सोचिए — जब आप बैंक से होम लोन लेते हैं, तो बैंक आपसे ब्याज वसूलता है। लेकिन बैंक को भी कभी-कभी पैसों की ज़रूरत पड़ती है — तब वह कहाँ जाता है? जवाब है — भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), जिसे "बैंकों का बैंक" कहा जाता है। जिस दर पर RBI बैंकों को उधार देता है, उसे "रेपो दर" (Repo Rate) कहते हैं — और यही एक दर पूरे देश की महंगाई, EMI, व निवेश तय करती है। जब जून 2026 में RBI ने रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी, तो इसका सीधा असर आपके होम लोन की किश्त पर पड़ा। यह पूरा तंत्र — कि RBI कैसे मुद्रा (पैसे) की मात्रा व कीमत (ब्याज दर) को नियंत्रित कर महंगाई व आर्थिक वृद्धि में संतुलन बनाता है — इसी को "मौद्रिक नीति" (Monetary Policy) कहते हैं। इसी अध्याय में हम RBI की भूमिका, ब्याज दरों के औज़ार, तथा बैंकिंग क्षेत्र के सुधारों (जैसे डूबे कर्ज़ यानी NPA से निपटने के तरीके) को आसान भाषा में समझेंगे।
📚 मानक परिभाषा: भारत का केंद्रीय बैंक (Central Bank), जिसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी तथा जिसका राष्ट्रीयकरण 1949 में किया गया — यह देश की मुद्रा आपूर्ति, बैंकिंग व्यवस्था तथा विदेशी मुद्रा भंडार का नियमन करने वाली शीर्ष संस्था है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे एक स्कूल में "प्रधानाचार्य" सभी शिक्षकों व कक्षाओं का नियंत्रण करता है, वैसे ही RBI देश के सभी बैंकों का "प्रधानाचार्य" है — यह तय करता है कि बैंक कितना पैसा छाप सकते हैं, कितना ब्याज लगा सकते हैं, और कैसे काम करें। 💡 उदाहरण: जब आपका बैंक (जैसे SBI या HDFC) किसी वित्तीय संकट में फँसता है, तो वह RBI से मदद माँगता है — RBI उसे "अंतिम उपाय के ऋणदाता" (Lender of Last Resort) के रूप में सहायता देता है, ठीक वैसे ही जैसे कोई बड़ा भाई संकट में छोटे भाई की मदद करता है।
| RBI द्वारा प्रशासित प्रमुख अधिनियम | वर्ष |
|---|---|
| भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम (RBI Act) | 1934 |
| बैंकिंग विनियमन अधिनियम (Banking Regulation Act) | 1949 |
| विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) | 1999 |
| सरकारी प्रतिभूति अधिनियम (Government Securities Act) | 2006 |
| क्रेडिट सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम | 2005 |
1. वार्षिक प्रकाशन — भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति पर रिपोर्ट (Report on Trend and Progress of Banking in India)। 2. अर्ध-वार्षिक प्रकाशन — वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report — FSR), मौद्रिक नीति रिपोर्ट (Monetary Policy Report)। 3. द्वि-मासिक प्रकाशन — द्वि-मासिक नीति वक्तव्य (Bi-monthly Policy Statement)। 4. त्रैमासिक प्रकाशन — विनिर्माण क्षेत्र सर्वेक्षण, उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण।
संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) RBI के 26वें गवर्नर हैं, जिन्होंने 11 दिसंबर 2024 से पदभार संभाला। वे IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस स्नातक हैं तथा प्रिंसटन विश्वविद्यालय (अमेरिका) से लोक नीति (Public Policy) में स्नातकोत्तर हैं।
📚 मानक परिभाषा: केंद्रीय बैंक (भारत में RBI, RBI अधिनियम 1934 के तहत) द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रा व साख (Credit) की आपूर्ति प्रबंधित करने हेतु अपनाई गई रणनीति — यह ब्याज दरों व तरलता उपायों जैसे मौद्रिक उपकरणों का उपयोग कर विशिष्ट समष्टि-आर्थिक लक्ष्य प्राप्त करती है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी नल से पानी की मात्रा घटाई-बढ़ाई जाती है, वैसे ही RBI ब्याज दरों व बैंकों के पास मौजूद पैसे की मात्रा को घटा-बढ़ा कर बाज़ार में "पैसे के बहाव" को नियंत्रित करता है। 💡 उदाहरण: जब बाज़ार में महंगाई ज़्यादा हो (जैसे सब्ज़ियाँ महँगी हो रही हों), तो RBI ब्याज दरें बढ़ाकर लोगों को उधार लेने से हतोत्साहित करता है, जिससे बाज़ार में पैसा घटता है और महंगाई कम होती है।
📚 मानक परिभाषा: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB (2016 में संशोधित) के तहत गठित 6-सदस्यीय समिति, जिसका उद्देश्य नीतिगत रेपो दर (Policy Repo Rate) तय करना तथा कीमत स्थिरता के साथ-साथ आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने हेतु मौद्रिक नीति का मार्गदर्शन करना है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी कक्षा में 6 सदस्यों की एक समिति मिलकर बहुमत से कोई फैसला लेती है, वैसे ही MPC के 6 सदस्य मिलकर वोट के ज़रिए तय करते हैं कि रेपो दर बढ़ानी है, घटानी है या यथावत रखनी है। 💡 उदाहरण: हर दो महीने में MPC की बैठक होती है, जिसमें RBI गवर्नर सहित 6 सदस्य मिलकर रेपो दर पर फैसला लेते हैं — जून 2026 की बैठक में समिति ने रेपो दर 5.25% पर यथावत रखी।
| पहलू (Aspect) | विवरण |
|---|---|
| गठन | RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत (2016 संशोधन) |
| उद्देश्य | नीतिगत रेपो दर तय करना तथा कीमत स्थिरता व संवृद्धि हेतु मार्गदर्शन |
| संरचना (6 सदस्य) | RBI प्रतिनिधि (3) — गवर्नर (अध्यक्ष), उप-गवर्नर (मौद्रिक नीति), एक अधिकारी; सरकार-नामित सदस्य (3) — अर्थशास्त्र विशेषज्ञ, केंद्र सरकार द्वारा नामित |
| निर्णय प्रक्रिया | बहुमत से मतदान; प्रत्येक सदस्य का एक वोट; बराबरी होने पर गवर्नर का निर्णायक वोट (Casting Vote) |
| बैठक आवृत्ति | वर्ष में कम से कम 4 बार (द्वि-मासिक) या आवश्यकतानुसार |
| सदस्यों का कार्यकाल | नामित सदस्य 4 वर्ष या अगले आदेश तक |
| मुद्रास्फीति लक्ष्य | CPI-संयुक्त (CPI-Combined) — वर्तमान लक्ष्य 4% (± 2%), अवधि 2021-2026 |
| कानूनी आधार | RBI अधिनियम, 1934 के प्रावधानों पर आधारित |
| सार्वजनिक पारदर्शिता | MPC प्रस्ताव प्रकाशित होता है; बैठक विवरण (Minutes) 14 दिन की देरी से जारी |
MPC की विफलता (MPC Failure): RBI अधिनियम, 1934 (2016 संशोधित) के अनुसार, यदि मुद्रास्फीति लगातार 3 तिमाहियों तक 2%-6% की लक्ष्य सीमा से बाहर रहे, तो MPC को "विफल" माना जाता है। ऐसी स्थिति में RBI को केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंपनी होती है, जिसमें विफलता के कारण, सुधारात्मक उपाय एवं लक्ष्य पुनः प्राप्त करने की समय-सीमा बताई जाती है।
भारत ने 2016 से "लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण" (Flexible Inflation Targeting — FIT) ढाँचा अपनाया है, जिसकी नींव उर्जित पटेल समिति (2014) की सिफारिशों पर रखी गई। इस ढाँचे के तहत सरकार, RBI से परामर्श कर, एक स्पष्ट मुद्रास्फीति लक्ष्य सीमा तय करती है — वर्तमान में यह लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित 4% है, जिसमें ऊपर-नीचे 2% की सहनशीलता है (अर्थात 2% से 6% के बीच), जो 2021-2026 की अवधि के लिए लागू है।
जैसे किसी डॉक्टर के लिए मरीज़ का शरीर का तापमान 98.6°F (सामान्य) के आसपास (97-99°F के बीच) रहना स्वस्थ माना जाता है, वैसे ही अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई दर 4% के आसपास (2% से 6% के बीच) रहना "स्वस्थ" माना जाता है। यदि महंगाई इस सीमा से बाहर लगातार 3 तिमाहियों तक रहे, तो RBI को सरकार को जवाब देना पड़ता है — ठीक वैसे ही जैसे डॉक्टर को इलाज असफल होने पर अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है।
1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति — मई 2026 में बढ़कर 3.9% (अप्रैल 2026 के 3.5% से), जो पिछले 16 महीनों में सर्वाधिक है, फिर भी RBI के 4% मध्य-बिंदु से नीचे। 2. खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) — मई 2026 में 4.8% (अप्रैल के 4.2% से वृद्धि), मध्य-पूर्व संघर्ष से ऊर्जा व उर्वरक कीमतों में वृद्धि के कारण। 3. RBI का चालू वित्त वर्ष हेतु मुद्रास्फीति अनुमान — लगभग 4.6%।
📚 मानक परिभाषा: वह ब्याज दर, जिस पर RBI, तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility — LAF) के तहत, सरकारी व अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों की जमानत पर बैंकों को अल्पकालिक ऋण (तरलता) प्रदान करता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे आप ज़रूरत पड़ने पर बैंक से लोन लेते हैं और ब्याज चुकाते हैं, वैसे ही बैंकों को भी कभी-कभी पैसों की ज़रूरत पड़ती है — वे RBI से उधार लेते हैं और उस पर "रेपो दर" चुकाते हैं। 💡 उदाहरण: जब RBI रेपो दर घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज़ मिलता है, और बैंक भी आपको सस्ती दर पर होम लोन/कार लोन देते हैं — जून 2026 में रेपो दर 5.25% पर बरकरार है।
| उपकरण (Instrument) | परिभाषा | वर्तमान दर (जून 2026) |
|---|---|---|
| रेपो दर (Repo Rate) | जिस दर पर RBI, LAF के तहत बैंकों को प्रतिभूतियों की जमानत पर अल्पकालिक ऋण देता है | 5.25% |
| रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate) | जिस दर पर RBI, बैंकों से प्रतिभूतियों की जमानत पर तरलता सोखता (Absorb) है | LAF कॉरिडोर का ऐतिहासिक निचला सिरा (अब SDF द्वारा प्रतिस्थापित) |
| स्थायी जमा सुविधा (SDF) | जिस दर पर RBI बिना जमानत के बैंकों से रातोंरात जमा स्वीकार करता है — रेपो दर से 25 आधार अंक नीचे, LAF कॉरिडोर का फर्श (Floor) | 5.00% |
| सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) | दंडात्मक दर, जिस पर बैंक अपने SLR भंडार में से रातोंरात उधार ले सकते हैं — रेपो दर से 25 आधार अंक ऊपर, LAF कॉरिडोर की छत (Ceiling) | 5.50% |
| बैंक दर (Bank Rate) | वह न्यूनतम दर, जिस पर RBI घरेलू बैंकों को ऋण देता है — MSF दर के बराबर, स्वतः समायोजित होती है | 5.50% |
| नकद आरक्षित अनुपात (CRR) | बैंक की शुद्ध माँग व मीयादी देयताओं (NDTL) का वह प्रतिशत, जो RBI के पास नकद रूप में रखना अनिवार्य है | 3.00% |
| सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) | बैंक की कुल जमाओं का वह प्रतिशत, जो सरकारी प्रतिभूतियों/नकद/स्वर्ण के रूप में स्वयं बैंक के पास रखना अनिवार्य है | 18.00% |
जैसे कोई दुकानदार बाज़ार में अतिरिक्त माल बेचकर नकदी जुटाता है या अतिरिक्त नकदी से माल खरीदता है, वैसे ही RBI बाज़ार में सरकारी बॉन्ड खरीद-बेचकर पैसों की मात्रा नियंत्रित करता है। जब RBI बॉन्ड खरीदता है, तो बाज़ार में पैसा बढ़ता है (तरलता इंजेक्शन); जब बेचता है, तो पैसा घटता है (तरलता अवशोषण) — इसी को "खुला बाज़ार परिचालन" (Open Market Operations — OMO) कहते हैं।
| अन्य तरलता उपकरण | कार्य |
|---|---|
| बाज़ार स्थिरीकरण योजना (MSS) | ट्रेजरी बिल/दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी कर अतिरिक्त तरलता सोखना |
| ऑपरेशन ट्विस्ट (Operation Twist) | लघु अवधि प्रतिभूतियाँ बेचकर दीर्घ अवधि प्रतिभूतियाँ खरीदना — दीर्घकालिक ब्याज दरें घटाने हेतु |
| नसबंदीकरण (Sterilization) | विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के घरेलू मुद्रा आपूर्ति पर प्रभाव को संतुलित करना (मुख्यतः OMO के ज़रिए) |
भारत में बैंकिंग का इतिहास
| वर्ष | प्रमुख घटना/महत्व |
|---|---|
| 1806 | बैंक ऑफ कलकत्ता (Bank of Calcutta) की स्थापना |
| 1921 | तीन प्रेसीडेंसी बैंकों का विलय होकर 'इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया' बना |
| 1935 | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना (1 अप्रैल) |
| 1949 | RBI का राष्ट्रीयकरण |
| 1969 | 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण |
| 1980 | 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण |
| 1991 | नरसिम्हन समिति द्वारा बैंकिंग सुधारों की शुरुआत |
भारत में वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks), बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत शासित होते हैं तथा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) व गैर-अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (NSCBs) में विभाजित हैं। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक RBI अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध होते हैं तथा RBI द्वारा विनियमित होते हैं।
| बैंक का प्रकार | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|
| भारतीय स्टेट बैंक (SBI) | सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक, व्यापक बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करता है |
| राष्ट्रीयकृत बैंक (Nationalised Banks) | सरकार द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंक — जैसे बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा |
| भारतीय निजी बैंक (Indian Private Banks) | निजी क्षेत्र के बैंक — जैसे HDFC, ICICI |
| निजी क्षेत्र के विदेशी बैंक (Foreign Banks) | विदेशी बैंक — जैसे HSBC, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, सिटी बैंक |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) | ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा हेतु स्थापित; 50% केंद्र सरकार, 35% प्रायोजक बैंक, 15% राज्य सरकार का स्वामित्व |
विभेदित बैंक (Differentiated Banks): नचिकेत मोर समिति (2013) की सिफारिश पर RBI ने 2014 में विभेदित बैंकों की अवधारणा पेश की — इनमें भुगतान बैंक (Payment Banks — जैसे एयरटेल, इंडिया पोस्ट, फिनो, पेटीएम, जियो) व लघु वित्त बैंक (Small Finance Banks — जैसे कैपिटल SFB, उज्जीवन, उत्कर्ष) शामिल हैं। दोनों पर CRR, SLR, रेपो समान रूप से लागू होते हैं, किंतु भुगतान बैंक जमा स्वीकार कर सकते हैं जबकि ऋण नहीं दे सकते।
भारत में बैंकों के प्रकार
| बैंक का प्रकार | उदाहरण | प्रमुख विशेषताएँ | नियामक |
|---|---|---|---|
| वाणिज्यिक बैंक | SBI, PNB | सामान्य बैंकिंग सेवाएँ | RBI |
| सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक | SBI, BOB | सरकारी स्वामित्व | RBI + सरकार |
| निजी क्षेत्र के बैंक | HDFC, ICICI | निजी स्वामित्व | RBI |
| विदेशी बैंक | Citibank, HSBC | विदेशी मूल | RBI |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) | प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक | ग्रामीण सेवा | RBI + NABARD |
| सहकारी बैंक | PACS, State Co-op Banks | सहकारी आधार | RBI + राज्य रजिस्ट्रार |
| लघु वित्त बैंक (SFBs) | AU, Jana, Ujjivan | छोटे कर्जदार | RBI |
| भुगतान बैंक (Payment Banks) | Paytm, Airtel, India Post | जमा ₹2 लाख तक, ऋण नहीं | RBI |
| विकास बैंक | NABARD, SIDBI | क्षेत्र विशेष विकास | RBI + मंत्रालय |
📚 मानक परिभाषा: बेसल बैंकिंग पर्यवेक्षण समिति (Basel Committee on Bank Supervision — BCBS), बेसल (स्विट्ज़रलैंड) मुख्यालय, 1974 में स्थापित, द्वारा निर्धारित वैश्विक बैंकिंग विनियमन मानक — जो बैंकों की पूँजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) सुनिश्चित करते हैं। भारत वर्तमान में बेसल-III मानदंड अपनाता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी वाहन में सुरक्षा हेतु न्यूनतम एयरबैग व सीटबेल्ट अनिवार्य होते हैं, वैसे ही बेसल मानदंड बैंकों के लिए न्यूनतम "पूँजी सुरक्षा कवच" (Capital Buffer) अनिवार्य करते हैं ताकि आर्थिक संकट में बैंक न डूबे। 💡 उदाहरण: बेसल-III के तहत न्यूनतम पूँजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) 10.5% निर्धारित है — अर्थात बैंक को अपनी जोखिम भारित परिसंपत्तियों (Risk-Weighted Assets) का कम से कम 10.5% पूँजी के रूप में सुरक्षित रखना होता है।
| बैंक श्रेणी | PSL लक्ष्य (कुल शुद्ध बैंक साख का %) |
|---|---|
| अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (कुल) | 40% (ANBC या CEOBE, जो भी अधिक हो) |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व लघु वित्त बैंक | 75% (ANBC या CEOBE) |
| कमजोर वर्ग (SC/ST, महिलाएँ, लघु किसान आदि) | 12% (कुल बैंक साख) या PSL का 10%, जो भी अधिक |
| कृषि | 18% (कुल शुद्ध बैंक साख) |
| जमा बीमा — DICGC | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | जमा बीमा एवं प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम, 1961 के तहत — RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी |
| बीमा कवर | प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक ₹5,00,000 तक (बचत, सावधि, चालू, आवर्ती सभी जमाओं सहित) |
| प्रीमियम भुगतान | बैंक द्वारा भुगतान (जमाकर्ता द्वारा नहीं) |
| अनिवार्य कवरेज | सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक, भारत में शाखाओं वाले विदेशी बैंक, सहकारी बैंक |
📚 मानक परिभाषा: ऐसा ऋण (Loan), जिसका मूलधन या ब्याज 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया (Overdue) रहे — कृषि ऋणों के लिए यह अवधि अल्पकालिक फसलों हेतु 2 फसल मौसम व दीर्घकालिक फसलों हेतु 1 फसल मौसम है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे आपने किसी दोस्त को उधार दिया और वह 3 महीने बाद भी पैसे वापस नहीं कर रहा, तो वह उधार आपके लिए "डूबा हुआ पैसा" बनता जा रहा है — बैंकों के लिए ऐसे ही न चुकाए गए ऋण "NPA" कहलाते हैं। 💡 उदाहरण: यदि कोई किसान बैंक से लिया गया ट्रैक्टर लोन 90 दिन से ज़्यादा नहीं चुका पाता, तो बैंक उस लोन को NPA (डूबत ऋण) के रूप में वर्गीकृत कर देता है, जिससे बैंक का मुनाफा प्रभावित होता है।
| ऋण खाता वर्गीकरण | परिभाषा |
|---|---|
| मानक खाता (Standard Account) | समय पर भुगतान वाला ऋण |
| अवमानक आस्ति (Substandard Asset) | 12 महीने से कम समय तक NPA रहा ऋण |
| संदिग्ध आस्ति (Doubtful Asset) | 12 महीने या अधिक समय तक अवमानक रहा ऋण |
| हानि आस्ति (Loss Asset) | अवसूलीय (Irrecoverable) माना गया, पर पूर्णतः बट्टे खाते में नहीं डाला गया ऋण |
| तनावग्रस्त आस्ति (Stressed Asset) | NPA + बट्टे खाते में डाले गए ऋण + पुनर्गठित ऋणों का योग |
1. सितंबर 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (घरेलू परिचालन) का सकल NPA अनुपात ऐतिहासिक निम्नतम 2.15% पर — सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों का 2.50%, निजी क्षेत्र बैंकों का 1.73%, विदेशी बैंकों का 0.80%। 2. मार्च 2025 तक RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के अनुसार सकल NPA अनुपात बहु-दशकीय निम्नतम स्तर 2.3% पर (मार्च 2024 के 2.8% से घटा) — सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों का अनुपात मार्च 2024 के 3.7% से घटकर मार्च 2025 में 2.8% हुआ। 3. यह निरंतर सुधार दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), NARCL व बेहतर वसूली तंत्र के कारण संभव हुआ है।
📚 मानक परिभाषा: कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत विनियमित एक वित्तीय संस्था, जो बैंकिंग लाइसेंस के बिना वित्तीय सेवाएँ प्रदान करती है — यह माँग जमा (Demand Deposits) स्वीकार नहीं कर सकती, साख निर्माण (Credit Creation) नहीं कर सकती, तथा भुगतान व निपटान प्रणाली का हिस्सा नहीं है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई निजी फाइनेंस कंपनी आपको बिना बैंक बने बाइक/कार लोन देती है, वैसे ही NBFC बैंक न होते हुए भी कर्ज़ देने का काम करती हैं — बस वे चेक बुक जारी नहीं कर सकतीं और आपकी सेविंग्स अकाउंट जैसी सुविधा नहीं देतीं। 💡 उदाहरण: बजाज फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस जैसी कंपनियाँ NBFC हैं जो लोन तो देती हैं, पर बैंक जैसी पूर्ण सुविधाएँ (चेक, डिमांड डिपॉज़िट) नहीं देतीं।
| NBFC का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| आस्ति वित्त कंपनी (AFC) | वाहन, मशीनरी जैसी भौतिक परिसंपत्तियों हेतु वित्त प्रदान करना |
| ऋण कंपनी (LC) | ऋण प्रदान करती हैं, पर आस्ति वित्तपोषण में शामिल नहीं |
| निवेश कंपनी (IC) | मुख्यतः शेयरों व प्रतिभूतियों में निवेश |
| आधारभूत संरचना वित्त कंपनी (IFC) | आधारभूत संरचना परियोजनाओं को वित्तपोषित करना |
| सूक्ष्म वित्त संस्था (MFI) | निम्न-आय वर्ग को सूक्ष्म-ऋण प्रदान करना |
| कोर निवेश कंपनी (CIC) | शेयरों व प्रतिभूतियों के अधिग्रहण में विशेषज्ञ |
1. जून 2026 MPC बैठक में रेपो दर 5.25% पर यथावत रखी गई, नीतिगत रुख "तटस्थ" (Neutral) बनाए रखा गया। 2. CPI मुद्रास्फीति — मई 2026 में 3.9% (RBI के 4% लक्ष्य से नीचे); चालू वित्त वर्ष हेतु RBI का अनुमान लगभग 4.6%। 3. वास्तविक GDP संवृद्धि दर — चालू वित्त वर्ष हेतु लगभग 6.9% अनुमानित (MPC का प्रक्षेपण)। 4. CRR — 3.00% (दिसंबर 2025 में 3.25% से घटाया गया); SLR — 18.00%। 5. SDF दर — 5.00%; MSF व बैंक दर — 5.50%। 6. अगली MPC बैठक — 3-5 अगस्त 2026 को प्रस्तावित। 7. सकल NPA अनुपात — सितंबर 2025 तक 2.15% (ऐतिहासिक निम्नतम स्तर)।
1. राजस्थान ग्रामीण बैंक (Rajasthan Gramin Bank) — 1 मई 2025 से "एक राज्य, एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक" (One State, One RRB) पहल के तहत राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक (RMGB) व बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (BRKGB) के विलय से गठित। 2. राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक (विलय-पूर्व) — भारत सरकार (50%), प्रायोजक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI, 35%) व राजस्थान सरकार (15%) की संयुक्त स्वामित्व वाली संस्था, 26 ज़िलों में 717+ शाखाएँ। 3. विलय के बाद, नया राजस्थान ग्रामीण बैंक पूर्णतः SBI के YONO प्लेटफ़ॉर्म से एकीकृत हो गया है, जिससे ग्रामीण किसान व शहरी SBI ग्राहक के बीच "डिजिटल विभाजन" (Digital Divide) समाप्त हुआ। 4. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का अनिवार्य प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य — कुल अग्रिमों का 75%, जिसका सीधा लाभ राजस्थान के लघु व सीमांत किसानों को मिलता है।
सोचिए राजस्थान के किसी दूरस्थ गाँव के किसान को पहले बैंकिंग सेवा के लिए कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था। अब राजस्थान ग्रामीण बैंक व जन धन योजना के खातों से वह अपने गाँव में ही बैंकिंग, बीमा व सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ (DBT) प्राप्त कर सकता है — यही "वित्तीय समावेशन" (Financial Inclusion) है, जो चिरंजीवी योजना जैसी राज्य योजनाओं के भुगतान को भी आसान बनाता है।
1. RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई, राष्ट्रीयकरण 1949 में हुआ। 📌 Pre 2. वर्तमान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा हैं (26वें गवर्नर), जिन्होंने 11 दिसंबर 2024 से कार्यभार संभाला। 📌 Pre 3. गवर्नर व उप-गवर्नर का अधिकतम कार्यकाल 3 वर्ष है (RBI अधिनियम की धारा 8(4))। 📌 Pre 4. MPC का गठन RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB (2016 संशोधित) के तहत हुआ; इसमें 6 सदस्य होते हैं। 📝 5M 5. वर्तमान मुद्रास्फीति लक्ष्य 4% (± 2%) है, जो 2021-2026 की अवधि हेतु लागू है — उर्जित पटेल समिति (2014) की सिफारिश पर आधारित। 📌 Pre 6. यदि मुद्रास्फीति लगातार 3 तिमाहियों तक लक्ष्य सीमा से बाहर रहे, तो MPC को "विफल" माना जाता है। 📝 10M 7. रेपो दर वह दर है जिस पर RBI बैंकों को उधार देता है; रिवर्स रेपो वह दर है जिस पर RBI बैंकों से उधार लेता है। 📌 Pre 8. जून 2026 में रेपो दर 5.25%, CRR 3.00%, SLR 18.00%, SDF 5.00%, MSF/बैंक दर 5.50% है। 📝 5M 9. MSF दर रेपो दर से 25 आधार अंक ऊपर तथा SDF दर रेपो दर से 25 आधार अंक नीचे होती है। 📝 10M 10. बैंकों का राष्ट्रीयकरण दो चरणों में हुआ — 1969 में 14 बैंक व 1980 में 6 बैंक। 📌 Pre 11. भारत वर्तमान में बेसल-III मानदंड अपनाता है; न्यूनतम पूँजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) 10.5% है। 📌 Pre 12. DICGC के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक अधिकतम ₹5,00,000 तक जमा बीमा उपलब्ध है। 📌 Pre 13. NPA की परिभाषा — 90 दिनों से अधिक बकाया ऋण (मूलधन या ब्याज)। 📌 Pre 14. IBC, 2016 में न्यूनतम चूक सीमा ₹1 करोड़ है; समाधान समय-सीमा 180 दिन (270 दिन तक विस्तारणीय)। 📝 10M 15. NARCL व IDRCL — "बैड बैंक" तंत्र के दो प्रमुख अंग, जो डूबत ऋण के अधिग्रहण व समाधान का कार्य करते हैं। 📝 5M 16. सकल NPA अनुपात सितंबर 2025 तक ऐतिहासिक निम्नतम स्तर 2.15% पर पहुँच गया। 📌 Pre 17. नचिकेत मोर समिति (2013) की सिफारिश पर 2014 में विभेदित बैंकों (भुगतान व लघु वित्त बैंक) की अवधारणा लागू हुई। 📌 Pre 18. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) का लक्ष्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों हेतु कुल शुद्ध बैंक साख का 40% है। 📝 5M 19. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का स्वामित्व — 50% केंद्र सरकार, 35% प्रायोजक बैंक, 15% राज्य सरकार। 📌 Pre 20. राजस्थान ग्रामीण बैंक 1 मई 2025 को RMGB व BRKGB के विलय से "एक राज्य, एक RRB" पहल के तहत बना। 📝 10M 21. प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 56.16 करोड़+ खाते खुले (अगस्त 2025), जिनमें 55.7% महिला खाताधारक हैं। 📌 Pre 22. NBFC माँग जमा स्वीकार नहीं कर सकते और साख निर्माण नहीं कर सकते — यह बैंक व NBFC के बीच प्रमुख अंतर है। 📌 Pre
Q1. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q2. रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, CRR एवं SLR में अंतर स्पष्ट कीजिए। (10 अंक) Q3. भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे (Inflation Targeting Framework) की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q4. अनर्जक आस्तियाँ (NPA) क्या हैं? इनके समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q5. दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 की मुख्य विशेषताएँ बताइए। (5 अंक) Q6. NARCL एवं IDRCL की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q7. भारत में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के उद्देश्य एवं प्रभावों की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q8. भुगतान बैंक एवं लघु वित्त बैंक में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q9. बेसल-III मानदंडों की मुख्य आवश्यकताएँ बताइए। (5 अंक) Q10. RBI के प्रमुख कार्यों का वर्णन करते हुए इसे "बैंकों का बैंक" क्यों कहा जाता है, स्पष्ट कीजिए। (Pre MCQ) Q11. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) की श्रेणियाँ एवं लक्ष्य निर्धारण के संबंध में सही कथन चुनिए। (Pre MCQ)
| वर्ष | नीति/घटना/योजना | महत्व |
|---|---|---|
| 1935 | RBI की स्थापना (1 अप्रैल) | भारत के केंद्रीय बैंक की नींव |
| 1949 | RBI का राष्ट्रीयकरण | RBI सरकार के पूर्ण स्वामित्व में आया |
| 1961 | DICGC अधिनियम पारित | जमा बीमा प्रणाली की शुरुआत |
| 1969 | पहले चरण में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण | सामाजिक बैंकिंग की शुरुआत |
| 1974 | बेसल समिति (BCBS) की स्थापना | वैश्विक बैंकिंग विनियमन मानकों की नींव |
| 1980 | दूसरे चरण में 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण | सार्वजनिक बैंकिंग का विस्तार |
| 2002 | सार्फेसी अधिनियम (SARFAESI) पारित | बैंकों को गिरवी संपत्ति वसूली का अधिकार |
| 2013 | नचिकेत मोर समिति — विभेदित बैंकों की सिफारिश | भुगतान व लघु वित्त बैंकों की नींव |
| 2014 | उर्जित पटेल समिति — मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचा | FIT ढाँचे की नींव |
| 2016 | MPC का गठन (RBI अधिनियम धारा 45ZB संशोधन) | मौद्रिक नीति निर्णय में संस्थागत ढाँचा |
| 2016 | दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) पारित | NPA समाधान का कानूनी ढाँचा |
| 2019 | NARCL/बैड बैंक की अवधारणा पर चर्चा शुरू | डूबत ऋण समाधान हेतु नई संस्था |
| अप्रैल 2022 | स्थायी जमा सुविधा (SDF) की शुरुआत | LAF कॉरिडोर का नया फर्श |
| 1 मई 2025 | राजस्थान ग्रामीण बैंक का गठन (RMGB+BRKGB विलय) | "एक राज्य, एक RRB" पहल का उदाहरण |
| सितंबर 2025 | सकल NPA अनुपात ऐतिहासिक निम्नतम 2.15% पर | बैंकिंग क्षेत्र की मज़बूती का प्रमाण |
| जून 2026 | MPC ने रेपो दर 5.25% पर यथावत रखी | वर्तमान मौद्रिक नीति रुख — तटस्थ |