🌦️ अध्याय 3/6 — भारत का भूगोल

जलवायु एवं मानसून तंत्र

Climate & Monsoon System of India
📋 इस अध्याय में
  1. भारत की जलवायु — मानसूनी प्रकार
  2. भारत की प्रमुख ऋतुएँ
  3. दक्षिण-पश्चिम मानसून की शाखाएं
  4. जेट स्ट्रीम एवं मानसून पर प्रभाव

1भारत की जलवायु — मानसूनी प्रकार

भारत की जलवायु को "मानसूनी जलवायु" कहा जाता है क्योंकि यहाँ की वर्षा एवं मौसम-चक्र दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर-पूर्वी मानसूनी पवनों पर निर्भर करता है। कोपेन के वर्गीकरण अनुसार भारत में मुख्यतः Aw (उष्णकटिबंधीय सवाना), BWh (उष्ण मरुस्थलीय — राजस्थान), Cwg (आर्द्र उपोष्ण) एवं ET (टुंड्रा — हिमालय के उच्च भाग) जलवायु प्रकार मिलते हैं।

2भारत की प्रमुख ऋतुएँ

ऋतुमहीनेविशेषता
शीत ऋतु (Winter)दिसंबर-फरवरीउत्तर-पूर्वी मानसून सक्रिय, उत्तर भारत में ठंड, तमिलनाडु तट पर वर्षा
ग्रीष्म ऋतु (Summer)मार्च-मईतापमान चरम पर, 'लू' चलती है, पश्चिमी विक्षोभ से कुछ वर्षा
वर्षा ऋतु / दक्षिण-पश्चिम मानसूनजून-सितंबरलगभग 75-80% वार्षिक वर्षा इसी दौरान, अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी शाखाएं
मानसून वापसी ऋतुअक्टूबर-नवंबरमानसून की वापसी, चक्रवात सक्रिय (बंगाल की खाड़ी में)

3दक्षिण-पश्चिम मानसून की शाखाएं

💡 महत्वपूर्ण तथ्य

मासिनराम (मेघालय) विश्व में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा वाला स्थान माना जाता है, इसके निकट ही चेरापूंजी भी अत्यधिक वर्षा के लिए प्रसिद्ध है — दोनों ही बंगाल की खाड़ी शाखा से प्रभावित होते हैं।

4जेट स्ट्रीम एवं मानसून पर प्रभाव

शीत ऋतु में उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम हिमालय के दक्षिण में स्थित रहती है जिससे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) भारत में शीतकालीन वर्षा लाते हैं। ग्रीष्म ऋतु में यह जेट स्ट्रीम हिमालय के उत्तर खिसक जाती है एवं उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम सक्रिय हो जाती है, जो मानसून के आगमन में सहायक होती है।

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