हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें हिमनदों के पिघलने के साथ-साथ मानसूनी वर्षा से भी जल मिलता है। इन्हें 3 प्रमुख तंत्रों में बाँटा जाता है:
| नदी तंत्र | उद्गम | प्रमुख सहायक नदियाँ |
|---|---|---|
| सिंधु नदी तंत्र | मानसरोवर झील के पास (तिब्बत) | झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलज (पंचनद) |
| गंगा नदी तंत्र | गंगोत्री हिमनद (गोमुख) | यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, चंबल, सोन |
| ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र | मानसरोवर झील के पास (तिब्बत, नाम त्सांगपो) | तिस्ता, मानस, दिबांग, लोहित |
प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी (Non-perennial) होती हैं क्योंकि ये पूर्णतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा जाता है:
| झील | राज्य | प्रकार |
|---|---|---|
| वूलर झील | जम्मू-कश्मीर | भारत की सबसे बड़ी ताज़े पानी की झील |
| चिल्का झील | ओडिशा | भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील |
| डल झील | जम्मू-कश्मीर (श्रीनगर) | प्रसिद्ध पर्यटन स्थल |
| सांभर झील | राजस्थान | भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील |
हिमालयी नदियाँ = बारहमासी (हिम + वर्षा दोनों से जल) याद रखने के लिए: "सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र सदा बहती हैं" और प्रायद्वीपीय नदियाँ = मौसमी याद रखने के लिए: "नर्मदा-तापी सीधी सागर में, बाकी बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाएं"।