📖 अध्याय 7/10 — भारतीय कला एवं संस्कृति

साहित्य — वैदिक से मध्यकालीन फ़ारसी/उर्दू एवं क्षेत्रीय

Literature: Vedic to Medieval Persian/Urdu & Regional | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. साहित्य का वर्गीकरण एवं महत्व
  2. वैदिक साहित्य (Vedic Literature)
  3. बौद्ध साहित्य (Buddhist Literature)
  4. जैन साहित्य (Jain Literature)
  5. संगम साहित्य (Sangam Literature — तमिल)
  6. शास्त्रीय संस्कृत साहित्य (Classical Sanskrit Literature)
  7. भक्तिकालीन साहित्य (Bhakti Period Literature)
  8. मध्यकालीन फारसी साहित्य (Persian Literature)
  9. मध्यकालीन उर्दू साहित्य (Urdu Literature)
  10. राजस्थानी डिंगल-पिंगल साहित्य (Rajasthani Dingal-Pingal Literature)
  11. करेंट अफेयर्स — साहित्य से संबंधित

कल्पना कीजिए — लगभग 3500 वर्ष पूर्व सप्त सिंधु प्रदेश में एक ऋषि अग्नि के सामने बैठकर मंत्रों का उच्चारण कर रहा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी केवल कंठस्थ परंपरा (श्रुति) से आगे बढ़ते हैं — यह वेद हैं, विश्व का सबसे प्राचीन जीवित साहित्य। इसी तरह सुदूर दक्षिण में तमिल कवि संगम सभाओं में प्रेम और युद्ध पर कविताएं रच रहे थे, और मध्यकाल में दिल्ली की गलियों में कबीर कपड़ा बुनते हुए दोहे गुनगुना रहे थे। भारतीय साहित्य की यह हजारों वर्षों की अविरल धारा — संस्कृत, प्राकृत, पालि, तमिल, फारसी, उर्दू व हिंदी — भारत की सांस्कृतिक निरंतरता (Cultural Continuity) का सबसे बड़ा प्रमाण है, और RAS Mains 2023 में ठीक यही थीम पूछी गई थी।

1साहित्य का वर्गीकरण एवं महत्व

प्राचीन एवं मध्यकालीन भारतीय साहित्य को भाषा एवं धार्मिक परंपरा के आधार पर मुख्यतः 4 धाराओं में बांटा जा सकता है — यह वर्गीकरण उत्तर लेखन में ढांचा (structure) देने के लिए उपयोगी है।

साहित्य धाराभाषाकालखंडप्रमुख उदाहरण
वैदिक-ब्राह्मणिक साहित्यसंस्कृत1500 ई.पू.—600 ई.पू.वेद, उपनिषद, महाकाव्य, पुराण
श्रमण साहित्य (बौद्ध-जैन)पालि, प्राकृत, अर्धमागधी600 ई.पू.—600 ई.त्रिपिटक, जैन आगम
द्रविड़/संगम साहित्यतमिल300 ई.पू.—300 ई.तोल्काप्पियम्, एट्टुतोगै
शास्त्रीय संस्कृत साहित्यसंस्कृतगुप्तकाल (300—600 ई.)कालिदास, विशाखदत्त
भक्तिकालीन साहित्यतमिल, हिंदी, अन्य क्षेत्रीय भाषाएं600—1700 ई.आलवार-नयनार, कबीर, तुलसी, मीरा
इंडो-फारसी/उर्दू साहित्यफारसी, उर्दू1200—1857 ई.अमीर खुसरो, अबुल फज़ल, बाबरनामा
राजस्थानी डिंगल-पिंगल साहित्यडिंगल, पिंगल (राजस्थानी)मध्यकालपृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई)

2वैदिक साहित्य (Vedic Literature)

वेद (Veda — अर्थ 'ज्ञान') विश्व के प्राचीनतम धार्मिक ग्रंथ माने जाते हैं। इन्हें 'श्रुति' (जो सुना गया — गुरु-शिष्य परंपरा से मौखिक रूप से हस्तांतरित) कहा जाता है, जबकि बाद के स्मृति ग्रंथ मानव-रचित माने जाते हैं। प्रत्येक वेद के 4 भाग होते हैं — संहिता (मंत्र), ब्राह्मण (कर्मकांड व्याख्या), आरण्यक (वन में चिंतन हेतु), उपनिषद (दार्शनिक ज्ञान)।

A. चार वेद (Four Vedas)

वेदअर्थ/स्वरूपप्रमुख विषय-वस्तुविशेष तथ्य
ऋग्वेद (Rigveda)स्तुति मंत्रों का संग्रह — 10 मंडल, 1028 सूक्तदेवताओं (इंद्र, अग्नि, वरुण) की स्तुतिसबसे प्राचीन वेद; विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ माना जाता है
सामवेद (Samaveda)गायन योग्य मंत्र (मुख्यतः ऋग्वेद से लिए गए)संगीत/गायन परंपरा का आधारभारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल स्रोत माना जाता है
यजुर्वेद (Yajurveda)यज्ञ कर्मकांड हेतु गद्य-पद्य मिश्रित मंत्रयज्ञ विधि-विधानशुक्ल व कृष्ण — 2 शाखाएं (संहिताएं)
अथर्ववेद (Atharvaveda)लौकिक जीवन संबंधी मंत्रचिकित्सा, तंत्र-मंत्र, दैनिक जीवनसबसे बाद का वेद; सामाजिक-सांस्कृतिक जानकारी का स्रोत

B. ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद

वैदिक साहित्य के इन तीन उत्तरवर्ती भागों में दार्शनिक चिंतन क्रमशः गहराता गया — यज्ञ-कर्मकांड की व्याख्या से शुरू होकर अंततः 'आत्मा-ब्रह्म एकत्व' के गूढ़ प्रश्नों तक पहुंचना।

ग्रंथस्वरूपउदाहरण
ब्राह्मण ग्रंथयज्ञ कर्मकांड की गद्य व्याख्याऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद), शतपथ ब्राह्मण (यजुर्वेद)
आरण्यकवन में चिंतन हेतु — कर्मकांड से दर्शन की ओर संक्रमणऐतरेय आरण्यक, तैत्तिरीय आरण्यक
उपनिषद (Upanishad)दार्शनिक ज्ञान — 'वेदांत' (वेद का अंत/सार) कहलाता है108 उपनिषद; प्रमुख 10-13 'मुख्य उपनिषद'

प्रमुख उपनिषद

उपनिषदसंबंधित वेदप्रमुख कथन/विषय
ईश उपनिषदयजुर्वेद (शुक्ल)सबसे लघु उपनिषद; त्याग व भोग का समन्वय
कठ उपनिषदयजुर्वेद (कृष्ण)नचिकेता-यम संवाद; आत्मा की अमरता
छांदोग्य उपनिषदसामवेद'तत्त्वमसि' महावाक्य; सबसे विस्तृत उपनिषद
बृहदारण्यक उपनिषदयजुर्वेद (शुक्ल)याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद; सबसे प्राचीन व वृहद उपनिषद
मुंडक उपनिषदअथर्ववेद'सत्यमेव जयते' वाक्य का स्रोत (भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य)

❝ उद्धरण (Quote)

"सत्यमेव जयते नानृतम्" — मुण्डक उपनिषद (भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य इसी से लिया गया है)

C. वेदांग साहित्य (Vedangas — वेद के 6 अंग)

वेदों को सही ढंग से समझने व उच्चारण करने हेतु 6 सहायक शास्त्र विकसित हुए, जिन्हें वेदांग कहते हैं।

वेदांगविषयउदाहरण ग्रंथ
शिक्षाउच्चारण शास्त्र (स्वर विज्ञान)प्रातिशाख्य ग्रंथ
कल्पयज्ञ विधि/कर्मकांड — इसी से 'सूत्र साहित्य' विकसित हुआश्रौतसूत्र, गृह्यसूत्र, धर्मसूत्र
व्याकरणभाषा का शुद्ध व्याकरणिक विश्लेषणपाणिनि कृत अष्टाध्यायी (लगभग 500 ई.पू.)
निरुक्तशब्द-व्युत्पत्ति शास्त्रयास्क कृत निरुक्त
छंदकाव्य रचना का मापदंड शास्त्रपिंगल कृत छंदशास्त्र
ज्योतिषकाल गणना — यज्ञ के शुभ मुहूर्त हेतुवेदांग ज्योतिष
💡 उदाहरण (Example)

वेदांग को ऐसे समझें — जैसे किसी पुरानी मशीन (वेद) को सही ढंग से चलाने के लिए 6 औजारों (टूल्स) की जरूरत पड़ती है — एक सही उच्चारण के लिए, एक व्याकरण जांचने के लिए, एक समय बताने के लिए। ये 6 वेदांग ठीक वैसे ही वेद-रूपी 'मशीन' को सही ढंग से समझने-चलाने के औजार हैं।

D. स्मृति साहित्य — महाकाव्य एवं धर्मशास्त्र

स्मृति साहित्य मानव-रचित माना जाता है (श्रुति के विपरीत) और इसमें महाकाव्य, पुराण व धर्मशास्त्र शामिल हैं।

ग्रंथरचनाकार (परंपरागत)विषय-वस्तु
रामायणवाल्मीकि24,000 श्लोक, 7 कांड; राम की जीवन-गाथा — 'आदि काव्य' कहा जाता है
महाभारतवेदव्यासविश्व का सबसे लंबा महाकाव्य (लगभग 1 लाख श्लोक); इसी में 'भगवद्गीता' सम्मिलित है
मनुस्मृतिमनु (परंपरागत)प्राचीनतम व सर्वाधिक प्रामाणिक धर्मशास्त्र ग्रंथ — वर्ण-आश्रम व्यवस्था का विवरण
18 पुराणवेदव्यास (परंपरागत)सृष्टि, वंशावली, राजवंश इतिहास — विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण आदि प्रमुख

⚠️ महत्वपूर्ण (Important Note)

पुराण साहित्य में 'पंचलक्षण' (5 विषय) होते हैं — सर्ग (सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय-पुनर्सृष्टि), वंश (देव-ऋषि वंशावली), मन्वंतर (कालखंड), वंशानुचरित (राजवंशों का इतिहास)। मत्स्य पुराण व वायु पुराण से सातवाहन एवं गुप्त वंशावली की जानकारी मिलती है — यह इतिहास-लेखन हेतु महत्वपूर्ण स्रोत है।

3बौद्ध साहित्य (Buddhist Literature)

बौद्ध साहित्य मुख्यतः 'पालि' भाषा में है (बुद्ध ने जनभाषा पालि में उपदेश दिए, संस्कृत में नहीं)। तीसरी बौद्ध संगीति (पाटलिपुत्र, अशोक काल) में इसे अंतिम रूप से संकलित किया गया।

A. त्रिपिटक (Tripitaka — 3 पिटक/टोकरियां)

पिटकविषय-वस्तु
विनय पिटक (Vinaya Pitaka)बौद्ध संघ (Sangha) के आचरण-नियम व अनुशासन संबंधी नियम
सुत्त पिटक (Sutta Pitaka)बुद्ध के उपदेश व प्रवचन — सबसे बड़ा भाग; इसी में 'धम्मपद' सम्मिलित
अभिधम्म पिटक (Abhidhamma Pitaka)दार्शनिक व मनोवैज्ञानिक विश्लेषण — बौद्ध दर्शन की गूढ़ व्याख्या

B. अन्य प्रमुख बौद्ध ग्रंथ

ग्रंथभाषाविषय
जातक कथाएं (Jataka Tales)पालिबुद्ध के 550+ पूर्वजन्मों की नैतिक-शिक्षाप्रद कथाएं
मिलिंदपन्हो (Milindapanho)पालियूनानी राजा मिनांडर (मिलिंद) व भिक्षु नागसेन के दार्शनिक संवाद
दीपवंश व महावंशपालिश्रीलंका के बौद्ध इतिहास ग्रंथ — प्राचीन भारतीय इतिहास हेतु स्रोत
बुद्धचरितसंस्कृत (अश्वघोष रचित)कनिष्क के दरबारी कवि अश्वघोष द्वारा रचित बुद्ध-जीवनी महाकाव्य
ललितविस्तरसंस्कृत (मिश्रित)महायान परंपरा में बुद्ध की दिव्य जीवनी
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4जैन साहित्य (Jain Literature)

जैन साहित्य मुख्यतः 'प्राकृत' भाषा (विशेषतः अर्धमागधी) में रचित है। महावीर के उपदेश शिष्यों द्वारा संकलित कर 'आगम' ग्रंथों का रूप दिया गया — अंतिम संकलन वल्लभी संगीति (लगभग 5वीं शताब्दी ई., देवर्धिगणि क्षमाश्रमण के नेतृत्व में) में हुआ।

ग्रंथ/समूहभाषाविषय-वस्तु
12 अंग आगमअर्धमागधी प्राकृतमहावीर के मूल उपदेश — आचारांग सूत्र, भगवती सूत्र आदि
कल्पसूत्र (Kalpasutra)प्राकृत (भद्रबाहु रचित)जैन तीर्थंकरों की जीवनियां, विशेषतः महावीर व पार्श्वनाथ की
तत्त्वार्थ सूत्रसंस्कृत (उमास्वाति रचित)जैन दर्शन का प्रथम संस्कृत ग्रंथ — त्रिरत्न व अनेकांतवाद की व्याख्या
💡 उदाहरण (Example)

बौद्ध व जैन साहित्य दोनों 'जनभाषा' (पालि/प्राकृत) में क्यों रचे गए? — क्योंकि बुद्ध व महावीर दोनों ने संस्कृत (जो तब केवल पुरोहित/अभिजात्य वर्ग की भाषा थी) के बजाय आम जनता की भाषा में उपदेश देना चुना — यह उनकी सामाजिक समानता की विचारधारा को दर्शाता है।

5संगम साहित्य (Sangam Literature — तमिल)

संगम साहित्य दक्षिण भारत का प्राचीनतम साहित्य है (लगभग 300 ई.पू.—300 ई.), जो पांड्य शासकों के संरक्षण में मदुरै में आयोजित 3 'संगम' (कवि सभाओं) में रचा-संकलित हुआ माना जाता है। इसमें लगभग 2381 कविताएं, 473 कवियों द्वारा रचित मिलती हैं।

रचना/समूहस्वरूपविषय
तोल्काप्पियम् (Tolkappiyam)तोल्काप्पियर रचितप्राचीनतम तमिल व्याकरण ग्रंथ — सामाजिक-राजनीतिक जीवन की भी जानकारी
एट्टुतोगै (Ettuthogai — 'आठ संकलन')8 काव्य-संग्रहों का समूहप्रेम (अगम) व वीरता (पुरम) विषयक लघु कविताएं
पत्तुपाट्टु (Pattuppattu — 'दस गीत')10 दीर्घ कविताओं का संग्रह100-800 पंक्तियों की लंबी कविताएं
शिलप्पदिकारम् (Silappadikaram)इलंगो अडिगल रचितजुड़वा महाकाव्यों में प्रथम — कण्णगी की कथा
मणिमेकलै (Manimekalai)सत्तनार रचितजुड़वा महाकाव्यों में द्वितीय — बौद्ध धर्म से प्रभावित

⚠️ महत्वपूर्ण (Important Note)

संगम साहित्य 19वीं-20वीं सदी में पुनः खोजा व प्रकाशित हुआ — इससे पूर्व सदियों तक यह लुप्तप्राय था। संगम साहित्य से तत्कालीन चेर, चोल, पांड्य वंशों तथा व्यापार (रोम के साथ) की बहुमूल्य ऐतिहासिक जानकारी मिलती है — यह मात्र साहित्य नहीं, इतिहास-स्रोत भी है।

6शास्त्रीय संस्कृत साहित्य (Classical Sanskrit Literature)

गुप्तकाल (लगभग 300-600 ई.) को संस्कृत साहित्य का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है — इसी दौर में कालिदास जैसे महाकवि व नाटककार सक्रिय थे। यह काल राजाश्रय में कला-साहित्य के अभूतपूर्व विकास का साक्षी बना।

साहित्यकारकालप्रमुख रचनाएं
कालिदास (Kalidasa)गुप्तकाल (लगभग 4-5वीं सदी)अभिज्ञानशाकुंतलम् (नाटक), मेघदूत, रघुवंशम्, कुमारसंभवम्
भास (Bhasa)गुप्तपूर्व कालस्वप्नवासवदत्तम्, प्रतिज्ञायौगन्धरायणम्
विशाखदत्त (Vishakhadatta)गुप्तकालमुद्राराक्षस (चंद्रगुप्त मौर्य-चाणक्य पर आधारित राजनीतिक नाटक)
शूद्रक (Shudraka)अनिश्चित (गुप्तकाल के आसपास)मृच्छकटिकम् (सामाजिक नाटक)
पाणिनि (Panini)लगभग 500 ई.पू.अष्टाध्यायी — संस्कृत व्याकरण का सर्वाधिक प्रामाणिक ग्रंथ
विष्णु शर्मा (Vishnu Sharma)लगभग 300 ई.पंचतंत्र — नीति-कथाओं का विश्वप्रसिद्ध संग्रह
कौटिल्य/चाणक्य (Kautilya)मौर्यकाल (लगभग 300 ई.पू.)अर्थशास्त्र — राजनीति व शासन-प्रबंधन ग्रंथ
वात्स्यायन (Vatsyayana)गुप्तकालकामसूत्र — सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का स्रोत
विशाखदत्त/भारवि/भट्टिगुप्तोत्तर कालकिरातार्जुनीयम् (भारवि), रावणवध/भट्टिकाव्य (भट्टि)

प्राचीन भारत में वैज्ञानिक साहित्य की भी समृद्ध परंपरा रही — आर्यभट्ट कृत आर्यभटीय (गणित-खगोल), वराहमिहिर कृत बृहत्संहिता, सुश्रुत संहिता व चरक संहिता (आयुर्विज्ञान) उल्लेखनीय हैं। RAS Mains 2013 में ठीक इसी विषय पर निबंध पूछा गया था।

7भक्तिकालीन साहित्य (Bhakti Period Literature)

भक्ति आंदोलन का साहित्य क्षेत्रीय भाषाओं (तमिल, हिंदी, आदि) में रचा गया, जिससे यह आम जनता तक सीधे पहुंचा। इसे 2 धाराओं में बांटा जाता है — दक्षिण भारत (प्रारंभिक, 6वीं-9वीं सदी) व उत्तर भारत (परवर्ती, 14वीं-17वीं सदी)। विस्तृत दार्शनिक विवेचन अगले अध्याय (अध्याय 10) में है — यहां केवल साहित्यिक योगदान का विवरण है।

A. दक्षिण भारत — आलवार व नयनार साहित्य

परंपरादेवतासाहित्यिक योगदान
आलवार संत (Alvars — 12)विष्णु भक्तदिव्य प्रबंधम् (4000 तमिल स्तोत्रों का संकलन)
नयनार संत (Nayanars — 63)शिव भक्ततेवारम् व तिरुवाचकम् (शैव भक्ति स्तोत्र)

B. उत्तर भारत — निर्गुण भक्ति साहित्य

निर्गुण भक्ति में निराकार, अद्वैत ब्रह्म की उपासना पर बल दिया गया तथा जाति-भेद व कर्मकांड की कटु आलोचना की गई।

संत/कविभाषा/शैलीप्रमुख रचना
कबीरदास (Kabir Das)सधुक्कड़ी (मिश्रित हिंदी)बीजक (साखी, सबद, रमैनी)
गुरु नानक देवपंजाबी/गुरमुखीजपुजी साहिब (आदि ग्रंथ साहिब का आधार)
रैदास (रविदास)हिंदीपद व भजन — समता व भक्ति पर बल
दादूदयाल (जयपुर)हिंदी (राजस्थान संबंध)दादू वाणी — निर्गुण भक्ति की राजस्थान शाखा

C. उत्तर भारत — सगुण भक्ति साहित्य

सगुण भक्ति में साकार, अवतारी ईश्वर (राम/कृष्ण) की उपासना पर बल दिया गया, जिसमें राम-भक्ति व कृष्ण-भक्ति दोनों धाराएं शामिल हैं।

संत/कविधाराप्रमुख रचना
तुलसीदास (Tulsidas)राम-भक्ति (अवधी)रामचरितमानस — तुलसीदास कृत सर्वाधिक लोकप्रिय रामकथा
सूरदास (Surdas)कृष्ण-भक्ति (ब्रज भाषा)सूरसागर — कृष्ण की बाल व राधा-लीलाओं का काव्य
मीराबाई (Mirabai — मेवाड़)कृष्ण-भक्ति (राजस्थान संबंध)मीरा पद/भजन — मेवाड़ की राजकुमारी, कृष्ण-प्रेम काव्य
वल्लभाचार्य/नंददासकृष्ण-भक्ति (पुष्टिमार्ग)अष्टछाप कवियों की परंपरा
⚖️ निर्गुण भक्ति साहित्य बनाम सगुण भक्ति साहित्य⚖️ निर्गुण भक्ति साहित्य बनाम सगुण भक्ति साहित्य
निर्गुण भक्ति (Nirguna)सगुण भक्ति (Saguna)
▸ निराकार, गुणरहित ब्रह्म की उपासना ▸ जाति-भेद व मूर्तिपूजा की आलोचना ▸ प्रतिनिधि: कबीर, नानक, रैदास, दादू ▸ भाषा सरल, सधुक्कड़ी/लोकभाषा▸ साकार, अवतारी ईश्वर (राम/कृष्ण) की उपासना ▸ भक्ति के साथ भक्ति-काव्य में शृंगार व लीला वर्णन ▸ प्रतिनिधि: तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई ▸ भाषा काव्यात्मक — अवधी (तुलसी), ब्रज (सूर)
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8मध्यकालीन फारसी साहित्य (Persian Literature)

फारसी, दिल्ली सल्तनत व मुगल काल में राजभाषा रही, अतः प्रशासनिक इतिहास-लेखन व काव्य दोनों में समृद्ध साहित्य रचा गया।

साहित्यकारकालप्रमुख रचना व विषय
अमीर खुसरो (Amir Khusrau)खिलजी-तुगलक काल'तूती-ए-हिंद' उपाधि; खालिक बारी, तारीख-ए-अलाई; हिंदवी-फारसी मिश्रित काव्य के जनक
जियाउद्दीन बरनीतुगलक कालतारीख-ए-फिरोजशाही (दिल्ली सल्तनत का इतिहास)
बाबर (Babur)मुगल संस्थापकबाबरनामा (तुजुक-ए-बाबरी) — आत्मकथा, मूलतः तुर्की में, बाद में फारसी अनुवाद
गुलबदन बेगममुगलकाल (हुमायूं की बहन)हुमायूंनामा — मुगल स्त्री द्वारा रचित दुर्लभ ऐतिहासिक ग्रंथ
जहांगीर (Jahangir)मुगल शासकतुज़ुक-ए-जहांगीरी — आत्मकथा, प्रकृति-अवलोकन हेतु प्रसिद्ध
अबुल फज़ल (Abul Fazl)अकबर का दरबारी इतिहासकारअकबरनामा व ऐन-ए-अकबरी — अकबर-कालीन प्रशासन का प्रामाणिक विवरण
फैजी (Faizi)अकबर दरबार (अबुल फज़ल का भाई)पंचतंत्र व लीलावती का फारसी अनुवाद; अकबर के 'नवरत्नों' में शामिल

⚠️ महत्वपूर्ण (Important Note)

RAS Mains 2016 (विशेष परीक्षा) में पूछा गया था — 'अकबर के काल में लिखे गए दो फारसी ग्रन्थों का उल्लेख कीजिए' — अकबरनामा, ऐन-ए-अकबरी, तारीख-ए-अलाई जैसे नाम याद रखें। अकबर ने संस्कृत ग्रंथों (महाभारत, रामायण) के फारसी अनुवाद हेतु 'मकतबखाना' (अनुवाद विभाग) स्थापित किया — महाभारत का फारसी अनुवाद 'रज़्मनामा' कहलाया।

9मध्यकालीन उर्दू साहित्य (Urdu Literature)

उर्दू भाषा का विकास फारसी-अरबी व स्थानीय हिंदवी/खड़ी बोली के मेल से हुआ — प्रारंभ में इसे 'हिंदवी' या 'रेख्ता' कहा जाता था। दक्कन में यह उत्तर भारत से पहले साहित्यिक रूप में विकसित हुई।

साहित्यकार/चरणक्षेत्र/कालयोगदान
दक्कनी उर्दू (Deccani Urdu)बहमनी व दक्कन सल्तनतें (15-17वीं सदी)उत्तर भारत से पूर्व उर्दू का साहित्यिक रूप में सबसे प्रारंभिक विकास
वली दक्कनी (Wali Deccani)औरंगाबाद/दक्कन (17-18वीं सदी)'उर्दू शायरी का जनक' कहा जाता है; दक्कनी शैली को उत्तर भारत तक पहुंचाया
अमीर खुसरोखिलजी कालहिंदवी-फारसी मिश्रित पहेलियां व दोहे — उर्दू के प्रारंभिक बीज
मिर्ज़ा गालिब (परवर्ती काल)मुगल पतनकाल (19वीं सदी)उर्दू शायरी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित कवियों में से एक (अध्याय के दायरे से बाद का काल)

10राजस्थानी डिंगल-पिंगल साहित्य (Rajasthani Dingal-Pingal Literature)

राजस्थान की अपनी समृद्ध साहित्यिक परंपरा रही है, जो मुख्यतः चारण (Charan) कवियों द्वारा रचित वीर-गाथा व श्रृंगार काव्य पर केंद्रित है। यह RAS परीक्षा के लिए विशेष महत्व रखता है।

⚖️ डिंगल (Dingal) बनाम पिंगल (Pingal)⚖️ डिंगल (Dingal) बनाम पिंगल (Pingal)
डिंगल (Dingal)पिंगल (Pingal)
▸ शुद्ध राजस्थानी भाषा शैली — ओजपूर्ण, कठोर ▸ वीर-रस प्रधान — युद्ध, शौर्य, वंशावली वर्णन ▸ चारण कवियों की मुख्य काव्य-भाषा ▸ उदाहरण: वेली किसन रुक्मिणी री (पृथ्वीराज राठौड़)▸ ब्रज-मिश्रित राजस्थानी शैली — कोमल, श्रृंगारिक ▸ श्रृंगार व भक्ति रस प्रधान ▸ दरबारी व भक्ति काव्य में प्रयुक्त ▸ छंदशास्त्र (पिंगल शास्त्र) से संबद्ध शैली
रचना/कविकालविवरण
पृथ्वीराज रासोचंदबरदाई (12वीं सदी)पृथ्वीराज चौहान तृतीय के दरबारी कवि; डिंगल शैली का आदिकाव्य माना जाता है
वेली किसन रुक्मिणी रीपृथ्वीराज राठौड़ (बीकानेर, 16वीं सदी)कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित प्रसिद्ध डिंगल काव्य
चारण साहित्य परंपरामध्यकाल भर सक्रियराजपूत वंशावली, ख्यात (इतिहास-लेखन), वीरगाथा रचना — इतिहास-स्रोत भी
ढोला-मारू रा दूहालोक/चारण परंपराप्रसिद्ध राजस्थानी प्रेम-गाथा काव्य
वीरमायण/हम्मीर रासोचारण परंपराहम्मीर देव चौहान (रणथंभौर) के शौर्य पर आधारित वीर काव्य

⚠️ महत्वपूर्ण (Important Note)

चारण साहित्य केवल काव्य नहीं, बल्कि 'ख्यात' (Khyat) के रूप में राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास-लेखन का प्रमुख स्रोत भी है — जैसे मुहणोत नैणसी री ख्यात। राजस्थानी भाषा को शास्त्रीय भाषा (Classical Language) का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से चल रही है, परंतु अभी तक केंद्र सरकार द्वारा औपचारिक मान्यता नहीं मिली है — करेंट अफेयर्स में ध्यान रखें।

11करेंट अफेयर्स — साहित्य से संबंधित

विषयविवरण
शास्त्रीय भाषा दर्जा (Classical Language Status) — अक्टूबर 2024केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मराठी, पालि, प्राकृत, असमिया व बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया — अब कुल 11 शास्त्रीय भाषाएं (पूर्व से तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया मान्यता प्राप्त थीं)
ज्ञानपीठ पुरस्कारभारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान — भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है
राष्ट्रीय अनुवाद मिशन (National Translation Mission)शिक्षा मंत्रालय की पहल — शास्त्रीय व क्षेत्रीय भाषाओं के ग्रंथों का अनुवाद व संरक्षण
साहित्य अकादमी पुरस्कारभारतीय भाषाओं की साहित्यिक रचनाओं हेतु वार्षिक राष्ट्रीय सम्मान
मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (UNESCO)ऋग्वेद पांडुलिपियां (भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुणे) यूनेस्को की इस सूची में सम्मिलित हैं

✍️ उत्तर लेखन कोण (Mains Answer Angle)

🎯 5-अंक कोण (~70 शब्द): • प्राचीन/मध्यकालीन भारतीय साहित्य की किसी एक धारा (जैसे वैदिक/संगम/भक्ति) की मुख्य विशेषताएं संक्षेप में बताएं। • एक ठोस उदाहरण दें (जैसे किसी ग्रंथ का नाम व रचनाकार) और उसका ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट करें। • यदि प्रश्न तुलनात्मक है (जैसे निर्गुण बनाम सगुण) तो 2-3 स्पष्ट अंतर बिंदु दें। 🎯 10-अंक कोण (~120 शब्द): • परिचय — साहित्य धारा का काल, भाषा व सामाजिक-धार्मिक पृष्ठभूमि स्पष्ट करें। • बहुआयामी विश्लेषण — साहित्यिक विशेषताएं, प्रमुख ग्रंथ/रचनाकार, भाषा-शैली का विकास शामिल करें। • सामाजिक प्रभाव — साहित्य ने समाज-सुधार, धार्मिक आंदोलन या सांस्कृतिक निरंतरता में क्या भूमिका निभाई, यह जोड़ें (जैसे 2023 का 'सांस्कृतिक निरंतरता' वाला प्रश्न)। • राजस्थान संबंध — जहां लागू हो (डिंगल-पिंगल, मीरा, दादू) अवश्य जोड़ें। • निष्कर्ष — साहित्य के ऐतिहासिक स्रोत के रूप में महत्व के साथ समाप्त करें।

🔑 मुख्य तथ्य (Key Facts)
✔ वेद 4 हैं — ऋग्वेद (प्राचीनतम), सामवेद (संगीत), यजुर्वेद (यज्ञ विधि), अथर्ववेद (लौकिक जीवन)। ✔ प्रत्येक वेद के 4 भाग — संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद। ✔ 'सत्यमेव जयते' मुण्डक उपनिषद (अथर्ववेद) से लिया गया है। ✔ 'तत्त्वमसि' महावाक्य छांदोग्य उपनिषद में है। ✔ 6 वेदांग — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष। ✔ पाणिनि रचित अष्टाध्यायी संस्कृत का प्रामाणिक व्याकरण ग्रंथ है (लगभग 500 ई.पू.)। ✔ रामायण के रचनाकार वाल्मीकि हैं — इसे 'आदि काव्य' कहा जाता है। ✔ महाभारत विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य है — इसमें भगवद्गीता सम्मिलित है। ✔ त्रिपिटक के 3 भाग — विनय, सुत्त, अभिधम्म पिटक (पालि भाषा)। ✔ जातक कथाएं बुद्ध के 550+ पूर्वजन्मों की कथाएं हैं। ✔ जैन आगम साहित्य मुख्यतः अर्धमागधी प्राकृत भाषा में है — अंतिम संकलन वल्लभी संगीति में हुआ। ✔ संगम साहित्य में लगभग 2381 कविताएं, 473 कवियों द्वारा रचित मिलती हैं। ✔ तोल्काप्पियम् प्राचीनतम तमिल व्याकरण ग्रंथ है (तोल्काप्पियर रचित)। ✔ शिलप्पदिकारम् (इलंगो अडिगल) व मणिमेकलै (सत्तनार) संगम युग के जुड़वा महाकाव्य हैं। ✔ कालिदास गुप्तकाल के महाकवि थे — अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत, रघुवंशम् प्रमुख रचनाएं। ✔ मुद्राराक्षस (विशाखदत्त) चंद्रगुप्त मौर्य-चाणक्य पर आधारित राजनीतिक नाटक है। ✔ निर्गुण भक्ति के प्रतिनिधि — कबीर, नानक, रैदास, दादूदयाल (जयपुर संबंध)। ✔ सगुण भक्ति के प्रतिनिधि — तुलसीदास (रामचरितमानस), सूरदास (सूरसागर), मीराबाई (मेवाड़ संबंध)। ✔ अबुल फज़ल रचित अकबरनामा व ऐन-ए-अकबरी अकबर-कालीन प्रशासन का प्रामाणिक स्रोत हैं। ✔ बाबरनामा (तुजुक-ए-बाबरी) मूलतः तुर्की भाषा में रचित मुगल शासक की आत्मकथा है। ✔ वली दक्कनी को 'उर्दू शायरी का जनक' कहा जाता है। ✔ पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई) डिंगल शैली का आदिकाव्य माना जाता है। ✔ अक्टूबर 2024 में मराठी, पालि, प्राकृत, असमिया व बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिला — अब कुल 11 शास्त्रीय भाषाएं हैं।

प्रमुख साहित्यकार/ग्रंथ — एक नज़र में

व्यक्ति/ग्रंथ (Person/Text)कालयोगदान
पाणिनिलगभग 500 ई.पू.अष्टाध्यायी — संस्कृत व्याकरण
कौटिल्य/चाणक्यमौर्यकालअर्थशास्त्र — राजनीति-शासन ग्रंथ
कालिदासगुप्तकालअभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत, रघुवंशम्
विशाखदत्तगुप्तकालमुद्राराक्षस
अश्वघोषकुषाणकाल (कनिष्क दरबार)बुद्धचरित
तोल्काप्पियरसंगमकालतोल्काप्पियम् (तमिल व्याकरण)
इलंगो अडिगल व सत्तनारसंगमकालशिलप्पदिकारम् व मणिमेकलै
तुलसीदासमुगलकाल (16वीं सदी)रामचरितमानस
सूरदासमुगलकाल (16वीं सदी)सूरसागर
मीराबाईमेवाड़ (16वीं सदी)कृष्ण-भक्ति पद/भजन
अमीर खुसरोखिलजी-तुगलक कालखालिक बारी; उर्दू के प्रारंभिक बीज
अबुल फज़लअकबर दरबारअकबरनामा, ऐन-ए-अकबरी
चंदबरदाईपृथ्वीराज चौहान तृतीय दरबारपृथ्वीराज रासो (डिंगल आदिकाव्य)

📝 पूर्व वर्षों के प्रश्न (PYQs)

Q1. कालिदास की रचनाओं व उनके गुप्तकालीन साहित्यिक योगदान की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q2. संस्कृत साहित्य के ऐतिहासिक/पौराणिक नाटकों पर संक्षिप्त लेख लिखिए। (5 अंक) Q3. अकबर के काल में लिखे गए फारसी ग्रंथों (अकबरनामा, ऐन-ए-अकबरी) के ऐतिहासिक महत्व की विवेचना कीजिए। (5 अंक) Q4. प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक साहित्य (आर्यभटीय, सुश्रुत संहिता, चरक संहिता) पर एक निबंध लिखिए। (10 अंक) Q5. संगम साहित्य की रचनाओं व उसके ऐतिहासिक महत्व का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q6. निर्गुण भक्ति साहित्य की समृद्ध परंपरा को स्पष्ट कीजिए, प्रमुख संत-कवियों के योगदान सहित। (10 अंक) Q7. तुलसीदास व सूरदास के साहित्यिक योगदान की तुलना कीजिए। (10 अंक) Q8. बौद्ध त्रिपिटक साहित्य के तीन भागों का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (5 अंक) Q9. राजस्थान के डिंगल-पिंगल साहित्य व चारण परंपरा के ऐतिहासिक महत्व की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q10. 'भारतीय संस्कृति की निरंतरता विश्व की संस्कृतियों में अनन्य है' — साहित्यिक परंपरा के उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए। (10 अंक)

कालक्रम (Timeline)

वर्ष/कालघटना/रचनामहत्व
लगभग 1500-1000 ई.पू.ऋग्वेद की रचनाप्राचीनतम वैदिक ग्रंथ, विश्व का प्राचीनतम जीवित साहित्य
लगभग 800-600 ई.पू.उपनिषदों की रचनावैदिक दर्शन का चरम — 'वेदांत' विकास
लगभग 500 ई.पू.पाणिनि कृत अष्टाध्यायीसंस्कृत व्याकरण का मानकीकरण
लगभग 300 ई.पू.कौटिल्य कृत अर्थशास्त्रमौर्यकालीन शासन-व्यवस्था का प्रामाणिक स्रोत
लगभग 300 ई.पू.—300 ई.संगम साहित्य रचनाकालदक्षिण भारत का प्राचीनतम तमिल साहित्य
तीसरी बौद्ध संगीति (अशोक काल)त्रिपिटक का अंतिम संकलनपाटलिपुत्र में; पालि बौद्ध साहित्य मानकीकृत हुआ
लगभग 5वीं शताब्दी ई.वल्लभी संगीति — जैन आगम संकलनदेवर्धिगणि क्षमाश्रमण के नेतृत्व में अंतिम जैन साहित्य संकलन
गुप्तकाल (300-600 ई.)कालिदास व शास्त्रीय संस्कृत साहित्य का स्वर्णकालअभिज्ञानशाकुंतलम्, मुद्राराक्षस जैसी कालजयी रचनाएं
12वीं शताब्दीचंदबरदाई कृत पृथ्वीराज रासोराजस्थानी डिंगल साहित्य का आदिकाव्य
13-14वीं शताब्दीअमीर खुसरो का साहित्यिक योगदानहिंदवी-फारसी मिश्रित काव्य; उर्दू के बीज
15-16वीं शताब्दीकबीर, नानक, रैदास — निर्गुण भक्ति साहित्यसामाजिक समता व भक्ति का जनभाषा साहित्य
16वीं शताब्दीतुलसीदास, सूरदास, मीराबाई — सगुण भक्ति साहित्यरामचरितमानस, सूरसागर रचना काल
1589-1596 ई. (अकबर काल)अबुल फज़ल कृत अकबरनामा व ऐन-ए-अकबरीमुगल प्रशासन का प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज़
अक्टूबर 2024मराठी, पालि, प्राकृत, असमिया, बंगाली को शास्त्रीय भाषा दर्जाकुल 11 शास्त्रीय भाषाएं — करेंट अफेयर्स महत्वपूर्ण
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