🌐 अध्याय 5/9 — अर्थव्यवस्था

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं भुगतान संतुलन

International Trade, BoP & FDI | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. खुली बनाम बंद अर्थव्यवस्था (Open vs Closed Economy)
  2. भुगतान संतुलन (Balance of Payments — BoP)
  3. चालू खाता घाटा (Current Account Deficit — CAD)
  4. भारत का व्यापार प्रदर्शन — निर्यात, आयात एवं व्यापार घाटा
  5. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) एवं विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)
  6. विदेशी निवेश के साधन — ADR, GDR, मसाला बॉन्ड, P-Notes, ECB
  7. विदेशी सहायता (Foreign Aid) — द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय
  8. विनिमय दर (Exchange Rate) — प्रकार एवं निर्धारक तत्व
  9. NEER, REER एवं मुद्रा विनिमय (Currency/Forex/Interest Rate Swap)
  10. विदेशी मुद्रा भंडार एवं बाह्य ऋण (Forex Reserves & External Debt)
  11. मुद्रा परिवर्तनीयता (Currency Convertibility)
  12. व्यापार समझौते (Trade Agreements) — PTA, FTA, CECA, CEPA
  13. निर्यात प्रोत्साहन नीतियाँ (Export Promotion Policies)
  14. राजस्थान कनेक्शन (Rajasthan Connection) — निर्यात एवं व्यापार

सोचिए — आपके घर की रसोई में जो खाना पकाने की गैस (LPG) आती है उसका कच्चा तेल शायद सऊदी अरब से आया हो, आपका मोबाइल फोन ताइवान की चिप और चीन के पुर्जों से बना हो, लेकिन उसी मोबाइल में जो सॉफ्टवेयर बेंगलुरु की किसी कंपनी ने अमेरिका के लिए बनाया, वह भारत की कमाई का ज़रिया बना। यह पूरा लेन-देन — जो एक देश से दूसरे देश तक सामान, सेवाएँ व पैसा आता-जाता है — इसी को "अंतर्राष्ट्रीय व्यापार" (International Trade) और इसके पूरे हिसाब-किताब को "भुगतान संतुलन" (Balance of Payments) कहते हैं। 1991 में जब भारत के पास सिर्फ दो हफ्ते के आयात लायक विदेशी मुद्रा बची थी, तब यही भुगतान संतुलन का संकट (BoP Crisis) था। आज 2026 में भारत के पास $700 अरब से ज़्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है — यह कहानी है कि कैसे भारत ने कमज़ोरी को ताकत में बदला।

1खुली बनाम बंद अर्थव्यवस्था (Open vs Closed Economy)

📖 परिभाषा (Definition): खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy)

📚 मानक परिभाषा: वह अर्थव्यवस्था जो वस्तुओं, सेवाओं व वित्तीय परिसंपत्तियों (Financial Assets) के व्यापार के ज़रिए अन्य देशों के साथ जुड़ी होती है — इसके विपरीत "बंद अर्थव्यवस्था" (Closed Economy) का शेष विश्व से कोई संबंध नहीं होता। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई परिवार अपने पड़ोसियों से सामान उधार लेता-देता है और मिल-जुलकर रहता है (खुली अर्थव्यवस्था), जबकि कोई परिवार अपने घर की चारदीवारी में ही सब कुछ खुद बनाता-खाता हो, बाहर से कुछ न ले (बंद अर्थव्यवस्था)। 💡 उदाहरण: सिंगापुर एक खुली अर्थव्यवस्था का उदाहरण है — वहाँ व्यापार, निवेश व श्रम की पूरी आज़ादी है; जबकि उत्तर कोरिया (North Korea) एक बंद अर्थव्यवस्था का उदाहरण है, जो शेष विश्व से लगभग कटी हुई है।

2भुगतान संतुलन (Balance of Payments — BoP)

📖 परिभाषा (Definition): भुगतान संतुलन (Balance of Payments — BoP)

📚 मानक परिभाषा: किसी देश के निवासियों तथा शेष विश्व के निवासियों के बीच एक वित्तीय वर्ष में होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित लेखा-जोखा (Systematic Record), जो किसी देश की वित्तीय सेहत व बाह्य आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे आपके घर का "आमदनी-खर्च का हिसाब" (कितना पैसा बाहर से आया, कितना बाहर गया) रखा जाता है, वैसे ही पूरे देश का हिसाब — कि विदेश से कितना पैसा आया और कितना गया — BoP कहलाता है। 💡 उदाहरण: जब भारत अमेरिका को सॉफ्टवेयर बेचता है तो पैसा भारत में आता है (BoP में जमा या "क्रेडिट"), और जब भारत सऊदी अरब से तेल खरीदता है तो पैसा बाहर जाता है (BoP में "डेबिट")।

BoP की संरचना — चालू खाता एवं पूँजी खाता

💰 चालू खाता (Current Account)
  • दृश्य व्यापार (Visible Trade) — वस्तुओं का निर्यात-आयात
  • अदृश्य व्यापार (Invisible Trade) — सेवाएँ, कारक आय
  • हस्तांतरण (Transfers) — उपहार, अनुदान, प्रेषण (Remittances)
🏦 पूँजी खाता (Capital Account)
  • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) एवं पोर्टफोलियो निवेश (FPI)
  • बाह्य वाणिज्यिक उधार (External Commercial Borrowings — ECB)
  • बैंकिंग पूँजी — NRI जमा (NRI Deposits)

वित्तीय खाता (Financial Account): नए लेखा मानकों के तहत एक तीसरा घटक — "वित्तीय खाता" (Financial Account) — भी पेश किया गया है, जो बॉन्ड व इक्विटी शेयर जैसी वित्तीय परिसंपत्तियों को ट्रैक करता है। भारत में इसे पूँजी खाते (Capital Account) के ही एक भाग के रूप में शामिल किया जाता है, अलग से नहीं दिखाया जाता।

चालू खाता — विस्तृत विवरण

घटकविवरणउदाहरण
दृश्य व्यापार (Visible Trade)वस्तुओं (Goods) का निर्यात व आयातइस्पात का निर्यात, कच्चे तेल का आयात
अदृश्य व्यापार — सेवाएँIT, पर्यटन, परिवहन जैसी सेवाओं का व्यापारसॉफ्टवेयर निर्यात, विदेशी पर्यटकों से आय
अदृश्य व्यापार — कारक आय (Factor Income)मज़दूरी, किराया, ब्याज, लाभांश से होने वाली कमाईविदेशी बॉन्ड में निवेश पर मिलने वाला ब्याज
हस्तांतरण (Transfers)एकतरफ़ा प्रवाह — कोई बदले में भुगतान नहींNRI प्रेषण (Remittances), विदेशी अनुदान (Grants)

📊 भारत का व्यापार — नवीनतम आँकड़े (FY 2025-26) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. वैश्विक वस्तु निर्यात (Merchandise Exports) में भारत की हिस्सेदारी लगभग 1.8% तथा वैश्विक सेवा निर्यात (Services Exports) में लगभग 4.3%। 2. भारत के शीर्ष निर्यात गंतव्य — अमेरिका (USA) > संयुक्त अरब अमीरात (UAE) > नीदरलैंड्स > ब्रिटेन (UK) > चीन। 3. भारत के शीर्ष आयात — कच्चा तेल, सोना व इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ; शीर्ष आयात स्रोत — चीन, अमेरिका, UAE, सऊदी अरब। 4. भारत का कुल प्रेषण (Remittances) 2010-11 के $55.6 अरब से दोगुना से अधिक बढ़कर 2023-24 में $118.7 अरब हो गया — भारत विश्व में प्रेषण पाने वाला सबसे बड़ा देश है। 5. प्रेषण के शीर्ष स्रोत (FY24) — अमेरिका (27.7%), UAE (19.2%), UK (10.8%), सऊदी अरब (6.7%), सिंगापुर (6.6%)।

3चालू खाता घाटा (Current Account Deficit — CAD)

📖 परिभाषा (Definition): चालू खाता घाटा (Current Account Deficit — CAD)

📚 मानक परिभाषा: वह स्थिति जब किसी देश का आयात, निर्यात से अधिक हो जाता है। सूत्र: CAD = व्यापार अंतर (निर्यात-आयात) + शुद्ध वर्तमान हस्तांतरण + शुद्ध कारक आय। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी परिवार का महीने का खर्च उसकी कमाई से ज़्यादा हो जाए, तो उसे बाहर से उधार लेना पड़ता है — वैसे ही जब देश का आयात निर्यात से ज़्यादा होता है, तो उसे भी विदेश से पैसा जुटाना (उधार/निवेश) पड़ता है। 💡 उदाहरण: 2025-26 में भारत का सोने का आयात $58.01 अरब (2024-25) से बढ़कर $71.98 अरब हो गया — जबकि मात्रा में आयात घटा, यानी सोना महँगा होने से आयात बिल बढ़ा और इसने व्यापार घाटे को चौड़ा किया।

📊 चालू खाता घाटा (CAD) — नवीनतम आँकड़े — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए CAD $25.2 अरब रहा (GDP का 0.6%) — पिछले वर्ष (2024-25) के $22.9 अरब के लगभग बराबर अनुपात में। 2. तिमाही-वार रुझान — Q2 FY26 में CAD घटकर $12.3 अरब (GDP का 1.3%) रह गया, जो Q2 FY25 के $20.8 अरब (2.2%) से बेहतर था; Q3 FY26 में यह $15.5 अरब (1.5%) रहा; लेकिन Q4 FY26 (जनवरी-मार्च 2026) में चालू खाता पलटकर $7.1 अरब (GDP का 0.7%) के अधिशेष (Surplus) में बदल गया। 3. व्यापारिक घाटा (Merchandise Trade Deficit) FY26 में $333.19 अरब तक पहुँचा (FY25 के $283.50 अरब से अधिक) — मुख्यतः सोने के महँगे आयात के कारण। 4. सेवा निर्यात (Services Exports) FY26 में $418.31 अरब (7.94% वृद्धि) तक पहुँचा, जिससे सेवा व्यापार अधिशेष (Services Trade Surplus) $213.89 अरब हो गया — यही अधिशेष व्यापारिक घाटे की भरपाई करता है। 5. Q4 FY26 में शुद्ध प्रेषण (Net Remittances) $41.3 अरब तक पहुँचा (पिछले वर्ष के $31.5 अरब से अधिक) — यह भी CAD को नियंत्रित रखने में सहायक रहा।

CAD को प्रभावित करने वाले कारक

कारकप्रभाव
विनिमय दर में उतार-चढ़ावकमज़ोर रुपया आयात महँगा व निर्यात सस्ता बनाता है
घरेलू खपत व आयात-निर्भरताअधिक घरेलू खपत व तेल/सोने पर निर्भरता CAD बढ़ाती है
पूँजी प्रवाह व बचत दरकम घरेलू बचत होने पर विदेशी पूँजी पर निर्भरता बढ़ती है
सापेक्ष मुद्रास्फीति दरेंघरेलू मुद्रास्फीति अधिक होने पर निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता घटती है
नीतिगत हस्तक्षेपनिर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ (जैसे PLI) CAD घटाने में सहायक

🏛️ प्रमुख सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ

4भारत का व्यापार प्रदर्शन — निर्यात, आयात एवं व्यापार घाटा

📊 भारत का समग्र व्यापार प्रदर्शन (FY 2025-26) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. वस्तु निर्यात (Merchandise Exports): $441.78 अरब (FY25 के $437.70 अरब से मामूली वृद्धि)। 2. वस्तु आयात (Merchandise Imports): $774.98 अरब (FY25 के $721.20 अरब से उल्लेखनीय वृद्धि)। 3. वस्तु व्यापार घाटा (Merchandise Trade Deficit): $333.19 अरब — पिछले वर्ष के $283.50 अरब से काफी अधिक चौड़ा। 4. कुल व्यापार (वस्तु+सेवा) निर्यात: $860.09 अरब (4.22% वृद्धि); कुल आयात: $979.40 अरब (6.47% वृद्धि)। 5. कुल व्यापार घाटा (वस्तु+सेवा): $119.30 अरब (FY25 के $94.66 अरब से अधिक)। 6. निष्कर्ष: सेवा क्षेत्र का मज़बूत अधिशेष (Surplus) वस्तु व्यापार घाटे को काफी हद तक संतुलित करता है — यह भारत की "सेवा-प्रधान" (Services-Led) अर्थव्यवस्था की विशेषता दर्शाता है (अध्याय 4 से जोड़कर देखें)।

वस्तु निर्यात की संरचना (Composition of Merchandise Exports)

श्रेणीFY23 हिस्साFY24 हिस्सा
पूँजीगत वस्तुएँ (Capital Goods)16.3%18.9%
उपभोक्ता वस्तुएँ (Consumer Goods)48.9%47.5%
मध्यवर्ती वस्तुएँ (Intermediate Goods)30.2%28.4%
कच्चा माल (Raw Materials)4.7%5.1%
💡 व्यापार घाटे को समझें

सोचिए एक परिवार हर महीने 1 लाख रुपये कमाता है लेकिन खर्च करता है 1.2 लाख रुपये — बाकी 20 हज़ार रुपये उसे उधार लेने पड़ते हैं। ठीक ऐसे ही भारत जितना निर्यात (कमाई) करता है, आयात (खर्च) उससे ज़्यादा हो तो "व्यापार घाटा" बनता है — इसे पाटने के लिए विदेशी निवेश (FDI/FPI) या उधार (ECB) का सहारा लेना पड़ता है।

🎯 भुगतान संतुलन एवं व्यापार घाटा — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द | Pre: conceptual clarity
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5विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) एवं विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)

📖 परिभाषा (Definition): विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (Foreign Direct Investment — FDI)

📚 मानक परिभाषा: विदेशी कंपनी या व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे देश में व्यवसाय में किया गया दीर्घकालिक निवेश, जिसमें प्रबंधन नियंत्रण (Management Control) व स्वामित्व शामिल होता है। RBI/SEBI के अनुसार 10% तक के निवेश को FPI तथा उससे अधिक को FDI माना जाता है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई विदेशी कंपनी भारत में खुद अपनी फैक्ट्री लगाए या किसी भारतीय कंपनी को खरीदकर उसका प्रबंधन भी संभाले — यह "पक्का, लंबे समय का रिश्ता" है, सिर्फ पैसा लगाना नहीं। 💡 उदाहरण: जब Samsung भारत में अपनी खुद की मोबाइल फैक्ट्री लगाती है और उसे खुद चलाती है — यह FDI है। लेकिन जब कोई विदेशी निवेशक सिर्फ TCS के शेयर खरीदता है (कंपनी चलाने में कोई भूमिका नहीं) — यह FPI है।

🏭 FDI (प्रत्यक्ष निवेश)
  • दीर्घकालिक (Long-Term) निवेश
  • प्रबंधन नियंत्रण व स्वामित्व शामिल
  • आसानी से वापस नहीं लिया जा सकता — स्थिर (Stable)
  • उदाहरण: विदेश में फैक्ट्री लगाना या कंपनी खरीदना
📈 FPI (पोर्टफोलियो निवेश)
  • अल्पकालिक (Short-Term) निवेश
  • सिर्फ स्टॉक/बॉन्ड खरीदना, प्रबंधन में भूमिका नहीं
  • तेज़ी से बाहर निकल सकता है — अस्थिर (Volatile/"Hot Money")
  • उदाहरण: शेयर बाज़ार या सरकारी बॉन्ड में निवेश

📊 FDI — नवीनतम आँकड़े (FY 2025-26) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. सकल FDI प्रवाह (Gross FDI Inflows) FY 2025-26 में $58.85 अरब — पिछले वर्ष से 18% की वृद्धि। 2. अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान सकल FDI प्रवाह $64.7 अरब रहा (आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार)। 3. शुद्ध FDI प्रवाह (Net FDI) H1 FY26 में बढ़कर $7.7 अरब (H1 FY25 के $3.4 अरब से अधिक) — हालाँकि हाल के वर्षों में शुद्ध FDI में गिरावट का एक कारण विकसित देशों में ऊँची ब्याज दरें व भारत के तेज़ शेयर बाज़ार से आकर्षक निकासी (Exit) भी है।

FDI — शीर्ष स्रोत, राज्य एवं क्षेत्र (FY 2025-26)

श्रेणीशीर्ष स्थानआँकड़ा
शीर्ष स्रोत देशसिंगापुर (1st), अमेरिका (2nd)सिंगापुर $19.8 अरब; अमेरिका $11.17 अरब (लगभग दोगुना)
शीर्ष राज्यमहाराष्ट्र (1st), कर्नाटकमहाराष्ट्र $18.4 अरब; कर्नाटक $12.9 अरब (लगभग दोगुना)
शीर्ष क्षेत्रकंप्यूटर सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर$13.9 अरब (पिछले वर्ष के $7.8 अरब से तीव्र वृद्धि)

📊 FPI — नवीनतम आँकड़े (FY 2025-26) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. FPI में H1 FY26 में $4.1 अरब का शुद्ध बहिर्वाह (Net Outflow) दर्ज हुआ — जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में $20.8 अरब का शुद्ध अंतर्वाह (Net Inflow) था। 2. इसके चलते H1 FY26 में विदेशी मुद्रा भंडार में $6.4 अरब की कमी आई (BoP आधार पर) — जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में $23.8 अरब की वृद्धि हुई थी। 3. FPI का उतार-चढ़ाव अक्सर वैश्विक ब्याज दरों, भू-राजनैतिक तनाव व निवेशक धारणा (Investor Sentiment) से प्रभावित होता है — इसीलिए इसे "हॉट मनी" (Hot Money) भी कहा जाता है।

6विदेशी निवेश के साधन — ADR, GDR, मसाला बॉन्ड, P-Notes, ECB

साधनविवरणउदाहरण
ADR (American Depository Receipt)अमेरिकी बैंकों द्वारा जारी प्रमाणपत्र, जो विदेशी कंपनी के शेयरों का प्रतिनिधित्व करते हैं; NYSE/NASDAQ पर कारोबारInfosys के ADR न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) पर सूचीबद्ध
GDR (Global Depository Receipt)अंतर्राष्ट्रीय बैंकों द्वारा जारी प्रमाणपत्र; अमेरिका के बाहर के स्टॉक एक्सचेंजों (जैसे लंदन) पर कारोबाररिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने यूरोपीय पूँजी बाज़ार तक पहुँचने हेतु GDR जारी किए
P-Notes (Participatory Notes)पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा जारी; विदेशी निवेशक बिना सीधे SEBI में पंजीकरण के भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते हैंमनी लॉन्ड्रिंग व कर चोरी की आशंका के चलते SEBI की कड़ी निगरानी में
मसाला बॉन्ड (Masala Bonds)भारत के बाहर जारी रुपये-मूल्यवर्गित बॉन्ड — मुद्रा जोखिम भारतीय कंपनी की बजाय निवेशक उठाता हैHDFC व NTPC ने वैश्विक बाज़ारों में मसाला बॉन्ड सफलतापूर्वक जारी किए
ECB (External Commercial Borrowings)भारतीय संस्थाओं द्वारा अनिवासी उधारदाताओं से लिया गया ऋण; RBI द्वारा विनियमितबुनियादी ढाँचा परियोजनाओं व विदेशी अधिग्रहण हेतु उपयोग

भारत की मज़बूती: भारत की ECB पर अल्पकालिक निर्भरता कम होने के कारण उसे वैश्विक वित्तीय संकटों (जैसे 2008) से एक हद तक सुरक्षा मिलती है — यह भारत की बाह्य क्षेत्र (External Sector) की एक महत्वपूर्ण मज़बूती मानी जाती है।

7विदेशी सहायता (Foreign Aid) — द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय

📖 परिभाषा (Definition): विदेशी सहायता (Foreign Aid / ODA)

📚 मानक परिभाषा: एक देश या अंतर्राष्ट्रीय संस्था द्वारा दूसरे देश को दिया गया अनुदान (Grant), रियायती ऋण (Concessional Loan) या तकनीकी सहायता — आधिकारिक विकास सहायता (Official Development Assistance — ODA) इसका सबसे सामान्य रूप है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई संपन्न रिश्तेदार किसी ज़रूरतमंद परिवार को बिना ज़्यादा शर्तों के आर्थिक मदद दे, या बहुत कम ब्याज पर उधार दे — देशों के बीच भी ऐसी ही मदद होती है, ताकि गरीब/विकासशील देश आगे बढ़ सकें। 💡 उदाहरण: भूकंप या बाढ़ जैसी आपदा में जापान या अमेरिका जैसे देश भारत को तकनीकी व वित्तीय सहायता देते हैं — जैसे जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) ने भारत की कई रेल व मेट्रो परियोजनाओं में ऋण सहायता दी है।

🤝 द्विपक्षीय सहायता (Bilateral Aid)
  • सीधे एक देश से दूसरे देश को दी गई सहायता
  • उदाहरण: जापान (JICA) की भारत को रेल/मेट्रो परियोजनाओं हेतु सहायता
  • अक्सर कूटनीतिक व सामरिक हितों से भी जुड़ी होती है
🌍 बहुपक्षीय सहायता (Multilateral Aid)
  • कई देशों/अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से दी गई सहायता
  • उदाहरण: विश्व बैंक (World Bank), IMF, एशियाई विकास बैंक (ADB)
  • अपेक्षाकृत कम राजनैतिक शर्तें, अधिक तकनीकी/आर्थिक मानदंड

विस्तृत अध्ययन आगे: विश्व बैंक (IBRD/IDA/IFC/MIGA) व IMF की विस्तृत संस्थागत संरचना, कार्य व भारत से संबंध — यह सब अध्याय 9 (विश्व अर्थव्यवस्था: WTO, World Bank, IMF) में गहराई से पढ़ेंगे। यहाँ केवल भुगतान संतुलन के संदर्भ में इनकी भूमिका बताई गई है।

8विनिमय दर (Exchange Rate) — प्रकार एवं निर्धारक तत्व

📖 परिभाषा (Definition): विनिमय दर (Exchange Rate)

📚 मानक परिभाषा: एक मुद्रा का दूसरी मुद्रा के संदर्भ में मूल्य — जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व निवेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी दुकान पर एक चीज़ का "भाव" होता है, वैसे ही एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा के मुक़ाबले "भाव" — जैसे "1 डॉलर = 94.7 रुपये" (जुलाई 2026 का अनुमानित भाव)। 💡 उदाहरण: जब आप विदेश यात्रा पर जाते हैं और अपने रुपये बदलकर डॉलर लेते हैं, तो जितने रुपये में आपको 1 डॉलर मिलता है — वही विनिमय दर है।

तंत्र (Mechanism)विवरण
निश्चित विनिमय दर (Fixed Rate)सरकार मुद्रा का मूल्य तय करती है; अवमूल्यन (Devaluation) से निर्यात को बढ़ावा मिलता है
लचीली विनिमय दर (Flexible/Floating Rate)बाज़ार की माँग-आपूर्ति से निर्धारित होती है — भारत वर्तमान में इसी व्यवस्था के करीब है
प्रबंधित प्रवाह दर (Managed Floating Rate)मूलतः बाज़ार-आधारित, परंतु केंद्रीय बैंक अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने हेतु हस्तक्षेप करता है
पेग्ड फ्लोट (Pegged Float)किसी एक मुद्रा या मुद्राओं की टोकरी से जोड़ी गई, सीमित उतार-चढ़ाव के साथ

विनिमय दर को प्रभावित करने वाले तत्व

तत्वप्रभाव
माँग एवं आपूर्तिमुद्रा की अधिक माँग से मूल्य बढ़ता (Appreciation), अधिक आपूर्ति से घटता (Depreciation) है
ब्याज दरेंऊँची ब्याज दरें विदेशी निवेश आकर्षित करती हैं, जिससे मुद्रा मज़बूत होती है
मुद्रास्फीतिकम मुद्रास्फीति मुद्रा को स्थिर रखती है; अधिक मुद्रास्फीति मुद्रा को कमज़ोर करती है

📊 रुपया-डॉलर विनिमय दर — नवीनतम स्थिति (जुलाई 2026) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. भारतीय रुपया जुलाई 2026 की शुरुआत में लगभग ₹94.7 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। 2. कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक रुपये में लगभग 7.04% का अवमूल्यन (Depreciation) हो चुका है — जबकि पूरे वर्ष 2025 में यह मात्र 4.9% तथा 2024 में 2.9% था — यानी गिरावट की रफ़्तार काफी तेज़ हुई है। 3. गिरावट के प्रमुख कारण — ईरान संघर्ष के बाद बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी शुल्क (Tariffs) से प्रभावित निर्यात, FPI का बहिर्वाह, तथा अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मज़बूती। 4. विशेषज्ञों के अनुसार यदि यही रफ़्तार जारी रही तो रुपया ₹100/डॉलर के स्तर तक भी पहुँच सकता है — निकट भविष्य के लिए अनुमानित दायरा ₹93-98/डॉलर है।

9NEER, REER एवं मुद्रा विनिमय (Currency/Forex/Interest Rate Swap)

📖 परिभाषा (Definition): NEER एवं REER

📚 मानक परिभाषा: NEER (Nominal Effective Exchange Rate) — किसी मुद्रा का अन्य मुद्राओं के व्यापार-भारित (Trade-Weighted) औसत मूल्य। REER (Real Effective Exchange Rate) — व्यापारिक साझेदार देशों के साथ मुद्रास्फीति अंतर के लिए समायोजित NEER। ✅ सरल शब्दों में: NEER बताता है कि रुपया औसतन कई देशों की मुद्राओं के मुक़ाबले कितना मज़बूत/कमज़ोर है (बिना महँगाई का असर देखे); REER उसी में महँगाई का असर जोड़कर बताता है कि भारत के निर्यात असल में कितने "सस्ते या महँगे" हैं। 💡 उदाहरण: यदि REER बढ़ता है, तो इसका मतलब है भारतीय निर्यात अपेक्षाकृत महँगे हो रहे हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता घट रही है (भले ही रुपया कमज़ोर दिख रहा हो) — इसलिए विश्लेषक असली मूल्य आँकने के लिए REER को ज़्यादा भरोसेमंद मानते हैं।

फॉरेक्स स्वैप, करेंसी स्वैप एवं इंटरेस्ट रेट स्वैप — तुलना

विशेषताकरेंसी स्वैप (Currency Swap)फॉरेक्स स्वैप (Forex Swap)इंटरेस्ट रेट स्वैप (Interest Rate Swap)
अवधिमध्यम-दीर्घकालिकअल्पकालिकमध्यम-दीर्घकालिक
मूलधन विनिमयहाँहाँनहीं
ब्याज भुगतानअलग-अलग मुद्राओं मेंएकल मुद्रा मेंएकल मुद्रा में
💡 करेंसी स्वैप — RBI व जापान का उदाहरण

RBI, जापान के केंद्रीय बैंक के साथ करेंसी स्वैप समझौता करता है — RBI जापान को ₹10,000 करोड़ देता है और बदले में ¥100 अरब लेता है (₹1 = ¥1 की दर पर)। दोनों पक्ष तय ब्याज दर पर एक-दूसरे को ब्याज देते हैं, और अवधि पूरी होने पर मूलधन उसी दर पर वापस बदल लिया जाता है। इससे भारत को जापान से आयात के लिए येन जुटाने में आसानी होती है, और विनिमय दर के उतार-चढ़ाव से भी बचाव मिलता है — जैसे दो दोस्त आपस में सामान उधार देकर बाद में वापस भी कर देते हैं, बिना बाज़ार भाव में उतार-चढ़ाव की चिंता किए।

भू-राजनैतिक हथियार के रूप में करेंसी स्वैप: हाल के वर्षों में करेंसी स्वैप सिर्फ "आपातकालीन तरलता" (Emergency Liquidity) का साधन नहीं रहे — भारत पड़ोसी देशों को रुपया-स्वैप लाइनें देकर दक्षिण एशिया में एक "रुपया क्षेत्र" (Rupee Zone) बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि क्षेत्र में चीनी युआन (Renminbi) के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सके।

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10विदेशी मुद्रा भंडार एवं बाह्य ऋण (Forex Reserves & External Debt)

📖 परिभाषा (Definition): विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves)

📚 मानक परिभाषा: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास रखी वे परिसंपत्तियाँ जो मुद्रा स्थिरता व बाह्य दायित्वों के प्रबंधन के लिए उपयोग होती हैं — इनमें विदेशी मुद्रा, सोना, SDR व IMF आरक्षित निधि शामिल हैं। ✅ सरल शब्दों में: जैसे कोई परिवार आपातकाल के लिए "बचत खाता" रखता है, वैसे ही देश भी विदेशी मुद्रा का "आपातकालीन कोष" रखता है ताकि किसी संकट में आयात व विदेशी भुगतान रुकें नहीं। 💡 उदाहरण: 1991 में भारत के पास सिर्फ 2 हफ्ते के आयात लायक भंडार था; जुलाई 2026 में यह भंडार 10-11 महीने के आयात के बराबर हो चुका है — यही फ़र्क बताता है कि भारत की आर्थिक मज़बूती कितनी बढ़ी है।

📊 विदेशी मुद्रा भंडार — नवीनतम स्थिति (जून 2026) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार जून 2026 में $700 अरब के स्तर को पार कर गया — मई 2026 के एक वर्ष के निचले स्तर $681 अरब से रिकवरी करते हुए। 2. आयात आवरण (Import Cover) — वर्तमान भंडार लगभग 10-11 महीने के आयात के बराबर है, जो सुरक्षित माने जाने वाले 3 महीने के मानक से कहीं अधिक है। 3. RBI ने रुपये को तेज़ी से गिरने से रोकने के लिए बाज़ार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया — यही हस्तक्षेप मई 2026 में भंडार में आई कमी का मुख्य कारण था। 4. भंडार के घटक — विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA — सबसे बड़ा हिस्सा, डॉलर/यूरो/येन में), स्वर्ण भंडार (Gold Reserves), विशेष आहरण अधिकार (SDR), तथा IMF में आरक्षित निधि स्थिति (Reserve Tranche Position)।

बाह्य ऋण (External Debt) — नवीनतम स्थिति

📊 भारत का बाह्य ऋण — नवीनतम आँकड़े (मार्च 2026) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. भारत का कुल बाह्य ऋण मार्च 2026 के अंत तक $762.8 अरब तक पहुँचा — मार्च 2025 से $26.3 अरब की वृद्धि। 2. बाह्य ऋण-GDP अनुपात मार्च 2025 के 19.8% से बढ़कर मार्च 2026 में 20.8% हो गया। 3. ऋण संरचना — अमेरिकी डॉलर मूल्यवर्गित ऋण सबसे बड़ा हिस्सा (55.5%), उसके बाद भारतीय रुपया (29.4%), येन (6.4%), SDR (4.3%) व यूरो (3.7%)। 4. दीर्घकालिक ऋण (Long-term Debt, 1 वर्ष से अधिक अवधि) $613.5 अरब — कुल ऋण का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक होना एक सकारात्मक संकेत माना जाता है।

🎯 विदेशी मुद्रा भंडार एवं बाह्य ऋण — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द | Pre: conceptual clarity

11मुद्रा परिवर्तनीयता (Currency Convertibility)

📖 परिभाषा (Definition): मुद्रा परिवर्तनीयता (Currency Convertibility)

📚 मानक परिभाषा: वह सीमा जिस तक किसी देश की घरेलू मुद्रा को बिना सरकारी प्रतिबंध के किसी अन्य मुद्रा या सोने में बदला जा सकता है। भारत में चालू खाता 1994 से पूर्णतः परिवर्तनीय है, जबकि पूँजी खाता आंशिक रूप से परिवर्तनीय है। ✅ सरल शब्दों में: जैसे किसी सिक्के को किसी भी दुकान पर बिना रोक-टोक भुनाया जा सके तो वह "पूर्णतः परिवर्तनीय" है; लेकिन अगर उसे भुनाने के लिए कई नियम-शर्तें माननी पड़ें तो वह "आंशिक रूप से परिवर्तनीय" है। 💡 उदाहरण: अगर आप विदेश घूमने जाते हैं तो अपने रुपये आसानी से डॉलर में बदल सकते हैं (यह चालू खाता परिवर्तनीयता का उदाहरण है) — लेकिन अगर आप किसी विदेशी कंपनी में असीमित बड़ी राशि निवेश करना चाहें, तो कुछ RBI नियमों का पालन करना पड़ता है (यह पूँजी खाता की आंशिक परिवर्तनीयता दर्शाता है)।

समितिवर्षप्रमुख सिफारिश
सुखमय चक्रवर्ती समिति1985चालू खाता परिवर्तनीयता को चरणबद्ध ढंग से लागू करने की सिफारिश
नरसिम्हम समिति (वित्तीय क्षेत्र सुधार)1991अधिक खुली विनिमय दर व्यवस्था व अंततः चालू खाता परिवर्तनीयता का सुझाव
तारापोर समिति-I19973 वर्षों में पूर्ण पूँजी खाता परिवर्तनीयता; शर्तें: राजकोषीय घाटा GDP का 3.5% से कम, मुद्रास्फीति 5% से कम, सकल NPA 5% से कम
तारापोर समिति-II2006संस्थाओं व जोखिम प्रबंधन को मज़बूत करने तथा ECB में सतर्क उदारीकरण की सिफारिश

12व्यापार समझौते (Trade Agreements) — PTA, FTA, CECA, CEPA

📖 परिभाषा (Definition): मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement — FTA)

📚 मानक परिभाषा: दो या अधिक देशों के बीच अधिकांश वस्तुओं व सेवाओं पर टैरिफ व व्यापारिक बाधाओं को समाप्त या न्यूनतम करने वाला समझौता। ✅ सरल शब्दों में: जैसे दो पड़ोसी देश आपस में तय करें कि "एक-दूसरे के सामान पर टैक्स नहीं लगाएँगे, ताकि दोनों तरफ का व्यापार आसान व सस्ता हो जाए"। 💡 उदाहरण: भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते (ISFTA, 2000 से लागू) के तहत कई उत्पादों पर बिना शुल्क के व्यापार होता है — जैसे भारत से चावल श्रीलंका जाना सस्ता हो जाता है।

व्यापार समझौतों के प्रकार — एकीकरण के स्तर अनुसार

प्रकारविवरणउदाहरण
वरीयता प्राप्त व्यापार समझौता (PTA)कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर टैरिफ घटाना/वरीयता देनाभारत-मर्कोसुर PTA (जून 2009 से प्रभावी)
मुक्त व्यापार समझौता (FTA)अधिकांश वस्तुओं व सेवाओं पर टैरिफ लगभग समाप्तभारत-श्रीलंका FTA, SAFTA, भारत-आसियान FTA
व्यापक आर्थिक सहयोग/भागीदारी समझौता (CECA/CEPA)वस्तु, सेवा, निवेश, बौद्धिक संपदा सहित व्यापक कवरेजभारत-सिंगापुर CECA (2005), भारत-जापान CEPA (2011), भारत-UAE CEPA (2022)
सीमा शुल्क संघ (Customs Union)सदस्यों के बीच बाधाएँ समाप्त + गैर-सदस्यों पर साझा बाहरी टैरिफयूरोपीय संघ (EU) — भारत किसी भी सीमा शुल्क संघ का सदस्य नहीं
साझा बाज़ार (Common Market)सीमा शुल्क संघ + श्रम व पूँजी की मुक्त आवाजाहीयूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (EEA)
आर्थिक संघ (Economic Union)साझा बाज़ार + समन्वित आर्थिक नीतियाँ + साझा मुद्रायूरोज़ोन (Eurozone)

भारत के प्रमुख व्यापार समझौते — नवीनतम स्थिति (2025-26)

समझौतावर्ष/स्थितिप्रमुख तथ्य
भारत-श्रीलंका FTA (ISFTA)2000 से प्रभावीकई उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुँच
SAFTA (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र)SAARC देशों के बीचक्षेत्रीय आंतरिक व्यापार में टैरिफ घटाने का लक्ष्य
भारत-आसियान FTAप्रभावीभारत-आसियान व्यापार व आर्थिक संबंध मज़बूत
भारत-सिंगापुर CECA2005व्यापार, निवेश व सेवा सहयोग को बढ़ावा
भारत-जापान CEPA2011अधिकांश वस्तुओं पर टैरिफ समाप्त
भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA2022आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता
भारत-UAE CEPA2022तेज़ी से क्रियान्वित समझौतों में से एक
भारत-EFTA TEPAहस्ताक्षर मार्च 2024, प्रभावी 1 अक्टूबर 2025स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिष्टेंस्टाइन के साथ; अगले 15 वर्षों में $100 अरब निवेश की प्रतिबद्धता (पहले 10 वर्ष में $50 अरब), लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार की संभावना
भारत-UK CETA (व्यापक आर्थिक व व्यापार समझौता)हस्ताक्षर 24 जुलाई 2025, प्रभावी 15 जुलाई 2026द्विपक्षीय व्यापार में अनुमानित $34 अरब वार्षिक वृद्धि की संभावना

नवीनतम — भारत-UK एवं भारत-EFTA समझौते: भारत-UK CETA व भारत-EFTA TEPA दोनों हाल के वर्षों की सबसे बड़ी व्यापारिक उपलब्धियाँ मानी जाती हैं — विशेषकर EFTA समझौता भारत में विदेशी निवेश के सबसे बड़े दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं में से एक है ($100 अरब)। RAS परीक्षा के लिए इनके हस्ताक्षर व प्रभावी होने की तारीखें अलग-अलग याद रखना ज़रूरी है — दोनों में अंतर होता है।

13निर्यात प्रोत्साहन नीतियाँ (Export Promotion Policies)

🏛️ प्रमुख सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ

14राजस्थान कनेक्शन (Rajasthan Connection) — निर्यात एवं व्यापार

📊 राजस्थान — निर्यात एवं व्यापार (नवीनतम आँकड़े) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) — राजस्थान भारत के कुल रत्न-आभूषण निर्यात का लगभग 17.5% हिस्सा रखता है; भारत के मीनाकारी आभूषण निर्यात का लगभग 90% तथा कुंदन आभूषण निर्यात का लगभग 60% राजस्थान से होता है। 2. H1 FY 2025-26 (अप्रैल-सितंबर 2025) में रत्न-आभूषण क्षेत्र का कुल सकल निर्यात $14.10 अरब रहा (3.66% वार्षिक वृद्धि); इसी अवधि में राजस्थान की वृद्धि दर उल्लेखनीय रूप से 82.14% तक पहुँची। 3. चुनौती — जड़ाऊ आभूषण (Studded Jewellery) का निर्यात पिछले 2 वर्षों में लगभग 30% घटा है (2023-24 के ₹82,000 करोड़ से घटकर 2024-25 में लगभग ₹60,000 करोड़) — अमेरिका द्वारा हाल में लगाए गए भारी शुल्क (Tariff) से जयपुर के आभूषण निर्यातक विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। 4. हस्तशिल्प (Handicrafts) निर्यात — राजस्थान का हस्तशिल्प निर्यात हाल में ₹7,987 करोड़ (लगभग $949 मिलियन) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा; 2030 तक इसे ₹18,000 करोड़ तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है। 5. वस्त्र (Textiles) क्षेत्र में हाल के वर्ष में मानव-निर्मित धागा/कपड़ा निर्यात में लगभग 2.49% तथा तैयार परिधान निर्यात में लगभग 7.4% की गिरावट दर्ज हुई — यह राज्य के निर्यात क्षेत्र की एक चुनौती है।

💡 राजस्थान का निर्यात कनेक्शन

जयपुर के आभूषण बाज़ार को अक्सर "भारत की जेम सिटी" कहा जाता है — यहाँ के कारीगरों की बनाई मीनाकारी व कुंदन ज्वेलरी दुनिया भर में जाती है। लेकिन जब अमेरिका जैसे बड़े बाज़ार में अचानक भारी शुल्क लग जाता है, तो सीधा असर जयपुर के हज़ारों कारीगरों की आजीविका पर पड़ता है — यही दिखाता है कि वैश्विक व्यापार नीतियाँ कितनी गहराई से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं।

★ परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य (Pre + Mains) ★

1. भुगतान संतुलन (BoP) के दो मुख्य घटक — चालू खाता व पूँजी खाता; तीसरा "त्रुटि व चूक" (Errors & Omissions)। 📌 Pre 2. CAD का सूत्र — व्यापार अंतर + शुद्ध वर्तमान हस्तांतरण + शुद्ध कारक आय। 📝 5M 3. FY 2025-26 में भारत का CAD $25.2 अरब (GDP का 0.6%) रहा; Q4 FY26 में यह $7.1 अरब के अधिशेष में बदल गया। 📝 10M 4. FDI में 10% से अधिक निवेश शामिल होता है (प्रबंधन नियंत्रण सहित); 10% तक FPI माना जाता है। 📌 Pre 5. FY 2025-26 में भारत का सकल FDI प्रवाह $58.85 अरब रहा — सिंगापुर शीर्ष स्रोत, महाराष्ट्र शीर्ष राज्य। 📝 5M 6. ADR अमेरिकी एक्सचेंज पर, GDR अमेरिका के बाहर (जैसे लंदन) कारोबार होता है — Infosys ADR व Reliance GDR उदाहरण हैं। 📌 Pre 7. भारत में चालू खाता 1994 से पूर्ण परिवर्तनीय है; पूँजी खाता आंशिक रूप से परिवर्तनीय है। 📌 Pre 8. तारापोर समिति-I (1997) ने 3 वर्षों में पूर्ण पूँजी खाता परिवर्तनीयता की सिफारिश की थी। 📝 5M 9. NEER व्यापार-भारित औसत विनिमय दर है; REER उसमें मुद्रास्फीति अंतर जोड़ता है। 📝 10M 10. जुलाई 2026 में रुपया लगभग ₹94.7/डॉलर पर था — 2026 में अब तक 7.04% का अवमूल्यन हो चुका है। 📌 Pre 11. जून 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $700 अरब पार कर गया — आयात आवरण लगभग 10-11 महीने। 📝 10M 12. भारत का बाह्य ऋण मार्च 2026 तक $762.8 अरब — GDP का 20.8%। 📝 5M 13. GATT की स्थापना 1947 में, WTO की स्थापना 1 जनवरी 1995 को उरुग्वे दौर (1986-94) के समापन पर हुई। 📌 Pre 14. व्यापार समझौतों का क्रम (एकीकरण बढ़ते क्रम में) — PTA → FTA → CECA/CEPA → सीमा शुल्क संघ → साझा बाज़ार → आर्थिक संघ। 📝 10M 15. भारत-EFTA TEPA अक्टूबर 2025 से प्रभावी — $100 अरब निवेश प्रतिबद्धता, लगभग 10 लाख रोज़गार की संभावना। 📌 Pre 16. भारत-UK CETA पर हस्ताक्षर 24 जुलाई 2025 को हुए, यह 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ। 📌 Pre 17. RoDTEP योजना ने MEIS (Merchandise Exports from India Scheme) का स्थान लिया। 📝 5M 18. IMF व विश्व बैंक दोनों की स्थापना 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में हुई। 📌 Pre 19. राजस्थान भारत के कुल रत्न-आभूषण निर्यात का लगभग 17.5% हिस्सा रखता है — मीनाकारी में 90% व कुंदन में 60% हिस्सेदारी। 📝 10M 20. भारत का शीर्ष निर्यात गंतव्य अमेरिका है, जबकि शीर्ष आयात स्रोत चीन है। 📌 Pre

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न 📝 Pre MCQ | 5-अंक (60-70 शब्द) | 10-अंक (~120 शब्द) — हर Q पर tag दिया है

Q1. भुगतान संतुलन (BoP) की संरचना को चालू खाता व पूँजी खाता के संदर्भ में समझाइए। (10 अंक) Q2. चालू खाता घाटा (CAD) क्या है? इसे प्रभावित करने वाले कारक बताइए। (5 अंक) Q3. FDI एवं FPI में अंतर स्पष्ट कीजिए। कौन-सा भारत के लिए अधिक स्थिर माना जाता है? (5 अंक) Q4. ADR एवं GDR में क्या अंतर है? (Pre MCQ) Q5. विनिमय दर के विभिन्न प्रकारों (Fixed, Flexible, Managed Floating) की व्याख्या कीजिए। (10 अंक) Q6. NEER एवं REER में अंतर स्पष्ट करते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डालिए। (10 अंक) Q7. भारत में मुद्रा परिवर्तनीयता से संबंधित प्रमुख समितियों (तारापोर समिति) की सिफारिशें बताइए। (5 अंक) Q8. भारत के हाल के प्रमुख व्यापार समझौतों (UK CETA, EFTA TEPA) का महत्व स्पष्ट कीजिए। (10 अंक) Q9. भारत सरकार की प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का उल्लेख कीजिए। (5 अंक) Q10. राजस्थान के रत्न-आभूषण निर्यात की वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ बताइए। (5 अंक)

वर्षघटना/नीतिमहत्व
1944ब्रेटन वुड्स सम्मेलन — IMF व विश्व बैंक की स्थापनाअंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था की नींव
1947GATT की स्थापनाWTO का पूर्ववर्ती ढाँचा
1985सुखमय चक्रवर्ती समितिचालू खाता परिवर्तनीयता की सिफारिश
1991BoP संकट व नई आर्थिक नीतिरुपये का अवमूल्यन, आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत
1994चालू खाता पूर्ण परिवर्तनीय घोषितIMF अनुच्छेद VIII दायित्वों के तहत
1995WTO की स्थापना (GATT का उत्तराधिकारी)वैश्विक व्यापार नियमन की आधुनिक संस्था
1997तारापोर समिति-Iपूँजी खाता परिवर्तनीयता का चरणबद्ध खाका
2000भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA)भारत का प्रारंभिक प्रमुख FTA
2005भारत-सिंगापुर CECA व SEZ अधिनियमव्यापक आर्थिक सहयोग व निर्यात क्षेत्र विकास
2006तारापोर समिति-IIसंस्थागत मज़बूती व सतर्क ECB उदारीकरण
2011भारत-जापान CEPAव्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता
2018कृषि निर्यात नीति व RoDTEP की नींवकृषि व समग्र निर्यात प्रोत्साहन
2022भारत-UAE CEPA व भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTAतीव्र गति से क्रियान्वित नए व्यापार समझौते
मार्च 2024भारत-EFTA TEPA पर हस्ताक्षर$100 अरब निवेश प्रतिबद्धता
जुलाई 2025भारत-UK CETA पर हस्ताक्षर$34 अरब वार्षिक व्यापार वृद्धि का अनुमान
अक्टूबर 2025 - जुलाई 2026EFTA TEPA व UK CETA दोनों प्रभावीभारत के व्यापार इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि
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