🔊 अध्याय 8/10 — भौतिक विज्ञान

ध्वनि एवं विद्युत-चुंबकीय तरंगें

Sound and Electro-Magnetic Waves | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय — तरंगों का वर्गीकरण (Classification of Waves)
  2. ध्वनि की प्रकृति (Nature of Sound)
  3. ध्वनि का वेग (Speed of Sound)
  4. ध्वनि के गुण (Properties of Sound)
  5. प्रतिध्वनि, अनुरणन एवं SONAR (Echo, Reverberation & SONAR)
  6. डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)
  7. पराश्रव्य एवं अवश्रव्य तरंगें (Ultrasound & Infrasound)
  8. विद्युत-चुंबकीय तरंगें एवं स्पेक्ट्रम (EM Waves & Spectrum)
  9. प्रमुख वैज्ञानिक एवं तरंग विज्ञान में उनका योगदान
🌟 क्या आप जानते हैं?

सोचो — पहाड़ों में खड़े होकर ज़ोर से चिल्लाने पर कुछ ही क्षण बाद अपनी ही आवाज़ पलटकर वापस सुनाई देती है, तथा किसी दौड़ती ट्रेन के हॉर्न की आवाज़ जैसे-जैसे वह पास आती है तीखी और जैसे ही दूर जाती है भारी होती जान पड़ती है। यह दोनों घटनाएँ किसी संयोग की नहीं, बल्कि ध्वनि तरंगों के मौलिक भौतिक नियमों — परावर्तन व डॉप्लर प्रभाव — का परिणाम हैं। इसी अध्याय में हम ध्वनि की संपूर्ण यात्रा — उसकी प्रकृति से लेकर SONAR तक — तथा विद्युत-चुंबकीय तरंगों की मौलिक प्रकृति को गहराई से समझेंगे।

1परिचय — तरंगों का वर्गीकरण (Classification of Waves)

तरंग वह विक्षोभ (Disturbance) है जो ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करती है — ध्यान रहे कि तरंग के साथ माध्यम के कण स्वयं स्थानांतरित नहीं होते, केवल ऊर्जा आगे बढ़ती है (ठीक वैसे ही जैसे तालाब में लहर उठने पर पानी की एक बूँद वास्तव में किनारे तक यात्रा नहीं करती, केवल ऊपर-नीचे दोलन करती है)। तरंगों को दो व्यापक वर्गों में बाँटा जाता है — यांत्रिक तरंग व विद्युत-चुंबकीय तरंग।

आधारयांत्रिक तरंग (Mechanical)विद्युत-चुंबकीय तरंग (EM)
माध्यमआवश्यक (ठोस/द्रव/गैस)आवश्यक नहीं
निर्वात में गमननहींहाँ
सामान्य वेग340 मीटर/सेकंड (वायु में ध्वनि)3×10⁸ मीटर/सेकंड
उदाहरणध्वनि, भूकंप तरंगें, जल तरंगेंप्रकाश, X-किरण, रेडियो तरंग

तरंगों को एक अन्य आधार पर भी बाँटा जाता है — अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंग में माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा के समानांतर (आगे-पीछे) कंपन करते हैं, जिससे संपीडन (Compression, जहाँ कण पास-पास होते हैं) व विरलन (Rarefaction, जहाँ कण दूर-दूर होते हैं) के क्षेत्र बनते हैं — ध्वनि इसी प्रकार की तरंग है। इसके विपरीत, अनुप्रस्थ (Transverse) तरंग में कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, जिससे शिखर (Crest) व गर्त (Trough) बनते हैं — प्रकाश व जल की सतह पर बनने वाली तरंगें इसी प्रकार की होती हैं।

📐 तरंग का मूल समीकरण — सूत्र

v = f × λ (v=तरंग वेग, f=आवृत्ति, λ=तरंगदैर्ध्य)
आवर्तकाल: T = 1/f

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
यांत्रिक तरंगविद्युत-चुंबकीय तरंगअनुदैर्ध्य तरंगअनुप्रस्थ तरंगसंपीडनविरलन
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2ध्वनि की प्रकृति (Nature of Sound)

ध्वनि एक यांत्रिक, अनुदैर्ध्य तरंग है जो माध्यम के कणों के संपीडन व विरलन से उत्पन्न होती है — इसीलिए ध्वनि के संचरण के लिए किसी न किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) का होना अनिवार्य है, तथा यह निर्वात में बिल्कुल भी यात्रा नहीं कर सकती। यही कारण है कि अंतरिक्ष के निर्वात में, चाहे कोई विशाल विस्फोट भी क्यों न हो, वहाँ पूर्ण मौन (सन्नाटा) होता है — कोई भी अंतरिक्ष यात्री बाहरी माध्यम के अभाव में उस ध्वनि को कभी नहीं सुन सकता।

2.1 आवृत्ति के आधार पर ध्वनि की श्रेणियाँ

श्रेणीआवृत्ति सीमाविशेष तथ्य
अवश्रव्य (Infrasound)20 Hz से कमभूकंप, हाथी व व्हेल इसे सुन व उत्पन्न कर सकते हैं
श्रव्य (Audible Sound)20 Hz – 20,000 Hzमानव कान की सुनने की सीमा
पराश्रव्य (Ultrasound)20,000 Hz से अधिकचमगादड़ (1 लाख Hz तक), कुत्ता (40 kHz तक), डॉल्फिन (1.5 लाख Hz तक)

2.2 ध्वनि की विशेषताएँ (Characteristics of Sound)

📐 ध्वनि तीव्रता स्तर (Sound Intensity Level) — सूत्र

SIL = 10 log₁₀(I/I₀) dB (I₀ = 10⁻¹² W/m², श्रव्यता की न्यूनतम सीमा)

शोर प्रदूषण — 85 dB की सीमा-रेखा: साधारण बातचीत लगभग 60 dB, सड़क का यातायात 80-100 dB तथा जेट इंजन 120-140 dB तक ध्वनि उत्पन्न करता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार 85 dB से अधिक तीव्रता की ध्वनि के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्थायी श्रवण क्षति (Hearing Loss) हो सकती है — इसीलिए निर्माण स्थलों व औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों को ईयर-प्रोटेक्शन पहनने की सलाह दी जाती है।
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
अवश्रव्यश्रव्यपराश्रव्यतारत्वप्रबलतागुणताडेसिबलशोर प्रदूषण
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3ध्वनि का वेग (Speed of Sound)

ध्वनि के वेग की गणना करने का पहला वैज्ञानिक प्रयास सर आइज़क न्यूटन ने 1687 में किया, जिसमें उन्होंने ध्वनि के संचरण को एक समतापी (Isothermal) प्रक्रिया माना — परंतु उनके सूत्र से प्राप्त मान (280 m/s) प्रायोगिक रूप से मापे गए वास्तविक मान से काफी कम था। लगभग 130 वर्ष बाद, फ्रांसीसी गणितज्ञ लाप्लास ने 1816 में यह सुधार सुझाया कि ध्वनि का संचरण वास्तव में रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है — अर्थात संपीडन व विरलन इतनी तेज़ी से होते हैं कि ऊष्मा का आदान-प्रदान होने का समय ही नहीं मिलता।

📐 न्यूटन-लाप्लास सूत्र — सूत्र

न्यूटन का सूत्र (समतापी): v = √(P/ρ)
लाप्लास का संशोधन (रुद्धोष्म): v = √(γP/ρ) = √(γRT/M) (γ = Cp/Cv, वायु के लिए γ=1.4)
ताप पर निर्भरता: v_T = 332 + 0.61t (t = सेल्सियस में तापमान)

माध्यमध्वनि वेग (मी/से)विशेष तथ्य
वायु (0°C)332न्यूटन-लाप्लास सूत्र से — Mach 1 = 332 m/s
वायु (25°C)346सामान्य कमरे में — ताप वृद्धि से बढ़ता है
जल (25°C)1498वायु से लगभग 4.5 गुना तेज़ — SONAR में उपयोग
लोहा (ठोस)5120ठोसों में सर्वाधिक — उच्च घनत्व व प्रत्यास्थता
रबर40–150न्यूनतम — अत्यंत लचीला माध्यम
निर्वातशून्यकोई माध्यम नहीं → ध्वनि असंभव
💡 ठोस में ध्वनि द्रव व गैस से तेज़ क्यों चलती है?

ध्वनि का वेग माध्यम की प्रत्यास्थता (Elasticity) व घनत्व दोनों पर निर्भर करता है — ठोस पदार्थों में कणों के बीच की बंधन-शक्ति (व प्रत्यास्थता गुणांक) द्रव व गैस की तुलना में कहीं अधिक होती है, जिससे एक कण से दूसरे कण तक कंपन-ऊर्जा कहीं तेज़ी से स्थानांतरित हो पाती है — यही कारण है कि रेलवे ट्रैक पर कान लगाकर दूर आती ट्रेन की आवाज़ हवा से पहले ही सुनी जा सकती है, क्योंकि ठोस पटरी में ध्वनि वायु की तुलना में लगभग 15 गुना तेज़ी से यात्रा करती है।

मैक संख्या (Mach Number) किसी वस्तु के वेग की ध्वनि के वेग से तुलना करती है — Mach 1 का अर्थ है वस्तु ठीक ध्वनि की गति से चल रही है, जबकि Mach 1 से अधिक (Supersonic) गति पर वस्तु ध्वनि से भी तेज़ यात्रा करती है, जिससे एक शंकु आकार की तीव्र दाब-तरंग बनती है, जो ज़मीन तक पहुँचने पर एक तीव्र धमाके जैसी ध्वनि (Sonic Boom) उत्पन्न करती है — यही कारण है कि सुपरसोनिक लड़ाकू विमान जब ध्वनि-अवरोध (Sound Barrier) पार करते हैं, तो एक तेज़ गड़गड़ाहट सुनाई देती है।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
न्यूटन सूत्रलाप्लास संशोधनरुद्धोष्म प्रक्रियामैक संख्यासॉनिक बूम
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4ध्वनि के गुण (Properties of Sound)

प्रकाश की भाँति ध्वनि भी परावर्तन, अपवर्तन तथा विवर्तन जैसी तरंग-विशेष घटनाओं का प्रदर्शन करती है — परंतु चूँकि ध्वनि की तरंगदैर्ध्य प्रकाश से कहीं अधिक होती है, इसलिए इसमें विवर्तन जैसी घटनाएँ कहीं अधिक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं।

व्यतिकरण (Interference) तब होता है जब दो ध्वनि तरंगें एक साथ अध्यारोपित (Superimpose) होती हैं — जहाँ दोनों तरंगें एक ही कला (Phase) में मिलती हैं, वहाँ संपोषी व्यतिकरण होता है (ध्वनि और तेज़); जहाँ विपरीत कला में मिलती हैं, वहाँ विनाशी व्यतिकरण होता है (ध्वनि कम या शून्य)। जब लगभग समान (परंतु बिल्कुल बराबर नहीं) आवृत्ति की दो ध्वनि तरंगें एक साथ बजाई जाती हैं, तो ध्वनि की प्रबलता बारी-बारी तीव्र व मंद होती प्रतीत होती है — इसे विस्पंद (Beats) कहते हैं, जिसका उपयोग संगीतकार अपने वाद्ययंत्रों को एक-दूसरे के सुर से मिलाने (Tuning) के लिए करते हैं।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
ध्वनि परावर्तनध्वनि अपवर्तनविवर्तनव्यतिकरणविस्पंद
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5प्रतिध्वनि, अनुरणन एवं SONAR (Echo, Reverberation & SONAR)

प्रतिध्वनि (Echo) वह परिघटना है जिसमें मूल ध्वनि सुनने के पश्चात, किसी दूर स्थित कठोर सतह से परावर्तित होकर वही ध्वनि पुनः सुनाई देती है। मानव कान किसी ध्वनि को लगभग 0.1 सेकंड तक "स्मरण" रखता है, इसलिए यदि मूल ध्वनि व परावर्तित ध्वनि के बीच समयांतर इससे कम हो, तो दोनों मिलकर एक ही निरंतर ध्वनि जैसी प्रतीत होती हैं — प्रतिध्वनि सुनाई देने के लिए यह अंतराल न्यूनतम 1/15 सेकंड (लगभग 0.067 सेकंड) होना आवश्यक है।

📐 प्रतिध्वनि की शर्त एवं दूरी — सूत्र

परावर्तक तल की न्यूनतम दूरी: d = v×t/2 ≈ 17 मीटर (v=340 m/s, t=1/15 s पर)
सामान्य सूत्र: d = v×t/2 (एकल प्रतिध्वनि के लिए t=2d/v)

जब किसी बंद कमरे में ध्वनि-स्रोत बंद होने के बाद भी ध्वनि कुछ समय तक बार-बार दीवारों से परावर्तित होकर बनी रहती है, तो इसे अनुरणन (Reverberation) कहते हैं। वह समय जिसमें ध्वनि की तीव्रता 60 डेसिबल तक घट जाती है, अनुरणन काल (RT60) कहलाता है, जिसकी गणना सैबिन के सूत्र से की जाती है — संगीत सभागार के लिए आदर्श RT60 लगभग 1.5-2 सेकंड जबकि भाषण हॉल के लिए 0.8-1 सेकंड माना जाता है, तथा अत्यधिक अनुरणन को कम करने के लिए कालीन, पर्दे व ध्वनि-अवशोषक टाइल का उपयोग किया जाता है।

5.1 SONAR (Sound Navigation And Ranging)

SONAR एक ऐसी तकनीक है जिसमें पराश्रव्य तरंगें जल में भेजी जाती हैं, जो किसी वस्तु (जैसे पनडुब्बी या समुद्र-तल) से टकराकर वापस लौटती हैं — भेजने व लौटने के बीच लगे समय से दूरी की गणना की जाती है।

📐 SONAR दूरी सूत्र — सूत्र

d = v×t/2 (v ≈ 1500 मीटर/सेकंड, जल में ध्वनि वेग)

💡 SONAR एवं RADAR में अंतर

SONAR (Sound Navigation And Ranging) पराश्रव्य ध्वनि तरंगों का उपयोग करके जल के भीतर पनडुब्बी का पता लगाने, समुद्र की गहराई मापने (Fathometer) व मछलियों के झुंड खोजने में सहायक है, जबकि RADAR (Radio Detection And Ranging) इसी सिद्धांत पर परंतु विद्युत-चुंबकीय (माइक्रोवेव) तरंगों का उपयोग करके वायु व अंतरिक्ष में विमानों व मौसम प्रणालियों का पता लगाता है — SONAR को "जल का RADAR" कहा जा सकता है, क्योंकि पानी में विद्युत-चुंबकीय तरंगें शीघ्र क्षीण हो जाती हैं, जबकि ध्वनि तरंगें पानी में बहुत कुशलता से यात्रा करती हैं।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
प्रतिध्वनिअनुरणनRT60SONARRADARसैबिन सूत्र
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6डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect)

डॉप्लर प्रभाव वह परिघटना है जिसमें ध्वनि-स्रोत या प्रेक्षक (सुनने वाला व्यक्ति) की सापेक्ष गति के कारण, प्रेक्षक को ध्वनि की आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से भिन्न प्रतीत होती है — यही कारण है कि किसी हॉर्न बजाती हुई ट्रेन के पास आने पर आवाज़ तीखी (उच्च आवृत्ति) तथा दूर जाने पर भारी (निम्न आवृत्ति) सुनाई देती है, जबकि ट्रेन में सवार व्यक्ति के लिए हॉर्न की आवृत्ति में कोई परिवर्तन नहीं होता।

📐 डॉप्लर प्रभाव सूत्र — सूत्र

f' = f × (v ± v_o)/(v ∓ v_s)
प्रेक्षक निकट आए → f' > f | प्रेक्षक दूर जाए → f' < f
स्रोत निकट आए → f' > f | स्रोत दूर जाए → f' < f

अनुप्रयोग क्षेत्रकार्यविधि
ट्रैफिक रडार (Speed Gun)डॉप्लर रडार से वाहन पर तरंग भेजकर परावर्तित तरंग की आवृत्ति-परिवर्तन से गति मापना
इकोकार्डियोग्राफी (चिकित्सा)डॉप्लर अल्ट्रासाउंड से हृदय के वाल्व व रक्त-प्रवाह की गति मापना
मौसम विज्ञानडॉप्लर वेदर रडार से तूफान व वर्षा की दिशा एवं गति का पूर्वानुमान
खगोलशास्त्ररेड शिफ्ट व ब्लू शिफ्ट से तारों व आकाशगंगाओं की गति की दिशा ज्ञात करना
💡 रेड शिफ्ट — ब्रह्मांड के विस्तार का प्रमाण

खगोलशास्त्री एडविन हबल ने पाया कि अधिकांश दूर स्थित आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश में "रेड शिफ्ट" (लाल रंग की ओर विचलन) देखा जाता है — डॉप्लर प्रभाव के अनुसार यह तभी संभव है जब वह आकाशगंगा हमसे दूर जा रही हो (जिससे तरंगदैर्ध्य बढ़कर लाल रंग की ओर खिसक जाती है)। इस अवलोकन ने वैज्ञानिक जगत को यह समझने में मदद की कि संपूर्ण ब्रह्मांड निरंतर विस्तारित हो रहा है — यही खोज आगे चलकर "बिग बैंग सिद्धांत" की एक महत्वपूर्ण प्रायोगिक पुष्टि बनी।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
डॉप्लर प्रभावरेड शिफ्टब्लू शिफ्टब्रह्मांड विस्तारडॉप्लर रडार
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7पराश्रव्य एवं अवश्रव्य तरंगें (Ultrasound & Infrasound)

पराश्रव्य तरंगें (Ultrasound) पीज़ो-इलेक्ट्रिक प्रभाव (क्वार्ट्ज़ क्रिस्टल पर विशेष विद्युत दाब से कंपन) या मैग्नेटोस्ट्रिक्शन (निकल की छड़ का चुंबकीय कंपन) द्वारा उत्पन्न की जाती हैं। उच्च आवृत्ति के कारण इनकी तरंगदैर्ध्य छोटी होती है, जिससे ये सीधी, अत्यंत दिशात्मक किरण के रूप में यात्रा करती हैं तथा कम विवर्तित होती हैं — इसी विशेषता के कारण इनका चिकित्सा व औद्योगिक क्षेत्र में व्यापक उपयोग होता है।

क्षेत्रअनुप्रयोग
चिकित्सा (Medical)अल्ट्रासोनोग्राफी (गर्भ में शिशु की जाँच), लिथोट्रिप्सी (गुर्दे की पथरी तोड़ना), इकोकार्डियोग्राफी (हृदय जाँच)
नौसेना (SONAR)पनडुब्बी का पता लगाना, समुद्र की गहराई मापना, मछली-झुंड खोजना
औद्योगिक (Industrial)वेल्डिंग, धातु में दरारें ढूँढना (NDT), अल्ट्रासोनिक सफाई
जंतु जगत (Animals)चमगादड़ की इकोलोकेशन (शिकार खोजना), डॉल्फिन का नेविगेशन, डॉग व्हिसल
गृह उपयोगअल्ट्रासोनिक ह्यूमिडिफायर, गहनों की सफाई, कीट-निवारक यंत्र

इसके ठीक विपरीत, अवश्रव्य तरंगें (Infrasound, आवृत्ति 20 Hz से कम) की तरंगदैर्ध्य बहुत बड़ी होती है, जिससे ये दीवारों व पहाड़ों को भी पार करते हुए बहुत दूर तक यात्रा कर सकती हैं। भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, विशाल जलप्रपात व वायुमंडलीय तूफान इनके प्राकृतिक स्रोत हैं।

💡 हाथी व व्हेल का "गुप्त संचार"

हाथी अवश्रव्य तरंगों के माध्यम से कई किलोमीटर दूर स्थित अपने झुंड के सदस्यों से संवाद कर सकते हैं, तथा वैज्ञानिकों का मानना है कि वे प्राकृतिक आपदाओं (जैसे भूकंप) से पहले उत्पन्न होने वाली सूक्ष्म अवश्रव्य तरंगों को महसूस कर पूर्व-चेतावनी जैसा व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। इसी प्रकार, ब्लू व्हेल समुद्र में 1000 किलोमीटर तक की दूरी पर भी अवश्रव्य तरंगों के माध्यम से संवाद स्थापित कर सकती है — जो पृथ्वी के किसी भी जीव द्वारा उत्पन्न सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक ध्वनि संकेतों में से एक मानी जाती है।

भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) का भी अवश्रव्य श्रेणी से गहरा संबंध है — P-तरंग (अनुदैर्ध्य, ठोस-द्रव-गैस तीनों में यात्रा करने में सक्षम) व S-तरंग (अनुप्रस्थ, केवल ठोस में यात्रा करने में सक्षम) की गति व व्यवहार के अध्ययन से ही वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की आंतरिक संरचना (क्रोड द्रव अवस्था में है, यह तथ्य S-तरंगों के द्रव क्रोड से न गुज़र पाने से ही ज्ञात हुआ) का अनुमान लगाया है।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
पराश्रव्यअवश्रव्यपीज़ो-इलेक्ट्रिक प्रभावलिथोट्रिप्सीइकोलोकेशनभूकंपीय तरंगें
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8विद्युत-चुंबकीय तरंगें एवं स्पेक्ट्रम (EM Waves & Spectrum)

ध्वनि के विपरीत, विद्युत-चुंबकीय (EM) तरंगों को किसी भी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती — ये निर्वात में भी अपने अधिकतम वेग c=3×10⁸ मीटर/सेकंड पर यात्रा करती हैं, जो ध्वनि के वेग से लगभग 9 लाख गुना अधिक है। इनकी गहन संरचना — मैक्सवेल के समीकरण, विद्युत क्षेत्र व चुंबकीय क्षेत्र का परस्पर लंबवत दोलन, तथा स्पेक्ट्रम का विस्तृत विवरण — हम पहले ही "चुंबकत्व एवं विद्युत-चुंबकत्व" अध्याय में गहराई से समझ चुके हैं; यहाँ हम इसकी कुछ अतिरिक्त विशेषताओं पर ध्यान देंगे जो सीधे ध्वनि तरंगों से तुलना करने में सहायक हैं।

गुणविवरण
माध्यम की आवश्यकतानहीं — निर्वात में भी c=3×10⁸ m/s से यात्रा (ध्वनि से विपरीत)
तरंग प्रकारअनुप्रस्थ — E एवं B परस्पर लंबवत तथा तरंग-दिशा से भी लंबवत
ध्रुवण (Polarization)EM तरंगें ध्रुवित हो सकती हैं; ध्वनि (अनुदैर्ध्य होने से) कभी ध्रुवित नहीं होती
ऊर्जा वहनE = hf — आवृत्ति जितनी अधिक, ऊर्जा उतनी अधिक (गामा किरण सर्वाधिक ऊर्जावान)
📐 EM तरंग में ऊर्जा — सूत्र

E = hf = hc/λ (h = 6.63×10⁻³⁴ जूल-सेकंड, प्लांक स्थिरांक)

💡 ध्वनि व प्रकाश दोनों के गुण एक साथ याद रखने की तरकीब

ध्वनि व प्रकाश (एक EM तरंग) दोनों ही परावर्तन व अपवर्तन दिखाते हैं, परंतु ध्वनि अनुदैर्ध्य होने से ध्रुवित नहीं हो सकती जबकि प्रकाश अनुप्रस्थ होने से ध्रुवित हो सकता है (जैसे पोलेराइज़्ड धूप के चश्मे में उपयोग होता है) — यह अंतर याद रखने के लिए सरल तरीका है: "अनुदैर्ध्य तरंग की दिशा में ही सब कुछ घटित होता है, इसलिए घुमाने (ध्रुवण) के लिए कोई अतिरिक्त दिशा बचती ही नहीं, जबकि अनुप्रस्थ तरंग में कंपन की दिशा तरंग-दिशा के लंबवत किसी भी कोण पर हो सकती है, इसीलिए इसे चुनिंदा दिशा में छाना (ध्रुवित) जा सकता है।"

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विद्युत-चुंबकीय तरंगध्रुवणप्लांक स्थिरांकEM स्पेक्ट्रम
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9प्रमुख वैज्ञानिक एवं तरंग विज्ञान में उनका योगदान

वैज्ञानिक (देश/काल)तरंग विज्ञान में योगदान
क्रिस्टियान डॉप्लर (ऑस्ट्रिया, 1803–1853)डॉप्लर प्रभाव (1842) — तरंग आवृत्ति में सापेक्ष गति से परिवर्तन
पियरे व जाक क्यूरी (फ्रांस)पीज़ो-इलेक्ट्रिक प्रभाव की खोज (1880) — अल्ट्रासाउंड उत्पादन का आधार
लॉर्ड रैले (इंग्लैंड, 1842–1919)ध्वनि सिद्धांत (Theory of Sound), प्रकाश प्रकीर्णन का नियम
हाइनरिष हर्ट्ज़ (जर्मनी, 1857–1894)EM तरंगों का प्रायोगिक प्रदर्शन (1887); हर्ट्ज़ (Hz) मात्रक इन्हीं के नाम पर
जेम्स क्लर्क मैक्सवेल (स्कॉटलैंड, 1831–1879)EM तरंगों की भविष्यवाणी — विस्तृत विवरण Ch.07 में
एडविन हबल (अमेरिका, 1889–1953)आकाशगंगाओं में रेड शिफ्ट — ब्रह्मांड के विस्तार की खोज (1929)
विल्हेम रॉन्टजन (जर्मनी, 1845–1923)X-किरणों की खोज (1895) — प्रथम नोबेल पुरस्कार (भौतिकी, 1901)

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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