भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान शिक्षा और प्रेस के विकास की कहानी एक जटिल और द्वंद्वपूर्ण प्रक्रिया है। जहाँ एक ओर औपनिवेशिक शासन ने पश्चिमी शिक्षा के माध्यम से अपना प्रशासनिक आधार मजबूत करने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर इसी शिक्षा ने राष्ट्रीय चेतना को जन्म दिया। इसी प्रकार प्रेस ने जहाँ स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी, वहाँ सरकार ने कठोर कानूनों से उसे दबाने का प्रयास किया।
भाग-क : भारत में शिक्षा का विकास
ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में शिक्षा नीति को लेकर दो प्रमुख विचारधाराएँ थीं जिनके बीच तीव्र विवाद हुआ :
(अ) प्राच्यवादी (Orientalist) विचारधारा
(ब) आंग्लवादी (Anglicist) विचारधारा
यह प्रथम अधिनियम था जिसने भारत में शिक्षा के लिए वित्तीय प्रावधान किया।
थॉमस बबिंग्टन मैकाले ने 2 फरवरी, 1835 को अपना प्रसिद्ध विवरण पत्र (Minute) प्रस्तुत किया। 7 मार्च, 1835 को गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने इसे सरकारी नीति के रूप में स्वीकार किया।
मैकाले के मुख्य तर्क
1. समस्त यूरोपीय साहित्य का एकमात्र अच्छा शेल्फ, भारत व अरब के समस्त साहित्य से अधिक मूल्यवान है
2. संस्कृत और अरबी साहित्य तथ्यात्मक त्रुटियों से भरा है, वे आधुनिक विज्ञान के योग्य नहीं
3. भारत में एक वर्ग बनाना जो "रक्त और रंग से भारतीय, किंतु रुचि, विचार, नैतिकता और बुद्धि में अंग्रेज हो"
4. "टपकन सिद्धांत" — शिक्षित वर्ग से ज्ञान नीचे की ओर प्रसारित होगा
परिणाम
स्मरण बिंदु: मैकाले को "भारत में अंग्रेजी शिक्षा का जनक" कहा जाता है। उनके टपकन सिद्धांत की 1854 में वुड डिस्पैच ने आलोचना की।
लॉर्ड डलहौजी के समय चार्ल्स वुड (Board of Control के अध्यक्ष) के नेतृत्व में यह घोषणापत्र तैयार किया गया। इसे "भारतीय शिक्षा का मेग्नाकार्टा" (Magna Carta) कहा जाता है।
प्रमुख अनुशंसाएँ
1. मैकाले के "टपकन सिद्धांत" को अस्वीकार किया — शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी
2. कंपनी के पाँचों प्रान्तों में शिक्षा विभाग और शिक्षा आयुक्त (Commissioner) की नियुक्ति
3. लंदन विश्वविद्यालय की तर्ज पर कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में विश्वविद्यालय स्थापित हों
4. अध्यापक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना
5. महिला शिक्षा, व्यावसायिक तथा तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
6. निजी क्षेत्र को शिक्षा में "अनुदान सहायता" (Grant-in-Aid) दी जाए
7. माध्यम : प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा, उच्च शिक्षा में अंग्रेजी
परिणाम
| वर्ष | आयोग/समिति/अधिनियम | अध्यक्ष/संबंधित | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1882 | हंटर आयोग (Hunter Commission) | विलियम विल्सन हंटर | प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा; द्वि-शाखा — साहित्यिक/व्यावसायिक |
| 1902 | विश्वविद्यालय आयोग | थॉमस रेले | कलकत्ता वि.वि. हेतु; सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की अनुशंसा |
| 1904 | विश्वविद्यालय अधिनियम | लॉर्ड कर्जन | वि.वि. में सरकारी सदस्य बढ़े; प्राइवेट कॉलेज मान्यता कठोर |
| 1913 | शिक्षा पर सरकारी प्रस्ताव | गोपाल कृष्ण गोखले के प्रयास | निरक्षरता समाप्ति; प्रत्येक प्रान्त में वि.वि. की योजना |
| 1917 | सैडलर आयोग (Sadler Commission) | माइकल सैडलर | कलकत्ता वि.वि.; 12 वर्षीय स्कूली + 3 वर्षीय डिग्री; ढाका वि.वि. की अनुशंसा |
| 1929 | हार्टोग समिति (Hartog Committee) | फिलिप हार्टोग | अत्यधिक प्रवेश की समस्या; व्यावसायिक शिक्षा पर बल; 1935 — CABE का पुनर्गठन |
| 1937 | वर्धा योजना (Wardha Scheme) | महात्मा गांधी / जाकिर हुसैन | बुनियादी शिक्षा; 7-14 वर्ष — मातृभाषा, निःशुल्क; हस्त-उत्पाद से शिक्षकों का वेतन |
| 1944 | सार्जेंट योजना (Sergeant Plan) | CABE | 6-11 प्राथमिक (निःशुल्क+अनिवार्य); माध्यमिक 11-17; 40 वर्ष में साक्षरता |
| 1948 | राधाकृष्णन आयोग | डॉ. एस. राधाकृष्णन | विश्वविद्यालय शिक्षा; UGC की स्थापना; विश्वविद्यालय प्रवेश से पहले 12 वर्ष |
| 1952 | मुदालियार आयोग | ए. लक्ष्मण स्वामी मुदालियार | माध्यमिक शिक्षा; त्रिभाषा फार्मूला; 14 वर्ष तक अनिवार्य |
| 1964-66 | कोठारी शिक्षा आयोग | डी. एस. कोठारी | 10+2+3 प्रणाली; शिक्षा को समवर्ती सूची में; UGC सशक्त करें |
यह आयोग प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की समीक्षा के लिए बनाया गया था।
परीक्षा टिप: हंटर आयोग की अनुशंसाओं पर 1904 का विश्वविद्यालय अधिनियम बना। इस आयोग ने 1813 के चार्टर एक्ट के शिक्षा प्रावधानों की समीक्षा की।
यह आयोग कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं के अध्ययन के लिए बनाया गया था, बाद में इसकी अनुशंसाएँ अन्य विश्वविद्यालयों में भी लागू हुईं।
महात्मा गांधी ने "हरिजन" समाचार-पत्र में शिक्षा संबंधी लेख लिखे। इन लेखों के आधार पर ज़ाकिर हुसैन समिति ने यह योजना तैयार की।
ईसाई मिशनरियों ने भारत में शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, यद्यपि उनका मुख्य उद्देश्य धर्म प्रचार था।
भारत में महिला शिक्षा का विकास धीमी गति से हुआ। अनेक समाज सुधारकों तथा मिशनरियों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुख व्यक्तित्व एवं संस्थाएँ
ब्रिटिश शासन में तकनीकी शिक्षा की उपेक्षा रही, परंतु धीरे-धीरे औद्योगीकरण की आवश्यकता के कारण कुछ संस्थाएँ खुलीं।
अंग्रेजी शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण अनपेक्षित परिणाम था — राष्ट्रवाद का उदय। पश्चिमी शिक्षा ने भारतीयों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय जैसे मूल्यों से परिचित कराया।
| प्रमुख घटना/नीति | वर्ष | महत्व |
|---|---|---|
| कलकत्ता मदरसा | 1781 | प्राच्य शिक्षा — वारेन हेस्टिंग्स |
| बनारस संस्कृत कॉलेज | 1792 | जोनाथन डंकन; प्राच्यवादी परंपरा |
| हिंदू कॉलेज, कलकत्ता | 1817 | डेविड हेयर; प्रथम आधुनिक कॉलेज |
| चार्टर एक्ट में शिक्षा प्रावधान | 1813 | ₹1 लाख वार्षिक; विवाद का प्रारंभ |
| मैकाले मिनट | 1835 | अंग्रेजी शिक्षा नीति; टपकन सिद्धांत |
| वुड डिस्पैच | 1854 | "भारतीय शिक्षा का मेग्नाकार्टा"; वि.वि. की स्थापना |
| कलकत्ता-बॉम्बे-मद्रास वि.वि. | 1857 | प्रथम तीन विश्वविद्यालय |
| हंटर आयोग | 1882 | प्राथमिक + माध्यमिक; द्वि-शाखा |
| विश्वविद्यालय अधिनियम | 1904 | कर्जन; सरकारी नियंत्रण बढ़ा |
| राष्ट्रीय शिक्षा परिषद | 1906 | स्वदेशी आंदोलन; बंगाल विभाजन के विरोध में |
| सैडलर आयोग | 1917 | 12+3 शिक्षा; ढाका वि.वि. |
| हार्टोग समिति | 1929 | अत्यधिक प्रवेश की समस्या |
| वर्धा योजना | 1937 | गांधीजी; बुनियादी शिक्षा |
| सार्जेंट योजना | 1944 | CABE; 40 वर्ष में सार्वभौमिक शिक्षा |
| राधाकृष्णन आयोग | 1948 | UGC की स्थापना |
भाग-ख : भारत में प्रेस का विकास
भारत में प्रेस का इतिहास ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के उदय के साथ आरंभ हुआ। प्रेस ने जहाँ एक ओर राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया, वहीं ब्रिटिश सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए कड़े कानून बनाए।
► हिक्की के पत्र ने गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स और मुख्य न्यायाधीश की आलोचना की
► 1782 में इसके मुद्रणालय को जब्त कर लिया गया
राजा राममोहन राय को "राष्ट्रीय प्रेस की स्थापना का श्रेय" दिया जाता है। उन्होंने प्रेस को सामाजिक सुधार का हथियार बनाया।
| वर्ष | अधिनियम | संबंधित व्यक्ति | विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1799 | प्रेस नियंत्रण अधिनियम (Press Control Act) | लॉर्ड वेलेजली | सभी समाचार-पत्रों पर पूर्व-सेंसरशिप (Pre-Censorship); युद्धकाल में कठोर नियंत्रण |
| 1818 | प्री-सेंसरशिप समाप्त | लॉर्ड हेस्टिंग्स | उदार नीति; समाचार-पत्रों को राहत |
| 1823 | लाइसेंसिंग रेगुलेशन एक्ट | जॉन एडम्स (कार्यकारी GG) | प्रेस के लिए लाइसेंस अनिवार्य; मजिस्ट्रेट को जब्त करने का अधिकार; राममोहन राय का मिरात-उल-अखबार बंद |
| 1835 | प्रेस अधिनियम (Metcalfe Act) | चार्ल्स मेटकाफ | 1823 का एक्ट रद्द; उदार नियमन; मेटकाफ को "भारतीय समाचार-पत्रों का मुक्तिदाता" कहा गया |
| 1857 | अनुज्ञप्ति अधिनियम (Licensing Act) | 1857 विद्रोह के बाद | बिना लाइसेंस के छापाखाना स्थापित नहीं; सरकारी अनुमति के बिना प्रकाशन नहीं |
| 1867 | प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम | — | प्रत्येक पुस्तक/पत्रिका का पंजीकरण अनिवार्य; 1857 एक्ट रद्द |
| 1878 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (VPA) | लॉर्ड लिटन | देशी भाषाओं के पत्रों पर; "गैगिंग एक्ट"; 1882 में रिपन ने रद्द किया |
| 1908 | समाचार-पत्र (अपराध के लिए उकसावा) अधिनियम | लॉर्ड मिंटो II | राजद्रोह पर 6 महीने से 6 साल की सजा; तिलक के "केसरी" पर |
| 1910 | भारतीय प्रेस अधिनियम | लॉर्ड मिंटो II | जमानत राशि; जब्त करने का अधिकार; 1878 के VPA के प्रावधान फिर लागू |
| 1931 | भारतीय प्रेस (आपातकाल) अधिनियम | लॉर्ड इरविन | CDM के दौरान; जमानत; प्रांतीय सरकार को अत्यधिक शक्तियाँ; 1932 में और कठोर |
यह भारतीय इतिहास का सर्वाधिक कुख्यात प्रेस-विरोधी कानून था। इसे "गैगिंग एक्ट" (Gagging Act = मुँह बंद करने वाला अधिनियम) कहा जाता था।
पृष्ठभूमि
प्रमुख प्रावधान
प्रभावित समाचार-पत्र
► पायोनियर पत्रिका ने VPA का समर्थन किया था
1882 में रद्द: लॉर्ड रिपन ने 1882 में VPA को रद्द किया। यह उनकी उदार नीति का प्रतीक था।
| समाचार-पत्र | भाषा/स्थान | संस्थापक/संपादक | वर्ष | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| बंगाल गजट / कलकत्ता जर्नल | अंग्रेजी/कलकत्ता | जेम्स हिक्की | 1780 | भारत का प्रथम समाचार-पत्र; 1782 में जब्त |
| संवाद कौमुदी | बंगाली/कलकत्ता | राजा राममोहन राय | 1821 | सती प्रथा विरोध; सामाजिक सुधार |
| मिरात-उल-अखबार | फारसी/कलकत्ता | राजा राममोहन राय | 1822 | 1823 के एक्ट पर बंद |
| केसरी | मराठी/पुणे | बाल गंगाधर तिलक | 1881 | "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" |
| मराठा | अंग्रेजी/पुणे | बाल गंगाधर तिलक | 1881 | राष्ट्रवाद का उग्र स्वर |
| अमृत बाजार पत्रिका | बंगाली→अंग्रेजी | शिशिर कुमार घोष | 1868 | VPA से बचने को रातभर में अंग्रेजी |
| द हिंदू | अंग्रेजी/मद्रास | जी. एस. अय्यर, वीर राघवाचारी | 1878 | दक्षिण भारत का प्रमुख पत्र |
| ट्रिब्यून | अंग्रेजी/लाहौर | दयाल सिंह मजीठिया | 1881 | पंजाब का प्रमुख पत्र |
| पायोनियर | अंग्रेजी/इलाहाबाद | — | 1865 | सरकारी नीतियों का समर्थक; रुडयार्ड किपलिंग |
| हिंदुस्तान टाइम्स | अंग्रेजी/दिल्ली | — | 1924 | बाद में गांधीजी का प्रभाव |
| नेशनल हेराल्ड | अंग्रेजी/लखनऊ | जवाहरलाल नेहरू | 1938 | कांग्रेस का मुखपत्र |
| हरिजन | हिंदी-अंग्रेजी | महात्मा गांधी | 1933 | दलित उत्थान; वर्धा शिक्षा योजना |
| यंग इंडिया | अंग्रेजी | महात्मा गांधी | 1919 | गांधी का प्रमुख पत्र; वैचारिक आंदोलन |
| नवजीवन | गुजराती | महात्मा गांधी | 1919 | गुजराती जनता में राष्ट्रवाद |
| अल-हिलाल | उर्दू | अबुल कलाम आज़ाद | 1912 | 1914 में जब्त; क्रांतिकारी विचार |
| अल-बलाग | उर्दू | अबुल कलाम आज़ाद | 1915 | सरकार विरोधी; बंद कराया गया |
| कॉमरेड | अंग्रेजी | मोहम्मद अली जौहर | 1911 | खिलाफत समर्थन |
| बंगाली | अंग्रेजी/बंगाली | सुरेन्द्रनाथ बनर्जी | 1879 | बंगाल विभाजन विरोध |
| इंडिया | अंग्रेजी/लंदन | भिकाजी कामा | 1909 | लंदन से; क्रांतिकारी प्रचार |
| युगान्तर | बंगाली/बंगाल | भूपेन्द्रनाथ दत्त | 1906 | अनुशीलन समिति; क्रांतिकारी |
प्रेस राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण माध्यम बना। तिलक, गांधी, आज़ाद जैसे नेताओं ने अपनी पत्रिकाओं से जनचेतना जागृत की।
तिलक और प्रेस
गांधी और प्रेस
आज़ाद और प्रेस
| वर्ष | घटना | प्रमुख पत्र/व्यक्ति |
|---|---|---|
| 1780 | भारत का पहला समाचार-पत्र | हिक्की का बंगाल गजट |
| 1822 | राममोहन राय का "मिरात-उल-अखबार" | फारसी प्रेस की स्वाधीनता का प्रयास |
| 1835 | मेटकाफ एक्ट — प्रेस को आजादी | सभी प्रतिबंध हटे; प्रेस का स्वर्णिम काल |
| 1868 | अमृत बाजार पत्रिका | शिशिर कुमार घोष; सामाजिक-राजनीतिक जागरण |
| 1878 | VPA — "गैगिंग एक्ट" | देशी भाषा पत्रों पर क्रूर प्रहार |
| 1881 | केसरी और मराठा | तिलक; उग्र राष्ट्रवाद का प्रसार |
| 1905 | बंगाल विभाजन विरोध | सुरेन्द्रनाथ बनर्जी की "बंगाली" |
| 1906-07 | युगान्तर और संधि | क्रांतिकारी विचारों का प्रसार |
| 1908 | तिलक पर 6 वर्ष की सजा | केसरी — राजद्रोह मामला |
| 1910 | प्रेस अधिनियम | जमानत राशि प्रावधान |
| 1912-14 | अल-हिलाल | आज़ाद का क्रांतिकारी पत्र; 1914 में जब्त |
| 1919 | यंग इंडिया और नवजीवन | गांधीजी का राजनीतिक प्रवेश |
| 1921 | 1908 और 1910 के एक्ट रद्द | सर तेज बहादुर सप्रू की अध्यक्षता में प्रेस समिति |
| 1931 | प्रेस आपात अधिनियम | CDM के दौरान; प्रांतों को अत्यधिक शक्तियाँ |
| 1933 | हरिजन | गांधी; दलित अधिकार और ग्रामोद्योग |
| 1938 | नेशनल हेराल्ड | नेहरू; कांग्रेस का मुखपत्र |
समय-समय पर प्रेस की स्वतंत्रता की माँग उठती रही और कुछ आयोगों ने प्रतिबंध हटाने की अनुशंसा की।
भाग-ग : प्रमुख व्यक्तित्व — शिक्षा एवं प्रेस
| व्यक्तित्व | योगदान |
|---|---|
| थॉमस बबिंग्टन मैकाले | मैकाले मिनट (1835); "टपकन सिद्धांत"; अंग्रेजी शिक्षा नीति के प्रणेता |
| चार्ल्स वुड | वुड डिस्पैच (1854); भारतीय शिक्षा का मेग्नाकार्टा; वि.वि. स्थापना |
| विलियम हंटर | हंटर आयोग (1882); प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा सुधार |
| ईश्वरचन्द्र विद्यासागर | 1849 — बेथुन स्कूल; महिला शिक्षा; बंगाली शिक्षा सुधार |
| राजा राममोहन राय | पश्चिमी शिक्षा समर्थन; हिंदू कॉलेज में सहयोग |
| ज्योतिबा फुले | 1848 — पुणे बालिका विद्यालय; शूद्र-अतिशूद्र शिक्षा |
| महात्मा गांधी | वर्धा/बुनियादी शिक्षा योजना (1937); हस्त-उत्पाद आधारित शिक्षा |
| मदन मोहन मालवीय | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (1916); हिंदी शिक्षा का केन्द्र |
| सर सैयद अहमद खाँ | अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का आधार (1875 — MAO कॉलेज) |
| गोपाल कृष्ण गोखले | 1910 — प्राथमिक शिक्षा विधेयक; 1913 के प्रस्ताव में भूमिका |
| डॉ. एस. राधाकृष्णन | 1948 आयोग; UGC; भारत के उच्च शिक्षा के पुनर्गठन में योगदान |
| व्यक्तित्व | पत्र/पत्रिका | योगदान |
|---|---|---|
| जेम्स हिक्की | बंगाल गजट (1780) | भारत का प्रथम समाचार-पत्र; शासन की आलोचना |
| राजा राममोहन राय | संवाद कौमुदी, मिरात-उल-अखबार | राष्ट्रीय प्रेस के जनक; प्रेस स्वतंत्रता के पक्षधर |
| बाल गंगाधर तिलक | केसरी, मराठा | उग्र राष्ट्रवाद; "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार" |
| महात्मा गांधी | यंग इंडिया, नवजीवन, हरिजन | राष्ट्रीय आंदोलन का वैचारिक नेतृत्व |
| अबुल कलाम आज़ाद | अल-हिलाल, अल-बलाग | इस्लामी जनचेतना; ब्रिटिश नीति की आलोचना |
| मोहम्मद अली जौहर | कॉमरेड, हमदर्द | खिलाफत आंदोलन; हिंदू-मुस्लिम एकता |
| सुरेन्द्रनाथ बनर्जी | बंगाली | बंगाल विभाजन विरोध; मध्यमार्गी स्वर |
| भूपेन्द्रनाथ दत्त | युगान्तर | क्रांतिकारी विचारधारा; बंगाल में जागरण |
| जवाहरलाल नेहरू | नेशनल हेराल्ड (1938) | कांग्रेस नीतियों का प्रचार |
| भिकाजी कामा | इंडिया (लंदन, 1909) | विदेश से क्रांतिकारी प्रचार; पहली बार तिरंगा फहराया |
| चार्ल्स मेटकाफ | — | 1823 एक्ट रद्द; "भारतीय समाचार-पत्रों का मुक्तिदाता" |
| शिशिर कुमार घोष | अमृत बाजार पत्रिका (1868) | VPA से बचाव हेतु रातभर में अंग्रेजी में परिवर्तित |
भाग-घ : तुलनात्मक विश्लेषण एवं UPSC टिप्स
| पहलू | ब्रिटिश शिक्षा नीति | ब्रिटिश प्रेस नीति |
|---|---|---|
| मूल उद्देश्य | सस्ते कर्मचारी; पश्चिमी मूल्यों का प्रचार; ईसाई धर्म प्रसार | समाचार-पत्रों पर नियंत्रण; सरकार विरोधी स्वर दबाना |
| अनपेक्षित परिणाम | राष्ट्रवाद का उदय; पश्चिमी स्वतंत्रता-समानता के विचार | प्रेस ने राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी; जन-जागरण |
| प्रमुख नीति | मैकाले → वुड डिस्पैच → हंटर → वर्धा → सार्जेंट | 1799 → 1823 → 1835 → 1878 (VPA) → 1908 → 1910 |
| कट्टरता | कर्जन का विश्वविद्यालय अधिनियम (1904) — नियंत्रण | VPA (1878), 1908, 1910, 1931 के दमनकारी अधिनियम |
| उदारता | वुड डिस्पैच (1854), हंटर आयोग (1882) | मेटकाफ (1835), 1921 में 1908-10 अधिनियम रद्द |
| राष्ट्रीय प्रतिक्रिया | BHU (1916), AMU (1920), राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (1905) | केसरी, अल-हिलाल, यंग इंडिया, हरिजन |
1. मैकाले का "टपकन सिद्धांत" (Filtration Theory) — ऊपर से नीचे शिक्षा — वुड डिस्पैच ने अस्वीकार किया 2. वुड डिस्पैच (1854) = "भारतीय शिक्षा का मेग्नाकार्टा" — तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना 3. भारत का पहला समाचार-पत्र : "बंगाल गजट" — जेम्स हिक्की — 1780 — कलकत्ता 4. राजा राममोहन राय = "राष्ट्रीय प्रेस के जनक" — संवाद कौमुदी (1821) + मिरात-उल-अखबार (1822) 5. चार्ल्स मेटकाफ = "भारतीय समाचार-पत्रों का मुक्तिदाता" — 1823 का लाइसेंसिंग एक्ट रद्द किया (1835) 6. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878) = "गैगिंग एक्ट" — लॉर्ड लिटन; 1882 में लॉर्ड रिपन ने रद्द किया 7. अमृत बाजार पत्रिका — VPA से बचाव हेतु रातभर बंगाली से अंग्रेजी में बदली 8. हंटर आयोग (1882) — प्राथमिक + माध्यमिक शिक्षा; 1904 विश्वविद्यालय अधिनियम का आधार 9. सैडलर आयोग (1917) — कलकत्ता वि.वि.; ढाका वि.वि. की अनुशंसा; 12+3 प्रणाली 10. वर्धा योजना (1937) = "बुनियादी शिक्षा" — महात्मा गांधी — 7-14 वर्ष निःशुल्क मातृभाषा में 11. सार्जेंट योजना (1944) — CABE; 40 वर्ष में 100% साक्षरता का लक्ष्य 12. 1857 ई. में कलकत्ता, बॉम्बे, मद्रास वि.वि. की स्थापना — सिर्फ संबद्धता विश्वविद्यालय 13. तिलक को 1908 में 6 वर्ष की सजा — "केसरी" में खुदीराम बोस का समर्थन करने पर 14. नेशनल हेराल्ड (1938) — जवाहरलाल नेहरू; हिंदुस्तान टाइम्स — बाद में बिड़ला परिवार 15. जामिया मिलिया इस्लामिया (1920) — 1920 के असहयोग आंदोलन में अलीगढ़ से अलग होकर 16. BHU (1916) — मदन मोहन मालवीय; AMU (1920) — सर सैयद की MAO कॉलेज (1875) से विकसित
| वर्ष | शिक्षा | प्रेस |
|---|---|---|
| 1780 | — | हिक्की का बंगाल गजट — भारत का प्रथम समाचार-पत्र |
| 1781 | कलकत्ता मदरसा (वारेन हेस्टिंग्स) | — |
| 1813 | चार्टर एक्ट — ₹1 लाख शिक्षा प्रावधान | — |
| 1817 | हिंदू कॉलेज (डेविड हेयर + राय) | — |
| 1821 | — | संवाद कौमुदी (राय); मिरात-उल-अखबार (1822) |
| 1823 | — | लाइसेंसिंग एक्ट; प्रेस पर नियंत्रण |
| 1835 | मैकाले मिनट — अंग्रेजी शिक्षा | मेटकाफ — 1823 एक्ट रद्द; प्रेस मुक्त |
| 1848 | फुले — पुणे बालिका विद्यालय | — |
| 1854 | वुड डिस्पैच — "मेग्नाकार्टा" | — |
| 1857 | कलकत्ता/बॉम्बे/मद्रास वि.वि. | अनुज्ञप्ति अधिनियम |
| 1868 | — | अमृत बाजार पत्रिका |
| 1878 | — | VPA — "गैगिंग एक्ट" (लिटन) |
| 1879 | — | सुरेन्द्रनाथ बनर्जी की "बंगाली" |
| 1881 | हंटर आयोग | केसरी और मराठा — तिलक |
| 1882 | — | VPA रद्द (रिपन) |
| 1902-04 | विश्वविद्यालय आयोग → अधिनियम | — |
| 1905 | राष्ट्रीय शिक्षा परिषद | — |
| 1908 | — | समाचार-पत्र अपराध उकसावा अधिनियम; तिलक को सजा |
| 1910 | — | भारतीय प्रेस अधिनियम (जमानत) |
| 1912 | — | अल-हिलाल — आज़ाद; 1914 में जब्त |
| 1916 | BHU — मालवीय | — |
| 1919 | — | यंग इंडिया और नवजीवन — गांधी |
| 1920 | AMU की स्थापना; जामिया मिलिया | — |
| 1921 | — | 1908-10 के एक्ट रद्द (सप्रू समिति) |
| 1929 | हार्टोग समिति | — |
| 1931 | — | प्रेस आपात अधिनियम (CDM दमन) |
| 1933 | — | हरिजन — गांधी |
| 1937 | वर्धा/बुनियादी शिक्षा योजना | — |
| 1938 | — | नेशनल हेराल्ड — नेहरू |
| 1944 | सार्जेंट योजना | — |
| 1948 | राधाकृष्णन आयोग — UGC | भारतीय संविधान — अनुच्छेद 19(1)(a) |
शिक्षा : मैकाले (1835) → वुड (1854) → हंटर (1882) → विश्वविद्यालय अधिनियम (1904) → सैडलर (1917) → हार्टोग (1929) → वर्धा (1937) → सार्जेंट (1944) → राधाकृष्णन (1948) प्रेस : प्रेस नियंत्रण (1799) → लाइसेंसिंग (1823) → मेटकाफ-मुक्ति (1835) → VPA (1878) → पुनः मुक्ति (1882) → अपराध उकसावा (1908) → प्रेस एक्ट (1910) → सप्रू समिति (1921) → आपात अधिनियम (1931) याद रखें : "भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष, राष्ट्रीय स्वतंत्रता के संघर्ष का अभिन्न अंग था।"