1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया। 1773 से 1947 तक ब्रिटिश संसद ने अनेक अधिनियम पारित किए जिन्होंने भारत के प्रशासनिक और संवैधानिक ढाँचे को आकार दिया। इन अधिनियमों का एकमात्र उद्देश्य ब्रिटिश हितों की रक्षा करना था, परंतु अनजाने में इन्होंने आधुनिक भारत की नींव भी तैयार की।
| ★ KEY POINTS ★ |
|---|
| ✦ कंपनी शासन काल: 1773–1858 (Regulating Act से Government of India Act 1858 तक) |
| ✦ ब्रिटिश ताज का शासन: 1858–1947 (Crown Rule — प्रत्यक्ष ब्रिटिश नियंत्रण) |
| ✦ संवैधानिक विकास का क्रम: Regulating Act → Pitt's Act → Charter Acts → GOI Acts → Independence |
| ✦ प्रमुख नीतियाँ: Ring Fence, Subsidiary Alliance, Doctrine of Lapse |
| ✦ शिक्षा नीतियाँ: Macaulay's Minute (1835), Wood's Despatch (1854), Hunter Commission (1882) |
| ✦ दमनकारी कानून: Vernacular Press Act (1878), Arms Act (1878), Ilbert Bill (1883) |
| ✦ 1940 के दशक की योजनाएँ: Cripps Mission, Wavell Plan, Cabinet Mission, Mountbatten Plan |
भाग-1 : कंपनी शासन के प्रमुख अधिनियम (1773–1858)
यह ब्रिटिश संसद द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को विनियमित करने का पहला प्रयास था। वॉरेन हेस्टिंग्स के "दोहरे शासन" (Double Government) की विफलताओं के बाद यह आवश्यक हो गया था।
प्रमुख प्रावधान
1. बंगाल के गवर्नर को "बंगाल का गवर्नर जनरल" बनाया गया — प्रथम गवर्नर जनरल: लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स।
2. बम्बई और मद्रास के गवर्नर गवर्नर जनरल के अधीन किए गए।
3. गवर्नर जनरल की सहायता के लिए 4 सदस्यीय कार्यकारिणी परिषद — बहुमत का निर्णय मान्य।
4. कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना (1774) — प्रथम न्यायाधीश: सर एलिजा इम्पे।
5. कंपनी के कर्मचारियों द्वारा निजी व्यापार और उपहार लेने पर प्रतिबंध।
6. कंपनी को ब्रिटिश सरकार को अपने राजनीतिक मामलों की जानकारी देनी होगी।
महत्त्व: रेग्युलेटिंग एक्ट भारत में केंद्रीकृत प्रशासन का पहला प्रयास था। यह ईस्ट इंडिया कंपनी पर संसदीय नियंत्रण का आरंभ था। UPSC में "प्रथम गवर्नर जनरल", "प्रथम सुप्रीम कोर्ट" — ये तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं।
रेग्युलेटिंग एक्ट की खामियों को दूर करने के लिए 1781 में संशोधन अधिनियम पारित हुआ। इसके बाद 1784 में पिट्स इंडिया एक्ट एक बड़ा सुधार लाया।
संशोधन अधिनियम, 1781
पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
1. बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना — 6 सदस्य (ब्रिटिश मंत्रिमंडल के): कंपनी के राजनीतिक मामलों पर नियंत्रण।
2. कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स वाणिज्यिक मामलों को देखते रहे — राजनीतिक मामले बोर्ड ऑफ कंट्रोल को।
3. गवर्नर जनरल की परिषद 4 से घटाकर 3 सदस्य की गई।
4. भारतीय क्षेत्रों को पहली बार "ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र" कहा गया।
5. वाणिज्यिक और राजनीतिक शक्ति का पहली बार स्पष्ट विभाजन।
महत्त्व: पिट्स इंडिया एक्ट ने "दोहरे नियंत्रण" (Double Government) की व्यवस्था बनाई — कंपनी और ब्रिटिश सरकार दोनों का नियंत्रण। यह 1858 तक चला।
EXAM TIP
UPSC: पिट्स इंडिया एक्ट 1784 ने "बोर्ड ऑफ कंट्रोल" बनाया — यह 1858 तक चला। भारतीय क्षेत्रों को "ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र" पहली बार कहा गया।
ईस्ट इंडिया कंपनी का चार्टर (अनुज्ञा-पत्र) हर 20 वर्ष पर नवीनीकृत होता था। इन नवीनीकरणों के समय ब्रिटिश संसद महत्त्वपूर्ण सुधार लाती थी।
| चार्टर एक्ट | प्रमुख प्रावधान | महत्त्व |
|---|---|---|
| 1793 | गवर्नर जनरल की शक्ति बढ़ाई; कंपनी का व्यापार एकाधिकार 20 वर्ष और; बोर्ड के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से | प्रशासनिक केंद्रीकरण |
| 1813 | कंपनी का व्यापार एकाधिकार समाप्त (चाय और चीन व्यापार छोड़कर); ईसाई मिशनरियों को भारत आने की अनुमति; भारत में शिक्षा पर प्रतिवर्ष ₹1 लाख खर्च अनिवार्य | मुक्त व्यापार + शिक्षा का आरंभ |
| 1833 | कंपनी का सभी व्यापारिक एकाधिकार समाप्त; बंगाल का गवर्नर जनरल = भारत का गवर्नर जनरल; केंद्रीकृत विधान; नियुक्ति में भेदभाव न करने का प्रावधान; मैकॉले की नियुक्ति विधि आयोग में | केंद्रीकरण — अखिल भारतीय प्रशासन |
| 1853 | गवर्नर जनरल की परिषद में कानून सदस्य जोड़ा; ICS परीक्षा हेतु खुली प्रतिस्पर्धा (पहले नियुक्ति); विधान परिषद और कार्यकारिणी परिषद का प्रथम पृथक्करण | कंपनी की अंतिम बार नवीनीकरण |
1833 का महत्त्व: 1833 के चार्टर एक्ट ने "भारत का गवर्नर जनरल" पद बनाया — प्रथम: लॉर्ड विलियम बेंटिंक। इसने यह भी कहा कि किसी भारतीय को जाति, धर्म या रंग के आधार पर किसी पद से वंचित नहीं किया जाएगा।
1853 का महत्त्व: 1853 का चार्टर एक्ट कंपनी का अंतिम नवीनीकरण था। इसने ICS में खुली प्रतिस्पर्धा का आरंभ किया — योग्यता आधारित भर्ती का पहला कदम।
EXAM TIP
UPSC PYQ: "किस एक्ट ने ICS में खुली प्रतिस्पर्धा शुरू की?" — चार्टर एक्ट 1853। "भारत के प्रथम गवर्नर जनरल कौन?" — लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1833 एक्ट के बाद)।
1857 के महान विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया। 2 अगस्त 1858 को यह अधिनियम पारित हुआ।
1. ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त — भारत सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के अधीन।
2. बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त।
3. नया पद: भारत सचिव (Secretary of State for India) — 15 सदस्यीय इंडिया काउंसिल का सहायक।
4. भारत का गवर्नर जनरल = वायसराय (Viceroy) — महारानी का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि।
5. प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग।
6. महारानी विक्टोरिया की उद्घोषणा (1858): धार्मिक सहिष्णुता, भारतीयों को सेवा में समान अवसर, रियासतों के अधिकारों की रक्षा।
महत्त्व: 1858 के एक्ट ने भारत में सत्ता के हस्तांतरण को औपचारिक किया — Company → Crown। "ताज की उद्घोषणा" (Queen's Proclamation) को "भारतीयों का मैग्ना कार्टा" कहा जाता है।
भाग-2 : ब्रिटिश ताज के प्रमुख अधिनियम (1861–1947)
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रशासन में कुछ सुधार किए। 1861 का एक्ट इसी दिशा में पहला कदम था।
1. वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में विधान कार्यों के लिए भारतीय सदस्यों को शामिल किया (अतिरिक्त सदस्य)।
2. बम्बई और मद्रास को विधान परिषद बनाने की शक्ति पुनः दी।
3. पोर्टफोलियो प्रणाली की शुरुआत — प्रत्येक परिषद सदस्य को एक विभाग।
4. वायसराय को अध्यादेश जारी करने का अधिकार (Ordinance Power)।
5. विकेंद्रीकरण की दिशा में पहला कदम — प्रांतीय विधान परिषदों का पुनरुद्धार।
महत्त्व: 1861 का एक्ट विधान सभा और कार्यकारिणी के बीच प्रथम स्पष्ट विभाजन था। ICS (Indian Civil Service) अधिनियम 1861 — कोई भी यूरोपीय या भारतीय सिविल सेवा में शामिल हो सकता था।
1. विधान परिषदों में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या बढ़ाई — केंद्र में 10 से 16, प्रांतों में भी वृद्धि।
2. गैर-सरकारी सदस्यों को सीमित मनोनयन का अधिकार (अप्रत्यक्ष निर्वाचन जैसी व्यवस्था)।
3. परिषद में बजट पर चर्चा का अधिकार — प्रश्न पूछने का अधिकार।
4. यह "प्रतिनिधित्व का बीज" था — पूर्ण निर्वाचन नहीं, परंतु मनोनयन में लोकमत का प्रभाव।
आलोचना: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह सुधार अपर्याप्त माना — "हमें वास्तविक प्रतिनिधित्व चाहिए, नामांकन नहीं।" 1892 के एक्ट की माँग लोकमान्य तिलक और बाल लाल पाल जैसे उग्र नेताओं की नई माँगों की पूर्वपीठिका बनी।
भारत सचिव जॉन मॉर्ले और वायसराय लॉर्ड मिंटो के नाम पर यह अधिनियम "मॉर्ले-मिंटो सुधार" भी कहलाता है।
1. केंद्रीय विधान परिषद में सदस्य संख्या 16 से 60।
2. प्रांतीय विधान परिषदों में बहुमत गैर-सरकारी सदस्यों का।
3. निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाई — परंतु अप्रत्यक्ष निर्वाचन।
4. पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate): मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन — यह सबसे विवादास्पद प्रावधान।
5. भारतीय सदस्य को वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में प्रथम बार शामिल किया — सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा (विधि सदस्य)।
6. परिषद में पूरक प्रश्न और संकल्प पेश करने का अधिकार।
| पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) — विवाद |
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EXAM TIP
UPSC: 1909 एक्ट = मॉर्ले-मिंटो सुधार = पृथक निर्वाचन मंडल का आरंभ। प्रथम भारतीय कार्यकारिणी परिषद सदस्य = सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा। "साम्प्रदायिक निर्वाचन का जनक" = 1909 का एक्ट।
भारत सचिव एडविन मॉन्टेग्यू और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड की रिपोर्ट (1918) पर आधारित यह अधिनियम 1921 में लागू हुआ।
द्विशासन (Dyarchy) — केंद्रीय प्रशासन
1. केंद्रीय विधान मंडल द्विसदनीय बनाया: केंद्रीय विधान सभा (147 सदस्य) + राज्य परिषद (60 सदस्य)।
2. केंद्र में सभी महत्त्वपूर्ण विषय वायसराय के नियंत्रण में — "आरक्षित विषय" जैसे।
द्विशासन (Dyarchy) — प्रांतीय प्रशासन
प्रांतों में द्विशासन (Dyarchy) की व्यवस्था लागू की गई — यह इस अधिनियम की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता थी।
| विभाग प्रकार | विषय | नियंत्रण |
|---|---|---|
| आरक्षित विषय (Reserved) | पुलिस, वित्त, कानून-व्यवस्था, राजस्व, न्याय | गवर्नर — उत्तरदायी नहीं |
| हस्तांतरित विषय (Transferred) | शिक्षा, स्थानीय स्वशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग | भारतीय मंत्री — विधान सभा को उत्तरदायी |
3. प्रांतीय विधान सभाओं में निर्वाचित बहुमत।
4. पृथक निर्वाचन मंडल: मुसलमान, सिख, ईसाई, यूरोपीय, आंग्ल-भारतीय — सभी के लिए।
5. 21 वर्ष से अधिक आयु के सीमित व्यक्तियों को मताधिकार (संपत्ति आधारित)।
6. लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) का प्रावधान।
7. केंद्र में राज्य परिषद और केंद्रीय विधान सभा — 1919 में पहली बार द्विसदनीयता।
आलोचना: गांधीजी ने 1919 के एक्ट को "हिचकिचाहट और अनिर्णय" कहा। द्विशासन व्यवस्था में भारतीय मंत्रियों के पास कार्यकारी शक्ति नहीं थी — वित्त गवर्नर के हाथ में। इसीलिए यह व्यवस्था विफल रही।
EXAM TIP
UPSC PYQ: "द्विशासन किस अधिनियम से लागू हुआ?" — 1919 (Dyarchy)। "प्रथम द्विसदनीय केंद्रीय विधान मंडल?" — 1919। "द्विशासन में आरक्षित विषय कौन से?" — पुलिस, वित्त, कानून-व्यवस्था।
यह अधिनियम भारतीय संवैधानिक इतिहास का सबसे व्यापक और महत्त्वपूर्ण दस्तावेज था। इसमें 451 धाराएँ और 15 अनुसूचियाँ थीं। 1950 के भारतीय संविधान में इस एक्ट से सर्वाधिक प्रावधान लिए गए।
संघीय ढाँचा (Federal Structure)
1. अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव: ब्रिटिश भारत के प्रांत + देशी रियासतें — परंतु यह लागू नहीं हो सका (रियासतों की सहमति आवश्यक थी)।
2. तीन सूचियाँ: संघ सूची, प्रांत सूची, समवर्ती सूची — शेष शक्तियाँ गवर्नर जनरल को।
3. संघीय न्यायालय (Federal Court) की स्थापना: दिल्ली में — 1937 में।
प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy)
4. द्विशासन समाप्त — प्रांतों में पूर्ण उत्तरदायी सरकार।
5. प्रांतीय गवर्नर मंत्रिमंडल की सलाह से कार्य करेगा — जो विधान सभा को उत्तरदायी।
6. 1937 में 11 में से 7 प्रांतों में कांग्रेस की सरकारें बनीं।
अन्य प्रमुख प्रावधान
7. केंद्र में द्विसदनीय विधान मंडल: संघीय सभा + राज्य परिषद।
8. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना का प्रावधान — 1934 में स्थापित।
9. संघ लोक सेवा आयोग (FPSC) और प्रांतीय लोक सेवा आयोग।
10. बर्मा को भारत से अलग किया।
11. एडेन (Aden) को भारत से पृथक किया।
12. पृथक निर्वाचन मंडल जारी — महिलाओं को सीमित मताधिकार।
| विशेषता | 1919 एक्ट | 1935 एक्ट |
|---|---|---|
| द्विशासन | प्रांतों में | केंद्र में (अधूरा) |
| प्रांतीय स्वायत्तता | सीमित | पूर्ण (Provincial Autonomy) |
| केंद्र में उत्तरदायित्व | नहीं | नहीं (संघ नहीं बना) |
| संघीय न्यायालय | नहीं | हाँ (Federal Court 1937) |
| RBI | नहीं | हाँ (1934) |
1950 का संविधान और 1935 का एक्ट: भारतीय संविधान का लगभग 70% भाग 1935 के एक्ट से लिया गया है — तीन सूचियाँ, आपातकालीन प्रावधान, राज्यपाल का पद, UPSC का प्रावधान, केंद्र-राज्य संबंध। इसीलिए डॉ. अम्बेडकर ने इसे "भारतीय संविधान का प्रारूप" कहा।
EXAM TIP
UPSC: 1935 में कितनी धाराएँ थीं? — 451 धाराएँ, 15 अनुसूचियाँ। संघीय न्यायालय कब स्थापित? — 1937। RBI की स्थापना किस एक्ट से? — 1935 (स्थापित 1934 में)। द्विशासन किस एक्ट से समाप्त? — 1935।
18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद ने यह अधिनियम पारित किया — 14-15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र अधिराज्य (Dominion) बने।
1. 15 अगस्त 1947 से दो स्वतंत्र अधिराज्य: भारत और पाकिस्तान।
2. वायसराय का पद समाप्त — प्रत्येक अधिराज्य में गवर्नर जनरल।
3. भारत के प्रथम गवर्नर जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन (बाद में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी)।
4. पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल: मुहम्मद अली जिन्ना।
5. भारत सचिव का पद समाप्त — इंडिया ऑफिस समाप्त।
6. देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त — वे स्वतंत्र रूप से निर्णय कर सकती थीं।
7. विधान परिषदें संविधान सभाएँ बन गईं — नया संविधान बनाने का अधिकार।
8. 1935 के एक्ट की आवश्यक धाराएँ अंतरिम संविधान के रूप में लागू रहीं।
भाग-3 : ब्रिटिश विस्तार की प्रमुख नीतियाँ
वॉरेन हेस्टिंग्स ने कंपनी के क्षेत्रों की रक्षा के लिए "बफर जोन" बनाने की नीति अपनाई। आसपास के राज्यों को सैन्य सुरक्षा देकर उनकी रक्षा की जाती थी — बदले में वे कंपनी के मित्र रहते।
लॉर्ड वेलेजली ने रिंग-फेंस नीति को और आगे बढ़ाकर सहायक संधि की व्यवस्था बनाई। इसने भारतीय राज्यों को प्रभावी रूप से कंपनी के अधीन कर लिया।
सहायक संधि के प्रमुख प्रावधान
1. भारतीय शासक अपने राज्य में ब्रिटिश सेना रखेगा और उसका खर्च वहन करेगा।
2. अपने दरबार में एक ब्रिटिश रेजीडेंट रखना अनिवार्य।
3. बिना ब्रिटिश अनुमति के किसी अन्य राज्य या विदेशी शक्ति से संधि नहीं।
4. यूरोपीय (विशेषकर फ्रांसीसी) को अपनी सेवा में नहीं रखेंगे।
5. बदले में ब्रिटिश कंपनी आंतरिक और बाह्य दोनों मामलों में सुरक्षा देगी।
| राज्य | सहायक संधि वर्ष |
|---|---|
| हैदराबाद | 1798-1800 |
| मैसूर | 1799 |
| तंजौर | 1799 |
| अवध के नवाब | 1801 |
| पेशवा बाजीराव II | 1802 |
| भोंसले (नागपुर) | 1803 |
| सिंधिया (ग्वालियर) | 1804 |
| गायकवाड़ और भरतपुर | 1818 |
परिणाम: सहायक संधि ने भारतीय राज्यों को प्रभावी रूप से निर्बल बना दिया। ब्रिटिश सेना उनके क्षेत्र में रही — उनका धन खर्च हो गया। किसी से भी स्वतंत्र रूप से बात नहीं कर सकते थे। धीरे-धीरे सभी ब्रिटिश आधिपत्य में आ गए।
लॉर्ड डलहौजी ने यह नीति अपनाई जिसके अनुसार यदि किसी देशी शासक का कोई प्राकृतिक उत्तराधिकारी नहीं है और वह गोद लेने की अनुमति नहीं ले पाया तो राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिल जाएगा।
| विलीन राज्य | वर्ष | कारण |
|---|---|---|
| सतारा | 1848 | कोई उत्तराधिकारी नहीं |
| जैतपुर और संभलपुर | 1849 | उत्तराधिकारी नहीं |
| बघाट | 1850 | उत्तराधिकारी नहीं |
| उदयपुर | 1852 | उत्तराधिकारी नहीं |
| झाँसी | 1853 | दत्तक पुत्र अमान्य |
| नागपुर | 1854 | दत्तक पुत्र अमान्य |
| अवध | 1856 | कुशासन के आधार पर |
1857 का कारण: व्यपगत सिद्धांत और अवध के विलय (1856) ने 1857 के विद्रोह की मुख्य भूमि तैयार की। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का विरोध और अवध के सिपाहियों का आक्रोश — दोनों इसी नीति का परिणाम थे।
EXAM TIP
UPSC: व्यपगत सिद्धांत = लॉर्ड डलहौजी। झाँसी का विलय 1853 — रानी लक्ष्मीबाई। अवध का विलय 1856 — "कुशासन"। यह 1857 के विद्रोह के कारणों में प्रमुख था।
भाग-4 : शिक्षा नीतियाँ एवं दमनकारी कानून
थॉमस बैबिंग्टन मैकॉले 1834 में कानूनी सदस्य के रूप में भारत आए। 1835 में उन्होंने एक ऐतिहासिक मिनट (ज्ञापन) प्रस्तुत किया जिसने भारतीय शिक्षा की दिशा बदल दी।
भारत सचिव चार्ल्स वुड द्वारा जारी — "भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा" कहलाता है।
1. प्रारंभिक शिक्षा से विश्वविद्यालय तक शिक्षा का पूर्ण ढाँचा — प्राथमिक → माध्यमिक → कॉलेज → विश्वविद्यालय।
2. तीन विश्वविद्यालयों की स्थापना का प्रावधान: बम्बई, कलकत्ता, मद्रास (1857 में स्थापित)।
3. शिक्षा का माध्यम: भारतीय भाषाएँ + अंग्रेजी — दोनों को प्रोत्साहन।
4. महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन।
5. शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण विद्यालय।
6. सरकारी अनुदान प्रणाली (Grant-in-Aid) की शुरुआत।
लॉर्ड रिपन ने सर विलियम हंटर की अध्यक्षता में यह आयोग नियुक्त किया — वुड के घोषणापत्र की समीक्षा हेतु।
1. प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की जिम्मेदारी नगरपालिकाओं और जिला बोर्डों को।
2. उच्च शिक्षा में निजी उद्यम को प्रोत्साहन।
3. सरकार माध्यमिक शिक्षा से पीछे हटे — Grant-in-Aid जारी रखे।
4. व्यावसायिक शिक्षा पर बल।
लॉर्ड लिटन के शासन में यह काला कानून पारित हुआ। इसे "मुँह बंद करने वाला अधिनियम" (Gagging Act) कहा गया।
1. भारतीय भाषा के समाचार-पत्र यदि सरकार की आलोचना करें तो प्रेस जब्त हो सकती है।
2. मजिस्ट्रेट को अधिकार — कोई अपील नहीं, जूरी नहीं।
3. अंग्रेजी समाचार-पत्रों पर लागू नहीं — स्पष्ट भेदभाव।
1. हथियार रखने के लिए लाइसेंस अनिवार्य — केवल भारतीयों पर।
2. यूरोपीयों को छूट — स्पष्ट नस्लीय भेदभाव।
3. 1857 की पुनरावृत्ति रोकने का उद्देश्य।
प्रतिक्रिया: इस एक्ट ने भारतीयों को अपमानित किया और राष्ट्रवादी भावनाओं को जागृत किया। गांधीजी ने खुद को निहत्था रखने की इस नीति की कड़ी आलोचना की।
वायसराय लॉर्ड रिपन के कानूनी सदस्य C.P. इल्बर्ट ने एक बिल लाया जिसके अनुसार भारतीय ICS अधिकारी यूरोपीय आरोपियों के मामले भी सुन सकेंगे।
भाग-5 : बंगाल विभाजन, मिशन और स्वतंत्रता योजनाएँ
लॉर्ड कर्जन ने 16 अक्तूबर 1905 को बंगाल का विभाजन किया — पश्चिमी बंगाल और पूर्वी बंगाल + असम।
1. कारण (आधिकारिक): प्रशासनिक सुविधा — बंगाल बहुत बड़ा था।
2. वास्तविक कारण: बंगाल में राष्ट्रवाद को कमजोर करना — हिंदू-मुसलमान विभाजन।
3. प्रतिक्रिया: स्वदेशी आंदोलन, बायकॉट, राखी बंधन — 16 अक्तूबर को "राष्ट्रीय शोक दिवस"।
4. रवींद्रनाथ टैगोर ने "आमार सोनार बांग्ला" लिखा।
5. 1911: विभाजन रद्द — दिल्ली दरबार में घोषणा — राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के बढ़ते खतरे के बीच ब्रिटेन ने भारत का सहयोग लेने के लिए सर स्टैफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा।
क्रिप्स मिशन के प्रस्ताव
क्यों विफल हुआ?
परिणाम: क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद गांधीजी ने "भारत छोड़ो आंदोलन" (8 अगस्त 1942) का आह्वान किया।
वायसराय लॉर्ड वेवेल ने शिमला सम्मेलन (जून 1945) बुलाया और एक नई योजना रखी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने तीन मंत्रियों का दल भारत भेजा: पेथिक-लॉरेंस (भारत सचिव), सर स्टैफोर्ड क्रिप्स, ए.वी. अलेक्जेंडर।
कैबिनेट मिशन के प्रमुख प्रस्ताव
1. पाकिस्तान की माँग अस्वीकार — "भारत को विभाजित नहीं किया जाना चाहिए।"
2. तीन स्तरीय संरचना: केंद्र → प्रांत समूह → प्रांत।
3. समूह A (हिंदू बहुल): मद्रास, बम्बई, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रांत, उड़ीसा।
4. समूह B (मुस्लिम बहुल पश्चिम): पंजाब, सिंध, NWFP, बलूचिस्तान।
5. समूह C (मुस्लिम बहुल पूर्व): बंगाल और असम।
6. अंतरिम सरकार का गठन: जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में (2 सितंबर 1946)।
7. संविधान सभा: 389 सदस्य — 296 ब्रिटिश भारत, 93 रियासतें।
महत्त्व: कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की माँग अस्वीकार की — परंतु समूहीकरण की व्यवस्था ने मुस्लिम लीग को एक अर्ध-पाकिस्तान दिया। इसी योजना से भारत की संविधान सभा का जन्म हुआ जिसने 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया।
लॉर्ड माउंटबेटन फरवरी 1947 में वायसराय बने। 3 जून 1947 को उन्होंने भारत के विभाजन की योजना प्रस्तुत की।
1. भारत का विभाजन: भारत और पाकिस्तान — दो स्वतंत्र अधिराज्य।
2. पंजाब और बंगाल का विभाजन — रेडक्लिफ रेखा।
3. जनमत संग्रह: NWFP और सिल्हट (बांग्लादेश) के लिए।
4. स्वतंत्रता की तिथि: 15 अगस्त 1947 — माउंटबेटन ने जल्दी की।
5. देशी रियासतें: अपनी मर्जी से भारत या पाकिस्तान में शामिल हों — या स्वतंत्र रहें।
6. कांग्रेस, मुस्लिम लीग ने स्वीकार किया — गांधीजी ने विरोध किया।
सीमा रेखा: सर सिरिल रेडक्लिफ ने 5 सप्ताह में भारत-पाकिस्तान सीमा (रेडक्लिफ रेखा) खींची — बिना स्थानीय ज्ञान के। यह विभाजन लाखों लोगों के विस्थापन और हिंसा का कारण बना।
EXAM TIP
UPSC: कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की माँग की — (अ) स्वीकार की (ब) अस्वीकार की। उत्तर: अस्वीकार। माउंटबेटन योजना = 3 जून 1947। स्वतंत्रता = 15 अगस्त 1947।
भाग-6 : तुलनात्मक तालिका एवं कालक्रम
| अधिनियम | वर्ष | गवर्नर जनरल/वायसराय | प्रमुख विशेषता | UPSC बिंदु |
|---|---|---|---|---|
| Regulating Act | 1773 | वॉरेन हेस्टिंग्स | प्रथम गवर्नर जनरल, सुप्रीम कोर्ट | संसदीय नियंत्रण का आरंभ |
| Pitt's India Act | 1784 | हेस्टिंग्स | बोर्ड ऑफ कंट्रोल | दोहरा नियंत्रण |
| Charter Act | 1813 | हेस्टिंग्स/मिंटो I | मिशनरी, शिक्षा ₹1 लाख | कंपनी एकाधिकार आंशिक समाप्त |
| Charter Act | 1833 | बेंटिंक | भारत का GG, मैकॉले | कंपनी व्यापार पूर्ण समाप्त |
| Charter Act | 1853 | डलहौजी | ICS खुली परीक्षा | कंपनी का अंतिम नवीनीकरण |
| GOI Act | 1858 | कैनिंग | ताज का शासन, वायसराय | कंपनी → Crown |
| ICA | 1861 | कैनिंग | पोर्टफोलियो, अध्यादेश शक्ति | प्रांतीय विधान परिषद |
| ICA | 1892 | लैंसडाउन | सीमित निर्वाचन | बजट चर्चा का अधिकार |
| ICA (मॉर्ले-मिंटो) | 1909 | मिंटो II | पृथक निर्वाचन | साम्प्रदायिक आधार |
| GOI Act (डायर्की) | 1919 | चेम्सफोर्ड | द्विशासन, द्विसदनीय | मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड |
| GOI Act | 1935 | लिनलिथगो | प्रांतीय स्वायत्तता, 451 धाराएँ | संविधान का स्रोत |
| Independence Act | 1947 | माउंटबेटन | भारत-पाकिस्तान | ताज का शासन समाप्त |
| वर्ष | घटना/अधिनियम | महत्त्व |
|---|---|---|
| 1773 | Regulating Act | प्रथम गवर्नर जनरल, सुप्रीम कोर्ट |
| 1784 | Pitt's India Act | बोर्ड ऑफ कंट्रोल — दोहरा शासन |
| 1793 | Charter Act | GG की शक्ति बढ़ी |
| 1798–1805 | Subsidiary Alliance | वेलेजली — भारतीय राज्यों का अधीनीकरण |
| 1813 | Charter Act | मिशनरी, शिक्षा ₹1 लाख |
| 1833 | Charter Act | भारत का GG, मैकॉले |
| 1835 | Macaulay's Minute | अंग्रेजी शिक्षा का निर्णय |
| 1848–56 | Doctrine of Lapse | डलहौजी — झाँसी, नागपुर, अवध |
| 1853 | Charter Act | ICS खुली परीक्षा |
| 1854 | Wood's Despatch | शिक्षा का मैग्ना कार्टा |
| 1858 | GOI Act | ताज का शासन — वायसराय |
| 1861 | ICA | पोर्टफोलियो प्रणाली |
| 1878 | Vernacular Press Act | गैगिंग एक्ट — 1882 में रद्द |
| 1878 | Arms Act | भारतीयों पर हथियार प्रतिबंध |
| 1882 | Hunter Commission | शिक्षा की समीक्षा |
| 1883 | Ilbert Bill | नस्लीय विवाद |
| 1892 | ICA | सीमित निर्वाचन |
| 1905 | Bengal Partition | स्वदेशी आंदोलन |
| 1909 | ICA (Morley-Minto) | पृथक निर्वाचन |
| 1911 | Bengal Partition रद्द | दिल्ली राजधानी |
| 1919 | GOI Act (Montford) | द्विशासन, द्विसदनीय |
| 1927–28 | Simon Commission | बहिष्कार — "साइमन गो बैक" |
| 1935 | GOI Act | प्रांतीय स्वायत्तता |
| 1942 | Cripps Mission | विफल — QIM का कारण |
| 1945 | Wavell Plan | जिन्ना के कारण विफल |
| 1946 | Cabinet Mission | संविधान सभा गठन |
| 3 जून 1947 | Mountbatten Plan | विभाजन की घोषणा |
| 15 अगस्त 1947 | Independence | भारत स्वतंत्र |
भाग-7 : UPSC परीक्षा के लिए अति महत्त्वपूर्ण तथ्य
1. ICS में खुली प्रतिस्पर्धा परीक्षा: Charter Act 1853।
2. प्रथम भारत का गवर्नर जनरल: लॉर्ड विलियम बेंटिंक (1833 एक्ट के बाद)।
3. प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग (1858)।
4. पृथक निर्वाचन मंडल: 1909 एक्ट (मॉर्ले-मिंटो)।
5. द्विशासन (Dyarchy): 1919 एक्ट। प्रांतों में द्विशासन।
6. 1935 के एक्ट की विशेषताएँ: 451 धाराएँ, 15 अनुसूचियाँ, Federal Court, Provincial Autonomy।
7. Federal Court की स्थापना: 1935 एक्ट (1937 में)।
8. RBI का प्रावधान: 1935 एक्ट (स्थापना 1 अप्रैल 1935)।
9. Cabinet Mission ने पाकिस्तान माँग अस्वीकार की।
10. Doctrine of Lapse: लॉर्ड डलहौजी — Satara(1848), Jhansi(1853), Nagpur(1854), Awadh(1856)।
11. Ilbert Bill समझौता: भारतीय जज + यूरोपीय जूरी।
12. Vernacular Press Act 1878 — 1882 में रद्द — लागू करने वाला: लॉर्ड लिटन, रद्द करने वाला: लॉर्ड रिपन।
13. Wood's Despatch: भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा — 3 विश्वविद्यालय — 1857 में स्थापित।
14. शिमला सम्मेलन (1945) — Wavell Plan — जिन्ना के कारण विफल।
15. Mountbatten Plan = 3 June Plan — भारत विभाजन 15 अगस्त 1947।
EXAM TIP
UPSC Main में पूछा जाता है: "1935 के एक्ट की विशेषताएँ जो संविधान में शामिल हुईं" — तीन सूचियाँ, आपातकाल, राज्यपाल पद, UPSC, Federal Court → Supreme Court। यह 6 अंकों का प्रश्न आता है।
| ★ KEY POINTS ★ |
|---|
| ✦ Regulating Act 1773 = संसदीय नियंत्रण का आरंभ + प्रथम गवर्नर जनरल + सुप्रीम कोर्ट |
| ✦ Pitt's India Act 1784 = Board of Control = दोहरा शासन (1858 तक) |
| ✦ Charter Act 1833 = भारत का GG (बेंटिंक) = कंपनी का व्यापार पूर्णतः समाप्त |
| ✦ Charter Act 1853 = ICS में खुली प्रतिस्पर्धा = कंपनी का अंतिम नवीनीकरण |
| ✦ GOI Act 1858 = Company → Crown = वायसराय (प्रथम: कैनिंग) |
| ✦ ICA 1909 = Morley-Minto = पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) |
| ✦ GOI Act 1919 = Montagu-Chelmsford = Dyarchy = प्रथम द्विसदनीय केंद्रीय विधान |
| ✦ GOI Act 1935 = 451 धाराएँ = Provincial Autonomy = Federal Court = RBI = संविधान का स्रोत |
| ✦ Subsidiary Alliance = वेलेजली = भारतीय राज्यों का अधीनीकरण |
| ✦ Doctrine of Lapse = डलहौजी = Satara, Jhansi, Nagpur, Awadh |
| ✦ Vernacular Press Act 1878 = Gagging Act = लिटन = 1882 में रिपन ने रद्द किया |
| ✦ Macaulay Minute 1835 = अंग्रेजी शिक्षा का निर्णय = Downward Filtration Theory |
| ✦ Wood's Despatch 1854 = शिक्षा का मैग्ना कार्टा = 3 विश्वविद्यालय (1857) |
| ✦ Cabinet Mission 1946 = पाकिस्तान अस्वीकार = संविधान सभा = 389 सदस्य |
| ✦ Mountbatten Plan = 3 June 1947 = विभाजन = 15 August 1947 स्वतंत्रता |