🏬 अध्याय 22/34 — भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

उच्च न्यायालय

High Court | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. भारत में उच्च न्यायालय — परिचय, इतिहास एवं वर्तमान स्थिति
  2. राजस्थान उच्च न्यायालय — स्थापना, समितियाँ एवं ऐतिहासिक विकास
  3. जोधपुर मुख्यपीठ एवं जयपुर खण्डपीठ — जिलावार अधिकार-क्षेत्र
  4. संवैधानिक अनुच्छेद 214–231 — अनुच्छेद-वार सारांश
  5. न्यायाधीशों की नियुक्ति, योग्यता, वेतन, स्थानान्तरण एवं महाभियोग
  6. राजस्थान उच्च न्यायालय — मुख्य न्यायाधीशों की पूर्ण सूची (1949–वर्तमान)
  7. राजस्थान उच्च न्यायालय — महिला न्यायाधीश
  8. पाँच रिटें (Writs) — अनुच्छेद 226 — अर्थ, प्रयोग एवं सीमाएँ
  9. उच्च न्यायालय की अधिकारिता (Jurisdiction) एवं शक्तियाँ
  10. उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता | भारत के सभी 25 उच्च न्यायालय

1भारत में उच्च न्यायालय — परिचय, इतिहास एवं वर्तमान स्थिति

उच्च न्यायालय (High Court) भारत की न्याय-व्यवस्था की वह कड़ी है जो राज्य-स्तर पर न्याय का सर्वोच्च केन्द्र है। जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय देश का संवैधानिक शिखर है, उसी प्रकार प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय नागरिकों के मूल अधिकारों का अभिभावक, अधीनस्थ न्यायालयों का अधिपति एवं संवैधानिक समीक्षा का केन्द्र है।

उच्च न्यायालयगठन तिथिविशेषता
कलकत्ता उच्च न्यायालय2 जुलाई, 1862भारत का सबसे प्राचीन (Oldest) उच्च न्यायालय
बॉम्बे उच्च न्यायालय14 अगस्त, 1862वर्तमान में मुम्बई उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय15 अगस्त, 1862वर्तमान में चेन्नई उच्च न्यायालय
📖 नाम परिवर्तन (2016):

केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने 5 जुलाई, 2016 को बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता हाईकोर्ट के नाम बदलकर क्रमशः मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता हाईकोर्ट करने का निर्णय लिया।

🧠 याद करने की ट्रिक:

NGMA (नगमा) — न = नागालैण्ड, ग = गोवा, म = मिजोरम, A = अरुणाचल प्रदेश। ये 4 राज्य अपने-अपने निकटवर्ती उच्च न्यायालयों (जैसे गुवाहाटी, बॉम्बे) के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं।

⭐ महत्वपूर्ण तथ्य:

प्रथम महिला HC न्यायाधीश (भारत) : अन्ना चांडी — केरल उच्च न्यायालय। प्रथम महिला HC मुख्य न्यायाधीश : लीला सेठ — हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। चंडीगढ़, पंजाब व हरियाणा का संयुक्त हाईकोर्ट चंडीगढ़ में है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
भाग-6Art. 214-231Indian Councils Act 186125 HCNGMA ट्रिकOldest HC = कलकत्ताअमरावती2019

2राजस्थान उच्च न्यायालय — स्थापना, समितियाँ एवं ऐतिहासिक विकास

राजस्थान के एकीकरण (1948–1956) की ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान यह प्रश्न उठा कि नवनिर्मित राज्य की राजधानी एवं उच्च न्यायालय कहाँ स्थापित हो? इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए सरकार ने विशेषज्ञ समितियाँ गठित कीं।

◈ बी.आर. पटेल समिति (1949)

◈ ऐतिहासिक मील-पत्थर — एक दृष्टि

घटना / विकासतिथिविवरण
राजस्थान HC उद्घाटन29 अगस्त, 1949जोधपुर में; राजप्रमुख सवाई मानसिंह II द्वारा। प्रारम्भ में 4 खण्डपीठ — जयपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर।
राजस्थान "बी" श्रेणी का राज्य26 जनवरी, 1950संविधान लागू; न्यायाधीशों की संख्या घटकर 1 CJ + 6 = 7 हुई।
तीन खण्डपीठें समाप्त22 मई, 1952बीकानेर, कोटा, उदयपुर बैंच समाप्त। केवल जयपुर खण्डपीठ यथावत।
सत्यनारायण राव समिति रिपोर्ट26 फरवरी, 1958जयपुर खण्डपीठ भी बंद की गई — पूर्वी राजस्थान में भारी आक्रोश।
जयपुर पीठ की पुनर्स्थापना8 दिसम्बर, 1976राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा-51(2) के तहत राष्ट्रपति आदेश 1976 द्वारा।
जयपुर पीठ ने कार्य प्रारम्भ किया31 जनवरी, 1977विधिवत कार्य प्रारम्भ।
स्वीकृत न्यायाधीश संख्या — 50वर्ष 2015राजस्थान HC में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 50 की गई।
प्रथम वर्चुअल कोर्ट20 जुलाई, 2022CJ एस.एस. शिन्दे द्वारा ई-उद्घाटन।
📖 पी. सत्यनारायण राव समिति:

गठन : राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के बाद। अन्य सदस्य : बी.के. गुप्ता एवं वी. विश्वनाथन। सिफारिश : मुख्यपीठ जोधपुर में रहे, जयपुर खण्डपीठ समाप्त हो। परिणाम : पूर्वी राजस्थान में जन-आक्रोश; 1976 में जयपुर पीठ पुनः बहाल।

◈ राजस्थान HC — उल्लेखनीय तथ्य

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
29 Aug 1949कमलकांत वर्माजोधपुरबी.आर. पटेल समितिसत्यनारायण रावजयपुर खण्डपीठ197750 न्यायाधीशवर्चुअल कोर्ट

3जोधपुर मुख्यपीठ एवं जयपुर खण्डपीठ — जिलावार अधिकार-क्षेत्र

राजस्थान में कुल 36 जिला न्यायालय हैं जिनमें से 19 जोधपुर मुख्यपीठ के तथा 17 जयपुर खण्डपीठ के अंतर्गत आते हैं। जोधपुर में 2 और जयपुर में 3 जिला न्यायालय हैं।

⭐ विशेष:

बाड़मेर का जिला न्यायालय — जिला मुख्यालय बाड़मेर में नहीं, बल्कि बालोतरा में। नागौर का जिला न्यायालय — जिला मुख्यालय नागौर में नहीं, बल्कि मेड़ता में।

⚖ जोधपुर मुख्यपीठ (19 जिले)
  • बालोतरा (बाड़मेर)
  • बाँसवाड़ा
  • भीलवाड़ा
  • बीकानेर
  • चित्तौड़गढ़
  • चुरू
  • डूंगरपुर
  • गंगानगर
  • हनुमानगढ़
  • जैसलमेर
  • जालोर
  • जोधपुर (डिस्ट्रिक्ट)
  • जोधपुर (मेट्रोपोलिटन)
  • मेड़ता (नागौर)
  • पाली
  • प्रतापगढ़
  • राजसमंद
  • सिरोही
  • उदयपुर
⚖ जयपुर खण्डपीठ (17 जिले)
  • अजमेर
  • अलवर
  • बारां
  • भरतपुर
  • बूँदी
  • दौसा
  • धौलपुर
  • जयपुर महानगर-I
  • जयपुर मेट्रो
  • झालावाड़
  • झुंझुनूं
  • करौली
  • कोटा
  • सवाई माधोपुर
  • सीकर
  • टोंक
  • जयपुर महानगर-II
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4संवैधानिक अनुच्छेद 214–231 — अनुच्छेद-वार सारांश

भारतीय संविधान के भाग-6 में उच्च न्यायालयों से संबंधित 18 अनुच्छेद (214 से 231) समाहित हैं। प्रत्येक अनुच्छेद उच्च न्यायालय के किसी एक महत्वपूर्ण पहलू को परिभाषित करता है।

अनुच्छेदविषयमुख्य प्रावधान
214HC की स्थापनाप्रत्येक राज्य का एक उच्च न्यायालय होगा।
215अभिलेख न्यायालयHC एक अभिलेख न्यायालय (Court of Record) है। न्यायालय की अवमानना पर दण्ड।
216गठनमुख्य न्यायाधीश + अन्य न्यायाधीश। न्यायाधीशों की संख्या — राष्ट्रपति तय करते हैं।
217(i)नियुक्तिनियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं — कॉलेजियम की सिफारिश + राज्यपाल के परामर्श से।
217(ii)योग्यताभारत का नागरिक। 10 वर्ष का न्यायिक/अधिवक्ता अनुभव। कोई न्यूनतम आयु नहीं।
217(iii)सेवानिवृत्तिसेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष (15वें संशोधन 1963 से 60 से 62 हुई)।
218SC प्रावधान HC परउच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंध HC पर भी लागू।
219शपथशपथ राज्यपाल या उनके प्रतिनिधि द्वारा। प्रारूप — तीसरी अनुसूची में।
220वकालत पर प्रतिबंधसेवानिवृत्ति के बाद स्थायी CJ/न्यायाधीश — अपने HC के अलावा कहीं वकालत नहीं।
221वेतन एवं भत्तेवेतन संसद द्वारा (2nd Schedule)। CJ — ₹2,50,000; अन्य — ₹2,25,000 प्रतिमाह। वेतन राज्य की संचित निधि से; पेंशन भारत की संचित निधि से।
222स्थानान्तरणराष्ट्रपति एक HC से दूसरे HC में स्थानान्तरण (CJI के परामर्श से)।
223कार्यकारी CJपद रिक्त होने पर राष्ट्रपति किसी अन्य न्यायाधीश को कार्यवाहक CJ नियुक्त करते हैं।
224अपर एवं कार्यकारी न्यायाधीशकार्यभार बढ़ने पर 2 वर्ष से अधिक नहीं के लिए अपर न्यायाधीश।
224(A)सेवानिवृत्त CJ की पुनः नियुक्ति15वें संशोधन 1963 द्वारा जोड़ा गया। राष्ट्रपति की पूर्वसहमति से।
225अधिकारिताराज्य की सीमा तक। संसद परिवर्तित कर सकती है। राजस्व पर पुराना प्रतिबंध समाप्त।
226रिट की शक्ति5 रिटें — मूल अधिकार + अन्य विधिक अधिकार दोनों के लिए। SC (Art. 32) से व्यापक।
227अधीक्षण शक्तिHC अधीनस्थ सभी न्यायालयों व अधिकरणों पर पर्यवेक्षण। सशस्त्र बल न्यायालय अपवाद।
228मामलों का अंतरणसंवैधानिक प्रश्न वाले मामले HC अपने पास मँगाकर स्वयं निपटा सकता है।
229पदाधिकारी एवं व्ययCJ कर्मचारी नियुक्त कर सकता है। HC का व्यय राज्य की संचित निधि पर भारित।
230UT पर अधिकारितासंसद HC की अधिकारिता केन्द्रशासित प्रदेशों तक बढ़ा सकती है।
231दो+ राज्यों हेतु एक HC7वें संशोधन 1956 द्वारा। उदाहरण : गुवाहाटी HC — असम, अरुणाचल, नागालैण्ड, मिजोरम।
⚖ उच्च न्यायालय (Art. 226)
  • रिट — मूल अधिकार + अन्य विधिक अधिकार दोनों हेतु
  • रिट अधिकारिता — संवैधानिक अधिकार
  • रिट मान्य — केवल राज्य सीमा तक
  • सेवानिवृत्ति आयु — 62 वर्ष
  • वेतन — राज्य की संचित निधि से
  • सलाहकारी अधिकारिता — नहीं
  • संपत्ति के अधिकार हेतु भी रिट जारी कर सकता है
⚖ उच्चतम न्यायालय (Art. 32)
  • रिट — केवल मूल अधिकारों के हनन पर
  • रिट अधिकारिता — स्वयं एक मूल अधिकार
  • रिट मान्य — सम्पूर्ण भारत में
  • सेवानिवृत्ति आयु — 65 वर्ष
  • वेतन — भारत की संचित निधि से
  • सलाहकारी अधिकारिता — हाँ (Art. 143)
  • संपत्ति के अधिकार हेतु रिट नहीं

⚠️ वित्त आपातकाल में अपवाद: Art. 360(4)(ख) के अनुसार वित्तीय आपातकाल में न्यायाधीशों के वेतन-भत्तों में कटौती की जा सकती है — यही एकमात्र अपवाद है, अन्यथा नियुक्ति के बाद वेतन में अलाभकारी परिवर्तन नहीं।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
Art. 215Art. 217Art. 219Art. 221Art. 226Art. 227Art. 228Art. 231अभिलेख न्यायालयतृतीय अनुसूची

5न्यायाधीशों की नियुक्ति, योग्यता, वेतन, स्थानान्तरण एवं महाभियोग

उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में न्यायाधीशों की नियुक्ति, वेतन सुरक्षा एवं हटाने की प्रक्रिया में अनेक संवैधानिक सुरक्षाएँ प्रदान की गई हैं।

◈ नियुक्ति — कॉलेजियम प्रणाली (Art. 217)

📖 कॉलेजियम प्रणाली का विकास:

II जजेज केस (SC Advocates on Record Assn. v. Union of India, 1993) : कॉलेजियम = 1 CJI + 2 वरिष्ठ न्यायाधीश। III जजेज केस (1998) : वर्तमान स्वरूप — 1 CJI + 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश। कार्य : उच्च व उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति व स्थानान्तरण की सिफारिश करना।

◈ योग्यता (Art. 217-ii)

⭐ महत्वपूर्ण:

HC न्यायाधीश के लिए कोई न्यूनतम आयु सीमा का प्रावधान नहीं। SC के लिए "पारंगत विधिवेता (Distinguished Jurist)" वाला प्रावधान HC में नहीं है।

◈ वेतन एवं भत्ते (Art. 221)

पदवेतन (प्रतिमाह)स्रोत
HC मुख्य न्यायाधीश₹2,50,000राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of State)
HC अन्य न्यायाधीश₹2,25,000राज्य की संचित निधि
पेंशन (दोनों के लिए)अंतिम वेतन का 50%भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India)

◈ महाभियोग प्रक्रिया (न्यायाधीश जाँच अधिनियम 1968)

उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया समान है (Art. 124(4) के तहत)। हटाने के दो आधार — (1) सिद्धकदाचार (Proved Misbehaviour), (2) असमर्थता (Incapacity)।

1. प्रस्ताव : संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। लोकसभा में 100 सदस्यों के; राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक।

2. अध्यक्ष/सभापति प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।

3. प्रस्ताव स्वीकृति पर 3 सदस्यीय जाँच समिति : (क) SC का CJ या न्यायाधीश, (ख) HC का एक CJ, (ग) एक प्रख्यात न्यायविद।

4. दोष सिद्ध होने पर — दोनों सदनों में विशेष बहुमत (उपस्थित का 2/3 + कुल का बहुमत) से पारित।

5. राष्ट्रपति न्यायाधीश को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

⚠️ सावधान: संविधान में न्यायाधीशों के लिए "Removal" (हटाना) शब्द; राष्ट्रपति के लिए "Impeachment" (महाभियोग)। महाभियोग प्रक्रिया एक ही संसद सत्र में पूर्ण होनी चाहिए। अब तक किसी भी उच्च/उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को महाभियोग द्वारा नहीं हटाया गया।

न्यायाधीशन्यायालयवर्षपरिणाम
वी. रामास्वामीउच्चतम न्यायालय1992–93पारित नहीं हुआ
दीपक मिश्रा (CJI)उच्चतम न्यायालय2018पारित नहीं हुआ
पी.डी. दिनाकरणसिक्किम HC—पारित नहीं हुआ
सौमित्र सेनकलकत्ता HC—पारित नहीं हुआ
जे.बी. पर्दीवालागुजरात HC—पारित नहीं हुआ
नागार्जुन रेड्डीआन्ध्रप्रदेश HC—पारित नहीं हुआ
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
कॉलेजियमनियुक्ति62 वर्षमहाभियोग100/50 हस्ताक्षरसिद्धकदाचारRemovalII/III जजेज केसवेतन सुरक्षा

6राजस्थान उच्च न्यायालय — मुख्य न्यायाधीशों की पूर्ण सूची (1949–वर्तमान)

क्र.मुख्य न्यायाधीशकार्यकालविशेष
1न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा29.08.1949 – 24.01.1950प्रथम CJ; इलाहाबाद HC के पूर्व CJ
2न्यायमूर्ति कैलाश वांचू02.01.1951 – 10.08.1958सर्वाधिक कार्यकाल; बाद में SC CJI बने
3न्यायमूर्ति सरजू प्रसाद28.02.1959 – 10.10.1961—
4न्यायमूर्ति जे.एस. राणावत11.10.1961 – 31.05.1963—
5न्यायमूर्ति डी.एस. दवे01.06.1963 – 17.12.1968—
6न्यायमूर्ति डी.एम. भंडारी18.12.1968 – 15.12.1969—
7न्यायमूर्ति जे. नारायण16.12.1969 – 13.02.1973—
8न्यायमूर्ति बी.पी. बेरी14.02.1973 – 16.02.1975—
9न्यायमूर्ति पी.एन. सिंघल17.02.1975 – 05.11.1975बाद में SC न्यायाधीश बने
10न्यायमूर्ति वी.पी. त्यागी06.11.1975 – 27.12.1977—
11न्यायमूर्ति सी. होनैया27.04.1978 – 22.09.1978—
12न्यायमूर्ति सी.एम. लोढ़ा12.03.1979 – 09.07.1980—
13न्यायमूर्ति के.डी. शर्मा07.01.1981 – 22.10.1983—
14न्यायमूर्ति पी.के. बनर्जी23.10.1983 – 30.09.1985—
15न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता12.04.1986 – 31.07.1986—
16न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा01.09.1986 – 22.05.1989बाद में SC CJI बने
17न्यायमूर्ति के.सी. अग्रवाल15.04.1990 – 07.04.1994—
18न्यायमूर्ति जी.सी. मित्तल12.04.1994 – 03.03.1995—
19न्यायमूर्ति ए.पी. रावानी04.04.1995 – 10.09.1996—
20न्यायमूर्ति एम.जी. मुखर्जी19.09.1996 – 24.12.1997—
21न्यायमूर्ति शिवराज वी. पाटिल22.01.1999 – 14.03.2000बाद में SC न्यायाधीश बने
22न्यायमूर्ति डॉ. ए.आर. लक्ष्मणन29.05.2000 – 25.11.2001बाद में SC न्यायाधीश बने
23न्यायमूर्ति अरुण कुमार02.12.2001 – 02.10.2002बाद में SC न्यायाधीश बने
24न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह24.12.2002 – 22.10.2004—
25न्यायमूर्ति एस.एन. झा12.10.2005 – 15.06.2007—
26न्यायमूर्ति जे.एम. पांचाल16.09.2007 – 11.11.2007प्रथम कार्यवाहक CJ; SC न्यायाधीश बने
27न्यायमूर्ति नारायण राव05.01.2008 – 31.01.2009—
28न्यायमूर्ति दीपक वर्मा06.03.2009 – 10.05.2009बाद में SC न्यायाधीश बने
29न्यायमूर्ति जगदीश भल्ला10.08.2009 – 31.10.2010—
30न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा26.11.2010 – 31.12.2012बाद में SC न्यायाधीश बने
31न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय02.01.2013 – 05.08.2014बाद में SC न्यायाधीश बने
32न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी24.03.2015 – 21.08.2015—
33न्यायमूर्ति सतीश कुमार मित्तल05.03.2016 – 14.04.2016न्यूनतम कार्यकाल
34न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा14.05.2016 – 17.02.2017बाद में SC न्यायाधीश बने
35न्यायमूर्ति प्रदीप नन्दाजोग02.04.2017 – 06.04.2019—
36न्यायमूर्ति श्रीपति रविन्द्र भट्ट05.05.2019 – 23.09.2019बाद में SC न्यायाधीश बने
37न्यायमूर्ति इन्द्रजीत महान्ती06.10.2019 – 12.10.2021—
38न्यायमूर्ति अकील कुरैशी12.10.2021 – 06.03.2022—
39न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे21.06.2022 – 01.08.2022प्रथम वर्चुअल कोर्ट उद्घाटन
40न्यायमूर्ति पंकज मित्तल14.10.2022 – 05.02.2023बाद में SC न्यायाधीश बने
41न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जार्ज मसीह30.05.2023 – 09.11.2023—
42न्यायमूर्ति मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव06.02.2024 – वर्तमान42वें एवं वर्तमान CJ
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7राजस्थान उच्च न्यायालय — महिला न्यायाधीश

न्यायपालिका में लैंगिक समानता सुनिश्चित करना न्यायिक विविधता का महत्वपूर्ण पहलू है। राजस्थान उच्च न्यायालय में अब तक 13 महिला न्यायाधीश नियुक्त हो चुकी हैं। वर्तमान में 3 महिला न्यायाधीश कार्यरत हैं।

क्र.महिला न्यायाधीशस्थिति
1कुमारी कांता भटनागरप्रथम महिला न्यायाधीश (Rajasthan HC); अन्य HC में CJ बनीं
2मोहिनी कपूरपूर्व
3मीना वी. गोंबरपूर्व
4निशा गुप्तापूर्व
5बेला त्रिवेदीSC में प्रोन्नत
6ज्ञान सुधा मिश्राSC में प्रोन्नत
7जयश्री ठाकुरपूर्व
8निर्मलजीत कौरपूर्व
9प्रभा शर्मापूर्व
10सबीनाHP HC में स्थानान्तरित
11शोभा मेहतावर्तमान (कार्यरत)
12रेखा बोराणावर्तमान (कार्यरत)
13नुपूर भाटीवर्तमान (कार्यरत)

8पाँच रिटें (Writs) — अनुच्छेद 226 — अर्थ, प्रयोग एवं सीमाएँ

उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत न केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर बल्कि किसी भी अन्य विधिक अधिकार की रक्षा के लिए भी 5 प्रकार की रिटें जारी कर सकता है। इसे "अंतरिम राहत रिट (Interim Relief Writ)" भी कहते हैं। यह उच्चतम न्यायालय (Art. 32) की रिट-शक्ति से अधिक व्यापक है।

रिट 1 — बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)

रिट 2 — परमादेश (Mandamus)

रिट 3 — अधिकार पृच्छा (Quo Warranto)

रिट 4 — उत्प्रेषण (Certiorari)

रिट 5 — प्रतिषेध (Prohibition)

रिटअर्थविरुद्धनहीं किसके लिएप्रयोग
बंदी प्रत्यक्षीकरणसशरीर लाओसरकार + व्यक्तिदण्डित, निवारक नजरबंदीअवैध बंदी
परमादेशकर्तव्य निभाओसभी अधिकारी/निकायराष्ट्रपति, राज्यपाललोक कर्तव्य पालन
अधिकार पृच्छाअधिकार बताओसार्वजनिक पदनिजी पदअवैध पदग्रहण
उत्प्रेषणमँगा लोन्यायिक/अर्द्ध-न्यायिक—पूर्ण/लंबित दोनों
प्रतिषेधरोकोन्यायिक/अर्द्ध-न्यायिकप्रशासनिक एजेंसियाँकेवल लंबित मामलों में
⭐ महत्वपूर्ण:

संपत्ति का अधिकार (Art. 300A) अब वैधानिक अधिकार है। इसके लिए HC रिट जारी कर सकता है, लेकिन SC (Art. 32) नहीं — क्योंकि SC की रिट केवल मूल अधिकारों के लिए है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
Habeas CorpusMandamusQuo WarrantoCertiorariProhibitionArt. 226Art. 32मूल अधिकारविधिक अधिकारArt. 300A

9उच्च न्यायालय की अधिकारिता (Jurisdiction) एवं शक्तियाँ

उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायालय होने के नाते व्यापक एवं बहुआयामी न्यायिक शक्तियाँ धारण करता है। ये शक्तियाँ मूल, अपीलीय, पर्यवेक्षी एवं संवैधानिक — सभी क्षेत्रों में विस्तृत हैं।

1. प्रारम्भिक/मूल अधिकारिता (Original Jurisdiction) : राजस्व संग्रह, मूल अधिकार उल्लंघन, संसद/विधानसभा सदस्यों के निर्वाचन विवाद, वसीयत, तलाक, कम्पनी कानून तथा न्यायालय अवमानना के मामलों में सीधे HC में दायर होते हैं।

► विशेष : मूल अधिकार मामलों में HC के पास "समीपवर्ती अधिकारिता (Writ Jurisdiction)" है, पूर्ण "Original Jurisdiction" नहीं।

2. अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction) : जिला न्यायालयों के दीवानी व आपराधिक निर्णयों की HC में अपील। आपराधिक मामलों में 7 वर्ष से अधिक की सजा पर HC में अपील। राज्य के सभी Tribunals एवं केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के निर्णयों की अपील।

3. न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) : HC राज्य विधानमण्डल एवं केन्द्र सरकार दोनों के कानूनों की संवैधानिकता की जाँच कर सकता है। संविधान विरोधी कानून को शून्य (Void) घोषित कर सकता है।

4. रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) : अनुच्छेद 226 के तहत 5 प्रकार की रिटें जारी करने की व्यापक शक्ति।

5. अधीक्षण शक्ति (Superintendence — Art. 227) : HC राज्य में सभी न्यायालयों व अधिकरणों पर पर्यवेक्षण करता है। विवरण मँगाना, नियम बनाना, फीस-सारणी तय करना। (सशस्त्र बल न्यायालय इसके बाहर।)

6. अभिलेख न्यायालय (Art. 215) : HC के निर्णय साक्ष्य के रूप में मान्य। अवमानना पर दण्ड की शक्ति।

7. मामलों का अंतरण (Art. 228) : संवैधानिक प्रश्न वाले मामले HC अपने पास मँगाकर स्वयं निपटा सकता है।

⭐ महत्वपूर्ण:

सलाहकारी अधिकारिता (Advisory Jurisdiction) केवल उच्चतम न्यायालय को (Art. 143)। Special Leave Petition (SLP) केवल SC में, HC में नहीं। उच्च न्यायालय PIL (Public Interest Litigation) भी सुन सकता है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
मूल अधिकारिताअपीलीयन्यायिक पुनर्विलोकनWritSuperintendenceArt. 227CATPILअभिलेख न्यायालय

10उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता | भारत के सभी 25 उच्च न्यायालय

◈ उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता — संवैधानिक सुरक्षाएँ

संविधान-निर्माताओं ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आत्मा माना। HC को कार्यपालिका के दबाव से मुक्त रखने हेतु संविधान में अनेक सुरक्षाएँ दी गई हैं।

◈ भारत के सभी 25 उच्च न्यायालय — एक दृष्टि

क्र.उच्च न्यायालयस्थापनामुख्यपीठक्षेत्राधिकार
1कोलकाता1862कोलकातापश्चिम बंगाल, अण्डमान-निकोबार
2मुम्बई1862मुम्बईमहाराष्ट्र, गोवा, दादरा-नागर हवेली, दमन-दीव
3मद्रास1862चेन्नईतमिलनाडु, पुड्डुचेरी
4इलाहाबाद1866प्रयागराजउत्तर प्रदेश (लखनऊ खण्डपीठ)
5कर्नाटक1884बेंगलुरुकर्नाटक (2 सर्किल बैंच — धारवाड़, गुलबर्ग)
6पटना1916पटनाबिहार
7जम्मू-कश्मीर व लद्दाख1928श्रीनगर/जम्मूJ&K, लद्दाख
8मध्यप्रदेश1936जबलपुरमध्यप्रदेश (इंदौर, ग्वालियर खण्डपीठ)
9पंजाब व हरियाणा1947चंडीगढ़पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़
10गुवाहाटी1948गुवाहाटीअसम, नागालैण्ड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश
11ओडिशा1948कटकओडिशा
12राजस्थान1949जोधपुरराजस्थान (जयपुर खण्डपीठ)
13तेलंगाना1954हैदराबादतेलंगाना
14केरल1958एर्नाकुलमकेरल, लक्षद्वीप
15गुजरात1960अहमदाबादगुजरात
16दिल्ली1966दिल्लीदिल्ली (UT — अपना HC)
17हिमाचल प्रदेश1967शिमलाहिमाचल प्रदेश
18सिक्किम1975गंगटोकसिक्किम (न्यूनतम 3 न्यायाधीश)
19छत्तीसगढ़2000बिलासपुरछत्तीसगढ़
20उत्तराखण्ड2000नैनीतालउत्तराखण्ड
21झारखण्ड2000राँचीझारखण्ड
22मेघालय2013शिलाँगमेघालय
23मणिपुर2013इम्फालमणिपुर
24त्रिपुरा2013अगरतलात्रिपुरा
25आन्ध्रप्रदेश2019अमरावतीआन्ध्रप्रदेश (25वाँ व नवीनतम)
⭐ महत्वपूर्ण:

खण्डपीठ वाले 8 HC : गुवाहाटी, मुम्बई, कर्नाटक, मद्रास, कलकत्ता, मध्यप्रदेश, इलाहाबाद, राजस्थान। केवल कर्नाटक HC की 2 सर्किल खंडपीठें (धारवाड़ एवं गुलबर्ग)। अपना HC रखने वाले 2 UT : दिल्ली (1966) और जम्मू-कश्मीर (1928)।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
कॉलेजियमArt. 121Art. 220Art. 22125 HC8 खण्डपीठ HC2 UT HCकर्नाटक 2 सर्किल बैंच

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. राजस्थान उच्च न्यायालय — स्थापना 29 अगस्त, 1949, जोधपुर में। राजप्रमुख सवाई मानसिंह II द्वारा उद्घाटन। 2. प्रथम CJ — कमलकांत वर्मा। 42वें व वर्तमान CJ — मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव (06.02.2024 से)। 3. बी.आर. पटेल समिति (27 मार्च 1949) : जयपुर को राजधानी व जोधपुर को HC की सिफारिश। 4. जयपुर खण्डपीठ : 1958 में समाप्त, 8 दिसम्बर 1976 को राष्ट्रपति आदेश से पुनः स्थापित; 31 जनवरी 1977 से कार्यरत। 5. स्वीकृत न्यायाधीश — 50 (2015)। 36 जिला न्यायालय : 19 जोधपुर + 17 जयपुर। 6. अनुच्छेद 217 — नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, कॉलेजियम सिफारिश पर। सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष। 7. कॉलेजियम : III जजेज केस 1998 = 1 CJI + 4 वरिष्ठतम SC न्यायाधीश। 8. पाँच रिटें (Art. 226) : HC-SC तुलना — HC की रिट अधिकारिता SC से व्यापक (मूल + विधिक दोनों)। 9. 5 रिटें : बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण, प्रतिषेध। 10. Art. 215 — अभिलेख न्यायालय। Art. 227 — अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण। 11. महाभियोग : Removal शब्द (न्यायाधीश हेतु); 100/50 हस्ताक्षर; अब तक कोई नहीं हटाया। 12. NGMA ट्रिक — नागालैण्ड, गोवा, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश — इन 4 राज्यों का अपना HC नहीं। 13. प्रथम महिला HC न्यायाधीश (राजस्थान) — कुमारी कांता भटनागर। वर्तमान महिला न्यायाधीश — 3।

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