स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही भारत के सामने दो विकट चुनौतियाँ थीं — पहली, 562 से अधिक देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण, और दूसरी, भाषाई एवं सांस्कृतिक आधार पर राज्यों का पुनर्गठन। इन दोनों कार्यों को सरदार वल्लभभाई पटेल, V. P. मेनन और भारत सरकार ने अद्भुत कुशलता, कूटनीति तथा दृढ़ संकल्प से पूरा किया।
भाग-क : देशी रियासतों का एकीकरण
1947 में भारत में लगभग 562-565 देशी रियासतें (Princely States) थीं। ये रियासतें क्षेत्रफल और जनसंख्या में बहुत भिन्न थीं — कुछ छोटे गाँव जैसी, तो हैदराबाद जितनी विशाल (फ्रांस के बराबर)।
ब्रिटिश सर्वोच्चता (Paramountcy)
रियासतों की तीन संभावित स्थितियाँ
माउंटबेटन का चेतावनी भाषण: वायसराय माउंटबेटन ने 25 जुलाई, 1947 को रियासतों के नरेशों को संबोधित करते हुए कहा — "आप न तो डोमिनियन सरकारों से भाग सकते हैं जो आपके पड़ोसी हैं, और न ही अपनी प्रजा से, जिनके कल्याण के लिए आप उत्तरदायी हैं।"
27 जून, 1947 को भारत सरकार ने "भारतीय राज्य विभाग" (States Department) की स्थापना की। यह विभाग देशी रियासतों के एकीकरण का केन्द्रीय संस्थान था।
सरदार वल्लभभाई पटेल — गृह मंत्री एवं विभाग-प्रमुख
V. P. मेनन — विभाग के सचिव
| दस्तावेज | विवरण | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| यथास्थिति समझौता(Standstill Agreement — SSA) | 3 जून, 1947 को मसौदा तैयार; 1 वर्ष तक यथास्थिति बनाए रखने का समझौता | संप्रभुता का हस्तांतरण नहीं; केवल व्यापार, संचार, पोस्ट आदि की निरंतरता; उदाहरण — कश्मीर के हरिसिंह ने SSA किया |
| विलय पत्र(Instrument of Accession — IOA) | 1935 के भारत शासन अधिनियम में पहली बार उल्लेख; V. P. मेनन द्वारा मसौदा | संप्रभुता का हस्तांतरण; केवल तीन विषय — रक्षा, विदेश नीति, संचार; जूनागढ़ ने पाकिस्तान के साथ IOA किया था |
IOA में प्रदत्त सुविधाएँ (रियासतों को)
चरण-1 : विलय पत्र पर हस्ताक्षर (जून-अगस्त 1947)
चरण-2 : पूर्ण एकीकरण (1948-1950)
जूनागढ़ एक मुस्लिम नवाब (महाबत खाँ) द्वारा शासित रियासत थी, परंतु यहाँ की 80% जनसंख्या हिंदू थी।
UPSC तथ्य: जूनागढ़ के नवाब ने पाकिस्तान के साथ IOA (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए थे — यह IOA का दुरुपयोग था क्योंकि जूनागढ़ भारत से घिरा था।
हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी और समृद्ध रियासत थी — फ्रांस के बराबर क्षेत्रफल। निजाम मीर उस्मान अली खाँ (मुस्लिम) शासक थे, जबकि 87% जनसंख्या हिंदू थी।
घटनाक्रम
ऑपरेशन पोलो (Operation Polo), 13-18 सितंबर, 1948
UPSC टिप: ऑपरेशन पोलो 13-18 सितंबर, 1948 को हुआ। रजाकारों का नेतृत्व कासिम रजवी ने किया। यह भारत की "पुलिस कार्यवाही" नहीं, वास्तव में एक सैन्य अभियान था।
कश्मीर की रियासत का शासक हरिसिंह (हिंदू डोगरा राजा) था, जबकि 77% जनसंख्या मुस्लिम थी। यह सबसे जटिल और विवादास्पद एकीकरण था।
विशेष प्रावधान: संविधान का अनुच्छेद 370 कश्मीर को विशेष स्वायत्त दर्जा देता था (जो 5 अगस्त, 2019 को निरस्त किया गया)। अनुच्छेद 35A — स्थायी निवासियों के विशेष अधिकार।
त्रावणकोर के दीवान C. P. रामास्वामी अय्यर ने रियासत को स्वतंत्र घोषित करने का प्रयास किया।
| रियासत / क्षेत्र | विलय की स्थिति | विशेषता |
|---|---|---|
| मणिपुर | 15 अगस्त 1947 को विलय पत्र; 1949 में पूर्ण विलय | राजा बोधचंद्र सिंह; 1949 में राज्याभिषेक करके पटेल से मिले; C-class state |
| जोधपुर | 15 अगस्त 1947 को विलय | पाकिस्तान के साथ बातचीत; जिन्ना ने blank cheque दी थी; माउंटबेटन ने रोका |
| गोवा | 17 दिसंबर, 1961 — ऑपरेशन विजय | पुर्तगाली उपनिवेश; नेहरू की वार्ता विफल; General J. N. Chaudhuri |
| पांडिचेरी (फ्रांसीसी) | 1 नवंबर, 1954 — शांतिपूर्ण हस्तांतरण | फ्रांसीसी बस्तियाँ — नाता, माहे, यनम, पांडिचेरी |
| सिक्किम | 16 मई, 1975 — 36वाँ राज्य | जनमत संग्रह के बाद; चोग्याल पालडेन थोंडुप नामग्याल; भारत का पूर्ण राज्य बना |
| हिमाचल प्रदेश | 1948 में 30 छोटी रियासतों को मिलाकर | चीफ कमिश्नर का प्रांत; 1971 में पूर्ण राज्य |
| राजस्थान | 1948-1949 में 18 रियासतों को मिलाकर | 7 चरणों में गठन; राजप्रमुख — जयपुर के महाराजा; 30 मार्च 1949 — "राजस्थान दिवस" |
प्रिवी पर्स वह धनराशि थी जो भारत सरकार ने देशी रियासतों के शासकों को उनकी भूमि और संपत्ति के बदले में नियमित रूप से देने का वादा किया था।
भाग-ख : राज्यों का पुनर्गठन
भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की माँग स्वतंत्रता से पहले से ही उठती रही थी। कांग्रेस ने स्वयं 1920 में भाषाई आधार पर प्रांतीय समितियाँ गठित की थीं।
संविधान के अंतर्गत राज्यों का वर्गीकरण (1950)
| वर्ग | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| Part A (भाग-क) | 9 प्रांत — पूर्व ब्रिटिश भारत के प्रांत; चुने हुए विधानमंडल | मद्रास, बंबई, UP, पश्चिम बंगाल आदि |
| Part B (भाग-ख) | 9 रियासतें — बड़ी देशी रियासतें; विधानमंडल; राजप्रमुख | हैदराबाद, मैसूर, राजस्थान, पटियाला |
| Part C (भाग-ग) | 10 क्षेत्र — केन्द्र शासित; कुछ में विधानमंडल | दिल्ली, अजमेर, कूर्ग, भोपाल |
| Part D (भाग-घ) | अंडमान-निकोबार — केन्द्र शासित | केन्द्र प्रशासित; कोई विधानमंडल नहीं |
17 जून, 1948 को भारत सरकार ने "भाषायी प्रांत आयोग" गठित किया। इसे S. K. धर आयोग भी कहा जाता है।
आयोग की सिफारिशें
परिणाम: धर आयोग की सिफारिशें जनभावनाओं के अनुकूल नहीं थीं। भाषाई राज्यों की माँग और तेज हुई।
धर आयोग की अनुशंसाओं से असंतुष्ट जनता के दबाव पर जनवरी 1949 में जयपुर कांग्रेस अधिवेशन में JVP समिति गठित की गई।
JVP समिति की रिपोर्ट (अप्रैल 1949)
महत्वपूर्ण: JVP समिति ने भाषाई राज्यों को मना नहीं किया — बस उचित समय आने पर विचार करने को कहा। आंध्र के लिए जन-आंदोलन ने इसे अनिवार्य बना दिया।
तेलुगुभाषी लोग मद्रास प्रांत से अलग अपना स्वतंत्र आंध्र राज्य चाहते थे। पोट्टि श्रीरामुलु के बलिदान ने इस माँग को ऐतिहासिक मोड़ दिया।
ऐतिहासिक महत्व: पोट्टि श्रीरामुलु का बलिदान भाषाई राज्यों के आंदोलन का निर्णायक मोड़ था। भारत सरकार ने महसूस किया कि अब भाषाई आधार पर पुनर्गठन अनिवार्य है।
आंध्र राज्य के गठन के बाद अन्य भाषाई समूहों की माँगें और तेज हुईं। 22 दिसंबर, 1953 को भारत सरकार ने SRC का गठन किया।
आयोग के सदस्य
SRC की प्रमुख सिफारिशें (रिपोर्ट : 1955)
1. भाषा को राज्य पुनर्गठन का एक आधार माना जाना चाहिए; परंतु "एक भाषा – एक राज्य" के सिद्धांत को अस्वीकार किया
2. राज्य पुनर्गठन के लिए चार आधार : (1) राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता (2) भाषाई एवं सांस्कृतिक एकरूपता (3) आर्थिक, वित्तीय एवं प्रशासनिक सुविधा (4) योजना
3. राज्यों की चार श्रेणियाँ (A, B, C, D) समाप्त कर दो श्रेणियाँ : (1) राज्य (States) — 16 (2) केन्द्र शासित प्रदेश (UT) — 3
4. बंबई — एकल राज्य के रूप में; पंजाब — एकल राज्य; हैदराबाद का विभाजन
जहाँ SRC की सिफारिशें अस्वीकार/संशोधित हुईं
SRC की सिफारिशों को लागू करने के लिए 1956 में 7वाँ संविधान संशोधन और राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ।
नवनिर्मित प्रमुख राज्य (1 नवंबर, 1956)
| राज्य | पूर्व का क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| आंध्र प्रदेश | आंध्र राज्य + हैदराबाद के तेलुगु क्षेत्र | राजधानी : हैदराबाद; पहला भाषाई राज्य |
| कर्नाटक (तब मैसूर) | मैसूर + बंबई-कर्नाटक + हैदराबाद-कर्नाटक | कन्नड़भाषी; 1973 में मैसूर→कर्नाटक नाम |
| केरल | त्रावणकोर-कोचीन + मालाबार (मद्रास से) | मलयालम भाषी |
| मध्य प्रदेश | मध्य भारत + विंध्य + भोपाल + मध्य प्रदेश | हिंदीभाषी; सबसे बड़ा राज्य (2000 तक) |
| राजस्थान | राजस्थान + अजमेर | हिंदीभाषी; राजधानी जयपुर |
| महाराष्ट्र | 1960 में बंबई से | मराठीभाषी; 1 मई 1960 — महाराष्ट्र दिवस |
| गुजरात | 1960 में बंबई से | गुजरातीभाषी; 1 मई 1960 — गुजरात दिवस |
| पंजाब | 1966 में विभाजित | पंजाबी + हिंदी क्षेत्र अलग — पंजाब, हरियाणा, HP |
| राज्य | वर्ष | पहले का क्षेत्र | कारण/विशेषता |
|---|---|---|---|
| महाराष्ट्र | 1 मई, 1960 | बंबई राज्य (मराठी भाग) | मराठी-गुजराती विवाद; संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन |
| गुजरात | 1 मई, 1960 | बंबई राज्य (गुजराती भाग) | गुजराती भाषी; अहमदाबाद → गांधीनगर |
| नागालैंड | 1 दिसंबर, 1963 | असम | नागा जनजातीय माँग; 16वाँ राज्य |
| हरियाणा | 1 नवंबर, 1966 | पूर्वी पंजाब | हिंदीभाषी; पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 |
| हिमाचल प्रदेश | 25 जनवरी, 1971 | पहाड़ी क्षेत्र | पहाड़ी भाषी; 1948 से C-State, 1971 में पूर्ण राज्य |
| मेघालय | 21 जनवरी, 1972 | असम | आदिवासी माँग; खासी-जयंतिया-गारो |
| मणिपुर | 21 जनवरी, 1972 | C-State | पूर्ण राज्य का दर्जा; पूर्वोत्तर भारत |
| त्रिपुरा | 21 जनवरी, 1972 | C-State | पूर्ण राज्य का दर्जा |
| सिक्किम | 16 मई, 1975 | स्वतंत्र रियासत | 36वाँ राज्य; जनमत संग्रह; चोग्याल का पतन |
| मिजोरम | 20 फरवरी, 1987 | असम | मिजो नेशनल फ्रंट के बाद शांति समझौता |
| अरुणाचल प्रदेश | 20 फरवरी, 1987 | NEFA (C-State) | अरुणाचल; चीन से सीमा विवाद |
| गोवा | 30 मई, 1987 | केन्द्र शासित | 25वाँ राज्य; 1961 से UT, 1987 में पूर्ण राज्य |
| छत्तीसगढ | 1 नवंबर, 2000 | मध्य प्रदेश | 26वाँ राज्य; आदिवासी बहुल |
| उत्तराखंड | 9 नवंबर, 2000 | उत्तर प्रदेश | 27वाँ राज्य; पहाड़ी माँग |
| झारखंड | 15 नवंबर, 2000 | बिहार | 28वाँ राज्य; आदिवासी बहुल; बिरसा मुंडा की जयंती पर |
| तेलंगाना | 2 जून, 2014 | आंध्र प्रदेश | 29वाँ राज्य; के. चंद्रशेखर राव; हैदराबाद राजधानी |
देशी रियासतों के एकीकरण का महत्व
राज्य पुनर्गठन का महत्व
| आयोग/समिति | वर्ष | अध्यक्ष | मुख्य सिफारिश | परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| S. K. धर आयोग | 1948 | एस. के. धर | भाषाई राज्य अस्वीकार; प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता | जनभावना के विरुद्ध; आंदोलन तेज |
| JVP समिति | 1948-49 | नेहरू-पटेल-पट्टाभि | तत्काल पुनर्गठन नहीं; अत्यधिक जन-माँग हो तो विचार | सीमित प्रभाव; पोट्टि श्रीरामुलु का अनशन |
| SRC (फजल अली) | 1953-55 | फजल अली | भाषा एक आधार; 14 राज्य + 6 UT; 4 श्रेणियाँ समाप्त | SRA 1956 — 1 नवंबर, 1956 से लागू |
| पंजाब पुनर्गठन आयोग | 1966 | शाह आयोग | पंजाब → पंजाब + हरियाणा + HP; चंडीगढ़ UT | 1 नवंबर, 1966 — हरियाणा और पंजाब |
1. 1947 में देशी रियासतों की संख्या — लगभग 562-565; क्षेत्रफल भारत का 48%; जनसंख्या 28% 2. V. P. मेनन की पुस्तक : "The Story of Integration of States" — एकीकरण का प्रामाणिक इतिहास 3. पटेल की नीति : "Carrot and Stick Policy" — प्रलोभन और दबाव का संतुलित प्रयोग 4. जूनागढ़ — नवाब ने पाकिस्तान में IOA किया; 20 फरवरी 1948 जनमत संग्रह; भारत में विलय 5. हैदराबाद — ऑपरेशन पोलो : 13-18 सितंबर, 1948; जनरल जे. एन. चौधरी; 17 सितंबर को आत्मसमर्पण 6. कश्मीर — 26 अक्तूबर, 1947 को हरिसिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए; कबाइली आक्रमण 22 अक्तूबर 1947 7. त्रावणकोर — C. P. रामास्वामी अय्यर ने स्वतंत्र रहने का प्रयास; जन-आंदोलन से विलय 8. प्रिवी पर्स — अनुच्छेद 291 (मूल संविधान); 26वाँ संविधान संशोधन 1971 — इंदिरा गांधी ने समाप्त किया 9. गोवा — ऑपरेशन विजय — 17 दिसंबर, 1961; पुर्तगाली उपनिवेश; 36वाँ राज्य नहीं, पहले UT 10. सिक्किम — 36वाँ राज्य — 16 मई, 1975; चोग्याल थोंडुप नामग्याल; 35वाँ → 36वाँ (संशोधन के बाद) 11. पोट्टि श्रीरामुलु — 56 दिन अनशन; 15 दिसंबर 1952 मृत्यु; 1 अक्तूबर 1953 — आंध्र राज्य गठित 12. आंध्र राज्य (1953) — भारत का पहला भाषाई राज्य; राजधानी : कुर्नूल; 1956 में हैदराबाद राजधानी 13. S. K. धर आयोग (1948) — भाषाई राज्य अस्वीकार; JVP समिति (1949) — नेहरू-पटेल-पट्टाभि 14. SRC = फजल अली आयोग (1953-55); रिपोर्ट 1955; SRA 1956 — 1 नवंबर, 1956 प्रभावी 15. SRA 1956 — 14 राज्य + 6 UT; 7वाँ संविधान संशोधन; A, B, C, D वर्गीकरण समाप्त 16. महाराष्ट्र-गुजरात — 1 मई, 1960 (बंबई राज्य से विभाजित); तेलंगाना — 2 जून, 2014 (29वाँ राज्य) 17. जोधपुर — जिन्ना ने blank cheque की पेशकश की थी; माउंटबेटन ने भारत में मिलाया 18. पांडिचेरी — 1 नवंबर, 1954 (फ्रांसीसी शांतिपूर्ण हस्तांतरण); गोवा — 17 दिसंबर, 1961 (सैन्य)
| तिथि | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 27 जून, 1947 | भारतीय राज्य विभाग की स्थापना | पटेल — अध्यक्ष; V. P. मेनन — सचिव |
| 25 जुलाई, 1947 | पटेल का रियासतों के नरेशों को संबोधन | भारत में विलय के लिए तैयार करना |
| 15 अगस्त, 1947 | अधिकांश रियासतों ने IOA पर हस्ताक्षर किए | कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ अपवाद |
| 22 अक्तूबर, 1947 | कश्मीर पर कबाइली आक्रमण | पाकिस्तानी समर्थन |
| 26 अक्तूबर, 1947 | कश्मीर का भारत में विलय पत्र | हरिसिंह का हस्ताक्षर |
| नवंबर, 1947 | जूनागढ़ पर भारतीय नियंत्रण | नवाब पाकिस्तान भागा |
| 20 फरवरी, 1948 | जूनागढ़ जनमत संग्रह | 91% भारत के पक्ष में |
| 13-18 सितंबर, 1948 | ऑपरेशन पोलो — हैदराबाद | जनरल जे. एन. चौधरी; निजाम का आत्मसमर्पण |
| 26 जनवरी, 1950 | भारतीय संविधान लागू | A, B, C, D वर्गीकरण; एकीकरण संपन्न |
| 17 जून, 1948 | S. K. धर आयोग गठित | भाषाई राज्य अस्वीकार |
| अप्रैल 1949 | JVP समिति की रिपोर्ट | भाषाई राज्य — तत्काल नहीं |
| 19 अक्तूबर, 1952 | पोट्टि श्रीरामुलु का अनशन प्रारंभ | आंध्र माँग; "आंध्र गांधी" |
| 15 दिसंबर, 1952 | पोट्टि श्रीरामुलु का निधन (56 दिन अनशन) | जन-आंदोलन; सरकार पर दबाव |
| 1 अक्तूबर, 1953 | आंध्र राज्य गठित | भारत का पहला भाषाई राज्य; राजधानी कुर्नूल |
| 22 दिसंबर, 1953 | SRC (फजल अली आयोग) गठित | त्रिसदस्यीय आयोग |
| 1955 | SRC रिपोर्ट | 14 राज्य + 6 UT; 4 श्रेणियाँ समाप्त |
| 19 अक्तूबर, 1956 | 7वाँ संविधान संशोधन — राष्ट्रपति की स्वीकृति | SRA का आधार |
| 1 नवंबर, 1956 | राज्य पुनर्गठन अधिनियम प्रभावी | 14 राज्य + 6 UT; भाषाई आधार |
| 1 मई, 1960 | महाराष्ट्र और गुजरात राज्य | बंबई राज्य का विभाजन |
| 1 दिसंबर, 1963 | नागालैंड — 16वाँ राज्य | पूर्वोत्तर; नागा माँग |
| 17 दिसंबर, 1961 | ऑपरेशन विजय — गोवा | पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन समाप्त |
| 1 नवंबर, 1966 | पंजाब पुनर्गठन — हरियाणा अलग | पंजाबी सूबा आंदोलन; चंडीगढ़ UT |
| 16 मई, 1975 | सिक्किम — 36वाँ राज्य | चोग्याल का पतन; जनमत संग्रह |
| 1 नवंबर, 2000 | छत्तीसगढ, उत्तराखंड, झारखंड | तीन नए राज्य एक ही दिन |
| 2 जून, 2014 | तेलंगाना — 29वाँ राज्य | आंध्र से अलग; हैदराबाद राजधानी |
एकीकरण : 27 जून 1947 (States Dept.) → IOA → जूनागढ़ (जनमत 1948) → कश्मीर (26 अक्तूबर 1947) → ऑपरेशन पोलो (सितंबर 1948) → 26 जनवरी 1950 (पूर्ण एकीकरण) पुनर्गठन : धर आयोग (1948) → JVP (1949) → पोट्टि श्रीरामुलु (1952-53) → आंध्र (1953) → SRC/फजल अली (1953-55) → SRA 1956 (1 नवंबर) याद रखें : "सरदार पटेल ने वह किया जो जर्मनी में बिस्मार्क और इटली में कैवूर भी नहीं कर सके — 562 रियासतों को एकता के सूत्र में पिरोया।"