📋 इस अध्याय में
- परिचय (Introduction)
- मूल अधिकारों की 12 विशेषताएँ (12 Features of Fundamental Rights)
- 6 मूल अधिकार — एक नजर में (Table 8.1)
- Table 8.2 — विदेशियों को मूल अधिकार (FR Available to Foreigners)
- अनुच्छेद 12 — "राज्य" की परिभाषा (Article 12 — Definition of State)
- अनुच्छेद 13 — FR से असंगत कानून शून्य (Article 13 — Void Laws)
- समानता का अधिकार (Right to Equality) — Art. 14–18
- स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom — Art. 19–22)
- शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation — Art. 23–24)
- धर्म की स्वतंत्रता (Right to Freedom of Religion — Art. 25–28)
- सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार (Cultural & Educational Rights — Art. 29–30)
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Article 32 — Right to Constitutional Remedies)
- पाँच प्रकार की Writs (Five Writs — Types and Scope)
- अनुच्छेद 33, 34, 35 — विशेष प्रावधान
- संपत्ति का अधिकार — वर्तमान स्थिति (Art. 300-A)
- FR के अपवाद (Art. 31A, 31B, 31C)
- मूल अधिकारों की आलोचनाएँ (8 Criticisms)
- मूल अधिकारों का महत्व (10 Significance)
- Part III के बाहर अधिकार (Rights outside Part III)
📌 मूल अधिकार — भाग 1
1परिचय (Introduction)
मूल अधिकार (Fundamental Rights) संविधान के भाग III (Part III) में अनुच्छेद 12 से 35 तक वर्णित हैं। इन्हें तैयार करने में संस्थापकों ने अमेरिकी संविधान (Bill of Rights) से प्रेरणा ली। Part III को उचित ही "भारत का मैग्ना कार्टा (Magna Carta of India)" कहा जाता है।
ये अधिकार "Fundamental" इसलिए हैं क्योंकि: (1) संविधान — देश के सर्वोच्च कानून — द्वारा गारंटीकृत हैं, और (2) ये व्यक्ति के सर्वांगीण विकास (भौतिक, बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक) के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
मूलतः 7 मूल अधिकार (Originally 7 FRs)
- 1. समानता का अधिकार (Art. 14-18)
- 2. स्वतंत्रता का अधिकार (Art. 19-22)
- 3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Art. 23-24)
- 4. धर्म की स्वतंत्रता (Art. 25-28)
- 5. सांस्कृतिक/शैक्षणिक (Art. 29-30)
- 6. संपत्ति का अधिकार (Art. 31)
- 7. संवैधानिक उपचार (Art. 32)
वर्तमान में 6 मूल अधिकार (Now 6 FRs)
- 44वाँ संशोधन 1978 ने Art. 31 हटाया
- संपत्ति का अधिकार — अब Art. 300-A में कानूनी अधिकार
- अब 6 Fundamental Rights
- मूल अधिकार — राजनीतिक लोकतंत्र के लिए
- "Government of Laws, not of Men"
- Part III ≠ USA से सिर्फ inspired; अधिक elaborate
2मूल अधिकारों की 12 विशेषताएँ (12 Features of Fundamental Rights)
| क्र. | विशेषता (Feature) | विस्तार |
|---|
| 1 | कुछ केवल नागरिकों को, कुछ सभी को | Art. 15, 16, 19, 29, 30 — केवल नागरिक; Art. 14, 20, 21, 22, 23, 24, 25-28 — सभी व्यक्ति |
| 2 | निरपेक्ष नहीं — Qualified (युक्तियुक्त प्रतिबंध) | राज्य Reasonable Restrictions लगा सकता है; court तय करेगा कि "reasonable" है या नहीं |
| 3 | State के विरुद्ध; कुछ निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी | Art. 17 (Untouchability), 23 (Traffic/Forced labour) — Private individuals पर भी |
| 4 | कुछ Negative, कुछ Positive | Negative: State पर सीमाएँ (Art. 14, 15); Positive: व्यक्तियों को विशेषाधिकार (Art. 16) |
| 5 | Justiciable (न्यायालय में प्रवर्तनीय) | उल्लंघन पर court में जा सकते हैं |
| 6 | SC द्वारा संरक्षित और गारंटीकृत | पीड़ित व्यक्ति सीधे SC जा सकता है (Art. 32) |
| 7 | अपरिवर्तनीय नहीं; Parliament curtail/repeal कर सकती है | Constitutional Amendment से — साधारण कानून से नहीं; Basic Structure प्रभावित नहीं होनी चाहिए |
| 8 | National Emergency में निलंबन | Art. 20, 21 — कभी नहीं; Art. 19 — केवल External Emergency में; बाकी सभी suspend |
| 9 | Art. 31A, 31B, 31C द्वारा सीमित | कुछ कानून FR के विरुद्ध होने पर भी रद्द नहीं |
| 10 | Armed Forces/Police पर संसद द्वारा प्रतिबंध | Art. 33 — Parliament restrict/abrogate कर सकती है; State Legislature नहीं |
| 11 | Martial Law के दौरान प्रतिबंध संभव | Art. 34 — Martial Law लागू होने पर, Parliament द्वारा Indemnity |
| 12 | अधिकांश सीधे प्रवर्तनीय (Self-executory) | कुछ के लिए Parliament कानून बनाएगी (Art. 35) — उनकी एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए |
36 मूल अधिकार — एक नजर में (Table 8.1)
| अधिकार (Right) | अनुच्छेद | मुख्य प्रावधान |
|---|
| 1. समानता का अधिकार (Right to Equality) | Art. 14–18 | विधि के समक्ष समानता; भेदभाव निषेध; लोक नियोजन में समता; अस्पृश्यता उन्मूलन; उपाधि उन्मूलन |
| 2. स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) | Art. 19–22 | 6 स्वतंत्रताएँ (Art. 19); अपराध सिद्धि के विरुद्ध (Art. 20); जीवन/व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Art. 21); शिक्षा (Art. 21A); गिरफ्तारी से संरक्षण (Art. 22) |
| 3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation) | Art. 23–24 | बेगार/बंधुआ मजदूरी निषेध; 14 वर्ष से कम आयु में कारखाने/खदान में काम निषेध |
| 4. धर्म की स्वतंत्रता (Right to Freedom of Religion) | Art. 25–28 | अंतःकरण की स्वतंत्रता; धर्म मानना/आचरण/प्रचार; धार्मिक मामले प्रबंधन; कर निषेध; धार्मिक शिक्षा |
| 5. सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार (Cultural & Educational Rights) | Art. 29–30 | अल्पसंख्यकों की भाषा/लिपि/संस्कृति संरक्षण; अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्था स्थापित करने का अधिकार |
| 6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) | Art. 32 | SC में जाने का अधिकार; 5 प्रकार की Writs; "संविधान की आत्मा" — Dr. Ambedkar |
मूल अधिकार किसके लिए?: मूल अधिकार सभी 'व्यक्तियों (persons)' को प्राप्त हैं — नागरिक, विदेशी और Legal Persons (Corporations, Companies)। लेकिन कुछ अधिकार केवल 'नागरिकों (citizens)' को ही मिलते हैं।
4Table 8.2 — विदेशियों को मूल अधिकार (FR Available to Foreigners)
केवल नागरिकों को — विदेशियों को नहीं
- Art. 15 — धर्म/जाति/लिंग पर भेदभाव निषेध
- Art. 16 — लोक नियोजन में अवसर की समता
- Art. 19 — 6 स्वतंत्रताएँ (वाक्, संगठन आदि)
- Art. 29 — अल्पसंख्यक भाषा/लिपि की रक्षा
- Art. 30 — अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था का अधिकार
नागरिक + विदेशी — दोनों को (शत्रु विदेशी को नहीं)
- Art. 14 — समानता (Equality before Law)
- Art. 20 — अपराध सिद्धि से संरक्षण
- Art. 21 — जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता
- Art. 21A — प्रारम्भिक शिक्षा
- Art. 22 — गिरफ्तारी से संरक्षण
- Art. 23 — बेगार/मानव तस्करी निषेध
- Art. 24 — बाल श्रम निषेध
- Art. 25-28 — धर्म की स्वतंत्रता
5अनुच्छेद 12 — "राज्य" की परिभाषा (Article 12 — Definition of State)
Part III में "राज्य (State)" शब्द का बार-बार प्रयोग होता है। अनुच्छेद 12 ने इसे व्यापक अर्थ में परिभाषित किया है ताकि उनकी सभी एजेंसियाँ मूल अधिकारों के उल्लंघन के लिए जवाबदेह हों।
| घटक | उदाहरण | महत्व |
|---|
| 1. भारत सरकार और Parliament (Union Government की कार्यपालिका + विधायिका) | केंद्रीय मंत्रालय, संसद | संसद के कानून FR के विरुद्ध — void |
| 2. राज्य सरकारें और विधानमंडल (State Government की कार्यपालिका + विधायिका) | राज्य मंत्रिमंडल, विधानसभा | State के कानून FR के विरुद्ध — void |
| 3. सभी स्थानीय प्राधिकरण (All Local Authorities) | नगर पालिका, पंचायत, जिला बोर्ड, सुधार न्यास | स्थानीय निकायों के कार्य FR के अधीन |
| 4. अन्य सभी प्राधिकरण (All Other Authorities) | वैधानिक: LIC, ONGC, SAIL; गैर-वैधानिक भी | इनके कार्य भी court में चुनौती दे सकते हैं |
Supreme Court का विस्तार: SC के अनुसार यदि कोई निजी संस्था (Private Body) या एजेंसी राज्य के साधन (Instrument of State) के रूप में कार्य करती है तो वह Art. 12 के अंतर्गत "राज्य" के दायरे में आती है।
6अनुच्छेद 13 — FR से असंगत कानून शून्य (Article 13 — Void Laws)
Art. 13 घोषित करता है कि जो भी कानून मूल अधिकारों से असंगत (Inconsistent) या उनका उल्लंघन (Derogation) करता है — वह शून्य (Void) होगा। यह प्रावधान न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से प्रावधानित करता है।
"कानून (Law)" की व्यापक परिभाषा — Art. 13 के अंतर्गत
| क्र. | कानून का प्रकार | उदाहरण |
|---|
| 1 | स्थायी कानून (Permanent Laws) | Parliament या State Legislature द्वारा अधिनियमित |
| 2 | अस्थायी कानून (Temporary Laws) | राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा जारी Ordinances |
| 3 | वैधानिक लिखत (Statutory Instruments) | Delegated Legislation — Order, Bye-law, Rule, Regulation, Notification |
| 4 | गैर-विधायी कानून स्रोत
(Non-legislative Sources) | कानून का बल रखने वाले रीति-रिवाज (Custom) या परंपरा (Usage) |
Art. 13 के तहत "Law" में क्या शामिल है
- Parliament + State Legislature के कानून
- President/Governor के Ordinances
- Order, Bye-law, Rule, Regulation, Notification
- Custom/Usage having force of law
Art. 13 के अनुसार Constitutional Amendment
- Art. 13 में "Amendment" = "Law" नहीं — इसलिए Challenge नहीं किया जा सकता
- LEKIN: Kesavananda Bharati 1973 — Amendment को तब Challenge किया जा सकता है जब वह Basic Structure का उल्लंघन करे
- यह सिद्धांत Supreme Court द्वारा विकसित किया गया
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7समानता का अधिकार (Right to Equality) — Art. 14–18
7.1 अनुच्छेद 14 — विधि के समक्ष समानता एवं समान संरक्षण (Article 14)
Art. 14 कहता है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को "विधि के समक्ष समानता (Equality before Law)" या "विधियों के समान संरक्षण (Equal Protection of Laws)" से वंचित नहीं करेगा। यह अधिकार नागरिकों और विदेशियों — दोनों को, और Legal Persons को भी उपलब्ध है।
विधि के समक्ष समानता(Equality before Law — British Origin)
- अर्थ: कोई विशेषाधिकार नहीं
- सभी का साधारण कानून के अधीन
- कोई कानून से ऊपर नहीं (PM से Constable तक)
- Negative Concept (नकारात्मक)
- सरकारी/गैर-सरकारी — सब समान
विधियों का समान संरक्षण(Equal Protection — American Origin)
- अर्थ: समान परिस्थिति में समान व्यवहार
- समान लोगों पर एक जैसे कानून
- Like treated alike
- Positive Concept (सकारात्मक)
- दोनों — एक ही लक्ष्य: कानूनी समानता
Reasonable Classification: Art. 14 वर्ग-विधान (Class Legislation) निषिद्ध करता है लेकिन युक्तियुक्त वर्गीकरण (Reasonable Classification) की अनुमति देता है। वर्गीकरण के लिए दो शर्तें: (1) बोधगम्य अंतर (Intelligible Differentia) — वर्गीकृत और गैर-वर्गीकृत में स्पष्ट अंतर, और (2) तर्कसंगत संबंध (Rational Nexus) — अंतर का कानून के लक्ष्य से तार्किक संबंध।
विधि का शासन (Rule of Law) — A.V. Dicey के तीन तत्व
Rule of Law — A.V. Dicey (British Jurist)
तत्व 1: मनमानी शक्ति का अभाव (Absence of Arbitrary Power) — कोई व्यक्ति केवल कानून के उल्लंघन पर ही दंडित किया जाए, मनमाने तरीके से नहीं। तत्व 2: विधि के समक्ष समानता (Equality before Law) — राजा से constable तक — सभी साधारण न्यायालयों के अधीन। [भारत में लागू] तत्व 3: व्यक्तिगत अधिकारों की प्रधानता (Primacy of Individual Rights) — संविधान न्यायालयों द्वारा लागू व्यक्तिगत अधिकारों का परिणाम है। [भारत में लागू नहीं — भारत में संविधान अधिकारों का स्रोत है] SC ने Rule of Law को Art. 14 का "Basic Feature" घोषित किया — संशोधन से भी नष्ट नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 14 के अपवाद (Exceptions to Art. 14)
| क्र. | अपवाद | अनुच्छेद |
|---|
| 1 | राष्ट्रपति और राज्यपाल — पद पर रहते हुए: आपराधिक/दीवानी कार्यवाही नहीं; गिरफ्तारी नहीं; अपने कार्यों के लिए किसी court के प्रति उत्तरदायी नहीं | Art. 361 |
| 2 | Parliament या State Legislature की कार्यवाही की सत्य रिपोर्ट का समाचारपत्र/TV में प्रकाशन — किसी court में कार्यवाही नहीं | Art. 361-A |
| 3 | Parliament का कोई सदस्य — संसद में कही गई किसी बात या मत के लिए court में कार्यवाही नहीं | Art. 105 |
| 4 | State Legislature का कोई सदस्य — Legislature में कही गई किसी बात या मत के लिए कार्यवाही नहीं | Art. 194 |
| 5 | Art. 31C — DPSP (Art. 39b, 39c) को लागू करने वाले State के कानून — Art. 14 के आधार पर Challenge नहीं हो सकते (SC: "Where Art. 31C comes in, Art. 14 goes out") | Art. 31C |
| 6 | विदेशी राजनयिक (Foreign Sovereigns, Ambassadors, Diplomats) — आपराधिक/दीवानी कार्यवाही से उन्मुक्ति (Diplomatic Immunity) | International Law |
| 7 | संयुक्त राष्ट्र (UNO) और उसकी एजेंसियाँ — कूटनीतिक उन्मुक्ति (Diplomatic Immunity) | UN Charter |
7.2 अनुच्छेद 15 — भेदभाव का निषेध (Article 15 — Table 8.3)
Art. 15 राज्य को निर्देश देता है कि वह किसी भी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव (Discrimination) नहीं करेगा। "केवल (Only)" शब्द महत्वपूर्ण है — अन्य आधारों पर भेदभाव निषिद्ध नहीं।
| Art. 15 का खंड | विषय |
|---|
| 15(1) | राज्य — धर्म/मूलवंश/जाति/लिंग/जन्म-स्थान पर भेदभाव नहीं करेगा। [केवल State पर लागू] |
| 15(2) | कोई नागरिक — इन्हीं आधारों पर दुकान, होटल, सार्वजनिक मनोरंजन स्थल, कुआँ, तालाब, स्नानघाट, सड़क, सार्वजनिक स्थल पर जाने से वंचित नहीं किया जाएगा। [State + Private Individuals दोनों पर] |
| 15(3) — अपवाद 1 | राज्य महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है। |
| 15(4) — अपवाद 2 [1st Amendment 1951] | राज्य सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़े वर्गों, SC एवं ST की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है। |
| 15(5) — अपवाद 3 [93rd Amendment 2005] | राज्य सामाजिक/शैक्षणिक पिछड़े वर्ग, SC, ST के लिए शैक्षणिक संस्थाओं (Private Aided/Unaided सहित, Minority Institutions को छोड़कर) में प्रवेश में आरक्षण कर सकता है। |
| 15(6) — अपवाद 4
[103rd Amendment 2019] | राज्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए (i) विशेष प्रावधान, (ii) शैक्षणिक संस्थाओं (Private Aided/Unaided सहित, Minority को छोड़कर) में 10% सीट आरक्षण। यह मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगा। |
"Creamy Layer" — OBCs का उन्नत वर्ग (Indra Sawhney Case 1992)
Creamy Layer = OBCs का वह वर्ग जो आरक्षण का लाभ नहीं उठाएगा। निम्नलिखित Creamy Layer में आते हैं:
| क्र. | Creamy Layer श्रेणी |
|---|
| 1 | संवैधानिक पदाधारी — राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, SC/HC के न्यायाधीश, UPSC/SPSC के अध्यक्ष/सदस्य, CEC, CAG आदि |
| 2 | Group A/Class I और Group B/Class II अधिकारी (All India/Central/State Services) + PSU, Bank, Insurance, University में समकक्ष + निजी क्षेत्र में भी |
| 3 | Army में Colonel और उससे ऊपर; Navy/Air Force/Paramilitary में समकक्ष |
| 4 | Professionals — Doctor, Lawyer, Engineer, Artist, Author, Consultant आदि |
| 5 | व्यापार, व्यवसाय, उद्योग में लगे व्यक्ति |
| 6 | एक सीमा से अधिक कृषि भूमि + शहरी क्षेत्र में रिक्त भूखंड/भवन |
| 7 | वार्षिक आय ₹8 लाख से अधिक (मूल सीमा 1993: ₹1 लाख → 2004: ₹2.5 लाख → 2008: ₹4.5 लाख → 2013: ₹6 लाख → 2017: ₹8 लाख) |
EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) — पात्रता (103rd Amendment 2019)
| EWS पात्रता शर्त | विवरण |
|---|
| आय सीमा | परिवार की सकल वार्षिक आय ₹8 लाख से कम (सभी स्रोतों से) |
| अपात्र — संपत्ति आधार पर | 5 एकड़ या अधिक कृषि भूमि; 1000 sq.ft. या अधिक आवासीय फ्लैट; Notified Municipality में 100 sq.yards या अधिक; अन्य क्षेत्र में 200 sq.yards या अधिक |
| EWS लाभ किसे? | SC/ST/OBC आरक्षण में शामिल नहीं — केवल उन्हें जो किसी भी मौजूदा आरक्षण के अंतर्गत नहीं |
| परिवार में शामिल | स्वयं + माता-पिता + 18 वर्ष से कम भाई-बहन + पति/पत्नी + 18 वर्ष से कम बच्चे |
7.3 अनुच्छेद 16 — लोक नियोजन में समता (Article 16 — Table 8.4)
Art. 16 सभी नागरिकों को राज्य के अधीन नियोजन या पद पर नियुक्ति (Employment or Appointment) के मामले में अवसर की समानता (Equality of Opportunity) की गारंटी देता है। आधार: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, वंश, जन्म-स्थान या निवास पर भेदभाव निषिद्ध।
| Art. 16 का खंड | विषय |
|---|
| 16(1) | सभी नागरिकों के लिए लोक नियोजन/पद पर नियुक्ति में अवसर की समता |
| 16(2) | धर्म/मूलवंश/जाति/लिंग/वंश/जन्म-स्थान/निवास के आधार पर भेदभाव निषिद्ध |
| 16(3) | Parliament कुछ नियोजन के लिए निवास को शर्त बना सकती है [Public Employment Act 1957 — 1974 में expired; AP और Telangana में Art. 371-D से अभी भी लागू] |
| 16(4) | राज्य पिछड़े वर्ग (inadequately represented) के लिए आरक्षण कर सकता है |
| 16(4A)
[77th Amendment 1995] | SC/ST (inadequately represented) के लिए पदोन्नति में आरक्षण [85th Amendment 2001 — consequential seniority जोड़ी] |
| 16(4B)
[81st Amendment 2000] | अपूर्ण आरक्षित रिक्तियाँ (Backlog Vacancies) — अगले वर्ष में अलग श्रेणी में; 50% की सीमा backlog पर नहीं |
| 16(5) | धार्मिक/सांप्रदायिक संस्था के पद पर उसी धर्म/संप्रदाय के व्यक्ति की नियुक्ति — कानून द्वारा जायज |
| 16(6)
[103rd Amendment 2019] | EWS के लिए 10% तक नियुक्तियों/पदों का आरक्षण (मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त) |
Mandal Commission (मंडल आयोग) — B.P. Mandal 1979
| विषय | तथ्य |
|---|
| नियुक्ति | 1979 — Morarji Desai सरकार; Art. 340 के तहत; द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग (B.P. Mandal — MP — अध्यक्ष) |
| रिपोर्ट | 1980 — 3743 जातियाँ OBC; कुल जनसंख्या का ~52% (SC/ST को छोड़कर) |
| सिफारिश | सरकारी नौकरियों में OBC के लिए 27% आरक्षण (SC/ST + OBC मिलाकर 50%) |
| क्रियान्वयन | V.P. Singh सरकार 1990 — 27% OBC आरक्षण लागू |
| Narasimha Rao Govt 1991 | (a) OBC के गरीब वर्ग को प्राथमिकता; (b) अन्य आर्थिक पिछड़ों के लिए 10% अतिरिक्त |
Indra Sawhney vs. Union of India (1992) — Mandal Case — 7 प्रमुख निर्णय
1. OBC की उन्नत परत — "Creamy Layer" — आरक्षण सूची से बाहर। 2. पदोन्नति में कोई आरक्षण नहीं — केवल प्रारम्भिक नियुक्तियों तक सीमित। 3. मौजूदा पदोन्नति आरक्षण — 5 वर्ष तक (1997 तक) जारी रह सकता है। 4. कुल आरक्षण — 50% से अधिक नहीं (कुछ असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर)। यह नियम प्रतिवर्ष लागू। 5. Backlog (Carry Forward) नियम वैध — लेकिन 50% सीमा का उल्लंघन नहीं। 6. OBC की सूची में Over/Under-inclusion की शिकायतों के लिए स्थायी वैधानिक निकाय (NCBC) की स्थापना। 7. पदोन्नति में आरक्षण के मामले में अर्हता अंकों में छूट नहीं — Art. 335 (प्रशासन में कार्यकुशलता)।
Indra Sawhney के बाद संसद की प्रतिक्रिया (Amendments)
| संशोधन | वर्ष | विषय |
|---|
| 77वाँ संशोधन | 1995 | SC/ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण — Art. 16(4A) जोड़ा |
| 85वाँ संशोधन | 2001 | Consequential Seniority (परिणामी वरिष्ठता) — June 1995 से पूर्वव्यापी प्रभाव |
| 81वाँ संशोधन | 2000 | Backlog Vacancies की 50% सीमा से मुक्ति — Art. 16(4B) |
| 76वाँ संशोधन | 1994 | Tamil Nadu Reservations Act 1993 (69%) — 9वीं अनुसूची में डाला |
| 82वाँ संशोधन | 2000 | पदोन्नति में आरक्षण: अर्हता अंकों में छूट — Art. 335 में संशोधन |
| 103वाँ संशोधन | 2019 | EWS के लिए 10% आरक्षण — Art. 16(6) जोड़ा |
First Backward Classes Commission: प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग — 1953 में Kaka Kalelkar की अध्यक्षता में; Report 1955 में प्रस्तुत।
7.4 अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का उन्मूलन (Article 17 — Abolition of Untouchability)
Art. 17 "अस्पृश्यता (Untouchability)" का उन्मूलन करता है और किसी भी रूप में इसके आचरण को निषिद्ध करता है। इसका उल्लंघन कानून के अनुसार दंडनीय अपराध (Punishable Offence) है।
- "Untouchability" की परिभाषा — न संविधान में, न अधिनियम में। Mysore HC: यह शाब्दिक/व्याकरणिक अर्थ में नहीं — "ऐतिहासिक अर्थ में जन्म-आधारित सामाजिक अक्षमताएँ" (Social Disabilities imposed by reason of birth in certain castes)।
- यह केवल State के विरुद्ध नहीं — निजी व्यक्तियों (Private Individuals) के विरुद्ध भी उपलब्ध।
- इस अधिकार के उल्लंघन पर राज्य का संवैधानिक दायित्व (Constitutional Obligation) है कि वह आवश्यक कार्रवाई करे।
| संबंधित कानून | विवरण |
|---|
| अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1955 | Untouchability (Offences) Act 1955 |
| नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 | 1976 में अस्पृश्यता अधिनियम का व्यापक संशोधन; नाम बदला; दायरा और दंड — दोनों कठोर किए |
| People's Union for Democratic Rights Case 1982 | SC: Art. 17 का अधिकार — निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी; राज्य का Constitutional Obligation |
7.5 अनुच्छेद 18 — उपाधियों का उन्मूलन (Article 18 — Abolition of Titles)
Art. 18 उपाधियों (Titles) को समाप्त करता है और इस संबंध में 4 प्रावधान करता है:
| क्र. | प्रावधान |
|---|
| 1 | राज्य किसी को कोई उपाधि (सैन्य या शैक्षणिक को छोड़कर) नहीं देगा — चाहे नागरिक हो या विदेशी। |
| 2 | कोई भारतीय नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा। |
| 3 | राज्य के अधीन लाभ या विश्वास के पद पर आसीन विदेशी — राष्ट्रपति की अनुमति के बिना विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा। |
| 4 | राज्य के अधीन लाभ या विश्वास के पद पर आसीन कोई नागरिक या विदेशी — राष्ट्रपति की अनुमति के बिना किसी विदेशी राज्य से कोई उपहार, परितोषण या पद स्वीकार नहीं करेगा। |
निषिद्ध उपाधियाँ (Prohibited Titles)
- वंशानुगत उपाधियाँ (Hereditary Titles)
- Maharaja, Raj Bahadur, Rai Bahadur
- Rai Saheb, Dewan Bahadur आदि
- औपनिवेशिक राज्यों द्वारा दी गई उपाधियाँ
- समान स्थिति के सिद्धांत के विरुद्ध
राष्ट्रीय पुरस्कार — Art. 18 का उल्लंघन नहीं
- Bharat Ratna, Padma Vibhushan, Padma Bhushan, Padma Sri
- Balaji Raghavan Case 1995: ये "Title" नहीं — Merit की पहचान
- नाम के साथ Prefix/Suffix के रूप में नहीं — अन्यथा पुरस्कार वापस
- 1954 में instituted; 1977 में बंद; 1980 में पुनः शुरू
| राष्ट्रीय पुरस्कार | वार्षिक सीमा | अन्य तथ्य |
|---|
| Bharat Ratna | अधिकतम 3 प्रति वर्ष | 1954 में स्थापित; Republic Day पर घोषित |
| Padma Awards
(Vibhushan + Bhushan + Sri) | अधिकतम 120 प्रति वर्ष (Posthumous/NRI/OCI को छोड़कर) | Republic Day पर घोषित; 1978-79 + 1993-97 में बंद रहे |
★ सारांश Part 1 (Summary)
समानता का अधिकार — त्वरित संदर्भ (Art. 14-18 Quick Reference)
| अनुच्छेद | विषय | महत्वपूर्ण बिंदु |
|---|
| Art. 12 | State की परिभाषा | 4 Components; SC — Instrument of State = State |
| Art. 13 | FR से असंगत कानून void | Judicial Review; 4 types of Law; Constitutional Amendment ≠ Law (but Kesavananda) |
| Art. 14 | Equality before Law + Equal Protection | British + American concept; Rule of Law (Dicey); Reasonable Classification; 7 Exceptions |
| Art. 15 | धर्म/जाति/लिंग/जन्म-स्थान पर भेदभाव निषेध | 15(1) to 15(6); OBC 27%; EWS 10%; Creamy Layer ₹8L |
| Art. 16 | लोक नियोजन में समता | 16(1) to 16(6); Mandal Commission; Indra Sawhney 1992; 7 rulings |
| Art. 17 | Untouchability उन्मूलन | Protection of Civil Rights Act 1955; Private individuals पर भी; PUDR Case 1982 |
| Art. 18 | Titles उन्मूलन | 4 provisions; National Awards = Not Titles (Balaji Raghavan 1995); Prefix/Suffix नहीं |
प्रमुख Case Laws (Part 1)
| वाद (Case) | वर्ष | निर्णय (Ruling) |
|---|
| Kesavananda Bharati vs. State of Kerala | 1973 | Constitutional Amendment भी Basic Structure का उल्लंघन करने पर void; Art. 13 में "Law" में Amendment नहीं |
| Indra Sawhney vs. Union of India (Mandal Case) | 1992 | 27% OBC आरक्षण valid; Creamy Layer बाहर; 50% ceiling; पदोन्नति में नहीं; Backlog carry forward valid |
| Balaji Raghavan vs. Union of India | 1995 | National Awards — Art. 18 का उल्लंघन नहीं; Prefix/Suffix के रूप में नहीं |
| People's Union for Democratic Rights (PUDR) | 1982 | Art. 17 — Private individuals के विरुद्ध भी; State का constitutional obligation |
प्रमुख संशोधन — Part 1 Relevant
| संशोधन | वर्ष | प्रभाव |
|---|
| 44वाँ संशोधन | 1978 | Art. 31 (Right to Property) — FR से हटाया → Art. 300-A (Legal Right) |
| 1st Amendment | 1951 | Art. 15(4) जोड़ा; Art. 19 पर 3 नए प्रतिबंध grounds |
| 93rd Amendment | 2005 | Art. 15(5) — Private Educational Institutions में OBC/SC/ST को आरक्षण |
| 103rd Amendment | 2019 | Art. 15(6) + Art. 16(6) — EWS के लिए 10% आरक्षण |
| 77th Amendment | 1995 | Art. 16(4A) — SC/ST के लिए Promotion में आरक्षण |
| 81st Amendment | 2000 | Art. 16(4B) — Backlog Vacancies की 50% सीमा से मुक्ति |
| 85th Amendment | 2001 | Art. 16(4A) में Consequential Seniority (June 1995 से) |
📌 मूल अधिकार — भाग 2
1स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom — Art. 19–22)
1.1 अनुच्छेद 19 — 6 स्वतंत्रताएँ एवं युक्तियुक्त प्रतिबंध (Table 8.5)
Art. 19 केवल नागरिकों को 6 स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है। ये केवल State action के विरुद्ध हैं, निजी व्यक्तियों के नहीं। मूलतः 7 स्वतंत्रताएँ थीं; संपत्ति का अधिकार [Art. 19(1)(f)] को 44वें संशोधन 1978 ने हटाया।
| क्र. | अधिकार (Right) | प्रतिबंध के आधार (Grounds of Restriction) |
|---|
| 1 | वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
[Art. 19(1)(a)] | Art. 19(2): संप्रभुता-अखंडता, राज्य-सुरक्षा, विदेशी संबंध, लोक व्यवस्था, शालीनता/नैतिकता, न्यायालय की अवमानना, मानहानि, अपराध के लिए उकसाना |
| 2 | शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार
[Art. 19(1)(b)] | Art. 19(3): संप्रभुता-अखंडता, लोक व्यवस्था |
| 3 | संघ, यूनियन या सहकारी समिति बनाने का अधिकार [Art. 19(1)(c)] | Art. 19(4): संप्रभुता-अखंडता, लोक व्यवस्था, नैतिकता |
| 4 | भारत के राज्यक्षेत्र में स्वतंत्र आवागमन [Art. 19(1)(d)] | Art. 19(5): सामान्य जनहित, अनुसूचित जनजातियों के हित |
| 5 | भारत के किसी भी भाग में निवास और बसने का अधिकार [Art. 19(1)(e)] | Art. 19(5): सामान्य जनहित, अनुसूचित जनजातियों के हित |
| (6) | [संपत्ति — 44वें संशोधन 1978 से हटाया गया] | — |
| 6 | कोई भी पेशा, व्यवसाय, वाणिज्य या व्यापार करने का अधिकार [Art. 19(1)(g)] | Art. 19(6): सामान्य जनहित, आवश्यक व्यावसायिक/तकनीकी योग्यता, राज्य का State Monopoly |
Art. 19(1)(a) — वाक् स्वतंत्रता के SC-मान्यता प्राप्त विस्तार
| SC द्वारा Art. 19(1)(a) में शामिल किए गए अधिकार (18 Rights) |
|---|
| 1. मत प्रचार (Right to propagate views) |
| 2. प्रेस की स्वतंत्रता (Freedom of Press) |
| 3. वाणिज्यिक विज्ञापन की स्वतंत्रता |
| 4. टेलीफोन वार्तालाप की टैपिंग के विरुद्ध |
| 5. टेलीकास्ट का अधिकार — सरकारी एकाधिकार नहीं |
| 6. बंद (Bandh) के विरुद्ध |
| 7. सरकारी गतिविधियों की जानकारी का अधिकार |
| 8. मौन का अधिकार (Freedom of Silence) |
| 9. समाचारपत्र पर पूर्व-सेंसरशिप के विरुद्ध |
| 10. धरना/पिकेटिंग का अधिकार (हड़ताल नहीं) |
| 11. राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार |
| 12. उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि जानने का मतदाता अधिकार |
| 13. प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम चुनने का अधिकार |
| 14. लैंगिक पहचान व्यक्त करने का अधिकार |
| 15. उत्तर देने का अधिकार (Right to Reply) |
| 16. Internet/Social Media पर जानकारी/वीडियो पोस्ट करने का अधिकार |
| 17. फिल्म निर्माताओं को फिल्म प्रदर्शित करने का अधिकार |
| 18. इंटरनेट के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार (Anuradha Bhasin Case 2020) |
1.2 अनुच्छेद 20 — अपराध सिद्धि के विरुद्ध संरक्षण (Article 20)
Art. 20 नागरिक, विदेशी और Legal Persons — सभी को मनमाने और अत्यधिक दंड से संरक्षण देता है। यह National Emergency में भी suspend नहीं होता।
| संरक्षण (Protection) | विस्तार | अपवाद/सीमाएँ |
|---|
| 1. भूतलक्षी कानून नहीं
(No Ex-Post-Facto Law) | (i) अपराध के समय प्रचलित कानून के उल्लंघन पर ही दंड; (ii) उस समय निर्धारित दंड से अधिक नहीं | केवल Criminal Laws पर; Civil/Tax Laws पर नहीं। Trial prohibit नहीं — केवल conviction/sentence। Preventive Detention पर लागू नहीं। |
| 2. दोहरे दंड से संरक्षण
(No Double Jeopardy) | एक ही अपराध के लिए दो बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा | केवल न्यायालय/Judicial Tribunal में। Departmental/Administrative proceedings में नहीं। |
| 3. स्वयं के विरुद्ध
साक्षी न बनने का (No Self-incrimination) | किसी अभियुक्त को स्वयं के विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा | Oral और Documentary evidence दोनों। लेकिन: Material objects, Thumb impression, Signature, Blood specimen, शरीर का प्रदर्शन — इसमें नहीं। केवल Criminal proceedings, Civil नहीं। |
1.3 अनुच्छेद 21 — जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21)
Art. 21 — "किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण (Life) या दैहिक स्वतंत्रता (Personal Liberty) से, विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Procedure Established by Law) के अनुसार ही, वंचित किया जाएगा।" यह नागरिक और विदेशी — दोनों को मिलता है।
Gopalan Case 1950 (संकीर्ण व्याख्या)
- Art. 21 केवल Arbitrary Executive Action से संरक्षण
- Legislative Action से नहीं (यदि कानून है तो valid)
- "Procedure Established by Law" = कोई भी कानूनी प्रक्रिया
- USA के "Due Process of Law" से भिन्न
- Personal Liberty = केवल शारीरिक स्वतंत्रता
Maneka Gandhi Case 1978 (व्यापक व्याख्या)
- Gopalan पलटा — Art. 21 बहुत व्यापक
- Procedure Reasonable, Fair और Just होनी चाहिए
- Natural Justice के सिद्धांतों के अनुरूप
- USA का "Due Process of Law" भारत में भी लागू (अप्रत्यक्ष)
- Executive AND Legislative — दोनों से संरक्षण
Art. 21 का अर्थ (Maneka Gandhi 1978): Right to Life = केवल जानवरों की तरह जीना नहीं — बल्कि मानवीय गरिमा (Human Dignity) के साथ जीना। "Personal Liberty" = अत्यंत व्यापक अर्थ।
Art. 21 के अंतर्गत SC द्वारा मान्यता प्राप्त 39 अधिकार
| क्र. | Art. 21 में शामिल अधिकार | क्र. | Art. 21 में शामिल अधिकार |
|---|
| 1 | मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार | 21 | बाहर न निकाले जाने का अधिकार (Not to be driven out of State) |
| 2 | प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण का अधिकार | 22 | निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार (Fair Trial) |
| 3 | आजीविका का अधिकार (Right to Livelihood) | 23 | कैदी को जीवन की आवश्यकताएँ |
| 4 | गोपनीयता का अधिकार (Right to Privacy) | 24 | महिलाओं के साथ शालीन व्यवहार |
| 5 | आश्रय का अधिकार (Right to Shelter) | 25 | सार्वजनिक फाँसी के विरुद्ध अधिकार |
| 6 | स्वास्थ्य का अधिकार | 26 | पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क का अधिकार |
| 7 | 14 वर्ष तक नि:शुल्क शिक्षा (Unni Krishnan 1993) | 27 | सूचना का अधिकार (Right to Information) |
| 8 | नि:शुल्क कानूनी सहायता का अधिकार | 28 | प्रतिष्ठा का अधिकार (Right to Reputation) |
| 9 | एकान्त कारावास के विरुद्ध अधिकार | 29 | दोषसिद्धि के निर्णय से अपील का अधिकार |
| 10 | शीघ्र सुनवाई का अधिकार (Speedy Trial) | 30 | पारिवारिक पेंशन का अधिकार |
| 11 | हथकड़ी लगाने के विरुद्ध अधिकार | 31 | सामाजिक-आर्थिक न्याय का अधिकार |
| 12 | अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध अधिकार | 32 | जंजीर डालने के विरुद्ध |
| 13 | मृत्युदंड में विलंब के विरुद्ध अधिकार | 33 | उचित जीवन बीमा पॉलिसी का अधिकार |
| 14 | विदेश यात्रा का अधिकार | 34 | नींद का अधिकार (Right to Sleep) |
| 15 | बंधुआ मजदूरी के विरुद्ध अधिकार | 35 | शोर प्रदूषण से मुक्ति |
| 16 | हिरासत में उत्पीड़न के विरुद्ध | 36 | सतत् विकास का अधिकार |
| 17 | आपातकालीन चिकित्सा सहायता का अधिकार | 37 | अवसर का अधिकार |
| 18 | सरकारी अस्पताल में समय पर उपचार | 38 | सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार का अधिकार |
| 19 | पसंद के व्यक्ति से विवाह का अधिकार | 39 | जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से मुक्ति |
| 20 | गरिमा के साथ मृत्यु (Passive Euthanasia 2018) | | |
Table 8.6 — Art. 21 को विस्तारित करने वाले महत्वपूर्ण वाद
| वाद (Case) | वर्ष | SC द्वारा घोषित अधिकार |
|---|
| Satwant Singh Sawhney vs. Asst. Passport Officer | 1967 | विदेश यात्रा का अधिकार (Right to Travel Abroad) |
| M.H. Hoskot vs. State of Maharashtra | 1978 | नि:शुल्क कानूनी सहायता (Right to Free Legal Aid) |
| Hussainara Khatoon vs. Home Secy., Bihar | 1979 | शीघ्र सुनवाई (Right to Speedy Trial) |
| Francis Coralie Mullin vs. Administrator, Delhi | 1981 | मानवीय गरिमा के साथ जीना + कैदी को आवश्यकताएँ |
| Sheela Barse vs. State of Maharashtra | 1983 | हिरासत में उत्पीड़न के विरुद्ध (Right against Custodial Harassment) |
| Rural Litigation vs. State of UP | 1985 | स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार (Right to Decent Environment) |
| Olga Tellis vs. Bombay Municipal Corporation | 1985 | आजीविका का अधिकार (Right to Livelihood) |
| Parmanand Katara vs. Union of India | 1989 | आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Right to Emergency Medical Aid) |
| Shantistar Builders vs. N.K. Totame | 1990 | आश्रय का अधिकार (Right to Shelter) |
| K.S. Puttaswamy vs. Union of India | 2017 | गोपनीयता का अधिकार (Right to Privacy) — 9 जजों की Bench |
| Common Cause vs. Union of India | 2018 | गरिमा के साथ मृत्यु — Passive Euthanasia वैध |
1.4 अनुच्छेद 21A — शिक्षा का अधिकार (Right to Education)
Art. 21A: राज्य 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य प्रारम्भिक शिक्षा (Free and Compulsory Elementary Education) प्रदान करेगा। यह 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया — 1 April 2010 से प्रभावी।
| पहलू | विवरण |
|---|
| कानूनी आधार | RTE Act 2009 (Right of Children to Free and Compulsory Education Act) — 1 April 2010 से लागू |
| Art. 45 परिवर्तन | पहले Art. 45 में 14 वर्ष तक शिक्षा — DPSP था (Non-justiciable); अब Art. 45 में 6 वर्ष तक की Early Childhood Care and Education |
| Art. 51-A नया कर्तव्य | प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य: 6-14 वर्ष के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर देना |
| Unni Krishnan Case 1993 | 14 वर्ष तक नि:शुल्क शिक्षा — Art. 21 का हिस्सा घोषित (86वें संशोधन से पहले) |
| Mohini Jain Case 1992 | Professional/Higher Education भी FR — लेकिन Unni Krishnan ने इसे सीमित किया |
| विशेष | Art. 21A केवल Elementary Education को FR बनाता है — Higher/Professional Education नहीं |
1.5 अनुच्छेद 22 — गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण (Article 22)
भाग 1: साधारण कानून के तहत गिरफ्तारी
- 1. गिरफ्तारी के कारण बताने का अधिकार
- 2. विधि-व्यवसायी से परामर्श और बचाव का अधिकार
- 3. 24 घंटे (यात्रा समय छोड़कर) में Magistrate के सामने पेश करना
- 4. 24 घंटे बाद Magistrate की अनुमति के बिना नहीं रखा जाएगा
अपवाद — ये सुरक्षाएँ नहीं मिलतीं
- शत्रु विदेशी (Enemy Alien)
- निवारक निरोध कानून के तहत (Preventive Detention)
- SC: Criminal/Quasi-criminal nature के acts पर ही — Court Order/Civil Arrest/Income Tax Failure/Deportation पर नहीं
भाग 2: निवारक निरोध (Preventive Detention) — संरक्षण
निवारक निरोध = बिना मुकदमे और दोषसिद्धि के नजरबंदी — भविष्य में अपराध रोकने के लिए। यह नागरिक और विदेशी दोनों को उपलब्ध है।
| संरक्षण (Safeguard) | विवरण |
|---|
| 1. अधिकतम 3 माह Advisory Board के बिना नहीं | 3 माह से अधिक के लिए HC के न्यायाधीशों की Advisory Board की रिपोर्ट आवश्यक [44वाँ संशोधन 1978: 3 माह → 2 माह, लेकिन अभी लागू नहीं] |
| 2. निरोध के कारण बताना आवश्यक | लेकिन जो बात सार्वजनिक हित के विरुद्ध हो — वह नहीं बताना जरूरी नहीं |
| 3. प्रतिनिधित्व (Representation) का अवसर | निरुद्ध व्यक्ति को निरोध आदेश के विरुद्ध प्रतिनिधित्व का अवसर |
निवारक निरोध के प्रमुख कानून (Parliament द्वारा)
| क्र. | कानून | स्थिति |
|---|
| 1 | Preventive Detention Act, 1950 | Expired 1969 |
| 2 | Maintenance of Internal Security Act (MISA), 1971 | Repealed 1978 |
| 3 | Conservation of Foreign Exchange and Prevention of Smuggling Activities Act (COFEPOSA), 1974 | Active |
| 4 | National Security Act (NSA), 1980 | Active |
| 5 | Prevention of Blackmarketing and Maintenance of Supplies of Essential Commodities Act (PBMSECA), 1980 | Active |
| 6 | Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act (TADA), 1985 | Repealed 1995 |
| 7 | Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (PITNDPSA), 1988 | Active |
| 8 | Prevention of Terrorism Act (POTA), 2002 | Repealed 2004 |
| 9 | Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA), 1967 | Amended 2004, 2008, 2012, 2019 — Active |
महत्वपूर्ण: विश्व का कोई भी लोकतांत्रिक देश Preventive Detention को संविधान का अभिन्न अंग नहीं बनाया जैसा भारत ने किया। USA में Preventive Detention अज्ञात है। ब्रिटेन में केवल WW-I और WW-II में था।
2शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation — Art. 23–24)
2.1 अनुच्छेद 23 — मानव तस्करी एवं बेगार निषेध (Article 23)
Art. 23 — मानव तस्करी (Traffic in Human Beings), बेगार (Begar) और अन्य समान प्रकार के बलात् श्रम (Forced Labour) को निषिद्ध करता है। यह नागरिक और गैर-नागरिक — दोनों को उपलब्ध; निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी।
| शब्द/अवधारणा | अर्थ | संबंधित कानून |
|---|
| "Traffic in Human Beings" | (a) स्त्री-पुरुष-बच्चों की वस्तुओं की तरह खरीद-बिक्री; (b) वेश्यावृत्ति; (c) देवदासी प्रथा; (d) दासता | Immoral Traffic (Prevention) Act 1956 |
| "बेगार (Begar)" | जमींदारों द्वारा किसानों से बिना मेहनताना काम करवाना — परंपरागत भारतीय प्रथा | — |
| "Forced Labour" | इच्छा के विरुद्ध काम करवाना; Force = Physical force + न्यूनतम वेतन से कम भुगतान (Economic Compulsion भी) | Bonded Labour System (Abolition) Act 1976; Minimum Wages Act 1948; Contract Labour Act 1970; Equal Remuneration Act 1976 |
| अपवाद | राज्य सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनिवार्य सेवा (Military/Social Service) लागू कर सकता है — लेकिन धर्म/मूलवंश/जाति/वर्ग पर भेदभाव नहीं | — |
2.2 अनुच्छेद 24 — बाल श्रम निषेध (Article 24)
Art. 24 — 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी कारखाने (Factory), खदान (Mine) या अन्य खतरनाक कार्यों (Hazardous Activities) जैसे निर्माण कार्य, रेलवे आदि में नियोजन निषिद्ध। निर्दोष/सुरक्षित कार्य में निषेध नहीं।
| कानून/घटनाक्रम | विवरण |
|---|
| Child Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 | सर्वाधिक महत्वपूर्ण कानून |
| SC निर्देश 1996 | Child Labour Rehabilitation Welfare Fund; प्रत्येक बच्चे के लिए ₹20,000 का जुर्माना |
| 2006 सरकारी प्रतिबंध | बच्चों को Domestic Servants/Hotels/Restaurants/Shops आदि में काम पर रोक |
| Child Labour
(Amendment) Act, 2016 | 1986 Act का नाम बदला — "Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986" |
| Commissions for Protection of Child Rights Act, 2005 | National Commission + State Commissions + Children's Courts — शीघ्र न्याय |
3धर्म की स्वतंत्रता (Right to Freedom of Religion — Art. 25–28)
3.1 अनुच्छेद 25 — अंतःकरण और धर्म की स्वतंत्रता (Article 25)
| Art. 25 के 4 पहलू | अर्थ |
|---|
| अंतःकरण की स्वतंत्रता (Freedom of Conscience) | व्यक्ति की आंतरिक स्वतंत्रता — ईश्वर या सृजन के साथ अपने संबंध को जैसे चाहे बनाए |
| धर्म स्वीकार (Right to Profess) | अपनी धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं को खुले रूप से घोषित करना |
| धर्म का पालन (Right to Practice) | धार्मिक पूजा, अनुष्ठान, समारोह और अपनी आस्थाओं का प्रदर्शन |
| धर्म का प्रचार (Right to Propagate) | अपनी धार्मिक मान्यताओं का प्रसार — लेकिन जबरन धर्मांतरण (Forcible Conversion) नहीं |
ये अधिकार नागरिक और गैर-नागरिक — दोनों को। लेकिन लोक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और FR के अन्य प्रावधानों के अधीन।
विशेष: Art. 25(2)(a): राज्य धार्मिक आचरण से जुड़ी आर्थिक/वित्तीय/राजनीतिक गतिविधियों को विनियमित कर सकता है। Art. 25(2)(b): सामाजिक कल्याण, सुधार और हिंदू धार्मिक संस्थाओं को सभी हिंदुओं के लिए खोलने का प्रावधान। हिंदुओं में सिख, जैन और बौद्ध भी शामिल हैं। Kirpan धारण = सिख धर्म का पालन।
3.2 अनुच्छेद 26 — धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता (Article 26)
Art. 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय (Religious Denomination) या उसके किसी वर्ग को निम्नलिखित अधिकार देता है:
1. धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संस्थाएँ स्थापित और अनुरक्षित (Maintain) करने का अधिकार।
2. धर्म के मामलों में अपने मामलों का स्वयं प्रबंधन (Manage its own Affairs)।
3. चल और अचल संपत्ति का अर्जन और स्वामित्व (Own and Acquire Property)।
4. ऐसी संपत्ति का कानून के अनुसार प्रशासन (Administer such Property)।
Art. 25 — व्यक्तिगत अधिकार; Art. 26 — सामूहिक अधिकार (Collective Freedom of Religion)। दोनों लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन।
SC का मत: धार्मिक संप्रदाय के लिए 3 शर्तें: (1) व्यक्तियों का समूह जिनकी आस्था एकजुट हो; (2) साझा संगठन हो; (3) विशिष्ट नाम हो। SC: Ramakrishna Mission और Ananda Marga = Religious Denominations; Aurobindo Society = नहीं।
3.3 अनुच्छेद 27-28 (Articles 27-28)
Art. 27 — धर्म के लिए कर निषेध
- किसी विशेष धर्म के प्रचार/रखरखाव के लिए कर नहीं
- राज्य सार्वजनिक धन का उपयोग एक धर्म के लिए नहीं करेगा
- सभी धर्मों के प्रचार के लिए उपयोग उचित
- Fee = Tax नहीं — तीर्थस्थल पर विशेष सेवा के लिए Fee जायज
- Religious Endowments पर Fee — जायज
Art. 28 — धार्मिक शिक्षा
- Type 1 (पूर्णतः राज्य-वित्त): धार्मिक शिक्षा — पूर्णतः निषिद्ध
- Type 2 (Trust/Endowment से): धार्मिक शिक्षा जायज (Trusts की शर्तें)
- Type 3 (राज्य-मान्यता): स्वैच्छिक रूप से धार्मिक शिक्षा जायज
- Type 4 (राज्य-सहायता): स्वैच्छिक; नाबालिग के लिए Guardian की अनुमति
4सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार (Cultural & Educational Rights — Art. 29–30)
4.1 अनुच्छेद 29 — अल्पसंख्यक हितों का संरक्षण (Article 29)
Art. 29 — भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों का कोई भी वर्ग जिसकी अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति है — उसे संरक्षित करने का अधिकार होगा। कोई भी नागरिक राज्य-संचालित या राज्य-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्था में केवल धर्म/मूलवंश/जाति/भाषा के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा।
- पहला प्रावधान: समूह का अधिकार (Group right); दूसरा: व्यक्ति का अधिकार (Individual right)।
- SC: Art. 29 केवल अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं — "नागरिकों का वर्ग (Section of Citizens)" में बहुसंख्यक भी शामिल।
- भाषा के संरक्षण का अधिकार — भाषा की रक्षा के लिए आंदोलन करने का अधिकार भी शामिल; चुनावी वादा नहीं माना जाएगा।
4.2 अनुच्छेद 30 — अल्पसंख्यकों का शैक्षणिक संस्था अधिकार (Article 30)
Art. 30 धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों (Minorities) को निम्नलिखित अधिकार देता है:
1. अपनी पसंद की शैक्षणिक संस्थाएँ स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार।
2. State द्वारा अनिवार्य अर्जन में compensation — Art. 30 के अधिकार को प्रतिबंधित/समाप्त नहीं करेगी [44वाँ संशोधन 1978 द्वारा जोड़ा]।
3. सहायता (Aid) देने में राज्य — अल्पसंख्यक प्रबंधित संस्था के साथ भेदभाव नहीं करेगा।
| विषय | विवरण |
|---|
| Art. 30 बनाम Art. 29 | Art. 29: बहुसंख्यक सहित सभी वर्गों को; Art. 30: केवल अल्पसंख्यकों को |
| अल्पसंख्यक की परिभाषा | संविधान में कहीं परिभाषित नहीं |
| 3 प्रकार की Minority Educational Institutions | (1) Recognition + Aid दोनों; (2) केवल Recognition; (3) न Recognition न Aid |
| Type 1 & 2 पर राज्य का नियंत्रण | पाठ्यक्रम, शैक्षणिक मानक, अनुशासन, स्वच्छता, शिक्षक सेवा शर्तें — State की regulatory power |
| Type 3 | General laws (Contract, Labour, Tax आदि) लागू; पूर्ण स्वायत्तता |
| प्रमुख Cases | Secretary of Malankara Syrian Catholic College 2006; Right = Maladminister का अधिकार नहीं |
5संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Article 32 — Right to Constitutional Remedies)
Dr. B.R. Ambedkar — Art. 32 के बारे में
"Art. 32 — यह "इस संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद" है — बिना जिसके यह संविधान शून्य (Nullity) होता। यह संविधान की आत्मा है और इसका हृदय है।" SC: Art. 32 = Basic Feature of the Constitution — संशोधन से भी नहीं हटाया जा सकता।
Art. 32 के 4 प्रावधान:
1. Fundamental Rights के प्रवर्तन के लिए SC में जाने का अधिकार — गारंटीशुदा।
2. SC — Habeas Corpus, Mandamus, Prohibition, Certiorari, Quo-Warranto सहित — directions, orders, writs जारी कर सकता है।
3. Parliament — SC के अधिकारों की हानि के बिना — किसी अन्य court को भी ऐसी Writs जारी करने का अधिकार दे सकती है। [अभी तक ऐसा नहीं किया — HC को Art. 226 से पहले से यह अधिकार]
4. यह अधिकार — National Emergency में Art. 359 के तहत — President द्वारा suspend किया जा सकता है।
SC की Writ Jurisdiction (Art. 32)
- केवल FR के प्रवर्तन के लिए (narrower purpose)
- पूरे भारत के विरुद्ध — व्यापक क्षेत्राधिकार
- Art. 32 स्वयं FR है — SC मना नहीं कर सकता
- Original (direct) — अपील की जरूरत नहीं
HC की Writ Jurisdiction (Art. 226)
- FR + Any Other Purpose — wider purpose
- केवल अपने क्षेत्राधिकार में (अपवाद: cause of action वहाँ)
- Discretionary — HC refuse कर सकता है
- Preferred: पहले HC जाएँ (SC की advice)
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6पाँच प्रकार की Writs (Five Writs — Types and Scope)
| Writ | लैटिन अर्थ | जारी किया जाता है | किसके विरुद्ध | जारी नहीं होती जब |
|---|
| Habeas Corpus
बंदी प्रत्यक्षीकरण | Body को पेश करना | निरुद्ध व्यक्ति को पेश करने के लिए; गैरकानूनी नजरबंदी — मुक्त करने के लिए | Public और Private दोनों | (a) नजरबंदी कानूनी;
(b) Legislature/Court की अवमानना;
(c) Competent Court का आदेश; (d) Court के क्षेत्राधिकार से बाहर |
| Mandamusपरमादेश | हम आदेश देते हैं | Public Officer को उसके Official Duty करने का आदेश; Public Body/Corporation/Inferior Court/Tribunal/Government को भी | Public Body/
Authority | (a) Private individual/body; (b) Statutory force रहित departmental instructions; (c) Discretionary duty; (d) Contractual obligation; (e) President/Governor के विरुद्ध |
| Prohibitionप्रतिषेध | रोकना/मना करना | अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकना — Final Order से पहले | Judicial और Quasi-Judicial authorities | Administrative authorities के विरुद्ध नहीं |
| Certiorariउत्प्रेषण | प्रमाणित करना | Lower Court/Tribunal के आदेश को — Excess/Lack of Jurisdiction पर — रद्द करना (Quash) — Final Order के बाद | पहले: केवल Judicial/Quasi-Judicial; बाद में SC: Administrative authorities भी | — |
| Quo-Warrantoअधिकार-पृच्छा | किस अधिकार से | किसी व्यक्ति के सार्वजनिक पद के दावे की वैधता जाँच; अवैध अधिग्रहण रोकना | Public statutory permanent office पर | "Ministerial" या "Private Office" पर नहीं; कोई भी जनहित-याचिका दायर कर सकता है |
Prohibition बनाम Certiorari
- जारी: Final Order से पहले
- कार्यवाही आगे न चले — इसलिए
- Prohibits (रोकता है)
- Ongoing proceedings में
Certiorari vs Prohibition
- जारी: Final Order के बाद
- पारित आदेश को रद्द (Quash) करने के लिए
- Quashes order
- Post-final order stage
7अनुच्छेद 33, 34, 35 — विशेष प्रावधान
7.1 अनुच्छेद 33 — सशस्त्र बलों के FR (Article 33)
Art. 33 — Parliament को अधिकार कि वह सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों के सदस्यों के FR को restrict या abrogate करे। उद्देश्य: उचित कर्तव्य पालन और अनुशासन बनाए रखना।
- यह शक्ति केवल Parliament को — State Legislatures को नहीं।
- Parliament द्वारा बनाया कानून — FR के उल्लंघन के आधार पर किसी court में challenge नहीं हो सकता।
- "Armed Forces" में Non-combatants (Barbers, Cooks, Mechanics, Tailors आदि) भी शामिल।
- Court Martial को Writ Jurisdiction से बाहर रखा जा सकता है।
7.2 अनुच्छेद 34 — Martial Law और FR (Article 34)
Art. 34 — Martial Law लागू होने पर — Parliament किसी सरकारी कर्मचारी को Indemnity (क्षतिपूर्ति) प्रदान कर सकती है। Parliament कोई भी sentence/punishment/forfeiture को भी validate कर सकती है।
| Martial Law बनाम National Emergency (Table 8.7) | Martial Law | National Emergency |
|---|
| प्रभाव | केवल FR प्रभावित | FR + Centre-State relations + Revenue distribution + Legislative powers + Parliament tenure |
| सरकार और न्यायालय | Government और Ordinary Courts निलंबित | Government और Ordinary Courts जारी रहते हैं |
| आधार | किसी भी कारण से Law & Order breakdown | केवल 3 आधार: युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह |
| क्षेत्र | देश के किसी विशेष क्षेत्र में | पूरे देश या किसी भाग में |
| संवैधानिक प्रावधान | संविधान में कोई विशेष प्रावधान नहीं — Implicit | Art. 352 — Explicit and detailed |
SC का मत: Martial Law की घोषणा से Habeas Corpus की Writ स्वतः (ipso facto) suspend नहीं होती।
7.3 अनुच्छेद 35 — FR को प्रभावी करने के लिए कानून (Article 35)
Art. 35 — यह सुनिश्चित करता है कि कुछ विशेष मामलों में FR के संबंध में कानून बनाने की शक्ति केवल Parliament को है (State Legislatures को नहीं) — ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे:
केवल Parliament कानून बना सकती है
- Art. 16: निवास शर्त (public employment)
- Art. 32: अन्य courts को Writ power देना
- Art. 33: Armed Forces के FR पर प्रतिबंध
- Art. 34: Martial Law Indemnity
दंड विधान (Punishment) — केवल Parliament
- Art. 17: Untouchability
- Art. 23: Forced Labour/Traffic
- Parliament का यह दंड-कानून बनाना संवैधानिक OBLIGATION
- Art. 35 — State List विषयों पर भी Parliament की competence
8संपत्ति का अधिकार — वर्तमान स्थिति (Art. 300-A)
| चरण | विवरण |
|---|
| मूल स्थिति (1949) | Art. 19(1)(f) + Art. 31 — दोनों FR। Art. 31: No deprivation except by law + Public Purpose + Compensation। |
| विवाद | FR to Property — सर्वाधिक विवादास्पद। SC vs Parliament संघर्ष। 1st, 4th, 7th, 25th, 39th, 40th, 42nd Amendments। Art. 31A, 31B, 31C जोड़े गए। |
| 44वाँ संशोधन 1978 | Art. 19(1)(f) और Art. 31 — हटाए। नया Art. 300-A जोड़ा — Part XII में। "विधि के प्राधिकार के बिना किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।" |
| वर्तमान स्थिति | Legal Right / Constitutional Right — Fundamental Right नहीं। Basic Structure का भाग नहीं। |
Legal Right (Art. 300-A) — क्या होता है
- साधारण कानून से regulate/curtail/modify हो सकता है
- Private property — Executive action से संरक्षण
- HC के Art. 226 से न्याय मिल सकता है
- Compensation की गारंटी नहीं
2 अपवाद — जहाँ Compensation अभी भी गारंटीशुदा
- Art. 30: Minority Educational Institution की property acquisition — Compensation अनिवार्य [44वाँ संशोधन 1978]
- Art. 31A: Personal Cultivation + Statutory Ceiling की जमीन अर्जन — Market Value Compensation [17वाँ संशोधन 1964]
9FR के अपवाद (Art. 31A, 31B, 31C)
| अनुच्छेद | प्रावधान | महत्वपूर्ण Cases |
|---|
| Art. 31A [1st Amendment 1951] | 5 श्रेणियों के कानूनों को Art. 14 और Art. 19 के आधार पर Challenge से बचाता है: (1) Estates का अर्जन; (2) संपत्ति प्रबंधन अपने हाथ लेना; (3) Corporations का विलय; (4) Directors/Shareholders के अधिकार समाप्त/संशोधन; (5) Mining Leases समाप्त/संशोधन। [State law के लिए President's assent जरूरी] | 1st, 4th, 17th, 44th Amendments |
| Art. 31B [1st Amendment 1951] + 9th Schedule | 9वीं अनुसूची में शामिल कानूनों को किसी भी FR के आधार पर Challenge से बचाता है। Art. 31B की scope Art. 31A से broader। [मूलतः 13 laws, अब 282] | Kesavananda Bharati 1973: Basic Structure violation — challenge संभव। Waman Rao 1980: 24 April 1973 के बाद जोड़े laws — review open। IR Coelho 2007: Art. 14,15,19,21 violation या Basic Structure — challenge संभव। |
| Art. 31C [25th Amendment 1971] | Art. 39(b) और (c) — Socialistic DPSP को लागू करने वाले कानून — Art. 14 और Art. 19 के आधार पर void नहीं। Original provision (b) — Kesavananda ने valid माना। 42nd Amendment Extension (सभी DPSP) — Minerva Mills 1980 ने Invalid घोषित किया। [State law के लिए President's assent जरूरी] | Kesavananda 1973; Minerva Mills 1980 |
10मूल अधिकारों की आलोचनाएँ (8 Criticisms)
| आलोचना | तर्क (Critics के अनुसार) |
|---|
| 1. अत्यधिक सीमाएँ (Excessive Limitations) | अनगिनत exceptions, restrictions, qualifications। Jaspat Roy Kapoor: "Limitations on FR" नाम होना चाहिए था। |
| 2. सामाजिक-आर्थिक अधिकारों का अभाव | Right to Social Security, Work, Employment, Rest — नहीं। USSR/China के संविधान में थे। |
| 3. अस्पष्ट भाषा (No Clarity) | "Public order", "minorities", "reasonable restriction", "public interest" — परिभाषित नहीं। Ivor Jennings: "Paradise for Lawyers"। |
| 4. स्थायित्व नहीं (No Permanency) | Parliament curtail/abolish कर सकती है — जैसे 1978 में Property Right हटाया। "Basic Structure" ही एकमात्र सीमा। |
| 5. Emergency में निलंबन | National Emergency में FR (Art. 20, 21 छोड़कर) suspend। "निर्दोष लोगों के अधिकार खतरे में।" |
| 6. महँगा उपचार (Expensive Remedy) | Judicial process — बहुत महँगा। सामान्य नागरिक court नहीं जा सकता — FR अमीरों के लिए। |
| 7. निवारक निरोध (Preventive Detention) | Art. 22 — State को मनमानी शक्ति। व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विरोधी। कोई अन्य लोकतांत्रिक देश ऐसा नहीं। |
| 8. अदर्शन-विरोध (No Consistent Philosophy) | Ivor Jennings: FR किसी दार्शनिक सिद्धांत पर नहीं। Courts के लिए interpretation कठिन। |
11मूल अधिकारों का महत्व (10 Significance)
| क्र. | महत्व (Significance) |
|---|
| 1 | लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला (Bedrock of Democratic System) |
| 2 | व्यक्ति के भौतिक और नैतिक संरक्षण के लिए आवश्यक शर्तें |
| 3 | व्यक्तिगत स्वतंत्रता का शक्तिशाली संरक्षक (Bulwark of Individual Liberty) |
| 4 | देश में विधि के शासन (Rule of Law) की स्थापना में सहायक |
| 5 | अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा |
| 6 | भारतीय राज्य के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे को मजबूत करते हैं |
| 7 | सरकार की शक्ति की निरंकुशता (Absoluteness) पर अंकुश |
| 8 | सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय की आधारशिला |
| 9 | व्यक्ति की गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करते हैं |
| 10 | लोगों की राजनीतिक-प्रशासनिक प्रक्रिया में भागीदारी को सुगम बनाते हैं |
12Part III के बाहर अधिकार (Rights outside Part III)
| अधिकार (Right) | अनुच्छेद (Article) | भाग (Part) |
|---|
| कानून के प्राधिकार के बिना कर नहीं वसूला जाएगा | Art. 265 | Part XII |
| कानून के प्राधिकार के बिना संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा | Art. 300-A | Part XII |
| भारत के राज्यक्षेत्र में व्यापार-वाणिज्य स्वतंत्र रहेगा | Art. 301 | Part XIII |
| Lok Sabha और State Assembly के चुनाव — Adult Suffrage के आधार पर | Art. 326 | Part XV |
FR बनाम Rights outside Part III: FR का उल्लंघन: सीधे SC — Art. 32 (जो स्वयं FR है)। Rights outside Part III का उल्लंघन: Art. 32 नहीं; HC — Art. 226 या साधारण वाद।
Table 8.8 — अनुच्छेद एक नजर में (Art. 12–35)
| अनुच्छेद | विषय |
|---|
| Art. 12 | राज्य की परिभाषा |
| Art. 13 | FR से असंगत या उनका उल्लंघन करने वाले कानून |
| Art. 14 | विधि के समक्ष समानता |
| Art. 15 | धर्म/मूलवंश/जाति/लिंग/जन्म-स्थान पर भेदभाव का निषेध |
| Art. 16 | लोक नियोजन में अवसर की समता |
| Art. 17 | अस्पृश्यता का उन्मूलन |
| Art. 18 | उपाधियों का उन्मूलन |
| Art. 19 | वाक् एवं अभिव्यक्ति आदि की 6 स्वतंत्रताएँ |
| Art. 20 | अपराध सिद्धि के विरुद्ध संरक्षण |
| Art. 21 | जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण |
| Art. 21A | प्रारम्भिक शिक्षा का अधिकार [86वाँ संशोधन 2002] |
| Art. 22 | गिरफ्तारी और निरोध के विरुद्ध संरक्षण |
| Art. 23 | मानव तस्करी और बलात् श्रम का निषेध |
| Art. 24 | कारखानों आदि में बच्चों को काम पर लगाने का निषेध |
| Art. 25 | धर्म की स्वतंत्रता — अंतःकरण, धर्म मानना, पालन, प्रचार |
| Art. 26 | धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता |
| Art. 27 | किसी विशेष धर्म के प्रचार के लिए कर अदा करने से मुक्ति |
| Art. 28 | कुछ शैक्षणिक संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या उपासना में उपस्थिति से मुक्ति |
| Art. 29 | अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण |
| Art. 30 | अल्पसंख्यकों का शैक्षणिक संस्था स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार |
| Art. 31 | संपत्ति का अनिवार्य अर्जन — (Repealed by 44th Amendment 1978) |
| Art. 31A | Estates अर्जन आदि के प्रावधान वाले कानूनों का परित्राण |
| Art. 31B | कुछ अधिनियमों और विनियमनों का सत्यापन (9th Schedule) |
| Art. 31C | कुछ DPSP को प्रभावी करने वाले कानूनों का परित्राण |
| Art. 31D | राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के कानूनों का परित्राण — (Repealed) |
| Art. 32 | इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उपचार (Writs) |
| Art. 32A | State Laws की संवैधानिक वैधता — (Repealed) |
| Art. 33 | सशस्त्र बलों आदि पर इस भाग के अधिकारों का संशोधन |
| Art. 34 | Martial Law प्रवृत्त होने पर इस भाग पर प्रतिबंध |
| Art. 35 | इस भाग के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिए विधान |
★ सारांश (Summary — Part 2)
सभी FR — Quick Reference (Complete)
| FR | Articles | Key Points |
|---|
| समानता (Equality) | 14–18 | Equality before Law (UK); Equal Protection (USA); Rule of Law (Dicey); Reasonable Classification; Abolition of Untouchability; National Awards |
| स्वतंत्रता (Freedom) | 19–22 | 6 Rights Art. 19 (citizens only); Ex-post-facto/Double Jeopardy/Self-incrimination (Art. 20); Life & Liberty (Art. 21) — 39 rights; Education 6-14 yrs (Art. 21A); Arrest Safeguards (Art. 22) |
| शोषण-विरोध | 23–24 | Traffic + Begar + Forced Labour; 14 yr Child Labour Ban; Both vs Private individuals |
| धर्म (Religion) | 25–28 | Conscience + Profess + Practice + Propagate (Art. 25); Denomination rights (Art. 26); No Tax for religion (Art. 27); Religious instruction (Art. 28) |
| सांस्कृतिक/शैक्षणिक | 29–30 | Language/Script/Culture; Minorities: Establish Educational Institutions; Aid discrimination prohibited |
| उपचार (Remedies) | 32 | Art. 32 = "Soul and Heart" (Ambedkar); 5 Writs; SC as Defender |
प्रमुख Case Laws — Part 2
| वाद (Case) | वर्ष | अनुच्छेद | निर्णय |
|---|
| A.K. Gopalan vs. State of Madras | 1950 | Art. 21 | Narrow interpretation — केवल Executive Action से; Procedure Established by Law = कोई भी |
| Maneka Gandhi vs. Union of India | 1978 | Art. 21 | Gopalan overruled; Procedure = Reasonable, Fair, Just; Due Process indirectly |
| Unni Krishnan vs. State of AP | 1993 | Art. 21/21A | 14 वर्ष तक FR to Education (86वें से पहले) |
| K.S. Puttaswamy vs. Union of India | 2017 | Art. 21 | Right to Privacy = FR; 9-judge bench |
| Common Cause vs. Union of India | 2018 | Art. 21 | Passive Euthanasia (गरिमा से मृत्यु) — valid |
| Kesavananda Bharati vs. Kerala | 1973 | Art. 31B | 9th Schedule laws — Basic Structure violation पर challenge संभव |
| Waman Rao vs. Union of India | 1980 | Art. 31B | 24 April 1973 के बाद 9th Schedule में डाले laws — open to review |
| I.R. Coelho vs. State of TN | 2007 | Art. 31B | Art. 14,15,19,21 + Basic Structure — challenge; कोई blanket immunity नहीं |
| Minerva Mills vs. Union of India | 1980 | Art. 31C | 42nd Amendment extension — invalid; FR-DPSP balance = Basic Structure |
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