🏥 अध्याय 8/15 — जीव विज्ञान

रोग एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

Diseases; Public Health Initiatives
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📋 इस अध्याय में
  1. रोग वर्गीकरण एवं संक्रामक रोग का परिचय — संचरण के माध्यम
  2. जीवाणु जनित रोग — क्षय रोग, हैजा, टिटनेस, कुष्ठ रोग, टाइफाइड आदि
  3. विषाणु जनित रोग भाग-1 — इन्फ्लुएंजा, हिपेटाइटिस, रेबीज, पोलियो, चेचक
  4. विषाणु जनित रोग भाग-2 — डेंगू, चिकनगुनिया, जीका, कोविड-19, HIV/AIDS
  5. परजीवी/प्रोटोजोआ जनित रोग — मलेरिया, काला-आजार, अमीबियासिस
  6. कृमि एवं कवक जनित रोग — फाइलेरिया, दाद, ब्लैक फंगस
  7. जूनोटिक रोग एवं पर्यावरणीय प्रदूषक जनित रोग
  8. असंक्रामक रोग — हृदय रोग, उच्च रक्तचाप
  9. मधुमेह एवं कैंसर
  10. आनुवंशिक रोग — डाउन सिंड्रोम, थैलेसीमिया, सिकल-सेल एनीमिया, हीमोफीलिया
  11. मानसिक स्वास्थ्य एवं संबंधित कार्यक्रम
  12. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्रमुख रोग नियंत्रण कार्यक्रम
  13. आयुष्मान भारत — PM-JAY, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डिजिटल मिशन
  14. राजस्थान की सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाएं
📖 🌟 क्या आप जानते हैं?
1854 में लंदन के सोहो इलाके में हैजे (Cholera) की महामारी फैली — सैकड़ों लोग मर रहे थे, पर किसी को कारण समझ नहीं आ रहा था। डॉक्टर जॉन स्नो ने एक नक्शे पर हर मौत को चिह्नित किया, और पाया कि सभी मौतें एक ही सार्वजनिक हैंडपंप के आसपास हो रही थीं — उन्होंने पंप का हैंडल हटवा दिया, और महामारी थम गई। यह घटना आधुनिक 'महामारी विज्ञान' (Epidemiology) व सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) की नींव मानी जाती है। आज, डेढ़ सौ साल बाद भी, वही सिद्धांत काम करता है — रोग को समझो, उसका स्रोत पकड़ो, और समाज को बचाओ। इसी सिद्धांत पर आज भारत में डेंगू के लार्वा नष्ट करने से लेकर आयुष्मान भारत जैसी विशाल स्वास्थ्य बीमा योजनाओं तक, सैकड़ों कार्यक्रम चल रहे हैं। आइए, संक्रामक व असंक्रामक रोगों की दुनिया से होते हुए, भारत व राजस्थान के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को विस्तार से समझते हैं।

1 रोग वर्गीकरण एवं संक्रामक रोग का परिचय — संचरण के माध्यम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार — "स्वास्थ्य केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक व सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होने की एक अवस्था है।" इसी व्यापक परिभाषा से रोग (Disease) को समझने की शुरुआत होती है — जब शरीर के किसी भी स्तर पर यह संतुलन बिगड़ता है, तो रोग उत्पन्न होता है।

रोगों का वर्गीकरण

रोगों को सबसे पहले जन्मजात (Congenital — जन्म से मौजूद) व अर्जित (Acquired — जीवनकाल में उत्पन्न) में बांटा जाता है। अर्जित रोग आगे दो बड़े वर्गों में बंटते हैं — संक्रामक/संचारी रोग (Communicable Diseases), जो रोगजनकों (Pathogens) द्वारा होते हैं व एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकते हैं; तथा असंक्रामक रोग (Non-Communicable Diseases - NCD), जो नहीं फैलते, बल्कि जीवनशैली, आनुवंशिकी या पर्यावरण से जुड़े होते हैं।

संक्रामक रोगों का संचरण — किस माध्यम से कौन सा रोग?

संक्रामक रोग वायरस, जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ आदि रोगजनकों (Pathogens) से होते हैं तथा सीधे संपर्क, वायु, दूषित भोजन-पानी, लैंगिक संपर्क या मच्छर-मक्खी जैसे वाहकों (Vectors) द्वारा फैलते हैं।

संचरण माध्यमप्रमुख रोग
स्पर्श से (Direct Contact)रिंगवर्म, कंजंक्टिवाइटिस, चेचक, चिकनपॉक्स, कुष्ठ रोग
मादा एनोफिलीज मच्छरमलेरिया
मादा क्यूलेक्स मच्छरफाइलेरिया (हाथीपांव), जापानी एन्सेफलाइटिस
मादा एडीज इजिप्टी मच्छरडेंगू, चिकनगुनिया, जीका, येलो फीवर
बालू मक्खी (Sandfly)काला-आजार
घरेलू मक्खीपेचिश, हैजा, टाइफाइड
पिस्सू (Fleas)प्लेग
लैंगिक संसर्गAIDS, हिपेटाइटिस B-C-D, सिफिलिस, गोनोरिया
दूषित जल/भोजनपोलियो, पेचिश, टाइफाइड, हिपेटाइटिस A-E, हैजा
📌 महत्वपूर्ण — 💡 मादा मच्छर ही क्यों रोगवाहक होती है?

नर मच्छर सामान्यतः रोगवाहक नहीं होते, क्योंकि वे केवल पौधों व फलों का रस पीते हैं। मादा मच्छर अंडोत्सर्ग हेतु अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता में मानव रक्त चूसती है — इसी प्रक्रिया में वह संक्रमित रक्त से रोगजनक ग्रहण कर अगले व्यक्ति में पहुंचा देती है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ रोग (Disease) ◆ जन्मजात व अर्जित रोग ◆ संक्रामक रोग (Communicable Disease) ◆ असंक्रामक रोग (NCD) ◆ रोगजनक (Pathogens) ◆ वाहक (Vectors)

2 जीवाणु जनित रोग — क्षय रोग, हैजा, टिटनेस, कुष्ठ रोग, टाइफाइड आदि

जीवाणु (Bacteria) एककोशिकीय सूक्ष्मजीव हैं जो शरीर में प्रवेश कर विष (Toxin) स्रावित करके या सीधे ऊतकों को क्षति पहुंचाकर रोग उत्पन्न करते हैं। भारत में आज भी जीवाणु जनित रोग — विशेषकर क्षय रोग — सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं।

क्षय रोग / यक्ष्मा / टीबी (Tuberculosis)

कारक जीव: माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) — यह मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है, पर हड्डी, मस्तिष्क जैसे अन्य अंगों को भी संक्रमित कर सकता है (एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी)।

लक्षण: लगातार खांसी (2 सप्ताह से अधिक), बुखार (विशेषकर शाम को), वजन में भारी कमी, कमजोरी, भूख न लगना, बलगम के साथ रक्त आना। संचरण मुख्यतः वायु द्वारा (खांसने-छींकने से); पशुजन्य टीबी संक्रमित पशु के दूध के सेवन से भी हो सकती है। MDR-TB (Multi-Drug Resistant) व XDR-TB (Extensively Drug Resistant) जैसे दवा-प्रतिरोधी रूप आज बड़ी चुनौती हैं।

📌 महत्वपूर्ण

🖼️ क्षय रोग (Tuberculosis) के लक्षण — शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रभाव

जीव विज्ञान चित्र

निदान: छाती का X-ray, बलगम जांच (Sputum Culture), NAAT (Nucleic Acid Amplification Test)। बचाव व उपचार: जन्म के समय BCG टीका अनिवार्य; DOTS (Directly Observed Treatment, Short-course) रणनीति के तहत नियमित निगरानी में पूर्ण उपचार दिया जाता है। भारत का लक्ष्य वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन था — यह लक्ष्य पूर्णतः प्राप्त तो नहीं हुआ, परंतु उल्लेखनीय प्रगति हुई है: WHO की 2025 रिपोर्ट के अनुसार उपचार-कवरेज 2015 के 53% से बढ़कर 2024 में 92% हो गया, तथा मृत्यु-दर में 2015-2024 के बीच लगभग 28% की कमी आई।

अन्य प्रमुख जीवाणु जनित रोग

रोगकारक जीवाणुप्रमुख लक्षण/विशेषता
हैजा/विषूचिका (Cholera)विब्रियो कोलेरी (Vibrio cholerae)अचानक उल्टी-दस्त, तीव्र निर्जलीकरण; ORS सबसे प्रभावी प्राथमिक उपचार
टिटनेस/धनुस्तम्भ (Tetanus)क्लोस्ट्रिडियम टिटेनी (Clostridium tetani)तीव्र ऐंठन, जबड़ों का भिंच जाना (Lockjaw); घाव से मिट्टी/गोबर के संपर्क से
कुष्ठ रोग (Leprosy)माइकोबैक्टीरियम लेप्री (Mycobacterium leprae)त्वचा-तंत्रिका प्रभावित; लक्षण संक्रमण के 1-7 वर्ष बाद प्रकट; बहु-औषधि चिकित्सा (MDT) से पूर्ण उपचार्य
मोतीझरा/टाइफाइड (Typhoid)सालमोनेला टाइफी (Salmonella typhi)103-105°F तेज बुखार, पेट दर्द; दूषित जल-भोजन से; Widal test से निदान
डिप्थीरिया (Diphtheria)कोरीनेबैक्टेरियम डिफ्थेरीयाईगले-टॉन्सिल में विषाक्त प्रभाव; DPT/पेंटावेलेंट टीके से बचाव
प्लेग (Plague)यर्सिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis)चूहों व पिस्सू से संचरण; लसीका ग्रंथियां-फेफड़े प्रभावित; स्ट्रेप्टोमाइसिन से उपचार

राजस्थान में टीबी उन्मूलन — AI तकनीक का उपयोग

राजस्थान में क्षय रोग उन्मूलन हेतु AI-आधारित समाधान की शुरुआत 19 सितंबर 2025 को जयपुर में वधवानी AI के सहयोग से की गई। पहले कोटा संभाग (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, और अब यह तकनीक राज्य के सभी 41 जिलों में लागू की जा रही है — यह दर्शाता है कि पारंपरिक रोग-नियंत्रण अब आधुनिक तकनीक से जुड़ रहा है।

📌 महत्वपूर्ण — 💡 DOTS रणनीति — निगरानी से इलाज तक

DOTS (Directly Observed Treatment, Short-course) में मरीज को स्वास्थ्यकर्मी की प्रत्यक्ष निगरानी में ही दवा दी जाती है, ताकि इलाज बीच में न छूटे — क्योंकि टीबी का इलाज अधूरा छोड़ना ही MDR-TB जैसे खतरनाक दवा-प्रतिरोधी रूपों को जन्म देता है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ क्षय रोग (Tuberculosis) ◆ DOTS रणनीति ◆ MDR-TB ◆ हैजा (Cholera) ◆ टिटनेस ◆ कुष्ठ रोग ◆ टाइफाइड

3 विषाणु जनित रोग भाग-1 — इन्फ्लुएंजा, हिपेटाइटिस, रेबीज, पोलियो, चेचक

विषाणु (Virus) जीवाणुओं से भी सूक्ष्म रोगजनक हैं, जो जीवित कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहते हैं परंतु कोशिका में प्रवेश करते ही उसकी मशीनरी का उपयोग कर तेज़ी से अपनी प्रतिकृतियां बनाते हैं। यही कारण है कि अधिकांश विषाणु जनित रोगों का कोई सीधा इलाज नहीं होता — बचाव व टीकाकरण ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।

रेबीज (Rabies) — हाइड्रोफोबिया

रेबीज विषाणु पागल कुत्तों, बिल्लियों, बंदरों की लार से काटने या खरोंचने पर शरीर में प्रवेश करता है। इसे 'हाइड्रोफोबिया' (जल-भय) भी कहते हैं, क्योंकि रोगी को पानी पीते समय गले में तीव्र ऐंठन होती है। इतिहास में लुई पास्चर ने 1885 में पहला रेबीज टीका बनाया था — उस समय पेट में 14 दर्दनाक इंजेक्शन लगते थे; आधुनिक मेरिएक्स ह्यूमन डिप्लोइड कोशिका टीके से अब हाथ पर केवल 3 इंजेक्शन ही पर्याप्त हैं।

हिपेटाइटिस/यकृत्शोथ (Hepatitis)

यकृत को प्रभावित करने वाले इन विषाणुओं में हिपेटाइटिस-A व हिपेटाइटिस-B प्रमुख हैं। हिपेटाइटिस-B की खोज 1965 में डॉ. ब्लूमबर्ग ने की थी (जिन्हें 1977 में इसके लिए नोबेल पुरस्कार मिला) — इसे 'ऑस्ट्रेलियन एंटीजन' भी कहा जाता है।

🟡 हिपेटाइटिस-A (HAV)🔴 हिपेटाइटिस-B (HBV)
◆ RNA वायरस ◆ संचरण — दूषित भोजन/जल (सामान्य पीलिया) ◆ बच्चे व वयस्क दोनों प्रभावित ◆ प्रभावी टीका उपलब्ध◆ DNA वायरस — HIV से भी अधिक खतरनाक माना जाता है ◆ संचरण — संक्रमित रक्त, सुई, असुरक्षित यौन संबंध ◆ यकृत कैंसर का कारण बन सकता है ◆ प्रभावी टीका उपलब्ध (हिपेटाइटिस-C का कोई टीका नहीं)

पोलियो / बालपक्षाघात (Polio) — भारत की एक बड़ी सफलता

पोलियो विषाणु मुख्यतः बच्चों के तंत्रिका तंत्र पर हमला कर स्थायी अपंगता उत्पन्न कर सकता है। यह दूषित जल व भोजन से फैलता है। भारत को 27 मार्च 2014 को आधिकारिक रूप से 'पोलियो मुक्त' घोषित किया गया — यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है, जो पल्स पोलियो कार्यक्रम व लगातार टीकाकरण अभियानों से संभव हुआ।

विशेषताOPV (मुख से)IPV (इंजेक्शन)
खोजकर्ताअल्बर्ट साबिन (1955)जोनास साल्क (1952)
प्रकारजीवित क्षीणित (Live Attenuated)निष्क्रिय (Inactivated)
सुरक्षाआंतों में स्थानीय प्रतिरक्षारक्त में एंटीबॉडी

चेचक (Smallpox) — विश्व से समाप्त पहला रोग

वेरियोला वायरस (Variola virus) से होने वाला चेचक अत्यंत संक्रामक व जानलेवा था। विश्वव्यापी टीकाकरण अभियानों से इसे 1980 में जड़ से समाप्त कर दिया गया — यह मानव इतिहास में टीकाकरण की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि विश्व की पहली वैक्सीन भी एडवर्ड जेनर ने इसी रोग के लिए 1796 में बनाई थी (देखें अध्याय 7, विषय 13)।

इन्फ्लुएंजा (Influenza/फ्लू)

इन्फ्लुएंजा वायरस के तीन प्रकार हैं — टाइप A (सबसे गंभीर, मनुष्य व पशु दोनों प्रभावित, महामारी क्षमता — जैसे H1N1 स्वाइन फ्लू, H5N1 बर्ड फ्लू), टाइप B (केवल मनुष्य, स्थानीय प्रकोप) व टाइप C (बहुत हल्का)। टैमीफ्लू (ओसेल्टामिविर) एक प्रभावी एंटीवायरल दवा है।

पोलियो-मुक्ति के बाद भी भारत ने सतर्कता नहीं छोड़ी — IPV को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करना एक रणनीतिक कदम था, ताकि पड़ोसी देशों से वायरस के दोबारा प्रवेश की स्थिति में भी बच्चे सुरक्षित रहें।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ रेबीज (Rabies) ◆ हिपेटाइटिस A व B ◆ पोलियो — भारत पोलियो-मुक्त (2014) ◆ OPV व IPV ◆ चेचक — उन्मूलन 1980 ◆ इन्फ्लुएंजा

4 विषाणु जनित रोग भाग-2 — डेंगू, चिकनगुनिया, जीका, कोविड-19, HIV/AIDS

डेंगू (Dengue) — हड्डी-तोड़ बुखार

डेंगू को 'Breakbone Fever' भी कहा जाता है — जोड़ों-मांसपेशियों में इतना तीव्र दर्द होता है कि हड्डी टूटने जैसा एहसास होता है। यह मादा एडीज इजिप्टी मच्छर (जो दिन में काटती है व साफ ठहरे पानी में पनपती है) द्वारा फैलता है। लक्षण: अचानक तेज बुखार, जोड़ों-आंखों के पीछे तीव्र दर्द, प्लेटलेट्स में तेज़ी से कमी, गंभीर स्थिति में रक्तस्राव।

भारत ने हाल ही में टेकेडा के TAK-003 (क्यूडेंगा/Qdenga) टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन को स्वीकृति दी है — यह भारत का पहला डेंगू टीका है। वोल्बैकिया (Wolbachia) पद्धति — एक प्राकृतिक बैक्टीरिया-आधारित तकनीक जो मच्छरों में डाली जाती है — डेंगू व जीका वायरस को मच्छरों में पनपने से रोकती है तथा मच्छर आबादी को भी नियंत्रित करती है।

चिकनगुनिया व जीका

कोविड-19 (COVID-19)

SARS-CoV-2 वायरस से होने वाली इस महामारी की शुरुआत दिसंबर 2019 में वुहान (चीन) से हुई थी। भारत ने दो प्रमुख स्वदेशी/साझेदारी वैक्सीन विकसित कीं — कोवैक्सिन (Covaxin, भारत बायोटेक व ICMR द्वारा निर्मित निष्क्रिय वैक्सीन) व कोविशील्ड (Covishield, सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा वायरल वेक्टर तकनीक से निर्मित)। भारत में 220 करोड़ से अधिक टीका खुराकें दी गईं — विश्व का सबसे तेज़ व सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान।

उपार्जित प्रतिरक्षा अक्षमता संलक्षण (AIDS/HIV)

HIV (Human Immunodeficiency Virus) एक रेट्रोवायरस है, जिसमें आनुवंशिक पदार्थ RNA होता है तथा रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम की मदद से यह RNA से DNA बनाता है। यह सीधे सहायक T-कोशिकाओं (CD4+ Cells) पर हमला करता है (देखें अध्याय 7, विषय 14), जिससे शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है।

संचरण: असुरक्षित यौन संपर्क, संक्रमित रक्त, संक्रमित सुई का साझा उपयोग, संक्रमित मां से शिशु — यह हाथ मिलाने, साथ खाने, छींकने या मच्छर के काटने से नहीं फैलता। निदान: ELISA (प्रारंभिक जांच), Western Blot (पुष्टिकरण), CD4 काउंट टेस्ट। भारत में NACO (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) की स्थापना 1992 में हुई; भारत का पहला मामला 1986 में चेन्नई में मिला था; प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।

⚠️ भ्रांति-निवारण — जन-जागरूकता आवश्यक

HIV/AIDS के बारे में समाज में आज भी कई भ्रांतियां प्रचलित हैं, जो संक्रमित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव को जन्म देती हैं। सही वैज्ञानिक जानकारी व सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण ही इस भेदभाव को समाप्त कर सकता है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ डेंगू व वोल्बैकिया पद्धति ◆ चिकनगुनिया ◆ जीका — माइक्रोसेफली ◆ COVID-19 — कोवैक्सिन व कोविशील्ड ◆ HIV/AIDS ◆ NACO

5 परजीवी/प्रोटोजोआ जनित रोग — मलेरिया, काला-आजार, अमीबियासिस

मलेरिया (Malaria)

मलेरिया प्लाज्मोडियम वंश के प्रोटोजोआ परजीवी से होता है, जिसकी चार प्रमुख जातियां हैं — प्लाज्मोडियम विवैक्स (सबसे सामान्य), प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम (सबसे घातक), प्लाज्मोडियम मलेरियाई तथा प्लाज्मोडियम ओवेल। इसका वाहक मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर है।

📌 महत्वपूर्ण

🖼️ मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र — मच्छर से मानव शरीर तक

जीव विज्ञान चित्र

मलेरिया एक द्विपोषदी परजीवी (Dual Host Parasite) है — मादा एनोफिलीज मच्छर में इसका लैंगिक जनन होता है (प्राथमिक पोषद), जबकि मानव शरीर में अलैंगिक जनन (द्वितीयक पोषद)। मानव शरीर में क्रम इस प्रकार है: संक्रमित मच्छर के काटने से स्पोरोजोआइट रक्त में प्रवेश → यकृत में संख्या-वृद्धि → लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) पर हमला व विभाजन → RBC का फटना, जिससे हीमोजोइन (Haemozoin) नामक पदार्थ मुक्त होता है — यही पदार्थ मलेरिया के विशिष्ट लक्षण (ठंड-कंपकंपी के साथ तेज बुखार, निश्चित अंतराल पर उतार-चढ़ाव) का कारण है।

मलेरिया नियंत्रण के उपाय

श्रेणीउपाय
औषधियांकुनैन (Quinine), आर्टीमिसिनिन-आधारित संयोजन चिकित्सा (ACT)
जल प्रबंधनठहरे पानी का निकास — मच्छर स्थिर जल में ही अंडे देते हैं
कीटनाशकDDT, गैमेक्सीन का छिड़काव, मच्छरदानी (विशेषकर कीटनाशक-युक्त)
जैविक नियंत्रणलार्वाभक्षी मछलियां — गैम्बूसिया, मिनोव
टीकाभारत का पहला स्वदेशी मलेरिया टीका — 'एडफाल्सीवैक्स' (AdFalciVax); वैश्विक टीके — RTS,S/AS01 व R21/Matrix-M

भारत का राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन ढांचा (2016-2030) वर्ष 2027 तक शून्य स्वदेशी मामलों का लक्ष्य रखता है — जो वैश्विक 2030 के लक्ष्य से तीन वर्ष पहले है। प्रगति उत्साहजनक रही है — मलेरिया के मामले 2015 के 11,69,261 से घटकर 2023 में 2,27,564 रह गए, यानी लगभग 80% की कमी।

काला-आजार / लीशमैनियासिस (Leishmaniasis)

'दमदम बुखार' के नाम से भी जाना जाने वाला यह रोग लीशमैनिया डोनोवानी (Leishmania donovani) नामक कशाभीय परजीवी से होता है, जिसका वाहक बालू मक्खी/सैंडफ्लाई (Phlebotomus) है। इसमें प्लीहा व यकृत का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाता है (Splenomegaly), त्वचा का रंग गहरा पड़ जाता है, तथा लगातार बुखार व अत्यधिक वजन घटता है।

अमीबियासिस (Amoebiasis)

एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) नामक परजीवी से होने वाली 'अमीबी पेचिश' दूषित जल-भोजन व घरेलू मक्खियों से फैलती है। इसमें आंत की भित्ति में छोटे-छोटे छाले बनते हैं, पेट में मरोड़ के साथ दस्त तथा मल में श्लेष्मा व रक्त आता है। उपचार मेट्रोनिडाजोल (Metronidazole) से किया जाता है।

📌 महत्वपूर्ण — 💡 राजस्थान में मलेरिया नियंत्रण

राजस्थान के मरुस्थलीय व दक्षिणी आदिवासी जिलों में मलेरिया ऐतिहासिक रूप से एक बड़ी चुनौती रहा है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में नियमित कीटनाशक छिड़काव, मच्छरदानी वितरण व सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उल्लेख विषय 12 में विस्तार से किया गया है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ मलेरिया (Malaria) ◆ प्लाज्मोडियम ◆ एनोफिलीज मच्छर ◆ हीमोजोइन ◆ काला-आजार/लीशमैनियासिस ◆ अमीबियासिस

6 कृमि एवं कवक जनित रोग — फाइलेरिया, दाद, ब्लैक फंगस

कृमि/हेल्मिन्थिक रोग (Helminthic Diseases)

हाथीपांव/फाइलेरिया (Filariasis) — वूचेरेरिया बैंक्रॉफ्टाई (Wuchereria bancrofti) नामक कृमि से होने वाला यह रोग मादा क्यूलेक्स मच्छर से फैलता है। यह लसीका तंत्र को अवरुद्ध कर देता है, जिससे पैरों व अन्य अंगों में असामान्य सूजन (हाथी के पैर जैसी) हो जाती है। उपचार — DEC (Diethylcarbamazine) व एल्बेंडाजोल।

कृमि रोगकारकविशेषता
एस्केरिएसिस (Ascariasis)एस्केरिस लम्ब्रिकॉइड्स (गोलकृमि)आंत में रहने वाला सबसे सामान्य कृमि रोग
टीनिएसिस (Taeniasis)टीनियस सोलियम/सैजिनेटा (फीता कृमि)कच्चे/अधपके मांस से; रक्तहीनता व तंत्रिका संबंधी समस्याएं
हुकवर्म संक्रमणहुकवर्ममिट्टी से नंगे पैर संपर्क से; एनीमिया का कारण
गिनी कृमि रोग (नारू)ड्रेकुनकुलस मेडिनेन्सिसभारत से पूर्णतः उन्मूलित (6वीं पंचवर्षीय योजना में कार्यक्रम शुरू)

कवक जनित रोग (Fungal Diseases)

कवक (Fungus) से होने वाले रोग सामान्यतः त्वचा को प्रभावित करते हैं, परंतु कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में ये गंभीर व जानलेवा भी हो सकते हैं। सामान्य कवक रोगों में दाद (Ringworm), धोबी खुजली (Tinea cruris), एथलीट्स फुट शामिल हैं।

COVID-19 महामारी के दौरान चर्चित ब्लैक फंगस/म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) — Mucorales समूह के कवकों (Rhizopus, Mucor) से होता है, जो नाक, आंख व मस्तिष्क को प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त Candida auris को WHO ने 'गंभीरतम प्राथमिकता वाला कवक रोगजनक' (Critical Priority Fungal Pathogen) घोषित किया है, तथा भारत में Trichophyton indotineae — एक दवा-प्रतिरोधी त्वचा कवक — पहली बार पहचाना गया है, जो दाद के गंभीर व दीर्घकालिक संक्रमण का कारण बनता है।

📌 महत्वपूर्ण — 💡 कृमि रोगों से बचाव — सरल आदतें

जूते पहनना (हुकवर्म से बचाव), भोजन से पहले हाथ धोना, मांस को पूरी तरह पकाकर खाना, तथा नियमित रूप से एल्बेंडाजोल जैसी कृमिनाशक दवा (सरकारी स्कूलों में वर्ष में दो बार दी जाती है) — ये सभी सरल उपाय कृमि रोगों से बचाव में अत्यंत प्रभावी हैं।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ फाइलेरिया/हाथीपांव ◆ एस्केरिएसिस ◆ टीनिएसिस ◆ कवक जनित रोग ◆ ब्लैक फंगस/म्यूकरमाइकोसिस ◆ Candida auris

7 जूनोटिक रोग एवं पर्यावरणीय प्रदूषक जनित रोग

'Zoonosis' शब्द ग्रीक भाषा के 'Zoon' (पशु) व 'Nosos' (रोग) से बना है — अर्थात जूनोटिक रोग (Zoonotic Diseases) वे संक्रामक रोग हैं जो पशु-पक्षियों से मनुष्यों में, या मनुष्यों से पशुओं में फैलते हैं।

संचरण की दिशा के आधार पर वर्गीकरण

🐾 एन्थ्रोपोजूनोसिस (पशु → मनुष्य)👤 जुएन्थ्रोपोनोसिस (मनुष्य → पशु)
◆ 'क्लासिकल जूनोसिस' भी कहते हैं ◆ उदाहरण — रेबीज, एंथ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस, निपाह वायरस◆ 'रिवर्स जूनोसिस' भी कहते हैं ◆ उदाहरण — COVID-19, इन्फ्लुएंजा, टीबी

रोगजनक के आधार पर वर्गीकरण

प्रकारकारकउदाहरण
वायरल जूनोसिसवायरसरेबीज, निपाह, बर्ड फ्लू, जापानी एन्सेफलाइटिस
बैक्टीरियल जूनोसिसजीवाणुएंथ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस, प्लेग
परजीवी जूनोसिसप्रोटोजोआ/कृमिटोक्सोप्लाज्मोसिस
फंगल जूनोसिसकवकदाद (Ringworm)

पर्यावरणीय प्रदूषकों से उत्पन्न रोग

औद्योगिकीकरण व प्रदूषण के बढ़ने से कुछ भारी धातुएं व रसायन पेयजल-भोजन में मिलकर विशिष्ट रोग उत्पन्न करते हैं — इन्हें प्रदूषक-जनित रोग (Pollutant Induced Diseases) कहा जाता है।

प्रदूषकरोगमुख्य प्रभाव
आर्सेनिक (As)ब्लैक फुट डिजीजत्वचा का काला पड़ना, रक्त वाहिकाओं में रुकावट, गैंग्रीन
सीसा/लेड (Pb)प्लम्बिज़्मतंत्रिका तंत्र प्रभावित; बच्चों में IQ की कमी
पारा/मरकरी (Hg)मिनामाटा रोगस्नायु तंत्र पर सीधा असर; मांसपेशियों में कमजोरी
कैडमियम (Cd)इटाई-इटाई रोगहड्डियां कमजोर, किडनी फेल हो सकती है
फ्लोराइडफ्लोरोसिस (Fluorosis)दांत व हड्डियां प्रभावित; पेयजल मानक 1.5 mg/L से अधिक होने पर खतरा
नाइट्रेटब्लू बेबी सिंड्रोमहीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन क्षमता घटती है, बच्चे का शरीर नीला पड़ना
📌 महत्वपूर्ण

💡 राजस्थान में फ्लोरोसिस — एक गंभीर चुनौती: राजस्थान के भूजल में प्राकृतिक रूप से फ्लोराइड की अधिक मात्रा पाई जाती है, विशेषकर मरुस्थलीय व दक्षिणी जिलों में। राष्ट्रीय फ्लोरोसिस नियंत्रण एवं रोकथाम कार्यक्रम (NPPCF) राज्य में 3 अक्टूबर 2019 से लागू है, जो वर्तमान में 30 जिलों में संचालित है — जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट (2025-26) के अनुसार राज्य के कुल 1,020 गांव फ्लोराइड-प्रभावित चिह्नित हैं।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ जूनोटिक रोग (Zoonotic Diseases) ◆ एन्थ्रोपोजूनोसिस ◆ प्रदूषक-जनित रोग ◆ फ्लोरोसिस ◆ मिनामाटा रोग ◆ इटाई-इटाई रोग

8 असंक्रामक रोग — हृदय रोग, उच्च रक्तचाप

असंक्रामक रोग (Non-Communicable Diseases - NCD) एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते, बल्कि जीवनशैली, आनुवंशिकी व पर्यावरण के दीर्घकालिक प्रभाव से उत्पन्न होते हैं। आज भारत सहित पूरी दुनिया में NCD मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बन चुके हैं — विशेषकर हृदय रोग, मधुमेह व कैंसर।

उच्च रक्तचाप/अतिरक्तदाब (Hypertension)

मानव शरीर की धमनियों की दीवारों पर रक्त द्वारा लगाया जाने वाला दबाव 'रक्तदाब' कहलाता है। सामान्य रक्तदाब 120/80 mmHg माना जाता है — इसमें 120 प्रकुंचन दाब (Systolic, हृदय के सिकुड़ने के समय) व 80 अनुशिथिलन दाब (Diastolic, हृदय के फैलने के समय) है। जब यह दबाव लगातार सामान्य सीमा से ऊपर बना रहता है, तो इसे उच्च रक्तचाप कहते हैं।

📌 महत्वपूर्ण

🖼️ रक्तचाप मापन का सिद्धांत — स्फिग्मोमैनोमीटर द्वारा

जीव विज्ञान चित्र

लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप धमनियों को सख्त व संकीर्ण बना देता है, जिससे हृदय को अधिक बल लगाना पड़ता है। अनियंत्रित रहने पर यह हृदपात (Heart Failure), मस्तिष्क आघात (Brain Stroke) व वृक्क क्षति (Kidney Damage) जैसे गंभीर परिणाम दे सकता है। इसे मापने का यंत्र स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer) कहलाता है।

हृदपेशी रोधगलन/हार्ट अटैक (Myocardial Infarction)

जब हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में अचानक रुकावट आ जाती है, तो हृदपेशी रोधगलन होता है। इसके पीछे दो प्रमुख प्रक्रियाएं हैं — एथिरोस्केलेरोसिस (धमनियों में वसा-कोलेस्ट्रॉल के जमाव से 'पट्टिका' बनना) व थ्रॉम्बस (रक्त का थक्का बनकर धमनी को पूरी तरह अवरुद्ध कर देना)। लक्षण: सीने में तीव्र दर्द (कंधे-बाएं हाथ-जबड़े तक फैलना), तेज मिचली, अत्यधिक पसीना, सांस लेने में गंभीर रुकावट।

जोखिम कारक — जीवनशैली रोगों की परस्पर संबद्धता

हृदय रोग व उच्च रक्तचाप के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं — मधुमेह, अत्यधिक मानसिक तनाव, मोटापा, धूम्रपान व वसायुक्त भोजन का अधिक सेवन। यह दिखाता है कि अधिकांश जीवनशैली रोग आपस में गहराई से जुड़े हैं — एक जोखिम कारक कई रोगों की जड़ बन सकता है।

💡 वास्तविक उपयोग

💡 प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन (15 अगस्त 2025): प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 'निवारक स्वास्थ्य अर्थशास्त्र' (Preventive Health Economics) के एक नए मॉडल का प्रस्ताव रखा — जिसमें मोटापे के विरुद्ध लड़ाई व खाने के तेल के उपयोग में 10% की कमी जैसे सुझाव शामिल थे। तर्क यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर जीवनशैली में छोटे बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर रोग-भार (Disease Burden) को काफी कम कर सकते हैं।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ असंक्रामक रोग (NCD) ◆ उच्च रक्तचाप (Hypertension) ◆ स्फिग्मोमैनोमीटर ◆ हृदपेशी रोधगलन ◆ एथिरोस्केलेरोसिस ◆ निवारक स्वास्थ्य अर्थशास्त्र

9 मधुमेह एवं कैंसर

मधुमेह/डायबिटीज़ (Diabetes Mellitus)

मधुमेह एक दीर्घकालिक रोग है जिसमें रक्त में ग्लूकोज (शक्कर) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका कारण है इंसुलिन की कमी या उसकी कार्यक्षमता में कमी — इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा-कोशिकाओं द्वारा स्रावित हार्मोन है, जो रक्त से ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुंचाकर ऊर्जा में बदलता है।

1️⃣ टाइप-1 डायबिटीज़2️⃣ टाइप-2 डायबिटीज़
◆ शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता ◆ सामान्यतः बच्चों व युवाओं में ◆ वजन घटना, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का खतरा ◆ आजीवन इंसुलिन इंजेक्शन आवश्यक◆ कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति असंवेदनशील (इंसुलिन प्रतिरोध) ◆ सामान्यतः 40 वर्ष से अधिक आयु में ◆ आज युवाओं में भी तेज़ी से बढ़ रहा है ◆ आहार-व्यायाम व दवाओं से नियंत्रण संभव

ध्यान रहे — डायबिटीज इन्सिपिडस (Diabetes Insipidus) का ब्लड शुगर (डायबिटीज मेलिटस) से कोई संबंध नहीं है; यह एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें एंटीडाययूरेटिक हार्मोन (ADH) की कमी से शरीर पानी नहीं रोक पाता तथा बहुत अधिक मात्रा में पतला पेशाब आता है।

कैंसर (Cancer)

कैंसर वह रोग है जिसमें सामान्य कोशिकाएं अपनी वृद्धि व विभाजन पर नियंत्रण खो देती हैं और अनियंत्रित रूप से विभाजित होकर असामान्य कोशिका-समूह (Neoplasm) बनाती हैं। कैंसर के लिए उत्तरदायी जीन को ऑन्कोजीन (Oncogenes) कहा जाता है।

🟢 सौम्य ट्यूमर (Benign)🔴 घातक ट्यूमर (Malignant)
◆ मूल स्थान तक सीमित ◆ शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलता ◆ अपेक्षाकृत कम हानिकारक◆ तीव्र गति से बढ़ता है ◆ आसपास के ऊतकों को नष्ट करता है ◆ मेटास्टेसिस — रक्त/लसीका द्वारा शरीर के अन्य भागों में फैलना (सबसे खतरनाक गुण)

कैंसरजनक कारक (Carcinogenic Agents)

भौतिक कारकरासायनिक कारकजैविक कारक
X-किरणें, UV-किरणें, रेडियोधर्मी विकिरणनिकोटिन, पॉलीसाइक्लिक हाइड्रोकार्बनकुछ DNA वायरस (HPV, EBV), रेट्रोवायरस

लक्षण: न भरने वाला घाव, असामान्य रक्तस्राव, स्तन या शरीर में गांठ, लगातार खांसी या आवाज़ में बदलाव, निगलने में कठिनाई। उपचार विधियां: कीमोथेरेपी, शल्य चिकित्सा, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी व ब्रेकीथेरेपी (आंतरिक विकिरण चिकित्सा)।

भारत की नवीनतम कैंसर उपलब्धियां

💡 वास्तविक उपयोग

💡 30 वर्ष के बाद नियमित जांच क्यों ज़रूरी?: NPCDCS (राष्ट्रीय कैंसर-मधुमेह-हृदय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, विस्तार विषय 12 में) के अंतर्गत 30 वर्ष व अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की नियमित स्क्रीनिंग की सिफारिश की जाती है — मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मुख कैंसर, स्तन कैंसर व गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की। शीघ्र पहचान से इलाज की सफलता दर कई गुना बढ़ जाती है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ मधुमेह (Diabetes Mellitus) ◆ टाइप-1 व टाइप-2 डायबिटीज़ ◆ कैंसर (Cancer) ◆ मेटास्टेसिस ◆ ऑन्कोजीन ◆ NexCAR19

10 आनुवंशिक रोग — डाउन सिंड्रोम, थैलेसीमिया, सिकल-सेल एनीमिया, हीमोफीलिया

जब जीन या गुणसूत्र की संख्या या संरचना में परिवर्तन आ जाता है, तो इसे आनुवंशिक रोग कहते हैं। ये दो व्यापक वर्गों में बंटते हैं — गुणसूत्रीय विपथन (Chromosomal Aberrations, गुणसूत्र की संख्या/संरचना में गड़बड़ी) व जीन उत्परिवर्तन (Gene Mutation, किसी विशिष्ट जीन में बदलाव)।

डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) — गुणसूत्र संख्या 21 की त्रिसूत्रता

'मंगोलिज्म' के नाम से भी जाना जाने वाला डाउन सिंड्रोम सबसे अधिक पाया जाने वाला गुणसूत्रीय विकार है, जिसमें गुणसूत्र संख्या 21 की तीन प्रतियां (सामान्य दो के बजाय) पाई जाती हैं — इसे Trisomy 21 कहते हैं।

📌 महत्वपूर्ण

🖼️ डाउन सिंड्रोम (Trisomy 21) का कैरियोटाइप — गुणसूत्र 21 की तीन प्रतियां

जीव विज्ञान चित्र

लक्षण: चपटा चेहरा, चौड़ा माथा, तिरछी आंखें (Epicanthal fold), छोटी गर्दन, हथेली पर एक ही स्पष्ट रेखा (Simian crease), सीखने में कठिनाई। इसके अतिरिक्त अन्य त्रिसूत्रता विकार भी होते हैं — पाटाऊ सिंड्रोम (Trisomy 13, कटा होंठ-तालु, अतिरिक्त उंगलियां) व एडवर्ड सिंड्रोम (Trisomy 18, बहुत कम वजन, छोटी जीवन प्रत्याशा)।

लिंग गुणसूत्र संबंधी विकार

सिंड्रोमगुणसूत्र संरचनाप्रमुख लक्षण
टर्नर सिंड्रोम44+XO (कुल 45), केवल स्त्रियों मेंबांझपन, छोटा कद, गर्दन पर अतिरिक्त त्वचा
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम44+XXY (कुल 47), केवल पुरुषों मेंबांझपन, लंबा कद, टेस्टोस्टेरोन कम

जीन उत्परिवर्तन से होने वाले रोग

सिकल-सेल एनीमिया (Sickle-cell Anemia) — गुणसूत्र 11 पर एक बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation) के कारण होता है, जिसमें बीटा-ग्लोबिन श्रृंखला के छठे स्थान पर ग्लूटामिक अम्ल की जगह वैलीन आ जाता है। सिकल कोशिकाएं मात्र 10-20 दिन में नष्ट हो जाती हैं (सामान्य लाल रक्त कोशिका 120 दिन जीवित रहती है)।

रोगवंशागति पैटर्नप्रमुख लक्षण
हीमोफीलिया (Hemophilia)X-सलग्न अप्रभावी (Sex-linked Recessive)रक्त का थक्का न बनना; Factor VIII/IX की कमी
वर्णांधता (Color Blindness)X-सलग्न अप्रभावीलाल-हरे रंग में भेद करने में कठिनाई
थैलेसीमिया (Thalassemia)ऑटोसोमल अप्रभावीहीमोग्लोबिन निर्माण बाधित; नियमित रक्ताधान आवश्यक
सिस्टिक फाइब्रोसिसऑटोसोमल अप्रभावीफेफड़ों में गाढ़ा म्यूकस जमाव

सरकारी पहल — आनुवंशिक व दुर्लभ रोगों हेतु

💡 वास्तविक उपयोग — 💡 जीन थेरेपी का नया युग

BIRSA-101 — भारत की पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी, सिकल सेल रोग के इलाज हेतु विकसित की गई है। यह दिखाता है कि आज आनुवंशिक रोगों का इलाज केवल लक्षण-प्रबंधन तक सीमित नहीं, बल्कि जड़ (जीन स्तर) से संभव हो रहा है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ आनुवंशिक रोग ◆ डाउन सिंड्रोम (Trisomy 21) ◆ टर्नर व क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम ◆ सिकल-सेल एनीमिया ◆ थैलेसीमिया ◆ हीमोफीलिया

11 मानसिक स्वास्थ्य एवं संबंधित कार्यक्रम

मानसिक विकार वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति के व्यवहार, सोच या भावनाओं में असामान्यता आ जाती है, जो सामान्यतः उसे कष्ट, अक्षमता या सामाजिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है। मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए — यही आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का मूल सिद्धांत है।

प्रमुख मानसिक/न्यूरोलॉजिकल विकार

विकारप्रमुख विशेषता
अल्ज़ाइमर (Alzheimer's Disease)65 वर्ष से अधिक आयु में सामान्य; मस्तिष्क में असामान्य प्रोटीन जमाव से याददाश्त में गिरावट; डिमेंशिया का सबसे सामान्य प्रकार
सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia)भ्रम-मतिभ्रम (सकारात्मक लक्षण), भावनाओं की कमी-सामाजिक अलगाव (नकारात्मक लक्षण)
डिस्लेक्सिया (Dyslexia)बुद्धि की कमी नहीं, बल्कि भाषा प्रोसेस करने का अलग तरीका; उपचार दवा से नहीं, विशेष शिक्षण विधियों से
अवसाद (Depression)लगातार उदासी, रुचि की कमी, ऊर्जा में कमी

केंद्र सरकार के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

राजस्थान की मानसिक स्वास्थ्य पहल

राजस्थान बजट 2026-27 में मानसिक स्वास्थ्य हेतु कई नई घोषणाएं की गई हैं — राज-ममता मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, SMS अस्पताल जयपुर में मानसिक स्वास्थ्य उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना, प्रत्येक जिले में Mental Health Care Cell, विद्यालयों में काउंसलिंग, तनाव-प्रबंधन कार्यशालाएं तथा किशोरों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य हेतु 'उजाला क्लिनिक'।

📌 महत्वपूर्ण — 💡 मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना

भारत सहित कई समाजों में मानसिक बीमारी को लेकर आज भी सामाजिक कलंक (Stigma) जुड़ा है, जिस कारण कई लोग समय पर मदद नहीं मांगते। Tele-MANAS जैसी 24×7 गुमनाम (Anonymous) हेल्पलाइन सेवाएं इसी झिझक को दूर करने में मदद करती हैं — याद रखें, मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद मांगना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ मानसिक स्वास्थ्य ◆ अल्ज़ाइमर ◆ सिज़ोफ्रेनिया ◆ डिस्लेक्सिया ◆ NMHP व DMHP ◆ Tele-MANAS

12 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्रमुख रोग नियंत्रण कार्यक्रम

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission - NHM), अपने दो उप-मिशनों — राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM, 2005 में शुरू) व राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM, 2013 में शुरू) — के साथ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य किफायती, समान व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करना है। NHM की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं — मातृ मृत्यु दर (MMR) में 86% की गिरावट तथा शिशु मृत्यु दर में 73% की गिरावट (वैश्विक औसत गिरावट 58% की तुलना में कहीं अधिक)।

प्रमुख रोग-विशिष्ट राष्ट्रीय कार्यक्रम

कार्यक्रमउद्देश्य/लक्ष्य
राष्ट्रीय TB उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)पूर्व नाम RNTCP; लक्ष्य — 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाना (पूर्ण उन्मूलन अभी शेष, पर उल्लेखनीय प्रगति — देखें विषय 2)
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP)मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार, फाइलेरिया, जापानी एन्सेफलाइटिस; मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य — 2027
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP)निःशुल्क बहु-औषधि चिकित्सा (MDT); विकलांगता व सामाजिक भेदभाव में कमी
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACO)निःशुल्क HIV जांच व एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART)
राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम1976 में शुरू; अंधापन दर को 0.25% तक लाना; निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन
एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP)2004 में शुरू; महामारी/प्रकोपों का शीघ्र पता लगाना व नियंत्रण
NPCDCSकैंसर-मधुमेह-हृदय रोग-स्ट्रोक नियंत्रण; 2010 में शुरू (विस्तार विषय 9 में)

मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम

पल्स पोलियो कार्यक्रम

5 वर्ष तक के सभी बच्चों को नियमित पोलियो खुराक देने हेतु राष्ट्रीय व उप-राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाए जाते हैं — रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर विशेष बूथ लगाकर छूटे बच्चों तक भी पहुंचा जाता है। यही सतत प्रयास भारत को 2014 के बाद भी पोलियो-मुक्त बनाए रखने में सफल रहा है।

💡 वास्तविक उपयोग — 💡 सार्वजनिक स्वास्थ्य की सफलता की कहानी

1854 के जॉन स्नो के हैंडपंप वाले उदाहरण (इस अध्याय की शुरुआत में) से लेकर आज के IDSP जैसे आधुनिक निगरानी तंत्र तक — सिद्धांत वही है: रोग को जल्दी पहचानो, स्रोत रोको, और आबादी को सुरक्षित रखो। भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रमों की सफलता इसी सिद्धांत के बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन का परिणाम है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ◆ NTEP ◆ NVBDCP ◆ NLEP ◆ जननी सुरक्षा योजना ◆ मिशन इंद्रधनुष ◆ पल्स पोलियो कार्यक्रम

13 आयुष्मान भारत — PM-JAY, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डिजिटल मिशन

आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त-पोषित स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है, जिसका शुभारंभ सितंबर 2018 में हुआ। इसके दो मुख्य स्तंभ हैं — प्राथमिक स्तर पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पहले 'हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर' कहलाते थे) व द्वितीयक-तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य बीमा (PM-JAY)।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

इस योजना के अंतर्गत गरीब व वंचित परिवारों को प्रति परिवार ₹5 लाख तक का मुफ्त, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिलता है। सितंबर 2024 में एक बड़ा विस्तार किया गया — अब 70 वर्ष व उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को (आय की परवाह किए बिना) आयुष्मान वय वंदन कार्ड के तहत कवरेज दिया जाता है, जिससे लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हुए हैं। देशभर में 36,000 से अधिक अस्पताल इस योजना में सूचीबद्ध हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM)

आयुष्मान भारत का प्राथमिक स्तंभ, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को घरों के करीब लाता है। यहां मातृ-शिशु स्वास्थ्य से आगे बढ़कर असंक्रामक रोगों की जांच, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, नेत्र-कान-नाक-गला देखभाल व आपातकालीन प्राथमिक उपचार जैसी विस्तृत सेवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। देशभर में लगभग 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर सक्रिय हैं, जिनमें टेलीकंसल्टेशन सुविधा भी शामिल है — सितंबर 2025 तक 39.61 करोड़ से अधिक टेलीकंसल्टेशन आयोजित हो चुके हैं।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

27 सितंबर 2021 को शुभारंभ किया गया यह मिशन एक मज़बूत डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहता है। इसके अंतर्गत ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) — प्रत्येक नागरिक का एक डिजिटल स्वास्थ्य ID — बनाया जाता है, जिसमें व्यक्ति के स्वास्थ्य अभिलेख सुरक्षित व केंद्रीकृत रूप से संग्रहित होते हैं। अगस्त 2025 तक 79.75 करोड़ से अधिक ABHA ID बनाई जा चुकी हैं।

सस्ती दवाइयां व अन्य सहयोगी पहल

💡 वास्तविक उपयोग — 💡 स्वास्थ्य बीमा से डिजिटल स्वास्थ्य तक

आयुष्मान भारत की यात्रा दिखाती है कि भारत की स्वास्थ्य नीति अब केवल 'इलाज उपलब्ध कराने' तक सीमित नहीं, बल्कि 'हर नागरिक का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड' बनाने तक पहुंच चुकी है — यह भविष्य में व्यक्तिगत, डेटा-आधारित स्वास्थ्य सेवा (Personalized Healthcare) की नींव रखता है।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ आयुष्मान भारत ◆ PM-JAY ◆ आयुष्मान आरोग्य मंदिर ◆ ABDM ◆ ABHA ◆ जन औषधि परियोजना

14 राजस्थान की सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाएं

राजस्थान ने अपनी विशिष्ट भौगोलिक व सामाजिक चुनौतियों (विशाल मरुस्थलीय क्षेत्र, बिखरी हुई आबादी, आदिवासी दूरस्थ क्षेत्र) को देखते हुए राष्ट्रीय योजनाओं के साथ-साथ कई राज्य-विशिष्ट स्वास्थ्य योजनाएं भी शुरू की हैं।

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY)

यह योजना मूल रूप से 1 मई 2021 को 'मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना' के नाम से शुरू हुई थी। 19 फरवरी 2024 को राज्य में सरकार बदलने के बाद इसका नाम बदलकर 'मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना' (MAAY) कर दिया गया — यह RAS परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य है (पुराना नाम व नया नाम दोनों याद रखें)। मूल संरचना जस की तस बनी हुई है:

विशेषताविवरण
कवरेज₹25 लाख स्वास्थ्य बीमा + ₹10 लाख दुर्घटना बीमा प्रति परिवार प्रति वर्ष
निःशुल्क लाभार्थीNFSA/SECC परिवार, लघु-सीमांत किसान, संविदाकर्मी, 70+ वरिष्ठ नागरिक
सामान्य वर्ग हेतु प्रीमियम₹850 प्रति परिवार प्रति वर्ष (शेष राशि राज्य सरकार वहन करती है)
उपचार पैकेज1,798 से अधिक उपचार पैकेज; अंग प्रत्यारोपण व कॉक्लियर इम्प्लांट भी शामिल
अस्पताल नेटवर्क778 राजकीय अस्पताल + 521 सूचीबद्ध निजी अस्पताल
पोर्टेबिलिटीअप्रैल 2025 से इन-बाउंड, दिसंबर 2025 से आउट-बाउंड पोर्टेबिलिटी लागू

अन्य प्रमुख राजस्थान स्वास्थ्य योजनाएं

राजस्थान का डिजिटल स्वास्थ्य विस्तार

राजस्थान में दिसंबर 2025 तक 6.52 करोड़ से अधिक ABHA ID बनाई जा चुकी हैं। साथ ही एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) राज्य में 14 मार्च 2024 से क्रियान्वित है, जिसके तहत 27 जिला चिकित्सालयों की प्रयोगशालाएं सुदृढ़ की गई हैं तथा 7 चिकित्सा महाविद्यालयों में रेफरल नेटवर्क प्रयोगशालाएं स्थापित हैं।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण — परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण

राजस्थान की स्वास्थ्य योजनाओं के नाम व वर्ष अक्सर बदलते रहते हैं (जैसे चिरंजीवी → आयुष्मान आरोग्य) — RAS परीक्षा की तैयारी में हमेशा नवीनतम आधिकारिक नाम व वर्तमान सरकार की घोषणाओं पर ध्यान दें, न कि पुरानी जानकारी पर।

📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)

◆ मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY) ◆ मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना ◆ RGHS ◆ स्वास्थ्य सेवा का अधिकार अधिनियम 2023 ◆ RIMS

📌 महत्वपूर्ण — 📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

• रोगों को जन्मजात व अर्जित में, तथा अर्जित रोगों को संक्रामक (जीवाणु-विषाणु-प्रोटोजोआ-कवक-कृमि जनित) व असंक्रामक (जीवनशैली, आनुवंशिक) में वर्गीकृत किया जाता है। • जीवाणु जनित रोगों (टीबी, हैजा, टिटनेस) व विषाणु जनित रोगों (डेंगू, कोविड-19, HIV) में भारत ने DOTS, टीकाकरण व AI-आधारित निगरानी जैसी रणनीतियों से उल्लेखनीय प्रगति की है — भारत 2014 से पोलियो-मुक्त है। • मलेरिया, काला-आजार व अमीबियासिस जैसे परजीवी रोग, तथा फाइलेरिया व फंगल संक्रमण भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं — मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य 2027 रखा गया है। • जूनोटिक रोग (पशु-मानव के बीच फैलने वाले) व पर्यावरणीय प्रदूषक-जनित रोग (फ्लोरोसिस, मिनामाटा, इटाई-इटाई) दर्शाते हैं कि स्वास्थ्य केवल चिकित्सा नहीं, पर्यावरण से भी जुड़ा है। • असंक्रामक रोगों में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह व कैंसर आज मृत्यु के प्रमुख कारण बन चुके हैं — जीवनशैली में सुधार व नियमित स्क्रीनिंग (NPCDCS) इनकी रोकथाम की कुंजी है। • आनुवंशिक रोग (डाउन सिंड्रोम, थैलेसीमिया, सिकल-सेल एनीमिया, हीमोफीलिया) व मानसिक स्वास्थ्य विकार (अल्ज़ाइमर, सिज़ोफ्रेनिया, डिस्लेक्सिया) हेतु भारत ने विशेष राष्ट्रीय मिशन व Tele-MANAS जैसी आधुनिक सेवाएं शुरू की हैं। • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) व इसके अंतर्गत चलने वाले दर्जनों रोग-विशिष्ट कार्यक्रम (NTEP, NVBDCP, NLEP, JSY, मिशन इंद्रधनुष) भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ हैं। • आयुष्मान भारत (PM-JAY, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, ABDM/ABHA) विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा व डिजिटल स्वास्थ्य पहल है, जो अब 70+ वर्ष के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी कवर करती है। • राजस्थान की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (पूर्व नाम चिरंजीवी योजना), निःशुल्क दवा-जांच योजना व स्वास्थ्य सेवा का अधिकार अधिनियम 2023 राज्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी बनाते हैं।

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