📈 अध्याय 8ख — अर्थव्यवस्था

सामाजिक क्षेत्र (भाग 2) — स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कल्याण

भारतीय अर्थव्यवस्था | स्वास्थ्य, शिक्षा, कमज़ोर वर्ग एवं सामाजिक सुरक्षा

🌅 कहानी से शुरुआत

📖 कहानी 1 — धापू और एक बुखार

डूंगरपुर ज़िले के एक गाँव में धापू (काल्पनिक) अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती है। कुछ साल पहले तक बच्चे को बुखार आता तो वह झाड़-फूँक वाले के पास जाती, और हालत बिगड़ने पर शहर के निजी अस्पताल — जहाँ एक रात का बिल पूरे साल की बचत निगल जाता। एक बार इलाज के लिए उनकी दो बकरियाँ बिक गईं।

अब तस्वीर बदली है। गाँव की आशा दीदी हर घर का हाल जानती हैं। धापू जब दूसरी बार गर्भवती हुई तो आशा दीदी उसे ए.एन.एम. (सहायक नर्स-दाई) के पास जाँच के लिए ले गईं; आयरन की गोलियाँ, टीके और संस्थागत प्रसव — सब समय पर हुआ। उप-स्वास्थ्य केंद्र पर बुखार की दवा लेने गई तो सरकारी अस्पताल की पर्ची पर लिखी सारी दवाएँ निःशुल्क मिलीं, जाँच भी मुफ़्त हुई।

फिर एक रात पति को सीने में तेज़ दर्द उठा। इस बार किसी साहूकार का दरवाज़ा नहीं खटखटाना पड़ा — परिवार के पास कैशलेस बीमा कार्ड था। अस्पताल ने कार्ड दिखाते ही भर्ती किया, ऑपरेशन हुआ, और बिल सीधे बीमा योजना ने चुकाया। एक हफ़्ते बाद पति घर लौटे, और घर के बर्तन भी नहीं बिके।

धापू को “स्वास्थ्य पर जेब से ख़र्च” जैसा शब्द नहीं पता। पर उसे इतना पता है कि बीमारी अब पहले जैसा डर नहीं लाती। सच यह है कि इलाज का ख़र्च गरीबी का बड़ा कारण है — एक बीमारी किसी भी परिवार को गरीबी रेखा के नीचे धकेल सकती है; और अच्छी स्वास्थ्य-व्यवस्था उसे वहीं रोक लेती है।

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📖 कहानी 2 — कक्षा पाँच की पूजा

बाड़मेर के एक राजकीय विद्यालय में पूजा (काल्पनिक) कक्षा पाँच में पढ़ती है। उसके घर में कोई बारहवीं तक नहीं पढ़ा। विद्यालय आने की एक बड़ी वजह है दोपहर का गर्म भोजन — घर से ख़ाली पेट आने वाले बच्चों के लिए वही सबसे भरोसेमंद थाली है। उसकी बड़ी बहन को छात्रवृत्ति मिली और विद्यालय की दूरी पाटने के लिए साइकिल भी, इसलिए वह आठवीं के बाद भी पढ़ाई जारी रख सकी।

पर एक दिन एक सर्वेक्षण दल ने पूजा को कक्षा दो की किताब का एक छोटा-सा पाठ पढ़ने को दिया। वह अटक-अटककर भी नहीं पढ़ सकी। पूजा अकेली नहीं थी — कक्षा के आधे से ज़्यादा बच्चे यही हाल में थे। विद्यालय में नामांकन पक्का था, पर सीखना कमज़ोर था। यानी बच्चा स्कूल में है, पर पढ़ा नहीं है।

फिर कक्षा में नई शिक्षिका आईं। उन्होंने पाठ्यपुस्तक रटवाने की जगह आधारभूत सीख के तरीके अपनाए — कहानी-कार्ड, अक्षरों और गिनती के खेल, छोटे समूहों में पढ़ना, और हर बच्चे के स्तर के हिसाब से अलग अभ्यास। तीन महीने में पूजा अटकते-अटकते पूरा पैराग्राफ़ पढ़ने लगी, और पहली बार उसने हाथ उठाकर जवाब दिया।

पूजा की कहानी बताती है कि शिक्षा केवल इमारत, भोजन और छात्रवृत्ति से पूरी नहीं होती; सीखने की गुणवत्ता ही यह तय करती है कि बच्ची आगे चलकर कौशल, रोज़गार और आत्मनिर्भरता तक पहुँचेगी या नहीं।

🎯 इस भाग (अध्याय 8ख) में हम इन्हीं दोनों कहानियों को खोलेंगे — स्वास्थ्य के संकेतक व चुनौतियाँ; स्वास्थ्य नीति और बीमा योजनाएँ; शिक्षा की स्थिति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020; शिक्षा की प्रमुख योजनाएँ; महिला एवं बाल कल्याण; कमज़ोर वर्गों की योजनाएँ; सामाजिक सुरक्षा एवं वित्तीय समावेशन — संविधान और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ाव, और राजस्थान की योजनाएँ। गरीबी, भूख और रोज़गार की कहानी अध्याय 8क में पहले ही पढ़ी जा चुकी है।

1. स्वास्थ्य — संकेतक, संक्रमण एवं चुनौतियाँ (Health — Indicators, Transitions & Challenges)

आज़ादी के समय भारत में जन्मा हर छठा-सातवाँ बच्चा अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाता था और औसत भारतीय मुश्किल से 32 वर्ष जीता था। आज शिशु मृत्यु दर 24 प्रति हज़ार पर आ गई है और औसत आयु 70 वर्ष से ऊपर है। यह बदलाव टीकों, संस्थागत प्रसव, साफ़ पानी और बेहतर पोषण की लंबी कहानी है।

लेकिन जिस गाँव में कभी हैज़ा और चेचक से मौतें होती थीं, वहीं आज मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग फैल रहे हैं, और इलाज का बड़ा ख़र्च परिवार जेब से भरते हैं। इस खंड में स्वास्थ्य के पैमाने, बदलती बीमारियाँ और तंत्र की कमज़ोरियाँ समझेंगे।

क. स्वास्थ्य क्या है?

📘 आसान परिभाषा: स्वास्थ्य (Health)

📚 परिभाषा: विश्व स्वास्थ्य संगठन के संविधान (1948) में दी गई परिभाषा — स्वास्थ्य केवल रोग या दुर्बलता का अभाव नहीं, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की अवस्था है।

✅ आसान भाषा में: बुख़ार न होना ही स्वस्थ होना नहीं है; मन शांत हो, शरीर काम करने लायक़ हो और समाज में सम्मान से जी सकें — तभी व्यक्ति सच में स्वस्थ है। 🏠 उदाहरण: जैसे — कोई युवक शारीरिक रूप से बिल्कुल ठीक है, पर बेरोज़गारी के कारण गहरे अवसाद में है; विश्व स्वास्थ्य संगठन की दृष्टि में वह पूर्ण स्वस्थ नहीं है।

स्वास्थ्य सेवा का प्रकार

उद्देश्य और उदाहरण

निवारक (Preventive) और प्रोत्साहक (Promotive)

रोग से पहले रोकथाम व स्वस्थ जीवनशैली — टीकाकरण, स्वच्छ पेयजल, योग, पोषण-संवर्धन (Fortification), सही खाओ भारत

उपचारात्मक (Curative)

रोग के बाद इलाज — दवाइयाँ, शल्य क्रिया, डायलिसिस

पुनर्वास (Rehabilitative) और प्रशामक (Palliative)

सामान्य जीवन में वापसी (फ़िज़ियोथेरेपी, कृत्रिम अंग); असाध्य रोग में कष्ट कम करना

🔎 तालिका से क्या समझें: सबसे सस्ता और असरदार इलाज निवारक और प्रोत्साहक है, फिर भी परिवारों का अधिकांश ख़र्च उपचारात्मक सेवाओं पर होता है।

ख. संविधान और स्वास्थ्य

स्वास्थ्य मूल रूप से राज्य सूची का विषय है — प्रविष्टि 6 में "सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता; अस्पताल और औषधालय"। इसीलिए अस्पताल और अधिकांश स्वास्थ्य व्यय राज्यों के हाथ में है, केंद्र राष्ट्रीय कार्यक्रमों से दिशा देता है।

संवैधानिक प्रावधान

स्वास्थ्य से संबंध

अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार)

सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगा खेत मज़दूर समिति मामले (1996) में कहा कि आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता देना राज्य का दायित्व है — स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा

अनुच्छेद 47

पोषण-स्तर और जीवन-स्तर ऊँचा करना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार राज्य का प्राथमिक कर्तव्य; नशीले पेय और हानिकारक मादक द्रव्यों के सेवन पर रोक का प्रयास

समवर्ती सूची

जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन (20क), चिकित्सा शिक्षा (25), चिकित्सा पेशा (26), एक राज्य से दूसरे राज्य में संक्रामक रोगों का प्रसार रोकना (29), जन्म-मृत्यु आँकड़े (30)

ग. स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतक

स्वास्थ्य मापने का सबसे भरोसेमंद वार्षिक स्रोत नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System) है, जिसे भारत के महापंजीयक का कार्यालय चलाता है।

📘 आसान परिभाषा: शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate)

📚 परिभाषा: किसी वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु की संख्या।

✅ आसान भाषा में: हज़ार बच्चे पैदा हुए, उनमें से कितने अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाए — यही शिशु मृत्यु दर है; इसे पूरे स्वास्थ्य तंत्र का "थर्मामीटर" माना जाता है। 🏠 उदाहरण: जैसे — केरल में यह दर 8 है और छत्तीसगढ़ में 36; यानी छत्तीसगढ़ में एक शिशु के पहले वर्ष में मरने की आशंका केरल से लगभग साढ़े चार गुना है।

संकेतक

परिभाषा (संक्षेप में)

भारत — नवीनतम

2030 का सतत विकास लक्ष्य

नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate)

जन्म के पहले 28 दिनों में मृत्यु, प्रति 1,000 जीवित जन्म

18 (2024)

12 या उससे कम

शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate)

1 वर्ष से कम आयु में मृत्यु, प्रति 1,000 जीवित जन्म

24 (2024)

अलग लक्ष्य नहीं

पाँच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (Under-5 Mortality Rate)

5 वर्ष पूरे होने से पहले मृत्यु, प्रति 1,000 जीवित जन्म

28 (2024)

25 या उससे कम

मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio)

गर्भावस्था, प्रसव या गर्भ-समाप्ति के 42 दिनों के भीतर संबंधित कारणों से माताओं की मृत्यु, प्रति 1,00,000 जीवित जन्म

88 (2021-23)

70 से कम

कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate)

एक महिला से उसके प्रजनन काल में औसत बच्चे

1.9 (2024)

प्रतिस्थापन स्तर 2.1

जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth)

नवजात के औसतन जीवित रहने के अपेक्षित वर्ष

70.0 (2016-20 जीवन-तालिका); मानव विकास रिपोर्ट 2025 में 72.0

—

🔎 तालिका से क्या समझें: चारों मृत्यु-संकेतकों में तेज़ गिरावट आई है, पर ध्यान दीजिए — शिशुओं की कुल मौतों में लगभग तीन-चौथाई (73%) नवजात मौतें हैं। यानी अब असली लड़ाई जन्म के पहले महीने की है: समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वज़न, संक्रमण और प्रसव के समय दम घुटना।

चित्र

चित्र 1: भारत के प्रमुख स्वास्थ्य संकेतक — 2014 बनाम नवीनतम, और 2030 के लक्ष्य

📊 नमूना पंजीकरण प्रणाली 2024 (मई 2026 में जारी) — नवीनतम आँकड़े

1. शिशु मृत्यु दर 24 (2019 में 30; 2014 में 39) — ग्रामीण 27, शहरी 17।

2. सबसे कम शिशु मृत्यु दर — केरल (8); सबसे अधिक — छत्तीसगढ़ (36); मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश लगभग 35।

3. अशोधित जन्म दर 18.3 (2014 में 21.0), अशोधित मृत्यु दर 6.4 प्रति हज़ार।

4. जन्म के समय लिंगानुपात 918 लड़कियाँ प्रति 1,000 लड़के; संस्थागत जन्म लगभग 95%।

⚠️ ध्यान दें — दर और अनुपात का अंतर

दर (Rate) बनाम अनुपात (Ratio) — शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्म पर, जबकि मातृ मृत्यु अनुपात प्रति 1,00,000 जीवित जन्म पर मापा जाता है। मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) एक अलग पैमाना है, जो प्रजनन आयु (15-49 वर्ष) की प्रति लाख महिलाओं पर गिना जाता है।

घ. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 — स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

छठे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2023-24) के तथ्य-पत्रक मई 2026 के अंत में जारी हुए। यहाँ मातृ-शिशु सेवाओं, टीकाकरण और बीमा के बदलाव देखें —

संकेतक

पाँचवाँ दौर (2019-21)

छठा दौर (2023-24)

संकेत

संस्थागत प्रसव

88.6%

90.6%

दस में से नौ से अधिक प्रसव अस्पताल में

कम से कम 4 प्रसव-पूर्व जाँचें

58.5%

65.2%

सुधार, पर एक-तिहाई माताएँ अब भी वंचित

पूर्ण टीकाकरण (12-23 माह के बच्चे)

83.8%

87.1%

सुधार; लक्ष्य 90% से ऊपर

रोटावायरस टीका

36.4%

85.4%

नए टीके का तेज़ विस्तार

घर के किसी सदस्य का स्वास्थ्य बीमा

41.0%

60.2%

आयुष्मान भारत का प्रभाव

सिज़ेरियन से प्रसव

21.5%

27.2%

चिंता — निजी अस्पतालों में अनावश्यक शल्य

18 वर्ष से पहले विवाहित (20-24 वर्ष की महिलाएँ)

23.3%

20.1%

घटा, पर हर पाँचवीं युवती अब भी बाल-विवाह की शिकार

🔎 तालिका से क्या समझें: सेवाओं की पहुँच (प्रसव, टीका, बीमा) में बड़ा सुधार हुआ है, पर गुणवत्ता के संकेत मिश्रित हैं — सिज़ेरियन का तेज़ी से बढ़ना और खसरे की दूसरी ख़ुराक का पीछे रहना बताता है कि अगला चरण "पहुँच" से आगे "सही और पूरी देखभाल" का है।

ङ. जनसांख्यिकीय और महामारी-विज्ञान संक्रमण

जब मौतें घटती हैं और लोग लंबा जीते हैं, तो मौत के कारण भी बदल जाते हैं — इसी बदलाव को महामारी-विज्ञान संक्रमण कहते हैं।

📘 आसान परिभाषा: महामारी-विज्ञान संक्रमण (Epidemiological Transition)

📚 परिभाषा: किसी समाज में मृत्यु और रोग के प्रमुख कारणों का संक्रामक, मातृ-शिशु और पोषण-जनित रोगों से हटकर दीर्घकालिक असंक्रामक रोगों (हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, श्वसन रोग) की ओर क्रमिक स्थानांतरण; यह सिद्धांत अब्देल ओमरान (1971) ने दिया।

✅ आसान भाषा में: पहले लोग हैज़ा, चेचक और टीबी से जल्दी मर जाते थे; अब वे लंबा जीते हैं, पर बुढ़ापे और बदली जीवनशैली की बीमारियों से जूझते हैं। 🏠 उदाहरण: जैसे — दादाजी के गाँव में मौत का बड़ा कारण दस्त और बुख़ार था; आज उसी गाँव में सबसे ज़्यादा लोग दिल के दौरे और मधुमेह की जटिलताओं से मरते हैं।

ओमरान के चरण

मृत्यु के मुख्य कारण

जीवन प्रत्याशा

1. महामारी और अकाल का युग

प्लेग, हैज़ा, चेचक, अकाल

20-40 वर्ष

2. घटती महामारियों का युग

संक्रामक रोग घटने लगते हैं, टीके-स्वच्छता का असर

30-50 वर्ष

3. अपक्षयी और मानव-निर्मित रोगों का युग

हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, दुर्घटनाएँ, प्रदूषण-जनित रोग

50 वर्ष से अधिक

4. विलंबित अपक्षयी रोगों का युग (बाद में जोड़ा गया)

वही रोग, पर इलाज से अधिक उम्र में

70 वर्ष से अधिक

📘 आसान परिभाषा: रोगों का दोहरा बोझ (Double Burden of Disease)

📚 परिभाषा: जब एक ही समाज पर एक साथ संक्रामक रोगों (क्षय रोग, मलेरिया, डेंगू, दस्त) और असंक्रामक रोगों (हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, उच्च रक्तचाप) दोनों का भारी बोझ हो।

✅ आसान भाषा में: पुरानी बीमारियाँ गई नहीं और नई बीमारियाँ आ गईं — स्वास्थ्य तंत्र को दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ रहा है। 🏠 उदाहरण: जैसे — एक ही ज़िला अस्पताल में एक वार्ड डेंगू और टीबी के मरीज़ों से भरा है, तो दूसरे में मधुमेह और हृदयाघात के।

🦠 संक्रामक रोगों का बोझ — अब भी भारी

🫀 असंक्रामक रोगों का बढ़ता बोझ

◆ दुनिया के लगभग 25% क्षय रोगी भारत में (2024 में लगभग 27 लाख नए मामले)

◆ दस्त और निमोनिया — शिशु मौतों के बड़े कारण

◆ कुल मौतों में 60% से अधिक हिस्सा असंक्रामक रोगों का

◆ लगभग 10.1 करोड़ मधुमेह रोगी और 13.6 करोड़ पूर्व-मधुमेह (2023 का राष्ट्रीय अध्ययन)

◆ कारण — तंबाकू, शराब, निष्क्रिय जीवनशैली, अति-प्रसंस्कृत भोजन, वायु प्रदूषण

🏏 क्रिकेट की भाषा में — दो छोर से गेंदबाज़ी

सोचिए एक बल्लेबाज़ को एक छोर से तेज़ गेंदबाज़ (संक्रामक रोग) बाउंसर फेंक रहा है और दूसरे छोर से फिरकी गेंदबाज़ (असंक्रामक रोग) धीरे-धीरे जाल बुन रहा है। तेज़ गेंदबाज़ का ख़तरा तुरंत दिखता है, पर फिरकी गेंदबाज़ चुपचाप विकेट ले जाता है। भारत का स्वास्थ्य तंत्र इसी बल्लेबाज़ की तरह है — उसे टीके और स्वच्छता से तेज़ गेंदबाज़ को भी खेलना है और नियमित जाँच, व्यायाम और सही खान-पान से फिरकी को भी।

च. स्वास्थ्य पर व्यय और जेब से ख़र्च

📘 आसान परिभाषा: जेब से होने वाला स्वास्थ्य व्यय (Out-of-Pocket Expenditure)

📚 परिभाषा: इलाज के समय परिवार द्वारा सीधे अपनी जेब से किया गया वह भुगतान, जिसकी भरपाई न सरकार करती है और न कोई बीमा; इसे कुल स्वास्थ्य व्यय के प्रतिशत के रूप में मापा जाता है।

✅ आसान भाषा में: अस्पताल का बिल, दवाइयाँ और जाँचें — जो पैसा आपको ख़ुद देना पड़े, वही जेब से ख़र्च है। 🏠 उदाहरण: जैसे — पिता के हृदय-ऑपरेशन के लिए किसान ने अपनी ज़मीन गिरवी रखी; यह जेब से ख़र्च है, और जब यह परिवार की आय के बड़े हिस्से को निगल जाए तो उसे विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय (Catastrophic Health Expenditure) कहते हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान (National Health Accounts)

2014-15

2021-22

कुल स्वास्थ्य व्यय — जीडीपी का प्रतिशत

लगभग 3.2%

3.83% (₹9.04 लाख करोड़; प्रति व्यक्ति ₹6,602)

सरकारी स्वास्थ्य व्यय — जीडीपी का प्रतिशत

1.13%

1.84%

जेब से व्यय — कुल स्वास्थ्य व्यय में हिस्सा

62.6%

39.4%

🔎 तालिका से क्या समझें: सात वर्षों में सरकार का हिस्सा 29% से 48% हुआ और जेब से ख़र्च 62.6% से 39.4% पर आया — यह बड़ा सुधार है। फिर भी 39% का स्तर वैश्विक औसत (लगभग 18%) का दोगुना है, और सरकारी व्यय राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के 2.5% (GDP) लक्ष्य से अब भी दूर है। जेब से ख़र्च का सबसे बड़ा हिस्सा दवाइयों पर जाता है।

छ. स्वास्थ्य तंत्र की चुनौतियाँ

चुनौती

स्थिति

असर

डॉक्टरों की कमी

पंजीकृत एलोपैथिक व आयुष डॉक्टर मिलाकर अनुपात लगभग 1:811 (विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक 1:1,000); पर डॉक्टर शहरों में केंद्रित

गाँवों में झोलाछाप पर निर्भरता

विशेषज्ञों का अभाव

ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्जन, स्त्री-रोग, शिशु-रोग विशेषज्ञों के लगभग 80% आवश्यक पद ख़ाली

मरीज़ ज़िला/मेडिकल कॉलेज की ओर भागते हैं — बड़े अस्पतालों पर भीड़

ग्रामीण-शहरी व राज्यों में असमानता

केरल-तमिलनाडु बनाम बिहार-उत्तर प्रदेश-छत्तीसगढ़ के संकेतकों में बड़ा अंतर

एक ही देश में "दो भारत"

मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा

प्रति लाख आबादी पर लगभग 0.75 मनोचिकित्सक (मानक 3)

इलाज का बड़ा अंतर (विस्तार खंड 2 में)

❝ "स्वास्थ्य ही असली धन है, सोने-चाँदी के टुकड़े नहीं।" (It is health that is real wealth and not pieces of gold and silver.) (— महात्मा गांधी)

📖 पीछे की कहानी — रुख़सार ख़ातून — भारत की अंतिम पोलियो रोगी

13 जनवरी 2011 को हावड़ा (पश्चिम बंगाल) की डेढ़ वर्ष की बच्ची रुख़सार ख़ातून में पोलियो की पुष्टि हुई — भारत का अंतिम मामला। तब दुनिया मानती थी कि घनी आबादी वाले भारत में पोलियो ख़त्म करना असंभव है, पर पल्स पोलियो अभियान में लाखों स्वास्थ्यकर्मी हर बूथ, ट्रेन, बस-अड्डे और ईंट-भट्ठे तक पहुँचे। फ़रवरी 2012 में भारत पोलियो-स्थानिक देशों की सूची से बाहर हुआ और 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को पोलियो-मुक्त प्रमाणित किया।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. स्वास्थ्य राज्य सूची (प्रविष्टि 6) का विषय; अनुच्छेद 47 — सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार राज्य का प्राथमिक कर्तव्य; अनुच्छेद 21 में स्वास्थ्य का अधिकार।

2. नवजात मौतें शिशु मौतों का लगभग 73%; मृत्यु दर दर प्रति हज़ार, मातृ मृत्यु अनुपात प्रति लाख।

3. जेब से व्यय 62.6% से 39.4%, पर सरकारी व्यय 1.84% (लक्ष्य 2.5%); असंक्रामक रोग 60%+ मौतें — रोगों का दोहरा बोझ।

2. स्वास्थ्य नीति एवं योजनाएँ (Health Policy & Schemes)

पिछले खंड ने बताया कि कहाँ कमी है; यह खंड बताता है कि सरकार कैसे उसे भरने की कोशिश कर रही है — नीतियाँ जो दिशा तय करती हैं, और योजनाएँ जो उस दिशा में गाँव-गाँव तक पहुँचती हैं।

📖 पीछे की कहानी — भोर समिति — एक युद्धकालीन सपना

1943 में, जब बंगाल अकाल से तड़प रहा था, अंग्रेज़ सरकार ने सर जोसेफ़ भोर की अध्यक्षता में स्वास्थ्य सर्वेक्षण एवं विकास समिति बनाई। 1946 की रिपोर्ट ने कहा कि कोई भी भुगतान न कर पाने के कारण पर्याप्त इलाज से वंचित न रहे। समिति ने हर 40,000 आबादी पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और निवारक-उपचारात्मक सेवाओं का एकीकरण सुझाया। स्वतंत्र भारत का त्रि-स्तरीय स्वास्थ्य ढाँचा इसी नींव पर खड़ा है।

क. स्वास्थ्य नीति की यात्रा

वर्ष

नीति / समिति / घटना

मुख्य योगदान

1946

भोर समिति

त्रि-स्तरीय ढाँचा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की अवधारणा

1978

अल्मा-अता घोषणा

"सन् 2000 तक सबके लिए स्वास्थ्य" — प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल वैश्विक रणनीति

2005

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन

आशा कार्यकर्ता, जननी सुरक्षा योजना, रोगी कल्याण समितियाँ

2017

तीसरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति

सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, "आश्वासन-आधारित" दृष्टिकोण

2018

आयुष्मान भारत

आरोग्य मंदिर (प्राथमिक) + जन आरोग्य योजना (द्वितीयक-तृतीयक)

ख. भारत का त्रि-स्तरीय स्वास्थ्य ढाँचा

चित्र

चित्र 2: सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के स्तर और जनसंख्या मानक

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 — लक्ष्य और उपलब्धि

📘 आसान परिभाषा: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage)

📚 परिभाषा: ऐसी व्यवस्था जिसमें सभी लोगों को आवश्यक प्रोत्साहक, निवारक, उपचारात्मक, पुनर्वास और प्रशामक सेवाएँ पर्याप्त गुणवत्ता के साथ मिलें और उनके उपयोग से कोई आर्थिक कठिनाई न हो।

✅ आसान भाषा में: हर किसी को ज़रूरत पड़ने पर अच्छा इलाज मिले — और इलाज के कारण कोई परिवार कर्ज़ में न डूबे। 🏠 उदाहरण: जैसे — गाँव की महिला को आरोग्य मंदिर में मुफ़्त रक्तचाप जाँच मिले और ज़रूरत पड़ने पर ज़िला अस्पताल में बिना भुगतान ऑपरेशन हो जाए।

नीति 2017 का विज़न है — सभी आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य और कल्याण का उच्चतम स्तर, बिना आर्थिक संकट के। यह निजी क्षेत्र को रणनीतिक भागीदार मानती है और संसाधनों का कम से कम दो-तिहाई प्राथमिक स्वास्थ्य पर लगाने की बात करती है।

लक्ष्य (नीति 2017)

समय-सीमा

नवीनतम स्थिति

परिणाम

मातृ मृत्यु अनुपात 100 से कम

2020

88

✅ प्राप्त

शिशु मृत्यु दर 28

2019

24

✅ प्राप्त

नवजात मृत्यु दर 16

2025

18

⏳ क़रीब

सरकारी स्वास्थ्य व्यय जीडीपी का 2.5%

2025

1.84% (2021-22)

❌ दूर

राज्य अपने बजट का 8% से अधिक स्वास्थ्य पर

2020

अधिकांश राज्य 5-6% के आसपास

❌ दूर

क्षय रोग उन्मूलन

2025

घटना में 21% कमी; लक्ष्य अब सतत विकास लक्ष्य के साथ 2030

❌ चूका

🔎 तालिका से क्या समझें: जनसांख्यिकीय लक्ष्य (प्रजनन दर, जीवन प्रत्याशा, मातृ मृत्यु) लगभग सब पूरे हुए, पर पैसे से जुड़े लक्ष्य (सरकारी व्यय, राज्यों का बजट-हिस्सा) सबसे पीछे हैं। यानी भारत ने कम ख़र्च में अच्छे नतीजे दिए, पर आगे की प्रगति — नवजात देखभाल, असंक्रामक रोग, क्षय रोग — ज़्यादा निवेश माँगती है।

ग. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन — गाँव तक पहुँच

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (12 अप्रैल 2005) 2013 में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission) बना — केंद्र प्रायोजित योजना (सामान्य राज्य 60:40, पूर्वोत्तर व हिमालयी 90:10)।

📘 आसान परिभाषा: मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता — आशा (Accredited Social Health Activist)

📚 परिभाषा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गाँव की ही चुनी गई प्रशिक्षित महिला स्वयंसेविका (सामान्यतः प्रति 1,000 आबादी पर एक), जो समुदाय और सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के बीच कड़ी का काम करती है और कार्य-आधारित प्रोत्साहन राशि पाती है।

✅ आसान भाषा में: गाँव की वह "स्वास्थ्य दीदी" जो गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाती है, बच्चों का टीकाकरण याद दिलाती है और बीमारी की पहली ख़बर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचाती है। 🏠 उदाहरण: जैसे — आशा, सहायक नर्स दाई और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मिलकर "3 ए" बनाती हैं, जो प्राथमिक स्वास्थ्य की रीढ़ हैं; 2022 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की 10 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया।

मातृ-शिशु कार्यक्रम

आरंभ

मुख्य प्रावधान

जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana)

2005

संस्थागत प्रसव पर नकद प्रोत्साहन — कम प्रदर्शन वाले राज्यों के ग्रामीण क्षेत्र में माँ को ₹1,400 और आशा को ₹600; अन्य राज्यों में कम राशि

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (Janani Shishu Suraksha Karyakram)

1 जून 2011

सरकारी अस्पताल में पूर्णतः मुफ़्त प्रसव (सिज़ेरियन भी), मुफ़्त दवा, जाँच, रक्त, भोजन (सामान्य प्रसव में 3 दिन, सिज़ेरियन में 7 दिन) और घर से अस्पताल व वापसी का मुफ़्त परिवहन; बीमार शिशु (1 वर्ष तक) को भी मुफ़्त इलाज

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

2016

हर महीने की 9 तारीख़ को गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञ द्वारा मुफ़्त प्रसव-पूर्व जाँच

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (Rashtriya Bal Swasthya Karyakram)

2013

0-18 वर्ष के बच्चों की "4 डी" जाँच — जन्मजात दोष (Defects), रोग (Diseases), कमियाँ (Deficiencies), विकास में देरी व दिव्यांगता (Developmental Delays)

घ. आयुष्मान भारत — चार स्तंभ

आयुष्मान भारत (बजट 2018-19) का विचार है "निरंतर देखभाल" (Continuum of Care) — रोकथाम गाँव के आरोग्य मंदिर में, गंभीर इलाज सूचीबद्ध अस्पताल में, रिकॉर्ड डिजिटल।

स्तंभ

आरंभ

क्या करता है

नवीनतम स्थिति

आयुष्मान आरोग्य मंदिर

14 अप्रैल 2018

उप-स्वास्थ्य व प्राथमिक केंद्र उन्नत कर व्यापक प्राथमिक देखभाल — मुफ़्त दवा-जाँच, असंक्रामक रोगों की जाँच

लगभग 1.8 लाख

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

23 सितंबर 2018

द्वितीयक व तृतीयक अस्पताल-भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख का कैशलेस कवर

आँकड़े नीचे

स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन

अक्टूबर 2021

ब्लॉक से ज़िला तक क्रिटिकल केयर ब्लॉक, जन-स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ, रोग-निगरानी

परिव्यय ₹64,180 करोड़

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन

27 सितंबर 2021

देश का डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचा — हर नागरिक की स्वास्थ्य पहचान व रिकॉर्ड

विवरण नीचे

📊 प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना — आठ वर्ष पूरे (सितंबर 2026) — नवीनतम आँकड़े

1. कुल 48.51 करोड़ आयुष्मान कार्ड; इनमें 70+ आयु के बुज़ुर्गों के 1.36 करोड़ वय वंदना कार्ड।

2. 13.25 करोड़ अस्पताल-भर्ती; लगभग ₹2.03 लाख करोड़ मूल्य का इलाज।

3. 38,000 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पताल; 27 विशेषज्ञताओं में 1,961 चिकित्सा प्रक्रियाएँ।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन — स्वास्थ्य का "डिजिटल राजमार्ग"

इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) लागू करता है। जैसे एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) ने भुगतान को आपस में जोड़ा, वैसे ही यह मिशन मरीज़, डॉक्टर, अस्पताल, प्रयोगशाला और बीमा कंपनी को एक साझा डिजिटल ढाँचे से जोड़ता है।

मिशन के निर्माण-खंड — आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (ABHA) (14 अंकों की स्वैच्छिक स्वास्थ्य पहचान), स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री, स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, सहमति प्रबंधक (मरीज़ की अनुमति के बिना कोई रिकॉर्ड नहीं देख सकता) और एकीकृत स्वास्थ्य इंटरफ़ेस (टेली-परामर्श जैसी सेवाओं का खुला नेटवर्क)।

📊 डिजिटल स्वास्थ्य — नवीनतम आँकड़े

1. 97.6 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य खाते (ABHA) और लगभग 120 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड जुड़े (सितंबर 2026)।

💡 आज की भाषा में — डिजिलॉकर जैसा स्वास्थ्य लॉकर

जैसे डिजिलॉकर में आपकी मार्कशीट और ड्राइविंग लाइसेंस सुरक्षित रहते हैं और आप ही तय करते हैं कि किसे दिखाना है, वैसे ही स्वास्थ्य खाता आपकी जाँच रिपोर्ट और पर्चों का लॉकर है। जयपुर से दिल्ली जाने पर नए डॉक्टर को पुरानी फ़ाइलें ढोकर दिखाने की ज़रूरत नहीं — आपकी अनुमति से वह पूरा इतिहास एक क्लिक में देख लेगा।

ङ. टीकाकरण — मिशन इंद्रधनुष

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम 1985 में शुरू हुआ और हर वर्ष लगभग 2.6 करोड़ नवजातों तक पहुँचता है। जो बच्चे छूट गए या जिनका टीकाकरण अधूरा रहा, उनके लिए मिशन इंद्रधनुष लाया गया।

🏛️ मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush)

◆ आरंभ 25 दिसंबर 2014; लक्ष्य — 2 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण।

◆ फ़ोकस — दुर्गम, जनजातीय, शहरी झुग्गी और प्रवासी आबादी के छूटे (Left-out) व अधूरे (Drop-out) बच्चे।

◆ सघन मिशन इंद्रधनुष (Intensified Mission Indradhanush) 2017 से; 2023 के 5.0 संस्करण में पहली बार 5 वर्ष तक के बच्चे शामिल और खसरा-रूबेला उन्मूलन पर विशेष ज़ोर।

च. क्षय रोग मुक्त भारत

भारत ने क्षय रोग उन्मूलन का लक्ष्य 2025 रखा था (वैश्विक समय-सीमा 2030 से पाँच वर्ष पहले); लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, पर प्रगति उल्लेखनीय है। कार्यक्रम का नाम अब राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम है।

पहल

मुख्य बात

नि-क्षय पोषण योजना

2018 से हर टीबी रोगी को इलाज के दौरान पोषण हेतु सीधा नकद; नवंबर 2024 से राशि ₹500 से बढ़कर ₹1,000 प्रति माह

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान

सितंबर 2022; नि-क्षय मित्र — व्यक्ति, संस्थाएँ, कंपनियाँ रोगियों को गोद लेकर पोषण किट देती हैं

📊 क्षय रोग — विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक रिपोर्ट 2025 — नवीनतम आँकड़े

1. भारत में घटना दर 2015 में प्रति लाख 237 से घटकर 2024 में 187 — लगभग 21% कमी (वैश्विक कमी लगभग 12% — भारत की गति लगभग दोगुनी)।

2. टीबी से मौतों में 2015-2024 के बीच लगभग 28% कमी।

3. उपचार कवरेज 2015 के 53% से बढ़कर 2024 में 92%।

छ. असंक्रामक रोग, सस्ती दवा और स्वस्थ जीवनशैली

पहल

उद्देश्य / विशेषता

असंक्रामक रोगों की रोकथाम व नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (NP-NCD)

30 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मुख, स्तन व गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर की जनसंख्या-आधारित जाँच

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम

2016 से ज़िला अस्पतालों में गरीबों को मुफ़्त डायलिसिस

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय; ब्रांडेड दवाओं से 50-90% सस्ती जेनेरिक दवाएँ; देशभर में 16,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र

भारत "विश्व की फ़ार्मेसी" है — वैश्विक जेनेरिक दवा आपूर्ति का लगभग 20% और विश्व के टीकों का लगभग 60% यहीं से जाता है।

ज. मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल लत

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) में लगभग 10.6% वयस्क किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित पाए गए, और इलाज की ज़रूरत वाले लोगों में से 70-90% तक को इलाज नहीं मिल पाता था। कलंक (Stigma), जानकारी की कमी और विशेषज्ञों का अभाव — तीनों मिलकर इसे "छिपी महामारी" बनाते हैं।

पहल

वर्ष

मुख्य बात

मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम

2017

सरकारी सेवाओं से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल पाने का अधिकार; मरीज़ों की गरिमा और "अग्रिम निर्देश" (Advance Directive)

राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम — टेली-मानस (Tele-MANAS)

10 अक्टूबर 2022

24×7 निःशुल्क हेल्पलाइन 14416; राज्यों में भाषावार केंद्र; जुलाई 2025 तक 23.8 लाख से अधिक कॉल

📘 आसान परिभाषा: डिजिटल लत (Digital Addiction)

📚 परिभाषा: स्मार्टफ़ोन, इंटरनेट, ऑनलाइन गेम या सोशल मीडिया का ऐसा अत्यधिक और बाध्यकारी उपयोग, जिस पर व्यक्ति का नियंत्रण न रहे और जो उसकी पढ़ाई, काम, नींद, रिश्तों व मानसिक स्वास्थ्य को नुक़सान पहुँचाए।

✅ आसान भाषा में: फ़ोन हम नहीं चला रहे, फ़ोन हमें चला रहा है — घंटों रील देखते रहना, गेम छोड़ न पाना, फ़ोन न मिले तो बेचैनी। 🏠 उदाहरण: जैसे — कक्षा 9 का छात्र रात 2 बजे तक ऑनलाइन गेम खेलता है, सुबह स्कूल में सोता है, चिड़चिड़ा रहता है और परिवार से कट जाता है।

देश

डिजिटल लत से निपटने की पहल

ऑस्ट्रेलिया

16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया खाते पर राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश (दिसंबर 2025 से लागू)

भारत

टेली-मानस; राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु का तकनीक के स्वस्थ उपयोग हेतु सेवा (SHUT) क्लिनिक; ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम, 2025 (पैसे वाले ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध); कर्नाटक का डिजिटल डिटॉक्स केंद्र

झ. स्वास्थ्य बीमा — लापता मध्य वर्ग

📘 आसान परिभाषा: लापता मध्य वर्ग (Missing Middle)

📚 परिभाषा: जनसंख्या का वह हिस्सा जो इतना गरीब नहीं कि सरकारी बीमा योजना का पात्र हो, और इतना संपन्न या संगठित क्षेत्र में भी नहीं कि निजी या कर्मचारी बीमा ले सके; नीति आयोग ने 2021 में ऐसे लगभग 30% (लगभग 40 करोड़) लोगों का अनुमान लगाया था।

✅ आसान भाषा में: न बीपीएल कार्ड, न कंपनी की मेडिक्लेम — बीच में फँसे लोग, जिन्हें बीमारी में पूरी जेब ढीली करनी पड़ती है। 🏠 उदाहरण: जैसे — छोटे दुकानदार, स्वरोज़गार वाले कारीगर और अनौपचारिक क्षेत्र के मध्यम आय वाले परिवार।

ञ. कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व

📘 आसान परिभाषा: कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility)

📚 परिभाषा: कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत निर्धारित सीमा से बड़ी कंपनियों का यह वैधानिक दायित्व कि वे पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% कंपनी अधिनियम की अनुसूची-7 (Schedule VII) में सूचीबद्ध सामाजिक गतिविधियों पर ख़र्च करें; 1 अप्रैल 2014 से लागू।

✅ आसान भाषा में: बड़ी कंपनी जो समाज से कमाती है, उसका एक हिस्सा क़ानूनन समाज को लौटाए — स्कूल, अस्पताल, पानी, पर्यावरण पर। 🏠 उदाहरण: जैसे — कोई सीमेंट कंपनी अपने कारख़ाने के आसपास के गाँवों में स्मार्ट क्लास और मोबाइल स्वास्थ्य वैन चलाती है।

🏛️ धारा 135 — मुख्य प्रावधान

◆ लागू होगा यदि शुद्ध संपत्ति ₹500 करोड़, कारोबार ₹1,000 करोड़ या शुद्ध लाभ ₹5 करोड़ में से कोई एक पिछले वित्तीय वर्ष में पूरा हो।

◆ अनुसूची-7 की गतिविधियाँ — भूख-गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य व स्वच्छता, शिक्षा, लैंगिक समानता, पर्यावरण, विरासत, खेल, प्रधानमंत्री राहत कोष आदि।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. नीति 2017 — जनसांख्यिकीय लक्ष्य पूरे, व्यय लक्ष्य (2.5%, दो-तिहाई प्राथमिक) अधूरे; आरोग्य मंदिर + जन आरोग्य योजना + अवसंरचना मिशन + डिजिटल मिशन = आयुष्मान भारत के चार स्तंभ।

2. जननी सुरक्षा 2005, जननी शिशु सुरक्षा 2011, मिशन इंद्रधनुष 25 दिसंबर 2014, टेली-मानस 14416; टीबी — घटना 21%, मौतें 28% कम।

3. कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व — धारा 135, औसत शुद्ध लाभ का 2%।

3. शिक्षा — स्थिति, चुनौतियाँ एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (Education — Status, Challenges & NEP 2020)

शिक्षा वह चाबी है जो गरीबी, बेरोज़गारी और खराब स्वास्थ्य — तीनों के ताले खोलती है; इसीलिए यह सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और लोकतांत्रिक नागरिकता का सबसे मज़बूत साधन है।

लगभग 27% आबादी 3-18 वर्ष के स्कूल-आयु वर्ग में है। अब सवाल "बच्चा स्कूल पहुँचा या नहीं" से आगे बढ़कर "बच्चा सीख रहा है या नहीं" का है।

क. संविधान और शिक्षा

प्रावधान

विषय-वस्तु

42वाँ संविधान संशोधन, 1976

शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची (प्रविष्टि 25) में डाला — अब केंद्र और राज्य दोनों क़ानून बना सकते हैं

86वाँ संविधान संशोधन, 2002

तीन बदलाव — नया अनुच्छेद 21क; अनुच्छेद 45 में संशोधन; नया मौलिक कर्तव्य 51क(ट)

अनुच्छेद 21क

6-14 वर्ष के हर बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार

अनुच्छेद 45

राज्य 6 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रयास करेगा

📖 पीछे की कहानी — गोखले का विधेयक — सौ साल लंबा इंतज़ार

1910-11 में गोपाल कृष्ण गोखले ने 6-10 वर्ष के लड़कों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का विधेयक रखा; अंग्रेज़ सरकार और कई ज़मींदार सदस्यों ने इसे यह कहकर गिरा दिया कि जनता तैयार नहीं और ख़र्च बहुत होगा। 1993 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्नीकृष्णन मामले में शिक्षा को जीवन के अधिकार से जोड़ा, 2002 में अनुच्छेद 21क आया और 1 अप्रैल 2010 को शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ — लगभग सौ वर्ष बाद।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 — मुख्य प्रावधान

प्रावधान

विवरण

निःशुल्क व अनिवार्य

6-14 वर्ष (कक्षा 1-8) — पास के स्कूल में दाख़िला, उपस्थिति और प्रारंभिक शिक्षा पूरी कराना सरकार का दायित्व

25% आरक्षण — धारा 12(1)(ग)

निजी ग़ैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश-कक्षा की 25% सीटें कमज़ोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए; ख़र्च की प्रतिपूर्ति सरकार करती है

छात्र-शिक्षक अनुपात

प्राथमिक में 30:1, उच्च प्राथमिक में 35:1

निषेध

प्रवेश के समय कैपिटेशन शुल्क और बच्चे या माता-पिता की स्क्रीनिंग पर रोक; शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर रोक; बिना मान्यता स्कूल चलाने पर रोक

अनुत्तीर्ण न करने की नीति में बदलाव

2019 के संशोधन से राज्य कक्षा 5 और 8 में नियमित मूल्यांकन कर सकते हैं; असफल होने पर दोबारा मूल्यांकन, फिर भी असफल तो रोका जा सकता है

❝ "शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिससे आप दुनिया बदल सकते हैं।" (Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.) (— नेल्सन मंडेला)

ख. साक्षरता और नामांकन — आँकड़ों में शिक्षा

📘 आसान परिभाषा: साक्षरता दर (Literacy Rate)

📚 परिभाषा: 7 वर्ष या अधिक आयु की जनसंख्या का वह प्रतिशत जो किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ और लिख सके; जनगणना और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण इसी परिभाषा का प्रयोग करते हैं।

✅ आसान भाषा में: केवल अपना नाम लिख लेना साक्षरता नहीं है — एक छोटा संदेश पढ़कर समझ लेना और लिख लेना साक्षरता है। 🏠 उदाहरण: जैसे — दादी बस का बोर्ड पढ़कर सही बस पकड़ लें और अपनी बेटी को चिट्ठी लिख सकें, तो वे साक्षर हैं।

वर्ष / सर्वेक्षण

कुल

पुरुष

महिला

विशेष

1951 (जनगणना)

18.3%

27.2%

8.9%

स्वतंत्रता के समय हर 5 में से 4 भारतीय निरक्षर

2011 (जनगणना)

74.0%

82.1%

65.5%

केरल सबसे ऊपर (94%), बिहार सबसे नीचे (61.8%); राजस्थान 66.1%

2023-24 (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण)

80.9%

87.2%

74.6%

ग्रामीण 77.5%, शहरी 88.9%; मिज़ोरम सबसे ऊपर; बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सबसे नीचे

🔎 तालिका से क्या समझें: साक्षरता चार गुना से अधिक बढ़ी है, पर लैंगिक अंतर अब भी लगभग 12-13 अंकों का है। राजस्थान में स्त्री-पुरुष साक्षरता का अंतर बड़े राज्यों में सबसे अधिक (लगभग 20 अंक) है — यानी राजस्थान की साक्षरता की चुनौती मूलतः बालिका और महिला शिक्षा की चुनौती है।

📘 आसान परिभाषा: सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio)

📚 परिभाषा: किसी शिक्षा-स्तर पर नामांकित सभी विद्यार्थियों (आयु चाहे कुछ भी हो) की संख्या को उस स्तर की आधिकारिक आयु-वर्ग की कुल जनसंख्या से भाग देकर 100 से गुणा; उच्च शिक्षा के लिए आयु-वर्ग 18-23 वर्ष।

✅ आसान भाषा में: जितने बच्चे उस कक्षा की उम्र के हैं, उनकी तुलना में कितने उस स्तर पर पढ़ रहे हैं — अधिक या कम उम्र वाले भी गिने जाते हैं, इसलिए यह 100% से ऊपर भी जा सकता है। 🏠 उदाहरण: जैसे — गाँव में 6-10 वर्ष के 100 बच्चे हैं और कक्षा 1-5 में 105 बच्चे पढ़ रहे हैं (कुछ बड़ी उम्र के भी), तो प्राथमिक सकल नामांकन अनुपात 105% होगा।

📊 एकीकृत ज़िला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस 2025-26 (जुलाई 2026 में जारी) — नवीनतम आँकड़े

1. कुल 14.67 लाख स्कूल (लगभग 10 लाख सरकारी), कुल नामांकन लगभग 23.2 करोड़ — पिछले वर्ष से लगभग 5.8 लाख कम।

2. शिक्षक 1.03 करोड़; छात्र-शिक्षक अनुपात 24; फिर भी लगभग 1 लाख स्कूल एक-शिक्षक वाले।

3. स्कूल छोड़ने की दर — प्राथमिक 0.3%, उच्च प्राथमिक 3.6%, माध्यमिक 9.5%।

4. उच्चतर माध्यमिक तक टिके रहने की दर (Retention) केवल 51.9% — कक्षा 1 में आए लगभग आधे बच्चे ही कक्षा 12 तक पहुँचते हैं।

📊 अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण 2023-24 (जुलाई 2026 में जारी) — नवीनतम आँकड़े

1. उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 30% (2035 का लक्ष्य 50%); महिलाओं का 31.2% — लैंगिक समानता सूचकांक 1.08, यानी महिलाएँ पुरुषों से आगे।

2. अनुसूचित जाति का अनुपात 27.8%, अनुसूचित जनजाति का 22.8% — सामाजिक अंतर बरक़रार।

चित्र

चित्र 3: शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात

ग. नामांकन से आगे — सीखने का संकट

वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (ग्रामीण भारत)

2018

2022

2024

कक्षा 3 के बच्चे जो कक्षा 2 का पाठ पढ़ सकते हैं (सरकारी स्कूल)

—

16.3%

23.4%

कक्षा 5 के बच्चे जो कक्षा 2 का पाठ पढ़ सकते हैं (सरकारी स्कूल)

—

38.5%

44.8%

कक्षा 5 के बच्चे जो भाग का सवाल हल कर सकते हैं (सभी स्कूल)

27.9%

—

30.7%

कक्षा 8 के बच्चे जो कक्षा 2 का पाठ पढ़ सकते हैं (सभी स्कूल)

—

—

67.5%

🔎 तालिका से क्या समझें: कोविड से गिरावट के बाद 2024 में सबसे अच्छी वापसी हुई — ख़ासकर सरकारी स्कूलों में और गणित में। इसका श्रेय आधारभूत साक्षरता व संख्या-ज्ञान पर केंद्रित निपुण भारत जैसे प्रयासों को दिया जाता है। फिर भी कक्षा 3 के चार में से तीन बच्चे अभी कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाते।

📘 आसान परिभाषा: अधिगम निर्धनता (Learning Poverty)

📚 परिभाषा: विश्व बैंक की अवधारणा — 10 वर्ष की आयु तक एक सरल, आयु-उपयुक्त पाठ पढ़कर समझ न पाने वाले बच्चों का प्रतिशत (स्कूल से बाहर के बच्चों सहित)।

✅ आसान भाषा में: बच्चा स्कूल तो जाता है, किताब भी खोलता है, पर पढ़कर समझ नहीं पाता — यह "सीखने की गरीबी" है। 🏠 उदाहरण: जैसे — कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 की किताब का "राम खेत में गया" जैसा वाक्य अटक-अटक कर भी नहीं पढ़ पाए; कोविड से पहले भारत में यह अनुपात लगभग 55% आँका गया था।

दिसंबर 2024 में परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण (पहले राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण) में लगभग 21 लाख विद्यार्थियों का आकलन हुआ — कक्षा 3 में गणित का औसत अंक लगभग 60% था, पर कक्षा 9 तक पहुँचते-पहुँचते यह लगभग 37% रह गया। यानी ऊँची कक्षाओं में सीखने का अंतर और गहरा होता जाता है।

💡 क्या आप जानते हैं? 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है — स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती।

घ. शिक्षा प्रणाली की प्रमुख समस्याएँ

समस्या

तथ्य / संकेत

माध्यमिक स्तर पर पलायन

उच्चतर माध्यमिक में नामांकन अनुपात केवल 61.7%; 14-18 वर्ष के लगभग 2 करोड़ किशोर स्कूल से बाहर — लड़के परिवार की आय में हाथ बँटाने, लड़कियाँ घरेलू काम-देखभाल के कारण

शिक्षकों की कमी और गुणवत्ता

लगभग 11 लाख शिक्षक-पद रिक्त; 1 लाख एक-शिक्षक स्कूल; शिक्षकों से ग़ैर-शैक्षणिक काम

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता

विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों (क्यूएस 2026) में केवल 3 भारतीय — आईआईटी दिल्ली, बॉम्बे, मद्रास; शोध पर कम व्यय

⚠️ ध्यान दें — शिक्षा व्यय — दो अलग गणनाएँ

शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय के दो आँकड़े मिलते हैं — आर्थिक समीक्षा के सामाजिक सेवा व्यय में "शिक्षा" (केवल शिक्षा विभागों का व्यय) जीडीपी का लगभग 2.7-2.9% दिखता है (अध्याय 8क के खंड 1), जबकि शिक्षा मंत्रालय के "शिक्षा पर बजटीय व्यय का विश्लेषण" में सभी विभागों का शिक्षा-व्यय जोड़ने पर यह 4% से अधिक आता है। दोनों ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के 6% लक्ष्य से नीचे हैं।

ङ. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 — मुख्य लक्ष्य

29 जुलाई 2020 को स्वीकृत राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्वतंत्र भारत की तीसरी शिक्षा नीति है (पहली 1968 — कोठारी आयोग, दूसरी 1986)। मसौदा डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने बनाया। यहाँ नीति के लक्ष्य और बड़े सुधार देखें।

क्षेत्र

प्रमुख लक्ष्य / सुधार

प्रारंभिक बाल्यावस्था

3-6 वर्ष की आंगनवाड़ी/बालवाटिका को औपचारिक शिक्षा में शामिल; खेल-आधारित शिक्षा

आधारभूत साक्षरता-संख्या ज्ञान

कक्षा 3 तक हर बच्चे में पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी क्षमता — "सबसे ऊँची प्राथमिकता"

सार्वभौमिक नामांकन

2030 तक पूर्व-प्राथमिक से माध्यमिक तक 100% सकल नामांकन; खुले विद्यालयों से लगभग 2 करोड़ स्कूल-बाहर बच्चों को वापस लाना

भाषा

कम से कम कक्षा 5 तक (बेहतर हो तो कक्षा 8 तक) मातृभाषा/स्थानीय भाषा में पढ़ाई; त्रि-भाषा सूत्र लचीले रूप में

पाठ्यक्रम व मूल्यांकन

कला-विज्ञान-वाणिज्य का कठोर विभाजन समाप्त; कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा व इंटर्नशिप; बोर्ड के इम्तिहानों का दबाव घटाना, वर्ष में दो बार का अवसर; समग्र प्रगति-पत्रक

शिक्षक

2030 तक शिक्षक बनने की न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय एकीकृत बी.एड.

उच्च शिक्षा

2035 तक सकल नामांकन 50%; बहु-विषयक विश्वविद्यालय; 4 वर्षीय स्नातक; एकल नियामक

स्नातक में बहु-प्रवेश और बहु-निकास — 1 वर्ष पर प्रमाण-पत्र, 2 वर्ष पर डिप्लोमा, 3 वर्ष पर स्नातक उपाधि, 4 वर्ष पर शोध सहित स्नातक उपाधि। यह अकादमिक क्रेडिट बैंक (Academic Bank of Credits) से चलता है, जिसमें अर्जित क्रेडिट डिजिटल रूप से जमा रहते हैं; राष्ट्रीय क्रेडिट ढाँचे में 1 क्रेडिट ≈ 30 घंटे का अधिगम है।

च. उच्च शिक्षा नियमन — उच्च शिक्षा आयोग से विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान तक

उच्च शिक्षा में कई नियामक हैं — विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (1956), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद — जिनके अधिकार टकराते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने एकल छत्र नियामक — भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (Higher Education Commission of India) का प्रस्ताव रखा, जिसका नियमन "हल्का पर कसा हुआ" (Light but Tight) हो।

💡 क्या आप जानते हैं? अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितंबर) की घोषणा यूनेस्को ने 1966 में की थी और इसे पहली बार 1967 में मनाया गया।

पक्ष

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 (Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill)

क्या ख़त्म होगा

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के क़ानून

नई संरचना

शीर्ष निकाय "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान" के अधीन तीन परिषदें — नियामक परिषद, प्रत्यायन (मान्यता) परिषद, मानक परिषद

दायरे से बाहर

चिकित्सा और विधि शिक्षा

स्थिति (अक्टूबर 2026)

अभी क़ानून नहीं बना — संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट के बाद संसद में आगे की कार्यवाही होनी है; समिति के विचार-विमर्श में राज्यों के प्रतिनिधित्व और संस्थानों की स्वायत्तता के सुरक्षा-उपायों पर ज़ोर

🌟 समर्थन में तर्क

⚠️ आलोचना और आशंकाएँ

◆ एक खिड़की — कई नियामकों का दोहराव और भ्रष्टाचार की गुंजाइश घटेगी

◆ संस्थानों को अधिक स्वायत्तता, परिणाम-आधारित नियमन

◆ शिक्षा समवर्ती विषय — केंद्रीकरण और राज्यों की भूमिका घटने की आशंका

◆ अनुदान मंत्रालय के पास जाने से राजनीतिक हस्तक्षेप का ख़तरा

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. 42वाँ संशोधन (1976) — शिक्षा समवर्ती सूची में; 86वाँ (2002) — अनुच्छेद 21क; शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, निजी स्कूलों में 25% सीटें।

2. साक्षरता 18.3% (1951) से 80.9% (2023-24); उच्च शिक्षा नामांकन 30%, लैंगिक समानता सूचकांक 1.08; कक्षा 3 के केवल 23.4% (सरकारी स्कूल) कक्षा 2 का पाठ पढ़ पाते हैं।

3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 29 जुलाई 2020 — स्कूल 100% नामांकन 2030, उच्च शिक्षा 50% 2035, व्यय 6%; विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक अभी संयुक्त संसदीय समिति के पास।

4. शिक्षा की प्रमुख योजनाएँ (Major Education Schemes)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक नक़्शा है; योजनाएँ वे सड़कें हैं जिन पर चलकर लक्ष्य तक पहुँचना है। इन्हें याद रखने का सबसे आसान तरीक़ा है — बच्चे के जीवन-चक्र के क्रम में देखना: आंगनवाड़ी से स्कूल, स्कूल से कॉलेज और कॉलेज से आजीवन सीखने तक।

💡 आज की भाषा में — पढ़ाई की पासबुक

जैसे बैंक की पासबुक में हर जमा-निकासी दर्ज रहती है, वैसे ही अपार पहचान में बच्चे की हर कक्षा, हर अंक-पत्र, हर प्रमाण-पत्र और खेल-उपलब्धि दर्ज रहती है। स्कूल बदला, शहर बदला या कॉलेज बदला — "पासबुक" साथ चलती है। और अकादमिक क्रेडिट बैंक उस खाते की तरह है जिसमें आपके कमाए क्रेडिट जमा हैं — बीच में पढ़ाई छोड़ी तो पैसा डूबा नहीं, लौटकर वहीं से आगे बढ़ सकते हैं।

💡 क्या आप जानते हैं? कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय 2004 में शैक्षिक रूप से पिछड़े प्रखंडों में वंचित वर्गों की बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय के रूप में शुरू हुए; अब ये समग्र शिक्षा का हिस्सा हैं।

क. स्कूली शिक्षा की छत्र योजना — समग्र शिक्षा

📘 आसान परिभाषा: समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha)

📚 परिभाषा: 2018-19 से लागू केंद्र प्रायोजित एकीकृत योजना, जिसने तीन पुरानी योजनाओं — सर्व शिक्षा अभियान (2000-01), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (2009) और शिक्षक शिक्षा — को मिलाकर पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा को एक निरंतरता (Continuum) के रूप में देखा।

✅ आसान भाषा में: पहले प्राथमिक, माध्यमिक और शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग योजनाएँ थीं; अब एक ही छतरी के नीचे पूरी स्कूली शिक्षा। 🏠 उदाहरण: जैसे — एक ही योजना से गाँव के स्कूल में नया कक्षा-कक्ष, दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशाला और शिक्षकों का प्रशिक्षण होता है।

🏛️ समग्र शिक्षा — मुख्य बातें

◆ समग्र शिक्षा 2.0 — 2021-22 से 2025-26 तक, कुल परिव्यय लगभग ₹2.94 लाख करोड़; राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पुनर्गठित।

◆ घटक — सार्वभौमिक पहुँच, बालिका शिक्षा (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय), समावेशी शिक्षा (विशेष आवश्यकता वाले बच्चे), व्यावसायिक व डिजिटल शिक्षा, ज़िला व राज्य शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों का सुदृढ़ीकरण।

ख. स्कूली शिक्षा — प्रमुख योजनाएँ एवं पहलें

योजना / पहल

आरंभ

उद्देश्य और मुख्य विशेषता

निपुण भारत (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy)

5 जुलाई 2021

समग्र शिक्षा के तहत आधारभूत साक्षरता व संख्या-ज्ञान मिशन — 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा 3 के अंत तक समझ के साथ पढ़ने और बुनियादी गणित में सक्षम

प्रधानमंत्री श्री — उभरते भारत के लिए विद्यालय (PM SHRI)

7 सितंबर 2022

14,500 से अधिक सरकारी स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आदर्श स्कूल बनाना — स्मार्ट कक्षा, डिजिटल ग्रंथालय, विज्ञान प्रयोगशाला, हरित स्कूल; जुलाई 2026 तक 13,092 स्कूल चयनित; परिव्यय ₹27,360 करोड़ (केंद्र ₹18,128 करोड़), 2022-23 से 2026-27

परख (Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Development)

2023

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के अधीन राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र — विभिन्न बोर्डों के मूल्यांकन मानकों में एकरूपता, राष्ट्रीय सर्वेक्षण

अपार (Automated Permanent Academic Account Registry)

2023

"एक राष्ट्र, एक छात्र पहचान-पत्र" — हर विद्यार्थी की आजीवन 12 अंकों की शैक्षणिक पहचान; अंक-पत्र, प्रमाण-पत्र, क्रेडिट डिजिलॉकर व अकादमिक क्रेडिट बैंक से जुड़े

दीक्षा (Digital Infrastructure for Knowledge Sharing)

सितंबर 2017

"एक राष्ट्र, एक डिजिटल मंच" — क्यूआर कोड वाली पाठ्य-किताबें, अनेक भाषाओं में ई-सामग्री, दृष्टि व श्रवण बाधित विद्यार्थियों के अनुकूल

🔎 तालिका से क्या समझें: ध्यान दीजिए, अधिकांश नई योजनाएँ बुनियाद (निपुण भारत, विद्या प्रवेश, जादुई पिटारा) और मापन (परख, अपार) पर हैं — यह उसी "सीखने के संकट" का जवाब है जो पिछले खंड के आँकड़ों में दिखा। बच्चा पढ़ना-गिनना शुरू में न सीखे तो आगे की हर कक्षा उसके लिए और कठिन होती जाती है।

ग. प्रौढ़ शिक्षा — उल्लास

🏛️ उल्लास — नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS — Understanding of Lifelong Learning for All in Society)

◆ केंद्र प्रायोजित योजना, अवधि 2022-23 से 2026-27; 15 वर्ष या अधिक आयु के सभी निरक्षर लक्षित — महिलाओं और पिछड़े राज्यों पर विशेष ज़ोर।

◆ लक्ष्य — 5 करोड़ शिक्षार्थी (लगभग 1 करोड़ प्रति वर्ष); स्वयंसेवक शिक्षक, विद्यार्थी और शिक्षक-प्रशिक्षु पढ़ाते हैं; ऑनलाइन शिक्षण-आकलन प्रणाली और उल्लास ऐप।

◆ पूर्ण साक्षर (वयस्क साक्षरता लगभग 95% या अधिक) घोषित — लद्दाख (पहला केंद्रशासित प्रदेश), मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश (2025), सिक्किम और उत्तराखंड (2026)।

📖 पीछे की कहानी — एर्नाकुलम — जहाँ हर हाथ में क़लम आई

1989 में केरल के एर्नाकुलम ज़िले में हज़ारों स्वयंसेवक — शिक्षक, विद्यार्थी, गृहिणियाँ — घर-घर, मछुआरों की बस्तियों और बागानों तक गए और शाम की कक्षाओं में दादा-दादी की उम्र के लोगों को भी अक्षर सिखाया। 4 फ़रवरी 1990 को एर्नाकुलम देश का पहला पूर्ण साक्षर ज़िला बना और 18 अप्रैल 1991 को पूरा केरल पूर्ण साक्षर राज्य। आज का उल्लास भी उसी स्वयंसेवा की भावना पर टिका है।

घ. उच्च शिक्षा, शोध और डिजिटल अधिगम

योजना / पहल

आरंभ

मुख्य विशेषता

स्वयं (Study Webs of Active-Learning for Young Aspiring Minds)

9 जुलाई 2017

कक्षा 9 से स्नातकोत्तर तक के निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम; क्रेडिट अकादमिक क्रेडिट बैंक में स्थानांतरित हो सकते हैं

प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी

6 नवंबर 2024

शीर्ष 860 गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को बिना गिरवी, बिना गारंटर शिक्षा ऋण; ₹7.5 लाख तक के ऋण पर 75% सरकारी ऋण-गारंटी; ₹8 लाख तक वार्षिक पारिवारिक आय वालों को ₹10 लाख तक के ऋण पर 3% ब्याज छूट; परिव्यय ₹3,600 करोड़ (2024-25 से 2030-31)

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA)

2023

पुराने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (2013) का नया रूप — राज्य विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में गुणवत्ता, पहुँच और समता; पिछड़े व वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित ज़िलों पर ध्यान

अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फ़ाउंडेशन (Anusandhan National Research Foundation)

अधिनियम 2023

देश में शोध का शीर्ष निकाय; 5 वर्षों में लगभग ₹50,000 करोड़ (बड़ा हिस्सा उद्योग व निजी क्षेत्र से अपेक्षित)

⚠️ ध्यान दें — मिलते-जुलते नाम

निपुण भारत (शिक्षा मंत्रालय — कक्षा 3 तक आधारभूत साक्षरता) और निपुण नाम की निर्माण-श्रमिक कौशल पहल (आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय) अलग-अलग हैं।

💡 क्या आप जानते हैं? 1986 की शिक्षा नीति से शुरू हुए जवाहर नवोदय विद्यालय ग्रामीण मेधावी बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा देते हैं; इनमें कम से कम 75% सीटें ग्रामीण बच्चों के लिए हैं।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. समग्र शिक्षा (2018-19) = सर्व शिक्षा अभियान + राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान + शिक्षक शिक्षा; 60:40 / 90:10।

2. निपुण भारत (2021) — कक्षा 3 तक आधारभूत साक्षरता; प्रधानमंत्री श्री (2022) — आदर्श स्कूल; अपार — 12 अंकों की शैक्षणिक पहचान; परख — राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र।

3. उल्लास — 15+ आयु, 5 करोड़ शिक्षार्थी; प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी — बिना गारंटर ऋण, ₹7.5 लाख पर 75% गारंटी।

5. महिला एवं बाल कल्याण (Women & Child Welfare)

किसी समाज की असली सेहत इस बात से नापी जाती है कि वहाँ बेटी का जन्म कैसे स्वीकार किया जाता है, माँ और बच्चा कितने सुरक्षित हैं और कामकाजी महिला बिना डर के घर से निकल पाती है या नहीं। इस क्षेत्र की योजनाएँ तीन छातों में समेटी गई हैं — मिशन शक्ति (महिलाएँ), मिशन वात्सल्य (बाल संरक्षण) और सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (पोषण; विस्तार अध्याय 8क के खंड 8 में)।

लक्ष्य स्पष्ट है — सतत विकास लक्ष्य 5 (SDG 5): लैंगिक समानता प्राप्त करना और सभी महिलाओं-बालिकाओं को सशक्त बनाना। इसकी सबसे संवेदनशील कसौटी जन्म के समय लिंगानुपात है, जो 2014-15 में 918 (प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियाँ) से बढ़कर 2024-25 में लगभग 929-930 तक पहुँचा है।

क. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सुकन्या समृद्धि

📘 आसान परिभाषा: पुत्र-मेटा वरीयता (Son Meta-Preference)

📚 परिभाषा: वह सामाजिक प्रवृत्ति जिसमें दंपती तब तक संतान पैदा करते रहते हैं जब तक इच्छित संख्या में पुत्र न हो जाएँ; इससे भ्रूण-हत्या न होने पर भी परिवार की अंतिम संतान के लड़का होने की संभावना बढ़ जाती है और बेटियाँ "अवांछित" श्रेणी में आ जाती हैं।

✅ आसान भाषा में: बेटे की चाह में "एक और बच्चा" — और इस दौड़ में पैदा हुई बेटियाँ अक्सर कम पोषण, कम पढ़ाई और कम ध्यान पाती हैं। 🏠 उदाहरण: जैसे — किसी परिवार में पहली दो संतानें बेटियाँ हैं, तो तीसरी संतान की योजना केवल बेटे की आशा में बनती है; आर्थिक समीक्षा 2017-18 ने भारत में ऐसी लगभग 2.1 करोड़ "अवांछित बेटियों" का अनुमान लगाया।

पहलू

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao)

सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana)

शुरुआत

22 जनवरी 2015, पानीपत (हरियाणा) से

2015, इसी अभियान के अंतर्गत; आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय

प्रकृति

जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन अभियान; 100% केंद्र-वित्तपोषित; अब मिशन शक्ति के "संबल" घटक में, सभी ज़िलों में

बालिका के नाम लघु बचत खाता (डाकघर या अधिकृत बैंक)

उद्देश्य / पात्रता

घटते बाल लिंगानुपात को रोकना; लिंग-आधारित भ्रूण चयन पर रोक; बालिका का जीवन, सुरक्षा और शिक्षा

10 वर्ष तक की बालिका; एक परिवार में अधिकतम 2 बालिकाएँ

मुख्य प्रावधान

गर्भधारण-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (PCPNDT Act) का सख़्त पालन; डिजिटल गुड्डी-गुड्डा बोर्ड पर ज़िले के लड़का-लड़की जन्म आँकड़े; रेडियो-टीवी-सोशल मीडिया अभियान

जमा ₹250 से ₹1.5 लाख प्रति वर्ष; ब्याज 8.2% (अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही में भी यथावत); आयकर में छूट — जमा, ब्याज और परिपक्वता राशि तीनों कर-मुक्त

परिपक्वता / निकासी

—

खाता खुलने से 21 वर्ष पर, या 18 वर्ष के बाद विवाह पर; 18 वर्ष की आयु पर उच्च शिक्षा हेतु जमा का 50% तक निकासी

🔎 तालिका से क्या समझें: दोनों योजनाएँ एक ही समस्या के दो पहलू हैं — पहली सोच बदलती है (बेटी बोझ नहीं), दूसरी जेब का डर दूर करती है (पढ़ाई-शादी का पैसा कहाँ से आएगा)।

ख. मिशन शक्ति — महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण का छाता

📘 आसान परिभाषा: मिशन शक्ति (Mission Shakti)

📚 परिभाषा: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एकीकृत अम्ब्रेला योजना (15वें वित्त आयोग की अवधि 2021-22 से 2025-26 के लिए), जिसके दो उप-घटक हैं — सुरक्षा-संरक्षा के लिए "संबल" (Sambal) और सशक्तिकरण के लिए "सामर्थ्य" (Samarthya)।

✅ आसान भाषा में: महिलाओं के लिए चल रही दर्जनभर छोटी योजनाओं को दो थैलियों में बाँट दिया गया — एक में "बचाने" वाली, दूसरी में "आगे बढ़ाने" वाली। 🏠 उदाहरण: जैसे — हिंसा से पीड़ित महिला पहले वन स्टॉप सेंटर (संबल) पहुँचती है, फिर शक्ति सदन में आश्रय और कौशल पाकर सखी निवास (सामर्थ्य) में रहते हुए नौकरी करने लगती है।

घटक

उद्देश्य

शामिल योजनाएँ

संबल (Sambal)

सुरक्षा व संरक्षा (Safety & Security)

वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी अदालत (ग्राम स्तर पर वैकल्पिक विवाद-समाधान)

सामर्थ्य (Samarthya)

सशक्तिकरण (Empowerment)

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, शक्ति सदन (पुराने स्वाधार गृह और उज्ज्वला गृह का विलय — संकटग्रस्त व तस्करी-पीड़ित महिलाओं हेतु), सखी निवास (कामकाजी महिला छात्रावास), पालना (आंगनवाड़ी-सह-क्रेच), महिला सशक्तिकरण हब

योजना / व्यवस्था

वर्ष

क्या करती है

सखी वन स्टॉप सेंटर (Sakhi One Stop Centre)

1 अप्रैल 2015

निजी या सार्वजनिक स्थान पर हिंसा से पीड़ित महिला को एक ही छत के नीचे चिकित्सा, पुलिस सहायता, क़ानूनी मदद, परामर्श और 5 दिन तक अस्थायी आश्रय; देश के लगभग हर ज़िले में

निर्भया कोष (Nirbhaya Fund)

2013

दिसंबर 2012 की दिल्ली घटना के बाद ₹1,000 करोड़ से बना न-व्यपगत (Non-lapsable) कोष; महिला सुरक्षा परियोजनाओं — फ़ास्ट-ट्रैक अदालतें, सुरक्षित शहर परियोजना, वन स्टॉप सेंटर, आपात प्रणाली 112 — का वित्तपोषण

शी-बॉक्स (SHe-Box)

2017; नया केंद्रीकृत पोर्टल अगस्त 2024

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत का एकल-खिड़की ऑनलाइन पोर्टल; शिकायत सीधे संबंधित आंतरिक/स्थानीय समिति तक; कार्यस्थल यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के क्रियान्वयन में मदद

⚠️ ध्यान दें — नाम-भ्रम

शक्ति सदन ≠ सखी निवास — शक्ति सदन संकट में फँसी या तस्करी से छुड़ाई गई महिलाओं का आश्रय-पुनर्वास गृह है, जबकि सखी निवास नौकरी करने वाली महिलाओं का छात्रावास है।

ग. शिक्षा, कौशल और उद्यमिता — बेटियों के पंख

योजना

विभाग / वर्ष

लाभार्थी और लाभ

नव्या (NAVYA — Nurturing Aspirations through Vocational Training for Young Adolescent Girls)

कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय + महिला एवं बाल विकास मंत्रालय; जून 2025, सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) से

16-18 वर्ष की किशोरियाँ (कम से कम दसवीं पास); प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के अंतर्गत ग्राफ़िक डिज़ाइन, डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा, ड्रोन असेंबली, स्मार्टफ़ोन मरम्मत जैसे नए युग के कौशल; आरंभ आकांक्षी ज़िलों से

प्रगति (PRAGATI)

शिक्षा मंत्रालय; क्रियान्वयन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE)

तकनीकी डिग्री-डिप्लोमा पढ़ रही छात्राओं को छात्रवृत्ति (प्रति परिवार अधिकतम 2 बेटियाँ)

आजीविका पहलें अध्याय 8क के खंड 14 में और महिला श्रम भागीदारी के उपाय खंड 11 में हैं। राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (106वाँ संविधान संशोधन) लोकसभा-विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करता है, जो अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।

💡 आज की भाषा में — मिशन शक्ति

मिशन शक्ति को मोबाइल ऐप के दो टैब की तरह समझिए — पहला "संबल" इमरजेंसी बटन (181, वन स्टॉप सेंटर, क़ानूनी मदद), दूसरा "सामर्थ्य" ग्रोथ बटन (छात्रावास, क्रेच, कौशल)। पहले सुरक्षा, फिर आत्मनिर्भरता।

घ. बाल संरक्षण — हर बच्चा सुरक्षित

बच्चों के लिए नीतिगत आधार राष्ट्रीय बाल नीति, 2013 है (18 वर्ष से कम हर व्यक्ति बच्चा)। संस्थागत ढाँचा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 देता है — 2021 के संशोधन से गोद लेने का आदेश ज़िला मजिस्ट्रेट देने लगे।

📘 आसान परिभाषा: मिशन वात्सल्य (Mission Vatsalya)

📚 परिभाषा: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की बाल संरक्षण की अम्ब्रेला योजना (2021-22 से), जिसमें पुरानी एकीकृत बाल संरक्षण योजना (Integrated Child Protection Scheme, 2009) समाहित है; यह किशोर न्याय व्यवस्था, बाल कल्याण समितियों, बाल देखरेख संस्थानों, प्रायोजन (Sponsorship), पालन-पोषण देखरेख (Foster Care) और दत्तक-ग्रहण को सुदृढ़ करती है; मूल मंत्र — "कोई भी बच्चा पीछे न छूटे" (Leave No Child Behind)।

✅ आसान भाषा में: जिस बच्चे का कोई सहारा नहीं, या जो किसी संकट में है — उसके लिए पहले परिवार खोजो, न मिले तो अच्छा पालक परिवार, और अंत में ही संस्था। 🏠 उदाहरण: जैसे — रेलवे स्टेशन पर मिला कोई भटका बच्चा चाइल्डलाइन 1098 (अब आपात प्रणाली 112 से जुड़ी) के ज़रिए बाल कल्याण समिति तक पहुँचता है, जो उसे परिवार से मिलाती है या सुरक्षित देखरेख में रखती है।

योजना

शुरुआत

प्रावधान

पीएम केयर्स फ़ॉर चिल्ड्रन (PM CARES for Children)

29 मई 2021

कोविड-19 में माता-पिता दोनों, जीवित अभिभावक, या क़ानूनी/दत्तक अभिभावक खोने वाले बच्चे; निःशुल्क शिक्षा, ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा, 18 वर्ष से मासिक भत्ता और 23 वर्ष की आयु पर ₹10 लाख; लगभग 4,500 बच्चे लाभार्थी

एनपीएस वात्सल्य (NPS Vatsalya)

शुभारंभ 18 सितंबर 2024

18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के नाम माता-पिता द्वारा पेंशन खाता; न्यूनतम अंशदान ₹250 प्रति वर्ष, अधिकतम सीमा नहीं; शिक्षा-इलाज हेतु आंशिक निकासी; 18 वर्ष पर सामान्य राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में बदलने का विकल्प

बाल-कल्याण पोर्टल

संचालक

उद्देश्य

बाल स्वराज (Baal Swaraj)

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)

देखरेख और संरक्षण की ज़रूरत वाले बच्चों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और वास्तविक-समय डिजिटल निगरानी

पॉक्सो ई-बॉक्स (POCSO e-Box)

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के अंतर्गत बाल यौन शोषण की आसान ऑनलाइन शिकायत

📖 पीछे की कहानी — चाइल्डलाइन 1098 — एक छात्रा का प्रोजेक्ट

1990 के दशक में मुंबई के टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की शिक्षिका जेरू बिलिमोरिया ने देखा कि सड़क पर रहने वाले बच्चे संकट में किसी को फ़ोन तक नहीं कर पाते। इसी विचार से जून 1996 में मुंबई में निःशुल्क चाइल्डलाइन 1098 शुरू हुई — "दस-नौ-आठ", जिसे बच्चे आसानी से याद रख सकें। प्रयोग सफल रहा, सरकार ने इसे पूरे देश में फैलाया और यह दुनिया की सबसे बड़ी बाल हेल्पलाइनों में गिनी गई; अब यह आपात प्रणाली 112 से एकीकृत है।

ङ. राजस्थान से जुड़ाव

🏛️ राजस्थान — महिला एवं बाल कल्याण

◆ मुख्यमंत्री पालनहार योजना: अनाथ और कठिन परिस्थितियों के बच्चों (जैसे — माता-पिता की मृत्यु, विधवा या पुनर्विवाहित माँ, आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता) का पालन करने वाले रिश्तेदार को नकद सहायता — 0-6 वर्ष ₹1,500 प्रति माह, स्कूल में नामांकित 6-18 वर्ष ₹2,500 प्रति माह, साथ में कपड़े-जूतों हेतु वार्षिक राशि; शुरुआत अनुसूचित जाति के अनाथ बच्चों से हुई, बाद में सभी वर्गों तक विस्तार।

◆ लाडो प्रोत्साहन योजना: सरकारी अस्पताल या मान्य निजी अस्पताल में जन्मी बेटी के लिए जन्म से स्नातक तक किस्तों में कुल ₹1.5 लाख का संकल्प-पत्र (सेविंग्स बॉन्ड)।

❝ "मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस प्रगति से मापता हूँ जो उस समुदाय की महिलाओं ने हासिल की है।" (I measure the progress of a community by the degree of progress which women have achieved.) (— डॉ. भीमराव अंबेडकर)

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ — 22 जनवरी 2015 (पानीपत); जन्म के समय लिंगानुपात 918 → लगभग 930; सुकन्या समृद्धि — ₹250-₹1.5 लाख/वर्ष, 21 वर्ष पर परिपक्वता।

2. मिशन शक्ति = संबल + सामर्थ्य; निर्भया कोष 2013, शी-बॉक्स 2017; नव्या (2025) — 16-18 वर्ष की किशोरियाँ।

3. पीएम केयर्स फ़ॉर चिल्ड्रन (29 मई 2021) — 23 वर्ष पर ₹10 लाख; एनपीएस वात्सल्य (18 सितंबर 2024); पालनहार — ₹1,500 / ₹2,500 मासिक।

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6. कमज़ोर वर्गों के लिए योजनाएँ (Schemes for Vulnerable Groups)

संविधान का अनुच्छेद 46 राज्य को निर्देश देता है कि वह कमज़ोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के शैक्षिक-आर्थिक हितों की विशेष सावधानी से अभिवृद्धि करे और उन्हें सामाजिक अन्याय व शोषण से बचाए। हर कमज़ोर वर्ग का एक नोडल मंत्रालय और लक्षित योजनाएँ हैं; चित्र में आठ वर्गों का मानचित्र है, फिर हर वर्ग की संक्षिप्त तालिका।

💡 क्या आप जानते हैं? जैन समुदाय को 27 जनवरी 2014 को छठे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया; शेष पाँच समुदाय 1993 में अधिसूचित हुए थे।

📘 आसान परिभाषा: लक्षित योजना (Targeted Scheme)

📚 परिभाषा: ऐसी कल्याणकारी योजना जिसका लाभ पूरी आबादी को नहीं, बल्कि किसी पहचाने गए वंचित समूह — जाति, जनजाति, धर्म, आयु, लिंग या दिव्यांगता के आधार पर — को दिया जाता है, ताकि सीमित संसाधन सबसे ज़रूरतमंद तक पहुँचें और ऐतिहासिक असमानता घटे।

✅ आसान भाषा में: सबको एक जैसा देने की जगह, जो सबसे पीछे है उसे थोड़ा ज़्यादा देना — ताकि दौड़ की शुरुआत बराबर हो सके। 🏠 उदाहरण: जैसे — सभी बच्चों को सरकारी स्कूल में मुफ़्त शिक्षा (सार्वभौमिक), पर अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए अलग से एकलव्य आवासीय विद्यालय और छात्रवृत्ति (लक्षित)।

चित्र

चित्र 4: लाभार्थी-समूह मानचित्र — आठ कमज़ोर वर्ग, उनके नोडल मंत्रालय और प्रमुख योजनाएँ

क. अनुसूचित जातियाँ (Scheduled Castes)

जनगणना 2011 में अनुसूचित जातियाँ देश की आबादी का 16.6% थीं और 1,200 से अधिक जातियाँ अधिसूचित हैं। नोडल विभाग — सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।

योजना

प्रकार

मुख्य प्रावधान

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY)

विकास (2021-22 से)

3 योजनाओं का विलय — प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, अनुसूचित जाति उप-योजना हेतु विशेष केंद्रीय सहायता, बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना; अनुसूचित जाति-बहुल गाँवों का "आदर्श ग्राम" विकास, परियोजना अनुदान और छात्रावास

प्री-मैट्रिक व पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति

शिक्षा

प्री-मैट्रिक — कक्षा 9-10 और अस्वच्छ-जोखिमपूर्ण व्यवसायों के अभिभावकों के बच्चे; पोस्ट-मैट्रिक — केंद्र प्रायोजित, 2020-21 से केंद्र-राज्य 60:40, सीधे खाते में

अनुसूचित जातियों हेतु उद्यम पूँजी कोष (Venture Capital Fund for SCs)

उद्यमिता (2014-15)

₹10 लाख से ₹15 करोड़ रियायती वित्त, ब्याज 4% (महिला व दिव्यांग उद्यमी 3.75%)

पीएम-सूरज पोर्टल (PM-SURAJ)

13 मार्च 2024

प्रधानमंत्री सामाजिक उत्थान एवं रोज़गार आधारित जनकल्याण — अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सफ़ाई कर्मचारी उद्यमियों को ₹15 लाख तक ऋण सहायता का एकल मंच

सामाजिक गरिमा से जुड़ी पहल

विवरण

नमस्ते (NAMASTE — National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem)

सामाजिक न्याय + आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की संयुक्त केंद्रीय योजना (2022-23); सीवर-सेप्टिक टैंक की यांत्रिक सफ़ाई, सुरक्षा उपकरण और पीपीई किट, स्वास्थ्य बीमा, कौशल; 2024-25 से कचरा बीनने वाले भी लाभार्थी

मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013

हाथ से मैला ढोना और बिना सुरक्षा सीवर में उतारना दंडनीय अपराध; पहचान और पुनर्वास अनिवार्य

डॉ. अंबेडकर अंतरजातीय विवाह योजना

अनुसूचित जाति के व्यक्ति से वैध अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपती को डॉ. अंबेडकर प्रतिष्ठान से ₹2.5 लाख प्रोत्साहन

ख. अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes)

जनगणना 2011 में अनुसूचित जनजातियाँ आबादी का 8.6% थीं; इनमें 75 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Groups) सबसे पीछे हैं। नोडल — जनजातीय कार्य मंत्रालय (1999); रणनीति जनजातीय उप-योजना (1974) से शुरू हुई।

📘 आसान परिभाषा: पीएम-जनमन (PM-JANMAN — Pradhan Mantri Janjati Adivasi Nyaya Maha Abhiyan)

📚 परिभाषा: प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान — 15 नवंबर 2023 (जनजातीय गौरव दिवस, भगवान बिरसा मुंडा जयंती) को शुरू, 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश (अंडमान-निकोबार) के 75 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों के लिए लगभग ₹24,104 करोड़ का मिशन, जिसमें 9 मंत्रालयों के 11 हस्तक्षेपों का अभिसरण है।

✅ आसान भाषा में: देश के सबसे अलग-थलग आदिवासी टोलों तक पक्का घर, सड़क, नल का पानी, बिजली, मोबाइल अस्पताल, आंगनवाड़ी, छात्रावास और 4जी मोबाइल नेटवर्क — सब एक साथ, तय समय में। 🏠 उदाहरण: जैसे — राजस्थान के बारां ज़िले के सहरिया (राज्य का एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) बस्तियों में इसी अभियान से पक्के आवास, सड़क और मोबाइल चिकित्सा इकाइयाँ पहुँच रही हैं।

योजना

वर्ष

मुख्य प्रावधान

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

शुभारंभ 2 अक्टूबर 2024, हज़ारीबाग (झारखंड)

लगभग 63,000 जनजाति-बहुल गाँवों में 5 करोड़ से अधिक आदिवासियों तक बुनियादी सुविधाएँ; 17 मंत्रालयों के 25 हस्तक्षेप; परिव्यय लगभग ₹79,156 करोड़; पीएम-जनमन का बड़ा, गाँव-स्तरीय रूप

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

मूल 1997-98; 2018-19 में नया स्वरूप

कक्षा 6-12 निःशुल्क आवासीय शिक्षा, नवोदय विद्यालय की तर्ज़ पर; 50%+ जनजातीय आबादी और 20,000+ जनजातीय जनसंख्या वाले हर ब्लॉक में एक; क्षमता 480 विद्यार्थी; लक्ष्य 728 विद्यालय

⚠️ ध्यान दें — जनजातीय योजनाएँ

एकलव्य विद्यालय 2018-19 में "शुरू" नहीं हुए — ये 1997-98 से अनुच्छेद 275(1) के अनुदान से चल रहे थे; 2018-19 में नया स्वरूप आया। पीएम-जनमन (75 समूह) और धरती आबा (63,000 गाँव) को आपस में न मिलाएँ।

ग. अल्पसंख्यक (Minorities)

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत केंद्र ने छह समुदायों को अल्पसंख्यक अधिसूचित किया है — मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी (1993) और जैन (2014)। नोडल — अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (2006)।

योजना / संस्था

मुख्य प्रावधान

पीएम विकास (PM VIKAS — प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन)

केंद्रीय क्षेत्र की नई अम्ब्रेला योजना; 5 योजनाएँ विलीन — सीखो और कमाओ, उस्ताद (USTTAD — पारंपरिक कला-शिल्प), हमारी धरोहर, नई रोशनी (महिला नेतृत्व), नई मंज़िल (स्कूल छोड़ चुके युवा); 4 घटक — कौशल, महिला उद्यमिता, शिक्षा (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से), बुनियादी ढाँचा

उम्मीद केंद्रीय पोर्टल (UMEED — Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency and Development)

6 जून 2025; वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत देशभर की वक़्फ़ संपत्तियों का केंद्रीकृत डिजिटल पंजीकरण, सत्यापन और निगरानी

⚠️ ध्यान दें — बंद हो चुकी संस्थाएँ-योजनाएँ

मौलाना आज़ाद शिक्षा प्रतिष्ठान (1989) फ़रवरी 2024 में बंद कर दिया गया; इसकी बेगम हज़रत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति और मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय फ़ेलोशिप (2022-23 से) भी अब नहीं दी जाती।

घ. दिव्यांगजन (Persons with Disabilities)

जनगणना 2011 में लगभग 2.68 करोड़ दिव्यांगजन थे — आबादी का 2.21%। भारत ने 2007 में संयुक्त राष्ट्र दिव्यांगजन अधिकार अभिसमय (UNCRPD) का अनुसमर्थन किया और उसी के अनुरूप पुराने 1995 के क़ानून की जगह नया अधिकार-आधारित क़ानून बनाया। नोडल — दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय)।

📘 आसान परिभाषा: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act)

📚 परिभाषा: दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी अक्षमता वाला वह व्यक्ति जिसे बाधाओं के कारण समाज में दूसरों के समान पूर्ण और प्रभावी भागीदारी में रुकावट आती है; अधिनियम में दिव्यांगता के प्रकार 7 से बढ़ाकर 21 किए गए (जैसे — तेज़ाब हमला पीड़ित, बौनापन, थैलेसीमिया, पार्किंसन रोग, विशिष्ट अधिगम अक्षमता) और 40% या अधिक दिव्यांगता को "मानक दिव्यांगता" (Benchmark Disability) माना गया।

✅ आसान भाषा में: दिव्यांगता केवल शरीर की कमी नहीं — सीढ़ी पर रैंप न होना भी उतनी ही बड़ी बाधा है। यह क़ानून "दया" नहीं, अधिकार की भाषा बोलता है। 🏠 उदाहरण: जैसे — मानक दिव्यांगता वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरियों में 4% और उच्च शिक्षण संस्थानों की सीटों में कम से कम 5% आरक्षण; 6-18 वर्ष के ऐसे बच्चों को निःशुल्क शिक्षा।

योजना / पहल

वर्ष

मुख्य प्रावधान

सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign)

3 दिसंबर 2015

3 स्तंभ — निर्मित वातावरण (रैंप, लिफ़्ट, सुगम शौचालय, ब्रेल संकेत), परिवहन (रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, बसें), सूचना-संचार प्रौद्योगिकी (सुगम सरकारी वेबसाइटें, सांकेतिक भाषा)

बजट 2026-27 की घोषणाएँ

1 फ़रवरी 2026

दिव्यांगजन कौशल योजना (सूचना प्रौद्योगिकी, AVGC, आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण); दिव्यांग सहारा योजना (गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण, कृत्रिम अंग निर्माण); प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र और "सहायक प्रौद्योगिकी मार्ट"

🔎 तालिका से क्या समझें: दिव्यांगजन नीति चिकित्सा मॉडल (दिव्यांगता = बीमारी) से सामाजिक मॉडल (दिव्यांगता = समाज की बाधाएँ, उन्हें हटाओ) की ओर बढ़ी है — 2015 का सुगम्यता अभियान और 2026 का कौशल-प्रौद्योगिकी जोर इसी बदलाव की सीढ़ियाँ हैं।

ङ. वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens)

जनगणना 2011 में 60+ आयु के लगभग 10.38 करोड़ लोग (8.6%) थे; अनुमान है कि 2036 तक यह संख्या लगभग 23 करोड़ (लगभग 15%) हो जाएगी। बुज़ुर्गों की ज़रूरतों की अर्थव्यवस्था "रजत अर्थव्यवस्था" (Silver Economy) कहलाती है। क़ानूनी आधार — माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007।

योजना

मुख्य प्रावधान

अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)

सामाजिक न्याय विभाग की अम्ब्रेला योजना — आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव; 6 घटक — वरिष्ठ नागरिकों हेतु एकीकृत कार्यक्रम (वृद्धाश्रम, सतत देखभाल गृह), राज्य कार्य योजना, राष्ट्रीय वयोश्री योजना, एल्डरलाइन, सेज (SAGE), जराचिकित्सा देखभालकर्ता प्रशिक्षण

राष्ट्रीय वयोश्री योजना

1 अप्रैल 2017; गरीबी रेखा से नीचे या कम आय वाले बुज़ुर्गों को सहायक जीवन-उपकरण — छड़ी, वॉकर, चश्मा, श्रवण यंत्र, कृत्रिम दाँत, व्हीलचेयर

एल्डरलाइन — 14567

राष्ट्रीय निःशुल्क हेल्पलाइन (2021) — पेंशन-क़ानूनी जानकारी, भावनात्मक सहारा, दुर्व्यवहार के मामलों में बचाव

सैक्रेड पोर्टल (SACRED — Senior Able Citizens for Re-Employment in Dignity)

1 अक्टूबर 2021 (अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस); 60+ नागरिकों का पंजीकरण कर पुनः रोज़गार के अवसर

च. ट्रांसजेंडर व्यक्ति (Transgender Persons)

2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ मामले में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को "तीसरे लिंग" के रूप में मान्यता दी और स्व-पहचान का अधिकार दिया। इसके बाद ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 (10 जनवरी 2020 से लागू) आया, जो शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य और आवाजाही में भेदभाव पर रोक लगाता है, ज़िला मजिस्ट्रेट से पहचान प्रमाण-पत्र का प्रावधान करता है और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति परिषद बनाता है।

योजना

मुख्य प्रावधान

स्माइल (SMILE — Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise)

12 फ़रवरी 2022; दो उप-योजनाएँ — (1) ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का समग्र कल्याण-पुनर्वास, (2) भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास

आयुष्मान भारत टीजी प्लस (Ayushman Bharat TG Plus)

प्रत्येक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ₹5 लाख प्रति वर्ष का स्वास्थ्य कवर, जिसमें हार्मोन चिकित्सा और लिंग-पुष्टि शल्य चिकित्सा भी शामिल

📖 पीछे की कहानी — बिरसा मुंडा — "धरती आबा"

15 नवंबर 1875 को वर्तमान झारखंड के उलिहातु गाँव में जन्मे बिरसा मुंडा ने अंग्रेज़ी शासन, ज़मींदारों और साहूकारों द्वारा आदिवासियों की ज़मीन छीने जाने के विरुद्ध "उलगुलान" (महान विद्रोह, 1899-1900) का नेतृत्व किया। मुंडा समाज उन्हें श्रद्धा से "धरती आबा" — धरती का पिता कहता था। 24 वर्ष की आयु में 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मृत्यु हुई, पर आंदोलन के दबाव में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 बना, जिसने आदिवासी भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाई। उनकी जयंती जनजातीय गौरव दिवस है।

🏛️ राजस्थान से जुड़ाव — कमज़ोर वर्ग

◆ सहरिया (बारां ज़िले के शाहाबाद-किशनगंज क्षेत्र) राजस्थान का एकमात्र विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह है — पीएम-जनमन का सीधा लाभार्थी।

◆ राज्य के दक्षिणी ज़िले — बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर के भाग — अनुसूचित क्षेत्र (पाँचवीं अनुसूची) में आते हैं; यहाँ धरती आबा अभियान और एकलव्य विद्यालयों का बड़ा जाल है।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. अनुसूचित जाति 16.6%, जनजाति 8.6% (2011); प्रधानमंत्री अजय = 3 योजनाओं का विलय; पीएम-सूरज 13 मार्च 2024; पीएम-जनमन — 15 नवंबर 2023 (75 समूह, ₹24,104 करोड़); धरती आबा — 2 अक्टूबर 2024 (~63,000 गाँव); वन धन — 14 अप्रैल 2018।

2. 6 अधिसूचित अल्पसंख्यक (जैन 2014); पीएम विकास = 5 योजनाएँ; उम्मीद पोर्टल 6 जून 2025; मौलाना आज़ाद शिक्षा प्रतिष्ठान 2024 में बंद।

3. दिव्यांगजन अधिनियम 2016 — 21 प्रकार, मानक 40%, आरक्षण 4%; सुगम्य भारत 3 दिसंबर 2015; एल्डरलाइन 14567; ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019, स्माइल 12 फ़रवरी 2022।

7. सामाजिक सुरक्षा एवं वित्तीय समावेशन (Social Security & Financial Inclusion)

बीमारी, दुर्घटना, बेरोज़गारी, बुढ़ापा या कमाने वाले की मृत्यु — ये झटके परिवार को गरीबी में धकेल सकते हैं। सामाजिक सुरक्षा इन जोखिमों के विरुद्ध राज्य का सुरक्षा-जाल है। संविधान के अनुच्छेद 41 (बेरोज़गारी, बुढ़ापा, बीमारी में लोक सहायता) और अनुच्छेद 42 (न्यायसंगत कार्य-दशाएँ, प्रसूति सहायता) इसके आधार हैं; "सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा" समवर्ती सूची का विषय है।

📘 आसान परिभाषा: सामाजिक सुरक्षा (Social Security)

📚 परिभाषा: वह सार्वजनिक व्यवस्था जो व्यक्तियों और परिवारों को जीवन-भर के जोखिमों — बीमारी, मातृत्व, दुर्घटना, दिव्यांगता, बेरोज़गारी, बुढ़ापा और कमाने वाले की मृत्यु — से होने वाली आय-हानि के विरुद्ध नकद लाभ, बीमा और सेवाओं के माध्यम से सुरक्षा देती है, ताकि वे गरीबी और अभाव में न गिरें।

✅ आसान भाषा में: ज़िंदगी में अचानक आने वाली "आँधी" के लिए पहले से बना छाता — आँधी रोकी नहीं जा सकती, पर भीगने से बचा जा सकता है। 🏠 उदाहरण: जैसे — किसी निर्माण मज़दूर की दुर्घटना में मृत्यु हो जाए, तो प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा के ₹2 लाख और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ के ₹20,000 परिवार को तुरंत संभाल लेते हैं।

🐪 राजस्थान की भाषा में — सामाजिक सुरक्षा का "टांका"

थार के गाँवों में घर के आँगन में टांका बनाया जाता है — बरसात के दिनों में छत का पानी उसमें इकट्ठा होता है, ताकि सूखे महीनों में परिवार प्यासा न रहे। अंशदायी सामाजिक सुरक्षा वही टांका है — कमाई के दिनों में थोड़ा-थोड़ा जमा (अटल पेंशन, बीमा), बुढ़ापे या संकट में वही काम आए। पर जिस घर की छत ही कच्ची हो, उसका टांका भर ही नहीं पाता — उसके लिए गाँव की सामूहिक बावड़ी चाहिए, यानी सरकार की गैर-अंशदायी पेंशन और मुफ़्त इलाज। अच्छी व्यवस्था में दोनों साथ चलते हैं।

💡 क्या आप जानते हैं? दुनिया की पहली अनिवार्य सामाजिक बीमा व्यवस्था जर्मनी में चांसलर ओटो वॉन बिस्मार्क ने बनाई — 1883 में स्वास्थ्य बीमा, 1884 में दुर्घटना बीमा और 1889 में वृद्धावस्था पेंशन।

💡 क्या आप जानते हैं? अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का सामाजिक सुरक्षा (न्यूनतम मानक) अभिसमय संख्या 102 (1952) सामाजिक सुरक्षा की नौ शाखाएँ परिभाषित करता है — चिकित्सा, बीमारी, बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, कार्य-दुर्घटना, पारिवारिक, मातृत्व, अशक्तता और उत्तरजीवी लाभ।

चित्र

चित्र 5: जन्म से बुढ़ापे तक — जीवन-चक्र के हर पड़ाव पर कल्याणकारी योजनाएँ

क. सामाजिक सुरक्षा की वास्तुकला — अंशदायी बनाम गैर-अंशदायी

🌟 अंशदायी (Contributory) — "सामाजिक बीमा"

⚠️ गैर-अंशदायी (Non-Contributory) — "सामाजिक सहायता"

◆ लाभार्थी (और नियोक्ता/सरकार) नियमित अंशदान करते हैं; लाभ अंशदान से जुड़ा

◆ संगठित क्षेत्र — कर्मचारी भविष्य निधि (1952), कर्मचारी राज्य बीमा (1948), कर्मचारी पेंशन योजना 1995

◆ सरकारी कर्मचारी — राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (2004), एकीकृत पेंशन योजना (1 अप्रैल 2025)

◆ असंगठित क्षेत्र — अटल पेंशन, श्रम योगी मानधन, जीवन ज्योति और सुरक्षा बीमा

◆ पूरा ख़र्च सरकार (कर-राजस्व से) उठाती है; लाभार्थी कुछ नहीं देता

◆ राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (1995) — वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग पेंशन

◆ सबसे गरीब और कार्य-अक्षम लोगों तक पहुँच — अंतिम सुरक्षा-जाल

दोनों के बीच की कड़ी है सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (21 नवंबर 2025 से लागू; विस्तार अध्याय 8क के खंड 11 में), जिसने 9 क़ानून मिलाकर पहली बार असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को दायरे में लिया; पंजीकरण का आधार ई-श्रम पोर्टल है।

📊 भारत में सामाजिक सुरक्षा का दायरा — नवीनतम आँकड़े

1. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के आँकड़ों में भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% — लगभग 94 करोड़ लोग कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के दायरे में; निरपेक्ष संख्या में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर।

2. फिर भी कार्यबल का 90% से अधिक अनौपचारिक — अधिकांश के पास पेंशन नहीं।

ख. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme)

15 अगस्त 1995 को शुरू यह कार्यक्रम अनुच्छेद 41 और 42 को साकार करने का सबसे सीधा प्रयास है। नोडल — ग्रामीण विकास मंत्रालय; 100% केंद्र-वित्तपोषित, राज्य अपनी राशि जोड़ते हैं; पात्रता — परिवार गरीबी रेखा से नीचे।

घटक

पात्रता

केंद्रीय अंश (प्रति माह)

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन (IGNOAPS)

60 वर्ष या अधिक

60-79 वर्ष — ₹200; 80+ वर्ष — ₹500

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन (IGNWPS)

40 वर्ष या अधिक की विधवा

40-79 वर्ष — ₹300; 80+ वर्ष — ₹500

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन (IGNDPS)

18 वर्ष या अधिक, 80%+ गंभीर या बहु-दिव्यांगता

18-79 वर्ष — ₹300; 80+ वर्ष — ₹500

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना (NFBS)

18-59 वर्ष के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मृत्यु

एकमुश्त ₹20,000

🔎 तालिका से क्या समझें: केंद्रीय वृद्धावस्था पेंशन (60-79 वर्ष) 2007 से ₹200 पर अटकी है; असली अंतर राज्यों के जोड़ से आता है — कई राज्य ₹1,000-₹3,000 तक देते हैं, और राजस्थान ने न्यूनतम गारंटीड आय अधिनियम, 2023 से पेंशन को क़ानूनी अधिकार बनाया (अध्याय 8क, खंड 7)।

ग. बीमा और पेंशन योजनाएँ — एक तालिका में

योजना (वर्ष)

आयु / पात्रता

अंशदान / प्रीमियम

लाभ

अटल पेंशन योजना (APY, 9 मई 2015)

18-40 वर्ष; आयकरदाता अपात्र (2022 से)

आयु और चुनी पेंशन के अनुसार मासिक

60 के बाद ₹1,000-5,000 गारंटीड पेंशन; बाद में जीवनसाथी को, फिर नामांकित को संचित राशि

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM, 2019)

18-40 वर्ष, असंगठित श्रमिक, मासिक आय ≤ ₹15,000

₹55-200 मासिक; सरकार बराबर (50:50) जोड़ती है

60 के बाद ₹3,000 मासिक पेंशन

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS, 2004; सभी नागरिक 2009)

18-70 वर्ष

परिभाषित अंशदान (Defined Contribution)

बाज़ार-आधारित; 60% एकमुश्त कर-मुक्त, शेष से वार्षिकी

एकीकृत पेंशन योजना (UPS, 1 अप्रैल 2025)

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली वाले केंद्रीय कर्मचारी (विकल्प)

कर्मचारी 10%, सरकार 18.5%

25 वर्ष सेवा पर अंतिम 12 माह के औसत मूल वेतन का 50%; न्यूनतम ₹10,000; पारिवारिक पेंशन 60%

⚠️ ध्यान दें — पेंशन की शब्दावली

परिभाषित लाभ (Defined Benefit) — पुरानी पेंशन, राशि पहले से तय, जोखिम सरकार का। परिभाषित अंशदान (Defined Contribution) — राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, केवल अंशदान तय, जोखिम कर्मचारी का। एकीकृत पेंशन योजना दोनों के बीच का रास्ता है — सुनिश्चित पेंशन भी।

घ. वित्तीय समावेशन — सामाजिक सुरक्षा की नींव

हर बीमा प्रीमियम, पेंशन और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की पहली शर्त बैंक खाता है (जन धन, मुद्रा, स्टैंड-अप इंडिया का विस्तार अध्याय 7 में)। जन धन-आधार-मोबाइल त्रिमूर्ति से बीमा का प्रीमियम और अटल पेंशन का अंशदान सीधे खाते से कटता है और पेंशन सीधे खाते में पहुँचती है — वित्तीय समावेशन साधन है, सामाजिक सुरक्षा साध्य।

ङ. सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा — एक बहस

📘 आसान परिभाषा: सामाजिक संरक्षण तल (Social Protection Floor)

📚 परिभाषा: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की अनुशंसा संख्या 202 (2012) में प्रस्तावित न्यूनतम राष्ट्रीय गारंटियों का समूह — जीवन-भर आवश्यक स्वास्थ्य सेवा और बचपन, कार्यशील आयु (बीमारी, बेरोज़गारी, मातृत्व, दिव्यांगता) तथा बुढ़ापे में बुनियादी आय सुरक्षा — जो हर निवासी को बिना भेदभाव मिलनी चाहिए।

✅ आसान भाषा में: मकान की नींव जैसी न्यूनतम गारंटी — इसके नीचे कोई नागरिक न गिरे; इसके ऊपर अंशदायी बीमा-पेंशन की मंज़िलें बनाई जाएँ। 🏠 उदाहरण: जैसे — हर बुज़ुर्ग को एक न्यूनतम पेंशन, हर बच्चे को पोषण-शिक्षा, हर बीमार को मुफ़्त इलाज — चाहे वह संगठित क्षेत्र में काम करता हो या रेहड़ी लगाता हो।

बहस यह है कि क्या लक्षित, बिखरी योजनाओं से आगे बढ़कर हर नागरिक के लिए स्वास्थ्य, पेंशन और आय-सुरक्षा का सार्वभौमिक न्यूनतम तल बनाया जाए (बिना शर्त नकद राशि की बहस अध्याय 8क के खंड 7 में है)।

🌟 सार्वभौमिकता के पक्ष में

⚠️ चुनौतियाँ

◆ अनौपचारिक कार्यबल (90%+) को केवल लक्षित योजनाएँ नहीं ढक पातीं; गिग-प्रवासी श्रमिक बार-बार छूटते हैं

◆ तेज़ी से बूढ़ी होती आबादी — 2036 तक हर सात में से एक बुज़ुर्ग; पेंशन के बिना संकट तय

◆ राजकोषीय क्षमता — कर-सकल घरेलू उत्पाद अनुपात सीमित; राज्यों के बजट पर दबाव

◆ पोर्टेबिलिटी — राज्य बदलते ही लाभ छूटना; केंद्र-राज्य योजनाओं का दोहराव

आगे की राह

क्या करना होगा

एक श्रमिक, एक खाता

ई-श्रम, कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा को जोड़कर पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा — नौकरी या राज्य बदले, सुरक्षा साथ चले

बहु-स्तरीय पेंशन

नीचे सार्वभौमिक गैर-अंशदायी न्यूनतम पेंशन, ऊपर अटल पेंशन/राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली जैसी अंशदायी परत

स्वास्थ्य को केंद्र में

इलाज का जेब-ख़र्च ही परिवारों को सबसे अधिक गरीब बनाता है — बहिरंग रोगी (OPD) ख़र्च तक बीमा का विस्तार

📖 पीछे की कहानी — बीवरिज रिपोर्ट — "पालने से कब्र तक"

1942 में ब्रिटेन के अर्थशास्त्री विलियम बीवरिज ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें समाज के पाँच दानवों — अभाव, रोग, अज्ञान, गंदगी और बेकारी — से लड़ने का खाका था; प्रस्ताव था कि हर नागरिक से थोड़ा-थोड़ा अंशदान लेकर उसे "पालने से कब्र तक" (Cradle to Grave) सुरक्षा दी जाए। इसी आधार पर ब्रिटेन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (1948) और आधुनिक कल्याणकारी राज्य बना।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. सामाजिक सुरक्षा = अंशदायी (भविष्य निधि 1952, राज्य बीमा 1948, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली 2004) + गैर-अंशदायी (सामाजिक सहायता कार्यक्रम 15 अगस्त 1995); संविधान अनुच्छेद 41-42, समवर्ती सूची।

2. वृद्धावस्था ₹200/₹500, विधवा-दिव्यांग ₹300/₹500, पारिवारिक लाभ ₹20,000; श्रम योगी मानधन ₹3,000; एकीकृत पेंशन 1 अप्रैल 2025 — 50%, न्यूनतम ₹10,000।

3. सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19% (2015) → 64.3% (2025), ~94 करोड़; सामाजिक संरक्षण तल — अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन अनुशंसा 202 (2012)।

8. भारत से जुड़ाव — संविधान, सतत विकास लक्ष्य एवं विकसित भारत (Linkages with India)

गरीबी, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य और शिक्षा — ये केवल "योजनाओं" के विषय नहीं, बल्कि संविधान के वादे हैं। संविधान की प्रस्तावना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात करती है, और भाग 4 के राज्य के नीति-निदेशक तत्व भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाने का खाका देते हैं। इस अध्याय की लगभग हर योजना किसी न किसी अनुच्छेद की "संतान" है।

📘 आसान परिभाषा: कल्याणकारी राज्य (Welfare State)

📚 परिभाषा: ऐसा राज्य जो केवल क़ानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर नागरिकों के न्यूनतम जीवन-स्तर — भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक सुरक्षा — की ज़िम्मेदारी स्वयं उठाता है।

✅ आसान भाषा में: सरकार "चौकीदार" ही नहीं, "अभिभावक" भी है — जो कमज़ोर पड़ जाए, उसे सहारा देना उसका कर्तव्य है। 🏠 उदाहरण: जैसे — बुज़ुर्ग को पेंशन, गरीब परिवार को सस्ता राशन, बच्चे को निःशुल्क शिक्षा और बीमार को निःशुल्क इलाज देना।

क. संवैधानिक प्रावधान

अनुच्छेद / प्रावधान

क्या कहता है

इस अध्याय से जुड़ाव

अनुच्छेद 21 / 21क

प्राण व दैहिक स्वतंत्रता — न्यायालयों ने इसमें आजीविका, भोजन, स्वास्थ्य शामिल माना; 21क (86वाँ संशोधन, 2002) — 6-14 वर्ष को निःशुल्क शिक्षा

भोजन-स्वास्थ्य का अधिकार; शिक्षा का अधिकार अधिनियम

अनुच्छेद 38 / 39

38(2) — आय व अवसरों की असमानता घटाना; 39 — आजीविका के पर्याप्त साधन, समान काम का समान वेतन, श्रमिकों-बच्चों का शोषण रोकना

ग्रामीण रोज़गार क़ानून, वेतन संहिता

अनुच्छेद 41 / 42 / 43

काम, शिक्षा व बेरोज़गारी-बुढ़ापे में लोक सहायता; प्रसूति सहायता; निर्वाह मज़दूरी

सामाजिक सहायता पेंशन, मातृ वंदना, श्रम संहिताएँ

अनुच्छेद 45 / 46

6 वर्ष से कम बच्चों की देखभाल-शिक्षा; अनुसूचित जातियों, जनजातियों व कमज़ोर वर्गों के हितों की रक्षा

आंगनवाड़ी; छात्रवृत्तियाँ, जनजातीय योजनाएँ

अनुच्छेद 47

पोषण-स्तर, जीवन-स्तर ऊँचा करना व लोक स्वास्थ्य सुधारना — राज्य का "प्राथमिक कर्तव्य"

पोषण अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

अनुच्छेद 243छ / 243प + 11वीं व 12वीं अनुसूची

पंचायतों (29 विषय) व नगरपालिकाओं (18 विषय) को सामाजिक न्याय की योजनाएँ

11वीं — गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य; 12वीं — शहरी गरीबी उन्मूलन

🔎 तालिका से क्या समझें: मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21, 21क) न्यायालय में लागू हो सकते हैं, जबकि नीति-निदेशक तत्व (38-47) नहीं — फिर भी "देश के शासन में मूलभूत" हैं। कल्याण-यात्रा की कहानी यही है कि निदेशक तत्वों को क़ानून बनाकर "अधिकार" में बदला गया — काम (मनरेगा), शिक्षा (21क), भोजन (2013 का क़ानून)।

◆ सातवीं अनुसूची — समवर्ती सूची में शिक्षा (प्रविष्टि 25, 1976 से), जनसंख्या नियंत्रण (20क), श्रमिक कल्याण व सामाजिक सुरक्षा (22-24); लोक स्वास्थ्य व स्वच्छता राज्य सूची (प्रविष्टि 6) में।

📖 पीछे की कहानी — जब सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा को "जीवन" से जोड़ा

1992 में मोहिनी जैन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21 से ही निकलता है। उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) में इसे सीमित किया — 14 वर्ष तक के हर बच्चे को निःशुल्क शिक्षा मौलिक अधिकार है। इन्हीं निर्णयों के दबाव से 86वाँ संशोधन (2002) आया, अनुच्छेद 21क जुड़ा, और 1 अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार क़ानून लागू हुआ — न्यायालय के एक वाक्य से संसद तक का सफ़र अठारह वर्ष का रहा।

ख. प्रमुख क़ानून — अधिकारों की इमारत

क़ानून

मुख्य प्रावधान

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (लागू 1 अप्रैल 2010)

6-14 वर्ष को निःशुल्क-अनिवार्य शिक्षा; निजी विद्यालयों में कमज़ोर वर्गों के लिए 25% सीटें

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016

श्रेणियाँ 7 से 21; सरकारी नौकरियों में 4% व उच्च शिक्षा में 5% आरक्षण

मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017

सवेतन मातृत्व अवकाश 12 से 26 सप्ताह; 50+ कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में शिशु-गृह

चार श्रम संहिताएँ (लागू 21 नवंबर 2025)

29 केंद्रीय श्रम क़ानून समाहित; गिग-प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा

विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025

मनरेगा (2005) का स्थान; 125 दिन काम; लागू 1 जुलाई 2026

ग. सतत विकास लक्ष्य — इस अध्याय के सात लक्ष्य

सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की सूची पहले अध्याय में दी जा चुकी है; यहाँ केवल वे सात लक्ष्य हैं जो सीधे सामाजिक क्षेत्र से जुड़ते हैं।

लक्ष्य

मुख्य उप-लक्ष्य (2030)

1 — गरीबी का अंत

अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन; राष्ट्रीय परिभाषा वाली गरीबी कम-से-कम आधी

2 — शून्य भूख

भूख का अंत; बच्चों में नाटापन-दुबलापन घटाना

3 — अच्छा स्वास्थ्य

मातृ मृत्यु अनुपात 70 से कम; नवजात मृत्यु 12 व पाँच वर्ष से कम मृत्यु 25 प्रति हज़ार तक

4 — गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

निःशुल्क, समान व गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा; प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल

5 — लैंगिक समानता

भेदभाव व हिंसा का अंत; अवैतनिक घरेलू काम को मान्यता

8 — गरिमापूर्ण काम

उत्पादक रोज़गार व समान वेतन; बाल श्रम का अंत

10 — असमानताओं में कमी

नीचे की 40% आबादी की आय राष्ट्रीय औसत से तेज़ बढ़ाना

📊 सतत विकास लक्ष्यों पर भारत की प्रगति — नवीनतम आँकड़े

1. सतत विकास रिपोर्ट 2026 — भारत 169 देशों में 94वाँ (अंक 68.3); 2024 में 109वाँ, 2025 में 99वाँ; पहला स्थान फ़िनलैंड।

2. नीति आयोग का सूचकांक 2023-24 — भारत का अंक 71 (2020-21 में 66); केरल व उत्तराखंड (79) शीर्ष पर, बिहार (57) सबसे नीचे; सबसे कमज़ोर — लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता)।

घ. विकसित भारत @2047 — सामाजिक लक्ष्य

2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होंगे। "विकसित भारत" का अर्थ केवल ऊँची प्रति व्यक्ति आय नहीं है — बजट 2025-26 के भाषण में इसके छह सामाजिक-आर्थिक स्तंभ स्पष्ट रूप से गिनाए गए:

◆ शून्य गरीबी; शत-प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा; सस्ती व व्यापक स्वास्थ्य सेवा; शत-प्रतिशत कुशल श्रम; आर्थिक गतिविधियों में 70% महिलाएँ; किसान भारत को "विश्व की खाद्य टोकरी" बनाएँ।

🔎 लक्ष्यों से क्या समझें: इनमें पाँच लक्ष्य सीधे मानव पूँजी से जुड़े हैं — विकसित भारत का रास्ता कक्षा, अस्पताल और कौशल केंद्र से होकर जाता है। 70% महिला भागीदारी का लक्ष्य वर्तमान स्तर (लगभग 40%) से बहुत आगे है — यही सबसे कठिन चुनौती है।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. अनुच्छेद 21क (86वाँ संशोधन 2002) — 6-14 वर्ष शिक्षा; 41 — काम व लोक सहायता; 47 — पोषण व लोक स्वास्थ्य।

2. दिव्यांग श्रेणियाँ 21, आरक्षण 4%; मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह; श्रम संहिताएँ 21 नवंबर 2025; नया ग्रामीण रोज़गार क़ानून 1 जुलाई 2026 से।

3. सतत विकास रिपोर्ट 2026 — भारत 94वाँ/169; विकसित भारत — शून्य गरीबी, 70% महिला आर्थिक भागीदारी।

9. संतुलित मूल्यांकन (Balanced Assessment)

हर उपलब्धि के साथ एक "लेकिन" भी जुड़ा है। नीचे स्वास्थ्य और शिक्षा का दो-तरफ़ा मूल्यांकन है; गरीबी और रोज़गार का मूल्यांकन अध्याय 8क में है।

क. स्वास्थ्य

✅ उपलब्धियाँ

⚠️ चिंताएँ

◆ शिशु मृत्यु दर 2013 के 40 से 2023 में 25 प्रति हज़ार; मातृ मृत्यु अनुपात 130 से 93 प्रति लाख

◆ जेब से स्वास्थ्य व्यय 2014-15 के 62.6% से 2021-22 में 39.4%

◆ आयुष्मान भारत — विश्व का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य आश्वासन; 70+ आयु के सभी बुज़ुर्ग शामिल

◆ सरकारी स्वास्थ्य व्यय सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.8-1.9% — 2.5% का लक्ष्य अधूरा

◆ ग्रामीण केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी; एनीमिया व गैर-संचारी रोगों की चुनौती

◆ बीमा भर्ती इलाज पर केंद्रित; ओपीडी व दवाओं का ख़र्च अब भी जेब से

ख. शिक्षा

✅ उपलब्धियाँ

⚠️ चिंताएँ

◆ प्राथमिक स्तर पर लगभग सार्वभौमिक नामांकन; लड़कियों का नामांकन लड़कों के बराबर

◆ उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात लगभग 28-29%

◆ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 — मातृभाषा, आधारभूत साक्षरता, बहुविषयक शिक्षा

◆ सीखने का संकट — कई बच्चे कक्षा के स्तर का पाठ नहीं पढ़ पाते; माध्यमिक स्तर पर ऊँचा ड्रॉपआउट

◆ शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय लगभग 4-4.6% — 6% का लक्ष्य दूर

◆ शिक्षकों के रिक्त पद, एकल-शिक्षक विद्यालय और डिजिटल खाई

निष्कर्ष: भारत ने "पहुँच" (Access) की लड़ाई काफ़ी हद तक जीत ली है। अब अगली और कठिन लड़ाई "गुणवत्ता" (Quality) की है — बच्चा विद्यालय में है तो सीखे भी, अस्पताल है तो डॉक्टर भी हो, रोज़गार है तो गरिमापूर्ण भी हो। कल्याण को मानव पूँजी में निवेश के रूप में देखना और महिलाओं को अर्थव्यवस्था के केंद्र में लाना — यही विकसित भारत की कसौटी है।

❝ "जो सबसे गरीब और सबसे कमज़ोर व्यक्ति तुमने देखा हो, उसका चेहरा याद करो और ख़ुद से पूछो — जो क़दम तुम उठाने जा रहे हो, क्या वह उसके किसी काम आएगा?" (Recall the face of the poorest and the weakest man whom you may have seen, and ask yourself, if the step you contemplate is going to be of any use to him.) (— महात्मा गांधी, "गांधी का जंतर" (1947))

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. शिशु मृत्यु दर 40 से 25 (2013-2023); मातृ मृत्यु अनुपात 130 से 93; जेब से व्यय 62.6% से 39.4%।

2. चिंता — सीखने का संकट, सरकारी स्वास्थ्य व्यय लक्ष्य (2.5%) से कम; मूल मंत्र — पहुँच से गुणवत्ता की ओर।

10. राजस्थान से जुड़ाव (Rajasthan Linkages)

राजस्थान — क्षेत्रफल में देश का सबसे बड़ा राज्य, जहाँ मरुस्थल, जनजातीय अंचल और बिखरी बसावट सामाजिक सेवाओं को महँगा और कठिन बनाते हैं। फिर भी पिछले दशक में राज्य ने स्वास्थ्य-सुरक्षा और कमज़ोर वर्गों के कल्याण में उल्लेखनीय प्रयोग किए हैं।

क. राजस्थान की प्रमुख सामाजिक योजनाएँ

योजना

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (पूर्व — चिरंजीवी, 2021)

प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹25 लाख तक कैशलेस इलाज (₹5 लाख बीमा-मोड + ₹20 लाख ट्रस्ट-मोड); खाद्य सुरक्षा वाले परिवार, लघु-सीमांत किसान, संविदाकर्मी निःशुल्क, अन्य परिवार ₹850 वार्षिक प्रीमियम पर

निःशुल्क दवा (2011) व निःशुल्क जाँच (2013)

सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाएँ व जाँचें निःशुल्क

राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2023

स्वास्थ्य को क़ानूनी अधिकार बनाने वाला देश का पहला राज्य

लाडो प्रोत्साहन योजना (1 अगस्त 2024; पूर्व — राजश्री)

बालिका को ₹1.5 लाख का संकल्प-पत्र, 7 किस्तों में — जन्म ₹2,500 से स्नातक व 21 वर्ष पर ₹1 लाख तक

मुख्यमंत्री पालनहार योजना (2004-05)

अनाथ व कठिन परिस्थिति के बच्चों का पालन; अनाथ श्रेणी — 0-6 वर्ष ₹1,500 व 6-18 वर्ष ₹2,500 प्रति माह

श्री अन्नपूर्णा रसोई (पूर्व — इंदिरा रसोई)

शहरों में ₹8 में पौष्टिक थाली; राज्य का अनुदान ₹17 से ₹22 प्रति थाली

उड़ान योजना (2021)

महिलाओं व किशोरियों को निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन

जन आधार / गिग श्रमिक क़ानून, 2023

परिवार-आधारित पहचान पत्र, कल्याण योजनाओं का प्रवेश-द्वार / गिग श्रमिक कल्याण का क़ानून बनाने वाला पहला राज्य

⚠️ ध्यान दें — नाम बदले, योजना वही

चिरंजीवी → मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य, इंदिरा रसोई → श्री अन्नपूर्णा रसोई, राजश्री → लाडो प्रोत्साहन — नाम बदले हैं, मूल ढाँचा काफ़ी हद तक वही है।

🐪 राजस्थान की भाषा में — अन्नपूर्णा की थाली

दिहाड़ी का इंतज़ार करता मज़दूर या अस्पताल के बाहर मरीज़ के साथ आया गाँव का परिजन — सबके लिए ₹8 की थाली "पेट भरने" से कहीं ज़्यादा है। यह राजस्थानी सदावर्त परंपरा का आधुनिक रूप है, पर अब यह दान नहीं, राज्य की ज़िम्मेदारी है।

🎯 याद रखें — इस खंड के मुख्य बिंदु

1. बहुआयामी गरीबी 28.86% से 15.31%; महिला साक्षरता 52.1% (सबसे कम); शिशु लिंगानुपात 888।

2. आयुष्मान आरोग्य — ₹25 लाख, प्रीमियम ₹850; स्वास्थ्य का अधिकार क़ानून 2023 (पहला राज्य)।

3. लाडो प्रोत्साहन ₹1.5 लाख / 7 किस्तें; पालनहार ₹1,500/₹2,500; अन्नपूर्णा थाली ₹8।

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11. प्रमुख व्यक्तित्व (Key Personalities)

व्यक्तित्व

योगदान

भीमराव आंबेडकर (1891-1956)

संविधान निर्माण में नीति-निदेशक तत्वों के माध्यम से आर्थिक लोकतंत्र; श्रम सदस्य के रूप में 1942 में 8 घंटे का कार्यदिवस

अमर्त्य सेन

क्षमता दृष्टिकोण व अकालों का हक़दारी (Entitlement) सिद्धांत ("गरीबी और अकाल", 1981); अर्थशास्त्र नोबेल 1998

महबूब उल हक़

मानव विकास रिपोर्ट (1990) और मानव विकास सूचकांक के जनक

इला भट्ट

सेवा (1972, अहमदाबाद) — अनौपचारिक महिला श्रमिकों का संगठन; रेमन मैग्सेसे 1977

अरुणा रॉय

मज़दूर किसान शक्ति संगठन (1990, देवडूंगरी, राजसमंद) — जन सुनवाई, सूचना का अधिकार आंदोलन; रेमन मैग्सेसे 2000

कैलाश सत्यार्थी

बचपन बचाओ आंदोलन (1980) — बाल श्रम के विरुद्ध; नोबेल शांति पुरस्कार 2014

12. विस्तृत कालक्रम (Detailed Timeline)

वर्ष

घटना

महत्व

1975 / 1995

समेकित बाल विकास सेवाएँ (2 अक्टूबर 1975); राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम व मध्याह्न भोजन (15 अगस्त 1995)

पोषण, बाल देखभाल; अनुच्छेद 41 व 47 का क्रियान्वयन

2000-2002

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना; सर्व शिक्षा अभियान; 86वाँ संशोधन — अनुच्छेद 21क (2002)

ग्रामीण संपर्क; शिक्षा मौलिक अधिकार

2005-2009

ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन व जननी सुरक्षा (2005); ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (2005); असंगठित श्रमिक सुरक्षा अधिनियम (2008); तेंदुलकर समिति व शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2009)

स्वास्थ्य, काम, शिक्षा — अधिकार की ओर

2013-2017

खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013); उज्ज्वला व दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (2016); मातृत्व लाभ संशोधन व मातृ वंदना (2017)

भोजन, स्वच्छ ईंधन, मातृत्व

2018

आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम (जनवरी); पोषण अभियान (8 मार्च, झुंझुनूं); आयुष्मान भारत (23 सितंबर, रांची)

पिछड़े ज़िले, पोषण, स्वास्थ्य आश्वासन

2019-2021

वेतन संहिता (2019); राष्ट्रीय शिक्षा नीति (29 जुलाई 2020); राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक आधार रिपोर्ट (2021)

34 वर्ष बाद नई शिक्षा नीति

2023-2024

राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम (2023); लाडो प्रोत्साहन (1 अगस्त 2024); आयुष्मान भारत में 70+ बुज़ुर्ग (29 अक्टूबर 2024)

स्वास्थ्य अधिकार; बालिका व बुज़ुर्ग सुरक्षा

2026

श्रम संहिताओं के केंद्रीय नियम (8 मई); राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (मई के अंत); नया ग्रामीण रोज़गार क़ानून (1 जुलाई); सतत विकास रिपोर्ट में भारत 94वाँ

नई गणना, नया आँकड़ा-आधार

2030 / 2047

सतत विकास लक्ष्यों की समय-सीमा / विकसित भारत

शून्य गरीबी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा-स्वास्थ्य

13. शब्दकोश — ज़रूरी शब्द (Glossary)

अध्याय पढ़ने के बाद दोहराने (रिवीज़न) के लिए — हर ज़रूरी शब्द एक पंक्ति में। विस्तृत परिभाषा और उदाहरण अध्याय के संबंधित खंड में दिए गए हैं।

क. स्वास्थ्य

शब्द

एक पंक्ति में अर्थ

शिशु मृत्यु दर (IMR)

प्रति हज़ार जीवित जन्म पर एक वर्ष की आयु से पहले मरने वाले शिशुओं की संख्या।

मातृ मृत्यु अनुपात (MMR)

प्रति एक लाख जीवित जन्म पर गर्भावस्था या प्रसव से जुड़े कारणों से होने वाली माताओं की मृत्यु।

महामारी-विज्ञान संक्रमण (Epidemiological Transition)

संक्रामक रोगों से जीवनशैली (असंक्रामक) रोगों की ओर बदलाव।

जेब से ख़र्च (Out-of-Pocket Expenditure)

इलाज का वह ख़र्च जो मरीज़ अपनी जेब से देता है।

आशा कार्यकर्ता (ASHA)

गाँव और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच की कड़ी — प्रशिक्षित सामुदायिक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता।

सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC)

हर व्यक्ति को आर्थिक बोझ के बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिलना।

कैशलेस इलाज (Cashless Treatment)

भर्ती के समय मरीज़ को भुगतान नहीं करना पड़ता; बीमा या सरकार सीधे अस्पताल को चुकाती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (Primary Health Care)

गाँव-मोहल्ले के स्तर पर पहली, सुलभ व सस्ती स्वास्थ्य सेवा — टीकाकरण, प्रसव-पूर्व जाँच, सामान्य उपचार।

ख. शिक्षा

शब्द

एक पंक्ति में अर्थ

सकल नामांकन अनुपात (GER)

किसी स्तर पर नामांकित ÷ उस आयु-वर्ग की कुल आबादी।

अधिगम दरिद्रता (Learning Poverty)

10 वर्ष का बच्चा सरल पाठ पढ़-समझ न सके।

आधारभूत साक्षरता एवं संख्या-ज्ञान (FLN)

शुरुआती कक्षाओं तक पढ़ने-समझने और बुनियादी गणित की क्षमता।

ड्रॉपआउट दर (Dropout Rate)

किसी स्तर की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों का प्रतिशत।

लिंग समानता सूचकांक (GPI)

लड़कियों के नामांकन अनुपात ÷ लड़कों का नामांकन अनुपात; 1 = बराबरी।

समावेशी शिक्षा (Inclusive Education)

दिव्यांग व वंचित बच्चों को सामान्य कक्षा में साथ पढ़ाने की व्यवस्था।

ग. कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा

शब्द

एक पंक्ति में अर्थ

अधिकार-आधारित दृष्टिकोण (Rights-based Approach)

कल्याण को क़ानूनी अधिकार बनाना — रोज़गार, भोजन, शिक्षा।

सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)

योजना के काम की जनता द्वारा सार्वजनिक जाँच।

स्वयं सहायता समूह (SHG)

10-20 सदस्यों का बचत-ऋण समूह, मुख्यतः महिलाएँ।

लखपति दीदी (Lakhpati Didi)

सालाना ₹1 लाख से अधिक कमाने वाली स्वयं सहायता समूह सदस्य।

अंशदायी / गैर-अंशदायी सामाजिक सुरक्षा

लाभार्थी के योगदान से / सरकारी कोष से दी जाने वाली सुरक्षा।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)

सब्सिडी या सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजना।

सामाजिक सुरक्षा जाल (Social Safety Net)

संकट में गिरने से बचाने वाली पेंशन, बीमा, राशन व नक़द सहायता की व्यवस्था।

14. अध्याय एक नज़र में (Chapter at a Glance)

पूरे अध्याय को एक पेज पर देखिए — पढ़ाई के बाद दोहराने का सबसे तेज़ तरीका। हर डिब्बा अध्याय के एक बड़े हिस्से को तीन मुख्य बिंदुओं में समेटता है।

चित्र

चित्र 6: सामाजिक क्षेत्र (भाग 2) — अध्याय 8ख का नक्शा

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