⚡ अध्याय 6/10 — भौतिक विज्ञान

स्थिर वैद्युतिकी एवं धारा विद्युत

Static and Current Electricity | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय — विद्युत आवेश (Electric Charge)
  2. स्थिर वैद्युतिकी (Electrostatics)
  3. विद्युत विभव एवं धारिता (Electric Potential & Capacitance)
  4. धारा विद्युत (Current Electricity)
  5. प्रतिरोध एवं संयोजन (Resistance & Combination)
  6. विद्युत शक्ति एवं ऊर्जा (Electric Power & Energy)
  7. कोशिका एवं बैटरी (Cell & Battery)
  8. विद्युत धारा के प्रभाव (Effects of Electric Current)
  9. घरेलू विद्युत परिपथ (Domestic Electric Circuits)
  10. प्रमुख वैज्ञानिक एवं विद्युत में उनका योगदान
🌟 क्या आप जानते हैं?

सोचो — अंधेरे कमरे में एक स्विच दबाते ही पूरा कमरा रोशन हो जाता है। यह कोई जादू नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनों की एक अदृश्य दौड़ है जो तार के भीतर लाखों बार प्रति सेकंड घटित होती है। और यह सब उसी दिन शुरू हुआ जब किसी प्राचीन यूनानी ने ऊन से रगड़े गए एम्बर (Amber) को हल्की वस्तुओं को आकर्षित करते देखा — वहीं से "इलेक्ट्रॉन" शब्द जन्मा, जिसका यूनानी अर्थ ही एम्बर है। इस अध्याय में हम विद्युत की इसी अदृश्य दुनिया को — स्थिर आवेश से लेकर घर की वायरिंग तक — पूरी गहराई से समझेंगे।

1परिचय — विद्युत आवेश (Electric Charge)

विद्युत आवेश (Charge) पदार्थ का वह मूल गुण है जो विद्युत तथा चुंबकीय बल उत्पन्न करता है — जिस प्रकार द्रव्यमान किसी वस्तु का गुरुत्वाकर्षण बल उत्पन्न करने का गुण है, उसी प्रकार आवेश विद्युत बल उत्पन्न करने का गुण है। इसका SI मात्रक कूलॉम (Coulomb, C) है। आवेश दो प्रकार का होता है — धनात्मक (Positive), जो प्रोटॉन में पाया जाता है, तथा ऋणात्मक (Negative), जो इलेक्ट्रॉन में पाया जाता है। समान आवेश (धन-धन या ऋण-ऋण) परस्पर प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत आवेश (धन-ऋण) परस्पर आकर्षित करते हैं।

📐 मूल आवेश एवं क्वांटीकरण — सूत्र

मूल आवेश: e = 1.6×10⁻¹⁹ कूलॉम
आवेश का क्वांटीकरण: Q = ne (n = पूर्णांक — 1, 2, 3...)
आवेश संरक्षण नियम: किसी पृथक निकाय में कुल आवेश सदैव नियत रहता है

आवेश की एक अत्यंत रोचक विशेषता यह है कि यह सदैव मूल आवेश (e) के पूर्ण-गुणज (Integer Multiple) में ही पाया जाता है — कभी भी आधा या 1.5 गुना आवेश संभव नहीं है, इसी को "आवेश का क्वांटीकरण" कहते हैं। इसके साथ ही, आवेश संरक्षण के नियम के अनुसार किसी भी पृथक भौतिक निकाय में कुल आवेश न तो कभी बनाया जा सकता है, न नष्ट किया जा सकता है — यह केवल एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित हो सकता है।

1.1 चालक, कुचालक एवं अर्धचालक

वर्गविशेषताउदाहरण
चालक (Conductor)मुक्त इलेक्ट्रॉन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध, आवेश सरलता से प्रवाहित होता हैताँबा, एल्युमिनियम, लोहा, चाँदी
कुचालक (Insulator)मुक्त इलेक्ट्रॉन लगभग नहीं, आवेश प्रवाहित नहीं होताकाँच, रबर, प्लास्टिक, लकड़ी
अर्धचालक (Semiconductor)न पूर्ण चालक न कुचालक — ताप बढ़ने पर प्रतिरोध घटता हैसिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge) — डायोड-ट्रांजिस्टर में प्रयुक्त

1.2 आवेशन की विधियाँ (Methods of Charging)

💡 कंघी से बाल आकर्षित होना एवं बादलों में बिजली

जब सूखे बालों में प्लास्टिक की कंघी फेरी जाती है, तो घर्षण के कारण इलेक्ट्रॉन बालों से कंघी में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिससे कंघी ऋणावेशित हो जाती है और यह हल्के कागज़ के टुकड़ों या बालों को आकर्षित करने लगती है। ठीक इसी सिद्धांत के बड़े पैमाने पर घटित होने से बादलों के भीतर घर्षण द्वारा आवेश अलग-अलग हो जाते हैं, और जब यह आवेश एक विशाल परिमाण तक पहुँचकर अचानक विसर्जित होता है, तो हमें आकाशीय बिजली (Lightning) के रूप में दिखाई देता है — इसीलिए ऊँची इमारतों की सुरक्षा हेतु तड़ित चालक (Lightning Rod) व भू-सम्पर्कन (Earthing) का उपयोग किया जाता है, जो अतिरिक्त आवेश को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में भेज देते हैं।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
विद्युत आवेशमूल आवेशआवेश का क्वांटीकरणआवेश संरक्षणचालककुचालकअर्धचालकप्रेरण
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

2स्थिर वैद्युतिकी (Electrostatics)

स्थिर वैद्युतिकी उस शाखा का नाम है जो विरामावस्था में स्थित (स्थिर) आवेशों के बीच लगने वाले बलों तथा उनसे उत्पन्न क्षेत्रों का अध्ययन करती है। इसकी नींव कूलॉम के नियम पर टिकी है, जो दो बिंदु आवेशों के बीच लगने वाले बल की गणना करने का तरीका बताता है।

📐 कूलॉम का नियम (Coulomb's Law) — सूत्र

F = k·q₁q₂/r²
k = 9×10⁹ N·m²/C² (निर्वात में) | k = 1/(4πε₀)
ε₀ (निर्वात विद्युतशीलता) = 8.85×10⁻¹² C²/(N·m²)

कूलॉम के नियम के अनुसार, दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला विद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है — अर्थात यदि दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो बल एक-चौथाई रह जाता है। यह ठीक न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम जैसा ही गणितीय स्वरूप रखता है, परंतु दोनों में एक बड़ा अंतर है।

कूलॉम बल (विद्युत)
  • परिमाण गुरुत्वीय बल से लगभग 10³⁹ गुना अधिक
  • आकर्षण भी, प्रतिकर्षण भी — दोनों संभव
  • माध्यम पर निर्भर — परावैद्युत स्थिरांक (K) से प्रभावित
गुरुत्वीय बल
  • अत्यंत दुर्बल बल
  • केवल आकर्षण — प्रतिकर्षण असंभव
  • माध्यम से अप्रभावित

2.1 विद्युत क्षेत्र (Electric Field)

किसी आवेश के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें रखा गया कोई अन्य आवेश विद्युत बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है। विद्युत क्षेत्र रेखाएँ सदैव धनावेश से निकलकर ऋणावेश में प्रवेश करती हैं, कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं, तथा जहाँ रेखाएँ सघन (पास-पास) होती हैं वहाँ क्षेत्र की तीव्रता अधिक होती है।

📐 विद्युत क्षेत्र, फ्लक्स एवं गॉस का नियम — सूत्र

E = F/q = kQ/r² | मात्रक: न्यूटन/कूलॉम (N/C) या वोल्ट/मीटर (V/m)
विद्युत फ्लक्स: ΦE = E·A·cosθ
गॉस का नियम: ΦE = q/ε₀ (किसी बंद पृष्ठ से निकलने वाला कुल फ्लक्स)

गॉस का नियम स्थिर वैद्युतिकी का एक अत्यंत शक्तिशाली उपकरण है, क्योंकि यह अत्यधिक सममित आवेश-वितरणों (जैसे अनंत तार, समतल आवेशित चादर, या गोलीय आवेशित कोश) के विद्युत क्षेत्र की गणना को कूलॉम के नियम की तुलना में कहीं सरल बना देता है — इसमें केवल एक उपयुक्त काल्पनिक बंद पृष्ठ (गॉसीय पृष्ठ) चुनकर संलग्न कुल आवेश व फ्लक्स के बीच संबंध स्थापित किया जाता है।

💡 विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole)

जब बराबर परिमाण के दो विपरीत आवेश (+q तथा −q) एक छोटी दूरी (2l) पर स्थित हों, तो इस युग्म को विद्युत द्विध्रुव कहते हैं, तथा इसकी शक्ति द्विध्रुव आघूर्ण p=q×2l से मापी जाती है। जल का अणु (H₂O) एक प्राकृतिक विद्युत द्विध्रुव का उत्कृष्ट उदाहरण है — ऑक्सीजन परमाणु आंशिक ऋणावेशित तथा हाइड्रोजन परमाणु आंशिक धनावेशित होते हैं, यही कारण है कि जल एक उत्तम ध्रुवीय विलायक (Polar Solvent) की तरह व्यवहार करता है और अनेक पदार्थों को घोलने में सक्षम होता है।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
कूलॉम का नियमविद्युत क्षेत्रविद्युत फ्लक्सगॉस का नियमविद्युत द्विध्रुव
📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

3विद्युत विभव एवं धारिता (Electric Potential & Capacitance)

विद्युत विभव (V) उस कार्य को मापता है जो अनंत दूरी से एक इकाई धनावेश को किसी विशेष बिंदु तक लाने में करना पड़ता है — यह ठीक उसी प्रकार है जैसे गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु को एक निश्चित ऊँचाई तक उठाने में किए गए कार्य को मापती है। दो बिंदुओं के बीच विभव के अंतर को विभवांतर (Potential Difference) कहते हैं, जिसे ही सामान्य भाषा में "वोल्टेज" कहा जाता है।

📐 विद्युत विभव — सूत्र

V = kQ/r = W/q | मात्रक: वोल्ट (V) = जूल/कूलॉम (J/C)
विभवांतर: V = VA − VB
विद्युत ऊर्जा: W = qV

3.1 संधारित्र एवं धारिता (Capacitor & Capacitance)

धारिता किसी चालक की आवेश संग्रहीत करने की क्षमता को मापती है — जितनी अधिक धारिता, उतना ही अधिक आवेश किसी दिए गए विभव पर संग्रहीत किया जा सकता है। संधारित्र (Capacitor) एक ऐसी युक्ति है जो दो चालक प्लेटों के बीच एक कुचालक (परावैद्युत) माध्यम रखकर आवेश व ऊर्जा संग्रहीत करने के लिए विशेष रूप से बनाई जाती है।

📐 धारिता एवं ऊर्जा — सूत्र

C = Q/V | मात्रक: फैरड (F)
समांतर प्लेट संधारित्र: C = ε₀A/d (A=क्षेत्रफल, d=प्लेटों के बीच दूरी)
संचित ऊर्जा: U = ½CV² = Q²/(2C)
श्रेणी संयोजन: 1/Cs = 1/C₁+1/C₂ | समानांतर संयोजन: Cp = C₁+C₂

💡 कैमरा फ्लैश एवं डिफिब्रिलेटर में संधारित्र

कैमरे का फ्लैश जलाने के लिए एक बड़ी मात्रा में ऊर्जा अत्यंत कम समय (मिलीसेकंड) में मुक्त करनी होती है — बैटरी सीधे इतनी तीव्र गति से ऊर्जा नहीं दे सकती, इसलिए फ्लैश सर्किट में एक संधारित्र धीरे-धीरे बैटरी से चार्ज होता रहता है, और बटन दबाते ही यह संचित ऊर्जा एक साथ मुक्त होकर तीव्र चमक उत्पन्न करती है। ठीक इसी सिद्धांत पर अस्पताल का डिफिब्रिलेटर (Defibrillator) कार्य करता है, जो हृदयाघात की स्थिति में हृदय को पुनः सामान्य लय में लाने के लिए संधारित्र में संचित विद्युत ऊर्जा का एक तीव्र झटका (Shock) देता है।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
विद्युत विभवविभवांतरसंधारित्रधारिताफैरडपरावैद्युत
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

4धारा विद्युत (Current Electricity)

जब आवेश किसी चालक में निरंतर प्रवाहित होता है, तो इसे विद्युत धारा कहते हैं — यह प्रति एकांक समय में किसी अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित होने वाले आवेश की मात्रा है। परंपरागत रूप से धारा की दिशा धनावेश के प्रवाह की दिशा (यानी + से − की ओर) मानी जाती है, जबकि वास्तव में तार के भीतर इलेक्ट्रॉन इसके विपरीत दिशा (− से + की ओर) गति करते हैं।

📐 विद्युत धारा — सूत्र

I = Q/t | मात्रक: ऐम्पियर (A) = कूलॉम/सेकंड
1 ऐम्पियर = 6.25×10¹⁸ इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड प्रवाहित होने के बराबर
अपवाह वेग: vd = I/(nAe)

4.1 ओम का नियम (Ohm's Law)

जर्मन भौतिकशास्त्री जॉर्ज साइमन ओम ने बताया कि स्थिर ताप पर, किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है — यह अनुपात नियत रहता है, जिसे प्रतिरोध (R) कहते हैं। यह भौतिकी के सबसे मौलिक व व्यावहारिक नियमों में से एक है, जिस पर संपूर्ण विद्युत परिपथ विश्लेषण आधारित है।

📐 ओम का नियम — सूत्र

V = IR | R = V/I | I = V/R
प्रतिरोध का मात्रक: ओम (Ω) = वोल्ट/ऐम्पियर

ओमीय चालक (Ohmic)
  • ओम के नियम का पालन करते हैं
  • V-I ग्राफ एक सरल रेखा (Straight Line)
  • उदाहरण: धातुएँ (सामान्य ताप पर)
अनओमीय चालक (Non-Ohmic)
  • ओम के नियम का पालन नहीं करते
  • V-I ग्राफ वक्र (Curve)
  • उदाहरण: डायोड, बल्ब का टंगस्टन फिलामेंट, ट्रांजिस्टर

प्रतिरोध की उत्पत्ति चालक के भीतर स्वतंत्र इलेक्ट्रॉनों तथा स्थिर धनायनों के बीच होने वाले लगातार टकराव से होती है — जितना अधिक टकराव, उतना अधिक प्रतिरोध। सामान्यतः धातुओं में ताप बढ़ने पर परमाणुओं का कंपन तीव्र हो जाता है, जिससे टकराव भी बढ़ता है और प्रतिरोध बढ़ जाता है, परंतु अर्धचालकों व विद्युत-अपघट्यों में इसका ठीक विपरीत होता है — ताप बढ़ने पर अधिक इलेक्ट्रॉन मुक्त होकर चालकता बढ़ाते हैं, जिससे प्रतिरोध घट जाता है।

अतिचालकता (Superconductivity): कुछ विशेष धातुओं व मिश्र-धातुओं को जब एक अत्यंत निम्न, क्रांतिक ताप (Critical Temperature, Tc) तक ठंडा किया जाता है, तो उनका विद्युत प्रतिरोध पूर्णतः शून्य हो जाता है — इस अद्भुत परिघटना को अतिचालकता कहते हैं। पारे (Mercury) के लिए Tc=4.2 केल्विन है, जबकि YBCO जैसे उच्च-ताप अतिचालक पदार्थों के लिए Tc लगभग 93 केल्विन तक पहुँच जाता है। अतिचालकता का उपयोग MRI मशीनों के शक्तिशाली चुंबक व भविष्य की हाई-स्पीड मैग्लेव रेलगाड़ियों में होता है।
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
विद्युत धाराऐम्पियरओम का नियमप्रतिरोधओमीय चालकअनओमीय चालकअतिचालकता
📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

5प्रतिरोध एवं संयोजन (Resistance & Combination)

जब किसी विद्युत परिपथ में एक से अधिक प्रतिरोध जोड़े जाते हैं, तो उन्हें मुख्यतः दो प्रकार से जोड़ा जा सकता है — श्रेणी संयोजन (Series) व समानांतर संयोजन (Parallel), तथा दोनों का व्यवहार बिल्कुल भिन्न होता है।

विशेषताश्रेणी संयोजन (Series)समानांतर संयोजन (Parallel)
कुल प्रतिरोधRs = R₁+R₂+R₃ (बढ़ता है)1/Rp = 1/R₁+1/R₂ (घटता है)
धारासभी में समानभिन्न — I₁/I₂ = R₂/R₁
विभवांतरविभक्त होता है — V=V₁+V₂सभी में समान
यदि एक अवयव खुल जाएपूरा परिपथ टूट जाता हैशेष अवयव कार्य करते रहते हैं
उपयोगक्रिसमस बल्ब, LED स्ट्रिपघर की वायरिंग — पंखा व लाइट
💡 घर की वायरिंग समानांतर संयोजन में ही क्यों?

यदि घर के सभी उपकरण श्रेणी क्रम में जोड़े जाएँ, तो सभी में समान धारा प्रवाहित होगी, परंतु प्रत्येक उपकरण को अलग-अलग वोल्टेज मिलेगा — जो कि व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि हर उपकरण (बल्ब हो या पंखा) को पूर्ण 220V आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, यदि श्रेणी क्रम में एक भी बल्ब फ्यूज़ हो जाए, तो पूरा परिपथ टूट जाएगा और घर के सभी उपकरण बंद हो जाएँगे। इसीलिए घरेलू वायरिंग सदैव समानांतर संयोजन में की जाती है — जिससे हर उपकरण को समान 220V मिले, तथा एक उपकरण के बंद होने पर बाकी उपकरण सामान्य रूप से चलते रहें।

5.1 विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity)

📐 विशिष्ट प्रतिरोध — सूत्र

R = ρL/A (ρ = विशिष्ट प्रतिरोध, L = लंबाई, A = अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल)
विशिष्ट चालकता: σ = 1/ρ

पदार्थविशिष्ट प्रतिरोध ρ (Ω·m)वर्ग व उपयोग
चाँदी (Silver)1.6×10⁻⁸सर्वश्रेष्ठ चालक, परंतु महँगा
ताँबा (Copper)1.7×10⁻⁸वायरिंग में सर्वाधिक प्रयुक्त चालक
एल्युमिनियम2.8×10⁻⁸बिजली की लंबी लाइनों में (हल्का)
टंगस्टन5.6×10⁻⁸बल्ब का फिलामेंट (अत्यंत उच्च गलनांक 3422°C)
निक्रोम (Ni-Cr)1.0×10⁻⁶हीटर व टोस्टर — उच्च प्रतिरोधकता चाहिए
सिलिकॉन640अर्धचालक — IC चिप्स, सोलर सेल
काँच/रबर10¹⁰–10¹⁶कुचालक — इन्सुलेशन

टंगस्टन का उपयोग बल्ब के फिलामेंट में इसलिए किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक (3422°C) सभी धातुओं में सबसे अधिक है — जब धारा प्रवाहित होती है तो फिलामेंट लगभग 2500°C तक गर्म होकर श्वेत-प्रकाश उत्सर्जित करता है, फिर भी पिघलता नहीं। दूसरी ओर, निक्रोम (निकल-क्रोमियम मिश्र धातु) की उच्च प्रतिरोधकता तथा तापमान के साथ स्थिर व्यवहार इसे हीटर व टोस्टर जैसे उपकरणों के लिए आदर्श बनाता है, जहाँ नियंत्रित रूप से लगातार ऊष्मा उत्पन्न करनी होती है।

व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge): व्हीटस्टोन सेतु एक ऐसा विशेष परिपथ है जिसका उपयोग किसी अज्ञात प्रतिरोध का अत्यंत सटीक मान ज्ञात करने के लिए किया जाता है — चार प्रतिरोधों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि संतुलन की स्थिति में गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती, तथा उस संतुलन बिंदु पर P/Q = R/S का संबंध लागू होता है, जिससे अज्ञात प्रतिरोध की गणना की जा सकती है।
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
श्रेणी संयोजनसमानांतर संयोजनविशिष्ट प्रतिरोधविशिष्ट चालकताव्हीटस्टोन सेतु
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

6विद्युत शक्ति एवं ऊर्जा (Electric Power & Energy)

विद्युत शक्ति (Power) प्रति एकांक समय में व्यय होने वाली विद्युत ऊर्जा को मापती है, अर्थात यह बताती है कि कोई उपकरण कितनी तेज़ी से विद्युत ऊर्जा को अन्य रूपों (प्रकाश, ऊष्मा, गति) में परिवर्तित कर रहा है।

📐 विद्युत शक्ति एवं ऊर्जा — सूत्र

P = VI = I²R = V²/R | मात्रक: वाट (W) = जूल/सेकंड
1 अश्वशक्ति (HP) = 746 वाट
विद्युत ऊर्जा: E = P×t = VIt = I²Rt | मात्रक: जूल
1 यूनिट (kWh) = 1000 W × 3600 s = 3.6×10⁶ जूल

💡 बिजली का बिल कैसे बनता है?

बिजली विभाग जिस "यूनिट" के आधार पर बिल बनाता है, वह वास्तव में किलोवाट-घंटा (kWh) है, न कि जूल — क्योंकि जूल इतनी छोटी इकाई है कि दैनिक उपयोग की गणना में असुविधाजनक होगी। उदाहरण के लिए, एक 100 वाट का बल्ब यदि 10 घंटे जलाया जाए, तो यह ठीक 1 यूनिट विद्युत खर्च करेगा (100W × 10h ÷ 1000 = 1 kWh), जबकि एक 1000 वाट का एयर कंडीशनर केवल 1 घंटे में ही 1 यूनिट खर्च कर देगा — इसीलिए AC व हीटर जैसे उच्च-शक्ति उपकरण बिजली का बिल तेज़ी से बढ़ाते हैं।

6.1 जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating)

जब विद्युत धारा किसी प्रतिरोध से होकर गुज़रती है, तो इलेक्ट्रॉनों व परमाणुओं के बीच होने वाले टकराव के कारण विद्युत ऊर्जा का एक भाग ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है — इसी सिद्धांत को जूल का तापन नियम कहते हैं, जो इलेक्ट्रिक हीटर, प्रेस, टोस्टर, गीज़र तथा फ्यूज़ जैसे अनेक उपकरणों के कार्य करने का आधार है।

📐 जूल का तापन नियम — सूत्र

H = I²Rt (H = उत्पन्न ऊष्मा जूल में)

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
विद्युत शक्तिवाटअश्वशक्तिकिलोवाट-घंटायूनिटजूल का तापन नियम
📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

7कोशिका एवं बैटरी (Cell & Battery)

विद्युत कोशिका (Cell) एक ऐसी युक्ति है जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है, तथा परिपथ में धारा प्रवाहित करने के लिए आवश्यक विभवांतर उत्पन्न करती है। किसी कोशिका के सिरों का वह विभवांतर जो बिना कोई धारा प्रवाहित हुए मापा जाता है, विद्युत वाहक बल (EMF) कहलाता है — जबकि जब कोशिका धारा प्रवाहित कर रही होती है, तो उसके भीतरी प्रतिरोध (आंतरिक प्रतिरोध) के कारण कुछ विभव की हानि होती है, और वास्तविक टर्मिनल वोल्टेज EMF से कम प्राप्त होता है।

📐 EMF एवं आंतरिक प्रतिरोध — सूत्र

V = E − Ir (E=EMF, r=आंतरिक प्रतिरोध, V=टर्मिनल वोल्टेज)
I = E/(R+r)
श्रेणी संयोजन (n कोशिकाएँ): I = nE/(R+nr)
समानांतर संयोजन (n कोशिकाएँ): I = E/(R+r/n)

पुरानी या अधिक उपयोग की जा चुकी बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध बढ़ जाता है — यही कारण है कि पुरानी बैटरी से कम वोल्टेज व कमज़ोर प्रदर्शन प्राप्त होता है, भले ही उसका EMF लगभग वही रहे। अधिक EMF चाहिए तो कोशिकाओं को श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है (जैसे टॉर्च में 2-3 सेल श्रेणी में), जबकि कम आंतरिक प्रतिरोध व अधिक समय तक चलने वाली धारा चाहिए तो समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है।

कोशिका का प्रकारविशेषताउदाहरण
प्राथमिक कोशिका (Primary)एक बार उपयोग के बाद पुनः आवेशित नहीं की जा सकतीड्राई सेल (Leclanché), मरकरी सेल
द्वितीयक कोशिका (Secondary)पुनः आवेशित (Rechargeable) की जा सकती हैलेड-एसिड (कार बैटरी, 12V), Li-Ion (मोबाइल, 3.7V प्रति सेल)
ईंधन कोशिका (Fuel Cell)H₂+O₂ के संयोजन से सीधे विद्युत उत्पन्न करती है, 70-80% दक्षताअंतरिक्ष यान में उपयोग
🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
EMFआंतरिक प्रतिरोधटर्मिनल वोल्टेजप्राथमिक कोशिकाद्वितीयक कोशिकाईंधन कोशिका
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

8विद्युत धारा के प्रभाव (Effects of Electric Current)

विद्युत धारा अपने पीछे तीन प्रमुख भौतिक प्रभाव छोड़ती है — ऊष्मीय, रासायनिक तथा चुंबकीय — और इन्हीं तीनों प्रभावों पर आधुनिक जीवन के अधिकांश विद्युत उपकरण कार्य करते हैं।

8.1 ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect)

जूल के तापन नियम (H=I²Rt) पर आधारित यह प्रभाव इलेक्ट्रिक हीटर, प्रेस (आयरन), टोस्टर, गीज़र तथा वेल्डिंग मशीनों में उपयोग होता है — इन सभी में उच्च-प्रतिरोध तार (प्रायः निक्रोम) से धारा प्रवाहित कर जानबूझकर अधिकतम ऊष्मा उत्पन्न की जाती है।

8.2 रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect)

जब विद्युत धारा किसी विद्युत-अपघट्य (Electrolyte) द्रव से गुज़रती है, तो वह द्रव अपने रासायनिक घटकों में विघटित हो जाता है — इसे विद्युत-अपघटन (Electrolysis) कहते हैं। सबसे सामान्य उदाहरण जल के विद्युत-अपघटन का है, जिसमें जल हाइड्रोजन (कैथोड पर) व ऑक्सीजन (एनोड पर) गैसों में विघटित हो जाता है। इसी सिद्धांत का व्यावहारिक उपयोग विद्युत लेपन (Electroplating) में होता है, जहाँ किसी सस्ती धातु की वस्तु पर चाँदी, सोना या क्रोमियम की पतली परत चढ़ाई जाती है — गहनों व चम्मचों पर चाँदी चढ़ाने के लिए सिल्वर नाइट्रेट (AgNO₃) के घोल का उपयोग होता है, जिसमें वस्तु को कैथोड तथा शुद्ध चाँदी को एनोड बनाया जाता है।

📐 फैराडे का प्रथम नियम — सूत्र

m = ZIt (m = निक्षेपित द्रव्यमान, Z = विद्युत रासायनिक तुल्यांक)

8.3 चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect)

1820 में हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड ने एक ऐतिहासिक खोज की — उन्होंने पाया कि किसी धारावाही तार के निकट रखी कम्पास सुई विक्षेपित हो जाती है, अर्थात धारावाही चालक के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसी खोज ने विद्युत व चुंबकत्व के बीच के गहरे संबंध को उजागर किया, जिस पर आगे चलकर विद्युत मोटर, विद्युत जनित्र व विद्युत चुंबक जैसी युक्तियाँ आधारित हैं — इनका विस्तृत अध्ययन हम आगे "चुंबकत्व एवं विद्युत-चुंबकत्व" नामक अध्याय में करेंगे।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
ऊष्मीय प्रभावरासायनिक प्रभावविद्युत-अपघटनविद्युत लेपनचुंबकीय प्रभावओर्स्टेड
📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

9घरेलू विद्युत परिपथ (Domestic Electric Circuits)

हमारे घरों में विद्युत सुरक्षित व कुशलतापूर्वक पहुँचे, इसके लिए कुछ विशेष तकनीकी व्यवस्थाएँ की जाती हैं — दिशा (AC/DC) से लेकर सुरक्षा उपकरणों तक।

9.1 AC बनाम DC (Alternating vs Direct Current)

दिश धारा (DC)
  • एक ही दिशा में प्रवाहित होती है
  • स्रोत: बैटरी, सोलर सेल
  • लंबी दूरी में हानि (Losses) अधिक
प्रत्यावर्ती धारा (AC)
  • दिशा नियमित रूप से बदलती रहती है
  • भारत में: 220V, 50Hz (1 सेकंड में 50 बार दिशा बदलती है)
  • ट्रांसफार्मर से वोल्टेज बदलना आसान — लंबी दूरी संचरण में हानि कम

AC का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ यह है कि ट्रांसफार्मर की सहायता से इसका वोल्टेज आसानी से घटाया या बढ़ाया जा सकता है — बिजलीघर से उच्च वोल्टेज पर संचरण करने से तार में ऊष्मीय हानि (I²R) काफी कम हो जाती है, तथा घर पहुँचने से पहले इसे पुनः 220V तक घटा दिया जाता है। DC में यह सुविधा उपलब्ध नहीं, इसीलिए विश्वभर में घरेलू व औद्योगिक विद्युत आपूर्ति के लिए AC को प्राथमिकता दी जाती है।

9.2 सुरक्षा उपकरण (Safety Devices)

उपकरणकार्यविधि
फ्यूज़ (Fuse)टिन व सीसे का पतला मिश्र-धातु तार, जो निर्धारित सीमा से अधिक धारा प्रवाहित होने पर जूल-ऊष्मा से पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है; सदैव लाइव (हॉट) तार में श्रेणी क्रम में लगाया जाता है
MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर)फ्यूज़ का आधुनिक विकल्प — ओवरलोड या शॉर्ट सर्किट होने पर स्वतः "ट्रिप" हो जाता है, तथा समस्या ठीक होने के बाद इसे पुनः चालू (ON) किया जा सकता है, इसे बार-बार बदलने की आवश्यकता नहीं
ELCB/RCCBअर्थ लीकेज सर्किट ब्रेकर — जैसे ही किसी उपकरण से थोड़ी सी भी धारा (लगभग 30 मिलीऐम्पियर) पृथ्वी में रिसने लगती है, यह तुरंत परिपथ काट देता है, जिससे बिजली के झटके से जीवन-रक्षा होती है
भू-सम्पर्कन (Earthing)उपकरण के धात्विक बाहरी भाग को एक तार द्वारा पृथ्वी से जोड़ा जाता है — विद्युत रिसाव होने पर धारा हरे/पीले अर्थिंग तार से होकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी में चली जाती है, जिससे उपयोगकर्ता को झटका नहीं लगता
💡 शॉर्ट सर्किट एवं ओवरलोड में अंतर

शॉर्ट सर्किट तब होता है जब किसी कारणवश लाइव व न्यूट्रल तार सीधे आपस में जुड़ जाते हैं — इससे परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है, जिससे ओम के नियम (I=V/R) के अनुसार धारा अत्यंत उच्च मात्रा में प्रवाहित होने लगती है, जो आग लगने का प्रमुख कारण बन सकती है। दूसरी ओर, ओवरलोड तब होता है जब एक ही सॉकेट या परिपथ में अत्यधिक उपकरण एक साथ जोड़ दिए जाते हैं, जिससे कुल धारा तार की क्षमता से अधिक हो जाती है, और तार अत्यधिक गर्म होकर फ्यूज़ उड़ा देता है या MCB ट्रिप कर देता है — दोनों ही स्थितियों में सुरक्षा उपकरण समय रहते परिपथ को काटकर बड़ी दुर्घटना को रोक देते हैं।

🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
ACDCट्रांसफार्मरफ्यूज़MCBELCBअर्थिंगशॉर्ट सर्किटओवरलोड
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

10प्रमुख वैज्ञानिक एवं विद्युत में उनका योगदान

वैज्ञानिक (देश/काल)विद्युत में योगदान
चार्ल्स कूलॉम (फ्रांस, 1736–1806)कूलॉम का नियम (1785) — स्थिर आवेशों के बीच बल
एलेसांड्रो वोल्टा (इटली, 1745–1827)प्रथम विद्युत सेल (वोल्टाइक पाइल, 1800), वोल्ट मात्रक इन्हीं के नाम पर
आंद्रे-मैरी एम्पीयर (फ्रांस, 1775–1836)विद्युत-चुंबकत्व का गणितीय सिद्धांत, ऐम्पियर मात्रक
जॉर्ज साइमन ओम (जर्मनी, 1789–1854)ओम का नियम (1827) — V=IR
हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड (डेनमार्क, 1777–1851)धारावाही चालक का चुंबकीय प्रभाव (1820)
माइकल फैराडे (इंग्लैंड, 1791–1867)विद्युत-अपघटन के नियम, विद्युत-चुंबकीय प्रेरण (आगामी अध्याय में विस्तार से)
जेम्स प्रेस्कॉट जूल (इंग्लैंड, 1818–1889)जूल का तापन नियम H=I²Rt
गॉर्ज साइमन ओम के अतिरिक्त — गुस्ताव किरखॉफ (जर्मनी, 1824–1887)किरखॉफ के परिपथ नियम — जटिल परिपथों के विश्लेषण हेतु

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →
← अध्याय 5: ऊष्मा अध्याय 7: चुंबकत्व एवं विद्युत-चुंबकत्व →