IAS में चयन।

UPSC/RPSC भर्ती प्रक्रिया — तीन चरण (RAS Mains संदर्भ)

चरणविवरण
प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam)वस्तुनिष्ठ (Objective/MCQ) प्रकृति की स्क्रीनिंग परीक्षा — केवल मुख्य परीक्षा हेतु अर्हता (qualifying) के लिए, मेरिट में अंक नहीं जुड़ते।
मुख्य परीक्षा (Main Exam)वर्णनात्मक (Descriptive) परीक्षा — निबंध, सामान्य अध्ययन व वैकल्पिक/विशिष्ट विषय (जैसे RAS Mains Paper 3); RAS में नए पैटर्न (2026) अनुसार अब केवल 5 व 10 अंकों के प्रश्न।
साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण (Interview/Personality Test)अंतिम चरण — उम्मीदवार के व्यक्तित्व, निर्णय-क्षमता व प्रशासनिक योग्यता का आकलन; अंतिम मेरिट में मुख्य परीक्षा + साक्षात्कार दोनों के अंक जुड़ते हैं।
🎓 मॉर्स्टीन मार्क्स के अनुसार नौकरशाही के 4 प्रकार (भर्ती-दर्शन के आधार पर) विचारक/प्रवर्तक: फ्रिट्ज़ मॉर्स्टीन मार्क्स (Fritz Morstein Marx) | वर्ष: वर्गीकरण अध्ययन
  • संरक्षक नौकरशाही (Guardian Bureaucracy): प्लेटो के "गार्जियन" विचार पर आधारित — अधिकारी शैक्षणिक/नैतिक श्रेष्ठता के आधार पर चुने जाते हैं, स्वयं को जनहित का संरक्षक मानते हैं (प्राचीन चीन व रूस में उदाहरण)।
  • जाति/वर्ग नौकरशाही (Caste Bureaucracy): भर्ती केवल एक विशेष वर्ग/जाति से होती है — निर्णय में भी जातिगत विचार हावी रहते हैं (प्राचीन भारत में केवल ब्राह्मण-क्षत्रिय वर्ग को उच्च पद; इंग्लैंड में अभिजात वर्ग को वरीयता)।
  • संरक्षण/भ्रष्ट नौकरशाही (Patronage/Spoils Bureaucracy): राजनीतिक संरक्षकों द्वारा अपने समर्थकों को सरकारी पद बतौर इनाम देना — इसे "Spoils System" भी कहते हैं (19वीं सदी अमेरिका में प्रचलित; योग्यता व अनुशासन की कमी के लिए आलोचित)।
  • योग्यता नौकरशाही (Merit Bureaucracy): उपरोक्त तीनों की कमियों के जवाब में विकसित — भर्ती स्पष्ट योग्यता व मानकों पर आधारित, सेवा में स्थिरता व राजनीतिक नियंत्रण दोनों सुनिश्चित — आधुनिक भारत सहित अधिकांश लोकतंत्रों में यही मॉडल अपनाया गया है (Pendleton Act, 1883, USA — देखें अध्याय 09)।
💡 सरल भाषा में समझें — क्रिकेट टीम चयन
सोचिए एक क्रिकेट टीम में सिलेक्टर सिर्फ अपने रिश्तेदारों को टीम में चुन ले (Patronage/Spoils System) — टीम कभी नहीं जीतेगी। लेकिन अगर हर खिलाड़ी को एक खुले ट्रायल (Open Competition) से गुज़ार कर, सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर चुना जाए (Merit System) — तभी सबसे अच्छी टीम बनेगी। भारत में UPSC/RPSC वही "निष्पक्ष ट्रायल" है जो सुनिश्चित करता है कि प्रशासन में सबसे योग्य लोग ही आएं।

आरक्षण नीति (Reservation Policy)

भारत में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु संविधान द्वारा भर्ती में आरक्षण का प्रावधान किया गया है — ताकि ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

वर्गआरक्षण (केंद्र सरकार, अनुमानित)
अनुसूचित जाति (SC)15%
अनुसूचित जनजाति (ST)7.5%
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)27%
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)10%
💡 सरल भाषा में समझें — दौड़ में अलग-अलग शुरुआती लाइन

सोचिए एक 400 मीटर की दौड़ में कुछ धावकों को जन्म से ही जूते नहीं मिले, कुछ को शुरुआत में ही रस्सी से बांध दिया गया था — अब सबको एक ही लाइन से दौड़ाना "बराबरी" नहीं, बल्कि अन्याय होगा। इसलिए जिन्हें पीछे रखा गया था, उन्हें थोड़ा आगे की लाइन से शुरू करने का मौका (आरक्षण) दिया जाता है — ताकि दौड़ सच में बराबरी की हो सके। भर्ती में आरक्षण भी ऐतिहासिक असमानता को पाटने का यही प्रयास है, योग्यता को दरकिनार करना नहीं।

पार्श्व प्रवेश (Lateral Entry) — इतिहास एवं नवीनतम विवाद

पार्श्व प्रवेश का अर्थ है — पारंपरिक सिविल सेवा परीक्षा के बाहर से, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक जगत या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विशेषज्ञों को सीधे संयुक्त सचिव/निदेशक/उप सचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर भर्ती करना — ताकि विशेषज्ञता (domain expertise) की कमी पूरी हो सके।

शुरुआत (2018): जून 2018 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने पहली बार निजी क्षेत्र से 10 "विशिष्ट व्यक्तियों" को केंद्र में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) स्तर पर भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित किए — न्यूनतम 15 वर्ष के निजी क्षेत्र अनुभव की शर्त रखी गई, नियुक्ति 3-5 वर्ष के संविदा (contract) आधार पर हुई। इस पहले दौर में 9 व्यक्ति विभिन्न मंत्रालयों में चयनित हुए — यह भारतीय नौकरशाही में पार्श्व प्रवेश का औपचारिक शुभारंभ था।

नवीनतम घटनाक्रम (2024): UPSC ने मई 2024 में 45 पदों हेतु पार्श्व प्रवेश का विज्ञापन जारी किया था। इसमें SC/ST/OBC/EWS आरक्षण का कोई प्रावधान न होने पर विपक्षी दलों (कांग्रेस, सपा, DMK) व सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों (JDU, LJP) दोनों ने कड़ा विरोध किया — सामाजिक न्याय व संवैधानिक आरक्षण-व्यवस्था को दरकिनार करने की आशंका जताई गई। परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के हस्तक्षेप पर UPSC को यह विज्ञापन वापस लेना पड़ा — हालाँकि सरकार ने स्पष्ट किया कि पार्श्व प्रवेश की नीति पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है, केवल आरक्षण संबंधी चिंताओं के समाधान हेतु पुनर्विचार किया जा रहा है।

RAS Mains PYQ 2021 (5 अंक): "उच्च सिविल सेवाओं में पार्श्व प्रवेश प्रणाली (Lateral Entry) के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।" — उत्तर में लाभ (विशेषज्ञता, नई सोच, तेज़ निर्णय-क्षमता) व चुनौतियाँ (आरक्षण का अभाव, पारंपरिक अफसरों में असंतोष, जवाबदेही ढांचे में भिन्नता) दोनों संतुलित रूप से लिखें, और 2024 के विवाद का उल्लेख अवश्य करें।

2प्रशिक्षण (Training)

चयन के बाद प्रशिक्षण ही वह सेतु है जो एक सामान्य उम्मीदवार को एक सक्षम प्रशासक में बदलता है। जितनी सावधानी भर्ती में बरती जाती है, प्रशिक्षण में उतनी ही सावधानी ज़रूरी है — बिना उचित प्रशिक्षण के सबसे मेधावी अधिकारी भी मैदानी प्रशासन (field administration) की जटिलताओं में असफल हो सकता है।

प्रशिक्षण के प्रकार (Types)

A. आगमनी/नींव प्रशिक्षण (Induction/Foundation Training): सेवा में प्रवेश के तुरंत बाद दिया जाने वाला प्रारंभिक प्रशिक्षण — मूल्यों, नियमों व प्रशासनिक संस्कृति से परिचय।

B. सेवाकालीन प्रशिक्षण (In-Service Training): सेवा के दौरान समय-समय पर दिया जाने वाला प्रशिक्षण, ताकि अधिकारी नई नीतियों/तकनीकों से अपडेट रहें।

C. पुनश्चर्या प्रशिक्षण (Refresher Training): वर्षों बाद कौशल को पुनः तरोताज़ा करने हेतु — विशेषकर पदोन्नति से पहले।

कार्यस्थल पर प्रशिक्षण (On-the-Job)
  • वास्तविक कार्यस्थल पर, कार्य करते हुए सीखना।
  • उदाहरण: प्रोबेशनर IAS अधिकारी की जिले में अटैचमेंट ट्रेनिंग।
कार्यस्थल से बाहर प्रशिक्षण (Off-the-Job)
  • कक्षा/अकादमी में सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण।
  • उदाहरण: LBSNAA मसूरी में फाउंडेशन कोर्स।

प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान

संस्थानविवरण
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरीIAS सहित सभी अखिल भारतीय व केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों का साझा फाउंडेशन कोर्स — भारत का सर्वोच्च प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान।
RCVP नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल (मध्य प्रदेश)मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवाओं के अधिकारियों हेतु राज्य-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान।
हरीश चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (HCM RIPA), जयपुरराजस्थान की RAS, राजस्थान पुलिस सेवा, राजस्थान लेखा सेवा सहित विभिन्न राज्य सेवाओं का फाउंडेशन प्रशिक्षण देने वाला प्रमुख संस्थान; इसके उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर व कोटा में 4 क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र भी हैं।
सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA), हैदराबादIPS अधिकारियों का प्रशिक्षण।
राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA), भोपालन्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण।
🎓 Mission Karmayogi एवं iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म विचारक/प्रवर्तक: भारत सरकार — राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम | वर्ष: शुभारंभ: सितंबर 2020
  • उद्देश्य: नियम-आधारित (rule-based) प्रशासन से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित (role-based) दक्षता प्रशिक्षण की ओर ले जाना — सिविल सेवकों को "रचनात्मक, कल्पनाशील, नवोन्मेषी, सक्रिय, व्यावसायिक, प्रगतिशील, ऊर्जावान, पारदर्शी व तकनीकी रूप से सक्षम (Creative, Imaginative, Innovative, Proactive, Professional, Progressive, Energetic, Transparent, Tech-enabled)" — यानी "CIPRPPETT" गुणों से युक्त बनाना।
  • iGOT Karmayogi डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हर सिविल सेवक की भूमिका-आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण, "कर्म अंक (Karma Points)" के आधार पर प्रगति ट्रैकिंग की सुविधा है।
  • नवीनतम अद्यतन (अप्रैल 2026): iGOT प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत, 8 करोड़ से अधिक कोर्स-पूर्णताएँ, 4,600 से अधिक बहुभाषी कोर्स उपलब्ध; अनिवार्य कोर्स व मूल्यांकन पूर्ण करने की समय-सीमा 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई गई (APAR प्रस्तुत करने से पहले पूर्ण करना अनिवार्य)।
  • दिसंबर 2025 में "iGOT Marketplace" लॉन्च किया गया — जिसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के उन्नत कोर्स मुफ्त उपलब्ध हैं; मार्च 2026 में Coursera के साथ भागीदारी कर तकनीक, डेटा-एनालिटिक्स व नेतृत्व-कौशल के कोर्स जोड़े गए।
💡 सरल भाषा में समझें — ड्राइविंग लाइसेंस से पहले ट्रेनिंग
सोचिए कोई गाड़ी चलाना सीखे बिना सीधे हाईवे पर उतर जाए — दुर्घटना तय है। इसीलिए पहले ड्राइविंग स्कूल में प्रशिक्षण दिया जाता है। ठीक वैसे ही, एक नया IAS अधिकारी सीधे कलेक्टर की कुर्सी पर बैठाया जाए तो जनता के जीवन से जुड़े फैसले गलत हो सकते हैं — इसलिए LBSNAA जैसी अकादमियाँ व अब iGOT जैसा डिजिटल मंच उसे व्यावहारिक अनुभव व निरंतर अपडेटेड ज्ञान देते हैं।
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3पदोन्नति (Promotion)

पदोन्नति का अर्थ है — किसी कर्मचारी को उसकी वर्तमान से उच्चतर श्रेणी/पद पर स्थानांतरित करना, सामान्यतः अधिक वेतन, सत्ता व दायित्व के साथ। पदोन्नति प्रणाली की निष्पक्षता ही किसी संगठन में मनोबल (देखें अध्याय 04) बनाए रखने की कुंजी है।

वरिष्ठता बनाम योग्यता (Seniority vs Merit)

वरिष्ठता आधारित पदोन्नति (Seniority-based)
  • सेवा में बिताए वर्षों के आधार पर स्वतः क्रम से पदोन्नति।
  • लाभ: निष्पक्ष, पक्षपात की गुंजाइश कम, अनुभव को महत्व।
  • दोष: कार्यकुशलता की अनदेखी हो सकती है — कमज़ोर प्रदर्शन करने वाला भी सिर्फ उम्र/अनुभव के दम पर ऊपर पहुँच सकता है।
योग्यता आधारित पदोन्नति (Merit-based)
  • कार्य-प्रदर्शन, दक्षता व मूल्यांकन के आधार पर पदोन्नति।
  • लाभ: कुशल व मेहनती कर्मचारियों को प्रोत्साहन, प्रतिस्पर्धा व उत्पादकता बढ़ती है।
  • दोष: मूल्यांकन में पक्षपात/व्यक्तिपरकता (subjectivity) की आशंका बनी रहती है।

व्यवहार में अधिकांश देश (भारत सहित) दोनों का मिश्रण अपनाते हैं — "वरिष्ठता-सह-योग्यता (Seniority-cum-Merit)" सिद्धांत, जिसमें वरिष्ठता को आधार बनाते हुए भी न्यूनतम प्रदर्शन-मानक (benchmark) अनिवार्य किया जाता है।

APAR (वार्षिक कार्य-निष्पादन मूल्यांकन प्रतिवेदन) एवं DPC

राजस्थान — नवीनतम आंकड़े (RAS से IAS पदोन्नति): सामान्यतः RAS अधिकारी को IAS में पदोन्नत होने में लगभग 25-30 वर्ष की सेवा लगती है — केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा गठित चयन समिति (Selection Committee) दिल्ली में वरिष्ठता व APAR के आधार पर निर्णय लेती है। जून 2025 में इसी प्रक्रिया के तहत 16 RAS अधिकारियों को वर्ष 2024 की रिक्तियों (vacancies) के विरुद्ध IAS में पदोन्नत किया गया — यह दर्शाता है कि पदोन्नति कोटा प्रतिवर्ष केंद्र द्वारा तय रिक्तियों पर निर्भर करता है, न कि केवल राज्य पर।

💡 सरल भाषा में समझें — स्कूल में रिपोर्ट कार्ड

सोचिए स्कूल में हर साल सिर्फ उम्र के आधार पर अगली क्लास में भेज दिया जाए, चाहे बच्चा पास हो या फेल — यह विशुद्ध "वरिष्ठता" होगी, जो गलत है। लेकिन अगर सिर्फ एक दिन के पेपर पर सब कुछ तय हो, अनुभव को बिल्कुल न गिना जाए — यह विशुद्ध "योग्यता" होगी, जो भी अधूरी है। असली व्यवस्था वही अच्छी है जो सालभर का रिपोर्ट कार्ड (APAR जैसा) भी देखे और अनुभव को भी सम्मान दे।

4तटस्थता (Neutrality)

सिविल सेवा तटस्थता का अर्थ है — सरकारी अधिकारी अपने व्यक्तिगत राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर, चाहे किसी भी दल/विचारधारा की सरकार सत्ता में हो, उसे समान निष्ठा व निष्पक्षता से सेवा दे। यह वेस्टमिंस्टर मॉडल (Westminster Model — देखें अध्याय 09) की एक केंद्रीय विशेषता है, जिसे भारत ने ब्रिटिश परंपरा से अपनाया।

तटस्थता के आयाम

वेस्टमिंस्टर मॉडल बनाम राजनीतिक नियुक्ति प्रणाली (Westminster vs Political Appointees)

वेस्टमिंस्टर मॉडल (India, UK)
  • स्थायी, तटस्थ, गुमनाम सिविल सेवा — चुनाव परिणाम से अप्रभावित।
  • एक ही अधिकारी अलग-अलग विचारधारा वाली सरकारों की समान निष्ठा से सेवा करता है।
  • भर्ती स्वतंत्र आयोग (UPSC/RPSC) द्वारा, कार्यकाल स्थायी।
राजनीतिक नियुक्ति प्रणाली (USA — Spoils/Schedule C)
  • सत्ता परिवर्तन के साथ वरिष्ठ पदों पर बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ बदलती हैं (जैसे US का "Schedule C" पद)।
  • नियुक्तियाँ राजनीतिक निष्ठा/चुनावी सहयोग के आधार पर होती हैं।
  • लाभ: नई सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं से बेहतर तालमेल; दोष: निरंतरता व तटस्थता प्रभावित (देखें अध्याय 09 — तुलनात्मक लोक प्रशासन)।

भारत में तटस्थता की चुनौतियाँ

💡 सरल भाषा में समझें — रेफरी की भूमिका

फुटबॉल मैच का रेफरी किसी एक टीम का समर्थक नहीं हो सकता, चाहे कोई भी टीम जीते उसे दोनों के लिए एक जैसा निष्पक्ष रहना है। सिविल सेवक भी वैसे ही होते हैं — चुनाव में कोई भी पार्टी जीते, कलेक्टर या सचिव को समान निष्ठा से नई सरकार की नीतियां लागू करनी होती हैं, अपनी निजी राजनीतिक पसंद को बीच में नहीं लाना होता।

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5गुमनामी (Anonymity)

गुमनामी के सिद्धांत का अर्थ है — सिविल सेवक अपने कार्यों के लिए सीधे जनता या संसद के प्रति उत्तरदायी नहीं होता; उसकी ओर से राजनीतिक जवाबदेही मंत्री (Minister) वहन करता है। यह वेस्टमिंस्टर परंपरा का दूसरा स्तंभ है, जो "मंत्रिस्तरीय उत्तरदायित्व (Ministerial Responsibility)" के सिद्धांत से जुड़ा है।

🎓 गुमनामी का सिद्धांत (Doctrine of Anonymity) विचारक/प्रवर्तक: वेस्टमिंस्टर संसदीय परंपरा | वर्ष: ब्रिटिश मूल, भारत में अपनाया गया
  • मूल तर्क: मंत्री एक राजनीतिक नियुक्ति है, जो संसद के प्रति (अपने "निर्वाचित स्वामियों" के प्रति) उत्तरदायी है। स्थायी अधिकारी (सिविल सेवक) चुनाव नहीं लड़ता, इसलिए वह सीधे जनता/संसद के प्रति उत्तरदायी नहीं हो सकता — उसकी गलतियों की राजनीतिक जिम्मेदारी मंत्री लेता है।
  • इसका व्यावहारिक अर्थ है — सिविल सेवक "जनता के गुस्से (public fury)" से सुरक्षित रहता है; वह केवल विभागीय जाँच व अनुशासनात्मक कार्रवाई के अधीन होता है, सार्वजनिक बहस/आलोचना के सीधे निशाने पर नहीं आता।
  • यह सिद्धांत ऐतिहासिक रूप से लोकपाल (देखें अध्याय 05) की स्थापना में सबसे बड़ी बाधा रहा — तर्क दिया गया कि यदि लोकपाल सीधे अधिकारियों की जाँच करेगा, तो यह गुमनामी व मंत्रिस्तरीय उत्तरदायित्व दोनों सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। यही कारण था कि 1968 से 2013 तक लोकपाल विधेयक बार-बार अटकता रहा।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005) ने इस सिद्धांत को बड़ी चुनौती दी है — अब नागरिक सीधे यह जान सकते हैं कि किस अधिकारी ने कौन-सी फाइल पर क्या निर्णय लिया, जिससे सिविल सेवकों की "गुमनामी" व्यवहारिक रूप से घटी है और प्रत्यक्ष जवाबदेही (Direct Accountability) बढ़ी है।
💡 सरल भाषा में समझें — टीम कप्तान और कोच
सोचिए क्रिकेट टीम हार जाए तो मीडिया व फैंस सबसे ज़्यादा सवाल कप्तान से पूछते हैं, टीम के फिजियो या नेट-बॉलर से नहीं — भले ही अंदरूनी रणनीति में उनकी भी भूमिका हो। ठीक वैसे ही, किसी योजना में गड़बड़ी होने पर संसद/मीडिया में मंत्री से जवाब माँगा जाता है, फाइल बनाने वाले अधिकारी से सीधे नहीं — यही "गुमनामी" का सिद्धांत है। लेकिन RTI आने के बाद अब यह पर्दा थोड़ा हट गया है, और लोग सीधे यह भी पूछ सकते हैं कि "फाइल पर दस्तखत किसके थे?"

6आचार संहिता (Code of Conduct)

आचार संहिता वह लिखित नियम-संहिता है जो सिविल सेवकों के व्यावसायिक व व्यक्तिगत आचरण की सीमाएँ तय करती है — ताकि सेवा में सत्यनिष्ठा (integrity), निष्पक्षता व अनुशासन बना रहे। यह तटस्थता व गुमनामी दोनों सिद्धांतों को व्यावहारिक/कानूनी रूप देने का माध्यम है।

नियम-संहिताप्रयोज्यता (Applicability)
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 [All India Services (Conduct) Rules, 1968]IAS, IPS, IFoS — तीनों अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू।
केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 [Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964]केंद्र सरकार के सिविल सेवकों (केंद्रीय सेवाओं) पर लागू।
राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 [Rajasthan Civil Services (Conduct) Rules, 1971]RAS सहित राजस्थान राज्य सेवाओं के समस्त कर्मचारियों पर लागू।

आचार संहिता के प्रमुख प्रावधान (Do's and Don'ts)

1. राजनीतिक गतिविधि पर प्रतिबंध — किसी राजनीतिक दल का सदस्य बनना, चुनाव में भाग लेना या सार्वजनिक रूप से राजनीतिक विचार व्यक्त करना वर्जित।

2. संपत्ति की घोषणा (Asset Declaration) — प्रत्येक वर्ष चल व अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य; निर्धारित सीमा से अधिक मूल्यवान उपहार लेने की मनाही।

3. निजी व्यापार/व्यवसाय पर रोक — सिविल सेवक बिना सरकार की पूर्व अनुमति के कोई निजी व्यापार, प्रकाशन या मीडिया गतिविधि नहीं कर सकता।

4. हड़ताल व प्रदर्शन पर प्रतिबंध — सामूहिक अवकाश (mass casual leave), हड़ताल या सरकार-विरोधी प्रदर्शन में भाग लेना निषिद्ध।

5. निष्पक्षता एवं सत्यनिष्ठा — कर्तव्यपालन में दक्षता, सत्यनिष्ठा (integrity) व भेदभाव-रहित व्यवहार बनाए रखना अनिवार्य।

6. ऋण एवं निवेश की सूचना — शेयर बाजार में सट्टा-प्रकृति के लेन-देन व बड़े ऋण लेने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी को सूचित करना आवश्यक।

💡 सरल भाषा में समझें — स्कूल का अनुशासन-नियम

जैसे किसी स्कूल में शिक्षक के लिए नियम होता है कि वह कक्षा में किसी राजनीतिक पार्टी का प्रचार नहीं करेगा, न ही बच्चों से रिश्वत लेगा, न ही बिना अनुमति ट्यूशन का अलग व्यापार चलाएगा — ठीक वैसे ही, सरकार ने अपने अधिकारियों के लिए यह "आचार संहिता" बनाई है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे कि अधिकारी निजी स्वार्थ के बजाय जनसेवा को प्राथमिकता देगा।

"सिविल सेवक की सबसे बड़ी पूँजी उसकी सत्यनिष्ठा (integrity) है — पद चला जाए तो वापस मिल सकता है, प्रतिष्ठा नहीं।" — प्रशासनिक आचार-संहिता का मूल दर्शन
🎯 कार्मिक प्रशासन — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

★ परीक्षा में अवश्य ध्यान रखने योग्य तथ्य ★

1. वेबर का "योग्यता आधारित भर्ती" सिद्धांत — खुली प्रतियोगी परीक्षा पर आधारित (देखें अध्याय 02)। 2. मॉर्स्टीन मार्क्स — नौकरशाही के 4 प्रकार: Guardian, Caste, Patronage/Spoils, Merit। 3. UPSC/RPSC भर्ती के 3 चरण — Prelims (अर्हक), Mains (वर्णनात्मक), Interview (व्यक्तित्व परीक्षण)। 4. आरक्षण — केंद्र सरकार में SC 15%, ST 7.5%, OBC 27%, EWS 10% (अनुमानित)। 5. Lateral Entry — जून 2018 पहला विज्ञापन (10 पद, 9 चयनित, Joint Secretary स्तर, 15 वर्ष अनुभव, 3-5 वर्ष संविदा)। 6. Lateral Entry विवाद (2024) — 45 पदों का UPSC विज्ञापन आरक्षण न होने पर वापस लिया गया। 7. वेस्टमिंस्टर मॉडल (भारत/UK) — स्थायी तटस्थ सिविल सेवा; USA का "Schedule C/Spoils System" — सत्ता बदलने पर वरिष्ठ पद भी बदलते हैं (देखें अध्याय 09)। 8. राजस्थान — RAS से IAS पदोन्नति में सामान्यतः 25-30 वर्ष सेवा लगती है; जून 2025 में 16 RAS अधिकारी IAS में पदोन्नत (2024 रिक्तियों के विरुद्ध)। 9. RAS Mains PYQ 2021 — "उच्च सिविल सेवाओं में पार्श्व प्रवेश का प्रभाव" (5 अंक)। 10. LBSNAA, मसूरी — सभी अखिल भारतीय व केंद्रीय सेवाओं का साझा फाउंडेशन कोर्स। 11. HCM RIPA, जयपुर — राजस्थान की RAS सहित राज्य सेवाओं का प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान; 4 क्षेत्रीय केंद्र (उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा)। 12. Mission Karmayogi — सितंबर 2020 में शुरू; iGOT Karmayogi डिजिटल प्रशिक्षण मंच। 13. iGOT प्लेटफॉर्म (अप्रैल 2026 तक) — 1.5 करोड़+ पंजीकृत शिक्षार्थी, 8 करोड़+ कोर्स-पूर्णताएँ, 4,600+ कोर्स। 14. iGOT Marketplace — दिसंबर 2025 लॉन्च; Coursera भागीदारी — मार्च 2026। 15. APAR (Annual Performance Appraisal Report) — पुराने ACR (गोपनीय प्रतिवेदन) का स्थान लिया, अब अंशतः पारदर्शी। 16. DPC (Departmental Promotion Committee) — विभागीय पदोन्नति समिति, APAR व सेवा-अभिलेख के आधार पर निर्णय। 17. वरिष्ठता-सह-योग्यता (Seniority-cum-Merit) — भारत में अपनाया गया व्यावहारिक पदोन्नति सिद्धांत। 18. तटस्थता (Neutrality) — वेस्टमिंस्टर मॉडल का स्तंभ — सिविल सेवक किसी भी दल की सरकार को समान निष्ठा से सेवा दे। 19. गुमनामी (Anonymity) — मंत्री उत्तरदायी, सिविल सेवक नहीं — मंत्रिस्तरीय उत्तरदायित्व सिद्धांत से जुड़ा। 20. गुमनामी का सिद्धांत — दशकों तक लोकपाल विधेयक (1968-2013) पारित होने में सबसे बड़ी बाधा रहा। 21. RTI Act, 2005 — गुमनामी के सिद्धांत को सबसे बड़ी चुनौती, प्रत्यक्ष अधिकारी-जवाबदेही बढ़ाई। 22. अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 — IAS/IPS/IFoS पर लागू। 23. केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 — केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू। 24. राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 — RAS सहित राज्य सेवाओं पर लागू।

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न (PYQs) 📝 5-अंक (60-70 शब्द) | 10-अंक (~120 शब्द)

Q1. उच्च सिविल सेवाओं में पार्श्व प्रवेश प्रणालियों (Lateral Entry Systems) के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए। (5 अंक) — RAS Mains 2021 Q2. (संभावित) भर्ती में योग्यता व्यवस्था (Merit System) एवं संरक्षण व्यवस्था (Spoils System) में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q3. (संभावित) सिविल सेवकों हेतु प्रशिक्षण की आवश्यकता एवं भारत में प्रचलित प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q4. (संभावित) Mission Karmayogi की अवधारणा एवं इसके उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q5. (संभावित) पदोन्नति में वरिष्ठता एवं योग्यता के सिद्धांतों की तुलनात्मक विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q6. (संभावित) सिविल सेवा तटस्थता (Neutrality) की अवधारणा एवं भारत में इसके समक्ष चुनौतियों का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q7. (संभावित) गुमनामी (Anonymity) के सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए बताइए कि सूचना के अधिकार अधिनियम ने इसे किस प्रकार प्रभावित किया है। (10 अंक) Q8. (संभावित) अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के प्रमुख प्रावधानों की विवेचना कीजिए। (5 अंक) Q9. (संभावित) वेस्टमिंस्टर मॉडल की स्थायी तटस्थ सिविल सेवा एवं अमेरिकी राजनीतिक नियुक्ति (Spoils System) में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)

वर्षघटना/सुधारमहत्व
1883Pendleton Act, USA (देखें अध्याय 09)।Spoils System से Merit System की ओर पहला बड़ा वैश्विक कदम।
1964केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम पारित।केंद्रीय कर्मचारियों हेतु आचार-संहिता का औपचारिक ढांचा।
1968अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम पारित।IAS/IPS/IFoS हेतु समान आचार-मानक स्थापित।
1971राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम पारित।राज्य सेवाओं हेतु स्वतंत्र आचार-संहिता।
2005सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act)।गुमनामी के सिद्धांत को सीधी चुनौती, अधिकारी-जवाबदेही बढ़ी।
2018पहला पार्श्व प्रवेश (Lateral Entry) विज्ञापन जारी।संयुक्त सचिव स्तर पर विशेषज्ञों की सीधी भर्ती की शुरुआत।
2020 (सितंबर)Mission Karmayogi का शुभारंभ।भूमिका-आधारित सिविल सेवा क्षमता-निर्माण की नई राष्ट्रीय नीति।
2024 (मई-अगस्त)45 पदों हेतु Lateral Entry विज्ञापन — आरक्षण विवाद पर वापस लिया गया।सामाजिक न्याय बनाम विशेषज्ञता की बहस सतह पर आई।
2025-26iGOT Karmayogi — 1.5 करोड़+ शिक्षार्थी, iGOT Marketplace (दिसंबर 2025), Coursera भागीदारी (मार्च 2026)।डिजिटल सिविल सेवा प्रशिक्षण का सबसे बड़ा विस्तार — नवीनतम स्थिति।
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