📖 अध्याय 4/34 — भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

संविधान की प्रस्तावना

Preamble of the Constitution | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय (Introduction)
  2. प्रस्तावना का पाठ (Text of the Preamble)
  3. प्रस्तावना के 4 घटक (Four Ingredients of the Preamble)
  4. प्रस्तावना का महत्व (Significance of the Preamble)
  5. प्रस्तावना: संविधान का भाग है या नहीं? (Is Preamble Part of the Constitution?)
  6. प्रस्तावना की संशोधनीयता (Amendability of the Preamble)

1परिचय (Introduction)

अमेरिकी संविधान पहला था जिसने प्रस्तावना (Preamble) से शुरुआत की। भारत सहित अनेक देशों ने इस परंपरा का अनुसरण किया। "Preamble" शब्द का अर्थ है — संविधान का परिचय या प्रस्तावना (Introduction / Preface)। इसमें संविधान का सार (Essence) होता है।

विद्वान (Scholar)प्रस्तावना के बारे में मत
N.A. Palkhivala ( न्यायविद)Preamble — "संविधान का पहचान-पत्र (Identity Card of the Constitution)"
Thakur Das Bhargavaप्रस्तावना संविधान का सबसे अनमोल भाग है — "soul, key, jewel, yardstick of the Constitution"
K.M. Munshi"हमारे सम्प्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की जन्म-पत्री (Horoscope)"
आधारObjectives Resolution (13 दिसम्बर 1946; Nehru; पारित 22 जनवरी 1947)

42वाँ संशोधन 1976: प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए: समाजवादी (Socialist), धर्म-निरपेक्ष (Secular), और अखंडता (Integrity)। यह एकमात्र संशोधन है जो प्रस्तावना में हुआ।

2प्रस्तावना का पाठ (Text of the Preamble)

भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble of the Indian Constitution)

"हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, [समाजवादी, धर्म-निरपेक्ष,] लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता [और अखण्डता] सुनिश्चित करने वाला बंधुत्व बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।" [ ] — 42वाँ संशोधन 1976 द्वारा जोड़े गए शब्द

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3प्रस्तावना के 4 घटक (Four Ingredients of the Preamble)

क्र.घटक (Ingredient)विवरण
1शक्ति का स्रोत (Source of Authority)संविधान अपनी शक्ति "भारत के लोगों (People of India)" से प्राप्त करता है — "We, THE PEOPLE OF INDIA"
2भारतीय राज्य की प्रकृति (Nature of State)सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य
3संविधान के उद्देश्य (Objectives)न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व
4संविधान अंगीकृत करने की तिथि (Date of Adoption)26 नवम्बर 1949

4–12. प्रमुख शब्दों की व्याख्या (Key Words in the Preamble)

1. संप्रभु SOVEREIGN

भारत किसी अन्य राष्ट्र पर निर्भर (Dependent) नहीं है और न ही किसी का उपनिवेश (Dominion) है। यह एक स्वतंत्र राज्य है जो अपने आंतरिक और बाह्य मामलों को स्वतंत्र रूप से संचालित करता है।

ऐतिहासिक क्रम: 1600-1947: Colony; 15 Aug 1947 – 26 Jan 1950: British Dominion; 26 Jan 1950 से: Sovereign Republic। पाकिस्तान 1956 तक British Dominion रहा।

2. समाजवादी SOCIALIST

42वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया। भारतीय समाजवाद "लोकतांत्रिक समाजवाद (Democratic Socialism)" है — Soviet/Communist Socialism नहीं। यह Mixed Economy का समर्थन करता है।

लोकतांत्रिक समाजवाद (Democratic Socialism)
  • भारत का अपना ब्रांड — "Indian Brand"
  • सार्वजनिक और निजी — दोनों क्षेत्र साथ
  • Mixed Economy में विश्वास
  • Marxism और Gandhism का मिश्रण
  • Nakara Case 1982: गरीबी, अज्ञानता, बीमारी दूर करना
साम्यवादी समाजवाद (Communist/State Socialism)
  • सभी उत्पादन-वितरण का राष्ट्रीयकरण
  • निजी संपत्ति का उन्मूलन
  • USSR मॉडल — राज्य-नियंत्रित
  • भारत ने इसे अस्वीकार किया
  • भारत में यह लागू नहीं

3. धर्म-निरपेक्ष SECULAR

42वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया। हालाँकि SC ने 1974 में कहा — यह शब्द न होने पर भी संविधान धर्मनिरपेक्ष था। Art. 25-28 इसे मूल अधिकार के रूप में सुनिश्चित करते हैं।

राज्य का प्रकारविशेषताउदाहरण
नास्तिक राज्य (Atheistic State)धर्म-विरोधी — सभी धर्मों की निंदा
धर्मशासित राज्य (Theocratic State)एक विशेष धर्म राज्य का आधिकारिक धर्मBangladesh, Myanmar, Sri Lanka, Pakistan
धर्मनिरपेक्ष राज्य (Secular State)धर्म के मामले में तटस्थ — कोई राजधर्म नहींUSA, India

भारतीय धर्मनिरपेक्षता — सकारात्मक अवधारणा (Positive Concept): सभी धर्मों को समान स्थिति और समर्थन (Equal Status and Support) प्राप्त है — पश्चिम की तरह धर्म-राजनीति का पूर्ण पृथक्करण नहीं।

Former CJI P.B. Gajendragadkar: धर्मनिरपेक्षता का अर्थ: "The State does not owe loyalty to any particular religion; it is not irreligious or anti-religious; it gives equal freedom to all religions."

4. लोकतांत्रिक DEMOCRATIC

लोकप्रिय संप्रभुता (Popular Sovereignty) का सिद्धांत — सर्वोच्च शक्ति जनता में। "Democracy" — Greek शब्द Demos (People) + Kratia (Rule) से। Preamble में "Democratic" का अर्थ — केवल राजनीतिक नहीं, सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी।

प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy)
  • जनता सीधे सर्वोच्च शक्ति का उपयोग करती है
  • उदाहरण: स्विट्जरलैंड (Switzerland)
  • 4 उपकरण: Referendum, Initiative, Recall, Plebiscite
  • भारत में लागू नहीं
अप्रत्यक्ष लोकतंत्र (Indirect / Representative Democracy)
  • जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि सर्वोच्च शक्ति का उपयोग करते हैं
  • दो प्रकार: Parliamentary और Presidential
  • भारत: प्रतिनिधिक संसदीय लोकतंत्र
  • Universal Adult Franchise + Rule of Law
प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उपकरणअर्थ
Referendum (जनमत संग्रह)किसी प्रस्तावित कानून को जनता के प्रत्यक्ष मत के लिए भेजना
Initiative (पहल)जनता के पास किसी विधेयक को विधायिका के पास प्रस्तुत करने की प्रक्रिया
Recall (वापस बुलाना)मतदाता किसी प्रतिनिधि या अधिकारी को कार्यकाल समाप्त होने से पहले हटा सकते हैं
Plebiscite (मतदान)किसी सार्वजनिक महत्व के मुद्दे — विशेषतः क्षेत्रीय विवाद — पर जनमत प्राप्त करने की विधि

Dr. Ambedkar (25 नवम्बर 1949, Constituent Assembly में)

"राजनीतिक लोकतंत्र (Political Democracy) तब तक नहीं टिकेगा जब तक उसके मूल में सामाजिक लोकतंत्र (Social Democracy) न हो। सामाजिक लोकतंत्र का अर्थ है — स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व को जीवन-पद्धति के रूप में अपनाना। ये तीनों अलग-अलग नहीं हैं — ये त्रिमूर्ति की एकता हैं। स्वतंत्रता को समता से अलग करने पर कुछ लोगों की सर्वोच्चता बनती है। समता को स्वतंत्रता से अलग करने पर व्यक्तिगत पहल नष्ट हो जाती है।"

SC 1997: "संविधान का लक्ष्य है — एक समतावादी सामाजिक व्यवस्था (Egalitarian Social Order) की स्थापना जो प्रत्येक नागरिक को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय दे।"

5. गणराज्य REPUBLIC

राज्य का प्रमुख सदा निर्वाचित (Elected) होता है

राजतंत्र (Monarchy)
  • राज्य का प्रमुख वंशानुगत (Hereditary) होता है
  • उत्तराधिकार से पद प्राप्त होता है
  • उदाहरण: ब्रिटेन (Britain)
  • निर्वाचित नहीं होता
  • विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग हो सकता है
गणराज्य (Republic)
  • राज्य का प्रमुख सदा
  • निर्वाचित (Elected) होता है
  • निश्चित अवधि (Fixed Period) के लिए
  • भारत में: राष्ट्रपति — अप्रत्यक्ष निर्वाचन — 5 वर्ष
  • राजनीतिक संप्रभुता जनता में — विशेषाधिकृत वर्ग नहीं

6. न्याय JUSTICE

प्रस्तावना में न्याय की तीन अलग-अलग अवधारणाएँ: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक — इन्हें Fundamental Rights और DPSP के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है। स्रोत: रूसी क्रांति 1917।

न्याय का प्रकारअर्थसंवैधानिक प्रावधान
सामाजिक न्याय (Social Justice)जाति, रंग, नस्ल, धर्म, लिंग के आधार पर कोई सामाजिक भेदभाव नहीं। पिछड़े वर्गों (SC/ST/OBC), महिलाओं की स्थिति में सुधार।Art. 14, 15, 16, 17, 18
आर्थिक न्याय (Economic Justice)आर्थिक कारणों से भेदभाव नहीं। धन, आय और संपत्ति में घोर असमानता का उन्मूलन।Art. 39 (DPSP) — Equal Pay
राजनीतिक न्याय (Political Justice)सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार। सभी राजनीतिक पदों तक समान पहुँच। सरकार में समान आवाज।Art. 325, 326

वितरणात्मक न्याय (Distributive Justice) = सामाजिक न्याय + आर्थिक न्याय का संयोजन।

स्रोत: न्याय (Social, Economic, Political) की अवधारणा रूसी क्रांति 1917 (Russian Revolution 1917) से ली गई है।

7. स्वतंत्रता LIBERTY

व्यक्तियों की गतिविधियों पर अनुचित प्रतिबंधों का अभाव और व्यक्तित्व विकास के अवसर। प्रस्तावना पाँच प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान करती है। स्रोत: फ्रांसीसी क्रांति 1789।

स्वतंत्रता का प्रकारअर्थ एवं महत्व
विचार की स्वतंत्रता (Liberty of Thought)प्रत्येक व्यक्ति अपने मन में स्वतंत्र रूप से सोच सकता है
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Liberty of Expression)अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त करना — Art. 19(1)(a)
विश्वास की स्वतंत्रता (Liberty of Belief)किसी भी सिद्धांत या विचारधारा में विश्वास करने की छूट
धर्म की स्वतंत्रता (Liberty of Faith)किसी भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता — Art. 25
उपासना की स्वतंत्रता (Liberty of Worship)किसी भी तरीके से पूजा-उपासना करने की स्वतंत्रता

8. समता EQUALITY

विशेष वर्गों को कोई विशेषाधिकार नहीं और सभी के लिए पर्याप्त अवसर। प्रस्तावना "प्रतिष्ठा और अवसर की समता" प्रदान करती है — तीन आयाम: नागरिक, राजनीतिक और आर्थिक।

समता का आयामअनुच्छेदविवरण
नागरिक समता (Civic Equality)Art. 14कानून के समक्ष समानता (Equality before Law)
Art. 15धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान पर भेदभाव निषेध
Art. 16सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता
Art. 17अस्पृश्यता का उन्मूलन (Abolition of Untouchability)
Art. 18उपाधियों का उन्मूलन (Abolition of Titles)
राजनीतिक समता (Political Equality)Art. 325धर्म/जाति/लिंग के आधार पर मतदाता सूची से बाहर नहीं
Art. 326Lok Sabha और State Legislature — Adult Suffrage का आधार
आर्थिक समता (Economic Equality)Art. 39 (DPSP)समान काम के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work)

9. बंधुत्व FRATERNITY

भाईचारे की भावना (Sense of Brotherhood)। प्रस्तावना में बंधुत्व दो चीजें सुनिश्चित करता है: व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता-अखंडता। "Integrity" 42वें संशोधन 1976 से जोड़ा।

4प्रस्तावना का महत्व (Significance of the Preamble)

प्रस्तावना में संविधान का मूलभूत दर्शन और मूल्य — राजनीतिक, नैतिक और धार्मिक — समाहित हैं। यह संविधान सभा के महान और उदात्त दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित करती है।

विद्वान (Scholar)पद (Position)महत्वपूर्ण कथन
N.A. Palkhivala著名 न्यायविद एवं संविधान विशेषज्ञ"Identity Card of the Constitution" — पहचान-पत्र
K.M. MunshiDrafting Committee के सदस्य"Horoscope of our Sovereign Democratic Republic" — जन्म-पत्री
Thakur Das BhargavaConstituent Assembly के सदस्य"Preamble is the most precious part — soul, key, jewel, yardstick of the Constitution."
Sir Ernest Barkerअंग्रेज राजनीति-वैज्ञानिक"Key-note to the Constitution"। इतने प्रभावित हुए कि अपनी पुस्तक (1951) में इसे उद्धृत किया।
M. HidayatullahFormer Chief Justice of India"Preamble is the soul of our Constitution — यह जीवन का वह नमूना है जिसे कोई क्रांति ही बदल सकती है।"
Alladi Krishnaswami IyerConstituent Assembly के सदस्य"Our Preamble expresses what we had thought or dreamt so long"
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5प्रस्तावना: संविधान का भाग है या नहीं? (Is Preamble Part of the Constitution?)

यह एक विवादास्पद प्रश्न है जिसका निर्णय SC ने तीन महत्वपूर्ण वादों में किया:

वाद (Case)वर्षनिर्णय (Decision)
Berubari Union Case (Reference under Art. 143)1960SC ने कहा — प्रस्तावना, संविधान के निर्माताओं के मस्तिष्क की कुंजी (Key) है लेकिन यह संविधान का भाग नहीं है।
Kesavananda Bharati vs. State of Kerala1973 (13 ججों की Bench)SC ने Berubari का मत पलट दिया — प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग (Integral Part) है। इसे संविधान की भव्य और उदात्त दृष्टि के प्रकाश में पढ़ा जाना चाहिए।
LIC of India vs. Consumer Education and Research Centre1995SC ने पुनः पुष्टि की — प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग (Integral Part) है।
प्रस्तावना के बारे में क्या सत्य है
  • संविधान सभा ने इसे पारित किया — अन्य प्रावधानों के बाद
  • Constituent Assembly President ने कहा: "Preamble stands part of the Constitution"
  • Kesavananda (1973) के बाद: संविधान का भाग है
  • संवैधानिक व्याख्या में उपयोगी
प्रस्तावना के बारे में क्या सत्य नहीं है
  • विधायिका को शक्ति का स्रोत नहीं
  • विधायिका पर प्रतिबंध भी नहीं
  • Non-Justiciable — न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं
  • केवल व्याख्या में सहायक

6प्रस्तावना की संशोधनीयता (Amendability of the Preamble)

क्या प्रस्तावना को Art. 368 के अंतर्गत संशोधित किया जा सकता है? यह प्रश्न Kesavananda Bharati Case (1973) में उठा।

प्रश्नSC का उत्तर (Kesavananda Bharati 1973)
क्या प्रस्तावना संविधान का भाग है?हाँ — प्रस्तावना संविधान का भाग है। Berubari (1960) का मत गलत था।
क्या इसे संशोधित किया जा सकता है?हाँ — प्रस्तावना को Art. 368 के अंतर्गत संशोधित किया जा सकता है।
क्या कोई सीमा है?हाँ — "मूल संरचना (Basic Features/Basic Structure)" को नहीं बदला जा सकता। प्रस्तावना के मूलभूत तत्वों को Amendment से नष्ट नहीं किया जा सकता।
अब तक कितनी बार संशोधन हुआ?केवल एक बार — 42वाँ संशोधन 1976 — Socialist, Secular, Integrity जोड़े। यह संशोधन वैध माना गया।

SC का ऐतिहासिक वक्तव्य (Kesavananda 1973): "हमारे संविधान की इमारत प्रस्तावना में उल्लिखित मूलभूत तत्वों (Basic Elements) पर टिकी है। यदि इनमें से कोई तत्व हटा दिया जाए तो यह ढाँचा ध्वस्त हो जाएगा और यह वही संविधान नहीं रहेगा। संसद की संशोधन शक्ति (Amending Power) को इस प्रकार नहीं पढ़ा जा सकता कि वह इन मूलभूत विशेषताओं को समाप्त कर सके।"

42वें संशोधन 1976 से पहले
  • "Sovereign Democratic Republic"
  • केवल 3 शब्द — Sovereign, Democratic, Republic
  • "Unity of the Nation"
  • Integrity शब्द नहीं था
  • Socialist और Secular नहीं थे
42वें संशोधन 1976 के बाद
  • "Sovereign Socialist Secular Democratic Republic"
  • 6 शब्द — Socialist, Secular जोड़े
  • "Unity and Integrity of the Nation"
  • अखंडता (Integrity) जोड़ी गई
  • Indira Gandhi सरकार द्वारा Emergency काल में

★ सारांश (Summary)

9 प्रमुख शब्द — एक नजर में (9 Keywords at a Glance)

शब्द (Keyword)42वाँ संशोधन?मुख्य विशेषतास्रोत / Case Law
संप्रभु (Sovereign)मूल से (1949)बाह्य/आंतरिक नियंत्रण से स्वतंत्र; Commonwealth/UNO से संप्रभुता पर कोई प्रभाव नहीं1947 — स्वतंत्रता; 1950 — गणराज्य
समाजवादी (Socialist)हाँ — 1976Democratic Socialism; Mixed Economy; Marxism + GandhismNakara Case 1982; NEP 1991 से कमजोर
धर्मनिरपेक्ष (Secular)हाँ — 1976Positive Secularism — सभी धर्मों को समान आदरSC 1974: शब्द बिना भी secular था
लोकतांत्रिक (Democratic)मूल से (1949)Popular Sovereignty; Representative Parliamentary DemocracyDr. Ambedkar: Political + Social Democracy
गणराज्य (Republic)मूल से (1949)निर्वाचित राज्य-प्रमुख — Hereditary नहींPresident — 5 वर्ष; Indirect Election
न्याय (Justice)मूल से (1949)Social + Economic + Political JusticeRussian Revolution 1917; Distributive Justice
स्वतंत्रता (Liberty)मूल से (1949)5 Liberties; FR द्वारा Justiciable; Absolute नहींFrench Revolution 1789-1799
समता (Equality)मूल से (1949)Civic (Art. 14-18) + Political (Art. 325-26) + Economic (Art. 39)French Revolution; Art. 14-18
बंधुत्व (Fraternity)Integrity — 1976 सेBrotherhood; Dignity + Unity + IntegrityK.M. Munshi; Art. 51-A; Single Citizenship

प्रमुख Case Laws और Scholars

विषयमहत्वपूर्ण तथ्य
Berubari Union Case 1960प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं (यह मत बाद में गलत ठहरा)
Kesavananda Bharati Case 1973प्रस्तावना संविधान का भाग है; संशोधन योग्य है लेकिन Basic Structure नष्ट नहीं
LIC of India Case 1995प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग — पुष्टि
42वाँ संशोधन 1976Socialist + Secular + Integrity — तीन नए शब्द; एकमात्र संशोधन
N.A. PalkhivalaIdentity Card of the Constitution
K.M. MunshiHoroscope of our Sovereign Democratic Republic
Thakur Das BhargavaSoul, Key, Jewel, Yardstick of the Constitution
Sir Ernest BarkerKey-note to the Constitution; अपनी पुस्तक (1951) में उद्धृत किया
M. HidayatullahSoul of our Constitution — क्रांति ही बदल सकती है
Non-Justiciableप्रस्तावना न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं; विधायिका को शक्ति/प्रतिबंध नहीं
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