सोचिए — आपके घर का महीने का बजट कैसे बनता है? पहले आप हिसाब लगाते हैं कि इस महीने कितनी कमाई (आय) होगी, फिर तय करते हैं कि राशन, बिजली, स्कूल फीस, बचत — किस मद में कितना खर्च (व्यय) करना है। अगर खर्च कमाई से ज़्यादा हो जाए, तो आपको उधार लेना पड़ता है। ठीक इसी तरह, पूरे देश का "घर-खर्च" चलाने के लिए भारत सरकार हर साल 1 फरवरी को संसद में एक बजट पेश करती है — जिसमें बताया जाता है कि सरकार को टैक्स व अन्य स्रोतों से कितनी आय होगी, और सड़क, स्कूल, सेना, पेंशन जैसी मदों पर कितना खर्च होगा। जब खर्च आय से ज़्यादा हो जाता है, तो सरकार भी बाज़ार से उधार (ऋण) लेती है — इसी अंतर को "राजकोषीय घाटा" (Fiscal Deficit) कहते हैं। यही सार्वजनिक वित्त (Public Finance) की पूरी कहानी है — सरकार कहाँ से पैसा जुटाती है, कहाँ खर्च करती है, और कैसे अपने घाटे को नियंत्रित रखती है — Union Budget 2026-27 में यह घाटा GDP का सिर्फ 4.3% रखने का लक्ष्य है।
📚 मानक परिभाषा: अर्थशास्त्र की वह शाखा जो सरकार की आय (राजस्व), व्यय, ऋण एवं वित्तीय प्रशासन का अध्ययन करती है — अर्थात सरकार पैसा कहाँ से जुटाती है और कहाँ खर्च करती है, इसका व्यवस्थित अध्ययन। ✅ सरल शब्दों में: जैसे एक परिवार का बजट — आय, खर्च, बचत व उधार का हिसाब — "पारिवारिक वित्त" कहलाता है, वैसे ही पूरे देश की सरकार का आय-व्यय का हिसाब "सार्वजनिक वित्त" कहलाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि सरकार का लक्ष्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि जनकल्याण (Public Welfare) है। 💡 उदाहरण: सरकार सड़क, अस्पताल, स्कूल बनाने के लिए टैक्स इकट्ठा करती है (आय) और फिर उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, सब्सिडी पर खर्च करती है (व्यय) — यही सार्वजनिक वित्त का व्यावहारिक उदाहरण है।
A. सार्वजनिक राजस्व (Public Revenue) — सरकार की आय के स्रोत — कर एवं गैर-कर राजस्व।
B. सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure) — सरकार द्वारा विभिन्न मदों पर किया गया खर्च।
C. सार्वजनिक ऋण (Public Debt) — जब व्यय, राजस्व से अधिक हो तो सरकार द्वारा लिया गया उधार।
D. वित्तीय प्रशासन (Financial Administration) — बजट निर्माण, क्रियान्वयन एवं लेखा-परीक्षण (Audit) की प्रक्रिया — जैसे CAG की भूमिका।
निजी वित्त (Private Finance) में व्यक्ति पहले अपनी आय देखता है, फिर उसके अनुसार खर्च तय करता है (आय → व्यय)। परंतु सार्वजनिक वित्त (Public Finance) में सरकार पहले जनकल्याण हेतु ज़रूरी खर्च तय करती है, फिर उसके अनुसार कर एवं अन्य स्रोतों से आय जुटाने की योजना बनाती है (व्यय → आय)। यही कारण है कि सरकार घाटे का बजट (Deficit Budget) भी बना सकती है, जबकि एक सामान्य परिवार लंबे समय तक ऐसा नहीं कर सकता।
📚 मानक परिभाषा: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 (Article 112) के तहत अनिवार्य एक वार्षिक वित्तीय विवरण, जो प्रत्येक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए सरकार की अनुमानित प्राप्तियों (Receipts) व व्ययों (Expenditure) का ब्यौरा देते हुए संसद में प्रस्तुत किया जाता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई कंपनी साल के शुरू में अपना "वार्षिक बजट" बनाती है कि आने वाले 12 महीनों में कितना कमाएगी और कितना खर्च करेगी, ठीक वैसे ही भारत सरकार भी हर साल अपना बजट पेश करती है। 💡 उदाहरण: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रत्येक वर्ष 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट पेश करती हैं — बजट तैयार करने की ज़िम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs) की होती है।
| बिंदु (Feature) | राजस्व बजट (Revenue Budget) | पूँजीगत बजट (Capital Budget) |
|---|---|---|
| फोकस | दैनिक खर्च व प्राप्तियाँ | दीर्घकालिक निवेश व परिसंपत्ति निर्माण |
| आय | कर, शुल्क, जुर्माना आदि | उधार, अधिशेष, विशेष लेवी |
| व्यय | वेतन, प्रशासन, सब्सिडी, सामाजिक कार्यक्रम | आधारभूत संरचना, पूँजीगत परियोजनाएँ |
| उद्देश्य | राजकोषीय स्थिरता (Fiscal Stability) | आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) |
| प्रभाव | अल्पकालिक आर्थिक गतिविधि | दीर्घकालिक आर्थिक विकास |
राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts) वे प्राप्तियाँ हैं जो न तो कोई देयता (Liability) बनाती हैं और न ही किसी परिसंपत्ति (Asset) को कम करती हैं — इनमें कर राजस्व (Tax Revenue) एवं गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) दोनों शामिल हैं। कर राजस्व सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत है, जिसे दो भागों में बाँटा जाता है — प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) एवं अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)।
1. प्रत्यक्ष कर-GDP अनुपात (Direct Tax to GDP Ratio) — वित्त वर्ष 2013-14 के 5.62% से बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 6.11% हुआ, तथा वित्त वर्ष 2023-24 में 24 वर्षों के उच्चतम स्तर 6.64% पर पहुँचा। 2. कर उत्प्लावकता (Tax Buoyancy) — वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनुमानित 1.4 (अर्थात कर राजस्व, GDP से तेज़ गति से बढ़ रहा है) — प्रत्यक्ष कर में 15.8% व अप्रत्यक्ष कर में 10.6% वृद्धि के कारण। 3. कुल कर-GDP अनुपात (Tax-to-GDP Ratio) — वित्त वर्ष 2008 में उच्चतम 12.1% रहा, वित्त वर्ष 2024 में अनुमानतः 11.8%।
📚 मानक परिभाषा: एक गंतव्य-आधारित (Destination-Based), एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली, जो 1 जुलाई 2017 से लागू हुई तथा उत्पाद शुल्क, सेवा कर, VAT जैसे कई अप्रत्यक्ष करों को मिलाकर "एक देश, एक कर" (One Nation, One Tax) की अवधारणा को साकार करती है। ✅ सरल शब्दों में: पहले हर राज्य में अलग-अलग टैक्स (VAT, एंट्री टैक्स) लगते थे — जैसे राजस्थान से दिल्ली माल भेजने पर कई जगह टैक्स कटता था। अब GST लागू होने से पूरे देश में एक जैसी दर लगती है — जैसे पूरे भारत में एक ही तरह का "टोल सिस्टम" हो। 💡 उदाहरण: जयपुर के किसी व्यापारी को अब दिल्ली माल बेचने पर बार-बार अलग राज्यों में टैक्स नहीं भरना पड़ता — उसे सिर्फ एक GST रिटर्न भरना होता है, जिससे व्यापार करना आसान हुआ है।
GST 2.0 सुधार (सितंबर 2025): 56वीं GST परिषद बैठक (3 सितंबर 2025) में "अगली पीढ़ी के GST सुधार" (Next-Gen GST Reforms) घोषित किए गए, जो 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए — पुरानी 5 दरों (0%, 5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर मुख्यतः दो स्लैब में समेटा गया: मानक दर 18% (अधिकांश वस्तु-सेवाएँ) व मेरिट दर 5% (आवश्यक व जन-उपयोगी वस्तुएँ जैसे टूथपेस्ट, साइकिल, प्रेशर कुकर)। विलासिता व अहितकर वस्तुओं (तंबाकू, पान मसाला, ऑनलाइन गेमिंग) पर नई विशेष डी-मेरिट दर 40% लगाई गई। इस सुधार से अनुमानित राजस्व हानि लगभग ₹48,000 करोड़ (FY23-24 खपत आधार पर) आँकी गई है, किंतु उपभोग व अनुपालन बढ़ने से यह भरपाई होने की उम्मीद है।
| GST स्लैब (2026) | दर | लागू वस्तुएँ/सेवाएँ |
|---|---|---|
| मेरिट दर (Merit Rate) | 5% | आवश्यक वस्तुएँ, दैनिक उपयोग की वस्तुएँ (टूथपेस्ट, बाइसिकल, छोटी वॉशिंग मशीन) |
| मानक दर (Standard Rate) | 18% | अधिकांश वस्तुएँ व सेवाएँ (छोटी कारों पर भी 28% से घटाकर 18%) |
| विशेष डी-मेरिट दर | 40% | तंबाकू, पान मसाला, गुटखा, ऑनलाइन गेमिंग, विलासिता की वस्तुएँ |
| निर्यात/कुछ वस्तुएँ | 0% | निर्यात वस्तुएँ, कुछ अनाज व आवश्यक खाद्य पदार्थ |
1. अप्रैल 2026 — अब तक का सर्वाधिक मासिक सकल GST संग्रह, ₹2.43 लाख करोड़ से अधिक। 2. मई 2026 — GST संग्रह ₹1.94 लाख करोड़ रहा (अप्रैल के रिकॉर्ड से कुछ कम, फिर भी मज़बूत)। 3. फरवरी 2026 — सकल GST संग्रह ₹1,83,609 करोड़ रहा। 4. अक्टूबर 2025 — कुल शुद्ध GST राजस्व ₹1,69,002 करोड़, पिछले वर्ष की तुलना में 7.1% अधिक। 5. GST 2.0 सुधार (सितंबर 2025) के बावजूद, बढ़ते उपभोग व बेहतर अनुपालन (Compliance) से संग्रह में निरंतरता बनी हुई है।
GST परिषद अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT): केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र निकाय, जो GST प्राधिकरणों या अपीलीय प्राधिकरण के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करता है। संरचना — अध्यक्ष (प्रमुख), एक न्यायिक सदस्य एवं दो तकनीकी सदस्य (एक राज्य से, एक केंद्र से)।
गैर-कर राजस्व में सरकार को टैक्स के अलावा अन्य स्रोतों से मिलने वाली नियमित आय शामिल है — जैसे ब्याज प्राप्तियाँ (केंद्र सरकार द्वारा दिए गए ऋणों से), लाभांश व मुनाफा (सरकारी कंपनियों के निवेश से), शुल्क व प्रभार (लाइसेंस, पासपोर्ट), जुर्माना व दंड, सार्वजनिक उपक्रमों का लाभ, रॉयल्टी व लाइसेंस (खनिज, प्रसारण), तथा विदेशी अनुदान।
📚 मानक परिभाषा: ऋण या परिसंपत्तियों की बिक्री से प्राप्त वित्तीय लाभ, जो या तो देयता बढ़ाते हैं या वित्तीय परिसंपत्ति घटाते हैं — जैसे उधार व विनिवेश (Disinvestment)। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी बेचकर या बैंक से लोन लेकर पैसा जुटाता है, वैसे ही सरकार भी उधार लेकर या सरकारी कंपनियों के शेयर बेचकर (विनिवेश) पैसा जुटाती है। 💡 उदाहरण: निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM), वित्त मंत्रालय, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में सरकार के इक्विटी निवेश के प्रबंधन व विनिवेश से जुड़े सभी मामले देखता है।
| श्रेणी | परिभाषा | घटक |
|---|---|---|
| राजस्व प्राप्तियाँ | जो देयता नहीं बनातीं व परिसंपत्ति नहीं घटातीं | कर राजस्व (प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष), गैर-कर राजस्व (ब्याज, लाभांश, शुल्क) |
| पूँजीगत प्राप्तियाँ | जो देयता बनाती हैं या परिसंपत्ति घटाती हैं | ऋण एवं उधार, विनिवेश आय, ऋणों की वसूली |
| राजस्व व्यय | परिसंपत्ति निर्माण न करने वाला सामान्य खर्च | वेतन-पेंशन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी, राज्यों को अनुदान |
| पूँजीगत व्यय | परिसंपत्ति निर्माण करने वाला दीर्घकालिक खर्च | भूमि-भवन-मशीनरी अधिग्रहण, राज्यों को ऋण, ऋण चुकौती |
प्रभावी पूँजीगत व्यय (Effective Capital Expenditure): केंद्रीय बजट 2022-23 से शुरू की गई एक नई अवधारणा, जो केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष पूँजीगत व्यय के साथ-साथ राज्यों को परिसंपत्ति निर्माण हेतु दिए गए अनुदान (Grants-in-Aid for Creation of Capital Assets) को भी जोड़ती है — इससे सड़क, रेलवे व आधारभूत संरचना में सरकार के वास्तविक निवेश का सही आकलन होता है।
| घाटा (Deficit) | सूत्र (Formula) | अर्थ |
|---|---|---|
| राजस्व घाटा(Revenue Deficit) | राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ | सरकार की चालू आय, चालू व्यय से कम पड़ना — सरकार की "दिस-सेविंग" (Dis-saving) दर्शाता है |
| राजकोषीय घाटा(Fiscal Deficit) | कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ) | सरकार की कुल उधारी आवश्यकता — बजट लेखांकन में राजकोषीय घाटा ही कुल उधार के बराबर होता है |
| प्राथमिक घाटा(Primary Deficit) | राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान | पिछले ऋण के ब्याज को छोड़कर, वर्तमान व्यय हेतु आवश्यक उधार — कम प्राथमिक घाटा बेहतर राजकोषीय सेहत दर्शाता है |
| प्रभावी राजस्व घाटा(Effective Revenue Deficit) | राजस्व घाटा − पूँजी निर्माण हेतु अनुदान | राजस्व व्यय के "गैर-उत्पादक" (Non-Productive) भाग को अलग कर विकासात्मक पहलू का विश्लेषण |
मान लीजिए राजस्व व्यय ₹80,000 करोड़ है और राजस्व प्राप्तियाँ ₹60,000 करोड़ हैं। सरकार ने ₹10,000 करोड़ उधार लिया है और ब्याज भुगतान ₹6,000 करोड़ है। तब — राजस्व घाटा = 80,000 − 60,000 = ₹20,000 करोड़। राजकोषीय घाटा (कुल उधार के बराबर) = ₹10,000 करोड़। प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान = 10,000 − 6,000 = ₹4,000 करोड़। इसी तरह, यदि राजकोषीय घाटा ₹50,000 करोड़ व ब्याज देयताएँ ₹1,500 करोड़ हों, तो सकल प्राथमिक घाटा = 50,000 − 1,500 = ₹48,500 करोड़ होगा।
1. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) — 2026-27 के लिए लक्ष्य GDP का 4.3%, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान (RE) 4.4% से कम है। 2. राजस्व घाटा (Revenue Deficit) — 2026-27 में GDP का 1.5% लक्षित, 2025-26 के 1.5% RE के लगभग बराबर। 3. ऋण-GDP अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) — 2026-27 बजट अनुमान (BE) में 55.6%, जबकि 2025-26 RE में यह 56.1% था — सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक इसे 50±1% तक लाना है। 4. कुल व्यय (Total Expenditure) 2026-27 — ₹53,47,315 करोड़ (2025-26 RE से 7.7% अधिक)। 5. कुल प्राप्तियाँ (उधार के अतिरिक्त) 2026-27 — ₹36,51,547 करोड़ (2025-26 RE से 7.2% अधिक)।
📚 मानक परिभाषा: सरकार द्वारा व्यय व कराधान में समायोजन करके आर्थिक उत्पादन एवं रोजगार को स्थिर करने का प्रयास — यह अधिशेष, घाटे या संतुलित बजट के माध्यम से माँग को प्रभावित कर आर्थिक चक्रों (Economic Cycles) का प्रबंधन करती है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी बीमार व्यक्ति को डॉक्टर दवा की खुराक कम-ज़्यादा करके ठीक करता है, वैसे ही सरकार टैक्स व खर्च को घटा-बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को "स्वस्थ" (संतुलित) रखने की कोशिश करती है। 💡 उदाहरण: कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने खर्च बढ़ाया व टैक्स में राहत दी (विस्तारवादी राजकोषीय नीति) ताकि मंदी से अर्थव्यवस्था उबर सके।
| राजकोषीय नीति का प्रकार | विस्तारवादी (Expansionary) | संकुचनकारी (Contractionary) |
|---|---|---|
| उद्देश्य | आर्थिक संवृद्धि को गति देना | मुद्रास्फीति नियंत्रित करना |
| उपकरण | सरकारी खर्च बढ़ाना, कर घटाना | सरकारी खर्च घटाना, कर बढ़ाना |
| प्रभाव | माँग व रोजगार में वृद्धि, मंदी से बचाव | माँग में कमी, अर्थव्यवस्था को अति-तप्त होने से बचाव |
| उदाहरण | 2008 के वित्तीय संकट व कोविड-19 में प्रयुक्त | 1970-80 के दशक में उच्च मुद्रास्फीति नियंत्रण हेतु प्रयुक्त |
📚 मानक परिभाषा: वर्ष 2003 में पारित एक अधिनियम, जो राजकोषीय घाटे को सीमित कर, सरकारी ऋण को नियंत्रित कर तथा समष्टि-आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) को बढ़ावा देकर भारत में राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी परिवार पर "इतना ही उधार लेने" की सीमा (Credit Limit) तय होती है ताकि वह कर्ज़ में न डूब जाए, वैसे ही FRBM अधिनियम सरकार पर घाटे व ऋण की एक तयशुदा सीमा लगाता है। 💡 उदाहरण: FRBM अधिनियम के तहत ही सरकार को हर बजट के साथ "मध्यम अवधि राजकोषीय नीति विवरण" (Medium-term Fiscal Policy Statement) संसद में पेश करना अनिवार्य है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
| संकेतक (Indicator) | FRBM लक्ष्य | छूट प्रावधान (Relaxation Clause) |
|---|---|---|
| राजकोषीय घाटा (राज्यों हेतु) | GSDP का 3% | राष्ट्रीय आपदा/आर्थिक संकट में 0.5% तक अतिरिक्त छूट |
| ऋण-GSDP अनुपात (राज्यों हेतु) | GSDP का 25% | आर्थिक व्यवधान में छूट, क्रमिक कमी की योजना सहित |
| राजस्व घाटा | FY20 तक शून्य | अप्रत्याशित घटनाओं से राजकोषीय दबाव होने पर लचीलापन |
एस्केप क्लॉज़ (Escape Clause): राष्ट्रीय आपदा या आर्थिक संकट जैसी आपात स्थितियों में राजकोषीय लक्ष्यों से अस्थायी विचलन की अनुमति देने वाला प्रावधान — कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को राजकोषीय घाटे की सीमा से अधिक उधार लेने की छूट दी गई थी।
📚 मानक परिभाषा: सरकार द्वारा अपने व्यय के वित्तपोषण एवं राजकोषीय घाटे के प्रबंधन हेतु लिया गया उधार — घरेलू वित्तीय बचत का एक हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों, लघु बचत योजनाओं व भविष्य निधि जैसे साधनों के माध्यम से आंतरिक ऋण में परिवर्तित होता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई व्यक्ति घर बनाने के लिए बैंक से होम लोन लेता है और बाद में किश्तों में चुकाता है, वैसे ही सरकार भी सड़क-रेल जैसी बड़ी परियोजनाओं व घाटा पूरा करने के लिए बॉन्ड/प्रतिभूतियाँ जारी कर उधार लेती है। 💡 उदाहरण: जब सरकार "सरकारी प्रतिभूति" (G-Sec) जारी करती है और बैंक/LIC उसे खरीदते हैं, तो यह जनता की बचत ही सरकार तक उधार के रूप में पहुँचती है।
1. बाह्य ऋण (External Debt) — जून 2025 के अंत में USD 747.2 अरब; बाह्य ऋण-GDP अनुपात जून 2025 में घटकर 18.9% (मार्च 2025 में 19.1% से)। 2. सामान्य सरकारी ऋण-GDP अनुपात (General Government Debt to GDP) — RBI के अनुमान अनुसार FY24 के 82.5% से घटकर FY31 तक 73.4% होने की संभावना। 3. केंद्र सरकार ऋण-GDP अनुपात — कुल 82.5% में से केंद्र का हिस्सा 56.8%, शेष राज्यों का संयुक्त हिस्सा। 4. वैश्विक तुलना — भारत का ऋण-GDP अनुपात लगभग 80% है, जो इसे विश्व में 31वें स्थान पर रखता है; चीन का अनुपात 96% है (21वाँ स्थान)। 5. केंद्र सरकार का लक्ष्य — 31 मार्च 2031 तक ऋण-GDP अनुपात को 50±1% तक लाना।
सार्वजनिक ऋण प्रबंधन प्रकोष्ठ (Public Debt Management Cell — PDMC): 2016 में एक स्वतंत्र सार्वजनिक ऋण प्रबंधन एजेंसी (PDMA) बनाने की दिशा में स्थापित प्रकोष्ठ, जिसका उद्देश्य सरकारी ऋण प्रबंधन को RBI से एक स्वायत्त एजेंसी को स्थानांतरित करना है। यह आर्थिक कार्य विभाग के संयुक्त सचिव (बजट) के नेतृत्व में कार्य करता है तथा ऋण रणनीति बनाने, नकदी शेष प्रबंधन एवं बाज़ार तरलता सुनिश्चित करने का कार्य करता है।
📚 मानक परिभाषा: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में गठित एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय, जो केंद्र व राज्यों के बीच करों के बँटवारे (Tax Devolution) एवं अनुदान (Grants-in-Aid) की सिफारिश करता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी संयुक्त परिवार में बड़ा भाई (केंद्र) कमाई का एक बड़ा हिस्सा जमा करता है, फिर एक निष्पक्ष पंच (वित्त आयोग) तय करता है कि उस कमाई में से छोटे भाइयों (राज्यों) को कितना-कितना हिस्सा मिलेगा। 💡 उदाहरण: जब केंद्र सरकार GST, आयकर जैसे करों से पैसा जुटाती है, तो उसका 41% हिस्सा वित्त आयोग की सिफारिश पर राज्यों में बाँटा जाता है — यही "कर हस्तांतरण" (Tax Devolution) है।
| क्षैतिज बँटवारे का मापदंड (Horizontal Distribution) | 15वाँ वित्त आयोग भारांश (%) |
|---|---|
| आय दूरी (Income Distance) | 45 |
| जनसंख्या (2011 जनगणना) | 15 |
| जनांकिकीय निष्पादन (Demographic Performance) | 12.5 |
| राज्य क्षेत्रफल (Area) | 15 |
| वन एवं पारिस्थितिकी (Forest & Ecology) | 10 |
| कर एवं राजकोषीय प्रयास (Tax & Fiscal Effort) | 2.5 |
1. अध्यक्ष (Chairman) — डॉ. अरविंद पानगढ़िया (Arvind Panagariya)। 2. अवधि (Award Period) — 5 वर्ष, 2026-27 से 2030-31 तक। 3. रिपोर्ट प्रस्तुति — 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026-27 के साथ संसद में प्रस्तुत। 4. राज्यों का हिस्सा (Vertical Devolution) — विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41% पर यथावत रखा गया (15वें वित्त आयोग के समान)। 5. नया दृष्टिकोण — "अधिकार-आधारित" (Entitlement-Based) से "अनुपालन-आधारित" (Compliance-Driven) राजकोषीय संघवाद की ओर बड़ा बदलाव।
| क्षैतिज बँटवारे का मापदंड | 16वाँ वित्त आयोग भारांश (%) | 15वें वित्त आयोग से अंतर |
|---|---|---|
| आय दूरी (Income Distance) | 42.5 | 45% से घटा |
| जनसंख्या (2011 जनगणना) | 17.5 | 15% से बढ़ा |
| जनांकिकीय निष्पादन | 10 | 12.5% से घटा |
| राज्य क्षेत्रफल (Area) | 10 | 15% से घटा — बड़े राज्यों को नुकसान |
| वन एवं पारिस्थितिकी | 10 | अपरिवर्तित |
| GDP में योगदान (नया मापदंड) | 10 | नया जोड़ा गया मापदंड |
| कर एवं राजकोषीय प्रयास | हटाया गया | 15वें आयोग में 2.5% था, अब समाप्त |
16वें वित्त आयोग का राजस्थान पर प्रभाव: क्षेत्रफल भारांश (Area Weightage) 15% से घटाकर 10% किए जाने से राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश जैसे बड़े क्षेत्रफल वाले राज्यों को नुकसान हुआ है — राजस्थान के विभाज्य पूल में हिस्से में लगभग 0.10% की कमी दर्ज की गई। हालाँकि "GDP योगदान" जैसे नए प्रदर्शन-आधारित मापदंड से आर्थिक रूप से तेज़ी से बढ़ते राज्यों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है।
1. प्रस्तुति तिथि — 1 फरवरी 2026, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा। 2. कुल व्यय (Total Expenditure) — ₹53,47,315 करोड़ (2025-26 RE से 7.7% अधिक)। 3. कुल प्राप्तियाँ (उधार के अतिरिक्त) — ₹36,51,547 करोड़ (2025-26 RE से 7.2% अधिक)। 4. राजकोषीय घाटा — GDP का 4.3% (2025-26 RE में 4.4% से कम)। 5. राजस्व घाटा — GDP का 1.5%। 6. ऋण-GDP अनुपात — 55.6% (BE 2026-27), 2025-26 RE में 56.1%। 7. वास्तविक GDP संवृद्धि दर 2025-26 का अनुमान — लगभग 7.4%; 2026-27 हेतु सांकेतिक (Nominal) संवृद्धि लगभग 10% अनुमानित। 8. आयकर स्लैब — नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) की मूल छूट सीमा ₹4 लाख यथावत; ₹4-8 लाख आय पर 5%, ₹8-12 लाख पर 10% — 2026-27 में स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं।
| रुपया कहाँ से आता है | हिस्सा (%) | रुपया कहाँ जाता है |
|---|---|---|
| उधार व अन्य देयताएँ | 24% | राज्यों का करों में हिस्सा — 22% |
| आयकर | 22% | ब्याज भुगतान — 20% |
| GST एवं अन्य कर | 18% | केंद्रीय क्षेत्र योजनाएँ — 16% |
| निगम कर (Corporation Tax) | 17% | वित्त आयोग एवं अन्य हस्तांतरण — 8% |
| गैर-कर प्राप्तियाँ | 9% | केंद्र प्रायोजित योजनाएँ — 8% |
| सीमा शुल्क | 4% | रक्षा — 8% |
| गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ | 1% | प्रमुख सब्सिडी — 6%, अन्य व्यय — 4% |
सोचिए सरकार के पास ₹100 आए — इसमें से ₹24 उधार लेकर आए, ₹22 आयकर से, ₹18 GST से, ₹17 कंपनियों के टैक्स से आए। अब यही ₹100 सरकार खर्च करती है — इसमें से ₹22 राज्यों को उनके हिस्से के करों के रूप में वापस जाता है, ₹20 पुराने कर्ज़ के ब्याज में जाता है (जैसे किसी के होम-लोन की EMI), और बाकी रक्षा, सब्सिडी व योजनाओं पर खर्च होता है। इसी हिसाब-किताब को समझना ही बजट को समझना है।
1. प्रस्तुति — उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा 11 फरवरी 2026 को प्रस्तुत, थीम — "विकसित राजस्थान @2047" (Viksit Rajasthan @2047)। 2. कुल बजट आकार (Total Outlay) — लगभग ₹6.11 लाख करोड़। 3. राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts) 2026-27 — अनुमानतः ₹3,25,740 करोड़, 2025-26 के संशोधित अनुमान से 14% अधिक। 4. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) — GSDP का 3.7% (₹79,493 करोड़) लक्षित, जो 2025-26 RE के 3.9% से कम है। 5. राजस्व घाटा (Revenue Deficit) — GSDP का 1.1% (₹24,314 करोड़) अनुमानित, 2025-26 RE के 1.8% से बेहतर। 6. बकाया देयताएँ (Outstanding Liabilities) — 2026-27 के अंत में GSDP का 36.8% अनुमानित, जो 2025-26 RE के 38% से कम है।
राजस्थान एवं 16वाँ वित्त आयोग: बड़े क्षेत्रफल के बावजूद, 16वें वित्त आयोग द्वारा क्षेत्रफल भारांश (Area Weightage) को 15% से घटाकर 10% किए जाने से राजस्थान के विभाज्य पूल में हिस्से में लगभग 0.10% की कमी आई है — यह राजस्थान के लिए RAS परीक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण समसामयिक तथ्य है, क्योंकि यह राज्य की भावी योजनाओं व अनुदानों को सीधे प्रभावित करता है।
राजस्थान सरकार का बजट भी केंद्र सरकार की तरह ही काम करता है — पहले यह तय होता है कि राज्य को GST, वित्त आयोग हस्तांतरण, अपने राज्य के करों (जैसे स्टाम्प ड्यूटी, पेट्रोल-डीज़ल पर VAT) से कितनी आय होगी, फिर उसके अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य (चिरंजीवी योजना), सड़क व सिंचाई पर खर्च तय होता है। जब खर्च आय से ज़्यादा होता है (राजकोषीय घाटा), तो राज्य सरकार बाज़ार से "राज्य विकास ऋण" (State Development Loans — SDL) के ज़रिए उधार लेती है — ठीक वैसे ही जैसे केंद्र सरकार सरकारी प्रतिभूतियाँ जारी करती है।
1. केंद्रीय बजट अनुच्छेद 112 के तहत अनिवार्य वार्षिक वित्तीय विवरण है — वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है। 📌 Pre 2. बजट तैयार करने की ज़िम्मेदारी वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) की होती है। 📌 Pre 3. राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण पूँजीगत प्राप्तियाँ); यह कुल उधार के बराबर होता है। 📝 5M 4. प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान — पिछले ऋण का ब्याज हटाकर वर्तमान उधार आवश्यकता दिखाता है। 📝 5M 5. FRBM अधिनियम 2003 में पारित हुआ, जो राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करता है। 📌 Pre 6. FRBM के तहत राज्यों हेतु राजकोषीय घाटे की सामान्य सीमा GSDP का 3% तथा ऋण-GSDP अनुपात की सीमा 25% है। 📝 10M 7. 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पानगढ़िया हैं, अवधि 2026-31, रिपोर्ट 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत। 📌 Pre 8. 16वें वित्त आयोग ने राज्यों का हिस्सा 41% पर यथावत रखा है (15वें वित्त आयोग के समान)। 📌 Pre 9. 16वें वित्त आयोग में "GDP में योगदान" एक नया मापदंड (10% भारांश) जोड़ा गया है, जबकि "कर एवं राजकोषीय प्रयास" मापदंड हटा दिया गया। 📝 10M 10. क्षेत्रफल भारांश 15% से घटाकर 10% किए जाने से राजस्थान जैसे बड़े राज्यों को नुकसान हुआ (लगभग 0.10% हिस्सा कम)। 📝 10M 11. GST 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ — "एक देश, एक कर" की अवधारणा पर आधारित गंतव्य-आधारित अप्रत्यक्ष कर है। 📌 Pre 12. GST 2.0 सुधार 22 सितंबर 2025 से लागू — नए स्लैब 5%, 18% व 40% (विलासिता/अहितकर वस्तुओं हेतु)। 📌 Pre 13. GST परिषद की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं; यह एक संवैधानिक निकाय है (अनुच्छेद 279A)। 📌 Pre 14. प्रत्यक्ष कर-GDP अनुपात FY24 में 24 वर्षों के उच्चतम स्तर 6.64% पर पहुँचा। 📌 Pre 15. केंद्रीय बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.3% तथा राजस्व घाटा 1.5% लक्षित है। 📝 5M 16. ऋण-GDP अनुपात को 2030-31 तक 50±1% तक लाने का लक्ष्य केंद्र सरकार ने रखा है। 📌 Pre 17. भारत का बाह्य ऋण जून 2025 के अंत में USD 747.2 अरब था; बाह्य ऋण-GDP अनुपात 18.9%। 📌 Pre 18. डिसइन्वेस्टमेंट (विनिवेश) से जुड़े मामले DIPAM (निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग) देखता है। 📌 Pre 19. वित्त आयोग का गठन अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में किया जाता है। 📌 Pre 20. राजस्थान बजट 2026-27 में राजकोषीय घाटा GSDP का 3.7% (₹79,493 करोड़) लक्षित है, थीम — "विकसित राजस्थान @2047"। 📝 10M 21. नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) की मूल छूट सीमा ₹4 लाख है तथा यह डिफ़ॉल्ट व्यवस्था है (Section 115BAC)। 📌 Pre 22. FRBM अधिनियम में "एस्केप क्लॉज़" राष्ट्रीय आपदा/आर्थिक संकट में राजकोषीय लक्ष्यों से अस्थायी विचलन की अनुमति देता है। 📝 5M
Q1. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) एवं राजस्व घाटा (Revenue Deficit) में अंतर स्पष्ट कीजिए तथा इनके आर्थिक प्रभावों की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q2. FRBM अधिनियम, 2003 के उद्देश्यों एवं इसके तहत निर्धारित राजकोषीय लक्ष्यों का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q3. प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर में क्या अंतर है? भारत में GST प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q4. GST 2.0 सुधार (2025) की मुख्य विशेषताएँ बताइए। (5 अंक) Q5. 16वें वित्त आयोग की प्रमुख सिफारिशों का वर्णन कीजिए तथा इसका राजस्थान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (10 अंक) Q6. सार्वजनिक ऋण (Public Debt) क्या है? भारत में आंतरिक व बाह्य ऋण के प्रमुख घटक बताइए। (5 अंक) Q7. विस्तारवादी एवं संकुचनकारी राजकोषीय नीति में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q8. केंद्रीय बजट 2026-27 की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q9. वित्त आयोग की संवैधानिक भूमिका एवं कर हस्तांतरण की प्रक्रिया समझाइए। (5 अंक) Q10. राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा एवं प्राथमिक घाटा — तीनों में संबंध स्पष्ट करते हुए सूत्र लिखिए। (Pre MCQ) Q11. GST परिषद (GST Council) की संरचना एवं कार्यों के संबंध में सही कथन चुनिए। (Pre MCQ)
| वर्ष | नीति/घटना/योजना | महत्व |
|---|---|---|
| 1963 | केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम — CBDT का गठन | प्रत्यक्ष कर प्रशासन की नींव |
| 1987 | न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) की शुरुआत | "जीरो टैक्स कंपनियों" पर अंकुश |
| 1991 | राजा जे. चेलैया समिति — VAT की सिफारिश | अप्रत्यक्ष कर सुधार की शुरुआत |
| 2000 | FRBM अधिनियम का प्रारंभिक प्रस्ताव | राजकोषीय अनुशासन की माँग |
| 2002 | केलकर समिति — कर सुधार की सिफारिश | प्रत्यक्ष व GST सुधार की नींव |
| 2003 | FRBM अधिनियम पारित | राजकोषीय घाटा व ऋण नियंत्रण हेतु कानूनी ढाँचा |
| 2010 | वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC) गठित | वित्तीय स्थिरता हेतु समन्वय निकाय |
| 2016 | संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम पारित | GST की संवैधानिक नींव |
| 2016 | सार्वजनिक ऋण प्रबंधन प्रकोष्ठ (PDMC) स्थापित | स्वतंत्र ऋण प्रबंधन एजेंसी की दिशा |
| 2017 | 1 जुलाई — GST लागू | "एक देश, एक कर" — अप्रत्यक्ष कर एकीकरण |
| 2020-21 | लाभांश वितरण कर (DDT) समाप्त | लाभांश अब शेयरधारकों के हाथ में कर योग्य |
| 2021-26 | 15वाँ वित्त आयोग कार्यकाल — 41% हस्तांतरण | कर हस्तांतरण की आधुनिक व्यवस्था |
| 2022-23 | प्रभावी पूँजीगत व्यय की नई अवधारणा शुरू | राज्यों को अनुदान सहित वास्तविक निवेश मापन |
| सितंबर 2025 | GST 2.0 सुधार — नए स्लैब 5%/18%/40% लागू | कर सरलीकरण व उपभोग वृद्धि |
| 1 फरवरी 2026 | 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट व बजट 2026-27 प्रस्तुत | राजकोषीय संघवाद व नई कर व्यवस्था |
| 11 फरवरी 2026 | राजस्थान बजट 2026-27 प्रस्तुत — "विकसित राजस्थान @2047" | राज्य स्तरीय राजकोषीय समेकन |