🏭 अध्याय 3/9 — अर्थव्यवस्था

उद्योग: नीति, LPG सुधार, MSME

Industry, LPG Reforms, MSME | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. औद्योगिक नीति संकल्प — 1948, 1956 एवं आयात प्रतिस्थापन (Industrial Policy Resolutions)
  2. 1991 का आर्थिक संकट एवं नई आर्थिक नीति (1991 Crisis & New Economic Policy)
  3. उदारीकरण (Liberalisation) — औद्योगिक, वित्तीय, कर एवं व्यापार सुधार
  4. निजीकरण (Privatisation) — विनिवेश एवं PSU वर्गीकरण
  5. औद्योगिक विकास का वर्तमान प्रदर्शन (Industrial & Manufacturing Performance)
  6. औद्योगिक वित्त (Industrial Finance) — विकास बैंक (Development Banks)
  7. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) — नई परिभाषा 2025
  8. MSME का आर्थिक योगदान, ऋण सहायता एवं चुनौतियाँ
  9. Make in India एवं राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (National Manufacturing Mission)
  10. उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI — Production Linked Incentive Scheme)
  11. Startup India, Stand-Up India एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान
  12. राजस्थान उद्योग कनेक्शन (Rajasthan Industry Connection)

कल्पना कीजिए — 1991 में भारत के खजाने में इतना ही विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) बचा था कि सिर्फ दो हफ्ते का आयात (Import) हो सके। सरकार को अपना सोना (Gold) विदेश में गिरवी रखना पड़ा ताकि कर्ज मिल सके। यही वह क्षण था जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाजे दुनिया के लिए खोले — उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG — Liberalisation, Privatisation, Globalisation) की शुरुआत हुई। इसी सुधार ने आज के उन उद्योगों की नींव रखी जिनमें आपका मोबाइल बनता है, आपकी कार असेंबल होती है, और जिस कंपनी में शायद आपके किसी परिचित की नौकरी लगी है। यह अध्याय बताता है कि भारत लाइसेंस-परमिट राज (License-Permit Raj) से निकलकर आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में कैसे शामिल हुआ — और इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) से लेकर बड़े कारखानों तक की पूरी कहानी है।

1. औद्योगीकरण की पृष्ठभूमि (Beginning of Industrialisation)

स्वतंत्रता के समय (1947) भारत की औद्योगिक स्थिति बहुत कमजोर थी — देश मुख्यतः कच्चे माल का निर्यातक और तैयार माल का आयातक था (औपनिवेशिक शोषण का परिणाम)। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत ने पूँजीवाद (Capitalism) और समाजवाद (Socialism) के मिश्रण वाला "मिश्रित अर्थव्यवस्था" (Mixed Economy) मॉडल अपनाया — जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) भारी उद्योगों में और निजी क्षेत्र (Private Sector) उपभोक्ता उद्योगों में काम करता। इसे पंचवर्षीय योजनाओं (Five-Year Plans, 1951 से) के माध्यम से लागू किया गया।

पंचवर्षीय योजनाओं में उद्योग का स्थान

योजनाअवधिऔद्योगिक फोकस एवं उपलब्धि
प्रथम योजना1951-56कृषि, सिंचाई व ऊर्जा प्राथमिकता; भाखड़ा व हीराकुंड जैसे बाँध
द्वितीय योजना1956-61भारी उद्योगों पर बल (महालनोबिस मॉडल); सार्वजनिक क्षेत्र इस्पात संयंत्र स्थापित
तृतीय योजना1961-66कृषि आत्मनिर्भरता के साथ हरित क्रांति की शुरुआत
चतुर्थ योजना1969-74बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969); गरीबी उन्मूलन
छठी योजना1980-85तकनीकी आत्मनिर्भरता; NABARD की स्थापना (1982)
वार्षिक योजनाएँ1990-92खाड़ी युद्ध व राजकोषीय संकट; आर्थिक सुधारों की शुरुआत
आठवीं योजना1992-97आर्थिक उदारीकरण; LPG सुधारों का क्रियान्वयन

📊 औद्योगिक क्षेत्र का प्रभाव (1951-1991) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. उद्योग का GDP में हिस्सा 1950-51 के 13% से बढ़कर 1990-91 में 24.6% हुआ। 2. क्षेत्रीय विविधता — वस्त्र उद्योग (Textiles) से बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल तक विस्तार। 3. लघु उद्योगों (Small-Scale Industry) को छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसर मिले। 4. आलोचना: सार्वजनिक क्षेत्र में अक्षमता, "परमिट-लाइसेंस राज" ने नवाचार को रोका, विदेशी प्रतिस्पर्धा न होने से घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद बने।

1औद्योगिक नीति संकल्प — 1948, 1956 एवं आयात प्रतिस्थापन (Industrial Policy Resolutions)

IPR 1956 — उद्योगों का वर्गीकरण

श्रेणी (Schedule)विवरणउदाहरण
अनुसूची A — सरकारी क्षेत्रपूर्णतः सार्वजनिक स्वामित्व के लिए आरक्षित रणनीतिक उद्योगरेलवे, परमाणु ऊर्जा, रक्षा उत्पादन
अनुसूची B — मिश्रित क्षेत्रसार्वजनिक क्षेत्र की अगुआई, निजी क्षेत्र की सहायक भूमिकाखनिज तेल, उर्वरक, भारी मशीनरी
अनुसूची C — निजी क्षेत्रसरकार के नियंत्रण में शेष सभी उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुलेउपभोक्ता वस्तुएँ, कपड़ा, चीनी

आयात प्रतिस्थापन नीति (Import Substitution Policy)

उद्देश्य था आयात की जगह घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और औद्योगिक आत्मनिर्भरता हासिल करना। इसके लिए टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाए गए और कोटा (मात्रा सीमा) लगाई गई ताकि घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके, विदेशी मुद्रा बचाई जा सके, और घरेलू बाज़ार पर ध्यान केंद्रित किया जा सके (1980 के दशक के मध्य में निर्यात पर बल बढ़ा)।

💡 रोज़मर्रा उदाहरण — लाइसेंस राज

1970 के दशक में अगर कोई उद्योगपति साबुन बनाने की फैक्ट्री का उत्पादन दोगुना करना चाहता था, तो भी उसे सरकार से अलग लाइसेंस लेना पड़ता था — जैसे आज आपको नया मोबाइल टावर लगाने के लिए दर्जनों मंज़ूरी चाहिए। इसी वजह से उद्यमी नई फैक्ट्री लगाने के बजाय "लाइसेंस" पाने में ही वर्षों लगा देते थे — यही "लाइसेंस-परमिट राज" (License-Permit Raj) कहलाया, जिसे 1991 के बाद काफी हद तक समाप्त किया गया।

📖 परिभाषा (Definition): लाइसेंस राज (License Raj / License-Permit Raj)

📚 मानक परिभाषा: भारत में 1951 से 1991 तक चली वह व्यवस्था जिसके तहत उद्योग स्थापित करने, विस्तार करने या उत्पाद बदलने के लिए सरकार से अनिवार्य लाइसेंस/परमिट लेना पड़ता था। ✅ सरल शब्दों में: सरकार हर बड़े व्यापारिक फैसले पर पहले "हाँ" कहती थी, तभी कोई काम शुरू हो सकता था — जैसे बिना अनुमति के कुछ भी बनाना गैरकानूनी हो। 💡 उदाहरण: 1991 से पहले कार बनाने वाली कंपनी को नया मॉडल लॉन्च करने के लिए भी सरकारी मंज़ूरी चाहिए होती थी — इसीलिए दशकों तक भारत में सीमित कार मॉडल (जैसे एंबेसडर, प्रीमियर पद्मिनी) ही उपलब्ध थे।

MRTP Act - एक संक्षिप्त अवलोकनMRTP Act - एक संक्षिप्त अवलोकन
विशेषता (Feature)विवरण (Description)
पूरा नाम (Full Form)Monopolies and Restrictive Trade Practices (MRTP) Act, 1969
मुख्य उद्देश्यदेश में आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण (Concentration of economic power) को रोकना और एकाधिकार (Monopoly) व अनुचित व्यापारिक प्रथाओं (Unfair Trade Practices) को नियंत्रित करना।
ऐतिहासिक भूमिकायह लाइसेंस-परमिट राज का एक प्रमुख हिस्सा था, जिसने बड़ी कंपनियों के विस्तार को सीमित कर दिया था और उन्हें नई परियोजनाएं शुरू करने के लिए बार-बार सरकारी मंज़ूरी की आवश्यकता होती थी।
1991 सुधारउदारीकरण के दौर में इसे विकास में बाधा माना गया क्योंकि यह कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनने से रोकता था, इसलिए इसके प्रावधानों को शिथिल किया गया।
वर्तमान स्थितिवर्ष 2002 में इसे निरस्त (Repealed) कर दिया गया और इसके स्थान पर 'प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002' (Competition Act) लाया गया। अब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) यह सुनिश्चित करता है कि बाज़ार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

21991 का आर्थिक संकट एवं नई आर्थिक नीति (1991 Crisis & New Economic Policy)

संकट की पृष्ठभूमि (1980 के दशक का कुप्रबंधन)

1991 के संकट के प्रमुख कारण

1. बाह्य ऋण संकट (External Debt Crisis): अंतरराष्ट्रीय उधार अस्थिर स्तर तक पहुँच गया था।

2. विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) घटकर मात्र लगभग 1.2 अरब डॉलर रह गया — जो सिर्फ दो हफ्ते के आयात के लिए पर्याप्त था।

3. आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज़ उछाल — मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में।

4. खाड़ी युद्ध (Gulf War, 1990-91) से तेल की कीमतें बढ़ीं और अनिवासी भारतीयों (NRI) की जमा राशि वापस जाने लगी।

महत्वपूर्ण तथ्य: कोई भी देश उधार देने को तैयार नहीं था, इसलिए भारत सरकार को विश्व बैंक (World Bank) व अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लगभग 7 अरब डॉलर का ऋण माँगना पड़ा। शर्त के रूप में भारत को अर्थव्यवस्था उदार बनाने पर सहमति देनी पड़ी। संकट की गंभीरता का प्रतीक — भारत को अपना लगभग 67 टन सोना (Gold) बैंक ऑफ इंग्लैंड व यूनियन बैंक ऑफ स्विट्ज़रलैंड के पास गिरवी रखकर तुरंत नकद ऋण जुटाना पड़ा।

नई आर्थिक नीति (New Economic Policy, NEP 1991) की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव (P.V. Narasimha Rao) के नेतृत्व में तथा वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) की अगुआई में जुलाई 1991 में ऐतिहासिक बजट पेश हुआ, जिसने भारत की आर्थिक दिशा हमेशा के लिए बदल दी। इसके तीन मुख्य स्तंभ (Pillars) थे — उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) — जिन्हें संक्षेप में "LPG सुधार" कहा जाता है।

✅ स्थिरीकरण उपाय (Stabilisation — अल्पकालिक)
  • भुगतान संतुलन (BoP) संकट को नियंत्रित करना
  • मुद्रास्फीति पर नियंत्रण
  • रुपये का अवमूल्यन (1991)
🏗️ संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms — दीर्घकालिक)
  • आर्थिक दक्षता में सुधार
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना
  • औद्योगिक लाइसेंसिंग का उन्मूलन
💡 रोज़मर्रा उदाहरण — 1991 का संकट

सोचिए, आपके घर में इतना ही पैसा बचा हो कि सिर्फ दो हफ्ते का राशन आ सके, और कोई भी उधार देने को तैयार न हो — तब आप अपने गहने (सोना) गिरवी रखकर पैसे जुटाते हैं। ठीक यही स्थिति 1991 में पूरे भारत देश की थी। इसी मजबूरी ने भारत को अपनी अर्थव्यवस्था के दरवाज़े दुनिया के लिए खोलने पर मजबूर किया।

3उदारीकरण (Liberalisation) — औद्योगिक, वित्तीय, कर एवं व्यापार सुधार

📖 परिभाषा (Definition): उदारीकरण (Liberalisation)

📚 मानक परिभाषा: सरकारी नियंत्रण, प्रतिबंधात्मक नियमों व लाइसेंसिंग को कम करना ताकि प्रतिस्पर्धा और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिले। सुधार 1980 के दशक में शुरू हुए और 1991 में व्यापक पैकेज के रूप में लागू हुए। ✅ सरल शब्दों में: सरकार का "हर काम में हस्तक्षेप" वाला रवैया छोड़कर बाज़ार को खुद फैसले लेने देना — जैसे माता-पिता बच्चे को बड़ा होने पर अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी देते हैं। 💡 उदाहरण: 1991 से पहले नई फैक्ट्री लगाने में सालों लगते थे; उदारीकरण के बाद ज़्यादातर उद्योगों से लाइसेंसिंग हटा दी गई और उद्यमी बिना सरकारी मंज़ूरी के कारखाना लगा सकते हैं (सिवाय कुछ रणनीतिक क्षेत्रों के)।

सुधार क्षेत्र1991 से पहले (Pre-1991)1991 के बाद (Post-1991) सुधार
औद्योगिक विनियमनभारी विनियमन, सीमित निजी भागीदारीअधिकांश औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त; बाज़ार-आधारित मूल्य निर्धारण
वित्तीय क्षेत्रRBI मुख्यतः नियामक (Regulator) की भूमिका मेंRBI सुविधाप्रदाता (Facilitator) बना; विदेशी निवेश सीमा बढ़ी; विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को अनुमति
प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)ऊँची कर दरें, कर चोरी को बढ़ावादरें घटाई गईं ताकि बचत व अनुपालन (Compliance) बढ़े
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)जटिल बहु-स्तरीय कर संरचनाCENVAT → VAT → अंततः GST (2017) से एकीकृत कर प्रणाली
विदेशी मुद्रा (Forex)निश्चित विनिमय दर, कड़े प्रतिबंधरुपये का अवमूल्यन (1991); बाज़ार-निर्धारित विनिमय दर; FERA की जगह FEMA (1999)
व्यापार एवं निवेशऊँचे टैरिफ, आयात प्रतिबंधटैरिफ घटाए गए, आयात लाइसेंसिंग व निर्यात शुल्क समाप्त

FERA से FEMA: विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 ने पुराने कठोर विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA), 1973 का स्थान लिया — इससे विदेशी मुद्रा लेन-देन को दंडात्मक (Criminal) की बजाय प्रबंधकीय (Civil/Management) दृष्टिकोण से देखा जाने लगा, जिससे व्यापार करना आसान हुआ। चालू खाता (Current Account) को FEMA के तहत पूर्ण परिवर्तनीय (Fully Convertible) बनाया गया।

4निजीकरण (Privatisation) — विनिवेश एवं PSU वर्गीकरण

📖 परिभाषा (Definition): निजीकरण (Privatisation)

📚 मानक परिभाषा: सरकारी स्वामित्व या प्रबंधन को पूर्णतः या आंशिक रूप से निजी क्षेत्र को हस्तांतरित करना — या तो सरकार की वापसी (Withdrawal) के ज़रिए या सार्वजनिक उद्यमों की बिक्री (Sale) के ज़रिए। ✅ सरल शब्दों में: सरकारी कंपनी को पूरी तरह या आंशिक रूप से निजी हाथों में सौंप देना — जैसे कोई सरकारी स्कूल किसी निजी ट्रस्ट को चलाने के लिए सौंप दिया जाए। 💡 उदाहरण: एयर इंडिया (Air India) — जो दशकों तक सरकारी स्वामित्व में घाटे में चल रही थी — को 2021 में टाटा समूह (Tata Group) को बेच दिया गया, यह "रणनीतिक विनिवेश" (Strategic Disinvestment) का उदाहरण है।

विनिवेश (Disinvestment) — निजीकरण का प्रमुख साधन

विनिवेश का अर्थ है सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSEs) में सरकार की इक्विटी (हिस्सेदारी) का कुछ भाग या पूरा भाग बेचना ताकि वित्तीय अनुशासन व आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिले।

🔹 टोकन विनिवेश (Token Disinvestment)
  • PSU की 49% तक हिस्सेदारी की बिक्री
  • प्रबंधन नियंत्रण (Management Control) सरकार के पास ही रहता है
  • उद्देश्य: राजस्व जुटाना, स्वामित्व बरकरार
🔸 रणनीतिक विनिवेश (Strategic Disinvestment)
  • 51% या उससे अधिक हिस्सेदारी की बिक्री
  • प्रबंधन नियंत्रण भी नए (निजी) मालिक को हस्तांतरित
  • उदाहरण: एयर इंडिया (2021), भारत पेट्रोलियम में प्रस्तावित विनिवेश

सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) का वर्गीकरण

सरकार ने बेहतर दक्षता व वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए PSU को स्वायत्तता (Autonomy) के आधार पर तीन श्रेणियों में बाँटा है — महारत्न, नवरत्न व मिनीरत्न।

श्रेणीप्रमुख मानदंडस्वायत्तता (बिना सरकारी मंज़ूरी निवेश)
महारत्न (Maharatna)नेटवर्थ > ₹15,000 करोड़, टर्नओवर > ₹25,000 करोड़, लाभ > ₹5,000 करोड़ (लगातार 3 वर्ष)₹5,000 करोड़ तक निवेश; विदेश में संयुक्त उद्यम स्वतंत्र रूप से
नवरत्न (Navratna)मिनीरत्न-I दर्जा + पिछले 5 में से 3 वर्ष "उत्कृष्ट/बहुत अच्छा" MoU रेटिंग₹1,000 करोड़ तक निवेश; बिना पूर्व मंज़ूरी संयुक्त उद्यम/विलय
मिनीरत्न श्रेणी-Iलगातार 3 वर्ष लाभ, किसी एक वर्ष में शुद्ध लाभ ≥ ₹30 करोड़₹500 करोड़ या नेटवर्थ का 50% (जो कम हो), तक पूंजीगत व्यय
मिनीरत्न श्रेणी-IIलगातार 3 वर्ष लाभ, सकारात्मक नेटवर्थ₹300 करोड़ या नेटवर्थ के 50% (जो कम हो), तक पूंजीगत व्यय

उदाहरण: महारत्न कंपनियाँ — कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), ONGC आदि। नवरत्न कंपनियाँ — भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन (Power Grid) आदि।

🎯 उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG) — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द | Pre: conceptual clarity

LPG सुधार — त्वरित सारांश (LPG Quick Summary)

घटकउदारीकरण (L)निजीकरण (P)वैश्वीकरण (G)
अर्थसरकारी नियंत्रण कम करोPSU को Private को दोविश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ो
उपकरणLicense हटाओ, MRTP समाप्तविनिवेश, Strategic SaleFDI, WTO, FTA
संस्थाCCI, SEBIDIPAM, NITI AayogWTO, IMF, World Bank
उदाहरणTelecom, Aviation खुलाAir India TATAIT Export $250 Bn+

6. वैश्वीकरण (Globalisation) — WTO, आउटसोर्सिंग, SEZ/NIMZ/EPZ

📖 परिभाषा (Definition): वैश्वीकरण (Globalisation)

📚 मानक परिभाषा: किसी देश की अर्थव्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण — आर्थिक, सामाजिक व भौगोलिक सीमाओं के पार अंतर्निर्भरता व एकीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ। लक्ष्य है एक "सीमाहीन दुनिया" (Borderless World) बनाना। ✅ सरल शब्दों में: दुनिया के अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं को इस तरह जोड़ना कि एक देश में होने वाली घटना दूसरे देशों को भी प्रभावित करे — जैसे मोहल्ले की सारी दुकानें आपस में जुड़कर एक बड़ा बाज़ार बन जाएँ। 💡 उदाहरण: जब अमेरिका में 2008 में वित्तीय संकट आया, तो उसका असर भारत के शेयर बाज़ार व IT कंपनियों पर भी पड़ा — यही वैश्वीकरण के आपसी जुड़ाव का उदाहरण है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) — संक्षिप्त परिचय

WTO की स्थापना 1995 में हुई, जो 1948 में 23 देशों के साथ शुरू हुए GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) का उत्तराधिकारी है। WTO का लक्ष्य टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाकर एक नियम-आधारित व्यापार प्रणाली बनाना है जिसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार में समान अवसर मिलें। भारत इसका सदस्य है और मात्रात्मक आयात प्रतिबंध हटाकर व टैरिफ दरें घटाकर वैश्विक व्यापार को उदार बनाया है (विस्तृत चर्चा अध्याय 9 — विश्व अर्थव्यवस्था में)।

आउटसोर्सिंग (Outsourcing) एवं BPO

वैश्वीकरण का एक बड़ा परिणाम आउटसोर्सिंग है — जिसमें कंपनियाँ अपनी सेवाएँ बाहरी स्रोतों, अक्सर दूसरे देशों से, प्राप्त करती हैं, न कि स्वयं उत्पादन करती हैं। संचार तकनीक (विशेषकर IT) में प्रगति के कारण यह प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ी। उदाहरण — ग्राहक सेवा (Customer Service), रिकॉर्ड कीपिंग, अकाउंटेंसी व टेलीमेडिसिन के लिए BPO (Business Process Outsourcing) केंद्र। भारत सस्ते व कुशल श्रम के कारण एक प्रमुख आउटसोर्सिंग गंतव्य बना।

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) एवं राष्ट्रीय निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्र (NIMZ)

📖 परिभाषा (Definition): विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ — Special Economic Zone)

📚 मानक परिभाषा: SEZ अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित क्षेत्र जिन्हें "डीम्ड फॉरेन टेरिटरी" (Deemed Foreign Territory) माना जाता है, जो निर्यात व विदेशी निवेश को बढ़ावा देने हेतु कर छूट व सरलीकृत प्रक्रियाएँ प्रदान करते हैं। ✅ सरल शब्दों में: देश के अंदर एक ऐसा विशेष इलाका जहाँ कंपनियों को टैक्स में भारी छूट मिलती है ताकि वे वहाँ से माल बनाकर विदेश भेज सकें — जैसे किसी शहर के अंदर एक "टैक्स-फ्री ज़ोन"। 💡 उदाहरण: गुजरात का कांडला (पहला EPZ, 1965 — जो बाद में SEZ ढाँचे में शामिल हुआ) और नोएडा जैसे SEZ में स्थापित कंपनियाँ आयात शुल्क में छूट पाकर सस्ता उत्पादन कर पातीं और सीधे निर्यात करती हैं।

🏭 SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र)
  • SEZ अधिनियम, 2005 के तहत गठित
  • क्षेत्रफल: 10 से 5,000 हेक्टेयर तक
  • पूर्णतः निर्यात-उन्मुख उद्योग
  • सीमा शुल्क व आयकर छूट (15 वर्ष तक)
  • पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA): परियोजना विकासकर्ता की ज़िम्मेदारी
🏗️ NIMZ (राष्ट्रीय विनिर्माण क्षेत्र)
  • राष्ट्रीय विनिर्माण नीति, 2011 के तहत परिकल्पित
  • न्यूनतम क्षेत्रफल: 5,000 हेक्टेयर (कोई ऊपरी सीमा नहीं)
  • स्वयं-निर्भर औद्योगिक टाउनशिप (स्कूल, अस्पताल सहित)
  • व्यापक विनिर्माण विकास पर केंद्रित (सिर्फ निर्यात नहीं)
  • EIA: राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी; उदाहरण — प्रकाशम (AP), संगारेड्डी (तेलंगाना), कलिंगनगर (ओडिशा)

भारतीय कंपनियों का वैश्विक विस्तार: वैश्वीकरण के चलते कई भारतीय कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी हैं — ONGC विदेश (16 देशों में सक्रिय), टाटा स्टील (26 देशों में), HCL टेक्नोलॉजीज़ (31 देशों में कार्यालय), और डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेट्रीज़ (वैश्विक विनिर्माण व अनुसंधान केंद्र)।

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5औद्योगिक विकास का वर्तमान प्रदर्शन (Industrial & Manufacturing Performance)

📊 विनिर्माण एवं औद्योगिक क्षेत्र — नवीनतम आँकड़े — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन (Manufacturing GVA) में मज़बूत सुधार — FY 2024-25 की दूसरी तिमाही के मात्र 2.2% से बढ़कर FY 2025-26 में पहली तिमाही में 7.72% व दूसरी तिमाही में 9.13% तक पहुँची — यानी संरचनात्मक सुधार का संकेत। 2. विनिर्माण क्षेत्र वर्तमान में भारत के GDP में लगभग 17% का योगदान देता है। 3. मध्यम एवं उच्च-तकनीक (Medium & High Technology) उत्पाद कुल विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन का लगभग 46% हिस्सा बनाते हैं — यानी भारत अब सिर्फ बुनियादी नहीं, तकनीकी रूप से जटिल उत्पादों की ओर बढ़ रहा है। 4. भारत वैश्विक विनिर्माण में लगभग 2.8% हिस्सेदारी रखता है, और चीन+1 (China+1) रणनीति के चलते विनिर्माण उत्पादन उभरती अर्थव्यवस्थाओं (भारत सहित) की ओर स्थानांतरित हो रहा है। 5. इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के घरेलू उत्पादन में FY15-FY24 के दौरान 17.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई।

लक्ष्य में बदलाव: "Make in India" के तहत 2022 तक विनिर्माण का GDP हिस्सा 25% करने का लक्ष्य रखा गया था, परंतु वास्तविकता में यह हिस्सा 2013-14 के 16.7% से घटकर 2023-24 में लगभग 15.9% रह गया। इसी कमी को दूर करने के लिए बजट 2025-26 में "राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन" के तहत नया, अधिक यथार्थवादी लक्ष्य रखा गया — 2030 तक विनिर्माण का GDP हिस्सा 20% (विवरण आगे बिंदु 11 में)।

औद्योगिक उत्पादन मापने के प्रमुख सूचकांक — PMI, IIP एवं ASI

बिंदुPMI (Purchasing Managers Index)IIP (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक)ASI (वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण)
प्रकाशकS&P Global (निजी संस्था)राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)NSO — फैक्ट्री अधिनियम पंजीकृत इकाइयाँ
आवृत्तिमासिक (Monthly)मासिक (Monthly)वार्षिक (Annual)
कवरेजलगभग 500 निजी क्षेत्र कंपनियाँ; विनिर्माण व सेवाएँनिजी व सार्वजनिक दोनों; विनिर्माण, खनन व बिजलीपंजीकृत फैक्ट्रियों का विस्तृत वित्तीय व रोज़गार डेटा
GDP गणना में उपयोगनहीं (सर्वेक्षण-आधारित संकेतक मात्र)हाँ — असंगठित क्षेत्र अनुमान हेतु प्रयुक्तहाँ — संगठित विनिर्माण के आधिकारिक आँकड़ों हेतु

6औद्योगिक वित्त (Industrial Finance) — विकास बैंक (Development Banks)

विकास बैंक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों — विशेषकर उद्योग व अवसंरचना — को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।

विकास बैंकस्वामित्वमुख्य कार्य
SIDBI (लघु उद्योग विकास बैंक)भारत सरकार व अन्य संस्थाएँभारत में लघु उद्योगों (Small Industries) के विकास को बढ़ावा व सुविधा प्रदान करना
NABARD (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक)पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व मेंवाणिज्यिक बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों व ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त (Refinance) सुविधा
EXIM Bank (निर्यात-आयात बैंक)भारत सरकारविदेश व्यापार तथा निर्यात ऋण को बढ़ावा देना
राष्ट्रीय आवास बैंक (National Housing Bank)भारत सरकारआवास वित्त (Housing Finance) क्षेत्र का नियमन व वित्तपोषण
MUDRA Bankभारत सरकारसूक्ष्म वित्त (Microfinance) — गैर-कॉर्पोरेट छोटे/सूक्ष्म उद्यमों को ऋण
NaBFID (राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक)भारत सरकारदीर्घकालिक अवसंरचना वित्तपोषण (Infrastructure Financing) — 2021 में स्थापित

7सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) — नई परिभाषा 2025

📖 परिभाषा (Definition): सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME)

📚 मानक परिभाषा: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के तहत विनिर्माण (Manufacturing) व सेवा (Service) उद्यमों को निवेश (Investment) व टर्नओवर (Turnover) की सीमा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ✅ सरल शब्दों में: छोटी, मंझोली और मध्यम आकार की दुकानों/फैक्ट्रियों को उनके निवेश व सालाना बिक्री के आधार पर तीन श्रेणियों में बाँटना — ताकि सरकार हर श्रेणी को उसके अनुसार सही सहायता (सस्ता ऋण, टैक्स छूट) दे सके। 💡 उदाहरण: आपके मोहल्ले की छोटी टेलरिंग शॉप "सूक्ष्म उद्यम" हो सकती है, जबकि किसी शहर की मध्यम आकार की ऑटो-पार्ट्स फैक्ट्री "मध्यम उद्यम" — दोनों को अलग-अलग तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है।

MSME वर्गीकरण — 2020 संशोधन (एकीकृत मापदंड)

श्रेणीनिवेश सीमा (2020)टर्नओवर सीमा (2020)
सूक्ष्म (Micro)₹1 करोड़ तक₹5 करोड़ तक
लघु (Small)₹10 करोड़ तक₹50 करोड़ तक
मध्यम (Medium)₹50 करोड़ तक₹250 करोड़ तक

MSME वर्गीकरण — 2025 संशोधन (1 अप्रैल 2025 से लागू) 📌 Pre

श्रेणीनिवेश सीमा (2025 — नई)टर्नओवर सीमा (2025 — नई)
सूक्ष्म (Micro)₹2.5 करोड़ तक (2.5 गुना वृद्धि)₹10 करोड़ तक (2 गुना वृद्धि)
लघु (Small)₹25 करोड़ तक₹100 करोड़ तक
मध्यम (Medium)₹125 करोड़ तक₹500 करोड़ तक

बजट 2025-26 की घोषणा: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में घोषणा की कि सभी MSME की निवेश सीमा 2.5 गुना और टर्नओवर सीमा 2 गुना बढ़ाई जाएगी — ताकि उद्यम बड़ा होने पर भी MSME के दर्जे व लाभों से वंचित न हों और स्केल-अप (Scale-Up), बेहतर ऋण पहुँच व बाज़ार विस्तार को बढ़ावा मिले। यह संशोधन 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी है।

Udyam पंजीकरण पोर्टल (Udyam Registration Portal)

8MSME का आर्थिक योगदान, ऋण सहायता एवं चुनौतियाँ

📊 MSME क्षेत्र — आर्थिक योगदान (नवीनतम आँकड़े) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. भारत के GDP में MSME का योगदान लगभग 30.1% है। 2. भारत के कुल विनिर्माण उत्पादन (Manufacturing Output) में MSME का हिस्सा 35.4% है। 3. भारत के कुल निर्यात (Exports) में MSME उत्पादों का हिस्सा लगभग 45.7%-45.8% है (2023-24 व उसके बाद)। 4. MSME निर्यात मूल्य ₹3.95 लाख करोड़ (2020-21) से बढ़कर ₹12.39 लाख करोड़ (2024-25) हो गया — यानी लगभग 3 गुना वृद्धि। 5. Udyam पोर्टल पर पंजीकृत इकाइयों की संख्या 3.80 करोड़ से अधिक।

MSME के लिए प्रमुख ऋण/क्रेडिट सहायता योजनाएँ

🏛️ प्रमुख सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ

MSME क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ

चुनौतीविवरण
औपचारिकीकरण अंतरालबड़ी संख्या में सूक्ष्म उद्यम अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र में — पंजीकरण व औपचारिक लाभों से वंचित
वित्त तक सीमित पहुँचबैंकों से ऋण प्राप्ति में कठिनाई, विशेषकर बिना गिरवी (Collateral) के
तकनीक व बाज़ार तक पहुँच की कमीआधुनिक तकनीक अपनाने व बड़े बाज़ारों तक पहुँचने में बाधाएँ
अवसंरचनात्मक बाधाएँबिजली, सड़क, भंडारण जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी
कुशल श्रम की कमीप्रशिक्षित/कुशल कामगारों की उपलब्धता सीमित
देर से भुगतान (Delayed Payments)बड़ी कंपनियों/सरकारी विभागों से समय पर भुगतान न मिलना — नकदी प्रवाह पर असर
🎯 MSME क्षेत्र — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द | Pre: conceptual clarity
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9Make in India एवं राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (National Manufacturing Mission)

📖 परिभाषा (Definition): Make in India

📚 मानक परिभाषा: 2014 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) की अगुआई में शुरू किया गया प्रमुख अभियान, जिसका उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना, रोज़गार सृजित करना व भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है। ✅ सरल शब्दों में: सरकार का यह नारा और नीति कि "दुनिया की कंपनियाँ अपना सामान भारत में बनाएँ, बाहर से मंगाने के बजाय" — जैसे किसी दुकानदार का प्रचार अभियान कि "यहीं बनाओ, यहीं बेचो"। 💡 उदाहरण: Apple जैसी कंपनियाँ अब iPhone का एक बड़ा हिस्सा भारत में असेंबल करती हैं (Foxconn/Tata की फैक्ट्रियों में) — यह Make in India पहल का ही परिणाम है।

राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (National Manufacturing Mission — बजट 2025-26)

Make in India के अधूरे लक्ष्यों को पूरा करने और नई गति देने के लिए बजट 2025-26 में "राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन" की घोषणा हुई — जो छोटे, मझोले व बड़े तीनों प्रकार के उद्योगों को कवर करता है।

A. व्यापार करने की सुगमता एवं लागत (Ease and Cost of Doing Business)

B. भविष्य के लिए तैयार कार्यबल (Future-Ready Workforce) — नई मांग वाली नौकरियों हेतु कुशल जनशक्ति

C. सशक्त एवं गतिशील MSME क्षेत्र (Vibrant & Dynamic MSME Sector)

D. तकनीक की उपलब्धता (Availability of Technology)

E. गुणवत्तापूर्ण उत्पाद (Quality Products)

📊 राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन — लक्ष्य एवं फोकस — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. लक्ष्य: 2030 तक विनिर्माण का GDP में हिस्सा बढ़ाकर 20% करना। 2. क्लीन-टेक विनिर्माण (Clean Tech Manufacturing) पर बल — सोलर PV सेल, EV बैटरी, मोटर व कंट्रोलर, इलेक्ट्रोलाइज़र, विंड टर्बाइन, अति-उच्च वोल्टेज पारेषण उपकरण, ग्रिड-स्केल बैटरी। 3. फुटवियर व लेदर सेक्टर के लिए "फोकस प्रोडक्ट स्कीम" — लक्ष्य: 22 लाख रोज़गार, ₹4 लाख करोड़ टर्नओवर, ₹1.1 लाख करोड़ निर्यात।

10उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI — Production Linked Incentive Scheme)

📖 परिभाषा (Definition): उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme)

📚 मानक परिभाषा: "आत्मनिर्भर भारत" (Aatmanirbhar Bharat) दृष्टिकोण के तहत भारत सरकार की प्रमुख योजना, जो घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात निर्भरता घटाने व निर्यात बढ़ाने के लिए वृद्धिशील उत्पादन व बिक्री से जुड़े वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। ✅ सरल शब्दों में: सरकार कंपनियों से कहती है — "तुम जितना ज़्यादा भारत में बनाओगे और बेचोगे, हम तुम्हें उतना ही कैशबैक (Incentive) देंगे" — जैसे किसी दुकान की "ज़्यादा खरीदो, ज़्यादा छूट पाओ" स्कीम। 💡 उदाहरण: मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियाँ (जैसे सैमसंग, फॉक्सकॉन) PLI के तहत भारत में उत्पादन बढ़ाने पर सरकार से नकद प्रोत्साहन पाती हैं — इसी वजह से आज भारत मोबाइल विनिर्माण का बड़ा वैश्विक केंद्र बन चुका है।

PLI योजना 14 प्रमुख क्षेत्रों — जैसे मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, सफेद वस्तुएँ (White Goods — AC, LED), विशेष इस्पात आदि — के लिए लगभग ₹1.97 लाख करोड़ (कुछ सरकारी दस्तावेज़ों में ₹1.91 लाख करोड़) के कुल परिव्यय (Outlay) के साथ शुरू की गई।

📊 PLI योजना — उपलब्धियाँ (31 दिसंबर 2025 तक, नवीनतम) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. कुल निवेश: ₹2.16 लाख करोड़ से अधिक (14 क्षेत्रों में)। 2. रोज़गार सृजन: 14.39 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार। 3. कुल बिक्री (Cumulative Sales): ₹20.41 लाख करोड़ से अधिक। 4. कुल निर्यात: ₹8.3 लाख करोड़ से अधिक। 5. सरकार द्वारा अब तक वितरित प्रोत्साहन राशि: ₹28,748 करोड़। 6. 836 आवेदन 14 क्षेत्रों में स्वीकृत। 7. भारत सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के तहत 10 परियोजनाओं में ₹1.6 लाख करोड़ का निवेश — यह अलग किंतु संबंधित पहल है।

ध्यान दें (आँकड़ों में भिन्नता): PLI के आँकड़े अलग-अलग समय पर अलग स्रोतों में थोड़े भिन्न मिल सकते हैं (जैसे आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने ₹2 लाख करोड़+ निवेश व 12.6 लाख रोज़गार का उल्लेख किया था) — क्योंकि यह एक सतत गतिशील (Continuously Updating) योजना है। परीक्षा में नवीनतम व सबसे आधिकारिक (जैसे बजट दस्तावेज़/आर्थिक सर्वेक्षण) आँकड़े को प्राथमिकता दें, और अनुमानित सीमा (₹2-2.2 लाख करोड़ निवेश, 12-15 लाख रोज़गार) याद रखना पर्याप्त है।

11Startup India, Stand-Up India एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान

📖 परिभाषा (Definition): स्टार्टअप इंडिया (Startup India)

📚 मानक परिभाषा: 2016 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया अभियान, जिसका उद्देश्य उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा देना है, विशेषकर तकनीक व सेवा क्षेत्र में — जिसके तहत स्टार्टअप्स को कर छूट व सरल नियामक प्रक्रियाएँ मिलती हैं। ✅ सरल शब्दों में: नए विचार लेकर आने वाले युवा उद्यमियों को सरकार टैक्स में छूट व कम कागज़ी कार्रवाई देकर प्रोत्साहित करती है — जैसे नए खिलाड़ी को मैदान में उतरने से पहले खास सुविधाएँ मिलें। 💡 उदाहरण: Zomato, Paytm, Ola जैसी कंपनियाँ कभी छोटे स्टार्टअप के रूप में DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) से मान्यता प्राप्त कर आगे बढ़ीं और आज बड़ी कंपनियाँ (कुछ यूनिकॉर्न भी) बन चुकी हैं।

📊 Startup India — नवीनतम आँकड़े (2026) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की कुल संख्या 2.40 लाख से अधिक — भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (Startup Ecosystem) बन चुका है। 2. FY26 (वित्त वर्ष 2025-26) में रिकॉर्ड 55,200+ नए स्टार्टअप्स को DPIIT मान्यता मिली — अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि। 3. मार्च 2026 तक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने लगभग 23.36 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित किए। 4. जून 2026 तक भारत में यूनिकॉर्न (Unicorn — $1 अरब से अधिक मूल्यांकन वाला स्टार्टअप) स्टार्टअप्स की संख्या 131 तक पहुँची; 2026 में जुड़े नए यूनिकॉर्न — Juspay (जनवरी), KreditBee (अप्रैल), Skyroot Aerospace (मई)। 5. यूनिकॉर्न की संख्या में बेंगलुरु सबसे आगे (55), उसके बाद मुंबई (22) व गुरुग्राम (21)। 6. फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds for Startups): SIDBI द्वारा प्रबंधित ₹10,000 करोड़ का कोष, जो 135+ वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के माध्यम से स्टार्टअप्स में निवेशित।

📖 परिभाषा (Definition): स्टैंड-अप इंडिया (Stand-Up India)

📚 मानक परिभाषा: 2016 में वित्त मंत्रालय द्वारा शुरू योजना, जिसके तहत प्रत्येक बैंक शाखा को कम-से-कम एक अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) उधारकर्ता व एक महिला उधारकर्ता को ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का बैंक ऋण ग्रीनफील्ड उद्यम स्थापित करने हेतु देना होता है। ✅ सरल शब्दों में: बैंकों को नियम बनाकर कहा गया है कि "कम से कम एक SC/ST व एक महिला को नया व्यापार शुरू करने के लिए ज़रूर कर्ज़ दो" — ताकि वंचित वर्गों को भी उद्यमी बनने का बराबर मौका मिले। 💡 उदाहरण: किसी गाँव की महिला जो नई सिलाई फैक्ट्री खोलना चाहती है, वह स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत अपनी नज़दीकी बैंक शाखा से ₹10 लाख तक का ऋण आसानी से प्राप्त कर सकती है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान (AtmaNirbhar Bharat Abhiyan, 2020)

कोविड-19 महामारी के बाद 2020 में शुरू किया गया व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण, जिसका उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर व वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) में मज़बूत खिलाड़ी बनाना है — यह "स्थानीय के लिए मुखर" (Vocal for Local) के सिद्धांत पर आधारित है।

पाँच स्तंभ (Five Pillars)संक्षिप्त विवरण
अर्थव्यवस्था (Economy)वृद्धिशील छलांग, न कि क्रमिक परिवर्तन
अवसंरचना (Infrastructure)आधुनिक भारत की पहचान बनाने वाली अवसंरचना
व्यवस्था (System)21वीं सदी की तकनीक-संचालित व्यवस्थाएँ
जीवंत जनसांख्यिकी (Vibrant Demography)विश्व की सबसे बड़ी जनसांख्यिकी को ऊर्जा स्रोत बनाना
मांग (Demand)मांग एवं आपूर्ति शृंखला की पूर्ण क्षमता का उपयोग

PLI और आत्मनिर्भर भारत का संबंध: PLI योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का सबसे महत्वपूर्ण क्रियान्वयन उपकरण (Implementation Tool) मानी जाती है — क्योंकि यह सीधे घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित कर आयात-निर्भरता घटाती है।

🎯 Make in India, PLI एवं Startup India — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द | Pre: conceptual clarity

12राजस्थान उद्योग कनेक्शन (Rajasthan Industry Connection)

📊 राजस्थान — औद्योगिक एवं निवेश परिदृश्य (नवीनतम आँकड़े) — नवीनतम आँकड़े (Latest Data)

1. राजस्थान का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्तमान भावों पर 2025-26 में लगभग ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित — पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10.24% की वृद्धि। 2. राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा लगभग 26.5% है — जिसे पत्थर (Stone), सीमेंट (Cement) व हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी स्थिति से बल मिलता है। 3. राइज़िंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट (Rising Rajasthan Global Investment Summit) — 9-11 दिसंबर 2024 को जयपुर के JECC, सीतापुरा में आयोजित; इसमें राजस्थान के इतिहास में सर्वाधिक — लगभग ₹35 लाख करोड़ के निवेश आशय पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर हुए (ध्यान रहे — यह हस्ताक्षरित MoU राशि है, वास्तविक ज़मीन पर उतरा निवेश इससे कम व चरणबद्ध रूप में आता है)। 4. समिट में 32 देशों की भागीदारी रही, जिनमें से 17 देश "पार्टनर कंट्री" के रूप में शामिल थे।

🏛️ प्रमुख सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ

💡 राजस्थान कनेक्शन उदाहरण

जिस तरह केंद्र सरकार ने 1991 में लाइसेंस राज हटाकर देश भर में उद्योग लगाना आसान किया, उसी तर्ज पर राजस्थान सरकार ने RIPS 2024 व भूमि रूपांतरण छूट जैसी नीतियों से राज्य में छोटे उद्योगों के लिए फैक्ट्री लगाना आसान बनाया है — यही "उदारीकरण की भावना" राज्य स्तर पर भी लागू होती दिख रही है।

★ परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य (Pre + Mains) ★

1. औद्योगिक नीति संकल्प (IPR) 1956 — भारत का "आर्थिक संविधान" कहलाता है। 📌 Pre 2. कार्वे समिति (1955) ने ग्रामीण विकास हेतु लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की सिफारिश की। 📌 Pre 3. पहला EPZ (Export Processing Zone) 1965 में कांडला (गुजरात) में स्थापित हुआ। 📌 Pre 4. 1991 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर मात्र 2 सप्ताह के आयात लायक रह गया था। 📝 10M 5. 1991 सुधारों के वास्तुकार — प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव व वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह। 📌 Pre 6. LPG सुधार का पूरा नाम — उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation), वैश्वीकरण (Globalisation)। 📌 Pre 7. FERA (1973) की जगह FEMA (1999) लागू हुआ — दंडात्मक की जगह प्रबंधकीय दृष्टिकोण। 📌 Pre 8. विनिवेश के 2 प्रकार — टोकन (49% तक) व रणनीतिक (51% या अधिक, प्रबंधन नियंत्रण सहित)। 📝 5M 9. PSU वर्गीकरण — महारत्न, नवरत्न, मिनीरत्न (श्रेणी I व II) — स्वायत्तता के आधार पर। 📌 Pre 10. महारत्न दर्जे के लिए नेटवर्थ > ₹15,000 करोड़ व टर्नओवर > ₹25,000 करोड़ आवश्यक। 📌 Pre 11. WTO की स्थापना 1995 में GATT (1948, 23 देश) के उत्तराधिकारी के रूप में हुई। 📌 Pre 12. SEZ अधिनियम वर्ष — 2005; SEZ को "डीम्ड फॉरेन टेरिटरी" माना जाता है। 📌 Pre 13. NIMZ की परिकल्पना राष्ट्रीय विनिर्माण नीति, 2011 के तहत हुई; न्यूनतम क्षेत्रफल 5,000 हेक्टेयर। 📌 Pre 14. विनिर्माण क्षेत्र का वर्तमान GDP हिस्सा लगभग 17%; लक्ष्य — 2030 तक 20% (राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन)। 📝 10M 15. MSMED अधिनियम वर्ष — 2006। 📌 Pre 16. MSME की नई परिभाषा (2025, 1 अप्रैल से लागू) — सूक्ष्म: निवेश ₹2.5cr/टर्नओवर ₹10cr; लघु: ₹25cr/₹100cr; मध्यम: ₹125cr/₹500cr। 📝 5M 17. MSME का भारत के GDP में योगदान ~30.1%, निर्यात में योगदान ~45.7%। 📝 10M 18. CGTMSE के तहत क्रेडिट गारंटी कवर बजट 2025-26 में ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ किया गया। 📌 Pre 19. Make in India लॉन्च वर्ष — 2014; नोडल मंत्रालय — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय। 📌 Pre 20. PLI योजना 14 क्षेत्रों के लिए, कुल परिव्यय लगभग ₹1.97 लाख करोड़। 📌 Pre 21. Startup India लॉन्च वर्ष — 2016; DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स 2.40 लाख से अधिक (2026)। 📝 5M 22. Stand-Up India — प्रत्येक बैंक शाखा से 1 SC/ST व 1 महिला उधारकर्ता को ₹10 लाख-₹1 करोड़ ऋण अनिवार्य। 📌 Pre 23. आत्मनिर्भर भारत अभियान (2020) के 5 स्तंभ — अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, व्यवस्था, जनसांख्यिकी, मांग। 📝 5M 24. राइज़िंग राजस्थान समिट (दिसंबर 2024) में ₹35 लाख करोड़ के MoU हस्ताक्षरित — राज्य के इतिहास में सर्वाधिक। 📝 10M

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न 📝 Pre MCQ | 5-अंक (60-70 शब्द) | 10-अंक (~120 शब्द) — हर Q पर tag दिया है

Q1. औद्योगिक नीति संकल्प, 1956 की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (10 अंक) Q2. 1991 के आर्थिक संकट के कारण एवं भारत सरकार की प्रतिक्रिया (नई आर्थिक नीति) का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q3. उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG) से आप क्या समझते हैं? (5 अंक) Q4. विनिवेश के प्रकारों (टोकन एवं रणनीतिक) में अंतर स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q5. सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) के वर्गीकरण — महारत्न, नवरत्न व मिनीरत्न — की व्याख्या कीजिए। (Pre MCQ) Q6. SEZ एवं NIMZ में क्या अंतर है? (5 अंक) Q7. भारत में MSME की नई परिभाषा (2025) क्या है? इसका महत्व बताइए। (10 अंक) Q8. PLI योजना भारत के विनिर्माण क्षेत्र को किस प्रकार बढ़ावा दे रही है? (10 अंक) Q9. Make in India एवं Startup India पहलों की मुख्य उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए। (5 अंक) Q10. आत्मनिर्भर भारत अभियान के पाँच स्तंभ कौन-से हैं? (Pre MCQ) Q11. राइज़िंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 का राज्य की अर्थव्यवस्था पर क्या महत्व है? (5 अंक) Q12. MRTP Act का संबंध किससे है? (Pre MCQ) Q13. GATT के स्थान पर WTO की स्थापना किस वर्ष हुई? (Pre MCQ) Q14. औद्योगिक नीति 1991 के तहत किन क्षेत्रों में अभी भी लाइसेंसिंग अनिवार्य है? (IAS Pre) Q15. FDI और FII में कौन-सा निवेश अधिक स्थायी माना जाता है? (IAS Pre)

वर्षघटना / नीतिमहत्व
1948प्रथम औद्योगिक नीतिस्वतंत्र भारत की पहली औद्योगिक रूपरेखा
1955कार्वे समिति की सिफारिशग्रामीण विकास हेतु लघु उद्योगों को बढ़ावा
1956औद्योगिक नीति संकल्प (IPR 1956)भारत का "आर्थिक संविधान"; उद्योगों का A/B/C वर्गीकरण
1965पहला EPZ — कांडला (गुजरात)निर्यात-प्रोत्साहन क्षेत्रों की शुरुआत
1982NABARD की स्थापनाकृषि व ग्रामीण वित्त की शीर्ष संस्था
1991नई आर्थिक नीति (LPG सुधार)भारत की आर्थिक दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन
1995WTO की स्थापनाGATT का उत्तराधिकारी; वैश्विक व्यापार नियमन
1999FEMA अधिनियम लागूFERA का स्थान लिया; प्रबंधकीय दृष्टिकोण
2005SEZ अधिनियमविशेष आर्थिक क्षेत्रों की विधिक रूपरेखा
2006MSMED अधिनियमMSME की पहली विधिक परिभाषा व वर्गीकरण
2011राष्ट्रीय विनिर्माण नीति (NIMZ की परिकल्पना)बड़े एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप का विचार
2014Make in India लॉन्चविनिर्माण को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का अभियान
2016Startup India व Stand-Up India लॉन्चनवाचार, उद्यमिता व समावेशी उद्यमिता को बढ़ावा
2020MSME की नई परिभाषा (निवेश+टर्नओवर एकीकृत) व आत्मनिर्भर भारत अभियानMSME वर्गीकरण सरल; कोविड बाद आत्मनिर्भरता पर बल
2021PLI योजना का विस्तार (14 क्षेत्र) व NaBFID की स्थापनाघरेलू विनिर्माण प्रोत्साहन व अवसंरचना वित्तपोषण
दिसंबर 2024राइज़िंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट₹35 लाख करोड़ के MoU — राज्य के इतिहास में सर्वाधिक
2025 (1 अप्रैल)MSME की नई परिभाषा (निवेश 2.5x, टर्नओवर 2x) व राष्ट्रीय विनिर्माण मिशनMSME दायरा विस्तृत; विनिर्माण को नई गति
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