🏦 अध्याय 5/11 — लोक प्रशासन

प्रशासनिक संस्थाएँ

Administrative Institutions | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission — UPSC)
  2. भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India — ECI)
  3. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General — CAG)
  4. वित्त आयोग (Finance Commission)
  5. लोकपाल (Lokpal)
  6. नीति आयोग (NITI Aayog)

कल्पना कीजिए — एक युवा हर साल लाखों प्रतियोगियों के बीच परीक्षा देकर IAS बनता है (यह UPSC का काम है); एक नेता चुनाव जीतकर सरकार बनाता है (यह निर्वाचन आयोग सुनिश्चित करता है कि चुनाव निष्पक्ष हों); उस सरकार का हर रुपया कहाँ खर्च हुआ, इसकी जाँच कौन करता है (यह CAG का काम है); केंद्र से राज्यों को पैसा किस अनुपात में बंटेगा, यह कौन तय करता है (वित्त आयोग); कोई मंत्री या अधिकारी भ्रष्टाचार करे तो कौन पकड़ेगा (लोकपाल); और देश की दीर्घकालिक नीति दिशा कौन तय करेगा (नीति आयोग)। यही छह संस्थाएँ — UPSC, ECI, CAG, वित्त आयोग, लोकपाल एवं नीति आयोग — भारत के लोकतांत्रिक व प्रशासनिक ढांचे के स्तंभ (pillars) हैं, जो सरकार को निष्पक्ष, जवाबदेह व कुशल बनाए रखती हैं।

1संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission — UPSC)

UPSC भारत की केंद्रीय भर्ती संस्था है, जिसका कार्य है — योग्यतम व्यक्तियों का निष्पक्ष चयन कर उन्हें अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFoS) व केंद्रीय सेवाओं में नियुक्त करने की सिफारिश करना। यह संविधान द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, ताकि सिविल सेवा भर्ती राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहे।

🎓 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) विचारक/प्रवर्तक: संवैधानिक निकाय — अनुच्छेद 315-323 | वर्ष: स्थापना: 1926 (Public Service Commission), वर्तमान स्वरूप 1950 से
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 315 (आयोग की स्थापना), अनुच्छेद 316 (नियुक्ति व पदावधि), अनुच्छेद 317 (निष्कासन — केवल राष्ट्रपति द्वारा, कदाचार सिद्ध होने पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बाद), अनुच्छेद 320 (कार्य), अनुच्छेद 323 (वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को)।
  • गठन: 1 अध्यक्ष + अन्य सदस्य (संख्या राष्ट्रपति तय करते हैं — वर्तमान में अध्यक्ष सहित कुल संख्या 9-11 के बीच रहती है); नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
  • कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो; त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपा जा सकता है।
  • स्वतंत्रता के उपाय: सेवा-शर्तें नियुक्ति के बाद अलाभप्रद रूप से नहीं बदली जा सकतीं; व्यय भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (charged) होता है — संसद में मतदान नहीं होता; अध्यक्ष व सदस्य पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं (कुछ अपवादों सहित)।
  • वर्तमान अध्यक्ष (नवीनतम, मई 2025 से): डॉ. अजय कुमार (Dr. Ajay Kumar) — 1985 बैच के केरल कैडर के भूतपूर्व IAS अधिकारी व पूर्व रक्षा सचिव — जिनका कार्यकाल अक्टूबर 2027 तक निर्धारित है।
💡 सरल भाषा में समझें — निष्पक्ष परीक्षक की भूमिका
सोचिए किसी स्कूल में अगर हेडमास्टर खुद ही अपने पसंदीदा बच्चों को टॉपर घोषित कर दे तो यह अन्यायपूर्ण होगा। इसीलिए बाहर से एक स्वतंत्र परीक्षक बुलाया जाता है जो निष्पक्ष रूप से मूल्यांकन करे। UPSC ठीक यही भूमिका निभाता है — सरकार अपने ही पसंदीदा लोगों को अफसर न बना दे, इसके लिए एक स्वतंत्र, संवैधानिक संस्था परीक्षा लेकर योग्यतम को चुनती है।
UPSC द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाएँसंक्षिप्त विवरण
सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam — CSE)IAS, IPS, IFoS सहित अखिल भारतीय व केंद्रीय सेवाओं हेतु — तीन चरण: Prelims, Mains, Interview।
भारतीय वन सेवा परीक्षा (IFoS)वन सेवा अधिकारियों की भर्ती हेतु — CSE Prelims के साथ संयुक्त।
संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (CDS)सेना/नौसेना/वायुसेना में अधिकारी पद हेतु।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल परीक्षा (CAPF)BSF, CRPF, CISF आदि में सहायक कमांडेंट पद हेतु।
भारतीय इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ESE)केंद्रीय तकनीकी/इंजीनियरिंग सेवाओं हेतु।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी परीक्षा (NDA/NA)12वीं के बाद सेना की तीनों शाखाओं में प्रवेश हेतु।
संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा (CMS)केंद्र सरकार चिकित्सा सेवाओं हेतु।

कार्य एवं शक्तियाँ (Functions & Powers) — अनुच्छेद 320

राजस्थान संदर्भ: राज्य स्तर पर UPSC के समकक्ष संस्था है — राजस्थान लोक सेवा आयोग (Rajasthan Public Service Commission — RPSC), अजमेर — जो RAS सहित राज्य की सिविल सेवाओं की भर्ती परीक्षाएँ आयोजित करता है। इसका संवैधानिक आधार भी अनुच्छेद 315-323 में ही निहित है (राज्य लोक सेवा आयोग के रूप में)।

2भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India — ECI)

निर्वाचन आयोग भारत के लोकतंत्र की रीढ़ है — यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संसद व राज्य विधानसभाओं के चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष व नियमित रूप से हों। बिना एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग के, लोकतंत्र केवल कागज़ों तक सीमित रह जाता — यही कारण है कि संविधान-निर्माताओं ने इसे एक शक्तिशाली स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित किया।

🎓 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) विचारक/प्रवर्तक: संवैधानिक निकाय — अनुच्छेद 324 | वर्ष: स्थापना: 25 जनवरी 1950 (राष्ट्रीय मतदाता दिवस इसी दिन मनाया जाता है)
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 324 — चुनाव के अधीक्षण, निर्देशन व नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग में निहित।
  • गठन: प्रारंभ में (1950-1989) एकल-सदस्यीय निकाय था; 1989 में अस्थायी रूप से बहु-सदस्यीय बनाया गया; अक्टूबर 1993 से स्थायी रूप से त्रि-सदस्यीय — 1 मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) + 2 निर्वाचन आयुक्त (ECs), सभी समान शक्ति रखते हैं, निर्णय बहुमत से।
  • नियुक्ति प्रक्रिया (नवीनतम — CEC एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं पदावधि) अधिनियम, 2023): चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, तथा प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री शामिल — यह सर्वोच्च न्यायालय के Anoop Baranwal निर्णय (2023) के बाद बनाया गया नया कानूनी ढांचा है (पूर्व में भारत के मुख्य न्यायाधीश भी समिति में थे, जो अंतरिम व्यवस्था थी)।
  • कार्यकाल व निष्कासन: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो; CEC को केवल महाभियोग (impeachment) की उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए है — जिससे CEC को कार्यपालिका के दबाव से सुरक्षा मिलती है।
  • वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (नवीनतम, फरवरी 2025 से): श्री ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) — भारत के 26वें CEC।
💡 सरल भाषा में समझें — मैच का अंपायर
क्रिकेट मैच में दोनों टीमों में से कोई भी अंपायर नहीं बन सकता — एक निष्पक्ष तीसरा व्यक्ति अंपायर बनता है ताकि फैसले पर कोई विवाद न हो। ठीक वैसे ही, चुनाव में कोई भी राजनीतिक दल खुद चुनाव नहीं करा सकता — निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र "अंपायर" की तरह चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करता है, आचार संहिता लागू करता है और परिणाम घोषित करता है।
कार्य एवं शक्तियाँ (Functions & Powers)विवरण
निर्वाचन संचालनराष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संसद व राज्य विधानसभाओं के चुनाव कराना।
मतदाता सूची तैयार करनाआवधिक रूप से मतदाता सूचियों को तैयार करना व अद्यतन करना।
आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct)चुनाव की घोषणा से परिणाम तक राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों के आचरण हेतु दिशा-निर्देश।
राजनीतिक दलों की मान्यता व चुनाव चिन्हदलों को मान्यता देना, चुनाव चिन्ह आवंटित करना, विवाद की स्थिति में निर्णय (जैसे चिन्ह विवाद)।
परिसीमन (Delimitation) में सहयोगपरिसीमन आयोग के साथ मिलकर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ तय करने में सहयोग।
निर्वाचन व्यय की निगरानीउम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा तय करना व निगरानी करना।

राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) से अंतर — RAS Mains PYQ 2023 (2M*): "राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का मुख्य कार्य क्या है?" — ध्यान रखें: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) संसद व विधानसभा चुनाव कराता है (अनुच्छेद 324), जबकि राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) पंचायत व नगरपालिका जैसे स्थानीय निकायों के चुनाव कराता है (अनुच्छेद 243K — विस्तार से देखें अध्याय 10 — राज्य प्रशासन)। दोनों अलग-अलग स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएँ हैं।

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3नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor General — CAG)

CAG को संविधान का "लेखा-परीक्षक (Auditor)" कहा जाता है — सरकार द्वारा जनता के पैसे का हर रुपया संविधान व कानून के अनुसार सही ढंग से खर्च हुआ या नहीं, इसकी जाँच करने वाली सर्वोच्च संस्था। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने CAG को "भारतीय संविधान के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी" कहा था।

🎓 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) विचारक/प्रवर्तक: संवैधानिक निकाय — अनुच्छेद 148 | वर्ष: भारत के "जनता के धन का संरक्षक (Guardian of Public Purse)"
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 148 (नियुक्ति), अनुच्छेद 149 (कर्तव्य व शक्तियाँ), अनुच्छेद 150 (लेखा प्रारूप), अनुच्छेद 151 (प्रतिवेदन राष्ट्रपति/राज्यपाल को)।
  • नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा; कार्यकाल — 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो।
  • निष्कासन: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया (अनुच्छेद 124(4)) — संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से कदाचार/असमर्थता सिद्ध होने पर ही हटाया जा सकता है — यह CAG को अत्यधिक स्वतंत्रता देता है।
  • लेखा परीक्षण के प्रकार: (i) अनुपालन लेखा परीक्षा (Compliance/Regularity Audit) — नियमों के पालन की जाँच (ii) निष्पादन लेखा परीक्षा (Performance Audit) — योजना के उद्देश्य कितने प्राप्त हुए (iii) वित्तीय लेखा परीक्षा (Financial Audit) — खातों की सत्यता की जाँच।
  • प्रतिवेदन प्रक्रिया: CAG रिपोर्ट राष्ट्रपति/राज्यपाल को सौंपी जाती है → संसद/विधानसभा में रखी जाती है → लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee — PAC) द्वारा विस्तृत परीक्षण।
  • वर्तमान CAG (नवीनतम, नवंबर 2024 से): श्री के. संजय मूर्ति (K. Sanjay Murthy) — भारत के 15वें CAG, जिन्होंने 21 नवंबर 2024 को पदभार ग्रहण किया।
💡 सरल भाषा में समझें — घर का हिसाब-किताब जाँचने वाला
सोचिए एक बड़े परिवार में हर महीने पैसा खर्च होता है — राशन, स्कूल फीस, बिजली बिल। अगर कोई सदस्य बेईमानी से पैसा गलत जगह खर्च कर दे, तो घर का कोई भरोसेमंद बुजुर्ग सारा हिसाब जाँचता है। सरकार में CAG यही भूमिका निभाता है — वह जाँचता है कि टैक्स के पैसे से बनी सड़क, अस्पताल, योजना पर खर्च सही हुआ या नहीं, और अपनी रिपोर्ट खुलकर संसद के सामने रखता है।
CAG के कार्यविवरण
संघ व राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षणकेंद्र व राज्य दोनों स्तर पर सरकारी व्यय की जाँच — CAG दोनों के लिए एकीकृत संस्था है।
सार्वजनिक उपक्रमों का ऑडिटसरकारी कंपनियों व निगमों (Public Sector Undertakings) के खातों की जाँच।
निष्पादन लेखा परीक्षा रिपोर्टयोजनाओं की प्रभावशीलता व मूल्य-प्रतिफल (Value for Money) की जाँच — जैसे 2G, कोयला घोटाला रिपोर्ट्स।
लेखा प्रारूप निर्धारणसंघ व राज्यों के खातों को किस रूप में रखा जाए, यह निर्धारित करना (राष्ट्रपति की सलाह से)।

राजस्थान संदर्भ: CAG की राजस्थान राज्य रिपोर्ट्स (State Finance Audit Report, Performance Audit Reports) प्रतिवर्ष राजस्थान विधानसभा में प्रस्तुत होती हैं, जिनमें राज्य की वित्तीय स्थिति, योजनाओं के क्रियान्वयन में कमियाँ व राजस्व हानि जैसे मुद्दे उजागर होते हैं — इन्हें राज्य की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) आगे जाँचती है (विस्तार से देखें अध्याय 08 — प्रशासन पर नियंत्रण)।

4वित्त आयोग (Finance Commission)

भारत एक संघीय व्यवस्था (Federal System) है, जिसमें केंद्र व राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत बंटवारा एक निरंतर चुनौती है। वित्त आयोग इसी समस्या का संवैधानिक समाधान है — यह एक अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) निकाय है जो हर पाँच वर्ष में केंद्र-राज्य कर-राजस्व के बंटवारे की सिफारिश करता है।

🎓 वित्त आयोग (Finance Commission) विचारक/प्रवर्तक: संवैधानिक निकाय — अनुच्छेद 280 | वर्ष: 16वाँ वित्त आयोग — अध्यक्ष: डॉ. अरविंद पानगढ़िया
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 280 — राष्ट्रपति द्वारा हर 5 वर्ष में (या आवश्यकता होने पर पहले भी) गठित; अध्यक्ष व 4 अन्य सदस्य।
  • मुख्य कार्य (Terms of Reference): (i) केंद्र व राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय का बंटवारा (vertical devolution) (ii) राज्यों के बीच इस आय का वितरण (horizontal devolution) (iii) संचित निधि से राज्यों को सहायता अनुदान (Grants-in-Aid) के सिद्धांत (iv) स्थानीय निकायों (पंचायत/नगरपालिका) के संसाधन बढ़ाने हेतु उपाय (v) आपदा प्रबंधन हेतु वित्तीय सिफारिशें।
  • 16वाँ वित्त आयोग (नवीनतम): डॉ. अरविंद पानगढ़िया की अध्यक्षता में गठित, इसकी रिपोर्ट 1 फरवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत की गई — यह अवधि 2026-27 से 2030-31 तक (5 वर्ष) के लिए सिफारिशें करती है।
  • प्रमुख सिफारिशें: राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 41% (15वें वित्त आयोग के समान बरकरार); क्षैतिज बंटवारे में एक नया मापदंड — "GDP में योगदान" को 10% भार देना (tax व fiscal effort मापदंड हटाया गया); ग्रामीण स्थानीय निकायों हेतु ₹4.4 लाख करोड़ व शहरी स्थानीय निकायों हेतु ₹3.6 लाख करोड़ के अनुदान; राज्य आपदा प्रबंधन कोष हेतु ₹2,04,401 करोड़।
💡 सरल भाषा में समझें — परिवार में कमाई का बंटवारा
सोचिए एक संयुक्त परिवार में सबसे बड़ा भाई कमाता है, पर पैसा पूरे परिवार (छोटे भाई-बहनों) में बाँटना है। कौन कितना पाएगा, यह तय करने के लिए एक निष्पक्ष बुजुर्ग सदस्य बुलाया जाता है, जो हर सदस्य की ज़रूरत, हैसियत, व योगदान देखकर बंटवारा तय करता है। वित्त आयोग ठीक यही भूमिका निभाता है — केंद्र (जो ज़्यादा टैक्स वसूलता है) और राज्यों (जिन्हें ज़्यादा खर्च करना है) के बीच पैसे का निष्पक्ष बंटवारा तय करता है।
क्षैतिज बंटवारे के मापदंड (16वाँ वित्त आयोग)भार (Weight)
आय-दूरी (Income Distance)42.5%
जनसंख्या (2011 जनगणना)17.5%
जनसांख्यिकीय निष्पादन (Demographic Performance)10%
क्षेत्रफल (Area)10%
वन एवं पारिस्थितिकी (Forest & Ecology)10%
GDP में योगदान (नया मापदंड)10%

राजकोषीय स्थिति — नवीनतम अनुमान: 16वें वित्त आयोग के अनुसार केंद्र-राज्य संयुक्त ऋण (Combined Debt) 2026-27 में GDP के 77.3% से घटकर 2030-31 तक 73.1% रह जाने का अनुमान है — यह राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

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5लोकपाल (Lokpal)

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु एक स्वतंत्र लोकपाल की माँग दशकों पुरानी है। पहले प्रशासनिक सुधार आयोग (1st ARC, 1966-70 — विस्तार से देखें अध्याय 07) ने सबसे पहले केंद्र में "लोकपाल" व राज्यों में "लोकायुक्त" जैसी स्वतंत्र ओम्बड्समैन संस्था बनाने की सिफारिश की थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — 1968 से 2013 तक की यात्रा

लोकपाल विधेयक संसद में पहली बार 1968 में पेश हुआ, परंतु अगले चार दशकों में यह 1971, 1977, 1985, 1989, 1996, 1998 व 2001 में बार-बार पेश होने के बावजूद पारित नहीं हो सका — हर बार लोकसभा भंग होने या राजनीतिक सहमति न बनने से यह विधेयक निरस्त हो जाता। स्थिति तब बदली जब 2011 में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में "इंडिया अगेंस्ट करप्शन (India Against Corruption)" आंदोलन ने जन लोकपाल विधेयक (Jan Lokpal Bill) की माँग को लेकर देशव्यापी जन-आंदोलन खड़ा कर दिया — इस दबाव में सरकार को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 पारित करना पड़ा।

🎓 लोकपाल (Lokpal) विचारक/प्रवर्तक: सांविधिक निकाय — Lokpal and Lokayuktas Act, 2013 | वर्ष: गठन: 2019 — पहले अध्यक्ष जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष
  • स्वरूप: लोकपाल एक सांविधिक (statutory) निकाय है — संवैधानिक नहीं — जो केंद्र सरकार के अधिकारियों व राजनेताओं के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच करता है।
  • गठन: 1 अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य (जिनमें कम से कम 50% न्यायिक सदस्य होने चाहिए); अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति करती है जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश (या नामित न्यायाधीश) व एक प्रख्यात विधिवेत्ता शामिल होते हैं।
  • क्षेत्राधिकार (Jurisdiction): प्रधानमंत्री (कुछ सुरक्षा-कवचों सहित — अंतरराष्ट्रीय संबंध, सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु व अंतरिक्ष जैसे विषय तब तक बाहर, जब तक पूर्ण पीठ 2/3 बहुमत से जाँच का निर्णय न ले), केंद्रीय मंत्री, सांसद, तथा केंद्र सरकार के सभी समूह A/B/C/D कर्मचारी व सरकारी वित्त-पोषित निकायों के अधिकारी।
  • प्रक्रिया: शिकायत मिलने पर 90 दिन में प्रारंभिक जाँच (Preliminary Inquiry) व 6 माह में पूर्ण अन्वेषण (Investigation) पूर्ण करने का प्रावधान।
  • वर्तमान अध्यक्ष (नवीनतम, फरवरी 2024 से): न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर (Justice A.M. Khanwilkar) — भारत के दूसरे लोकपाल अध्यक्ष, जिन्होंने प्रथम अध्यक्ष न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष (कार्यकाल समाप्ति: मई 2022) का स्थान लिया।
💡 सरल भाषा में समझें — स्कूल की शिकायत पेटी
सोचिए स्कूल में अगर कोई टीचर गलत काम करे, तो बच्चे सीधे प्रिंसिपल को नहीं बल्कि एक स्वतंत्र "शिकायत समिति" को बता सकें जो प्रिंसिपल के दबाव में न हो। लोकपाल भी वैसा ही एक स्वतंत्र निकाय है — नागरिक बड़े से बड़े नेता या अधिकारी के भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे उस निकाय तक पहुँचा सकते हैं, जो सरकार के दबाव से मुक्त रहकर जाँच करता है।
राज्यलोकायुक्त स्थापना वर्ष
ओडिशा (सबसे पहला)1970
महाराष्ट्र1972
राजस्थान1973
बिहार1974
उत्तर प्रदेश1975
कर्नाटक1979
मध्य प्रदेश1981
आंध्र प्रदेश1983
गुजरात, हिमाचल प्रदेश1983-86

राजस्थान लोकायुक्त: राजस्थान ने 1973 में ही (ओडिशा व महाराष्ट्र के बाद देश का तीसरा राज्य) राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के तहत लोकायुक्त संस्था स्थापित कर दी थी — जो मुख्यमंत्री सहित राज्य के मंत्रियों व अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतों की जाँच करती है (विस्तृत वर्तमान लोकायुक्त व क्षेत्राधिकार — देखें अध्याय 10, राज्य प्रशासन)।

6नीति आयोग (NITI Aayog)

1950 में स्थापित योजना आयोग (Planning Commission) दशकों तक भारत की पंचवर्षीय योजनाओं व संसाधन-आवंटन का केंद्र रहा। परंतु बदलते आर्थिक परिवेश — बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था, राज्यों की बढ़ती भूमिका — के मद्देनज़र इसे 1 जनवरी 2015 से नीति आयोग (NITI Aayog — National Institution for Transforming India) से प्रतिस्थापित किया गया।

🎓 नीति आयोग (NITI Aayog) विचारक/प्रवर्तक: सरकारी संकल्प (Executive Resolution) द्वारा गठित नीति थिंक-टैंक | वर्ष: स्थापना: 1 जनवरी 2015
  • स्वरूप: नीति आयोग कोई संवैधानिक या सांविधिक निकाय नहीं, बल्कि एक कार्यकारी प्रस्ताव (Cabinet Resolution) से बना "नीति थिंक-टैंक (Policy Think-Tank)" है — योजना आयोग के विपरीत, इसके पास धन आवंटन (fund allocation) की शक्ति नहीं है, यह केवल नीतिगत सुझाव व दिशा देता है।
  • गठन: अध्यक्ष — प्रधानमंत्री (पदेन); उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson) — वर्तमान में अशोक कुमार लाहिड़ी (Ashok Kumar Lahiri), जिन्होंने सुमन बेरी (Suman Bery) का स्थान लिया; मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) — वर्तमान में बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम (B.V.R. Subrahmanyam); शासी परिषद (Governing Council) में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री व केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल।
  • मुख्य कार्य: सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) व प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) को बढ़ावा देना; दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा (जैसे "Vision 2047") तैयार करना; आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme) के माध्यम से पिछड़े जिलों का विकास; SDG India Index के माध्यम से राज्यों के सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति मापना।
💡 सरल भाषा में समझें — परिवार का सलाहकार बनाम खजांची
योजना आयोग एक "खजांची (treasurer)" जैसा था — वह तय करता था कि किस राज्य/विभाग को कितना पैसा मिलेगा। नीति आयोग एक "सलाहकार (advisor)" जैसा है — वह पैसा नहीं बाँटता, बल्कि सुझाव देता है कि किस दिशा में आगे बढ़ना बेहतर होगा, और राज्यों को खुद अपनी प्राथमिकताएँ तय करने की आज़ादी देता है। यही फर्क है केंद्रीकृत नियंत्रण (योजना आयोग) और सहयोगी मार्गदर्शन (नीति आयोग) में।

योजना आयोग बनाम नीति आयोग (Planning Commission vs NITI Aayog)

योजना आयोग (Planning Commission, 1950-2014)
  • केंद्रीकृत, "टॉप-डाउन" दृष्टिकोण — केंद्र राज्यों को योजना बताता था।
  • धन आवंटन की शक्ति — पंचवर्षीय योजनाओं के लिए बजट तय करता था।
  • राज्यों की सीमित भूमिका/परामर्श।
  • अध्यक्ष: प्रधानमंत्री; उपाध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा।
नीति आयोग (NITI Aayog, 2015 से)
  • विकेंद्रीकृत, "बॉटम-अप" दृष्टिकोण — राज्यों को अधिक स्वायत्तता।
  • केवल नीतिगत थिंक-टैंक — कोई सीधा धन आवंटन नहीं (यह अब वित्त मंत्रालय व वित्त आयोग के माध्यम से होता है)।
  • शासी परिषद में सभी CM की सक्रिय भागीदारी — सहकारी संघवाद पर बल।
  • अध्यक्ष: प्रधानमंत्री; उपाध्यक्ष व CEO दोनों प्रमुख पद।
"सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) ही भारत के विकास का सच्चा इंजन है — राज्य केवल नीति-प्राप्तकर्ता नहीं, नीति-निर्माता भी हैं।" — नीति आयोग का मार्गदर्शक दर्शन
🎯 प्रशासनिक संस्थाएँ — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

★ परीक्षा में अवश्य ध्यान रखने योग्य तथ्य ★

1. UPSC — अनुच्छेद 315-323; कार्यकाल 6 वर्ष/65 वर्ष; निष्कासन केवल राष्ट्रपति द्वारा, सर्वोच्च न्यायालय जाँच के बाद (अनुच्छेद 317)। 2. वर्तमान UPSC अध्यक्ष — डॉ. अजय कुमार (मई 2025 से, कार्यकाल अक्टूबर 2027 तक)। 3. ECI — अनुच्छेद 324; अक्टूबर 1993 से स्थायी रूप से त्रि-सदस्यीय (1 CEC + 2 EC)। 4. CEC Appointment Act, 2023 — चयन समिति: PM, विपक्ष नेता, PM-नामित मंत्री (Anoop Baranwal केस के बाद)। 5. वर्तमान CEC — ज्ञानेश कुमार (फरवरी 2025 से), भारत के 26वें CEC। 6. CAG — अनुच्छेद 148; निष्कासन प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान (अनुच्छेद 124(4))। 7. CAG को डॉ. अंबेडकर ने "संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी" कहा था। 8. वर्तमान CAG — के. संजय मूर्ति (नवंबर 2024 से), भारत के 15वें CAG। 9. CAG के 3 प्रकार के ऑडिट — अनुपालन, निष्पादन, वित्तीय। 10. वित्त आयोग — अनुच्छेद 280; हर 5 वर्ष में गठन; अर्ध-न्यायिक निकाय। 11. 16वाँ वित्त आयोग — अध्यक्ष डॉ. अरविंद पानगढ़िया; रिपोर्ट 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत; अवधि 2026-27 से 2030-31। 12. 16वें वित्त आयोग में राज्यों की हिस्सेदारी — 41% (यथावत); नया मापदंड — GDP योगदान को 10% भार। 13. लोकपाल — Lokpal and Lokayuktas Act, 2013; 1st ARC (1966-70) ने सबसे पहले सिफारिश की थी। 14. अन्ना हज़ारे आंदोलन (2011) — जन लोकपाल विधेयक हेतु जन-दबाव, जिससे 2013 अधिनियम पारित हुआ। 15. वर्तमान लोकपाल अध्यक्ष — न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर (फरवरी 2024 से), दूसरे लोकपाल अध्यक्ष। 16. ओडिशा (1970) — देश में लोकायुक्त स्थापित करने वाला पहला राज्य; राजस्थान (1973) — तीसरा राज्य। 17. नीति आयोग — 1 जनवरी 2015 से योजना आयोग (1950) का स्थान लिया। 18. नीति आयोग — कोई संवैधानिक/सांविधिक निकाय नहीं, कार्यकारी प्रस्ताव से गठित थिंक-टैंक; धन-आवंटन शक्ति नहीं। 19. वर्तमान नीति आयोग उपाध्यक्ष — अशोक कुमार लाहिड़ी; वर्तमान CEO — बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम। 20. आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme) — नीति आयोग की प्रमुख पहल, पिछड़े जिलों के समग्र विकास हेतु।

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न (PYQs) 📝 5-अंक (60-70 शब्द) | 10-अंक (~120 शब्द)

Q1. राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का मुख्य कार्य क्या है? (5 अंक) — RAS Mains 2023 Q2. (संभावित) संघ लोक सेवा आयोग के गठन, कार्यों एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाले संवैधानिक प्रावधानों की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q3. (संभावित) भारत निर्वाचन आयोग को दी गई शक्तियों की विवेचना करते हुए CEC एवं अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नई नियुक्ति प्रक्रिया (2023) पर टिप्पणी कीजिए। (10 अंक) Q4. (संभावित) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के कार्यों एवं महत्व की विवेचना कीजिए। (5 अंक) Q5. (संभावित) वित्त आयोग के गठन एवं कार्यों को स्पष्ट कीजिए। 16वें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशों पर प्रकाश डालिए। (10 अंक) Q6. (संभावित) लोकपाल की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं इसके क्षेत्राधिकार की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q7. (संभावित) योजना आयोग एवं नीति आयोग में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q8. (संभावित) नीति आयोग की संरचना एवं इसके द्वारा संचालित प्रमुख कार्यक्रमों की विवेचना कीजिए। (10 अंक)

वर्षघटना/स्थापना/सुधारमहत्व
1926लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) की स्थापना।UPSC का पूर्ववर्ती स्वरूप।
1950 (25 जनवरी)भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना।राष्ट्रीय मतदाता दिवस इसी दिन मनाया जाता है।
1950योजना आयोग की स्थापना; UPSC को वर्तमान संवैधानिक स्वरूप।केंद्रीकृत योजना-निर्माण युग की शुरुआत।
1966-70प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1st ARC)।सबसे पहले लोकपाल/लोकायुक्त की सिफारिश (देखें अध्याय 07)।
1970ओडिशा — देश का पहला राज्य जहाँ लोकायुक्त स्थापित।राज्य स्तर पर ओम्बड्समैन व्यवस्था की शुरुआत।
1973राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम पारित।राजस्थान में भ्रष्टाचार-निरोधक स्वतंत्र संस्था की स्थापना।
1993 (अक्टूबर)ECI स्थायी रूप से त्रि-सदस्यीय निकाय बना।सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया सुनिश्चित।
2011अन्ना हज़ारे — India Against Corruption आंदोलन।जन लोकपाल विधेयक हेतु राष्ट्रव्यापी दबाव।
2013Lokpal and Lokayuktas Act पारित।दशकों की माँग के बाद केंद्र में लोकपाल की सांविधिक स्थापना।
2015 (1 जनवरी)नीति आयोग की स्थापना — योजना आयोग का स्थान लिया।सहकारी संघवाद पर आधारित नई नीति-निर्माण व्यवस्था।
2019न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष — प्रथम लोकपाल अध्यक्ष नियुक्त।लोकपाल संस्था वास्तविक रूप से क्रियाशील हुई।
2023सर्वोच्च न्यायालय — Anoop Baranwal निर्णय; CEC Appointment Act, 2023 पारित।ECI नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा विधिक सुधार।
2024-26 (नवीनतम)नई नियुक्तियाँ — CAG (नवंबर 2024), लोकपाल अध्यक्ष (फरवरी 2024), CEC (फरवरी 2025), UPSC अध्यक्ष (मई 2025); 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट (फरवरी 2026)।इन सभी संस्थाओं में वर्तमान नेतृत्व एवं ताज़ा सिफारिशें।
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