भारत में एकीकृत न्यायिक व्यवस्था है — शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, उसके नीचे उच्च न्यायालय, और फिर अधीनस्थ न्यायालय। यह व्यवस्था भारत सरकार अधिनियम 1935 से ली गई है। संविधान के भाग V में अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय की संगठन, स्वतंत्रता, अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियों का वर्णन है।
📘 Pre स्तर — संरचना, नियुक्ति, अधिकार क्षेत्र एवं महत्वपूर्ण तथ्य
विशेष कथन: Alladi Krishnaswami Ayyar (संविधान सभा के प्रारूपण समिति सदस्य): "भारत का सर्वोच्च न्यायालय विश्व के किसी भी सर्वोच्च न्यायालय से अधिक शक्तियाँ रखता है।"
| अधिनियम/वर्ष | CJI सहित कुल (बढ़ाकर) | परिवर्तन |
|---|---|---|
| मूल संविधान (अनुच्छेद 124) | 8 (1+7) | आरंभिक प्रावधान |
| Supreme Court (Number of Judges) Act, 1956 | 11 (1+10) | 7 से 10 |
| Amendment Act, 1960 | 14 (1+13) | 10 से 13 |
| Amendment Act, 1977 | 18 (1+17) | 13 से 17 |
| Amendment Act, 1986 | 26 (1+25) | 17 से 25 |
| Amendment Act, 2008 | 31 (1+30) | 25 से 30 |
| Amendment Act, 2019 | 34 (1+33) | 30 से 33 (वर्तमान) |
| वाद | वर्ष | निर्णय |
|---|---|---|
| प्रथम न्यायाधीश वाद (S.P. Gupta vs. UOI) | 1981 | "परामर्श" का अर्थ "सहमति" नहीं — केवल विचारों का आदान-प्रदान; कार्यपालिका को अधिक शक्ति |
| द्वितीय न्यायाधीश वाद (SC Advocates-on-Record vs. UOI) | 1993 | निर्णय पलटा — "परामर्श" = "सहमति"; CJI की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी; CJI 2 वरिष्ठतम न्यायाधीशों से सलाह लेगा; सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीश ही CJI बनेगा |
| तृतीय न्यायाधीश वाद (Presidential Reference) | 1998 | CJI को 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों का कॉलेजियम बनाना होगा; 2 के विरोध पर सिफारिश नहीं भेजी जाएगी; एकल CJI की राय बाध्यकारी नहीं |
| चतुर्थ न्यायाधीश वाद (SC Advocates-on-Record vs. UOI) | 2015 | NJAC (99वाँ संशोधन 2014) असंवैधानिक घोषित; कॉलेजियम व्यवस्था पुनः बहाल; NJAC से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरा |
NJAC: 99वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2014 एवं National Judicial Appointments Commission Act 2014 द्वारा कॉलेजियम की जगह NJAC बनाई गई। NJAC में CJI (अध्यक्ष), 2 वरिष्ठ SC न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री, 2 नागरिक शामिल थे। 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक घोषित किया।
ध्यान दें: संविधान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं है।
महत्वपूर्ण तथ्य: अब तक किसी भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को impeach नहीं किया गया। पहला प्रयास: न्यायमूर्ति V. Ramaswami (1991-93) — जाँच समिति ने दोषी पाया, किंतु लोकसभा में कांग्रेस के अनुपस्थित रहने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हुआ।
| प्रकार | नियुक्तिकर्ता | शर्त/अवसर |
|---|---|---|
| कार्यवाहक CJI (Acting CJI) | राष्ट्रपति | CJI का पद रिक्त हो; CJI अस्थायी अनुपस्थित हो; CJI कार्य करने में असमर्थ हो |
| तदर्थ न्यायाधीश (Ad hoc Judge) | CJI (राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से) | स्थायी न्यायाधीशों की कोरम नहीं; उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को नियुक्त; संबंधित HC के CJ से परामर्श |
| सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired Judge) | CJI (राष्ट्रपति की पूर्व सहमति + व्यक्ति की सहमति) | अस्थायी अवधि के लिए; SC या HC के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जो SC न्यायाधीश की योग्यता रखते हों |
सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक, मूल अधिकारों का गारंटर एवं संघीय न्यायालय है। इसकी स्वतंत्रता के लिए संविधान में 9 प्रमुख उपाय:
| उपाय | विवरण |
|---|---|
| 1. नियुक्ति का तरीका | राष्ट्रपति न्यायपालिका से परामर्श करके नियुक्ति — कार्यपालिका का एकतरफा नियंत्रण नहीं |
| 2. पद की सुरक्षा | निर्धारित प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है — राष्ट्रपति की इच्छा पर नहीं |
| 3. निश्चित सेवा शर्तें | नियुक्ति के बाद वेतन-भत्ते में अहितकारी परिवर्तन नहीं (वित्तीय आपातकाल को छोड़कर) |
| 4. भारत की संचित निधि पर व्यय | वेतन, भत्ते, पेंशन एवं प्रशासनिक व्यय — संचित निधि पर भारित; संसद में अमतदेय |
| 5. न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा वर्जित | संसद/राज्य विधानमंडल में न्यायाधीशों के कर्तव्य-निर्वहन पर चर्चा प्रतिबंधित (impeachment के दौरान छोड़कर) |
| 6. सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर रोक | सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत के किसी भी न्यायालय/प्राधिकरण में बहस/कार्य नहीं कर सकते |
| 7. न्यायालय की अवमानना की शक्ति | निर्णयों की आलोचना से न्यायालय की गरिमा की रक्षा — contempt power |
| 8. कर्मचारियों की नियुक्ति की स्वतंत्रता | CJI बिना कार्यपालिका हस्तक्षेप के अधिकारियों/कर्मचारियों की नियुक्ति करते हैं |
| 9. अधिकार क्षेत्र में कटौती नहीं | संसद SC के अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियों में कटौती नहीं कर सकती — केवल विस्तार कर सकती है |
सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को निम्न 8 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
► अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (Inter-State River Water Disputes Act 1956)
► वित्त आयोग को संदर्भित मामले
► प्री-कॉन्स्टिट्यूशन संधि/समझौते
► निजी नागरिकों के केंद्र/राज्य के विरुद्ध वाद
प्रथम वाद: 1961 में पश्चिम बंगाल ने Coal Bearing Areas Act 1957 की वैधता को चुनौती दी — प्रथम मूल अधिकार क्षेत्र का वाद। सर्वोच्च न्यायालय ने अधिनियम को वैध ठहराया।
सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनता है। यह 4 प्रकार का है:
| अपील का प्रकार | अनुच्छेद | मुख्य शर्त |
|---|---|---|
| (अ) संवैधानिक मामले | 132 | HC प्रमाणित करे कि पर्याप्त संवैधानिक व्याख्या का प्रश्न है |
| (ब) सिविल मामले | 133 | HC प्रमाणित करे: (i) सामान्य महत्व का कानूनी प्रश्न + (ii) SC के निर्णय की आवश्यकता; 30वें संशोधन 1972 ने ₹20,000 की मौद्रिक सीमा हटाई |
| (स) आपराधिक मामले | 134 | HC ने बरी को दोषी ठहराकर मृत्यु/आजीवन कारावास/10 वर्ष दिया हो; या HC ने अधीनस्थ न्यायालय से मामला लेकर मृत्यु/10 वर्ष दिया हो; या HC ने प्रमाणित किया हो |
| (द) विशेष अनुमति याचिका (SLP) | 136 | SC के विवेक पर निर्भर; किसी भी न्यायालय/ट्रिब्यूनल के किसी भी मामले में (सैन्य न्यायालय छोड़कर); इसे अधिकार के रूप में नहीं माँगा जा सकता |
SLP (Special Leave Petition): अनुच्छेद 136 SC को असाधारण एवं सर्वव्यापी अधिकार देता है। यह संवैधानिक, दीवानी, आपराधिक, कर, श्रम, राजस्व — किसी भी विषय पर हो सकता है। SC ने स्वयं कहा: यह विवेकाधीन शक्ति है, इसे सावधानी से प्रयोग करना होगा।
► (अ) सार्वजनिक महत्व का कानूनी/तथ्यात्मक प्रश्न — SC राय दे सकता है या मना कर सकता है
► (ब) प्री-कॉन्स्टिट्यूशन संधि/समझौते पर विवाद — SC को अनिवार्यतः राय देनी होगी
► 1991: SC ने निर्णय दिया कि वह स्वयं के साथ उच्च न्यायालयों, अधीनस्थ न्यायालयों एवं ट्रिब्यूनलों की अवमानना भी दंडित कर सकता है
| सिद्धांत | संक्षिप्त अर्थ |
|---|---|
| पृथक्करण सिद्धांत (Severability) | असंवैधानिक भाग को शेष से अलग कर वैध भाग बचाना |
| अधित्यजन सिद्धांत (Waiver) | व्यक्ति अपने मूल अधिकार का स्वेच्छा से त्याग कर सकता है |
| ग्रहण सिद्धांत (Eclipse) | संविधान से पहले का कानून जो असंवैधानिक हो, वह "ग्रहण" में; संशोधन से पुनः जीवित हो सकता है |
| प्रादेशिक संपर्क (Territorial Nexus) | राज्य का कानून राज्य सीमा से बाहर भी लागू हो सकता है यदि उचित संपर्क हो |
| सार एवं सत्व (Pith and Substance) | कानून का वास्तविक विषय देखकर विधायी शक्ति निर्धारित |
| रंग परिवर्तन (Colourable Legislation) | संसद/विधानसभा वह कार्य नहीं कर सकती जो वह करने का अधिकार नहीं रखती — भले ही दूसरे रूप में हो |
| निहित शक्तियाँ (Implied Powers) | स्पष्ट शक्तियों से निहित शक्तियाँ भी |
| आनुषंगिक शक्तियाँ (Incidental/Ancillary) | मुख्य विधायी विषय से संबंधित आनुषंगिक विषय |
| नज़ीर सिद्धांत (Precedent) | पूर्व निर्णय बाध्यकारी |
| अधिगृहीत क्षेत्र (Occupied Field) | जहाँ संसद ने कानून बनाया, राज्य उसी पर नहीं बना सकता |
| भावी अतिलंघन (Prospective Overruling) | पूर्व निर्णय पलटने का प्रभाव भविष्य से — पूर्व लेनदेन अप्रभावित |
| सुसंगत निर्वचन (Harmonious Construction) | दो प्रावधानों में संघर्ष — दोनों को प्रभावी बनाने की कोशिश |
| उदार व्याख्या (Liberal Interpretation) | मूल अधिकारों की व्यापक व्याख्या |
📗 Mains विश्लेषण — न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं भूमिका
1. सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन: 28 जनवरी 1950; Federal Court (1935) का उत्तराधिकारी 2. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 124-147, संविधान का भाग V 3. वर्तमान न्यायाधीश: 34 (1 CJI + 33); मूल संख्या 8 (1+7) — 1950 में 4. न्यायाधीशों की नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा; अन्य न्यायाधीशों में CJI से परामर्श अनिवार्य 5. CJI की नियुक्ति: सर्वाधिक वरिष्ठ SC न्यायाधीश (द्वितीय न्यायाधीश वाद 1993 के बाद) 6. NJAC: 99वाँ संशोधन 2014 — 2015 में असंवैधानिक घोषित; कॉलेजियम पुनः बहाल 7. SC न्यायाधीश की आयु सीमा: 65 वर्ष (HC न्यायाधीश की 62 वर्ष) 8. योग्यता: भारत का नागरिक + 5 वर्ष HC न्यायाधीश / 10 वर्ष HC अधिवक्ता / Distinguished Jurist 9. वेतन 2018: CJI ₹2.80 लाख, अन्य न्यायाधीश ₹2.50 लाख प्रतिमाह 10. पदच्युति: Judges Enquiry Act 1968; 100 LS / 50 RS सदस्यों का हस्ताक्षर; 3-सदस्यीय जाँच समिति 11. Justice V. Ramaswami (1991-93): प्रथम impeachment प्रयास; कांग्रेस के अनुपस्थित रहने से विफल 12. मूल क्षेत्राधिकार (Art 131): अनन्य; केंद्र-राज्य, राज्य-राज्य विवाद; अंतर-राज्यीय नदी विवाद बाहर 13. रिट शक्ति (Art 32): केवल मूल अधिकारों के लिए; HC (Art 226) की रिट शक्ति अधिक व्यापक 14. SLP (Art 136): किसी भी न्यायालय/ट्रिब्यूनल के विरुद्ध (सैन्य छोड़कर); विवेकाधीन 15. परामर्शदायी क्षेत्राधिकार (Art 143): राष्ट्रपति 15 बार भेज चुके हैं; SC की राय बाध्यकारी नहीं 16. अभिलेख न्यायालय (Art 129): Contempt Act 1971; 6 माह जेल या ₹2,000 जुर्माना 17. Constitution Bench: न्यूनतम 5 न्यायाधीश — संवैधानिक प्रश्नों के लिए 18. SC का कानून (Art 141) सभी भारतीय न्यायालयों पर बाध्यकारी 19. 13 संवैधानिक व्याख्या सिद्धांत: पृथक्करण, ग्रहण, पिथ एंड सब्स्टेंस, हार्मोनियस कंस्ट्रक्शन आदि 20. प्रथम न्यायाधीश वाद 1981: परामर्श ≠ सहमति; द्वितीय 1993: परामर्श = सहमति (पलटा)
Q1. सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन किस तिथि को हुआ? — 28 जनवरी 1950 Q2. सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान में कितने न्यायाधीश हैं? — 34 (1+33) Q3. NJAC को किस संवैधानिक संशोधन द्वारा स्थापित किया गया और इसे कब असंवैधानिक घोषित किया? — 99वाँ संशोधन 2014, असंवैधानिक 2015 (चतुर्थ न्यायाधीश वाद) Q4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए लोकसभा में कितने सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं? — 100 (राज्यसभा में 50) Q5. अनुच्छेद 143 के तहत परामर्शदायी क्षेत्राधिकार — क्या SC की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी है? — नहीं, केवल सलाहकारी Q6. भारत और अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में अंतर बताइए — भारत: परामर्शदायी अधिकार है; अमेरिका: नहीं। भारत: SLP की शक्ति; अमेरिका: नहीं Q7. Constitution Bench में न्यूनतम कितने न्यायाधीश होते हैं? — 5 Q8. Judges Enquiry Act किस वर्ष पारित हुआ? — 1968 Q9. सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार (Art 131) में किसे शामिल नहीं किया गया? — अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद Q10. पिथ एंड सब्स्टेंस सिद्धांत क्या है? — विधायी शक्ति निर्धारण के लिए कानून का वास्तविक विषय देखना Q11. न्यायमूर्ति V. Ramaswami के संदर्भ में कौन सा कथन सही है? — जाँच समिति ने दोषी पाया लेकिन कांग्रेस के अनुपस्थित रहने से LS में प्रस्ताव विफल
| वर्ष/अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 1935 | Federal Court की स्थापना (GOI Act 1935) |
| 28 जनवरी 1950 | सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन; Federal Court का उत्तराधिकारी |
| 1956 | न्यायाधीश संख्या 8 से 11; Supreme Court (Number of Judges) Act |
| 1960-77-86 | संख्या क्रमशः 14, 18, 26 की गई |
| 1961 | West Bengal vs Union (पहला मूल क्षेत्राधिकार वाद) |
| 1968 | Judges Enquiry Act — पदच्युति प्रक्रिया |
| 1971 | Contempt of Courts Act (6 माह जेल / ₹2000 जुर्माना) |
| 1972 | 30वाँ संशोधन — SLP में ₹20,000 की मौद्रिक सीमा समाप्त |
| 1973 | A.N. Ray: वरिष्ठता परंपरा का पहला उल्लंघन (Kesavananda के बाद) |
| 1977 | M.U. Beg: H.R. Khanna को दरकिनार (ADM Jabalpur dissent के बाद) |
| 1981 | प्रथम न्यायाधीश वाद — परामर्श ≠ सहमति |
| 1991-93 | Justice V. Ramaswami — पहला impeachment प्रयास; विफल |
| 1993 | द्वितीय न्यायाधीश वाद — कॉलेजियम स्थापित; परामर्श = सहमति; सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीश = CJI |
| 1998 | तृतीय न्यायाधीश वाद — 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों का कॉलेजियम |
| 2008 | न्यायाधीश संख्या 26 से 31 |
| 2014 | 99वाँ संशोधन + NJAC Act — कॉलेजियम की जगह NJAC |
| 2015 | चतुर्थ न्यायाधीश वाद — NJAC असंवैधानिक; कॉलेजियम पुनः बहाल |
| 2018 | CJI वेतन ₹1L → ₹2.80L; अन्य न्यायाधीश ₹90,000 → ₹2.50L |
| 2019 | न्यायाधीश संख्या 31 से 34 — वर्तमान |
| अनुच्छेद 124-147 | सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित समस्त प्रावधान — भाग V |
| अनुच्छेद 131 | मूल क्षेत्राधिकार (केंद्र-राज्य विवाद) |
| अनुच्छेद 32 | रिट अधिकार — "संविधान की आत्मा" (Dr. Ambedkar) |
| अनुच्छेद 136 | Special Leave Petition (SLP) |
| अनुच्छेद 143 | परामर्शदायी क्षेत्राधिकार (15 संदर्भ अब तक) |
| अनुच्छेद 141 | SC का कानून सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी |