भारत की स्वतंत्रता और विभाजन की कहानी 20वीं सदी की सबसे जटिल और वेदनापूर्ण घटनाओं में से एक है। एक ओर जहाँ दशकों के राष्ट्रीय संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता का सपना साकार हुआ, वहीं दूसरी ओर विभाजन की त्रासदी ने लाखों लोगों को विस्थापित किया और अनकही पीड़ाएँ दीं। यह अध्याय 1940 से 1947 के उन निर्णायक वर्षों का विस्तृत अध्ययन है जिन्होंने भारत के भाग्य को बदल दिया।
द्वि-राष्ट्र सिद्धांत वह विचारधारा थी जिसके अनुसार हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं जिनका साथ रहना संभव नहीं। इस सिद्धांत ने विभाजन की नींव रखी।
प्रमुख विचारक एवं उनके योगदान
कांग्रेस का रुख
महत्वपूर्ण: जिन्ना 1916 तक भारत-पाकिस्तान की बात नहीं करते थे। वे "हिंदू-मुस्लिम एकता के राजदूत" कहे जाते थे (सरोजिनी नायडू का कथन)। 1937 के चुनावों में मुस्लिम लीग की हार के बाद उनका रुख कठोर हुआ।
23 मार्च, 1940 को लाहौर में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में "पाकिस्तान प्रस्ताव" (जिसे बाद में लाहौर प्रस्ताव कहा गया) पारित हुआ। यह भारत विभाजन की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम था।
प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु
1. उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों को "स्वतंत्र राज्यों" (Independent States) का दर्जा दिया जाए
2. ये इकाइयाँ "स्वायत्त और संप्रभु" (Autonomous and Sovereign) हों
3. अल्पसंख्यक क्षेत्रों में मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा हो
महत्वपूर्ण तथ्य
UPSC टिप: लाहौर प्रस्ताव में "पाकिस्तान" शब्द नहीं था — परंतु यह पाकिस्तान की माँग का आधार बना। 1940 का अधिवेशन जिन्ना की अध्यक्षता में था।
द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की सफलताओं (बेल्जियम, हॉलैंड, फ्रांस का पतन) के बाद ब्रिटेन को भारतीय सहयोग की जरूरत थी। वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने अगस्त 1940 में यह प्रस्ताव रखा।
प्रमुख प्रावधान
प्रतिक्रियाएँ
अगस्त प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद गांधीजी ने अक्टूबर 1940 में सीमित व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारंभ किया।
मार्च 1942 में सर स्टैफोर्ड क्रिप्स (ब्रिटिश मंत्रिमंडल के सदस्य, लेबर पार्टी) भारत आए। जापानी खतरे और मित्र राष्ट्रों के दबाव के कारण ब्रिटेन भारत का सहयोग चाहता था।
प्रमुख प्रस्ताव
1. डोमिनियन स्टेटस : युद्ध के बाद भारतीय संघ को डोमिनियन का दर्जा; राष्ट्रमंडल और UN की सदस्यता का अधिकार
2. संविधान सभा : युद्धोत्तर — प्रांतीय विधानमंडलों से निर्वाचित सदस्य + देशी रियासतों के मनोनीत प्रतिनिधि
3. प्रांतीय अलगाव का अधिकार : कोई भी प्रांत नए संघ में सम्मिलित होने से मना कर सकता है और ब्रिटेन से अलग समझौता कर सकता है — यह पाकिस्तान के लिए रास्ता था
4. अंतरिम काल : रक्षा ब्रिटेन के हाथों में; गवर्नर-जनरल की शक्तियाँ यथावत
प्रस्ताव की विशेषताएँ
प्रतिक्रियाएँ एवं अस्वीकृति
| दल/नेता | रुख | मुख्य आपत्ति |
|---|---|---|
| कांग्रेस (नेहरू-आज़ाद) | अस्वीकार | पूर्ण स्वतंत्रता नहीं; GG की सर्वोच्चता बरकरार; देशी रियासतों का प्रतिनिधित्व अनुचित |
| मुस्लिम लीग (जिन्ना) | अस्वीकार | एकल भारतीय संघ का विरोध; अलग पाकिस्तान की स्पष्ट स्वीकृति नहीं |
| हिंदू महासभा | आंशिक विरोध | प्रांतीय अलगाव से राष्ट्रीय एकता को खतरा |
| डॉ. अंबेडकर | संशय | दलित वर्गों के हित सुनिश्चित नहीं |
| गांधी | अस्वीकार | "डूबते बैंक का उत्तर-दिनांकित चेक" — Post-dated Cheque on a Crashing Bank |
असफलता के कारण
UPSC स्मरण बिंदु: "Post-dated Cheque on a Crashing Bank" — गांधी का क्रिप्स प्रस्ताव पर कथन। नेहरू ने कहा यह मिशन "स्वेच्छाचारी शासन की निरंतरता है।"
क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद गांधीजी ने सबसे बड़ा और निर्णायक आंदोलन छेड़ा। 8 अगस्त, 1942 को बम्बई के गोवालिया टैंक मैदान (अगस्त क्रांति मैदान) में कांग्रेस ने "भारत छोड़ो" प्रस्ताव पारित किया।
पृष्ठभूमि
प्रमुख निर्णय एवं घोषणाएँ
आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ
समानांतर सरकारें (Parallel Governments)
| स्थान | काल | नेता | विशेषता |
|---|---|---|---|
| बलिया (UP) | अगस्त 1942 | चित्तू पांडेय | एक सप्ताह के लिए पूर्ण समानांतर सरकार; कांग्रेस नेताओं को जेल से मुक्त कराया |
| तामलुक (बंगाल) | दिसंबर 1942 – सितंबर 1944 | जातीय सरकार | चक्रवात राहत; अनुदान; विद्युत वाहिनी गठित |
| सतारा (महाराष्ट्र) | 1943-1945 | नाना पाटिल, वाई. बी. चव्हाण | प्रति सरकार (Prati Sarkar); न्यायदान मंडल, गांधी विवाह, ग्राम पुस्तकालय |
प्रमुख क्रांतिकारी व्यक्तित्व
दमन एवं परिणाम
आंदोलन का महत्व: यद्यपि आंदोलन तत्काल सफल नहीं हुआ, परंतु इसने यह सिद्ध किया कि अब भारत में ब्रिटिश राज दीर्घकाल तक नहीं चल सकता। बंगाल के 1943 के अकाल (30 लाख मौतें) ने ब्रिटिश नीतियों की क्रूरता उजागर की।
जहाँ भारत में असहयोग आंदोलन चल रहा था, वहीं विदेश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस सशस्त्र क्रांति की दिशा में काम कर रहे थे।
INA मुकदमे (1945-46)
शीतकाल 1945-46 में तीन बड़े जन-उभार हुए जिन्होंने ब्रिटिश राज को हिला दिया और उनके जाने का समय निकट आ गया।
नौसेना विद्रोह (Royal Indian Navy Mutiny), फरवरी 1946
महत्व: नौसेना विद्रोह ने ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों की वफादारी पर प्रश्न खड़ा किया। ब्रिटेन को एहसास हुआ कि अब और नहीं रुका जा सकता।
जून 1945 में वायसराय लॉर्ड वेवेल ने एक नई योजना रखी और शिमला सम्मेलन आयोजित किया।
वेवेल योजना के प्रमुख प्रावधान
1. वायसराय की कार्यकारी परिषद का पुनर्गठन — कमांडर-इन-चीफ को छोड़कर सभी सदस्य भारतीय होंगे
2. हिंदुओं और मुसलमानों को परिषद में बराबर प्रतिनिधित्व
3. यह एक अस्थायी व्यवस्था थी — संविधान निर्माण तक
शिमला सम्मेलन की विफलता
परिणाम: शिमला सम्मेलन की विफलता ने जिन्ना को यह सिद्ध करने का अवसर दिया कि मुसलमानों का एकमात्र प्रतिनिधि मुस्लिम लीग ही है।
शीतकाल 1945-46 में केन्द्रीय विधानमंडल और प्रांतीय विधानमंडलों के लिए आम चुनाव हुए। ये चुनाव भारत के भविष्य के लिए निर्णायक थे।
| क्षेत्र | कांग्रेस | मुस्लिम लीग | अन्य |
|---|---|---|---|
| केन्द्रीय विधानमंडल | 57 में से 57 सामान्य सीटें | 30 में से 30 मुस्लिम सीटें | — |
| प्रांतीय विधानमंडल (कुल) | 923 सीटें (सामान्य में) | मुस्लिम सीटों पर 87% वोट | — |
| मुस्लिम सीटें (प्रांतीय) | कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार हारे | लीग को भारी बहुमत | — |
फरवरी 1946 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने तीन मंत्रियों का कैबिनेट मिशन भारत भेजा ताकि सत्ता-हस्तांतरण का रास्ता निकाला जाए।
मिशन के सदस्य
मिशन ने पाकिस्तान की माँग क्यों अस्वीकार की ?
1. पूर्ण पाकिस्तान बनने पर भी उसमें बड़ी हिंदू और सिख आबादी रहेगी
2. विभाजित पंजाब और बंगाल दोनों देशों के लिए कमजोर होंगे
3. सेना, रेलवे और संचार व्यवस्था का विभाजन भारत और पाकिस्तान दोनों को कमजोर करेगा
कैबिनेट मिशन की त्रि-स्तरीय संघ योजना
| स्तर | विवरण | विषय |
|---|---|---|
| प्रथम — केन्द्र | दुर्बल केन्द्रीय संघ (Weak Union) | विदेश नीति, रक्षा, संचार और इन विषयों के वित्त |
| द्वितीय — प्रांत समूह | Group A (6 हिंदू-बहुल प्रांत), Group B (पंजाब, NWFP, Sindh, Baluchistan), Group C (बंगाल, असम) | प्रांत और समूह अपने विषय तय करें |
| तृतीय — प्रांत | स्वतंत्र प्रांत | शेष सभी विषय |
अन्य प्रमुख प्रावधान
प्रतिक्रियाएँ
UPSC टिप: कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की माँग अस्वीकार की परंतु ग्रुप B और C बनाकर एक व्यावहारिक विकल्प दिया था। यह अब तक का सबसे व्यावहारिक प्रस्ताव था।
अंतरिम सरकार (Interim Government), सितंबर 1946
प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (Direct Action Day), 16 अगस्त 1946
जिन्ना ने 16 अगस्त, 1946 को "प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस" (Direct Action Day) मनाने की घोषणा की जब कैबिनेट मिशन को लीग ने अस्वीकार किया।
परिणाम: प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस की हिंसा ने ब्रिटिश सरकार को और जल्दी निर्णय लेने पर मजबूर किया। इसने विभाजन को अनिवार्य बना दिया।
20 फरवरी, 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने ब्रिटिश संसद में ऐतिहासिक घोषणा की।
लॉर्ड माउंटबेटन 24 मार्च, 1947 को भारत के अंतिम वायसराय बनकर आए। उन्होंने कांग्रेस, मुस्लिम लीग और सिख नेताओं से विचार-विमर्श के बाद "3 जून योजना" घोषित की।
योजना के प्रमुख बिंदु
1. भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन के रूप में सत्ता हस्तांतरण
2. पंजाब और बंगाल विधानमंडलों को दो भागों में विभाजन पर मत देने का अधिकार
3. सिंध विधानमंडल अपना फैसला करेगा
4. NWFP और सिलहट (असम) में जनमत संग्रह
5. बलूचिस्तान में शाही जिरगा मत देगा
6. देशी रियासतें : ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त; भारत या पाकिस्तान किसी में भी मिल सकती हैं
7. समय-सीमा : जून 1948 से घटाकर 15 अगस्त 1947 तय की गई (10 माह पहले!)
कांग्रेस और लीग की स्वीकृति
माउंटबेटन की भूमिका: माउंटबेटन ने दोनों पक्षों को तेजी से मनाया। जिस तारीख को 15 अगस्त तय करने के बारे में पूछा गया, माउंटबेटन ने कहा — "जापान के आत्मसमर्पण (15 अगस्त, 1945) की वर्षगांठ।"
18 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद ने यह अधिनियम पारित किया। 15 अगस्त, 1947 से यह प्रभावी हुआ।
प्रमुख प्रावधान
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| दो नए डोमिनियन | 15 अगस्त, 1947 से भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र डोमिनियन बनेंगे |
| ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त | ब्रिटिश सरकार का भारत और पाकिस्तान पर अधिकार समाप्त |
| संविधान सभाएँ | दोनों देशों की संविधान सभाएँ अपना-अपना संविधान बनाएँगी; तब तक 1935 एक्ट लागू |
| देशी रियासतें | ब्रिटिश सर्वोच्चता का अंत; वे स्वतंत्र हैं — किसी में भी मिल सकती हैं |
| पदाधिकारी | नेहरू — भारत के प्रथम प्रधानमंत्री; लियाकत अली खाँ — पाकिस्तान के प्रथम PM |
| गवर्नर-जनरल | माउंटबेटन — दोनों डोमिनियन के GG; भारत का पहला भारतीय GG — राजगोपालाचारी (1948) |
| भारत का संविधान लागू | 26 जनवरी, 1950 — 1935 एक्ट की जगह भारतीय संविधान |
पंजाब और बंगाल के विभाजन के लिए एक सीमा आयोग का गठन किया गया। सर सिरिल रेडक्लिफ इसके अध्यक्ष थे।
विभाजन की रेखाएँ
► गुरदासपुर जिले का बड़ा हिस्सा भारत को — कश्मीर तक पहुँच का रास्ता मिला
► फिरोजपुर और जलंधर — भारत; लाहौर, मुल्तान — पाकिस्तान
► सिलहट जनमत संग्रह में पाकिस्तान के पक्ष में वोट; करीमगंज भारत में
विवाद एवं आलोचना
विभाजन की त्रासदी मानव इतिहास की सबसे बड़ी विस्थापन त्रासदियों में से एक है।
शरणार्थी संकट
आर्थिक प्रभाव
कश्मीर समस्या
गांधीजी की भूमिका
स्वतंत्रता के समय 562 देशी रियासतें थीं। उनका भारतीय संघ में एकीकरण सरदार वल्लभभाई पटेल और V. P. मेनन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
एकीकरण का दृष्टिकोण
प्रमुख रियासतें एवं उनकी स्थिति
| रियासत | स्थिति | परिणाम |
|---|---|---|
| जूनागढ़ | मुस्लिम नवाब ने पाकिस्तान में विलय का प्रयास; हिंदू-बहुल जनसंख्या | जनमत संग्रह → भारत में विलय; नवाब पाकिस्तान भागे |
| हैदराबाद | निजाम उस्मान अली खाँ ने स्वतंत्र रहना चाहा | सितंबर 1948 — "पुलिस कार्यवाही" (Operation Polo); भारत में विलय |
| कश्मीर | हरि सिंह — स्वतंत्र; पाकिस्तानी घुसपैठ | 26 अक्टूबर 1947 — विलय पत्र; UN में मामला |
| त्रावणकोर-कोचीन | प्रारंभिक विरोध; दीवान C. P. रामास्वामी अय्यर ने स्वतंत्रता चाही | 1949 में भारत में विलय |
| भोपाल | नवाब हमीदुल्लाह खाँ — प्रतीक्षा रणनीति | अंततः 1949 में विलय |
| मैसूर, बड़ौदा, पटियाला आदि | सहर्ष विलय | स्वेच्छा से विलय पत्र पर हस्ताक्षर |
V. P. मेनन की भूमिका: V. P. मेनन (गृह मंत्रालय के सचिव) ने पटेल के साथ मिलकर अधिकतर रियासतों को विलय के लिए मनाया। "विलय पत्र" का मसौदा मेनन ने ही तैयार किया था।
| प्रस्ताव | वर्ष | प्रमुख विशेषता | कांग्रेस | मुस्लिम लीग | परिणाम |
|---|---|---|---|---|---|
| अगस्त प्रस्ताव | 1940 | डोमिनियन + अल्पसंख्यक वीटो | अस्वीकार | स्वागत | व्यक्तिगत सत्याग्रह |
| क्रिप्स मिशन | 1942 | डोमिनियन + प्रांत अलग हो सकते हैं | अस्वीकार | अस्वीकार | भारत छोड़ो आंदोलन |
| वेवेल योजना | 1945 | परिषद में भारतीय बहुमत | स्वीकार | विफल (जिन्ना की हठ) | शिमला सम्मेलन विफल |
| कैबिनेट मिशन | 1946 | त्रि-स्तरीय संघ; पाकिस्तान अस्वीकार | आंशिक स्वीकृति | पहले स्वीकार, फिर अस्वीकार | प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस |
| माउंटबेटन योजना | 1947 | भारत-पाकिस्तान विभाजन | स्वीकार | स्वीकार | 15 अगस्त, 1947 स्वतंत्रता |
1. लाहौर प्रस्ताव (23 मार्च, 1940) में "पाकिस्तान" शब्द नहीं था — मीडिया ने नाम दिया; प्रस्तुतकर्ता — फजलुल हक 2. क्रिप्स मिशन पर गांधी : "डूबते बैंक का उत्तर-दिनांकित चेक" — Post-dated Cheque on a Crashing Bank 3. अगस्त प्रस्ताव पर नेहरू : "यह मरा हुआ है, एक कील की तरह" (Dead as a Doornail) 4. भारत छोड़ो प्रस्ताव — नेहरू ने रखा, पटेल ने समर्थन किया; 8 अगस्त 1942, गोवालिया टैंक, बम्बई 5. गांधी का नारा : "करो या मरो" (Do or Die); अरुणा आसफ अली ने गोवालिया टैंक पर तिरंगा फहराया 6. उषा मेहता : भूमिगत "Congress Radio" — 42.34 meters पर प्रसारण 7. "पाकिस्तान" शब्द पहली बार : चौधरी रहमत अली (1933) — "Now or Never" पैम्फलेट 8. जिन्ना को "हिंदू-मुस्लिम एकता का राजदूत" कहा था — सरोजिनी नायडू ने 9. कैबिनेट मिशन के तीन सदस्य : पेथिक-लॉरेंस, स्टैफोर्ड क्रिप्स, ए. वी. अलेक्जेंडर 10. INA के पहले कमांडर : कैप्टन मोहन सिंह (1942); बाद में रास बिहारी बोस; फिर सुभाष बोस 11. INA मुकदमा : नेहरू, भुलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू — बचाव पक्ष के वकील 12. नौसेना विद्रोह — 18 फरवरी, 1946; HMIS Talwar; पटेल की अपील पर शांत 13. माउंटबेटन — 24 मार्च, 1947 को अंतिम वायसराय बने; 15 अगस्त की तारीख उनका निर्णय 14. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम — 18 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में पारित 15. रेडक्लिफ पुरस्कार — 17 अगस्त, 1947 को सार्वजनिक; रेडक्लिफ ने पारिश्रमिक लेने से मना किया 16. हैदराबाद — "पुलिस कार्यवाही" (Operation Polo) — सितंबर 1948; जनरल जे. एन. चौधरी 17. जूनागढ़ — जनमत संग्रह से भारत में; त्रावणकोर, भोपाल — 1949 में विलय 18. गांधी हत्या — 30 जनवरी, 1948; नाथूराम गोडसे; राष्ट्रीय शोक
| तिथि | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 23 मार्च, 1940 | लाहौर प्रस्ताव — मुस्लिम लीग | पाकिस्तान की माँग का आधार |
| अगस्त, 1940 | अगस्त प्रस्ताव — वायसराय लिनलिथगो | डोमिनियन + अल्पसंख्यक वीटो; कांग्रेस ने अस्वीकार |
| अक्टूबर 1940 – मई 1941 | व्यक्तिगत सत्याग्रह | विनोबा → नेहरू; 25,000 गिरफ्तार |
| मार्च 1942 | क्रिप्स मिशन | असफल; गांधी — "पोस्ट-डेटेड चेक" |
| 8 अगस्त, 1942 | भारत छोड़ो प्रस्ताव — गोवालिया टैंक | करो या मरो; नेहरू-पटेल का समर्थन |
| 9 अगस्त, 1942 | नेता गिरफ्तार; अरुणा आसफ अली का तिरंगा | आंदोलन की आधिकारिक शुरुआत |
| 1943 | बंगाल का महाभीषण अकाल | 30 लाख मौतें; ब्रिटिश नीति की क्रूरता |
| 21 अक्टूबर, 1943 | नेताजी की आज़ाद हिंद सरकार — सिंगापुर | पहला स्वतंत्र भारतीय सरकार का दावा |
| जून 1945 | शिमला सम्मेलन — वेवेल योजना | जिन्ना की हठ से विफल |
| 1945-46 (सर्दी) | तीन उभार — INA मुकदमे, नौसेना विद्रोह | ब्रिटिश राज के अंत का संकेत |
| फरवरी 1946 | नौसेना विद्रोह — HMIS Talwar | ब्रिटिश सेना में विद्रोह |
| मार्च–मई 1946 | कैबिनेट मिशन | त्रि-स्तरीय संघ योजना; पाकिस्तान अस्वीकार |
| 2 सितंबर, 1946 | नेहरू की अंतरिम सरकार | भारत की पहली राष्ट्रीय सरकार |
| 16 अगस्त, 1946 | प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस | कलकत्ता नरसंहार; हजारों मौतें |
| 20 फरवरी, 1947 | एटली की घोषणा | जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरण |
| 24 मार्च, 1947 | माउंटबेटन वायसराय बने | अंतिम वायसराय; जल्द निर्णय का मिशन |
| 3 जून, 1947 | माउंटबेटन योजना (3 June Plan) | भारत-पाकिस्तान विभाजन का खाका |
| 18 जुलाई, 1947 | भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम — ब्रिटिश संसद | कानूनी आधार |
| 14 अगस्त, 1947 | पाकिस्तान की स्वतंत्रता | लियाकत अली खाँ — प्रथम PM |
| 15 अगस्त, 1947 | भारत की स्वतंत्रता — "Tryst with Destiny" | नेहरू का भाषण; 200 वर्ष के संघर्ष का अंत |
| 17 अगस्त, 1947 | रेडक्लिफ पुरस्कार सार्वजनिक | सीमाओं की घोषणा |
| 26 अक्टूबर, 1947 | कश्मीर का भारत में विलय | हरि सिंह का हस्ताक्षर |
| 30 जनवरी, 1948 | गांधीजी की हत्या — नाथूराम गोडसे | राष्ट्रपिता का बलिदान |
| सितंबर 1948 | Operation Polo — हैदराबाद विलय | पुलिस कार्यवाही; जनरल जे. एन. चौधरी |
| 26 जनवरी, 1950 | भारत गणराज्य — संविधान लागू | डोमिनियन से गणराज्य |
विभाजन की ओर : लाहौर प्रस्ताव (1940) → अगस्त प्रस्ताव (1940) → क्रिप्स मिशन (1942) → भारत छोड़ो (1942) → INA/नौसेना विद्रोह → शिमला सम्मेलन (1945) → कैबिनेट मिशन (1946) → प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस → एटली घोषणा (1947) → माउंटबेटन योजना → स्वतंत्रता अधिनियम → 15 अगस्त, 1947 तीन बड़े इनकार : (1) कांग्रेस ने क्रिप्स अस्वीकार (2) लीग ने कैबिनेट मिशन ग्रुपिंग अस्वीकार (3) दोनों ने वेवेल योजना को विफल किया स्वतंत्रता की कीमत : "आज़ादी एक त्रासदी के साथ आई — विभाजन की पीड़ा और लाखों की मृत्यु। परंतु यह एक ऐसा पल था जब इतिहास के पन्ने पलटे और एक नया भारत जन्मा।"