सोचिए — किसी परिवार में अगर माता-पिता बच्चे को अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधा नहीं दे पाएँ, तो वह बच्चा बड़ा होकर भी गरीबी के चक्र से बाहर नहीं निकल पाता। ठीक इसी तरह, किसी देश की सबसे बड़ी पूँजी उसके "लोग" होते हैं — यदि वे स्वस्थ, शिक्षित व कुशल हों, तो देश आर्थिक रूप से मज़बूत बनता है। इसी को "मानव पूंजी" (Human Capital) कहते हैं। भारत सरकार ने इस दिशा में हज़ारों योजनाएँ चलाई हैं — जैसे आयुष्मान भारत (मुफ्त इलाज), समग्र शिक्षा (मुफ्त पढ़ाई), मनरेगा (गाँव में रोजगार), और लखपति दीदी (महिलाओं की आय बढ़ाना)। यह अध्याय बताता है कि कैसे भारत गरीबी व बेरोजगारी से लड़ते हुए अपने नागरिकों को स्वस्थ, शिक्षित व आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहा है — और चूँकि यह विषय RAS परीक्षा में सबसे ज़्यादा योजनाओं वाला भाग है, इसे बहुत विस्तार से, सेक्टर-दर-सेक्टर समझाया गया है ताकि एक भी योजना या तथ्य छूटे नहीं।
📚 मानक परिभाषा: शिक्षा, प्रशिक्षण व स्वास्थ्य विकास के माध्यम से व्यक्तियों द्वारा अर्जित कौशल, ज्ञान, दक्षताओं व गुणों का समुच्चय, जो उन्हें आर्थिक व सामाजिक प्रगति में प्रभावी योगदान देने में सक्षम बनाता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे भूमि में निवेश करके उसे भौतिक पूँजी (कारखाना, मशीन) में बदला जाता है, वैसे ही शिक्षा व स्वास्थ्य में निवेश करके किसी व्यक्ति को "मानव पूंजी" (डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक) में बदला जाता है। 💡 उदाहरण: एक गाँव का बच्चा जब सरकारी स्कूल में अच्छी शिक्षा व आंगनवाड़ी में पोषण पाकर आगे चलकर इंजीनियर बनता है, तो वह स्वयं के लिए (निजी लाभ — बेहतर आय) व देश के लिए (सामाजिक लाभ — आर्थिक विकास) दोनों तरह से योगदान देता है।
| मानव पूंजी निर्माण के स्रोत | विवरण |
|---|---|
| शिक्षा (Education) | ज्ञान, तकनीकी कौशल व संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ाकर आय व उत्पादकता में सुधार |
| स्वास्थ्य (Health) | निवारक व उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश — उत्पादक कार्यबल सुनिश्चित करना |
| कार्य-स्थल प्रशिक्षण (On-the-Job Training) | संगठनों द्वारा कर्मचारियों के कौशल उन्नयन कार्यक्रम |
| प्रवास (Migration) | बेहतर आर्थिक अवसरों हेतु व्यक्तियों का स्थानांतरण |
| सूचना (Information) | रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी सटीक जानकारी तक पहुँच |
मानव पूंजी बनाम मानव विकास (Human Capital vs Human Development): मानव पूंजी दृष्टिकोण व्यक्ति को आर्थिक उत्पादन के "साधन" (Means) के रूप में देखता है (शिक्षा व स्वास्थ्य में निवेश उत्पादकता बढ़ाने हेतु), जबकि मानव विकास दृष्टिकोण (प्रो. अमर्त्य सेन की क्षमता पहुँच — Capability Approach पर आधारित) व्यक्ति को स्वयं में "साध्य" (Ends) मानता है — अर्थात व्यक्ति की समग्र भलाई व गरिमा प्राथमिकता है, न कि केवल आर्थिक योगदान। HDI (Ch01 में विस्तृत) मानव विकास दृष्टिकोण का प्रमुख मापक है।
2. स्वास्थ्य क्षेत्र (Health Sector)
📚 मानक परिभाषा: 2018 में शुरू की गई विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे आपकी निजी मेडिक्लेम पॉलिसी अस्पताल का खर्च कवर करती है, वैसे ही आयुष्मान भारत गरीब परिवारों को मुफ्त में यह "स्वास्थ्य बीमा कवच" देती है, ताकि इलाज के अभाव में कोई गरीब न रहे। 💡 उदाहरण: यदि किसी गरीब परिवार के सदस्य को हृदय शल्य चिकित्सा (Heart Surgery) करानी हो, जिसकी लागत ₹3 लाख है, तो आयुष्मान कार्ड के ज़रिए वह किसी सूचीबद्ध (Empanelled) अस्पताल में बिना एक रुपया खर्च किए इलाज करा सकता है।
1. अब तक 43.52 करोड़+ आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं, जो 55 करोड़+ लाभार्थियों को कवर करते हैं। 2. योजना शुरू होने से अब तक 11.69 करोड़+ अस्पताल भर्तियाँ (Hospital Admissions) हो चुकी हैं, जिनमें ₹1.73 लाख करोड़ का उपचार स्वीकृत हुआ। 3. सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या — 32,000+ (सार्वजनिक व निजी दोनों)। 4. सितंबर 2024 से 70 वर्ष व उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों (आय की परवाह किए बिना) को कवरेज — "वय वंदना कार्ड" के माध्यम से 6 करोड़+ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ। 5. केंद्रीय बजट 2026-27 में PM-JAY हेतु आवंटन ₹9,500 करोड़ (2025-26 RE के ₹9,000 करोड़ से अधिक)।
| योजना | उद्देश्य | नवीनतम विवरण |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) | सुलभ व किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना | 30,000+ स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (Health & Wellness Centres) परिचालन में |
| PM आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन | सार्वजनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना सुदृढ़ करना | ₹7,300 करोड़ प्राथमिक व द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु आवंटित |
| मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush) | बच्चों व गर्भवती महिलाओं का सार्वभौमिक टीकाकरण | 12 राष्ट्रव्यापी चरण पूर्ण; ~3,777 ज़िले कवर; ~5.46 करोड़ बच्चे व ~1.32 करोड़ गर्भवती महिलाएँ टीकाकृत |
| POSHAN अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) | कुपोषण घटाना — बच्चों, किशोरियों, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं में | आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक पोषण, विकास निगरानी |
| एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) | बच्चों व माताओं हेतु पूरक पोषण, टीकाकरण, प्री-स्कूल शिक्षा | ₹20,000 करोड़ पोषण सहायता हेतु आवंटित (2023-24) |
आयुष्मान भारत योजना की पात्रता सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के वंचन मापदंडों पर आधारित है — जैसे कच्चे मकान में रहने वाले परिवार, जिनके घर में 16-59 वर्ष का कोई वयस्क सदस्य न हो, या भूमिहीन परिवार जो मुख्यतः शारीरिक श्रम पर निर्भर हों। योजना के निम्नलिखित प्रावधान इसे विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बनाते हैं:
📚 मानक परिभाषा: प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान (ABHA — Ayushman Bharat Health Account) प्रदान करने वाला राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना कार्यक्रम, जो मरीज़ के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित व सुलभ बनाता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे आपका आधार कार्ड आपकी पहचान का डिजिटल प्रमाण है, वैसे ही ABHA ID आपके स्वास्थ्य रिकॉर्ड (जाँच रिपोर्ट, पर्चे, टीकाकरण) का डिजिटल लॉकर है, जिसे कोई भी डॉक्टर आपकी अनुमति से देख सकता है। 💡 उदाहरण: यदि आप जयपुर से दिल्ली शिफ्ट होते हैं, तो नए डॉक्टर को अपनी पुरानी बीमारी की जानकारी बार-बार बताने की ज़रूरत नहीं — वह आपका ABHA ID स्कैन कर पूरा मेडिकल इतिहास देख सकता है।
1. शिशु मृत्यु दर (IMR) — स्वतंत्रता के समय 218 प्रति हज़ार जीवित जन्म से घटकर वर्तमान में 35.3 प्रति हज़ार (NFHS-5) — बेहतर स्वास्थ्य सुविधा व टीकाकरण का प्रमाण। 2. औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) — 1947 में मात्र 32 वर्ष से बढ़कर अब महिलाओं के लिए 70.7 वर्ष व पुरुषों के लिए 68.2 वर्ष (NFHS-5)। 3. प्रधानमंत्री जन औषधि योजना — सस्ती जेनेरिक दवाइयाँ उपलब्ध कराने हेतु 15,000+ जन औषधि केंद्र संचालित, जहाँ ब्रांडेड दवाओं से 50-90% तक सस्ती दवाएँ मिलती हैं।
सोचिए किसी गाँव में एक गर्भवती महिला को टीका लगवाना है — मिशन इंद्रधनुष टीम गाँव-गाँव जाकर मुफ्त टीका लगाती है। उसके बच्चे को आंगनवाड़ी में पोषण मिलता है (ICDS/POSHAN अभियान)। अगर परिवार में किसी को गंभीर बीमारी हो जाए, तो आयुष्मान भारत कार्ड से मुफ्त इलाज मिलता है। यही है भारत का "जन्म से लेकर बीमारी तक" का सामाजिक सुरक्षा जाल (Safety Net)।
📚 मानक परिभाषा: 34 वर्षों बाद (1986 की नीति के बाद) लागू की गई नई शिक्षा नीति, जो स्कूली शिक्षा में 10+2 ढाँचे को 5+3+3+4 ढाँचे से प्रतिस्थापित करती है तथा उच्च शिक्षा में बहु-विषयक (Multidisciplinary) व लचीली शिक्षा को बढ़ावा देती है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे पुराने ज़माने में एक ही तरह का पाठ्यक्रम सबको पढ़ाया जाता था, वैसे ही पुरानी शिक्षा नीति सबको एक जैसे ढाँचे में बाँधती थी। NEP 2020 अब बच्चों को उनकी उम्र व रुचि के अनुसार लचीली शिक्षा (जैसे शुरुआती वर्षों में खेल-खेल में सीखना) देती है। 💡 उदाहरण: NEP 2020 के तहत अब एक इंजीनियरिंग का छात्र चाहे तो बीच में संगीत या इतिहास का कोर्स भी ले सकता है (मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम), जो पहले संभव नहीं था।
| चरण | आयु समूह | विवरण |
|---|---|---|
| आधारभूत चरण (Foundational) | 3-8 वर्ष | आंगनवाड़ी/प्री-स्कूल + कक्षा 1-2 — खेल-आधारित व गतिविधि-आधारित शिक्षा |
| पूर्वाभ्यास चरण (Preparatory) | 8-11 वर्ष | कक्षा 3-5 — भाषा, संख्यात्मकता व बुनियादी कौशल पर ज़ोर |
| मध्य चरण (Middle) | 11-14 वर्ष | कक्षा 6-8 — विषय-आधारित शिक्षण व व्यावसायिक कौशल का परिचय |
| माध्यमिक चरण (Secondary) | 14-18 वर्ष | कक्षा 9-12 — बहु-विषयक अध्ययन, विषय चयन में लचीलापन |
| योजना | उद्देश्य | नवीनतम विवरण |
|---|---|---|
| समग्र शिक्षा अभियान (SSA) | पूर्व-प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा सुधारना | ₹36,453 करोड़ अधोसंरचना व अधिगम परिणाम सुधार हेतु आवंटित |
| PM eVIDYA | DIKSHA, टीवी चैनल व ऑनलाइन संसाधनों से डिजिटल शिक्षा | 2024-25 तक DIKSHA प्लेटफ़ॉर्म पर 5.58 करोड़+ लर्निंग सेशन दर्ज |
| PM पोषण (मध्याह्न भोजन योजना) | स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना | अब प्री-प्राइमरी बच्चों को भी शामिल करने हेतु विस्तारित |
| निपुण भारत (NIPUN Bharat) | बच्चों में आधारभूत साक्षरता व संख्यात्मकता सुधारना | ₹5,300 करोड़ आवंटित; लक्ष्य — 2026-27 तक 3-9 वर्ष के बच्चों में सार्वभौमिक FLN |
| PM उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना | उच्च शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़ करना व अनुसंधान बढ़ावा | ₹1,558 करोड़ अधोसंरचना व संकाय प्रशिक्षण हेतु आवंटित |
| राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) | राज्य विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता व अधोसंरचना सुधार हेतु वित्तीय सहायता | RUSA 3.0 के तहत ₹1,815 करोड़ संस्थागत उत्कृष्टता हेतु स्वीकृत |
| GIAN (वैश्विक शैक्षणिक नेटवर्क पहल) | अंतर्राष्ट्रीय संकाय आमंत्रित कर उच्च शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाना | 1,800+ पाठ्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ प्रस्तुत |
| IMPRINT | राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जुड़ी अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन | ₹700 करोड़ अंतर-विषयक अनुसंधान परियोजनाओं हेतु आवंटित |
📚 मानक परिभाषा: 6-14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क व अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1-8) का मौलिक अधिकार प्रदान करने वाला अधिनियम, जो संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत लागू है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे मतदान का अधिकार हर वयस्क नागरिक को है, वैसे ही RTE के तहत शिक्षा हर बच्चे का "मौलिक अधिकार" है — सरकार का कर्तव्य है कि हर बच्चा स्कूल में दाखिला ले, पढ़े व कक्षा 8 तक पूरी करे। 💡 उदाहरण: धारा 12(1)(c) के तहत हर निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल को कक्षा 1 की 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) व वंचित समूहों के बच्चों हेतु निःशुल्क आरक्षित करनी होती हैं — सरकार स्कूल को प्रति बच्चा खर्च की प्रतिपूर्ति करती है।
RTE (संशोधन) अधिनियम, 2019 — नो-डिटेंशन नीति में बदलाव: पहले कक्षा 8 तक किसी बच्चे को फेल नहीं किया जा सकता था ("नो-डिटेंशन पॉलिसी")। 2019 के संशोधन ने राज्यों को कक्षा 5 व 8 के लिए नियमित परीक्षा लेने की अनुमति दी — यदि बच्चा फेल होता है तो उसे तुरंत उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) व पुनः परीक्षा का अवसर मिलता है; दूसरी बार फेल होने पर राज्य सरकार बच्चे को रोकने (Detain) का निर्णय ले सकती है।
1. समग्र साक्षरता दर — स्वतंत्रता के समय 16% से कम (महिला साक्षरता मात्र 7%) से बढ़कर जनगणना 2011 में 74% हुई। 2. उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrollment Ratio — GER) — भारत में वर्तमान में लगभग 28-29%, जबकि NEP 2020 का लक्ष्य 2035 तक इसे 50% तक ले जाना है।
📚 मानक परिभाषा: आर्थिक व सामाजिक अभाव की वह स्थिति, जिसमें व्यक्ति या परिवार बुनियादी जीवन स्तर हेतु आवश्यक संसाधनों से वंचित रहते हैं — यह एक बहुआयामी (Multidimensional) समस्या है, जो आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन स्तर से जुड़ी होती है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी परिवार के पास इतना पैसा न हो कि वह पेट भर खाना, दवाई व बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सके, तो वह परिवार "गरीबी रेखा से नीचे" (Below Poverty Line — BPL) माना जाता है। 💡 उदाहरण: विश्व बैंक के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा (2022 के अनुसार) $2.15 प्रतिदिन (क्रय शक्ति समता — PPP) है — इससे कम आय पर जीवन-यापन करने वाला व्यक्ति "अत्यंत गरीब" (Extreme Poor) माना जाता है।
| समिति | वर्ष | मुख्य दृष्टिकोण एवं निष्कर्ष |
|---|---|---|
| अलघ समिति (Alagh Committee) | 1979 | न्यूनतम कैलोरी उपभोग (ग्रामीण 2,400 व शहरी 2,100 कैलोरी/दिन) पर आधारित गरीबी रेखा — कैलोरी-पोषण संबंध की नींव रखी |
| लकड़ावाला समिति (Lakdawala Committee) | 1993 | राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखा (CPI-AL व CPI-IW के अनुसार समायोजित) — 2004-05 में ग्रामीण गरीबी 28.3% व शहरी 25.7% अनुमानित |
| तेंदुलकर समिति (Tendulkar Committee) | 2009 | कैलोरी-आधारित पुरानी पद्धति की सीमाओं को दूर किया; निजी स्वास्थ्य-शिक्षा व्यय शामिल किया; 2011-12 में गरीबी 21.9% अनुमानित (ग्रामीण 30.95%, शहरी 26.4% — SECC आधारित) |
| रंगराजन समिति (Rangarajan Committee) | 2014 | पोषण-आधारित मानकों पर पुनः लौटी (ग्रामीण 2,155, शहरी 2,090 कैलोरी/दिन); व्यापक उपभोग टोकरी शामिल; 2011-12 में गरीबी 29.5% अनुमानित (तेंदुलकर से अधिक) |
सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (Socio-Economic Caste Census — SECC) 2011 में आयोजित की गई, जो BPL परिवारों की पहचान हेतु एक बहुआयामी मूल्यांकन उपकरण है। इसमें तीन चरण की प्रक्रिया अपनाई गई — स्वतः बहिष्करण (मोटर वाहन, फ्रिज या निर्धारित सीमा से अधिक भूमि वाले परिवार), स्वतः समावेशन (निराश्रित परिवार, आदिम जनजातीय समूह, मैला ढोने वाले परिवार) एवं वंचन स्कोर आधारित रैंकिंग। SECC डेटा का उपयोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), आयुष्मान भारत व उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान हेतु किया जाता है।
📚 मानक परिभाषा: UNDP व ऑक्सफ़ोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा विकसित सूचकांक, जो केवल आय ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन स्तर से जुड़े कई अभावों (Deprivations) को मापकर गरीबी का समग्र मूल्यांकन करता है। NITI Aayog इसे भारत के संदर्भ में 12 संकेतकों के आधार पर "राष्ट्रीय MPI" के रूप में प्रकाशित करता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी व्यक्ति की आय अच्छी हो, पर उसके घर में शौचालय, बिजली या स्वच्छ पानी न हो, तो केवल आय देखकर उसे "गरीब नहीं" कहना गलत होगा। MPI ऐसे कई पहलुओं को एक साथ देखकर सही तस्वीर दिखाता है। 💡 उदाहरण: सूत्र — MPI = H × A, जहाँ H = बहुआयामी रूप से गरीब लोगों का अनुपात (Headcount Ratio) व A = भारित अभावों का औसत अनुपात (Intensity)। उदाहरण: यदि 30% लोग गरीब हैं और उनका औसत अभाव 40% है, तो MPI = 0.3 × 0.4 = 0.12।
1. NITI Aayog की "राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: प्रगति समीक्षा 2023" रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 9 वर्षों में 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। 2. 2025 की वैश्विक MPI रिपोर्ट के अनुसार भारत का MPI मूल्य 0.069 है, जो निरंतर सुधार दर्शाता है। 3. राज्य-स्तर पर — केरल में सबसे कम गरीबी (0.55%) व बिहार में सबसे अधिक (33.76%) दर्ज। 4. IMF (2023) के अनुसार 2015-2021 के बीच 14 करोड़+ भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले; UNDP (2023) के अनुसार 2005-06 से 2019-21 के बीच 41.5 करोड़+ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। 5. 1 नवंबर 2025 को केरल भारत का पहला राज्य बना जिसने अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) समाप्त करने की घोषणा की — Extreme Poverty Eradication Project (EPEP) के तहत सूक्ष्म-योजना (Micro-planning) से 64,000+ परिवारों को लाभ मिला।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| हेडकाउंट अनुपात (Headcount Ratio — H) | गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या का प्रतिशत (गरीब व्यक्तियों की संख्या ÷ कुल जनसंख्या) |
| निर्धनता अंतराल सूचकांक (Poverty Gap Index) | गरीबों की आय व गरीबी रेखा के बीच के अंतर (कमी) को दर्शाता है |
| सेन सूचकांक (Sen Index) | हेडकाउंट अनुपात, निर्धनता अंतराल व गरीबों के बीच असमानता — तीनों को संयोजित करता है |
| लॉरेंज वक्र (Lorenz Curve) | जनसंख्या में आय/संपत्ति वितरण की असमानता दर्शाने वाला ग्राफ |
| गिनी गुणांक (Gini Coefficient) | आय असमानता मापने का सूचकांक — 0 (पूर्ण समानता) से 1 (अधिकतम असमानता) के बीच |
| गरीबी की श्रेणियाँ | विवरण |
|---|---|
| सदा गरीब (Always Poor) | लगातार गरीब रहने वाले व बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने हेतु संघर्षरत व्यक्ति |
| दीर्घकालिक गरीब (Chronic Poor) | सामान्यतः गरीब, पर कभी-कभी थोड़ी अतिरिक्त आय पाने वाले (जैसे आकस्मिक श्रमिक) |
| उतार-चढ़ाव वाले गरीब (Churning Poor) | गरीबी में आते-जाते रहने वाले (जैसे छोटे किसान, मौसमी श्रमिक) |
| कभी-कभी गरीब (Occasionally/Transient Poor) | सामान्यतः संपन्न, पर दुर्भाग्य से अस्थायी गरीबी झेलने वाले |
| कभी गरीब नहीं (Never Poor) | सदैव पर्याप्त आय वाले, गरीबी का जोखिम न रखने वाले |
| कार्यक्रम | वर्ष | प्रावधान/उद्देश्य |
|---|---|---|
| एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) | 1980 | ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वरोजगार हेतु परिसंपत्ति व ऋण सहायता — बाद में SGSY में विलय |
| ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम (RLEGP) | 1983 | भूमिहीन ग्रामीण परिवारों हेतु मज़दूरी रोजगार सृजन |
| जवाहर रोजगार योजना (JRY) | 1989 | NREP व RLEGP का विलय — ग्रामीण गरीबों हेतु अतिरिक्त रोजगार सृजन |
| स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) | 1999 | स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण स्वरोजगार — बाद में NRLM में रूपांतरित (2011) |
| अंत्योदय अन्न योजना (AAY) | 2000 | सबसे गरीब परिवारों को अत्यधिक रियायती दर पर अनाज — अब NFSA के अंतर्गत समाहित |
| स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (SJSRY) | 1997 | शहरी गरीबों हेतु स्वरोजगार व मज़दूरी रोजगार — बाद में DAY-NULM में रूपांतरित (2013) |
अवधारणा — क्रमिक विकास (Evolutionary Pattern): ध्यान दें कि अधिकांश पुराने कार्यक्रम (IRDP, SGSY, SJSRY) समय के साथ नई, अधिक व्यापक योजनाओं (NRLM/लखपति दीदी, DAY-NULM) में विलीन या रूपांतरित हो गए हैं — यह दर्शाता है कि भारत की गरीबी-विरोधी नीति धीरे-धीरे केवल सरकारी अनुदान वितरण से हटकर "स्वरोजगार व स्वयं सहायता समूह" के मॉडल की ओर बढ़ी है।
📚 मानक परिभाषा: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, वह स्थिति जिसमें लोग रोजगार में नहीं हैं परंतु सक्रिय रूप से कार्य की तलाश कर रहे हैं व कार्य हेतु उपलब्ध हैं — अर्थशास्त्री इसे ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करते हैं जिसे आधे दिन में एक घंटे का भी काम नहीं मिल पाता। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई व्यक्ति नौकरी ढूँढ रहा है, इंटरव्यू दे रहा है, पर उसे काम नहीं मिल रहा, तो वह "बेरोजगार" कहलाता है — लेकिन अगर कोई व्यक्ति काम ढूँढ ही नहीं रहा (जैसे गृहिणी या छात्र), तो उसे बेरोजगार नहीं गिना जाता। 💡 उदाहरण: एक इंजीनियरिंग स्नातक जो नौकरी के लिए आवेदन कर रहा है पर उसे उसकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिल रहा — यह "संरचनात्मक बेरोजगारी" (Structural Unemployment) का उदाहरण है।
1. 15 वर्ष व उससे अधिक आयु वर्ग हेतु बेरोजगारी दर घटकर 3.1% — पिछले 8 वर्षों में सबसे निम्नतम स्तर। 2. युवा बेरोजगारी दर (15-29 वर्ष) — 10.3% से घटकर 9.9%; हालाँकि ~25% युवा अब भी NEET (न रोजगार में, न शिक्षा में, न प्रशिक्षण में) श्रेणी में। 3. श्रम बल भागीदारी दर (LFPR, 15+ वर्ष) — 59.3% पर स्थिर; पुरुष भागीदारी 79.1% बनाम महिला भागीदारी केवल 40.0% — बड़ा लैंगिक अंतर। 4. महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) — 2011-12 के 31.2% से घटकर 2017-18 में 23.3% हुई, फिर 2023-24 में तेज़ी से बढ़कर 41.7% पर पहुँची। 5. ग्रामीण महिला कार्य भागीदारी दर (WPR) 44.9% पर स्थिर; 44.4% महिलाओं ने बाल-देखभाल व घरेलू ज़िम्मेदारियों को श्रम बल से बाहर रहने का प्रमुख कारण बताया। 6. गिग इकॉनमी (Gig Economy) — वित्त वर्ष 2024-25 तक लगभग 1.2 करोड़ गिग श्रमिक, ~17% वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से वृद्धि।
| रोजगार श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्वरोजगार (Self-Employed) | अपना व्यवसाय स्वयं संचालित करना (जैसे सीमेंट दुकान मालिक) — आय अनियमित, बाज़ार पर निर्भर |
| आकस्मिक मज़दूर (Casual Wage Labourers) | कृषि या निर्माण कार्य में अस्थायी रूप से लगे, मज़दूरी पर काम |
| नियमित वेतनभोगी कर्मचारी (Regular Salaried) | स्थिर वेतन व नौकरी सुरक्षा के साथ काम (जैसे सिविल इंजीनियर) |
📚 मानक परिभाषा: भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का उपयोग करने हेतु शुरू किया गया राष्ट्रीय अभियान, जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक तकनीकी, प्रबंधकीय व उद्यमशीलता संबंधी कौशल प्रदान कर रोजगार योग्य बनाना है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी कच्चे लोहे को तराश कर उपयोगी औज़ार बनाया जाता है, वैसे ही कौशल भारत मिशन युवाओं को प्रशिक्षण देकर बाज़ार की माँग के अनुरूप "रोजगार योग्य" (Employable) बनाता है। 💡 उदाहरण: एक गाँव का युवा जो पहले बेरोजगार था, PMKVY के तहत इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण लेकर अब शहर में नौकरी पा सकता है या स्वयं का काम शुरू कर सकता है।
1. 2022-23 में केवल 4.4% युवाओं को औपचारिक प्रशिक्षण (Formal Training) प्राप्त हुआ, जबकि 16.6% को अनौपचारिक प्रशिक्षण मिला (PLFS 2022-23) — विकसित देशों (50%+) की तुलना में काफी कम। 2. PMKVY के तहत महिला भागीदारी वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर 52.3% हुई। 3. PMKVY 4.0 अब AI, रोबोटिक्स व 3D प्रिंटिंग जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों पर केंद्रित है।
| योजना | उद्देश्य | नवीनतम विवरण |
|---|---|---|
| प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) | उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना | PMKVY 4.0 — AI, रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग पर केंद्रित |
| SANKALP (Skills Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion) | अल्पकालिक व दीर्घकालिक कौशल प्रशिक्षण सुधारना | कुल परियोजना लागत ~₹4,455 करोड़ (विश्व बैंक ऋण ₹3,300 करोड़ सहित) |
| PM विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना | कारीगरों व शिल्पकारों का कौशल उन्नयन | ₹13,000 करोड़ आवंटित (बजट 2023-24) |
| दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) | ग्रामीण युवाओं का कौशल विकास व रोजगार क्षमता बढ़ाना | ₹1,200 करोड़ आवंटित; 17.5 लाख युवा प्रशिक्षित, 11.48 लाख नियोजित |
| राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) | निरंतर अप-स्किलिंग व री-स्किलिंग कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार क्षमता बढ़ाना | कौशल भारत पहलों का समन्वय व क्रियान्वयन |
भारत बनाम विकसित देश — कौशल तुलना: भारत में औपचारिक प्रशिक्षण दर मात्र 4.4% है, जबकि विकसित देशों (जैसे जर्मनी, दक्षिण कोरिया) में यह 50%+ है। व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुँच भी भारत में सीमित (~15%) है, जबकि जर्मनी की "दोहरी प्रणाली" (Dual System) में 60-70% व दक्षिण कोरिया में 80%+ है — यह अंतर भारत के लिए एक बड़ी नीतिगत चुनौती व अवसर दोनों है।
📚 मानक परिभाषा: कौशल प्रमाणपत्रों व शैक्षणिक डिग्रियों को एक समान स्तर (Level 1 से Level 10) पर मापने वाला राष्ट्रीय ढाँचा, ताकि कौशल-आधारित प्रशिक्षण को औपचारिक शिक्षा प्रणाली के बराबर मान्यता मिल सके। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी सीढ़ी में हर पायदान की एक निश्चित ऊँचाई होती है, वैसे ही NSQF में हर कौशल स्तर की एक निश्चित योग्यता तय होती है — इससे ITI से प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन व कॉलेज डिग्रीधारी की योग्यता की तुलना समान पैमाने पर हो पाती है। 💡 उदाहरण: एक छात्र जिसने PMKVY के तहत "लेवल 4" इलेक्ट्रीशियन कोर्स किया है, वह चाहे तो आगे चलकर औपचारिक डिप्लोमा में सीधे उच्च स्तर पर प्रवेश ले सकता है — क्योंकि उसका कौशल स्तर पहले से ही मान्यता प्राप्त है (क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा)।
📚 मानक परिभाषा: 2005 में लागू एक कानूनी अधिकार-आधारित योजना, जो ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिन की गारंटीशुदा मज़दूरी रोजगार प्रदान करती है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी परिवार को यह गारंटी हो कि साल में कम से कम 100 दिन उसे काम ज़रूर मिलेगा (चाहे वह तालाब खुदाई हो या सड़क निर्माण), वैसे ही मनरेगा गाँव के परिवारों को यह "रोजगार गारंटी कार्ड" देती है। 💡 उदाहरण: सूखे के मौसम में जब खेती का काम नहीं होता, तो गाँव के मज़दूर मनरेगा के तहत सड़क या तालाब बनाने का काम कर मज़दूरी कमा सकते हैं — इससे मौसमी बेरोजगारी से राहत मिलती है।
MGNREGA से विकसित भारत–G-RAM-G की ओर परिवर्तन: बजट 2026-27 में MGNREGA को मात्र ₹30,000 करोड़ (पुराने बकाया भुगतान हेतु) आवंटित किए गए हैं, जबकि इसका स्थान लेने हेतु एक नई योजना "विकसित भारत – ग्रामीण रोजगार आश्वासन एवं ग्रामीण मिशन" (VB-G RAM G) प्रस्तावित है, जिसे ₹95,692 करोड़ का बजट मिला है — दोनों योजनाओं का संयुक्त आवंटन ₹1.25 लाख करोड़+ है, जो पिछले वर्ष के अकेले मनरेगा आवंटन से 43% अधिक है।
| क्षेत्र | योजना | उद्देश्य एवं नवीनतम विवरण |
|---|---|---|
| ग्रामीण विकास | प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) | ग्रामीण गरीबों को बुनियादी सुविधाओं सहित पक्के मकान उपलब्ध कराना |
| ग्रामीण विकास | राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) / लखपति दीदी | स्वरोजगार व उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण आजीविका बढ़ाना — 10.05 करोड़ ग्रामीण परिवार 90.9 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित; जून 2025 तक 1.48 करोड़+ महिलाएँ "लखपति दीदी" (वार्षिक आय ₹1 लाख+) बनीं; बजट 2026-27 में "लखपति दीदी 2.0" व "She Marts" की घोषणा; लक्ष्य — 6 करोड़ लखपति दीदी |
| शहरी विकास | दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) | शहरी गरीबों को स्वरोजगार व मज़दूरी रोजगार हेतु कौशल प्रदान करना |
| शहरी विकास | PM स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) | रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को कार्यशील पूँजी ऋण — 30 जुलाई 2025 तक 96 लाख+ ऋण वितरित, कुल राशि ₹13,797 करोड़ |
| स्वरोजगार | PM रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) | स्वरोजगार अवसरों को बढ़ावा देना — जुलाई 2024 तक 79 लाख लोगों हेतु रोजगार सृजित |
| स्वरोजगार | PM मुद्रा योजना (PMMY) | गैर-कॉर्पोरेट लघु/सूक्ष्म उद्यमों को ऋण — ₹23 लाख करोड़ वितरित, 41 करोड़+ लाभार्थी (मार्च 2024 तक 47.7 करोड़ ऋण स्वीकृत) |
| स्वरोजगार | स्टैंड-अप इंडिया योजना | SC/ST व महिलाओं में उद्यमिता बढ़ावा — 2.35 लाख+ लाभार्थियों को ऋण |
| स्टार्टअप | स्टार्ट-अप इंडिया | DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के माध्यम से नवाचार व रोजगार — 2023 तक 12.42 लाख नौकरियाँ सृजित |
भारत के 29 पुराने श्रम कानूनों को सरल बनाकर चार व्यापक श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है, जो 21 नवंबर 2025 से देशभर में प्रभावी हो चुकी हैं (केंद्रीय नियम 8 मई 2026 को अंतिम रूप से अधिसूचित)। ये संहिताएँ श्रम बाज़ार में औपचारिकता (Formalization) व सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाती हैं — इसलिए यह रोजगार से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण नवीनतम घटनाक्रम है।
| संहिता | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|
| वेतन संहिता (Code on Wages, 2019) | देशभर में एक समान न्यूनतम वेतन (Statutory Floor Wage) सुनिश्चित करती है; वेतन भुगतान में देरी रोकती है; संगठित व असंगठित — दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों पर लागू |
| औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code, 2020) | हड़ताल, छँटनी व औद्योगिक विवाद समाधान की प्रक्रिया सरल बनाती है; फिक्स्ड-टर्म रोजगार (Fixed-Term Employment) को औपचारिक मान्यता — 1 वर्ष सेवा पूर्ण करने पर ग्रेच्युटी की पात्रता |
| व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-दशा संहिता (OSH Code, 2020) | कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य व बेहतर कार्य-दशाएँ सुनिश्चित करती है; प्रवासी श्रमिकों हेतु विशेष प्रावधान |
| सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security, 2020) | पहली बार "गिग वर्कर" व "प्लेटफ़ॉर्म वर्कर" को औपचारिक रूप से परिभाषित व सामाजिक सुरक्षा दायरे में शामिल करती है — जीवन, स्वास्थ्य, मातृत्व व भविष्य निधि (PF) लाभ; एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे स्विगी, ओला) को वार्षिक कारोबार का 1-2% सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान अनिवार्य |
सोचिए कोई डिलीवरी बॉय स्विगी या ज़ोमैटो के लिए काम करता है — पहले उसे कोई औपचारिक कर्मचारी दर्जा या सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती थी। अब सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत उसे "गिग वर्कर" के रूप में मान्यता मिलती है, और कंपनी को उसके स्वास्थ्य व भविष्य निधि हेतु अपने कारोबार का एक हिस्सा योगदान देना अनिवार्य है — यह भारत के 1.2 करोड़+ गिग श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत है।
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम (ESI Act), 1948 — अब सामाजिक सुरक्षा संहिता में समाहित: बीमारी, मातृत्व, विकलांगता व कार्य-संबंधी मृत्यु की स्थिति में चिकित्सा देखभाल व वित्तीय लाभ प्रदान करने वाला सामाजिक सुरक्षा कानून — पहले 10+ कर्मचारियों वाली गैर-मौसमी फैक्ट्रियों पर लागू था, अब दुकानों, होटलों, सिनेमाघरों व परिवहन उपक्रमों (20+ कर्मचारी) पर भी लागू। यह प्रावधान अब संहिताबद्ध होकर सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का हिस्सा बन गया है।
| योजना | उद्देश्य | नवीनतम विवरण |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 | पात्र लाभार्थियों को सब्सिडीयुक्त अनाज के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना | PMGKAY के तहत 81 करोड़ लोगों को कवर |
| एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) | बच्चों व माताओं हेतु पूरक पोषण, टीकाकरण व प्री-स्कूल शिक्षा | ₹20,000 करोड़ पोषण सहायता हेतु आवंटित (2023-24) |
| PM पोषण (मध्याह्न भोजन) | स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन | अब प्री-प्राइमरी स्तर तक विस्तारित |
नोट — विस्तृत कवरेज Ch02 में: NFSA, PDS व बफर स्टॉक जैसी खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कृषि-केंद्रित बारीकियाँ अध्याय 2 (कृषि) में विस्तार से कवर की गई हैं — यहाँ केवल सामाजिक सुरक्षा जाल (Social Safety Net) के दृष्टिकोण से संक्षिप्त उल्लेख किया गया है ताकि दोहराव न हो।
भारत सरकार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यकों (Minorities) व दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities) के कल्याण व सशक्तिकरण हेतु सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय व अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के माध्यम से अनेक लक्षित योजनाएँ संचालित करती है।
| वर्ग | प्रमुख योजनाएँ/संस्थाएँ |
|---|---|
| अनुसूचित जाति (SC) | पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), स्टैंड-अप इंडिया (SC उद्यमी) |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), वन धन विकास योजना, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC), पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति |
| अल्पसंख्यक (Minorities) | प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK), मौलाना आज़ाद शिक्षा फाउंडेशन |
| दिव्यांगजन (Divyangjan) | सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign), दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण हेतु ADIP योजना, यूनिक डिसेबिलिटी ID (UDID) |
📚 मानक परिभाषा: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal Groups — PVTGs) के समग्र विकास हेतु 2023 में शुरू किया गया मिशन, जो सड़क, बिजली, स्वच्छ जल, आवास, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी 9 प्रमुख सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित करता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी बहुत दूर-दराज़ इलाके तक हर सुविधा (सड़क, बिजली, स्कूल) एक साथ पहुँचाने का "मिशन मोड" अभियान चलाया जाए, वैसे ही PM-JANMAN देश के सबसे वंचित आदिवासी समूहों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने पर केंद्रित है। 💡 उदाहरण: बैगा, सहरिया, कमार जैसे PVTG समुदायों के गाँवों में जहाँ पहले सड़क तक नहीं थी, वहाँ अब PM-JANMAN के तहत सड़क, आंगनवाड़ी व स्वास्थ्य केंद्र एक साथ विकसित किए जा रहे हैं (राजस्थान में सहरिया जनजाति को प्रत्यक्ष लाभ)।
| योजना | उद्देश्य |
|---|---|
| बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ | लिंगानुपात सुधारना व बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना |
| प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) | गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद प्रोत्साहन |
| प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना | गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त LPG गैस कनेक्शन |
| सुकन्या समृद्धि योजना | बालिकाओं की शिक्षा व विवाह हेतु बचत को प्रोत्साहित करना |
| लखपति दीदी (DAY-NRLM के तहत) | स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की वार्षिक आय ₹1 लाख+ करना |
| नमो ड्रोन दीदी | महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन-आधारित कृषि सेवाएँ प्रदान करने हेतु सशक्त बनाना (₹1,261 करोड़ परिव्यय) |
📚 मानक परिभाषा: 10-20 सदस्यों (मुख्यतः महिलाओं) का एक अनौपचारिक समूह, जो नियमित रूप से बचत करता है तथा आपसी सहयोग व बैंक ऋण के ज़रिए सूक्ष्म-उद्यम स्थापित करता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई मित्र-मंडली मिलकर हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करे और ज़रूरत पड़ने पर आपस में उधार दे-ले, वैसे ही SHG की महिलाएँ मिलकर बचत करती हैं व छोटे व्यवसाय (जैसे अचार बनाना, सिलाई) शुरू करती हैं। 💡 उदाहरण: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत 10.05 करोड़ ग्रामीण परिवार 90.9 लाख SHGs में संगठित हैं, जिनमें से कई महिलाएँ अब "लखपति दीदी" बन चुकी हैं।
सोचिए किसी गाँव की 15 महिलाओं ने मिलकर एक SHG बनाया और हर महीने ₹100 जमा करना शुरू किया। कुछ महीनों बाद उनके पास ₹15,000 जमा हो गए। अब बैंक इस समूह की "साख" (Credit History) देखकर उन्हें बिना गारंटी के ऋण देता है (SHG-Bank Linkage Programme), जिससे वे सिलाई मशीन खरीदकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं — यही सूक्ष्म वित्त (Microfinance) की ताकत है।
वित्तीय समावेशन सामाजिक सशक्तिकरण की नींव है — बिना बैंक खाते के कोई भी सरकारी योजना का सीधा लाभ (DBT) नहीं पा सकता। इसलिए निम्नलिखित योजनाएँ सामाजिक क्षेत्र की सफलता का आधार हैं (RBI/बैंकिंग की गहराई हेतु अध्याय 7 देखें):
| योजना | नवीनतम विवरण |
|---|---|
| प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) | 56 करोड़+ कुल खाते खुले (अगस्त 2025 तक), सार्वभौमिक बैंकिंग पहुँच सुनिश्चित |
| प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) | ₹23 लाख करोड़ वितरित; 41 करोड़+ लाभार्थी |
| स्टैंड-अप इंडिया योजना | 2.35 लाख+ SC/ST व महिला उद्यमियों को ऋण सहायता |
1. बेरोजगारी दर (15+ वर्ष) — 3.1% (PLFS वार्षिक रिपोर्ट 2025, 8 वर्षों में सबसे निम्नतम)। 2. आयुष्मान भारत — 43.52 करोड़+ कार्ड, 55 करोड़+ लाभार्थी, 11.69 करोड़+ अस्पताल भर्तियाँ। 3. लखपति दीदी — 1.48 करोड़+ महिलाएँ (जून 2025 तक), लक्ष्य 6 करोड़। 4. PM SVANidhi — 96 लाख+ ऋण वितरित, ₹13,797 करोड़ (जुलाई 2025 तक)। 5. बजट 2026-27 में सामाजिक क्षेत्र आवंटन — MGNREGA ₹30,000 करोड़ + VB-G RAM G ₹95,692 करोड़ (संयुक्त ₹1.25 लाख करोड़+); PM-JAY ₹9,500 करोड़। 6. राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक — भारत का MPI मूल्य 0.069 (2025 वैश्विक MPI रिपोर्ट)।
1. मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY) — पूर्व में "मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना" के नाम से जानी जाती थी; 19 फरवरी 2024 को वर्तमान भाजपा सरकार (मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा) द्वारा पुनः नामकरण किया गया। योजना अब भी सक्रिय है व ₹25 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर (1,798 चिकित्सा प्रक्रियाएँ शामिल) प्रदान करती है; अपात्र परिवार ₹850 वार्षिक प्रीमियम देकर नामांकन करा सकते हैं। 2. खेलो राजस्थान युवा खेल (पूर्व नाम — राजीव गांधी ग्रामीण/शहरी ओलंपिक खेल) — 2022 में शुरू हुई ग्रामीण व शहरी ओलंपिक खेल योजनाओं का नई सरकार द्वारा "खेलो राजस्थान युवा खेल" के रूप में पुनर्गठन/पुनर्नामकरण किया गया है; गाँव-ब्लॉक-ज़िला-राज्य स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने का उद्देश्य यथावत है। 3. इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना (2023 में शुरू) — चिरंजीवी परिवार की महिला मुखिया, कक्षा 9-12 की छात्राओं व सरकारी कॉलेज की छात्राओं को मुफ्त स्मार्टफोन (3 वर्ष मुफ्त इंटरनेट सहित); अब तक 1.35 करोड़+ स्मार्टफोन वितरित (चरण 1 व 2)। सरकार परिवर्तन के बाद योजना की भविष्य की निरंतरता पर अभी अंतिम निर्णय लंबित है — विद्यार्थियों को इसे "वर्तमान स्थिति में जारी, भविष्य अनिश्चित" के रूप में ध्यान रखना चाहिए (परीक्षा हेतु सतर्कता आवश्यक — नवीनतम समाचार अवश्य जाँचें)।
महत्वपूर्ण चेतावनी — योजनाओं के नाम परिवर्तन: दिसंबर 2023 में राजस्थान में सरकार परिवर्तन (कांग्रेस से भाजपा) के बाद कई पूर्ववर्ती योजनाओं का नाम बदला गया है या उनकी समीक्षा की जा रही है। RAS परीक्षा में योजनाओं के वर्तमान (Current) नाम व स्थिति पूछे जाने की पूरी संभावना है — अतः छात्रों को पुराने व नए दोनों नाम याद रखने चाहिए (जैसे चिरंजीवी योजना → मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना; राजीव गांधी ओलंपिक खेल → खेलो राजस्थान युवा खेल)।
सोचिए राजस्थान के किसी गाँव की एक महिला बीमार पड़ जाती है — मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से उसका मुफ्त इलाज होता है। उसकी बेटी सरकारी स्कूल में पढ़ती है और उसे स्मार्टफोन मिलता है ताकि वह ऑनलाइन पढ़ाई कर सके। परिवार का बेटा गाँव में आयोजित खेल प्रतियोगिता (खेलो राजस्थान युवा खेल) में भाग लेता है। यही है राजस्थान सरकार का समग्र सामाजिक सुरक्षा मॉडल — स्वास्थ्य, शिक्षा व खेल तीनों को साथ जोड़ना।
1. मानव पूंजी दृष्टिकोण व्यक्ति को उत्पादन का "साधन" मानता है, जबकि मानव विकास दृष्टिकोण (अमर्त्य सेन) व्यक्ति को "साध्य" मानता है। 📝 10M 2. आयुष्मान भारत-PMJAY प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा देती है; 43.52 करोड़+ कार्ड बन चुके हैं। 📌 Pre 3. सितंबर 2024 से 70+ आयु वर्ग के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आय की परवाह किए बिना आयुष्मान भारत कवरेज — "वय वंदना कार्ड" के ज़रिए। 📌 Pre 4. NEP 2020 में 10+2 ढाँचे के स्थान पर 5+3+3+4 ढाँचा लागू किया गया है। 📌 Pre 5. निपुण भारत मिशन का लक्ष्य 2026-27 तक 3-9 वर्ष के बच्चों में सार्वभौमिक आधारभूत साक्षरता व संख्यात्मकता (FLN) है। 📌 Pre 6. अलघ समिति (1979) ने 2,400/2,100 कैलोरी (ग्रामीण/शहरी) पर आधारित पहली गरीबी रेखा तय की थी। 📌 Pre 7. तेंदुलकर समिति (2009) ने 2011-12 में गरीबी 21.9% तथा रंगराजन समिति (2014) ने 29.5% अनुमानित की। 📝 10M 8. MPI का सूत्र — MPI = H (हेडकाउंट अनुपात) × A (अभावों की तीव्रता)। 📝 5M 9. भारत का MPI मूल्य 0.069 है (2025 वैश्विक MPI रिपोर्ट); केरल में सबसे कम व बिहार में सबसे अधिक राज्य-स्तरीय गरीबी। 📌 Pre 10. 1 नवंबर 2025 को केरल भारत का पहला "अत्यधिक गरीबी मुक्त" राज्य घोषित हुआ (EPEP के तहत)। 📌 Pre 11. गिनी गुणांक 0 (पूर्ण समानता) से 1 (अधिकतम असमानता) के बीच आय असमानता मापता है। 📌 Pre 12. बेरोजगारी दर (15+ वर्ष) PLFS 2025 रिपोर्ट अनुसार 3.1% — पिछले 8 वर्षों में सबसे निम्नतम। 📝 5M 13. महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) 2023-24 में बढ़कर 41.7% हुई (2017-18 के 23.3% से)। 📝 10M 14. बेरोजगारी के 7 प्रमुख प्रकार — खुली, प्रच्छन्न, मौसमी, चक्रीय, तकनीकी, संरचनात्मक व घर्षणात्मक। 📌 Pre 15. MGNREGA (2005) में 100 दिन गारंटीशुदा रोजगार; प्रस्तावित VB-G RAM G योजना में 125 दिन का प्रावधान। 📝 10M 16. बजट 2026-27 में MGNREGA को केवल ₹30,000 करोड़ (बकाया चुकाने हेतु), नई VB-G RAM G योजना को ₹95,692 करोड़ आवंटित। 📌 Pre 17. लखपति दीदी — SHG सदस्य महिला जिसकी वार्षिक आय ₹1 लाख या अधिक हो; जून 2025 तक 1.48 करोड़+ महिलाएँ लखपति दीदी बनीं। 📝 5M 18. PM SVANidhi के तहत जुलाई 2025 तक 96 लाख+ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को ऋण, कुल ₹13,797 करोड़। 📌 Pre 19. NRLM के तहत 10.05 करोड़ ग्रामीण परिवार 90.9 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित हैं। 📌 Pre 20. PMKVY 4.0 अब AI, रोबोटिक्स व 3D प्रिंटिंग जैसे भविष्योन्मुखी कौशल क्षेत्रों पर केंद्रित है। 📌 Pre 21. SECC 2011 के अनुसार 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 30.95% व शहरी गरीबी 26.4% थी। 📝 5M 22. राजस्थान की चिरंजीवी योजना का नाम फरवरी 2024 में बदलकर "मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना" (MAAY) किया गया, कवरेज ₹25 लाख। 📝 10M 23. राजीव गांधी ग्रामीण/शहरी ओलंपिक खेल का नाम बदलकर "खेलो राजस्थान युवा खेल" किया गया है। 📌 Pre 24. इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना (2023) के तहत अब तक 1.35 करोड़+ स्मार्टफोन वितरित; इसकी भविष्य की निरंतरता पर अंतिम निर्णय लंबित है। 📌 Pre
Q1. मानव पूंजी एवं मानव विकास में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q2. आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) की मुख्य विशेषताएँ बताइए। (5 अंक) Q3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q4. भारत में गरीबी मापन हेतु गठित प्रमुख समितियों (तेंदुलकर, रंगराजन) के दृष्टिकोण की तुलना कीजिए। (10 अंक) Q5. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) क्या है? इसकी गणना विधि सोदाहरण समझाइए। (10 अंक) Q6. भारत में बेरोजगारी के प्रकारों का वर्णन कीजिए तथा नवीनतम PLFS आँकड़ों का उल्लेख कीजिए। (10 अंक) Q7. MGNREGA एवं प्रस्तावित VB-G RAM G योजना में अंतर स्पष्ट कीजिए। (10 अंक) Q8. लखपति दीदी योजना के उद्देश्य एवं उपलब्धियों की विवेचना कीजिए। (5 अंक) Q9. स्वयं सहायता समूह (SHG) आंदोलन की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q10. महिला सशक्तिकरण हेतु चलाई जा रही प्रमुख केंद्रीय योजनाओं का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q11. राजस्थान की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना की मुख्य विशेषताएँ बताइए। (5 अंक) Q12. कौशल विकास एवं बेरोजगारी के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए। (Pre MCQ) Q13. सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 की तीन-चरणीय प्रक्रिया के संबंध में सही कथन चुनिए। (Pre MCQ) Q14. गिनी गुणांक एवं लॉरेंज वक्र के संबंध में सही कथन चुनिए। (Pre MCQ)
| वर्ष | नीति/घटना/योजना | महत्व |
|---|---|---|
| 1979 | अलघ समिति — पहली आधिकारिक गरीबी रेखा | कैलोरी-आधारित गरीबी मापन की नींव |
| 1993 | लकड़ावाला समिति गठित | राज्य-विशिष्ट गरीबी रेखा प्रस्ताव |
| 2005 | MGNREGA अधिनियम पारित | ग्रामीण रोजगार गारंटी का कानूनी अधिकार |
| 2009 | तेंदुलकर समिति रिपोर्ट | नई गरीबी मापन पद्धति (निजी व्यय शामिल) |
| 2011 | सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) | BPL पहचान हेतु बहुआयामी डेटा |
| 2013 | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) | कानूनी खाद्य सुरक्षा अधिकार |
| 2014 | रंगराजन समिति रिपोर्ट | गरीबी रेखा पुनरीक्षण |
| 2015 | दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) | ग्रामीण युवा कौशल विकास |
| 2018 | आयुष्मान भारत-PM-JAY लॉन्च | विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना |
| 2020 | राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू | 34 वर्षों बाद शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव |
| 2020 | PM स्वनिधि (PM SVANidhi) लॉन्च | स्ट्रीट वेंडरों को कोविड-राहत ऋण |
| 2023 | इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना (राजस्थान) लॉन्च | महिला डिजिटल सशक्तिकरण |
| 2023 | NITI Aayog राष्ट्रीय MPI प्रगति समीक्षा रिपोर्ट | 24.82 करोड़ लोग गरीबी से बाहर |
| फरवरी 2024 | राजस्थान चिरंजीवी योजना का MAAY में नामकरण | राज्य स्वास्थ्य योजना पुनर्गठन |
| सितंबर 2024 | PM-JAY में 70+ आयु वर्ग शामिल (वय वंदना कार्ड) | वरिष्ठ नागरिकों हेतु सार्वभौमिक कवरेज |
| 1 नवंबर 2025 | केरल — भारत का पहला अत्यधिक-गरीबी-मुक्त राज्य | EPEP मॉडल की सफलता |
| 1 फरवरी 2026 | बजट 2026-27 में लखपति दीदी 2.0 व VB-G RAM G की घोषणा | ग्रामीण रोजगार व महिला आजीविका में बड़ा बदलाव |