🎨 अध्याय 6/10 — भारतीय कला एवं संस्कृति

चित्रकला परंपराएँ

Mural, Miniature & Modern Painting Traditions | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. भारतीय चित्रकला परंपरा — परिचय एवं काल-विभाजन
  2. चित्रकला का सैद्धांतिक आधार — षडंग (चित्रसूत्र)
  3. भित्ति चित्रकला — अजंता की गुफाएँ
  4. भित्ति चित्रकला — एलोरा की गुफाएँ
  5. बाघ एवं अन्य भित्ति चित्रकला स्थल
  6. लघु चित्रकला — प्रारंभिक परंपराएँ (पाल एवं जैन शैली)
  7. मुगल लघु चित्रकला शैली
  8. राजस्थानी (राजपूत) चित्रकला — मेवाड़ एवं हाड़ौती शैली
  9. किशनगढ़ शैली — बनी ठनी
  10. बीकानेर, जोधपुर एवं जयपुर शैलियाँ
  11. पहाड़ी चित्रकला शैली (बसोहली, गुलेर, कांगड़ा)
  12. दक्कनी चित्रकला शैली
  13. सभी लघु चित्रकला शैलियों की तुलनात्मक तालिका
  14. ब्रिटिश काल की चित्रकला — कंपनी शैली
  15. बंगाल स्कूल एवं आधुनिक भारतीय चित्रकला का प्रारंभ
  16. राजस्थान की लोक चित्रकला परंपराएँ
  17. हालिया शोध एवं करेंट अफेयर्स

सोचो लगभग 1500 साल पहले एक बौद्ध भिक्षु अजंता की अंधेरी गुफा में मशाल व दर्पण से परावर्तित रोशनी के सहारे दीवार पर पद्मपाणि बोधिसत्व का चित्र बना रहा है — इतनी बारीकी से कि आज 1500 साल बाद भी उस चेहरे की करुणा हमें छू जाती है। यही परंपरा आगे चलकर मुगल दरबारों की चमकदार लघु चित्रकला में, राजस्थान के किशनगढ़ की 'बनी ठनी' में, और अंततः बंगाल स्कूल के स्वदेशी आंदोलन में विकसित हुई। यह अध्याय भित्ति चित्रकला से लेकर आधुनिक भारतीय चित्रकला तक — इसी पूरी यात्रा को कवर करता है।

1भारतीय चित्रकला परंपरा — परिचय एवं काल-विभाजन

भारतीय चित्रकला को व्यापक रूप से तीन कालों में बाँटा जा सकता है — नीचे तालिका में संक्षिप्त परिचय देखें:

कालप्रमुख शैली
प्राचीन एवं प्रारंभिक-मध्यकालभित्ति चित्रकला (Mural Painting) — अजंता, एलोरा, बाघ, सित्तनवासल
मध्यकाल (सल्तनत-मुगल-राजपूत)लघु चित्रकला (Miniature Painting) — मुगल, राजस्थानी, पहाड़ी, दक्कनी शैलियाँ
ब्रिटिश काल एवं आधुनिक कालकंपनी शैली, बंगाल स्कूल एवं आधुनिक भारतीय चित्रकला का प्रारंभ

2चित्रकला का सैद्धांतिक आधार — षडंग (चित्रसूत्र)

जिस प्रकार नाट्यशास्त्र प्रदर्शनकारी कला का सैद्धांतिक आधार है, उसी प्रकार 'विष्णुधर्मोत्तर पुराण' के 'चित्रसूत्र' खंड में चित्रकला के छह मूल सिद्धांत बताए गए हैं, जिन्हें 'षडंग' (Six Limbs of Painting) कहा जाता है:

अंग (Limb)अर्थ
रूपभेद (Rupabheda)विभिन्न आकृतियों व रूपों में अंतर पहचानने की क्षमता
प्रमाणम् (Pramanam)सही अनुपात व माप का ज्ञान
भाव (Bhava)भावनाओं व मनोभावों की अभिव्यक्ति
लावण्ययोजनम् (Lavanya Yojanam)सौंदर्य व आकर्षण का सृजन
सादृश्यम् (Sadrisyam)विषय-वस्तु से यथार्थ समानता
वर्णिकाभंग (Varnikabhanga)रंग व ब्रश के मिश्रण की तकनीक

3भित्ति चित्रकला — अजंता की गुफाएँ

भित्ति चित्रकला (Mural Painting) दीवारों/छतों पर सीधे बनाई गई चित्रकारी है — भारत की सबसे प्रसिद्ध भित्ति चित्रकला महाराष्ट्र की अजंता गुफाओं में मिलती है।

पहलूविवरण
स्थानऔरंगाबाद ज़िला, महाराष्ट्र
गुफा संख्याकुल 30 शैलकृत (rock-cut) गुफाएँ
धार्मिक संबद्धताबौद्ध धर्म — हीनयान व महायान, दोनों चरणों की गुफाएँ शामिल
खोज1819 में एक ब्रिटिश अधिकारी जॉन स्मिथ द्वारा बाघ-शिकार के दौरान संयोगवश खोजी गई
तकनीक'फ्रेस्को-सेको' (सूखे प्लास्टर पर चित्रकारी) — सत्य फ्रेस्को (गीले प्लास्टर पर) नहीं
विषय-वस्तुजातक कथाएँ, बुद्ध का जीवन-चरित्र, दरबारी व सामाजिक जीवन के दृश्य
प्रसिद्ध चित्रपद्मपाणि बोधिसत्व व वज्रपाणि बोधिसत्व (गुफा संख्या 1)
UNESCO मान्यता1983 में UNESCO विश्व धरोहर घोषित

4भित्ति चित्रकला — एलोरा की गुफाएँ

अजंता से लगभग 100 किमी दूर स्थित एलोरा अपनी वास्तुकला के लिए अधिक प्रसिद्ध है, परंतु यहाँ चित्रकला के भी सीमित अवशेष मिलते हैं — इसकी सबसे बड़ी विशेषता है तीन अलग-अलग धर्मों की गुफाओं का एक साथ होना:

पहलूविवरण
गुफा संख्याकुल 34 शैलकृत गुफाएँ
धार्मिक विविधतागुफा 1-12 (बौद्ध), गुफा 13-29 (हिन्दू), गुफा 30-34 (जैन) — तीनों धर्मों की गुफाएँ एक साथ, यह भारत में अद्वितीय है
कैलाश मंदिर (गुफा 16)एक ही चट्टान को ऊपर से नीचे तराशकर बनाई गई विश्व की सबसे बड़ी एकाश्म (monolithic) रॉक-कट संरचना
UNESCO मान्यता1983 में UNESCO विश्व धरोहर घोषित
💡 उदाहरण (Example)

सोचो एलोरा एक ऐसी जगह है, जहाँ एक ही पहाड़ी में अलग-अलग समय में बौद्ध भिक्षुओं, हिन्दू शिल्पकारों व जैन साधुओं ने अपनी-अपनी आस्था के अनुसार गुफाएँ तराशीं — जैसे कोई एक ही किताब में अलग-अलग भाषाओं के तीन अलग-अलग अध्याय लिखे गए हों, फिर भी वह किताब एक साथ बँधी हो। यही एलोरा को भारत की धार्मिक सहिष्णुता व स्थापत्य-विविधता का सबसे बड़ा प्रतीक बनाता है।

5बाघ एवं अन्य भित्ति चित्रकला स्थल

अजंता-एलोरा के अतिरिक्त भारत में कुछ अन्य महत्वपूर्ण भित्ति चित्रकला स्थल भी हैं:

स्थलराज्यविशेषता
बाघ गुफाएँमध्य प्रदेशबौद्ध गुफाएँ; अजंता से मिलती-जुलती परंतु दरबारी/सांसारिक जीवन के दृश्य अधिक प्रमुखता से चित्रित
सित्तनवासल गुफातमिलनाडुजैन गुफा; छत पर बना कमल-सरोवर (lotus pond) चित्र सबसे प्रसिद्ध
बादामी गुफाएँकर्नाटकचालुक्य काल; मुख्यतः वैष्णव विषयों पर आधारित चित्रकारी
अरमामलाई गुफातमिलनाडुजैन गुफा चित्रकारी का उदाहरण
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6लघु चित्रकला — प्रारंभिक परंपराएँ (पाल एवं जैन शैली)

लघु चित्रकला (Miniature Painting) — छोटे आकार की, प्रायः पांडुलिपियों (manuscripts) में बनाई गई चित्रकारी — की शुरुआत भित्ति चित्रकला के बाद हुई। इसकी दो सबसे प्रारंभिक परंपराएँ नीचे देखें:

शैलीकाल/क्षेत्रविशेषता
पाल शैली8वीं-12वीं सदी, बंगाल-बिहारबौद्ध पांडुलिपियों का चित्रण; ताड़पत्र (palm leaf) पर बनाई गई
पश्चिम भारतीय/जैन शैली12वीं-16वीं सदी, गुजरात-राजस्थानजैन 'कल्पसूत्र' जैसी पांडुलिपियों का चित्रण; कोणीय (angular) चेहरे व चेहरे से बाहर निकली हुई आँख (protruding eye) इसकी विशिष्ट पहचान; चमकीले रंग व सोने का प्रयोग

7मुगल लघु चित्रकला शैली

मुगल शासकों के दरबारी संरक्षण में लघु चित्रकला अपने चरम पर पहुँची — हर शासक के काल में शैली में विशिष्ट बदलाव आया:

शासकयोगदान
हुमायूँफारस से चित्रकार मीर सैयद अली व अब्दुस्समद को भारत लाए — मुगल शैली की सैद्धांतिक नींव यहीं पड़ी
अकबरबड़े पैमाने पर शाही चित्रशाला (karkhana) की स्थापना; हम्ज़ानामा, अकबरनामा व तूतीनामा जैसी भव्य सचित्र पांडुलिपियाँ; हिन्दू-मुस्लिम चित्रकारों की संयुक्त कार्यशाला-पद्धति
जहाँगीरप्रकृतिवाद (naturalism) व एकल व्यक्ति-चित्रण (portraiture) पर विशेष बल; उस्ताद मंसूर पशु-पक्षी चित्रण में सिद्धहस्त कलाकार के रूप में प्रसिद्ध
शाहजहाँअधिक औपचारिक व स्थिर दरबारी दृश्य; रंगों में संयम व समरूपता
औरंगज़ेबराजकीय संरक्षण में भारी कमी — इस कारण कई कुशल चित्रकार दरबार छोड़कर राजस्थानी व पहाड़ी रियासतों में शरण लेने चले गए, जिससे उन क्षेत्रीय शैलियों को नई ऊर्जा मिली

8राजस्थानी (राजपूत) चित्रकला — मेवाड़ एवं हाड़ौती शैली

मुगल शैली के समानांतर राजस्थान की राजपूत रियासतों में भी अपनी विशिष्ट चित्रकला शैलियाँ विकसित हुईं — RAS परीक्षा में यह भाग विशेष महत्वपूर्ण है।

शैलीकेंद्रविशेषता
मेवाड़ शैलीचित्तौड़/उदयपुरचटख व गहरे रंगों (लाल-पीले) का प्रयोग; रागमाला व रसिकप्रिया जैसे विषयों का चित्रण; प्रारंभिक चित्रों पर पश्चिम भारतीय/जैन शैली का प्रभाव
बूंदी-कोटा (हाड़ौती) शैलीबूंदी व कोटाशिकार-दृश्य व हरे-भरे घने जंगल/परिदृश्य का सजीव चित्रण; स्त्री-सौंदर्य व दरबारी जीवन के दृश्य भी लोकप्रिय

9किशनगढ़ शैली — बनी ठनी

राजस्थानी शैलियों में किशनगढ़ शैली अपनी एक अनूठी पहचान रखती है — इसकी सबसे प्रसिद्ध कृति 'बनी ठनी' को अक्सर 'भारत की मोनालिसा' कहा जाता है।

पहलूविवरण
संरक्षकराजा सावंत सिंह (कवि-नाम 'नागरीदास')
चित्रकारनिहालचंद (1710-1782)
'बनी ठनी' चित्रराधा-कृष्ण भाव में राजा सावंत सिंह व उनकी प्रेमिका बनी ठनी का चित्रण; लंबा चेहरा, धनुषाकार भौंहें, कमल-जैसी लंबी आँखें — दिव्य सौंदर्य दर्शाने हेतु जानबूझकर अतिरंजित (elongated) रूप
राष्ट्रीय पहचान1973 में भारत सरकार द्वारा इस चित्र पर एक स्मारक डाक-टिकट जारी किया गया

10बीकानेर, जोधपुर एवं जयपुर शैलियाँ

राजस्थान की शेष प्रमुख चित्रकला शैलियाँ नीचे देखें:

शैलीविशेषता
बीकानेर शैलीराजस्थानी शैलियों में मुगल शैली का सर्वाधिक प्रत्यक्ष प्रभाव; चित्रकार उस्ताद अली रज़ा जैसे मुगल-प्रशिक्षित कलाकारों का योगदान
जोधपुर (मारवाड़) शैलीसशक्त व गहरे रंग; स्थानीय लोक-शैली व मुगल प्रभाव का मिश्रण
जयपुर शैलीसवाई जयसिंह के संरक्षण में विकसित; लघु चित्रों के साथ-साथ बड़े आकार के भित्ति-चित्र (जैसे हवेलियों में) भी प्रचलित

11पहाड़ी चित्रकला शैली (बसोहली, गुलेर, कांगड़ा)

हिमालय की तराई में स्थित पहाड़ी रियासतों (जम्मू से लेकर हिमाचल प्रदेश तक) में भी औरंगज़ेब के बाद बिखरे मुगल कलाकारों के प्रभाव से एक समृद्ध शैली विकसित हुई:

उप-शैलीक्षेत्रविशेषता
बसोहली शैलीजम्मू क्षेत्रतीव्र व गहरे रंगों का प्रयोग; आभूषणों को दर्शाने हेतु भृंग (beetle) के पंखों के हरे रंग का अनूठा प्रयोग
गुलेर शैलीहिमाचल प्रदेशबसोहली की तीव्रता से हटकर अधिक कोमल व प्राकृतिक (naturalistic) शैली की शुरुआत — इसे 'कांगड़ा शैली का वसंत' कहा जाता है
कांगड़ा शैलीहिमाचल प्रदेशअत्यंत कोमल, गीतात्मक (lyrical) व प्रवाहमय रेखाएँ; राधा-कृष्ण प्रेम-प्रसंग प्रमुख विषय; चित्रकार नैनसुख इस शैली के प्रमुख कलाकार
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12दक्कनी चित्रकला शैली

दक्षिण भारत की दक्कन सल्तनतों (Chapter 04 में पढ़ीं) के दरबारों में भी एक विशिष्ट चित्रकला शैली विकसित हुई, जो फारसी, स्थानीय दक्कनी व यूरोपीय — तीनों प्रभावों का मिश्रण थी:

केंद्रविशेषता
अहमदनगर व बीजापुरफारसी-दक्कनी-यूरोपीय तत्वों का मिश्रण; समृद्ध व गहरे रंगों का प्रयोग
गोलकुंडाअत्यंत समृद्ध रंग-योजना; लंबी व सुंदर मानव-आकृतियाँ; स्वर्ण-कार्य की प्रचुरता

13सभी लघु चित्रकला शैलियों की तुलनात्मक तालिका

RAS मुख्य परीक्षा में अलग-अलग लघु चित्रकला शैलियों को एक साथ तुलनात्मक रूप से पूछा जाना बहुत सामान्य है — नीचे एक संक्षिप्त 'मास्टर-टेबल' दी गई है:

शैली समूहक्षेत्रमुख्य पहचान
मुगल शैलीदिल्ली-आगरा (शाही दरबार)फारसी-भारतीय मिश्रण; प्रकृतिवाद व दरबारी यथार्थवाद
राजस्थानी (राजपूत) शैलीमेवाड़, हाड़ौती, किशनगढ़, बीकानेर, जयपुर आदिचटख रंग; भक्ति (कृष्ण-लीला), रागमाला व शिकार जैसे विषय
पहाड़ी शैलीजम्मू से हिमाचल तक (बसोहली, गुलेर, कांगड़ा)बसोहली की तीव्रता से कांगड़ा की कोमल गीतात्मकता तक विकास
दक्कनी शैलीअहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडाफारसी-दक्कनी-यूरोपीय मिश्रण; समृद्ध रंग-योजना

14ब्रिटिश काल की चित्रकला — कंपनी शैली

18वीं-19वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों के संरक्षण में भारतीय चित्रकारों ने एक नई मिश्रित शैली विकसित की, जिसे 'कंपनी शैली' (Company Style/Painting) कहा जाता है:

पहलूविवरण
काललगभग 18वीं सदी मध्य से 19वीं सदी तक
संरक्षकब्रिटिश अधिकारी व व्यापारी
विषय-वस्तुभारतीय वनस्पति-जीव-जंतु (flora-fauna), स्मारक, त्योहार, व्यवसाय व सामाजिक जीवन का दस्तावेज़ीकरण
तकनीकयूरोपीय जलरंग (watercolor) तकनीक व परिप्रेक्ष्य (perspective) के साथ भारतीय लघु चित्रकला शैली का मिश्रण
प्रमुख केंद्रकोलकाता, पटना, दिल्ली, मुर्शिदाबाद, तंजावुर

15बंगाल स्कूल एवं आधुनिक भारतीय चित्रकला का प्रारंभ

19वीं सदी के अंत तक भारतीय चित्रकला पर पश्चिमी अकादमिक यथार्थवाद (Western Academic Realism) का गहरा प्रभाव पड़ चुका था — इसी दौर में दो समानांतर धाराएँ उभरीं:

पहलूविवरण
राजा रवि वर्मायूरोपीय तैल-चित्रण (oil painting) तकनीक को भारतीय पौराणिक विषयों के साथ जोड़ने वाले अग्रणी चित्रकार; इन्हें प्रायः 'आधुनिक भारतीय चित्रकला का जनक' कहा जाता है; इनके चित्रों की सस्ती छापें (oleographs) घर-घर पहुँचीं
बंगाल स्कूल — पृष्ठभूमिराजा रवि वर्मा की पाश्चात्य-शैली के विरुद्ध एक 'स्वदेशी' प्रतिक्रिया के रूप में उभरा — स्वदेशी आंदोलन के सांस्कृतिक समानांतर के रूप में देखा जाता है
संस्थापकअवनींद्रनाथ टैगोर
तकनीक'वॉश तकनीक' (Wash Technique) — जापानी चित्रकला शैली से प्रभावित, हल्के व पारदर्शी रंगों की परतें
प्रसिद्ध चित्र'भारत माता' (Bharat Mata) — अवनींद्रनाथ टैगोर द्वारा निर्मित, स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक चित्र बना
समर्थक/अन्य कलाकारई.बी. हैवेल (कला-प्रशासक जिन्होंने आंदोलन को संस्थागत समर्थन दिया); नंदलाल बोस (शांतिनिकेतन से जुड़े प्रमुख कलाकार)

16राजस्थान की लोक चित्रकला परंपराएँ

दरबारी लघु चित्रकला के अतिरिक्त राजस्थान की अपनी समृद्ध लोक चित्रकला परंपराएँ भी हैं, जो आज भी जीवंत हैं:

शैलीक्षेत्रविशेषता
फड़ चित्रकलाशाहपुरा, भीलवाड़ाकपड़े पर बनाई गई विशाल स्क्रॉल-चित्रकारी; लोकदेवता पाबूजी व देवनारायण की गाथाओं का चित्रण; भोपा-भोपी (गायक-पुजारी) द्वारा रात में गाकर कथा-वाचन के साथ प्रदर्शित; परंपरागत रूप से जोशी परिवार द्वारा निर्मित; इसके GI (भौगोलिक संकेतक) टैग हेतु 2024 में आवेदन दाखिल
पिछवाई चित्रकलानाथद्वाराश्रीनाथजी मंदिर की पृष्ठभूमि हेतु कपड़े पर चित्रित भव्य धार्मिक चित्र; कृष्ण-लीला व त्योहारों के दृश्य प्रमुख विषय
मांडनासंपूर्ण राजस्थान (ग्रामीण क्षेत्र)त्योहारों व शुभ अवसरों पर स्त्रियों द्वारा घर की दीवारों व फर्श पर बनाई जाने वाली ज्यामितीय अल्पना/रंगोली शैली की चित्रकारी

17हालिया शोध एवं करेंट अफेयर्स

नीचे दी गई तालिका इस अध्याय से जुड़े हालिया शोध व करेंट अफेयर्स को एक जगह दर्शाती है:

घटनावर्षमुख्य महत्व
फड़ चित्रकला (राजस्थान) हेतु GI टैग आवेदन2024भीलवाड़ा-शाहपुरा की फड़ चित्रकला की मौलिकता व कारीगरों के हितों की सुरक्षा हेतु आवेदन दाखिल
श्री लाल जोशी को पद्मश्री सम्मानपूर्व में सम्मानितफड़ चित्रकला के पुनरुद्धार व शाहपुरा में 'जोशी कला कुंज' की स्थापना हेतु राष्ट्रीय सम्मान
अजंता-एलोरा संरक्षण पहलसमकालीनASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) द्वारा भित्ति-चित्रों के रंग-क्षरण (fading) रोकने हेतु निरंतर वैज्ञानिक संरक्षण कार्य
❝ उद्धरण (Quote)
"राजपूत चित्रकला केवल दरबारी कला नहीं, बल्कि भारतीय जन-जीवन की आत्मा व लोक-भावना का सजीव प्रतिबिंब है।" — आनंद कुमारस्वामी (Ananda K. Coomaraswamy), कला-इतिहासकार — 'Rajput Painting' (1916) के भावार्थ पर आधारित
✍️ उत्तर लेखन कोण (Mains Answer Angle)
🎯 5-अंक कोण (~70 शब्द): • प्रश्न जैसे 'अजंता की चित्रकला की विशेषताएँ बताइए' में — पहले स्थान व काल (महाराष्ट्र, बौद्ध गुफाएँ) बताएँ। • फिर 2-3 विशेषताएँ क्रमवार लिखें — फ्रेस्को-सेको तकनीक, जातक कथाएँ, पद्मपाणि जैसे प्रसिद्ध चित्र। • अंत में इसका महत्व (UNESCO धरोहर, विश्व चित्रकला में भारत का योगदान) बताएँ। 🎯 10-अंक कोण (~120 शब्द): • प्रश्न जैसे 'मुगल काल से लेकर बंगाल स्कूल तक भारतीय चित्रकला के विकास का मूल्यांकन कीजिए' में — परिचय में भित्ति व लघु चित्रकला के मूल अंतर की पृष्ठभूमि दें। • मुख्य भाग को कालानुक्रमिक/क्षेत्रवार उप-शीर्षकों में बाँटें — मुगल शैली (शासकवार विकास), राजस्थानी शैलियाँ (मेवाड़-किशनगढ़ आदि), पहाड़ी शैली, कंपनी शैली, बंगाल स्कूल। • उदाहरण जोड़ें — बनी ठनी (किशनगढ़), उस्ताद मंसूर के पशु-चित्र (जहाँगीर), भारत माता (अवनींद्रनाथ टैगोर)। • निष्कर्ष में बताएँ कि यह पूरी यात्रा किस प्रकार दरबारी संरक्षण से लेकर राष्ट्रवादी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तक भारतीय चित्रकला के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों को दर्शाती है, राजस्थान की फड़/पिछवाई परंपरा का उल्लेख अवश्य करें।
🔑 मुख्य तथ्य (Key Facts)
✔ षडंग (चित्रसूत्र, विष्णुधर्मोत्तर पुराण) — रूपभेद, प्रमाणम्, भाव, लावण्ययोजनम्, सादृश्यम्, वर्णिकाभंग — चित्रकला के 6 सैद्धांतिक आधार। ✔ अजंता (महाराष्ट्र) — 30 गुफाएँ, बौद्ध (हीनयान+महायान), 1819 में जॉन स्मिथ द्वारा खोजी गईं; UNESCO (1983)। ✔ अजंता की तकनीक 'फ्रेस्को-सेको' (सूखे प्लास्टर पर) है, सत्य फ्रेस्को नहीं। ✔ एलोरा (महाराष्ट्र) — 34 गुफाएँ; बौद्ध+हिन्दू+जैन तीनों धर्म एक साथ; कैलाश मंदिर विश्व की सबसे बड़ी एकाश्म संरचना; UNESCO (1983)। ✔ सित्तनवासल (तमिलनाडु) — जैन गुफा, कमल-सरोवर छत-चित्र के लिए प्रसिद्ध। ✔ पश्चिम भारतीय/जैन शैली — कल्पसूत्र पांडुलिपियाँ, चेहरे से बाहर निकली आँख इसकी पहचान। ✔ मुगल शैली — हुमायूँ द्वारा फारसी चित्रकारों का आगमन; अकबर के हम्ज़ानामा-अकबरनामा; जहाँगीर काल में उस्ताद मंसूर का प्रकृतिवादी चित्रण। ✔ औरंगज़ेब के संरक्षण त्यागने से चित्रकार राजस्थानी-पहाड़ी दरबारों में गए — इससे क्षेत्रीय शैलियों को बल मिला। ✔ किशनगढ़ शैली की 'बनी ठनी' (चित्रकार निहालचंद, संरक्षक सावंत सिंह/नागरीदास) को 'भारत की मोनालिसा' कहा जाता है; 1973 में डाक-टिकट जारी। ✔ बूंदी-कोटा (हाड़ौती) शैली — शिकार-दृश्य व हरे-भरे परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध। ✔ बसोहली शैली — आभूषणों में भृंग के पंखों के हरे रंग का अनूठा प्रयोग। ✔ कांगड़ा शैली — कोमल, गीतात्मक शैली; चित्रकार नैनसुख; राधा-कृष्ण प्रेम प्रमुख विषय। ✔ दक्कनी शैली (अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा) — फारसी-दक्कनी-यूरोपीय मिश्रण। ✔ कंपनी शैली — ब्रिटिश संरक्षण में भारतीय वनस्पति-जीव-जंतु व सामाजिक जीवन का दस्तावेज़ीकरण; यूरोपीय जलरंग तकनीक। ✔ राजा रवि वर्मा — यूरोपीय तैल-चित्रण तकनीक व भारतीय पौराणिक विषयों का मेल; 'आधुनिक भारतीय चित्रकला का जनक'। ✔ बंगाल स्कूल — अवनींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित; वॉश तकनीक; प्रसिद्ध चित्र 'भारत माता'; ई.बी. हैवेल का समर्थन; नंदलाल बोस प्रमुख अनुयायी। ✔ फड़ चित्रकला (शाहपुरा, भीलवाड़ा) — पाबूजी-देवनारायण गाथा, भोपा-भोपी परंपरा, जोशी परिवार; GI आवेदन 2024। ✔ पिछवाई चित्रकला — नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर से जुड़ी कपड़े पर धार्मिक चित्रकारी। ✔ मांडना — राजस्थान की ग्रामीण भित्ति/फर्श अल्पना चित्रकला परंपरा। ✔ श्री लाल जोशी — फड़ चित्रकला पुनरुद्धार हेतु पद्मश्री सम्मानित; शाहपुरा में 'जोशी कला कुंज' के संस्थापक।

प्रमुख चित्रकार एवं उनका योगदान

चित्रकार/व्यक्तिशैली/कालयोगदान
जॉन स्मिथ1819अजंता गुफाओं की आकस्मिक खोज
मीर सैयद अली व अब्दुस्समदहुमायूँ कालफारस से भारत लाए गए, मुगल चित्रकला शैली की नींव
उस्ताद मंसूरजहाँगीर कालपशु-पक्षी व प्रकृति-चित्रण में सिद्धहस्त, प्रकृतिवादी शैली
निहालचंदकिशनगढ़, 1710-1782'बनी ठनी' सहित किशनगढ़ शैली की प्रसिद्ध कृतियों के रचयिता
नैनसुखकांगड़ा/पहाड़ी शैलीकांगड़ा शैली की कोमल-गीतात्मक पहचान स्थापित करने में प्रमुख योगदान
राजा रवि वर्माआधुनिक काल, 19वीं सदीयूरोपीय तैल-चित्रण व भारतीय पौराणिक विषयों का सम्मिश्रण
अवनींद्रनाथ टैगोरबंगाल स्कूल, 20वीं सदी प्रारंभबंगाल स्कूल के संस्थापक; 'भारत माता' चित्र के रचयिता
श्री लाल जोशीफड़ चित्रकला (राजस्थान)फड़ चित्रकला के पुनरुद्धार हेतु पद्मश्री सम्मानित

📝 पूर्व वर्षों के प्रश्न (PYQs)

Q1. अजंता की भित्ति चित्रकला की विषय-वस्तु एवं तकनीक का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q2. एलोरा की गुफाओं की धार्मिक एवं स्थापत्य विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q3. मुगल लघु चित्रकला के शासकवार विकास-क्रम की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q4. किशनगढ़ शैली की 'बनी ठनी' के कला-ऐतिहासिक महत्व को स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q5. राजस्थान की प्रमुख लघु चित्रकला शैलियों की तुलना कीजिए। (10 अंक) Q6. पहाड़ी चित्रकला शैली (बसोहली एवं कांगड़ा) की विशेषताएँ बताइए। (5 अंक) Q7. बंगाल स्कूल के उदय की पृष्ठभूमि एवं विशेषताओं की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q8. कंपनी शैली की चित्रकला की विशेषताएँ बताइए। (5 अंक) Q9. राजस्थान की फड़ एवं पिछवाई चित्रकला परंपराओं का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q10. षडंग (चित्रसूत्र) सिद्धांत से आप क्या समझते हैं? (5 अंक)

नीचे दी गई तालिका इस अध्याय के महत्वपूर्ण वर्षों व घटनाओं का कालक्रम प्रस्तुत करती है — यह Revision हेतु सबसे उपयोगी है:

काल/वर्षघटना/स्थलमहत्व
लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू.-छठी शताब्दी ई.अजंता गुफाओं का निर्माण-कालभारतीय भित्ति चित्रकला की सर्वोच्च उपलब्धि
लगभग 8वीं-12वीं सदीएलोरा गुफाओं का निर्माण-कालबौद्ध-हिन्दू-जैन तीनों धर्मों की स्थापत्य कला का संगम
8वीं-12वीं सदीपाल शैली लघु चित्रकला (बंगाल-बिहार)भारत की सबसे प्रारंभिक लघु चित्रकला परंपरा
12वीं-16वीं सदीपश्चिम भारतीय/जैन शैली (गुजरात-राजस्थान)कल्पसूत्र पांडुलिपि-चित्रण की परंपरा
1556-1605अकबर काल — हम्ज़ानामा व अकबरनामा निर्माणमुगल चित्रशाला व्यवस्था अपने चरम पर
1605-1627जहाँगीर काल — प्रकृतिवादी चित्रकलाउस्ताद मंसूर का पशु-पक्षी चित्रण
1819अजंता गुफाओं की खोज (जॉन स्मिथ)विश्व को भारतीय भित्ति चित्रकला की जानकारी मिली
18वीं सदी (लगभग 1750 के दशक)किशनगढ़ में 'बनी ठनी' चित्र निर्माण (निहालचंद)राजस्थानी लघु चित्रकला की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में से एक
18वीं-19वीं सदीकंपनी शैली का विकासयूरोपीय व भारतीय शैली के मिश्रण का दस्तावेज़ीकरण
19वीं सदी अंतराजा रवि वर्मा का कला-कालयूरोपीय तैल-चित्रण व भारतीय पौराणिक विषयों का मेल
1905 के आसपासबंगाल स्कूल का उदय (अवनींद्रनाथ टैगोर)स्वदेशी आंदोलन से जुड़ी राष्ट्रवादी चित्रकला की शुरुआत
1973'बनी ठनी' पर स्मारक डाक-टिकट जारीकिशनगढ़ शैली को राष्ट्रीय पहचान
2024फड़ चित्रकला हेतु GI टैग आवेदनराजस्थान की लोक चित्रकला परंपरा के संरक्षण की दिशा में कदम
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