🗺️ अध्याय 14/15 — आधुनिक भारत का इतिहास

देशी रियासतों का एकीकरण एवं राज्य पुनर्गठन

Integration of Princely States & State Reorganization | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. पृष्ठभूमि — रियासती भारत का स्वरूप
  2. भारतीय राज्य विभाग — पटेल और V. P. मेनन
  3. यथास्थिति समझौता एवं विलय पत्र
  4. एकीकरण के चरण
  5. विशेष रियासतें — विस्तृत विवेचना
  6. प्रिवी पर्स (Privy Purse) — उन्मूलन
  7. पुनर्गठन की पृष्ठभूमि — भाषाई राज्यों की माँग
  8. S. K. धर आयोग (1948)
  9. JVP समिति (Linguistic Provinces Committee), 1948-49
  10. पोट्टि श्रीरामुलु और आंध्र राज्य (1952-53)
  11. राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission — SRC), 1953
  12. राज्य पुनर्गठन अधिनियम (States Reorganisation Act — SRA), 1956
  13. 1956 के बाद नए राज्यों का निर्माण
  14. एकीकरण एवं पुनर्गठन का महत्व एवं प्रभाव
  15. भाषाई राज्य आयोग/समितियाँ — तुलनात्मक विश्लेषण
  16. परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य
  17. एकीकरण एवं पुनर्गठन — कालरेखा

स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही भारत के सामने दो विकट चुनौतियाँ थीं — पहली, 562 से अधिक देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण, और दूसरी, भाषाई एवं सांस्कृतिक आधार पर राज्यों का पुनर्गठन। इन दोनों कार्यों को सरदार वल्लभभाई पटेल, V. P. मेनन और भारत सरकार ने अद्भुत कुशलता, कूटनीति तथा दृढ़ संकल्प से पूरा किया।

भाग-क : देशी रियासतों का एकीकरण

1पृष्ठभूमि — रियासती भारत का स्वरूप

1947 में भारत में लगभग 562-565 देशी रियासतें (Princely States) थीं। ये रियासतें क्षेत्रफल और जनसंख्या में बहुत भिन्न थीं — कुछ छोटे गाँव जैसी, तो हैदराबाद जितनी विशाल (फ्रांस के बराबर)।

ब्रिटिश सर्वोच्चता (Paramountcy)

रियासतों की तीन संभावित स्थितियाँ

माउंटबेटन का चेतावनी भाषण: वायसराय माउंटबेटन ने 25 जुलाई, 1947 को रियासतों के नरेशों को संबोधित करते हुए कहा — "आप न तो डोमिनियन सरकारों से भाग सकते हैं जो आपके पड़ोसी हैं, और न ही अपनी प्रजा से, जिनके कल्याण के लिए आप उत्तरदायी हैं।"

2भारतीय राज्य विभाग — पटेल और V. P. मेनन

27 जून, 1947 को भारत सरकार ने "भारतीय राज्य विभाग" (States Department) की स्थापना की। यह विभाग देशी रियासतों के एकीकरण का केन्द्रीय संस्थान था।

सरदार वल्लभभाई पटेल — गृह मंत्री एवं विभाग-प्रमुख

V. P. मेनन — विभाग के सचिव

पटेल की "गाजर और छड़ी नीति" (Carrot & Stick Policy)

🥕 गाजर नीति (Carrot — प्रलोभन)
  • शासकों में राष्ट्रवाद की भावना जगाई
  • पारंपरिक अधिकारों की रक्षा का आश्वासन
  • आंतरिक मामलों में स्वायत्तता का वादा
  • प्रिवी पर्स (Privy Purse) — भूमि के बदले निश्चित राशि
  • उपाधियों और झंडों का सम्मान
  • राजप्रमुख (Rajpramukh) के रूप में नियुक्ति
🪄 छड़ी नीति (Stick — दबाव)
  • जन-आंदोलन के खतरे का उपयोग
  • प्रजामंडलों को विलय माँगने हेतु प्रेरित
  • जूनागढ़ की जरूरी आपूर्तियाँ काट दीं
  • सैन्य कार्यवाही की धमकी
  • जूनागढ़ में सैन्य कब्जे का उपयोग
  • हैदराबाद में पुलिस कार्यवाही

3यथास्थिति समझौता एवं विलय पत्र

दस्तावेजविवरणमुख्य विशेषता
यथास्थिति समझौता(Standstill Agreement — SSA)3 जून, 1947 को मसौदा तैयार; 1 वर्ष तक यथास्थिति बनाए रखने का समझौतासंप्रभुता का हस्तांतरण नहीं; केवल व्यापार, संचार, पोस्ट आदि की निरंतरता; उदाहरण — कश्मीर के हरिसिंह ने SSA किया
विलय पत्र(Instrument of Accession — IOA)1935 के भारत शासन अधिनियम में पहली बार उल्लेख; V. P. मेनन द्वारा मसौदासंप्रभुता का हस्तांतरण; केवल तीन विषय — रक्षा, विदेश नीति, संचार; जूनागढ़ ने पाकिस्तान के साथ IOA किया था

IOA में प्रदत्त सुविधाएँ (रियासतों को)

4एकीकरण के चरण

चरण-1 : विलय पत्र पर हस्ताक्षर (जून-अगस्त 1947)

चरण-2 : पूर्ण एकीकरण (1948-1950)

5विशेष रियासतें — विस्तृत विवेचना

(अ) जूनागढ़ (सौराष्ट्र)

जूनागढ़ एक मुस्लिम नवाब (महाबत खाँ) द्वारा शासित रियासत थी, परंतु यहाँ की 80% जनसंख्या हिंदू थी।

UPSC तथ्य: जूनागढ़ के नवाब ने पाकिस्तान के साथ IOA (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए थे — यह IOA का दुरुपयोग था क्योंकि जूनागढ़ भारत से घिरा था।

(ब) हैदराबाद — ऑपरेशन पोलो (Operation Polo)

हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी और समृद्ध रियासत थी — फ्रांस के बराबर क्षेत्रफल। निजाम मीर उस्मान अली खाँ (मुस्लिम) शासक थे, जबकि 87% जनसंख्या हिंदू थी।

घटनाक्रम

ऑपरेशन पोलो (Operation Polo), 13-18 सितंबर, 1948

UPSC टिप: ऑपरेशन पोलो 13-18 सितंबर, 1948 को हुआ। रजाकारों का नेतृत्व कासिम रजवी ने किया। यह भारत की "पुलिस कार्यवाही" नहीं, वास्तव में एक सैन्य अभियान था।

(स) कश्मीर — विलय की जटिल कहानी

कश्मीर की रियासत का शासक हरिसिंह (हिंदू डोगरा राजा) था, जबकि 77% जनसंख्या मुस्लिम थी। यह सबसे जटिल और विवादास्पद एकीकरण था।

विशेष प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 370 कश्मीर को विशेष स्वायत्त दर्जा देता था (जो 5 अगस्त, 2019 को निरस्त किया गया)। अनुच्छेद 35A — स्थायी निवासियों के विशेष अधिकार।

(द) त्रावणकोर-कोचीन

त्रावणकोर के दीवान C. P. रामास्वामी अय्यर ने रियासत को स्वतंत्र घोषित करने का प्रयास किया।

(इ) भोपाल

(फ) मैसूर

(ग) अन्य विशेष मामले

रियासत / क्षेत्रविलय की स्थितिविशेषता
मणिपुर15 अगस्त 1947 को विलय पत्र; 1949 में पूर्ण विलयराजा बोधचंद्र सिंह; 1949 में राज्याभिषेक करके पटेल से मिले; C-class state
जोधपुर15 अगस्त 1947 को विलयपाकिस्तान के साथ बातचीत; जिन्ना ने blank cheque दी थी; माउंटबेटन ने रोका
गोवा17 दिसंबर, 1961 — ऑपरेशन विजयपुर्तगाली उपनिवेश; नेहरू की वार्ता विफल; General J. N. Chaudhuri
पांडिचेरी (फ्रांसीसी)1 नवंबर, 1954 — शांतिपूर्ण हस्तांतरणफ्रांसीसी बस्तियाँ — नाता, माहे, यनम, पांडिचेरी
सिक्किम16 मई, 1975 — 36वाँ राज्यजनमत संग्रह के बाद; चोग्याल पालडेन थोंडुप नामग्याल; भारत का पूर्ण राज्य बना
हिमाचल प्रदेश1948 में 30 छोटी रियासतों को मिलाकरचीफ कमिश्नर का प्रांत; 1971 में पूर्ण राज्य
राजस्थान1948-1949 में 18 रियासतों को मिलाकर7 चरणों में गठन; राजप्रमुख — जयपुर के महाराजा; 30 मार्च 1949 — "राजस्थान दिवस"
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6प्रिवी पर्स (Privy Purse) — उन्मूलन

प्रिवी पर्स वह धनराशि थी जो भारत सरकार ने देशी रियासतों के शासकों को उनकी भूमि और संपत्ति के बदले में नियमित रूप से देने का वादा किया था।

भाग-ख : राज्यों का पुनर्गठन

7पुनर्गठन की पृष्ठभूमि — भाषाई राज्यों की माँग

भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की माँग स्वतंत्रता से पहले से ही उठती रही थी। कांग्रेस ने स्वयं 1920 में भाषाई आधार पर प्रांतीय समितियाँ गठित की थीं।

संविधान के अंतर्गत राज्यों का वर्गीकरण (1950)

वर्गविवरणउदाहरण
Part A (भाग-क)9 प्रांत — पूर्व ब्रिटिश भारत के प्रांत; चुने हुए विधानमंडलमद्रास, बंबई, UP, पश्चिम बंगाल आदि
Part B (भाग-ख)9 रियासतें — बड़ी देशी रियासतें; विधानमंडल; राजप्रमुखहैदराबाद, मैसूर, राजस्थान, पटियाला
Part C (भाग-ग)10 क्षेत्र — केन्द्र शासित; कुछ में विधानमंडलदिल्ली, अजमेर, कूर्ग, भोपाल
Part D (भाग-घ)अंडमान-निकोबार — केन्द्र शासितकेन्द्र प्रशासित; कोई विधानमंडल नहीं

8S. K. धर आयोग (1948)

17 जून, 1948 को भारत सरकार ने "भाषायी प्रांत आयोग" गठित किया। इसे S. K. धर आयोग भी कहा जाता है।

आयोग की सिफारिशें

परिणाम: धर आयोग की सिफारिशें जनभावनाओं के अनुकूल नहीं थीं। भाषाई राज्यों की माँग और तेज हुई।

9JVP समिति (Linguistic Provinces Committee), 1948-49

धर आयोग की अनुशंसाओं से असंतुष्ट जनता के दबाव पर जनवरी 1949 में जयपुर कांग्रेस अधिवेशन में JVP समिति गठित की गई।

JVP समिति की रिपोर्ट (अप्रैल 1949)

महत्वपूर्ण: JVP समिति ने भाषाई राज्यों को मना नहीं किया — बस उचित समय आने पर विचार करने को कहा। आंध्र के लिए जन-आंदोलन ने इसे अनिवार्य बना दिया।

10पोट्टि श्रीरामुलु और आंध्र राज्य (1952-53)

तेलुगुभाषी लोग मद्रास प्रांत से अलग अपना स्वतंत्र आंध्र राज्य चाहते थे। पोट्टि श्रीरामुलु के बलिदान ने इस माँग को ऐतिहासिक मोड़ दिया।

ऐतिहासिक महत्व: पोट्टि श्रीरामुलु का बलिदान भाषाई राज्यों के आंदोलन का निर्णायक मोड़ था। भारत सरकार ने महसूस किया कि अब भाषाई आधार पर पुनर्गठन अनिवार्य है।

11राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission — SRC), 1953

आंध्र राज्य के गठन के बाद अन्य भाषाई समूहों की माँगें और तेज हुईं। 22 दिसंबर, 1953 को भारत सरकार ने SRC का गठन किया।

आयोग के सदस्य

SRC की प्रमुख सिफारिशें (रिपोर्ट : 1955)

1. भाषा को राज्य पुनर्गठन का एक आधार माना जाना चाहिए; परंतु "एक भाषा – एक राज्य" के सिद्धांत को अस्वीकार किया

2. राज्य पुनर्गठन के लिए चार आधार : (1) राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता (2) भाषाई एवं सांस्कृतिक एकरूपता (3) आर्थिक, वित्तीय एवं प्रशासनिक सुविधा (4) योजना

3. राज्यों की चार श्रेणियाँ (A, B, C, D) समाप्त कर दो श्रेणियाँ : (1) राज्य (States) — 16 (2) केन्द्र शासित प्रदेश (UT) — 3

4. बंबई — एकल राज्य के रूप में; पंजाब — एकल राज्य; हैदराबाद का विभाजन

जहाँ SRC की सिफारिशें अस्वीकार/संशोधित हुईं

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12राज्य पुनर्गठन अधिनियम (States Reorganisation Act — SRA), 1956

SRC की सिफारिशों को लागू करने के लिए 1956 में 7वाँ संविधान संशोधन और राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ।

नवनिर्मित प्रमुख राज्य (1 नवंबर, 1956)

राज्यपूर्व का क्षेत्रविशेषता
आंध्र प्रदेशआंध्र राज्य + हैदराबाद के तेलुगु क्षेत्रराजधानी : हैदराबाद; पहला भाषाई राज्य
कर्नाटक (तब मैसूर)मैसूर + बंबई-कर्नाटक + हैदराबाद-कर्नाटककन्नड़भाषी; 1973 में मैसूर→कर्नाटक नाम
केरलत्रावणकोर-कोचीन + मालाबार (मद्रास से)मलयालम भाषी
मध्य प्रदेशमध्य भारत + विंध्य + भोपाल + मध्य प्रदेशहिंदीभाषी; सबसे बड़ा राज्य (2000 तक)
राजस्थानराजस्थान + अजमेरहिंदीभाषी; राजधानी जयपुर
महाराष्ट्र1960 में बंबई सेमराठीभाषी; 1 मई 1960 — महाराष्ट्र दिवस
गुजरात1960 में बंबई सेगुजरातीभाषी; 1 मई 1960 — गुजरात दिवस
पंजाब1966 में विभाजितपंजाबी + हिंदी क्षेत्र अलग — पंजाब, हरियाणा, HP

131956 के बाद नए राज्यों का निर्माण

राज्यवर्षपहले का क्षेत्रकारण/विशेषता
महाराष्ट्र1 मई, 1960बंबई राज्य (मराठी भाग)मराठी-गुजराती विवाद; संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन
गुजरात1 मई, 1960बंबई राज्य (गुजराती भाग)गुजराती भाषी; अहमदाबाद → गांधीनगर
नागालैंड1 दिसंबर, 1963असमनागा जनजातीय माँग; 16वाँ राज्य
हरियाणा1 नवंबर, 1966पूर्वी पंजाबहिंदीभाषी; पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966
हिमाचल प्रदेश25 जनवरी, 1971पहाड़ी क्षेत्रपहाड़ी भाषी; 1948 से C-State, 1971 में पूर्ण राज्य
मेघालय21 जनवरी, 1972असमआदिवासी माँग; खासी-जयंतिया-गारो
मणिपुर21 जनवरी, 1972C-Stateपूर्ण राज्य का दर्जा; पूर्वोत्तर भारत
त्रिपुरा21 जनवरी, 1972C-Stateपूर्ण राज्य का दर्जा
सिक्किम16 मई, 1975स्वतंत्र रियासत36वाँ राज्य; जनमत संग्रह; चोग्याल का पतन
मिजोरम20 फरवरी, 1987असममिजो नेशनल फ्रंट के बाद शांति समझौता
अरुणाचल प्रदेश20 फरवरी, 1987NEFA (C-State)अरुणाचल; चीन से सीमा विवाद
गोवा30 मई, 1987केन्द्र शासित25वाँ राज्य; 1961 से UT, 1987 में पूर्ण राज्य
छत्तीसगढ1 नवंबर, 2000मध्य प्रदेश26वाँ राज्य; आदिवासी बहुल
उत्तराखंड9 नवंबर, 2000उत्तर प्रदेश27वाँ राज्य; पहाड़ी माँग
झारखंड15 नवंबर, 2000बिहार28वाँ राज्य; आदिवासी बहुल; बिरसा मुंडा की जयंती पर
तेलंगाना2 जून, 2014आंध्र प्रदेश29वाँ राज्य; के. चंद्रशेखर राव; हैदराबाद राजधानी

14एकीकरण एवं पुनर्गठन का महत्व एवं प्रभाव

देशी रियासतों के एकीकरण का महत्व

राज्य पुनर्गठन का महत्व

15भाषाई राज्य आयोग/समितियाँ — तुलनात्मक विश्लेषण

आयोग/समितिवर्षअध्यक्षमुख्य सिफारिशपरिणाम
S. K. धर आयोग1948एस. के. धरभाषाई राज्य अस्वीकार; प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकताजनभावना के विरुद्ध; आंदोलन तेज
JVP समिति1948-49नेहरू-पटेल-पट्टाभितत्काल पुनर्गठन नहीं; अत्यधिक जन-माँग हो तो विचारसीमित प्रभाव; पोट्टि श्रीरामुलु का अनशन
SRC (फजल अली)1953-55फजल अलीभाषा एक आधार; 14 राज्य + 6 UT; 4 श्रेणियाँ समाप्तSRA 1956 — 1 नवंबर, 1956 से लागू
पंजाब पुनर्गठन आयोग1966शाह आयोगपंजाब → पंजाब + हरियाणा + HP; चंडीगढ़ UT1 नवंबर, 1966 — हरियाणा और पंजाब

16परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य

★ परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य ★

1. 1947 में देशी रियासतों की संख्या — लगभग 562-565; क्षेत्रफल भारत का 48%; जनसंख्या 28% 2. V. P. मेनन की पुस्तक : "The Story of Integration of States" — एकीकरण का प्रामाणिक इतिहास 3. पटेल की नीति : "Carrot and Stick Policy" — प्रलोभन और दबाव का संतुलित प्रयोग 4. जूनागढ़ — नवाब ने पाकिस्तान में IOA किया; 20 फरवरी 1948 जनमत संग्रह; भारत में विलय 5. हैदराबाद — ऑपरेशन पोलो : 13-18 सितंबर, 1948; जनरल जे. एन. चौधरी; 17 सितंबर को आत्मसमर्पण 6. कश्मीर — 26 अक्तूबर, 1947 को हरिसिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए; कबाइली आक्रमण 22 अक्तूबर 1947 7. त्रावणकोर — C. P. रामास्वामी अय्यर ने स्वतंत्र रहने का प्रयास; जन-आंदोलन से विलय 8. प्रिवी पर्स — अनुच्छेद 291 (मूल संविधान); 26वाँ संविधान संशोधन 1971 — इंदिरा गांधी ने समाप्त किया 9. गोवा — ऑपरेशन विजय — 17 दिसंबर, 1961; पुर्तगाली उपनिवेश; 36वाँ राज्य नहीं, पहले UT 10. सिक्किम — 36वाँ राज्य — 16 मई, 1975; चोग्याल थोंडुप नामग्याल; 35वाँ → 36वाँ (संशोधन के बाद) 11. पोट्टि श्रीरामुलु — 56 दिन अनशन; 15 दिसंबर 1952 मृत्यु; 1 अक्तूबर 1953 — आंध्र राज्य गठित 12. आंध्र राज्य (1953) — भारत का पहला भाषाई राज्य; राजधानी : कुर्नूल; 1956 में हैदराबाद राजधानी 13. S. K. धर आयोग (1948) — भाषाई राज्य अस्वीकार; JVP समिति (1949) — नेहरू-पटेल-पट्टाभि 14. SRC = फजल अली आयोग (1953-55); रिपोर्ट 1955; SRA 1956 — 1 नवंबर, 1956 प्रभावी 15. SRA 1956 — 14 राज्य + 6 UT; 7वाँ संविधान संशोधन; A, B, C, D वर्गीकरण समाप्त 16. महाराष्ट्र-गुजरात — 1 मई, 1960 (बंबई राज्य से विभाजित); तेलंगाना — 2 जून, 2014 (29वाँ राज्य) 17. जोधपुर — जिन्ना ने blank cheque की पेशकश की थी; माउंटबेटन ने भारत में मिलाया 18. पांडिचेरी — 1 नवंबर, 1954 (फ्रांसीसी शांतिपूर्ण हस्तांतरण); गोवा — 17 दिसंबर, 1961 (सैन्य)

17एकीकरण एवं पुनर्गठन — कालरेखा

तिथिघटनामहत्व
27 जून, 1947भारतीय राज्य विभाग की स्थापनापटेल — अध्यक्ष; V. P. मेनन — सचिव
25 जुलाई, 1947पटेल का रियासतों के नरेशों को संबोधनभारत में विलय के लिए तैयार करना
15 अगस्त, 1947अधिकांश रियासतों ने IOA पर हस्ताक्षर किएकश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ अपवाद
22 अक्तूबर, 1947कश्मीर पर कबाइली आक्रमणपाकिस्तानी समर्थन
26 अक्तूबर, 1947कश्मीर का भारत में विलय पत्रहरिसिंह का हस्ताक्षर
नवंबर, 1947जूनागढ़ पर भारतीय नियंत्रणनवाब पाकिस्तान भागा
20 फरवरी, 1948जूनागढ़ जनमत संग्रह91% भारत के पक्ष में
13-18 सितंबर, 1948ऑपरेशन पोलो — हैदराबादजनरल जे. एन. चौधरी; निजाम का आत्मसमर्पण
26 जनवरी, 1950भारतीय संविधान लागूA, B, C, D वर्गीकरण; एकीकरण संपन्न
17 जून, 1948S. K. धर आयोग गठितभाषाई राज्य अस्वीकार
अप्रैल 1949JVP समिति की रिपोर्टभाषाई राज्य — तत्काल नहीं
19 अक्तूबर, 1952पोट्टि श्रीरामुलु का अनशन प्रारंभआंध्र माँग; "आंध्र गांधी"
15 दिसंबर, 1952पोट्टि श्रीरामुलु का निधन (56 दिन अनशन)जन-आंदोलन; सरकार पर दबाव
1 अक्तूबर, 1953आंध्र राज्य गठितभारत का पहला भाषाई राज्य; राजधानी कुर्नूल
22 दिसंबर, 1953SRC (फजल अली आयोग) गठितत्रिसदस्यीय आयोग
1955SRC रिपोर्ट14 राज्य + 6 UT; 4 श्रेणियाँ समाप्त
19 अक्तूबर, 19567वाँ संविधान संशोधन — राष्ट्रपति की स्वीकृतिSRA का आधार
1 नवंबर, 1956राज्य पुनर्गठन अधिनियम प्रभावी14 राज्य + 6 UT; भाषाई आधार
1 मई, 1960महाराष्ट्र और गुजरात राज्यबंबई राज्य का विभाजन
1 दिसंबर, 1963नागालैंड — 16वाँ राज्यपूर्वोत्तर; नागा माँग
17 दिसंबर, 1961ऑपरेशन विजय — गोवापुर्तगाली औपनिवेशिक शासन समाप्त
1 नवंबर, 1966पंजाब पुनर्गठन — हरियाणा अलगपंजाबी सूबा आंदोलन; चंडीगढ़ UT
16 मई, 1975सिक्किम — 36वाँ राज्यचोग्याल का पतन; जनमत संग्रह
1 नवंबर, 2000छत्तीसगढ, उत्तराखंड, झारखंडतीन नए राज्य एक ही दिन
2 जून, 2014तेलंगाना — 29वाँ राज्यआंध्र से अलग; हैदराबाद राजधानी

🇮🇳 स्वर्णिम सूत्र 🇮🇳

एकीकरण : 27 जून 1947 (States Dept.) → IOA → जूनागढ़ (जनमत 1948) → कश्मीर (26 अक्तूबर 1947) → ऑपरेशन पोलो (सितंबर 1948) → 26 जनवरी 1950 (पूर्ण एकीकरण) पुनर्गठन : धर आयोग (1948) → JVP (1949) → पोट्टि श्रीरामुलु (1952-53) → आंध्र (1953) → SRC/फजल अली (1953-55) → SRA 1956 (1 नवंबर) याद रखें : "सरदार पटेल ने वह किया जो जर्मनी में बिस्मार्क और इटली में कैवूर भी नहीं कर सके — 562 रियासतों को एकता के सूत्र में पिरोया।"

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