⚖️ अध्याय 21/34 — भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

सर्वोच्च न्यायालय

Supreme Court of India | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में

    भारत में एकीकृत न्यायिक व्यवस्था है — शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय, उसके नीचे उच्च न्यायालय, और फिर अधीनस्थ न्यायालय। यह व्यवस्था भारत सरकार अधिनियम 1935 से ली गई है। संविधान के भाग V में अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय की संगठन, स्वतंत्रता, अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियों का वर्णन है।

    📘 Pre स्तर — संरचना, नियुक्ति, अधिकार क्षेत्र एवं महत्वपूर्ण तथ्य

    1. परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    विशेष कथन: Alladi Krishnaswami Ayyar (संविधान सभा के प्रारूपण समिति सदस्य): "भारत का सर्वोच्च न्यायालय विश्व के किसी भी सर्वोच्च न्यायालय से अधिक शक्तियाँ रखता है।"

    2. संरचना एवं न्यायाधीशों की नियुक्ति

    न्यायाधीशों की संख्या का ऐतिहासिक विकास

    अधिनियम/वर्षCJI सहित कुल (बढ़ाकर)परिवर्तन
    मूल संविधान (अनुच्छेद 124)8 (1+7)आरंभिक प्रावधान
    Supreme Court (Number of Judges) Act, 195611 (1+10)7 से 10
    Amendment Act, 196014 (1+13)10 से 13
    Amendment Act, 197718 (1+17)13 से 17
    Amendment Act, 198626 (1+25)17 से 25
    Amendment Act, 200831 (1+30)25 से 30
    Amendment Act, 201934 (1+33)30 से 33 (वर्तमान)

    नियुक्ति प्रक्रिया

    न्यायाधीश नियुक्ति विवाद — Judges Cases (कॉलेजियम व्यवस्था)

    वादवर्षनिर्णय
    प्रथम न्यायाधीश वाद (S.P. Gupta vs. UOI)1981"परामर्श" का अर्थ "सहमति" नहीं — केवल विचारों का आदान-प्रदान; कार्यपालिका को अधिक शक्ति
    द्वितीय न्यायाधीश वाद (SC Advocates-on-Record vs. UOI)1993निर्णय पलटा — "परामर्श" = "सहमति"; CJI की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी; CJI 2 वरिष्ठतम न्यायाधीशों से सलाह लेगा; सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीश ही CJI बनेगा
    तृतीय न्यायाधीश वाद (Presidential Reference)1998CJI को 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों का कॉलेजियम बनाना होगा; 2 के विरोध पर सिफारिश नहीं भेजी जाएगी; एकल CJI की राय बाध्यकारी नहीं
    चतुर्थ न्यायाधीश वाद (SC Advocates-on-Record vs. UOI)2015NJAC (99वाँ संशोधन 2014) असंवैधानिक घोषित; कॉलेजियम व्यवस्था पुनः बहाल; NJAC से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरा

    NJAC: 99वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2014 एवं National Judicial Appointments Commission Act 2014 द्वारा कॉलेजियम की जगह NJAC बनाई गई। NJAC में CJI (अध्यक्ष), 2 वरिष्ठ SC न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री, 2 नागरिक शामिल थे। 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे असंवैधानिक घोषित किया।

    CJI की नियुक्ति की परंपरा

    3. योग्यता, शपथ एवं वेतन

    नियुक्ति के लिए योग्यता

    1. भारत का नागरिक होना आवश्यक

    2. (अ) उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में 5 वर्ष; OR (ब) उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में 10 वर्ष; OR (स) राष्ट्रपति की राय में विशिष्ट विधिवेत्ता (Distinguished Jurist)

    ध्यान दें: संविधान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं है।

    वेतन एवं भत्ते

    4. कार्यकाल एवं पदच्युति

    पदच्युति प्रक्रिया — Judges Enquiry Act 1968

    1. हटाने का प्रस्ताव: लोकसभा में 100 सदस्य OR राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर

    2. स्पीकर/सभापति प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं

    3. स्वीकार होने पर: 3 सदस्यीय जाँच समिति गठन — (अ) SC का CJI या न्यायाधीश + (ब) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश + (स) विशिष्ट विधिवेत्ता

    4. दोषी पाए जाने पर: प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से पारित (कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित एवं मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत)

    5. राष्ट्रपति को संबोधन प्रस्तुत → राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करता है

    महत्वपूर्ण तथ्य: अब तक किसी भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को impeach नहीं किया गया। पहला प्रयास: न्यायमूर्ति V. Ramaswami (1991-93) — जाँच समिति ने दोषी पाया, किंतु लोकसभा में कांग्रेस के अनुपस्थित रहने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हुआ।

    5. कार्यवाहक, तदर्थ एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश

    प्रकारनियुक्तिकर्ताशर्त/अवसर
    कार्यवाहक CJI (Acting CJI)राष्ट्रपतिCJI का पद रिक्त हो; CJI अस्थायी अनुपस्थित हो; CJI कार्य करने में असमर्थ हो
    तदर्थ न्यायाधीश (Ad hoc Judge)CJI (राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से)स्थायी न्यायाधीशों की कोरम नहीं; उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को नियुक्त; संबंधित HC के CJ से परामर्श
    सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired Judge)CJI (राष्ट्रपति की पूर्व सहमति + व्यक्ति की सहमति)अस्थायी अवधि के लिए; SC या HC के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जो SC न्यायाधीश की योग्यता रखते हों

    6. सीट एवं कार्यप्रणाली

    7. सर्वोच्च न्यायालय की स्वतंत्रता के संवैधानिक उपाय

    सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक, मूल अधिकारों का गारंटर एवं संघीय न्यायालय है। इसकी स्वतंत्रता के लिए संविधान में 9 प्रमुख उपाय:

    उपायविवरण
    1. नियुक्ति का तरीकाराष्ट्रपति न्यायपालिका से परामर्श करके नियुक्ति — कार्यपालिका का एकतरफा नियंत्रण नहीं
    2. पद की सुरक्षानिर्धारित प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है — राष्ट्रपति की इच्छा पर नहीं
    3. निश्चित सेवा शर्तेंनियुक्ति के बाद वेतन-भत्ते में अहितकारी परिवर्तन नहीं (वित्तीय आपातकाल को छोड़कर)
    4. भारत की संचित निधि पर व्ययवेतन, भत्ते, पेंशन एवं प्रशासनिक व्यय — संचित निधि पर भारित; संसद में अमतदेय
    5. न्यायाधीशों के आचरण पर चर्चा वर्जितसंसद/राज्य विधानमंडल में न्यायाधीशों के कर्तव्य-निर्वहन पर चर्चा प्रतिबंधित (impeachment के दौरान छोड़कर)
    6. सेवानिवृत्ति के बाद वकालत पर रोकसेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत के किसी भी न्यायालय/प्राधिकरण में बहस/कार्य नहीं कर सकते
    7. न्यायालय की अवमानना की शक्तिनिर्णयों की आलोचना से न्यायालय की गरिमा की रक्षा — contempt power
    8. कर्मचारियों की नियुक्ति की स्वतंत्रताCJI बिना कार्यपालिका हस्तक्षेप के अधिकारियों/कर्मचारियों की नियुक्ति करते हैं
    9. अधिकार क्षेत्र में कटौती नहींसंसद SC के अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियों में कटौती नहीं कर सकती — केवल विस्तार कर सकती है

    8. अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियाँ

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को निम्न 8 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

    (1) मूल अधिकार क्षेत्र — Original Jurisdiction (अनुच्छेद 131)

    मूल क्षेत्राधिकार का विस्तार नहीं:

    ► अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (Inter-State River Water Disputes Act 1956)

    ► वित्त आयोग को संदर्भित मामले

    ► प्री-कॉन्स्टिट्यूशन संधि/समझौते

    ► निजी नागरिकों के केंद्र/राज्य के विरुद्ध वाद

    प्रथम वाद: 1961 में पश्चिम बंगाल ने Coal Bearing Areas Act 1957 की वैधता को चुनौती दी — प्रथम मूल अधिकार क्षेत्र का वाद। सर्वोच्च न्यायालय ने अधिनियम को वैध ठहराया।

    (2) रिट अधिकार क्षेत्र — Writ Jurisdiction (अनुच्छेद 32)

    (3) अपीलीय अधिकार क्षेत्र — Appellate Jurisdiction

    सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनता है। यह 4 प्रकार का है:

    अपील का प्रकारअनुच्छेदमुख्य शर्त
    (अ) संवैधानिक मामले132HC प्रमाणित करे कि पर्याप्त संवैधानिक व्याख्या का प्रश्न है
    (ब) सिविल मामले133HC प्रमाणित करे: (i) सामान्य महत्व का कानूनी प्रश्न + (ii) SC के निर्णय की आवश्यकता; 30वें संशोधन 1972 ने ₹20,000 की मौद्रिक सीमा हटाई
    (स) आपराधिक मामले134HC ने बरी को दोषी ठहराकर मृत्यु/आजीवन कारावास/10 वर्ष दिया हो; या HC ने अधीनस्थ न्यायालय से मामला लेकर मृत्यु/10 वर्ष दिया हो; या HC ने प्रमाणित किया हो
    (द) विशेष अनुमति याचिका (SLP)136SC के विवेक पर निर्भर; किसी भी न्यायालय/ट्रिब्यूनल के किसी भी मामले में (सैन्य न्यायालय छोड़कर); इसे अधिकार के रूप में नहीं माँगा जा सकता

    SLP (Special Leave Petition): अनुच्छेद 136 SC को असाधारण एवं सर्वव्यापी अधिकार देता है। यह संवैधानिक, दीवानी, आपराधिक, कर, श्रम, राजस्व — किसी भी विषय पर हो सकता है। SC ने स्वयं कहा: यह विवेकाधीन शक्ति है, इसे सावधानी से प्रयोग करना होगा।

    (4) परामर्शदायी अधिकार क्षेत्र — Advisory Jurisdiction (अनुच्छेद 143)

    ► (अ) सार्वजनिक महत्व का कानूनी/तथ्यात्मक प्रश्न — SC राय दे सकता है या मना कर सकता है

    ► (ब) प्री-कॉन्स्टिट्यूशन संधि/समझौते पर विवाद — SC को अनिवार्यतः राय देनी होगी

    (5) अभिलेख न्यायालय — Court of Record (अनुच्छेद 129)

    ► 1991: SC ने निर्णय दिया कि वह स्वयं के साथ उच्च न्यायालयों, अधीनस्थ न्यायालयों एवं ट्रिब्यूनलों की अवमानना भी दंडित कर सकता है

    (6) न्यायिक पुनरावलोकन — Judicial Review

    (7) पुनर्विलोकन अधिकार क्षेत्र — Review Jurisdiction (अनुच्छेद 137)

    (8) संवैधानिक व्याख्या एवं अन्य शक्तियाँ

    सिद्धांतसंक्षिप्त अर्थ
    पृथक्करण सिद्धांत (Severability)असंवैधानिक भाग को शेष से अलग कर वैध भाग बचाना
    अधित्यजन सिद्धांत (Waiver)व्यक्ति अपने मूल अधिकार का स्वेच्छा से त्याग कर सकता है
    ग्रहण सिद्धांत (Eclipse)संविधान से पहले का कानून जो असंवैधानिक हो, वह "ग्रहण" में; संशोधन से पुनः जीवित हो सकता है
    प्रादेशिक संपर्क (Territorial Nexus)राज्य का कानून राज्य सीमा से बाहर भी लागू हो सकता है यदि उचित संपर्क हो
    सार एवं सत्व (Pith and Substance)कानून का वास्तविक विषय देखकर विधायी शक्ति निर्धारित
    रंग परिवर्तन (Colourable Legislation)संसद/विधानसभा वह कार्य नहीं कर सकती जो वह करने का अधिकार नहीं रखती — भले ही दूसरे रूप में हो
    निहित शक्तियाँ (Implied Powers)स्पष्ट शक्तियों से निहित शक्तियाँ भी
    आनुषंगिक शक्तियाँ (Incidental/Ancillary)मुख्य विधायी विषय से संबंधित आनुषंगिक विषय
    नज़ीर सिद्धांत (Precedent)पूर्व निर्णय बाध्यकारी
    अधिगृहीत क्षेत्र (Occupied Field)जहाँ संसद ने कानून बनाया, राज्य उसी पर नहीं बना सकता
    भावी अतिलंघन (Prospective Overruling)पूर्व निर्णय पलटने का प्रभाव भविष्य से — पूर्व लेनदेन अप्रभावित
    सुसंगत निर्वचन (Harmonious Construction)दो प्रावधानों में संघर्ष — दोनों को प्रभावी बनाने की कोशिश
    उदार व्याख्या (Liberal Interpretation)मूल अधिकारों की व्यापक व्याख्या

    अन्य महत्वपूर्ण शक्तियाँ

    9. भारत बनाम अमेरिका — सर्वोच्च न्यायालय तुलना

    भारत का सर्वोच्च न्यायालय
    • मूल क्षेत्राधिकार — केवल संघीय विवाद
    • अपीलीय — संवैधानिक, दीवानी, आपराधिक, SLP
    • परामर्शदायी अधिकार क्षेत्र है (अनुच्छेद 143)
    • न्यायिक पुनरावलोकन सीमित
    • "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" (Procedure Established by Law)
    • संसद SC का अधिकार क्षेत्र बढ़ा सकती है
    • एकीकृत न्यायव्यवस्था — राज्य HC पर पर्यवेक्षण
    • SLP की असाधारण शक्ति (अनुच्छेद 136)
    अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय
    • मूल क्षेत्राधिकार — संघीय + नौसैनिक, राजदूत आदि
    • अपीलीय — केवल संवैधानिक मामले
    • परामर्शदायी अधिकार क्षेत्र नहीं
    • न्यायिक पुनरावलोकन अत्यंत व्यापक
    • "उचित प्रक्रिया" (Due Process of Law)
    • अधिकार क्षेत्र संविधान तक सीमित
    • द्विस्तरीय (Federal + State) न्यायव्यवस्था
    • ऐसी विवेकाधीन शक्ति नहीं

    📗 Mains विश्लेषण — न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं भूमिका

    🎯 कॉलेजियम बनाम NJAC — न्यायपालिका नियुक्ति विमर्श (Mains विश्लेषण)
    🎯 न्यायिक पुनरावलोकन — लोकतंत्र का रक्षक या विधायिका पर अतिक्रमण? (Mains विश्लेषण)
    🎯 परामर्शदायी अधिकार क्षेत्र — महत्व एवं सीमाएँ (Mains विश्लेषण)
    🎯 न्यायपालिका की स्वतंत्रता — वर्तमान चुनौतियाँ (Mains विश्लेषण)

    ★ परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य ★

    1. सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन: 28 जनवरी 1950; Federal Court (1935) का उत्तराधिकारी 2. संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 124-147, संविधान का भाग V 3. वर्तमान न्यायाधीश: 34 (1 CJI + 33); मूल संख्या 8 (1+7) — 1950 में 4. न्यायाधीशों की नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा; अन्य न्यायाधीशों में CJI से परामर्श अनिवार्य 5. CJI की नियुक्ति: सर्वाधिक वरिष्ठ SC न्यायाधीश (द्वितीय न्यायाधीश वाद 1993 के बाद) 6. NJAC: 99वाँ संशोधन 2014 — 2015 में असंवैधानिक घोषित; कॉलेजियम पुनः बहाल 7. SC न्यायाधीश की आयु सीमा: 65 वर्ष (HC न्यायाधीश की 62 वर्ष) 8. योग्यता: भारत का नागरिक + 5 वर्ष HC न्यायाधीश / 10 वर्ष HC अधिवक्ता / Distinguished Jurist 9. वेतन 2018: CJI ₹2.80 लाख, अन्य न्यायाधीश ₹2.50 लाख प्रतिमाह 10. पदच्युति: Judges Enquiry Act 1968; 100 LS / 50 RS सदस्यों का हस्ताक्षर; 3-सदस्यीय जाँच समिति 11. Justice V. Ramaswami (1991-93): प्रथम impeachment प्रयास; कांग्रेस के अनुपस्थित रहने से विफल 12. मूल क्षेत्राधिकार (Art 131): अनन्य; केंद्र-राज्य, राज्य-राज्य विवाद; अंतर-राज्यीय नदी विवाद बाहर 13. रिट शक्ति (Art 32): केवल मूल अधिकारों के लिए; HC (Art 226) की रिट शक्ति अधिक व्यापक 14. SLP (Art 136): किसी भी न्यायालय/ट्रिब्यूनल के विरुद्ध (सैन्य छोड़कर); विवेकाधीन 15. परामर्शदायी क्षेत्राधिकार (Art 143): राष्ट्रपति 15 बार भेज चुके हैं; SC की राय बाध्यकारी नहीं 16. अभिलेख न्यायालय (Art 129): Contempt Act 1971; 6 माह जेल या ₹2,000 जुर्माना 17. Constitution Bench: न्यूनतम 5 न्यायाधीश — संवैधानिक प्रश्नों के लिए 18. SC का कानून (Art 141) सभी भारतीय न्यायालयों पर बाध्यकारी 19. 13 संवैधानिक व्याख्या सिद्धांत: पृथक्करण, ग्रहण, पिथ एंड सब्स्टेंस, हार्मोनियस कंस्ट्रक्शन आदि 20. प्रथम न्यायाधीश वाद 1981: परामर्श ≠ सहमति; द्वितीय 1993: परामर्श = सहमति (पलटा)

    📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 📝

    Q1. सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन किस तिथि को हुआ? — 28 जनवरी 1950 Q2. सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान में कितने न्यायाधीश हैं? — 34 (1+33) Q3. NJAC को किस संवैधानिक संशोधन द्वारा स्थापित किया गया और इसे कब असंवैधानिक घोषित किया? — 99वाँ संशोधन 2014, असंवैधानिक 2015 (चतुर्थ न्यायाधीश वाद) Q4. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए लोकसभा में कितने सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं? — 100 (राज्यसभा में 50) Q5. अनुच्छेद 143 के तहत परामर्शदायी क्षेत्राधिकार — क्या SC की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी है? — नहीं, केवल सलाहकारी Q6. भारत और अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में अंतर बताइए — भारत: परामर्शदायी अधिकार है; अमेरिका: नहीं। भारत: SLP की शक्ति; अमेरिका: नहीं Q7. Constitution Bench में न्यूनतम कितने न्यायाधीश होते हैं? — 5 Q8. Judges Enquiry Act किस वर्ष पारित हुआ? — 1968 Q9. सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार (Art 131) में किसे शामिल नहीं किया गया? — अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद Q10. पिथ एंड सब्स्टेंस सिद्धांत क्या है? — विधायी शक्ति निर्धारण के लिए कानून का वास्तविक विषय देखना Q11. न्यायमूर्ति V. Ramaswami के संदर्भ में कौन सा कथन सही है? — जाँच समिति ने दोषी पाया लेकिन कांग्रेस के अनुपस्थित रहने से LS में प्रस्ताव विफल

    📅 कालरेखा — सर्वोच्च न्यायालय का विकास

    वर्ष/अनुच्छेदविषय
    1935Federal Court की स्थापना (GOI Act 1935)
    28 जनवरी 1950सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन; Federal Court का उत्तराधिकारी
    1956न्यायाधीश संख्या 8 से 11; Supreme Court (Number of Judges) Act
    1960-77-86संख्या क्रमशः 14, 18, 26 की गई
    1961West Bengal vs Union (पहला मूल क्षेत्राधिकार वाद)
    1968Judges Enquiry Act — पदच्युति प्रक्रिया
    1971Contempt of Courts Act (6 माह जेल / ₹2000 जुर्माना)
    197230वाँ संशोधन — SLP में ₹20,000 की मौद्रिक सीमा समाप्त
    1973A.N. Ray: वरिष्ठता परंपरा का पहला उल्लंघन (Kesavananda के बाद)
    1977M.U. Beg: H.R. Khanna को दरकिनार (ADM Jabalpur dissent के बाद)
    1981प्रथम न्यायाधीश वाद — परामर्श ≠ सहमति
    1991-93Justice V. Ramaswami — पहला impeachment प्रयास; विफल
    1993द्वितीय न्यायाधीश वाद — कॉलेजियम स्थापित; परामर्श = सहमति; सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीश = CJI
    1998तृतीय न्यायाधीश वाद — 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों का कॉलेजियम
    2008न्यायाधीश संख्या 26 से 31
    201499वाँ संशोधन + NJAC Act — कॉलेजियम की जगह NJAC
    2015चतुर्थ न्यायाधीश वाद — NJAC असंवैधानिक; कॉलेजियम पुनः बहाल
    2018CJI वेतन ₹1L → ₹2.80L; अन्य न्यायाधीश ₹90,000 → ₹2.50L
    2019न्यायाधीश संख्या 31 से 34 — वर्तमान
    अनुच्छेद 124-147सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित समस्त प्रावधान — भाग V
    अनुच्छेद 131मूल क्षेत्राधिकार (केंद्र-राज्य विवाद)
    अनुच्छेद 32रिट अधिकार — "संविधान की आत्मा" (Dr. Ambedkar)
    अनुच्छेद 136Special Leave Petition (SLP)
    अनुच्छेद 143परामर्शदायी क्षेत्राधिकार (15 संदर्भ अब तक)
    अनुच्छेद 141SC का कानून सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी
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