🏞️ अध्याय 2/6 — भारत का भूगोल

अपवाह तंत्र

Drainage System of India
📋 इस अध्याय में
  1. हिमालयी नदी तंत्र
  2. प्रायद्वीपीय नदी तंत्र
  3. प्रमुख झीलें

1हिमालयी नदी तंत्र

हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें हिमनदों के पिघलने के साथ-साथ मानसूनी वर्षा से भी जल मिलता है। इन्हें 3 प्रमुख तंत्रों में बाँटा जाता है:

नदी तंत्रउद्गमप्रमुख सहायक नदियाँ
सिंधु नदी तंत्रमानसरोवर झील के पास (तिब्बत)झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलज (पंचनद)
गंगा नदी तंत्रगंगोत्री हिमनद (गोमुख)यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, चंबल, सोन
ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रमानसरोवर झील के पास (तिब्बत, नाम त्सांगपो)तिस्ता, मानस, दिबांग, लोहित

2प्रायद्वीपीय नदी तंत्र

प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी (Non-perennial) होती हैं क्योंकि ये पूर्णतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा जाता है:

3प्रमुख झीलें

झीलराज्यप्रकार
वूलर झीलजम्मू-कश्मीरभारत की सबसे बड़ी ताज़े पानी की झील
चिल्का झीलओडिशाभारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील
डल झीलजम्मू-कश्मीर (श्रीनगर)प्रसिद्ध पर्यटन स्थल
सांभर झीलराजस्थानभारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील
📝 Trick से याद करें

हिमालयी नदियाँ = बारहमासी (हिम + वर्षा दोनों से जल) याद रखने के लिए: "सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र सदा बहती हैं" और प्रायद्वीपीय नदियाँ = मौसमी याद रखने के लिए: "नर्मदा-तापी सीधी सागर में, बाकी बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाएं"।

🔑 Keyword Summary
सिंधु नदी तंत्रगंगा नदी तंत्रब्रह्मपुत्रनर्मदा-तापीगोदावरीकृष्णा-कावेरीवूलर झीलचिल्का झीलडल झीलसांभर झील
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